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सिंहस्थ में भीड़, यातायात और पार्किंग प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी उपयोग किया जाएगा

 भोपाल  उज्जैन में वर्ष 2028 में होने जा रहे सिंहस्थ में भीड़, यातायात और पार्किंग प्रबंधन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) का भी उपयोग किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था और अन्य प्रबंध के लिए ड्रोन से निगरानी की जाएगी। इसी वर्ष प्रयागराज महाकुंभ में इन तकनीकों के सफल प्रयोग के बाद इन्हें यहां भी अपनाया जाएगा। सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों को लेकर पुलिस मुख्यालय में डीजीपी कैलाश मकवाणा ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें प्रयागराज कुंभ की व्यवस्थाओं में बड़ी भूमिका निभाने वाले उत्तर प्रदेश पुलिस के आइपीएस अधिकारी प्रेम कुमार गौतम ने वहां किए गए प्रबंध के बारे में प्रस्तुतीकरण दिया। रीयल-टाइम ट्रैफिक मानीटरिंग की जाएगी गौतम ने बताया कि स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण के लिए एआइ आधारित ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर की स्थापना, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएस) द्वारा रीयल-टाइम ट्रैफिक मानीटरिंग की गई। ड्रोन से प्रमुख मार्गों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में सटीक पर्यवेक्षण किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रूट डायवर्सन मोबाइल एप बनाकर लाइव ट्रैफिक अपडेट उपलब्ध कराए गए। आंतकवाद से निपटने की भी तैयारी साथ ही उन्होंने बताया कि आतंकवाद विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए डाग स्क्वाड, बम डिस्पोजल यूनिट को तैनात किया। डार्कवेब से साइबर खतरों और फेस रिकग्नीशन ट्रैकिंग सिस्टम से संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी गई। वीवीआइपी मूवमेंट और श्रद्धालु सुविधाओं के बारे में भी उन्होंने बताया। प्रयागराज की तुलना में जगह कम उज्जैन सिंहस्थ में भी प्रदेश पुलिस इन व्यवस्थाओं को अपनाने की तैयारी कर रही है। सिंहस्थ के लिए अभी लगभग तीन वर्ष होने के कारण पुलिस के पास तैयारी के लिए पर्याप्त अवसर भी है। इसमें लगभग तीन करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, पर बड़ी चुनौती यह है कि प्रयागराज की तुलना में उज्जैन में जगह बहुत कम है, गलियां संकरी हैं।

सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान, हर घाट होगा रामघाट, नहीं होगा कोई भी वीआईपी घाट

