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सीएचसी को एफआरयू बनाने हेतु मैनपावर की व्यवस्था जरूरी, उप मुख्यमंत्री Narottam Mishra Shukla ने दिया आदेश

सीएचसी को एफआरयू के रूप में उन्नत करने के लिए मैनपावर की उपलब्धता सुनिश्चित करें: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में प्रदेश की स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास और चिकित्सा सेवाओं के सुदृढ़ीकरण से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं प्रशासनिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) के रूप में उन्नत करने के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि इन इकाइयों में चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय मैनपावर की उपलब्धता प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एफआरयू का सुचारू संचालन अत्यंत आवश्यक है। चयनित मैनपावर की समयबद्ध जॉइनिंग के निर्देश उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने चयनित हो चुके स्टाफ की जॉइनिंग प्रक्रिया को समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि अस्पतालों में मानव संसाधन की कमी को दूर कर सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके।बैठक में स्वास्थ्य जांच की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए प्रदेश की टेस्टिंग लैब्स के सुदृढ़ीकरण कार्यों पर भी चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और पैथोलॉजी सेवाओं के विस्तार हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव  अशोक बर्नवाल, आयुक्त  धनराजू एस सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल का आह्वान: स्वास्थ्य सेवाओं का सुधार और योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करें

स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, योजनाओं का करें प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, अधोसंरचना विकास, चिकित्सकीय मैनपावर की उपलब्धता एवं चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाने के लिए सभी योजनाओं का प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने अधोसंरचना विकास, चिकित्सकीय सहायक एवं चिकित्सकीय मैनपावर की नियुक्ति तथा स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन से संबंधित प्रस्तावों की गहन समीक्षा की। उन्होंने इन प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। रिमोट लोकेशन में स्थित मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण स्टाफ की नियुक्ति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अतिरिक्त इंसेंटिव प्रदान करने के प्रस्ताव को कैबिनेट अनुमोदन हेतु शीघ्र भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में योग्य शिक्षण स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करना गुणवत्तापूर्ण चिकित्सकीय शिक्षा के लिए अहम है। बैठक में अंतर्विभागीय विषयों पर चर्चा करते हुए उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर औपचारिकताओं की पूर्ति प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब न हो। सीएम केयर्स के अंतर्गत टर्शरी केयर स्वास्थ्य सुविधाओं में अत्याधुनिक उपकरणों की उपलब्धता के साथ-साथ आवश्यक मैनपावर की नियुक्ति के प्रस्तावों को प्राथमिकता से अग्रेषित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि गंभीर रोगों के उपचार हेतु टर्शरी केयर सेवाओं को और अधिक मजबूत किया जाना आवश्यक है, ताकि नागरिकों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं प्रदेश के हर क्षेत्र में उपलब्ध हों। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने दमोह, छतरपुर एवं बुधनी मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए आवश्यक शिक्षण स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र में संचालन शुरू करने के लिए प्राथमिकता से समस्त औपचारिकताओं की पूर्ति की जाये। बैठक में केंद्रीय बजट के प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने उपलब्ध बजटीय संसाधनों के समयबद्ध एवं प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए विभाग को ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  संदीप यादव, आयुक्त  धनराज एस, एमडी एमपीपीएचएससीएल  मयंक अग्रवाल, एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरुणा कुमार सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए सरकार हर नवाचार और तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहन दे रही

भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए सरकार हर संभव नवाचार और तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहन दे रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के स्वस्थ भारत के विजन को मूर्त रूप देने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सभी स्तरों पर ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल मंत्रालय में ट्रिवीट्रॉन हेल्थकेयर के प्रतिनिधि मंडल से शिशुओं की स्वास्थ्य सेवाओं पर चर्चा कर रहे थे। प्रतिनिधि मंडल ने प्रदेश में नवजात शिशुओं में कंजेनिटल मेटाबॉलिक डिसऑर्डर की पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए न्यू बॉर्न स्क्रीनिंग लैब की स्थापना का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस प्रयोगशाला की स्थापना से जन्म के कुछ दिनों के भीतर ही शिशुओं में गंभीर आनुवांशिक विकारों की पहचान की जा सकेगी, जिससे समय रहते उपचार संभव हो सकेगा। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ऐसे नवाचार अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जनहितैषी तकनीकों को प्राथमिकता देती है। इस प्रस्ताव पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक परीक्षण उपरांत सकारात्मक विचार किया जाएगा। प्रतिनिधियों ने बताया कि स्क्रीनिंग लैब में चार प्रमुख आनुवांशिक विकारों कंजेनिटल हाइपोथायरोडिज्म, कंजेनिटल एड्रेनल हाइपरप्लेशिया, ग्लूकोज-6-फास्फेट डीहाइड्रोजनेज डेफिशियेंसी और गैलेक्टोजीमिया की पहचान की जाएगी। उन्होंने बताया कि ट्रिवीट्रॉन हेल्थकेयर द्वारा यह सेवा केरल में पहले से ही प्रभावी रूप से संचालित की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने विश्व के अन्य देशों में इस तकनीक के सफल प्रयोगों और परिणामों की जानकारी भी साझा की। कंपनी द्वारा संचालित मोबाइल टेस्टिंग वैन सेवाओं की जानकारी दी। इसमें मैमोग्राफी और सिकल सेल स्क्रीनिंग की सुविधाएँ हैं। यह सेवा वर्तमान में तमिलनाडु में कंपनी द्वारा प्रदान की जा रही हैं।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि ऑडिटोरियम, खेल सुविधाएँ, फर्नीचर और अन्य निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं

रीवा उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में रीवा जिले में सांदीपनि विद्यालय और अन्य विद्यालयों के उन्नयन एवं निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने पी.के. गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल, रीवा को सांदीपनि विद्यालय के रूप में विकसित किए जाने के लिए किए जा रहे कार्यों की विशेष चर्चा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि ऑडिटोरियम, खेल सुविधाएँ, फर्नीचर और अन्य निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। जिससे आगामी शैक्षणिक सत्र से सेवाओं का संचालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की तकनीकी अड़चनों को त्वरित रूप से उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाकर प्राथमिकता के आधार पर निराकृत किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा शहर के समीपवर्ती क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों के प्रस्तावित उन्नयन कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की और निर्देशित किया कि सभी आवश्यक औपचारिकताओं को शीघ्रता से पूर्ण कर प्रस्तावों को सक्षम स्तर पर अनुमोदन के लिए भेजा जाए। उन्होंने कहा कि रीवा शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों के उन्नयन को प्राथमिकता से किया जाये, जिससे इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और उन्हें शिक्षा के लिये शहर आने की असुविधा न हो। आयुक्त, स्कूल शिक्षा श्रीमती शिल्पा गुप्ता, पीआईयू, एवं एप्को के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में नवीन टेलीमेडिसिन सेंटर का किया लोकार्पण

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि टेलीमेडिसिन सेवा से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बढ़ेगी। इस नवाचार से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के मरीजों को विशेषज्ञों द्वारा बेहतर इलाज एवं परामर्श प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के टेलीफोन के माध्यम से विस्तार के लिए प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में ई-संजीवनी पोर्टल प्रारंभ किया गया है। इस पोर्टल के द्वारा मरीज विशेषज्ञ चिकित्सकों से घर बैठे नि:शुल्क परामर्श ले सकते है। टेलीमेडिसिन सेवा से मरीजों की रेफरल संख्या भी कम होगी, जिससे मेडिकल कॉलेजों और जिला चिकित्सालयों में दबाव कम होगा। मरीजों को घर बैठे विशेषज्ञों से उपचार सुविधा मिलेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने गुरुवार को गांधी चिकित्सा महाविद्यालय एवं हमीदिया चिकित्सालय, भोपाल में नवीन टेलीमेडिसिन सेंटर का लोकार्पण किया। इस अवसर पर आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी, डीन गांधी चिकित्सा महाविद्यालय श्रीमती कविता सिंह सहित विभिन्न विभागों के एचओडी, डॉक्टर्स, प्रोफेसर, अधिकारी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हम स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञों, मेडिकल स्टॉफ की भर्ती की जा रही है। जिससे मेडिकल स्टॉफ की कमी की पूर्ति होगी। इन विशेषज्ञों की तैनाती ग्रामीण क्षेत्रों में की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि किसी समस्या के जड़ से समाधान के लिए जिद और जुनून की आवश्यकता है। टेलिमेडिसिन सेवा तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह सेवा स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि इस सेवा का प्रभावी तरीके के क्रियान्वयन किया जाए। टेलीमेडिसिन सेवा से जुड़े विशेषज्ञ प्रोफेसर्स और डॉक्टर्स प्रत्येक मरीज को बेहतर से बेहतर इलाज प्रदान करें। इस सेवा का व्यापक प्रचार करें जिससे कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इस सुविधा का ज्यादा के ज्यादा लाभ प्राप्त कर सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हमीदिया चिकित्सालय 70 वर्षों के अधिक समय से प्रदेश के मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रहा है। यहां की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार कार्य जारी है। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल कैंपस में जर्जर भवनों का रिनोवेशन किया जायेगा। उन्होंने कमला नेहरू हॉस्पिटल में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में परिवर्तित करने की बात भी कही। इस दौरान उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने टेलीमेडिसिन हब रूम से सीहोर के मरीज और चिकित्सकों से चर्चा की। उन्होंने प्रेरणा सेवा ट्रस्ट द्वारा हॉस्पिटल को भेंट किए गए ई-रिक्शा का लोकार्पण किया। उन्होंने हॉस्पिटल में स्थापित बेबी फीडिंग रूम का लोकार्पण भी किया। थैलेसीमिया डे केयर सेंटर के बच्चों ने उप मुख्यमंत्री शुक्ल को पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया। गांधी मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक सुनील टंडन ने कॉलेज में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों और नवाचारों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर महाविद्यालय परिसर में स्पोर्ट्स प्रमोटर्स ग्रुप सरगुजा ने 251 पौधों का रोपण किया है। चिकित्सालय के समस्त क्लिनिकल विभाग का सहयोग प्राप्त कर आने वाले मरीजों को त्वरित एवम उचित उपचार दिए जाने के उद्देश्य से इमरजेंसी मेडिसिन विभाग और अधीक्षक कार्यालय द्वारा एक एसओपी जारी की गई है।चिकित्सालय में शव वाहन, नवीन कैथ लैब, सीटी-स्केन और एमआरआई जांच सुविधा की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमीदिया चिकित्सालय आने वाले मरीजों के त्वरित एवम उचित इलाज किए जाने के लिए लगातार प्रयासरत है।  

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कैबिनेट द्वारा स्वीकृत पदों पर समय-सीमा में भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए

कैबिनेट द्वारा स्वीकृत पदों पर समय-सीमा में करें भर्ती : उप मुख्यमन्त्री शुक्ल यूजी पीजी सीट के लिए अधोसंरचना विकास और उपकरण खरीदी कार्य प्राथमिकता से करें पूर्ण: उप मुख्यमन्त्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कैबिनेट द्वारा स्वीकृत पदों पर समय-सीमा में भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कैबिनेट द्वारा स्वीकृत पदों पर समय-सीमा में भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा स्वीकृत पदों की भर्ती में अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग की वृहद समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने यूजी/पीजी सीट्स के अपग्रेडेशन से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मेडिकल कॉलेजों में सीट वृद्धि के लिए आवश्यक अधोसंरचना विकास कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए। साथ ही आवश्यक उपकरणों की खरीदी प्रक्रिया को भी निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए जिससे राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के सभी मापदंड निर्धारित समय में पूरे किए जा सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि नियमित फॉलो-अप कर कार्यों की स्थिति पर सतत निगरानी रखी जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने यह भी निर्देश दिए कि ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया को पारदर्शिता एवं समयबद्धता के साथ क्रियान्वित किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने हिंदी में एमबीबीएस के लिए आवश्यक पुस्तकों की उपलब्धता मेडिकल कॉलेज में सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिकता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। आयुक्त स्वास्थ्य तरुण राठी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पीआईयू द्वारा किए जा रहे स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों की वृहद समीक्षा की

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निर्देश दिए हैं कि निर्माण एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा करें और अंतर्विभागीय समन्वय से संबंधित विषयों को तत्काल रेखांकित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन स्थलों पर निर्माण एजेंसियों को भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई है अथवा अन्य कोई प्रशासनिक विभागीय अवरोध या असमंजस की स्थिति है, उसकी स्थिति उच्च अधिकारियों को तुरंत अवगत कराई जाए, ताकि उनका प्राथमिकता से निराकरण कार्य को गति दी जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सामंजस्य एवं विभागीय सक्रियता की कमी से कार्यों में विलंब पर अप्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों को समय से पूर्ण करना स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिये आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में परियोजना कार्यान्वयन इकाई (पीआईयू) द्वारा किए जा रहे स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अधोसंरचना विकास कार्यों की गहन समीक्षा की। भुगतान में विलंब विभागीय उदासीनता उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि किए गए कार्यों का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। भुगतान में विलंब से कार्य की गति प्रभावित होती है और यह विभागीय उदासीनता को दर्शाता है। उन्होंने निर्देश दिए कि विभागीय अधिकारी स्वयं मैदानी निरीक्षण कर कार्यों की सघन मॉनिटरिंग करें तथा 15वें वित्त आयोग और पीएम-अभीम योजना के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूर्ण किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, अंडर ग्रेजुएट/पोस्ट ग्रेजुएट सीट अपग्रेडेशन, सीसीबी सहित सभी अधोसंरचना विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की एवं स्पष्ट निर्देश दिए कि बजट का योजनाबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए, और उपकरण एवं फर्नीचर की खरीदी का कार्य समानांतर रूप से किया जाए। जिससे निर्माण कार्य पूर्ण होने और सेवा प्रदाय में विलम्ब न हो। बैठक में बताया गया कि सिवनी, नीमच और मंदसौर में मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और ये संस्थान सेवा में आ चुके हैं। वहीं छतरपुर, दमोह, राजगढ़ और सीआईएमएस छिंदवाड़ा में कार्य प्रगतिरत हैं। मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में यूजी सीट्स अपग्रेडेशन के अंतर्गत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा में मेडिकल कॉलेज में कार्य पूर्ण हो चुके हैं। सागर में कार्य प्रगतिरत है। पीजी सीट्स के अपग्रेडेशन के लिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर, सागर, ग्वालियर और रीवा में निर्माण एवं संसाधन उन्नयन कार्य प्रगतिरत हैं। बैठक में यह जानकारी दी गई कि पीआईयू द्वारा राज्य में वर्तमान में 217 कार्य प्रगतिरत हैं, जिनके लिए 1054 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त 24 कार्यों के लिए 283 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है, परंतु वे अभी प्रारंभ नहीं हो पाए हैं। 5 कार्य विभिन्न कारणों से अवरुद्ध हैं। कुल 246 कार्यों के लिए 1027 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी जानी शेष है। नर्सिंग कॉलेज मंदसौर में बाउंड्री वॉल निर्माण, छिंदवाड़ा में होस्टल और कॉलेज भवन का कार्य, सतना एवं राजगढ़ में लैंड डेवलपमेंट कार्य प्रगतिरत है। नीमच में प्रस्तावित नर्सिंग कॉलेज के लिए टेंडर की स्वीकृति शासन स्तर पर लंबित है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल 352.5 करोड़ रुपए की मांग प्रस्तुत की गई थी, जिसके विरुद्ध अब तक 40.5 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इसमें से ₹12.81 करोड़ रुपए का व्यय किया गया है, 52.32 करोड़ रुपए के बिल लंबित हैं। राजगढ़ और छिंदवाड़ा के लिए 22.13 करोड़ एवं 14 करोड़ रुपये के बिल लंबित हैं। दमोह, छतरपुर में आंशिक राशि व्यय की गई है, जबकि जबलपुर को पूरी मांग के अनुरूप राशि प्राप्त हुई है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मांग अनुसार बजट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त तरुण राठी, संचालक प्रोजेक्ट नीरज कुमार सिंह, एमडी एनएचएम डॉ सलोनी सिडाना, विभागीय वरिष्ठ अधिकारी, पीआईयू के अधिकारी एवं निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के समग्र सुधार के लिए प्रतिबद्ध

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज़, नई दिल्ली द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिला चिकित्सालयों में पोस्ट एमबीबीएस डीएनबी/पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम की 12 नई सीटों को मान्यता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि राज्य के सभी जिलों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं आमजन तक सुगमता से पहुंचें। इन नई सीटों से भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी और ग्रामीण तथा दूरस्थ अंचलों में भी गुणवत्तापूर्ण उपचार सुलभ हो सकेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के समग्र सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। जिला अस्पतालों को चिकित्सा शिक्षा के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में सशक्त किया जा रहा है, जिससे न केवल युवा चिकित्सकों को अवसर मिलेगा, बल्कि अस्पतालों में सेवाओं की गुणवत्ता भी सुदृढ़ होगी। उन्होंने कहा कि यह मान्यता राज्य सरकार द्वारा जिला अस्पतालों में बुनियादी ढांचे के सशक्तिकरण, मानव संसाधन की नियुक्ति और प्रशिक्षण की निरंतर प्रक्रिया का परिणाम है। सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में प्रत्येक जिला चिकित्सालय एक अत्याधुनिक उपचार और प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित हो। स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। एनबीईएमएस, नई दिल्ली द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिला चिकित्सालयों में पोस्ट एमबीबीएस डीएनबी/पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम की 12 नई सीटों को मान्यता प्रदान की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल शिवपुरी में डीजीओ (डिप्लोमा इन गाइनेकोलॉजी एंड ऑब्सटेट्रिक्स) की 4 सीटें एवं डीए (डिप्लोमा इन एनेस्थीसिया) की 2 सीटें, जिला अस्पताल रतलाम में डीओ (डिप्लोमा इन ऑप्थाल्मोलॉजी) की 2 सीटें तथा जिला अस्पताल भोपाल में डीजीओ की 4 नई सीटों को एनबीईएमएस द्वारा मान्यता दी गई है। इस मान्यता के साथ ही प्रदेश में पोस्ट एमबीबीएस डीएनबी/पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 63 हो गई है।  

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा है प्रदेश सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के सतत विकास के लिये पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के सतत विकास के लिये पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल इस बात की है कि उपलब्ध बजट का समय पर प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गति तेज करते हुए समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। मंत्रालय में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पूंजीगत बजट की योजना अनुसार प्रगति, निर्माण कार्यों की भौतिक स्थिति, उपकरणों की खरीदी और एजेंसीवार कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि विभागीय अधिकारियों की यह ज़िम्मेदारी है कि राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा प्रदत्त बजट का अधिकतम उपयोग कर सेवाओं को सुदृढ़ किया जाए। बैठक में परियोजना संचालक नीरज कुमार सिंह सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कार्यों की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए निर्देशित किया कि पीआईयू, बीडीसी और बी एंड आर सहित सभी कार्यान्वयन एजेंसियों की मासिक आधार पर भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्यों की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि सभी अधोसंरचनात्मक निर्माण कार्यों की सतत निगरानी की जाए तथा एजेंसियों को समय पर सचेत कर कार्यों को गति प्रदान की जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग कॉलेजों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों सहित समस्त चिकित्सकीय संस्थानों के निर्माण एवं उन्नयन कार्यों को निर्धारित समय में पूर्ण किया जाए। साथ ही उपकरणों की खरीदी में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। बैठक में मंडला, श्योपुर, राजगढ़ सहित विभिन्न स्थानों पर चल रहे अधोसंरचना विकास कार्यों और पीजी व यूजी पाठ्यक्रमों के लिए उपकरणों की खरीदी की भी गहन समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्पष्ट कहा कि कार्य की गुणवत्ता, समय सीमा और बजट उपयोग की त्रि-सूत्रीय रणनीति पर कार्य कर प्रदेश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाना है। बैठक में जानकारी दी गई कि 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर राज्य सरकार द्वारा 430 करोड़ रुपये की राशि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए स्वीकृत की गई है। इसका उपयोग अस्पताल एवं औषधालयों के भवन निर्माण में किया जा रहा है। प्रथम तिमाही में पूंजीगत व्यय सीमा को 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन है, ताकि निर्माण कार्यों में अपेक्षित गति लाई जा सके। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन (पीएम-अभीम) में 476 करोड़ रुपये और मेडिकल एजुकेशन में सेंट्रली स्पॉन्सर्ड योजनाओं के तहत 365.67 करोड़ रुपये की राशि विभाग के पास उपलब्ध है, जिसके त्वरित उपयोग के उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए ताकि केंद्र से आवंटन समय से प्राप्त हो सके। केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए 400 करोड़ रुपये, पीजी पाठ्यक्रम सुदृढ़ीकरण के लिए 206 करोड़ रुपये, एमबीबीएस सीट वृद्धि के लिए 150 करोड़ रुपये और नवीन नर्सिंग कॉलेजों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये की प्रावधानित राशि के उपयोग की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। मंडला, श्योपुर, राजगढ़, बुधनी, छतरपुर, दमोह और सिंगरौली में चल रहे अधोसंरचना कार्यों की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि लागत संशोधन, अनुबंध वृद्धि एवं प्रशासनिक स्वीकृति जैसे प्रकरणों में विभाग शीघ्र निर्णय लेकर कार्यों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करे। सभी कार्यों की सतत मॉनिटरिंग कर गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष सागर में स्वास्थ्य विभाग के अधोसंरचना विकास संबंधी कार्यों की वृहद की समीक्षा

