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5000 शिक्षक पदों की भर्ती को मिली मंजूरी, छत्तीसगढ़ में जल्द शुरू होगी प्रक्रिया

रायपुर  छत्तीसगढ़ में टीचर भर्ती को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जहां लंबे समय से स्कूल शिक्षा विभाग में भर्ती का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है। राज्य के स्कूलों में जल्द ही 5,000 टीचिंग पदों पर भर्ती होगी। इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से डायरेक्टरेट ऑफ़ पब्लिक इंस्ट्रक्शन को एक आदेश जारी कर दिया गया है। यदि पिछली भर्ती आदेश की बात करें तो छत्तीसगढ़ सरकार ने 28 अक्टूबर, 2025 को 4,708 शिक्षक भर्ती की अनुमति दी थी। अब, फरवरी के पहले हफ्ते ही राज्य सरकार के नया आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक 292 सहायक पदों के सृजन को भी मंजूरी दे दी गई है। इन पदों के साथ, कुल 5,000 टीचिंग पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। इस संबंध में लोकशिक्षण संचालनालय के संचालक को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। शिक्षा विभाग के इस फैसले से फैसले से न सिर्फ पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं को बड़ा लाभ मिलेगा, बल्कि राज्य के स्कूलों में टीचर की कमी भी पूरी होगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती के विरोध में प्रदर्शन, भविष्य की उम्मीदें बंधी!

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले ने एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है. इसे लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी आज यानी 2 फरवरी 2026 को लखनऊ में अपनी मांगो को पूरा करवाने के लिए को धरना प्रदर्शन करेंगे. इस मामले में अभ्यर्थियों का आरोप है कि ने कोई पहल नहीं कर रही जिस कारण से मामला इतना आगे चला गया है. इस केस की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में साल 2024 में सितंबर के महीने में हुई थी. उसके बाद से लगातार के इस मामले में तारीख पर तारीख मिल रही है. इस केस को लेकर अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी. लेकिन उससे पहले आरक्षित वर्ग के लोग अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए आज प्रदर्शन करने वाले हैं.  कौन कर रहा है प्रदर्शन का नेतृत्व  ऐसे में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने इसे लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा की इस केस को सुलझाने के लिए सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है. जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट से केवल तारीखें मिल रही हैं. इस दौरान उन्होंने बताया कि वे दो फरवरी से आंदोलन करेंगे. आंदोलन के शुरुआत में बनाए गए सभी जिला कोऑर्डिनेटर से ब्लाक लेवल पर संपर्क कर आने वाले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की लिस्ट बनाने को कहा गया है.  प्रदर्शकारियों का फूटा गुस्सा  ऐसे में इस केस को लेकर प्रदर्शकारियों में गुस्सा भरा पड़ा है. उन्होंने कहा कि ओबीसी आयोग और लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में है. इस केस पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाई कोर्ट डबल बेंच का फैसला सब हमारे पक्ष में है, लेकिन हमारे साथ अन्याय इसलिए हो रहा है क्योंकि हम पिछड़े और दलित समाज से आते हैं.  इतने सालों से चल रहा है संघर्ष वहीं, दूसरे प्रदर्शनकारी ने कहा कि  वो पिछले 6 सालों  से संघर्ष कर रहे हैं.सरकार से मांग करते हैं, लेकिन हमारी बातों को नहीं सुना जाता है. सुनवाई न होने के कारण सभी अभ्यर्थी आहत हैं. 

विद्यालयों में भाड़े के शिक्षक रखने वाले पांच शिक्षकों को कलेक्टर संदीप जीआर द्वारा कड़ी कार्रवाई करते हुए बर्खास्त किया गया

सागर  शासकीय विद्यालयों में भाड़े के शिक्षक रखने वाले पांच शिक्षकों को कलेक्टर संदीप जीआर द्वारा कड़ी कार्रवाई करते हुए बर्खास्त किया गया है। कलेक्टर के आदेश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने यह कार्रवाई की है। कलेक्टर ने बताया कि गत महीनों में  प्रशासन को विभिन्न समाचार माध्यमों से सूचना मिली थी कि जिले के अलग-अलग विद्यालयों में पांच शासकीय शिक्षक अपने स्थान पर भाड़े के शिक्षक रखकर शैक्षणिक कार्य करा रहे हैं। और इन समाचारों को आधार बना कर ऐसे शिक्षकों की जब जांच कराई गई तो यह आरोप सही पाए गए जिसके आधार पर सभी पांच शिक्षकों को बर्खास्त करने की कार्रवाई की गई है।  इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन ने बताया कि कलेक्टर संदीप जीआर के अनुमोदन के पश्चात् यह कार्रवाई की गई जिसमें सभी शिक्षकों की सेवाएं समाप्त की जाकर उन्हें बर्खास्त किया गया है। इन शिक्षकों को किया गया बर्खास्त मामले में अनिल मिश्रा प्राथमिक शिक्षक शा.प्रा. शा. रहली विकास खण्ड जैसीनगर जिला सागर, जानकी तिवारी प्राथमिक शिक्षक शास.एकी. माध्यमिक शाला बंजरिया विकास खण्ड जैसीनगर, अवतार सिंह ठाकुर प्राथमिक शिक्षक शा.प्रा.शा. कजरई विकास खण्ड खुरई, रूपसिंह चढ़ार प्राथमिक शिक्षक शास. एकी. माध्य. शाला भेलैया विकास खण्ड मालथौन और इन्द्र विक्रम सिंह परमार प्राथमिक शिक्षक शा.प्रा.शा.मंझेरा विकास खण्ड मालथौन पर कार्रवाई की गई है।   इनसे करवाते थे शिक्षण कार्य  जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी सेवा समाप्ति आदेश के अनुसार  शिक्षकों की जांच हेतु जांच दल गठित किया गया। जांच दल द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन का परीक्षण करने पर पाया गया कि शास. प्राथमिक शाला रहली विकास खण्ड जैसीनगर में पदस्थ अनिल मिश्रा प्राथमिक शिक्षक संस्था से अनुपस्थित पाए गए तथा संस्था के छात्रों द्वारा बताया गया कि अनिल मिश्रा सप्ताह में एक बार उपस्थित होते हैं एवं अपने स्थान पर भगवान दास सकवार को शैक्षणिक कार्य हेतु भाड़े पर रखा गया है। इसी प्रकार शास.एकी. माध्यमिक शाला बंजरिया विकास खण्ड जैसीनगर में पदस्थ जानकी तिवारी ने  गोकल प्रसाद प्रजापति को, शासकीय प्राथमिक शाला कजरई विकास खण्ड खुरई में पदस्थ अवतार सिंह ठाकुर ने  राहुल पंडित को, शासकीय एकीकृत माध्यमिक शाला भेलैया विकास खण्ड मालथौन में पदस्थ रूपसिंह चढ़ार ने  विक्रम सिंह लोधी को एवं शासकीय प्राथमिक शाला मंझेरा विकास खण्ड मालथौन में पदस्थ  इन्द्र विक्रम सिंह परमार ने ममता अहिरवार को अपने स्थान पर विद्यालय में शैक्षणिक कार्य हेतु भाड़े पर रखा हुआ था। जांच प्रतिवेदन निष्कर्ष अनुसार शासकीय गवाहों, प्रस्तुत अभिलेखों एवं तर्कों के आधार पर यह पाया गया है कि उक्त पांचों शिक्षक अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह हैं तथा संस्था में सप्ताह में एक दिन उपस्थित होते हैं एवं अपने स्थान शैक्षणिक कार्य हेतु भाड़े पर शिक्षकों को रखा है। उक्त शिक्षकों की विभागीय जांच के दौरान भी शासकीय साक्षियों द्वारा अभिलेख सहित पुष्टि की गई। जांचकर्ता अधिकारी के अभिमत अनुसार  उक्त शिक्षकों का यह कृत्य गंभीर कदाचरण, स्वैच्छाचारिता, शासकीय लोक सेवक के प्रतिकूल एवं आपराधिक श्रेणी का है, जो मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) 1965 के प्रावधानों के विपरीत होकर मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियत्रंण तथा अपील) नियम 1966 के तहत दण्डनीय भी है। 

युक्तियुक्तकरण : स्कूलों और शिक्षकों की व्यवस्था को इस तरह से सुधारना की छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित हो

