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त्राल एनकाउंटर: मारे गए 3 जैश आतंकी, टारगेटेड इलाके में ऑपरेशन जारी

 त्राल जम्मू-कश्मीर के त्राल में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ की खबर है. इस दौरान तीन आतंकियों को ढेर कर दिया गया. इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के दो से तीन आतंकी छिपे होने की खबर है. जिन तीन आतंकियों को ढेर किया गया है. वे सभी त्राल के रहने वाले हैं. इनके नाम आसिफ अहमद शेख, आमिर नजीर वानी और यावर अहमद भट्ट हैं. इस कामयाबी के बाद भारतीय सेना ने बताया कि खुफिया जानकारी मिलने के बाद 15 मई को अवंतीपोरा के त्राल के नादेर में तलाशी अभियान चलाया गया. भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने त्राल के नादेर को चारों ओर से घेर लिया. जवानों को कुछ संदिग्ध गतिविधियों का पता चला, जिसके बाद आतंकियों पर फायरिंग की गई. ऑपरेशन अभी जारी है. यह एनकाउंटर त्राल के नादिर गांव में चल रहा है. पुलवामा में 48 घंटे में यह दूसरा एनकाउंटर है. इससे पहले मंगलवार को शोपियां में लश्कर के तीन आतंकियों को ढेर किया गया था. शोपियां में सुरक्षाबलों के विशेष ऑपरेशन के तहत मंगलवार को लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकियों को ढेर कर दिया गया था. इन आतंकियों को सुरक्षाबलों ने जिनपथेर केलर इलाके में घेर लिया था. इस ऑपरेशन को ऑपरेशन केलर नाम दिया गया था. इस ऑपरेशन में मारे गए लश्कर के एक आतंकी का नाम शाहिद कुट्टे था, जो शोपियां का रहने वाला था. वह आठ मार्च 2023 को लश्कर में शामिल हुआ था. वह 18 मई, 2024 को हीरपोरा, शोपियां में बीजेपी सरपंच की हत्या में शामिल था. वहीं, दूसरे आतंकवादी की पहचान अदनान शफी डार के रूप में हुई है, जो वंडुना मेलहोरा, शोपियां का रहने वाला है. वह 18 अक्टूबर, 2024 को लश्कर में शामिल हुआ था. वह 18 अक्टूबर, 2024 को शोपियां में गैर स्थानीय मजदूर की हत्या में शामिल था.​ पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों के पोस्टर शोपियां के कई इलाकों में लगाए गए थे. सुरक्षाबलों ने आतंकियों की सूचना देने वाले को 20 लाख रुपये इनाम देने का भी ऐलान कर रखा है. सेना ने पहलगाम में मासूम पर्यटकों की मौत के गुनहगार पाकिस्तानी आतंकियों की तलाश तेज कर दी है.  

आतंकी खेलना चाहते थे पहलगाम के आरू, एम्यूजमेंट पार्क या बेताब घाटी में खूनी खेल, इस वजह से बैसरन को बनाया निशाना

