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तहव्वुर राणा ने विशेष एनआईए कोर्ट में याचिका दायर कर फोन पर परिवार से बात करने के लिए अनुमति मांगी

नई दिल्ली पाकिस्तानी-कनाडाई नागरिक और मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा ने मंगलवार को विशेष एनआईए कोर्ट में याचिका दायर कर जेल से अपने परिवार के सदस्यों से फोन पर बात करने की अनुमति मांगी है। एनआईए की विशेष अदालत बुधवार को उसकी याचिका पर सुनवाई कर सकती है। अपनी याचिका में राणा ने दावा किया कि परिवार के सदस्यों से उसकी बातचीत जरूरी है, क्योंकि वे उसके बारे में चिंतित होंगे। पिछले महीने, राणा द्वारा दायर इसी तरह के अनुरोध को एनआईए कोर्ट ने खारिज कर दिया था। 24 अप्रैल को विशेष न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने राणा की अपने परिवार से बात करने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। एनआईए द्वारा उसकी याचिका का विरोध करने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया था। सुनवाई के दौरान, एनआईए ने तर्क दिया कि अगर राणा को अपने परिवार के सदस्यों से बात करने की अनुमति दी जाती है, तो वह बातचीत के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कर सकता है। पाकिस्तानी सेना के मेडिकल कोर के पूर्व अधिकारी राणा को हाल ही में 26/11 मुंबई आतंकी हमले में मुकदमा चलाने के लिए अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया था, जिसमें 26 नवंबर, 2008 को 166 लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे। 9 मई को विशेष अदालत ने राणा को 6 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था, जिससे एनआईए द्वारा पूछताछ में एक अस्थायी विराम लग गया था। एक अधिकारी ने बताया कि 3 मई को एनआईए ने न्यायाधीश की मौजूदगी में राणा की आवाज़ और हस्तलिपि के नमूने एकत्र किए थे, ताकि 26/11 के सह-आरोपी डेविड कोलमेन हेडली के साथ उसकी टेलीफोन पर हुई चर्चाओं की रिकॉर्डिंग से उनका मिलान किया जा सके। संदेह है कि राणा ने हेडली को हाथ से लिखे नोट दिए थे, जिसमें निर्देश और नक्शे साझा किए गए थे, जिनका इस्तेमाल 26/11 के लक्ष्यों की टोह लेने के लिए किया गया था। एनआईए रिमांड के दौरान राणा से मुंबई पुलिस अधिकारियों ने भी पूछताछ की थी। पूछताछ के दौरान, राणा ने दावा किया कि हमले की योजना या निष्पादन से उसका “कोई संबंध नहीं” था। उसने यह भी दावा किया कि उसका बचपन का दोस्त और सह-आरोपी हेडली 26/11 की रेकी करने और योजना के पहलुओं के लिए पूरी तरह जिम्मेदार था। हेडली वर्तमान में अमेरिका की जेल में है। मामले में सरकारी गवाह बने हेडली ने पहले लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की ओर से मुंबई सहित पूरे भारत में टोही मिशन चलाने की बात स्वीकार की थी। पूछताछ के दौरान राणा ने बताया कि मुंबई और दिल्ली के अलावा वह केरल भी गया था। जब उससे केरल जाने का मकसद पूछा गया तो उसने दावा किया कि वह वहां अपने किसी परिचित से मिलने गया था और उसने एजेंसी को उस व्यक्ति का नाम और पता भी बताया था।

तहव्वुर राणा के पैरों में बेड़ियां, कमर में जंजीर बांधकर भारत कौ सौंपा गया ! सामने आई प्रत्यर्पण की तस्वीर

नई दिल्ली मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा आखिरकार अमेरिका से भारत लाया जा चुका है, लेकिन जिस तरह उसकी तस्वीर सामने आई है, उसने सबका ध्यान खींच लिया है. प्रत्यर्पण की तस्वीर में राणा के पैरों में बेड़ियां, कमर में जंजीर बंधी हुई दिखाई दे रही है. इसके साथ ही अमेरिकी मार्शल प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को पूरा करते हुए नजर आ रहे हैं, वहीं  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अधिकारी भी वहां मौजूद हैं. ये तस्वीर केवल एक आतंकी के ट्रांसफर का नहीं, बल्कि भारत की