रायपुर, छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा की व्यवस्था को बेहतर और ज्यादा प्रभावशाली बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया शुरू की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि जहां जरूरत है वहां शिक्षक उपलब्ध हों और बच्चों को अच्छी शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और बेहतर सुविधाएं मिल सकें। युक्तियुक्तकरण का मतलब है स्कूलों और शिक्षकों की व्यवस्था को इस तरह से सुधारना कि सभी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित हो और कोई भी स्कूल बिना शिक्षक के न रहे। वास्तविक स्थिति क्या है? राज्य की 30,700 प्राथमिक शालाओं में औसतन 21.84 बच्चे प्रति शिक्षक हैं और 13,149 पूर्व माध्यमिक शालाओं में 26.2 बच्चे प्रति शिक्षक हैं, जो कि राष्ट्रीय औसत से कहीं बेहतर है। हालांकि 212 प्राथमिक स्कूल अभी भी शिक्षक विहीन हैं और 6,872 प्राथमिक स्कूलों में केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है। पूर्व माध्यमिक स्तर पर 48 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और 255 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है। 362 स्कूल ऐसे भी हैं जहां शिक्षक तो हैं, लेकिन एक भी छात्र नहीं है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में 527 स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 10 या उससे कम है। 1,106 स्कूलों में यह अनुपात 11 से 20 के बीच है। 837 स्कूलों में यह अनुपात 21 से 30 के बीच है। लेकिन 245 स्कूलों में यह अनुपात 40 या उससे भी ज्यादा है, यानी छात्रों की दर्ज संख्या के अनुपात में शिक्षक कम हैं। युक्तियुक्तकरण के क्या होंगे फायदे? जिन स्कूलों में ज्यादा शिक्षक हैं लेकिन छात्र नहीं, वहां से शिक्षकों को निकालकर उन स्कूलों में भेजा जाएगा जहां शिक्षक नहीं हैं। इससे शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक वाले स्कूलों की समस्या दूर होगी। स्कूल संचालन का खर्च भी कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। एक ही परिसर में ज्यादा कक्षाएं और सुविधाएं मिलने से बच्चों को बार-बार एडमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी। यानी एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल संचालित होंगे तो प्राथमिक कक्षाएं पास करने के बाद विद्यार्थियों को आगे की कक्षाओं में एडमिशन कराने की प्रक्रिया से छुटकारा मिल जाएगा। इससे बच्चों को पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी। बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर (ड्रॉपआउट रेट) भी घटेगी। अच्छी बिल्डिंग, लैब, लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं एक ही जगह देना आसान होगा।   शिक्षा विभाग ने कतिपय शैक्षिक संगठनों द्वारा युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पर उठाए गए भ्रामक सवालों के संबंध में स्पष्ट किया है कि युक्तियुक्तकरण का मकसद किसी स्कूल को बंद करना नहीं है बल्कि उसे बेहतर बनाना है। यह निर्णय बच्चों के हित में, और शिक्षकों की बेहतर तैनाती के लिए लिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल राज्य की शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा सशक्त और संतुलित बनाएगी। युक्तियुक्तकरण से न सिर्फ शिक्षकों का समुचित उपयोग होगा, बल्कि बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी मिल सकेगी।

सीहोर में सरकारी टीचर ने पार की हदें, पाक सेना का किया सपोर्ट, शेयर किया वीडियो, अब भुगतना होगा अंजाम

 सीहोर सीहोर में एक सरकारी स्कूल की टीचर शहनाज परवीन को सस्पेंड कर दिया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी सेना के समर्थन में पोस्ट किया था। जिला शिक्षा अधिकारी संजय सिंह तोमर ने यह कार्रवाई की। टीचर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता का उल्लंघन करने का आरोप है। उनके इस काम को गलत माना गया है, इसलिए उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। टीचर शहनाज परवीन जावर की रहने वाली हैं। वह मेहतवाड़ा के सरकारी स्कूल में पढ़ाती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली थी। इस पोस्ट में उन्होंने पाकिस्तानी सैनिकों के लिए दुआ की थी। उन्होंने लिखा था कि पाकिस्तानी सैनिकों को अल्लाह अच्छा रखे। शिक्षिका ने शेयर किया था वीडियो दरअसल, जावर की रहने वाली शिक्षिका शहनाज परवीन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मेहतवाड़ा में बतौर शिक्षिका है. ऐसे में बजरंग दल की शिकायत पर जिला शिक्षा विभाग ने संज्ञान लिया. अब मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम के तहत उन पर गाज गिरी है. इस दौरान शिक्षिका शहनाज परवीन का मुख्यालय निलंबन अवधि में इछावर रखा गया है. टीचर को किया गया निलंबित सीहोर में सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी सेना के पक्ष में एक पाकिस्तानी यूजर का पोस्टर शेयर करने वाली सरकारी शिक्षिका को जिला शिक्षा अधिकारी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया है. दरअसल, सीहोर के जावर की रहने वाली शिक्षिका ने पाकिस्तान को सपोर्ट में एक वीडियो शेयर किया था जो देखते ही देखते वायरल हो गया. इस वीडियो में की सोशल मीडिया यूजर ने कमेंट भी किया था. इसके बाद शिक्षिका को जमकर ट्रोल किया जाने गया. वीडियो की भनक शिक्षा विभाग को लगी तो हड़कंप मच गया. फिर जिला शिक्षा अधिकारी ने उन्हें निलंबित कर दिया. सोशल मीडिया पर डाला था पोस्ट यह पोस्ट भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के सेक्शन 163 का उल्लंघन है। इस नियम के अनुसार, कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया पर गलत या बिना पुष्टि की हुई जानकारी नहीं फैला सकता। इसमें सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आते हैं। बजरंग दल ने की कार्रवाई की मांग बजरंग दल ने इस मामले में शिक्षा विभाग से शिकायत की थी। शिक्षा विभाग के डीईओ संजय सिंह तोमर ने टीचर के इस काम को गलत माना। उन्होंने शहनाज परवीन को सस्पेंड कर दिया। सस्पेंशन के दौरान शहनाज परवीन का मुख्यालय इछावर रहेगा। विभाग के अधिकारी का कहना शिक्षा विभाग के डीईओ संजय सिंह तोमर ने बताया कि बजरंग दल ने इस मामले में शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया था कि टीचर शहनाज परवीन ने पाकिस्तानी सेना के समर्थन में पोस्ट डालकर गलत काम किया है।

मोहन सरकार का बड़ा फैसला, अब शिक्षकों की लापरवाही सामने आने पर होगी वेतन में कटौती

