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भोपाल के स्कूल को IED ब्लास्ट से उड़ाने की धमकी, तेलुगु भाषा में मेल किया, स्कूल खाली कराया गया; पुलिस और ATS ने ली तलाशी

भोपाल भोपाल के पिपलानी में एक प्राइवेट स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। शनिवार की सुबह स्कूल के ऑफिशियल ईमेल आईडी पर तेलगू भाषा में एक धमकी भरा मेल मिला। जिसमें स्कूल की बिल्डिंग को IED ब्लास्ट से उड़ाने की धमकी मिली है। स्कूल स्टाफ में एक व्यक्ति को तेलगू भाषा की समझ है। उसने तुरंत मेल को ट्रांसलेट करके अन्य स्टाफ को जानकारी दी। धमकी मिलने के बाद से स्कूल में हड़कंप मच गया। सूचना पर पुलिस की टीम बीडी (बॉम्ब डिस्पोजल) और डॉग स्क्वायड की टीम के साथ मौके पर पहुंची और स्कूल के कोने कोने की तलाशी ली। शनिवार को छुट्टी होने के कारण बच्चे स्कूल में नहीं थे। स्कूल में पैरेंट्स टीचर मीटिंग बुलाई गई थी। उस समय स्कूल में करीब 50 लोग मौजूद थे। सभी को परिसर से बाहर निकाल दिया गया। मामला शनिवार सुबह 10.30 बजे हरमन माइनर स्कूल का है। आज स्कूल की छुट्‌टी थी, लेकिन स्टाफ के कुछ सदस्य और कुछ छात्रों के परिजन मीटिंग के लिए मौजूद थे। धमकी मिलने के बाद तुरंत ही वे बाहर निकल गए और पुलिस को सूचना दी। स्कूल के हर कोने की हुई तलाशी मौके पर पहुंची पुलिस ने बीडी (बॉम्ब डिस्पोजल) और डीएस (डॉग स्क्वायड) की टीम के साथ स्कूल की सघन तलाशी शुरू कर दी। इसके अलावा, एटीएस (एंटी टेरर स्क्वायड) की टीम भी जांच के लिए पहुंची। थाना प्रभारी (TI) अनुराग लाल ने बताया कि स्कूल के कोने-कोने की तलाशी ली गई, लेकिन कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई। आईपी एड्रेस ट्रेस करने की कोशिश थाना प्रभारी अनुराग लाल ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस और विशेष सुरक्षा दल मौके पर पहुंचे। स्कूल के कोने कोने की तलाशी ली गई, लेकिन कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। पुलिस का कहना है कि मेल भेजने वाले व्यक्ति की पहचान के लिए साइबर एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है। उसका आईपी एड्रेस ट्रेस कर रहे हैं। पुलिस ने स्कूल में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। पुलिस के साथ एटीएस भी इम मामले की जांच करने में लगी हुई है। पुलिस का मानना है कि यह किसी शरारती तत्व का काम हो सकता है। लेकिन फिर भी जांच जारी है। तेलुगु भाषा में था मेल, स्टाफ ने किया ट्रांसलेट धमकी भरा मेल तेलुगु भाषा में लिखा गया था। स्कूल स्टाफ में मौजूद एक व्यक्ति को तेलुगु भाषा आती थी, उसने मेल को ट्रांसलेट कर इसकी जानकारी अन्य स्टाफ को दी। इसके बाद तुरंत स्कूल खाली कराया गया। उस समय वहां करीब 50 लोग मौजूद थे। स्कूल की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

स्कूलों ने 10 प्रतिशत से ज्यादा फीस बढ़ाई है, तो वो पैसा माता-पिता को वापस करना होगा: हाई कोर्ट

जबलपुर  एमपी हाई कोर्ट ने  निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर बड़ा फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने कहा कि अगर स्कूलों ने 2018 या उससे पहले 10 प्रतिशत से ज्यादा फीस बढ़ाई है, तो वो पैसा माता-पिता को वापस करना होगा। यह मामला पैरेंट्स द्वारा स्कूलों की अवैध फीस वसूली के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। कोर्ट ने स्कूलों को फीस जमा करने के लिए भी निर्देश दिए हैं। मामले पर अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। कैसे शुरू हुआ मामला मामले की शुरुआत पैरेंट्स द्वारा निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करने से हुई। अभिभावकों का कहना था कि स्कूल ज्यादा फीस वसूल रहे हैं। इसके कारण उन्हें आर्थिक स्तर पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस याचिका पर सुनवाई हुई। नहीं हो रहा नियमों का पालन हस्तक्षेपकर्ता के वकील सुरेंद्र वर्मा ने कोर्ट में दलील दी कि एमपी सरकार द्वारा बनाए गए स्कूल विनिमय अधिनियम 2018 के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। पैरेंट्स से एक बार में फीस वसूली के आदेश दिए जा रहे हैं। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि अभिभावक फीस क्यों नहीं जमा कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं के वकील ने जवाब दिया कि अभिभावकों ने 70% फीस तो जमा कर दी है। लेकिन बाकी फीस का मामला कोर्ट में है, इसलिए वो फीस अभी जमा नहीं की गई है। निजी स्कूलों की दलील निजी स्कूलों की तरफ से वकील अंशुमान सिंह ने 13 अगस्त 2024 के हाई कोर्ट के आदेश का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 2018 के नियम के हिसाब से 10 प्रतिशत फीस बढ़ाने की अनुमति है। उसी के अनुरूप काम किया जा रहा है। वापस करनी होगी फीस- कोर्ट का फैसला इसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि निजी स्कूलों को 50 प्रतिशत फीस तीन दिन में और बाकी 50 फीसदी फीस तीन महीने के अंदर जमा करनी होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर 2018 या उससे पहले किसी स्कूल ने 10 परसेंट से ज्यादा फीस बढ़ाई है, तो वह ज्यादा वसूली गई राशि पैरेंट्स को वापस करनी होगी। यह फैसला अभिभावकों के लिए एक बड़ी राहत की बात है। इससे स्कूलों की मनमानी पर रोक लगने की उम्मीद है।

