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रायपुर : युक्तियुक्तकरण का असर: कोंडागांव जिले में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं

रायपुर : युक्तियुक्तकरण से मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था को मिली नई मजबूती शिक्षक विहीन विद्यालयों की स्थिति में आया ऐतिहासिक सुधार सूरजपुर जिले की शालाएं बनीं शिक्षक युक्त, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर ऐतिहासिक पहल रायपुर : युक्तियुक्तकरण का असर: कोंडागांव जिले में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं 10 पूर्णतः शिक्षकविहीन विद्यालयों को भी मिले शिक्षक रायपुर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित युक्तियुक्तकरण अभियान के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय विद्यालयों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यह सुधार शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है। शासन के निर्देश पर जिले में संचालित विद्यालयों की व्यापक समीक्षा की गई, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि युक्तियुक्तकरण से पूर्व जिले में 3 प्राथमिक शालाएं और 1 हाई स्कूल पूरी तरह से शिक्षक विहीन थे। इन सभी शालाओं में त्वरित कार्रवाई करते हुए शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। अब जिले का कोई भी प्राथमिक विद्यालय या हाई स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है, जो प्रशासन की सक्रियता और शिक्षा विभाग की तत्परता को दर्शाता है। हालांकि, जिले में अभी भी 2 प्राथमिक शालाएं एकल शिक्षक प्रणाली पर आधारित हैं। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन शालाओं को भी शीघ्र ही बहु-शिक्षक विद्यालयों में परिवर्तित करने की दिशा में आवश्यक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। मनेंद्रगढ़, चिरमिरी और भरतपुर विकासखंडों के ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों में स्थित कई विद्यालयों में पूर्व में शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण पठन-पाठन प्रभावित हो रहा था। अब युक्तियुक्तकरण के पश्चात इन शालाओं में नियमित कक्षाएं संचालित हो रही हैं और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि “राज्य शासन द्वारा लागू की गई युक्तियुक्तकरण नीति से शिक्षकों की तैनाती में असंतुलन को दूर किया गया है। अब हमारा प्रयास शेष एकल शिक्षकीय विद्यालयों को भी बहु-शिक्षकीय स्वरूप प्रदान करने का है, जिससे शिक्षकों का कार्यभार संतुलित हो और छात्रों को बेहतर शिक्षण वातावरण मिले।” विभाग ने बताया कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में जिले के सभी विकासखंडों से प्राप्त आंकड़ों का सूक्ष्म विश्लेषण कर प्राथमिकता के आधार पर शिक्षकों की नवीन पदस्थापना की गई है। साथ ही, जहां आवश्यकता है, वहां त्वरित समाधान की दिशा में निरंतर कार्य जारी है।  सूरजपुर जिले की शालाएं बनीं शिक्षक युक्त, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर ऐतिहासिक पहल सूरजपुर जिले में बच्चों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण की गई है। इस पहल के तहत अब जिले की लगभग सभी शालाएं शिक्षक युक्त हो चुकी हैं, जिससे जिले की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और सकारात्मक सुधार देखने को मिल रहा है। पूर्व में जिले की 18 प्राथमिक शालाएं पूरी तरह से शिक्षकविहीन थीं, लेकिन अब ये सभी शालाएं शिक्षकयुक्त हो गई हैं। इसी तरह, पहले 281 प्राथमिक शालाएं एकल शिक्षक प्रणाली पर आधारित थीं, जिनकी संख्या अब घटकर केवल 47 रह गई है। इसके अतिरिक्त, दो हाई स्कूल भी शिक्षकविहीन थे, जिन्हें अब योग्य शिक्षकों से सुसज्जित कर दिया गया है। जिले के सभी पूर्व माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में भी शिक्षकों की पूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है। शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, 1 से 3 जून 2025 तक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, विश्रामपुर में ओपन काउंसलिंग का आयोजन किया गया। इस प्रक्रिया में वरीयता क्रम के आधार पर सैकड़ों अतिशेष शिक्षकों की नवीन पदस्थापना की गई। इससे न केवल शिक्षकविहीन शालाओं की समस्या का समाधान हुआ, बल्कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों की शालाओं में भी शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। शिक्षकों के इस युक्तियुक्तकरण से जिले में शिक्षा के परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। शासन और जिला प्रशासन की यह पहल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध हो रही है। युक्तियुक्तकरण का असर: कोंडागांव जिले में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं 10 पूर्णतः शिक्षकविहीन विद्यालयों को भी मिले शिक्षक 244 एकल शिक्षकीय प्राथमिक शालाओं सहित हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में भी हुई शिक्षक नियुक्ति, शिक्षा की गुणवत्ता में आएगा सुधार छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए लागू की गई “युक्तियुक्तकरण” नीति के सकारात्मक नतीजे अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखने लगे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर संचालित इस प्रक्रिया के तहत कोंडागांव जिले के सभी शिक्षकविहीन और एकल शिक्षकीय विद्यालयों को आवश्यकतानुसार शिक्षक मिल चुके हैं। इससे जिले में शिक्षा का नया उजाला फैला है और विद्यार्थियों का भविष्य अब अधिक सुरक्षित हुआ है। इस पहल के तहत जिले के 10 पूरी तरह शिक्षकविहीन प्राथमिक विद्यालयों को शिक्षक उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही 244 एकल शिक्षकीय प्राथमिक शालाएं, दो पूर्व माध्यमिक विद्यालय, दो हाई स्कूल और एक हायर सेकेंडरी स्कूल में भी शिक्षकों की पदस्थापना कर दी गई है। अब जिले में एक भी विद्यालय ऐसा नहीं बचा है जहां शिक्षक न हो। इन विद्यालयों को मिला सबसे अधिक लाभ माकड़ी विकासखण्ड के प्राथमिक शाला करमरी, डोंगरीपारा क्षमतापुर और नेवरा, बड़ेराजपुर विकासखण्ड के रावसवाही, कोण्डागांव विकासखण्ड के कोरमेल, बाखरा, ज्ञान ज्योति नयापारा छोटेबंजोड़ा, एहरा और खुटडोबरा जैसे प्राथमिक विद्यालय वर्षों से शिक्षकविहीन थे। इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति से अब बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से शुरू हो सकेगी। एकल शिक्षकीय विद्यालयों में भी सुधार फरसगांव विकासखण्ड के उच्च प्राथमिक शाला भैंसाबोड़, माध्यमिक शाला बाजारपारा फरसगांव, कोण्डागांव विकासखण्ड के हाई स्कूल डोंगरीगुड़ा और हाई स्कूल नवागांव, माकड़ी विकासखण्ड के हाई स्कूल एरला जैसे अनेक स्कूलों में भी अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। कुल मिलाकर 244 एकल शिक्षकीय प्राथमिक शालाओं में भी अब संतुलित शिक्षक संख्या उपलब्ध हो चुकी है। शिक्षा व्यवस्था को मिली नई दिशा युक्तियुक्तकरण के इस व्यापक और सुनियोजित प्रयास से जिले की शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिली है। शिक्षकों की उपलब्धता से जहां बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता आएगी, वहीं शैक्षणिक गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

