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सत्ता से पहले ही तारिक रहमान का संदेश, संविधान में बदलाव से किया इंकार

ढाका पड़ोसी देश बांग्लादेश में तारिक रहमान की अगुवाई में आज (मंगलवार, 17 फरवरी को) नई सरकार शपथ लेने जा रही है। उससे पहले तारिक रहमान और उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNS) ने संविधान बदलने से इनकार कर दिया है और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें कहा गया था कि सभी सांसदों को नई “कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल” के सदस्य के तौर पर एक शपथ पत्र पर दस्तखत करने हैं। सांसदों के शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत में ही मोहम्मद यूनुस के इस मनमानीपूर्ण फैसले को BNP ने खारिज कर दिया। BNP नेता सलाउद्दीन अहमद ने तारिक रहमान की मौजूदगी में कहा कि पार्टी प्रमुख तारिक रहमान के निर्देशों के बाद सभी नवनिर्वाचित BNP सांसदों से कहा गया है कि वे कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल फॉर्म पर साइन न करें, क्योंकि वे काउंसिल के सदस्य के तौर पर नहीं चुने गए हैं। BNP के इस कदम से यूनुस की उन कोशिशों को बड़ा झटका लगा है, जिसके तहत वह संविधान को बदलना चाह रहे थे। बता दें कि इस काउंसिल का मकसद पार्लियामेंट चुनावों के साथ हुए रेफरेंडम के हिसाब से बांग्लादेश के संविधान को बदलना है। कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल संविधान में शामिल नहीं डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, सलाउद्दीन अहमद ने इस पर स्थिति साफ करते हुए कहा कि कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल संविधान में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि काउंसिल को पहले रेफरेंडम के नतीजों के हिसाब से संविधान में शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि उसमें कई जरूरी नियमों की भी जरूरत है, जिसमें यह भी शामिल है कि कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल के सदस्यों को शपथ कौन दिलाएगा। BNP MPs ने सिर्फ बांग्लादेश संसद के सदस्य के तौर पर शपथ ली इसके बाद BNP के सांसदों ने सिर्फ बांग्लादेश संसद के सदस्य के तौर पर शपथ ली। BNP का कहना है कि कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल के नियम अभी मौजूदा संविधान का हिस्सा नहीं हैं और इस पर संसद में विचार-विमर्श की जरूरत है। बतौर सांसद शपथ लेने तारिक रहमान अपनी बेगम जुबैदा रहमान और बेटी ज़ाइमा रहमान के साथ करीब 10:28 बजे शपथ लेने वाले कमरे में दाखिल हुए। इसके बाद चीफ इलेक्शन कमिश्नर AMM नासिर उद्दीन ने 12 फरवरी को हुए 13वें पार्लियामेंट्री इलेक्शन में चुने गए सांसदों को शपथ दिलाई। ढाका पहुंचे ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए मंगलवार को ढाका पहुंच चुके हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी और अन्य अधिकारियों के साथ ढाका पहुंचने के बाद, बिरला ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण क्षण है जो दोनों पड़ोसी देशों के बीच जन-संबंधों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगा। बिरला ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”तारिक रहमान के नेतृत्व में नयी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए ढाका में उपस्थित होना मेरे लिए सम्मान की बात है। यह एक महत्वपूर्ण क्षण है जो हमारे दोनों देशों के बीच जन-संबंधों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करेगा।”  