कलेक्टर का बड़ा एक्शन, भिंड के 126 निजी स्कूलों की मान्यता निलंबित, स्कूल एसोसिएशन ने मांगा समय

भिंड  मध्यप्रदेश में एक बार फिर प्राइवेट स्कूलों की लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई की गई है। मामला भिंड जिले का है जहां कलेक्टर ने एक साथ 126 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता निलंबित कर दी है। स्कूल प्रबंधन द्वारा अपार आईडी बनाने में लापरवाही बरतने के कारण ये एक्शन लिया गया है। कलेक्टर ने ये भी साफ कर दिया है कि जब तक स्कूल प्रबंधन अपार आईडी निर्माण कार्य पूरा कर उसका प्रमाण प्रस्तुत नहीं करेंगे, तब तक उनकी मान्यता बहाल नहीं की जाएगी। कलेक्टर भिण्ड संजीव श्रीवास्तव ने अपार आई डी निर्माण शुरू नहीं किये जाने पर नाराजगी जताते हुए जिले के 126 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता निलंबित कर दी है। कलेक्टर ने आदेश जारी कर कहा है कि भारत सरकार की योजना अन्तर्गत नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के छात्र/ छात्राओं की अपारआईडी बनाई जा रही है जिसके लिये कई बार बैठकों एवं व्हाट्सएप के माध्यम से निर्देश दिए गए हैं, कई स्कूलों ने उनके यहाँ पढ़ने वाले छात्र/छात्राओं के अपार आईडी के निर्माण का कार्य 29 जनवरी 2025 तक प्रारंभ नहीं किया जिसपर 30 जनवरी 2025 को कार्यालयीन पत्र भेजकर नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया लेकिन आज दिनांक तक  उसका कोई जबाब प्राप्त नहीं हुआ। लापरवाह 126 प्राइवेट स्कूलों की मान्यता निलंबित इसलिए अपार आई डी निर्माण का कार्य प्रारंभ न किये जाने पर जिले के 126 अशासकीय विद्यालय की मान्यता निलंबित कर दी गई है। कलेक्टर ने सभी 126 अशासकीय विद्यालयों के संचालकों को निर्देशित किया है कि वे अध्ययनरत विद्यार्थियों के अपार आईडी के निर्माण का कार्य पूर्ण करने के उपरान्त उसका प्रमाणीकरण प्रस्तुत करें तब ही मान्यता निलंबन से बहाल किये जाने पर विचार किया जायेगा। यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा। अपार आईडी ( APAAR ID) यानि छात्र का 12 अंकों का यूनिक आईडी नंबर अपार आईडी यानी ऑटोमेटिक परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री – APAAR ID। केंद्र सरकार के निर्देश को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों ने अपने यहां संचालित सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों से कहा है कि वे हर छात्र की एक अलग खास पहचान बनाने के लिए उनके माता-पिता से सहमति लें। केंद्र सरकार की “वन नेशन वन स्टूडेंट आईडी” योजना के तहत यह अपार आईडी कार्ड बनाया जा रहा है। योजना के तहत प्रत्येक छात्रों को 12 अंकों का एक यूनिक आईडी नंबर जारी किया जा रहा है जिसे अपार आईडी का नाम दिया गया है। अपार आईडी के लिए छात्र आधिकारिक वेबसाइट apaar education.gov.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। हालांकि यह काम स्कूलों द्वारा पूरा किया जाना है। APAAR ID से छात्र को मिलेगी अलग पहचान अपार आईडी आधार नंबर की तरह ही एक तरह का आईडी है। योजना के तहत अपार आईडी में एक विद्यार्थी की बचपन से लेकर हायर एजुकेशन तक की शैक्षणिक गतिविधियों का पूरा ब्योरा दर्ज होगा। इस योजना के तहत हर विद्यार्थी को आजीवन एक खास अपार पहचान मिलेगी। अपार आईडी कार्ड में छात्र का नाम, लिंग, जन्मतिथि, पता, पैरेंट्स का नाम, फोटो के साथ-साथ उनकी शैक्षणिक योग्यता के प्रमाणपत्र , कैरेक्टर सर्टिफिकेट, स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट सहित अन्य कई दस्तावेज मौजूद होंगे। इसके अलावा विद्यार्थी की खेल प्रतियोगिता में हिस्सा, स्कॉलरशिप, जीते गए अवॉर्ड, स्किल ट्रेनिंग, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज, ओलिंपियाड में सहभागिता की जानकारी भी इस आईडी कार्ड में दर्ज कराई जाएगी। अपार आईडी में छात्र का ब्लड ग्रुप, ऊंचाई और वजन जैसी अतिरिक्त जानकारी भी शामिल हो सकती हैं।  

MP में प्राइवेट स्कूलों की मान्यता की डेट समाप्त, स्कूल बंद होंगे तो आरटीई के तहत पढ़ने वाले बच्चों पर संकट आएगा