प्रदेश के मॉडल स्कूल में 50 हजार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाई जा रही

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग वर्तमान में 145 शासकीय मॉडल स्कूल का संचालन कर रहा है। इनमें से 143 मॉडल स्कूल के स्वयं के भवन निर्मित हो चुके हैं। इन मॉडल स्कूल में करीब 50 हजार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाई जा रही है। मॉडल स्कूल शैक्षणिक रूप से प्रदेश के पिछड़े विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों में शिक्षा से जुड़ी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जिला मुख्यालय पर शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय स्कूल शिक्षा विभाग माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के 43 जिला मुख्यालय एवं 96 विकासखंड मुख्यालय पर उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इन विद्यालयों में बच्चों के कॅरियर काउंसलिंग की भी व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था से बच्चों को भविष्य में किस क्षेत्र में अध्ययन करना है, उसकी समझाइश विशेषज्ञों के माध्यम से मिलती है।  

ऑस्ट्रिया के बड़े स्कूल में फायरिंग में छात्र-शिक्षक समेत 10 की मौत

 ग्राज ऑस्ट्रिया के ग्राज शहर में एक छात्र ने बंदूक से 11  छात्रों को भून दिया. गोलीबारी की घटना को उसने स्कूल के क्लासरूम में अंजाम दिया है. छात्रों को मारने के बाद उसने खुद को गोली मार ली. घटना के बाद पूरे इलाके को पुलिस ने घेर लिया. जांच एजेंसी इस बात की तस्दीक कर रही है कि आखिर युवक ने गोली क्यों चलाई? समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक गोलीबार की घटना ग्राज शहर के उत्तर-पश्चिम में ड्रेयर्सचुट्जेगैस पर स्थित एक संघीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में हुई है, जो शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर स्थित है. ऑस्ट्रिया इटली के पड़ोस में स्थित है. यह यूरोप का एक देश है. गोली चलाई फिर खुद को मार ली गोली स्थानीय मीडिया के मुताबिक हमलावर युवक है और 18 साल से कम उम्र का है. पहले हमलावर बंदूक लेकर स्कूल में गया और फिर उसने अंधाधुंध फायरिंग की. जब फायरिंग खत्म होने लगी तो उसने आखिरी गोली खुद को मार ली. हमलावर की मौत भी मौके पर हो गई है. ग्राज शहर के मेयर के मुताबिक इस हमले में 11  बच्चों की जान चली गई है. घायलों को इलाज के लिए पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है. ग्राज ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना के बाद दूसरा सबसे प्रमुख शहर है. ग्राज के अधिकारियों का कहना है कि इलाके को सील कर लिया गया है और जांच के बाद ही यह खुलासा हो पाएगा कि आखिर हमले के पीछे कौन था? ऑस्ट्रिया की वजह से हुआ था प्रथम विश्व युद्ध ऑस्ट्रिया मध्य यूरोप का एक देश है, जिस पर कभी रोमन सम्राज्य का कब्जा था. 1914 में ऑस्ट्रिया और सर्बिया की लड़ाई की वजह से प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ था. इस जंग में ऑस्ट्रिया जर्मनी के साथ था. हालांकि, उसे हार का सामना करना पड़ा. ऑस्ट्रिया जर्मनी, इटली और स्विटजरलैंड का पड़ोसी देश है.  

रीवा में स्कूल को बना डाला ‘ गोदाम’, वीडियो हुआ वायरल तो डीएम ने प्राचार्य को किया निलंबित

रीवा मध्य प्रदेश के रीवा में स्कूल प्रबंधक की लापरवाही का मामला सामने आया है. जहां एक शासकीय स्कूल को प्याज के गोदाम के रूप में तब्दील कर दिया गया. कमरों के अंदर प्याज से भरी हुई बोरियां रखी गई हैं. स्कूल के अंदर प्याज के भण्डारण का वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन सकते में आ गया. कलेक्टर ने मामले में संज्ञान लेते हुए तत्काल प्रभाव से स्कूल के हेडमास्टर को निलंबित कर दिया है. इसके अलावा उन्होंने जिले के अन्य स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किया है. स्कूल के हेडमास्टर ने किया कारनामा मामला गोविंदगढ़ क्षेत्र स्थित ओढ़की खुर्द शासकीय प्राथमिक पाठशाला का है. छुट्टियों के चलते स्कूल पूरी तरह से खाली है. ग्रीष्मकालीन अवकाश खत्म होने के बाद 15 जून से स्कूल फिर से खुलेंगे. मगर यहां पर पदस्थ हेडमास्टर नरेन्द्र पाण्डेय ने एक गजब का कारनामा कर दिया. हेडमास्टर ने शासकीय स्कूल को पूरी तरह से प्याज के गोदाम में तब्दील कर दिया. इस बात की भनक ग्रामीण और बच्चों के अभिभावकों को लगी तो वो आक्रोशित हो गए. उन्होंने कलेक्टर को शिकायती पत्र लिखकर स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. स्कूल के प्रिंसिपल को किया गया सस्पेंड किसी ने स्कूल का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया में वायरल कर दिया. वीडियो कलेक्टर प्रतिभा पाल के संज्ञान में आया तो वो भी हेडमास्टर की इस करतूत को देखकर हैरान हो गईं. इसके अलावा उन्हें मामले की शिकायत भी मिली थी. उन्होंने तत्काल इस पर संज्ञान लेते हुए शासकीय स्कूल को निजी उपयोग करने पर स्कूल के हेडमास्टर नरेंद्र पांडेय को दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. बताया जा रहा है कि हेडमास्टर द्वारा पिछले कई दिनों से स्कूल में प्याज के भंडारण किया गया था. कलेक्टर ने जिले के अन्य स्कूलों को दिया निर्देश मामले को लेकर कलेक्टर प्रतिभा पाल का कहना है कि “उन्हें शिकायत मिली थी कि रीवा ब्लाक स्थित ओढ़की खुर्द प्राथमिक पाठशाला में किसी ने प्याज की बोरियों का भंडारण किया है. प्राथमिक जांच में ये शिकायत सही पाई गई. हेडमास्टर नरेन्द्र पाण्डेय की जवाबदेही थी की विद्यालय की कक्षाओं का उपयोग केवल पठन-पाठन के लिए हो. ऐसा न पाए जाने पर हेडमास्टर को निलंबित कर दिया गया. साथ ही अन्य स्कूलों के प्रिंसिपल को भी निर्देश दिए गए हैं कि स्कूल कैंपस केवल शैक्षणिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो. अगर कैंपस में कोई दूसरी गतिविधि होते हुए पाई जाएगी तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी.”