 भोपाल  शिक्षा विभाग कार्यालय मे काम कर रहे शिक्षकों को अब स्कूल भेजे जाएंगे. इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं. वहीं ट्रांसफर के बाद ज्वाइन नहीं करने वाले शिक्षकों के खिलाफ जांच के भी निर्देश दिए गए हैं. दरअसल,  स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों की बैठक ली. उन्होंने कहा कि कई शिक्षक लोक शिक्षण संचालनालय, राज्य शिक्षा केंद्र, बोर्ड ऑफिस, जिला शिक्षा कार्यालय, बीआरसीसी और जनशिक्षक कार्यालयों में अटके हुए हैं. इन्हें कार्यमुक्त कर स्कूलों में भेजा जाएगा. इसके अलावा सभी शिक्षकों को अपने दैनिक कार्य समय और उपस्थिति को दर्ज करने के लिए शिक्षा पोर्टल 3.0 का उपयोग करना होगा. बिना पोर्टल पर उपस्थित के वेतन नहीं मिलेगा. जो शिक्षक निर्धारित समय सीमा के भीतर पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करते हैं, उनके खिलाफ आवश्यक जांच और कार्रवाई की जाएगी. ट्रांसफर के बाद ज्वाइन नहीं करने वालों की होगी जांच     बैठक में निर्देश दिए गए कि ऐसे शिक्षकों की सूची भी बनाई जाए, जिनका पहले ट्रांसफर हो चुका है या जो अतिशेष में थे, लेकिन उन्होंने स्कूल ज्वाइन नहीं किया। मंत्री ने साफ कहा कि इन मामलों में अब और लापरवाही नहीं चलेगी।     अब पोर्टल पर उपस्थिति, तभी वेतन : शिक्षकों के लिए यह भी अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपनी पूरी उपस्थिति शिक्षा पोर्टल 3.0 पर दर्ज करें। बिना उपस्थिति फीड किए वेतन नहीं मिलेगा। अब सरकारी स्कूलों से शिक्षक गायब नहीं रह पाएंगे मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। स्वयं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि प्रदेश के कुछ जिलों में शिक्षक नियमित रूप से स्कूल नहीं जाते, बल्कि उनकी जगह अन्य लोग पढ़ाने जाते हैं। इसके अलावा, कई शिक्षक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते हैं। इस स्थिति में सुधार लाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है ऐसे करेंगे सख्ती     शिक्षकों की उपस्थिति अब बायोमेट्रिक सिस्टम से दर्ज की जाएगी।     ‘सार्थक’ ऐप के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति ऑनलाइन ट्रैक की जाएगी।     इस ऐप की मदद से न सिर्फ लोकेशन की निगरानी होगी, बल्कि अन्य जरूरी गतिविधियों की भी जानकारी जुटाई जाएगी।     निर्देशों की अनदेखी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ वेतन में कटौती जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे। गैर हाजिरी पर लगेगी लगाम सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की गैरहाजिऱी पर लगाम लगाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने इस दिशा में एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत प्रदेश के लगभग चार लाख शिक्षकों की उपस्थिति अब ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। इसके लिए विभाग “सार्थक एप” का उपयोग करेगा। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होगी जुलाई में ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद जैसे ही स्कूल दोबारा खुलेंगे, शिक्षकों के लिए ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया जाएगा। इस बार उपस्थिति दर्ज करने के लिए चेहरा पहचान प्रणाली (फेस रिकग्निशन) का उपयोग होगा, जिससे उन शिक्षकों पर रोक लगेगी जो अपनी जगह किसी और को पढ़ाने भेजते हैं। उज्जैन और नरसिंहपुर जिलों में सबसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह प्रणाली सबसे पहले उज्जैन और नरसिंहपुर जिलों में लागू की जाएगी। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए हर जिले से दो-दो प्रोग्रामरों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति प्रदेश के कुल 99,145 स्कूलों में से सिर्फ 8,051 स्कूलों में ही विद्यार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जा रही है। इसका मतलब है कि 91,094 स्कूल अब भी इस अनिवार्य प्रणाली का पालन नहीं कर रहे हैं, जबकि यह व्यवस्था ऐच्छिक नहीं बल्कि आवश्यक रूप से लागू की गई थी। असफलता के पीछे का कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की यह व्यवस्था तीन बार यानि साल 2017, 2020 और 2022 में शिक्षा मित्र एप के माध्यम से लागू की गई, लेकिन हर बार असफल रही। शिक्षकों ने कभी स्मार्टफोन की कमी का हवाला दिया तो कभी नेटवर्क की समस्या का, जिससे यह प्रणाली कभी पूरी तरह से लागू नहीं हो सकी। अब नहीं होगी गड़बड़ी, उपस्थिति होगी सटीक ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पहले एम शिक्षा मित्र एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज की जाती थी। यह एप नेटवर्क न होने की स्थिति में भी उपस्थिति दर्ज कर लेता था और जैसे ही नेटवर्क मिलता, डेटा अपडेट हो जाता था। हालांकि, इस प्रक्रिया में कई बार गड़बडय़िां सामने आईं। अब इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए शिक्षकों की उपस्थिति सार्थक एप के माध्यम से दर्ज की जाएगी, जिसमें चेहरा पहचान कर उपस्थिति ली जाएगी। जुलाई से अनिवार्य होगी “सार्थक एप”   स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति “सार्थक एप” से सुनिश्चित की जाएगी। इसे इस बार बेहतर ढंग से लागू किया जाएगा और जुलाई से इसका उपयोग अनिवार्य कर दिया जाएगा। छुट्टी के लिए भी एप पर कर सकेंगे आवेदन सार्थक एप केवल उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे शिक्षक अपनी लोकेशन की जानकारी के साथ-साथ अन्य ज़रूरी कार्य भी कर सकेंगे। अब कर्मचारी व शिक्षक अवकाश के लिए आवेदन भी इसी एप के माध्यम से कर सकेंगे और शासन से होने वाला पत्राचार भी यहीं से किया जा सकेगा।

स्कूल की छात्रा को हुआ टीचर से प्यार, गुपचुप तरीके से कर ली शादी

अशोकनगर  देश में जहां गुरु को भगवान की संज्ञा दी जाती है और सम्मान के नजर से देखा जाता है ऐसे में अशोकनगर जिले में इस संबंध को बदनामी का मुंह देखना पड़ा। शहर के एक 35 वर्षीय शिक्षक ने अपने से लगभग आधी उम्र की छात्रा को स्कूल से भगा कर कोर्ट मैरिज कर ली। बाद में जब छात्रा के परिजन थाने पहुंचे तो मामला सामने आया। मामला शहर के वर्धमान स्कूल का है। यहां 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा को उसी स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक से प्रेम हो गया। दोनों ने मन ही मन शादी का भी प्लान कर लिया। जिसके बाद जैसे ही छात्रा 18 वर्ष की उम्र पार की तो स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक विनीत जैन ने उस भगा कर कोर्ट मैरिज कर ली। मामले का खुलासा तब हुआ जब छात्रा स्कूल से घर नहीं पहुंची। परेशान परिजन थाने पहुंचे तो वहां उन्हें मैरिड सर्टिफिकेट बता दिया गया कि दोनों शादी कर चुके हैं। परिजनों का कहना मामले पर छात्रा की मां बोली जब स्कूल के शिक्षक ही छात्राओं के साथ ऐसा करेंगे तो गरीब अपनी बेटियों को कैसे पढ़ाएंगे। इस मामले के शहर में फैलने के बाद सोशल मीडिया पर छात्र के माता और पिता का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें छात्रा के परिजन कहते दिख रहे हैं शिक्षक विनीत जैन लंबे समय से उनकी बच्ची के पीछे पड़ा था। उन लोगों ने उसे समझाया भी था लेकिन जैसे ही लड़की 18 वर्ष की आयु पार हुई तो उसने लड़की से भागकर शादी कर ली। ऐसे में यदि स्कूलों में शिक्षक ही बेटियों के साथ ऐसा करेंगे तो फिर गरीब अपनी बेटियों को किसके भरोसे स्कूल भेजेंगे। छात्रा के माता-पिता ने शिक्षक पर कार्रवाई की मांग की है।

प्रदेश में अब सरकारी स्कूलों के टीचर्स की अटेंडेंस चेहरा दिखाकर लगेगी

भोपाल  अब सरकारी स्कूलों से शिक्षक गायब नहीं रह पाएंगे। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने नई पहल की है। प्रदेश के करीब चार लाख शिक्षकों की उपस्थिति सार्थक एप के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज होगी। यह एप शिक्षकों की लोकेशन दर्ज करेगा साथ ही आनलाइन चेहरा दिखाई देने पर ही उपस्थिति लगेगी। गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलेंगे तो जुलाई से शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य कर दी जाएगी।     प्रदेश के 99,145 स्कूलों में से केवल 8,051 स्कूलों में ही शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति एम शिक्षा मित्र एप से दर्ज की जा रही है यानी 91,094 स्कूलों में इसका उपयोग ही नहीं हो रहा है।     जबकि यह व्यवस्था अनिवार्य की गई थी। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सवाल खड़े होते रहते हैं।     स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी इस बात को कई बार स्वीकार कर चुके हैं कि प्रदेश में कुछ जिलों में शिक्षक स्कूल नहीं जाते हैं।     उनके स्थान पर दूसरे लोग पढ़ाने जाते हैं। वहीं कुछ शिक्षक स्कूलों के निर्धारित समय पर नहीं पहुंचते हैं।     तीन बार व्यवस्था बनाई गई लेकिन फेल हो गई।     स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से वर्ष 2017, वर्ष 2020 और वर्ष 2022 में प्रयास किया।     ऑनलाइन उपस्थिति एम शिक्षा मित्र एप के जरिए शुरू की गई थी।     लेकिन शिक्षकों ने इस प्रक्रिया का विरोध किया।     कभी स्मार्ट फोन न होने तो कभी नेटवर्क न मिलने का बहाना बनाया गया।     ऑनलाइन उपस्थिति से कन्नी काटी जाती रही।     कई कारणों से यह प्रक्रिया ठीक से लागू नहीं हो पाई। नए एप में गड़बड़ियों को किया गया दूर     एम शिक्षा मित्र एप से उपस्थिति लगानी अनिवार्य की गई थी लेकिन इसके माध्यम से नेटवर्क मिलने पर ही उपस्थिति लगती थी।     इसमें लोकेशन व चेहरा पहचान कर उपस्थिति लगाने का विकल्प नहीं होने से बहुत गड़बड़ियां होती थीं। सार्थक एप में इन्हें दूर कर लिया गया है। अवकाश के लिए भी कर सकेंगे आवेदन     सार्थक एप की नई व्यवस्था में कर्मचारी व शिक्षक छुट्टी के लिए भी आवेदन कर सकेंगे और शासन से किसी भी प्रकार का कार्यालयीन पत्राचार इस एप से हो जाएगा।     दरअसल, सार्थक एप मध्य प्रदेश सरकार के पोर्टल से जुड़ा नवीनतम मोबाइल एप्लीकेशन है।     सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों की सार्थक एप के माध्यम से आनलाइन उपस्थिति दर्ज की जाएगी। इस बार इसे बेहतर तरीके से लागू किया जाएगा। जुलाई से यह अनिवार्य कर दिया जाएगा।     – उदय प्रताप सिंह, मंत्री, स्कूल शिक्षा विभाग  

