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मध्यप्रदेश में टैक्स वृद्धि की संभावना, 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं दरें

भोपाल  भोपालवासियों पर टैक्स वृद्धि की मार पड़ सकती है। 23 मार्च को नगर निगम का बजट आएगा, जिसमें वाटर-सीवेज और प्रॉपर्टी टैक्स में बढ़ोतरी की संभावना है। बताया जा रहा है कि योजना आयोग ने आमदनी बढ़ाने के लिए हर साल टैक्स बढ़ाने की सलाह दी है। लिहाजा नगर निगम के वाटर टैक्स और सीवेज चार्ज में बढ़ोतरी हो सकती है। बजट राशि एवं अनुदान राशियों पर चर्चा के लिए महापौर परिषद ने इसे पारित कर दिया है। अब नगर परिषद की बैठक में बहुमत के आधार पर फैसला होगा। आने वाले समय में शहर की जनता की जेब पर कर का बोझ बढऩे वाला है। नगर निगम विभागीय वर्ष 2026-27 के लिए 23 मार्च को बजट प्रस्तुत करने जा रहा है। निगम प्रबंधन योजना आयोग की अनुशंसा को आधार बनाकर इस बजट में भी प्रॉपर्टी, वाटर और सीवेज जैसे मदों में टैक्स में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि करने की तैयारी में है। हालांकि इस प्रस्ताव पर ज्यादातर पार्षद और एमआइसी सदस्य राजी नहीं हैं। निगम का तर्क है, योजना आयोग आय बढ़ाने हर साल बजट में टैक्स बढ़ाने की सलाह दी है। भोपाल में बीते वर्ष ही प्रॉपर्टी टैक्स में 10 प्रतिशत वाटर टैक्स एवं सीवेज चार्ज में 15 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। निगम ने विभागीय वर्ष 2025-26 के लिए 3611 करोड़ 79 लाख रुपए का बजट का बजट पेश किया था। सबसे महंगा-सबसे सस्ता टैक्स परिक्षेत्र क्रमांक 1 से 7 में तय होने वाले संपत्ति के वार्षिक भाड़ा मूल्य के आधार पर अरेरा कॉलोनी-एमपी नगर में सबसे महंगा व बैरसिया के अररिया में सबसे सस्ता प्रॉपर्टी टैक्स है। दरें सामान रहेंगी। विकास निधि: निगम के सभी जनप्रतिनिधियों की विकास निधि दोगुनी हो चुकी है। इसमें वृद्धि नहीं होगी। महापौर 10 करोड़, निगम अध्यक्ष 5 करोड़, महापौर परिषद सदस्य 1 करोड़, वार्ड नियोजन 50 लाख, जोन अध्यक्ष 10 लाख सालाना खर्च कर सकेंगे। इस बार नगर निगम द्वारा बजट में खर्च कम करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही उलझनों से बचने के लिए बजट में मदों को घटा दिया गया है। कई विभागों के खर्च कम किए गए हैं और उनकी सीमा भी तय कर दी गई है। पहले जनसंपर्क प्रकोष्ठ के बजट की सीमा निर्धारित नहीं थी पर अब यह प्रावधान खत्म कर दिया है।

इंदौर में खुले हवा पर टैक्स, निगम वसूलेगा MOS टैक्स, 4000 तक की अतिरिक्त लागत हो सकती है

