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एमपी में 23 मार्च तक रिजल्ट घोषित होगा, 1 अप्रैल से स्कूल खुलेंगे, ड्रॉप-आउट रोकने के लिए शिक्षक करेंगे घर-घर संपर्क

भोपाल मध्य प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की तैयारियां तेज हो गई हैं. लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) से मिली जानकारी के अनुसार 8वीं, 9वीं और 11वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम 23 मार्च तक घोषित कर दिए जाएंगे. इसके बाद 24 से 31 मार्च तक विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा. वहीं एक अप्रैल से प्रदेश भर के सरकारी स्कूलों में नई कक्षाएं शुरू होंगी और प्रवेशोत्सव के साथ विशेष नामांकन अभियान भी चलाया जाएगा। हर कक्षा में बनाया जाएगा एक वार्डन स्कूल शिक्षा विभाग ने इस बार सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने और ड्रॉप-आउट कम करने के लिए विशेष रणनीति बनाई है. डीपीआई द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत प्रत्येक कक्षा में एक शिक्षक को ‘वार्डन’ की जिम्मेदारी दी जाएगी. यह शिक्षक विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पर नजर रखेगा. जो बच्चे लगातार अनुपस्थित रहेंगे, उनके अभिभावकों से सीधे संपर्क करेगा। लोक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त शिल्पा गुप्ता ने बताया कि नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों को घर-घर जाकर संपर्क अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. इस दौरान शिक्षक अभिभावकों को सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी देंगे. इनमें निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म, स्कॉलरशिप सहित अन्य शासकीय योजनाएं शामिल हैं. विभाग का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कर स्कूलों में शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई जाए। सरकारी स्कूलों में रंगाई-पुताई के निर्देश नए सत्र की तैयारियों को लेकर स्कूलों को भी कई निर्देश दिए गए हैं. एक अप्रैल से पहले सभी स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों का वितरण पूरा कर लिया जाएगा, ताकि सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू हो सके. इसके अलावा स्कूल भवनों की रंगाई-पुताई और साफ-सफाई का काम 30 मार्च तक पूरा करने को कहा गया है। बीते साल 3.43 लाख बच्चों ने रोकी पढ़ाई दरअसल प्रदेश में बढ़ते ड्रॉप-आउट को देखते हुए सरकार और शिक्षा विभाग चिंतित है. पिछले वर्ष प्रदेश में करीब 3.43 लाख बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया था. इनमें सबसे अधिक 2.66 लाख बच्चे सरकारी स्कूलों के हैं. 52 जिलों में सबसे ज्यादा खरगोन जिले से 20 हजार से अधिक बच्चे ड्रॉप-आउट हुए, जिन्होंने कहीं भी दोबारा प्रवेश नहीं लिया। बजट बढ़ा, लेकिन कम हुई विद्यार्थियों की संख्या जानकारी के अनुसार आठ साल पहले प्रदेश में पहली से 12वीं तक के स्कूलों में करीब 1.60 करोड़ बच्चों का पंजीयन हुआ था. आठ साल बाद इनमें से केवल 1 करोड़ 4 लाख बच्चे ही पढ़ाई में बने रहे. खास बात यह है कि इस दौरान स्कूल शिक्षा का बजट लगभग चार गुना बढ़कर 9 हजार करोड़ से 37 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इसके बावजूद विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज की गई है।

MP में प्राइवेट स्कूलों के लिए मान्यता की अंतिम तिथि, 10 मार्च तक 20 हजार लेट फीस के साथ आवेदन कर सकेंगे

 ग्वालियर  लोक शिक्षण विभाग यानि डीपीआई हाईस्कूल व हायरसेकेण्डरी स्कूलों की नवीन मान्यता व नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। बिना विलंब शुल्क के ऑनलाइन आवेदन के करने की तिथि निकल चुकी है। लेकिन विभाग ने 20 हजार विलंब शुल्क के साथ मान्यता के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीक्ष 10 मार्च रखी है। आवेदन के बाद 25 मार्च तक संयुक्त संचालक शिक्षा के नेतृत्व में गठित टीम आवेदन वाले स्कूलों की छानबीन करेगा। इसके बाद जिन स्कूलों के आवेदन को समिति निरस्त करेगी, उसके लिए 25 अप्रैल तक अपील की जा सकती है। इन अपीलों का निराकरण डीपीआई 25 मई को करेगा। इसके बाद स्कूलों की मान्यता जारी कर दी जाएगी। ऑनलाइन आवेदन और पोर्टल की जानकारी डीपीआई ने मान्यता की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल https://manyta.dpimp.in/ शुरू किया है। सीबीएसई, आईसीएसई और अन्य बोर्डों से संबद्ध स्कूलों को भी इसी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। सामान्य शुल्क के साथ आवेदन की समय-सीमा 15 फरवरी को समाप्त हो चुकी है, लेकिन स्कूलों को डीपीआई ने विलंब शुल्क के साथ 10 मार्च तक का आवेदन करने का समय दिया है। आवेदन करने के बाद इस तरह चलेगी प्रक्रिया     ग्वालियर चंबल क्षेत्र से स्कूलों की जांच संभागीय संयुक्त संचालक द्वारा गठित दल ऑनलाइन आवेदनों की छानबीन की जाएगी। नवीन मान्यता, नवीनीकरण और अपग्रेडेशन के प्रकरणों पर निर्णय लेने की अंतिम तिथि 25 मार्च 2026 तय की गई है।     यदि किसी स्कूल का आवेदन संयुक्त संचालक स्तर पर निरस्त कर दिया जाता है, तो संबंधित संस्था 25 अप्रैल तक आयुक्त, लोक शिक्षण के समक्ष ऑनलाइन अपील प्रस्तुत कर सकती है।     प्राप्त अपीलों का अंतिम निराकरण 25 मई तक कर दिया जाएगा। इसके बाद ही स्कूलों की मान्यता की अंतिम सूची और प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। स्कूलों को यह रखना होगा ध्यान डीपीआई के संचालक केके द्विवेदी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन समय-सीमा का विशेष ध्यान रखें। ग्वालियर संभाग के संयुक्त संचालक ने भी जिले के सभी अशासकीय स्कूलों को निर्देशित किया है कि वे तकनीकी त्रुटियों से बचने के लिए अंतिम तारीख का इंतजार न करें और पोर्टल पर सभी प्रविष्टियों को सावधानीपूर्वक अपलोड करें।  

