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सिंहस्थ में रास्ते में खराब हुए वाहनों को हटाने के लिए 5 बड़ी क्रेन लगेंगी, पूरे सांवेर रोड को सीसीटीवी सर्विलेंस में लाएंगे

उज्जैन  एमपी में सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन की तैयारियां चल रही हैं। इंदौर शहर में अलग-अलग जगह होल्डिंग जोन बनाने का प्रस्ताव है, ताकि उज्जैन में भीड़ बढ़ने पर बाहरी लोगों को यहां रोका जाए। जमीन हासिल करने के बाद सभी विभाग यहां हर तरह की सुविधा का इंतजाम करेंगे। पुलिस ने बल व अन्य संसाधनों के साथ हाई-वे चौकियां, सहायता केंद्र व इंट्रीग्रेटेड कमांड सेंटर स्थापित करने की अनुमति मांगी है। एक-दो दिन तक रोकने की रहेगी व्यवस्था होल्डिंग जोन बनाने के लिए कुछ जगह चिन्हित की है। यहां 50 हजार से ज्यादा लोगों को रोकने के लिए विश्राम स्थल, कुर्सियां, सुविधागृह, पंखे, कूलर, पेयजल आदि की व्यवस्था की जाएगी। उज्जैन में भीड़ अधिक होने पर बाहरी लोगों को यहां ठहराया जाएगा। एक-दो दिन तक रोकने की व्यवस्था रहेगी। एडिशनल कमिश्नर मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक, लवकुश चौराहे पर लेफ्ट साइड की खाली जमीन, रिंग रोड पर रोबोट चौराहे के पास आइडीए की जमीन, मांगलिया व तेजाजी नगर में भी होल्डिंग एरिया के लिए जमीन मांगी है। उज्जैन में हुई बैठकों में कई प्रस्ताव मंजूर हो चुके हैं। इतने इंतजाम की दरकार -सुपर कॉरिडोर, लवकुश चौराहे के पास करीब 7 एकड़ जमीन इंट्रीगेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर के लिए रहेगी, ताकि वहां से नजर रखी जा सके। पुलिस, प्रशासन व निगम के अफसर यहां से सभी गतिविधियां संचालित करेंगे। -पूरे सांवेर रोड को सीसीटीवी सर्विलेंस में लाएंगे। -महालक्ष्मी नगर, सुपर कॉरिडोर व धार रोड को थाने के रूप में मंजूर करने की मांग है। -7 हाई-वे चौकियां चाहिए। देवगुराड़िया, नेमावर रोड, खंडवा रोड पर तेजाजी नगर, एबी रोड पर राऊ के पास व अन्य जगह लगेगी। -रिंग रोड, बायपास पर ट्रैफिक सहायता केंद्र स्थापना की अनुमति मांगी है। -करीब 2 हजार पुलिसकर्मियों का अतिरिक्त बल दो महीने पहले चाहिए। साथ ही 20 जीप, 20 बसें व ट्रक फोर्स व सामान के परिवहन के लिए चाहिए। -रास्ते में खराब हुए वाहनों को हटाने के लिए 5 बड़ी क्रेन लगेंगी। शिप्रा के जल से उगाए 50 हजार बांस उज्जैन में सिंहस्थ 2028 में इस बार बहुत कुछ अलग देखने को मिलेगा. इस बार धर्मध्वजाओं को लहराने के लिए पूरे उज्जैन में 50 हजार से