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बागपत के गांव तक मुख्यमंत्री योगी ने पहुंचाई हाईटेक एस्ट्रोनॉमी लैब, 45 प्रकार के प्रयोग कर अंतरिक्ष के बारे में समझ रहे बच्चे

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बालिकाओं की शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को नई उड़ान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर अब सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियां भी अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियां सीख रहीं हैं। बागपत जनपद के छपरौली ब्लॉक में स्थापित अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी लैब से ग्रामीण छात्राओं के सपनों को उड़ान मिलेगी। ब्लॉक संसाधन केंद्र परिसर में बनाई गई इस हाईटेक खगोलशास्त्र प्रयोगशाला के माध्यम से छपरौली ब्लॉक की लगभग 100 बालिकाओं को आधुनिक विज्ञान को समझने का अवसर मिल रहा है। प्रयोगशाला में 45 प्रकार के प्रयोगों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे छात्राएं अंतरिक्ष से जुड़े जटिल सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से समझ रहीं हैं। योगी सरकार के इस प्रयास से अब ग्रामीण पृष्ठभूमि की छात्राएं भी टेलिस्कोप संचालित करने से लेकर नाइट-स्काई ऑब्जर्वेशन तक की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं। आकाशीय पिंडों की स्थिति, गति और संरचना को डिजिटल माध्यम से समझ रहीं हैं बेटियां सीएम योगी की इस दूरदर्शी पहल से विज्ञान शिक्षा को नई गति मिल रही है। ब्लॉक संसाधन केंद्र छपरौली में स्थापित एस्ट्रोनॉमी लैब को हाईटेक टेक्नोलॉजी से विकसित किया गया है। बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि प्रयोगशाला में आधुनिक उपकरणों के साथ-साथ छात्राओं को एस्ट्रोनॉमी सॉफ्टवेयर के उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे वे आकाशीय पिंडों की स्थिति, गति और संरचना को डिजिटल माध्यम से समझ रहीं हैं। इस तरह का व्यावहारिक प्रशिक्षण छात्राओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में बेहद सहायक होगा। टेलिस्कोप से चंद्रमा देख बढ़ रहा आत्मविश्वास इस पहल की सबसे खास बात यह है कि अब छात्राएं स्वयं टेलिस्कोप के माध्यम से चंद्रमा और अन्य आकाशीय पिंडों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर रही हैं। जब एक बालिका अपने हाथों से टेलिस्कोप चलाकर चंद्रमा देखती है, तो उसके भीतर आत्मविश्वास और जिज्ञासा दोनों का विकास होता है। अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े करियर के बारे में गंभीरता से समझ रहीं बालिकाएं कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय छपरौली की सभी छात्राएं इस लैब में नियमित रूप से प्रशिक्षण ले रही हैं। नाइट-स्काई प्रेक्षण जैसी गतिविधियां उनके लिए रोमांचक अनुभव साबित हो रही हैं। शिक्षकों का कहना है कि  इससे बालिकाओं की विज्ञान के प्रति रुचि तेजी से बढ़ी है और वे अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े करियर के बारे में गंभीरता से सोचने लगी हैं। एआई-संचालित स्मार्ट क्लास से मिल रही आधुनिक शिक्षा जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि बागपत में शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिले के 25 सरकारी विद्यालयों में एआई-संचालित स्मार्ट क्लास शुरू की गई हैं। इनके माध्यम से बच्चों को इंटरैक्टिव और तकनीक आधारित शिक्षा मिल रही है, जिससे सीखने की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है।

