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पहला सूर्य ग्रहण और 12 राशियाँ: किसे मिलेगा लाभ, किसे रहना होगा सावधान

कुंभ राशि में लगने वाला साल का पहला ग्रहण सामूहिक चेतना, नवाचार और भविष्य की योजनाओं में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है. भले ही यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों का गोचर और उनकी स्थिति प्रत्येक जातक के लिए महत्वपूर्ण होती है. आइए विस्तार से समझते हैं कि इस ग्रहण का विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ने की संभावना है. राशियों पर ग्रहण का प्रभाव मेष राशि यह ग्रहण आपके सामाजिक जीवन और बड़े सपनों को प्रभावित कर सकता है. देखा जाए तो आप अपनी दोस्ती और काम-काज के रिश्तों को नए नजरिए से देख सकते हैं. पैसों को लेकर थोड़ी अस्थिरता महसूस हो सकती है, इसलिए निवेश या खर्च का कोई भी फैसला जल्दबाजी में न लें. वृषभ राशि करियर को लेकर यह समय थोड़ा संभलकर चलने का है. हो सकता है ऑफिस में काम का दबाव बढ़े या मेहनत का फल मिलने में थोड़ी देरी हो. अधिकारियों से उलझने के बजाय धैर्य रखें. ध्यान रहे, धीरे-धीरे ही सही लेकिन आपकी निरंतरता आपको बड़ी सफलता दिलाएगी. मिथुन राशि आपकी पढ़ाई, लंबी यात्राओं और भविष्य की सोच में कुछ बदलाव आ सकते हैं. मुमकिन है कि बनी-बनाई योजनाओं में फेरबदल करना पड़े. विशेष रूप से, इस दौरान आपकी आध्यात्मिक रुचि बढ़ेगी, जो आपको खुद को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगी. कर्क राशि ग्रहण के प्रभाव से आपकी भावनाएं काफी गहरी हो सकती हैं. पैसों के लेन-देन, लोन या पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सावधानी बरतें. बेमतलब की चिंताओं में न उलझें और मुश्किल समय में परिवार के साथ पर भरोसा रखें. सिंह राशि आपके रिश्तों और पार्टनरशिप के लिए यह समय धैर्य की परीक्षा जैसा है. अगर बातचीत में अहंकार आया, तो गलतफहमियां बढ़ सकती हैं. दूसरों की बातों को ध्यान से सुनें और शांति से जवाब दें; यही आपकी समझदारी होगी. कन्या राशि अपनी सेहत और रोजमर्रा के काम पर ध्यान दें. काम के बोझ को खुद पर हावी न होने दें, नहीं तो तनाव बढ़ सकता है. अनुशासन बनाए रखें और काम के साथ-साथ आराम के लिए भी वक्त निकालें. सेहत को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. तुला राशि आपका मन रचनात्मक कामों में लगेगा, लेकिन भावनात्मक रूप से ध्यान भटक सकता है. प्रेम संबंधों में एक-दूसरे से बहुत ज्यादा उम्मीदें न पालें. अपनी बात को साफ और स्पष्ट रखें ताकि किसी भी तरह के भ्रम की गुंजाइश न रहे. वृश्चिक राशि यह समय आपके घर और परिवार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. घर की चर्चाओं में धैर्य बनाए रखें, क्योंकि पुरानी बातें फिर से उभर सकती हैं. कड़वी भाषा का प्रयोग करने से बचें और घर के माहौल को शांत रखने की कोशिश करें. धनु राशि बातचीत करने और नई चीजें सीखने के मामले में सावधानी जरूरी है. किसी को कुछ भी बोलने से पहले सोच लें ताकि गलतफहमी न हो. छोटे भाई-बहनों या पड़ोसियों के साथ व्यवहार में नरमी बरतें और सकारात्मक रहें. मकर राशि पैसों के मामले में अनुशासन बनाए रखना ही आपके लिए सबसे बड़ा मंत्र है. फिजूलखर्ची या रिस्की निवेश से फिलहाल दूर रहें. यह ग्रहण आपको अपनी बचत और खर्च करने के तरीकों को सुधारने का एक अच्छा मौका दे रहा है. कुंभ राशि यह ग्रहण आपकी ही राशि में है इसलिए यह समय ‘खुद को पहचानने’ का है. आप अपने स्वास्थ्य, करियर और रिश्तों को लेकर दोबारा सोच सकते हैं. मन थोड़ा अशांत रह सकता है, इसलिए फिलहाल कोई बड़ा बदलाव न करें और खुद को समय दें. मीन राशि आपका झुकाव अध्यात्म की ओर ज्यादा रहेगा. आप अकेलापन महसूस कर सकते हैं, लेकिन इसे नकारात्मक न होने दें. यह पुराने जख्मों को भरने और प्रार्थना व ध्यान के जरिए खुद को शांत करने का बहुत अच्छा समय है. ग्रहण के दौरान नकारात्मक प्रभाव कम करने के उपाय शास्त्रों में ग्रहण के प्रभाव को संतुलित करने के लिए कुछ विशेष मार्गदर्शन दिए गए हैं, जो सभी जातकों के लिए लाभकारी हैं:     मंत्रों का आलंबन: स्पष्टता और सुरक्षा के लिए गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप करें.     दान और सेवा: चावल, दूध, तिल, पीले वस्त्र या अन्य वस्तुओं का दान करना सकारात्मकता लाता है.     आध्यात्मिक साधना: ध्यान, मौन और प्रार्थना को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.     संयम: अनावश्यक विवादों से बचें और मानसिक शांति बनाए रखने का प्रयास करें.  