सागर उप मुख्यमंत्री एवं सागर ज़िले के प्रभारी राजेन्द्र शुक्ल ने स्वास्थ्य अधोसंरचना निर्माण कार्यों में गति लाने और समानांतर रूप से आवश्यक उपकरण और फर्नीचर खरीदने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का प्रदाय शीघ्र प्रारंभ हो सके इसके लिए आवश्यक उपकरण और फर्नीचर की उपलब्धता भी साथ ही सुनिश्चित की जाए। इसके लिए सतत मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर संचालन के लिए मैनपॉवर की उपलब्धता बढ़ाने पर सरकार द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष सागर में स्वास्थ्य विभाग के अधोसंरचना विकास संबंधी कार्यों की वृहद समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सभी परियोजनाओं के बारे में जनप्रतिनिधियों से पूर्व में ही चर्चा की जाए तथा उनके साथ समन्वय स्थापित कर कार्य किए जाएं। उन्होंने उपस्थित विधायक गण से भी कहा कि वे उनके क्षेत्र विशेष के कार्यों का निरीक्षण कर उनकी प्रगति आदि से समय-समय पर अवगत कराएं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए निर्माण कार्यों, अधोसंरचना विकास कार्यों में गति अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य  सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए बजट का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए तथा निर्माण कार्यों को समयसीमा में पूर्ण किया जाए। उन्होंने  निर्देश दिए कि निर्माण एजेंसियों द्वारा किए गए कार्यों के भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो, ताकि कार्यों की गति बनी रहे और गुणवत्ता भी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने लैंड एलॉटमेंट की प्रक्रिया यथासंभव शीघ्रता से करने के भी निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी और जनहितकारी व्यवस्थाओं पर संबंधित अधिकारी प्राथमिकता पर ध्यान दें। उन्होंने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्‍द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र/आरोग्य मंदिर से संबंधित विभिन्न पूर्ण हो चुके तथा निर्माणाधीन कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। सागर जिले में उक्त सभी कार्यों की अनुमानित लागत लगभग 447 करोड़ रुपए है जो विभिन्न निर्माण एजेंसियों जैसे पीडब्ल्यूडी, पीआईएयू, हाउसिंग बोर्ड आदि से संबंधित हैं। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने जिला चिकित्सालय के अंतर्गत 100 बिस्तरीय नवीन भवन के शीघ्र लोकार्पण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही जिला चिकित्सालय में इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब में एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के भी निर्देश दिए। इसी प्रकार बीना अस्पताल के रिनोवेशन /नवीनीकरण तथा वहां डॉक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। बंडा पीएचसी में बाउंड्री वॉल को प्रस्ताव शामिल करने के निर्देश दिए। इसी प्रकार 15वें वित्त के तहत कार्यों को शीघ्रता से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वह संवेदनशील रहकर कार्य करें और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम लाने की दिशा में हर संभव प्रयास करें। उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन एक प्रभावी योजना है जिसका सीएचसी, पीएचसी और आरोग्य केन्‍द्रों के माध्यम से प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक , सशक्त और जनहितकारी बनाने के लिए अधोसंरचना, मानव संसाधन, उपकरण, प्रबंधन और तकनीकी सभी स्तरों पर समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे कार्यों की सतत निगरानी करें और सभी परियोजनाओं को गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ पूरा करें। विधायक शैलेंद्र जैन, वीरेंद्र लोधी, श्रीमती निर्मला सप्रे, महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत, कलेक्टर संदीप जी.आर., पुलिस अधीक्षक विकास शाहवाल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में खाली पद जल्द भरें जायेंगे, डिप्टी सीएम ने अफसरों को दिए निर्देश, बोले- टाइम लिमिट पर फोकस करें

भोपाल मध्य प्रदेश में तबादलों से बैन हटने के बाद अब विभागों में खाली पड़े पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को तेज करने की कवायद शुरू हो गई है, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर रिक्त पदों को शीघ्र भरने के निर्देश दिए हैं। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि राज्य शासन की मंशा के अनुरूप स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों पर भर्ती का कार्य एक निश्चित समय-सीमा का निर्धारण कर शीघ्रता से पूरा किया जाए। उन्होंने इस समय चल रही भर्ती प्रक्रिया की अपडेट जानकारी अधिकारियों से ली। भर्ती प्रक्रिया सरल बनाने संशोधन की भी बात मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग , सामान्य प्रशासन विभाग और कर्मचारी चयन मण्डल के अधिकारियों के साथ बैठक में अधिकारियों को निर्देश देते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यकता होने पर नियमों में आवश्यक संशोधन करने और प्रक्रिया को सरल करने के संबंध में भी प्रस्ताव तैयार करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंगलवार को मंत्रालय में यह निर्देश स्वास्थ्य, सामान्य प्रशासन विभाग और कर्मचारी चयन मंडल के अधिकारियों की बैठक में दिए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यकता होने पर नियमों में आवश्यक संशोधन करने और प्रक्रिया को सरल करने के संबंध में भी प्रस्ताव तैयार करें। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मियों को और सुविधा दिए जाने, विभाग के चतुर्थ श्रेणी अस्पताल सहायक के 1200 रिक्त पदों के लिए परीक्षा प्रारूप और पाठ्यक्रम निर्धारण करने के भी निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने आयुक्त स्वास्थ्य तरुण राठी, संचालक मलिका निगम नागर, संचालक कर्मचारी चयन मंडल संकेत मालवीय और सचिव सामान्य प्रशासन विभाग अनिल सुचारी की मौजूदगी में हुई बैठक में कहा कि 24 घंटे सेवाएं देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की सेवाओं को ध्यान में रखते हुए उनके हित में बनने वाले प्रस्तावों को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों से चर्चा की जाए। स्वास्थ्य कर्मियों की बेहतरी के लिये प्रस्ताव तैयार करे। मंत्री बोले- प्रस्तावों को गंभीरता से लें बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मियों को और सुविधा दिये जाने, विभाग के चतुर्थ श्रेणी अस्पताल सहायक के 1200 रिक्त पदों की पूर्ति के लिये परीक्षा प्रारूप और पाठ्यक्रम निर्धारण करने के भी निर्देश दिये गये। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि 24 घंटे सेवाएं देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की सेवाओं को ध्यान में रखते हुए उनके हित में बनने वाले प्रस्तावों को गंभीरता से लें। वेतन विसंगति दूर करने के निर्देश स्वास्थ्य कर्मियों की बेहतरी के लिये प्रस्ताव तैयार करें और प्रस्ताव के विषय में वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों से चर्चा की जाये।  राजेंद्र शुक्ला ने स्वास्थ्य कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर करने तथा कर्मचारियों के ग्रेड-पे और एनएचएम कर्मियों को नियमित कर्मचारियों के समतुल्य सुविधाएं देने आदि पर विचार करने के निर्देश दिए।  

स्वास्थ्य संघ के पदाधिकारियों ने हड़ताल की समाप्ति के संबंध में उप मुख्यमंत्री को पत्र भी सौंपा

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के साथ हुई चर्चा के बाद उप मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद सोमवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त कर दी गयी है। स्वास्थ्य संघ के पदाधिकारियों ने हड़ताल की समाप्ति के संबंध में उप मुख्यमंत्री को पत्र भी सौंपा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 22 अप्रैल 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अप्रेजल, स्वास्थ्य बीमा, ईपीएफ, समकक्षता निर्धारण, ग्रेज्युटी, अर्जित एवं मेडिकल अवकाश तथा अन्य मांगों पर यथोचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मध्यप्रदेश द्वारा उप मुख्यमंत्री शुक्ल के आश्वासन पर सहर्ष हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना, प्रदेश महामंत्री भारतीय मजदूर संघ कुलदीप सिंह गुर्जर सहित संघ के अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा की

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य सेवाओं को जनसामान्य के लिए सुलभ, उच्च गुणवत्ता युक्त और व्यापक बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुभव, आधुनिक मेडिकल कॉलेजों का सुदृढ़ आधार और समय पर नियुक्ति की प्रक्रिया से प्रदेश के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने भोपाल स्थित निवास कार्यालय में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से जुड़े विभिन्न विषयों की गहन समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश में वरिष्ठ विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुभव का लाभ उठाने के उद्देश्य से, उन्हें 70 वर्ष की आयु तक संविदा सेवा देने के लिये प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। प्रस्ताव कैबिनेट अनुमोदन के लिए शीघ्र प्रस्तुत किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अनुभवी चिकित्सकों की सेवाएं प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों की गुणवत्ता में वृद्धि करेंगी साथ ही यह निर्णय चिकित्सकों की कमी की पूर्ति करने में भी सहायक होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा और इंदौर के मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन का विस्तृत प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इसके लिए कॉलेजों का अधोसंरचना विकास , अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था अन्य आवश्यक कार्य भी समय से पूर्ण किए जाएँ। शुक्ल ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से मेडिकल ऑफिसर और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कहा कि एमपीपीएससी के साथ नियमित संपर्क में रहते हुए सभी आवश्यक औपचारिकताओं को तत्काल प्राथमिकता से पूरा किया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ किया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित ऑनलाइन ट्रांसफर पोर्टल (ई-एचआरएमएस) की तैयारी पूर्ण कर ली जाए। पोर्टल को उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाते हुए स्थानांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि कार्मिकों के स्थानांतरण में पारदर्शिता और त्वरित निर्णय से विभागीय कार्य में गति आएगी और सेवाओं में सुधार होगा। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, मिशन संचालक एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना उपस्थित रहे।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि व्यक्तियों के समूह से समाज बनता है और समाज से देश का निर्माण होता है

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि व्यक्तियों के समूह से समाज बनता है और समाज से देश का निर्माण होता है, लेकिन संस्कार देने का कार्य समाज करता है। विकास को वरदान बनाता है संस्कार। संस्कार से ही सशक्त समाज की रचना होती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ड्रीम वर्ल्ड गार्डन एवं रिसोर्ट गोम्मटगिरि इंदौर में आयोजित बागेश्वर कसौधन वैश्य समाज की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि भगवान शिव के अवतार है बागेश्वर और ऋषि कश्यप के वंशज है, जिनका संबंध कश्मीर से है। बागेश्वर कसौधन वैश्य समाज देशभर में फैला है और यह शिक्षा, स्वास्थ्य के बेहतरी के साथ सामूहिक विवाह जैसे कार्य भी कर रहा है, जो अनुकरणीय है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर रोजगार के क्षेत्र में केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की कई कल्याणकारी योजनाएं चल रही है। जिसमें आयुष्मान भारत योजना, लाड़ली बहना योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, स्टार्टअप योजना आदि शामिल है। इन योजनाओं से समाज लाभान्वित हुआ है और उनके जीवन में बदलाव आया। शुक्ल ने कहा कि देश में जितने अधिक रोजगार के अवसर होंगे, भारत उतनी तेजी से आर्थिक महाशक्ति बनेगा। इसमें हर समाज अपनी भूमिका निभायें। शुक्ल ने युवाओं से आहवान किया कि देश को आगे बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाये और नशे से दूर रहें। सामाजिक उत्थान के साथ धार्मिक उत्थान की दिशा में भी कार्य करें, जिससे सनातन धर्म और मजबूत हो। शुक्ल ने इंदौर के नागरिकों की स्वच्छता के संस्कार की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश को स्वच्छ बनाने की पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी, लेकिन इसमें इंदौर ने अहम भूमिका निभाई। इंदौर के नागरिक स्वच्छता के प्रति बड़े सजग है। वे चॉकलेट के रैपर से केले के छिलके तक को सड़क पर नहीं फेंकते। इसी वजह से इंदौर शहर पूरे देश में लगातार सातवीं बार स्वच्छता में नम्बर वन बना हुआ है। यह साधारण बात नहीं, बगैर इच्छा शक्ति के यह संभव नहीं है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हमारे यहां बागेश्वर धाम के धीरेन्द्र शास्त्री भी है, जो सनातन धर्म की ध्वजा को पूरे देश में फैला रहे हैं। वे अपनी गृह क्षेत्र में एक विशाल कैंसर अस्पताल बना रहे है, जिसके शिलान्यास में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु भी शामिल हुए। इतना बड़ा कार्य बिना इच्छा शक्ति के संभव नहीं। पूर्व विधायक आकाश विजयर्वीय ने भी संबोधित किया। इस मौके पर बागेश्वर कसौधन वैश्य समाज के नवनिर्वाचित अध्यक्ष वीरेन्द्र गुप्ता सहित देश से आये समाजजन उपस्थित थे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दतिया में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा

दतिया उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि अक्टूबर माह तक डॉक्टर्स की नई भर्ती सुनिश्चित कर सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। प्राथमिक, उप-स्वास्थ्य एवं सामुदायिक केंद्रों सहित आरोग्य मंदिरों की अवस्थापना सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु पर्याप्त बजट की व्यवस्था की जा रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दतिया जिले के अपने अल्प प्रवास के दौरान जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने टेलीमेडिसिन सेवा से जिले के सभी प्राथमिक एवं उप-स्वास्थ्य केंद्रों तक उन्नत विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं के प्रदाय के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन के माध्यम से जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टर गाँव-गाँव में बैठकर मरीजों को परामर्श दे सकेंगे। इससे मरीजों को बार-बार जिला अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं होगी और उनके समय एवं धन की भी बचत होगी। इस अवसर पर कलेक्टर संदीप कुमार माकिन ने उप मुख्यमंत्री शुक्ल को बताया कि जिला अस्पताल में महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पिंक अलार्म जैसी नवीन पहल प्रारंभ की गई है। उन्होंने नव निर्मित दतिया एयरपोर्ट की व्यस्थाओं के संबंध में भी अवगत कराया। माँ पीताम्बरा के दर्शन कर प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने दतिया के अल्प प्रवास के दौरान विश्व प्रसिद्ध पीताम्बरा शक्तिपीठ पहुंचकर माँ पीताम्बरा के दर्शन किए एवं पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के कल्याण एवं सुख-समृद्धि की कामना की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्राचीन वन खण्डेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक भी किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने माँ पीताम्बरा शक्तिपीठ परिसर में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने केंद्र सरकार की “प्रसाद योजना” के अंतर्गत शक्तिपीठ परिसर के सौंदर्यीकरण हेतु स्वीकृत 44.24 करोड़ रूपए की परियोजना की प्रगति की जानकारी प्राप्त की और किए जा रहे कार्यों का अवलोकन किया। स्थानीय जन-प्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।  

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का बड़ा ऐलान- प्रदेश के हर जिले में खुलेंगे मेडिकल कॉलेज, दो इसी साल

दतिया डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला अल्प प्रवास पर दतिया पहुंचे. उन्होंने पीतांबरा पीठ पहुंचकर मां बगलामुखी के दर्शन किए. साथ ही पीठ परिसर में स्थित वनखंडेश्वर महादेव का अभिषेक किया. मीडिया से बातचीत करते हुए डिप्टी सीएम ने नेशनल हेराल्ड मामले में कहा, जब कोई गड़बड़ी घोटाला करता है और पकड़ा जाता है, तो वह ये स्वीकार नहीं करता कि उसने गलत किया है. कांग्रेस के नेता भी ऐसा कर रहे हैं. डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि जिला अस्पताल में आगजनी और अन्य घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी रखी जाएगी. दमोह अस्पताल जैसा मामला सामने आने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि कोई गलत काम करने का दुस्साहस न कर सके. सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रकिया चल रही है. इस साल दो जगह मेडिकल कॉलेज शुरू हो जाएंगे. प्रदेश के लिए 12 जगह टेंडर हो चुके हैं, शेष बचे जिलों में भी भविष्य में मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे. अस्पतालों में मरीजों को टेली मेडिसिन सुविधा मिले, इसके लिए भी शासन प्रयास कर रहा है. प्रदेश के सभी जिलों में खुलेंगे मेडिकल कॉलेज- शुक्ल मीडिया से बातचीत में शुक्ल ने कहा कि जिला अस्पतालों में आगजनी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी। दमोह जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना है। इस वर्ष दो नए मेडिकल कॉलेज शुरू होंगे। 12 स्थानों पर टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों को टेलीमेडिसिन की सुविधा देने के लिए सरकार प्रयासरत है। राजेंद्र शुक्ल महाकौशल एक्सप्रेस से सुबह लगभग साढ़े 4 बजे दतिया पहुंचे। सुबह 6 बजे पीतांबरा पीठ में दर्शन के बाद वे ग्वालियर के लिए रवाना हो गए। ग्वालियर में उनके स्थानीय कार्यक्रम और मेडिकल कॉलेज में जिला प्रशासन के साथ बैठक का कार्यक्रम है। ‘प्रसाद योजना’ से संवरेगी मां पीतांबरा की नगरी गौरतलब है कि पीतांबरा पीठ अब आध्यात्मिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है. क्योंकि केंद्र सरकार ने इस दिशा में ‘प्रसाद योजना’ के तहत 44.24 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की है. इस योजना से धार्मिक स्थलों का कायाकल्प होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण होगा. योजना का उद्देश्य भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और पर्यटकों के लिए सुविधाजनक बनाना है.

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय के लिये प्रतिबद्ध

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि टेली-मेडिसिन सेवा दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाओं के प्रदाय का सशक्त माध्यम है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा में टेली-मेडिसिन सेवा का शुभारंभ किया। इस सेवा से रीवा और सीधी जिलों के प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सकों को वरिष्ठ विशेषज्ञों का परामर्श प्राप्त होगा। इस सेवा के तहत अब संजय गांधी अस्पताल, रीवा के मेडिसिन, शिशु रोग (पेडियाट्रिक्स) तथा स्त्री रोग (गायनी) विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सक, दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों को फोन या अन्य संचार माध्यमों से जरूरी परामर्श देंगे। इससे उन मरीजों को तुरंत लाभ मिलेगा जिन्हें विशेषज्ञ सलाह की आवश्यकता होती है। अब ग्रामीण क्षेत्र के नागरिकों को विशेषज्ञ सेवाओं के लिए ज़िला मुख्यालय आने की आवश्यकता विशेष परिस्थितियों में ही पड़ेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह सेवा न सिर्फ मरीजों की यात्रा की आवश्यकता को कम करेगी, बल्कि समय, धन और संसाधनों की भी बचत करेगी। साथ ही, इससे प्राथमिक स्तर पर कार्यरत चिकित्सकों को विशेषज्ञों की मदद से त्वरित एवं सटीक निर्णय लेने में सुविधा होगी। इससे मातृ-शिशु स्वास्थ्य, गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक पहचान व इलाज की गुणवत्ता में सुधार होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि टेली-मेडीसिन सेवा का प्रभावी उपयोग “सशक्त व स्वस्थ मध्यप्रदेश” के विजन को धरातल पर उतारने में सहयोगी होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने टेली-मेडिसिन कक्ष की व्यस्थाओं का अवलोकन किया एवं विधिवत संचालन के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि वे अगले सप्ताह प्रदान की जा रही सेवाओं की गुणवत्ता की समीक्षा करेंगे। डीन मेडिकल कॉलेज रीवा डॉ. सुनील अग्रवाल सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित थे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पतंजलि संस्थान द्वारा विंध्य क्षेत्र में किए जा रहे निवेश एवं औद्योगिक परियोजनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि हाल ही में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉनक्लेव, रीवा के माध्यम से विंध्य क्षेत्र में निवेश के अपार अवसर खुले हैं। जो विंध्य के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। पतंजलि समूह जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की भागीदारी से इस क्षेत्र में औद्योगिक क्रांति की मजबूत आधारशिला रखी जा सकती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल से अमहिया, रीवा स्थित निज निवास पर पतंजलि योगपीठ के संस्थापक सचिव आचार्य बालकृष्ण ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर पतंजलि संस्थान द्वारा विंध्य क्षेत्र में किए जा रहे निवेश एवं संभावित औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। क्षेत्रीय विकास, स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग तथा युवाओं को रोजगार से जोड़ने के विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता, प्राकृतिक संसाधनों और जनभागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भर विंध्य के निर्माण की दिशा में सार्थक चर्चा हुई।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा प्रदेश के हर क्षेत्र में उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में ग्वालियर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण योजना की गहन समीक्षा की उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में जल संसाधन मंत्री एवं ग्वालियर जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण तथा उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह और ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जय आरोग्य अस्पताल, ग्वालियर में सीटीवीएस (कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी) विभाग के आवश्यक पदों की स्वीकृति का प्रस्ताव तैयार करने और अस्पताल भवन के उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों को शीघ्रता एवं प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर क्षेत्र में उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में ग्वालियर क्षेत्र के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के अधोसंरचना विकास, मैन पॉवर, उपकरण उपलब्धता की विस्तारपूर्वक समीक्षा कर आवश्यक व्यवस्थाओं के उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश सरकार समस्त अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा लक्ष्य है कि नागरिकों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बाहर न जाना पड़े। इसके लिए आवश्यक अधोसंरचना विकास, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और चिकित्सकीय स्टॉफ की पर्याप्त नियुक्ति सुनिश्चित की जा रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत सांवेर विधानसभा क्षेत्र के स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन के लिए तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त तरुण राठी, तथा संचालक नीरज कुमार सिंह उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वास्थ्य अमले को तैयारियों के लिए जारी किये निर्देश

