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प्रिंसिपल के सिर में गोली मारकर छात्र स्कूटी लेकर हो गया फरार,जाने क्या है पूरा मामला

छतरपुर  छतरपुर जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल की स्कूल में ही पढ़ने वाले छात्र ने गोली मारकर हत्या कर दी। मर्डर करने के बाद आरोपी छात्र मृतक प्रिंसिपल की स्कूटी लेकर मौके से फरार हो गया। घटनाओं की जानकारी लगने के बाद भारी संख्या में पुलिस बल एवं आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। एफएसएल की टीम घटना की बारीकी से जांच कर रही है। घटना शुक्रवार के दोपहर 1:00 बजे की है। छतरपुर जिले के धमोरा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाने वाले प्रिंसिपल पुष्पेंद्र सक्सेना के सिर उस वक्त गोली मार दी जब वह स्कूल में बनी बाथरूम में गए हुए थे। इसी बीच स्कूल में ही पढ़ने वाला छात्र पीछे से पहुंचा और उनके सिर में गोली मार दी। हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। 12वीं क्लास के छात्र ने घटना को दिया अंजाम आरोपी छात्र कक्षा 12वीं का है। वह गणित विषय से पढ़ाई कर रहा था। घटना को अंजाम देने के पीछे क्या वजह क्या है फिलहाल इस का पता नही लग सका है। पुलिस इस बात का पता लगाने में जुट गई है कि आरोपी छात्र के पास अवैध हथियार कहां से आया और उसने इस वारदात को अंजाम क्यों दिया। फिलहाल आरोपी छात्र फरार है और मौके पर एडिशनल एसपी विक्रम सिंह एसएसपी अमन मिश्रा मौके पर मौजूद है| गोली की आवाज से दहला स्कूल स्कूल में पढ़ाने वाले अन्य शिक्षकों ने बताया की अचानक से गोली चलने की आवाज आई किसी को कुछ समझ में नहीं आया। इस पहले हम सब कुछ समझ पाते छात्र दौड़ते हुए बाथरूम से बाहर निकला। हमने अंदर जाकर देखा तो प्रिंसिपल सर की लाश जमीन पर खून से लथपथ पड़ी हुई थी। घटना के तुरंत के स्कूल में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को घर भेज दिया है वहीं पुलिस मामले की बारीकी से जांच कर रही है।

बच्चो के लिए अच्‍छी खबर: प्रदेश के सभी स्कूलो में 31 दिसंबर से 4 जनवरी तक अवकाश रहेगा , परिवार के साथ बनाएं प्‍लान; देखें छुट्टियों की

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने दिसंबर महीने में कई महत्वपूर्ण सार्वजनिक अवकाशों की घोषणा की है, जिसमें 3 दिसंबर को भोपाल गैस त्रासदी की याद में स्थानीय अवकाश शामिल है। इसके अलावा, क्रिसमस डे (25 दिसंबर) पर भी स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तरों में छुट्टी रहेगी। इस महीने को लेकर कुछ अन्य ऐच्छिक अवकाश भी घोषित किए गए हैं, जिससे कर्मचारियों और छात्रों को अतिरिक्त छुट्टियां मिलेंगी। 3 दिसंबर, 2024 को भोपाल गैस त्रासदी की 40वीं बरसी के अवसर पर स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है। इसके साथ ही, 25 दिसंबर को क्रिसमस डे के अवसर पर प्रदेशभर में स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। इसके अलावा, दिसंबर के महीने में कई ऐच्छिक अवकाश भी घोषित किए गए हैं, जिनमें 3 दिसंबर को ‘विश्व विकलांग दिवस’, 4 दिसंबर को ‘क्रांतिसूर्य टंट्या भील बलिदान दिवस’, 18 दिसंबर को ‘गुरु घासीदास जयंती’, 14 दिसंबर को ‘दत्तात्रय जयंती’, 27 दिसंबर को ‘महाराजा खेतसिंह खंगार जी की जयंती’, और 31 दिसंबर को ‘बालीनाथ जी बैरवा जयंती’ शामिल हैं। शीतकालीन अवकाश की भी घोषणा इसके अलावा, मध्य प्रदेश सरकार ने शीतकालीन अवकाश की घोषणा भी कर दी है। इस वर्ष शीतकालीन अवकाश 31 दिसंबर से 4 जनवरी तक रहेगा, जो अगले दिन 5 जनवरी को रविवार की छुट्टी से जुड़कर 6 जनवरी तक मिलेगा। इन पांच दिनों के दौरान सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद रहेंगे। जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार ने भी स्कूलों में शीतलाकीन अवकाश का ऐलान कर दिया है। इस बार मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में 31 दिसंबर से 4 जनवरी 2025 तक शीतकालीन अवकाश की घोषणा की है। इस बाबत आदेश जारी कर दिया गया है। मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी स्कूलों शीतकालीन अवकाश किया जाता है, हालांकि अभी तक किसी भी राज्य ने इनकी घोषणा नहीं की है। अभी तक मध्य प्रदेश के स्कूलों में पांच दिन की विंटर वेकेशन घोषित की गई है। 6 जनवरी को रविवार होने की वजह से इस दिन भी विद्यालय बंद रहेंगे। ऐसे में मध्य प्रदेश के स्कूलों में 6 दिनों की छुट्टी रहेगी। न्यू ईयर के अवसर पर छुट्टी मिलने से स्कूली छात्रों में खुशी की लहर है।  दिल्ली में विंटर वेकेशन दिल्ली के स्कूलों में शीतकालीन छुट्टियां जनवरी 2024 के आरंभ में होगी। ताजा जानकारी के मुताबिक दिल्ली में स्कूलों को 1 जनवरी से 6 जनवरी (Delhi Winter Vacation 2024 Dates) तक बंद रखा जाएगा। हालांकि दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय द्वारा विंटर वेकेशन की डेट्स अलग से घोषित की जाएंगी। पिछले रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी के पहले सप्ताह में शीतकालीन अवकाश रहेगा। चार दिन की लंबी छुट्टी का मौका भोपाल में 3 दिसंबर को गैस त्रासदी के मौके पर स्थानीय अवकाश होने के कारण, अगर कोई कर्मचारी या छात्र सोमवार को भी छुट्टी लेता है, तो उसे लगातार चार दिन का अवकाश मिलेगा। वहीं, कुछ स्कूलों में परीक्षा का दौर भी होने की वजह से छुट्टियों की प्लानिंग में बदलाव हो सकता है। घूमने का बेस्ट मौका मध्य प्रदेश के लोग इन छुट्टियों का लाभ उठाकर प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों जैसे उज्जैन, महेश्वर, ओंकारेश्वर, सांची और माण्डी जैसी जगहों पर घूमने का प्लान बना सकते हैं। इन स्थानों पर धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल हैं, जो परिवार के साथ छुट्टियां बिताने के लिए आदर्श हैं। इस दिसंबर में मध्य प्रदेश के लोगों को विभिन्न छुट्टियों का लुत्फ उठाने का एक बेहतरीन मौका मिलेगा, और वे इन अवकाशों का उपयोग अपने परिवार के साथ सैर-सपाटे, आराम और नए साल की खुशियों का स्वागत करने के लिए कर सकते हैं।  