ज्यादा बांस उगाए गए हैं, शिप्रा नदी के किनारे 10.72 हेक्टेयर में पूरा जंगल उगाया गया है, यहां शिप्रा नदी के पानी से बांस उगाए हैं, जहां 30 फीट ऊंचे बांस लगाए गए हैं, यह बांस उज्जैन वन मंडल की तरफ से निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इन बांसों से सिंहस्थ में आने वाले सभी अखाड़े और साधु संतों को धर्मध्वजा लहराने के लिए दिया जाएगा. इन बांसों की बारीकी से वन विभाग की तरफ से देखरेख भी की जा रही है. उज्जैन में 7 साल पहले लगे थे यह बांस बताया जा रहा है कि उज्जैन में शिप्रा नदीं के किनारे यह बांस 7 साल पहले ही लगा दिए गए थे. जिन्हें 30 फीट की ऊंचाई तक जाने देना है, हालांकि अभी इनकी ऊंचाई 20 से 25 फीट ही हुई है. अभी अगले दो साल और यह बांस लगे रहेंगे, जिससे इनकी लंबाई 30 फीट से ज्यादा हो जाएगी. वन विभाग की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक सिंहस्थ महाकुंभ शुरू होने से तीन महीने पहले ही इन बांसों की कटाई शुरू हो जाएगी और उन्हें व्यवस्थित कर वन विभाग की देखरेख में रखा जाएगा, जबकि बाद में कलेक्टर और मेला अधिकारी को यह बांस सौंप दिए जाएंगे, जहां सिंहस्थ मेला में 13 अखाड़ों समेत जितने भी साधु-संत आएंगे उन्हें यह बांस धर्म ध्वजा लहराने और अपने-अपने शिविरों में झंडा लगाने के लिए दिए जाएंगे. वन विभाग ने भैरवगढ़ मार्ग पर शिप्रा नदी के पास फिलहाल इन बांसों की पूरी देखरेख की जा रही है. बांस का धार्मिक महत्व बता दें कि बांस का अपना अलग धार्मिक महत्व होता है, हिंदू धर्म में बांस पर ही ध्वजा लगाई जाती है. ऐसे में सिंहस्थ के दौरान धर्मध्वजाएं इन्हीं बांसों पर लगेगी, क्योंकि यह आस्था का भाव माना जाता है. 10.72 हेक्टेयर में बांस का यह पूरा जंगल फैला है, बताया जा रहा है कि यह बांस बेंबोसा बाल्कोअ प्रजाति, जिसका बीज 2018 में रीवा की फ्लोरीकल्चर लेब से लाया गया था, जहां उज्जैन में कुल 5600 बांस के पौधों का प्लाटेंशन किया गया था, बताया जा रहा है कि यहां वन मंडल की तरफ से धार्मिक महत्व का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है और बांस के सभी झुंडों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है. क्योंकि एक बांस के पेड़ से 20 से 25 बांस निकलते हैं, लेकिन यह सब बिना कटे फटे होने चाहिए, इसलिए यहां पूरी देखरेख की जा रही है. क्योंकि 50 हजार से ज्यादा बांसों में केवल शिप्रा नदीं का ही जल सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया गया है. 