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने राज्य में बढ़ती गर्मी और लू की गंभीरता को देखते हुए नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकाल के समय में सभी नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। सरकार और प्रशासन पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं। समस्त स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक तैयारियों के लिए निर्देशित कर दिया गया है। उन्होंने अपील की है कि सभी नागरिक सावधानियों का अवश्य पालन करें। प्रबंध संचालक, एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन और अस्पताल अधीक्षकों को गर्मी के दृष्टिगत स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए आवश्यक तैयारियों और जागरूकता के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गर्मी के मौसम में भारत सरकार द्वारा हीट रिलेटेड इलनेस से बचाव के लिए दिशा-निर्देश को जिला व स्वास्थ्य संस्थानों को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के लिए कहा है। साथ ही जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में इन पर चर्चा कर संबंधित विभाग प्रमुखों को भी अवगत कराने के निर्देश दिए गये हैं। उन्होंने जनसामान्य को जागरूक करने और सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में रोगियों को एचआरआई से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, आईएचआईपी पोर्टल पर प्रतिदिन एचआरआई मामलों की रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिये कहा गया है। इससे अधिक तापमान से होने वाली बीमारियों व अवांक्षित घटनाओं को रोका जा सकेगा। क्या करें हाइड्रेटेड रहना है जरूरी गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी होना आम समस्या है। इससे गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं। नागरिक दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, भले ही प्यास न लगे। यात्रा करते समय पानी अवश्य साथ रखें। ओआरएस, नींबू पानी, लस्सी, छाछ, फलों के रस (थोड़ा नमक मिलाकर) जैसे घरेलू पेय का सेवन लाभकारी होता है। तरबूज, खरबूजा, संतरा, अंगूर, अनानास, खीरा जैसी मौसमी फल-सब्ज़ियों का सेवन शरीर में तरलता बनाए रखने में सहायक होता है। शरीर को ढँककर रखें धूप में निकलते समय शरीर को पूरी तरह ढँकना बेहद जरूरी है। हल्के रंग के, सूती और ढीले कपड़े पहनें ताकि गर्मी से राहत मिल सके। सिर को टोपी, छतरी, गमछा या पारंपरिक उपायों से ढकना चाहिए। नंगे पांव धूप में जाना भी हानिकारक हो सकता है, इसलिए चप्पल या जूते पहनना अनिवार्य है। घर को ठंडा और सुरक्षित बनाएँ जहाँ तक हो सके, दोपहर के समय घर के अंदर या छांव में रहें। घर में ठंडी हवा का संचार बना रहे, इसके लिए दिन में खिड़कियां और पर्दे बंद रखें और रात में उन्हें खोल दें। बाहर जाना जरूरी हो, तो सुबह या शाम के ठंडे समय में ही जाएं। गर्मी के समय बाहरी गतिविधियों को सीमित करना आवश्यक है। घर में ठंडक बनाए रखने के लिए पर्दे, शटर या सनशेड का उपयोग करें। दिन में निचली मंजिल पर रहना ज्यादा सुरक्षित होता है। शरीर को ठंडा रखने के लिए पंखा, ठंडा पानी, गीले कपड़े, या 20°C के पानी में पैरों को डुबोना सहायक होता है। विशेष ध्यान देने योग्य संवेदनशील वर्ग छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, मानसिक या शारीरिक बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति और बाहर कार्य करने वाले लोग अधिक संवेदनशील होते हैं। इन लोगों को अतिरिक्त सुरक्षा और देखरेख की आवश्यकता होती है। ठंडे प्रदेश से गर्म प्रदेश में आने वाले लोगों को अपने शरीर को नई जलवायु के अनुसार ढालने के लिए समय देना चाहिए। मौसम की जानकारी रखें रेडियो, टीवी, समाचार पत्रों या भारत मौसम विज्ञान विभाग की वेबसाइट (https://mausam.imd.gov.in) से मौसम की ताज़ा जानकारी लेते रहें। मौसम की पूर्व चेतावनियों को गंभीरता से लें और उसी अनुसार अपने कार्यक्रम बनाएं। बचाव के लिए ये गलतियां न करें दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक बाहर न निकलें। इस समय गर्मी अपने चरम पर होती है। भारी कामकाज या शारीरिक मेहनत भी टालें। नंगे पांव बाहर न निकलें। गर्मी में खाना पकाते समय रसोई में वेंटिलेशन रखें। शराब, चाय, कॉफी, सॉफ्ट ड्रिंक्स, या अधिक मीठे पेयों से बचें, ये शरीर से तरलता कम करते हैं। बासी और भारी प्रोटीन युक्त भोजन न करें। किसी भी परिस्थिति में बच्चों या पालतू जानवरों को बंद वाहन में न छोड़ें। श्रमिकों और नियोक्ताओं के लिए विशेष निर्देश काम की जगह पर ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना अनिवार्य है और हर 20 मिनट में पानी पीने की सलाह दी जाए। काम को सुबह-शाम के समय शेड्यूल करें। छांव की व्यवस्था करें और कार्य के बीच पर्याप्त आराम दें। नए श्रमिकों के लिए कार्य का समय धीरे-धीरे बढ़ाएं ताकि वे मौसम के अनुसार ढल सकें। श्रमिकों को गर्मी से संबंधित लक्षणों की पहचान और प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग दें। ‘बडी सिस्टम’ अपनाएं और प्रशिक्षित फर्स्ट एड कर्मियों की व्यवस्था करें। गर्भवती या बीमार श्रमिकों के लिए डॉक्टर से परामर्श आवश्यक है। भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में सावधानी खेलों या धार्मिक आयोजनों जैसे भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में अत्यधिक गर्मी और पसीने के कारण हीट रिले़टेड इलनेस (एचआरआई) की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे आयोजनों में पर्याप्त पानी, छांव और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था अनिवार्य है। उपस्थित लोगों को लक्षणों की जानकारी होनी चाहिए। गर्मी से होने वाली बीमारियां और लक्षण अत्यधिक गर्मी से शरीर का तापमान ऊपर जा सकता है, जिससे हीट स्ट्रेस, हीट रैश, हाथ-पांव सूजना, मांसपेशियों की ऐंठन, चक्कर आना, हीट एक्सहॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे दिल, फेफड़े, किडनी जैसी पुरानी बीमारियां भी बढ़ सकती हैं। लक्षणों में चक्कर, बेहोशी, उल्टी, सिरदर्द, बहुत ज्यादा प्यास, गाढ़ा पेशाब, तेज़ सांस और दिल की धड़कन शामिल हैं। मांसपेशियों की ऐंठन होने पर तुरंत ठंडे स्थान पर आराम करें और ओआरएस पिएं। एक घंटे से अधिक ऐंठन रहने पर डॉक्टर से परामर्श लें। हीट स्ट्रोक: जानलेवा स्थिति हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें शरीर का तापमान 40°C से ऊपर हो सकता है और व्यक्ति बेहोश, भ्रमित या चिड़चिड़ा हो सकता है। त्वचा लाल, गर्म और सूखी हो जाती है। बच्चों में संकेत: दूध न पीना, चिड़चिड़ापन, पेशाब कम होना, आंखों का धंसना, सुस्ती या झटका आना, शरीर से खून आना आदि। तुरंत क्या करें 108 या 102 पर कॉल करें। व्यक्ति को ठंडी जगह ले … Read more

यह भारत का महानिर्माण काल है, जिसमें प्रत्येक नागरिक, संस्था और संगठन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत शक्तिशाली, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र के रूप में वैश्विक क्षितिज पर उभर रहा है। यह भारत का महानिर्माण काल है, जिसमें प्रत्येक नागरिक, संस्था और संगठन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल सफल रिट्रीट भोपाल में एमईएस बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ऑल इंडिया काउंसिल मीट-2025 कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने एसोसिएशन के सभी प्रतिनिधियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं एवं श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों प्रतिनिधियों को सम्मानित किया अब हम दुश्मन को घर में घुसकर जवाब देते है उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत को आशा और संभावनाओं की दृष्टि से देख रही है। भारत वह राष्ट्र है जो विश्व में शांति स्थापित करने की सामर्थ्य रखता है। आज का भारत अपने निर्णय अंतर्राष्ट्रीय दबाव में नहीं, बल्कि वैश्विक हित में लेता है। हमारी सेनाएं पूरी मजबूती के साथ खड़ी हैं। अब वह समय नहीं जब हम ज़मीन पर विजय के बाद टेबल पर हार जायें, अब हम दुश्मन को घर में घुसकर जवाब देते हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि भारतीय सेना के साथ जुड़कर कार्य करना गौरव और राष्ट्रसेवा का अवसर है। एमईएस बिल्डर्स एसोसिएशन के सदस्य सैन्य आवश्यकताओं की पूर्ति में उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं। सैन्य क्षेत्र में उत्पादों की गुणवत्ता, अनुशासन और प्रतिबद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और एसोसिएशन इन सभी मानकों पर खरा उतर रहा है। विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। भविष्य में हथियार भी भारतीय होंगे उन्हें चलाने वाले भी स्वदेशी होंगे। एमईएस बिल्डर्स एसोसिएशन के सदस्य भारतीय सेना के साथ कदम से कदम मिलाकर भारत माता की सेवा कर रहे हैं, यह अत्यंत गर्व की बात है। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के 80 जिलों से आए एसोसिएशन के पदाधिकारी, बिल्डर्स, सैन्य क्षेत्र से जुड़े अधिकारी एवं प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा विश्वविद्यालय महापुरुषों के निर्माण की फैक्ट्री होते हैं और शिक्षकगण इन संस्थाओं के कुशल कारीगर होते

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि विश्वविद्यालय महापुरुषों के निर्माण की फैक्ट्री होते हैं और शिक्षकगण इन संस्थाओं के कुशल कारीगर होते हैं। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर के उद्धरण का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास होना चाहिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के तृतीय दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अपने ज्ञान का प्रयोग समाज के उत्थान में करें। केवल व्यक्तिगत सफलता ही नहीं, समाज और देश के विकास में भी भागीदारी आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बड़े पद पर पहुँचने के बाद ही असली कार्य प्रारंभ होता है। अपने योगदान से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे राष्ट्र के तीव्र विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अधोसंरचना, आर्थिक समृद्धि, और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प को दोहराया और कहा कि ‘स्किल, स्केल और स्पीड’ के तीन स्तंभों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि “धरती से दौलत निकालनी होगी”- इस विचारधारा को मूर्त रूप देते हुए ‘नदी जोड़ो परियोजना’ के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नव युग की शुरुआत हो रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आज युवाओं के पास विकास के बहुत अवसर हैं। इन अवसरों का लाभ उठायें। उन्होंने युवाओं से आहवान किया कि वे नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहें और अपनी ऊर्जा का सदुपयोग स्वयं, समाज, देश और विश्व के कल्याण के लिये करें। उन्होंने कहा कि समाज युवाओं की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है और युवाओं को इस भरोसे पर खरा उतरना होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की दीक्षांत समारोह स्मारिका तथा “कंप्यूटर एक परिचय” पुस्तक के 41वें संस्करण का विमोचन भी किया। समारोह में रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे, कुलगुरु डॉ. आर.पी. दुबे, इसरो के वरिष्ठ एयरोस्पेस वैज्ञानिक राधाकांत पाढ़ी सहित अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।  

MP के रीवा शहर में बनेगा कैंसर अस्पताल, अब मरीजों को नहीं जाना होगा भोपाल

रीवा मध्य प्रदेश को जल्द ही एक और कैंसर अस्पताल की सौगात मिलने वाली है, इस बात की जानकारी डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने दी है. उन्होंने बताया कि कैंसर अस्पताल के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं, एक से डेढ़ साल के बीच ही अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा, वहीं अस्पताल के लिए मशीनों के एडवांस में ऑर्डर भी दे दिए गए हैं. यह कैंसर अस्पताल में विंध्य अंचल में खुलेगा ऐसे में अब यहां के मरीजों को भोपाल या इंदौर जाने की जरुरत नहीं होगी, क्योंकि उन्हें उनके ही घर में कैंसर का इलाज मिलना शुरू हो जाएगा.  कैंसर एक खतरनाक और जानलेवा बीमारी है। यह जिसे भी हो जाए उसके परिवार को तबाह करके रख देती है। समय पर यदि इसका इलाज ना मिले, तो यह धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा कर उसकी जान ले सकती है। कैंसर का नाम सुनते ही लोगों की हक्की-बक्की गुम हो जाती है। कैंसर का इलाज काफी महंगा भी है, लेकिन कुछ ऐसे भी संस्थान है, जहां फ्री में या फिर बहुत ही कम पैसे में इसका इलाज कराया जाता है। जो लोग कैंसर से पीड़ित हो जाते हैं, उन्हें जीवन भर डॉक्टर की निगरानी में रहना पड़ता है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के रीवावासियों के लिए खुशखबरी है। बता दें कि जिले में कैंसर अस्पताल बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। उम्मीद है कि आने वाले 1 से डेढ़ साल में यहां कैंसर अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा। स्थानीय लोगों को फायदा मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, यहां निर्माणाधीन कैंसर अस्पताल के लिए मशीनों के एडवांस आर्डर भी दे दिए गए हैं। जिसकी जानकारी खुद मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने दी है। उन्होंने बताया कि काफी लंबे समय से इस प्रोजेक्ट पर विचार किया जा रहा था, जिसे ध्यान में रखते हुए इस अस्पताल को बनाने का निर्णय लिया गया। जिसमें पहले 200 बेड की व्यवस्था की जाएगी। इस अस्पताल के बनने से स्थानीय लोगों को काफी राहत मिलेगी। मिलेगा बेहतर इलाज रीवा के लोगों को इलाज के लिए टाटा मेमोरियल या फिर भोपाल एम्स जाना पड़ता था, लेकिन रीवा में ही कैंसर अस्पताल बनने के बाद उनकी यह परेशानी दूर हो जाएगी। यहां उन्हें बेहतर इलाज मिल पाएगा। करोड़ों की लागत से बन रहे इस अस्पताल में मरीज को बहुत सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। कैंसर की अस्पताल में 20 से 25 करोड़ की लागत की कई मशीन लगाई जाएगी। जिसकी मदद से पहले स्टेज में ही कैंसर का पता लगाया जाएगा। साथ ही इसका इलाज भी शुरू कर दिया जाएगा। एक से डेढ़ साल में बनेगा अस्पताल के बनने से रीवा के लोगों को अब इलाज के टाटा मेमोरियल और भोपाल एम्स नहीं जाना पड़ेगा। रीवा में ही उन्हें बेहतर इलाज हो पाएगा, अगले एक से डेढ़ साल में कैंसर अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा। करोड़ों रुपयाें की मशीनों से होगा इलाज बता दें कि, कैंसर के इलाज के लिए कुछ महत्वपूर्ण मशीनों की जरूरत होती है। जिनमें लीनियर एक्सीलरेटर, कोबाल्ट मशीन, पेट स्कैन समेत ब्रेकीथेरेपी मशीन भी शामिल है। अकेले लीनियर एक्सीलरेटर मशीन की कीमत 50 से 60 करोड़ रुपए की है।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा को विकसित बनाने के साथ जल समृद्ध बनाना

रीवा उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा को विकसित बनाने के साथ जल समृद्ध बनाना है। वर्षा के जल को संरक्षित करने तथा प्राचीन जल स्त्रोतों में सुधार कार्य कर जल संरक्षण व संवर्धन के कार्य प्राथमिकता से किये जा रहे हैं ताकि आने वाले समय में पानी की कमी न हो। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ग्राम पंचायत सगरा में केन्द्रीय जल शक्ति विभाग के सहयोग से बोर के माध्यम से संग्रहित होने वाले भूजल को जमीन के भीतर संचयित किये जाने के कार्य का शुभारंभ किया। ग्राम पंचायत सगरा में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार के जल शक्ति विभाग के सहयोग से रीवा जिले में 100 बोरवेल के माध्यम से संग्रहित होने वाले जल को जमीन के अंदर संचित किये जाने का कार्य प्रारंभ हो रहा है। इसके अतिरिक्त जल गंगा अभियान में जल संरक्षण व संवर्धन के कार्य आगामी 3 माह तक नियमित रूप से संचालित होंगे। यह प्रयास है कि वर्षा का जल बर्बाद न हो। जमीन के अंदर इसका संचयन हो तथा जल स्त्रोत भी पानीदार रहे ताकि जिले का भूजल स्तर कम न हो। उन्होंने जल संरक्षण कार्य में आमजनों की सहभागिता की भी अपेक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल द्वारा जहां एक ओर हर घर को शुद्ध पानी पहुंचाने का कार्य हो रहा है वहीं दूसरी ओर जल संचयन, संवर्धन का कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जमीन के अंदर के पानी का दोहन न होकर इसका पोषण हो यह इस योजना का लक्ष्य है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने बताया कि जल गंगा अभियान अन्तर्गत जिले के तालाब निर्माण के साथ ही मनरेगा से पानी बचाने की संरचनाओं को पूर्ण किये जाने के कार्य कराये जायेंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत मेहताब सिंह गुर्जर ने जल संचयन कार्य में गुजरात के दल को प्रशासन के पूर्ण सहयोग की बात कही। इससे पूर्व गुजरात के जल संचयन दल प्रभारी अमित सिंह ने बताया कि रीवा जिले में 100 बोर कर संग्रहित पानी को चेम्बर बनाकर भूमि के अंदर संचयित किया जायेगा। इस कार्य का शुभारंभ सगरा से किया गया है। सरपंच श्रीमती सावित्री राजेश पाल, सीईओ जनपद संजय सिंह, समाजसेवी राजेश पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन व ग्राम पंचायतों के सरपंच उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बेसिक्स आफ क्रिटिकल केयर इन ऑब्स्टेट्रिक्स विषय पर कार्यशाला का किया शुभारंभ

मातृ एवं शिशु के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिये समन्वित प्रयास आवश्यक- उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मातृ एवं शिशु के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिये समन्वित प्रयास आवश्यक उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बेसिक्स आफ क्रिटिकल केयर इन ऑब्स्टेट्रिक्स विषय पर कार्यशाला का किया शुभारंभ भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मातृ एवं शिशु के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिये समन्वित प्रयास आवश्यक है। गभर्वती महिला की समय-समय पर जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श देकर एवं उनके परिजनों को जागरूक कर मातृ मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा में गायनी विभाग के तत्वाधान में “बेसिक्स ऑफ क्रिटिकल केयर इन ऑब्स्टेट्रिक्स” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला का पंजीयन हो। उसकी समय-समय पर जांच की जाकर चिकित्सकीय परामर्श दिया जाय और यह प्रयास हों कि वह क्रिटिकल अवस्था में पहुंचे ही नहीं। चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएँ देकर एवं ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य कार्यकर्ता व स्टाफ अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए गर्भवती महिला का ध्यान रखें और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने का समन्वित प्रयास करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि हुई है। चिकित्सकों के पदों की पूर्ति की गई है। मेडिकल कालेज खोले गये हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केन्द्रों को सुविधायुक्त बनाया जा रहा है इससे वहां जिला अस्पताल जैसी सभी सुविधाएँ मुहैया रहें। उन्होंने चिकित्सकों व स्वास्थ्य विभाग के अमले को इस चुनौती का सामना करते हुए संकल्प के साथ कार्य करने की अपेक्षा की जिससे प्रदेश मातृ मृत्यु व शिशु मृत्यु दर कम कर पाने में सफल हो सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कार्यशाला में विचार विमर्श व प्राप्त सुझावों का नीचे स्तर तक लाभ मिलेगा और यह कार्यशाला सार्थक सिद्ध होगी। उन्होंने कार्यशाला में जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ व बीएमओ की उपस्थिति की बात कही। कार्यशाला में मिशन डायरेक्टर एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना ने भोपाल से वीडियो कांफ्रेंसिग से सम्मिलित हुई। डायरेक्टर एनएचएम एमसीएच (रेगुलेशन एण्ड पॉलिशी) डॉ. अरूणा कुमार ने मातृ मृत्यु दर का संभागवार प्रस्तुतीकरण देते हुए उसे कम करने के विषय में जानकारी दी। संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरूण श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में कहा कि कार्यशाला से चिकित्सक सीख लेकर समर्पित भाव से कार्य करें तो हम प्रदेश में मातृ मृत्यु दर व शिशु मृत्यु दर को कम कर सकेंगे। उन्होंने शोध व अकादमिक स्तर को सशक्त बनाने की भी बात कही। संचालक श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को उप मुख्यमंत्री शुक्ल के प्रयासों से पर्याप्त बजट प्राप्त हुआ है। स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि हो रही है। रीवा भी उक्त स्वास्थ्य सुविधाओं में प्रदेश में पीछे नहीं है। डॉ. बीनू कुशवाहा, डीन मेडिकल कालेज डॉ. सुनील अग्रवाल, अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा सहित प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालय के गायनी विभाग के चिकित्सक, मेडिकल कालेज के चिकित्सक तथा छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। आने वाला समय भारत का है। हम फिर से सोने की चिड़िया बनने की राह पर हैं और इस सपने को पूरा करने के लिए अच्छा स्वास्थ्य अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, सबसे पहला सुख निरोगी काया है। विकसित भारत के निर्माण के लिए स्वस्थ भारत आवश्यक है। इसके लिए नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना होगा, स्वस्थ जीवन शैली अपनानी होगी और नियमित जाँच करवानी होगी, ताकि रोगों का समय पर निदान हो सके और प्रसार को रोका जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ज्ञान विज्ञान भवन, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल में भोजपाल मित्र परिषद द्वारा आयोजित कैंसर जाँच एवं जागरूकता शिविर का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्राथमिकता का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिये सतत प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि शासकीय प्रयासों के साथ निजी सहभागिता को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्ष 2003 में प्रदेश में मात्र 5 मेडिकल कॉलेज थे, जो अब बढ़कर 17 हो चुके हैं। आगामी 2 वर्षों में 8 नवीन शासकीय मेडिकल कॉलेज खोले जाने की योजना है। इसके अलावा, 12 जिलों में पीपीपी मोड से मेडिकल कॉलेज स्थापना के प्रयास किए जा रहे हैं। ‘राइट टू हेल्थ’ के साथ ‘राइट टू स्क्रीनिंग’ भी ज़रूरी उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने भोजपाल मित्र परिषद द्वारा कैंसर जागरूकता एवं जाँच शिविर की पहल की सराहना करते हुए कहा कि कैंसर की सही समय पर जाँच निदान को सरल बनाती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि ‘राइट-टू-हेल्थ’ के साथ ‘राइट-टू-स्क्रीनिंग’ भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूरे देश में 30 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों की जाँच के लिए 20 फरवरी से 31 मार्च तक निःशुल्क निरोगी काया अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें बीपी, सुगर, फैटी लीवर और कैंसर की जाँच की जा रही है। उन्होंने उपस्थित युवाओं और प्रबुद्ध जनों से आह्वान किया कि इस अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करें। इससे अधिक से अधिक नागरिक इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। निरोगी काया अभियान में की जा रही है निःशुल्क जाँच उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के तहत असंचारी रोगों की स्क्रीनिंग के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिकों पर जाँच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। रोगों की पहचान होने पर त्वरित रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सिविल अस्पतालों अथवा जिला चिकित्सालयों में उपचार प्रारंभ किया जा रहा है। नए मरीजों की पहचान के लिए आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर जानकारी इकट्ठा की जा रही है। प्राप्त जानकारी के आधार पर असंचारी रोग स्क्रीनिंग एवं पंजीयन का कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्क्रीनिंग के साथ-साथ लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए विभिन्न बीमारियों के लक्षण, बचाव और उपचार की जानकारी भी दी जा रही है। हर संभागीय मुख्यालय में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का प्रयास उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कैंसर के इलाज के लिए शीघ्र ही प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों में ‘सेंटर-ऑफ-एक्सीलेंस’ स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में अत्याधुनिक उपकरण जैसे ब्रेकी थेरेपी, पेट स्कैन, लीनियर एक्सीलरेटर आदि की सुविधा होगी तथा पर्याप्त मैनपॉवर की भी व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति सतर्क और सजग रहना भी आवश्यक है, ताकि जीवनशैली में सुधार कर स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण में योगदान दिया जा सके। आयुर्वेद स्वस्थ जीवन शैली का प्रशस्त करता है मार्ग सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण और उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि आयुर्वेद स्वस्थ जीवन शैली का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने योग और प्राणायाम को जीवन में अपनाने पर बल दिया। आरोग्य भारती के अशोक वाष्णेय ने संतुलित आहार, स्वस्थ दिनचर्या और सकारात्मक सोच को स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन का मूल बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र और मौसम के अनुरूप भोजन करना और नियमित व्यायाम को जीवनशैली में शामिल करना आवश्यक है। नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, हरिओम जटिया, पीपल्स ग्रुप के डायरेक्टर रोहित पंडित, डॉ. अनिकेश गोयनका, भोजपाल मित्र परिषद के आशीष पांडेय, आशीष जनक सहित अन्य पदाधिकारी, चिकित्सक और चिकित्सा छात्र उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री ने खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता प्रबंधन की समीक्षा में दिये निर्देश