उज्जैन मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ लगेगा। वैसे इसके लिए अभी तीन वर्ष का समय है, लेकिन सरकार ने प्रयागराज महाकुंभ को देखकर कई सीख ली है। इसी के चलते उज्जैन के लिए खास तैयारियां शुरू हो गई हैं। उज्जैन में शिप्रा के दोनों किनारे पर बनाए जाने वाले नए 29 किमी सहित कुल सभी 35 किमी लंबे घाटों को रामघाट के रूप में ही प्रचारित किया जाएगा। यहां अगल से कोई भी वीआईपी घाट नहीं बनाया जायेगा। उज्जैन सिंहस्थ को लेकर रूपरेखा तैयार पूरी कर ली गई है, अब बस सीएम की हरी झंडी का इंतजार है। उज्जैन के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल बयान देते हुए कहा कि सिंहस्थ की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन का हर घाट रामघाट होगा। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में दिशा निर्देश जारी किए हैं। ऐसा अनुमान लगया जा रहा है कि सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आ सकते हैं। ऐसे में हर दिन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 740 टन कचरा उत्पन्न होने का अनुमान है। इसे नियंत्रित करने के लिए 50 हजार बायो-टॉयलेट भी बनाए जाएंगे। गैरजरूरी कामों के प्रस्ताव नहीं बनाएं कलेक्टर बैठक के पहले चरण में उज्जैन को छोड़ आसपास के जिलों के प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। इसमें डॉ. राजौरा ने कलेक्टरों को स्पष्ट किया कि नए निर्माण कार्यों के प्रस्तावों को श्रद्धालुओं की व्यवस्थाओं को ध्यान रख ही बनाएं। यानी गैर जरूरीकामों के प्रस्ताव नहीं बनाएं। किसी भी घाट को वीआईपी नाम नहीं दें, ताकि ज्यादा भीड़ केवल उसी दिशा जाने का प्रयास नहीं करें। बैठक की अध्यक्षता जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने की। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा। मंत्री ने कहा कि काम ऐसे होने चाहिए कि वे बाद वाले सिंहस्थ में भी उपयोगी हों। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने सिंहस्थ के लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर रहेगा विशेष जोर मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि निर्माण कार्य केवल इस एक सिंहस्थ तक सीमित न रहें, बल्कि वे भविष्य के सिंहस्थ आयोजनों में भी उपयोगी साबित हों। इसी दिशा में निर्देश दिया गया कि निर्माण कार्य स्थायी और गुणवत्तायुक्त हों। इसके लिए अच्छी सामग्री का इस्तेमाल करने पर ज़ोर दिया जाएगा। मास्टर प्लान तैयार होगा अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सिंहस्थ 2028 के लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया जाए, जिसमें भीड़ प्रबंधन, यातायात, घाटों की व्यवस्था, जल-प्रबंधन और आपदा सुरक्षा की दृष्टि से सभी पहलुओं को शामिल किया जाए।

उज्जैन सिंहस्थ के दौरान रेलवे के सैटेलाइट स्टेशन बनाए जाएंगे, 75 प्रतिशत भीड़ दूसरे स्टेशनों से आ-जा सकेगी

 भोपाल  प्रयागराज की तरह उज्जैन सिंहस्थ के दौरान भी रेलवे के सैटेलाइट स्टेशन बनाए जाएंगे। तीन से चार स्टेशन बनाने की रूपरेखा बनी है। इससे मुख्य स्टेशन में आने वाली लगभग 75 प्रतिशत भीड़ दूसरे स्टेशनों से आ-जा सकेगी। इसका लाभ यह होगा कि स्टेशन और शहर में एक साथ भीड़ नहीं पहुंचेगी। प्रयागराज कुंभ में यह प्रयोग सफल रहा है। मप्र पुलिस के अधिकारियों की टीम ने कुंभ में जाकर सैटेलाइट स्टेशन सहित अन्य व्यवस्था देखी थी। अब उसी के अनुरूप उज्जैन सिंहस्थ के लिए तैयारी की जा रही है। सैटेलाइट रेलवे स्टेशन के लिए विस्तार से हुई चर्चा पिछले दिनों अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा ने भी उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर बैठक ली थी। इसमें सैटेलाइट रेलवे स्टेशन और बस स्टाप कहां-कहां बनाए जा सकते हैं, इस पर भी विस्तार से चर्चा हुई थी। सिंहस्थ के दौरान लगभग तीन करोड़ लोगों के आने की संभावना है। उज्जैन के आसपास पांच से सात किमी के क्षेत्र में सैटेलाइट स्टेशन बनाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त विशेष ट्रेन चलाने की भी तैयारी है। सुरक्षा में लगेंगे 42 हजार पुलिसकर्मी सिंहस्थ में सुरक्षा के लिए दो पाली में लगभग 42 हजार पुलिसकर्मी लगाए जाएंगे। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि जिला पुलिस बल के अतिरिक्त होम गार्ड्स के जवान भी लगाए जाएंगे। आवश्यकता होने पर केंद्र से अर्धसैनिक बल की सहायता ली जाएगी। सिंहस्थ के दौरान सुरक्षा के लिए डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर सहित अन्य सामग्री की खरीदी के लिए पुलिस मुख्यालय से प्रस्ताव मांगा गया है। छह माह के भीतर खरीदी की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी।

