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सौरभ शर्मा का सर्विस रिकार्ड लोकायुक्त ने पुलिस को सौंपा, लापरवाही भी आई सामने, दस्तावेजों का क्रॉस वेरिफिकेशन

ग्वालियर ग्वालियर। करोड़ों की अवैध कमाई और फर्जी अनुकंपा नियुक्ति मामले में फंसे परिवहन विभाग के बर्खास्त आरक्षक सौरभ शर्मा की मुश्किलें अब और बढ़ती दिख रही हैं। भोपाल लोकायुक्त द्वारा सौरभ शर्मा का पूरा सर्विस रिकॉर्ड ग्वालियर के सिरोल थाना पुलिस को सौंप दिया गया है। इस रिकॉर्ड की जांच के साथ अब सौरभ और उनकी मां उमा शर्मा से पूछताछ की तैयारी भी शुरू हो गई है। साथियों के भी दर्ज हुए बयान सौरभ शर्मा के मामले में केवल वही नहीं, बल्कि उनके कई साथी आरक्षक भी जांच के घेरे में आ गए हैं। हाल ही में परिवहन मुख्यालय में सौरभ के साथ काम कर चुके कुछ आरक्षकों के बयान दर्ज किए गए हैं। इन पर सौरभ के साथ मिलीभगत का आरोप है। अब सभी बिंदुओं की गहनता से जांच की जा रही है। छापे में मिली थी अकूत संपत्ति यह मामला 19 दिसंबर 2024 को सुर्खियों में आया जब भोपाल स्थित सौरभ के घर पर लोकायुक्त की छापेमारी में भारी मात्रा में कैश, सोना और चांदी बरामद की गई। उसी रात, मेंडोरी के जंगल में आयकर विभाग ने 11 करोड़ नकद और 52 किलो सोना जब्त किया। इसके बाद ED (प्रवर्तन निदेशालय) भी मामले में कूद पड़ा और कई शहरों में कार्रवाई की गई। विभागीय लापरवाही भी आई सामने सौरभ शर्मा की अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उनकी नियुक्ति के दौरान तत्कालीन परिवहन आयुक्त शैलेंद्र श्रीवास्तव के कार्यकाल में जानबूझकर अनदेखी की गई। दस्तावेजों में भाई की नौकरी छिपाई गई और संबंधित विभागों ने भी इस पर चुप्पी साधी रही। अब होगा दस्तावेजों का क्रॉस वेरिफिकेशन सिरोल थाना प्रभारी गोविंद बगौली के अनुसार, लोकायुक्त से प्राप्त रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है। सौरभ और उमा शर्मा के हस्ताक्षरों का मिलान, शपथ पत्रों की वैधता और उस वक्त मौजूद अधिकारियों की भूमिका भी अब जांच के घेरे में है।

धन कुबेर सौरभ के करीबियों पर भी कसेगा शिकंजा, एक इंस्पेक्टर व चार आरक्षकों को लोकायुक्त ने भेजा नोटिस

भोपाल  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बहुचर्चित RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा (Saurabh Sharma)  से मिली अकूत सम्पत्ति के मामले में भले ही उसके परिजनों को कोर्ट से जमानत की राहत मिल गई हो, लेकिन अब लोकायुक्त की रडार पर सौरभ के करीबी भी आ रहे हैं. इसी कड़ी में मंगलवार को लोकायुक्त (Loka Yukta) ने प्रदेश के विभिन्न  RTO चेक पोस्टों पर तैनात रहे एक इंस्पेक्टर और चार आरक्षकों को लोकायुक्त ने नोटिस भेजकर इस मामले में पूछताछ के लिए तलब किया है. एक मई को पेश होने के दिए आदेश लोकायुक्त भोपाल के जांच अधिकारी डीएसपी वीरेंद्र सिंह ने परिवहन विभाग जरिए  सौरभ शर्मा मामले में परिवहन विभाग के इंस्पेक्टर किशोर सिंह बघेल, सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर वीरेश कुमार और तुमराम सहित 4 आरक्षकों को  नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है. सौरभ शर्मा के नजदीकी कहे जाने परिवहन आरक्षकों में गौरव पाराशर, हेमंत जाटव, धनंजय चौबे, नरेंद्र सिंह भदौरिया को भी लोकायुक्त ने नोटिस जारी किया है.   इस नोटिस में कहा गया है कि सौरभ शर्मा प्रकरण में जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि आपसे तथ्यों के सम्बन्ध और परिस्थितियों को सुनिश्चित करने के लिए प्रश्न पूछने के पास ठोस युक्तियुक्त आधार है. लिहाजा, आपको एक मई को सुबह 11 बजे युक्तियुक्त कार्यालय भोपाल में उपस्थित हों.  गौरतलब है कि भोपाल के जंगल में एक कार में 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये कैश मिलने के बाद भोपाल आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा सुर्खियों में आए थे. इसके बाद उनके खिलाफ लोकायुक्त, ईडी और इनकम टैक्स की जांच चल रही है. फिलहाल शर्मा अपने सहयोगियों के साथ जेल में बंद है. 

ईडी ने सौरभ शर्मा, चेतन और शरद के खिलाफ चालान पेश किया, 108.25 करोड़ की संपत्ति होगी जब्त