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा “मन की बात” में देशवासियों को उचित खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया गया है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि संतुलित और स्वच्छ भोजन नागरिकों के स्वास्थ्य का आधार है। उन्होंने निर्देश दिए कि स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और खाद्य संस्थानों को सही खाद्य पदार्थों का उपयोग और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिये की जा रही कार्यवाहियों और गतिविधियों की वृहद समीक्षा की। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, आयुक्त फूड सेफ्टी संदीप यादव, नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन दिनेश कुमार मौर्य, संयुक्त नियंत्रक श्रीमती माया अवस्थी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। हर ज़िले में हेल्दी और हाईजीनिक फ़ूड स्ट्रीट बनायें उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि प्रदेश में एक महीने का विशेष जन जागरूकता अभियान चलाया जाये। जिसमें सभी जिलों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता की जांच हो साथ ही अच्छी प्रैक्टिस की जानकारी भी दी जाये। एक माह बाद खाद्य गुणवत्ता में सुधार के प्रभाव की समीक्षा कर आगामी कार्य योजना का निर्धारण किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्ट्रीट फूड विक्रेताओं और खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा संबंधी बेहतर तरीकों के बारे में जागरूक किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल करने का प्रयास किया जाए ताकि वे अपने क्षेत्रों में जन-जागरूकता का प्रसार कर सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि हर ज़िले में हेल्दी और हाईजेनिक फ़ूड स्ट्रीट प्रमाणन के प्रयास किए जायें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “ईट राइट इंडिया अभियान” को गति देगा और नागरिकों को सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश को आगे ले जाएगा। उन्होंने कहा कि हेल्दी और हाइजीनिक फूड की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। 3 नवीन संभागीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशालाओं का किया जा रहा है निर्माण खाद्य पदार्थों की जाँच में तेज़ी लाने के लिये 3 नई संभागीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशालाओं का निर्माण इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में किया जा रहा है। इंदौर और जबलपुर में मशीनें स्थापित कर मानव संसाधन उपलब्ध कराकर परीक्षण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। ग्वालियर में 60% सिविल कार्य पूरा हो चुका है। भोपाल में हाइटेक माइक्रो बॉयोलॉजी प्रयोगशाला का 80% निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। संयुक्त नियंत्रक श्रीमती अवस्थी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 अंतर्गत प्रदेश में 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2024 तक 10,670 लीगल नमूने और 31,387 सर्विलेंस नमूने लिए गए, जिनमें से 30,692 नमूनों का विश्लेषण किया गया। इनमें 1,663 नमूने असुरक्षित, अवमानक या मिथ्या छाप पाए गए। विभाग ने 1,729 प्रकरण दायर किए और 2,015 प्रकरणों का निपटारा किया, जिनमें से 2,000 प्रकरणों में दोष सिद्धि हुई। इस अवधि में 24,485 लाइसेंस और 1,46,258 रजिस्ट्रेशन जारी किए गए। लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन से ₹12.47 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि ₹9.02 करोड़ का अर्थदंड अधिरोपित कर ₹2.98 करोड़ की वसूली की गई। 13 हज़ार से अधिक खाद्य कारोबारियों को किया जा चुका है प्रशिक्षित खाद्य पदार्थों में मिलावट के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु 270 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर 13,588 खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षित किया गया है। चलित खाद्य प्रयोगशाला के माध्यम से 563 जनजागरूकता कार्यक्रमों में 15,185 नागरिकों को प्रशिक्षण दिया गया। फोर्टिफाइड राइस कर्नेल निर्माताओं को भारत सरकार के सहयोग से प्रशिक्षित किया गया। ‘ईट राइट’ गतिविधि के तहत 10 ईट राइट कैंपस, 9 ईट राइट स्कूल, 3 क्लीन वेजिटेबल मार्केट, 4 सेफ भोग प्लेस, 188 हाईजीन रेटिंग और 2 ईट राइट स्टेशनों को प्रमाणित किया गया है। अवमानक असुरक्षित खाद्य पदार्थों के नियंत्रण के वैधानिक प्रावधान संयुक्त नियंत्रक श्रीमती अवस्थी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत खाद्य पदार्थों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। अवमानक खाद्य (सब स्टैंडर्ड) वह होता है जो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करता, लेकिन इससे मानव स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं होता। मिथ्या छाप खाद्य (मिस ब्रांड) वह खाद्य पदार्थ है, जिसके संबंध में आवश्यक जानकारी या गुण-दोष लेवल पर सही तरीके से अंकित नहीं किए गए हों। वहीं, असुरक्षित खाद्य (अनसेफ) ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं, जिनकी प्रकृति, गुणवत्ता या सामग्री मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। अधिनियम के तहत दो प्रकार के प्रकरण अभियोजित किए जाते हैं। सिविल प्रकरण (धारा 51 से 58 एवं 61, 63) में अवमानक या मिथ्या छाप से संबंधित अपराध या नियमों का उल्लंघन होने पर मामले न्याय निर्णायक अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं। आपराधिक प्रकरण (धारा 59, 60, 62, 64, 65) में असुरक्षित खाद्य या बिना लाइसेंस व्यापार से जुड़े मामले प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत होते हैं, जिनमें अधिकतम आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।  

प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता से 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका

टीबी मुक्त भारत के लिए मध्यप्रदेश प्रतिबद्ध : उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निक्षय भारत अभियान में मध्यप्रदेश के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों की सराहना की  प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता से 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतें क्षयरोग मुक्त घोषित भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निक्षय भारत अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं की सराहना की है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल शासकीय प्रयासों से ही संभव नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी से ही इसे साकार किया जा सकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि इस अभियान में सहयोग दें और टीबी मुक्त मध्यप्रदेश बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विश्व टीबी दिवस पर स्वास्थ्यकर्मियों, निक्षय मित्रों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की प्रतिबद्धता और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि सबकी मेहनत और सेवा भाव से ही मध्यप्रदेश क्षयरोग उन्मूलन की दिशा में इतनी तेज गति से आगे बढ़ा है। निक्षय मित्रों ने अपने स्तर पर आर्थिक और पोषण सहायता प्रदान कर मरीजों को नया जीवन दिया है, जो एक अनुकरणीय उदाहरण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से हम टीबी मुक्त भारत का सपना साकार करेंगे। मध्यप्रदेश में 100 दिवसीय विशेष निक्षय शिविर अभियान के तहत 7 दिसंबर 2024 से 23 जिलों में गहन टीबी खोज और उपचार अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य उच्च टीबी बोझ वाले जिलों में टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान, मृत्यु दर में कमी और नए मामलों को रोकना है। इस अभियान के तहत 78 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 21 हजार 430 नए टीबी मरीज चिन्हित (नोटिफाई) किए गए और उनका तुरंत उपचार शुरू कराया गया। डीबीटी के माध्यम से आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। इस दौरान 19 हजार से अधिक निक्षय मित्रों ने 25 हजार से अधिक टीबी मरीजों को पोषण सहायता प्रदान की और 4 लाख से अधिक नागरिकों ने टीबी मुक्त भारत के संकल्प की शपथ ली। प्रदेश में सामुदायिक सहभागिता के अंतर्गत 5 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को क्षयरोग मुक्त घोषित किया जा चुका है। मध्यप्रदेश ने क्षयरोग (टीबी) उन्मूलन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त किया है। वर्ष 2020 में संभावित क्षयरोगी दर 532 प्रति लाख थी, जो 2024 में बढ़कर 3031 प्रति लाख हो गई, जो रोगियों की शीघ्र पहचान और बेहतर निगरानी का प्रमाण है। वर्ष 2024 में 1 लाख 90 हजार क्षय रोगियों को खोजने के लक्ष्य के विरुद्ध 1 लाख 81 हजार 85 (95%) रोगियों की पहचान की गई। प्रदेश में टीबी उपचार की सफलता दर 87% है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है। गत 1 नवंबर 2024 से सभी अधिसूचित टीबी मरीजों को उपचार के दौरान एक हजार रूपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जो पहले 500 रूपये प्रतिमाह थी। इसके अलावा, अधिसूचित जनजातीय क्षेत्रों में सभी खोजे गए टीबी रोगियों को 750 रूपये की एकमुश्त राशि भी प्रदान की जा रही है। प्रदेश की सभी जेलों में भी समय-समय पर आईसीएमआर की हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों के माध्यम से टीबी स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। बलगम के नमूने लेकर उन्हें सीबीनेट और टूनेट मशीनों द्वारा जांच की जाती है, जिससे जेलों में क्षयरोग के मामलों की शीघ्र पहचान हो रही है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने नियमित जाँच और अंगदान को बढ़ावा देने का किया आह्वान

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर किडनी रोगों से बचा जा सकता है। विश्व किडनी दिवस के अवसर पर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेशवासियों से किडनी रोगों के प्रति जागरूक रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियां क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के प्रमुख कारण हैं। इसके नियंत्रण के लिए समय पर जांच और सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं लेकिन अधिक मात्रा में पानी पीने से बचें। अपने आहार में किडनी के लिए अनुकूल फल और सब्जियाँ शामिल करें और भोजन में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और मसालों का प्रयोग करें। नियमित रूप से व्यायाम करें और धूम्रपान व शराब के सेवन से बचें। साथ ही, चीनी और नमक के अधिक सेवन से परहेज करें ताकि किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित न हो। वर्तमान वर्ष में अब तक 1 लाख 76 हज़ार से अधिक डायलिसिस सत्र सफलतापूर्वक संपन्न उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और सभी नागरिकों को उत्कृष्ट चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य सरकार किडनी रोगियों को गुणवत्तापूर्ण उपचार और डायलिसिस सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वर्तमान में प्रदेश में कुल 67 डायलिसिस इकाइयाँ कार्यरत हैं। इनमें 325 डायलिसिस मशीनों से मरीजों को राहत प्रदान की जा रही है। अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 तक 5058 मरीजों ने इन सेवाओं का लाभ लिया, और इस अवधि में 1,76,975 डायलिसिस सत्र सफलतापूर्वक संपन्न किए गए। सभी शासकीय चिकित्सालयों में गुणवत्तापूर्ण डायलिसिस सेवा सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन वीडियो मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया गया है, जिससे राज्य स्तर से सभी डायलिसिस इकाइयों पर निगरानी रखी जा रही है। रोकथाम और प्रारंभिक पहचान पर जोर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में मधुमेह और उच्च रक्तचाप से ग्रस्त सभी मरीजों की नियमित सीकेडी जांच सुनिश्चित की जा रही है, ताकि इस बीमारी को प्रारंभिक अवस्था में पहचाना और नियंत्रित किया जा सके। सभी चिकित्सकों को भी इस विषय में जागरूक किया जा रहा है कि वे उच्च जोखिम वाले मरीजों की समय पर पहचान कर उचित मार्गदर्शन दें।उन्होंने नागरिकों से अंगदान को अपनाने की अपील की है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सरकार अंग प्रत्यारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं पर कार्य कर रही है, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को नया जीवन मिल सके। किडनी विकारों के कारण और बचाव दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन: दर्द कम करने वाली एनएसएआईडी और एनाल्जेसिक दवाएं अत्यधिक उपयोग से किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। बिना चिकित्सक की सलाह के इनका लंबे समय तक सेवन न करें। अधिक नमक का सेवन: ज्यादा नमक या सोडियम युक्त आहार से रक्तचाप बढ़ता है और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए नमक की जगह जड़ी-बूटियों और मसालों का उपयोग करें। प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ: अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड में सोडियम, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा अधिक होती है। इससे किडनी रोग का खतरा 24% तक बढ़ सकता है। इनकी जगह ताजा और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ अपनाएं। कम पानी पीना: शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा न होने से किडनी विषाक्त पदार्थों को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, जिससे क्षति का खतरा बढ़ जाता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, खासकर गर्म मौसम में या अधिक शारीरिक गतिविधि करने पर। नींद की कमी: अच्छी नींद संपूर्ण स्वास्थ्य और किडनी के सुचारू कार्य के लिए आवश्यक है। नींद-जागने का चक्र किडनी के कार्य भार को नियंत्रित करता है, जिससे शरीर में संतुलन बना रहता है। अत्यधिक मांस का सेवन: प्रोटीन जरूरी है, लेकिन अधिक मात्रा में मांस खाने से किडनी पर दबाव बढ़ सकता है। संतुलित आहार का पालन करें और अपनी प्रोटीन आवश्यकताओं को ध्यान में रखें। अत्यधिक चीनी खाना: अधिक चीनी मोटापे को बढ़ाती है, जिससे उच्च रक्तचाप और मधुमेह का खतरा बढ़ता है। ये दोनों किडनी रोग के प्रमुख कारण हैं। धूम्रपान: धूम्रपान न केवल हृदय और फेफड़ों के लिए बल्कि किडनी के लिए भी हानिकारक है। धूम्रपान करने वालों में मूत्र में प्रोटीन बढ़ने की संभावना अधिक होती है, जो किडनी खराबी का संकेत हो सकता है। अत्यधिक शराब सेवन: ज्यादा शराब पीने से किडनी के कार्य प्रभावित होते हैं, जिससे शरीर में पानी का संतुलन बिगड़ सकता है और रक्तचाप बढ़ सकता है, जो किडनी रोग का प्रमुख कारण है। निष्क्रिय जीवनशैली: नियमित व्यायाम से वजन, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखा जा सकता है, जिससे किडनी को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिलती है। लंबे समय तक बैठे रहने से बचें और शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।  

जीरो कार्बन उत्सर्जन और ग्रीन ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भारत को विश्व का अग्रणी राष्ट्र : मंत्री शुक्ला

भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की विधानसभा में प्रस्तुत किया गया बजट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गरीब युवा, अन्नदाता और नारी (जीवायएएन) पर ध्यान के मंत्र पर फोकस के साथ ही धर्म और अध्यात्म की धरोहर को संरक्षित करने वाला है। मंत्री शुक्ला ने बजट में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अटल गृह ज्योति योजना के अंतर्गत 7132 करोड़ रुपए एवं कृषक मित्र सूर्य योजना के अंतर्गत 447 करोड़ रुपए का प्रवाधान किये जाने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों से किसान और आम नागरिक अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनेंगे। परिणामस्वरूप वर्ष 2047 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन और ग्रीन ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में भारत को विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री मोदी के लक्ष्य की प्राप्ति में मध्यप्रदेश महत्वपूर्ण योगदान कर सकेगा। मंत्री शुक्ला ने कहा कि बजट में श्रीकृष्ण पाथेय योजना के साथ राम पथ गमन योजना के लिए भी समुचित राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में सर्व-सुविधायुक्त वैचारिक अध्ययन केंद्र के रूप में गीता भवन बनाए जाने के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्णय का भी स्वागत किया है। मंत्री शुक्ला ने कहा कि इस बजट में फिर एक बार सरकार ने जनता पर बिना कोई कर लगाए बजट राशि को बढ़ाया है। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि यह बजट आने वाले वर्षों में समृद्ध मध्यप्रदेश के साथ विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।  

स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि, 23 हज़ार 535 करोड़ रुपए के वित्तीय प्रावधान

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत 2025-26 का बजट सर्वसमावेशी और दूरदर्शी है। यह बजट प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बजट में औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन जैसे सभी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इस वर्ष स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि कर कुल 23 हज़ार 535 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो गत वर्ष की तुलना में 2,992 करोड़ रूपये अधिक है। यह स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तृत और सुदृढ़ बनाने में सहयोगी होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सर्व-हितकारी और विकासोन्मुखी बजट के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उप मुख्यमंत्री (वित्त) जगदीश देवड़ा का आभार व्यक्त किया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के संतुलित एवं योजनाबद्ध विकास के लिए व्यापक बजटीय आवंटन उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं उप मुख्यमंत्री (वित्त) देवड़ा के नेतृत्व में प्रस्तुत यह बजट प्रदेश के सर्वांगीण विकास का एक प्रभावी दस्तावेज है। यह बजट प्रदेश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। सरकार ने संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और अधोसंरचना विकास को भी समान रूप से प्राथमिकता दी है। प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों, हस्तशिल्प और कला-संस्कृति को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने के लिए नई योजनाएँ शुरू की जा रही हैं। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किया गया है, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को भव्यता प्रदान की जा सके। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के संतुलित एवं योजनाबद्ध विकास के लिए व्यापक बजटीय आवंटन किया गया है। ‘सीएम केयर योजना’ के तहत कैथ लैब और कैंसर उपचार सुविधाओं का किया जा रहा है विस्तार उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। आयुष्मान भारत योजना के लिए इस वर्ष 2,039 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में 1,000 संजीवनी और 1,059 जननी एम्बुलेंस संचालित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से 22 लाख नागरिकों को आपातकालीन सेवाएँ प्रदान की गई हैं। उच्च जोखिम वाले दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 249 बर्थ वेटिंग रूम स्थापित किए गए हैं। गंभीर बीमारियों से पीड़ित नागरिकों के लिए ‘सीएम केयर योजना’ के तहत कैथ लैब और कैंसर उपचार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए भी व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने व्यापक प्रयास किए हैं। इस वर्ष नीमच, मंदसौर और सिवनी में नए सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। प्रदेश में 400 एमबीबीएस और 252 पीजी सीटों की वृद्धि की गई है। रीवा जिला चिकित्सालय में 100 बिस्तरों का नया वार्ड तैयार किया जा रहा है, जिससे उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। साथ ही, प्रदेश में जन-निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) के तहत नए चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना की योजना बनाई जा रही है। प्रत्येक विधानसभा में प्रस्तावित खेल स्टेडियमों में पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा के लिए बनाए जाएंगे हेलीपैड उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘पीएमएयर एम्बुलेंस सेवा’ की हर क्षेत्र में सहज उपलब्धता के लिये प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित खेल स्टेडियमों में हेलीपैड बनाए जाएंगे। सिकलसेल एनीमिया उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वास्थ्य मानकों में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिये सरकार संकल्पित है। बजटीय प्रावधान और चिकित्सकीय, सहायक चिकित्सकीय अमले के प्रतिबद्ध और समर्पित प्रयासों से हम मध्यप्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय में आदर्श राज्य बनाने में सफल होंगे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय में विभागीय विषयों की समीक्षा की

भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विभागीय विषयों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में वेतन संरक्षा (पे-प्रोटेक्शन) के लाभ आवश्यक है जिससे चिकित्सा शिक्षकों का आर्थिक संतुलन प्रभावित न हो और कार्यक्षमता बनी रहे। उन्होंने पे-प्रोटेक्शन के लिए कैबिनेट प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने नर्सिंग पदों पर भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने पर जोर दिया और कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए मानव संसाधन की कमी को शीघ्र दूर करना आवश्यक है। उन्होंने मेडिकल इक्विपमेंट की समय पर खरीदी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू प्रदाय के लिये स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध होना आवश्यक है। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, एमडी एमपीपीएचसीएल मयंक अग्रवाल उपस्थित रहे।  

राजीव शुक्ला भगवान राम के पुत्र लव के मंदिर पहुंचे , इस कट्टर इस्लामिक देश में है मौजूद

इस्लामाबाद  बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला पाकिस्तान पहुंचे हैं। उनका यह दौरा पाकिस्तान में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान हुआ है। इस दौरान उन्होंने लाहौर में स्थित भगवान राम के पुत्र लव की समाधि पर भी पहुंचे। राजीव शुक्ला ने उनकी समाधि पर पूरा-अर्चना करते हुए तस्वीर भी पोस्ट की है। इसमें उन्होंने कहा कि भगवान राम के दूसरे पुत्र कुश ने कसूर शहर को बसाया था, जो पाकिस्तान का एक बड़ा शहर है। राजीव शुक्ला ने क्या कहा राजीव शुक्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, लाहौर के प्राचीन क़िले में प्रभु राम के पुत्र लव की प्राचीन समाधि है लाहौर नाम भी उन्ही के नाम से है। वहां प्रार्थना का अवसर मिला। साथ में पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी जो इस समाधि का जीर्णोद्धार करवा रहे हैं । मोहसिन ने मुख्यमंत्री रहते यह काम शुरू करवाया था।” ‘कुश ने बसाया था कसूर शहर’ उन्होंने आगे लिखा, “लाहौर के म्युनिसिपल रिकॉर्ड में दर्ज है कि यह नगर भगवान राम के पुत्र लव के नाम से बसाया गया था और कसूर शहर उनके दूसरे पुत्र कुश के नाम से। पाकिस्तान सरकार भी यह बात मानती है।” कौन हैं राजीव शुक्ला राजीव शुक्ला भारतीय राजनेता, पूर्व पत्रकार और इंडियन प्रीमियर लीग के पूर्व अध्यक्ष हैं। आईपीएल में कथित भ्रष्टाचार और स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आने के बाद राजीव शुक्ला ने 1 जून 2013 को इसके अध्यक्ष के रूप में इस्तीफा दे दिया। 2015 में राजीव शुक्ला को फिर से सर्वसम्मति से बीसीसीआई द्वारा आईपीएल के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। 18 दिसंबर 2020 को उन्हें निर्विरोध बीसीसीआई का उपाध्यक्ष चुना गया था।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निर्देश दिए हैं कि स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन के पात्र प्रस्तावों को शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत किया जाए

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निर्देश दिए हैं कि स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन के पात्र प्रस्तावों को शीघ्र तैयार कर प्रस्तुत किया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने मेडिकल कॉलेज श्योपुर और सिंगरौली को आगामी सत्र में प्रारम्भ करने के लिए निर्माण कार्य सहित समस्त औपचारिकताओं की पूर्ति के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय, भोपाल में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा संस्थानों के अधोसंरचना विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी, संचालक (प्रोजेक्ट) प्रवीण सिंह अढ़ायच सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। पीएचसी एवं सीएचसी में कार्यरत चिकित्सकों की सुविधा के लिए आवासीय परिसर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि तय समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य पूर्ण किये जाएँ। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पीएचसी एवं सीएचसी में कार्यरत चिकित्सकों की सुविधा के लिए आवासीय परिसरों के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण के लिए चिकित्सकों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिये सरकार प्रतिबद्ध है। इससे चिकित्सकों को बेहतर कार्य वातावरण प्राप्त होगा। ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थान सशक्त होंगे, प्रदेश के हर कोने में उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय के लिये यह कारगर कदम है।  

