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रूस भारत को Su-57E की पूर्ण सोर्स कोड एक्सेस देने को तैयार, रूस तोड़ेगा अमेरिका का घमंड !

रूस रूस ने भारत को Su-57 लड़ाकू विमान की सोर्स कोड तक पूरी पहुंच की पेशकश की, भारत अब अमेरिका के F-35 प्रस्ताव से इसकी तुलना कर रहा है। रूस ने भारत को अपने अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान Su-57E  की तकनीक के साथ एक बड़ा ऑफर दिया है। इस प्रस्ताव में न केवल विमान की आपूर्ति शामिल है, बल्कि उसके पूरे सॉफ्टवेयर सोर्स कोड तक पहुंच तकनीकी हस्तांतरण और भारत में इसका स्थानीय निर्माण भी प्रस्तावित है।यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत अमेरिका के F-35A स्टील्थ फाइटर को खरीदने पर भी विचार कर रहा है। अब भारत के सामने यह रणनीतिक विकल्प है कि वह रूस के प्रस्ताव को स्वीकार करे या अमेरिका के साथ जाए।   रूस के प्रस्ताव में क्या है खास?  रूस भारत को Su-57E की पूर्ण सोर्स कोड एक्सेस देने को तैयार है, जिससे भारत इसमें अपने हथियार और एवियोनिक्स सिस्टम जोड़ सकेगा।यह कदम भारत को स्वदेशीकरण की दिशा में बड़ा तकनीकी लाभ देगा। रूस, भारत में इस विमान का निर्माण करने की अनुमति  भी देगा, जिससे ‘ मेक इन इंडिया ’ को बल मिलेगा। भारत इसमें अपनी मिसाइलें जैसे अस्त्र, रुद्रम * और अन्य हथियार जोड़ सकता है।        F-35A बनाम Su-57  अमेरिका का F-35A विमान तकनीकी रूप से बहुत उन्नत माना जाता है लेकिन अमेरिका पूर्ण तकनीक साझा नहीं करता । अमेरिका भारत को F-35 की केवल सीमित संख्या और सीमित क्षमताओं के साथ देने पर सहमत है। वहीं रूस न सिर्फ  पूरी टेक्नोलॉजी देने को तैयार है बल्कि  उत्पादन का अधिकार भी देगा। भारत की रणनीतिक दुविधा भारत का अमेरिका के साथ QUAD  जैसे रणनीतिक समझौते हैं, वहीं रूस लंबे समय से भारत का भरोसेमंद रक्षा साझेदार रहा है। इस समय भारत को यह निर्णय लेना है कि वह रणनीतिक दृष्टि से किस साझेदार पर अधिक विश्वास कर सकता है । टेक्नोलॉजी ट्रांसफर देने वाला रूस या  राजनयिक सहयोग देने वाला अमेरिका । रूस का यह प्रस्ताव भारत की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार बना सकता है। अमेरिका के साथ जुड़ने के राजनीतिक लाभ हैं, लेकिन तकनीकी और सामरिक आत्मनिर्भरता के लिए रूस का प्रस्ताव बेहद लुभावना है।