उस लंबी कानूनी और कूटनीतिक लड़ाई का नतीजा है जो सालों से जारी है. अमेरिका ने बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच राणा को भारत को सौंपा. अमेरिकी न्याय विभागकैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में अमेरिकी मार्शलों ने पाकिस्तानी नागरिक और कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा की हिरासत भारत के विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों को सौंप दी। तहव्वुर राणा अब 18 दिनों के लिए एनआईए की हिरासत में है, इस दौरान एजेंसी उससे विस्तृत पूछताछ करेगी, ताकि 2008 के हमलों के पीछे की पूरी साजिश का पता लगाया जा सके। इन हमलों में कुल 166 लोग मारे गए थे और 238 से अधिक घायल हुए थे। भारत लाते ही कराया गया मेडिकल चेकअप भारत के गुनाहगार तहव्वुर को विशेष सुरक्षा के बीच अमेरिकी से दिल्ली लाया गया था। उसे भारत लाने के लिए विशेष टीम गई थी, जिसने दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर प्लेन के लैंड होते ही तहव्वुर को NIA के हवाले कर दिया। एनआईए ने सबसे पहले तहव्वुर का मेडिकल चेकअपल कराया। इसके बाद यहां से सीधे उसे NIA कोर्ट ले जाया गया। NIA कोर्ट में रात 2 बजे के बाद तक सुनवाई चली। एनआईए ने राणा की कस्टडी मांगी और अदालत ने 18 दिनों के लिए जांच एजेंसी को उसकी कस्टडी दे दी। भारत न आने के लिए राणा ने दी थी ये दलील हालांकि, तहव्वुर राणा किसी भी कीमत पर अमेरिका से भारत नहीं आना चाहता था। उसने 13 फरवरी को दायर अपनी याचिका के गुण-दोष के आधार पर मुकदमेबाजी (सभी अपीलों की समाप्ति सहित) तक अपने प्रत्यर्पण और भारत के समक्ष आत्मसमर्पण पर रोक लगाने की मांग कर रहा था। उसने तर्क दिया था कि भारत को उसका प्रत्यर्पण अमेरिकी कानून और संयुक्त राष्ट्र के यातना विरोधी कन्वेंशन का उल्लंघन है, क्योंकि उसे भारत में यातना का खतरा है। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया था। भारत ने 7 मार्च को कहा था कि वह राणा के प्रत्यर्पण के लिए आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रहा है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने वाशिंगटन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के बाद राणा के प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। भारत को बड़ी सफलता भारत सालों से राणा के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा था. राणा ने इसे रोकने के लिए अमेरिका की हर अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट तक से उसे राहत नहीं मिली. 9 अप्रैल को अमेरिकी मार्शल्स ने लॉस एंजेलिस एयरपोर्ट पर उसे भारत के हवाले किया

26/11 हमला: प्रत्यर्पित तहव्वुर राणा दिल्ली लाया गया, प्रत्यर्पण पर इजरायली राजदूत ने भारत सरकार को शुक्रिया कहा

नई दिल्ली  26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा दिल्ली पहुंच चुका है। तहव्वुर राणा को अमेरिका से एनआईए की 7 सदस्यीय टीम दिल्ली लेकर पहुंची है। दिल्ली एयरपोर्ट पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वह यहां पहुंचा। तहव्वुर राणा का मेडिकल कराया जाएगा और फिर एनआईए उसे कोर्ट में पेश करेगी। राणा को अमेरिका से भारत लाए जाने के बाद तिहाड़ जेल के हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा जा सकता है। तिहाड़ की हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा जाएगा सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि 64 साल का तहव्वुर राणा दिल्ली की तिहाड़ जेल में एक हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि आतंकवादी को रखने के लिए जेल में सभी आवश्यक तैयारियां पहले ही कर ली गई हैं। तहव्वुर राणा साल 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक डेविड कोलमेन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी का करीबी सहयोगी है। राणा को लेकर एक विशेष चार्टर्ड विमान बुधवार (9 अप्रैल) को अमेरिका से भारत के लिए रवाना हुआ था। 