एमपी में शिक्षकों का पुलिस वेरिफिकेशन हुआ अनिवार्य, फिर भी 4 हजार शिक्षकों का सत्यापन बाकी

भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में बच्चों के साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म जैसे बढ़ते मामलों पर रोक के लिए शिक्षकों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य हुआ। बावजूद इसके राजधानी के 95 प्रतिशत निजी स्कूल ऐसे हैं जहां अनजान शिक्षक हैं। स्कूलों ने करीब 4 हजार शिक्षकों की रिपोर्ट जिला शिक्षा विभाग को नहीं दी। ऐसे में बच्चों को पढ़ा रहे शिक्षकों से विभाग अनजान है। राजधानी में करीब 1200 निजी स्कूल हैं। इनमें चार से पांच हजार का स्टाफ है। पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य राजधानी के लिए निजी स्कूल में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के पुलिस वेरिफिकेशन को अनिवार्य कर दिया। आदेश जारी करते हुए तीन दिन में रिपोर्ट मांगी थी। इस मामले को एक साल से ज्यादा बीत गया। शिक्षक सत्र भी खत्म हो गया लेकिन निजी स्कूलों के स्टाफ और शिक्षकों के पुलिस वेरिफिकेशन से जुड़ी रिपोर्ट शिक्षा विभाग के पास नहीं पहुंची। आकस्मिक निरीक्षण कर होगी जांच निजी स्कूलों में स्टाफ सहित शिक्षकों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है। कितने शिक्षकों का वेरिफिकेशन हो पाया इसकी रिपोर्ट नहीं मिली है। इसे जांचने स्कूलों का आकस्मिक निरीक्षण कर जांच होगी। अगर कहीं यह सत्यापन नहीं हुआ तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।- नरेन्द्र अहिरवार, जिला शिक्षा अधिकारी

स्कूल प्रिंसिपल ने महिला शिक्षिका से शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया, दी स्कूल में ही मारकर दफनाने की धमकी

बड़वानी  स्कूल शिक्षा का मंदिर होता है लेकिन हवस की आग में तड़प रहे प्रिंसिपल ने महिला टीचर को ही अपना शिकार बनाने का प्रयास किया। उसने धमकी दी थी कि यदि फिजिकल रिलेशन नहीं बनाएगी तो वह उसे मारकर स्कूल में ही दफन कर देगा। इससे महिला शिक्षिका घबरा गई। हालांकि उसने समझदारी से काम लिया। पुलिस के पास पहुंची महिला शिक्षिका घबराई महिला पुलिस के पास पहुंची, जिस पर सेंधवा पुलिस ने यौन संबंध के लिए दबाव बनाने के आरोप में स्कूल संचालक के विरुद्ध कल देर रात प्रकरण दर्ज कर लिया। सेंधवा शहर थाना पुलिस के अनुसार 21 वर्षीय महिला की शिकायत पर चाचरिया स्थित एक निजी स्कूल के संचालक मोनू मालवीय के विरुद्ध छेड़खानी, जान से मारने की धमकी समेत अन्य धाराओं के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है। 8 महीने में कई बार की अश्लील हरकत शिकायत के मुताबिक वह अगस्त 2023 से मार्च 2024 तक चाचरिया के एक निजी स्कूलों में शिक्षिका के तौर पर कार्यरत थी। इस दौरान मोनू मालवीय ने उससे कई बार अश्लील हरकत की और यौन संबंध बनाने के लिए दबाव बनाया। उसने कहा कि यदि फिजिकल रिलेशन नहीं बनाओगी तो मैं तुम्हें जान से मार कर यहीं दफन कर दूंगा। क्लास में भी गलत नीयत से किया बैड टच पीड़िता ने बताया कि फरवरी माह में स्कूल की परीक्षा के दौरान क्लास रूम में रुकने के लिए बोला और उसके बाद गलत नीयत से बैड टच किया। टीचर ने बताया कि मेरे फोटो नहीं होने के बावजूद धमकी दी कि वह उसके अश्लील फोटो वायरल कर देगा। इन घटनाओं के चलते उसने परेशान होकर स्कूल जाना बंद कर दिया, लेकिन मोनू मालवीय ने जान से मारने की धमकी देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स व्हाट्सएप और स्नैपचैट पर कई बार अश्लील संदेश भेजे। पुलिस को दिए सबूत उसने सोशल मीडिया के स्क्रीनशॉट और वीडियो पुलिस को उपलब्ध कराए हैं। उसने बताया कि स्कूल छोड़ने के बाद उसकी शादी हुई थी, किंतु विवाद के चलते फिलहाल वह अपने माता-पिता के साथ रह रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी की तलाश की जा रही है।

स्कूल टीचर को एडल्ट वेबसाइट पर मॉडल के रूप में काम करते पकड़े जाने पर निलंबित कर दिया

रोम इटली में एक कैथोलिक स्कूल की टीचर को एडल्ट वेबसाइट ओनली फैंस पर मॉडल के रूप में काम करते हुए पकड़े जाने पर निलंबित कर दिया गया। दरअसल, 20 वर्षीय एलेना मारागा एक स्कूल शिक्षिका के तौर पर बच्चों को पढ़ाने के अलावा ओनली फेंस पर भी काम करती थी। एक बच्चे के माता-पिता ने उसे एडल्ट वेबसाइट पर काम करते हुए पहचान लिया। बाद में उन्होंने व्हाट्सअप ग्रुप चैट और फेसबुक के माध्यम से बाकी अभिभावकों को इस बारे में जानकारी दी। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक इन सभी ने मिलकर स्कूल प्रशासन से इसकी शिकायत की। बाद में स्कूल प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मरागा को सस्पेंड कर दिया। मरागा ने इस कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि वह अपने खाली समय में जो भी करती हैं उससे किसी को क्या ही नुकसान हो सकता है। मरागा ने कहा कि स्कूल की तरफ से उसे वर्तमान में लगभग 1200 यूरो सैलरी के तौर पर मिलते हैं जो कि अस्थाई हैं, इसलिए मैंने पहले ही अन्य करियर के बारे में सोच लिया था। मरागा ने कहा कि मैं ऐसे कई दोस्तों को जानती हूं जो इसमें मुझसे बहुत बेहतर कमाते हैं। मुझे मेरे शरीर पर गर्व है, मैंने इसे काफी मेहनत के साथ बनाया है। ऐसे में मैं इसे दिखाना पसंद करती हूं। इतावली मीडिया के अनुसार, मरागा के पास शैक्षिक रूप से विज्ञान की डिग्री है और उन्हें कैथोलिक नर्सरी स्कूल में काम करने का 5 साल का अनुभव है।

ईएसबी ने प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षक चयन परीक्षा के आवेदन की तारीख 20 फरवरी तक बढ़ाई

भोपाल  मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) की ओर से प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षक चयन परीक्षा के लिए आवेदन करने की तारीख में 10 दिन की बढ़ोतरी की गई है। अब अभ्यर्थी 20 फरवरी तक आवेदन कर सकते हैं। अभी आवेदन करने की अंतिम तिथि मंगलवार को समाप्त हो रही थी। वहीं, आवेदन पत्र में संशोधन करने की तिथि 16 से बढ़ाकर 25 फरवरी की गई है। अभ्यर्थियों ने आवेदन की तारीख बढ़ाने की मांग की थी।     खासतौर पर अतिथि शिक्षकों ने मुख्यमंत्री और ईएसबी के अधिकारियों को पत्र लिखकर तारीख बढ़ाने की मांग की थी।     अतिथि शिक्षकों का कहना था कि इस बार आवेदन करते समय ही अनुभव प्रमाण पत्र मांगे गए हैं।     कई के अनुभव प्रमाण पत्र बन नहीं पाए हैं, ऐसे में वे आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।     वहीं कुछ अभ्यर्थी प्रोफाइल पंजीयन आईडी का मैप नहीं होने से आवेदन नहीं कर पा रहे थे। अब तक 1.43 लाख आवेदन आ चुके हैं। दो पारियों में होगी परीक्षा यह चयन परीक्षा 20 मार्च से शुरू होकर दो पारियों में आयोजित की जाएगी। पहली पारी की परीक्षा सुबह नौ से 11 बजे तक और दूसरी पारी में दोपहर तीन से शाम पांच बजे तक आयोजित होगी। दोनों पारियों में अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर एक घंटा पहले पहुंचना होगा।