ऑपरेशन स्पाइडर पर पुतिन की रिवेंज स्ट्राइक! यूक्रेन पर मिसाइलों की बरसात

कीव रूस ने यूक्रेन पर भीषण हवाई हमला किया है। इस हमले में यूक्रेन के चार नागरिकों की मौत हुई है, जबकि 40 से अधिक घायल बताए जा रहे हैं। हमले इतने जोरदार थे कि यूक्रेनी सेना को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इसे यूक्रेन के ऑपरेशन स्पाइडर वेब का जवाब माना जा रहा है, जिसमें रूस को कम के कम 9 परमाणु बमवर्षक विमान खोने पड़े थे। इस हमले के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने दावा किया कि रूस ने रात भर में 400 से अधिक ड्रोन और 40 से अधिक मिसाइलों से बड़े पैमाने पर हमला किया है। ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन के सहयोगियों से युद्ध रोकने के लिए शीघ्र कार्रवाई करने का आह्वान किया। रूसी हमले से सदमे में यूक्रेन ज़ेलेंस्की ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “यदि कोई दबाव नहीं डालता है और युद्ध को लोगों की जान लेने के लिए और समय देता है, तो वे दोषी और जिम्मेदार हैं। हमें निर्णायक रूप से कार्य करने की आवश्यकता है।” यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रपति के आह्वान का समर्थन किया तथा सहयोगियों से अविलंब अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ाने का आग्रह किया। यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिगा ने एक बयान में कहा, “रूस द्वारा रात में नागरिकों पर किया गया हमला एक बार फिर दर्शाता है कि मॉस्को पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव यथाशीघ्र बढ़ाया जाना चाहिए।” 18 इमारतों को किया जमींदोज यह हमला रूस की ओर से यूक्रेन पर हो रहे लगातार और व्यापक हमलों की कड़ी में एक और खतरनाक कदम है. खारकीव के मेयर इगोर टेरेखोव ने बताया कि हमले में 18 बहुमंजिला इमारतें और 13 निजी मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं. यूक्रेन ने मचाई थी तबाही पिछले दिनों यूक्रेन ने ड्रोन के जरिए रूस पर ताबड़तोड़ हमला किया. रॉयटर्स ने तीन ओपन सोर्स विश्लेषकों के हवाले से बताया है कि रूस के अंदर यूक्रेन द्वारा ड्रोन हमला किए जाने के तुरंत बाद ली गई रूसी एयर बेस की सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि कई बम गिराने वाले विमान नष्ट हो गए और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए. 117 ड्रोन से किया अटैक यूक्रेन ने टारगेट के करीब कंटेनरों से लॉन्च किए गए 117 मानव रहित एरियल व्हीकल का उपयोग करके रूस भर में करीब चार एयर बेस को निशाना बनाया. रॉयटर्स की ओर से वेरिफाइड ऑपरेशन के ड्रोन फुटेज से पता चलता है कि करीब दो जगहों पर कई एयरक्राफ्ट पर हमला किया गया. चार लोगों की मौत की पुष्टि कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने पुष्टि की कि चार लोगों की मौत हो गई है और कहा कि शहर में 20 लोग घायल हुए हैं। सोलोम्यांस्की जिले में, 16 मंजिला आवासीय इमारत की 11वीं मंजिल पर आग लग गई। आपातकालीन सेवाओं ने अपार्टमेंट से तीन लोगों को निकाला, और बचाव अभियान जारी है। इसके बाद एक धातु गोदाम में आग लग गई। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन प्रमुख दिमित्रो ब्रायज़िन्स्की के अनुसार, उत्तरी चेर्निहाइव क्षेत्र में, एक शाहेद ड्रोन एक अपार्टमेंट इमारत के पास फट गया, जिससे खिड़कियां और दरवाजे टूट गए। उन्होंने कहा कि शहर के बाहरी इलाकों में बैलिस्टिक मिसाइलों से विस्फोट भी दर्ज किए गए। जेलेंस्की ने बताया कहां-कहां हुआ हमला हमले के बाद जेलेंस्की ने एक्स पर लिखा, रूस अपनी नीति नहीं बदलता – शहरों और आम जीवन पर एक और बड़ा हमला। उन्होंने लगभग पूरे यूक्रेन को निशाना बनाया – वोलिन, लविवि, टेरनोपिल, कीव, सुमी, पोल्टावा, खमेलनित्सकी, चर्कासी और चेर्निहिव क्षेत्र। कुछ मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया गया। मैं अपने योद्धाओं को उनकी रक्षा के लिए धन्यवाद देता हूं। लेकिन दुर्भाग्य से, सभी को रोका नहीं जा सका।।” 400 ड्रोन, 40 मिसाइलों से हमला उन्होंने आगे कहा, आज के हमले में कुल मिलाकर 400 से अधिक ड्रोन और 40 से अधिक मिसाइलों – बैलिस्टिक मिसाइलों सहित – का इस्तेमाल किया गया। 49 लोग घायल हुए। दुर्भाग्य से, संख्या बढ़ सकती है – लोग मदद के लिए आगे आ रहे हैं। अब तक, तीन मौतों की पुष्टि हुई है – वे सभी यूक्रेन की राज्य आपातकालीन सेवा के कर्मचारी थे। उनके परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना। सभी आवश्यक सेवाएं अब ग्राउंड पर काम कर रही हैं, मलबे को साफ कर रही हैं और बचाव अभियान चला रही हैं। सभी नुकसान निश्चित रूप से बहाल किए जाएंगे।”