श्रीनगर पहलगाम आतंकी हमले की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में पता चला है कि हमला करने वाले आतंकियों ने बैसरन से पहले तीन और जगहों पर भी रेकी की थी। बताया गया है कि आतंकियों ने 22 अप्रैल से पहले पहलगाम और आसपास के इलाके की रेकी शुरू की थी। बैसरन, आरु वैली और बेताब वैली संग लोकल एम्यूज़मेंट पार्क की रेकी करने के बाद हमले के लिए बैसरन को चुना गया था। आतंकियों की ओर से सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल किए जाने के इनपुट भी जांच में मिले हैं। इसी बीच पूरे कश्मीर में छापेमारी और पूछताछ का तेज सिलसिला चल रहा है। हिरासत में लिए गए करीब 185 लोगों से आतंकियों और मददगारों के गठजोड़ के सुराग तलाशे जा रहे हैं। किन जगहों की रेकी जांच में गिरफ्तार किए गए एक ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) ने बताया कि आतंकी घटना से दो दिन पहले बैसारन घाटी में मौजूद थे। आतंकियों ने 15 अप्रैल को पहलगाम पहुंचकर चार जगहों की रेकी की थी। इनमें बैसरन घाटी, आरु घाटी, स्थानीय एम्यूज़मेंट पार्क और बेताब घाटी शामिल थे। सुरक्षा कड़ी होने की वजह से आतंकी इन जगहों पर हमला नहीं कर पाए। NIA इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। एनआईए को शक है कि लगभग 20 ओवर ग्राउंड वर्कर ने विदेशी आतंकियों की मदद की थी। इनमें से कुछ को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बाकी पर नजर रखी जा रही है। ओवर ग्राउंड वर्कर ने की आतंकियों की मदद जांच में पता चला है कि कम से कम चार ओवर ग्राउंड वर्कर ने आतंकियों को रेकी और जरूरी सामान पहुंचाने में मदद की। हमले से पहले इलाके में तीन सैटेलाइन फोन के इस्तेमाल के सबूत भी मिले हैं। इनमें से दो डिवाइस के सिग्नल को ट्रैस कर लिया गया है। एनआईए और खुफिया एजेंसियां अब तक 2,500 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी हैं। फिलहाल 186 लोगों को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया है। जम्मू और कश्मीर में कई जगह छापेमारी हमले के बाद जम्मू और कश्मीर में कई जगह छापेमारी की गई। कुपवाड़ा, हंदवाड़ा, अनंतनाग, त्राल, पुलवामा, सोपोर, बारामूला और बांदीपोरा में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अलग-अलग गुट और जमात-ए-इस्लामी जैसे प्रतिबंधित संगठनों के सदस्यों और समर्थकों के घरों की तलाशी ली गई। एनआईए सूत्रों के अनुसार, इन संगठनों पर प्रतिबंध लगा हुआ है। फिर भी इन्होंने एक ऐसा नेटवर्क बनाया, जिससे पाकिस्तानी आतंकियों को पहलगाम में हमला करने की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में मदद मिली। NIA की जांच में पता चला है कि ऐसे 4 ओवरग्राउंड वर्कर्स ने पहलगाम समेत 4 जगहों की हमले के लिए रेकी की थी। इस रेकी के बाद ही आतंकियों ने पहलगाम की बैसरन घाटी में हमला करने का फैसला लिया। सूत्रों का कहना है कि अब तक कुल 20 ओवरग्राउंड वर्कर्स की पहचान हो चुकी है। इनमें से कई लोगों को अरेस्ट भी किया गया है। अब तक इस हमले के बाद से 186 लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनके पूछताछ की जा रही है। दरअसल कश्मीर में लंबे समय से आतंकी संगठनों की यह रणनीति रही है। अब आतंकी संगठनों का कोई खुलकर साथ नहीं देता, लेकिन अपनी नौकरी और धंधे करते हुए ही कई लोग ऐसे पाए जाते हैं, जो आतंकियों का साथ देते हैं। इन्हें ही ओवरग्राउंड वर्कर का नाम दिया गया है। 22 अप्रैल को आतंकियों ने पहलगाम में टूरिस्टों को मारा था। इन आतंकियों ने पुरुषों को ही मारा और उनकी महिलाओं को छोड़ दिया। इन महिलाओं एवं अन्य परिजनों ने ही बताया था कि आतंकियों ने उनसे पहले धर्म पूछा था और फिर कलमा पढ़वाया और खतना तक चेक किया। रिपोर्ट्स के अनुसार 20 लोगों की पैंट उतरवाकर आतंकियों ने देखा था कि उनका खतना हुआ है या नहीं। खतना नहीं पाया तो पुष्टि हुई कि वे मुसलमान नहीं हैं और फिर उनका बेरहमी से कत्ल कर दिया गया। कॉल रिकॉर्ड की जांच इन संगठनों से जुड़े लोगों के कॉल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जांचकर्ताओं को इन समूहों के सदस्यों और पहलगाम हमले में शामिल ओवर ग्राउंड वर्कर के बीच बातचीत के लिंक मिले हैं। इससे पता चलता है कि हमले की साजिश में कई लोग शामिल थे। एनआईए और दूसरी एजेंसियां मिलकर इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं। वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस हमले में और कौन-कौन शामिल था और उनका मकसद क्या था? मामले की जांच अभी जारी इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है। एनआईए हर पहलू पर बारीकी से ध्यान दे रही है ताकि दोषियों को सजा मिल सके और भविष्य में ऐसे हमलों को रोका जा सके। सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट पर हैं और इलाके में कड़ी निगरानी रख रही हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को टाला जा सके। लोगों से भी अपील की गई है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। अगर उन्हें कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। हमले से दो दिन पहले पहुंचा आतंकी दल सूत्रों की मानें तो आतंकियों का दल अपने ओवरग्राउंड वर्क संग 19 अप्रैल को बैसरन पहुंचा था। उन्होंने बैसरन पार्क और आसपास क्षेत्र की रेकी की, लेकिन अपने ओवरग्राउंड वर्कर से इस विषय में कोई बात नहीं की आतंकियों ने हमले से एक दिन पहले अपने ओवरग्राउंड वर्कर से संपर्क किया और उसे 22 अप्रैल की दोपहर को बैसरन पहुंचने के लिए कहा था। ओवरग्राउंड वर्कर बने गाइड सूत्रों के अनुसार, बैसरन नरसंहार के गुनहगारों को पकड़ने के लिए सुरक्षा बल ने अपना तलाशी अभियान जारी रखा हुआ है। सुरक्षा बल ने 20 के करीब ऐसे ओवरग्राउंड वर्करों को चिह्नित किया है, जो हमलावर आतंकियों के साथ संपर्क में रह चुके हैं। इनमें से कुछ जेल में बंद हैं। चार ओवरग्राउंड वर्करों ने पाकिस्तानी आतंकियों के लिए कथित तौर पर गाइड का भी काम किया है। पांच ओवरग्राउंड वर्करों के बारे में कहा जा रहा है कि वह हमले के समय पहलगाम और बैसरन के आसपास … Read more