साल का पहला सूर्य ग्रहण: रिंग ऑफ फायर क्या है और क्यों माना जाता है खास?

सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर लगता है. कल यानी 17 फरवरी को फाल्गुन माह की अमावस्या मानाई जाएगी. साथ ही कल साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. सूर्य को ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगेगा. ये वलयाकार सूर्य ग्रहण रहने वाला है. इसे विज्ञान अपनी भाषा में रिंग ऑफ फायर कहता है. ये सूर्य ग्रहण बहुत ही विशेष है. ये सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आने वाला है और न ही इसका सूतक काल भारत में माना जाएगा, लेकिन लोगों के मन में सवाल है कि ये रिंग ऑफ फायर क्या है और ये सूर्य ग्रहण विशेष क्यों हैं? क्या है रिंग ऑफ फायर? NASA के अनुसार, जब धरती से चंद्रमा की दूरी सबसे अधिक होती है और उस दौरान सूर्य ग्रहण लगता है, तो चंद्रमा दूर होने की वजह से सूर्य को पूरी तरह से ढक पाने में असफल रहता है. इसलिए आकार में छोटा नजर आता है. ऐसे में सूर्य का बीच वाला भाग काला दिखता है और उसके चारों ओर रौशनी की पतली चमकदार घेरा बन जाता है. ये चमकदार घेरा आग की अंगूठी जैसा नजर आता है. इसे ही रिंग ऑफ फायर कहते हैं. दूसरा, वलयाकार या कुंडलाकार सूर्य ग्रहण के समय सूर्य, चंद्रमा और धरती एक सीध में होते हैं और चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढक लेता है. इस स्थिति में सूर्य एक रिंग जैसा दिखने लगता है. सूर्य ग्रहण क्यों है विशेष? साल 2026 का ये सूर्य ग्रहण इसलिए विशेष माना जा रहा है क्योंकि ये शनि देव की राशि कुंभ में और धनिष्ठा नक्षत्र में लगने वाला है. सूर्य के साथ-साथ इस राशि में राहु, बुध, शुक्र और चंद्रमा भी मौजूद रहने वाले हैं. ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि सूर्य और राहु के एक साथ किसी राशि में रहने पर ग्रहण योग निर्मित होता है. कुंभ राशि में राहु और सूर्य की युति को परंपरागत तौर पर अशुभ माना जाता है. कितने बजे लगेगा सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार, सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर लगेगा और शाम 7 बजकर 57 मिनट पर ये खत्म होगा. ये सूर्य ग्रहण कुल 04 घंटे 32 मिनट तक रहेगा.

सूर्य ग्रहण और अर्घ्य का रहस्य: शास्त्र क्या कहते हैं, क्या करना है सही?

भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में सूर्य और चंद्र ग्रहण का गहरा अध्यात्मिक महत्व माना जाता है. ग्रहण के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है. ग्रहण के दौरान सूतक काल, खान-पान के नियम और शुद्धिकरण का विशेष ध्यान रखा जाता है. आमतौर पर रोजाना लोग सूर्य देव की कृपा पाने के लिए उनको अर्घ्य यानी जल दिया करते हैं. मान्यताओं के अनुसार, रोजाना सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन की नकारात्मकता दूर हो जाती है, लेकिन सूर्य ग्रहण के समय लोगों के मन में ये सवाल हमेशा उठता है कि इस दौरान सूर्य देव को अर्घ्य दिया जा सकता है या नहीं. ऐसे में आइए जानते हैं कि सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य को अर्घ्य देना सही है गलत. इसको लेकर शास्त्र क्या कहते हैं? सूर्य ग्रहण में सूर्य को जल देना वर्जित वैदिक काल से ही भगवान सूर्य को सुबह के समय जल चढ़ाना दिनचर्या का एक भाग रहा है. ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि तांबे के लोटे में सूर्य को अर्घ्य देने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है. सेहत अच्छी रहती है और कुंडली में सूर्य मजबूत होता है, लेकिन ग्रहण काल में हालात पूरी तरह बदल जाते हैं. धार्मिक सिद्धांतों और ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण के समय सूर्य को अर्घ्य देना वर्जित है. मान्यता है कि ग्रहण के समय राहु-केतु का प्रभाव बढ़ता जाता है, जिससे सूर्य की सकारात्मक उर्जा बाधित होती है. ऐसे समय में जल चढ़ाने से शुभ फलों के स्थान पर प्रतिकूल प्रभाव जीवन पर पड़ सकते हैं. अर्घ्य सूर्य को देखकर दिया जाता है, लेकिन धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टियों से ग्रहण के समय सूर्य को देखना आंखों के लिए हानिकारक और अशुभ माना गया है. ग्रहण के समय से पहले सूतक काल में पूजा-पाठ करना मना होता है. साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण कब? सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन लगता है. साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फाल्गुन माह की अमावस्या के दिन 17 फरवरी को लगेगा. ये वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ भी कहते हैं. 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण दोपहर 03 बजकर 26 मिनट पर लगेगा. इसका समापन 07 बजकर 57 मिनट पर होगा. ये ग्रहण कुंभ राशि में लगेगा. ये ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा. ऐसे में इसका सूतक भी नहीं माना जाएगा.