भोपाल मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग और राज्य शिक्षा केंद्र के नए नियमों के कारण हजारों निजी स्कूलों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। निजी स्कूल संगठन के अध्यक्ष अजीत सिंह का कहना है कि विभाग की कठोर शर्तों और प्रशासनिक लापरवाही के चलते कई विद्यालयों होंगे बंद। वजह, शासन ने मान्यता नियम के लिए रजिस्टर्ड किरायानामा की शर्त रखी है, जो स्कूल संचालक पूरी नहीं करना चाह रहे। भोपाल में 1400 स्कूलों में से 232 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है। वहीं राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी करने से बच रहे हैं। अगर यह हालात रहे तो 18,000 निजी स्कूल बंद हो सकते हैं, जिससे लाखों बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी, खासकर उन छात्रों की जिनका नाम कम शुल्क वाले विद्यालयों में है। अजीत सिंह के अनुसार, जिन स्कूलों ने आवेदन किया है, उनमें भी कई स्कूलों के पास दस्तावेज़ पूरे नहीं हैं या वे नए नियमों का पालन नहीं कर पा रहे हैं। इस मुद्दे पर सरकार और विभाग की चुप्पी बनी हुई है।

एमपी में निजी स्कूलों के लिए बदले फीस के नियम, फीस बढ़ाने के लिए जिला समिति की अनुमति लेनी होगी

 भोपाल  मध्यप्रदेश में निजी स्कूलों में बस किराया और ट्यूशन फीस को लेकर बड़ा अपडेट है। अब निजी स्कूल अलग से बस फीस नहीं ले पाएंगे और इसे भी वार्षिक का ही भाग माना जाएगा। मध्यप्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 सदन से पारित होने के बाद राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने मुहर लगा दी है। नए नियम के तहक बिना अनुमति अब 10% से अधिक फीस नहीं बढ़ेगी। ₹25000 से ज्यादा सालाना फीस लेने वाले स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए जिला समिति की अनुमति लेनी होगी। इसी फीस में बस का शुल्क भी शामिल होगा। नई कानून पर राज्यपाल ने मुहर लगाई है। मध्यप्रदेश के 18000 स्कूल इसके दायरे में आएंगे। इस नए नियम से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी। फीस नियंत्रण पर अभिभावकों को राहत यह विधेयक निजी स्कूलों की फीस नीति को नियमित करने और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न सिर्फ अभिभावकों के आर्थिक बोझ को कम करेगा, बल्कि शिक्षा में समानता और सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करेगा। सरकार के इस प्रयास से शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव की उम्मीद है, जो छात्रों और अभिभावकों के हित में साबित हो सकते हैं। यह विधेयक निजी स्कूलों की फीस नीति को नियमित करने और पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रदेश में 16 हजार स्कूल ऐसे आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में करीब 34,652 निजी स्कूल हैं। इनमें से लगभग 16 हजार ऐसे स्कूल हैं, जिनकी किसी भी कक्षा में वार्षिक फीस 25 हजार रुपये या इससे कम है। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2017 के तहत वर्ष 2020 में नियम बनाए गए हैं। इसके अनुसार सरकार को यह अधिकार दिया गया कि वह निजी स्कूलों की फीस और अन्य विषयों पर निर्णय लेकर फीस विनियमन कर सकेगी। नए प्रवाधानों में क्या नए प्रावधानों के अनुसार 10 प्रतिशत वार्षिक फीस बिना अनुमति के बढ़ाई जा सकती है लेकिन इससे अधिक वृद्धि के लिए जिला समिति की अनुमति लेना जरूरी होगा। स्कूल 25 हजार रुपये तक फीस लेने वाले स्कूलों को शिक्षकों के वेतन सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए वित्तीय प्रबंधन में परेशानी होती है। आपको बता दें कि यदि दस प्रतिशत वृद्धि करते हैं तो अभिभावकों पर अधिक भार नहीं पड़ता है, इसलिए नई उपधारा प्रस्तावित की गई है कि 25 हजार रुपये वार्षिक फीस लेने वाले स्कूल अधिनियम के दायरे से बाहर रहेंगे। साथ ही परिवहन फीस स्कूलों की वार्षिक फीस का भाग होगा। अभी स्कूल इसे वार्षिक फीस से अलग लेते हैं और इसमें वृद्धि भी अधिक होती है। इससे वार्षिक फीस नियंत्रित रहेगी। समिति के अध्यक्ष होंगे शिक्षा मंत्री नए नियमों के अनुसार फीस बढ़ाने पर आपत्ति की अपील सुनने मंत्री की अध्यक्षता में समिति अधिनियम में यह संशोधन भी प्रस्तावित किया गया है कि वार्षिक फीस में 15 प्रतिशत से अधिक वृद्धि के आदेश के विरुद्ध अपील सुनने के लिए राज्य स्तरीय समिति होगी। इसके अध्यक्ष स्कूल शिक्षा मंत्री रहेंगे। समिति को यह अधिकार रहेगा कि वह विभागीय समिति द्वारा किसी स्कूल पर लगाए गए अर्थदंड को घटा या बढ़ा सकेगी। अलग से बस फीस नहीं ले पाएंगे प्राइवेट स्कूल मध्यप्रदेश सरकार ने  मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 में संशोधन के लिए प्रस्तुत विधेयक पेश किया। इसमें ये प्रावधान किया गया है कि प्राइवेट स्कूलों के द्वारा बस फीस अलग से वसूली नहीं जा सकेगी और बस फीस को स्कूल की वार्षिक फीस का ही हिस्सा माना जाएगा। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम-2024 सदन से पारित होने के बाद राज्यपाल मंगुभाई पटेल के पास अनुमति के लिए भेजा जाएगा और वहां से मंजूरी मिलते ही प्रभावी हो जाएगा।

स्कूलों को बम से उड़ाने की मिली धमकी, नोएडा पुलिस, बम स्कवॉड और सभी बड़े अधिकारी स्कूलों में पहुंचकर छानबीन कर रहे