30 महीने में बदल जाएगी क्षिप्रा नदी की तस्वीर, 12 किमी की टनल का काम शुरू,सिंहस्थ में पर्व स्नान के लिए नर्मदा से नहीं लाना होगा पानी

उज्जैन इंदौर की कान्ह नदी का गंदा पानी दिसंबर 2027 के बाद क्षिप्रा नदी को प्रदूषित नहीं कर पाएगा। न ही हर पर्व स्नान के लिए नर्मदा से करोड़ाें रुपए का पानी खरीदना पड़ेगा। इसी दावे के साथ कान्ह डायवर्जन की नई योजना पर काम शुरू कर दिया है। नाम है- क्लोज डक्ट। इसमें 18 किमी की डक्ट होगी और 12 किमी लंबी टनल रहेगी। इंदौर रोड़ स्थित जमालपुरा से शुरू हुई इस योजना का 20% काम हो चुका है। जल संसाधन विभाग के माध्यम से 400 मजदूर, इंजीनियर व तकनीकी एक्सपर्ट की टीम इसे पूरा कर रही है। इससे पहले कान्ह डायवर्जन के नाम पर पिछले सिंहस्थ में 150 करोड़ रुपए खर्च किए थे। राघोपिपलिया से लेकर कैडी पैलेस तक बड़े पाइप डालकर कान्ह के गंदे पानी को डायवर्ट किया था, लेकिन यह योजना फेल हो गई। पाइपों की ज्वाइंट की इंजीनियरिंग ठीक नहीं थी। वशिष्ठ कंस्ट्रक्शन हैदराबाद के साइट इंजीनियर बृजेंद्र राजपूत ने बताया इस बार हर किमी के लिए इंजीनियर व तकनीकी एक्सपर्ट लगे हैं। कान्ह नदी के डायवर्सन के लिए इंदौर रोड स्थित जमालपुरा से बनाई जा रही टनल की पहली तस्वीर। दावा है कि इस योजना का 20% काम हो चुका है। दिसंबर 2027 तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के अनुसार, क्षिप्रा को कान्ह के गंदे पानी से मुक्त करने के लिए यह एक बहुत कारगर योजना है। कान्ह का दूषित जल नहीं मिल सकेगा क्षिप्रा में कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग मयंक सिंह ने बताया कि 919.94 करोड़ लागत की कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना के कार्य मौके पर प्रारंभ हो गए हैं, जिसमें ग्राम बमोरा और देवराखेड़ी में टनल बिछाने के लिए खुदाई और ग्राम जमालपुर में कट एंड कवर का कार्य जारी है. उन्होंने बताया कि यह परियोजना सिंहस्थ के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी. सन 2052 तक के सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना में 40 क्यूमैक्स जल बहाव क्षमता का भूमिगत क्लोज डक्ट का निर्माण किया जा रहा हैं, जिससे जमालपुर के समीप कान्ह नदी पर बैराज निर्माण कर दूषित जल को टनल में भेजा जाएगा, जिससे कान्ह का दूषित जल