इंदौर मकान बनाते समय व्यक्ति भूखंड के कुछ हिस्से को इसलिए खाली छोड़ता है ताकि उस रास्ते घर में हवा-पानी आ सके, लेकिन अब नगर निगम ने इसी खाली रास्ते (मार्जिनल ओपन स्पेस) (एमओएस) पर कर लगाने की तैयारी कर ली है। अगर ऐसा हुआ तो संपत्तिधारकों पर 500 रुपये से लेकर चार हजार रुपये प्रतिवर्ष का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। इधर कांग्रेस ने इस प्रस्तावित कर का विरोध शुरू कर दिया है। मंगलवार को कांग्रेस पार्षदों ने निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के कार्यालय का घेराव किया। उन्होंने मांग की कि एमओएस कर को रोका ए। ऐसा नहीं किया गया तो कांग्रेस आमजन के समर्थन में सड़क पर उतरेगी। कांग्रेस ने प्रदर्शन करते हुए निगमायुक्त को ज्ञापन सौंपा और कर को वापस लेने की मांग की। कांग्रेस ने निगमायुक्त को सौंपा ज्ञापन नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष और इंदौर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ निगमायुक्त कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए कांग्रेस ने मांग रखी कि, मकानों में छोड़े गए खुले स्थान (एमओएस) पर टैक्स लगाने का फैसला सरासर गलत है। इसे वापस लिया जाना चाहिए। निगम इस टैक्स की वसूली को नहीं रोकेगा तो कांग्रेस आमजन के साथ सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करेगी। गांधीवादी तरीके से विरोध की तैयारी उन्होंने कहा कि, निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जहां भी इस खुले स्थान के टैक्स को वसूलने के लिए जाएंगे, कांग्रेसी वहां पहुंचकर उनका विरोध करेंगे। हमारा विरोध पूरी तरह से गांधीवादी और शांतिपूर्ण रहेगा। नगर निगम के माध्यम से हर मकान के खुले स्थान पर संपत्ति कर लगाना मनमानी है। ऐसी मनमानी का कांग्रेस हर स्तर पर विरोध करेगी। ज्ञापन देने वालों में पार्षद दीपू यादव, सीमा सोलंकी, सेफू वर्मा , सोनीला मिमरोट, राजू भदोरिया, अमित पटेल, सुदामा चौधरी, राजेश चौकसे आदि शामिल थे। वर्ष 2020 में मिली थी अनुमति राज्य शासन ने वर्ष 2020 में स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एमओएस टैक्स की अनुमति दी थी। हालांकि पिछले पांच वर्ष से इसे लागू नहीं किया जा सका।  

संपत्ति कर का दायरा बढ़ा: 9 साल बाद 10 हजार नई प्रॉपर्टी जुड़ेंगी, निगम को होगा फायदा

खंडवा नगरीय क्षेत्र में जीआईएस ( ज्योग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम ) यानी भौगोलिक सर्वे के दौरान 10 हजार से अधिक नई संपत्तियां मिलीं हैं। नई संपत्तियां एक अप्रेल से टैक्स के दायरे में आ जाएंगी। निगम ने नौ साल बाद नई संपत्तियों को टैक्स लगाने की कार्य योजना तैयार की है। सर्वे में मिलीं 10 हजार नई संपत्तियां नगरीय क्षेत्र में जीआईएस ( ज्योग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम ) यानी भौगोलिक सर्वे के दौरान 10 हजार से अधिक नई संपत्तियां मिलीं हैं। नई संपत्तियां एक अप्रेल से टैक्स के दायरे में आ जाएंगी। निगम ने नौ साल बाद नई संपत्तियों को टैक्स लगाने की कार्य योजना तैयार की है। जिसे एमआईसी फाइनल टच देगी। टैक्स शुरु होने से निगम की आय हर साल एक से डेढ़ करोड़ रुपए बढ़ने की उम्मीद है। निगम की डिमांड 11.50 करोड़ से बढ़कर 13 करोड़ रुपए हो जाएगी। वर्ष 2017 के बाद 2026 में नई संपत्तियां नगर निगम ने वर्ष 2017 के बाद नई संपत्तियों पर वर्ष 2026 में टैक्स लगाने का ब्लू प्रिंट तैयार किया है। सर्वे का कार्य 8 फरवरी-2025 को शुरु हुआ था। इस दौरान 10 हजार 887 नई संपत्तियां दर्ज की गईं हैं। निगम ने इन संपत्तियों का डिटेल सर्वे तैयार किया है। अभी 46,346 संपत्तियों टैक्स के दायरे में हैं। इन संपत्तियों से करीब 11.50 करोड़ रुपए टैक्स की डिमांड है। अब नई संपत्तियों को मिलाकर एक से डेड़ करोड़ रुपए नया टैक्स जनरेट होगा।