9 महीने के इंतजार के बाद सुनीता विलियम्स की वापसी तय, जानें पूरा शेड्यूल

वाशिंगटन भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विलमोर के लिए राहत की खबर है। 9 महीने से ISS (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) में फंसे दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने के लिए भेजा गया Crew Dragon स्पेसक्राफ्ट सफलतापूर्वक ISS से जुड़ चुका है। 16 मार्च को डॉकिंग प्रक्रिया पूरी हुई, और अब वे 19 मार्च को धरती पर वापसी करेंगे। 14 मार्च को लॉन्च हुए Crew-10 मिशन ने ISS तक पहुंचकर चार नए अंतरिक्ष यात्रियों को वहां पहुंचाया और वापसी के लिए रास्ता साफ कर दिया। सुनीता और विलमोर को सिर्फ एक हफ्ते बाद लौटना था, लेकिन बोइंग स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट की तकनीकी खराबी के चलते वे 9 महीने तक फंसे रह गए। अब NASA और SpaceX के इस मिशन के जरिए उनकी वापसी संभव हो रही है, और पूरी दुनिया इस ऐतिहासिक पल का इंतजार कर रही है। कैसे हुई Crew-10 की लॉन्चिंग? 14 मार्च को स्पेसएक्स ने Crew-10 मिशन लॉन्च किया था। इस मिशन के तहत फॉल्कन-9 रॉकेट से Crew Dragon कैप्सूल को अंतरिक्ष में भेजा गया। यह मिशन NASA के कमर्शियल क्रू प्रोग्राम के तहत भेजी गई 11वीं क्रू फ्लाइट थी। इस सफल लॉन्चिंग के बाद अब सुनीता विलियम्स की वतन वापसी की उम्मीदें मजबूत हो गई हैं। क्या होती है डॉकिंग प्रक्रिया? डॉकिंग वो प्रक्रिया होती है, जिसमें स्पेसक्राफ्ट अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन से जुड़ता है। इसके पूरा होते ही अंतरिक्ष यात्री अपने स्पेससूट उतारते हैं और कार्गो को उतारने की तैयारी शुरू होती है। इसके बाद हैच खोलकर ISS में प्रवेश किया जाता है। NASA इस मौके पर Crew-10 के स्वागत समारोह का सीधा प्रसारण भी करेगा। सुनीता विलियम्स की वापसी पर डोनाल्ड ट्रंप की नजर सुनीता विलियम्स की वापसी पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने टेस्ला के मालिक एलन मस्क से अनुरोध किया था कि इस मिशन को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को सुरक्षित वापस लाया जा सके। स्पेसक्राफ्ट में कौन-कौन आया ISS? इस मिशन के तहत ISS में चार नए एस्ट्रोनॉट पहुंचे हैं— NASA की कमांडर: ऐनी मैक्कलेन पायलट: अयर्स जापान की JAXA एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री: ताकुया ओनिशी रूस के कोस्मोनॉट: किरिल पेसकोव ये स्पेसक्राफ्ट वापसी में अटलांटिक महासागर में लैंड कर सकता है। 9 महीने से ISS में फंसी थीं सुनीता विलियम्स सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर पिछले साल 5 जून को ISS गए थे। उन्हें एक हफ्ते बाद लौटना था, लेकिन बोइंग स्टारलाइनर में तकनीकी खराबी आ जाने की वजह से वे 9 महीने से अंतरिक्ष में फंसे हुए थे। अब Crew-10 मिशन उनकी वापसी सुनिश्चित करेगा। कैसा है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जहां 9 महीने से फंसी हैं सुनीता विलियम्स इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन वो अंतरिक्ष में मौजूद वो प्लेटफॉर्म है जहां अंतरिक्ष जाने वाली सवारियां उतरती हैं, यहां पर रहती हैं और विज्ञान के बड़-बड़े एक्सपेरिमेंट करती हैं. लेकिन धरती से यहां की जिंदगी एकदम ही अलग है. आप ये जानकर अचंभित हो सकते हैं कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में 24 घंटे में 16 बार सूर्योदय और 16 बार सूर्यास्त होता है. ऐसा क्यों होता है हम