गुना जिले में 1855 सरकारी स्कूल, इनमें से सिर्फ 241 स्कूलों ने ही शिक्षकों की तस्वीर जानकारी के साथ प्रदर्शित की

गुना फर्जी शिक्षकों की स्कूलों में एंट्री रोकने के लिए शासन के 13 माह पुराने आदेश की जिले में धज्जियां उड़ाई जा रही है। प्रत्येक स्कूल के बाहर वहां पदस्थ नियमित शिक्षकों की तस्वीर प्रदर्शित करने के निर्देश शासन ने दिए थे। लेकिन जिले के 1613 स्कूलों में इस आदेश का पालन नहीं हुआ। आखिर यहां के शिक्षकों को अपना चेहरा दिखाने में किस बात का संकोच है? दरअसल, कई स्थानों पर वहां पदस्थ शिक्षकों की बजाय उनके रिश्तेदार या अन्य व्यक्तियों को ठेके पर रख लेने की शिकायत मिलने के बाद सरकारी स्तर पर यह आदेश जारी हुआ था कि सभी स्कूलों में वहां पदस्थ शिक्षकों के फोटो लगाए जाएं। गुना जिले में 1855 सरकारी स्कूल हैं। इनमें से सिर्फ 241 स्कूलों ने ही शिक्षकों की तस्वीर जानकारी के साथ प्रदर्शित की है। इसमें भी ज्यादातर हाईस्कूल और हायर सेकंडरी शामिल हैं। वहीं 1613 स्कूलों ने तो शिक्षकों की तस्वीर स्कूल में लगाई ही नहीं। 3000 से 5000 रुपए में भाड़े पर रखे शिक्षक सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षक मोटा वेतन लेते हैं, लेकिन कई शिक्षक अपनी जगह किसी दूसरे पढ़े-लिखे व्यक्ति को 3000 से 5000 रुपए तक में किराए पर बच्चों को पढ़ाने के लिए रख लेते हैं। पूर्व में ऐसे शिक्षकों को सिर्फ नोटिस देकर शिक्षा अधिकारियों ने मामले को रफादफा कर दिया गया था। वर्तमान में एक सहायक शिक्षक का वेतन भी कम से कम 75 हजार रुपए है। कई शिक्षक ऐसे हैं, जिनके दूसरे कारोबार भी चलते हैं। या अपने रुतबे के कारण वे अपनी जगह किसी अन्य को स्कूल में पढ़ाने भेज देते हैं। नियमित शिक्षकों की जगह भाड़े के शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे थे शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल प्रदेश के कई जिलों के स्कूलों की जांच कराई गई थी तब नियमित शिक्षकों की जगह एवज या भाड़े के शिक्षक पढ़ाते हुए मिले थे। गुना में भी कुछ स्कूलों में फर्जी शिक्षक मिले थे। इस खुलासे के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी स्कूलों को आदेश दिए थे कि स्कूलों में पदस्थ प्रत्येक शिक्षकों का नाम, मोबाइल नंबर और विषयवार जानकारी के साथ उनका फोटो प्रदर्शित किया जाए। ताकि छात्र-छात्रा और उनके अभिभावक शिक्षकों के बारे में जानकारी हो। अगर उनकी जगह कोई दूसरा शिक्षक स्कूल में पढ़ाने आए तो पहचान हो सके। भाड़े के शिक्षकों को सबक सिखाने और उनकी पहचान को लेकर यह व्यवस्था लागू की गई है। लेकिन जिले में अभी तक यह फर्जीवाड़ा नहीं रुक पाए। लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश को जारी हुए 13 माह बीत चुके हैं। लेकिन जिले में 87 फीसदी सरकारी स्कूलों ने इसका पालन नहीं किया। शिक्षा विभाग के अफसर अक्सर स्कूलों का निरीक्षण करते हैं, लेकिन इस तरफ उन्होंने भी ध्यान नहीं दिया। जिला शिक्षा अधिकारी अब इस बारे में कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं। नियमों का पालन करवाएंगे डीईओ चंद्रशेखर सिसौदिया ने बताया स्कूलों में पदस्थ शिक्षक की तस्वीर, उनकी योग्यता एवं विषयवार जानकारी नोटिस बोर्ड या फिर स्कूल के बाहर प्रदर्शित करनी है। पूर्व में लोकशिक्षण संचालनालय ने आदेश जारी किए थे। ज्यादातर स्कूलों ने जानकारी प्रदर्शित नहीं की है। आपके द्वारा जानकारी संज्ञान में लाई गई है, हम इसका पालन कराएंगे।  

जम्मू के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी स्कूल 19 मई से फिर से खुलेंगे