स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किये निर्देश, अद्धवार्षिक मूल्यांकन 16 से 21 दिसम्बर की अवधि में किया जायेगा

भोपाल प्रदेश की शासकीय एवं अशासकीय शालाओं में शैक्षणिक सत्र 2024-25 में इस वर्ष 16 दिसम्बर से अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन किया जायेगा। इसके लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किये हैं। यह अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन कक्षा 3 से 8 की सभी शासकीय शालाओं, अशासकीय शालाओं के साथ मदरसों में भी होगा। अद्धवार्षिक मूल्यांकन 16 से 21 दिसम्बर की अवधि में किया जायेगा। अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन 30 नवम्बर 2024 तक पढ़ाये गये पाठ्यक्रम के अनुसार किया जायेगा। मूल्यांकन के लिये प्रश्न पत्र राज्य शिक्षा केन्द्र तैयार कर रहा है। कक्षा 5 और 8 के विषयवार प्राप्त अंकों की प्रविष्टि परीक्षा पोर्टल पर की जायेगी। अधिभार की गणना शाला द्वारा नहीं की जायेगी। यह गणना सॉफ्टवेयर में स्वत: ही हो जायेगी। इस संबंध में विस्तृत निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अपलोड कर दिये गये हैं। कक्षा 5 और 8 के बच्चों की पंजीकरण की व्यवस्था ऑनलाइन पोर्टल rskmp.in पर की गई है। अतिरिक्त अतिथि शिक्षकों को रिलीव करने संबंधी निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग ने GFMS पोर्टल पर पूर्व से कार्यरत अतिरिक्त अतिथि शिक्षकों को रिलीव करने के संबंध में प्रदेश के समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये हैं। निर्देश में बताया गया है कि शासकीय शालाओं में नवीन भर्ती से शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। इसके साथ ही उच्च पद प्रभार से भी शिक्षक पदस्थ किये गये हैं। इस कारण स्वीकृत पद के विरूद्ध रिक्त पद उपलब्ध न होने पर संबंधित विषय में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को रिलीव किया जाना होगा। इस संदर्भ में एक ही विषय में एक से अधिक अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं तथा रिक्त पद एक ही है, तो अतिथि शिक्षक को रिलीव करने की कार्यवाही की जायेगी। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश स्कूल शिक्षा विभाग के पोर्टल पर प्रदर्शित किये गये है।  