मोहन सरकार ने शिक्षकों की छुट्टियों को 15 फरवरी 2025 से 15 मई 2025 तक रद्द कर किया, जाने क्या है वजह

भोपाल मध्यप्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल से जुड़े सभी शिक्षकों की अगले तीन महीने तक की छुट्टियां रद्द कर दी हैं. राज्य शासन ने आदेश जारी कर इसकी सूचना दी है. शासन ने एसेंशियल सर्विस एंड मेंटेनेंस (एस्मा) लगाने का आदेश किया है, जो 15 फरवरी 2025  से 15 मई 2025 तक लागू किया गया है. इस बीच यानी तीन महीने शिक्षकों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. अगर शिक्षक छुट्टी के लिए आवेदन करता है तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा. बोर्ड परीक्षा के चलते तीन महीने तक छुट्टी नहीं ले पाएंगे शिक्षक यह फैसला मध्यप्रदेश बोर्ड परीक्षा 2025 के मद्देनजर लिया गया है. मध्यप्रदेश में 24 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं. ऐसे में परीक्षाओं की तैयारी को लेकर भी शिक्षकों को मुख्य रूप से निर्देशित किया गया है. इस आदेश के बाद अब शिक्षक छुट्टी के लिए आवेदन देते भी हैं तो उन्हें अवकाश नहीं दिया जाएगा. परीक्षाओं के दौरान जिन शिक्षकों, कर्मचारियों, अधिकारियों और अन्य स्टाफ की ड्यूटी होगी, वे छुट्टी नहीं ले पाएंगे. कहीं फिर से लीक न हो जाए पेपर… पूरे देश में जहां पेपर लीक एक बड़ी परेशानी बनी हुई है, वहीं मध्यप्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल के लिए बिना पेपर लीक बोर्ड परीक्षाएं करवाना भी एक बड़ी चुनौती है. दो साल पहले 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के पेपर लीक हुई थे. हालाँकि 2024 की परीक्षाओं में माध्यमिक शिक्षा मंडल ने काफी कड़ी सुरक्षा और निर्देशों के बीच परीक्षाएं आयोजित करवाई थीं. लगातार मीटिंग कर रहे अधिकारी एमपी की बोर्ड एग्जाम की तैयारी को लेकर 5 फरवरी को प्रदेश के सभी संभाग के कमिश्नर और कलेक्टरों की वीडियो कॉन्फ्रेसिंग आयोजित की जा रही है. जिसमें प्रशासन बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों को लेकर निर्देशित किया जाएगा. परीक्षा के दौरान पूरी तरह बैन रहेगा मोबाइल फोन यूज 2024 में माध्यमिक शिक्षा मंडल ने आदेश जारी कर केंद्राध्यक्ष, सहायक केंद्राध्यक्ष, पर्यवेक्षक सहित किसी भी स्टाफ के लिए मोबाइल परीक्षा केंद्र पर प्रतिबंधित कर दिया था. क्योंकि दो साल पहले पेपर लीक मामले में मोबाइल के उपयोग की बात सामने आई थी. पुलिस थाना से प्रश्न पत्र परीक्षा कक्ष तक पहुंचने के दौरान मोबाइल से फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया था. इस बार भी बोर्ड सख्ती करने की तैयारी में है. 2022 में पेपर लीक करने के आरोप में कई एफआईआर भी दर्ज की गई थीं. बता दें कि मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग के शिक्षा और कर्मचारियों की छुट्टी रद्द का यह आदेश उनके लिए बुरी खबर है जिन्होंने छुट्टियों के लिए आवेदन दिया हुआ है. भोपाल समेत मध्य प्रदेश के कई ज़िलों में कई शिक्षकों और कर्मचारियों ने छुट्टी के लिए आवेदन दे रखे हैं. अब ये आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे. बता दें की शिक्षा विभाग में फिलहाल तबादलों पर भी रोक लगी हुई है. बेहद ही गंभीर परिस्थिति में ट्रांसफर भी मंत्री के अनुमोदन से ही हो सकेंगे.  

मध्यप्रदेश में शिक्षक पद के लिए बंपर भर्ती निकली, आवेदन की प्रक्रिया 28 जनवरी, 2025 से शुरू होगी

भोपाल शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाने की सोच रहे युवाओं के लिए शानदार मौका आया है। दरअसल, मध्यप्रदेश में इन दिनों शिक्षक पद के लिए बंपर भर्ती निकली है। इस भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया 28 जनवरी, 2025 से शुरू होगी। अप्लाई करने के इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी आधिकारि वेबसाइट https://esb.mp.gov.in/e_default.html पर एप्लीकेशन प्रोसेस शुरू होने के बाद आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के जरिए की जाएगी।  जारी भर्ती अधिसूचना के मुताबिक स्कूल शिक्षा विभाग के तहत माध्यमिक शिक्षक (विषय, खेल एवं संगीत गायन वादन) और प्राथमिक शिक्षक (खेल संगीत गायन-वादन व नृत्य) और जनजातीय विभाग के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षक (विषय) और प्राथमिक शिक्षक (खेल, संगीत, गायन वादन , नृत्य) की भर्ती की जाएगी। इस भर्ती के लिए 28 जनवरी से 11 फरवरी 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। 28 जनवरी से 16 फरवरी तक आवेदन में संशोधन कर सकेंगे। परीक्षा 20 मार्च से शुरू होगी। एग्जाम दो शिफ्टों में होगा। पहली शिफ्ट सुबह 9 से 11 बजे तक होगी जबकि दूसरी शिफ्ट दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक होगी। बता दें कि मध्यप्रदेश में शिक्षकों की भर्ती में अतिथि शिक्षकों को अब 50% आरक्षण मिलेगा। इसके लिए वहीं अतिथि शिक्षक पात्र होंगे, जिन्होंने 3 शैक्षणिक सत्रों में 200 दिन सरकारी स्कूलों में पढ़ाया हो। इसका लाभ अतिथि शिक्षकों को हाल ही में होने वाली शिक्षकों की भर्ती में मिलेगा। राज्य कर्मचारी चयन मंडल ने 10 हजार शिक्षकों की भर्ती का कार्यक्रम घोषित किया है।

टीचर ने छुट्टी के लिए बनाया छात्र की मौत का बहाना, ‘दाह संस्कार’ के नाम पर निकल लिया, हुआ सस्पेंड

रीवा  मऊगंज में एक शिक्षक ने छुट्टी लेने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने एक जिंदा बच्चे को मरा हुआ बता दिया। शिक्षक हीरालाल पटेल ने स्कूल रजिस्टर में लिखा कि वह छात्र जितेंद्र कोरी के अंतिम संस्कार में जा रहे हैं। लेकिन जितेंद्र एकदम स्वस्थ था। इस झूठ का पता चलने पर बच्चे के पिता ने शिकायत की। कलेक्टर ने शिक्षक को निलंबित कर दिया है और जांच के आदेश दिए हैं। छुट्टी के लिए स्टूडेंट को बता दिया मरा हुआ मऊगंज जिले के नईगढ़ी इलाके में स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय चिगिरका टोला में यह अजीबोगरीब वाकया हुआ। तीसरी कक्षा के छात्र जितेंद्र कोरी को शिक्षक हीरालाल पटेल ने मृत घोषित कर दिया। हीरालाल पटेल छुट्टी चाहते थे। इसलिए उन्होंने स्कूल रजिस्टर में लिखा, ‘मैं हीरालाल पटेल प्राथमिक शिक्षक, छात्र जितेंद्र कोरी के निधन के कारण उसके अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहा हूं।’ परिजनों के उड़े होश जब यह बात जितेंद्र के परिवार वालों को पता चली तो उनके होश उड़ गए। जितेंद्र तो बिल्कुल ठीक था। उसके पिता रामसरोज कोरी को शिक्षक की यह हरकत बिल्कुल रास नहीं आई। उन्होंने नईगढ़ी थाने में शिक्षक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। रामसरोज ने शिक्षक पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। कलेक्टर ने की कार्रवाई मामला जिला कलेक्टर अजय श्रीवास्तव तक पहुंचा। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने शिक्षक हीरालाल पटेल को निलंबित कर दिया। साथ ही, मामले की जांच के आदेश भी दिए। डीपीसी सुदामा लाल गुप्ता को इस मामले की जांच की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। कलेक्टर अजय श्रीवास्तव ने शिक्षक की इस हरकत को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि एक जीवित बच्चे को मृत बताकर छुट्टी लेना सरकारी कामकाज के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिक्षक के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश के प्राचार्य सिंगापुर की शिक्षा प्रणाली का अध्ययन करेंगे, 120 सदस्यीय दल दौरे पर जायेगा