प्राथमिक वा माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को नही है बात करने की तजुर्बा मुंह से निकालते आग

प्राथमिक वा माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को नही है बात करने की तजुर्बा मुंह से निकालते आग  राजेंद्रग्राम  कार्यालय विकासखंड पुष्पराजगढ़ अंतर्गत आने वाली एकीकृत माध्यमिक विद्यालय नगमला वा शासकीय प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के द्वारा किसी संस्था से आए हुए अधिकारी कर्मचारी वा पत्रकारो के आने से सिक्षको में खलबली मच जाती है।और सभी शिक्षक एक जगह आए हुए अधिकारी कर्मचारी वा पत्रकार बंधुओ को घेर कर उसका इंटरव्यू लेने के कगार में होते है।कहा जाता है की आप लोगों से हमारा कोई लगाओ नही है क्यू आए और किस लिए आए हो शिक्षकों का इंटरव्यू पत्रकारों को लेने की बजाय पत्रकारों का इंटरव्यू शिक्षकों के द्वारा लिया जाता है।और कहा तो जितना प्रधाना ध्यापक का अधिकार नही होता है उससे कई ज्यादा अधिकार दो दिनों का मेहमान अतिथि शिक्षको को बोलने का अधिकार दिया जाता है।और अतिथि शिक्षको के पास इतना भी तजुर्बा नही होता की को कोई परिचय पूछते है तो उनका नाम पूछने से नाम वा परिचय नही बताया जाता है क्या शिक्षा विभाग के द्वारा यही संस्कार विद्यार्थियों को दिलाए जाने की सलाह अपने शिक्षा कर्मियों  को सिखाया जाता है और अगर ऐसे शिक्षको को आने वाले टाइम में भर्ती करेगी सरकार तो विद्यार्थियों का उज्वल भविष्य क्या कभी साकार हो सकेगी। अतिथि शिक्षक के द्वारा बनाया गया वीडियो रिकॉर्डिंग एकीकृत माध्यमिक विद्यालय नगमला के अतिथि शिक्षक को नाम पूछने पर नाम नही बताया गया और अपने मोबाइल का कैमरा चालू कर वीडियो बनाने में लग जाते है अगर बच्चो से कोई उनके ही किताब से कोई प्रश्न पूंछ लिया जाता है तो बच्चे उस प्रश्न का जवाब नही दे पाते है अगर वीडियो बनाने की जगह विद्यार्थियों को पढ़ाया लिखाया जाता तो सही तरीके से विद्यार्थियों अपना शिक्षा ग्रहण कर पाते और कभी कोई भी प्रश्न पूछने पर सही सही जवाब जरूर दे पाते ना की सिर नीचे कर लिया करते और सभी विभागों से अच्छा शिक्षा विभाग को माना गया है,जहां शिक्षा मिलती है ,लेकिन ऐसे शिक्षको के द्वारा शिक्षा विभाग वा अच्छा शिक्षा  कर्मचारियों को बदनाम करने के लिए तुले बैठे हैं।और सासन प्रशासन को भी बदनाम किया जाता है। समय से नही खुलता है, विद्यालय नही आते शिक्षक जानकारी के अनुसार बताया गया की शिक्षक अपने मनमानी से विद्यालय खोलते है और मनमानी से बंद किया जाता है और समय से विद्यालय में उपस्थित ही नही होते है और सौचालय मेंशिक्षको के द्वारा ताला लगाकर विद्यार्थियों को सौच के लिए नदी तालाब में भेजने के लिए मजबूर किया जाता है ,और बच्चों को डांट फटकार व प्रताड़ित भी किया जाता है।ग्रामीणों का कहना है की उचित व्यवस्था कराकर विद्यार्थियों की उज्ज्वल भविष्य की कामना करते है।

एक अप्रैल से लागू होगा प्रतिबंध, जबलपुर के स्कूली वाहनों में एलपीजी किट का इस्तेमाल नहीं होगा

जबलपुर  शहर की सड़कों पर स्कूली बच्चों को एलपीजी (LPG) किट लगे असुरक्षित वाहनों में ढोना अब स्कूल प्रबंधकों और वाहन स्वामियों को भारी पड़ेगा। जिला प्रशासन ने छात्र सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। कलेक्टर कार्यालय सभागार में आयोजित इस बैठक में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गेहलोत, आरटीओ संतोष पॉल और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) अंजना तिवारी सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी व स्कूलों के प्राचार्य मौजूद रहे। एलपीजी वाहनों से छात्रों का परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक में यह तय किया गया है कि एक अप्रैल से जिले के किसी भी शासकीय या अशासकीय विद्यालय में एलपीजी संचालित वाहनों से विद्यार्थियों का परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। गैस किट वाले वाहन बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बैठक में स्कूली परिवहन की सुरक्षा समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि गैस किट वाले वाहन बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। सड़कों पर होगा औचक निरीक्षण: आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस अधीक्षक और यातायात पुलिस को स्कूल समय के दौरान औचक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी को जिले के समस्त सीबीएसई, आइसीएसई और माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध स्कूलों को इस आदेश से अवगत कराने और उनसे अनुपालन प्रतिवेदन लेने को कहा गया है। डेडलाइन तय एक अप्रैल के बाद यदि कोई स्कूल एलपीजी वाहन का उपयोग करता पाया गया, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित संस्था व वाहन स्वामी पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। वैकल्पिक व्यवस्था स्कूल प्रबंधकों को निर्देशित किया गया है कि वे समय रहते इन वाहनों के स्थान पर वैधानिक रूप से अनुमन्य और फिटनेस प्रमाणित (पेट्रोल/डीजल/सीएनजी) वाहनों की व्यवस्था सुनिश्चित करें। सत्यापन अभियान आरटीओ को जिम्मेदारी दी गई है कि वे स्कूली वाहनों का भौतिक सत्यापन कर गैस किट वाले वाहनों की पहचान करें।     विद्यार्थियों का सुरक्षित परिवहन हमारी प्राथमिकता है। एक अप्रैल के बाद अवैध गैस किट वाले वाहन सड़कों पर नहीं दिखने चाहिए। उल्लंघन करने वाले स्कूलों और वाहन मालिकों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।     – राघवेंद्र सिंह, कलेक्टर  

बड़वानी में शिक्षा की दुर्दशा:गाय-बकरियों के तबेले में ठूंसे गए 40 आदिवासी बच्चे!