जम्मू  जम्मू-कश्मीर में स्कूल शिक्षा निदेशालय जम्मू ने घोषणा की है कि जम्मू संभाग के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी स्कूल 19 मई से फिर से खुलेंगे. सीमापार से गोलीबारी के खतरे को देखते हुए ऐहतियात के तौर पर इन स्कूलों को बंद कर दिया गया. क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारियों को भेजे गए नोटिस में विभाग ने सुरक्षा दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया है. स्कूल प्रमुखों को सुरक्षित और सुचारू रूप से फिर से स्कूल खोलने के लिए स्थानीय अधिकारियों और पुलिस के साथ मिलकर काम करने के लिए कहा गया है. निदेशालय ने स्कूलों से सकारात्मक शिक्षण वातावरण बनाए रखने और छात्रों और कर्मचारियों के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा उपायों का पालन करने में सतर्क रहने का भी आग्रह किया. जम्मू क्षेत्र के सीमावर्ती इलाकों में पड़ने वाले सभी स्कूल 7 मई से बंद हैं. इस संबंध में निदेशक स्कूल शिक्षा जम्मू (डीएसईजे) द्वारा एक आदेश जारी किया गया. संयुक्त निदेशक सुबाह मेहता द्वारा जारी आदेश में कहा गया, ‘डीएसईजे के 14 मई के आदेश के क्रम में सभी स्कूल (सरकारी और निजी) 19 मई से फिर से खुलेंगे. ये अभी बंद हैं. आदेश में आगे कहा गया, ‘संस्थानों के प्रमुखों को निर्देश दिया जाता है कि वे शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारू और व्यवस्थित तरीके से फिर से शुरू करना सुनिश्चित करें. साथ ही स्थानीय प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ नियमित समन्वय बनाए रखें. पाकिस्तान की ओर से भारी गोलाबारी के बाद सीमावर्ती इलाकों में सभी स्कूल बंद हैं. गोलीबारी के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भागना पड़ा. कई स्कूलों को गंभीर या आंशिक रूप से नुकसान भी पहुंचा. इससे पहले 13 मई को रामबन, डोडा, किश्तवाड़, रियासी और उधमपुर जिलों में स्कूल खुले थे. इसके बाद जम्मू, सांबा, कठुआ, राजौरी और पुंछ जिलों के सुरक्षित क्षेत्रों में स्कूल खुले थे. अब शेष स्कूल 19 मई को पुनः खुलेंगे.

साउथ कोरिया के सरकारी स्कूलों की तर्ज पर बनेंगे मॉडल स्कूल, रचनात्मक शिक्षा पर होगा फोकस

भोपाल देश के स्कूलों में कोरिया (Korean Education) की तर्ज पर मेकाट्रॉनिक्स शिक्षा (Mechatronics education) दी जाएगी। किताबी पढ़ाई के साथ प्रैक्टिकल नॉलेज पर ज्यादा जोर होगा। यहां उन्हें बताया जाएगा कि इंडस्ट्रीज में किस तरह के नॉलेज की जरूरत होगी। इसके लिए राजधानी में लैब तैयार होगी। इसे स्थापित करने के लिए एनसीईआरटी और कोरिया की एजेंसी के बीच समझौता हुआ है। नई शिक्षा नीति के तहत इस पर काम शुरू किया जा रहा है। नीति में वोकेशनल एजुकेशन को बढ़ावा देने की बात कही गई है। किताबी शिक्षा के साथ ही स्कूली बच्चों को कोई हुनर सिखाया जाना है। वह हुनर कौन सा हो इसके लिए उद्योग और परिवेश को देखते हुए निर्णय होगा। दो करोड़ की लागत से लैब मेकाट्रॉनिक्स शिक्षा के लिए राजधानी में दो करोड़ रुपए की लागत से लैब (Korean Lab) तैयार की जाना है। यह लैब कोरिया की एजेंसी बनाएगी। मेकाट्रॉनिक्स शिक्षा यानि कई हुनर का समावेश करने वाली शिक्षा है। इसमें इंडस्ट्रीज से जुड़ी बातें भी शामिल होती हैं। कक्षा 9वीं से 12वीं के लिए होगी लागू अगले साल से यह शुरू होगी। अभी डेमोस्ट्रेशन बेस पर आयोजन होगा। यह कक्षा नौंवी से बारहवीं के स्टूडेंट के लिए हैं। अधिकारियों केे मुताबिक प्रयोग सफल रहा तो देशभर के स्कूलों में शुरुआत होगी। बच्चों हुनरमंद बनाने शुरू होगी लैब वोकेशनल एजुकेशन के तहत बच्चों हुनरमंद बनाने लैब शुरू होगी। करीब दो करोड़ की लागत से कोरिया की एजेंसी इसे स्थापित करेंगी। मुय उद्देश्य बच्चों को ऐसे हुनर सिखाना जो उन्हें रोजगार दे सकेंगे। प्रो. विनय स्वरूप मेहरोत्रा, कार्यक्रम समन्वय, केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान

नई शिक्षा नीति के तहत अब सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी

भोपाल नई शिक्षा नीति के तहत अब निजी स्कूलों को टक्कर देने के लिए सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी हो चुकी है। आगामी 16 जून से नए शिक्षा सत्र में जिले के 226 स्कूलों में नर्सरी की कक्षाएं शुरू होंगी, जिसके चलते सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चों को नर्सरी से शिक्षा उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए तीन वर्ष की उम्र वाले विद्यार्थियों को संस्था में प्रवेश दिया जायेगा। यह सभी स्कूल सांदिपनी विद्यालय से अलग होंगे। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्कूलों में यह सभी व्यवस्था लागू होंगी। जिला परियोजना समन्वयक रमेश राम उईके ने बताया कि जिले के 226 सरकारी स्कूलों में नए शिक्षा सत्र 16 जून से नर्सरी की कक्षाएं शुरू होंगी। इन कक्षाओं को नियमित किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में पीपी-2 और पीपी-3 की कक्षाएं होंगी, जो केजी-1 अन्य कक्षाओं को नियमित किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में पीपी-2 और पीपी-3 की कक्षाएं होंगी, जो केजी-1 और केजी-2 के समकक्ष हैं। नर्सरी के विद्यार्थियों को शिक्षा देने के लिए डाइट के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जायेगा, जिससे कि शिक्षक विद्यार्थियों को शुरुआती दौर में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का ज्ञान दे सकें। इसके अतिरिक्त शिक्षक बच्चों को नाच-गाकर भी पढ़ाएंगे, जिससे कि विद्यार्थियों को आसानी से अक्षर का ज्ञान हो सकेगा। नर्सरी में प्रवेश के लिए तीन साल की उम्र निर्धारित नई शिक्षा नीति के अनुसार पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 6 से साढ़े 7 वर्ष व नर्सरी में प्रवेश के लिए तीन साल की उम्र निर्धारित की गई हैं। निजी स्कूलों में पहले से ही नर्सरी की कक्षाएं संचालित हैं। इन स्कूलों को टक्कर देने के लिए ही सरकारी स्कूलों में यह पहल शुरु की जा रही है। 226 स्कूलों के बाद आगामी समय में जिले के अन्य सभी स्कूलों में इस व्यवस्था को लागू किया जायेगा। डीपीसी के मुताबिक प्राइवेट स्कूल की तर्ज पर अब शिक्षक नर्सरी के बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाएंगे। पिछले वर्ष के आगे की कक्षा में भेजे जाएंगे और अभिभावकों को शिक्षक घर-घर जाकर सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षा में प्रवेश दिलाने के लिए प्रेरित करेंगे। नए प्रयोग से मजबूत होगी बच्चों की नींव डीपीसी आरआर उइके के मुताबिक स्कूल शिक्षा विभाग का यह तर्क है कि सरकारी स्कूलों से अधिक से अधिक बच्चों को जोड़ा जाए। यदि प्रारंभिक दौर में नर्सरी के बच्चों को स्कूल से जोड़ा जाएगा तो वह आगे की कक्षा में भी सरकारी स्कूलों में ही अध्ययन करेंगे। शिक्षक नाच-गाकर नर्सरी के बच्चों को अक्षर का ज्ञान सिखाएंगे ऐसे में विद्यार्थी कक्षा पहली तक आते-आते अक्षर व शब्द लिखना पूरी तरह सीख जाएंगेे। ऐसे में बच्चों की शिक्षा की राह आसान होगी ओर उनकी नींव भी पूरी तरह मजबूत होगी। विभाग ने इसके लिए नियम लागू कर दिए हैं। शिक्षकों को घर-घर जाकर सर्वे करने के निर्देश भी जारी किये गए हैं। बच्चों के लिए करें व्यवस्था राज्य शिक्षा केंद्र ने जिला कलेक्टरों को जारी दिशा-निर्देश में कहा है कि प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए स्कूल में टाट पट्टी, पीने का पानी और शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए. जिस विद्यालय में प्रवेश दिया जाना है, वहां कम से कम दो कक्षाओं में प्रवेश पाने वाले बच्चों की कक्षा संचालन की सुविधा हो और बाहर खेलने के लिए मैदान पर्याप्त जगह वाला हो.  

139 उत्कृष्ट विद्यालयों का संचालन

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग शासकीय स्कूलों में माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर की गुणवत्ता युक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के जिला मुख्यालय एवं विकासखंड पर उत्कृष्ट विद्यालयों का संचालन कर रहा है। वर्तमान में 43 जिला मुख्यालयों पर और 96 विकासखंड स्तर पर उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हो रहे हैं। जिला स्तरीय उत्कृष्ट विद्यालयों में लगभग 49 हजार 500 और विकासखंड स्तरीय विद्यालयों में 66 हजार 250 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। यह योजना प्रदेश में वर्ष 2017-18 में शुरू की गई थी। प्रदेश में 41 जिला उत्कृष्ट विद्यालयों में 100 सीटर बालक और 100 सीटर बालिका छात्रावास भी स्वीकृत किये गये हैं। वर्तमान में इन छात्रावासों में लगभग 5 हजार 800 विद्यार्थियों को छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उत्कृष्ट विद्यालय की स्थापना से विद्यार्थियों की शिक्षा के स्तर में काफी अच्छे परिणाम सामने आये हैं।  

रायपुर : मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल : प्रदेश में गर्मी और लू को देखते हुए स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित

रायपुर : मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल : प्रदेश में गर्मी और लू को देखते हुए स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित 25 अप्रैल से 15 जून तक स्कूल रहेंगे बंद रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्कूली बच्चों के हित में संवेदनशील निर्णय लेते हुए राज्य के सभी कलेक्टरों से कहा है कि राज्य में पड़ रही भीषण गर्मी और लू की स्थिति को देखते हुए राज्य के सभी स्कूलों में 25 अप्रैल से 15 जून तक अवकाश रखा जाए। सभी स्कूलों में इस निर्देश का कड़ाई से पालन किया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने ग्रीष्मकालीन अवकाश की तिथि घोषित कर दी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि गर्मी को देखते हुए स्कूली बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के परिपालन में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के सभी शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त एवं गैर अनुदान प्राप्त स्कूलों में 25 अप्रैल से 15 जून 2025 तक ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा की गई है। गौरतलब है कि स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश की घोषणा 1 मई से 15 जून तक घोषित की गई थी, गर्मी की तीव्रता को देखते हुए अब इसे संशोधित कर दिया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश केवल विद्यार्थियों के लिए है और यह शिक्षकों पर लागू नहीं होगा, शिक्षकों की ड्यूटी यथावत जारी रहेगी।  

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में लगेंगी मस्ती की पाठशाला, मोहन सरकार का आनंद प्लान