 भोपाल  माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) के 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा में 95 प्रतिशत से अधिक परिणाम लाने वाले स्कूलों के प्राचार्य और अधिकारियों का 120 सदस्यीय दल सिंगापुर दौरे पर जा रहा है। स्टार्स परियोजना के तहत शासन की ओर से इस यात्रा के लिए चार करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। इस दौरे में जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर ढाई लाख रुपये खर्च होंगे। यह दौरा दो अलग-अलग दलों में होगा। पहले दल में 70 और दूसरे दल में 50 प्राचार्यों-अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। 6 जनवरी को पहला दल होगा रवाना पहला दल 6 जनवरी को और दूसरा दल 13 जनवरी को पांच दिवसीय यात्रा पर रवाना होगा। वहां की शिक्षा व्यवस्था देखने और उनकी प्रणाली में प्रशिक्षण लेकर प्राचार्य अपने स्कूल में उसे लागू करने की कोशिश करेंगे। इससे पहले उन्हें एक रिपोर्ट बनाकर सरकार को अपनी संस्तुतियां सौंपनी होंगी। यदि उनकी सिफारिशे मंजूर होती हैं तो उसे स्कूलों में लागू किया जाएगा। दक्षिण कोरिया का कर चुके हैं दौरा इससे पहले शिक्षा विभाग के 250 अफसरों और प्राचार्यों का दल दक्षिण कोरिया के अध्ययन दौरे पर गया था। 2021 में प्राचार्यों के दल को चार बार दिल्ली के सरकारी स्कूलों का अध्ययन करने भेजा गया था। इस दौरे में भी सरकार ने पांच से सात लाख रुपये खर्च किए थे। दक्षिण कोरिया से लौटकर स्टीम पद्धति की गई लागू 2019 में 250 अधिकारियों और प्राचार्यों की टीम दक्षिण कोरिया के दौरे पर गई थी। जो वहां स्टीम (साइंस, टेक्नोलाजी, इंजीनियरिंग, आर्ट्स औऱ मैथ्स) शिक्षा पद्धति का अध्ययन कर आई थी। इस दल ने मध्य प्रदेश में इसे लागू करने के लिए अपनी सिफारिशों के साथ एक रिपोर्ट पेश की थी। अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मल्टी डिस्पिलनरी स्टडी को लागू किया गया है, इसमें इसकी सिफारिशों का एक हिस्सा समाहित है। ढांचागत सुधार की योजना नहीं बन पाई दक्षिण कोरिया से लौटकर आए दल ने प्रमुख सचिव को प्रेजेंटेशन भी दिया था। इसमें ढांचागत सुधार, व्यावसायिक पाठ्यक्रम को शामिल करने संबंधी कई तरह के शैक्षणिक सुधारों की सिफारिशे थीं। इस रिपोर्ट का कुछ असर नहीं दिखा। ढांचागत सुधार की कोई योजना लागू ही नहीं हो पाई।

स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों को सिंगापुर भेजने की तैयारी की जा रही, जाने क्या है प्लान

भोपाल सिंगापुर के शिक्षा मॉडल के आधार पर मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों को सिंगापुर भेजने की तैयारी की जा रही है। राज्य शिक्षा केंद्र इसकी रूपरेखा तैयार कर रहा है। यात्रा पर उन शिक्षकों का चुनाव होगा जो इनोवेटिव हैं। प्रस्ताव अभी प्रारंभिक स्थिति में है।  इस यात्रा को एक्सपोजर विजिट नाम दिया गया है। बताया कि जिन देशों में शिक्षा को बेहतर माना जाता है उसके कारण विभाग तलाश रहा है। पढ़ाने के तरीके समझने शिक्षकों को साथ रखा जा रहा है। यात्रा कब होगी इसकी तारीख अभी तय नहीं है। ऐसी उम्मीद है कि परीक्षा के बाद इसका शेड्यूल तय हो सकता है। परीक्षा फरवरी में शुरू होगी और मार्च में खत्म हो रही हैं। इससे पहले कोरिया की यात्रा कर चुके स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी और शिक्षक इससे पहले कोरिया की यात्रा कर चुके हैं। करीब पांच साल पहले इन्हें भेजा गया था। करीब डेढ़ सौ लोगों ने इसमें हिस्सा लिया था। यात्रा पर करीब पांच करोड़ रुपए खर्च हुआ था। कोरिया से लौटने के बाद दल की समीक्षा तो हुई लेकिन इसका क्या फायदा हुआ इसका असर नहीं दिखा। ये भी एक्सपोजर विजिट थी। बेहतर एजुकेशन सिस्टम में शामिल सिंगापुर सिंगापुर की शिक्षा व्यवस्था विश्व के दस सबसे बेहतर एजुकेशन सिस्टम में से एक हैं। यहां हाइली ट्रेंड शिक्षक। कक्षाओं में इनोवेशन, विज्ञान गणित के साथ शारीरिक शिक्षा पर जोर हैं। इससे पहले हिमाचल प्रदेश के शिक्षक सिंगापुर का दौरा कर चुके हैं। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और नई तकनीक जानने शिक्षकों के साथ अधिकारियों को भी भेजा था। प्रदेश में राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारी अभी इस यात्रा को लेकर खुलकर बोलने तैयार नहीं है।

सागर में किराए के शिक्षक को नियुक्त करने के मामले में आठ टीचर निलंबित

सागर  सागर जिले में सरकारी स्कूलों में पदस्थ शिक्षक के स्थान पर अन्य अनधिकृत व्यक्ति के जरिए पढ़ाई कराए जाने का मामला सामने आया है। जिसके बाद ऐक्शन लेते हुए जिला कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी, जिला परियोजना अधिकारी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और संकुल प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके अलावा तीन जन शिक्षक और पांच शिक्षकों समेत कुल आठ शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। कलेक्टर ने ऐसे शिक्षकों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज कराने के लिए कहा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार कलेक्टर संदीप जी आर के निर्देश पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी और विकासखंड स्त्रोत समन्वयक मालथौन द्वारा माध्यमिक शाला भेलैंया एवं प्राथमिक शाला मझेरा का कल आकस्मिक निरीक्षण किया गया और संयुक्त जांच कार्रवाई कर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। जांच प्रतिवेदन के अनुसार रूप सिंह चढ़ार एवं इंद्रविक्रम सिंह परमार, अनिल मिश्रा, श्रीमती जानकी तिवारी और अवतार सिंह ठाकुर प्रथम दृष्टतया दोषी हैं। इन पांचों को तत्काल ही सोमवार को निलंबित कर दिया गया। जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन ने बताया कि इन निलंबित शिक्षकों के खिलाफ पुलिस के पास प्राथमिकी भी दर्ज करायी जा रही है। तीन जन शिक्षकों में जनपद शिक्षा केंद्र खुरई के प्रभारी जन शिक्षक भोलाराम अहिरवार, जैसीनगर विकासखंड के जनपद शिक्षा केंद्र के जनशिक्षक हरिशंकर लोधी और मालथौन जनपद शिक्षण केंद्र के जगभान अहिरवार द्वारा मॉनिटरिंग निरीक्षण नहीं किए जाने तथा अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरतने पर इन तीनों को भी निलंबित किया गया है। इसके अलावा शिक्षा विभाग के द्वारा विकासखंड शिक्षा अधिकारियों एवं संकुल प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कलेक्टर ने बताया कि निलंबित शिक्षक खुद बच्चों को नहीं पढ़ाते थे बल्कि अपनी जगह किराए के टीचर्स को रखा था। कलेक्टर को इसे लेकर शिकायत मिली थी। जांच में आरोप सही मिले, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।