बड़वानी नरेश रायक सरकार करोड़ों रुपये शिक्षा पर खर्च करने के दावे करती है, मगर हकीकत यह है कि जिले में 40 आदिवासी बच्चों का भविष्य पशुबाड़े में दम तोड़ रहा है। जिस जगह गाय-बकरियां बांधी जाती हैं, वहीं बच्चों की कक्षाएं लग रही हैं। गोबर की बदबू, गंदगी से भरी जमीन और संक्रमण का खतरा—यही है इस ‘तबेला स्कूल’ की असली तस्वीर। क्या यही है “शिक्षा का अधिकार”? बच्चे जमीन पर ठूंसे हुए बैठते हैं। बरसात में कीचड़, गर्मी में असहनीय दुर्गंध। सवाल सीधा है—  क्या आदिवासी बच्चों की शिक्षा की कीमत इतनी सस्ती है? क्या जिम्मेदार अधिकारी कभी अपने बच्चों को ऐसे माहौल में पढ़ने भेजेंगे? जिम्मेदार कौन? जर्जर/अपर्याप्त भवन की आड़ में पशुबाड़े में स्कूल चलाना किसकी अनुमति से? शिक्षा विभाग और प्रशासन की निगरानी कहां है? क्या स्वास्थ्य विभाग ने इस पर कोई आपत्ति दर्ज की? ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद सिर्फ “अस्थायी व्यवस्था” का बहाना दिया गया। मगर यह अस्थायी इंतजाम कब तक चलेगा? महीनों से बच्चे तबेले में बैठकर पढ़ रहे हैं। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, यह भविष्य के साथ खिलवाड़ है बड़वानी जैसे आदिवासी बहुल जिले में यदि बच्चों को सम्मानजनक कक्षा कक्ष भी नसीब न हो, तो विकास के दावे खोखले साबित होते हैं। अब देखना है—  क्या प्रशासन तुरंत वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करेगा? या फिर ‘तबेला स्कूल’ ही जिले की शिक्षा व्यवस्था का स्थायी प्रतीक बन जाएगा? बच्चों की पढ़ाई पशुबाड़े में और भाषण स्मार्ट क्लास के—यह दोहरी तस्वीर आखिर कब बदलेगी?

सरकारी स्कूल ने प्राइवेट को दी चुनौती, रतलाम के बच्चे बिना बैग आए और 40 तक के पहाड़े याद किए

रतलाम  सरकारी स्कूलों का जब जिक्र आता है, तब ज्यादातर समय दिमाग में पहली तस्वीर बदहाल व्यवस्था की बनती है लेकिन मध्य प्रदेश के रतलाम में एक ऐसा अनूठा स्कूल है, जो इसके विपरीत एक नजीर पेश कर रहा है. यह स्कूल अपने आप में एक मिसाल है. इसके बारे में यह कहना हरगिज गलत नहीं होगा कि यह सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों को मात दे रहा है. स्कूल की अपनी कार्यशैली के चलते इसे ‘समस्या मुक्त विद्यालय’ नाम दिया गया है. यहां के प्रधानाध्यापक ने अपने खर्च पर स्कूल को सजाया-संवारा है. वहीं उनका शिक्षा की गुणवत्ता पर भी खासा फोकस रहता है. हम बात कर रहे हैं रतलाम के जावरा स्थित रूपनगर के सरकारी प्राथमिक स्कूल की. प्राथमिक स्कूल को बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया है. स्कूल में बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ वह तमाम जानकारी मुहैया करवाई जा रही है, जो उनके सर्वांगीण विकास में सहायक है. स्कूल में इस तरह हरियाली छाई हुई है कि एक बार के लिए लगता है कि आप किसी गार्डन में आ गए हों. स्कूल की साफ-सफाई पर बहुत ध्यान दिया जाता है ताकि बच्चे अभी से स्वच्छता के महत्व को समझ सकें और इसे अपने जीवन में अपना सकें. खाली हाथ स्कूल आते हैं बच्चे पहली से पांचवीं क्लास तक यह स्कूल पूरी तरह से एक बैगलेस स्कूल है. बच्चे घर से बैग लेकर स्कूल नहीं आते हैं ताकि उनके नाजुक कंधों पर वजनी बोझ न पड़े. स्कूल में पढाई के साथ-साथ होमवर्क भी करवाया जाता है. बच्चों की यूनिफॉर्म पूरी तरह से व्यवस्थित है. इन नन्हे-मुन्ने स्टूडेंट्स की छोटी-छोटी बातों पर पूरा ध्यान दिया जाता है ताकि वे भी अच्छी बातें सीख सकें. बच्चों को 40 तक के पहाड़े मुंहजबानी याद स्कूल से प्रधानाध्यापक की मेहनत का ही यह नतीजा है कि उन्होंने इस सरकारी स्कूल की तस्वीर बदल दी. यहां बच्चों को 40 तक के पहाड़े मुंहजबानी याद हैं. जावरा के रूपनगर का यह सरकारी स्कूल रतलाम ही नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में मिसाल पेश करता नजर आ रहा है.

Ahmedabad के शैक्षणिक संस्थानों को बम धमकी, सुरक्षा बढ़ाई गई, इलाके में हड़कंप

अहमदाबाद  अहमदाबाद के तीन स्कूलों को एक धमकी भरा ईमेल मिला है, जिसमें परिसर को बम से उड़ाने की बात कही गई है. स्कूल को प्राप्त हुए ईमेल में स्कूल को 1:11 बजे बम से उड़ाने की चेतावनी दी गई है. पुलिस ने मामला गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है और स्कूलों में डॉग स्क्वाड, बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वाड (बॉम्ब स्क्वाड) की टीमों के साथ व्यापक जांच शुरू की गई है. पुलिस-प्रशासन ने बताया कि कुछ स्कूलों ने धमकी भरे ईमेल मिलने की शिकायत मिली है. इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तुरंत एक्शन शुरू कर दिया गया है और सतर्कता बरतते हुए स्कूल प्रशासन ने स्कूलों की छुट्टी कर दी है और बच्चों को सुरक्षित घर भेजना शुरू कर दिया है. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे परिसर की तलाशी ले रही हैं. अभी तक किसी भी स्कूल से कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली है, लेकिन जांच जारी है. अधिकारी ये पता लगाने में जुटे हैं कि ईमेल किसने और कहां से भेजा गया. विशेषज्ञों का मानना है कि ये धमकी होक्स (झूठी) हो सकती है, जैसा कि पिछले कुछ महीनों में दिल्ली-एनसीआर, नोएडा और अहमदाबाद में कई बार हुआ है, लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर कोई रिस्क नहीं लिया जा रहा.  