वायु प्रदूषण के बीच दिल्ली-NCR में खुलेंगे स्कूल! SC ने कहा, AQI लेबल देखें, फिर

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर सुनवाई की और स्कूल खोलने से पहले दो दिन और इंतजार करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा, “हमारा सुझाव है कि अगले दो दिनों के लिए AQI लेबल देखें.. परसों डेटा लाएं, फिर हम देखेंगे कि पिछले दो दिनों में क्या रुझान रहा है और फिर शिक्षण संस्थान खोलने से जुड़े मामले पर फैसला लेंगे।” दिल्ली एनसीआर में स्कूल फिर से खुल सकते हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने सीएक्यूएम (Commission for Air Quality Managemen) को ऑफलाइन स्कूलों या हाइब्रिड कक्षाओं की अनुमति देने पर विचार करने की अनुमति दी है. एससी ने मध्याह्न भोजन और ऑनलाइन शिक्षा तक पहुंच की कमी को इस अपवाद के पीछ के मुख्य कारणों के तौर पर बताया है. फिलहाल सीएक्यूएम के फैसले तक कक्षाएं ऑनलाइन ही रहेंगी.  गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान IV (जीआरएपी IV) के तहत वर्तमान में लागू कुछ उपायों में छूट देने पर विचार करने के लिए सहमति व्यक्त की है. इन उपायों में स्कूलों को बंद करना भी शामिल है.  इसे लेकर कुछ माता-पिता ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि हर घर में स्वच्छ हवा नहीं है और सभी के पास बच्चों की ऑनलाइन कक्षाओं के लिए तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. इसके अलावा, दिल्ली सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के “गंभीर से अधिक” श्रेणी में पहुंचने के बाद सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया था. कक्षा 10 और 12 को छोड़कर सभी कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित कर दिया गया था.  बता दें कि जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ इस पर सुनवाई कर रही है कि ग्रेप 4 के तहत लगी पाबंदियों को जारी रखा जाए या उनमें कुछ छूट दी जाए. इस पर SC ने पूछा कि कितनी चेकपोस्ट की जांच की गई? वकील ने बताया कि कोर्ट कमिश्नर ने कुल 83 चेकपोस्ट की जांच की है. एमाइकस अपराजिता सिंह ने कहा कि कई चेक पोस्ट्स पर तो कोर्ट के आदेश के बाद कर्मचारियों की तैनाती की गई. उनके बीच दिशा-निर्देशों को लेकर भी कोई स्पष्टता नहीं है.  सर्वे करने गए वकील ने बताया कि चेक पोस्ट्स पर चेकिंग तो हो रही थी लेकिन प्रभावी तरीके से नहीं. कुछ चेक पोस्ट पर हरियाणा और दूसरी तरफ से आने वाले वाहनों को रोका जा रहा था. वहां दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग के कर्मचारी नहीं थे. कोई बैरिकेड नहीं थे. पुलिस ट्रकों को रोकने के लिए सड़क के बीच जाकर चेकिंग कर रही थी. दिल्ली सरकार के वकील ने बताया कि तीन से चार अलग-अलग स्तर के कर्मचारी चेकिंग मे लगाए गए थे. दिल्ली पुलिस,नगर निगम के कर्मचारी और नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवक थे.  इस पर एमाइकस ने कहा कि ट्रक ड्राइवरों को यह नहीं पता था कि उन्हें दिल्ली में प्रवेश करना है या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि 18 नवंबर के बाद क्या कोई लिखित आदेश आया था जिसमें पुलिस को चेकपॉइंट पर स्थायी रूप से तैनात करने का निर्देश दिया गया था? ट्रकों के प्रवेश को रोकने के लिए 13 एंट्री प्वाइंट पर तैनात लोगों को सूचित करने के लिए दिल्ली सरकार ने क्या कदम उठाए? ASG ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि आदेश दिए गए थे लेकिन अभी हमारे पास कॉपी नहीं है.  पीठ ने कहा कि हम बयान दर्ज करना चाहते हैं. हमें बताएं कि क्या आदेश को लागू करने के लिए इन चेकपोस्ट पर 24/7 पुलिसकर्मियों को तैनात करने के लिए कोई आदेश जारी किया गया था? ASG एश्वर्या भाटी ने कहा कि हमें 23 प्रमुख चेकपॉइंट पर पुलिस तैनात करने के आदेश दिए जाने चाहिए. अभी आदेश नहीं आया है, लेकिन हमारे पास की गई कार्रवाई का विवरण है.  उधर, कोर्ट कमिश्नर ने बताया कि अदालत के आदेश का पालन नहीं हो रहा है. कोर्ट कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कुछ जगहों पर चेक पोस्ट बने हैं चेकिंग हो रही है लेकिन वह प्रभावी नहीं है.  बेरिकेड्स नहीं होने की वजह से अवैध रूप से दिल्ली में घुस रहे ट्रकों को रोकने के लिए बीच सड़क पर हाईवे के चलते ट्रैफिक में पुलिस के जवान कूदकर ट्रकों को रोकते हुए पाए गए.  गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 22 तारीख को 13 वकीलों को कोर्ट कमिश्नर्स नियुक्त किया था जिन्हें रिपोर्ट देना था कि दिल्ली में इंटर करने वाले ट्रकों को रोकने के आदेश का पालन हो रहा है या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार ने 18 से 23 नवंबर के बीच ग्रेप 4 के दिशानिर्देशों का पालन ठीक से नहीं किया है. ट्रकों को दिल्ली आने से रोकने के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि सिर्फ़ 13 पोस्ट पर ही क्यों चेकपोस्ट लगे? यह लापरवाही सिर्फ़ 23 प्वाइंट पर की गई. हम CAQM आयोग को धारा 14 के तहत दिल्ली के पुलिस आयुक्त पर मुकदमा चलाने का निर्देश देंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम CAQM को सभी एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने, जवाब लेने और उन पर मुकदमा चलाने का निर्देश देंगे.  सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के चरण-4 के तहत प्रतिबंधों को ठीक से लागू न करने के लिए दिल्ली सरकार की भी आलोचना की। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार ने 18 से 23 नवंबर के बीच ग्रुप 4 के दिशा-निर्देशों का ठीक से पालन नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि ट्रकों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोकने के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए। यूपी के इन शहरों में खुल गए स्कूल दिल्ली से सटे नोएडा में स्कूल बंद हैं. इसका आदेश शनिवार को जारी कर दिया गया था. गाजियाबाद के स्कूलों को खोलने का भी कोई नोटिस नहीं आया है. वहीं, मेरठ के डीएम दीपक मीणा ने सोमवार, 25 नवंबर 2024 से सभी स्कूलों को खोलने का निर्देश दिया है. यहां अब ऑनलाइन क्लास के बजाय बच्चों को स्कूल जाकर ही पढ़ाई करनी होगी. मेरठ और हापुड़ में स्कूल, कॉलेज, कोचिंग समेत सभी … Read more

डेढ़ लाख बालिकाओं को दिलाया गया रानी लक्ष्मीबाई आत्म रक्षा प्रशिक्षण

स्कूल में पढ़ने वाली बालिकाओं को आत्म सुरक्षा के लिये दिया जा रहा है प्रशिक्षण  प्रदेश में एक लाख 50 हजार बालिकाओं को आत्म सुरक्षा के लिये जूडो-कराटे का प्रशिक्षण दिलाया गया डेढ़ लाख बालिकाओं को दिलाया गया रानी लक्ष्मीबाई आत्म रक्षा प्रशिक्षण भोपाल प्रदेश में शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाली बालिकाओं में आत्म-विश्वास और सुरक्षा की भावना सशक्त करने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा रानी लक्ष्मीबाई आत्म सुरक्षा प्रशिक्षण योजना चलाई जा रही है। योजना से प्रदेश में करीब एक लाख 50 हजार बालिकाओं को जूडो-कराटे का प्रशिक्षण दिलाया गया है। योजना में 15 हजार 245 शासकीय विद्यालयों की 80 हजार 466 बालिकाओं को प्रशिक्षण दिलाया गया। इसी के साथ प्रदेश में संचालित 207 कस्तूरबा गांधी विद्यालय और 324 नेताजी सुभाष चन्द्र बोस बालिका छात्रावास में अध्ययनरत 70 हजार 450 बालिकाओं को जूडो-कराटे का प्रशिक्षण दिलाया गया। स्कूल शिक्षा विभाग ने कक्षा 1 से 8 की बालिकाओं के विद्यालयों के लिये प्रशिक्षण राशि भी जारी की है। दृष्टि बाधित बच्चों को पुस्तकों का वितरण स्कूल शिक्षा विभाग ने दृष्टि बाधित बच्चों की सुविधा को देखते हुए उनके पाठ्यक्रम की समस्त पुस्तकें ब्रेल लिपि में उपलब्ध करवाई हैं। ब्रेल लिपि पाठ्य पुस्तकों का मुद्रण शासकीय ब्रेल प्रेस भोपाल से कराया गया है। दिव्यांग बच्चों का चिकित्सीय मूल्यांकन प्रदेश के शासकीय स्कूलों में पढने वाले दिव्यांग बच्चों का चिकित्सीय मूल्यांकन शिविरों के माध्यम से कराया गया। पिछले वर्ष 30 जिलों के विकासखंडों पर आयोजित शिविर में 6 हजार 560 दिव्यांग बच्चों की पहचान कर उन्हें उनकी आवश्यकता के उपकरण वितरित किये गये। इसी के साथ दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को भी गृह आधारित शिक्षा एवं बच्चों की दैनिक गतिविधियों पर फेस-टू-फेस प्रशिक्षण जिला स्तर पर प्रदान किया गया है।  