नोएडा उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर में एक बार फिर स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह धमकी ई मेल के जरिये मिली है। धमकी भरी मेल की जानकारी जैसे ही स्कूल प्रबंधक को मिली उन्होंने तुरंत इसकी सूचना कमिश्नरेट पुलिस को दी। सूचना मिलने के तुरंत बाद ही पुलिस टीम, दमकल विभाग और बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंच गई। टीम ने स्कूल को खाली करवा कर छानबीन शुरु कर दी। इसमें नोएडा के कई नामी स्कूल शामिल है। नोएडा में नामी चार स्कूलों को आज सुबह एक साथ बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह धमकी बुधवार की सुबह ईमेल के माध्यम से दी गई हैं। धमकी भरी आयी ईमेल मिलने के बाद मौके पर हड़कंप मच गया। स्कूलों में डर का माहौल उत्पन्न हो गया। आनन फानन में स्कूल प्रबंधकों ने इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई। धमकी भरे ईमेल की सूचना मिलते ही कमिश्नरेट पुलिस मौके पर पहुंच गई। इसके बाद टीम ने तत्काल स्कूल के एक-एक कोने में छानबीन शुरु कर दी। जिन स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल आया है, उनमें स्टेप बाय स्टेप स्कूल , द हेरिटेज स्कूल , ज्ञानश्री स्कूल  और मयूर स्कूल का नाम शामिल है। नोएडा कमिश्नरेट पुलिस की टीम ने घटनास्थल पर पहुंच कर जांच पड़ताल शुरु कर दी है। दमकल विभाग और बम निरोधक दस्ता के साथ स्थानीय पुलिस मौके पर छानबीन कर रहे है। स्कूलों को खाली करवा कर दिया गया है। कई स्कूलों के बच्चों को सुरक्षित जगह पर इकठ्ठा किया गया है। अभी तक की मिली जानकारी के मुताबिक, किसी स्कूल में कोई आपत्तिजनक सामान नही मिला है। बम स्क्वायड के साथ कमिश्नरेट पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी स्कूलों में पहुंच कर छानबीन कर रहे है। गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट पुलिस प्रवक्ता ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि स्टेप बाय स्टेप स्कूल, द हेरिटेज स्कूल, ज्ञानश्री स्कूल और मयूर स्कूल में स्पेम ईमेल द्वारा बॉम्ब थ्रेट प्राप्त होने पर तत्काल अलग अलग पुलिस, बॉम्ब स्क्वाड, फायर ब्रिगेड, डॉग स्क्वाड, बीडीडीएस टीम से सभी जगह चेकिंग करा ली गई है। सब जगह नार्मल है। कई स्कूल में क्लासेज आरंभ हो गई हैं। साइबर टीम द्वारा ईमेल की विवेचना की जा रही है।

इंदौर : एनडीपीएस और आईपीएस प्रबंधन को आया धमकी भरा ई-मेल, स्कूल खाली करवा दिया, आला अधिकारी मौके पर

इंदौर  मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में स्कूल में बम की धमकी का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, एनडीपीएस और आईपीएस स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। प्रिंसिपल को तमिलनाडु से भेजे गए ईमेल में धमकी दी गई है। तत्काल पुलिस को सूचित किया गया। बम स्क्वाड दस्ता भी मौके पर पहुंचा। स्कूल प्रबंधन ने तत्काल स्कूल खाली करवाया। बच्चों को घर भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार इंदौर के खंडवा रोड़ स्थित एनडीपीएस और राऊ स्थित आईपीएस कॉलेज को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। राउ स्थित इंदौर पब्लिक स्कूल परिसर में मंगलवार सुबह स्टूडेंट्स को अचानक घर जाने के लिए कहा गया। कोई कुछ समझ पाता उसके पहले ही बसों में बच्चों को बैठाकर घर रवाना कर दिया। कहा जा रहा है कि स्कूल और परिसर में लगने वाले कॉलेज के बच्चों ने अपने पेरेंट्स को फोन करके बताया कि संभवतः स्कूल को किसी तरह की धमकी मिली है। हजारों स्टूडेंट्स को ताबड़तोड़ बाहर निकाल दिया गया। बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स स्कूल के सामने की लाइन में स्थित मंदिर परिसर में जमा हो गए थे। अभी तक इस मामले को लेकर अधिकृत जानकारी नहीं मिल पाई है। एनडीपीएस में दूसरी शिफ्ट में आए बच्चों को स्कूल मैदान के बाद क्लास में नहीं जाने दिया और वापस बस में बैठाकर घर भेजा गया।

ग्वालियर में शीतलहर को देखते हुए 7 जनवरी से 31 जनवरी तक स्कूलों का समय बदला, आज रहेगी छुट्टी

ग्वालियर ग्वालियर में कड़ाके की ठंड और शीतलहर को देखते हुए जिला प्रशासन ने नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए 6 जनवरी को अवकाश घोषित किया है। 7 जनवरी से 31 जनवरी तक स्कूलों का समय बदलकर सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक कर दिया गया है। यह आदेश सरकारी और गैर-सरकारी सभी स्कूलों, आईसीएससी और सीबीएसई स्कूलों पर लागू होगा। परीक्षाएं पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कलेक्टर रुचिका चौहान ने जिला शिक्षा अधिकारी अजय कटियार को निर्देशित किया, जिसके बाद यह आदेश जारी किया गया। आदेश में यह भी उल्लेख है कि परीक्षाएं पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेंगी। इससे पहले, 5 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश के चलते स्कूल बंद थे। स्कूलों के समय में बदलाव बच्चों को ठंड से बचाने के उद्देश्य से लिए गए इस निर्णय के तहत स्कूलों के समय में बदलाव कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। प्रशासन ने सभी स्कूलों को आदेश का पालन करने के निर्देश दिए हैं। यह निर्णय जिले में बढ़ती ठंड और गिरते पारे को देखते हुए लिया गया है, जिससे बच्चों को शीतलहर से बचाया जा सके।