स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी से अफरा-तफरी, दिल्ली के 9 स्कूल अलर्ट पर

 नई दिल्ली दिल्ली के कई इलाकों में सोमवार सुबह अफरा-तफरी मच गई, जब सुबह करीब 8.30 से 9 बजे के बीच शहर के 9 बड़े स्कूलों को बम की धमकी वाली कॉल मिली. स्कूलों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी. इसके बाद दिल्ली पुलिस, फायर ब्रिगेड और बम स्क्वॉड मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की. सुरक्षा के लिए बच्चों और स्टाफ को बाहर निकालकर स्कूल की पूरी तलाशी ली गई. बताया जा रहा है कि सभी कॉल लगभग एक ही समय पर आईं, इसलिए एजेंसियां सतर्क हैं. फिलहाल पुलिस कॉल करने वाले की पहचान करने की कोशिश कर रही है. जिन 9 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है, उनमें दिल्ली कैंट का लॉरेटो कॉन्वेंट स्कूल, श्रीनिवासपुरी का केम्ब्रिज स्कूल, रोहिणी का वेंकटेश्वर स्कूल, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी का केम्ब्रिज स्कूल, सादिक नगर का इंडियन स्कूल, रोहिणी का CM श्री स्कूल, आईएनए का DTA स्कूल, रोहिणी का बाल भारती स्कूल और न्यू राजेंद्र नगर का वनस्थली स्कूल शामिल हैं. इन सभी स्कूलों में सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है और एहतियाती कदम उठाए गए हैं. ईमेल में क्या लिखा है? धमकी भरे ईमेल में उकसावे और भड़काऊ संदेश लिखे गए हैं, जिसमें “दिल्ली बनेगा खालिस्तान”, “अफजल गुरु की याद में” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया. मेल में यह भी दावा किया गया कि 13 फरवरी को दोपहर 1:11 बजे स्कूल में धमाका होगा और अंत में खुद को “खालिस्तान नेशनल आर्मी” के नाम से जोड़ा गया. हालांकि इस तरह के संदेशों को सुरक्षा एजेंसियां बेहद गंभीरता से लेते हुए जांच करती हैं और आमतौर पर लोगों से अपील की जाती है कि ऐसे दावों पर घबराने के बजाय आधिकारिक जानकारी का इंतजार करें. जनवरी से फरवरी 2026 के बीच दिल्ली-एनसीआर में स्कूलों को बम की धमकियों का सिलसिला लगातार देखा गया है. 7 फरवरी को बड़े पैमाने पर भेजे गए एक ईमेल के बाद 50 से अधिक स्कूलों को खाली कराया गया था, जिसे बाद में गृह मंत्रालय ने फर्जी बताया. इससे पहले 28-29 जनवरी को सरदार पटेल विद्यालय, लॉरेटो कॉन्वेंट और डॉन बॉस्को समेत पांच स्कूलों को धमकियां मिली थीं, लेकिन जांच में कुछ संदिग्ध नहीं मिला और कुछ ही घंटों में परिसर सुरक्षित घोषित कर दिए गए.