निगम परिषद में कलेक्टर गाइड लाइन पर तीखी बहस, ग्वालियर में पुरानी दर से ही होगी टैक्स वसूली

ग्वालियर. वित्तीय वर्ष 2026-27 में कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार निगम कमिश्नर के संपत्तिकर की दरों के निर्धारण के प्रस्ताव पर शुक्रवार को नगर निगम परिषद की बैठक में चर्चा हुई। सभी पार्षदों ने एकजुट होकर प्रस्ताव का विरोध किया। विरोध को देखते हुए सभापति ने प्रस्ताव को वापस कर दिया और जनता को राहत देते हुए संपत्तिकर को पुरानी गाइड लाइन से ही वसूलने निर्णय लिया। हालांकि, संपत्तियों की बोगस आइडियों को लेकर सत्ता पक्ष व प्रतिपक्ष के पार्षदों में काफी बहस भी हुई और एक दूसरे पर कई तरह के आरोप भी लगाए। यहां तक कि बहस में अमर्यादित शब्दों का भी उपयोग हुआ। नगर निगम परिषद की बैठक शुक्रवार को दोपहर तीन बजे से स्थानीय जलविहार स्थित परिषद भवन में आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता पैनल सभापति गिर्राज कंषाना ने की। बता दें कि 26 फरवरी को हुए परिषद के विशेष सम्मेलन के एजेंडे में कमिश्नर के 2026-27 की कलेक्टर गाइड लाइन के मुताबिक संपत्तिकर की दरों के निर्धारण करने का प्रस्ताव शामिल था, लेकिन 26 फरवरी को इस इस बिंदु पर चर्चा नहीं हो पाई थी और इस पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को विशेष सम्मेलन बुलाया गया। संपत्तियों की ID व राजस्व बढ़ाने पर अधिक चर्चा सम्मेलन में सत्ता पक्ष व प्रतिपक्ष ने एजेंडे के बिंदु पर तो कम चर्चा की, बल्कि शहर की बोगस संपत्तियों की ID हटाने, 40 प्रतिशत शहर जो संपत्तिकर के दायरे में नहीं हैं, उन्हें दायरे में लाने और पुराने ठहरावों पर अमल कराने पर अधिक बहस की। दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे। यहां तक कि कुछ प्रतिपक्ष के नेताओं ने तो सत्ता पक्ष, महापौर, एमआइसी व अफसरों पर भ्रष्टाचार करने व झूठी जानकारी देने के भी आरोप लगाए। हालांकि, सत्ता पक्ष प्रतिपक्ष के आरोपों का जवाब नहीं दे पाया। ऐसे में प्रतिपक्ष हावी रहा। किसने क्या कहा  – नेता प्रतिपक्ष हरिपाल ने कहा कि संपत्तियों की बोगस आइडियों को हटाने व नई ID बनाने के लिए 20 जुलाई 2023 व 19 जुलाई 2024 की बैठकों में ठहराव हुआ था, लेकिन निगम के अफसरों ने इसका अमल नहीं किया। अब जनवरी में इसका आदेश जारी किया है। ऐसे में निगम को राजस्व की हानि हो रही है। साथ ही शहर की 40 प्रतिशत संपत्तियां ऐसी हैं जिनसे कर वसूल नहीं किया जाता। इन संपत्तियों को वसूली के दायरे में लाया जाए। नई गाइड लाइन के मुताबिक संपत्तिकर वसूलने की जगह पुरानी दरों से ही वसूला जाए।     -भाजपा पार्षद देवेंद्र राठौर ने कहा कि संपत्तियों की ID न बनने से निगम को राजस्व की हानि हो रही है। साथ ही राजस्व वसूली न करने वालों पर सख्ती की जाए, ये संपत्तिकर वसूलने में कोताही बरतते हैं। इनकी तीन-तीन मंजिला कोठी बन गई हैं। राजस्व वसूली में 80 प्रतिशत इनकी जेब में जाता है। आइडी बनाने के भी पांच से दस हजार लेते हैं। पुराने ठहरावों पर अमल किया जाए।     – कांग्रेस पार्षद मनोज राजपूत ने BJP पार्षदों पर आरोप लगाया कि आपकी तानाशाही चल रही है, जबकि शहर में विकास हो रहा है और ग्वालियर बदल रहा है। भाजपा पार्षद विकास की नहीं, बल्कि उलझाने की बात करते हैं। संपत्तिकर को पुरानी गाइड लाइन से ही वसूल किया जाए।     – मदनमोहन सोनी ने कहा कि पुराने ठहराव 56 व 142 के पालन में निगम अफसरों क्या किया। ठहराव होने के दो साल में कितनी बोगस आइडी हटाई और कितनी बनाई, इसका बात का डेटा अफसरों को देना चाहिए। तभी पता चलेगा कितना काम हुआ है। पोर्टल की कमियों को दूर किया जाए, क्योंकि वहां संपत्तिकर दो साल का जमा होना है, लेकिन उस पर निकल छह साल का रहा है। नेता प्रतिपक्ष के अमर्यादित बोल -‘…आपको नहीं मिलेगी MIC’ कांग्रेस पार्षद मनोज राजपूत के प्रतिपक्ष पर विकास में सहयोग न करने के आरोप पर नेता प्रतिपक्ष हरिलाल ने उनसे अमर्यादित शब्दावली में कहा, ‘आपको MIC नहीं मिलेगी।’ हालांकि, नेता प्रतिपक्ष के इस कथन के बाद परिषद में अन्य पार्षदों ने थोड़ा हंगामा किया और उन्हें मर्यादित शब्दों का उपयोग करने के लिए कहा।