राज्य सुपरवाईजरी बोर्ड की बैठक उप मुख्यमंत्री शुक्ल की अध्यक्षता में संपन्न

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि पीसीपीएनडीटी (गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक) अधिनियम का महत्व केवल एक कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और नैतिक संकल्प भी है, जो लिंगानुपात को संतुलित करने और कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए लागू किया गया है। इस अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण आधार है। यह अधिनियम उन सभी चिकित्सा प्रक्रियाओं और तकनीकों पर रोक लगाता है, जिनका दुरुपयोग भ्रूण के लिंग निर्धारण और कन्या भ्रूण हत्या के लिए किया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम के तहत गठित राज्य सुपरवाईज़री बोर्ड की बैठक में अधिनियम के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पी.सी.पी.एन.डी.टी. अधिनियम अंतर्गत अनिवार्य फॉर्म- एफ़ अपलोड की स्थिति और प्रावधान अंतर्गत की गयी कार्यवाहियों की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिये कि ऐसे क्षेत्र जहाँ लिंगानुपात विपरीत है वहाँ सघन कार्यवाही और नियमित मॉनिटरिंग की जाये। विधायक श्रीमती प्रियंका मीणा, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी, राज्य सुपरवाईजरी बोर्ड के सदस्य उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कानून की सफलता केवल इसके प्रावधानों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन, सख्त निगरानी और जनजागरूकता अभियानों पर भी आधारित है। यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक अल्ट्रासाउंड सेंटर, प्रसव पूर्व निदान सुविधा और चिकित्सा संस्थान कानून के तहत निर्धारित मानकों का पालन करे। कड़े कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ लोगों को नैतिक रूप से जागरूक करना भी आवश्यक है ताकि समाज में यह संदेश स्पष्ट रूप से जाए कि हर बालिका का जीवन मूल्यवान है और उसे समान अवसर मिलना चाहिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश में लिंग चयन गतिविधियों के प्रतिषेध हेतु “मुखबिर योजना” और पी.सी.पी.एन.डी.टी. अधिनियम के दण्डात्मक प्रावधानों के प्रति जन-जागरूकता के निर्देश दिए। अर्हताधारी चिकित्सकों की पहचान की पुष्टि के लिए आधार ऑथेंटिकेशन की अधिसूचना जारी वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. प्रज्ञा तिवारी ने बताया कि पूर्व बैठक में बोर्ड के निर्णय अनुसार वयोवृद्ध रेडियोलॉजिस्ट / सोनोलॉजिस्ट तथा ऐसे चिकित्सक जिनके द्वारा फिंगर प्रिंट की यूआईडीएआई से पुष्टि के अभाव में फॉर्म-एफ़ का अपलोड संभव नहीं हो रहा है, उनके लिए वैकल्पिक बायोमेट्रिक के तौर पर आईरिस स्कैन का विकल्प पी.सी.पी.एन.डी.टी. पोर्टल पर किया गया है। पी.सी.पी.एन.डी.टी. पोर्टल में ऑनलाइन प्रविष्टियों हेतु अर्हताधारी चिकित्सकों की पहचान पुष्टि के लिए 14 फरवरी 2025 को आधार ऑथेंटिकेशन की अधिसूचना जारी की गई। सोनोलॉजिस्ट की संख्या में वृद्धि के प्रयास किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत कुल पंजीकृत संस्थाओं की संख्या 2884 है। अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत नियमित निगरानी कर अब तक कुल 352 कार्यवाहियाँ की गईं, जिनमें पंजीयन निरस्तीकरण और निलंबन की कार्रवाइयाँ शामिल हैं। पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत 44 वैधानिक कार्यवाहियाँ की गईं हैं इनमें 5 मामलों में अपंजीकृत केंद्रों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, जबकि 2 मामलों में अधिनियम अंतर्गत आवश्यक अभिलेखों (फॉर्म-एफ, एएनसी रजिस्टर, रेफरल स्लिप) का संधारण नहीं किए जाने के कारण वैधानिक कार्यवाही की गई। इसके अतिरिक्त, 2 मामलों में गर्भस्थ भ्रूण के लिंग की जानकारी से संबंधित संवाद करने के उल्लंघन पर कार्रवाई हुई, वहीं 107 मामलों में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक के माध्यम से लिंग चयन हेतु विज्ञापन देने पर कार्रवाई की गई।  

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मध्यप्रदेश परफॉर्मर स्टेट है। उन्होंने कहा कि संगठित प्रयासों से हम प्रदेश को स्वास्थ्य मानकों में शीर्ष पर लाने में सफल होंगे। उन्होंने चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे प्रदेश के हेल्थ पैरामीटर्स को शीर्ष स्तर पर ले जाने के लिए सतत प्रयास करें। सरकार स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को बेहतरीन इकोसिस्टम और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल में मीडिया समूह द्वारा आयोजित “मेडिकल एक्सीलेंस अवार्ड-2025” कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने चिकित्सा सेवा और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉक्टरों, चिकित्सा शिक्षकों और चिकित्सकीय संस्थान संचालकों को सम्मानित किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेज गति से प्रगति कर रहा है और जल्द ही हम वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि विकास का मुख्य लक्ष्य स्वास्थ्य और शिक्षा की उत्कृष्ट व सहज उपलब्धता सुनिश्चित करना है, जिसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकारें लगातार कार्य कर रही हैं। आयुष्मान भारत योजना से स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत चक्र मिला है, वहीं प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाई जा रही है जिससे पर्याप्त चिकित्सकीय मैन पावर उपलब्ध हो सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अच्छे कार्य करने वालों को सम्मानित करने से न केवल उनका हौसला बढ़ता है, बल्कि समाज में अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने चिकित्सा सेवा क्षेत्र मानवता की सेवा का सबसे बड़ा अवसर बताते हुए कहा कि डॉक्टरों से इलाज में संवेदनशीलता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सहज व्यवहार और आत्मीयता से किया गया इलाज मरीजों को आत्मविश्वास देता है और उपचार को प्रभावी बनाता है।  

चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों ने पुनरीक्षित वेतनमान तथा एनपीए गणना प्रावधानों के लिये उप मुख्यमंत्री शुक्ल का व्यक्त किया आभार

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने और स्वास्थ्य मानकों में मध्यप्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए कृत-संकल्पित है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश ने ऊर्जा, स्वच्छता, कृषि और सिंचाई जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि चिकित्सा शिक्षकों एवं चिकित्सकों के समर्पित प्रयासों से स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी यह लक्ष्य हम अवश्य प्राप्त करेंगे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल से भोपाल स्थित निवास कार्यालय पर चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों ने भेंट कर आभार व्यक्त किया। चिकित्सकीय समुदाय के हितों के संरक्षण के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सकीय समुदाय के हितों के संरक्षण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनकी सुविधाओं एवं हितों की रक्षा हेतु आवश्यक प्रावधान किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा कार्मिकों की सेवा संबंधी विषयों और अन्य समस्याओं के समाधान के लिये उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति नियमित रूप से बैठक कर स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण और चिकित्सकीय कार्मिकों के हित संरक्षण से संबंधित विषयों पर चर्चा करेगी और आवश्यक सुझाव प्रस्तुत करेगी, जिन पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने चिकित्सकीय स्टॉफ को करें प्रेरित उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा कुशल चिकित्सकीय मैन पॉवर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सुझाव आमंत्रित किए। उन्होंने चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे सभी चिकित्सा कार्मिकों को स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा प्रदाय के लिए प्रेरित करें। चिकित्सा महासंघ के प्रतिनिधियों ने चिकित्सा महाविद्यालयों एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालयों के शासकीय एवं स्वशासी चिकित्सा शिक्षकों और दंत चिकित्सकों को पुनरीक्षित वेतनमान (सातवें वेतनमान) का वास्तविक लाभ 1 जनवरी 2016 से प्रदान करने तथा एनपीए (नॉन प्रैक्टिसिंग एलाउंस) की गणना सातवें वेतनमान के अनुरूप करने के आदेश के लिए उप मुख्यमंत्री शुक्ल का आभार जताया। इस अवसर पर चिकित्सा महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ. राकेश मालवीय, डॉ. गजेंद्र नाथ कौशल, डॉ. रितेश तंवर, डॉ. अशोक ठाकुर, डॉ. महेश कुमार खाचरिया, डॉ. शमिख रज़ा, डॉ. आदित्य सक्सेना, डॉ. राहुल रोकड़ें, डॉ. नीरज खरे, डॉ. राजेश टिक्कस, डॉ. अनुराधा चौधरी, डॉ. पुनीत कुमार आचार्य, डॉ. जी. पी. भनारिया, डॉ. विवेक चौकसे सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

वेतन वृद्धि, मातृत्व और पितृत्व अवकाश, सेवा सुरक्षा के प्रावधान नवीन नीति में शामिल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की नवीन संविदा कर्मचारी नीति-2025 का निर्धारण संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए किया गया है। नवीन नीति से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में स्थायित्व आएगा और कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा। इस नीति का लाभ 32 हज़ार संविदा कर्मचारियों को प्रत्यक्ष रूप से मिलेगा और उनके परिवारों सहित लगभग 1.5 लाख लोग इससे लाभान्वित होंगे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह निर्णय प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुचारु बनाने में सहायक होगा। उन्होंने समस्त संविदा कर्मचारियों से अपील की है कि सभी समर्पित भाव से सेवा करें, जिससे प्रदेश के नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकें। एनएचएम की नवीन नीति में संविदा कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएँ प्रदान की गई हैं। अब कर्मचारियों को हर वर्ष अनुबंध के नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं होगी। कर्मचारियों के कार्य प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए एक पारदर्शी और समयबद्ध वार्षिक सेवा आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली लागू की गई है। कर्मचारियों की शिकायतों के त्वरित और प्रभावी निवारण के लिए एक अपीलीय अनुक्रम स्थापित किया गया है। संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्ति का अधिकार केवल मिशन संचालक एनएचएम के पास होगा और यह केवल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने के बाद ही किया जा सकेगा। नवीन नीति में वेतन वृद्धि को भी एक सुव्यवस्थित ढांचे में लाया गया है। अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार पर नियमित वेतन वृद्धि का लाभ मिलेगा। गर्भवती महिलाओं को नियुक्ति के समय प्रसव के छह सप्ताह बाद (सातवें सप्ताह से) कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दी जाएगी, जिससे वे मातृत्व के शुरुआती दिनों में समुचित देखभाल प्राप्त कर सकेंगी। इसी तरह, मातृत्व अवकाश और पितृत्व अवकाश के प्रावधान भी संविदा कर्मचारियों के लिए लागू किए गए हैं। आकस्मिक परिस्थितियों में सहायता के लिए अनुकंपा नियुक्ति और एक्स-ग्रेशिया के प्रावधान प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की सुचारु व्यवस्था के लिए संविदा कर्मचारियों को अंतर-जिला स्थानांतरण की सुविधा प्रदान की गई है। जिला स्वास्थ्य समिति को जिले में स्थानांतरण का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान के लिए एक स्पष्ट शिकायत निवारण अनुक्रम निर्धारित किया गया है। आकस्मिक परिस्थितियों में परिवार को सहायता प्रदान करने के लिए अनुकंपा नियुक्ति और एक्स-ग्रेशिया सहायता राशि के प्रावधान किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार विशेष अवकाश की सुविधा भी संविदा कर्मचारियों को प्रदान की जाएगी। नवीन नीति में कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ जांच चल रही हो, तो उसे 50% वेतन प्रदान किया जाएगा। स्थानांतरण प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। साथ ही, वेतन असमानता की समस्या को दूर करते हुए सभी संविदा कर्मचारियों के लिए वेतन समानता सुनिश्चित की गई है।  

20 फ़रवरी से 31 मार्च तक संचालित है ‘निरोगी काया अभियान’: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

30 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिक अभियान का अवश्य लें लाभ : उप मुख्यमंत्री शुक्ल जन-प्रतिनिधियों, समाज सेवियों और आमजन से सहभागिता की अपील की : उप मुख्यमंत्री शुक्ल 20 फ़रवरी से 31 मार्च तक संचालित है ‘निरोगी काया अभियान’: उप मुख्यमंत्री शुक्ल डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर जैसी असंक्रामक बीमारियों (एनसीडी) की हो रही है निःशुल्क जांच भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश में केंद्र सरकार के मार्गदर्शन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में 20 फरवरी से 31 मार्च 2025 तक ‘निरोगी काया अभियान’ संचालित किया जा रहा है। इस महाभियान के तहत प्रदेश में 12 हज़ार से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों, जन आरोग्य मंदिरों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिकों में 30 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों की मधुमेह (डायबिटीज), रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और फैटी लिवर जैसी प्रमुख असंक्रामक बीमारियों (एनसीडी) की निःशुल्क जांच की जा रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने आमजनों, जन-प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रशासन से इस अभियान को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने आसपास के नागरिकों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रेरित करें, अभियान की मॉनिटरिंग करें और जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचाने में सहायता करें। उन्होंने सभी नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अपने नजदीकी जन आरोग्य मंदिर, संजीवनी क्लिनिक या स्वास्थ्य केंद्र पर पहुँचकर अपनी निःशुल्क जांच अवश्य करवाएँ। स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएँ रविवार को छोड़कर सप्ताह में 6 दिन उपलब्ध हैं। अतः सभी नागरिकों से अनुरोध है कि अपना और अपने परिवार का स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएँ और गंभीर बीमारियों से बचाव करें। समय पर जांच से रोगों के जटिल होने से पूर्व ही सहजता से होता है पूर्ण उपचार उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को असंक्रामक बीमारियों की रोकथाम और समय पर पहचान के प्रति जागरूक करना है। अक्सर यह देखा गया है कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप और फैटी लिवर जैसी बीमारियाँ आरंभिक अवस्था में लक्षणहीन होती हैं, जिससे लोग इन्हें पहचान नहीं पाते और समय पर इलाज नहीं हो पाता। यह समस्या खासकर ग्रामीण और सुदूर इलाकों में अधिक देखने को मिलती है। ऐसे में जब बीमारी बढ़ जाती है, तो मरीजों को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। इस अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रदेश के हर व्यक्ति तक आवश्यक स्वास्थ्य जांच और उपचार सेवाएँ पहुंचें। अब तक 8 लाख नागरिकों की हो चुकी है निःशुल्क जांच उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि निरोगी काया अभियान के तहत अब तक 6 लाख लोगों की मधुमेह और रक्तचाप की जांच पूरी की जा चुकी है, जबकि 2 लाख लोगों की फैटी लिवर की जांच हो चुकी है। यह आँकड़े इस अभियान की सफलता को दर्शाते हैं और इस बात को प्रमाणित करते हैं कि नागरिकों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने संभाग स्तरीय बैठक में स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा की

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मातृ मृत्यु दर व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिये स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग को समन्वित प्रयास करना होगा। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य कार्यकर्ताएँ व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत पंजीयन करें तथा प्रतिमाह उन्हें चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाय। उप मुख्यमंत्री ने कमिश्नर कार्यालय सभागार रीवा में स्वास्थ्य सूचकांक, एएनसी पंजीयन व संस्थागत प्रसव सहित स्वास्थ्य सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मातृ मृत्यु दर व शिशु मृत्यु दर में सुधार की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला पूरी संवेदनशीलता के साथ घर-घर जाकर गर्भवती माताओं का शत-प्रतिशत पंजीयन करते हुए उन्हें प्रतिमाह व तिमाही में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएँ दें तथा उनकी जांच कराये ताकि वह महिलाएँ हाई रिस्क में न जा पाये। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क में यदि गर्भवती महिला पहुंचती है तो उसको समय समय पर उपचार दिया जाय। तदुपरांत उसका संस्थागत प्रसव कराकर सुरक्षित किया जाय। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में अधोसंरचना विकास के अनेक कार्य संचालित हैं। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में अस्पताल भवनों के निर्माण के साथ ही पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता, डॉक्टर्स व पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति के कार्य प्राथमिकता से किये जा रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि मैदानी अमला पूरी निष्ठा से कार्य करें तथा जिला एवं विकासखण्ड स्तरीय अधिकारी गंभीरता से मानीटरिंग करें व क्षेत्र का नियमित भ्रमण करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत प्रतिमाह की 9 एवं 25 तारीख को दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की मानीटरिंग की जाएं ताकि इसका अधिक से अधिक आउटपुट निकले। उप मुख्यमंत्री ने अपेक्षा की कि गर्भवती महिलाओं के परिजनों को भी उसके स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिये जागरूक किया जाएं जिससे जच्चा व बच्चा स्वस्थ्य रहे। उप मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से अपेक्षा की कि वह क्षेत्र का भ्रमण कर स्वास्थ्य सुविधाओं की सतत मॉनिटरिंग करें।कमियों को दूर करने के लिये प्रयास करें। उन्होंने रीवा संभाग का व्हाट्सअप ग्रुप बनाकर स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रगति की नियमित जानकारी शेयर करने के भी निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री ने अपेक्षा की कि रीवा संभाग में समन्वित प्रयासों से शिशु मृत्यु दर व मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में सफलता मिलेगी और इसकी लिये प्रतिमाह रिव्यू बैठक की जायेगी। कमिश्नर रीवा संभाग बीएस जामोद, कलेक्टर सतना डॉ. सतीश कुमार एस, कलेक्टर मऊगंज अजय श्रीवास्तव, कलेक्टर मैहर सुरानी बाटड़, सीईओ जिला पंचायत रीवा एवं सीधी उपस्थित रहे। कलेक्टर सिंगरौली वीसी के माध्यम से बैठक में जुड़े। इस दौरान स्वास्थ्य तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के रीवा संभाग के जिलों के अधिकारी उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रयागराज में संत जनों का प्राप्त किया आशीर्वाद

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने महाकुंभ मेला क्षेत्र प्रयागराज में संतजनों से सौजन्य भेंट की और शुभाशीष प्राप्त किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कार्ष्णि आश्रम (रमणरेती धाम) में कार्ष्णिपीठाधीश्वर गुरुशरणानंद जी महाराज एवं श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी जी महाराज से भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने शिविर में विभिन्न संतों का सान्निध्य भी प्राप्त किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जूनापीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि जी महाराज एवं स्वामी राघवाचार्य जी से भेंट कर उनका शुभाशीष प्राप्त किया।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के बसामन मामा गौवन्य विहार अभ्यारण्य में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया

रीवा उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के बसामन मामा गौवन्य विहार अभ्यारण्य में चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। उप मुख्यमंत्री ने गाय को गुड़ चना खिलाकर गौसेवा की। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य विहार में बिजली की निर्बाध आपूर्ति की व्यवस्था करें। नये विद्युत सबस्टेशन के निर्माण तक बसामन मामा मंदिर के पास के फीडर से कनेक्शन करायें। गौशाला से जुड़ी 17 एकड़ जमीन पर दो गौशाला शेड का इस तरह निर्माण करें की बाउन्ड्रीबाल बनाने की आवश्यकता न रहे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बसामन मामा गौवन्य विहार के निर्माण कार्यों की वृहद समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने नाले में दो स्टापडैम सह रपटा निर्माण का स्टीमेट तैयार करने के निर्देश दिये। स्टापडैमों के निर्माण से गौशाला में पानी की व्यवस्था के साथ चारागाह विकास की भी सुविधा मिलेगी। उन्होंने माइक्रो सिंचाई परियोजना से पूर्वा तालाब तथा क्षेत्र के अन्य तालाबों में पानी भरने की व्यवस्था करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये। उप मुख्यमंत्री ने पानी पीने के लिए हौज तथा चारा चारागाह की बाउन्ड्रीबाल का निर्माण तत्काल शुरू कराने के लिये कहा। कार्यपालन यंत्री पीएचई दोनों सम्पवेल में 7 दिवस में पानी भरने की व्यवस्था करें। उप मुख्यमंत्री ने बैठक में वनमंडलाधिकारी को गायों के चरने के वन क्षेत्र में पानी की व्यवस्था करने तथा विभागीय प्लांटेशन में गौशाला की खाद के उपयोग के निर्देश दिए। बैठक में उप संचालक पशु पालन डॉ. राजेश मिश्रा ने बसामन मामा गौ-अभ्यारण्य के कार्यों की जानकारी दी। उप मुख्यमंत्री ने गौशाला में प्रस्तावित राधा कृष्ण गौ मंदिर के निर्माण स्थल का निरीक्षण किया एवं निर्माण कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रात: गौअभ्यारण्य का भ्रमण किया तथा नवजात बछड़े को गोद में उठाकर दुलार किया। पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी, स्थानीय जन प्रतिनिधिगण तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने तीर्थ यात्रियों से संवाद करते हुए रीवा जिले एवं मध्यप्रदेश में की गई व्यवस्थाओं की जानकारी ली

 रीवा उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने महाकुंभ जा रहे तीर्थ यात्रियों के लिए रीवा बाईपास पर हरिहरपुर में लगाये गये शिविर में पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और तीर्थ यात्रियों को भोजन एवं पानी का वितरण किया। इस अवसर पर उन्होंने तीर्थ यात्रियों से संवाद करते हुए रीवा जिले एवं मध्यप्रदेश में की गई व्यवस्थाओं की जानकारी ली। तीर्थ यात्रियों ने उप मुख्यमंत्री शुक्ल को बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर मध्यप्रदेश सरकार तीर्थ यात्रियों के लिए जगह-जगह भोजन, पानी, चाय, बिस्किट, फल एवं दूध का वितरण करा रही है। इस वजह से हम लोगों को कहीं भी कोई परेशानी नहीं हो रही है। तीर्थ यात्रियों ने मंत्री शुक्ल का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि रीवा जिले में भी सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। इससे बड़ी संख्या में यात्रीगण लाभान्वित हो रहे हैं। उप मुख्यमंत्री ने शिविर स्थल में लगाये गये चिकित्सा कैंप का भी निरीक्षण किया। सामाजिक संगठनों के सहयोग से विन्ध्य में तीर्थ यात्रियों के लिए नि:शुल्क भोजन, पानी की व्यवस्था की गयी है। साथ ही चिकित्सा व अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गयी हैं।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि महाकुंभ के दौरान प्रदेश सरकार श्रद्धालुओं की सेवा में तत्पर

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा बायपास पर प्रयागराज महाकुंभ के श्रद्धालुओं से की भेंट उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बेला बायपास पहुंचकर प्रयागराज महाकुंभ में जा रहे श्रद्धालुओं से की मुलाकात उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि महाकुंभ के दौरान प्रदेश सरकार श्रद्धालुओं की सेवा में तत्पर है व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के बेला स्थित बायपास पहुंचकर प्रयागराज महाकुंभ में जा रहे श्रद्धालुओं से मुलाकात की और उनकी यात्रा से संबंधित व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से बातचीत कर उनकी यात्रा की स्थिति की जानकारी ली। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि महाकुंभ के दौरान प्रदेश सरकार श्रद्धालुओं की सेवा में तत्पर है और हर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि श्रद्धालु अपनी यात्रा निर्विध्न पूरी कर सकें। श्रद्धालुओं ने उप मुख्यमंत्री शुक्ल को बताया कि प्रशासन द्वारा यात्रा मार्ग में भोजन, पानी और अन्य आवश्यक सेवाओं की बेहतर व्यवस्था की गई है। उन्होंने प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि यात्रा मार्ग पर भोजन, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और विश्राम स्थलों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें और प्रशासन का सहयोग करें। विधायक नरेंद्र प्रजापति, नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय, पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।  

दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट में “आत्मनिर्भर और स्वावलंबी आदर्श ग्राम” विषय पर कार्यशाला का किया शुभारंभ