शिकायतकर्ता शिक्षक पर गिरी गाज, दो वेतनवृद्धियाँ रोकी

बड़वानी   नरेश रायक मिली जानकारी बताया कि जिस शिक्षक ने खुद को “न्याय का योद्धा” बताकर मोर्चा खोला था, वही अब प्रशासन की फाइलों में आरोपी बनकर दर्ज हो चुका है। शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय क्रमांक-01 बड़वानी में छात्र से मारपीट का आरोप लगाने वाले शिक्षक जगदीश गुजराती अब खुद फर्जी पत्राचार, दबाव बनाने और अधिकारों के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों में घिर चुके हैं। कहते हैं — जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वही पहले उसमें गिरता है। बड़वानी में यह कहावत अब सरकारी कागज़ों में दर्ज हो चुकी है।  शिकायत से शुरू हुआ खेल शिक्षक जगदीश गुजराती ने सहायक आयुक्त जनजातीय विभाग में शिकायत दर्ज कराई कि 18 जुलाई को कक्षा 9वीं ‘सी’ में अतिथि शिक्षक पंकज गुर्जवार ने छात्रों सहित उनकी पुत्री को लकड़ी के डंडे से पीटा, जिससे हाथ में “फ्रैक्चर” हो गया। मामला सुर्खियों में आया, पर जब जांच शुरू हुई तो कहानी की परतें खुद ही उखड़ने लगीं।  जांच में फिसली शिकायत की ज़मीन सहायक आयुक्त द्वारा गठित जांच दल ने विद्यार्थियों, स्टाफ, तत्कालीन प्राचार्य आर.एस. जाधव सहित सभी पक्षों के बयान लिए। प्रतिवेदन दिनांक 06 नवंबर 2025 में साफ लिखा गया — घटना उतनी गंभीर नहीं है जितनी दिखाई गई। रिपोर्ट में दर्ज है कि यदि हाथ में फ्रैक्चर होता तो छात्रा नियमित रूप से विद्यालय नहीं आती, हाथ में प्लास्टर होता और चिकित्सकीय प्रमाण सामने आते। यानि शिकायत की नींव ही कमजोर निकली।  फर्जी आदेश बनवाकर प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। जांच बंद होते ही शिक्षक जगदीश गुजराती पर सबसे बड़ा आरोप लगा — सहायक आयुक्त के नाम से फर्जी पत्र जारी करवा कर जावक तक कराने का। सहायक आयुक्त बड़वानी ने पत्र क्रमांक 11755 दिनांक 10 दिसंबर 2025 में साफ लिखा कि शिकायतकर्ता ने अपने प्रभाव से कूट रचित पत्र क्रमांक 11555 दिनांक 08 दिसंबर 2025 जारी कराया, जिसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया गया। यह सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि सीधा-सीधा प्रशासनिक विश्वासघात है।  निलंबन की तलवार, नोटिस की चोट फर्जीवाड़ा सामने आते ही संभागीय उपायुक्त जनजातीय कार्य विभाग इंदौर ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। पत्र में उल्लेख है कि प्रकरण के आधार पर निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित है और शिक्षक को इंदौर तलब किया गया। अब शिक्षक की कुर्सी डगमगा रही है और फाइलें तेजी से ऊपर बढ़ रही हैं।  पर्दे के पीछे संरक्षण का खेल सूत्र बताते हैं कि जैसे ही कार्रवाई की आहट हुई, कुछ नेता और अफसर शिक्षक के बचाव में मैदान में उतर आए। जिले के एक बीईओ तक इंदौर पहुँच गए। यानी सवाल उठता है — क्या नियम सबके लिए समान हैं या सिफारिश से गुनाह धुल जाते हैं? उत्कृष्ट स्कूल की चमक पर दाग शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय-01 बड़वानी जिले का सबसे प्रतिष्ठित स्कूल है, जहाँ प्रवेश परीक्षा से चयन होता है। यहाँ “क्रीमी लेयर” विद्यार्थी आते हैं, इसलिए परिणाम भी चमकदार रहते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यदि यहाँ के शिक्षक इतने ही काबिल हैं, तो उन्हें सामान्य स्कूलों में भेजकर क्यों नहीं परखा जाता? कागज़ों की तारीफ और ज़मीन की हकीकत में फर्क साफ दिख रहा है।  गिरी सज़ा —  दो वेतनवृद्धियाँ जब्त सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में शिक्षक जगदीश गुजराती की दो वेतनवृद्धियाँ रोकने का आदेश जारी हो चुका है। यह कार्रवाई फर्जी पत्राचार और विभागीय अनुशासनहीनता के आधार पर की गई। यह सिर्फ शुरुआत है या अंतिम फैसला — अब सबकी निगाहें प्रशासन पर हैं।   अब असली सवाल क्या शिक्षक कानून से ऊपर हैं? क्या फर्जी पत्र बनवाना “न्याय” कहलाता है? क्या संरक्षण से सच्चाई दबाई जा सकती है? बड़वानी का यह मामला अब सिर्फ स्कूल का नहीं, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी की खुली परीक्षा बन चुका है।

दिल्ली स्कूल फीस कानून पर स्थिति साफ, 2025-26 से पहले नहीं लागू होगा नियम: सरकार

नई दिल्ली   दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की फीस नियंत्रित करने वाले नए कानून पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन (ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट, 2025 को वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2025-26 में लागू नहीं किया जाएगा। यह कानून अब अगले शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा। शिक्षा निदेशालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने यह जानकारी दी। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कानून को शैक्षणिक सत्र के बीच में जल्दबाजी से लागू करने पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने कहा था कि ऐसा करने से स्कूलों और अभिभावकों को परेशानी हो सकती है और यह व्यावहारिक नहीं होगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने माना कि कानून का उद्देश्य अच्छा है। लेकिन, इसे सही समय पर लागू करना जरूरी है। सरकार के इस फैसले के बाद कोर्ट ने कहा कि अब इस पर दखल देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार ने समझदारी दिखाई है। यह कानून प्राइवेट स्कूलों में फीस की मनमानी बढ़ोतरी रोकने के लिए बनाया गया है। इसके तहत हर स्कूल को फीस तय करने के लिए एक स्कूल लेवल कमेटी बनानी होगी। इस कमेटी में स्कूल प्रबंधन का प्रतिनिधि, प्रधानाचार्य, तीन शिक्षक, पांच अभिभावक और शिक्षा निदेशालय का एक प्रतिनिधि शामिल होगा। कमेटी फीस के प्रस्ताव पर विचार करेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा जिला स्तर पर अपील कमेटी भी होगी। कानून कैपिटेशन फीस वसूलने पर रोक लगाता है और अतिरिक्त शुल्क पर भी नियंत्रण रखता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून की वैधता से जुड़ा मामला दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। अब आगे की सुनवाई और फैसला हाई कोर्ट ही करेगा। प्राइवेट स्कूल एसोसिएशंस ने इस कानून को चुनौती दी है। लेकिन, कोर्ट ने फिलहाल इसे लागू करने के तरीके पर ही ध्यान दिया। अभिभावक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि इससे फीस में अचानक बढ़ोतरी पर लगाम लगेगी। अगले साल से लागू होने पर स्कूलों को भी तैयारी का समय मिलेगा। यह कदम दिल्ली में शिक्षा की पहुंच और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

’डीएमएफ से शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा नया आयाम’