मप्र उच्च शिक्षा विभाग ने फरवरी तक के‍ लिए खोला पोर्टल, कॉलेज छात्राओं को 10 महीने तक 500 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे

भोपाल  मध्य प्रदेश के कॉलेजों में पढ़ रहीं छात्राओं को प्रोत्साहन राशि देने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रतिभा किरण और गांव की बेटी योजना में पंजीयन करने के लिए पोर्टल खोल दिया है। अब छात्राएं दोनों में से एक योजना में 500-500 रुपये प्रतिमाह लेने के लिए पंजीयन करा सकेंगी। पोर्टल फरवरी तक खुला रहेगा, इसमें पूर्व छात्राओं का नवीनीकरण किया जाएगा और वर्तमान सत्र में प्रवेश लेने वालीं छात्राओं के नवीन पंजीयन होंगे। 12वीं में 60 फीसदी अंक और बीपीएल बता दें, गांव की बेटी योजना के लिए ग्रामीण छात्रा को ग्रामीण निवासी होना अनिवार्य है। वहीं 12वीं में 60 फीसद अंक होने के साथ उसका गरीबी रेखा के नीचे होना जरूरी है। इसके बाद विभाग उसे साल के 10 महीने 500-500 रुपये देगा। वहीं प्रतिभा किरण योजना के लिए शहरी क्षेत्र की छात्राओं को 12वीं में 60 फीसद अंक लाना अनिवार्य है। उसे भी 10 महीने तक 500-500 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। दोनों ही योजनाओं की लाभार्थी छात्राएं प्रदेश के किसी भी निजी या सरकारी कॉलेज में प्रवेश ले सकती हैं। इसके बाद में विभाग के द्वारा उसको साल के 10 महीने पांच ₹500 की रकम दी जाती है और यहां प्रतिभा किरण योजना जो कि शहरी क्षेत्र की छात्राओं के लिए है । बताया जा रहा है कि यह स्कीम में 12वीं में 60 फिसदी तक के अंक आना जरूरी होते हैं जिसमें यह ₹500 की रकम हर महीने दी जाती है दोनों ही योजना का फायदा लाभार्थी छात्राओं को निजी तथा सरकारी कॉलेज में प्रवेश के बाद में मिलता है।

2023-24 में लड़कियों के स्कूली नामांकन में 16 लाख की कमी, जबकि लड़कों के नामांकन में 21 लाख की गिरावट दर्ज

नई दिल्ली भारत में स्कूलों जाने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल 2023-24 में करीब 37 लाख छात्रों ने स्कूली पढ़ाई छोड़ी दी है, जिनमें 16 लाख लड़कियां शामिल हैं. साल 2022-23 के मुकाबले 2023-24 में स्कूली छोड़ने वाली छात्रों की संख्या अधिक है. शिक्षा मंत्रालय की एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (UDISE) की एक रिपोर्ट में यह डेटा में सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 में कुल 25.17 करोड़ छात्र स्कूलों में नामांकित थे, जबकि 2023-24 में यह संख्या घटकर 24.80 करोड़ रह गई और 2021-2022 में करीब 26.52 करोड़ था. इसके अनुसार, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में छात्रों के नामांकन में 37.45 लाख की गिरावट आई है. इस तरह2023-24 में लड़कियों के नामांकन में 16 लाख की कमी आई, जबकि लड़कों के नामांकन में 21 लाख की गिरावट दर्ज की गई. अल्पसंख्यकों की भागीदारी UDISE 2023-24 ने पहली बार छात्रों का व्यक्तिगत डेटा और स्वैच्छिक आधार पर उनके आधार नंबर जुटाए. 2023-24 तक 19.7 करोड़ छात्रों ने अपने आधार नंबर शेयर किए. कुल नामांकन में 20% छात्र अल्पसंख्यक समुदायों से थे. इनमें 79.6% मुस्लिम, 10% ईसाई, 6.9% सिख, 2.2% बौद्ध, 1.3% जैन और 0.1% पारसी समुदाय से थे. जातीय वर्गीकरण रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल लेवल पर पंजीकृत (UDISE डेटा के अनुसार), 26.9% छात्र सामान्य वर्ग से, 18% अनुसूचित जाति से, 9.9% अनुसूचित जनजाति से और 45.2% अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अलग-अलग राज्यों में स्कूलों, शिक्षकों और नामांकित छात्रों की उपलब्धता अलग-अलग है। ‘घोस्ट स्टूडेंट्स’ की पहचान व्यक्तिगत डेटा से फर्जी छात्रों (‘घोस्ट स्टूडेंट्स’) की पहचान और सरकार की योजनाओं का लाभ सही छात्रों तक पहुंचाने में मदद मिली. इससे सरकारी खर्च में बचत और बेहतर प्रबंधन संभव हुआ. एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि यह पहली बार है जब राष्ट्रीय स्तर पर व्यक्तिगत छात्र डेटा जुटाया गया. इसलिए, यह डेटा 2021-22 या उससे पहले के आंकड़ों से तुलनात्मक नहीं है. यह प्रक्रिया स्कूल-वार डेटा से अलग है, जिससे शिक्षा प्रणाली की वास्तविक स्थिति सामने आती है. राज्यों में स्कूल और छात्रों का अनुपात उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और राजस्थान में स्कूलों की संख्या छात्रों की तुलना में अधिक है. वहीं, तेलंगाना, पंजाब, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली और बिहार में छात्रों की संख्या स्कूलों से ज्यादा है. यह रिपोर्ट बताती है कि नई डेटा प्रणाली से छात्रों के ड्रॉपआउट और शिक्षा में प्रगति को सटीकता से ट्रैक किया जा सकेगा, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा.