साल 2025 में कब- कब पड़ेगा सूर्य ग्रहण, जानिए भारत में दिखेगा या नहीं

नई दिल्ली ग्रहण लगना एक विशेष खगोलीय घटना मानी जाती है। जिस समय में चंद्रमा सूर्य को अपनी रोशनी से पूरी तरह से ढक लेता है तो उस समय में सूर्य ग्रहण लगता है। साल 2025 में कुल चार ग्रहण लगेंगे। जिसमें से दो चंद्र ग्रहण और दो सूर्य ग्रहण होंगे। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण के समय में बहुत सारे काम करने की मनाही होती है। 2 अक्तूबर 2024 को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण था। अब साल 2025 आने वाला है। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि साल 2025 में सूर्य ग्रहण कब लगेगा और कितने सूर्य ग्रहण लगेंगे। आइए जानें कब लगेगा सूर्य ग्रहण। साल 2025 में सूर्य ग्रहण कब-कब लगेगा साल 2025 में कब है पहला सूर्य ग्रहण साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण मार्च के महीने में लगेगा। ये ग्रहण 29 मार्च 2025 को लगेगा। ये ग्रहण एक आंशिक सूर्य ग्रहण लगेगा। भारत के समय के अनुसार ये ग्रहण 2:20 मिनट पर शुरू होगा और 6 बजकर 13 मिनट पर लगेगा। साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा या नहीं साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण मार्च में लगने जा रहा है। ये ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण कहां- कहा दिखाई देगा मार्च 2025 में पड़ने वाला सूर्य ग्रहण साल का पहला सूर्य ग्रहण होगा। ये ग्रहण फ्रीका, नॉर्थ अमेरिका, एशिया अटलांटिक और आर्कटिक महासागर में दिखाई देगा। साल 2025 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगेगा साल 2025 का दूसरा सूर्य ग्रहण 21 सितंबर 2025 को लगेगा। ये ग्रहण भी आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। साल 2025 का दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा या नहीं साल 2025 के सितंबर महीने का सूर्य ग्रहण साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण होगा। इस ग्रहण का भी भारत पर कोई अस नहीं होगा। ये भारत में नहीं नजर आएगा। साल 2025 का दूसरा सूर्य ग्रहण कहां- कहां दिखेगा साल 2025 का दूसरा सूर्य ग्रहण अटलांटिक महासागर, अंटार्कटिका, प्रशांत महासागर और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा। आंशिक सूर्य ग्रहण क्या होता है आंशिक सूर्य ग्रहण उस समय लगता है। जब चंद्रमा सूर्य के कुछ ही भाग को अपनी छाया से ढकता है। इस समय में सूर्य का आधा भाग ग्रहण से प्रभावित होता है, इसलिए इसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहा जाता है। जिस समय में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से अपनी छाया में ढक लेता है। उस समय में पूर्ण चंद्र ग्रहण लगता है। 29 मार्च को पहला सूर्य ग्रहण (पूर्ण सूर्य ग्रहण) पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च 2025 को चैत्र मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन लगेगा. यह पूर्ण ग्रहण दोपहर 14:21 बजे से शाम 18:14 बजे तक रहेगा. यह विशेष रूप से बरमूडा, बारबाडोस, डेनमार्क, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, उत्तरी ब्राज़ील, फिनलैंड, जर्मनी, फ्रांस, हंगरी, आयरलैंड, मोरक्को, ग्रीनलैंड, कनाडा का पूर्वी भाग, लिथुआनिया, हॉलैंड, पुर्तगाल, उत्तरी रूस, स्पेन, सूरीनाम, स्वीडन, पोलैंड, पुर्तगाल, नॉर्वे, यूक्रेन, स्विट्जरलैंड, इंग्लैंड और अमेरिका के पूर्वी क्षेत्र, आदि में देखा जा सकेगा. यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका कोई धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाएगा. साथ ही इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा. इस दौरान मीन राशि और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में ग्रहों का विशेष संयोग बनेगा. इस दिन मीन राशि में सूर्य और राहु के अतिरिक्त शुक्र, बुध और चंद्रमा उपस्थित होंगे। इससे द्वादश भाव में शनि विराजमान होंगे. इससे तीसरे भाव में वृषभ राशि में बृहस्पति, चौथे भाव में मिथुन राशि में मंगल और सप्तम भाव में कन्या राशि में केतु स्थित होंगे. पांच ग्रहों का प्रभाव एक साथ होने के कारण इस ग्रहण का राशियों पर बहुत गहरा प्रभाव देखने को मिल सकता है. 21 सितंबर को दूसरा सूर्य ग्रहण (पूर्ण सूर्य ग्रहण) दूसरा सूर्य ग्रहण 21 सितंबर की रात्रि में लगेगा, जो आश्विन मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन रात 22:59 बजे से शुरू होकर 22 सितंबर की सुबह 03:23 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस पूर्ण ग्रहण को न्यूजीलैंड, फिजी, अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी भागों में देखा जा सकेगा. यह ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका धार्मिक प्रभाव भी नहीं होगा और न ही इसका सूतक काल मान्य होगा. साल का दूसरा ग्रहण कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में आकार लेगा. इस दौरान सूर्य, चंद्रमा और बुध के साथ कन्या राशि में स्थित होंगे और उन पर मीन राशि में बैठे शनि देव की पूर्ण दृष्टि रहेगी. इससे दूसरे भाव में तुला राशि में मंगल होंगे, छठे भाव में कुंभ राशि में राहु, दशम भाव में बृहस्पति और द्वादश भाव में शुक्र और केतु की युति होगी. कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे लोगों के लिए यह सूर्य ग्रहण विशेष रूप से प्रभावशाली हो सकता है. 14 मार्च को पहला चंद्र ग्रहण (पूर्ण चंद्र ग्रहण) साल 2025 का पहला चंद्र ग्रहण 14 मार्च को फाल्गुन मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन लगेगा. यह ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह 10:41 बजे से दोपहर 14:18 बजे तक रहेगा. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा जो मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश भाग यूरोप अफ्रीका के अधिकांश भाग, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, प्रशांत अटलांटिक आर्कटिक महासागर, पूर्वी एशिया और अंटार्कटिका, आदि क्षेत्रों में दिखाई देगा. यह भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इस ग्रहण का धार्मिक दृष्टि से भारत में कोई महत्व नहीं होगा. खगोलीय दृष्टि से यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा, इसलिए सिंह राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे लोगों के लिए यह ग्रहण विशेष रूप से प्रभावशाली रहने वाला है. चंद्र ग्रहण के दिन चंद्रमा से सप्तम भाव में सूर्य और शनि विराजमान रहेंगे और चंद्रमा को पूर्ण सप्तम दृष्टि से देखेंगे. ऐसे में इसका प्रभाव और भी गहरा देखने को मिलेगा. इस दिन चंद्रमा से दूसरे भाव में केतु, सप्तम भाव में सूर्य और शनि, अष्टम भाव में राहु, बुध और शुक्र, दशम भाव में बृहस्पति और एकादश भाव में मंगल विराजमान होंगे. 7 सितंबर को दूसरा चंद्र ग्रहण (पूर्ण चंद्र ग्रहण ) दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025 को भाद्रपद मास की शुक्ल पूर्णिमा के दिन लगेगा. यह रात्रि 21:57 बजे शुरू होकर 1:26 बजे तक प्रभावी रहेगा … Read more

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