रायपुर : ‘कोरबा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम’ ’108 स्कूलों को मिलेंगे , 17 करोड़ की स्वीकृति से सजेगा बच्चों का भविष्य’ ’डीएमएफ से शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा नया आयाम’ रायपुर समावेशी बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप कोरबा जिले में अब स्कूलों की तस्वीर बदलने जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा जिले के 108 शैक्षणिक संस्थानों के लिए 17 करोड़ 08 लाख 94 हजार रुपए की लागत से नए भवनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। जिला कलेक्टर अजीत वसंत ने डीएमएफ (जिला खनिज न्यास निधि) से प्रथम चरण में सभी विकासखंडों के लिए भवन निर्माण स्वीकृत करते हुए विभिन्न विभागों को क्रियान्वयन एजेंसियां नियुक्त करने और कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने के निर्देश दिए हैं। ’जर्जर भवनों की जगह बनेंगे आधुनिक स्कूल’ इस योजना के तहत पुराने और जीर्ण-शीर्ण भवनों को हटाकर नए और सुरक्षित भवनों का निर्माण किया जाएगा। इससे बच्चों को बेहतर एवं सुरक्षित शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा। इस पहल के अंतर्गत पाली, पोड़ी उपरोड़ा, कटघोरा, करतला, कोरबा और नगरीय क्षेत्र बांकीमोंगरा के प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं में भवन निर्माण कार्य शामिल है। प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय के लिए औसतन 15 लाख से 15.65 लाख रुपए तथा माध्यमिक विद्यालयों के लिए 15.85 लाख से 16.60 लाख रुपए तक की राशि स्वीकृत की गई है। स्वीकृत कार्याे में पाली विकासखंड के ग्राम पंचायत चोढ़ा के अंतर्गत ग्राम भदरापारा छिंदपानी, भादाकछार छिंदपानी, तालाबपारा, छिंदपानी, ग्राम पंचायत पोटापानी अंतर्गत बरहामुड़ा, ग्राम पंचायत भण्डारखोल अंतर्गत जरमौहा, लाफा के गोंदिलहापारा, कोरबी के झालापारा, बड़ेबांका के कटेलपारा में नवीन प्राथमिकशाला भवन निर्माण हेतु 15-15 लाख रूपए की स्वीकृति प्रदान की है। इसी प्रकार ग्राम पंचायत कोरबी में नवीन माध्यमिक शाला भवन निर्माण हेतु 15 लाख 85 हजार, नोनबिर्रा में नवीन माध्यमिक शाला भवन निर्माण हेतु 15 लाख 85 हजार, ग्राम पंचायत पोड़ी में पुराना भवन विनिष्टीकरण सहित नए माध्यमिक शाला भवन निर्माण हेतु 16 लाख 60 हजार की राशि स्वीकृत किए गए है। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के खिरटी पंचायत के रनईपारा, ग्राम पंचायत परला के ललमटटापारा, ग्राम पंचायत सारिसमार के बंशीपेन्द्रो में एवं ग्राम पंचायत सरभोका के आश्रम में नवीन प्राथमिक शाला भवन निर्माण हेतु 15-15 लाख,  ग्राम पंचायत मेरई अंतर्गत मुडमिसिनी, पचरा के नदियापार, मानिकपुर के शाहीपुर, खिरटी के पण्ड्राआमा, कोडगार के महादेवपारा, ग्राम पंचायत पसान के गोलाबहरा, दर्रीपारा, बालमपुर, पोड़ीकला के पोड़ीपारा, बरदापखना,  सैला के पथराडांड, अडसरा के घाघरा, रानीअटारी, जटगा के बरेलियापारा, मेरई के ठाकुरदईयापारा, साखो के बरभांठा, मदनपुर के कोदवारीपारा, कटोरीनगोई के कुकरीकाडर, कोडगार के पहाड़पारा, घुंचापुर के लालपुर, मोरगा के जूनापारा, भुलसीभवना,  गुड़रूमुड़ा के कोड़ा, धजाक के जामबहार, मिसिया के करमीपारा, सिंधिया के कर्रा, ग्राम पंचायत केन्दई के केन्दई व आश्रित ग्राम रामभांठा, टिहलीसराई, पचरा के खुरूभांठा, लेपरा के नानलेपरा, सिर्री के बांधपारा, लैंगी के मोहनपुर में ग्राम पंचायत लाद, ग्राम पंचायत अटारी में पुराना भवन विनिष्टीकरण व नवीन प्राथमिक शाला भवन निर्माण के लिए प्रत्येक संस्थान हेतु 15 लाख 65 हजार, ग्राम पंचायत सुतर्रा व अमलडीहा में नवीन माध्यमिक शाला भवन निर्माण हेतु प्रत्येक संस्थान के लिए 15 लाख 85 हजार, ग्राम पंचायत मानिकपुर, सरभौंका, गिधमुड़ी, कुम्हारीसानी, लेपरा, सारिसमार, नगोईबछेरा, एवं ग्राम पंचायत केन्दई के टिहलीसराई, मोरगा के भुलसीभवना, ग्राम पंचायत कोनकोना के बरौदखार, खोडरी प के खम्हरिया, अमलीकुण्डा के अमलीकुण्डा बसाहट व झुनकीडीह, मातिन के मातीन बसाहट व लोड़ीबहरा में पुराने भवन विनिष्टीकरण व नवीन माध्यमिक शाला भवन निर्माण के लिए प्रत्येक संस्थान हेतु 16 लाख 60 हजार की राशि स्वीकृत की गई है। विकासखंड कटघोरा के ग्राम पंचायत बाता एवं ग्राम पंचायत खैरभौना के पड़निया में नवीन प्राथमिक शाला भवन निर्माण हेतु 15-15 लाख,  ग्राम पंचायत बिरदा एवं छुरीखुर्द में नवीन प्राथमिकशाला भवन निर्माण हेतु प्रत्येक संस्थान के लिए 15 लाख65 हजार, ग्राम पंचायत कनबेरी, अरदा एवं ग्राम पंचायत खैरभौना के पड़निया में नवीन माध्यमिकशाला निर्माण हेतु प्रत्येक संस्थान के लिए 15 लाख 85 हजार एवं ग्राम पंचायत कटसिरा एवं बाता में नवीन माध्यमिकशाला निर्माण हेतु 16 लाख 60 हजार की राशि स्वीकृत की गई है। विकासखंड करतला के ग्राम पंचायत तुमान के भांठापारा, बीरतराई के कचोरा, खरवानी के सरईपाली, सुपातरर्इ्र के तिल्हापतई, चिचोली के ठिठोली, नोनबिर्रा के बनियापारा, दमखांचा के दमखांचा बसाहट व खरहरकूड़ा, ग्राम पंचायत फुलझर, कनकी के बालक आश्रम कनकी, औराई के गनियारी, मुकुन्दपुर के कुरूडीह, रीवापार के दर्राभांठा ग्राम पंचायत रोगदा व पंचपेड़ी में पुराना भवन विनिष्टीकरण सहित नवीन प्राथमिकशाला भवन निर्माण हेतु प्रत्येक संस्थान के लिए 15 लाख 65 हजार की राशि, ग्राम पंचायत सुपातराई, तरदा, खरवानी, कोटमेर, घाठाद्वारी, दमखांचा एवं ग्राम पंचायत जामपानी के छातापाठ में पुराना भवन विनिष्टीकरण सहित नवीन माध्यमिकशाला भवन निर्माण हेतु प्रत्येक संस्थान के लिए 16 लाख 60 हजार राशि की स्वीकृति प्रदान की गई है। विकासखंड कोरबा के ग्राम पंचायत तौलीपाली, ग्राम पंचायत बासीन के रनगढ़हा, जामबहार के रोगबहरी, बेला के टापरा, ग्राम पंचायत चाकामार व आश्रित ग्राम हाथीमुड़ा में नवीन प्राथमिकशाला भवन निर्माण हेतु 15-15 लाख की स्वीकृति प्रदान की गई है। ग्राम पंचायत चाकामार व तिलईडाड़ में पुराना भवन विनिष्टीकरण सहित नवीन माध्यमिकशाला भवन निर्माण हेतु प्रत्येक संस्थान के लिए 16 लाख 60 हजार की राशि स्वीकृत की गई है। नगरीय क्षेत्र बांकीमोंगरा अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बांकी साईड में 02 कक्ष का नया भवन सहशौचालय निर्माण हेतु 18 लाख 32 हजार एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मांगरा में 02 कक्ष का नया भवन सह शौचालय निर्माण हेतु 18 लाख 32 हजार राशिकी स्वीकृति प्रदान की गई है। इन भवनों की स्वीकृति उन क्षेत्रों में दी गई है जहाँ लंबे समय से स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीण व पालक पुराने व जर्जर विद्यालय भवनों को हटाकर नए भवनों की मांग कर रहे थे। जिला प्रशासन ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