उत्तर प्रदेश में अटल आवासीय में मुफ्त पढ़ाई करेंगे कामगारों के बच्चे

वाराणसी  उत्तर प्रदेश के श्रम विभाग में पंजीकृत मजदूरों के बच्चों को सीबीएससी बोर्ड की पढ़ाई कराने के लिए अटल आवासीय विद्यालय में मुफ्त प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए शैक्षिक सत्र 2025-26 में कक्षा 6 और कक्षा 9 में प्रवेश के लिए पंजीकृत निर्माण मजदूरों से आवेदन मांगे गए हैं। पात्र और इच्छुक पंजीकृत निर्माण श्रमिक अपने बच्चों के प्रवेश के लिए 25 जनवरी तक आफलाइन आवेदन कर सकते हैं। श्रम प्रवर्तन अधिकारी कुंवर रणंजय पांडेय ने बताया कि उत्तर प्रदेश भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बालक और बालिकाओं के प्रवेश अटल आवासीय विद्यालय समिति की ओर से संचालित अटल आवासीय विद्यालय में कराया जाएगा। यहां पर कक्षा 6 और 9 में 140-140 सीटों पर प्रवेश लिया जाएगा। इसमें 70-70 बालक और 70-70 बालिकाएं होगी। यह सीट गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी और चंदौली जिले के लिए है। प्रवेश के लिए आवेदन पत्र 20 जनवरी तक शहर के शास्त्रीनगर स्थित श्रमायुक्त कार्यालय से मुफ्त प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके बाद पूर्ण रूप से भरे हुए आवेदन पत्र सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ 25 जनवरी तक यहीं पर जमा किए जा सकता है।श्रमिक जिनका पंजीयन 30 नवंबर तक कम से कम तीन वर्ष पूरा कर चुका हो। इन श्रमिकों के अधिकतम दो बच्चों को प्रवेश मिलेगा। कक्षा छह में प्रवेश के लिए जन्मतिथि एक मई 2013 से पहले और 31 जुलाई 2015 के बाद नहीं होना चाहिए। कक्षा नौ में प्रवेश पाने के इच्छुक उम्मीदवार की जन्मतिथि एक मई 2010 से पहले और 31 जुलाई 2012 के बाद नहीं होना चाहिए। आवेदन के लिए कहां मिलेगा फॉर्म वे छात्र जो इन स्कूलों में आवेदन करना चाहते हैं, वे अटल आवासीय स्कूलों में नए सेशन में दाखिला लेने के लिए हाथरस, अलीगढ़, एटा व कासगंज के योग्यता पूरी करने वाले स्टूडेंट्स जिला प्रोबेशन अधिकारी, बीईओ, बीएसए, बीडीओ और श्रम विभाग ऑफिस से आवेदन फॉर्म प्राप्त कर भरकर जमा करें। आवेदन के लिए जरूरी योग्यता अटल आवासीय विद्यालयों में एडमिशन लेने के लिए बच्चों का मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, कोरोना काल में बेसहारा बच्चे, पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चे इसके लिए पात्र होंगे। साथ ही अगर छात्र कक्षा-6 में दाखिला ले रहा है, तो उसका जन्म 01 मई, 2013 से 31 जुलाई, 2015 के बीच होना चाहिए। कक्षा-9 में एडमिशन लेने वाले बच्चे का जन्म 01 मई, 2010 से 31 जुलाई, 2012 में होना चाहिए। एक परिवार से अधिकतम 02 बच्चे ही इन स्कूलों में एडमिशन पा सकते हैं। वहीं श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन 30 नवंबर, 2024 तक कम से कम 03 साल की सदस्यता पूरी कर चुके हो। कब आयोजित कराई जाएगी परीक्षा साल 2025-26 सेशन कक्षा-6 और कक्षा-9 में दाखिले के लिए 25 दिसंबर से ऑफलाइन प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं इसकी अंतिम तिथि 31 जनवरी, 2025 है। बता दें, इसके तहत कोविड के दौरान बेसहारा बच्चों को जिला प्रोबेशन अधिकारी ऑफिस में आवेदन कर सकेंगे। आवेदन पूरे होने के बाद 02 मार्च को श्रम विभाग द्वारा प्रवेश परीक्षा कराई जाएगी। वहीं वर्तमान में गभाना के टमकौली के स्कूल में कक्षा-6, 7 और 9 का पढ़ाई सत्र चल रहा है, जिसमें लगभग 360 स्टूडेंट्स शामिल हैं। इसमें से 140 छात्र 2025-26 में होने वाले बोर्ड एग्जाम में बैंठेगे। एडमिशन ले चुके छात्रों को मिलेंगी ये सुविधाएं अटल आवासीय स्कूलों में दाखिला लेने वाले बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ रहना-खाना बिल्कुल फ्री होगा। साथ ही सीबीएसई पाठ्यक्रमों का पालन करते हुए उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दी जाएगी। मॉर्डन क्लासरूम के साथ कंप्यूटर साइंस लैब आदि सुविधाएं दी जाएगी।