2008 के आतंकी हमले में 166 लोग मारे गए थे। NIA हेडक्वाटर में होगी पूछताछ तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाने में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद प्रत्यर्पित किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि राणा को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की हिरासत में लिया जाएगा, जो रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के साथ मिलकर उसके प्रत्यर्पण का कोर्डिनेशन कर रही है। संभावना है कि उसे जल्द ही दिल्ली की एक अदालत में पेश किया जाएगा। किन किन धाराओं में आरोपी है राणा? राणा पर कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, जिनमें आपराधिक साजिश, भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना, हत्या, जालसाजी और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम शामिल हैं। हालांकि, मुंबई पुलिस को अभी तक उसके शहर में स्थानांतरण के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। लेकिन माना जा रहा है कि उसे मुंबई ले जाने पर ऑर्थर रोड जेल के इस सेल में रखा जाएगा जहां आतंकी कसाब को रखा गया था। ट्रंप की हरी झंडी के बाद मिली कामयाबी डेविड कोलमेन हेडली का सहयोगी होने के अलावा, ऐसा माना जाता है कि राणा के पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ करीबी संबंध थे। राणा के प्रत्यर्पण की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्हाइट हाउस दौरे के दौरान की थी। इसके बाद राणा ने सुप्रीम कोर्ट में प्रत्यर्पण को रोकने की कोशिश की, लेकिन अब उसकी सभी कानूनी अपीलों को खारिज कर दिया गया है। भारत ने रचा ऐसा चक्रव्यूह कि शिकंजे में आ गया राणा  ……. 26/11 के मुंबई हमलों के वांछित और साजिशकर्ता तहव्वुर राणा भारत प्रत्यर्पित हो चुका है। यह काम इतना आसान और सहज नहीं था, लेकिन भारत ने इसे सच कर दिखाया। यह केंद्रीय एजेंसियों के सबसे महत्वपूर्ण प्रत्यर्पणों में से एक है क्योंकि इसके लिए NIA अधिकारियों को कई बार अमेरिका के चक्कर लगाने पड़े और अमेरिकी सरकार को राणा को प्रत्यर्पित करने के लिए मनाना पड़ा। एक बार तो राणा को तब अमेरिकी जेल में रखने के लिए अमेरिकी सरकार को मनाना पड़ा , जब वह रिहा होने वाला था। इस दौरान भारतीय अधिकारियों ने ना केवल राणा के प्रत्यर्पण की गारंटी सुनिश्चित की बल्कि उसके खिलाफ सबूत भी जुटाए। गिरफ्तारी, दोबारा गिरफ्तारी, सजा, भारत का प्रत्यर्पण अनुरोध 64 वर्षीय तहव्वुर हुसैन राणा, पाकिस्तान में जन्मा एक कनाडाई नागरिक है। उसे अमेरिकी अधिकारियों ने 18 अक्टूबर, 2009 को गिरफ्तार किया था। इससे दो हफ्ते पहले 3 अक्टूबर, 2009 को उसके बचपन के दोस्त डेविड कोलमैन हेडली की गिरफ्तारी हो चुकी थी। भारत ने हेडली के लिए भी प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा था, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने उसे देने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसने मुंबई हमलों और डेनमार्क में नाकाम साजिश से संबंधित कई मामलों सहित आतंकवाद से संबंधित 12 आरोपों में दोषी होने की बात स्वीकार की थी। चूंकि वह अमेरिकी जांचकर्ताओं के साथ सहयोग करने के लिए तैयार था, इसलिए हेडली के याचिका समझौते में गैर-प्रत्यर्पण प्रावधान शामिल था। दूसरी ओर, राणा पर अमेरिका में तीन मामलों में मुकदमा चलाया गया। इनमें भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने की साजिश, डेनमार्क में आतंकवाद को बढ़ावा देने की साजिश और एक विदेशी आतंकवादी संगठन को सहायता प्रदान करना शामिल था। इस बीच, भारत ने तहव्वुर राणा को वांछित घोषित कर दिया था और 28 अगस्त, 2018 को उसके खिलाफ साजिश, युद्ध छेड़ने, हत्या करने, जालसाजी, आतंकवादी हमले के आरोपों पर गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया। उधर, राणा के बचपन के दोस्त हेडली ने अमेरिकी अभियोजन पक्ष के सामने गवाही दी और यूएस जूरी ने 9 जून, 2011 को राणा को डेनमार्क से संबंधित आतंकवादी साजिश और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) को भौतिक सहायता प्रदान करने का दोषी ठहरा दिया, लेकिन भारत से संबंधित आतंकवादी साजिश से उसे बरी कर दिया। 