रूस ने भारत की वर्षों से चली आ रही संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की स्‍थायी सदस्‍यता मांग का खुलकर समर्थन किया

नई दिल्ली/ मास्‍को  भारत और रूस की राजनयिक दोस्‍ती के 78 साल पूरे हो गए हैं। शीत युद्ध से लेकर पाकिस्‍तान युद्ध तक रूस ने भारत के साथ दोस्‍ती निभाई है। अब एक बार फिर से रूस ने भारत की वर्षों से चली आ रही मांग का खुलकर समर्थन किया है। रूस ने संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्‍थायी सदस्‍यता देने की मांग को फिर से दोहराया है। साथ ही रूस ने भारत के साथ आने वाले वर्षों में भी अच्‍छे रिश्‍ते बरकरार रखने की उम्‍मीद जताई है। रूस के विदेश मंत्रालय ने अपने संदेश में दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्‍ते स्‍थापित होने के 78 साल पूरे होने की बधाई दी। इस बीच स्‍लोवाकिया ने भी भारत की संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सदस्‍यता का समर्थन किया है। टेलिग्राम पर दिए अपने संदेश में रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम भारत के साथ रणनीतिक भागीदारी को और मजबूत करना चाहते हैं। रूसी मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद मजबूत बना रहेगा और दोनों देशों के नेताओं के बीच मुलाकातों का दौर जारी रहेगा। साल 2024 में पीएम मोदी और रूसी राष्‍ट्रपति पुतिन के बीच दो शिखर सम्‍मेलन हुए थे। इस साल भी पुतिन भारत आने वाले हैं। रूस ने विक्‍ट्री डे परेड में पीएम मोदी को न्‍योता दिया था। इसमें हिस्‍सा लेने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर जा रहे हैं। भारत और रूस बढ़ाएं दोस्‍ती रूसी विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच व्‍यापार लगातार तेजी से बढ़ रहा है और यह 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसके अलावा दोनों देश परमाणु ऊर्जा पर भी सहयोग कर रहे हैं और तमिलनाडु के कुंडनकुलम में परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाया जा रहा है। रूस ने कहा कि दोनों देशों को रक्षा, स्‍पेस, तकनीक और सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान को जारी रखना चाहिए ताकि एक बहुध्रुवीय दुनिया को बनाया जा सके। यह वैश्विक प्रशासन में ग्‍लोबल साऊथ की भागीदारी को बढ़ाएगा। सुरक्षा परिषद की दावेदारी में कहां फंसा पेंच? संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सदस्‍यता के लिए कई साल से भारत मांग कर रहा है। यह दुनिया का सबसे शक्तिशाली निकाय है लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत इसका स्‍थायी सदस्‍य नहीं है। साल 1945 में बनाए गए संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा पर‍िषद 15 सदस्‍य हैं और इसमें केवल 5 ही स्‍थायी सदस्‍य हैं। ये देश हैं- अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन और ब्रिटेन। 10 गैर अस्‍थायी सदस्‍य होते हैं जिन्‍हें दो साल के लिए चुना जाता है। स्‍थायी सदस्‍यों के पास वीटो पावर होता है लेकिन अस्‍थायी सदस्‍यों के पास यह ताकत नहीं होती है। भारत को रूस, अमेरिका, फ्रांस समेत दुनिया के कई ताकतवर देशों का समर्थन हासिल है लेकिन नई दिल्‍ली की राह में सबसे बड़ी बाधा चीन बना हुआ है। चीन नहीं चाहता है कि एशिया में उसके एकाधिकार को भारत चुनौती दे। इसी वजह से चीन सुरक्षा परिषद में एशिया से अकेले प्रतिनिधित्‍व करना चाहता है।  