दाग मिटाने की कोशिश में तारिक रहमान, कैबिनेट में हिंदू नेताओं की एंट्री से दिया बड़ा संदेश

ढाका बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल करने वाले तारिक रहमान की कैबिनेट में दो अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं को जगह दी गई है. 25 सांसदों ने मंत्री पद की शपथ ली. इनमें निताई रॉय चौधरी का नाम भी शामिल है. हालांकि पहले चर्चा थी कि चौधरी के समधी और अहम महकमों के मंत्री रह चुके गोयेश्वर चंद्र रॉय को जगह मिलेगी. वहीं दूसरे अल्पसंख्यक नेता का नाम दीपेन दीवान है. कौन हैं निताई रॉय चौधरी? तृतीयोमात्रा डॉट कॉम के मुताबिक, 1949 में पैदा हुए निताई रॉय चौधरी एक बांग्लादेशी वकील और राजनीतिज्ञ हैं. निताई रॉय चौधरी, जो मगुरा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए हैं, पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों में से एक हैं और शीर्ष नेतृत्व के वरिष्ठ रणनीतिक सलाहकार माने जाते हैं. उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के प्रत्याशी को सीधी टक्कर में मात दी है. 12 फरवरी 2026 को हुए 13वें संसदीय चुनाव में उन्होंने मगुरा-2 संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल की. निताई रॉय चौधरी को 147896 वोट मिले हैं. उन्होंने जमात उम्मीदवार मुस्तर्शीद बिल्लाह को 30,838 वोटों के अंतर से हराया है.   कौन हैं दीपेन दीवान? दूसरे अल्पसंख्यक नेता दीपेन दीवान, बौद्ध मेजोरिटी वाले चकमा एथनिक माइनॉरिटी ग्रुप से हैं. इन्होंने दक्षिण-पूर्व रंगमती जिले की एक सीट से जीत हासिल की. हालांकि उनकी धार्मिक पहचान साफ नहीं है और कई लोग उन्हें हिंदू बताते हैं. दीवान ने अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी के तौर पर एक निर्दलीय चकमा उम्मीदवार को हराया. हिंदू मंत्रियों की नियुक्ति और मां से नाता तारिक रहमान की कैबिनेट में मंत्री पद को लेकर गोयेश्वर रॉय को लेकर थी, जो बांग्लादेश की राजनीति में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के प्रमुख चेहरों में से एक माने जाते हैं. खालिदा जिया सरकार में लगभग 30 साल पहले (1991-1996) वो राज्य मंत्री थे. इस बार उन्हें जगह न देकर उनके समधी निताई रॉय चौधरी को मंत्री बनाया गया है. खालिदा जिया की पार्टी भले ही अल्पसंख्यकों को ज्यादा महत्वपूर्ण पद न देती हो लेकिन खालिदा जिया के दो कार्यकाल में हिंदू मंत्री शामिल रहे – 1991-1996 में गयेश्वर चंद्र रॉय राज्य मंत्री (स्टेट मिनिस्टर) के रूप में शामिल थे. वे पर्यावरण एवं वन मंत्रालय तथा मत्स्य एवं पशुपालन मंत्रालय के प्रभारी थे. अब वे बड़ा अल्पसंख्यक चेहरा बन चुके हैं. 2001-2006 में गौतम चक्रबर्ती राज्य मंत्री के रूप में जल संसाधन मंत्रालय के प्रभारी थे. वे बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई कल्याण फ्रंट के कन्वेनर भी थे. तारिक रहमान ने भी मां की राह पर चलते हुए अपनी कैबिनेट में हिंदू चेहरों को शामिल किया है. उनकी मां की कैबिनेट में एक हिंदू मंत्री रहे लेकिन रहमान कैबिनेट में 2 अल्पसंख्यक चेहरे हैं, वो भी ऐसे वक्त में जब बांग्लादेश अल्पसंख्यकों के लिए नर्क बना हुआ है. बांग्लादेश के दामन से खून का दाग धोएंगे तारिक रहमान? तारिक रहमान ऐसे वक्त में बांग्लादेश की सत्ता संभाल रहे हैं, जब वहां अस्थिरता के साथ-साथ अल्पसंख्यकों के लिए बेहद बुरे हालात हैं. अंतरिम सरकार के राज में हिंदुओं का खूब कत्लेआम हुआ. मॉब लिंचिंग की ऐसी-ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं. खासतौर पर चुनावों की घोषणा होने के बाद से अलग-अलग इलाकों से लगभग हर रोज हिंदुओं की हत्या की खबरें आती रहीं. खासतौर पर नवंबर के अंत से फरवरी के पहले हफ्ते तक अल्पसंख्यकों के खून से बांग्लादेश का दामन रंग गया. क्या तारिक रहमान बदलाव के छोटे से कदम से अपने देश की इमेज सुधार पाएंगे? BNP कैबिनेट में किसे कौन सी जिम्मेदारी दी जाएगी?   