टैक्स का भुगतान ऑनलाइन करने पर सरकार देगी 100% छूट, जानें पूरी जानकारी

भोपाल  एमपी में भोपाल नगर निगम ने करदाताओं से अपील की है कि वे वित्तीय वर्ष 2024-25 का सपत्तिकर, जल प्रभार और अन्य करों का भुगतान 31 मार्च तक अनिवार्य रूप से करें। 31 मार्च तक भुगतान नहीं किया तो 1 अप्रेल से करदाताओं को दोगुना राशि चुकानी पड़ेगी। सरकार ने 31 मार्च तक संपत्तिकर, जल प्रभार और अन्य उपभोक्ता प्रभार की ऑनलाइन राशि जमा करने पर 100 प्रतिशत तक की विशेष छूट दी है। जुर्माने से बचने के लिए करें भुगतान सरकार ने 31 मार्च तक संपत्तिकर, जल प्रभार और अन्य उपभोक्ता प्रभारों के ऑनलाइन भुगतान पर 100 प्रतिशत की विशेष छूट देने का ऐलान किया है। यह योजना उन सभी करदाताओं के लिए एक बड़ा लाभ लेकर आई है, जो ऑनलाइन माध्यम से कर का भुगतान करना चाहते हैं। भोपाल नगर निगम ने इसे लेकर करदाताओं से अपील की है कि वे 31 मार्च तक इन करों का भुगतान अनिवार्य रूप से कर दें, ताकि किसी भी प्रकार के जुर्माने से बचा जा सके। 100 प्रतिशत छूट की योजना सरकार ने इस योजना के तहत उन नागरिकों को 100 प्रतिशत की छूट देने की घोषणा की है। 31 मार्च तक संपत्तिकर, जल प्रभार और अन्य उपभोक्ता प्रभारों का ऑनलाइन भुगतान करेंगे। अगर कोई करदाता 31 मार्च तक अपनी देय राशि का भुगतान नहीं करता है, तो 1 अप्रैल से उसे दोगुनी राशि चुकानी पड़ेगी। यह विशेष छूट नागरिकों को राहत देने के लिए है, ताकि वे समय पर अपना कर चुकता कर सकें और किसी प्रकार की अतिरिक्त राशि से बच सकें। ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया ऑनलाइन कर भुगतान के लिए नगर निगम ने एक आसान प्रक्रिया तैयार की है। करदाता नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट www.bhopalmunicipal.com पर जाकर सीधे संपत्तिकर भुगतान सेक्शन में जा सकते हैं। यहां पर अपनी प्रॉपर्टी आईडी दर्ज करने के बाद वे अपनी देय राशि की जांच कर सकते हैं। भुगतान के लिए डेबिट/क्रेडिट कार्ड, UPI, नेट बैंकिंग जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं। भुगतान पूरा होने के बाद करदाता को एक रसीद मिलेगी, जिसे उन्हें डाउनलोड करके सुरक्षित रखना होगा। ऑफलाइन भुगतान की सुविधा जो लोग ऑफलाइन तरीके से कर जमा करना चाहते हैं, उनके लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। भोपाल नगर निगम के सभी जोन और वार्ड कार्यालय 31 मार्च तक खुले रहेंगे। करदाता सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कार्यालयों में जाकर संपत्तिकर, जल प्रभार और अन्य करों का भुगतान कर सकते हैं। यह सुविधा उन लोगों के लिए है जो ऑनलाइन भुगतान नहीं कर पाते हैं या ऑफलाइन भुगतान की सुविधा लेना चाहते हैं। भोपाल नगर निगम की अपील भोपाल नगर निगम ने करदाताओं से यह अपील की है कि वे समय पर अपना कर जमा कर दें, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार का जुर्माना न चुकाना पड़े। निगम ने चेतावनी दी है कि 31 मार्च के बाद सभी करों में दोगुना शुल्क लिया जाएगा। इसीलिए नगर निगम ने करदाताओं से 31 मार्च तक भुगतान करने की अपील की है, ताकि कोई भी नागरिक अतिरिक्त शुल्क से बच सके।