अब रूस जाने के लिए नहीं पड़ेगी वीजा की जरूरत, पुतिन जल्द करेंगे घोषणा

नई दिल्ली भारतीय पर्यटकों के लिए एक अच्छी खबर है. भारत के लोग जल्द ही बिना वीजा के रूस घूम सकते हैं. भारत और रूस के बीच 2025 में इसे लेकर एक सिस्टम विकसित होने की संभावना है. अब कुछ ही समय बाद भारतीयों को रूस जाने के लिए टूरिस्ट वीजा की आवश्यकता नहीं होगी. इससे पहले रूस ने भारतीयों के लिए अगस्त 2023 से ई-वीजा की शुरुआत की थी जिसकी प्रक्रिया पूरे होने में लगभग 4 दिन लगते हैं. हालांकि, अब नई वीजा-फ्री व्यवस्था से भारतीयों के लिए रूस की यात्रा और भी सरल हो जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल रूस ने जितने ई-वीजा जारी किए, उसमें भारत टॉप पांच देशों में शामिल था. रूस ने भारतीयों को 9,500 ई-वीजा दिए. बिना वीजा के रूस जा सकेंगे भारतीय रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय समझौते के तहत ग्रुप टूरिस्ट एक्सचेंज के लिए वीजा नियमों को आसान बनाने की प्रक्रिया जून 2023 में शुरू हुई थी. रूस के आर्थिक विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी, निकिता कोंद्रात्येव ने कहा, “भारत इस समझौते को अंतिम रूप देने के अंतिम चरण में है.” माना जा रहा है कि यह समझौता साल के अंत तक पूरा हो जाएगा, जिसके बाद भारतीय नागरिक बिना वीजा के रूस की यात्रा कर सकेंगे. रूस में भारतीय यात्रियों की बढ़ती संख्या हाल के वर्षों में रूस जाने वाले भारतीय यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है. 2023 में, रूस ने भारतीय यात्रियों को 9,500 ई-वीजा जारी किए, जो कुल ई-वीजा का 6% था. 2024 की पहली छमाही में, 28,500 भारतीय यात्रियों ने मॉस्को का दौरा किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1.5 गुना अधिक है. 2023 में, 60,000 से अधिक भारतीयों ने रूस की यात्रा की, जो 2022 की तुलना में 26% अधिक है. मॉस्को सिटी टूरिज्म कमेटी के चेयरमैन, एवगेनी कोज़लोव ने बताया, “2023 की पहली तिमाही में, भारत गैर-CIS देशों के व्यापार पर्यटकों में तीसरे स्थान पर था.” मॉस्को के अधिकारियों का मानना है कि भारत रूस के लिए एक प्राथमिक बाजार है, क्योंकि दोनों देशों के बीच मजबूत और ऐतिहासिक संबंध हैं. रूस और भारत के बीच गहरी ऐतिहासिक और कूटनीतिक मित्रता रही है. नई वीजा-फ्री नीति से न केवल पर्यटन बल्कि व्यापारिक संबंधों को भी बल मिलेगा. 58 देशों में भारतीयों की वीजा फ्री एंट्री वर्तमान में भारतीय पासपोर्टधारियों को 58 देशों में वीजा फ्री एंट्री का अधिकार हासिल है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2024 में भारत का पासपोर्ट 83वें स्थान पर है जिसकी मदद से भारतीय थाईलैंड, इंडोनेशिया, मालदीव, श्रीलंका , मोरिशियस और कतर जैसे ट्रैवल डेस्टिनेशन्स पर बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं.