प्रदेश सरकार जन सुविधाओं को हर कोने हर व्यक्ति तक पहुंचाने के लिये संकल्पित – उप मुख्यमंत्री शुक्ल अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाने में जन-जागरूकता तंत्र की भूमिका महत्वपूर्ण दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट में “आत्मनिर्भर और स्वावलंबी आदर्श ग्राम” विषय पर कार्यशाला का किया शुभारंभ भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार जन सुविधाओं को हर कोने हर व्यक्ति तक पहुंचाने के लिये संकल्पित है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं में जन सहभागिता सुनिश्चित करने में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद की महत्वपूर्ण भूमिका है और आगे भी रहेगी। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की सोच को साकार करते हुए अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाने में शासन के साथ-साथ उसे जन-जागरूकता तंत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दीन दयाल शोध संस्थान चित्रकूट में “आत्मनिर्भर और स्वावलंबी आदर्श ग्राम” विषय पर दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि गांव में अब पहले से ज्यादा सुविधाएं हैं। आदर्श ग्रामों के विकास के लिए अनुकूल समय है। दीनदयाल शोध संस्थान का मार्गदर्शन और मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद का समर्पण इस दिशा में निर्णायक बदलाव ला सकता है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रऋषि नाना जी देशमुख के आत्मनिर्भर एवं स्वावलम्बी ग्रामों के चित्रकूट मॉडल को सम्पूर्ण प्रदेश में विस्तारित करने के उद्देश्य से दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट और मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला का आयोजन किया गया है। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर ने कहा कि गांव की समृद्धि और विकास के लिये आवश्यक है कि सभी ग्रामवासियों की सम्पूर्ण प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। तभी स्थायी और सतत परिणाम होंगे। उन्होंने परिषद अमले को कहा कि गांव में सिखाने नहीं सीखने के भाव से जाएं। दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि नाना जी का मानना था कि कर्मठता और स्वावलंबन से ही ग्राम जीवन में बदलाव आ सकता है। नाना जी ने अपने समय की समस्त चुनौतियों को संबोधित किया है। उनका विकास मॉडल सर्वे भवंतु सुखिनः का उदघोष करता है। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ.धीरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कहा कि परिषद की उपस्थिति अधिकांश पंचायतों में है। नवांकुर संस्थाओं और प्रस्फुटन समितियों सहित प्रदेश में सीएमसीएलडीपी के 50 हजार विद्यार्थियों के साथ परिषद सबसे महत्वपूर्ण मैदानी संगठनों में से एक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अपेक्षाओं के अनुरूप इस प्रशिक्षण से परिषद अमले को ग्राम-समाज को समझने और बदलावों की गतिविधियों के चिन्हांकन के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिलेगा। प्रशिक्षण कार्यशाला में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद राज्य कार्यालय के अधिकारियों सहित समस्त संभाग जिला और विकासखण्ड समन्वयक सहभागिता कर रहे हैं।  

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि कैंसर की सही समय में जाँच पर पूर्ण निदान सहजता से संभव

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि कैंसर की सही समय में जाँच पर पूर्ण निदान सहजता से संभव है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गौरवशाली नेतृत्व में आज आर्थिक संसाधनों की कमी नहीं है। चिकित्सकीय संस्थानों का उन्नयन किया जा रहा है। अधोसंरचना विकास के साथ अत्याधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में संसाधनों के साथ चिकित्सकीय मैनपॉवर का मानवीय रवैया, भावनात्मक सहयोग उपचार को आसान करता है। मरीजों और परिजनों में संतोष का भाव जागृत करता है। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े सभी अधिकारियों कार्मिकों में मानवीय संवेदनाओं की समझ और उसका प्रकटीकरण अत्यंत आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विश्व कैंसर दिवस पर एम्स भोपाल में आयोजित 2 दिवसीय पेलियेटिव केयर प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कैंसर का निदान सहज और सुलभ बनाने के लिये केंद्रीय बजट में हर ज़िले में कैंसर केयर सेंटर बनाने का ऐतिहासिक प्रावधान किया गया है। साथ ही कैंसर दवाओं को किफायती दरों में उपलब्ध कराने के प्रावधान किये गये हैं। आयुष्मान भारत योजना से हर नागरिक आज उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं सहजता से प्राप्त कर पा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन में स्वस्थ भारत महत्वपूर्ण आयाम है। इसके लिये केन्द्र और राज्य सरकार पूर्ण समर्पण से प्रयास कर रही हैं। इसे साकार करने हेल्थ मैन-पॉवर की महत्वपूर्ण भूमिका है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सक का दायित्व केवल उपचार करने तक सीमित नहीं है। उपचार के साथ और उपचार के बाद मरीज़ को जो मानसिक और भावनात्मक सहयोग चिकित्सक या अस्पताल स्टॉफ से मिल सकता है, वो उसकी रिकवरी को और तेज़ करने में सहायक होता है। उन्होंने उपस्थित चिकित्सकों और नर्सिंग ऑफिसर से प्रशिक्षण का पूर्ण लाभ उठाने का आह्वान किया। असंचारी रोगों के बेहतर प्रबंधन के लिए “टेस्ट और ट्रीट” अवधारणा पर किया जा रहा है कार्य उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों में संभागीय मुख्यालयों में लाइनैक मशीन, पेट स्कैन, ब्रेकी थेरेपी एयर कैथ लैब जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराने के प्रयास किये जा रहे हैं, ताकि हृदय रोग, कैंसर जैसे असंचारी रोगों का समुचित निदान किया जा सके। उन्होंने कहा कि इन रोगों के बेहतर प्रबंधन के लिए “टेस्ट और ट्रीट” अवधारणा पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मियों से आह्वान किया कि पूरे समर्पण से मिशन मोड में सेवा भाव से कार्य करें। संसाधनों के साथ समर्पित प्रयास से मध्यप्रदेश शीघ्र ही स्वास्थ्य मानकों में अग्रणी राज्य बनेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विगत दिवस जबलपुर, भोपाल और इंदौर में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंग रिट्रीवल एवं प्रत्यारोपण कर बहुमूल्य जीवन के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चिकित्सकीय और सहायक चिकित्सकीय स्टॉफ की प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा ऐसे समर्पित प्रयासों से चिकित्सकीय कार्मिको का मान बढ़ता है और समाज में अपने प्रतिष्ठित स्थान के साथ वे न्याय करते हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रशिक्षण प्रदान करने वाले मास्टर ट्रेनर और रिसोर्स पर्सन को सम्मानित किया। अध्यक्ष एम्स प्रो. डॉ. सुनील मलिक ने पेलियेटिव केयर के विभिन्न आयामों और महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभाकर तिवारी ने असंचारी रोगों के बढ़ते दबाव और प्रबंधन के लिए किये जा रहे प्रयासों की संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और एम्स के संयुक्त तत्वाधान में किया गया है। एम्स के वरिष्ठ चिकित्सक, प्रोफेसर्स और विषय विशेषज्ञों ने पेलियेटिव केयर की जिम्मेदारियों और दायित्वों की चिकित्सकों और नर्सिंग ऑफिसर को विस्तारपूर्वक जानकारी दी। क्या है पेलियेटिव केयर.. पेलियेटिव केयर गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए विशेष चिकित्सा देखभाल है। पेलियेटिव केयर का उद्देश्य मरीज़ में दर्द या अन्य कोई शारीरिक, मानसिक या सामाजिक समस्याओं की पहचान और सही मूल्यांकन कर उसकी पीड़ा को कम करने में मदद करना है। इसके लिए ऐसे मरीज़ों के परिजनों को भी परामर्श और तकनीकी कौशल को बढ़ाने की ज़रूरत है ताकि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद घर पर उसकी बेहतर देखभाल हो सके। साथ ही साथ अस्पताल में बार-बार भर्ती होने की संभावनाओं को न्यूनतम किया जा सके। पेलियेटिव केयर कार्यक्रम में कैंसर विभाग, रेडियोथैरेपी, एनेस्थिशिया, मेडिसिन एवं सायकेट्री विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही फंटलाईन डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टॉफ को भी इसकी समझ ज़रूरी है, क्योंकि इन्हीं लोगों के पास सबसे पहले कोई मरीज़ अपनी तकलीफ को लेकर पहुंचता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में 5 करोड़ 68 लाख लोगों को पेलिएटिव केयर की आवश्यकता है। इनमें से लगभग 2 करोड़ 57 लाख लोग जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं। वैश्विक स्तर पर 14 प्रतिशत लोगों को ही पेलिएटिव केयर उपलब्ध है।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्री पाटिल को अवगत कराया कि रीवा संभाग की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए बहुती नहर के उन्नयन की महती आवश्यकता

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल से सौजन्य भेंट की। उन्होंने रीवा और सतना जिलों में संचालित बाणसागर परियोजना की बहुती नहर के उन्नयन के लिए केंद्र सरकार की “मॉडर्नाइजेशन ऑफ कैचमेंट एरिया डेवलपमेंट” योजना के तहत 1700 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने का अनुरोध किया। इस परियोजना के अंतर्गत 85,000 हेक्टेयर कृषि भूमि के आधुनिकीकरण और सिंचाई क्षमता का विकास होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने केंद्रीय मंत्री पाटिल को अवगत कराया कि रीवा संभाग की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए बहुती नहर के उन्नयन की महती आवश्यकता है, क्योंकि वर्तमान नहर संरचना के कारण कई स्थानों पर कमांड क्षेत्र ऊंचे स्तर पर स्थित है। इस स्थिति में सुधार के लिए नहर प्रणाली के आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता है। परियोजना के क्रियान्वयन से न केवल सिंचाई सुविधाओं में सुधार होगा, बल्कि कृषि उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह परियोजना न केवल किसानों के लिए समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी बल्कि प्रदेश के जल संसाधन प्रबंधन को भी सुदृढ़ बनाएगी। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री पाटिल ने केंद्र सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।  

कैंसर देखभाल में क्रांति लाने के लिए विशेष बजट प्रावधान : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल विश्व कैंसर दिवस (4 फरवरी) के अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि कैंसर जैसे गंभीर रोग की समय पर पहचान समुचित उपचार के लिये अहम है। प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वस्थ भारत विज़न से प्रेरणा लेते हुए निरंतर प्रयासरत है। हर नागरिक को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ और किफायती रूप से मिल सकें। इसी दिशा में राज्य और केंद्र सरकार ने कैंसर उपचार के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में प्रस्तुत केंद्रीय बजट में कैंसर देखभाल के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। कैंसर की दवाओं को सुलभ और सस्ती दर में उपलब्ध कराने के प्रावधान हैं। इसके अलावा, हर ज़िले में कैंसर देखभाल केंद्र स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया गया है, जिससे कैंसर डायग्नोसिस और उपचार की सुविधा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को मिल सकेगी। राज्य सरकार भी इन केंद्रों को स्थापित करने के लिए प्राथमिकता दे रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में कैंसर की रोकथाम और उपचार के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सिविल डिस्पेंसरी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सिविल अस्पतालों में सर्वाइकल कैंसर की वीआईए जांच निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। इस जांच को प्रत्येक पांच वर्ष में कम से कम एक बार करवाना आवश्यक है। जिला अस्पतालों में बायोप्सी सैंपलिंग और मेडिसिन कीमोथेरेपी की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का विकेंद्रीकरण सुनिश्चित करते हुए कैंसर के इलाज को मेडिकल कॉलेजों और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान जैसी संस्थाओं में सुलभ बनाया गया है। पहले जहां कैंसर का उपचार केवल निजी अस्पतालों में ही उपलब्ध था, अब राज्य के विभिन्न जिलों में, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में उन्नत कैंसर उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर कैंसर सहित असंचारी रोगों की पहचान के लिए सीबैक फॉर्म भरवाए गए हैं। जिसके आधार पर एनसीडी पोर्टल के माध्यम से मरीजों का उपचार एवं फॉलो-अप सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डायबिटीज, हाईपरटेंशन और कैंसर जैसे असंचारी रोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, इसलिए इनकी समय पर पहचान और समुचित उपचार आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आयुष्मान भारत निरामयम योजना के तहत कैंसर के उपचार की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है। अब 70 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक भी इस योजना के तहत महंगे इलाज का लाभ बिना किसी वित्तीय बोझ के उठा सकते हैं। जिला अस्पतालों में एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी उन्नत डायग्नोसिस सुविधाएं पात्र हितग्राहियों के लिए निःशुल्क तथा अन्य नागरिकों के लिए रियायती दरों पर उपलब्ध हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “सभी के लिए स्वास्थ्य” विज़न को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ लड़ाई में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और बजट प्रावधान महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाएं और किसी भी प्रकार के लक्षणों को नजरअंदाज न करें। राज्य सरकार हर नागरिक के बेहतर स्वास्थ्य के लिए संकल्पित है।  

हमीदिया अस्पताल को मिलेंगे 3 करोड़ 45 लाख रुपये लागत के अत्याधुनिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी उपकरण

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने अभूतपूर्व प्रगति की है। गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल में अत्याधुनिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी उपकरणों की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारा लक्ष्य है कि शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक उपकरणों और उन्नत चिकित्सा सेवाओं से सुसज्जित किया जाए। राज्य के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवा प्राप्त हो सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों को भी ऐसे उन्नत उपकरणों से लैस करने की योजना पर कार्य कर रही है। उन्होंने चिकित्सकों से इन सुविधाओं का उपयोग कर राज्य के नागरिकों को श्रेष्ठ चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के निर्देश दिये हैं। गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल में 3 करोड़ 45 लाख रुपये लागत के अत्याधुनिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी उपकरणों की स्थापना की स्वीकृति दी गयी है। इनमें एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS), एसोफेजियल मैनोमेट्री, पीएच मैट्री और ब्रीथ एनालाइज़र जैसी तकनीकें शामिल हैं। यह उन्नत सुविधाएँ किसी भी सरकारी अस्पताल में पहली बार उपलब्ध कराई गई हैं। इन नवीन उपकरणों की मदद से पाचन तंत्र की गंभीर बीमारियों की सटीक और त्वरित पहचान संभव हो सकेगी। अब मध्य प्रदेश के मरीजों को उन्नत और सटीक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी उपचार के लिए अन्य राज्यों या निजी अस्पतालों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। उपकरणों का विवरण     एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS): पेट और आंतों की गहराई से जांच कर कैंसर, पैंक्रियास की बीमारियों और अन्य गंभीर समस्याओं का जल्द पता लगाने में मदद करता है।     एसोफेजियल मैनोमेट्री: निगलने में होने वाली समस्याओं के सही निदान में सहायक।     पीएच मैट्री: एसिडिटी और रिफ्लक्स से जुड़ी बीमारियों के सटीक निदान के लिए उपयोगी।     ब्रीथ एनालाइज़र: एक दर्द-रहित जांच जो आंतों में बैक्टीरिया की अधिकता और लैक्टोज असहिष्णुता जैसी समस्याओं का पता लगाने में मदद करता है।  

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा 33 हज़ार से अधिक पदों पर की जा रही है भर्ती

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में ईएसबी एवं पीएससी के अंतर्गत प्रक्रियाधीन विभिन्न चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय पदों में भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि सभी भर्ती प्रक्रियाएं निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाएं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए मैन-पॉवर की समय पर नियुक्ति अत्यंत आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेजों में पे-प्रोटेक्शन के विषय पर आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर, सभी औपचारिकताओं को पूर्ण करते हुए इसे शीघ्र कैबिनेट अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने सीधी भर्ती एवं बैकलॉग पदों पर अब तक की गई कार्रवाई की पदवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सभी कैबिनेट स्वीकृत समस्त पदों पर भर्ती तय समय सीमा में पूरी की जाये। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या आने पर उसे तत्काल संज्ञान में लाया जाए। सभी औपचारिकताएं समयबद्ध ढंग से पूरी हों। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 33 हज़ार से अधिक पदों पर भर्ती की जा रही है। आईपीएचएस मानक अनुसार 18 हज़ार 653 पद पर, 454 उन्नयित स्वास्थ्य संस्थानों में 7 हज़ार 977 पद पर, कैलाशनाथ काटजू हॉस्पिटल में 195 पदों पर, 18 शासकीय नर्सिंग महाविद्यालयों के लिये 414 पद सहित 273 अन्य स्वीकृत स्वास्थ्य संस्थानों में 5 हज़ार 779 चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय पदों पर नियुक्ति प्रक्रियाधीन है। बैठक में आयुक्त स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने बाबा विश्वनाथ का किया अभिषेक, प्रदेशवासियों की सुख समृद्धि की प्रार्थना की

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ महादेव के दर्शन किये। उन्होंने सपरिवार विधि-विधान से बाबा विश्वनाथ का पूजन एवं अभिषेक किया और प्रदेशवासियों की सुख समृद्धि की प्रार्थना की। वाराणसी कैंट विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री सौरभ श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने हृदय रोग के एचओडी डॉ. राजीव गुप्ता को ‘नेशनल वेटरन एकेडमिक एक्सीलेंस अवार्ड’ से सम्मानित होने पर बधाई दी

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने भोपाल के हमीदिया अस्पताल में हृदय रोग विभाग के एचओडी डॉ. राजीव गुप्ता को ‘नेशनल वेटरन एकेडमिक एक्सीलेंस अवार्ड’ से सम्मानित होने पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान न केवल डॉ. गुप्ता के व्यक्तिगत समर्पण और उत्कृष्टता का प्रमाण है, बल्कि यह मध्यप्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि डॉ. गुप्ता का योगदान भविष्य में अन्य लोगों को भी प्रेरित करेगा तथा प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) ने मध्यप्रदेश के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. गुप्ता को ‘नेशनल वेटरन एकेडमिक एक्सीलेंस अवार्ड’ से सम्मानित किया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान चिकित्सा क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान और आधुनिक चिकित्सा के प्रति उनकी निष्ठा का प्रमाण है। यह सम्मान समारोह हिटेक्स एग्जीबिशन सेंटर, हैदराबाद, तेलंगाना में आयोजित हुआ, जहां देशभर से चिकित्सा जगत की प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं।  

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों की समीक्षा

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश के हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य जागरूकता, समय पर निदान और रोकथाम के उपायों को सफलतापूर्वक लागू कर, हम प्रदेश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनायेंगे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर डिलीवरी और स्वास्थ्य मानकों में सुधार के लिए जनता को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, स्वास्थ्य देखभाल के उचित तरीकों और आवश्यक सावधानियों के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने चार इमली स्थित निवास कार्यालय पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और प्रदेश में स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के लिए जागरूकता गतिविधियों की समीक्षा की। स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिये महत्वपूर्ण है समय पर चिन्हांकन उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के लिए सही समय पर चिन्हांकन आवश्यक है। जिससे उनका सही समय पर समाधान भी सुनिश्चित किया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि रोकथाम आधारित स्वास्थ्य देखभाल (प्रिवेंटिव हेल्थ केयर मेजर्स) स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय जितना ही महत्वपूर्ण है। इससे प्रदेश में शिशु मृत्यु दर (IMR) और मातृ मृत्यु दर (MMR) सहित विभिन्न स्वास्थ्य मानकों में सुधार लाया जा सकता है। स्वास्थ्य अभियानों में जन-सहभागिता को करें प्रोत्साहित उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने जनता को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने के लिए जन-जागरूकता अभियानों को और प्रभावशाली बनाया जाए। आम नागरिकों को स्वास्थ्य प्रबंधन, सही खानपान, नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वास्थ्य देखभाल के सही तरीकों के प्रति शिक्षित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि क्या करें और क्या न करें (Do’s & Don’ts) की स्पष्ट जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाए, जिससे बीमारियों की रोकथाम सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने जनसहभागिता को प्रोत्साहित करने पर बल दिया, जिससे स्वास्थ्य अभियानों को सफलतापूर्वक लागू किया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिये हैं कि एक सप्ताह के भीतर जागरूकता गतिविधियों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। जिसमें स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों, समय पर निदान और स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी डिलीवरी को शामिल किया जाए। बैठक में उप मुख्यमंत्री शुक्ल को प्रदेश में चल रही स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी गयी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की प्रबंध संचालक डॉ. सलोनी सिडाना, आईईसी निदेशक डॉ. रचना दुबे और उप निदेशक (आईईसी) डॉ. अर्चना पुंधीर उपस्थित रहीं।  

दमोह में निजी चिकित्सक ओपीडी प्रिस्क्रिप्शन में उप मुख्यमंत्री शुक्ल दे रहे जागरूकता संदेश

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल कहा है कि टीबी उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। नि:क्षय शिविर अभियान सामुदायिक भागीदारी से अपने लक्ष्य को प्राप्त करेगा। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों और समाजसेवकों से आह्वान किया है कि वे इस अभियान का हिस्सा बनें और हर टीबी मरीज तक जरूरी सहायता पहुंचाने में सहयोग करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने आस-पास के टीबी मरीजों की पहचान करने और उन्हें समय पर इलाज दिलाने में सहयोग करें। यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार या वजन घटने जैसी शिकायत हो, तो उसे तुरंत स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, इसके लिए समय पर पहचान और उपचार महत्वपूर्ण है। सभी के समेकित प्रयास से टीबी मुक्त मध्यप्रदेश का लक्ष्य हम शीघ्र प्राप्त करेंगे। उन्होंने अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, समाजसेवियों, संस्थाओं, नि:क्षय मित्रों की सराहना की है। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्ष 2025 तक टीबी (क्षय रोग) को समाप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चला रहा है। इस अभियान में समाज के हर वर्ग को जोड़ते हुए, एनजीओ, समाजसेवी संगठनों, और आम जनता से सक्रिय सहयोग की अपील की जा रही है। 100 दिवसीय नि:क्षय शिविर अभियान में प्रदेश के 23 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने, रोग की पहचान, रोकथाम और उपचार को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान में टीबी की घटनाओं में 80% कमी लाने, मृत्यु दर में 90% गिरावट और मरीजों के चिकित्सा व्यय को शून्य करने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिये नि:क्षय मित्रों, स्वयं सेवकों और सामाजिक संगठनों को शामिल कर सघन प्रयास किये जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के खिलाफ जागरूकता को जनआंदोलन का रूप देने के लिए विभिन्न रचनात्मक पहलें की हैं। सिवनी जिले में ‘न्यू पहल’ फाउंडेशन ने 400 मस्जिदों में उर्दू भाषा में जागरूकता सामग्री प्रदाय की है, जिससे समुदाय के हर वर्ग तक टीबी की जानकारी पहुंचे। मंदसौर में ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर कमलेश भाटी ने एक शादी समारोह में टीबी जागरूकता का संदेश देकर समाज के बीच जागरूकता का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी तरह, जबलपुर रेलवे स्टेशन पर लाखों यात्रियों को टीबी की जानकारी देने के लिए पोस्टर और फ्लेक्स लगाए गए हैं। विशेष शिविर लगाकर की जा रही हैं जाँच दमोह जिले में निजी चिकित्सकों ने अपने मरीजों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए ओपीडी प्रिस्क्रिप्शन में टीबी जागरूकता के संदेश देने की पहल की है। सीधी जिले में स्थानीय “बघेली” भाषा में दीवार लेखन के माध्यम से सैकड़ों प्रेरक नारों को लिखा गया है, जो समुदाय के लोगों के बीच जागरूकता फैलाने में मदद कर रहे हैं। दतिया में आईसीएमआर टीम ने जेल के कैदियों की हैंडहेल्ड एक्स-रे तकनीक से स्क्रीनिंग की, जबकि मंडला जिले के कार्य स्थलों पर शिविर लगाकर 417 मजदूरों की जांच की गई। नीमच जिले में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने टीबी मरीजों को पोषण सामग्री उपलब्ध कराकर उनके समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की कोशिश की है।  