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए अभी से तैयारी शुरू, भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में स्नान कराना प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती

उज्जैन  भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी किनारे वर्ष 2028 में लगने वाले महाकुंभ सिंहस्थ की तारीख शासन ने घोषित कर दी है। सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने बताया कि इस बार सिंहस्थ दो माह का होगा। 27 मार्च से 27 मई तक लगेगा। नौ अप्रैल से आठ मई तक तीन अमृत स्नान और सात स्नान पर्व होंगे। गत सिंहस्थ एक माह का था। उज्जैन में हर 12 वर्ष के अंतराल पर महाकुंभ सिंहस्थ लगता है, जिसमें दुनियाभर से साधु-संत और श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान करने आते हैं और धर्म, संस्कृति का प्रचार-प्रसार करते हैं। इस बार के महाकुंभ में 14 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान सरकार ने लगाया है। सिंहस्थ में अब 35 महीने का समय शेष रह गया है और स्थिति यह है कि सड़क, पुल, बिजली सहित अधिकांश प्रोजेक्ट कागजों में ही सिमटे पड़े हैं। आगे चलकर हो सकती है बड़ी मुसीबत प्रमुख बात यह है कि सालभर में सिंहस्थ मद के केवल दो काम ही धरातल पर प्रारंभ हो पाए हैं। विभागीय मद के अधिकांश प्रोजेक्ट सक्षम स्वीकृति और ठेकेदार चयन प्रक्रिया में ही उलझा रखे हैं। यह विशुद्ध रूप से अफसरों की उदासीनता एवं लापरवाही का प्रमाण है, जो समय रहते काम प्रारंभ और समाप्त न होने से आगे चलकर बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है। श्रद्धालुओं के लिए होगी व्यवस्थाएं एक रिपोर्ट के अनुसार सिंहस्थ की महत्ता और विशालता को ध्यान में रख श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं करने को 11 विभाग 15751 करोड़ रुपये के 102 कार्य की योजना प्रस्तावित हैं, जिनमें 5133 करोड़ रुपये से 75 कार्य इस वर्ष सिंहस्थ मद से कराने की अनुशंसा संभागीय समिति ने की है। ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रदेश बजट में सिंहस्थ मद दो हजार करोड़ का ही रखा गया है। प्रश्न उठता है कि भविष्य में मद बढ़ाया जाएगा या कुछ कार्यों की छंटनी होगी। सबसे बड़ी चुनौती भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में स्नान सिंहस्थ कराने में सबसे बड़ी चुनौती भीड़ प्रबंधन और स्वच्छ जल में श्रद्धालुओं को स्नान कराने की है। भीड़ प्रबंधन तभी संभव है जब शहर की आंतरिक सड़कें चौड़ी, पुलों का दोहरीकरण और शिप्रा नदी पर घाट की लंबाई बढ़े। ये तीनों ही काम करने में यहां का प्रशासन पिछड़ा है। ट्रैफिक नियंत्रण के लिए बनी रोप-वे, फ्रीगंज समानांतर रेलवे ओवर ब्रिज सरिकी अनेक विभागीय योजना सक्षम स्वीकृति के बाद भी धरातल पर शुरू न हो सकी है। सरकार को प्रारंभिक तौर पर अनुमान है कि सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन आ सकते हैं। ऐसे में इनके लिए व्यवस्था करना भी आसान काम नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने अनुमान के आधार पर कुम्भ मेले के दौरान कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। जिनको कुंभ के दौरान लागू किया जाएगा। कुंभ में होंगी ये व्यवस्थाएं कुंभ मेले के दौरान मेला क्षेत्र में प्रतिदिन 16 हजार से ज्यादा सफाईकर्मी स्वच्छता की व्यवस्था संभालेंगे। साथ ही श्रृद्धालुओं की सुविधा के लिए 50 हजार शौचालय का निर्माण भी किया जाएगा। आने वाले श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाने का भी निर्णय लिया गया है। सिंहस्थ में लगेंगे इतने सफाईकर्मी बताया जा रहा है कि उज्जैन में सड़क और अन्य क्षेत्रों को मिलाकर 11 हजार 220 सफाईकर्मियों की आवश्यकता होगी। कचरा संग्रहण के लिए लगभग 5 हजार सफाईकर्मियों की जरूरत पड़ेगी। कुल मिलाकर 16 हजार 220 सफाई कर्मियों की आवश्यकता सिंहस्थ में होगी। सिंहस्थ में आ सकते हैं 14 करोड़ श्रद्धालु सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आ सकते हैं। ऐसे में हर दिन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 740 टन कचरा उत्पन्न होने का अनुमान है। इसे नियंत्रित करने के लिए 50 हजार बायो-टॉयलेट बनाए जाएंगे। सिंहस्थ कुम्भ मेले में 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं को सिंहस्थ मेला क्षेत्र के अनुसार 6 जोन में बांटा जाएगा। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं का डिजीटल रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा। डॉक्टर और पेरामेडिकल स्टॉफ की ट्रेनिंग होगी। इसके साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर पर्याप्त सुरक्षाबलों को तैनात किया जाएगा।

अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने सिहस्थ-2028 के प्रगतिरत उज्जैन में निर्माण कार्यो की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए

भोपाल अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने सिहस्थ-2028 के प्रगतिरत उज्जैन में निर्माण कार्यो की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि निर्माण संबंधी कार्यों में समयबद्ध तरीके से काम किया जाना सुनिश्चित किया जाये। प्रगतिरत कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भी प्रत्येक माह भेजी जाएं। इसकी प्रत्येक 15 दिन में कलेक्टर उज्जैन द्वारा समीक्षा की जाएगी। अपर मुख्य सचिव ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण कार्यों की गति को बनाए रखना संबंधित विभाग के अधिकारी की जिम्मेदारी है इसके लिए यदि दो शिफ्ट में काम करने की आवश्यकता है तो वह भी करें। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होना चाहिए। समीक्षा बैठक में कलेक्टर नीरज कुमार ने विभिन्न निर्माण कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की। घाट निर्माण के लिए 30 माह का समय सुनिश्चित किया गया है। क्षिप्रा शुद्धिकरण के लिये कान्हा नदी डायवर्सन की भौतिक प्रगति रिपोर्ट 29 प्रतिशत है। सेवर खेड़ी, सिलार खेड़ी जलाशय का काम भी शुरू हो चुका है। इंदौर उज्जैन सिक्स लेन का कार्य 24 माह में पूर्ण किया जाना है। इसी के साथ उज्जैन मक्सी फोर लेन इंगोरिया उन्हेल और उज्जैन सिंहस्थ बायपास का काम भी प्रगतिरत है। बैठक में पीडब्ल्यूडी के निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई। इसी के साथ नगर निगम के मार्ग चौड़ीकरण के कार्यों की भी समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सड़क चौड़ीकरण के कार्यों को समन्वय के साथ किया जाना सुनिश्चित करें। इसमें सभी के सहयोग से कार्य पूर्ण किया जायें। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजौरा ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यदि किसी निर्माण कार्य में समस्या आ रही है तो उसके संबंध में जिला प्रशासन और कलेक्टर को बताएं जिससे समस्या का त्वरित समाधान किया जा सके। प्रो-एक्टिव होकर काम करने की आवश्यकता है जो काम अभी शुरू नहीं हुए हैं और जिनको किया जाना जरूरी है उन कार्यों को भी तुरंत राज्य शासन को भेजें। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि स्थायी प्रकृति के सभी कामों को शुरू किया जावे और उनकी सतत मॉनिटरिंग भी किया जाना सुनिश्चित करें। अपर मुख्य सचिव ने बैठक के बाद निर्माण कार्यों को भी देखा मेडिसिटी मेडिकल कालेज के निर्माण कार्यों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया। इसके बाद सिलार खेड़ी जलाशय का भी निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की जानकारी ली। बैठक में संभागायुक्त संजय गुप्ता इन्दौर कलेक्टर आशीष सिंह पुलिस अधीक्षक प्रदीप कुमार शर्मा जिला पंचायत सीईओं श्रीमती जयती सिंह नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक और अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थें।  

बदनावर-उज्जैन फोरलेन पर सिंहस्थ को ध्यान में रखकर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित होंगे

उज्जैन  उज्जैन से बदनावर की दूरी 65 किमी. की है। गुजरात के श्रद्धालु महाकाल दर्शन करने के लिए बदनावर होकर ही गुजरते हैं। हाल ही में बदनावर बागेश्वर धाम से उज्जैन के इंदौर बायपास तक फोरलेन बनकर तैयार हो चुका है तथा आवागमन भी शुरू हो गया है। यह रोड भी वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ(Simhastha 2028) के मद्देजनर ही बनाया गया है। इस समय आम जनता का झुकाव इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति बढ़ा है। इसी को ध्यान में रखकर जिला प्रशासन ने बदनावर में 3 जगह चार्जिंग स्टेशन(E-Buses Charging Station) बनाने का निर्णय लिया है, इनमें मुख्य बस स्टैंड, गणेश वडली बस स्टैंड व नागेश्वर महादेव धाम है। यह सभी स्टेशन सिहंस्थ के चलते स्थापित किए जा रहे हैं। कलेक्टर प्रियांक मिश्र ने बदनावर के साथ पीथमपुर, मनावर, सरदारपुर और कुक्षी में भी स्थानीय निकाय को चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इन स्थानों पर बस स्टैंड और डिपो के लिए भूमि चिन्हित की जाएगी। मंगलवार को स्थान के निरीक्षण के लिए एसडीएम वसीम अहमद भट्ट, तहसीलदार सुरेश नागर, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि शेखर यादव, सीएमओ लालसिंह राठौर आदि उपस्थित थे। गुजरात के अधिकांश वाहन बायपास से गुजरने लगे बदनावर-उज्जैन फोरलेन बनने के बाद गुजरात से आने वाले ज्यादातर वाहन अब बायपास से होकर गुजरने लगे हैं। जिन तीन जगह को सिंहस्थ को ध्यान में रखकर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे है, उनमें से बागेश्वर धाम का चार्जिंग स्टेशन गुजरात जाने वाले वाहनों के लिए उपयोग में आएगा। शेष दोनों चार्जिंग स्टेशन अन्य वाहनों के लिए उपयोगी रहेंगे। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि शासन को उज्जैन से बदनावर 70 किमी लंबे फोरलेन के आसपास चार्जिंग स्टेशन(E-Buses Charging Station) स्थापित करना चाहिए, ताकि सिंहस्थ के दौरान चार्जिंग स्टेशन पर वाहनों की लंबी कतार न लगे।