BNP के सूत्रों के हवाले से एक लिस्ट हासिल की है, जिसमें बताया गया है कि किन मंत्रियों और राज्य मंत्रियों को कौन से मंत्रालय दिए जाएंगे.     मिर्ज़ा फ़ख़रुल इस्लाम आलमगीर – स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय     सलाहुद्दीन अहमद – गृह मंत्रालय     अमीर खसरू महमूद चौधरी – वित्त और योजना मंत्रालय     मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद – मुक्ति युद्ध मामलों का मंत्रालय     इकबाल हसन महमूद तुकू – बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्रालय     AZM ज़ाहिद हुसैन – महिला और बाल मंत्रालय, सामाजिक कल्याण     खलीलुर रहमान – विदेश मंत्रालय     अब्दुल अवल मिंटू – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय     मिजानुर रहमान मीनू – भूमि मंत्रालय     निताई रॉय चौधरी – सांस्कृतिक मामलों का मंत्रालय     मोहम्मद असदुज्जमां – कानून, न्याय और संसदीय मामलों का मंत्रालय     काज़ी शाह मोफ़ज्जल हुसैन कैकोबाद – धार्मिक मामलों का मंत्रालय     अरिफुल हक चौधरी – श्रम और रोज़गार मंत्रालय, प्रवासी कल्याण और विदेशी रोज़गार     खानदेकर अब्दुल मुक्तदिर – वाणिज्य, उद्योग, कपड़ा और जूट मंत्रालय     ज़ाहिर उद्दीन स्वपन – सूचना और प्रसारण मंत्रालय शाहिद     उद्दीन चौधरी एनी – जल संसाधन मंत्रालय     एहसानुल हक मिलन – शिक्षा, प्राइमरी और मास एजुकेशन मंत्रालय     अमीन उर ​​राशिद – कृषि, मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय, खाद्य मंत्रालय     अफरोजा खानम – नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय     असदुल हबीब दुलु – आपदा प्रबंधन और राहत मंत्रालय     ज़कारिया ताहिर – आवास और सार्वजनिक निर्माण मंत्रालय     दीपेन दीवान – चटगाँव पहाड़ी इलाकों के मामले मंत्रालय     सरदार एमडी सखावत हुसैन बकुल – स्वास्थ्य और परिवार नियोजन मंत्रालय     फकीर महबूब अनम – डाक और दूरसंचार विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय     शेख रबीउल आलम, सड़क परिवहन और पुल, रेलवे और शिपिंग मंत्रालय.

आज की ताजपोशी में चर्चा का केंद्र—तारिक रहमान की दौलत और पत्नी जुबैदा की अधिक संपत्ति

ढाका  तारिक रहमान की ताजपोशी होने वाली है. दुनियाभर से करीब 1200 मेहमान शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचने वाले हैं. दरअसल, तारिक रहमान बांग्लादेशी के अगले प्रधानमंत्री बनने वाले हैं. ये पूर्व राष्ट्रपति जिया उर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं, और 17 साल के निर्वासन के बाद 2025 में लंदन से बांग्लादेश लौटकर आए हैं.  बंपर जीत के बाद तारिक रहमान की खूब चर्चा हो रही है. लोग जानना चाहते हैं कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी प्रमुख तारिक रहमान की कुल संपत्ति कितनी है, उनकी कमाई का जरिया क्या है?  पति से ज्यादा पत्नी अमीर चुनावी हलफनामे के मुताबिक तारिक रहमान की कुल नेटवर्थ करीब 1.97 करोड़ बांग्लादेशी टका है, जो भारतीय करेंसी में करीब 1.48 करोड़ रुपये के बराबर है. उनकी यह नेटवर्थ मुख्य रूप से बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर और अचल संपत्ति मिलाकर है. चुनाव आयोग के सामने जमा किए गए हलफनामे में यह विवरण साफ दर्ज किया गया है.  