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार अब सरकारी स्कूलों में मस्ती की पाठशाला लगाने जा रही है. दरसअल, सरकारी स्कूल की पढ़ाई बेहतर बनाने के साथ सराकार बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है. इसी के तहत मोहन सरकार शासकीय स्कूलों के लिए आनंद योजना लेकर आ रही है. इसके तहत अब स्कलों में कोर्स की पढ़ाई के साथ बच्चों को जीवन जीने की कला और स्ट्रेस मैनेजमेंट की ट्रेनिंग भी दी जाएगी. सरकारी स्कूलों में लगेगा आनंद पीरियड इसके लिए सरकारी स्कूलों में अलग से आनंद का एक पीरियड लगाया जाएगा, जिसमें हायर सेकंडरी के बच्चों को जीवन जीने और तनाव मुक्त रहने की कला सिखाई जाएगी. दरअसल, स्कूली बच्चों में स्ट्रेस और प्रतिस्पर्धा को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने आनंद विभाग के साथ अनुबंध किया है. 2 हजार सरकारी स्कूलों से होगी आनंद क्लास की शुरुआत इसमें आनंद विभाग शिक्षकों को पहले ट्रेनिंग देगा, फिर वही शिक्षक बच्चों को प्रशिक्षित करेंगे. ऐसे में इसे मस्ती की पाठशाला भी कहा जा रहा है, जो बच्चों के लिए काफी फायदेमंद भी होगी. 2 हजार सरकारी स्कूलों से होगी शुरुआत बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग पहले भी सीएम राइज और मॉडल स्कूलों में मस्ती की पाठशाला का प्रयोग कर चुका है. इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अन्य सरकारी स्कूलों में भी मस्ती की पाठशाला लगाने का फैसला लिया गया है. हालांकि, पहले चरण में 2 हजार स्कूलों में मस्ती की पाठशाला की शुरुआत होगी. इसके बाद प्रदेश के अन्य सरकारी स्कूलों के हायर सेकंडरी के बच्चों के लिए आनंद क्लास लगाई जाएगी. इंजीनियरिंग और मेडिकल कालेजों में भी आनंद पीरियड सरकार की मंशा है कि जिस तरह सरकारी स्कूलों में आनंद की कक्षाएं शुरु की जा रही है. इसी तरह प्रदेश के इंजीनियरिंग, मेडिकल, एनटीटीटीआर और अन्य कालेजों में भी स्ट्रेस मैनेजमेंट और आर्ट आफ लिविंग की शिक्षा दी जाए. इसके लिए राज्य आनंद संस्थान ने पूरी तैयारी कर ली है. इधर सरकारी स्कूलों में बच्चों को ट्रेनिंग देने के लिए 4 हजार सरकारी शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा. बता दें कि अभी 24 से 29 मार्च तक सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए वर्चुअल क्लासेस भी लगाई गई थी, जिसमें 3500 से 4 हजार बच्चों ने भाग लिया था. पहली बार हायर सेकंडरी स्कूलों में मस्ती की पाठशाला राज्य आनंद संस्थान के डायरेक्टर सत्य प्रकाश आर्य ने बताया, ” पहली बार सरकारी स्कूलों में आनंद की क्लास लगाई जाएगी. नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों को स्कूली शिक्षा देने के साथ उनको मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा देना भी अनिवार्य है. इसी के तहत स्कूलों में आर्ट ऑफ लिविंग और स्ट्रेस मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है. इसके साथ ही शिक्षकों को भी 6 दिनों का प्रशिक्षण आनंद संस्थान द्वारा किया जाएगा.”  

अब 87 स्कूलों का भविष्य कलेक्टर के हाथ में, डीपीसी स्तर पर स्कूलों की मान्यता को रद्द

भोपाल आवश्यक दस्तावेजों की कमी, भवन, मैदान का अभाव, शिक्षकों की कमी और योग्यता की कमी, छात्रों की जानकारी ऑनलाइन अपडेट नहीं, फायर सेफ्टी जैसे मान्यता के मुख्य मापदंड पर जिले के कई निजी स्कूल खरे नहीं उतरे हैं। इसके चलते बीआरसी के बाद डीपीसी स्तर पर भी 87 स्कूलों की मान्यता को रद्द कर दिया गया है। अब ये स्कूल कलेक्टर को मान्यता के लिए आवेदन देंगे। 671 स्कूलों का आया था आवेदन धार जिले में 671 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन दिए थे जिसका बीआरसी ने 31 मार्च तक निरीक्षण किया था। जिन स्कूलों में कमियां मिली थी उनकी मान्यता रद्द करने को लेकर बीआरसी ने अनुशंसा की थी। इसके बाद डीपीसी स्तर पर मान्यता के मापदंडों को परखा गया, लेकिन उसमें स्कूलों में कमियां मिली। जिस पर डीपीसी स्तर पर भी स्कूलों की मान्यता रद्द हो गई है। आधार सेंटरों की कमी के चलते भी प्रगति नहीं जिले में एक क्लिक पर विद्यार्थियों की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने के मकसद से 12 अंकों का अपार आइडी (Apaar ID) बनाया जा रहा है। इसमें विद्यार्थियों की संपूर्ण जानकारी होगी, लेकिन अपार में आधार अपडेशन को लेकर दिक्कतें आ रही है। कई बच्चों के आधार अपडेट नहीं हो रहे हैं, ऐसे में उनकी अपार आइडी नहीं बन रही हैं, क्योंकि शहर में सेंटरों में आधार सेंटरों की संख्या भी कम हैं। विभाग भी उदासीनता बरत रहा है, इससे लक्ष्य पूर्ति नहीं हो पा रही है। टाइम लाइन बेअसर कई बार टाइम लाइन दी गई, लेकिन लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। पहले दिसंबर 2025 तक सभी के अपार आइडी बनाए जाने थे, लेकिन कार्य पूरा नहीं हुआ तो 31 मार्च की टाइम लाइन तय की गई। अब अप्रैल तक कार्य पूरा करने की प्लानिंग की गई है। हालांकि अब कम प्रगति को देखकर शिक्षक भी मदद कर आधार अपडेट आइडी में बनाने में मार्गदर्शन करेंगे। जिले में अब तक सिर्फ प्रतिशत विद्यार्थियों की ही आइडी बनी है। जिले में 3 लाख 27 हजार 421 आइडी बनना है, लेकिन अब तक 2 लाख 6 हजार 734 बनाई जा सकी है। आइडी बनाने का कार्य स्कूलों को दिया गया है, जो यू डाइस प्लस पोर्टल के जरिए बनाई जा रही है। हालांकि दो दिन से तकनीकी दिक्कतों से चलते पोर्टल में खुल नहीं रहा हैं। मुख्य रूप से ये दिक्कतें…     स्कूल और आधार में दर्ज नार्मो में अंतर आ रहा है     स्कूल में दर्ज जन्म तारीख और आधार में लिखी जन्म तिथि में अंतर     कई स्टूडेंट के आधार अपडेट नहीं हैं     शहर में आधार अपडेट करवाने के लिए सेंटरों की कमी इसलिए आ रही दिक्कतें अपार आइडी यू-डाइस प्लस पोर्टल के डाटा के आधार पर बन रहा है। पोर्टल और आधार कार्ड की जानकारी के डालने के बाद आईडी बनता है, लेकिन पोर्टल और आधार कार्ड की जानकारी में अड़चन आने से आइडी जनरेट नहीं हो रही है, जैसे स्टूडेंट का नाम, माता-पिता का नाम, सरनेम में बिंदी का अंतर आ रहा है, या फिर स्पेलिंग आधार और पोर्टल के डाटा में अलग अलग है। ऐसी स्थिति में अपार आइडी जनरेट नहीं होगी। ऐसी समस्याओं की वजह से अब तक 2 हजार आइडी रिजेक्ट हो चुकी है। हालांकि लोग आधार अपडेट करवाना चाहते हैं, लेकिन आधार सेंटरों पर वेटिंग चल रही है। ऐसे होती है स्कूलों की मान्यता की प्रक्रिया स्कूल द्वारा आवेदन पोर्टल पर लॉक करने के बाद जिले के बीआरसी स्कूलों का निरीक्षण कर मान्यता के मापदंडों को परखते हैं। स्कूलों की कमियां और मापदंडों को पूरा कर रिपोर्ट तैयार डीपीसी स्तर पर भेज देते हैं। डीपीसी स्तर पर वैरिफिकेशन कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। जिसमें कमियां मिलने पर मान्यता रद्द कर दी जाती है, जबकि मापदंड पूरा करने वाले स्कूलों को मान्यता मिल जाती है। मान्यता रद्द वाले स्कूलों के पास कलेक्टर के पास अपील करने की अंतिम अवसर होता है। आवेदनों में यह कमियां आई सामने     स्कूल भवन के कागजात अधूरे     अलग-अलग शौचालय नहीं होना     पीने के पानी की सुविधा का अभाव     प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होना     आरटीई एक्ट के नियमों का पालन नहीं करना ये है मान्यता के मुख्य मापदंड     रजिस्टर्ड किरायानामा     प्राथमिक शाला के लिए 7 कक्षाएं और 7 शिक्षक अनिवार्य     खेल सामग्री और खेल मैदान होना चाहिए,     न्यूनतम 2400 से 4 हजार स्क्वेयर फीट साइज का खेल मैदान हो     छात्रों की संख्या पर खेल मैदान का साइज निर्धारित हो     सुरक्षा के लिहाज से स्कूल में अग्निशमन यंत्र होना चाहिए।     बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय हो।     लाइब्रेरी की सुविधा होना चाहिए।