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों को प्रशासन का बड़ा आदेश, स्कूलों के बोर्ड पर टीचरों की फोटो लगानी होगी

भोपाल मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों को लेकर प्रशासन ने बड़ा आदेश जारी किया है. लोक शिक्षण संचालनालय ने आदेश दिया है कि प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों के बोर्ड पर टीचरों की फोटो लगानी होगी. ताकि, बच्चे अपने टीचर को पहचान सकें. गौरतलब है कि, सागर जिले में कुछ टीचर अपनी जगह किराये के लोगों से बच्चों को पढ़वा रहे थे. इसकी जानकारी लगते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया था. इसके बाद विभाग ने कई टीचरों को सस्पेंड भी कर दिया था. लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों ने इस आदेश का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही है. बता दें, हाल ही में शिक्षा विभाग को जानकारी मिली थी कि सागर जिले में कुछ टीचर और जनशिक्षक स्कूल नहीं जा रहे. वे अपनी जगह कुछ दूसरे लोगों को भेजकर बच्चों की क्लास लगवा रहे हैं. विभाग ने जब इसकी जांच की तो यह जानकारी सही पाई गई. इसके बाद शिक्षा विभाग ने 3 जनशिक्षकों और 5 टीचरों को सस्पेंड कर दिया था. इन्होंने 3 से 5 हजार रुपए महीने मे दूसरे लोगों को अपनी जगह काम पर लगाया था. इस मामले में लापरवाही बरतने और निरीक्षण न करनें पर जिला शिक्षा अधिकारी, जिला परियोजना अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, संकुल प्राचार्य को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. इन पर चला सरकार का डंडा जानकारी के मुताबिक, रूप सिंह चढ़ार, इंद्र विक्रम सिंह परमार,अनिल मिश्रा, जानकी तिवारी, अवतार सिंह ठाकुर ने अपनी जगह दूसरे लोगों को पढ़ाई के लिए रखा था. इन्होंने 3 से 5 हजार रुपये देकर किराए पर टीचर रख लिए थे. ये धांधली मुख्य तौर से जिले के खुरई, मालथौन, जैसीनगर, बिलहरा इलाकों से सामने आए. इन शिक्षकों का वेतन 50 से 70 हजार रुपये है. ये बच्चों को पढ़ाने कभी स्कूल नहीं गए.

जबलपुर के 5 प्राइवेट ने वसूली 166 करोड़ रुपए की अवैध फीस, 2 लाख रुपये का जुर्माना, ऐसे हुआ खुलासा

जबलपुर शहर के पांच निजी स्कूलों की 31.5 करोड़ रुपए की अवैध फीस वसूली पकड़ी गई है। यह रकम इन स्कूलों के संचालकों ने 52 हजार छात्रों से वसूल की थी। कलेक्टर दीपक सक्सेना के निर्देश पर हुई जांच में इसका खुलासा हुआ है। सेंट अगस्टीन स्कूल सगड़ा, सेंट्रल एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल विजयनगर, एमजीएम हायर सेकेंडरी स्कूल हाथीताल, आदित्य कान्वेंट स्कूल गोपालबाग एवं अशोका हॉल जूनियर एंड हाई स्कूल विजय नगर के संचालकों पर दो-दो लाख रुपए का जुर्माना लगाते हुए अवैध तरीके से वसूली गई फीस 30 दिन के भीतर अभिभावकों को वापस किए जाने के आदेश दिए गए हैं। इन स्कूलों को लौटाने होंगे पैसे सेंट अगस्टीन स्कूल, सगड़ा- 4.76 करोड़ रुपये सेंट्रल एकेडमी हायर सेकेंडरी, विजयनगर- 3.86 करोड़ रुपये एमजीएम हायर सेकेंडरी, हाथीताल- 7.19 करोड़ रुपये आदित्य कॉन्वेंट स्कूल, चेरीताल- 5.03 करोड़ रुपये अशोका हॉल जूनियर और हाई स्कूल, विजयनगर- 10.67 करोड़ रुपये जिला कलेक्टर दीपक सक्सेना  ने बताया कि इन स्कूलों ने 2024-25 सत्र के लिए फीस में अत्यधिक बढ़ोतरी की थी. इस पर अभिभावकों ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जिला समिति ने गहन जांच की. जांच में पाया गया कि ये स्कूल मनमाने तरीके से फीस वसूल रहे थे. जांच के बाद प्रशासन ने सभी स्कूलों को निर्देशित किया है कि वो बढ़ी हुई फीस वसूली के बजाय पहले से तय फीस ही अभिभावकों से लेंगे. प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए 5 निजी स्कूलों के मालिकों को जुर्माने की दो-दो लाख की राशि 30 दिन के भीतर जमा करने के लिए निर्देशित किया है.     अशोका हॉल जूनियर और हाई स्कूल, विजयनगर- 10.67 करोड़ रुपये जिला कलेक्टर दीपक सक्सेना  ने बताया कि इन स्कूलों ने 2024-25 सत्र के लिए फीस में अत्यधिक बढ़ोतरी की थी. इस पर अभिभावकों ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जिला समिति ने गहन जांच की. जांच में पाया गया कि ये स्कूल मनमाने तरीके से फीस वसूल रहे थे. इन स्कूलों पर प्रशासन ने ठोंका 2-2 लाख रुपये का जुर्माना इन 5 स्कूल प्रबंधनों पर 2-2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसे 30 दिनों के भीतर जमा करने के आदेश दिए गए हैं. साथ ही अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि को लौटाने का निर्देश भी दिया गया है. फीस के नाम पर 166 करोड़ की अवैध वसूली मध्य प्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम 2017 के तहत गठित जिला समिति ने अब तक जिले के 25 स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 160 करोड़ रुपये से अधिक की फीस वापसी सुनिश्चित की है. इस निर्णय से प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि छात्रों और अभिभावकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे.  