भोपाल  मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक धनकुबेर सौरभ शर्मा की 108.25 करोड़ की संपत्ति जब्त होगी। प्रवर्तन निदेशालय ने पीएमएलए कोर्ट में अभियोजन शिकायत दी है। ED ने सौरभ शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज प्रकरण पर जांच शुरू की थी। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा ने काली कमाई से करोड़ों रुपये इकट्‌ठा किये थे। ईडी ने मंगलवार को इस संबंध में पीएमएलए कोर्ट में शिकायत की। भ्रष्टाचार के जरिये इकट्‌ठा की गई 108.25 करोड़ की चल-अचल संपत्ति जब्त करने का आवेदन दिया है। इस पर कोर्ट ने संज्ञान लिया है। ED ने सौरभ शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज प्रकरण पर जांच शुरू की थी। इस दौरान सौरभ शर्मा, चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल को पीएमएलए एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया। तीनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में सेंट्रल जेल में हैं। ईडी ने सौरभ शर्मा, उसके रिश्तेदारों, सहयोगियों और इनके स्वामित्व वाली कंपनियों में 92.07 करोड़ रुपए की चल अचल संपत्ति को 25 मार्च को कुर्क किया था। सौरभ शर्मा समेत 12 लोगों को बनाया आरोपी ED ने 52 किलो सोने के मामले में जेल में बंद परिवहन विभाग के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा उसके सहयोगी शरद जायसवाल, मां और पत्नी समेत 12 अन्य सहयोगियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया है। ये चालान सचिन कुमार घोष की अदालत में पेश किया गया। 18 दिसंबर को लोकायुक्त का छापा, IT ने बरामद किया था सोना और कैश गौरतलब है कि 18 दिसंबर को लोकायुक्त ने राजधानी भोपाल में सौरभ शर्मा के घर छापामार कार्रवाई की थी। वहीं 19 दिसंबर को मेंडोरी गांव के कुछ लोगों ने पुलिस को खाली प्लॉट पर खड़ी एक लावारिस क्रिस्टा गाड़ी के होने की सूचना दी थी, जिसमें 6 से 7 बैग रखे हुए थे। 52 किलो सोना और 11 करोड़ कैश मिलने के बाद शुरू हुई जांच कैश का अंदेशा होने की वजह से आयकर विभाग को सूचित किया गया था, जिसके बाद IT की टीम ने कांच तोड़कर अंदर से बैग बाहर निकला। जिसमें 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये कैश बरामद किया गया था। जिसके बाद से लोकायुक्त के बाद ED और IT भी सक्रिय हो गई। 27 दिसंबर को जांच एजेंसियों ने सौरभ शर्मा के रिश्तेदारों और सहयोगियों के भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर स्थित आवास में जांच एजेंसियों ने छापामार कार्रवाई की। इस दौरान अलग-अलग ठिकानों पर सर्चिंग के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए। वहीं सौरभ के सहयोगी चेतन सिंह गौर के नाम पर 6 करोड़ रुपये से अधिक की FD मिली थी। परिवार के सदस्यों और कंपनियों के नाम पर 4 करोड़ रुपये से अधिक का बैंक बैलेंस भी मिला। 23 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेज पाए गए और उन्हें जब्त कर लिया गया। सौरभ शर्मा को 62 दिन बाद विशेष न्यायाधीश आरपी मिश्रा की कोर्ट से लोकायुक्त केस में जमानत मिल गई है। 11 अप्रैल को खत्म हो रही न्यायिक हिरासत 11 अप्रैल को सौरभ शर्मा, चेतन सिंह और शरद जायसवाल की न्यायिक हिरासत खत्म हो रही है। लोकायुक्त द्वारा समय पर चालान पेश नहीं किए जाने के कारण अदालत लोकायुक्त के मामले में पहले ही सौरभ, चेतन गौर और शरद की जमानत मंजूर कर चुकी है, लेकिन ईडी का चालान पेश नहीं होने के कारण तीनों ही जेल से बाहर नहीं आ सके हैं। अब चालान पेश होने के बाद सौरभ की ओर से जमानत का आवेदन लगाया जाएगा। सौरभ के अलावा चेतन और शरद के वकील भी जमानत का आवेदन लगा सकते हैं। वहीं प्यारेलाल की गिरफ्तारी को लेकर ईडी आरोपियों की जमानत का विरोध करेगी।

लोकायुक्त, ईडी, IT और DRI के बाद अब ग्वालियर पुलिस ने सौरभ शर्मा और उसकी मां उमा शर्मा के खिलाफ एफआईआर की दर्ज

 ग्वालियर ग्वालियर में आरटीओ के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा केस में अब पांचवीं जांच एजेंसी की एंट्री हो गई है। लोकायुक्त, ईडी, आयकर विभाग और डीआरआई के बाद अब ग्वालियर पुलिस ने सौरभ शर्मा और उसकी मां उमा शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सौरभ और उमा शर्मा के खिलाफ ग्वालियर के सिरोल थाना में शुक्रवार रात करीब साढ़े 11 बजे परिवहन विभाग की तरफ से धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया गया है। साल 2016 में परिवहन विभाग में अनुकंपा नियुक्ति लेते समय सौरभ और उसकी मां उमा शर्मा ने शपथ पत्र में बड़े भाई सचिन शर्मा की छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की बात छिपाई थी। मुख्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद अब ग्वालियर में दोनों पर मामला दर्ज कराया गया है। सौरभ की नियुक्ति को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट संकेत साहू पहले ही लोकायुक्त में शिकायत कर चुके थे। पुलिस को दिए आवेदन के मुताबिक, सहायक परिवहन आयुक्त किरन कुमार को एक जनवरी 2025 को संयुक्त परिवहन आयुक्त की ओर से एक पत्र मिला था। जिसमें सेवानिवृत परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा की नियुक्ति को लेकर दिए गए शपथ पत्र की जांच के निर्देश थे। सहायक परिवहन आयुक्त ने जांच की और सर्विस रिकॉर्ड मंगाया। सौरभ शर्मा ने शपथ पत्र में यह जिक्र नहीं किया कि उसका बड़ा भाई सचिन शर्मा छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी में है। सौरभ की नियुक्ति के लिए उसकी मां उमा शर्मा ने भी शपथ पत्र दिया था। जिसमें बड़े बेटे की सरकारी नौकरी की बात छिपाई थी।जांच के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार के वित्त विभाग में संपर्क किया गया और वेबसाइट से कर्मचारियों की सूची निकाली तो वहां सौरभ के बड़े भाई सचिन शर्मा के सड़क विकास निगम रायपुर में तैनात होने की पुष्टि हुई। जिससे शपथ पत्र झूठे होने का प्रमाण मिला है। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा केस में ईडी मनी ट्रेल और प्रॉपर्टी के दस्तावेज, तो इनकम टैक्स विभाग सौरभ के दोस्त चेतन सिंह गौर की गाड़ी से मिले 54 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए की जांच कर रही है। लोकायुक्त आय से ज्यादा संपत्ति की जांच तो डीआरआई इस बात की जांच कर रही है कि जो सोना मिला है, वो लीगल तरीके से लिया गया है या नहीं? काली कमाई को कॉलोनी बनाने में खपाए जाने का कनेक्शन भी जांच एजेंसियों को मिला है। अब ग्वालियर पुलिस ने सौरभ और उसकी मां उमा शर्मा पर धोखाधड़ी व अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है।

सौरभ शर्मा, चेतन गौर, शरद जायसवाल की न्यायिक हिरासत 29 मार्च तक बढ़ी, लोकायुक्त विशेष न्यायाधीश ने फैसला सुनाया