बता दें, तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों सीटों से भारी मतों से जीत हासिल की है. Election Affidavit के अनुसार तारिक रहमान की सालाना आय करीब 6.76 लाख टका (लगभग 5 लाख रुपये) है, जो उन्होंने शेयर, बॉन्ड और बैंक जमा पर अर्जित किया है.  उनके बैंक खातों में कुल जमा लगभग 1.23 करोड़ टका (यानी करीब 92.25 लाख रुपये) हैं, जिनमें से लगभग 31.6 लाख टका नकद या चालू बचत में रखे हुए हैं. Fixed Deposits में कुछ उनके बेटी के नाम पर भी हैं, तारिक रहमान द्वारा घोषित चल संपत्ति (movable assets) में फर्नीचर लगभग 2 लाख टका का है. इसके अलावा उनके पास बोगुरा में 2 एकड़ से अधिक जमीन है.  तारिक रहमान की पत्नी डॉक्टर तारिक की पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान ने अपने हलफनामे में काफी अधिक आय और संपत्ति घोषित की है. वे एक डॉक्टर हैं और उनकी वर्षीय आय लगभग 35.6 लाख टका (लगभग 26.7 लाख रुपये) है, यह उनकी पति की आय से लगभग 5 गुना अधिक है. उनके बैंक जमा लगभग 1 करोड़ बांग्लादेशी टका हैं, जिसमें से 66.5 लाख टका बचत खाते में हैं, वे 111.25 डिसिटल भूमि और 800-स्क्वायर-फुट के डुप्लेक्स घर की भी मालकिन हैं. टैक्स रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि तारिक ने पिछले साल करीब 1 लाख टका टैक्स दिया, हलफनामे के अनुसार, उनके पास कोई भी कर्ज या सरकारी बकाया नहीं है. जबकि उनकी पत्नी ने लगभग 5.6 लाख टका टैक्स दिया. शेयरों में भी दोनों का मिलकर कुछ निवेश है, जिसमें लगभग 5 लाख रुपये से अधिक का शेयर और अन्य कंपनियों में 18.5 लाख रुपये का निवेश शामिल है. हलफनामे में यह भी उल्लेख है कि 2004 से अब तक दर्ज 77 कानूनी मामलों में उन्हें पूरी तरह से बरी कर दिया गया है.

‘उम्मीदों और लोकतंत्र की जीत’—तारिक रहमान का बड़ा बयान

ढाका बांग्लादेश चुनाव में मिली बंपर जीत के बाद पहली बार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) चीफ तारिक रहमान ने मीडिया के सामने देशवासियों का आभार जताया। उन्होंने इसे देश, लोकतंत्र और जनता की उम्मीदों की जीत करार दिया। बांग्ला संबोधन में रहमान ने कहा, “यह जीत बांग्लादेश की है, डेमोक्रेसी की है, और लोगों की उम्मीदों की है। मैं बांग्लादेश के लोगों को डेमोक्रेसी स्थापित करने में आई रुकावटों को पार करने के लिए बधाई देता हूं।” उन्होंने आगे कहा, “फासीवादी सरकार द्वारा संविधान और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की अनदेखी नाकाम हो गई है। हमारी सरकार अब पूरे देश में कानून और पक्की सुरक्षा व्यवस्था करेगी।” उन्होंने सत्ता की जवाबदेही का भरोसा दिलाया। बोले, “देश में डायरेक्ट वोटिंग के जरिए लोगों के प्रति जवाबदेह संसद और सरकार फिर से बनाई जा रही है। यह पक्का करने के लिए कि कोई भी बुरी ताकत देश में तानाशाही फिर से न ला सके और यह पक्का करने के लिए कि देश गुलाम देश न बन जाए, हमें एकजुट रहना होगा और लोगों की इच्छा का सम्मान करना होगा।” बीएनपी चेयरमैन तारिक रहमान ने आगे कहा, “बांग्लादेश के लोगों का बीएनपी पर दिखाया गया भरोसा दिखाता है कि नागरिकों का हम पर पूरा विश्वास है। इस भरोसे के जरिए, हम सभी बांग्लादेशियों के विकास और तरक्की के लिए अथक काम करेंगे। हमारे रास्ते और राय अलग हो सकते हैं, लेकिन देश हित में हमें एकजुट रहना होगा। मेरा पक्का मानना ​​है कि देश की एकता हमारी सामूहिक ताकत है।” तारिक रहमान ने विदेशी प्रेस से बात करते हुए अपनी मां और देश की पूर्व पीएम खालिदा जिया को भी याद किया। सभी पार्टियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि देश खालिदा जिया को बहुत याद कर रहा है। यह लोगों का जनादेश है और हम आप सभी को बधाई देते हैं। बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव हुए थे। कुल 297 सीटों के परिणाम घोषित किए गए। इनमें सबसे बड़ी पार्टी के रूप में बीएनपी उभरी। जिसने 209 सीटें हासिल की। गठबंधन को कुल 212 सीटें मिलीं। नतीजतन एक बार फिर बांग्लादेश में बीएनपी सत्ता में वापसी कर रही है।

