LATEST NEWS

आरटीई प्रवेश प्रक्रिया का दूसरा चरण आज से, द्वितीय चरण के लिए ऑनलाइन लाटरी 25 जून 2025 को होगी

भोपाल प्रदेश में नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम में कमजोर वर्ग एवं वंचित समूह के बच्चों के गैर अनुदान मान्यता प्राप्त अशासकीय स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश का दूसरा चरण 16 जून सोमवार से शुरू होगा। प्रथम चरण के बाद जिन स्कूलों में सीटें रिक्त रह गई हैं, उन स्कूलों में रिक्त सीटों की जानकारी द्वितीय चरण प्रवेश प्रक्रिया के लिए पोर्टल पर प्रदर्शित की गई है। आवेदकों द्वारा स्कूलों के च्वाइस को अपडेट किये जाने का कार्य 20 जून तक किया जा सकेगा। द्वितीय चरण के लिए ऑनलाइन लाटरी 25 जून 2025 को होगी। आवंटन के बाद स्कूल में प्रवेश एवं संबंधित स्कूल द्वारा मोबाइल ऐप से  एडमीशन रिपोर्टिंग 25 जून से 30 जून 2025 तक की जा सकेगी। द्वितीय चरण के लिए नवीन आवेदन पंजीयन नहीं होगा और पुन: सत्यापन प्रक्रिया भी नहीं होगी। वह आवेदक जिन्होंने प्रथम चरण में आवेदन किया था और सत्यापन के बाद पात्र पाए गए थे, उनका प्रथम चरण में कोई स्कूल आवंटित नहीं हुआ था वह द्वितीय चरण के लिए स्कूल की च्वाइस अपडेट कर सकते हैं। जिन आवेदकों को प्रथम चरण में स्कूल आवंटन हुआ है, लेकिन स्कूल पसंद नहीं आने के कारण आवंटित स्कूल में एडमीशन नहीं लिया है, वह द्वितीय चरण में च्वाइस अपडेट कर सकते हैं।

राइट टू एजुकेशन के तहत गुजरात के प्राइवेट स्कूलों में पहले चरण में 86 हजार बच्चों को मिला प्रवेश, प्रक्रिया हुई पूरी

अहमदाबाद गुजरात में शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए राइट टू एजुकेशन (RTE) अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश देने की प्रक्रिया के पहले चरण में 86,274 बच्चों को पहली कक्षा में दाखिला मिला है. यह दाखिले राज्य की कुल 9,741 प्राइवेट स्कूलों में आरक्षित 93,860 सीटों में से हुए हैं. RTE कानून के अनुसार, राज्य की मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को अपनी पहली कक्षा की कुल सीटों में से 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) और वंचित वर्गों (DG) के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं. गुजरात सरकार इस आरक्षण के तहत चयनित बच्चों की पढ़ाई का खर्च वहन करती है. 2.38 लाख से अधिक छात्रों ने किए थे आवेदन इस वर्ष राज्य भर से RTE के तहत 2,38,916 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए थे. दस्तावेजों की जांच के बाद 1,75,685 आवेदन स्वीकृत किए गए.  13,761 आवेदन गलत या अधूरे दस्तावेजों के कारण रद्द कर दिए गए हैं. वहीं, 49,470 आवेदन अभिभावकों ने स्वयं रद्द कर दिए. नियमों के मुताबिक, अभिभावकों को आवेदन के समय अपने घर से 6 किलोमीटर की परिधि में स्थित स्कूलों को ही प्राथमिकता देनी होती है. इसी आधार पर पहले राउंड में सीटों का आवंटन किया गया है. पहले चरण में खाली रहीं 7,586 सीटें पहले चरण में कुल 86,274 बच्चों को प्रवेश मिला, लेकिन 7,586 सीटें अभिभावकों द्वारा पसंद नहीं की जाने के कारण खाली रह गईं. इन खाली सीटों को अगले चरण में भरा जाएगा. प्रवेश की पुष्टि की अंतिम तिथि 8 मई पहले चरण में चयनित बच्चों के अभिभावकों को SMS के माध्यम से जानकारी भेजी गई है. उन्हें 8 मई, गुरुवार तक संबंधित स्कूल में सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर बच्चे का प्रवेश सुनिश्चित करना होगा. पहले राउंड की प्रक्रिया के बाद, बची हुई सीटों के लिए दूसरे चरण की प्रवेश प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, जिसकी जानकारी RTE गुजरात की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से दी जाएगी. गुजरात के 9,741 निजी स्कूलों में विभिन्न भाषाओं में शिक्षा दी जाती है, जिनमें शामिल हैं:   – गुजराती माध्यम की स्कूलें: 5,725   – अंग्रेजी माध्यम: 3,553   – हिंदी माध्यम: 408   – मराठी: 35   – उड़िया: 13   – उर्दू: 7 इस वर्ष RTE के पहले चरण में जिन बच्चों को प्राथमिकता दी गई, वे निम्नलिखित श्रेणियों से थे:   – सरकारी आंगनवाड़ी में पढ़ने वाले बच्चे (32,267 विद्यार्थी)   – अनाथ एवं संरक्षण की जरूरत वाले बच्चे   – प्रवासी मज़दूरों के बच्चे   – शारीरिक रूप से दिव्यांग बच्चे   – शहीद जवानों के बच्चे   – एकमात्र बेटी वाली संतान   – BPL, SC/ST, SEBC, OBC और सामान्य वर्ग के पात्र बच्चे  