भोपाल मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग के करोड़पति आरक्षक सौरभ शर्मा केस में बड़ी अपडेट सामने आई है. सौरभ शर्मा, चेतन गौर, शरद जायसवाल की न्यायिक हिरासत 29 मार्च तक बढ़ा दी गई है. लोकायुक्त विशेष न्यायाधीश ने फैसला सुनाया है. सौरभ शर्मा को आरटीओ घोटाले में गिरफ्तार किया गया था. फिलहाल जांच एजेंसियो की पूछताछ जारी है. इधर, पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के मामले में एसआईटी कोर्ट में चार्टशीट पेश होगी. मालूम हो कि 1 जनवरी 2025 की रात युवा पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर शव को सेप्टिक टैंक में चुनवा दिया गया था. 2 जनवरी को मुकेश के भाई युकेश ने कोतवाली में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी. 3 जनवरी की देर शाम मोबाइल (गूगल) लोकेशन के आधार पर मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर के चट्टान पारा स्थित बाड़ा से पुलिस ने मुकेश की बॉडी को बरादम किया था. इस मामले में सरकार ने एसआईटी जांच के आदेश दिए थे. सुरेश के भाई रितेश, दिनेश और कर्मचारी महेंद्र रामटेके को गिरफ्त में लेने के 3 दिन बाद हैदराबाद से सुरेश को गिरफ्तार किया गया था. मामला गंगालूर से मिरतुर 100 करोड़ की लागत वाली सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग से जुड़ा हुआ था. रिपोर्टिंग से नाराज सुरेश ने हत्या की साजिश रची थी. फिलहाल इस मामले के सभी आरोपी जेल में बंद हैं. जिस जगह से मुकेश का शव बरामद हुआ था एसआईटी ने उसे सील कर रखा है. हत्या के बाद से सुरेश की प्रापर्टी कुर्की करने की लगातार मांग उठ रही है. मामले में भ्रष्टाचार के संलिप्तत को लेकर पीडब्ल्यूडी के पूर्व ईई, एसडीओ समेत 4 लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का बड़ा बयान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इस पूरे मामले में छोटी मछलियों पर कार्रवाई की गई लेकिन बड़ी मछलियों को हाथ तक नहीं लगाया गया. पूरी कांग्रेस पार्टी इस मामले में गोविंद सिंह राजपूत और उनके सहयोगियों पर कार्रवाई की मांग कर रही है. इसी कड़ी में कल हम लोकायुक्त गए थे. आज हम लोग eow आए हैं. 3-3 एजेंसियां काम कर रही हैं, लेकिन अब तक यह पता नहीं लगा पाई आखिर 52 किलो सोना और कैश किसका था eow के अधिकारियों ने जांच कर आश्वाशन दिया है. आने वाले समय में हम प्रधानमंत्री को भी शिकायत करेंगे. रजिस्ट्री से लेकर तमाम साक्ष्य दिए हैं. उसके बाद भी कार्रवाई से बच रही है जांच एजेंसियां. हमने सदन में स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग की लेकिन चर्चा भी नहीं हुई.

सौरभ शर्मा की मुश्किलें बढ़ी, आयकर विभाग की तिगड़ी से पूछताछ, मिला लेनदेन का लिंक !

भोपाल  काली कमाई और 52 किलो सोने के मामले में सौरभ शर्मा से पूछताछ के लिए दूसरे दिन भी आयकर विभाग की टीम भोपाल सेंट्रल जेल पहुंची। जहां बंद कमरे में सौरभ शर्मा से पूछताछ की गई। इस दौरान इनकम टैक्स विभाग को अहम सुराग मिले है।  लगातार दूसरे दिन भी आयकर विभाग की टीम भोपाल केंद्रीय जेल पहुंची। जहां आईटी की टीम ने सौरभ शर्मा से करीब 6 घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान आयकर विभाग को सौरभ और चेतन के बीच हुए लेनदेन के पुख्ता प्रमाण मिले है। फिलहाल IT टीम आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है। 24 फरवरी  को भी सौरभ शर्मा से पूछताछ करने इनकम टैक्स की टीम सेंट्रल जेल पहुंची थी। जहां उससे 5 घंटे तक पूछताछ की गई थी। जिसमें सौरभ शर्मा से 52 किलो सोने और 11 करोड़ रुपये की नकदी से भरी इनोवा कार के बारे में सवाल किए गए। सौरभ ने इन संपत्तियों से अपना कोई संबंध होने से इनकार किया। हालांकि चेतन सिंह गौर पहले ही आईटी को दिए बयान में कार में भरा कैश और सोना सौरभ का होने का दावा कर चुका है। सौरभ शर्मा 28 जनवरी को कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा था, लेकिन आवेदन के बाद अदालत ने जांच एजेंसी से डायरी मंगवाई थी। जिसके बाद उसे अगले दिन आने के लिए कहा, वकील के मुताबिक, सुबह 11 बजे जैसे ही सौरभ कोर्ट जा रहा था। लोकायुक्त ने उसे बाहर से ही गिरफ्तार कर लिया और लोकायुक्त ऑफिस ले गई. जहां उससे 5 घंटे तक पूछताछ की गई.। उसकी निशानदेही पर उसके साथी चेतन गौर को भी हिरासत में लिया गया। 18 दिसंबर को लोकायुक्त का छापा, IT ने बरामद किया था सोना और कैश गौरतलब है कि 18 दिसंबर को लोकायुक्त ने राजधानी भोपाल में सौरभ शर्मा के घर छापामार कार्रवाई की थी। वहीं 19 दिसंबर को मेंडोरी गांव के कुछ लोगों ने पुलिस को खाली प्लॉट पर खड़ी एक लावारिस क्रिस्टा गाड़ी के होने की सूचना दी थी, जिसमें 6 से 7 बैग रखे हुए थे। 52 किलो सोना और 10 करोड़ कैश मिलने के बाद शुरू हुई जांच कैश का अंदेशा होने की वजह से आयकर विभाग को सूचित किया गया था, जिसके बाद IT की टीम ने कांच तोड़कर अंदर से बैग बाहर निकला। जिसमें 52 किलो सोना और 10 करोड़ रुपये कैश बरामद किया गया था। जिसके बाद से लोकायुक्त के बाद ED और IT भी सक्रिय हो गई। 27 दिसंबर को ED ने कई ठिकानों पर मारा छापा, 6 करोड़ से अधिक की FD बरामद 27 दिसंबर को जांच एजेंसियों ने सौरभ शर्मा के रिश्तेदारों और सहयोगियों के भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर स्थित आवास में जांच एजेंसियों ने छापामार कार्रवाई की। इस दौरान अलग-अलग ठिकानों पर सर्चिंग के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए। वहीं सौरभ के सहयोगी चेतन सिंह गौर के नाम पर 6 करोड़ रुपये से अधिक की FD मिली थी। परिवार के सदस्यों और कंपनियों के नाम पर 4 करोड़ रुपये से अधिक का बैंक बैलेंस भी मिला। 23 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेज पाए गए और उन्हें जब्त कर लिया गया।