सिंहस्थ के दौरान शहर और मेला क्षेत्र स्वच्छ और हरियाली से आच्छादित रहेंगे, नगर निगम ने ‘ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ’ अवधारणा पर काम शुरू किया

 उज्जैन  तीन साल बाद उज्जैन में लगने जा रहे महाकुंभ सिंहस्थ में 22 हजार 200 टन कचरा निकलने का अनुमान नगर निगम ने लगाया है। अनुमान है कि प्रतिदिन औसत 740 टन कचरा (सालिड वेस्ट) निकलेगा। इतने कचरे का बेहतर प्रबंधन करने के लिए सरकार से 15220 सफाई कर्मचारी, 379 वाहन, चार नए कचरा ट्रांसफर स्टेशन और 50 हजार बायो टायलेट की अपेक्षा की गई है। पिछली बार महाकुंभ में सात करोड़ श्रद्धालु आए थे, इस बार 13 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। ढाई से तीन गुना बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या बता दें कि 92.68 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले उज्जैन शहर की आबादी सात लाख के करीब है। यहां ‘महाकाल महालोक’ के रूप में ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर का विस्तार होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या ढाई से तीन गुना बढ़ गई है। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड का कहना है कि उज्जैन शहर में रोजाना चार लाख 81 हजार लोगों का आवागमन होता है। रेलवे का कहना है कि वर्तमान में उज्जैन रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन औसत 36946 व्यक्ति ट्रेन से उतरते-चढ़ते हैं। पिछले सिंहस्थ में सात करोड़ श्रद्धालु आए थे सिंहस्थ के दरमियान ये संख्या 66132 हो सकती है। नगर निगम का कहना है कि अभी प्रतिदिन शहर से रोजाना औसत 240 टन (महीने में 7200 टन) कचरा निकलता है। पिछले सिंहस्थ के दौरान महीनेभर में सात करोड़ श्रद्धालु उज्जैन आए थे, तब महीनेभर में 18700 टन कचरा निकला था। इसकी कीमत 150 रुपये प्रति टन के हिसाब से 28 लाख पांच हजार रुपये थी। इन सब आंकड़ों का अध्ययन, विश्लेषण करने के बाद ही नगर निगम ने सिंहस्थ के दौरान 22200 टन कचरा उत्सर्जित होने का अनुमान लगाया है। इतने कचरे के एकत्रीकरण, परिवहन एवं सड़क-नाली की सफाई के लिए वाहन एवं कर्मचारियों की उपलब्धता का आकलन किया है। प्रारंभिक योजना से अपर मुख्य सचिव डा. राजेश राजोरा को अवगत कराया जा चुका है। ‘ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ’ अवधारणा पर होगा काम पिछली बार की तरह इस बार भी यहां ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ अवधारणा पर काम होगा। इसका मतलब है कि महाकुंभ के दौरान शहर और मेला क्षेत्र स्वच्छ तो होगा ही हरियाली से आच्छादित भी होगा। नगर निगम हर संभव प्रयास करेगा कि मेला प्रतिबंधित प्लास्टिक कचरा मुक्त हो। योजना, जीरो वेस्ट सिंहस्थ इवेंट की बनाई जा रही है। इसमें सारे कचरे का बेहतर तरीके से संग्रहण कर वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन किया जाएगा। शहर से 12 किलोमीटर दूर गोंदिया ट्रेचिंग ग्राउंड में भारत सरकार की नवरत्न कंपनी गैस अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा स्थापित किए जाने वाले कम्प्रेस्ड बायोमिथिनेशन प्लांट की इसमें अहम भूमिका होगी। मच्छर मारने तक के होंगे इंतजाम सिंहस्थ में कचरा संग्रहण, सफाई कार्य के साथ मच्छर मारने तक के इंतजाम होंगे। पिछली बार मच्छरों को पनपने से रोकने और मलेरिया की रोकथाम पर सवा करोड़ रुपये खर्च हुए थे। घाट क्षेत्र में शाही स्नान वाले दिन सुगंधित स्प्रे भी किया था। ऐसा इस बार भी किए जाने की योजना है। सिंहस्थ 2028 के लिए बनाया जा रहा प्लान     सिंहस्थ-2028 के लिए कचरा प्रबंधन का विस्तृत प्लान तैयार किया जा रहा है। अभी आकलन में यह बात सामने आई है कि सिंहस्थ के दरमियान महीनेभर में 22 हजार 200 टन कचरा निकलेगा। कचरा प्रबंधन के लिए 15220 सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति, 379 वाहनों की खरीदी, चार नए कचरा ट्रांसफर स्टेशन और 50 हजार बायो टायलेट बनाने का प्रस्ताव शासन को दिया जा रहा है। – आशीष पाठक, आयुक्त, नगर निगम, उज्जैन  