प्रदेश में नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की कार्यवाही पारदर्शी तरीके से की जायेगी

भोपाल प्रदेश में नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की कार्यवाही पारदर्शी तरीके से की जायेगी। इसके लिये कमजोर वर्ग एवं वंचित समूह के बच्चों के नि:शुल्क प्रवेश की प्रक्रिया का टाइम टेबल घोषित कर दिया गया है। शिक्षण सत्र 2025-26 में 5 मई से प्रवेश प्रक्रिया की कार्यवाही शुरू की जा रही है। इस संबंध में राज्य शिक्षा केन्द्र ने जिला कलेक्टर्स और जिला परियोजना समन्वयक को निर्देश जारी किये हैं। जारी कैलेण्डर के अनुसार 5 मई, 2025 को नि:शुल्क प्रवेश के लिये मान्यता प्राप्त अशासकीय स्कूल एवं उनमें उपलब्ध कक्षा की सीट का पोर्टल पर प्रदर्शन होगा। पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन एवं त्रुटि-सुधार का कार्य 7 मई से 21 मई तक किया जायेगा। आवेदन के बाद सत्यापन का कार्य शासकीय जन-शिक्षा केन्द्र में 7 मई से 23 मई तक होगा। रेण्डम पद्धति से ऑनलाइन लॉटरी द्वारा स्कूल का आवंटन एवं चयनित आवेदकों को एसएमएस द्वारा सूचना 29 मई तक की जायेगी। आवंटन के बाद अशासकीय स्कूल में प्रवेश के लिये उपस्थिति और स्कूल द्वारा मोबाइल ऐप के माध्यम से एडमिशन रिपोर्टिंग का कार्य 2 से 10 जून तक किया जायेगा। आवेदक अपने ग्राम, वार्ड तथा विस्तारित पड़ोस के गैर-अनुदान मान्यता प्राप्त प्रायवेट स्कूलों में पोर्टल पर कक्षावार प्रदर्शित स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश के लिये आवेदन दर्ज करा सकेंगे। निर्धारित सत्यापन केन्द्र (शासकीय जन-शिक्षा केन्द्र) में मूल दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाना अनिवार्य है। प्रवेश प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी एजुकेशन पोर्टल पर भी प्रदर्शित की गयी है। इससे जुड़ी जानकारी संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से भी प्राप्त की जा सकती है। प्रवेश प्रक्रिया में कक्षावार निर्धारित आयु की भी जानकारी दी गयी है। नर्सरी में न्यूनतम आयु 3 वर्ष एवं अधिकतम आयु 4 वर्ष 6 माह, के.जी.-1 में न्यूनतम आयु 4 वर्ष एवं अधिकतम आयु 5 वर्ष 6 माह, के.जी.-2 में न्यूनतम आयु 5 वर्ष एवं अधिकतम आयु 6 वर्ष 6 माह, कक्षा-1 में न्यूनतम आयु 6 वर्ष एवं अधिकतम आयु 7 वर्ष 6 माह निर्धारित की गयी है। स्कूल शिक्षा विभाग ने निर्धारित तय समय-सीमा में प्रक्रिया पूरा करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये हैं।  