राजस्थान में प्रदूषण के कारण स्कूलों में छु्ट्टी, 300 के पार पहुंचा AQI; जानिए आदेश

जयपुर राजस्थान में प्रदूषण अब एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है. राजस्थान के इतिहास में पहली बार प्रदूषण के कारण सरकार को स्कूल बंद करने का फैसला लेना पड़ा है. राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंचने के कारण, जिला प्रशासन ने स्कूलों में 20 से 23 नवंबर तक छुट्टी घोषित की है. यह आदेश राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बाद लिया गया है. ख़तरनाक AQI के कारण स्कूलों में अवकाश जिला कलक्टर किशोर कुमार ने आदेश जारी कर बताया कि खैरथल-तिजारा में स्थित सभी राजकीय और गैर-राजकीय विद्यालयों में 20 से 23 नवंबर तक पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए अवकाश घोषित किया गया है. उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार की बाधा न हो, इसके लिए ऑनलाइन कक्षाओं का आयोजन करना होगा. इस दौरान स्कूलों में शिक्षकों की छुट्टी नहीं होगी और वे स्कूल आकर बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाएंगे. यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण के कारण लिया गया है. ग़ौरतलब है कि राजस्थान में सर्दी बढ़ने के साथ ही करीब 25 से ज्यादा जिलों में एक्यूआई ख़तरनाक स्तर पर पहुंच चुका है. यहां कि कई जिले खतरनाक स्तर पर प्रदूषित हो चुके हैं. राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, इस समय राजस्थान के कई प्रमुख जिले जैसे झुंझुनूं, भिवाड़ी, करौली और बीकानेर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 से भी ज्यादा दर्ज किया गया है. झुंझुनूं का AQI 432, बहरोड़ का 350, भिवाड़ी का 348 और अलवर का 175 तक पहुंच चुका है, जो एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है. राजस्थान-दिल्ली में आरोप प्रत्यारोप दिल्ली के मुख्यमंत्री आतिशी ने दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण के लिए राजस्थान को भी दोषी ठहराया था मगर राजस्थान सरकार का कहना है कि राजस्थान की आबो हवा दूसरे राज्यों की वजह से ख़राब हुई है. राजस्थान में न तो पराली जलाई जाती है और न ही इतनी फैक्ट्रियां हैं जिनकी वजह से प्रदूषण हो. इस बीच, सरकार ने लोगों से प्रदूषण को लेकर सतर्क रहने और मास्क पहनने जैसी सावधानियां बरतने की अपील की है, ताकि प्रदूषण से होने वाली समस्याओं से बचा जा सके. जानें आदेश में क्या? कलक्टर की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश व दिल्ली-एनसीआर में एक्यूआई 450 पार जाने के बाद राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, बीकानेर को आदेश जारी किए थे। उसी के अनुसरण में खैरथल-तिजारा में स्थित सभी राजकीय और गैर राजकीय विद्यालयों में प्राथमिक कक्षाओं के लिए 20 नवंबर से 23 नवंबर तक भौतिक अवकाश घोषित किया जाता है। इस दौरान शिक्षक विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन क्लास संचालित करने की व्यवस्था करेंगे। यह आदेश केवल विद्यार्थियों के लिए ही लागू होगा।  

MP में सर्दी बढ़ी: ठंड की दस्तक के साथ ही बदली स्कूलों की टाइमिंग, 20 नवंबर के बाद और बढ़ेगी ठंड

भोपाल  मध्य प्रदेश के तापमान में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है राजधानी भोपाल में भी ठंड का असर बढ़ने लगा है। भोपाल में सुबह लगने वाली स्कूलों ने अपना समय बढ़ाना शुरू कर दिया है। दरअसल सर्द हवाएं चलने से ठंड का असर है। इस वजह से अब स्कूलों की टाइमिंग भी बदली जा रही है। भोपाल में कई प्राइवेट स्कूलों ने 30 मिनट तक टाइमिंग बढ़ा दी है। इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर-उज्जैन में भी समय बदलेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 20 नवंबर के बाद सर्दी का असर और बढ़ेगा। रात के तापमान में आ रही गिरावट प्रदेश में ठंड का असर दिखने लगा है पचमढ़ी सबसे ठंडा है यहां का न्यूनतम पर 7.8 तक लुढ़क चुका है। मौसम विभाग की माने तो पहाड़ों में जेटस्ट्रीम हवाएं चलने और वेस्टर्न डिस्टबेंस (पश्चिम विक्षोभ) की वजह से पिछले एक सप्ताह से कई शहरों में रात का टेम्प्रेचर लुढ़का है। भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तापमान सामान्य से 2 डिग्री तक कम है। वहीं, ग्वालियर-इंदौर में सामान्य के बराबर है।आने वाले तीन-चार दिनों में कई शहरों में रात के टेम्प्रेचर में 2 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट हो सकती है। उत्तरी हिस्से यानी ग्वालियर-चंबल संभाग में ठंड का असर ज्यादा बढ़ा रहेगा। राजधानी में इन स्कूलों के समय में परिवर्तन राजधानी भोपाल के कई निजी स्कूलों के समय में परिवर्तन किया गया है जिनमें से कोलार, अरेरा कॉलोनी और ईदगाह हिल्स स्थित सेंट जोसेफ स्कूल ने अपनी टाइमिंग बढ़ा दी है। जो स्कूल सुबह 7.30 बजे शुरू होते थे, वह आज से सुबह 8 बजे लगना शुरू हो गए हैं। सेज इंटरनेशनल स्कूल ने एक हफ्ते पहले ही समय में बदलाव कर दिया था। अन्य स्कूलों की टाइमिंग भी बदली जा रही है। मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों का न्यूनतम तापमान पचमढ़ी में रविवार-सोमवार की रात तापमान 8.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, भोपाल में 13.2 डिग्री, इंदौर में 15.7 डिग्री, ग्वालियर में 16.2 डिग्री, उज्जैन में 15 डिग्री और जबलपुर में 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा। भोपाल और जबलपुर में पारा सामान्य से नीचे रहा। इसी तरह छिंदवाड़ा में 12.6 डिग्री, मंडला में 10.2 डिग्री, नौगांव में 12.2 डिग्री, रीवा में 12.6 डिग्री, उमरिया में 11.6 डिग्री और बालाघाट में 11.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।

UP में 27 हजार प्राथमिक विद्यालयों को नजदीकी विद्यालय में विलय करते हुए उन्हें बंद करने की तैयारी !