सौरभ शर्मा मामले में चौंकाने वाला खुलासा, 50 से अधिक बेनामी संपत्ति का राज… 30 लोगों को भेजा गया नोटिस

भोपाल परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं. अब हाल ही में लोकायुक्त पुलिस की गिरफ्त में आए सौरभ शर्मा और उसके साथी चेतन सिंह और शरद जायसवाल से पूछताछ में 50 से ज्यादा बेनामी संपत्तियों का खुलासा हुआ है. इन संपत्तियों के नाम पर 30 से ज्यादा लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनसे जल्द ही पूछताछ की जाएगी. सौरभ शर्मा केस में चौंकाने वाला खुलासा दरअसल लोकायुक्त ने सौरभ शर्मा की 50 से ज़्यादा संपत्तियों का खुलासा किया है, जिसमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर शामिल हैं. जांच में पता चला कि सौरभ ने अपने करीबियों के नाम पर कई संपत्तियां रजिस्टर्ड करवा रखी थीं. लोकायुक्त ने 30 से ज़्यादा लोगों को नोटिस भेजा है, जिनसे पूछताछ की जाएगी. सौरभ शर्मा की रिमांड 4 फरवरी को खत्म हो रही है, ऐसे में जांच में और भी पेचीदगियां सामने आने की उम्मीद है. यह मामला अब एक बड़ी जांच और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है. भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में मिले दस्तावेज छापेमारी के दौरान सौरभ के घर और दफ्तर से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में स्थित संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं. इनमें से ज्यादातर संपत्तियां उसके रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर हैं, हालांकि इनकी असली रजिस्ट्रियां सौरभ के पास ही मिलीं. कई संपत्तियों की पावर ऑफ अटॉर्नी भी दूसरे लोगों के नाम पर की गई थी. 4 फरवरी को खत्म हो रही सौरभ की रिमांड बता दें कि लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ से इन संपत्तियों के बारे में पूछताछ की, लेकिन उसने इनमें अपना नाम होने से इनकार किया. जांच में सहयोग न करने पर 30 लोगों को नोटिस भेजा गया है. 4 फरवरी को सौरभ की रिमांड खत्म होने के बाद लोकायुक्त फिर से रिमांड की मांग कर सकता है. क्या है मामला दरअसल लोकायुक्त ने सौरभ शर्मा की 50 से ज्यादा संपत्तियों का खुलासा किया है। इनमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर शहरों की संपत्तियां शामिल हैं। जांच में पता चला है कि सौरभ ने कई संपत्तियां अपने करीबियों के नाम पर रजिस्टर्ड करवा रखी हैं। इस लिस्ट में 30 से ज्यादा करीबियों के नाम हैं। मामले में सभी को नोटिस भेजा गया है। इन सभी से पूछताछ की जाएगी। बता दें कि सौरभ शर्मा की रिमांड कल 4 फरवरी मंगलवार को खत्म हो जाएगी। लेकिन सौरभ इन संपत्तियों को लेकर जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। जिसके बाद लोकायुक्त ने 30 लोगों को नोटिस भेजा है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में मिले दस्तावेज बता दें कि छापेमारी के दौरान सौरभ के घर और दफ्तर से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में स्थित संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इनमें से ज्यादातर संपत्तियां उसके रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर हैं। लेकिन ऑरिजनल रजिस्ट्री सौरभ के पास ही मिली हैं। सौरभ की कई संपत्तियों की पावर ऑफ अटॉर्नी भी दूसरे लोगों के नाम पर की गई थीं। कल खत्म हो जाएगी या बढ़ेगी सौरभ की रिमांड? बता दें कि सौरभ शर्मा की 7 दिन की रिमांड कल 4 फरवरी मंगलवार को खत्म हो जाएगी। जिसके बाद तीनों सौरभ, चेतन और शरद को कोर्ट में पेश किया जाएगा। मामले में लगातार हो रहे खुलासे के बाद संभावना यही है कि लोकायुक्त पुलिस सौरभ, चेतन और शरद की रिमांड और बढ़ा सकती है। प्रॉपर्टी की बिक्री पर लग चुकी है रोक  सौरभ शर्मा के ठिकानों से जब्त हुए प्रॉपर्टी को खुर्द-बुर्द करने से बचाने के लिए लोकायुक्त ने जिला पंजीयकों को पहले ही पत्र लिख दिया है। दस्तावेजों में मिली प्रत्येक प्रापर्टी की जानकारी पंजीयकों को उपलब्ध करवा दी गई है ताकि उनकी दोबारा से रजिस्ट्री नहीं करवाई जा सके। शरद जायसवाल और चेतन सिंह ने किसी प्रकार के खुलासे नहीं किए हैं। हर महीने आता था 4 लाख किराया लोकायुक्त पुलिस सूत्रों ने बताया कि सौरभ शर्मा के पास हर महीने 4 लाख रुपये किराया आता था। यह जानकारी सौरभ ने पूछताछ के दौरान पुलिस को दी है। यह किराया उसकी प्रापर्टियों से मिल रहा था। ग्वालियर में स्थित प्रापर्टी का किराया लेने के लिए उसने कर्मचारी नियुक्त कर रखा था। यह कर्मचारी किराया वसूल कर सौरभ को भेजता था।  सौरभ की बढ़ सकती है रिमांड  सौरभ शर्मा समेत उसके तीनों सहयोगियों की रिमांड अवधि 4 फरवरी तक है। पूछताछ के दौरान सौरभ ने प्रापर्टी खरीदने के लिए फायनेंस करने वालों के नामों का खुलासा नहीं किया है। इसके साथ ही लोकायुक्त के ऐसे दर्जनों सवाल हैं, जिनके जवाब उसने नहीं दिए हैं। इसलिए अब लोकायुक्त पुलिस उसकी रिमांड अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन लगा सकती है। 

सौरभ शर्मा के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी, गिरफ्तारी की तैयारी, प्रॉपर्टी हो जाएगी जब्त