कक्षा में शर्ट उतारकर सो रहे टीचर का वीडियो वायरल: बीईओ ने दिए जांच के आदेश

जबलपुर मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में शिक्षा के हालात की ताजा तस्वीर सामने आई है। जिले के मझौली तहसील स्थित प्राथमिक स्कूल नंदग्राम में एक शिक्षक क्लासरूम में बच्चों के बैग को तकिया बनाकर सो गया। इसका वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि टीचर अपने कपड़े उतारकर क्लास में चैन की नींद सो रहा है। क्लास में बच्चों के बैग तो हैं लेकिन छात्र दिखाई नहीं दे रहे हैं।सरकारी टीचर का नाम विनोद मांझी बताया जा रहा है। नोटिस के जवाब टीचर ने दी ये सफाई सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा अधिकारी ने टीचर विनोद मांझी के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। हालांकि वीडियो के संबंध में टीचर ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उसकी तबीयत खराब थी। इसलिए वह सो गया था। बीईओ का कहना है कि इससे पहले भी विनोद मांझी के खिलाफ शिकायतें आ चुकी हैं। बच्चों के बैग पैर और सिर के पास रखा जानकारी के मुताबिक, विनोद मांझी प्राथमिक शाला नंदग्राम में पदस्थ हैं। बुधवार को स्कूल आए टीचर मांझी ने बच्चों को पढ़ाने के बजाय उन्हें खेलने के लिए कहा और खुद कक्षा में आराम करने लगा। विनोद ने अपनी शर्ट उतारकर छात्रों के स्कूली बैग को सिर के नीचे तकिए की तरह रखा। इतना ही नहीं कुछ बैग उसने पैरों के पास भी रखे थे। ग्रामीणों ने वीडियो बनाकर किया वायरल बच्चों ने विनोद मांझी की इस हरकत के बारे में गांव के कुछ लोगों को बताया। इसके बाद ग्रामीणों ने शिक्षक का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। स्कूल में शिक्षक के सोते हुए वीडियो को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी का भी बयान सामने आया है। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अतुल चौधरी का कहना है कि इससे पहले भी विनोद मांझी के खिलाफ बच्चों के साथ मारपीट करने और उन्हें न पढ़ाने संबंधी शिकायतें मिली हैं। अब उनका एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है,जिसमें वह बच्चों के बैग पर सिर रखकर सोते नजर आ रहे हैं। जांच के लिए बनाई गई टीम उन्होंने बताया कि आज ही स्कूल का निरीक्षण भी किया गया। इस संबंध में विनोद मांझी को नोटिस देकर उनसे जवाब मांगा गया था। इस पर उन्होंने तबीयत खराब होने की बात कही है। बीईओ ने बताया कि इस मामले में एक जांच टीम बनाई गई है और रिपोर्ट आते ही वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी जाएगी।

दो अवैध क्लीनिक सील कर झोलाछाप डॉक्टरों पर बढ़ाई सख्ती, छत्तीसगढ़-गरियाबंद में शिक्षक से दवाइयां जब्त

गरियाबंद. जिले में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्यवाही की है। स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त टीम ने बुधवार को फिंगेश्वर ब्लॉक के कई गांवों छापेमार कार्यवाही कर दो अवैध क्लीनिक को सील किया है साथ ही दो संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। छापामारी के दौरान ये सभी क्लिनिक नियम विरुद्ध संचालित पाए गए। इस दौरान टीम ने यहां से बड़ी मात्रा में दर्द के इंजेक्शन, एक्सपायरी दवाइयां, प्रेगनेंसी कीट, अबॉर्शन कीट, एंटीबायोटिक भी बरामद किए है। जिसे जप्त कर लिया गया। इसके अलावा मौके पर कई ऐसी दवाइयां भी मिली है जो विशेषज्ञ डॉक्टर के सलाह के बिना नहीं दी जा सकती। कार्यवाही के बाद झोलाछाप डॉक्टरों में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों से पता चला की कार्यवाही की भनक लगते ही कई झोलाछाप डॉक्टर पहले ही अपनी दुकान बनकर भाग निकले थे। उल्लेखनीय है कि विगत कुछ वर्षों से जिले में झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़ सी आ गई है। गांव-गांव में झोला छाप डॉक्टरों का जाल बिछा हुआ है। ये झोला छाप डॉक्टर ग्रामीण अंचल में अवैध रूप से निजी क्लीनिक संचालित कर स्वास्थ्य सेवा देने के नाम पर मरीजों की जेब काट रहे हैं साथ ही मरीजों की जान से खिलवाड़ भी कर रहे है। लगातर इसकी शिकायत मिलनें के बाद बुधवार को जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ गार्गी यदुपाल के निर्देश पर गठित संयुक्त टीम ने फिंगेश्वर ब्लॉक के ग्राम लचकेरा, रजनकट्टी, कोसमबुढ़ा और भेंद्री में औचक छापेमार कार्यवाही की। कार्यवाही के दौरान ग्राम लचकेरा में राजूराम साहू अपने घर में, रजनकट्टी में रविशंकर साहू, कोसमबुढ़ा में वीरेंद्र महलदार और ग्राम भेंद्री में जागेश्वर साहू अपने घर में अवैध रूप से क्लीनिक का संचालन करते पाए गए। इनके घर से बड़ी संख्या में एक्सपाइरी दवाइयां, इंजेक्शन, प्रेगनेंसी कीट सहित कई प्रकार के दवाइयां बरामद हुई है। बताया जाता है इसमें भेंद्री निवासी जागेश्वर साहू पेशे से सरकारी शिक्षक है। इसके बाद भी अवैध गतिविधियों में सलिप्त पाए गए। संयुक्त टीम में दो क्लिनिक को सील करते हुए उनसे दोबारा अवैध क्लिनिक संचालित नहीं करने का शपथ पत्र भी लिया। इसके अलावा दो को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इस दौरान संयुक्त टीम में शिशू रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अंकुश वर्मा, डीएचओ डॉक्टर लक्ष्मीकांत जांगड़े, डॉक्टर सुनील रेड्डी के साथ ही फिंगेश्वर थाना से एएसआई सोमेश्वर ठाकुर भी शामिल थे। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के भोलेभाले लोग दलालों के चक्कर में आकर कुकुरमुत्ते की तरह गांव गांव में चल रहे अवैध क्लीनिक का ही सहारा लेते है और अपनी जेब ढीली कर कई बार अपनी जान भी जोखिम लगा बैठते है। छापेमारी के दौरान टीम ने डेका डोबिन इंजेक्शन 500, प्रेगनेंसी कीट, बीपी मशीन, थर्मामीटर, डिक्लोफेनाक इंजेक्शन, ऑप्टिनेयरोन इंजेक्शन, जेंटामाइसिन इंजेक्शन, डेक्सामेथासोन इंजेक्शन सहित दर्द, बुखार, संक्रमण की भी कई प्रकार की दवाई और इंजेक्शन जप्त किए है। इधर, जिले में अवैध क्लिनिक के साथ ही धड़ल्ले से अवैध नर्सिंग होम भी संचालित किए जाने की शिकायत है। नियम विरुद्ध संचालित अवैध नर्सिंग होम में लोगों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है। मालूम हो कि कुछ माह पहले ही अवैध नर्सिंग होम में एक महिला को डॉक्टर के लापरवाही और समुचित इलाज नहीं करने के चलते मौत हो गई थी। बाद में मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अवैध नर्सिंग को सील कर दिया था। इसके कुछ दिन बाद फिर छुरा ब्लॉक के एक हॉस्पिटल में गर्भवती महिला के पेट में ही बच्चे की मौत होने का मामला सामने आया था। विभाग के कार्यवाही के बाद अब अवैध नर्सिंग होम और हॉस्पिटल चलाने वालों को भी कार्यवाही की चिंता सताने लगी है। इस संबंध में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर गार्गी पाल यदु से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि लंबे समय से अवैध क्लिनिक संचालन की सूचना मिली थी। टीम बनाकर छापेमार कार्यवाही की गई, जिसमें चार क्लिनिक अवैध रूप से संचालित पाए गए। दो को सील किया गया है। क्लिनिक में एक ही इंजेक्शन का उपयोग कई मरीजों कर किया जा रहा था। कई एक्सपाइरी दवाइयां भी जप्त की है।

शिक्षकों को दिवाली से पहले सौगात, उच्च माध्यमिक विद्यालियों को मिलेंगे 3198 शिक्षक, जल्द जॉइनिंग