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के 27 हजार बेसिक स्कूलों के जल्द बंद होने की खबरों ने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। अब सरकार की ओर से इन खबरों का खंडन कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कहा गया है कि 27 हजार प्राथमिक विद्यालयों को नजदीकी विद्यालय में विलय करते हुए उन्हें बंद करने की बाते कहीं जा रही है, जो बिल्कुल भ्रामक और निराधार है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से यह भी कहा गया कि इस संबंध में ऐसी कोई प्रक्रिया गतिमान नहीं है।  बेसिक शिक्षा विभाग के एक्स पर इस संबंध में कई पोस्ट किए गए हैं। पोस्ट के जरिये बेसिक शिक्षा विभाग ने बताया कि मीडिया में ऐसी खबरें चल रही है। इसमें 27 हजार प्राथमिक विद्यालयों को नजदीकी विद्यालयों में विलय करते हुए बंद करने की बात की गई है, जो बिल्कुल भ्रामक और निराधार है। साथ ही यह भी साफ किया गया कि किसी भी विद्यालय को बंद किए जाने की कोई प्रक्रिया नहीं चल रही है। ड्राप आउट दर कम करने की कोशिश जारी वहीं विभाग की ओर से बताया गया कि प्रदेश का प्राथमिक शिक्षा विभाग विद्यालयों में मानव संसाधन और आधारभूत सुविधाओं के विकास, शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने पोस्ट के जरिये बताया कि छात्रों विशेषकर बालिकाओं के ड्राप आउट दर को कम करने के लिए विभाग लगातार प्रयत्नशील है। इसको लेकर समय-समय पर विभिन्न अध्ययन भी किए जाते रहे हैं। इसके साथ ही विभाग ने बताया कि बीते सालों में प्रदेश के विद्यालयों में कायाकल्प, निपुण, प्रेरणा आदि योजनाओं के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति और सुधार हुए हैं। विभाग के लिए प्रदेश के छात्रों का हित सर्वोपरि है। बता दें, 50 से कम बच्चों वाले प्राथमिक स्कूलों को बंद कर नजदीकी स्कूलों में मर्ज किये जाने की खबरे चल रही थी। फिलहाल इन खबरों का खंडन कर दिया गया है। एक्स पर पूछा जा रहा ये सवाल आपके द्वारा जारी खंडन को झूठा करार देते हुए यह कागज वायरल हो रहा है। कागज 13 और 14 नवंबर को आयोजित बैठक को लेकर जारी विस्तृत एजेंडा का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें स्पष्ट रूप विद्यालयों को मर्ज करने की विस्तृत रूपरेखा स्पष्ट की गई थी। कुछ कहना चाहेंगे?

मार्गदर्शिका का क्षेत्रीय परीक्षण चयनित जिलों में, एक नवीन पहल है, जो बालकों में एक नयी सोच का संचार करेगी

भोपाल प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालयों में पढ़ने वाले बालकों में सकारात्मक सोच के लिये उज्ज्वल कार्यक्रम में प्रशिक्षण मार्गदर्शिका तैयार की जा रही है। इसका प्रमुख उद्देश्य बालकों को बढ़ती उम्र के साथ विभिन्न पहलुओं और बदलाव में उनकी सकारात्मक भूमिका के प्रति सजग करना है। यह एक नवीन पहल है, जो बालकों में एक नयी सोच का संचार करेगी, जिससे वे सकारात्मक सोच के साथ विभिन्न मुद्दों को समझ पायें। किशोर अवस्था में अर्जित ज्ञान और कौशल का प्रभाव आजीवन रहता है। इसलिये आवश्यक है कि “पौरूष” की अवधारणा से बालक प्रारंभ से ही परिचित हो सकें और उनके अनुकूल जीवन में व्यवहार करने की सोच उनके अंदर विकसित हो सके। स्कूल शिक्षा विभाग ने यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फण्ड एक्टिविटी (यूएनएफपीए) के सहयोग से इस नवीन आवधारणा को लेकर मार्गदर्शिका उज्ज्वल का निर्माण किया है। उज्ज्वल में शामिल मुद्दे मार्गदर्शिका “उज्ज्वल” में भेदभाव, हिंसा, टकराव, सायबर अपराध, लैंगिक अपराधों और कुप्रथाओं को रोकने में बालकों की भूमिका, घरेलू कामों में बालकों व पुरूषों की बराबरी की भागीदारी जैसे विभिन्न मुद्दे शामिल किये गये हैं। मार्गदर्शिका का क्षेत्रीय परीक्षण प्रदेश के डिंडोरी, बैतूल, गुना एवं भोपाल जिलों में कक्षा 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों के साथ चर्चा की गई। उनसे मिली प्रतिक्रियाओं और सुझावों को मार्गदर्शिका की विषय-वस्तु में शामिल किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने मार्गदर्शिका का प्रथम प्रारूप तैयार कर इसकी समीक्षा शिक्षकों के साथ की है। विभाग संशोधित मार्गदर्शिका को अंतिम स्वरूप देने पर काम कर रहा है। किशोरियों के लिये भी मार्गदर्शिका कन्या छात्रावासों में अध्ययन करने वाली कक्षा 9वीं से 12वीं की किशोरियों के लिये भी सशक्त मार्गदर्शिका तैयार की जा रही है। मार्गदर्शिका के सहयोग से किशोरियां दक्षता अर्जित कर पाएंगी, जो उनके भावी जीवन को बेहतर बनाने में सहायक होगी। किशोरियां विभिन्न जीवन कौशल विकसित कर जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने में अधिक सक्षम हो पायेंगी। किशोरियां अपने अधिकारों, कर्त्तव्यों और सामाजिक जिम्मदारियों के प्रति जागरूक होकर हॉस्टल, घर और समुदाय में परिवर्तन लाने की दिशा में भी सहयोग कर पायेंगी।  