17 जनवरी, 2013 को अमेरिकी डिसेट्रिक कोर्ट ने उसे 168 महीने के कारावास की सजा सुनाई। 7 साल जेल में रहने के बाद, कोविड-19 महामारी के दौरान राणा की अनुकंपा रिहाई की याचिका भी मंजूर कर ली गई। इसी बीच, जब वह रिहा होने वाला था, तब भारत द्वारा प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया। इसके बाद राणा को 10 जून, 2020 को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। भारतीय वकील दयान कृष्णन ने की ‘निःशुल्क’ सहायता 2009 में 26/11 हमलों की जांच शुरू करने के बाद से, डेविड हेडली और तहव्वुर राणा की हिरासत पाने के लिए एनआईए अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई और न्याय विभाग के साथ नियमित संपर्क में था। NIA की एक टीम ने पहली बार 2010 में अमेरिका का दौरा किया और हेडली से पूछताछ की थी लेकिन उस समय राणा से पूछताछ नहीं की जा सकी थी। इसके बाद, 2018 में मामले में सबूत इकट्ठा करने के लिए एनआईए के अफसरों ने फिर यूएस का दौरा किया। इसके दो साल बाद राणा के प्रत्यर्पण की कार्रवाई शुरू हुई। 2020 में राणा के प्रत्यर्पण की कार्यवाही शुरू होने के बाद, NIA की टीमों ने मामले के दस्तावेजों, आरोपों आदि को समझाने में अमेरिकी अभियोजकों की सहायता के लिए कई बार दौरे किए। अमेरिका में राणा की पैरवी ब्रिटिश बैरिस्टर पॉल गार्लिक कर रहे थे, जबकि … Read more

तहव्वुर राणा का पाकिस्तान कनेक्शन?एनआईए आरोपी की कस्टडी की मांग करेगी

नई दिल्ली अमेरिका से प्रत्यर्पित किए गए 26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को स्पेशल विमान के जरिए आज भारत लाया जा रहा है. वह गुरुवार दोपहर दिल्ली पहुंचेगा, जहां उसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया जाएगा. इसके बाद उसे राजधानी की तिहाड़ जेल में रखा जाएगा, जहां उसकी सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं. इससे पहले राणा को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां एनआईए आरोपी की कस्टडी की मांग करेगी. बुलेटप्रूफ व्हीकल में NIA हेडक्वार्टर जाएगा तहव्वुर राणा 26/11 के आतंकी तहव्वुर राणा को बुलेट प्रूफ गाड़ी में पालम टेक्निकल एयरपोर्ट से एनआईए हेडक्वॉक्टर लाया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, बुलेट प्रूफ गाड़ी के साथ मार्क्समेन गाड़ी को भी स्टैंडबाय में रखा गया है. दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के कमांडोज इस गाड़ी के साथ भी स्टैंडबाय पर हैं. मार्कसमेन बेहद सुरक्षित गाड़ी होती है, जिसमें किसी तरह का हमला कारगर नही हो सकता. बड़े आतंकियों और गैंगस्टर्स को इसी गाड़ी से स्पेशल सेल कोर्ट और एजेंसी के दफ्तर लाने और ले जाने के लिए इस्तेमाल करती है. तहव्वुर राणा के खिलाफ क्या-क्या कानूनी कार्रवाई हुई? अक्टूबर 2009 में, तहव्वुर राणा और हेडली को अमेरिकी अधिकारियों ने डेनमार्क में जाइलैंड्स-पोस्टेन अखबार के आफिस पर हमला करने की कथित साजिश के लिए गिरफ्तार किया था, जिसने कार्टून पब्लिश किए थे. इस जांच से मुंबई हमलों में उसकी संलिप्तता का पता चला. जून 2011 में, अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में तीन सप्ताह की सुनवाई के बाद, राणा को लश्कर-ए-तैयबा को मदद करने और डेनिश अखबार के खिलाफ विफल साजिश में उसकी भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया था. तहव्वुर राणा को अमेरिकी अदालत में मुंबई हमलों में प्रत्यक्ष भागीदारी के आरोपों से मुक्त कर दिया गया था, फिर भी उसे 17 जनवरी, 2013 को 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी. सजा सुनाते समय जज ने साजिश को “कायरतापूर्ण” कहा था. इस बीच, हेडली ने 12 आतंकवाद के आरोपों में दोषी होने की दलील दी और उसे 35 साल की जेल की सजा सुनाई गई. अधिकारियों के साथ हेडली के सहयोग, जिसमें राणा के खिलाफ गवाही देना भी शामिल था – उसे मौत की सजा और प्रत्यर्पण से बचने में मदद की. राणा के खिलाफ सबूत पर्याप्त थे. मुकदमे के दौरान, रिकॉर्ड की गई बातचीत के टेप पेश किए गए, जिनमें सितंबर 2009 के टेप भी शामिल थे. अन्य बातचीत में, राणा ने हेडली से कहा था कि मुंबई हमलों में शामिल हमलावरों को पाकिस्तान का सर्वोच्च मरणोपरांत सैन्य सम्मान मिलना चाहिए, जिससे आतंकवादियों की कार्रवाइयों के प्रति उसके समर्थन का पता चलता है. तहव्वुर राणा के भारत आगमन पर क्या तैयारियां की गई हैं? भारत ने तहव्वुर राणा को कानूनी सजा देने के लिए तमाम तैयारियां की हैं. भारत से एनआईए के इंसपेक्टर जनरल रैंक के अधिकारी आशीष बत्रा के नेतृत्व में एक मल्टी-एजेंसी टीम तहव्वुर राणा को हिरासत में लेने के लिए अमेरिका गई थी. टीम में सब-इंसपेक्टर जनरल रैंक की अधिकारी जया रॉय और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के साथ-साथ तीन खुफिया एजेंसी के अधिकारी शामिल हैं. वे रविवार को “आत्मसमर्पण वारंट” की पुष्टि प्राप्त करने के बाद अमेरिका के लिए रवाना हुए, जिसके तहत राणा को भारतीय अधिकारियों को सौंपा गया.   भारत पहुंचने पर, तहव्वुर राणा को हिरासत के लिए नई दिल्ली में एनआईए अदालत में पेश किया जाएगा. पूछताछ और जांच के शुरुआती कुछ हफ्तों तक उसके एनआईए की हिरासत में रहने की उम्मीद है. बाद में, मुंबई क्राइम ब्रांच मुंबई हमलों की आगे की जांच के लिए उसकी हिरासत की मांग करेगी. नामित जेलों में हाई सिक्योरिटी की व्यवस्था की गई है, जिसमें राणा की गतिविधियों पर 24/7 निगरानी रखने के लिए इन-बिल्ट बाथरूम सुविधाओं के साथ सीसीटीवी कैमरे शामिल हैं. NIA, RAW, SWAT Team और स्पेशल प्लेन… वो टीम जो तहव्वुर राणा को इंडिया ला रही है   2008 के मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को आज अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया जा रहा है. उसे स्पेशल प्लेन से राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) और RAW की टीम भारत ला रही है. यह विमान किसी भी वक्त दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड कर सकता है. एनआई और RAW की संयुक्त टीम की तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण में अहम भूमिका है. सूत्रों का कहना है कि एनआईए की DIG जया रॉय ने मंगलवार को तहव्वुर राणा के सरेंडर वॉरंट पर साइन किए थे, जिसके बाद उसे भारत प्रत्यर्पित किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी. राणा को लेकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की टीम विशेष विमान से बुधवार सुबह लगभग 6.30 बजे दिल्ली के लिए रवाना हुई थी. इस दौरान एनआईए टीम की अगुवाई सदानंद दाते कर रहे हैं. वह महाराष्ट्र कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं. 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान से आए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों ने जब मुंबई पर हमला किया था, तब सदानंद दाते मुंबई क्राइम ब्रांच में कार्यरत थे. भारत पहुंचते ही एनआईए की टीम आधिकारिक रूप से राणा को हिरासत में ले लेगी. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को भी हाई अलर्ट कर दिया गया है. साथ ही SWAT कमांडोज को भी एयरपोर्ट पर तैनात किया गया है. इसके अलावा एयरपोर्ट के बाहरी क्षेत्र में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPF) की सिक्योरिटी विंग और स्थानीय पुलिस मुस्तैद रहेगी. तहव्वुर राणा को सीधे एनआईए के दफ्तर लाया जाएगा. एनआईए दफ्तर और उसके आसपास हाई लेवल सिक्योरिटी है. राणा को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जा सकता है. कहा जा रहा है कि सुरक्षा कारणों से उसे वर्चुअली ही एनआईए जज के समक्ष पेश किया जाएगा. पेशी से पहले उसका मेडिकल टेस्ट किया जाएगा. तहव्वुर राणा को दिल्ली की तिहाड़ जेल के हाई-सिक्योरिटी वॉर्ड में रखा जाएगा. जेल प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष बंदोबस्त किए हैं.  केंद्र सरकार ने इस मामले में एडवोकेट नरेंद्र मान को स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया है. उन्हें तीन साल की अवधि के लिए या फिर केस का ट्रायल पूरा होने तक यह जिम्मेदारी दी गई है. मान पहले भी कई मामलों में सीबीआई का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. कौन है तहव्वुर राणा? तहव्वुर राणा का जन्म पाकिस्तान में हुआ था. उसने आर्मी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई की और पाकिस्तान आर्मी … Read more

26/11 हमले के आरोपी आतंकी तहव्वुर राणा अमेरिका से प्रत्यर्पित, विशेष विमान से लाया जा रहा भारत

मुंबई  26/11 मुंबई आतंकी हमले (Mumbai Terror Attack) का मुख्य आरोपी तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana), जो इस समय अमेरिका (United States Of America) की जेल में बंद है, भारत लाने की तैयारी शुरू हो गई है। भारत सरकार काफी समय से तहव्वुर के प्रत्यर्पण (Tahawwur Rana Extradition) की कोशिश कर रही थी और कुछ समय पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Of US) ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Indian Prime Minister Narendra Modi) के अमेरिका दौरे के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी साफ कर दिया था कि तहव्वुर को जल्द से जल्द भारत के हवाले कर दिया जाएगा। तहव्वुर ने भारत प्रत्यर्पण को रोकने के लिए अलग-अलग मौकों पर याचिका भी लगाई, पर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया गया। कुछ दिन पहले ही तहव्वुर की आखिरी याचिका भी खारिज कर दी गई। अब उसके भारत प्रत्यर्पण की तैयारी शुरू हो गई है। आज लाया जाएगा भारत तहव्वुर को आज ही भारत लाया जाएगा। भारतीय एजेंसियों की टीम उसे भारत लाने के लिए अमेरिका पहुंच चुकी है और बचा हुआ पेपरवर्क पूरा किया जा रहा है। तहव्वुर कल सुबह, यानी कि गुरुवार को भारत पहुंच सकता है। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल (Ajit Doval) पूरी स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं। तिहाड़ जेल में रखने की संभावना! तहव्वुर के भारत प्रत्यर्पण से पहले ही दिल्ली में तिहाड़ जेल और मुंबई की आर्थर रोड जेल में गतिविधियाँ बढ़ गई हैं और स्टाफ को अलर्ट कर दिया गया है। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि मुंबई आतंकी हमले के आरोपी को इन दोनों में से एक जेल में NIA की निगरानी में बेहद सुरक्षित सेल में रखा जा सकता है। मुंबई आतंकी हमले में तहव्वुर की थी अहम भूमिका मुंबई आतंकी हमले में तहव्वुर ने अहम भूमिका निभाई थी। इस आतंकी हमले में 175 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 166 नागरिक और 9 आतंकी थे। इतना ही नहीं, 300 से ज़्यादा लोग इस आतंकी हमले में घायल भी हो गए थे। लश्कर-ए-तैयबा ने इस हमले को अंजाम दिया था और आतंकी संगठन के 10 आतंकियों ने इस हमले को अंजाम दिया था। 10 में से सिर्फ एक आतंकी अजमल कसाब ही इस हमले में ज़िंदा बच गया था और बाकी सभी मारे गए थे। कसाब को 2012 में फांसी दे दी गई थी।