भोपाल लोकायुक्त छापे के 14 दिन बाद भी पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा बयान दर्ज कराने के लिए नहीं पहुंचा है। स्वजन ने बताया था कि वह दुबई में है। उसके विरुद्ध लुकआउट सर्कुलर भी जारी है, फिर भी उसके नहीं आने की स्थिति में आगे की कार्रवाई के संबंध में अब लोकायुक्त पुलिस विधिक सलाह ले रही है। इसमें उसकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करने से लेकर न्यायालयीन आदेश से संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई की तैयारी है। अभी तक सिर्फ सौरभ की मां उमा शर्मा ने बयान दर्ज कराए हैं। पत्नी के साथ दुबई गया था छापे के दौरान सौरभ के स्वजन ने पुलिस को बताया था कि वह कार्रवाई के दो दिन पहले ही पत्नी दिव्या के साथ दुबई गया है। सूत्रों का कहना है कि उसका 21 दिसंबर को वापसी का टिकट था। इसके पहले ही 18 दिसंबर को सौरभ के आवास और कार्यालय में पुलिस ने छापा डाला था। इसके बाद लोकायुक्त पुलिस द्वारा सौरभ, उसके करीबी चेतन गौर, शरद जायसवाल, पत्नी दिव्या शर्मा और मां उमा शर्मा से पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया था। आयकर विभाग की मांग पर एक सप्ताह पहले उसके विरुद्ध पिछले लुकआउट सर्कुलर भी जारी है। साले को गिफ्ट किया साढ़े 3 करोड़ का घर जबलपुर के शास्त्री नगर स्थित रोहित तिवारी के घर पर कुछ दिनों पहले ईडी ने कार्रवाई की थी। रोहित सौरभ का साला है। सौरभ के खिलाफ करोड़ों की अवैध संपत्ति का मामला सामने आया था, जिसके बाद से उसके रिश्तेदारों के यहां पर भी छापामार कार्रवाई चली। कहा यह भी जा रहा है कि रोहित का जो उमा निवास बना है वह सौरभ शर्मा ने उसे गिफ्ट किया था। जिसकी कीमत लगभग 3.50 करोड़ रुपए बताई जा रही है। लाल डायरी पर पूर्व मंत्री भार्गव बोले- ‘मेरा तो नाम नहीं होगा’ सौरभ के घर से एक डायरी बरामद हुई है। डायरी में कई मंत्रियों के नाम कोड वर्ड में हैं। ऐसे में कई बड़े चेहरे बेनकाब होने की संभावना है। इस पर पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा है कि मेरा नाम तो नहीं होगा। बता दें कि जीतू पटवारी ने आरोप लगाया था कि शर्मा घर से एक लाल डायरी मिली है, जिसमें कई मंत्रियों के नाम हैं।  पुलिस नहीं पता कर पाई सौरभ कहा है इससे एयरपोर्ट या बंदरगाह पर पहुंचते ही उसे पकड़ा जा सकेगा। लोकायुक्त पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि संभवत: सौरभ भारत आ गया है। इसके बाद भी पुलिस पुख्ता तौर पर यह पता नहीं कर पाई है कि वह कहां है। सौरभ के करीबी शरद जायसवाल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आवेदन कर अतिरिक्त समय मांगा है। चेतन गौर ने भी आयकर व ईडी में बयान दर्ज करा दिए हैं, पर लोकायुक्त पुलिस से दूरी बना रखी है। जानें कब तक जांच एजेंसियों को क्या-क्या मिला  ईडी भोपाल ने सौरभ शर्मा और अन्य मामले में मध्य प्रदेश के भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जिलों में स्थित विभिन्न परिसरों में पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत 27 दिसंबर 24 को तलाशी अभियान चलाया था। तलाशी अभियान के दौरान विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं। सौरभ शर्मा के सहयोगी चेतन सिंह गौर के नाम पर 6 करोड़ से अधिक की सावधि जमा के रूप में चल संपत्ति भी मिली है।  25.87 करोड़ रुपए मिले कैश  सौरभ शर्मा के परिवार के सदस्यों और कंपनियों के नाम पर 4 करोड़ रुपए से अधिक का बैंक बैलेंस और 50 लाख से अधिक की अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए थे। 23 करोड़ रुपए नकदी बरामद किए गए हैं। लोकायुक्त पुलिस ने सौरभ शर्मा के घर और दफ्तर से 2 करोड़ 87 लाख नगद जब्त बरामद किए थे। अब इंडी ने 23 करोड़ रुपए नकद बरामद होने के बाद सौरभ शर्मा के पास से कुल बरामद कैश की कीमत बढ़कर 25 करोड़ 87 लाख हो गई है। आईटी टीम ने कार से जब्त किया था 52 किलो सोना, 10 करोड़ नगदी गौरतलब है कि मध्य प्रदेश लोकायुक्त पुलिस ने बीते दिनों सौरभ शर्मा के ठिकानों से 234 किलो चांदी और करोड़ों रुपए कैश बरामद किए थे. इसके बाद सौरभ के सहयोगी की कार से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को 52 किलो सोना और 10 करोड़ रुपए नगद मिले थे. फिलहाल सौरभ शर्मा फरार है. भोपाल जिला न्यायालय में सौरभ शर्मा के वकील ने अग्रिम जमानत अर्जी लगाई, जिसे खारिज कर दी गई. सौरभ के वकील अब उच्च न्यायालय जाने की तैयारी में हैं.