आपको आगे बताएंगे? भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स इसी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में 9 महीने से फंसी है और धरती वापसी का इंतजार कर रही हैं. अगर आप समझते हैं कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन अथवा दिल्ली एयरपोर्ट जैसा कोई स्थायी बना हुआ ढांचा है तो आप गलत हैं. दरअसल इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन कोई स्थिर संरचना नहीं है, बल्कि सतत घुमते रहने वाला एक बड़ा अंतरिक्ष यान है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन लगातार पृथ्वी का चक्कर काटते रहता है. धरती से कितना दूर है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी से 403 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी के चक्कर लगाता रहता है. इस दौरान इसमें अंतरिक्ष यात्री मौजूद रहते हैं. यानी कि सुनीता विलियम्स पिछले 9 महीनों से लगातार पृथ्वी के चक्कर लगा रही है. इसका एक मतलब यह भी है कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन धरती से 403 किलोमीटर की दूरी पर है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की स्पीड लेकिन सबसे दंग करने वाला है इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की स्पीड. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन 17500 मील प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा करता है. इसे किलोमीटर में कहें तो इसका मतलब ये होगा कि 28163 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी की परिक्रमा करता है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की साइज अमेरिकी स्पेस एंजेसी नासा के अनुसार इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का आकार पांच बेडरूम वाले घर या दो बोइंग 747 जेटलाइनर जितना है. यहां 6 लोगों की टीम और कुछ मेहमान रह सकते हैं. इस वक्त स्पेस स्टेशन में 8 लोग हैं. पृथ्वी पर अंतरिक्ष स्टेशन का वजन लगभग दस लाख पाउंड यानी कि 453592.37 किलोग्राम होगा. अगर इसके सभी छोर को मिलाकर इसका आकार मापा जाए तो इसकी लंबाई फुटबॉल मैदान के बराबर होगी. इस स्पेस स्टेशन में इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जापान और यूरोप के प्रयोगशाला मॉड्यूल शामिल हैं. 90 घंटे का दिन और 90 घंटे की रात का राज इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में 24 घंटे में 16 सूर्योदय और 16 सूर्यास्त देखने का अनुभव होता है. इसे आप इस तरह से भी कह सकते हैं कि यहां 90 मिनट का दिन और 90 मिनट की रात होती है और ऐसा 24 घंटे में 16-16 बार होता है. ऐसा पृथ्वी के आकार इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की बहुत तेज गति के कारण संभव होता है. लगभग 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी की परिक्रमा करता है. इसमें उसे 90 मिनट लगते हैं. यानी कि एक चक्कर लगाने में 90 मिनट. स्पेस स्टेशन में क्रू 10 के सदस्यों ने रविवार को सुनीता विलियम्स समेत दूसरे अंतरिक्ष यात्रियों से मुलाकात की. इसका मतलब है कि 24 घंटे में ISS पृथ्वी के चारों ओर लगभग 16 चक्कर (24 घंटे ÷ 90 मिनट = 16) लगाता है. चूंकि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन हर 90 मिनट में एक चक्कर पूरा करता है, इसका मतलब है कि हर चक्कर के दौरान ये स्पेस स्टेशन लगभग 45 मिनट दिन (सूर्य की रोशनी में) और लगभग 45 मिनट रात (पृथ्वी की छाया में) रहता है. इसलिए हर … Read more

सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष स्टेशन से पृथ्वी वापसी का कार्यक्रम एक बार फिर स्थगित, अब मार्च के बाद लौटेंगी

नई दिल्ली भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से पृथ्वी वापसी का कार्यक्रम एक बार फिर स्थगित हो गया है। अब अगले वर्ष मार्च के बाद पृथ्वी पर लौटेंगी। नासा ने कहा है कि ISS में मौजूदा चालक दल स्वस्थ और सुरक्षित है। नासा ने घोषणा की कि स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान, जिसे सुनीता विलियम्स को वापस लाने का कार्य सौंपा गया था, अब मार्च के अंत तक पृथ्वी से लॉन्च नहीं होगा। आपको बता दें कि सुनीता ने जून में ISS में कदम रखा था। पहले यह तय हुआ कि उनकी वापसी फरवरी 2025 में होगी, लेकिन यह फिर एकबार टल गया है। बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान में सुरक्षा संबंधी समस्याएं आने के कारण से वह अंतरिक्ष में फंसी हुई हैं। अंतरिक्ष में रहने का शरीर पर कितना असर अंतरिक्ष में लंबी अवधि तक रहना मानव शरीर पर कई प्रभाव डालता है। ऐसा इसलिए क्योंकि मानव शरीर पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण के तहत काम करने के लिए विकसित हुआ है। अंतरिक्ष में रहते हुए हड्डियों की घनत्व में कमी आती है, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इसके अलावा, शरीर के मांसपेशियां भी घट जाती हैं। वहां वजन का बोझ नहीं होता। दिल, जिगर और आंखों जैसे अन्य अंगों में भी परिवर्तन होते हैं। हालांकि, अधिकांश बदलाव पृथ्वी पर लौटने के बाद और गुरुत्वाकर्षण में पुनः प्रशिक्षण लेने के बाद होते हैं। सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव सुनीता विलियम्स एक अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं और यह उनका तीसरा अंतरिक्ष मिशन है। अब तक उन्होंने अपने मिशनों के दौरान कुल 517 दिन से अधिक समय अंतरिक्ष में बिताया है। एक समय था जब उन्होंने सबसे अधिक समय तक अंतरिक्ष वॉक करने का रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने 51 घंटे से अधिक का समय अंतरिक्ष में बिताया था। जून से फंसी हैं सुनीता विलियम्स सुनीता विलियम्स जून में बोइंग स्टारलाइनर के माध्यम से ISS में पहुंचीं। यह मिशन पहले 7 से 10 दिन का निर्धारित किया गया था। लेकिन बोइंग स्टारलाइनर में सुरक्षा संबंधित तकनीकी खराबियों के कारण, उनका मिशन फरवरी 2025 तक बढ़ा दिया गया था। अब नासा ने सुनीता की वापसी के लिए अगले साल मार्च या अप्रैल की तारीख तय की है। नासा और स्पेसएक्स ने आगामी क्रू हैंडओवर के प्रबंधन के लिए कई विकल्पों पर विचार किया, जिसमें दूसरे ड्रैगन अंतरिक्ष यान का उपयोग और मैनिफेस्ट समायोजन शामिल थे। इसके बाद टीम ने निर्णय लिया कि मार्च के अंत में क्रू-10 लॉन्च करना सबसे अच्छा विकल्प है, ताकि नासा की आवश्यकताएं और 2025 के लिए अंतरिक्ष स्टेशन के उद्देश्यों को पूरा किया जा सके। अफवाहों का खंडन कुछ अफवाहें थीं कि सुनीता विलियम्स का वजन घट चुका है और वह अस्वस्थ हैं, लेकिन नासा ने इन अफवाहों का खंडन किया। सुनीता ने खुद बताया कि वह अंतरिक्ष स्टेशन पर विशेष उपकरणों का उपयोग करके वजन प्रशिक्षण कर रही हैं। इसके