क्षिप्रा में नहीं मिल सकेगा. सेवरखेड़ी-सिलारखेडी मध्यम सिंचाई परियोजना क्षिप्रा नदी को निरंतर प्रवाहमान बनाए रखने लिए सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 614.53 करोड़ की विभाग को प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई हैं,  जिसकी कार्य एजेंसी निर्धारित कर जल्द मौके पर कार्य प्रारंभ किया जा रहा है. परियोजना में सेवरखेड़ी में बैराज का निर्माण कर मानसून के समय बैराज से 51 मिली घन मीटर जल को लिफ्ट कर सिलारखड़ी जलाशय में डाला जाएगा, जिसके लिए सिलारखेड़ी जलाशय का विस्तार भी किया जाएगा. परियोजना से ग्रीष्म ऋतु में भी क्षिप्रा नदी प्रवाहमान बनी रहेगी. परियोजना को पूर्ण करने के लिए 30 माह लक्ष्य निर्धारित किया गया.  कान्ह और क्षिप्रा नदी पर बनाए जाएंगे बैराज क्षिप्रा शुद्धिकरण के लिए कान्ह नदी पर 5 और क्षिप्रा नदी पर 1 बैराज का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए कुल 36.6 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई है, जिसमें 6.24 करोड़ की लागत से गोठड़ा स्टॉपडेम, 5.06 करोड़ की लागत से पिपलिया राघो  बैराज, 6.35 करोड़ की लागत से रामवासा बैराज , 4.56 करोड़ की लागत से जमालपुरा स्टॉपडेम, 5.74 करोड़ की लागत से पंथपीपलई स्टॉपडैम और क्षिप्रा नदी पर 8.71 करोड़ की लागत से किठोदाराव बैराज का निर्माण किया जाएगा. क्लोज डक्ट योजना की टेंडर शर्त के अनुसार, 15 साल तक कंपनी को ही पूरा मेंटेेनेंस करना होगा। पिछली बार जो कान्ह डायवर्जन योजना थी, उसमें टेंडर में ये शर्तें नहींं थी। नई योजना में वर्षाकाल के बाद के पानी को बायपास करने की मात्रा पिछली कान्ह योजना से लगभग 7-8 गुना ज्यादा होगी। जो डक्ट बनेंगे, उनकी आसानी से जेसीबी तक की मदद से सफाई हो सकेगी। कुल मिलाकर हमारे सारे स्नान पर्व क्षिप्रा में बिना गंदे पानी के हो सकेंगे। 5 मीटर गहरी, 5 मीटर चौड़ी टनल पहले कान्ह डायवर्जन में सही से इंजीनियरिंग नहीं हुई, जिससे पाइपों के ज्वाइंट ठीक नहीं बैठ पाए। योजना फेल हुई। नई योजना में 400 लोगों की दक्ष टीम लगाई है। 5 मीटर गहरी व 5 मीटर चौड़ी टनल बना रहे है, इतनी ही लंबी-चौड़ी डक्ट रहेगी। दिसंबर 2027 में काम पूरा कर देंगे और 15 साल तक कंपनी ही मेंटेनेंस करेगी। -इंजीनियर शुभम पांडेय, डिप्टी प्रोजेक्ट इंचार्ज  