संपत्ति कर, जल प्रभार एवं अन्य उपभोक्ता प्रभार के अधिभार में उपभोक्ताओं को छूट का निर्णय

भोपाल  नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 की अवधि में संपत्ति कर, जल प्रभार एवं अन्य उपभोक्ता प्रभार के अधिभार में उपभोक्ताओं को छूट देने का निर्णय लिया है। यह छूट उपभोक्ताओं को 31 मार्च तक ऑनलाइन भुगतान की दशा में की जाएगी। इस संबंध में विभाग ने नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर परिषद को पत्र लिखकर निर्देश जारी किए हैं। आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास ने बताया कि वर्ष 2024-25 वित्तीय वर्ष की कर वसूली 31 मार्च तक ही हो सकेगी। वर्तमान में 15वें वित्त आयोग की शर्तों के अनुसार प्रतिवर्ष संपत्ति कर की वसूली में राज्य की ग्रास स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीएसडीपी) की औसत वृद्धि के अनुरूप वृद्धि किया जाना अनिवार्य है। इस स्थिति को देखते हुए वृद्धि न किए जाने की स्थिति में संबंधित नगरीय निकायों को 15वें वित्त आयेाग के अनुदान से वंचित होना पड़ सकता है। नगरीय निकायों को अपने क्षेत्र के उपभोक्ताओं को समस्त प्रकार के करों की वसूली नियत समय में किए जाने के लिए जागरूक करने के लिए कहा गया है। नागरिक इस संबंध में विस्तृत जानकारी अपने क्षेत्र के नगरीय निकाय के वार्ड कार्यालय से भी प्राप्त कर सकते हैं।

शुद्ध प्रत्यक्ष करीब 15% बढ़ा, हो गया 17.78 लाख करोड़ रुपये, जानिए कितना जारी किया गया रिफंड