उप मुख्यमंत्री से वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधि मंडल ने की सौजन्य भेंट

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के हर व्यक्ति को समय पर, सुलभ और उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और अन्य चिकित्सा मैनपावर की कमी एक प्रमुख चुनौती है, जिसे प्रभावी रणनीतियों से दूर किया जाना जरूरी है। इसके लिए मेडिकल के साथ नॉन-मेडिकल हस्तक्षेपों पर भी काम करना होगा। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि प्रदेश में सभी स्वास्थ्य सेवाओं और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो ताकि स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदेश के हर क्षेत्र और हर वर्ग तक पहुँच सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल से आज मंत्रालय भोपाल में वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र को और सशक्त बनाने के लिए विभिन्न विषयों और अंतःक्षेपों पर विस्तृत चर्चा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भी उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को मजबूत बनाने के लिए फर्स्ट रेफरल यूनिट्स के रूप में विकसित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में वृद्धि के साथ मैनपॉवर व्यवस्था के लिये व्यापक भर्तियाँ की जा रही है। इन प्रयासों के सदुपयोग से स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण और स्वास्थ्य मानकों में सुधार शासन का लक्ष्य है। तात्कालिक और दीर्घकालिक लाभ के लिये दें सुझाव उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विशेष रूप से शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) और मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों में सुधार लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन मानकों में सुधार के लिए ऐसी रणनीतियां बनाई जानी चाहिए जो शॉर्ट टर्म में त्वरित प्रभाव दें साथ ही दीर्घकालिक समाधान भी प्रदान करें। उन्होंने वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधि मंडल से प्रदेश की वर्तमान स्वास्थ्य चुनौतियों का सटीक आकलन कर ऐसे सुझाव देने के लिये कहा जिनसे तात्कालिक और दीर्घकालिक लाभ चरणबद्ध रूप से प्राप्त हो सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि वर्ल्ड बैंक का यह अध्ययन प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र को समझने और सुधारात्मक कदम उठाने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा। बैठक में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की वर्तमान स्थिति, स्वास्थ्य सूचकांकों का अध्ययन, गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के विस्तार और बीमारियों के भौगोलिक वितरण के विश्लेषण पर गहन मंथन हुआ। उल्लेखनीय है कि वर्ल्ड बैंक प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र का अध्ययन कर मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण के लिए सुझाव प्रस्तुत करेगा ताकि हर नागरिक को यूनिवर्सल और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हो सकें। “गेटिंग हेल्थ रिफॉर्म राइट” फ्रेमवर्क के तहत वर्ल्ड बैंक मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सुधार के लिए अध्ययन कर देगा सुझाव वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधि अमित नागराज ने बताया कि “गेटिंग हेल्थ रिफॉर्म राइट” फ्रेमवर्क के तहत वर्ल्ड बैंक मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सुधार के लिए एक समग्र और साक्ष्य-आधारित अध्ययन करेगा। यह अध्ययन प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की मौजूदा चुनौतियों और अवसरों का विश्लेषण करेगा और यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यूएचसी) के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सुधारात्मक कदम सुझाएगा। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य तंत्र को अधिक प्रभावी, सशक्त और समान बनाने के साथ-साथ प्रदेश के नागरिकों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना है। वर्ल्ड बैंक प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए अपने कार्यों और सफल योजनाओं के आधार पर मध्यप्रदेश के लिए उपयुक्त और व्यावहारिक सिफारिशें देंगे। यह अध्ययन जनवरी 2025 से शुरू होगा और मार्च 2025 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट और कार्यान्वयन रोडमैप प्रस्तुत करेगा। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, ऐग्पा के एडिशनल सीईओ लोकेश शर्मा, वर्ल्ड बैंक की हेल्थ स्पेशलिस्ट सुजिज्ञासा शर्मा, क्रिस एंडरसन और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री से एशियन डेवलपमेंट बैंक के प्रतिनिधि मंडल ने की सौजन्य भेंट

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार का प्राथमिक लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को उन्नत और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार मैनपावर प्रबंधन, अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था और संकेंद्रित प्रयासों के जरिये स्वास्थ्य मानकों में सुधार पर लगातार काम कर रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल से मंत्रालय भोपाल में एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। बैठक में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और सर्वसुलभ बनाने के लिए निजी निवेश और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर गहन चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए प्रदेश में निजी निवेश के विभिन्न मॉडलों पर विचार किया जा रहा है। शासन का उद्देश्य है कि चिकित्सकीय मैनपावर की उपलब्धता बढ़ाई जाए, अधोसंरचना को आधुनिक तकनीकी के साथ उन्नत किया जाए और उन क्षेत्रों में उच्च स्तरीय सेवाएँ प्रदान की जाएँ जहाँ अभी इनकी कमी है। इसके लिए निजी निवेश के माध्यम से गैप फिलिंग का प्रयास किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने एडीबी प्रतिनिधियों से ऐसे संभावित क्षेत्रों की पहचान और उनके समाधान के लिए प्रभावी सुझाव प्रस्तुत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सुधार लाने के लिए एडीबी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के अनुभव और विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा। एशियन डेवलपमेंट बैंक के प्रतिनिधि मंडल ने विभिन्न देशों और राज्यों में उनके अनुभव साझा किए और बताया कि उन्होंने अन्य क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुधार के लिए किस प्रकार के संयुक्त प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भी इस प्रयास के लिए जल्द ही विस्तृत सुझाव प्रस्तुत करेंगे । प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त तरुण राठी, ऐग्पा के एडिशनल सीईओ लोकेश शर्मा, एडीबी के धवल झंब सहित अन्य प्रतिनिधि एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा सामंजस्य और आपसी सहयोग से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करना संभव

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि सामंजस्य और आपसी सहयोग से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करना संभव है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अपोलो सेज हॉस्पिटल परिसर में “ओरल कैंसर डिटेक्शन और डेंटल ट्रीटमेंट वैन” सेवा का शुभारंभ किया। यह मोबाइल वैन अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस है, जो मुंह के कैंसर की शीघ्र पहचान और संपूर्ण दंत चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में सक्षम है। इस पहल को डेनेशिया ग्रुप और रोटरी क्लब के सहयोग से संचालित किया जा रहा है, यह वैन विशेष रूप से उन नागरिकों की सेवा के लिए समर्पित है जो आर्थिक अथवा भौगोलिक कारणों से चिकित्सा सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। इस वैन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों और भोपाल के आस-पास के जिलों कर कैंसर एवं दंत रोगों की पहचान और उपचार की सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने डेनेशिया ग्रुप और रोटरी क्लब के सहयोग की सराहना करते हुए इसे मानवता की सेवा का अनुकरणीय उदाहरण बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के विजन में सामूहिक प्रयासों का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि इस वैन के संचालन से न केवल ओरल कैंसर की शीघ्र पहचान और उपचार होगा, बल्कि दंत चिकित्सा सेवाओं से भी हजारों नागरिक लाभान्वित होंगे। यह पहल समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। शुक्ल ने विश्वास व्यक्त किया कि यह वैन लोगों को सुलभ और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अपोलो सेज हॉस्पिटल की सुविधाओं का अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि वैन में उन्नत तकनीक से लैस ओरल कैंसर डिटेक्शन सिस्टम है, जो कुछ ही मिनटों में कैंसर की पहचान कर सकता है। इसके अतिरिक्त, वैन में एक आधुनिक डेंटल चेयर और अन्य चिकित्सा उपकरण हैं, जो जटिल से जटिल दंत समस्याओं का इलाज कर सकते हैं। वैन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह बिजली न होने की स्थिति में भी पेट्रोल जनरेटर की सहायता से निर्बाध रूप से कार्य करती है। यह वैन न केवल तकनीकी रूप से उन्नत है, बल्कि प्रदेश के हर कोने तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है। सेज ग्रुप के चेयरमैन संजीव अग्रवाल, डेनेशिया ग्रुप के चेयरमैन पी के त्रिपाठी सहित रोटरी क्लब के प्रतिनिधि, चिकित्सा विशेषज्ञ उपस्थित रहे।  

नि-क्षय शिविर का मुख्यमंत्री डॉ. यादव वर्चुअली करेंगे अभियान का शुभारंभ

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि टीबी, जिसे कभी लाइलाज माना जाता था, अब सघन और समर्पित प्रयासों से समाप्ति के करीब है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए 7 दिसंबर 2024 से 25 मार्च 2025 तक “100 दिवसीय निक्षय शिविर” आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक गति देना और जन-जागरूकता को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अभियान का वर्चुअल शुभारंभ करेंगे। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्वास्थ्य कर्मियों और आमजन से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जैसे हमने कोविड महामारी में एकजुट होकर हर व्यक्ति तक जाँच और उपचार सुनिश्चित किया, वैसे ही इन 100 दिनों में हमें टीबी की व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग, जाँच, उपचार और जन-जागरूकता को सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से आह्वान किया कि पूर्ण समर्पण से अभियान को सफल बनाने के लिए अपना योगदान दें। उन्होंने आमजन से स्वास्थ्य कर्मियों को सहयोग प्रदान करने की अपील की है, जिससे समाज का सशक्त और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर अंतर्गत गतिविधियाँ प्रदेश में क्षय रोग (टी.बी.) के उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश के 23 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों नरसिंहपुर, दतिया, सिंगरोली, डिन्डौरी, खण्डवा, कटनी, अनुपपूर, अलिराजपुर जबलपुर, नीमच, रतलाम, मंदसौर, छतरपुर, उज्जैन, सीधी, श्योपुर, बैतूल, छिन्दवाडा, विदिशा, दमोह, मंडला, सीहोर और सिवनी में 7 दिसंबर से प्रारंभ होगा। इस शिविर का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले मरीजों की स्क्रीनिंग, जांच, और उचित उपचार प्रदान करना है। इस अभियान के अंतर्गत समस्त आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उपस्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी/ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक) के माध्यम से उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों और टी.बी. के मरीजों की स्क्रीनिंग एवं जांच की जाएगी। 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर के तहत विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रमुख रूप से मधुमेह पीड़ित, कुपोषित, धूम्रपान करने वाले, शराब सेवन करने वाले, पूर्व टीबी मरीज, संपर्क व्यक्ति और एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जाएगी। शिविरों का आयोजन प्रमुख सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे और बस स्टेशनों, सामूहिक स्थानों, छात्रावास, आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM), और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर किया जाएगा। नि-क्षय शिविरों का आयोजन कारखानों, उद्योगों, ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों, पत्थर क्रशरों और अन्य ऐसे कार्यस्थलों पर भी किया जाएगा, जिससे श्रमिक वर्ग और अन्य संवेदनशील वर्गों तक इस अभियान का लाभ पहुँच सके। शिविरों का आयोजन पंचायत संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों, स्वसहायता समूहों, जन आरोग्य समिति, महिला आरोग्य समिति, और ग्राम स्वास्थ्य पोषण एवं स्वच्छता समिति के साथ मिलकर जागरूकता कार्यक्रम चलाया जायेगा। नए निक्षय मित्रों और टीबी चैंपियंस/विजेताओं की पहचान की जाएगी, जिससे उनकी सहभागिता से अभियान को और गति दी जा सके। त्यौहारों और मेलों के दौरान धार्मिक गुरुओं के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे। स्कूलों और कॉलेजों में कला और सांस्कृतिक गतिविधियाँ, रैलियाँ आयोजित की जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य सरकारी विभागों में “नि-क्षय सप्ताह” के आयोजन के अन्तर्गत जागरूकता सत्र, निक्षय शिविर, टीबी शपथ एवं प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाएंगी।  

प्रक्रिया में तेजी लाने और पारदर्शिता के लिये टेक्नोलॉजी का करें प्रयोग: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

छात्रों और स्वास्थ्य सेवाओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें: उप मुख्यमंत्री शुक्ल मध्यप्रदेश फार्मेसी, पैरामेडिकल और नर्सिंग काउंसिल की हुई समीक्षा मान्यता और परीक्षाओं के संचालन की कार्यवाही शीघ्रता से पूर्ण करें : उप मुख्यमंत्री शुक्ल प्रक्रिया में तेजी लाने और पारदर्शिता के लिये टेक्नोलॉजी का करें प्रयोग: उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में मध्यप्रदेश फार्मेसी, पैरामेडिकल और नर्सिंग काउंसिल की समीक्षा की। उन्होंने लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण, परिषदों की कार्यप्रणाली में सुधार की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर विस्तार से चर्चा की। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी प्रक्रियाएं पारदर्शिता और गति के साथ पूरी हों, जिससे छात्रों और स्वास्थ्य सेवाओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा सके। प्रक्रिया में तेजी लाने के लिये टेक्नोलॉजी का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए पारदर्शिता, गति और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। बैठक में परिषदों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। सुटेबल कॉलेजों में भर्ती प्रक्रिया के लिए 15 दिसंबर तक पूर्ण करें कार्रवाई नर्सिंग काउंसिल की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 468 आवेदक संस्थानों में से 202 मापदण्डों अनुसार सुटेबल हैं जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 97 संस्थान डेफिशिएंट हैं। मानकों की कमी के कारण प्रक्रिया लंबित है। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि लंबित संस्थानों की समीक्षा शीघ्र पूरी की जाए। मापदंडों अनुसार सुटेबल पाए गये कॉलेज में नर्सिंग छात्रों की भर्ती प्रक्रिया के  लिए आवश्यक कार्रवाई 15 दिसंबर तक पूर्ण करें। उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार अस्पतालों में बेड आवंटन और मान्यता प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने के लिए अधिकारियों को तैयार रहने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय वल्लभ भवन में नर्सिंग कोर्स के विद्यार्थियों की परीक्षाओं के संचालन कैलेंडर की वृहद् समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य के प्रति संवेदनशील है। उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश से छूट मिलने के बाद उप मुख्यमंत्री शुक्ल के निर्देशानुसार नर्सिंग के विभिन्न कोर्स के छात्रों की परीक्षाओं के संचालन का कैलेंडर तैयार किया गया है और परीक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है। इससे नर्सिंग के विभिन्न कोर्सेज के 90 हज़ार विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। नर्सिंग के विभिन्न कोर्सेज के 47 हज़ार से अधिक अभ्यर्थियों की परीक्षाएँ हो चुकी हैं आयोजित उप मुख्यमंत्री शुक्ल के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश नर्सिंग काउंसिल द्वारा विभिन्न नर्सिंग पाठ्यक्रमों की लंबित परीक्षाएँ आयोजित की गयी हैं। जिनमें 47 हज़ार से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए हैं। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निर्देश दिए हैं कि शेष लंबित परीक्षाओं को शीघ्र आयोजित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता बनी रहे, ताकि छात्रों का शैक्षणिक कैलेंडर बाधित न हो। मई 2024 में बी.एससी. नर्सिंग प्रथम वर्ष (शैक्षणिक सत्र 2020-21) की परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें 15,787 छात्र सम्मिलित हुए। इसी अवधि में पी.बी.बी.एससी. नर्सिंग प्रथम वर्ष (2020-21 सत्र) की परीक्षा भी आयोजित की गई थी, जिसमें 4,601 छात्र परीक्षा में सम्मिलित हुए। इसके अतिरिक्त, एम.एससी. नर्सिंग प्रथम वर्ष (2020-21 सत्र) की परीक्षा में 1,612 छात्रों ने भाग लिया। इसी तरह बी.एससी. नर्सिंग तृतीय वर्ष (2019-20 सत्र) की परीक्षा भी मई 2024 में संपन्न हुई, जिसमें 8,793 छात्रों ने परीक्षा दी। सितंबर 2024 में बी.एससी. नर्सिंग प्रथम वर्ष (2021-22 सत्र) की परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें 13,106 छात्रों ने भाग लिया। इसी सत्र की पी.बी.बी.एससी. नर्सिंग प्रथम वर्ष की परीक्षा में 2,980 छात्र शामिल हुए। एम.एससी. नर्सिंग प्रथम वर्ष (2021-22 सत्र) की परीक्षा भी सितंबर 2024 में आयोजित की गई, जिसमें 1,066 छात्रों ने परीक्षा दी। सत्यापन प्रक्रिया के समयबद्ध निराकरण में शिक्षण संस्थानों की जवाबदेही करें सुनिश्चित फार्मेसी काउंसिल की समीक्षा में बताया गया कि राज्य में वर्तमान में 327 संस्थान फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) से मान्यता प्राप्त हैं। प्रतिवर्ष लगभग 25,000 फार्मासिस्ट (डिप्लोमा और डिग्री) का पंजीकरण किया जाता है। काउंसिल के कार्यों में नए पंजीकरण, पंजीकरण का नवीनीकरण, डुप्लीकेट पंजीकरण जारी करना, अन्य राज्यों में कार्य के लिए एनओसी जारी करना और फार्मासिस्ट डेटा प्रबंधन शामिल हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने लंबित पंजीकरणों की स्थिति की समीक्षा की और सत्यापन प्रक्रिया को तेज करने के लिए ऑनलाइन प्रणाली को सशक्त बनाने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सत्यापन कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और व्यक्तिगत हस्तक्षेप को कम करते हुए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया जाए। साथ ही सत्यापन प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूर्ण हो इसके लिए शिक्षण संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिये। पैरामेडिकल काउंसिल की समीक्षा में परीक्षा परिणाम और मान्यता संबंधित प्रक्रियाओं को समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि किसी भी प्रकार की देरी छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है, इसलिए इन प्रक्रियाओं को शीघ्र और प्रभावी रूप से पूरा किया जाए।  

सफल क्लेविकल फ्रैक्चर सर्जरी सरकारी अस्पतालों में अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं के बढ़ते स्तर को दर्शाती है

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि रतलाम मेडिकल कॉलेज द्वारा जागरूक क्लेविकल फ्रैक्चर सर्जरी का सफलतापूर्वक संपादन प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सर्जरी न केवल सरकारी अस्पतालों में अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं के बढ़ते स्तर को दर्शाती है, बल्कि यह साबित करती है कि हमारे डॉक्टर्स और चिकित्सा कर्मियों की विशेषज्ञता किसी से कम नहीं है। उन्होंने इस उपलब्धि के चिकित्सकीय टीम को बधाई दी है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में चिकित्सा अधोसंरचना के सतत विकास और उत्कृष्ट एवं अत्याधुनिक सेवाओं के प्रदाय का कार्य सतत् चल रहा है। उल्लेखनीय है कि डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, रतलाम में पहली बार मेडिकल कॉलेज की ऑर्थोपेडिक और इंटरवेंशनल पेन फिजिशियन टीम ने जागरूक क्लेविकल फ्रैक्चर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह सर्जरी विशेष है, क्योंकि मरीज सर्जरी के दौरान पूरी तरह जागरूक था और लगातार सर्जन और पेन फिजिशियन के साथ संवाद करता रहा। इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली टीम में ऑर्थोपेडिक्स विभाग से डॉ. योगेश तिलकर (एसोसिएट प्रोफेसर) और डॉ. उत्सव शर्मा (असिस्टेंट प्रोफेसर) शामिल थे। एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर और पेन मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. शैलेंद्र डावर के मार्गदर्शन में सर्जरी पूरी की गई। सर्जरी के दौरान इंटरस्केलिन ब्लॉक और सुपरफिशियल सर्वाइकल प्लेक्सस ब्लॉक का उपयोग किया गया, जिसे अल्ट्रासाउंड मशीन की सहायता से सटीकता के साथ लागू किया गया। डीन प्रो. डॉ. अनीता मूथा ने बताया कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, रतलाम जल्द ही एडवांस पेन क्लीनिक की शुरुआत करेगा। इसमें क्रॉनिक कैंसर पेन, स्पॉन्डिलोसिस पेन, लो बैक पेन, फ्रोजन शोल्डर पेन, एल्बो और नी पेन, और हिप जॉइंट पेन जैसी जटिल समस्याओं का इलाज किया जाएगा।  

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधोसंरचना विकास एवं प्रशासनिक सुधार के सभी कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा किया जाए : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी और जन-सुलभ बनाने समय-सीमा में पूर्ण करें कार्य: उप मुख्यमंत्री शुक्ल उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय में की विभागीय कार्यों की गहन समीक्षा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधोसंरचना विकास एवं प्रशासनिक सुधार के सभी कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा किया जाए : उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधोसंरचना विकास एवं प्रशासनिक सुधार के सभी कार्यों को तय समय-सीमा में पूरा किया जाए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और जनसुलभ बनाया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मंत्रालय भोपाल में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की वृहद समीक्षा की। बैठक में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त तरुण राठी और उप सचिव श्रीमती शुचिस्मिता सक्सेना मौजूद रहे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने 454 स्वास्थ्य संस्थाओं में स्वीकृत पदों को मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन बोर्ड से भर्ती किये जाने की प्रक्रिया की समीक्षा की और औपचारिकताओं को समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने रीवा मेडिकल कॉलेज में कैथलैब के कार्य की प्रगति की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कार्य को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए, जिससे क्षेत्रीय मरीजों को उन्नत उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही रीवा और सतना मेडिकल कॉलेज, एमवाई हॉस्पिटल इंदौर में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कैबिनेट के लिए प्रस्तावित महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। मेडिकल कॉलेजों में पे-प्रोटेक्शन और नवीन जिलों के जिला अस्पतालों में पदों की स्वीकृति के प्रस्ताव पर चर्चा की गयी। उन्होंने प्रदेश में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए नियमों और निर्देशों में अपेक्षित सुधार किए जाने की कार्रवाई के निर्देश दिये। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने मेडिकल कॉलेजों में आउटसोर्स पदों पर नियुक्ति के लिए मानकों के अनुरूप प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिये। बैठक में वर्षों से निलंबित डॉक्टर्स के प्रकरण में विचार के लिए गठित विशेष समिति की बैठक आयोजित कर नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए कहा। बॉन्ड अवधि पूरी कर चुके डॉक्टर्स को एनओसी जारी करने और उनके दस्तावेज लौटाने की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के विषय पर विमर्श किया और प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के निर्देश दिये।  

महिला सुरक्षा संवाद का दूसरा दिन कार्यात्मक दृष्टिकोण और युवा केंद्रित समाधानों के साथ संपन्न हुआ