अलावा एक पूर्व मिशन के दौरान उन्होंने ISS पर अंतरिक्ष मैराथन भी दौड़ी थी। अंतरिक्ष स्टेशन पर क्रिसमस का जश्न अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर इस सप्ताह क्रिसमस का उत्सव मनाया गया, जिसमें नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बटच विलमोर ने एक अनोखा अंदाज अपनाया। क्रिसमस से पहले इन दोनों ने संता का रूप धारण किया और अंतरिक्ष में रहते हुए छुट्टियों के जश्न का आनंद लिया। क्रिसमस के मौके पर ISS पर उपहार भी पहुंचाए गए। सोमवार को स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान के माध्यम से अंतरिक्ष स्टेशन पर उपहार और अन्य आपूर्ति भेजी गईं। इनमें क्रिसमस के तोहफे और त्योहारों से जुड़ी अन्य सामग्री भी शामिल थी, जिससे ISS पर रह रहे अंतरिक्ष यात्री इस विशेष समय का जश्न मना सके।

सुनीता ने खुद बताया अपना हाल, कहा-मेरा वजन कम हो रहा है, स्पेस स्टेशन में बिगड़ी तबीयत

नई दिल्ली भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स जून से ही अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में फंसी हुई हैं। बीते दिनों उनकी कुछ तस्वीरें सामने आईं जिनमें वह काफी पतली नजर आ रही थीं। इसे देखकर उनकी सेहत को लेकर लोगों को चिंता होने लगी। हालांकि, अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। न्यू इंग्लैंड स्पोर्ट्स नेटवर्क (NESN) को दिए इंटरव्यू में उन्होंने खुद ही सारी बातें साफ कर दी हैं। सुनीता ने कहा, ‘मुझे लगता है कि मेरा शरीर थोड़ा बदल गया है मगर वजन उतना ही है। ये बातें अफवाह हैं कि मेरा वजन कम हो रहा है। मैं बताना चाहती हूं कि मेरा वजन उतना ही है जितना यहां आने पर था।’ सुनीता विलियम्स ने कहा कि माइक्रोग्रैविटी के चलते उनके शरीर में कुछ बदलाव हुए हैं। ऐसी स्थिति में शारीरिक तरल पदार्थ ऊपर की ओर बढ़ने लगते हैं। इससे अक्सर अंतरिक्ष यात्रियों के चेहरे फूल जाते हैं और उनके शरीर के निचले हिस्से दुबले दिखाई देने लगते हैं। लंबे समय तक चलने वाले अंतरिक्ष अभियानों का हिस्सा बनने की कुछ अनूठी चुनौतियां हैं। उन्होंने इसे समझाते हुए कहा, ‘यह ठीक उसी तरह है जैसे आपका शरीर पर्यावरण के साथ तालमेल बिठाता है।’ भारहीन वातावरण में रहने के शारीरिक प्रभाव पड़ते हैं। इसका सामना करने के लिए खास तरह की फिटनेस डाइट लेनी होती है। सुनीता विलियम्स ने बताईं चुनौतियां अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने इंटरव्यू में कहा, ‘मेरी जांघें थोड़ी बड़ी हैं। मेरा शरीर थोड़ा अलग मालूम होता है। हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने के लिए हम बहुत सारे उपाय करते हैं, कूल्हों और पैरों पर विशेष ध्यान देना होता है।’ अगर अंतरिक्ष स्टेश में सुनीता के वर्कआउट की बात करें तो इसमें साइकिल चलाना, ट्रेडमिल दौड़ना और खास उपकरणों से प्रशिक्षण शामिल हैं। मालूम हो कि माइक्रोग्रैविटी में अंतरिक्ष यात्री हर महीने 1-2% हड्डी का द्रव्यमान खो देते हैं। विशेष रूप से रीढ़, कूल्हों और पैरों जैसी वजन सहने वाली हड्डियों पर असर पड़ता है। सवालों के जवाब देते हुए विलियम्स ने यह स्वीकार किया कि अस्थि घनत्व को पूरी तरह से रोकना चुनौती जरूर है।