छात्र-छात्राओं को उच्च स्तर की खेल सुविधायें उपलब्ध कराने 110 नोडल खेल केन्द्रों की स्थापना

भोपाल प्रदेश में सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को उच्च स्तर की खेल सुविधायें उपलब्ध कराने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने हर जिले के सरकारी स्कूलों में 110 नोडल खेल केन्द्रों की स्थापना की है। इन केन्द्रों के जरिये छात्र-छात्राओं को खेल अधो-संरचना के साथ उत्कृष्ट स्तर की खेल सामग्री और खेल प्रशिक्षण की सुविधायें उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस व्यवस्था से सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं के खेल प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। साथ ही विभिन्न स्तरों पर आयोजित होने वाली शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की सहभागिता में भी बढ़ोत्तरी हुई है। विभिन्न नोडल केन्द्रों के करीब 200 खिलाड़ियों ने राज्यस्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में सहभागिता कर विभिन्न खेलों में 80 पदक प्राप्त किये। राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रदेश के खिलाड़ियों ने विभिन्न विधाओं में सहभागिता की। पिछले वर्ष 67वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में 14, 17 और 19 वर्ष से कम आयु वर्ग की प्रतियोगता में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 7 खेलों में 26 स्वर्ण, 13 रजत और 14 कांस्य समेत कुल 53 पदक प्राप्त किये। स्कूलों में खेलों में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहन देने के लिये कक्षा 9वीं से 12वीं तक आवासीय खेलकूद संस्थान, सीहोर में संचालित किया जा रहा है। इस आवासीय संस्थान में 200 सीट निर्धारित है। विद्यार्थी यहां विद्यालय में 4 वर्ष तक पढ़ाई के साथ अपनी रूचि के खेलों का भी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इस आवासीय संस्थान के विद्यार्थियों का विभिन्न खेल प्रतियोगितायों में श्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। फिट इण्डिया मूवमेंट में गतिविधियां स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा फिट इण्डिया मूवमेंट के अंतर्गत ‘फिटनेस का डोज-आधा घण्टा रोज’ कार्यक्रम सरकारी स्कूलों में आयोजित किया गया। इसके अंतर्गत छात्र-छात्राएं, शिक्षकगण और अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक विभिन्न खेल गतिविधियों में सहभागिता की। फिट इण्डिया मूवमेंट के अंतर्गत 5वां ‘फिट इण्डिया वीक’ पिछले वर्ष सभी जिलों में मनाया गया।  

मैडम देती थीं पैसे का लालच, छत्तीसगढ़-बिलासपुर के स्कूल में मासूम बच्चों से उठवाया दो क्विंटल चावल

बिलासपुरः छत्तीसगढ़ में शिक्षा की बदहाली के कई मामले सामने आ चुके हैं। कप-प्लेट धुलवाने से लेकर पान-गुटखा मंगवाने के कई मामले पहले ही वायरल हो चुके हैं। अब ताजा मामला बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड के प्राइमरी स्कूल का है। यहां का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है जिसमें स्कूली बच्चे साइकल पर 50-50किलो की चावल की बोरी ढोकर ले जाते दिख रहे हैं। दरअसल, मस्तूरी विकासखंड के सोन गांव स्थित प्राइमरी स्कूल में मिड डे मील के लिए चावल स्कूली बच्चों से ढुलवाने का मामला सामने आया है। यहां की हेड मास्टर पुष्पा साहू पर बच्चों से काम कराने का आरोप है। साइकिल में चावल लाने वाले छात्रों ने बताया कि चार बार में 50-50 किलो कर 2 क्विंटल स्कूल में लेकर आए। कभी पैसे का लालच तो कभी धमका कर काम स्कूल की हेड मास्टर पर आरोप है कि वह वह स्कूल के बच्चों को कभी पैसे का लालच देकर तो कभी धमकियों का सहारा लेकर चावल ढुलवाने के लिए मजबूर करती है। बच्चों के साइकिल पर चावल ढोते हुए देखकर गांव के कुछ युवकों ने इसका वीडियो बना लिया और सोशल मीडिया में वायरल कर दिया। हालांकि इस तरह बच्चों से काम कराने के चलते उनकी पढ़ाई पर प्रभाव पड़ रहा है। हेड मास्टर ने कहा-बदनाम करने की कोशिश वहीं, सोशल मीडिया में वायरल वीडियो को लेकर हेडमास्टर ने कहा कि उन्हें बदनाम करने के लिए पुराना वीडियो सोशल मीडिया में वायरल किया जा रहा है। वीडियो सितंबर महीने का है जिसे अब शेयर कर उन्हें परेशान करने के लिए कर रहे हैं। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर ब्लाक शिक्षा अधिकारी सोनवानी ने बताया कि मामला पुराना है। उन्होंने कहा कि घटना की जानकारी मिलने पर स्कूल का निरीक्षण किया गया था। मामला सही पाए जाने पर चेतावनी दी गई थी। आपको बता दें कि यह पहला मामला नहीं है। इसके पहले बिल्हा ब्लाक में बच्चों से कप प्लेट धुलवाने की घटना हुई थी। वहीं, मस्तूरी ब्लाक में ही प्यून के द्वारा बच्चों से पान-गुटखा मंगवाने का मामला सामने आया था।

सरकारी स्‍कूलों में पढ़ाई को लेकर श‍िक्षक गंभीर नहीं, 5 वीं और 8 वीं का परीक्षा परिणाम शून्य, 54 स्कूलों को नोटिस