Ex Constable Saurabh Sharma के घर 9 दिन से जारी Raid में मिला 93 Crore का खजाना

भोपाल  27 दिसंबर से भोपाल के करोड़पति आरटीओ पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के यहां छापेमारी देश भर में सुर्खियों में रही। उसके घर 9 दिन में बैक टू बैक तीन एजेंसियों ने छापे मारे। इस दौरान धनकुबेर सौरभ के पास 93 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति मिली है। इनमें 52 किलो सोना और 11 करोड़ कैश से लेकर 23 करोड़ की अन्य संपत्तियों और 6 करोड़ की एफडी शामिल है। इतने खुलासों ने जांच दलों को भी हैरानी में डाल दिया है। उसके यहां ईडी से लेकर लोकायुक्त और आयकर विभाग तीनों कार्रवाई को अंजाम दिया। शर्मा पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। उसके पास आय से कई गुना अधिक चल अचल संपत्ति मिली है। वह भी मात्र कुछ सालों के काम करने के बाद। छापेमारी का क्रम ऐसा रहा ईडी ने 27 दिसंबर को सौरभ शर्मा, चेतन सिंह गौर, शरद जायसवाल और रोहित तिवारी के ठिकानों पर छापे मारे थे। ये सभी लोग सौरभ के काम में मददगार बताए जा रहे हैं। शुरुआती छापेमारी में सौरभ की कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। इसके बाद ईडी ने जांच का दायरा बढ़ाया और उनके परिवार, दोस्तों और सहयोगियों के ठिकानों पर भी छापेमारी की। इस दौरान भी कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिसने सभी को हैरत में डाल दिया है। ईडी को अब तक शर्मा के परिजनों और दोस्तों के खातों में 4 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके अलावा 23 करोड़ रुपये की और संपत्ति भी जांच के घेरे में है। परिवार और दोस्तों के नाम बेनामी संपत्तियां भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर में की गई छापेमारी में 6 करोड़ रुपये की एफडी भी मिली हैं। ईडी को शक है कि शर्मा ने अपने परिवार, दोस्तों और कंपनियों के नाम पर कई बेनामी संपत्तियां खरीदी हैं। ईडी का कहना है कि ये सभी लोग सौरभ के अवैध कारोबार से फायदा उठा रहे थे। या फिर उसके काम में मदद कर रहे थे। इस मामले में अभी जांच जारी है और आगे और भी खुलासे हो सकते हैं। बता दें सौरभ शर्मा का अब तक लोकायुक्त पता नहीं लगा सकी है। सौरभ शर्मा दुबई में है या भारत में इसको लेकर एजेंसी के अधिकारी ही कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे हैं। इस बीच सौरभ शर्मा के यहां लगातार अलग-अलग एजेंसियों की तलाशी में काली कमाई निकल रही है। जानकारी के अनुसार सौरभ शर्मा के करीबियों की शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस ने उसके ठिकानों पर 19 और 20 दिसंबर को सर्च की थी। इस दौरान सौरभ के भोपाल स्थित घर और कार्यालय से 7.98 करोड़ रुपए की चल संपत्ति बरामद की गई थी। वहीं, आयकर विभाग ने भी एक कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए कैस जब्त किया था।    लाल डायरी में छिपा है 2000 करोड़ का घोटाला?   पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने दावा किया कि सौरभ शर्मा से जब्त की गई लाल डायरी में नेता और अफसरों के नाम पर 2000 करोड़ रुपए के लेन-देन का हिसाब दर्ज है। इस डायरी में कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया गया है, जिससे नेता और अधिकारियों की पहचान छिपाई गई है।   पटवारी की मांग: केंद्रीय एजेंसी से जांच हो पटवारी ने मांग की है कि लाल डायरी का सत्यापन केंद्रीय एजेंसियों से करवाया जाए। उन्होंने आशंका जताई कि लोकायुक्त पुलिस के पास मौजूद डायरी में छेड़छाड़ की जा सकती है। उन्होंने इसे सार्वजनिक करने की भी मांग की।

Saurabh Sharma के ऑफिस में 13 घंटे से ज्यादा वक्त तक चली तलाशी, जानिए सर्चिंग टीम को क्या कुछ मिला