पहलगाम हमले में आतंकियों का पाक कनेक्शन, हाशिम मूसा को कुख्यात आतंकवादी, 12 लोगों के सिर में मारी गोली

श्रीनगर  पहलगाम आतंकी हमले के पीछे दो पाकिस्तानी आतंकियों का हाथ माना जा रहा है। सुरक्षा बल उन्हें पकड़ने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं। ये आतंकी करीब डेढ़ साल पहले पाकिस्तान से जम्मू और कश्मीर में घुसे थे। उन्होंने सांबा-कठुआ क्षेत्र से घुसपैठ की थी। तब से वे कई आतंकी हमलों में शामिल रहे हैं। सेना, राष्ट्रीय राइफल्स और पैरामिलिट्री फोर्स अनंतनाग के ऊपरी इलाकों में आतंकियों को ढूंढ रही हैं। पुलिस तकनीकी साक्ष्य और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी का इस्तेमाल कर रही है। पुलिस ने आतंकियों की पहचान अली भाई उर्फ तल्हा और हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान के रूप में की है। पुलिस ने एक स्थानीय लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य आदिल हुसैन ठोकर का स्केच भी जारी किया है। माना जा रहा है कि ठोकर भी पहलगाम हमले में शामिल था। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी के लिए 20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। आतंकियों की कैसे पहचान कर रही जांच एजेंसी? दरअसल हाशिम मूसा पर पिछले साल 20 अक्टूबर को सोनमर्ग में जेड-मोड़ टनल पर हमला करने का शक है। उस हमले में एक निर्माण इकाई में काम करने वाले सात लोग मारे गए थे। सूत्रों ने बताया कि चश्मदीदों, पर्यटकों और स्थानीय गाइडों की ओर से रिकॉर्ड किए गए वीडियो फुटेज और सुरक्षा बलों के पास घाटी में सक्रिय आतंकियों के बारे में मौजूद जानकारी को मिलाकर तीनों हमलावरों की पहचान की गई। एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि चश्मदीदों को सक्रिय आतंकियों की कई तस्वीरें दिखाई गईं। उन्होंने मूसा को एक तस्वीर से पहचाना। इसके बाद सभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर अन्य हमलावरों की पहचान की गई। हाशिम मूसा की कैसे हुई पहचान? सूत्रों ने बताया कि मूसा की पहचान जिस तस्वीर से हुई, वह मारे गए स्थानीय लश्कर ए तैयबा आतंकी जुनैद अहमद भट के फोन से मिली थी। भट को पिछले दिसंबर में दाचीगम के जंगलों में मार गिराया गया था। जेड-मोड़ टनल हमले को अंजाम देते हुए वह CCTV कैमरे में कैद हुआ था। पुलिस ने उसके शव से एक फोन बरामद किया था। इसमें मूसा सहित अन्य आतंकियों के साथ उसकी तस्वीरें थीं। सूत्रों ने बताया कि अली भाई भी उसी समूह का हिस्सा था। चश्मदीदों के बयानों के आधार पर पुलिस ने ठोकर को हमले में शामिल लश्कर का स्थानीय सदस्य बताया है। आतंकियों का पाक कनेक्शन अनंतनाग के बिजबेहरा का रहने वाला ठोकर 2018 में वाघा बॉर्डर पार करके स्टूडेंट वीजा पर पाकिस्तान गया था। वहां उसने लश्कर ए तैयबा के टेरर ट्रेनिंग कैंप में बकायदा ट्रेनिंग ली। सूत्रों ने बताया कि वह डेढ़ साल पहले दो पाकिस्तानी आतंकियों के साथ वापस आया था। पाकिस्तान जाने से पहले ठोकर कश्मीर में एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता था। इन घटनाओं में होने का शक सूत्रों ने बताया कि आतंकी तब से पूंछ-राजौरी, बारामूला और दक्षिण कश्मीर क्षेत्र में सक्रिय हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या वे 24 अक्टूबर 2024 को बोटापथरी हमले में शामिल थे। उस हमले में तीन आर्मी के जवान और दो पोर्टर मारे गए थे। हालांकि उस हमले की जिम्मेदारी पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट ने ली थी, जो जैश-ए-मोहम्मद का एक हिस्सा है। आतंकियों में मूसा सबसे बड़ा कातिल सूत्रों ने बताया कि मूसा को बहुत स्किल्ड माना जाता है और वह जंगल में रहने का माहिर है। सूत्रों ने यह भी बताया कि वह उन घुसपैठियों में से हो सकता है जिन्होंने पिछले तीन सालों में जम्मू में आतंक मचाया है। उन्होंने सटीक फायरिंग और चुपके से की गई गतिविधियों से 50 से ज्यादा आर्मी के जवानों को मारा है। जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या यही समूह अगस्त 2023 में दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में तीन आर्मी के जवानों की हत्या में शामिल था। 12 लोगों के सिर में मारी गोली सूत्रों ने बताया कि आतंकियों पर पिछले साल मई में जम्मू के पूंछ जिले में हुए हमले में भी शामिल होने का शक है। उस हमले में एयरफोर्स का एक जवान मारा गया था और चार अन्य घायल हो गए थे। उधर, पहलगाम आतंकी हमले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की जांच में यह भी पता चला है कि फायरिंग के दौरान आतंकियों ने अपने साथियों से जल्दी करने को कहा ताकि वे जा सकें। शव की ऑटोप्सी रिपोर्ट से पता चला कि 12 पीड़ितों के सिर में गोली लगी थी।