सरकार के इस कदम से प्रदेश के 16,000 स्कूलों को लाभ मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने 25 हजार रुपए से कम वार्षिक फीस वाले निजी स्कूलों को बड़ी राहत दी है। अब इन स्कूलों को फीस संबंधी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी। इस निर्णय से लगभग 16,000 स्कूलों को लाभ मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और फीस बढ़ोतरी पारदर्शिता के साथ हो। सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में निजी स्कूलों को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि जिन निजी विद्यालयों की किसी भी कक्षा में वार्षिक फीस 25 हजार रुपए या उससे कम है, उन्हें विभाग के पोर्टल पर फीस संबंधी जानकारी अपलोड करना अनिवार्य नहीं होगा। इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 16,000 स्कूलों को राहत मिलेगी।राज्य में कुल 34,652 निजी स्कूल हैं, जिनमें से लगभग 18,000 स्कूलों की वार्षिक फीस 25 हजार रुपए से अधिक है। इन विद्यालयों को अब 15 मई तक पोर्टल पर कक्षा और संवर्गवार फीस संरचना की जानकारी अपलोड करनी होगी। शुरुआत में यह अंतिम तिथि 31 मार्च तय की गई थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इसे बढ़ाया गया है। यह नियम मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम-2020 के तहत लागू किया गया है, जो 31 जनवरी 2025 से प्रभावी हुआ है। 10% तक फीस बढ़ाने की छूट, लेकिन शर्तों के साथ शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कोई भी विद्यालय सालाना 10% तक फीस वृद्धि बिना अनुमति कर सकता है। लेकिन इससे अधिक फीस वृद्धि के लिए संबंधित जिला समिति से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और फीस बढ़ोतरी पारदर्शिता के साथ हो। राज्य और जिला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन फीस संबंधी मामलों की निगरानी और शिकायतों के निवारण के लिए राज्य और जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां यह सुनिश्चित करेंगी कि सभी विद्यालय निर्धारित नियमों के अनुसार ही फीस निर्धारित करें और किसी भी प्रकार की मनमानी न हो। सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।  

भोपाल में घटना के 6 महीने बाद स्कूल पर एक्शन, मान्यता रद्द, 324 स्टूडेंट्स अन्य स्कूलों में ले सकेंगे प्रवेश