मध्य प्रदेश के स्कूलों में हुई 10 दिन की छुट्टी, बढ़ गया शीत कालीन अवकाश

भोपाल एमपी में बीतते वर्ष को विदाई देने व नए साल के स्वागत में जश्न मनाने के लिए स्कूली बच्चों को खासी छुट्टियां मिल गई हैं। प्रदेश के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में शीतकालीन अवकाश की घोषणा कर दी गई है। एमपी में राज्य सरकार के कोर्स वाले सरकारी और प्राइवेट स्कूलों तथा केंद्र सरकार के सीबीएसई, आईसीएसई कोर्स वाले स्कूलों में अलग अलग अवकाश अवधि की घोषणा की गई है। प्रदेश के केंद्रीय स्कूलों में जहां 9 और 10 दिन की छुट्टी रहेगी वहीं राज्य सरकार के स्कूलों में केवल 5 दिन की छुट्टी दी गई है। हालांकि रविवार पड़ जाने के कारण राज्य सरकार के स्कूली बच्चों का शीतकालीन अवकाश भी एक दिन और बढ़ गया है। स्कूली बच्चों को ऐसे में 6 दिन की लगातार छुट्टी मिल रही है। छात्रों को इस समय एक साथ पांच से लेकर दस दिन तक की छुट्टियां मिलेंगी, जो उन्हें 31 दिसंबर से 4 जनवरी तक मिलने वाली छुट्टियों के साथ मिलकर अधिक लंबी हो गई हैं। छुट्टियों की अवधि में विभिन्न विद्यालयों के लिए बदलाव मध्य प्रदेश में सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के साथ-साथ केंद्रीय और अन्य बोर्ड के स्कूलों में छुट्टियों की अवधि अलग-अलग होगी। राज्य सरकार से संबद्ध स्कूल: प्रदेश के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में 31 दिसंबर से 4 जनवरी तक 5 दिन की शीतकालीन छुट्टी घोषित की गई है। हालांकि, 5 जनवरी को रविवार होने के कारण बच्चों को एक और दिन की छुट्टी मिल रही है। इस तरह, राज्य सरकार के स्कूलों के छात्र 6 जनवरी से स्कूलों में वापस लौटेंगे। सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूल सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध स्कूलों में शीतकालीन अवकाश की अवधि अधिक होगी। सीबीएसई के स्कूलों में 24 दिसंबर से 1 जनवरी तक यानी 9 दिन की छुट्टी रहेगी, और स्कूल 2 जनवरी से खुलेंगे। वहीं, आईसीएसई बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में छुट्टियां 24 दिसंबर से 2 जनवरी तक होंगी, यानी 10 दिन की छुट्टी होगी। केंद्रीय विद्यालयों में शीतकालीन अवकाश: केंद्रीय विद्यालयों में भी छुट्टियों की घोषणा की गई है। इन स्कूलों में 31 दिसंबर से 2 जनवरी तक अवकाश रहेगा, और 3 जनवरी से स्कूल खुलेंगे। केंद्रीय विद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, यह अवकाश छात्रों के लिए कल यानी 31 दिसंबर से शुरू हो जाएगा।  इधर एमपी के सीबीएसई बोर्ड के स्कूलों में 24 दिसंबर से 1 जनवरी 2025 तक का यानि 9 दिनों का शीतकालीन अवकाश रहेगा। अब 2 जनवरी 2025 को ये स्कूल खुलेंगे। मध्यप्रदेश के स्थानीय कोर्स के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में 31 दिसंबर से 4 जनवरी 2025 तक का यानि 5 दिनों का शीतकालीन अवकाश घोषित किया गया है। चूंकि 5 जनवरी को रविवार है इसलिए एक दिन का अवकाश बढ़ गया है। ऐसे में एमपी के सरकारी और प्राइवेट स्कूल 6 जनवरी 2025 से लगेंगे। केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 1 के जनसंपर्क अधिकारी डा. कपिल भार्गव के अनुसार केंद्रीय विद्यालयों में शीतकालीन अवकाश घोषित किया गया है। आदेश के अनुसार कल से 2 जनवरी तक स्टूडेंट के लिए अवकाश रहेगा।

‘ईआरसीपी योजना से राजगढ़ क्षेत्र को मिलेगा पानी’, राजस्थान-अलवर के विद्यालय में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने किया प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान

जयपुर। केंद्रीय पर्यावरण,वन एवं जलवायु प​रिवर्तन मंत्री व अलवर सांसद श्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को अलवर जिले के राजगढ़ विधानसभा क्षेत्र में  राजकीय माध्यमिक विद्यालय, नयागांव माचाड़ी में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह कार्यक्रम में प्रतिभावान छात्रा-छात्राओं को सम्मानित किया। केंद्रीय मंत्री श्री यादव ने सम्मानित हुए छात्रा-छात्राओं को शुभकामना देते हुए कहा कि इस क्षेत्र के बच्चे बड़े प्रतिभावान है और ये जीवन में तरक्की कर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि पाड़ा, माचाड़ी और नयागांव तीनों ग्राम पंचायत के बीच में सांसद कोष से ई—लाइब्रेरी और खेल मैदान का निर्माण कराया जाएगा, उसके लिए तीनों ग्राम पंचायत भूमि उपलब्ध करायें। उन्होंने कहा कि सांसद बनने के बाद जब पहली बार बझेड़ा गांव में आए तो वहां के लोगों ने कहा कि काफी वर्षों से यहां केंद्रीय विद्यालय बनवाने की मांग चल रही है। इस मांग को  पूरा करने के लिए राजगढ़ में जल्द ही केंद्रीय विद्यालय बनवाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री श्री यादव ने कहा कि जल जीवन मिशन योजना में जिन ठेकेदारों ने अधूरे काम छोड़ दिए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जो गांव डार्क जोन में हैं, उनमें भी पानी पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईआरसीपी योजना कामें जो पानी आना था डीपीआर में राजगढ़ क्षेत्रा को भी शामिल कर दिया गया है, जिससे कि ईआरसीपी योजना का पानी राजगढ़ को भी मिलेगा । कार्यक्रम में  श्री अशोक गुप्ता, श्री बन्नाराम मीणा, अंजली यादव सहित प्रबुद्ध व्यक्ति और ग्रामीण मौजूद रहे। इसके पश्चात केंद्रीय मंत्री ने गणेश पोल स्थित रिद्धि-सिद्धि मंदिर में पूजा अर्चना की तथा राजगढ़ कस्बे के माचाडी चौक, चौपड़ बाजार में खुली जीप से अभिवादन करते हुए मालाखेड़ा दरवाजा पहुंचे। जहां उन्होंने कस्बे के मालाखेड़ा गेट का अनावरण  किया। उन्होंने कहा कि मालाखेड़ा दरवाजा  राजगढ़ की ऐतिहासिक शान रहा है।  उन्होंने कहा कि सांसद के रूप में राजगढ़ के विकास में कार्य करूंगा और कदम से कदम मिलाकर चलूंगा। इस मौके पर वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  श्री संजय शर्मा,  श्री अशोक गुप्ता, श्री बन्ना राम मीणा सहित प्रबुद्ध व्यक्ति एवं बडी संख्या में आमजन मौजूद रहे।