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री पद की शपथ के करीब तारिक रहमान, 4 साल की उम्र की जेल से पहुंचे राष्ट्रीय नेता तक

ढाका  बांग्लादेश में आम चुनाव के बाद राजनीतिक तस्वीर तेजी से साफ होती दिख रही है. मतगणना के बीच बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने जीत का दावा किया है और कई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि 300 सदस्यीय संसद में पार्टी 151 से ज्यादा सीट हासिल कर चुकी है, जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त मानी जाती है. हालांकि निर्वाचन आयोग की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और कुछ सीटों के नतीजे आने बाकी हैं. बीएनपी ने सोशल मीडिया पर कहा कि वह बहुमत के साथ सरकार बनाने के लिए तैयार है. 200 से ज्यादा सीटों पर बढ़त की भी खबर है. चुनाव जीतने वाली पार्टी उस अंतरिम प्रशासन की जगह लेगी, जिसने अगस्त 2024 में आवामी लीग सरकार के हटने के बाद सत्ता संभाली थी. इसी बीच यह भी खबर है कि पार्टी प्रमुख तारिक रहमान शनिवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. बांग्लादेश चुनाव BNP के जीतने के साथ ही विदेशों से प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रहमान को जीत पर बधाई देते हुए कहा कि यह बांग्लादेश की जनता के उनके नेतृत्व पर भरोसे को दिखाता है और भारत साझा विकास लक्ष्यों पर साथ काम करने को तैयार है. अमेरिका ने भी चुनाव को सफल बताते हुए शुभकामनाएं दी हैं. वहीं पाकिस्तान के नेतृत्व की ओर से भी बधाई संदेश भेजे गए हैं. बांग्लादेश चुनाव को बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधी टक्कर माना गया, क्योंकि आवामी लीग मैदान में नहीं थी. जमात ने मतगणना में देरी और हेरफेर के आरोप लगाए हैं और चेतावनी दी है कि जनादेश छीना गया तो बड़ा आंदोलन होगा. नेशनल सिटिजन पार्टी ने भी कुछ सीटों पर धांधली के आरोप लगाए. दूसरी ओर निर्वाचन आयोग ने मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नतीजों में उतार-चढ़ाव सामान्य है. गुरुवार को देशभर में 299 सीटों पर मतदान गुरुवार सुबह 7:30 बजे शुरू होकर शाम 4:30 बजे तक चला, जिसके बाद तुरंत मतगणना शुरू कर दी गई. चुनाव के दौरान व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए और करीब 10 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई, जिसे अब तक की सबसे बड़ी चुनावी तैनाती माना जा रहा है. आयोग के अनुसार हजारों केंद्रों से अलग-अलग समय पर नतीजे आने के कारण अंतिम तस्वीर बनने में वक्त लग रहा है. बीएनपी पिछली बार 2001 से 2006 के बीच सत्ता में रही थी. पार्टी ने पहले ही साफ किया था कि जीत मिलने पर तारीक रहमान प्रधानमंत्री बनेंगे. करीब 17 साल विदेश में रहने के बाद पिछले साल देश लौटे रहमान ने समर्थकों से जश्न के बजाय संयम रखने और दुआ करने की अपील की है. फिलहाल आधिकारिक नतीजों की घोषणा का इंतजार है, लेकिन शुरुआती संकेत बताते हैं कि बांग्लादेश की राजनीति में एक नया दौर शुरू होने की तैयारी है. 