अंतरिक्ष में ‘फंसीं’ सुनीता विलियम्स के लिए बढ़ा खतरा, ISS में आ गईं दरारें

वाशिंगटन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) को लेकर NASA भी टेंशन में आ गया है। आईएसएस में पिछले पांच साल से हल्का लीकेज जारी था। हालांकि अब पता चला है कि कम से कम 50 जगहों पर लीकेज की समस्या है। इसके अलावा आईएसएस में दरारें भी आ रही हैं। नाआस की एक जांच रिपोर्ट लीक हो गई जिसमें पता चला कि आईएसएस पर खतरा मंडरा रहा है। साथ ही सुनीता विलियम्स समेत यहां के अंतरिक्षयात्रियों की भी जान पर बनी हुई है। रूस ने पृथ्वी की कक्षा में घूमते लैब में माइक्रो वाइब्रेशन का भी दावा किया है। नासा का कहना है कि स्पेस स्टेशन से बड़ी मात्रा में हवा निकल रही है जो कि खतरे की घंटी है। हालांकि यहां लोगों की जान बचाने और इसका कोई समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। जानकारी के मुताबिक आईएसएस में पिछले पांच साल से लीकेज की समस्या है सबसे पहले लीकेज स्पेस स्टेशन में मौजूद यवेज्दा मॉड्यूल से शुरू हुई थी जो कि डॉकिंग पोर्ट तक जाने के लिए एक सुरंग है। इस हिस्सा का कंट्रोल रूस के हाथ में है। हालांकि इस समस्या को लेकर असली वजह क्या है, इसपर नासा और रूसी एजेंसी Roscomos के बीच अभी सहमति नहीं बन पाई है।सीएनएन के मुताबिक नासा के अंतरिक्षयात्री बॉब कैबाना ने कहा कि स्पेस एजेंसी ने इस लीकेज को लेकर चिंता जाहिर की है। कैबाना ने कहा कि लीकेज को रोकने के लिए ऑपरेशन चलाना कुछ समय के लिए राहत दिला सकता है लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। अमेरिका का कहना है कि यह सुरक्षित नहीं है। सबसे पहले 2019 में लीकेज का पता चला था। इसके बाद अप्रैल 2024 से रोज 1.7 किलो की दर से हवा लीक होने लगी। आम तौर पर आईएसएस में सात से 10 अंतरिक्षयात्री रहते हैं । रूस के इंजीनियर्स ने माइक्रो वाइब्रेशन की बात कही है। इस खतरे को टालने के लिए नासा ने कुछ कदम उठाए हैं। इसके अलावा यहां मौजूद अंतरिक्षयात्रियों को भी अतिरिक्त सावधानी रखने की सलाह दी गई है।

सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर अमेरिकी चुनाव में अंतरिक्ष से मतदान करेँगे