सरकार ने स्कूलों में प्रकाश की व्यवस्था के लिए हर विद्यालय को 20 हजार रुपए की राशि उपलब्ध कराई

भोपाल प्रदेश में कड़ाके की ठंड के मद्देनजर स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों में बिजली व्यवस्था सुचारू रखने के लिए कहा है ताकि सर्द हवाएं चलने पर कक्षाओं में खिड़की बंद रखकर पढ़ाई कराई जा सके। इसके चलते अंधेरा न हो और पठन पाठन का काम प्रभावित न हो। शासकीय विद्यालयों की कक्षाओं में विद्युत व्यवस्था के संबंध में मिलने वाली शिकायतों को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। इसमें कहा है कि सर्दी में ठंडी हवा से बचाव के लिए खिड़कियों को बंद करने पर कक्षाओं में पर्याप्त प्रकाश की आवश्यकता बढ़ जाती है। प्रकाश के अभाव में विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसमें सुधार के लिए कक्षाओं में आवश्यक प्रकाश की व्यवस्था की जाएं। हर कक्षा में कम से कम 4 एलईडी ट्यूबलाईट की व्यवस्था की जाए। प्रकाश व्यवस्था के लिए 7 हजार 125 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में हर विद्यालय के हिसाब से 20 हजार रुपए की राशि सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को उपलब्ध कराई गई है। शाला प्रभारियों को प्रकाश व्यवस्था के साथ बिजली के स्विच बोर्ड और आंतरिक विद्युतीकरण व्यवस्था अन्तर्गत तार की मरम्मत के लिये भी कहा है। ऐसे शासकीय विद्यालयों में जहां विद्युतीकरण नहीं है, एमपीईबी से एस्टीमेंट लेकर कर स्वीकृति के लिये वरिष्ठ कार्यालय को भेजे जाएं। इस कार्य को प्राथमिकता दिए जाने के लिए भी कहा है।  

भोपाल में स्कूलों की टाइमिंग बदली, जारी किया आदेश, अब 9 बजे से होंगा संचालन

भोपाल जिले में तापमान में कमी और शीतलहर के प्रभाव को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी शासकीय, अशासकीय, सीबीएसई और अन्य बोर्ड से संबंधित विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि विद्यालय का संचालन अब सुबह 9 बजे से पूर्व नहीं किया जाएगा। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों के स्वास्थ्य पर शीतलहर के प्रतिकूल प्रभाव को कम करना है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। हालांकि, परीक्षाओं का संचालन पूर्व नियत समय सारणी के अनुसार ही किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। यह कदम विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए उठाया गया है। सभी विद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे इस आदेश का पालन करें और विद्यार्थियों की भलाई के लिए उचित कदम उठाएं। राजधानी भोपाल में कड़ाके की ठंड के चलते स्कूलों का समय बदल दिया गया है। अब जिले के 12 दिसंबर से सभी स्कूल सुबह 9 बजे के बाद ही खुलेंगे। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं। डीईओ एनके अहिरवार ने बुधवार को सरकारी-प्राइवेट स्कूलों के लिए यह निर्देश जारी कर दिए। यह निर्देश सीबीएसई, आईसीएसई और एमपी बोर्ड से जुड़े स्कूलों के लिए रहेगा। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के आदेश के बाद गुरुवार से स्कूल नए समय पर लगेंगे। अभी और गिरेगा तापमान मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर भारत में जारी बर्फबारी और ठंडी हवाओं के कारण अगले कुछ दिनों में तापमान और गिर सकता है। अनुमान है कि अगले 6-7 दिनों तक न्यूनतम तापमान 8 से 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा। साथ ही, प्रदेश के न्यूतम तापमान में भी 2 से 3 डिग्री की कमी देखी जा सकती है। इंदौर में पांच डिग्री लुढ़का पारा प्रदेश के पांच बड़े शहरों में भोपाल का रात का न्यूनतम तापमान सबसे कम 9.2 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके अलावा ग्वालियर में 10.8 डिग्री, इंदौर में 11.4 डिग्री, उज्जैन में 11.5 डिग्री और जबलपुर में 12.4 डिग्री दर्ज किया गया। इंदौर में दिन के अधिकतम तापमान में भारी गिरावट देखने को मिली। यहां तापमान सबसे कम 22.9 डिग्री दर्ज किया गया। इसके अलावा भोपाल में 23.4 डिग्री, उज्जैन में 24.5 डिग्री, ग्वालियर में 24.8 डिग्री और जबलपुर में 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। पिपरसमा (शिवपुरी) में 6.8 डिग्री, मरूखेडा (नीमच) में 7.4 डिग्री, राजगढ़ में 7.6 डिग्री, गिरवर (शाजापुर)/गुना में 8.6 डिग्री और सीहोर/पचमढ़ी (नर्मदापुरम) में 9 डिग्री के साथ इन शहरों में प्रदेश का सबसे कम तापमान दर्ज किया गया।  

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