मॉस्को बम धमाके में परमाणु सुरक्षा बल प्रमुख की गई जान, रूस के राष्ट्रपति पुतिन को बड़ा झटका

मॉस्को. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक बड़ा झटका लगा है। यहां की राजधानी मॉस्को में मंगलवार को एक बड़ा धमाका हुआ, जिसमें रूस के परमाणु, जैविक और रासायनिक सुरक्षा बलों के प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल इगोर किरिलोव की मौत हो गई। किरिलोव की क्रेमलिन के पास रियाजांस्की प्रॉस्पेक्ट पर स्थित एक अपार्टमेंट के बाहर हत्या कर दी गई। स्कूटर में छिपाया गया था बम रूसी जांच एजेंसियों के अनुसार, धमाका एक इलेक्ट्रिक स्कूटर में छिपाए गए बम के कारण हुआ। बम फटने से किरिलोव और उनके एक सहायक की जान चली गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह एक हत्या थी। तस्वीरें सामने आईं जमीन से ली गई तस्वीरों में मलबे से अटी एक इमारत का टूटा हुआ प्रवेश द्वार दिखाई दे रहा। वहीं, घटनास्थल पर खून से सनी बर्फ में दो शव पड़े हुए थे और पुलिस ने इलाके को घेर लिया था। इसके बाद इस मामले में आपराधिक जांच शुरू कर दी गई है।

युद्ध की तस्वीर बदल सकता है ये हथियार, रूस के स्टारलिंक किलर ने उड़ाई यूक्रेन और एलन मस्क की नींद

मॉस्को। रूस की सेना ने कथित तौर पर एक ऐसा हथियार विकसित कर लिया है, जिससे यूक्रेन और अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की रातों की नींद उड़ सकती है। दरअसल रूसी सेना ने कथित तौर पर एक ऐसी उन्नत प्रणाली विकसित की है, जो दुश्मन यूएवी (ड्रोन्स) को स्टारलिंक सिस्टम से मिलने वाले सिग्नल को पकड़ सकती है। रूस के इस नए सिस्टम को स्टारलिंक किलर कहा जा रहा है। वहीं इसका आधिकारिक नाम कलिंका मॉनिटरिंग सिस्टम है। मीडिया रिपोर्ट्स को अगर सही माने तो इससे यूक्रेन का परेशान होना बनता है क्योंकि यूक्रेनी सेना ने रूस को ड्रोन्स हमलों से खासा परेशान किया है। अब अगर रूसी सेना ने ये नया सिस्टम विकसित कर लिया है तो फिर यूक्रेन ड्रोन्स से भी रूस को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा और इससे युद्ध की तस्वीर भी बदल सकती है। एलन मस्क के लिए ये चिंता की बात इसलिए है क्योंकि स्टारलिंक सिस्टम एलन मस्क का ही है और इसका काट मिलना कहीं न कहीं मस्क के लिए भी झटका है। 15 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन ड्रोन्स का पता लग सकेगा रूस-यूक्रेन युद्ध में अमेरिका ने यूक्रेन की मदद के लिए एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक का संचार टर्मिनल दिया है। इस टर्मिनल का इस्तेमाल करके ही यूक्रेन द्वारा रूस पर हवाई और नौसैनिक ड्रोन्स से हमले किए जा रहे हैं। रूसी मीडिया के अनुसार, कलिंका मॉनिटरिंग सिस्टम को रूस के सेंटर फॉर अनमैन्ड सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज (CBST) द्वारा विकसित किया गया है। CBST के अध्यक्ष का दावा है कि अभी कलिंका मॉनिटरिंग सिस्टम्स का परीक्षण चल रहा है। यह सिस्टम 15 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन ड्रोन्स का पता लगा सकता है। ये प्रणाली कथित तौर पर ड्रोन्स को मिल रहे स्टारलिंक सिग्नल का तेजी से पता लगा सकती है, जिसके बाद दुश्मन ड्रोन्स को निशाना बनाना आसान है। स्टारलिंक क्या है? स्पेसएक्स का स्टारलिंक एक उपग्रह-आधारित इंटरनेट सेवा है जो दुनिया भर में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाएं प्रदान करती है। यह फाइबर ऑप्टिक केबल की तरह प्रकाश के माध्यम से डेटा मुहैया करती है। स्टारलिंक के उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद हैं, वहीं से जमीन पर मौजूद उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट मिलता है। रूस द्वारा यूक्रेन के बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया गया है, जिसके चलते यूक्रेनी सेना इंटरनेट के लिए स्टारलिंक पर निर्भर है। 