न्यूयॉर्क  महीनों से अंतरिक्ष में फंसी सुनीता विलियम्स के अमेरिकी चुनाव तक धरती पर लौटने के आसार कम हैं। इसके बावजूद भी वह देश का नेता चुनने के लिए तैयार हैं। खबर है कि विलियम्स अंतरिक्ष से ही अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालेंगी। खास बात है कि अमेरिका में स्पेस से अंतरिक्ष यात्रियों के लिए वोटिंग की प्रथा साल 1997 से ही चली आ रही है। ISS यानी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की कमांडर विलियम्स स्पेस से ही मतदान के लिए तैयार हैं। वह धरती की सतह से अनुमानित 400 किमी की दूरी से वोटिंग में शामिल होंगी। वह स्पेस के मतदाताओं के एक सिलेक्ट ग्रुप में शामिल होंगी। इतिहास में सबसे पहले वोट डालने वाले अमेरिकी डेविड वुल्फ हैं। वहीं, हाल ही में यह उपलब्धि हासिल करने वाली केट रुबिन्स थीं। उन्होंने 2020 के चुनाव में वोट डाला था। स्पेस से कैसे वोट डालेंगी सुनीता विलियम्स जिस तरह से विदेश में बैठे अमेरिकी नागरिक मतदान में शामिल होते हैं, उससे मिलती-जुलती प्रक्रिया से विलियम्स भी गुजरेंगी। हालांकि, इसमें कई और बातें भी शामिल हैं। सबसे पहले उन्हें एब्सेंटी बैलेट हासिल करने के लिए फेडरल पोस्ट कार्ड एप्लिकेशन पूरी करनी होगी। इसे हासिल करने के बाद वह ISS के कंप्युटर सिस्टम पर इलेक्ट्रॉनिक बैलेट भरेंगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह वोटिंग प्रक्रिया नासा के SCaN यानी सोफिस्टिकेटेड स्पेस कम्युनिकेशन एंड नेविगेशन पर निर्भर है। विलियम्स का बैलेट एजेंसी के नियर स्पेस नेटवर्क के जरिए आगे बढ़ेगा। इसके बाद नासा के न्यू मैक्सिको स्थित व्हाइट सैंड्स टेस्ट फैसिलिटी ग्राउंड एंटेना तक पहुंचेगा। बाद में इसे ह्यूस्टन स्थित जॉनसन स्पेस सेंटर के मिशन कंट्रोल सेंटर भेजा जाएगा। ह्यूस्टन से एनक्रिप्टेड बैलेट काउंटी क्लर्क के पास भेजा जाएगा। खास बात है कि सिर्फ विलियम्स और काउंटी क्लर्क के पास ही मतपत्र तक पहुंच होगी।

अंतरिक्ष में फंसी नहीं हैं सुनीता विलियम्स, वापसी के लिए दो और स्पेसक्राफ्ट भी तैयार

वाशिंगटन बोइंग के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान के थ्रस्टर में खराबी के बाद इसका धरती पर वापसी का मिशन रोक दिया गया है। इसके बाद यान के साथ गए नासा के एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन (ISS) पर फंस गए हैं। दोनों अंतरिक्ष यात्री बीते महीने 5 जून को अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए थे। अंतरिक्ष में उनका मिशन केवल एक सप्ताह के लिए ही था, लेकिन एक महीने से भी ज्यादा समय बीत चुका है और अभी तक उनकी वापसी के बारे में कोई अपडेट नहीं है। नासा के इंजीनियर स्टारलाइनर की समस्या को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं, इस दौरान दोनों एस्ट्रोनॉट स्पेस स्टेशन पर दूसरे यात्रियों के साथ रहना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की धरती पर वापसी कब होगी और क्या नासा को इसके लिए रेस्क्यू मिशन शुरू करने की जरूरत है। अंतरिक्ष में फंसी नहीं हैं सुनीता विलियम्स इन सवालों का जवाब अंतरिक्ष प्रणालियों और मिशनों के विशेषज्ञ पैट्रिक विनिंग ने दिया है। पैट्रिक जॉन्स हॉपकिंस एप्लाइड फिजिक्स लैब में नेशनल सिक्योरिटी स्पेस के लिए मिशन एरिया एग्जीक्यूटिव के रूप में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रेस्क्यू अभियान की बात करना अनावश्यक है। इसकी वजह बताते हुए वे कहते हैं कि पहले तो यह समझना होगा कि स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर आईएसएस पर पहुंचे अंतरिक्ष यात्री फंसे नहीं है। न ही आईएसएस पर पहले से मौजूद सात दूसरे अंतरिक्ष यात्री ही फंसे हुए हैं। वापसी के लिए दो और स्पेसक्राफ्ट भी पैट्रिक ने बताया कि स्टारलाइनर अपने यात्रियों के साथ पृथ्वी पर लौटने में सक्षम है। इसके अलावा आईएसएस पर डॉक किए दो अन्य अंतरिक्ष यान भी अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी पर वापस ले आने में सक्षम हैं। इनमें एक स्पेसएक्स का ड्रैगन एंडेवर और सोयुज MS-25 क्रू शिप शामिल है। स्टारलाइनर के थ्रस्टर में खराबी और एक अप्रत्याशित हीलियम लीक की रिपोर्ट के बाद नासा की टीम अंतरिक्ष यान का डेटा इकठ्ठा कर रही है, जिसके चलते स्पेसक्राफ्ट की वापसी में देरी की गई है। यहां हमें याद रखने की जरूरत है कि अंतरिक्ष में जाना कठिन है। वहीं, मानव अंतरिक्ष उड़ान तो और भी कठिन है। स्टारलाइनर के डिजाइन में कई बैकअप सिस्टम हैं, जिसने आईएसएस पर इसके पहुंचने को सफल बनाया, लेकिन बैकअप सिस्टम के साथ भी अप्रत्याशित स्थितियों को समझना महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि नासा अधिक डेटा एकत्र कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि रेस्क्यू मिशन आम तौर पर सेना चलाती है, जैसे कि अगर कोई स्पेसक्रॉफ्ट लॉन्च के समय समुद्र में गिर जाए। लेकिन यहां मामला अलग है, अमेरिकी सेना के पास अंतरिक्ष में मिशन चलाने की क्षमता नहीं है। फिलहाल तो इस मामले में रेस्क्यू की जरूरत भी नहीं है। प्रोटोकॉल बदलने की जरूरत? स्टारलाइनर में आई समस्या के बाद भविष्य के आपातकाली प्रोटोकॉल को बदलने के सवाल पर पैट्रिक ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि नासा और बोइंग जमीनी परीक्षण प्रक्रियाओं और दृष्टिकोणों पर कड़ी नज़र रखेंगे। सभी अंतरिक्ष यान डेवलपर्स ‘उड़ान भरते समय परीक्षण’ करने का बहुत प्रयास करते हैं ताकि लॉन्च से पहले अंतरिक्ष प्रणालियों पर असामान्य स्थितियों का पता लगाया जा सके। यह स्पष्ट है कि बोइंग का परीक्षण कार्यक्रम वर्तमान स्थितियों को पकड़ने में अपर्याप्त था। यही कारण है कि अधिक ऑन-ऑर्बिट परीक्षण डेटा एकत्र किया जाना चाहिए।