शिक्षकों की पदस्थापना से शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय रहे स्कूलों में भी दिखी रौनक

रायपुर : जून से खुले स्कूलों के पट, पहले दिन पहुंचे बच्चों का हुआ स्वागत युक्तियुक्तकरण के पश्चात नव पदस्थ शिक्षकों का भी तिलक लगाकर स्कूलों में किया गया स्वागत शिक्षकों की पदस्थापना से शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय रहे स्कूलों में भी दिखी रौनक पहले दिन पहुंचे बच्चों को मिला जाति-आय-निवास प्रमाण पत्र का उपहार रायपुर 16 जून से फिर स्कूल खुल गए हैं। नए सत्र से साथ कक्षाएं फिर से गुलजार हो गई हैं। विद्यार्थियों में नई क्लास में पहुंचने का उत्साह है। पहले दिन शाला पहुंचे बच्चों का तिलक लगा और मुंह मीठा कर स्वागत किया गया। इन सबके बीच जो खास नजारा इस बार देखने को मिलेगा वो है कि कई ऐसे स्कूल जो शिक्षकों की कमी से जूझ रहे थे उनमें अब फिर से रौनक है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अतिशेष शिक्षकों की काउंसिलिंग से जिले के शिक्षकविहीन और एकल शिक्षकीय शालाओं में पदस्थापना कर दी गई है। कई ऐसे स्कूल जहां पहले एक भी शिक्षक नहीं थे वहां अब छात्रों के दर्जमान से 3 से 4 शिक्षकों की पदस्थापना हो चुकी है। यह शैक्षणिक वातावरण को बेहतर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पालकों में भी इस बात को लेकर खुशी है कि उनके बच्चों को अब विषयवार शिक्षक मिल गयें हैं, वे स्कूलों में सारे विषयों की पढ़ाई कर सकेंगे।         शाला प्रवेशोत्सव के अवसर पर जिले के स्कूलों में न्योता भोज का आयोजन किया गया। साथ ही निःशुल्क पाठ्य-पुस्तक एवं गणवेश प्रदान किया गया। इसी तरह जिले के कई स्कूलों में स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा एक पेड़ मां के नाम 2.0 अंतर्गत पौधा रोपण कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। युक्तियुक्तकरण के पश्चात नव पदस्थ शिक्षकों का भी तिलक लगाकर स्कूलों में स्वागत किया गया। युक्तियुक्तकरण के पश्चात विकासखण्ड पुसौर के शासकीय प्राथमिक विद्यालय-सेमरा में शिक्षिका की पदस्थापना हुई है। जिससे वहां के विद्यार्थियों में खुशी का माहौल है। शाला प्रवेशोत्सव के दौरान नई शिक्षिका का सम्मान तिलक लगाकर किया गया। इसी तरह विकासखण्ड रायगढ़ के प्राथमिक शाला साल्हेओना में भी बच्चों ने गुलदस्ता भेंटकर शिक्षिका का सम्मान किया। युक्तियुक्तकरण पश्चात धरमजयगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत प्राथमिक शाला कुम्हीचुंआ जो कभी शिक्षक विहीन था, आज इसमें 4 शिक्षकों की पदस्थापना हुई है। ऐसे में यहां खुशी का माहौल है एवं सभी बच्चे उत्साहित है। पहले दिन पहुंचे बच्चों को मिला जाति-आय-निवास प्रमाण पत्र का उपहार पहले दिन पहुंचे नव प्रवेशी बच्चों को शाला पहुंचने पर न सिर्फ  तिलक और मिठाई से स्वागत किया गया, बल्कि उन्हें उनके जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनाकर दिए गए। जिले के सभी तहसीलों में राजस्व अधिकारियों ने स्कूलों में पहुंचकर बच्चों को ये प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने सभी राजस्व और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दे रखा है कि आगामी 16 जुलाई अर्थात शाला खुलने से 1 माह के अंदर सभी नव प्रवेशित स्कूली बच्चे जिनके जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र नहीं है उन्हें यह बनाकर दिए जाएं। इसके लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से काम करते हुए जल्द सारी प्रक्रियाएं पूरी करने के लिए विशेष रूप से निर्देशित किए गया है।