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में कई प्रमुख बाजारों की सड़कों का चौड़ीकरण जल्द

उज्जैन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में कई प्रमुख बाजारों की सड़कों का चौड़ीकरण होने वाला है, इसे लेकर टेंडर जारी किया जा रहा है. नगर निगम द्वारा एक-दो दिनों में मार्किंग शुरू कर दी जाएगी. इस चौड़ीकरण पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करने वाली है. यह चौड़ीकरण लंबे समय से पेंडिंग था. उज्जैन के नगर निगम कमिश्नर आशीष पाठक ने बताया कि उज्जैन में कई प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण किया जा रहा है. इसे लेकर महापौर परिषद ने भी निर्णय लिया है. प्रमुख रूप से निकास चौराहा से कंठाल, गाड़ी अड्डा चौराहे से विक्रमादित क्लॉथ मार्केट, केडी गेट जूना सोमारिया होते हुए शिप्रा नदी की बड़ी पुल तक चौड़ीकरण होगा. इसके अतिरिक्त खजूर वाली मस्जिद से अब्दलपुरा, रविंद्र नाथ टैगोर मार्ग जीवाजी गंज से गणेश चौक तक चौड़ीकरण किया जाएगा.  इसके अलावा कोयला फाटक से छत्री चौक, गोपाल मंदिर तक चौड़ीकरण होगा. इसी तरह गदा पुलिया से रविशंकर नगर, जयसिंहपुरा होते हुए लालपुर ब्रिज तक चौड़ीकरण किया जाएगा.   मार्किंग को लेकर क्या बोले कमिश्नर उज्जैन में होने वाले चौड़ीकरण की मार्किंग को लेकर नगर निगम कमिश्नर आशीष पाठक ने एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत के दौरान कहा कि एक-दो दिनों में मार्किंग शुरू हो जाएगी. पहले चौड़ीकरण की मार्किंग होगी.  इसके बाद टेंडर लगाए जाएंगे. जैसे ही टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होगी, वैसे ही चौड़ीकरण शुरू हो जाएगा. सिंहस्थ 2028 को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय उज्जैन के महापौर मुकेश टेटवाल ने बताया कि सिंहस्थ 2028 को लेकर चौड़ीकरण को काफी महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है. पूर्व में भी चौड़ीकरण की मांग उठती आई है, मगर अब सिंहस्थ के पहले सड़कों का चौड़ीकरण इसलिए भी जरूरी माना जा रहा है क्योंकि उज्जैन में सिंहस्थ में पिछले सिंहस्थ 2016 की तुलना में बड़ी संख्या में अधिक श्रद्धालु आएंगे.

सिंहस्थ 2028 से जुड़ी 19 पहलों के लिए 5,882 करोड़ का बजट स्वीकृत, 9 अप्रैल से 8 मई तक तीन शाही स्नान और सात पर्व स्नान होंगे