गुनहगार तहव्वुर राणा की अर्जी फिर खारिज,अमेरिकी कोर्ट में प्रत्यर्पण रोकने की मांग की थी, कहा- पाकिस्तानी मुस्लिम हूं, भारत गया तो मारा जाऊंगा

वाशिंगटन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से 2008 मुंबई हमलों के दोषी तहव्वुर राणा को बड़ा झटका लगा है. भारत प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई है. जज एलेना कगान ने तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की याचिका खारिज की. 26/11 मुंबई हमले के दोषी तहव्वुर राणा ने भारत प्रत्यर्पण किए जाने से बचने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. राणा ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उनके प्रत्यर्पण पर इमरजेंसी स्टे लगाया जाए. याचिका में तहव्वुर राणा ने कहा था कि अगर मुझे भारत प्रत्यर्पित किया गया तो मुझे प्रताड़ित किया जाएगा. मैं भारत में ज्यादा सर्वाइव नहीं कर पाऊंगा. तहव्वुर राणा ने याचिका में क्या कहा था? राणा ने अमेरिकी कोर्ट के समक्ष अपनी याचिका में कहा था कि पाकिस्तान मूल का मुस्लिम होने की वजह से उसे भारत में बहुत अधिक प्रताड़ित किया जाएगा. ह्यूमन राइट्स वॉच 2023 की वर्ल्ड रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की बीजेपी सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों विशेष रूप से मुस्लिमों के साथ भेदभाव करती है. याचिका में कहा गया था कि भारत की सरकार लगातार तानाशाही होती जा रही है और इसके पर्याप्त कारण हैं कि भारत सरकार को सौंपे जाने पर उसे प्रताड़ित किया जाएगा. तहव्वुर राणा ने कहा था कि वह कई तरह की बीमारियों से जूझ रहा है. वह पार्किंसंस की समस्या से भी जूझ रहा है. ऐसी जगह नहीं भेजा जाए, जहां राष्ट्रीय, धार्मिक और सांस्कृतिक तौर पर उन्हें निशाना बनाया जाएगा. कौन है तहव्वुर राणा? तहव्वुर राणा का जन्म पाकिस्तान में हुआ था. उसने आर्मी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई की और पाकिस्तान आर्मी में 10 साल तक बतौर डॉक्टर काम काम किया. लेकिन तहव्वुर राणा को अपना काम पसंद नहीं आया और उसने ये नौकरी छोड़ दी. भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने वाला तहव्वुर राणा अभी कनाड़ा का नागरिक है. लेकिन हाल में वह शिकागो का निवासी था, जहां उसका बिजनेस है. अदालत के दस्तावेजों के मुताबिक, उसने कनाड़ा, पाकिस्तान, जर्मनी और इंग्लैंड की यात्राएं की है और वहां रहा है, वह लगभग 7 भाषाएं बोल सकता है. अदालत के दस्तावेज बताते हैं कि 2006 से लेकर नवंबर 2008 तक तहव्वुर राणा ने पाकिस्तान में डेविड हेडली और दूसरे लोगों के साथ मिलकर साजिश रची. इस दौरान तहव्वुर राणा ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और हरकत उल जिहाद ए इस्लामी की मदद की और मुंबई आतंकी हमले की प्लानिंग की और इसे अमली जामा पहनाने में मदद की. आतंकी हेडली इस मामले में सरकारी गवाह बन गया है. 26 नवंबर 2008 को क्या हुआ था? 26 नवंबर 2008 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर आतंकी हमला हुआ था. आतंकियों के इस हमले को नाकाम करने के लिए 200 एनएसजी कमांडो और सेना के पचास कमांडो को मुंबई भेजा गया था. इसके अलावा सेना की पांच टुकड़ियों को भी वहां तैनात किया गया था. हमले के दौरान नौसेना को भी अलर्ट पर रखा गया था. मुंबई के आतंकी हमले को नाकाम करने के अभियान में मुंबई पुलिस, एटीएस और एनएसजी के 11 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे. इनमें एटीएस के प्रमुख हेमंत करकरे, एसीपी अशोक कामटे, एसीपी सदानंद दाते, एनएसजी के कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसआई विजय सालस्कर, इंसपेक्टर सुशांत शिंदे, एसआई प्रकाश मोरे, एसआई दुदगुड़े, एएसआई नानासाहब भोंसले, एएसआई तुकाराम ओंबले, कांस्टेबल विजय खांडेकर, जयवंत पाटिल, योगेश पाटिल, अंबादोस पवार और एम.सी. चौधरी शामिल थे.  