ग्वालियर  सरकारी स्कूलों में बेहतर पढ़ाई हो इसको लेकर सरकार दिल खोलकर खर्च कर रही है। इसके बाद भी ग्वालियर के 54 स्कूल ऐसे हैं जहां पर एक भी विद्यार्थी इस बार पास नहीं हो सका। वह भी तब जब स्कूलों काे हाईटेक करने से लेकर शिक्षकों को हर तीन माह में किसी न किसी तरह से प्रशिक्षित कर बेहतर परीक्षा परिणाम लाने की जिम्मेदारी दी जाती है। इसके बाद भी लाखों रुपये वेतन उठाने वाले शिक्षक परिणाम के नाम पर शून्य देते हैं। इससे साफ है कि ना तो इन स्कूलों की ढंग से मॉनिटरिंग की गई और न ही स्कूलों में पहुंचने वाले विद्यार्थियों को ठीक से पाया जाता है। जिसका नतीजा सामने हैं। अब इन स्कूलों के खराब परीक्षा परिणाम को लेकर डीपीसी द्वारा सभी संस्था प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। इसका जवाब अगले सात दिन में मांगा गया है। यदि जवाब संतुष्टिपूर्ण नहीं रहा तो आगे एक्शन लिया जाएगा। इन स्कूलों के परीक्षा परिणाम खराब होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर व ग्रामीण के स्कूलों में तैनात शिक्षक पढ़ाने तक नहीं जाते। गजब की बात यह है कि एक से लेकर 5 तक के विद्यार्थियों को एक ही कक्षा में बैठाकर,एक ही शिक्षक द्वारा सभी विषय पढ़ाए जाते हैं, क्योंकि बाकी के शिक्षक स्कूल पहुंचते ही नहीं है। ऐसे में विद्यार्थी क्या सीखेगा और एक शिक्षक सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को क्या पढ़ाएगा इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है इस अव्यवस्था का नईदुनिया द्वारा खुलासा किया गया इसके बाद भी जिम्मेदार शिक्षा विभाग के अफसर इन स्कूलों में झांकने तक नहीं पहुंचे। इससे साफ है कि नोटिस देना एक औपचारिकता भर है और कुछ नहीं । असल में शहर और ग्रामीण मिलाकर 46 प्राइमरी स्कूल ऐसे हैं जिनमें कक्षा पांचवीं का एक भी विद्यार्थी पास नहीं हुआ। इसी तरह से 8 मिडिल स्कूल ऐसे है जिनमें एक भी कक्षा 8 वीं का विद्यार्थी पास नहीं हुआ। जिसको लेकर ग्वालियर की रैंकिंग प्रदेश में कम रही और कक्षा पांच व आठ वीं का परीक्षा परिणाम में फैल होने वाले बच्चों का ग्राफ बढ़ गया।

गुजरात में शिक्षा विभाग ने बिना इजाजत स्कूल चलाने के मामले कड़ी कार्रवाई, 6 साल से चल रहा था स्कैम

राजकोट गुजरात में फर्जी सरकारी दफ्तर, आईएएस और आईपीएस अधिकारी के बाद अब फर्जी स्कूल पकड़ा गया है. राजकोट में मलियान के पिपलिया गांव में इस फेक स्कूल का पता चला है. जिला शिक्षा विभाग ने स्कूल को सील कर दिया है और इसे चलाने वाले कपल की तलाश की जा रही है. शिक्षा विभाग ने बिना इजाजत स्कूल चलाने के मामले कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है. स्कूल को लेकर प्राइमरी एजुकेशन ऑफिसर ने कहा कि लिविंग सर्टिफिकेट नहीं देने के संबंध में अंग्रेजी मीडियम के स्कूल के खिलाफ उन्हें शिकायत मिली थी. इसके बाद मामले की जांच की गई और पाया कि मध्य प्रदेश के संदीप तिवारी और उनकी पत्नी कात्यानी तिवारी स्कूल का संचालन कर रहे थे. शिक्षा अधिकारी ने बताया कि कपल चार दुकानें किराए पर लेकर बिना इजाजत कक्षा एक से दसवीं तक गौरी प्री-प्राइमरी स्कूल नाम से स्कूल चला रहे थे. मान्यता प्राप्त स्कूल से अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे स्टूडेंट्स शिक्षा अधिकारी ने बताया कि जांच के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आई. मसलन, इस मामले में शिक्षा विभाग ने मध्य प्रदेश के रहने वाले कपल को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है. छापेमारी के दौरान स्कूल में कक्षा एक से दसवीं तक के 29 स्टूडेंट्स मिले. विभाग की कोशिश है कि जो स्टूडेंट्स स्कूल में पढ़ रहे हैं, उनकी शिक्षा प्रभावित न हो. इसलिए वे अपनी आगे की पढ़ाई मान्यता प्राप्त स्कूल से जारी रख सकेंगे. बड़े स्कूल से कमीशन लेकर चलाते थे स्कूल शिक्षा विभाग ने पाया कि मध्य प्रदेश के कपल स्कूल में बच्चों का दाखिला लेते थे और उनसे फीस वसूलते थे. इसके बाद उनका एडमिशन एक मान्यता प्राप्त स्कूल में कराया जाता था. कुछ बड़े मान्यता प्राप्त स्कूल से उनके संपर्क थे, जिसमें फीस की कुछ रकम इनके स्कूल को दी जाती थी. यह स्कैम 2018 से चल रहा था. स्कूल में अपने बच्चे को पढ़ाने वाले परिवार क्या बोले?   अपने बच्चे को गौरी इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाने वाले अभिभावक का कहना है कि उनके बच्चे का लिविंग सर्टिफिकेट पिछले दो साल से नहीं दिया गया है. कोरोना काल में स्कूल फीस भरने के लिए दबाव बनाते थे. स्कूल की फीस भरने के बाद भी बेटे को लिविंग सर्टिफिकेट नहीं दिया गया. कई बार कहने के बाद भी स्कूल प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया. एक परिवार ने कहा, “मेरा बेटा कक्षा एक से छह तक गौरी इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ा. परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण पत्र पहले दो बार दिया गया था, लेकिन वो सर्टिफिकेट अलग-अलग स्कूलों से दिए गए थे. हमारे एक बच्चे की मासिक फीस 450 रुपये थी जबकि दूसरे बच्चे की मासिक फीस 550 से 600 रुपये थी. 2019 से यह स्कूल यहां पर चल रहा था लेकिन गांव वालों में शिक्षा का अभाव होने के कारण इस फर्जी स्कूल के बारे में किसी को भनक नहीं लगी. अब इस स्कूल का भंडाफोड़ हुआ है.”  

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