हम होंगे कामयाब पखवाड़ा भोपाल “हम होंगे कामयाब” पखवाडा में आयोजित कार्यशाला ‘महिला सुरक्षा संवाद’ के दूसरे दिन उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकारी विभागों और नागरिक समाज के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिये प्रतिबद्ध है, जहां महिलाएं हिंसा और भेदभाव के बिना आगे बढ़ सकें। कार्यशाला के स्काई सोशल की संस्थापक सृष्टि प्रगट ने युवा पीढ़ी की बदलाव लाने की अपार क्षमता को उजागर किया और महिलाओं के खिलाफ हिंसा से मुक्त एक भविष्य बनाने में उनके योगदान की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने सामूहिक प्रयासों और सक्रिय युवा भागीदारी की बात की, जिससे प्रणालीगत समस्याओं का समाधान किया जा सके, और यह सुनिश्चित किया जा सके। रेडियो बुन्देलखण्ड की आर.जे. सुवर्षा ने कैसे युवा सामाजिक परिवर्तन के प्रेरक बन सकते हैं पर चर्चा की। इसमें यूनिसेफ के अधिकारियों के साथ-साथ ‘आरंभ’ और ‘उदय’ के युवाओं ने अपनी परिवर्तनकारी कहानियाँ और लिंग आधारित हिंसा के खिलाफ जमीनी स्तर पर संघर्ष की रणनीतियाँ साझा कीं। इस सत्र ने युवाओं को समुदाय विकास और लिंग आधारित हिंसा के खिलाफ सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। डॉ. वंचना सिंह परिहार ने महिला हिंसा से प्रभावित व्यक्तियों के लिए एक समग्र सहायता प्रदान करने वाली वन स्टॉप सेंटर्स की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने इन केंद्रों के संचालन को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि ये अधिक सुलभ और पीड़ित केंद्रित हो सकें। अधिवक्ता योगेश पंडित ने साइबर हिंसा से उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने महिलाओं को ऑनलाइन उत्पीड़न से बचाने के लिए कार्यात्मक दृष्टिकोण प्रदान किए और कानून व्यवस्था के तहत अपराधियों को जिम्मेदार ठहराने के तरीकों पर चर्चा की। क्लिनिकल साइकॉलाजिस्ट सुगर्गी कन्हेरे द्वारा संचालित “लिंग आधारित हिंसा का मानसिक प्रभाव” सत्र में लिंग आधारित हिंसा युवाओं पर मानसिक प्रभाव कितना गहरा हो सकता है पर चर्चा की गई। सत्र में इस तरह के मानसिक आघात को समझने, सहनशीलता का निर्माण करने और सहानुभूतिपूर्ण समर्थन प्रणालियाँ विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि युवा मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और जीबीटी से प्रभावित साथियों का समर्थन करने के लिए क्या रणनीतियाँ और उपकरण अपना सकते हैं। डॉ. दीपल मेहरोत्रा ने शिक्षा संस्थानों में सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए आंतरिक शिकायत समितियों जैसी संस्थागत उपायों का खाका प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने छात्रों और शिक्षकों के बीच लिंग संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के सर्वोत्तम अभ्यासों को साझा किया। लिंग आधारित हिंसा जागरूकता बढ़ाने मनोचा और चिन्मय गोड़ ने संचालित किया, इस बात पर चर्चा की गई कि सोशल मीडिया का किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है जिससे लिंग आधारित हिंसा के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके, संवाद शुरू किया जा सके और समुदायों को क्रियान्वयन के लिए प्रेरित किया जा सके।  

उप मुख्यमंत्री “हम होंगे कामयाब” अभियान अंतर्गत राज्य स्तरीय “महिला सुरक्षा संवाद” में हुए शामिल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमंते तत्र देवता” के आदर्श वाक्य को साकार करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। “लाड़ली लक्ष्मी योजना,” “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ,” और “वन स्टॉप सेंटर” जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक पवित्र मिशन है। केवल शासकीय प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं, इसे एक जन आंदोलन बनाना होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल में कुशाभाऊ इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में “हम होंगे कामयाब” अभियान अंतर्गत राज्य स्तरीय “महिला सुरक्षा संवाद” कार्यक्रम में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गौरवशाली नेतृत्व में देश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ आने वाली चुनौतियों के प्रति हमें सतर्क रहना होगा। विकास को सार्थक बनाने के लिए एकजुट होकर महिलाओं को सशक्त और समाज को सुरक्षित बनाना ज़रूरी है। समाज को नशा-मुक्त बनाकर युवाओं की ऊर्जा को सही राह में लगाकर देश को विश्व गुरु बनाना है तो हम सबको मिलकर इस मिशन को सफल बनाना होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि महिलाओं का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तीकरण आवश्यक है। यह हमारी गौरवशाली परंपरा रही है, विकृतियों को दूर करने के लिए सभी को प्रयास करने होंगे। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने डॉ. रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कविता का उल्लेख करते हुए कहा कि “समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध, जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध।” उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण और सामाजिक परिवर्तन के इस संग्राम में किसी को भी तटस्थ रहने का अधिकार नहीं है। यह लड़ाई हर व्यक्ति की है, और इसमें सबकी भागीदारी जरूरी है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने नशे के दुष्प्रभावों को रेखांकित करते हुए कहा कि जेंडर आधारित हिंसा का एक बड़ा कारण नशा भी है। नशे के कारोबार में लिप्त लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। नशा मुक्ति केंद्रों के माध्यम से समाज को इस बुराई से मुक्त करने के प्रयास तेज किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रयास समाज में जेंडर समानता और महिलाओं के प्रति सम्मान को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कार्यक्रम सह आयोजक “स्काई सोशल” के प्रयास की सराहना की। 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक “हम होंगे कामयाब” अभियान से प्रदेशवासियों को किया जाएगा जागरूक “हम होंगे कामयाब” पखवाड़ा 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा पर केंद्रित है, बल्कि पुरुषों की मानसिकता में बदलाव लाकर एक नए समाज की नींव रखना भी है। पखवाड़े के दौरान विभिन्न जिलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें विभिन्न विभागों के समन्वय से गतिविधियां निर्धारित की गई हैं। आयुक्त महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती सूफिया फारूकी वली, “स्काई सोशल” की फाउंडर सुसृष्टि प्रगट सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

हमीदिया हॉस्पिटल में सफलतापूर्वक हुई 100वीं कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी, उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने दी बधाई

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सफलतापूर्वक 100वें कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी ऑपरेशन की उपलब्धि पर चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय टीम को बधाई दी है।उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में उत्कृष्टता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस तरह के प्रयास राज्य के वंचित मरीजों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के हमारे लक्ष्य को और मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। डीन जीएमसी भोपाल डॉ. कविता सिंह ने बताया कि यह सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के तहत की गई। जो मरीज आयुष्मान योजना के तहत नहीं आते, उनके लिए भी यह सर्जरी मामूली शुल्क पर उपलब्ध कराई जाएगी। डॉ. सिंह ने बताया कि बीना के ग्राम माला सानातू की निवासी 54 वर्षीय श्रीमती सरोज रानी पाठक का सफल ऑपरेशन किया गया। उन्हें एक माह पूर्व सीने में दर्द की समस्या पर हमीदिया चिकित्सालय रेफर किया गया। ऐन्जियोग्राफी के दौरान ब्लॉकेज का पता चला। इसके बाद कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग में उनका सफल ऑपरेशन किया गया। कार्डियोथोरेसिक सर्जरी टीम का नेतृत्व कार्डियक सर्जन डॉ. प्रवीण शर्मा (प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष) और डॉ. ऋषि तिवारी (सहायक प्राध्यापक) ने किया। निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. आर. पी. कौशल (प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष), डॉ. बृजेश कौशल (सह प्राध्यापक), डॉ. श्वेता श्रीवास्तव और डॉ. असीम गार्गेव (सहायक प्राध्यापक), जूनियर डॉक्टरों की टीम में डॉ. धनेश्वरी, डॉ. नितेश, डॉ. हनुमंत, डॉ. अरविंद, डॉ. लीना और डॉ. महेंद्र ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परफ्यूजनिस्ट विनय केलकर सहित चिकित्सकीय एवं सहायक चिकित्सकीय टीम ने अपनी भूमिका का निर्वहन किया।  

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने देश की तरक्की के लिए जो पौधारोपा था आज वह वट वृक्ष बन गया : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा से देश की जड़ें मजबूत हो रही हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने देश की तरक्की के लिए जो पौधारोपा था आज वह वट वृक्ष बन गया है। उनकी विचारधारा देश को सुनहरे भविष्य की ओर ले जा रही है। देश आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर है। वर्ष 2047 में जब देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे तब भारत आर्थिक महाशक्ति बनकर खड़ा होगा और दुनिया का नेतृत्व करेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल सेमरिया में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल जी और डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जीवन में अनेकों कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने विरोधी ताकतों को अपनी विचारधारा का लोहा मनवाया। उनकी विचारधारा पर ही चलकर सरकार समाज के उत्थान के लिए कार्य कर रही है। पंडित दीनदयाल ने जो सपना देखा था उन्हें आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूरा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लोगों के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। उन्होंने आयुष्मान योजना लागू की। इससे गरीब से गरीब व्यक्ति भी अच्छे से अच्छे अस्पतालों में पाँच लाख रुपए तक का नि:शुल्क उपचार कराने में सक्षम हो गया है। इस योजना का और विस्तार किया गया है जिसमें अब 70 वर्ष अथवा उससे अधिक आयु के नागरिकों का भी आयुष्मान कार्ड बनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करोड़ो लोगों अपना पक्का मकान मिला है। जल जीवन मिशन योजना के तहत हर घर को नल से पानी पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। सरकार ने भी लाड़ली बहना योजना लागू कर महिला सशक्तिकरण को मजबूती प्रदान की है। हर तरफ पंडित दीनदयाल जी की विचारधारा को ध्यान में रखकर सरकार द्वारा कार्य किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री स्कूल के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में हुए शामिल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ग्राम बहुरीबांध में स्थित जागृति इंटरनेशनल हायर सेकण्डरी स्कूल के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि जागृति इंटरनेशनल स्कूल के संचालन का यह पाँचवा वर्ष है। यह स्कूल इस क्षेत्र में अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा की कमी को पूरा कर रहा है। इस तरह के विद्यालय का संचालन होना इस क्षेत्र के लिए नितांत आवश्यक था। छोटे-छोटे बच्चों ने कार्यक्रम में बेहतरीन नृत्य प्रस्तुत किया। यह बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इससे बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है। बच्चों का केवल पढ़ाई में अच्छा होना ही काफी नहीं है बल्कि उन्हें हर गतिविधि में बढ़चढ़ कर भाग लेना चाहिए। इससे उनमें आत्मविश्वास आता है। बच्चों के लिए शिक्षा और संस्कार दोनो आवश्यक है। यह उनके लिए वरदान साबित होता है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल बसामन मामा गौवंश वन्य विहार पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। उप मुख्यमंत्री ने गौवंश वन्य विहार परिसर में बन रहे नवीन कार्यालय का निरीक्षण किया। इस अवसर पर विधायक मनगवां इंजीनियर नरेन्द्र प्रजापति, पूर्व विधायक सेमरिया केपी त्रिपाठी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ला ने कहा देश तेजी के साथ विकास पथ पर अग्रसर , आजादी की 100वीं वर्षगाँठ पर हम विश्व की पहली अर्थव्यवस्था बन जायेंगे

भोपाल संयुक्त राष्ट्र के धारणीय विकास के लक्ष्यों को पाने के लिए चित्रकूट में दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा 22 से 24 नवंबर 2024 तक चौथे अंतर्राष्ट्रीय सतत् विकास के लक्ष्य (एसडीजी) सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। चतुर्थ त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ शुक्रवार को दीनदयाल परिसर के विवेकानंद सभागार में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, महिला एवं बाल विकास मंत्री सुनिर्मला भूरिया, तेलंगाना राज्य के विशेष मुख्य सचिव अरविंद कुमार, सांसद सतना गणेश सिंह, विधायक चित्रकूट सुरेंद्र सिंह गहरवार, डॉ लोकेश शर्मा ओ एस डी मुख्यमंत्री मुख्य कार्यकारी अधिकारी अटल विहारी बाजपेई सुशासन नीति विश्लेषण, प्रो0 भरत मिश्रा कुलगुरु महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय , डॉ वी के जैन ट्रस्टी एवं निदेशक सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट, अशोक जाटव जिला पंचायत अध्यक्ष चित्रकूट, पंकज अग्रवाल अध्यक्ष कोऑपरेटिव बैंक बाँदा-चित्रकूट, श्रीमती अनुजा ताई परचुरे प्रबन्ध समिति सदस्य डीआरआई, अभय महाजन संगठन सचिव दीनदयाल शोध संस्थान, वसंत पण्डित कोषाध्यक्ष द्वारा भारतरत्न नानाजी देशमुख के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्वलन से किया गया। सेमिनार में एसडीजी 5 – लैंगिक समानता और एसडीजी 7 – नवकरणीय ऊर्जा तथा ग्रामोदय से सर्वोदय के लक्ष्य की प्राप्ति में परिवार एक महत्वपूर्ण आधार है पर विमर्श किया जाएगा। एसडीजी-5 के अन्तर्गत महिला समानता प्राप्त करना तथा सभी महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाना तथा एसडीजी -7 के अन्तर्गत स्वच्छ एवं किफायती ऊर्जा तक पहुँच सुनिश्चित करना है। सेमिनार के उद्घाटन अवसर पर दीनदयाल शोध संस्थान के कोषाध्यक्ष एवं सेमिनार के संयोजक वसन्त पंडित ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार वैश्विक संपर्क बनाने और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति को गति देने के प्रयास को जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में देश भर से 14 प्रमुख संस्थान सहभागी बने हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वीडियो संदेश के माध्यम से कार्यक्रम में पधारे देश विदेश के सभी विद्युत जनों का अभिनन्दन करते हुए सेमिनार की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दी। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने कहा कि देश तेजी के साथ विकास पथ पर अग्रसर है। आजादी की 100वीं वर्षगाँठ पर हम विश्व की पहली अर्थव्यवस्था बन जायेंगे और सम्पूर्ण विश्व का नेतृत्व करेंगें। अपनी संस्कृति एवं सभ्यता का संरक्षण एवं संवर्धन करना अति आवश्यक है तभी विकास हमारे लिए वरदान बनेगा। लैंगिक समानता के बगैर उन्नति का मार्ग नही निकलता जहाँ चाह वहाँ राह, मजबूत इच्छाशक्ति से ही विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। हम सभी का सामूहिक प्रयास देश को विश्व गुरु बनाने में सहभागी होगा। शासन द्वारा स्वच्छ एवं किफायती ऊर्जा तक पहुँच सुनिश्चित कराने के लिये किये जा रहे कार्यों का विस्तृत रोडमैप की जानकारी प्रदान की गई, 2030 तक ऊर्जा के कुल उपयोग के 50 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में सकारात्मक प्रयत्न किया जा रहा है। मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया ने कहा कि राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख ने व्यक्तिगत जीवन की जगह सामाजिक जीवन को प्राथमिकता दी और अपना सम्पूर्ण जीवन समाज के लिए अर्पित कर दिया। मातृशक्ति का सम्मान एवं उनके सशक्तिकरण के लिये सामूहिक प्रयत्न हमारे जीवन का ध्येय बने। लैंगिक समानता के बिना कोई भी समाज सशक्त एवं समृद्ध नही हो सकता है इसे हम सभी अपने जीवन मे अपनाएं एवं बेहतर समाज के निर्माण में अपना योगदान प्रदान करें। ऊर्जा के लिए पवन की शक्ति, सूर्य की ऊर्जा, समुद्र की ऊर्जा का अधिक से अधिक उपयोग कैसे कर सकते है इस पर विचार करें।  

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा हिनौती गोधाम में हजारों गौवंश को आश्रय मिलेगा

हिनौती गोधाम में गौवंश रखने के लिए तत्काल करें आवश्यक व्यवस्थाएँ – उप मुख्यमंत्री  उप मुख्यमंत्री ने कहा गौशालाओं संचालन तथा गौसेवा के लिए दान दी गयी राशि को आयकर की छूट में शामिल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा हिनौती गोधाम में हजारों गौवंश को आश्रय मिलेगा भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि हिनौती गोधाम में हजारों गौवंश को आश्रय मिलेगा। इसे आधुनिक गौशाला और गोसंवर्धन केन्द्र के रूप में विकसित किया जायेगा। गौशाला में जारी बाउंड्रीबाल का निर्माण शीघ्र पूरा करायें साथ ही स्वीकृत प्लान के अनुसार गौवंश के रहने के लिए शेड तथा भूसा भण्डारण के लिए शेड का निर्माण भी तत्काल शुरू करायें। हिनौती गोधाम को माडल गौशाला के रूप में विकसित करें। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गौशालाओं संचालन तथा गौसेवा के लिए दान दी गयी राशि को आयकर की छूट में शामिल करें, जिससे इस पुनीत कार्य में बढ़चढ़कर सहयोग मिल सके। उप मुख्यमंत्री ने कलेक्टर सतना को बगदरा गौ-अभयारण्य का निर्माण शीघ्र शुरू करने के निर्देश देते हुए कहा कि चित्रकूट के समीप बगदरा घाटी हजारों गौवंश के प्राकृतिक रहवास का अनूठा स्थल है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल रीवा कमिश्नर कार्यालय में विभागीय समीक्षा कर रहे थे। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने बताया कि बाउंड्रीबाल का निर्माण ग्रामीण यंत्रिकी विभाग द्वारा किया जा रहा है। शेड का निर्माण भी दो दिन में शुरू हो जायेगा। गुढ़ में भैरव बाबा मंदिर के समीप स्वीकृत गौशाला में 50 एकड़ में 18 लाख रूपये की लागत से फेंसिंग का कार्य शुरू हो गया है। यहां भी शेड निर्माण के लिए राशि मंजूर कर दी गयी है। बैठक में राजेश पाण्डेय ने गौशाला संचालन समिति में जनप्रतिनिधियों को शामिल करने का सुझाव दिया। जनपद अध्यक्ष गंगेव विकास तिवारी ने गौशाला संचालन के संबंध में सुझाव दिया। बैठक में विधायक मनगवां इंजी. नरेन्द्र प्रजापति, कमिश्नर बी.एस. जामोद, कलेक्टर रीवा श्रीमती प्रतिभा पाल, कलेक्टर सतना अनुराग वर्मा, कलेक्टर मऊगंज अजय श्रीवास्तव, उप संचालक पशु पालन डॉ. राजेश मिश्रा, परियोजना अधिकारी जिला पंचायत संजय सिंह तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।  

विज्ञान और प्रौद्योगिकी से विकास की तेज राह में विश्व आगे बढ़ रहा है : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी से विकास की तेज राह में विश्व आगे बढ़ रहा है, इसे सही दिशा देकर मानव कल्याण से जोड़ने के लिए समाज में सद्मूल्यों को विकसित करना होगा। विकास को वरदान बनाना है तो समाज में प्रेम, दया, करुणा, परोपकार और शांति की भावना को जागृत करना होगा। ब्रह्मकुमारी जैसे संस्थानों द्वारा जन-चेतना के लिए किये जा रहे कार्य सशक्त और समृद्ध भारत तथा वैश्विक खुशहाली के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल राजस्थान के माउंट आबू में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित “आध्यात्मिकता द्वारा स्वच्छ एवं स्वस्थ समाज का निर्माण” वैश्विक शिखर सम्मेलन के समापन समारोह में शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि 4 से 7 अक्टूबर तक आयोजित शिखर सम्मेलन के शुभारंभ सत्र में (4 अक्टूबर) राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु शामिल हुई थीं। प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में सपनों के भारत के निर्माण का चल रहा है महायज्ञ उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गौरवशाली नेतृत्व में भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है आज भारत विश्व की 5 वीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। आगामी 5 वर्षों में हम तीसरी और वर्ष 2047 तक विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होंगे। व्यापक स्तर पर तेज गति से विकास हो रहा है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ने विकास के द्वार खोले हैं। नागरिकों को सक्षम बनाने के लिये उच्चस्तरीय शिक्षा, स्वास्थ्य की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। विकास की राह के हर पड़ाव में सहयोग प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सपनों के भारत के निर्माण का महायज्ञ चल रहा है। इस विकास को स्थायी बनाने के लिये मानव जाति का जागृत होना आवश्यक है। इसके लिये भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और आध्यमिकता का पुनरुत्थान करना होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद कहते थे 21 वीं सदी भारत की होगी। भारत विश्वगुरु होगा। वर्तमान वैश्विक पारिस्थितियों में भारत का नेतृत्व नितांत आवश्यक है। आर्थिक विकास के साथ आध्यात्मिक विकास पर भी कार्य करना होगा। विकसित, समृद्ध और खुशहाल विश्व के निर्माण के लिये भारत की “वसुधैव कुटुंबकम्” की सोच पर सभी को चलना होगा। वैश्विक कल्याण के इस अहम दायित्व के निर्वहन के लिये आवश्यक है कि भारत का हर नागरिक सकारात्मक भूमिका निभाकर लोक-कल्याणकारी पुनीत यज्ञ में सहभागी बने। अच्छा मनुष्य बनकर ही स्वयं, समाज और विश्व का कल्याण किया जा सकता है सुनिश्चित उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि श्रद्धेय अटल जी कहते थे “आज मानव ने आकाश में पक्षी की तरह उड़ना सीख लिया है, मछली की तरह समुद्र में तैरना सीख लिया है लेकिन इंसान की तरह जमीन पर चलना नहीं सीख पाया।” उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि वैश्विक कल्याण के लिये मानव मूल्यों को जागृत करना होगा। समाज को तोड़ने वाली शक्तियाँ कार्य कर रही हैं, परंतु ख़ुशी की बात है कि समाज को जोड़ने वाली, चिंतन करने वाली, वैश्विक कल्याण के भाव वाली संस्थाएँ और विचारक सतत कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज विश्व ब्रह्मकुमारी जैसे संस्थानों को आशा भरी नज़रों से देख रहा है। यह वर्तमान पीढ़ी की ज़िम्मेदारी है आगामी पीढ़ी को भारत की समृद्ध संस्कृति और आध्यात्म से जोड़ने की दिशा में प्रयास करे। एक अच्छा मनुष्य बनकर ही स्वयं का, समाज का और विश्व का कल्याणकारी भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल को ब्रह्मकुमारी संस्थान के प्रतिनिधियों ने स्मृति चिन्ह भेंट किया। ब्रह्मकुमारी के राजयोगी बृजमोहन, राजयोगिनी सुचन्द्रिका दीदी सहित 20 हजार से अधिक प्रतिभागी इस सम्मेलन में शामिल थे।

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