भोपाल परिवहन विभाग के धनकुबेर पूर्व आरक्षक (Former RTO Constable) सौरभ शर्मा (Saurabh Sharma) और उसके सहयोगी चेतन गौर (Chetan Gour) पर अब ईडी (ED) का भी शिकंजा कसना शुरू हो गया है. इनकी काली कमाई (Black Money) से जुड़े साक्ष्य तलाशने ईडी ने प्रदेश के अलग अलग इलाको में इनसे जुड़े ठिकानों पर एक साथ रेड की थी. ग्वालियर में सौरभ और चेतन के घरों पर लगभग साढ़े तेरह घण्टे तक जांच पड़ताल चली. बताया जा रहा है कि पुलिस इन दोनों जगहों से एक सेल डीड और एक डायरी जब्त करके ले गई है.  प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम गुरुवार को ही ग्वालियर पहुंच गई थी. ऐसे हुई कार्रवाई ED ने गुप्त ढंग से यहां ऑपरेशन की योजना बनाई थी, उसने स्थानीय टैक्सी का सहारा लेकर पर्यटक बनकर पहले शहर में भ्रमण किया. शुक्रवार को सुबह 5 बजे टीम सौरभ शर्मा के विनय नगर सेक्टर दो में  शब्द प्रताप आश्रम स्थित घर पहुंची. यहां देर रात तक लगभग 13.30 घंटे तक सर्चिग चली, जिसमें मकान की रजिस्ट्री से संबंधित सेल डीड, एक डायरी और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए। इसके बाद टीम वहां से रवाना हो गई. सौरभ के किस ठिकाने से क्या मिला… 1. ई- 7/98, अरेरा कॉलोनी: इस मकान में सौरभ परिवार के साथ 2 साल से रह रहा है। सूत्रों का कहना है कि ये मकान रोहित तिवारी ने खरीदा था। सौरभ को उसने 50 हजार रुपए महीने किराए पर ये मकान दिया है। लोकायुक्त की टीम ने इस घर पर छापा मारा था। क्या मिला- यहां से प्रॉपर्टी में निवेश के दस्तावेज और नकदी मिली है। 2. ई- 7/78, अरेरा कॉलोनी: सौरभ ने ये बंगला 2 महीने पहले ही खरीदा है। बताया जा रहा है कि ये बंगला बहुत दिनों से खाली था। यहां लोकायुक्त की टीम ने छापा नहीं मारा, लेकिन दो दिन पहले यहां पुलिस देखी गई है। ये भी पता चला कि इस घर की निगरानी के लिए पुलिस ने एक दूसरे मकान पर सीसीटीवी लगाया था। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि किसी ने नहीं की। क्या मिला- ये मकान खाली था। यहां पर सर्चिंग के दौरान कुछ खास नहीं मिल पाया है। 3. ई- 7/ 657, अरेरा कॉलोनी: इस बंगले में सौरभ ने जयपुरिया स्कूल का ऑफिस बनाया हुआ था। इसमें ही उसका दोस्त चेतन सिंह गौर रहता था। लोकायुक्त को इसी मकान से 2 क्विंटल से ज्यादा चांदी की सिल्लियां मिली हैं। क्या मिला- जयपुरिया स्कूल में निवेश के कुछ दस्तावेज मिले हैं। खाली बैग मिले, जिन्हें नकदी के लिए इस्तेमाल किया जाता था। 4. ई- 8/ 98, रेलवे कॉलोनी: इस मकान में शरद जायसवाल रहता है। शरद कंस्ट्रक्शन कंपनी अविरल में डायरेक्टर भी हैं। बताया जा रहा है कि शरद ने सौरभ के निवेश से जुड़ी अहम जानकारी ईडी को दी है। क्या मिला- प्रॉपर्टी में निवेश के दस्तावेज सौरभ की मां का लॉकर फ्रीज कराया सौरभ शर्मा के विनय नगर स्थित आवास से ईडी की टीम को उसकी मां उमा शर्मा के साथ जॉइंट अकाउंट के दस्तावेज मिले हैं। जो यूनियन बैंक के हैं। उमा शर्मा के नाम शब्द प्रताप आश्रम स्थित यूनियन बैंक में एक लॉकर भी मिला है। जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग के पैसे आने जाने की आशंका पर उसे फ्रीज कराया गया है। हाईवे पर हाल ही में एक जमीन बेचे जाने के भी कुछ दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा कई सारे रिकॉर्ड जमा किए गए हैं, जिनको आगे जांच में लिया जा सकता है। इसके अलावा ग्वालियर में सौरभ शर्मा के सिटी सेंटर स्थित घर और जबलपुर में उसकी ससुराल के मकान में भी ईडी ने दिन भर सर्चिंग की। यहां से भी कुछ अहम दस्तावेज और बैंक ट्रांजेक्शन की जानकारी मिली है। ईडी की एक अन्य टीम ने  सौरभ के दोस्त और पार्टनर चेतन गौर के कम्पू स्थित आवास पर छापा मारा. इस घर मे भी कोई मौजूद नहीं था. बताया गया कि ईडी ने चेतन के घर से कई दस्तावेज जब्त किये. चेतन के घर पर टीम ने तलाशी के बाद कुछ फाइलें भी जब्त कीं, जो सरकारी ठेकों से जुड़ी बताई जा रही हैं. बताया गया है चेतन ने सौरभ के काम में रिश्तेदारों का पैसा निवेश किया था, इसकी फाइलों की पड़ताल के लिए टीम यहां आई थी. चेतन ने 3 गाड़ियां भी दी हुई थीं, जिसके बदले में उसे हर महीने 2.50 लाख रुपये मिलते थे. बताया गया कि ईडी टीम (ED Team) ने सौरभ के विनय नगर स्थित घर मे काफी बारीकी से जांच पड़ताल की. उन्होंने फर्नीचर व जमीन को भी ठोक कर देखा. ईडी ने सौरभ के घर पर रखे फर्नीचर को भी अच्छी तरह से चेक करने के साथ ही फर्श  को भी कई बार ठोक कर देखा. वह यह देखना चाहती थी इनमें कुछ छिपा तो नहीं है. इसके साथ ही घर मे कार्यरत संग्राम नामक एक कर्मचारी से भी पूछताछ की. पता ये भी चला कि सौरभ ने कुछ समय पहले दुबई में अपनी पत्नी दिव्या के साथ अपने बेटे का जन्मदिन भी मनाया था. जांच में यह तथ्य भी प्रकाश में आया कि सौरभ के कई रिश्तेदार भी दुबई में रहते हैं. सौरभ के घर से जांच टीम रात लगभग साढ़े सात बजे निकली और सीधे गाड़ियों में सवार हो गई. इस टीम में एक पुरुष और एक महिला मुंह ढंके हुए निकले जो पूरी कार्रवाई के दौरान टीम के साथ रहे. इन दोनों को लेकर दिन भर चर्चा रही. हालांकि बताया गया कि यह दोनो स्वतंत्र साक्ष्य के रूप में लाये गए थे, जो एक राष्ट्रीय बैंक के एक मैनेजर और एक फील्ड ऑफीसर थे. टीम घरों से निकलकर सीधे अपने गंतव्य पर रवाना हो गई. शहर में नहीं रुकी.

RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी

भोपाल परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक और सैकड़ों करोड़ के घोटाले के मास्टरमांग सौरभ शर्मा के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया है। बीते दिनों जांच एजेंसी द्वारा की गई छापेमारी में सौरभ शर्मा के ठिकानों से करोड़ों रुपए की संपत्ति और सोना चांदी बरामद हुई थी। इसके बाद ईडी ने मामला दर्ज किया था। अब करोड़ों की काली कमाई करने वाले शर्मा के खिलाफ एलओसी जारी किया गया है। जानकारी के अनुसार आयकर विभाग द्वारा पूर्व आरक्षक के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया है। इसके बाद एयरपोर्ट पर ही सौरभ शर्मा को गिरफ्तार किया जा सकेगा। बताया जा रहा है कि, छपेमारी से पहले ही सौरभ शर्मा दुबई रवाना हो गया था। लोकायुक्त और आयकर विभाग द्वारा सौरभ शर्मा के खिलाफ जांच की जा रही है। छापेमारी में सौरभ शर्मा के ठिकानों से करोड़ों रुपए की संपत्ति मिली थी। लोकायुक्त की छापेमारी के बाद अब ईडी ने भी इस केस में एंट्री कर ली है। सौरभ शर्मा और उसके दोस्त चेतन सिंह गौर के खिलाफ ईडी ने केस दर्ज कर लिया है। सौरभ शर्मा के परिजनों को भी जांच के दायरे में लाया जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन विभाग के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा और उनके सहयोगी चेतन सिंह गौर के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की है। सौरभ शर्मा के अरेरा कॉलोनी ई – 7 स्थित ठिकाने पर छापेमारी कर लोकायुक्त ने करोड़ों रुपए की संपत्ति जब्त की थी। सात साल की नौकरी के बाद सौरभ शर्मा ने वीआरएस ले लिया था। इसके बाद सौरभ शर्मा ने रियाल एस्टेट बिजनेस में हाथ आजमाना था। अनुकंपा नियुक्ति में नियमों से हुआ खिलवाड़ भोपाल में सौरभ शर्मा पर एक और बड़ा खुलासा हुआ है। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक की नियुक्ति पर भी गड़बड़ी सामने आई है। अनुकंपा नियुक्ति में नियमों से साथ खिलवाड़ हुआ है। पिता के निधन के बाद सौरभ ने आवेदन किया था। जानकारी के अनुसार सौरभ का भाई छत्तीसगढ़ में अधिकारी है। सौरभ शर्मा नियुक्ति के लिए पात्र नहीं था यह जानकारी भी सामने आई है।

लोकायुक्त के शिकंजे में फंसे परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय की एंट्री