जबलपुर जबलपुर हाईकोर्ट ने वर्ग 1 के शिक्षकों के लिए जॉइनिंग लेटर जारी करने का अंतरिम आदेश दिया है। चीफ जस्टिस की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और डीपीआई के पक्ष में अंतरिम राहत प्रदान की। हालांकि, यह प्रक्रिया अंतिम आदेश के अधीन रहेगी, जिसका मतलब है कि आगे कोई भी निर्णय उस आदेश के आधार पर लिया जाएगा।  इस मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी, और डीपीआई एक-दो दिन में 3198 शिक्षकों को जॉइनिंग लेटर जारी कर सकता है। सभी औपचारिकताओं का पालन किया जा रहा है, और अब केवल औपचारिक आदेश का इंतजार है। यह शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उनकी भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। ये है मामला यह केस 2018 में हुई भर्ती परीक्षा से संबंधित है, जिसमें 848 ईडब्ल्यूएस पद शामिल थे। प्रारंभ में, जब परीक्षा का नोटिफिकेशन जारी हुआ, तब इन पदों का उल्लेख नहीं था, लेकिन बाद में इन्हें जोड़ा गया। मामला कोर्ट में गया, और 23 फरवरी 2024 को न्यायालय ने निर्देश दिया कि पात्रता परीक्षा में 75 अंक लाने वालों की मेरिट बनाने की प्रक्रिया की जाए और तब तक भर्ती पर रोक लगा दी जाए। हाईकोर्ट में लगाई गई थी चार याचिका इस मामले में जबलपुर हाईकोर्ट में चार याचिकाएं चल रही हैं, जिसमें DPI द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ अपील की गई है। मौखिक निर्देश दिए गए हैं कि सिंगल बेंच के आदेश पर यथास्थिति बनाए रखी जाए। हालांकि, शासन ने 2023 की भर्ती परीक्षा में पास हुए उम्मीदवारों के दस्तावेजों का सत्यापन कर लिया है, लेकिन ज्वाइनिंग लेटर देने पर रोक लगा दी है, जिससे ज्वाइनिंग प्रक्रिया रुक गई है। डीपीआई का तर्क डीपीआई ने कोर्ट में तर्क दिया है कि 2018 की भर्ती के पदों के कारण 2023 की भर्ती को नहीं रोका जाना चाहिए, और ज्वाइनिंग देने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का पक्ष इस केस में चयनित शिक्षकों ने अपनी ओर से 2023 भर्ती पर लगी रोक को हटाने के लिए अदालत में याचिका दायर की। जहां उन्होंने अपनी नियुक्ति को सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट का फैसला हाल ही में 15 अक्टूबर को हुई सुनवाई में शासन की ओर से जॉइनिंग की मांग को सशर्त मंजूर किया गया। यह निर्णय याचिकाकर्ताओं के वकीलों द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्कों के बाद आया। अब उम्मीद है कि जल्द ही स्कूलों को आवश्यक शिक्षकों की नियुक्ति मिल सकेगी, जिससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सकता है।

ओडिशा में एक दिन के अंदर ही 16 हजार से अधिक शिक्षकों की हुई भर्ती, सीएम ने सौंपे नियुक्ति पत्र

भुवनेश्वर ओडिशा सरकार ने एक ही दिन में 16000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती की है. राज्य में विभिन्न योजनाओं के तहत ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में 16009 प्राइमरी और अपर प्रामरी शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे हैं. जूनियर शिक्षकों की नियुक्ति राज्य के सभी 30 जिलों में की गई है. मुख्यमंत्री मोहन माझी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में बीते कलिंगा स्टेडियम में आयोजित एक समारोह में शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे. सीएम मोहन माझी ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘शिक्षण सबसे सम्मानजनक पेशा है और शिक्षक समाज के भविष्य को आकार देते हैं. प्राचीन काल में गुरुओं (शिक्षकों) की तुलना ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर जैसे भगवानों से की जाती थी.’ सीएम ने आगे कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा के लिए बजटीय आवंटन में काफी वृद्धि की है. उन्होंने कहा, ‘दोगुनी गति से वादे पूरे किए जा रहे हैं! स्कूली शिक्षा परिदृश्य को मजबूत करने के लिए आज 16,000 से अधिक नव-नियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए.’ वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पोस्ट में लिखा कि चुनावी वादों को पूरा करने और 2036 तक विकसित ओडिशा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मोहन माझी की सरकार चौबीसों घंटे काम कर रही है. उन्होंने पोस्ट में लिखा, ‘यह बड़े पैमाने पर भर्ती शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, बेहतर शिक्षण परिणाम सुनिश्चित करने और ओडिशा के बच्चों के लिए उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. एक्स पर पोस्ट में लिखा, ‘माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री मोहन मोदी की सरकार आकांक्षाओं को साकार करने, चुनावी वादों को पूरा करने और 2036 तक विकसित ओडिशा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है.” हालांकि, विपक्षी बीजद ने शिक्षकों की भर्ती का श्रेय लेने के लिए भाजपा का मजाक उड़ाया. क्षेत्रीय पार्टी ने एक विज्ञप्ति में कहा, “पिछली बीजेडी सरकार ने पूरी भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली थी. भाजपा की इसमें कोई भूमिका नहीं है, लेकिन वह सिर्फ नियुक्ति पत्र बांटकर श्रेय ले रही है.” बीजू जनता दल के ‘एक्स’ पर एक प्रेस रिलीजी जारी कर कहा गया कि नई मोहन सरकार द्वारा केवल जूनियर शिक्षक भर्ती के नियुक्ति पत्र बांटे गए हैं. बीजेडी की पोस्ट में लिखा, ‘हिरण हिरण का पीछा कर रहा है और कह रहा है कि हमने उसका शिकार किया है. नए दौर में ब्लॉक में एक मॉडल स्कूल की स्थापना की गई. बीजेपी इसे संविदा नियुक्ति कहकर विरोध कर रही थी, अब उसमें वह नियुक्ति देकर श्रेय लेने की कोशिश कर रही है.’  

सीधी के स्‍कूल में 13 विद्यार्थियों में आते हैं सिर्फ दो, दो अतिथि शिक्षक के अलावा दो रसोइये भी

 सीधी  सीधी जिले का प्रशासन लंबे समय से यह दावा कर रहा है कि जिले में कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है। इन सब दावों से हटकर सीधी जिले के ग्राम घूघा में एक ऐसी पाठशाला है जो बिना किसी नियमित शिक्षक के चल रही है। ऐसे में जिस प्राथमिक पाठशाला में पिता प्रभारी शिक्षक है, तो बेटा उसी को स्कूल में अतिथि शिक्षक के तौर पर मास्टर साहब बना हुआ है। छात्रों की संख्या 13, लेकिन स्कूल आते सिर्फ दो इस विद्यालय का संचालक मात्र दो अतिथि शिक्षक पढ़ा रहे हैं उससे भी बड़ी बात यह है कि इस विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 13 है लेकिन स्कूल आने वाले छात्रों की संख्या सिर्फ दो है। इस स्कूल में दो रसोईया भी है जो बच्चों के लिए खाना बनाते हैं अब ऐसे में बेहतर स्कूल बेहतर शिक्षक का दावा करने वाली सरकार के दावों की कलई खुलती नजर आती है कि इस विद्यालय में नियमित शिक्षक क्यों नहीं है। दो बच्चे, दो अतिथि शिक्षक और दो रसोईए आते हैं विद्यालय में पढ़ने वाले सभी 13 छात्र स्कूल क्यों नहीं आते यह बड़ा सवाल है वही दो बच्चों को पढ़ाने और दो अतिथि शिक्षक और उन्हें भोजन खिलाने दो रसोईए स्कूल इसलिए आते हैं कि उन्हें अपने वेतन और मानदेय से मतलब है और शायद इसीलिए यह स्कूल आज तक संचालित है वरना इस स्कूल का क्या फायदा इस प्राथमिक स्कूल की समस्या को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नियमित शिक्षक न होने के सवाल पर वह गोल-माल जवाब जब जिला शिक्षा अधिकारी पीएल मिश्रा से जानकारी चाहि तो उन्होंने भी स्कूल की जांच करने की बात कही वही स्कूल में नियमित शिक्षक न होने के सवाल पर वह गोल-माल जवाब देते नजर आए जिला शिक्षा अधिकारी के बयान के बाद यह बात तो स्पष्ट हो जाती है कि जिले में शिक्षक विहीन शाला न होने का दवा अभी पूरा नहीं हुआ है जिस दिन यह दाबा पूरा हो जाएगा उस दिन से स्कूलों में ना आने वाले सभी छात्र शायद पढ़ते भी आने लगेंगे। प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पूरी तरीके से चौपट बहरहाल सीधी जिले में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पूरी तरीके से चौपट हो गई है आलम यह है कि इस स्कूल जैसे दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में न जाने और ऐसी कितनी स्कूल है सिर्फ कागज में दर्जन भर छात्र और शिक्षक विहीन शालाएं शिक्षा विभाग के अफसर के फाइलों में संचालित हो रही हैं, जिसकी कलाई जांच मीडिया की जीरो ग्राउंड रिपोर्टिंग के दरमियान सामने आ गई है। पिता प्रभारी शिक्षक, बेटा उसी स्कूल में अतिथि शिक्षक ऐसे में जिस प्राथमिक पाठशाला में पिता प्रभारी शिक्षक है तो बेटा उसी स्कूल में अतिथि शिक्षक के तौर पर मास्टर साहब बना हुआ है जो कागज में 13 छात्र लेकिन जमीनी हकीकत में सिर्फ दो छात्रों को शिक्षा दीक्षा दे रहा है ऐसे में इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले के शिक्षा विभाग अपने कर्तव्य में लापरवाही करतें हुए व्यक्तिगत स्वार्थ और अपनों को आर्थिक लाभ पहुंचाने में लगा हुआ है उसे बच्चों के भविष्य से कोई सरोकार नहीं है।

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