सिंहस्थ-2028 में100 करोड़ से अधिक के काम के लिए कैबिनेट मंजूरी, 50 KM रेडियस में बनेगी सिंहस्थ के लिए पार्किंग

उज्जैन सिंहस्थ-2028 के दौरान उज्जैन में 10 किमी से लेकर 50 किमी एरिया तक में मुख्य मार्गों पर पार्किंग सह ट्रांजिट क्षेत्र बनाए जाएंगे। 10 सितंबर को हुई बैठक में उज्जैन कलेक्टर ने मुख्यमंत्री और सिंहस्थ की मंत्रिमंडलीय कमेटी के सामने प्रजेंटेशन दिया था। 4 दिन बाद इस प्रजेंटेशन का विवरण जारी हुआ। जिसके मुताबिक उज्जैन जिला प्रशासन के प्रजेंटेशन पर सैद्धांतिक सहमति दे दी गई है। विभागों से कहा- समय सीमा में कराएं काम नोडल एजेंसी बनाए गए नगरीय विकास विभाग ने सभी संबंधित विभागों से कहा है कि समय-सीमा में काम पूरा कराएं। बड़े वाहन शहर के बाहर रोके जाएंगे और वहां सुविधायुक्त ट्रांजिट स्थल बनाए जाएंगे। इन ट्रांजिट स्थलों से शहर के अंदर तक (मंदिर के घाटों तक आने के लिए) नि:शुल्क परिवहन (इलेक्ट्रिक बसें) की व्यवस्था की जानी चाहिए। छोटे और निजी वाहनों को शहर के भीतर न्यूनतम दूरी तक आने की अनुमति देने और शहरी सीमा में तय पार्किंग स्थलों को चिह्नित किए जाएं और उनके उपयोग की कार्ययोजना बनाएं। इंदौर और उज्जैन संभाग के सभी बस अड्‌डों को चिह्नित कर उनकी क्षमता विस्तार, सुविधा, मजबूतीकरण और नवीनीकरण का काम पुनर्घनत्वीकरण योजना या पीपीपी मोड पर किया जाएगा। सिंहस्थ में होने वाले कामों को लेकर केंद्रीय योजनाओं और केंद्र सहायता वाली योजनाओं व निजी जनभागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से काम कराने पर फोकस किया जाएगा। सिंहस्थ के कामों के प्रस्ताव संबंधित विभाग, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से नोडल विभाग नगरीय विकास और आवास विभाग को भेजे जाएंगे। नगरीय विकास विभाग करेगा इन प्रस्तावों का परीक्षण जो काम किए जाने हैं, उसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी है जो विचार कर काम को कार्ययोजना में शामिल किए जाने का फैसला करेगी। इसके साथ ही इस कमेटी द्वारा विभागीय कार्य, सिंहस्थ मद के काम और पीपीपी मोड के काम के लिए वित्तीय व्यवस्था की भी अनुशंसा की जाएगी। इस मामले में अंतिम निर्णय मंत्रिमंडलीय समिति लेगी। 100 करोड़ से अधिक के काम के लिए कैबिनेट मंजूरी     मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा कामों को मंजूरी दिए जाने के बाद विभागीय मद से काम होगा। मुख्य सचिव इसकी समीक्षा करेंगे।     सिंहस्थ मद से होने वाले कामों के लिए प्रशासनिक स्वीकृति लेना होगी। 20 करोड़ रुपए तक के काम स्टेट फाइनेंस कमेटी और 100 करोड़ तक के काम ईएफसी और इससे अधिक राशि के काम कैबिनेट की मंजूरी के बाद होंगे।     3 साल से अधिक समय लगने वाले कामों को चिह्नित कर लिया गया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने इसका परीक्षण भी कर लिया है। यह काम करेगा PWD     लोक निर्माण विभाग (PWD) खाकचौक वीर सावरकर चौराहा से गढ़कालिका से भर्तहरी गुफा होकर रंजीत हनुमान तक सड़क और पुल बनाएगा। मंगलनाथ और दत्त अखाड़ा क्षेत्र को जोड़ने के लिए केडी गेट से वीरा दुर्गादास छत्री होकर गोन्सा चौराहा तक नदी पर पुल समेत अन्य वैकल्पिक निर्माण कराए जाएंगे।     सिद्धवट कूट से कैलाश खो तक सस्पेंशन ब्रिज बनाया जाएगा। पर्यटन विभाग भी एक पैदल पुल बनाएगा। इसकी आवश्यकता का परीक्षण करने के लिए कहा है।     इंदौर-उज्जैन मार्ग से होकर बड़नगर और जावरा मार्ग को जोड़ते हुए सिंहस्थ बायपास पर लंबाई 19 किमी तक फोरलेन बनाने का काम किया जाएगा।     इंदौर-खंडवा नेशनल हाइवे पर बड़वाह और सनावद में एनएचएआई बायपास बनाएगा। इसके लिए परीक्षण करने का फैसला किया गया है।

उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के पहले स्पिरिचुअल सिटी बनाई जाएगी