नई दिल्ली चालू वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.69 प्रतिशत बढ़कर 17.78 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक शुद्ध गैर-कॉर्पोरेट करों से संग्रह जिसमें मुख्य रूप से व्यक्तिगत आयकर शामिल है जो प‍िछले साल के मुकाबले 21 प्रतिशत बढ़कर लगभग 9.48 लाख करोड़ हो गया। 1 अप्रैल, 2024 से 10 फरवरी, 2025 के बीच शुद्ध कॉर्पोरेट कर संग्रह 6 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 7.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। इस वित्त वर्ष में अब तक प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) से शुद्ध संग्रह 65 प्रतिशत बढ़कर 49,201 करोड़ रुपये हो गया है। इस अवधि के दौरान 4.10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रिफंड जारी किए गए जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 42.63 प्रतिशत अधिक है। 10 फरवरी तक सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 19.06 प्रतिशत बढ़कर 21.88 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान (आरई) में सरकार ने कुल आयकर संग्रह 12.57 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है जो बजट अनुमान 11.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इस वित्त वर्ष में एसटीटी से संग्रह 55,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो बजट अनुमान (बीई) 37,000 करोड़ रुपये से अधिक है। कॉरपोरेट कर संग्रह लक्ष्य को संशोधित कर 9.80 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है जो बजट लक्ष्य 10.20 लाख करोड़ रुपये से कम है। कुल मिलाकर, संशोधित अनुमान में प्रत्यक्ष कर संग्रह 22.37 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है जो बजट अनुमान के 22.07 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 7 फरवरी को नए आयकर विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस सप्ताह लोकसभा में नया प्रत्यक्ष कर विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है। नया कर विधेयक देश की कर प्रणाली में सुधार के एक बड़े प्रयास का हिस्सा है और इसका उद्देश्य मौजूदा कर ढांचे में सुधार करके इसे और अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।

केंद्र सरकार ने राज्यों को जारी किए 1.73 लाख करोड़ रुपये, यह आंकड़ा दिसंबर 2024 में जारी किए रुपये के हस्तांतरण से अधिक

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने आज राज्य सरकारों को कर में हिस्सेदारी के रूप में 1,73,030 करोड़ रुपये जारी किए। यह आंकड़ा दिसंबर 2024 में जारी किए 89,086 करोड़ रुपये के हस्तांतरण से अधिक है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस महीने में किया गया अधिक हस्तांतरित राज्यों को पूंजीगत व्यय में तेजी लाने और विकास एवं कल्याण संबंधी खर्च को फाइनेंस करने में मदद करेगा। शुक्रवार को घोषित पैकेज के तहत 26 राज्यों को पैसे जारी किए गए हैं। इसमें पश्चिम बंगाल के लिए 13,017.06 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश के लिए 7,002.52 करोड़ रुपये, कर्नाटक के लिए 6,310.40 करोड़ रुपये, असम के लिए 5,412.38 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ के लिए 5,895.13 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश के लिए 1,436.16 करोड़ रुपये, केरल के लिए 3,330.83 करोड़ रुपये, पंजाब के लिए 3,126.65 करोड़ रुपये और तमिलनाडु के लिए 7,057.89 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। अन्य राज्यों में उत्तर प्रदेश को 31,039.84 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 10,930.31 करोड़ रुपये, गुजरात को 6,017.99 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश को 13,582.86 करोड़ रुपये, मणिपुर को 1,238.9 करोड़ रुपये और मेघालय को 1,327.13 करोड़ रुपये दिए गए हैं। कर हस्तांतरण केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए करों की शुद्ध आय को राज्यों को वितरित करने की प्रक्रिया है। केंद्र सरकार वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर नियमित किस्तों में राज्यों को कर वितरित करती है। वित्त आयोग कॉरपोरेट कर, आयकर और केंद्रीय जीएसटी सहित सभी करों की कुल शुद्ध आय में राज्यों के हिस्से की सिफारिश करता है। 15वें वित्त आयोग ने सिफारिश की थी कि केंद्र सरकार के विभाज्य कर पूल का 41 प्रतिशत 2021-26 की अवधि के लिए राज्यों को आवंटित किया जाए। इसे वर्टिकल हस्तांतरण के रूप में जाना जाता है। इसने राज्यों के बीच धन वितरित करने के लिए मानदंड की भी सिफारिश की थी, जिसे हॉरिजॉन्टल हस्तांतरण के रूप में जाना जाता है।

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