सूचना का अधिकार कोई एहसान नहीं, यह हमारा संवैधानिक हक है

जबलपुर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला – RTI को कमजोर करने वालों को मिलेगा करारा जवाब मामला: डॉ. जयश्री दुबे बनाम केंद्रीय सूचना आयोग एवं अन्य फैसला दिनांक: 03 अप्रैल 2025 स्थान: उच्च न्यायालय, जबलपुर यह फैसला उन लाखों लोगों के लिए एक मिसाल है जो सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी की उम्मीद रखते हैं। आइए, जानिए इस ऐतिहासिक फैसले के प्रमुख बिंदु: 1. नौकरी से संबंधित दस्तावेज अब ‘गोपनीय’ नहीं रहेंगे: यदि कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक पद पर नियुक्त हुआ है, तो उसकी शैक्षणिक योग्यता, अनुभव प्रमाणपत्र, चयन प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज, नियुक्ति आदेश आदि निजी जानकारी नहीं माने जाएंगे। कोर्ट का स्पष्ट आदेश: ये सभी दस्तावेज जनता के लिए सार्वजनिक सूचना हैं और RTI के माध्यम से प्राप्त किए जा सकते हैं। 2. गोपनीयता का झूठा बहाना अब नहीं चलेगा: सूचना आयोग ने इस RTI को RTI Act की धारा 8(1)(h), 8(1)(j) और 11 के तहत खारिज कर दिया था, लेकिन अदालत ने कहा: “बिना ठोस कारण बताए सूचना को रोकना RTI अधिनियम का दुरुपयोग है।” 3. जनहित सर्वोपरि है – पारदर्शिता से समझौता नहीं: अगर किसी नियुक्ति में भ्रष्टाचार या अनियमितता की आशंका है, तो जनता का यह जानना अधिकार है कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष थी या नहीं। गोपनीयता की आड़ लेकर इन तथ्यों को छिपाया नहीं जा सकता। 4. धारा 11 की गलत व्याख्या पर रोक: सूचना आयोग ने तीसरे पक्ष की सहमति के बिना जानकारी देने से मना कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट कहा: अगर सूचना जनहित में है, और किसी तीसरे व्यक्ति को इससे कोई वास्तविक नुकसान नहीं, तो उसकी सहमति जरूरी नहीं है। सूचना देनी ही होगी। 5. गलत मंशा से RTI नकारने पर दंड: कोर्ट ने पाया कि यह RTI जानबूझकर खारिज की गई थी ताकि किसी अयोग्य व्यक्ति को बचाया जा सके। आदेश: संबंधित जन सूचना अधिकारी पर ₹25,000 जुर्माना यह राशि RTI आवेदनकर्ता डॉ. जयश्री दुबे को दी जाएगी 6. 15 दिन में निशुल्क सूचना उपलब्ध कराना अनिवार्य। कोर्ट ने आदेश दिया। सभी मांगी गई सूचनाएं 15 दिनों के भीतर निशुल्क आवेदक को दी जाएं। यह फैसला एक चेतावनी है उन सभी अधिकारियों और संस्थाओं के लिए जो RTI के तहत सूचना देने से बचते हैं। RTI कानून का पालन न करना अब उन्हें भारी पड़ेगा। आपका RTI, आपकी ताकत! अगर आप भी सरकारी भर्तियों, नियुक्तियों या फंड के दुरुपयोग से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी चाहते हैं, तो RTI आपका संवैधानिक हथियार है। इसे जानें, अपनाएं और आवाज़ उठाइये। #Corruption #RTIACT2005 #भ्रष्टाचारी सरकारी नौकर जनहित में प्रसारित – आत्माराम यादव आरटीआई कार्यकर्ता नर्मदापुरम