नौसेना के नए युद्धपोत ‘आईएनएस तुशील’ की कमिशनिंग में हो रहे शामिल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस पहुंचे

मॉस्को। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को रूस में नौसेना के नवीनतम, बहुउद्देश्यीय, स्टील्थ-गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट ( युद्धपोत) ‘आईएनएस तुशील’ का जलावतरण करेंगे। रक्षा मंत्री कलिनिनग्राद के यंत्र शिपयार्ड में ‘युद्धपोत, परियोजना 1135.6’ के तहत एक उन्नत ‘क्रिवाक III श्रेणी फ्रिगेट’ का जलावतरण करेंगे। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, भारत और रूस वरिष्ठ अधिकारी भी इस दौरान उपस्थित रहेंगे। रक्षा मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, रक्षा मंत्री 8-10 दिसंबर तक रूस की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। राजनाथ सिंह और रूसी रक्षा मंत्री आंद्रे बेलौसोव 10 दिसंबर को मास्को में सैन्य और सैन्य तकनीकी सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (आईआरआईजीसी-एमएंडएमटीसी) की 21वीं बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे। दोनों नेता रक्षा के क्षेत्र में भारत-रूस के बीच बहुआयामी संबंधों की समीक्षा करेंगे। वे आपसी हितों के समकालीन क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। इसके अलावा, राजनाथ सिहं दूसरे विश्व युद्ध के दौरान मारे गए सोवियत सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए मॉस्को में ‘अज्ञात सैनिक की समाधि/द टॉम्ब ऑफ अननोन सोल्जर’ पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। वह भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी बातचीत करेंगे। क्रिवाक श्रेणी के छह युद्धपोत पहले से ही सेवा में हैं। इनमें सेंट पीटर्सबर्ग के बाल्टिस्की शिपयार्ड में निर्मित ‘तलवार श्रेणी’ के तीन जहाज और कैलिनिनग्राद के यंतर शिपयार्ड में निर्मित ‘टेग श्रेणी’ के तीन जहाज शामिल हैं। ‘आईएनएस तुषिल’ इस सीरिज का सातवां और दो अपग्रेडेड एडीशनल फॉलोऑन जहाजों में से पहला होगा। इसके लिए भारत सरकार और नौसेना ने अक्टूबर 2016 में जेएससी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। अधिकारियों ने बताया कि 125 मीटर लंबा और 3,900 टन वजनी यह जहाज घातक है। इसमें युद्धपोत निर्माण की सर्वोत्तम पद्धतियों के अलावा रूसी और भारतीय अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रभावशाली मिश्रण है। पोस्ट कंस्ट्रक्शन और तैयार होने के बाद, जनवरी 2024 से जहाज को कई परीक्षणों से गुजराना पड़ा है। इसमें फैक्ट्री समुद्री परीक्षण, राज्य समिति परीक्षण और अंत में, एक भारतीय एक्सपर्ट टीम द्वारा डिलीवरी स्वीकृति परीक्षण शामिल है। परीक्षण के दौरान, जहाज ने 30 नॉट (55 किमी प्रति घंटे) से अधिक की प्रभावशाली गति दर्ज की। यह लगभग युद्ध के लिए तैयार स्थिति में भारत पहुंचेगा। नौसेना के एक अधिकारी के अनुसार, ‘तुशील’ नाम का अर्थ है ‘सुरक्षा कवच’ और इसका शिखर ‘अभेद्य कवच’ (अभेद्य कवच) का प्रतिनिधित्व करता है। अपने आदर्श वाक्य ‘निर्भय, अभेद्य और बलशील’ के साथ, यह जहाज देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भारतीय नौसेना एक्सपर्ट्स और सेवर्नॉय डिजाइन ब्यूरो के सहयोग से, जहाज की स्वदेशी सामग्री को 26 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। कमीशन होने पर, आईएनएस तुशील पश्चिमी नौसेना कमान के तहत भारतीय नौसेना के ‘स्वॉर्ड आर्म’, पश्चिमी बेड़े में शामिल हो जाएगा।

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