CG में स्कूलों की कक्षाएं सुबह 7:00 बजे से 11:00 बजे तक संचालित होंगी, आदेश जारी

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य में पड़ रही भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव किया है। शिक्षा सत्र 2025-26 की शुरुआत 16 जून से हो चुकी है, लेकिन तापमान में बढ़ोतरी के चलते छात्रों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 17 जून से 21 जून 2025 तक प्रदेश की सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त, गैर अनुदान प्राप्त और अशासकीय स्कूलों की कक्षाएं सुबह 7:00 बजे से 11:00 बजे तक संचालित होंगी। इसके बाद 23 जून 2025 से विद्यालयों में सामान्य समयानुसार कक्षाएं संचालित की जाएंगी। अभिभावकों से की गई अपील यह आदेश राज्यपाल के नाम से अतिरिक्त सचिव आर. पी. वर्मा द्वारा जारी किया गया है और सभी जिला कलेक्टर, संभागीय संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण और अन्य संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी भेजी गई है। छात्रों और अभिभावकों से अपील की गई है कि वे निर्देशों का पालन करते हुए समय पर विद्यालय पहुंचे और गर्मी से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतें। 447 सरकारी स्कूलों को मिले शिक्षक सरकार ने कुछ दिन पहले ही राज्य के कुल 453 शिक्षक विहीन स्कूलों में से 447 स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती कर दी है। शिक्षक विहीन स्कूलों में शिक्षकों की पदस्थापना से एक नई उम्मीद जगी है। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत शिक्षक विहीन 357 प्राथमिक स्कूल और 30 माध्यमिक स्कूल में नियमित शिक्षकों की पदस्थापना कर दी गई। सुकमा जिले के चार और बीजापुर जिले के दो हाई स्कूलों को छोड़ भी दें, तो राज्य में प्राथमिक स्कूल से लेकर हायर सेकेंडरी स्कूल तक अब शिक्षक विहीन नहीं हैं।  

बस अनफिट मिली तो स्कूल की मान्यता होगी समाप्त, इस तारीख तक हर हाल में कराना फिटनेस टेस्ट

नोएडा  बच्चों को लाने-ले जाने वाली बस अगर अनफिट मिली तो स्कूल की मान्यता रद्द होगी। शासन स्तर से यह निर्देश मिलने के बाद परिवहन विभाग ने स्कूलों को फोन कर बसों की फिटनेस कराने के लिए सचेत करना शुरू कर दिया है। फिलहाल जिले में करीब 30 ऐसी स्कूल बसें हैं, जो फिट नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्कूल संचालकों के पास 20 जून तक का समय है। इसके बाद जिस स्कूल की बस अनफिट मिली, उसकी मान्यता रद्द करने के लिए डीआईओएस को पत्र लिखा जाएगा। एआरटीओ डॉ. सियाराम वर्मा ने बताया कि नौनिहालों की जिंदगी से खिलवाड़ करना अपराध है। किसी भी हालत में इसे स्वीकार नहीं जाएगा। इसके लिए शासन स्तर से भी सख्त आदेश मिले हैं। बड़े स्तर पर विभाग की टीमें अभियान चलाकर बसों को फिट कराने में जुटी हैं। बड़े स्तर पर विभाग की टीमें अभियान चलाकर बसों को फिट करने में लगी हैं। सभी स्कूलों को फोन के माध्यम सचेत कर चेतावनी दी जा रही है। लेकिन इसके बाद भी कई स्कूल के संचालक बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में इनपर कार्रवाई की जाएगी। अहम है कि जिले में 1900 से अधिक स्कूली बसें संचालित हो रही हैं। इसके अलावा कुछ अनुबंधित बसें भी हैं ऐसे में इन सभी बसों की फिटनेस पूरी करने के लिए यह अभियान शुरू किया गया था। इसके अलावा जो भी बसें मॉडल कंडीशन में आ गई हैं। उनका भी पंजीयन निरस्त करने की कवायद की जा रही है। सभी स्कूलों को फोन के माध्यम सचेत कर चेतावनी दी जा रही है, लेकिन कई स्कूल के संचालक लापरवाही बरतने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में इनपर कार्रवाई की जाएगी। जनपद में 1900 से अधिक स्कूली बसें संचालित होती हैं। इसके अलावा कुछ अनुबंधित बसें भी हैं, जिनकी समय से पहले फिटनेस करना शुरू कर दिया है। अभियान के तहत एक जुलाई के बाद डीआइओएस और बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर स्कूल की मान्यता रद करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। स्कूलों को फोन कर चेतावनी दी जा रही है, लेकिन इसके बाद भी कई स्कूल संचालक बाज नहीं आ रहे हैं। अब इन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिले में 1900 से अधिक स्कूल बसें और वैन संचालित हो रही हैं। कुछ अनुबंधित बसें भी हैं। इनकी फिटनेस पूरी कराने के लिए अभियान शुरू किया गया था।

उत्तर प्रदेश में स्कूलों में इतने दिन बढ़ाई गई छुट्टी, भीषण गर्मी के कारण लिया गया फैसला; पढ़ें आदेश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और लू को देखते हुए परिषदीय स्कूलों की छुट्टी बढ़ा दी गई है। अब छात्र-छात्राओं के लिए स्कूल 30 जून तक बंद रहेंगे। पहले 20 मई से 15 जून तक स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई थी। 16 जून से बच्चों को स्कूल जाना था। हालांकि शिक्षकों को 16 जून से स्कूल जाना होगा।   उप्र बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी ने इसके लिए आदेश पत्र जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा कि वर्तमान में अत्यधिक गर्मी एवं हीटवेव को देखते हुए स्कूलों में 30 जून तक पठन-पाठन के लिए छात्र-छात्राएं नहीं आएंगे। एक जुलाई से स्कूल अपने निर्धारित समय पर नियमित खुलेंगे। जबकि, 16 जून से स्कूल खुल जाएंगे।   इस दौरान स्कूल में शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालय जाएंगे। वह शैक्षणिक, प्रशासकीय एवं अन्य कार्यों को पूर्ण करेंगे। हालांकि मान्यता प्राप्त विद्यालयों में विद्यालय प्रबंध समिति अपना निर्णय लेने के लिए अधिकृत है। वह अपने हिसाब से निर्णय ले सकते हैं।  कई जिलों में 40 पार हो चुका है पारा आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में गर्मी का प्रकोप जारी है। कई जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया है। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा हो सकता है। छुट्टियां बढ़ाने से बच्चों को गर्मी से राहत मिलेगी। शिक्षकों को 16 जून से स्कूल जाना होगा। वे स्कूल में शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों को पूरा करेंगे। शिक्षकों को स्कूल में उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी। उन्हें छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं भी आयोजित करनी पड़ सकती हैं। मान्यता प्राप्त विद्यालयों को अपने हिसाब से निर्णय लेने का अधिकार है। वे चाहें तो अपने स्कूलों को 30 जून तक बंद रख सकते हैं या फिर पहले भी खोल सकते हैं।  

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