26/11 हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को जल्द लाया जायेगा भारत, प्रत्यर्पण के लिए अमेरिका तैयार

मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में 26/11 आतंकी हमले में शआमिल रहा पाकिस्तान मूल का कनाडाई बिजनेसमैन तहव्वुर राणा को जल्द ही भारत को सौंपा जा सकता है। इसके लिए डिप्लोमैटिक चैनल्स पर काम शुरू हो गया है। अमेरिका की एक कोर्ट तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण को जायज बता चुकी है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण को लेकर बातचीत चल रही है।  रिपोर्ट के अनुसार, तहव्वुर राणा को राजनयिक माध्यमों से भारत लाने की प्रक्रिया चल रही है। अगस्त 2024 में, नौवें सर्किट के लिए अमेरिकी अपील न्यायालय ने फैसला सुनाया कि तहव्वुर राणा दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत को प्रत्यर्पित किया जा सकता है। अमेरिकी पैनल ने दी प्रत्यर्पण को लेकर जानकारी पैनल ने जिला न्यायालय द्वारा तहव्वुर हुसैन राणा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज करने के निर्णय की पुष्टि की, जिसमें मुम्बई में आतंकवादी हमलों में कथित भागीदारी के लिए राणा को भारत को प्रत्यर्पित करने योग्य घोषित करने के मजिस्ट्रेट न्यायाधीश के निर्णय को चुनौती दी गई थी। पैनल ने यह भी माना कि भारत ने मजिस्ट्रेट जज के इस निष्कर्ष के समर्थन में पर्याप्त सक्षम साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं कि राणा ने आरोपित अपराध किए हैं। मुंबई पुलिस ने 26/11 हमलों के सिलसिले में 405 पन्नों की चार्जशीट में राणा का नाम शामिल किया है। राणा पर पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा का ऑपरेटिव होने का आरोप है। प्रत्यर्पण को लेकर क्या हैं पेच? अदालत ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि में Non Bis is Idem एक अपवाद है, जो कि तब लगा होता है, जब आरोपी को उसी अपराध के लिए पहले दोषी ठहराया जा चुका हो, या बरी किया जा चुका है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि राणा के खिलाफ भारत में लगाए गए आरोप अमेरिकी अदालतों में उनके खिलाफ चलाए गए मामलों से अलग हैं, इसीलिए नॉन बिस, इन आइडम अपवाद लागू नहीं होता है। बता दें कि 26 नवंबर 2011 को मुंबई में हुई हमलों के लगभग एक साल बाद FBI ने शिकागो में राणा को गिरफ्तार किया था। राणा और उसके साथी कोलमैन हेडली ने मिलकर मुंबई हमलों के लिए जगहों की रेकी की थी, और पाकिस्तान के आतंकवादियों को अंजाम देने के लिए एक खाका तैयार किया गया है। तहव्वुर राणा के खिलाफ सबूत अमेरिकी अदालत ने राणा के प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका खारिज कर दी, जिसमें भारत द्वारा उसके खिलाफ पर्याप्त सबूतों का हवाला दिया गया। उसका नाम 26/11 हमलों के लिए मुंबई पुलिस की चार्जशीट में शामिल है। उस पर पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय सदस्य होने का आरोप है। राणा ने कथित तौर पर मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड डेविड कोलमैन हेडली की मुंबई में संभावित ठिकानों की टोह लेने में मदद की थी। आरोपपत्र में हेडली के साथ मिलकर इन हमलों की योजना बनाने में उसकी संलिप्तता का विवरण दिया गया है। गैर-बिस इन आइडेम क्लॉज नहीं होंगे लागू अदालत ने कहा कि भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि में गैर-बिस इन आइडेम क्लॉज यहां लागू नहीं होता है। यह क्लॉज उस स्थिति में प्रत्यर्पण को रोकता है जब किसी व्यक्ति पर उसी अपराध के लिए कहीं और मुकदमा चलाया गया हो। हालांकि, राणा के खिलाफ भारत और अमेरिका में आरोप अलग-अलग हैं, इसलिए यह अपवाद अप्रासंगिक है। मुंबई हमलों के एक साल बाद शिकागो से गिरफ्तार हुआ राणा मुंबई आतंकी हमलों के करीब एक साल बाद FBI ने राणा को शिकागो में गिरफ्तार किया था। अमेरिका में आरोपों से बरी होने के बावजूद, भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध के कारण वह हिरासत में है। 26/11 की पूरी प्लानिंग तहव्वुर राणा और डेविड कोलमैन हेडली ने मिलकर मुंबई को निशाना बनाने वाले पाकिस्तानी आतंकवादियों के लिए एक योजना बनाई। उनके ब्लूप्रिंट में हमलों के लिए प्रमुख स्थानों की पहचान की गई थी। वर्तमान में, राणा लॉस एंजिल्स की जेल में बंद है और भारत में उसके प्रत्यर्पण के संबंध में आगे की कार्यवाही का इंतजार कर रहा है।

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