उज्जैन  सिंहस्थ महापर्व 2028 से पहले धर्मधानी उज्जैन में स्थित चौरासी महादेव मंदिरों का जीर्णोंद्धार होगा। उज्जैन विकास प्राधिकरण ने इसके लिए 30 करोड़ रुपये से योजना तैयार की है। स्वीकृति के बाद काम शुरू हो जाएगा। पुराणों में महाकाल वन में चौरासी महादेव का उल्लेख है। भक्त प्रतिवर्ष श्रावण मास तथा प्रत्येक तीन वर्ष में आने वाले अधिकमास के दौरान चौरासी महादेव मंदिरों की यात्रा करते हैं। इस बार भी श्रावण मास में 22 जुलाई से चौरासी महादेव यात्रा शुरू होगी, जो 19 अगस्त तक चलेगी। पुराने शहर की सघन बस्ती तथा शिप्रा किराने चौरासी महादेव के मंदिर हैं। कुछ मंदिरों की जमीन पर अतिक्रमण पसरा है। कुछ जमीनों पर अवैध निर्माण भी हो गए हैं। इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधा के इंतजाम नहीं है। ऐसे में उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा मंदिरों के उन्नयन तथा विकास की योजना बनाई गई है। सिंहस्थ से पहले इनका कायाकल्प हो जाएगा। यहां आने वाले दर्शनार्थियों को सुविधा के साथ बेहतर आध्यात्मिक वातावरण मिलेगा। अध्ययन के बाद तैयार कराई डिजाइन उविप्रा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप कुमार सोनी ने बताया कंसलटेंट से मंदिरों का अध्ययन कराकर डिजाइन तैयार कराई गई है। विचार विमर्श के बाद, जो योजना तैयार हुई है इसमें मंदिरों का विकास, आसपास की खाली जमीन का विकास, बाउंड्रीवाल, अप्रोच, फसाड, रंगरोगन, लाइटिंग, हरियाली तथा नाली आदि का निर्माण शामिल है। जिन मंदिरों में जिस प्रकार के काम की आवश्यकता होगी वह कराया जाएगा। कुल मिलकर मंदिरों के संपूर्ण विकास की योजना बनाई गई है। पिछले सिंहस्थ में भी हुआ था काम चौरासी महादेव मंदिरों को लेकर सिंहस्थ 2016 में भी योजना बनाई गई थी। इसके तहत कई मंदिरों में परिसर आदि का निर्माण भी कराया गया था। प्राचीन मंदिर काले पत्थरों से निर्मित है, लेकिन शिखर पर रंगरोगन तथा मरम्मत आदि के काम किए गए थे। इस बार महापर्व के पहले से संधारण शुरू होगा, इससे काम में गुणवत्ता भी बनी रहेगी।   भगवान शिव की विशाल मूर्ति के साथ होंगे 12 ज्योतिर्लिंग जानकारी के मुताबिक यह सिटी उज्जैन से 15 किमी दूर बनाई जाएगी, जिसके लिए 150 एकड़ जमीन चिन्हित कर ली गई है। यहां भगवान भोलेनाथ की मूर्ति के चारों ओर देश के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंग के स्वरूप स्थापित किए जाएंगे। यहां ज्योतिर्लिंग के साथ अपनाई जाने वाली पूजा पद्धति की जानकारी भी रहेगी, ताकि आने वाले श्रद्धालु 12 अलग-अलग ज्योतिर्लिंग में की जाने वाली पूजा के आधार पर पूजन कर सकें। उज्जैन में बनेगा म्यूजियम सिंहस्थ के पहले उज्जैन में बड़ा म्यूजियम बनाने की तैयारी भी की जा रही है। यह म्यूजियम कोठी एरिया में बनाया जाएगा। इसमें विक्रमादित्य के शासन काल के साथ भगवान कृष्ण, महाकाल बाबा और अन्य धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए मूर्तियों और अन्य ऐतिहासिक, पुरातात्विक वस्तुओं को रखा जाएगा, ताकि श्रद्धालु म्यूजियम में जाकर उज्जैन के गौरवशाली इतिहास और धार्मिक महत्व से परिचित हो सकें।

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