उज्जैन  मध्य प्रदेश में सिंहस्थ-2028 की तैयारी राज्य सरकार ने शुरू कर दी है। इसके लिए पांच सौ करोड़ रुपये का बजट प्रवधान भी किया गया है। मगर, सिंहस्थ के कार्यों में इससे अधिक व्यय होगा। सिंहस्थ की तैयारियों के तहत 18 विभागों ने 568 कार्यों का प्रस्ताव शासन को सौंपा है। इन कार्यों में 15,567 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इनमें नदियों पर घाटों का निर्माण, वहां सुरक्षा व्यवस्था, सड़क, पुल निर्माण, सिंहस्थ मेला क्षेत्र का विकास, परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के कार्यों को प्राथमिकता में रखा गया है। वहीं, तीन साल से अधिक अवधि के कार्यों को लेकर भी बजट निर्धारित किया जाएगा। केंद्र सरकार से मांगा जाएगा बजट इनमें से अधिकांश कार्यों के लिए केंद्र सरकार से भी बजट मांगा जाएगा। विभागों को केंद्र से सहायता प्राप्त करने के लिए कार्यों का प्रस्ताव बनाकर भारत सरकार को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल सिंहस्थ 2028 से जुड़ी 19 पहलों के लिए 5,882 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इनमें जल संसाधन, नगरीय प्रशासन एवं विकास, ऊर्जा, लोक निर्माण, संस्कृति और पुरातत्व विभागों की परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। बताते चलें कि भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से दो ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश में हैं। उज्जैन के महाकाल ज्योतिर्लिंग और ओंकारेश्वर में बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। भीड़ संभालने के लिए बनेगी कुशल यातायात प्रणाली हर 12 वर्ष में पवित्र शहर उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ के लिए प्रसिद्ध मध्य प्रदेश राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर एक विशेष स्थान रखता है। वहीं, सिंहस्थ में दुनिया भर से लगभग 15 करोड़ आगंतुकों के आने की उम्मीद की जा रही है। लिहाजा, इतनी बड़ी संख्या में आने वाले भक्तों की भीड़ को संभालने के लिए उज्जैन में एक कुशल यातायात प्रणाली भी बनाई जाएगी। पैदल आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग रास्ता बनाया जाएगा, ताकि वाहनों की वजह से जाम न लगे और लोगों को परेशानी न हो। प्रारंभिक कार्यों की यह परियोजनाएं स्वीकृत     29.21 किलोमीटर लंबे घाटों का 778.91 करोड़ से निर्माण किया जाएगा और 1,024.95 करोड़ रुपये से कान्ह नदी का 30.15 किलोमीटर का डायवर्जन किया जाएगा।     क्षिप्रा नदी पर सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी बांध के निर्माण से जुड़ी एक सतत जल प्रवाह योजना के लिए 614.53 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।     जल विनियमन के लिए क्षिप्रा नदी पर 74.67 करोड़ रुपये से 14 और कान्ह नदी पर 43.51 करोड़ रुपये से 11 प्रस्तावित बैराज बनाए जाएंगे।     198 करोड़ के आवंटन के साथ उज्जैन शहर सीवरेज परियोजना, 250 करोड़ की लागत से अल्ट्रा-हाई-प्रेशर कार्य के लिए एक नया ईएचवी सबस्टेशन, 16.80 करोड़ की लागत से हाई-प्रेशर स्टेशन की क्षमता वृद्धि और 29.83 करोड़ की लागत से 33/11 केवी सबस्टेशन स्थापित किया जाएगा।     4.50 करोड़ 33 केवी लाइन और इंटरकनेक्शन (10 किमी) के निर्माण के लिए अलग रखे गए हैं। 18.36 करोड़ 80 किमी तक फैले समान कार्यों के लिए और 10.08 करोड़ ओंकारेश्वर बजट के तहत भूमिगत केबल कार्य पर व्यय किए जाएंगे।  

उज्जैन में पुलिस लाइन सरोवर पर सिंहस्थ- 2028 को आपदामुक्त संपन्न कराने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को उज्जैन में पुलिस लाइन सरोवर पर सिंहस्थ- 2028 को आपदामुक्त संपन्न कराने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 18 हजार पुलिस, एसडीआरएफ, होमगार्ड जवान एवं सिविल वॉलिंटियर्स को श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस दौरान डीप डाइवर्स, तैराकों, बोट हैंडलर्स के कार्यों का अवलोकन किया तथा ब्रीदिंग अप्रैटस, स्नेक कैचर एवं आपदा प्रबंधन के कार्य में आने वाले अन्य उपकरणों का निरीक्षण भी किया। उपकरणों की जानकारी डिविजनल कमांडेंट होमगार्ड श्री रोहतीश पाठक एवं जिला कमांडेंट होमगार्ड श्री संतोष कुमार जाट द्वारा दी गई। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, सांसद श्री अनिल फिरोजिया,विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, श्री सतीश मालवीय, श्री जितेंद्र सिंह पंड्या, महापौर श्री मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, जनप्रतिनिधि श्री संजय अग्रवाल, श्री रवि सोलंकी, संभागायुक्त श्री संजय गुप्ता, एडीजीपी श्री उमेश जोगा, कलेक्टर श्री नीरज कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

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