4 साल की उम्र में जेल से PM की कुर्सी तक बांग्लादेश के 2026 के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की ऐतिहासिक जीत में तारिक रहमान की रणनीतिक और करिश्माई भूमिका ने केंद्रबिंदु की तरह काम किया। लंबे निर्वासन और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने पार्टी को एकजुट किया, युवा मतदाताओं को आकर्षित किया और जनसमर्थन की नई लहर खड़ी की। यह जीत सिर्फ बीएनपी की नहीं, बल्कि तारिक रहमान की नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक दृष्टि का प्रतीक बनकर उभरी है। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि बांग्लादेश की राजनीति दशकों से दो मुख्य पारिवारिक‑राजनीतिक धारणाओं के बीच घूमती रही है। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत खालिदा जिया की विरासत के बीच। ऐसे में 2026 के चुनावों में बीएनपी की जीत और तारिक रहमान की उभरती भूमिका यह संकेत देती है कि अब देश का नेतृत्व एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर सकता है।  पहले तारिक रहमान के बारे में जानिए 20 नवंबर 1965 को जन्मे तारिक रहमान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता और पार्टी के चेयरमैन हैं। वह पार्टी की सर्वोच्च राजनीतिक इकाई का नेतृत्व करते हैं। उन्होंने ढाका यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना शुरू किया। वे बांग्लादेश के इतिहास में एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता जिया उर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति और स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे, जिनकी 1981 में हत्या हो गई थी। उनकी मां बेगम खालिदा जिया 1991 से 1996 व 2001 से 2006 तक बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं और बीएनपी की प्रमुख चेयरपर्सन थीं। अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों से ही तारिक अपने परिवार की राजनीति में शामिल रहे हैं और बीएनपी के भीतर स्थायी भूमिका निभाई है।  जब चार साल की उम्र में जेल गए थे तारिक तारिक रहमान, जिन्हें बांग्लादेश की राजनीति में अक्सर तारिक जिया कहा जाता है, अपने परिवार के नाम से ही पहचान रखते हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान वे केवल चार साल के थे और कुछ समय के लिए हिरासत में भी रहे। इसी वजह से उनकी पार्टी बीएनपी उन्हें युद्ध के सबसे कम उम्र के बंदियों में शामिल बताकर सम्मान देती है। उनकी राजनीतिक पहचान भी इसी पारिवारिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ी है। छोटे उम्र में संघर्ष और परिवार की विरासत ने उन्हें बांग्लादेश की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा बना दिया।  अब तारिक रहमान की मां खालिदा जिया के बारे में जानिए तारिक रहमान की मां और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने 3 जनवरी 1982 को पहली बार बीएनपी के सदस्य के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। बाद में वे बीएनसपी की अध्यक्ष बनीं और अपनी मौत तक वह इस पद पर रहीं। बांग्लादेश में सैन्य शासन के खिलाफ खालिदा जिया एक प्रमुख आवाज बनकर उभरीं। लोगों को सैन्य शासन के खिलाफ एकजुट करने में खालिदा जिया ने अहम भूमिका निभाई।  जिया 1991 में पहली बार बनीं पीएम खालिदा जिया साल 1991 में पहली बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। इसके साथ ही बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव भी हासिल किया। इसके बाद साल 2001 से 2006 तक दूसरी बार भी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं। बताते चले कि खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1946 को अविभाजित भारत के दिनाजपुर जिले … Read more

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