सुनीता विलियम्स को अंतर‍िक्ष में लेकर गए बोइंग के स्टारलाइनर कैप्सूल में सकता है विस्फोट?

वॉशिंगटन  भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर स्पेस में फंसे हुए हैं। सुनीता और विल्मोर को अपने मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर एक सप्ताह बिताने के बाद 13 जून को धरती पर लौटना था लेकिन बोइंग स्टारलाइनर में खराबी के चलते उनकी वापसी नहीं हो पा रही है। अब ये भी सवाल उठने लगा है कि क्या अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को ले जा रहे बोइंग के स्टारलाइनर कैप्सूल में विस्फोट हो सकता है। यह सवाल तब सामने आया जब नासा ने विस्फोट न कराने के लिए एयरोस्पेस कंपनी की सराहना की। नासा ने बोइंग की प्रशंसा की है क्योंकि कैप्सूल पर आईएसएस की यात्रा करने वाले अंतरिक्ष यात्री तब तक वहां रह सकेंगे, जब तक बोइंग को समस्याओं को ठीक करने में समय लगेगा। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह चेतावनी दी गई थी कि बोइंग कैप्सूल में समस्याएं हो सकती हैं और लिफ्टऑफ से पहले यह पता चला कि हीलियम लीक हो गया था। इन सभी नकारात्मक परिस्थितियों के बावजूद नासा जून की शुरुआत में पहले क्रू स्टारलाइनर लॉन्च के साथ आगे बढ़ा। आईएसएस की अपनी यात्रा में लीक बढ़ी और वहां पहुंचने के बाद डॉकिंग में परेशानी का सामना करना पड़ा। इससे पहले 2019 में अपनी पहली परीक्षण उड़ान के दौरान यह अपनी अपेक्षित कक्षा तक पहुंचने में विफल रहा था। इसके बारे में बाद में पता चला कि ऑनबोर्ड घड़ी गलत तरीके से सेट की गई थी और इसके कारण स्टारलाइनर के थ्रस्टर्स गलत समय पर चालू हो गए। नासा ने कहा- बैटरियां चार्ज हो रही हैं नासा के वाणिज्यिक क्रू कार्यक्रम के प्रबंधक स्टीव स्टिच ने स्पेस डॉट कॉम को बताया कि बैटरियां चार्ज हो रही हैं। हम उन बैटरियों और कक्षा में उनके प्रदर्शन को देख रहे हैं। उन्हें स्टेशन द्वारा रिचार्ज किया जा रहा है। इंजीनियरों ने बोइंग अंतरिक्ष यान में कई समस्याएं पाई हैं और नासा अभी भी ये बताने की स्थिति में नहीं है कि दोनों एस्ट्रोनॉट की वापसी कब होगी। हालांकि राहत की बात ये है कि अभी तक दोनों एस्ट्रोनॉट स्वस्थ हैं। बोइंग का स्टारलाइनर कैप्सूल 5 जून को अमेरिका के समयानुसार सुबह 10 बजकर 52 मिनट पर फ्लोरिडा के केप कैनवेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से चालक दल के साथ अपनी पहली उड़ाने के लिए रवाना हुआ था। ये नौ दिवसीय मिशन तब पटरी से उतर गया जब हीलियम लीक ने उनकी वापसी की तारीख को अनिश्चित बना दिया है। अंतरिक्ष रहस्यों से भरी दुनिया है. नासा की भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अपने साथी बैरी विल्मोर के साथ अंतरिक्ष में फंस गई हैं. लेकिन सवाल ये है कि आखिर सुनीता विलियम्स स्पेस में कैसे फंसी हैं और उनकी धरती पर वापसी कैसे होगी. आज हम आपको बताएंगे कि अंतरिक्ष में फंसने पर किसी भी एस्ट्रोनॉट्स की धरती पर वापसी कैसे होती है.   स्पेस अंतरिक्ष के रहस्यों को सुलझाने के लिए अधिकांश देशों के वैज्ञानिक लग हुए हैं. जिसके लिए वो अलग-अलग प्रोजेक्ट करते हैं. अभी बीते जून में भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अपने साथी बैरी विल्मोर के साथ स्पेस में गई थी. लेकिन बोइंग स्टारलाइनर में खराबी आने की वजह से दोनों अंतरिक्ष यात्री वापस लौट नहीं पाए हैं. अंतरिक्ष यान दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर पांच जून को लेकर गया था. स्पेस में खतरा अंतरिक्ष में जाने वाले अंतरिक्षयात्रियों के ऊपर कई तरह के खतरे होते हैं. स्पेस का कोई भी प्रोजेक्ट 100 फीसदी सुरक्षित नहीं होता है. अंतरिक्ष यात्रा के दौरान, उल्कापिंड, स्पेस मलबा भी एक खतरा है. हालांकि अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स स्पेस स्टेशन में दो बार लंबा समय बिता चुकी हैं. लेकिन इस बार वो स्पेस में फंस गई हैं. उनके स्पेसक्राफ्ट में खराबी के कारण धरती पर वह नहीं आ पाई हैं. इस कारण वह अभी भी स्पेस स्टेशन में मौजूद हैं. नासा के मुताबिक मिशन को 45 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है. अब सवाल है कि आखिर इस दौरान एस्ट्रोनॉट्स के शरीर पर क्या असर पड़ेगा? और सुनीता विलियम्स और उनके साथ धरती पर कैसे लौटेंगे.  शरीर पर क्या असर? स्पेस में ज्यादा दिनों तक रहने पर शरीर के तरल पदार्थ माइक्रोग्रैविटी में ऊपर की ओर बढ़ते हैं. इस कारण हमारे शरीर के फिल्टर सिस्टम यानी किडनी को समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इस दौरान शरीर में मौजूद तर ऊपर की ओर जाते हैं, जिससे चेहरे पर सूजन आ जाती है. गुर्दे उचित द्रव संतुलन बनाए रखने के लिए संघर्ष करते हैं, जिससे संभावित रूप से डिहाइड्रेशन या फ्लूइड ओवरलोड होता है. माइक्रोग्रेविटी के कारण हड्डियों में कैल्शियम का उत्सर्जन बढ़ने से गुर्दे में पथरी का खतरा बढ़ जाता है. धरती पर कब लौंटेगी सुनीता स्पेस से वापस धरती पर सुनीता विलियम्स और उनके साथी कब लौटेंगे, इसको लेकर नासा की तरफ से कोई बयान जारी नहीं किया गया है. नासा के मुताबिक इस मिशन को 45 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है. अनुमान के मुताबिक सुनीता और उनके साथी की वापसी जुलाई महीने के अंत तक हो सकती है. नासा की टीम लगातार सभी तकनीकी खामियों को दूर करने और उनको समझने का प्रयास कर रही हैं. 

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