भोपाल  लोकायुक्त के शिकंजे में फंसे परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) की एंट्री हो गई है। ईडी ने सौरभ शर्मा और चेतन सिंह गौर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। इस मामले में सौरभ के परिवार से भी पूछताछ की जाएगी। इधर जांच का दायरा जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे ही नए-नए खुलासे भी हो रहे हैं। अब सौरभ के बारे में पता चला है कि वह नौकरी छोड़ने के बाद भी परिवहन विभाग में सक्रिय था। अपने लोगों को परिवहन के चेक पोस्टों पर भेजा करता था। हालांकि तब सितंबर 2023 में कुछ अधिकारियों ने इसका विरोध करते हुए जानकारी ऊपर तक भी पहुंचाई थी, लेकिन इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं अब लोकायुक्त और आयकर विभाग के रडार पर आने के बाद सौरभ शर्मा के बारे में ये सारी बातें सामने आ रही हैं। हालांकि जिन अधिकारियों के सामने तब ये मामले आए थे, अब वे भी कुछ कहने से बच रहे हैं। पुलिस सूत्रों की मानें तो सौरभ शर्मा के पास करीब 12 लोगों की ऐसी टीम थी, जिनको परिवहन के चेक पोस्टों पर वसूली का अनुभव था। बीच-बीच में उसके लोगों के वीडियो भी सोशल मीडिया के अलग-अलग माध्यमों पर वायरल हुए थे, तब मामला ऊपर तक भी पहुंचा था, लेकिन लिखित शिकायत से पहले ही पूरा मामला दबा दिया गया था। परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सौरभ काफी सतर्क रहकर काम करता था। उसे नाकों की भी पूरी खबर रहती थी। अगर उसके लोगों की कुछ शिकायत आती थीं तो वह अपने रसूख का उपयोग कर उसे दबा देता था। आयकर विभाग का बिल्डर के बाद सौरभ पर फोकस आयकर विभाग की टीम ने बिल्डर के यहां छापेमारी में अहम राजफाश करने के बाद अब सौरभ शर्मा पर फोकस बढ़ा दिया है। दिल्ली से दिशा-निर्देश मिलने के बाद आयकर विभाग ने सोने और 10 करोड़ रुपये की नकदी की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। सौरभ के दुबई से भारत आने के बाद उसे पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। ऊपर से रकम को होल्ड करने के मिले निर्देश आयकर सूत्रों का कहना है कि रातीबड़ में एक फार्म की जमीन पर खड़ी कार से जब्त सोना और रुपये को लोकायुक्त को वापस करने की चर्चाओं पर अब विराम लग गया है। आला अधिकारियों की बैठक के बाद रकम को होल्ड करने का निर्णय लिया गया है। जब तक सोने की पूरी जानकारी नहीं मिल जाती है, तब तक रकम और सोना आयकर विभाग के पास ही रहेगा। पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा… पढ़िए अब तक की पूरी कहानी     पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा के यहां कुछ रोज पहले ही लोकायुक्त ने भोपाल निवास व कार्यालय पर छापा मारा था। सौरभ मूल रूप से ग्वालियर का रहने वाला है।     जो गाड़ी आयकर की टीम ने पकड़ी, उसमें 54 किलो सोना व नौ करोड़ से ज्यादा नकद मिला था। यह गाड़ी सौरभ के नजदीकी चेतन सिंह गौर की थी। सौरभ की ग्वालियर के थाटीपुर में ससुराल है।     सोशल मीडिया पर पहले सौरभ व उसकी पत्नी दिव्या और इसके बाद एक एक करके सभी रिश्तेदार व नजदीकियों ने अपने फेसबुक व इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट कर लिए हैं। परिवहन महकमे में सबसे ज्यादा चर्चा सौरभ को लेकर परिवहन मुख्यालय से लेकर जिला परिवहन अधिकारी कार्यालय तक में इन दिनों भारी चर्चा है। सौरभ शर्मा के कई जानने वाले कार्यालयों में पदस्थ हैं और दबी जुबान से अलग-अलग बातें कर रहे हैं। विभाग के कुछ लोगों का कहना है कि सौरभ ने ग्वालियर में शुरुआत जरूर की, लेकिन इसके बाद भोपाल की ओर रुख करने में देर नहीं की। सौरभ के अलग-अलग कारोबारों में पार्टनर भी हैं। जिस तरह रोहित तिवारी व शरद जायसवाल पार्टनर हैं, उसमें एक मेहता भी सौरभ का काफी नजदीकी है। शरद जायसवाल होटल फाटिगो भोपाल का भी काम देखता है। वहीं मेहता भी होटल से लेकर रियल स्टेट कारोबार में सौरभ का साथ देता है। सौरभ की नियुक्ति में पूर्व विधायक का बड़ा हाथ इस बीच, परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की नियुक्ति नियम विरुद्ध बताई जा रही है। इसमें ग्वालियर अंचल के कांग्रेस से जुड़े एक कद्दावर नेता और पूर्व विधायक का बड़ा हाथ है। तत्कालीन कलेक्टर पर भोपाल तक से दबाव डलवाकर दो बार अनुकंपा नियुक्ति को लेकर प्रस्ताव भिजवाया गया। परिवहन आयुक्त के स्टेनो ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई। आखिर सौरभ को यह लोग परिवहन विभाग में लाने में कामयाब हो गए। पूर्व मुख्यमंत्री तक से पूर्व विधायक ने प्रदेश के मंत्रियों को सौरभ के लिए सिफारिश कराई थी। यह पूर्व विधायक सौरभ के परिवार से सालों से जुड़े हैं। सौरभ की नियुक्ति होने के बाद उसे परिवहन विभाग के दांव-पेंच सीखते में अधिक समय नहीं लगा। दो साल तक भाजपा सरकार में उसने पूरे दांव-पेंच सीखकर परिवहन चेक पोस्टों का ठेका उठाया। दो बार पीएससी मुख्य तक पहुंचा, अनुकंपा नियुक्ति से लगा पैसा कमाने का चस्का प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले मनोज शर्मा बताते हैं कि सौरभ पढ़ने में बहुत होशियार था। कोचिंग के टेस्ट में अव्वल आता था। उसमें प्रतिभा थी। दो बार उसने एमपीपीएससी दी और प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की मुख्य परीक्षा तक पहुंचा। एक बार साक्षात्कार में रह गया। इसी दौरान पिता के निधन के बाद उसकी अनुकंपा नियुक्ति परिवहन विभाग में हो गई। यहां से उसे पैसा कमाने का चस्का लगा।

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