मध्यप्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में RTE के तहत पढ़ रहे बच्चों को कक्षा 12वीं तक मुफ्त शिक्षा का लाभ मिलने की संभावना

भोपाल  मध्यप्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत पढ़ रहे बच्चों को कक्षा 12वीं तक मुफ्त शिक्षा का लाभ मिलने की संभावना है. अभी शिक्षा का अधिकार कानून के तहत कक्षा 8 वीं तक ही बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है. अब बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मुख्यमंत्री के सामने प्रदेश में इसका दायरा 12 वीं तक किए जाने और परिवार के साथ पलायन करने वाले आदिवासी बच्चों को दूसरे जिलों में शिक्षा का लाभ दिलाने की व्यवस्था शुरू करने की मांग की है. इस मामले में मुख्यमंत्री ने कहा “कार्यक्रम में मंत्री मौजूद हैं, वह इन विषयों को गंभीरता से समझेंगी.” कार्यशाला में मुख्यमंत्री के सामने रखी मांग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अनिनियम, पॉस्को को लेकर आयाजित कार्यशाला के शुभारंभ में पहुंचे. कार्यक्रम में मंत्री निर्मला भूरिया भी मौजूद थीं. इसी कार्यक्रम में बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष देवेन्द्र मोरे ने सरकार से मांग की “नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिनियम के तहत बच्चों को अभी कक्षा 8 वीं तक लाभ दिया जाता है, लेकिन इसके दायरे को बढाकर कक्षा 12 वीं तक किया जाना चाहिए. इससे कक्षा 8 वीं के बाद बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं होना पड़ेगा. प्रदेश में अभी 15 लाख बच्चे आरटीई से लाभान्वित हो रहे हैं. प्रदेश में इस 84 हजार से ज्यादा बच्चे 8 वीं क्लास में पढ़ रहे हैं. हालांकि यह विषय केन्द्र का है, लेकिन राज्य सरकार इसे अमल में लाकर नवाचार कर सकती है.” आदिवासी इलाकों के बच्चों के लिए भी मांग बाल संरक्षण आयोग का कहना है “इसके अलावा मध्यप्रदेश के 89 ब्लॉक ट्राइबल के हैं. ट्राइबल बच्चों के बच्चे मजबूरी के चलते परिवार के साथ पलायन करते हैं. सरकार को पलायन के बाद दूसरे जिले या प्रदेश में पहुंचने पर बच्चे को शिक्षा का लाभ मिल सके, इसकी व्यवस्था की जाए. हालांकि पिछले साल राज्य शिक्षा केन्द्र ने मध्यप्रदेश से गुजरात पहुंचने आदिवासी क्षेत्र के बच्चों के लिए गुजरात 12 हजार किताबों के सेट पहुंचाए थे.” मुख्यमंत्री ने विभागीय मंत्री पर छोड़ा मामला कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा “2018 से 2024 के बीच मध्यप्रदेश में महिला एवं बाल अपराध के मामले में 48 प्रकरण में मृत्युदंड दिया गया है. राज्य सरकार हमेशा ऐसे मामलों को लेकर बेहद सख्त है. जिस समाज में यदि बच्चे, बच्चियां, महिलाएं सुरक्षित हैं, तभी देश का भविष्य है. ऐसे अपराधों से निपटने के लिए सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है. समाज भी अपनी जिम्मेदारी निभाए.” मुख्यमंत्री ने बाल अधिकार आयोग की मांग को लेकर कहा “जो मुद्दा आपने उठाया है, उस क्षेत्र की मंत्री निर्मला भूरिया कार्यक्रम में मेरे जाने के बाद भी मौजूद रहेंगी, वह इसे और अच्छे से समझेंगी.”

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live