भोपाल भोपाल के रेडक्लिफ स्कूल में तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था. अब इस मामले में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने स्कूल की मान्यता सत्र 2025-26 से रद्द करने के आदेश जारी कर दिए हैं. इस फैसले के बाद स्कूल में पढ़ने वाले छात्र अब स्वयं के खर्चे पर शासकीय या किसी अन्य निजी स्कूल में दाखिला ले सकेंगे. यह कार्रवाई उस जघन्य घटना के बाद हुई है, जिसमें 19 सितंबर 2024 को स्कूल के आईटी टीचर ने साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था. आदेश में कहा गया है कि स्कूल सत्र 2025-26 से शाला का संचालन नहीं कर सकेगा। ऐसे में यहां पहले से पढ़ने वाले बच्चे सरकारी या अन्य प्राइवेट स्कूल में एडमिशन ले सकते हैं। आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों को अन्य सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाया जा सकेगा, जबकि अन्य छात्र-छात्राएं स्वयं के व्यय पर दूसरे स्कूल में प्रवेश ले सकते हैं। स्कूल की मान्यता सत्र 2025-26 से रद्द घटना के सामने आते ही पूरे शहर में गुस्से का माहौल बन गया था. हिंदू संगठनों ने इस घटना के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और स्कूल परिसर में तोड़फोड़ भी की थी. प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की और स्कूल की लापरवाही को लेकर यह सख्त फैसला लिया गया. स्कूल में तीन साल की मासूम से हुआ था रेप कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए यह जरूरी कदम है. अभिभावकों से अपील की गई है कि वे समय रहते अपने बच्चों के लिए वैकल्पिक स्कूल का चयन कर लें ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो. 324 बच्चों का भविष्य दूसरे स्कूलों में संवरेगा बता दें कि इस स्कूल में कुल 324 बच्चे पढ़ते हैं। पिछले साल सितंबर में स्कूल के टीचर ने ही 3 साल की बच्ची से रेप किया था। इस मामले में हंगामे के बाद स्कूल को सील कर दिया गया था। 6 सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद कलेक्टर सिंह ने सरकार को प्रस्ताव भेजा था कि स्कूल का संचालन डीईओ करें। जांच के लिए दो टीमें बनाई गई थीं। पहली जांच रिपोर्ट में बच्चियों की सुरक्षा को लेकर स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई थी। वहीं, दूसरी 7 सदस्यीय कमेटी ने स्कूल के संचालन को लेकर अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को दी थी। इसके बाद भोपाल में पहली बार किसी प्राइवेट स्कूल की कमान सरकारी हाथ में ली गई थी। संकुल प्राचार्य को संचालन की व्यवस्था सौंपी गई थी। इसके बाद स्कूल खोल दिया गया था, लेकिन अब संचालन नहीं होगा। स्कूल को कक्षा पहली से 8वीं की मान्यता नहीं दी गई है। 79 बच्चों का दाखिला आरटीई से स्कूल में कुल 324 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से 79 ऐसे हैं, जिनका आरटीई (राइट टू एजुकेशन) के जरिए एडमिशन हुआ है। बीच सत्र में स्कूल बंद होने से सभी बच्चों को परेशानी हो सकती थी। उनका एक साल बिगड़ जाता। दूसरी ओर, जब बच्ची के साथ गलत हरकत हुई, तब स्कूल खुले पांच महीने हो चुके थे। यानी, आधा शिक्षा सत्र। ऐसे में बच्चों का कहीं एडमिशन भी नहीं हो सकता था। प्रशासन यदि स्कूल को बंद रखता तो बच्चों का एक साल खराब हो जाता। इसलिए स्कूल का संचालन सरकार ने खुद ही किया।

छत्तीसगढ़ में आत्मानंद स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का मौका, आवेदन शुरू

रायपुर स्वामी आत्मानंद इंग्लिश और हिंदी मीडियम स्कूलों में एडमिशन की तैयारी एक बार फिर शुरू हो गई है। नया सेशन 2025-26 शुरू होने वाला है और इसी को लेकर 10 अप्रैल यानि आज से आवेदन भरने की प्रक्रिया शुरू हो रही है। राज्य सरकार की इस योजना के तहत चलने वाले स्कूलों में हर साल हजारों पेरेंट्स अपने बच्चों का एडमिशन कराने की कोशिश करते हैं। इस बार भी मुकाबला तगड़ा होने वाला है। लोक शिक्षण संचालनालय की तरफ से ऑफिशियल शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है। फॉर्म 10 अप्रैल से लेकर 5 मई तक भरे जाएंगे। अगर किसी स्कूल में सीटों से ज्यादा फॉर्म आएंगे, तो मई के दूसरे हफ्ते में लॉटरी होगी और फिर एडमिशन दिया जाएगा। इस बार कितने स्कूलों में एडमिशन होगा? इस बार कुल 751 स्कूलों में एडमिशन होगा इनमें से 403 इंग्लिश मीडियम स्कूल हैं 348 हिंदी मीडियम स्कूल हैं दोनों ही तरह के स्कूलों के लिए आवेदन भरने की सुविधा है इंग्लिश और हिंदी मीडियम – क्या फर्क है? इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पहली क्लास में करीब 40-50 सीटें होती हैं इसके अलावा जिन क्लासेस में सीट खाली होंगी, उनके लिए भी एडमिशन लिया जाएगा हिंदी मीडियम स्कूलों में बैठक क्षमता के हिसाब से एडमिशन होते हैं, वहां सीटें फिक्स नहीं होतीं एडमिशन शेड्यूल इस तरह रहेगा प्रोसेस   फॉर्म भरना शुरू 10 अप्रैल आखिरी तारीख 5 मई लॉटरी (जहां जरूरत हो) 6 से 10 मई एडमिशन की प्रक्रिया 11 से 15 मई पहली क्लास में एडमिशन के लिए उम्र कितनी होनी चाहिए? बच्चे की उम्र 5.5 से 6.5 साल के बीच होनी चाहिए उम्र का आधार 31 मई 2025 होगा इससे कम या ज्यादा उम्र होने पर फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है जरूरी डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट पिछली क्लास की मार्कशीट (अगर ऊपर की क्लास के लिए फॉर्म भर रहे हो) बच्चे और पैरेंट्स का आधार कार्ड निवास प्रमाण पत्र जाति प्रमाण पत्र (अगर रिजर्व कैटेगरी में हो) 2 पासपोर्ट साइज फोटो BPL कार्ड (अगर लागू हो) कक्षा 6वीं और 9वीं में कैसे होगा एडमिशन? इन क्लासेस में एडमिशन का फैसला जिले की एडमिन कमेटी लेती है कलेक्टर की अध्यक्षता में यह तय होता है कि कितनी सीटों पर एडमिशन दिया जाए फॉर्म कैसे भर सकते हैं? ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ऑप्शन हैं लेकिन रायपुर जिले के लिए सिर्फ ऑनलाइन फॉर्म मान्य होंगे बाकी जिलों में स्कूल से फॉर्म ले सकते हैं या DEO ऑफिस से जानकारी मिल सकती है अगर सीट से ज्यादा फॉर्म आ गए तो? उस स्कूल में लॉटरी सिस्टम लागू होगा यह लॉटरी पब्लिक के सामने या वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ की जाएगी रिजल्ट स्कूल में और वेबसाइट पर लगाया जाएगा  

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