एजेंसियों का दावा हमलावर आतंकी पाकिस्तान में बैठे ऑपरेटिव के साथ प्रत्यक्ष रूप से संपर्क में

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकी हमले के डिजिटल सबूत पाकिस्तान से जुड़ते नजर आ रहे हैं. भारत की खुफिया एजेंसियों ने कहा है कि हमले के संदिग्ध आतंकियों के डिजिटल फुटप्रिंट मुजफ्फराबाद और कराची स्थित सेफ हाउस तक पहुंच रहे हैं. इससे इस हमले के क्रॉस बॉर्डर लिंक का सबूत मिल रहा है. बता दें कि इस हमले में अबतक 28 सैलानियों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल हैं. खुफिया सूत्रों ने घटनास्थल से बरामद फॉरेंसिक एनालिसिस और हमले में बचे लोगों से मिली जानकारी के आधार पर कहा है कि आतंकियों ने सेना के लिए इस्तेमाल होने वाले हथियारों का इस्तेमाल हमले के लिए किया. इसका ये अर्थ निकलता है कि हमलावर पूरी तरह से ट्रेंड थे और उन्हें सभी जरूरी हथियार मिले थए. भारत की एजेंसियों को घटनास्थल के आस-पास एडवांस कैटेगरी के संचार उपकरण मिले हैं. इससे ये संकेत मिलता है कि आतंकियों को बाहर से लॉजिस्टिक सपोर्ट और सहयोग मिल रहा था.   खुफिया एजेंसियों का दावा है कि हमलावर आतंकी पाकिस्तान में बैठे ऑपरेटिव के साथ प्रत्यक्ष रूप से संपर्क में थे. पहलगाम हमले के संदिग्धों के डिजिटल कनेक्शन पाकिस्तान स्थित मुजफ्फराबाद और कराची के ‘सेफ हाउस’ पर पाए गए, जिससे सीमा पार आतंकियों के संबंध के साक्ष्य मजबूत हुए. सुरक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हथियारों की प्रकृति और हमले की सटीकता से पता चलता है कि आतंकियों ने प्रशिक्षित संचालकों से सैन्य सहायता ली थी. बता दें कि द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) जो छद्म नाम लेकर आतंकी हमले करता है ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. खुफिया एजेंसियों के अनुसार आतंकवादी पूरी तैयारी के साथ हमले के लिए आए थे. आतंकवादियों ने अपनी पीठ पर बैग टांग रखे थे, जिसमें सूखे मेवे, दवाइयां और संचार उपकरण थे.  5 से 6 विदेशी आतंकवादियों का एक समूह कुछ समय से जंगल में छिपा हुआ था और स्थानीय लोगों की मदद से पहलगाम की रेकी कर रहा था. तैयारी पूरी होने के बाद दहशतगर्दों ने मौका देखकर हमला कर दिया. खुफिया एजेंसियों का दावा है कि 3 से4 आतंकवादियों ने एके-47 से लगातार फायरिंग की. इस दौरान 2 पाकिस्तानी आतंकवादी पश्तो भाषा बोल रहे थे. उनके साथ 2 स्थानीय आतंकी (आदिल और आसिफ) भी थे. ये दो स्थानीय आतंकवादी बिजभेरा और त्राल के हैं. पाकिस्तानी आतंकियों ने बॉडी कैमरा पहनकर सब कुछ रिकॉर्ड किया. माना जा रहा है कि पहलगाम में आतंकवादी हमला 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले की तर्ज पर किया गया था. इस आतंकवादी हमले का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाना था. इस हमले के पीछे संभवतः पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई का हाथ है. खुफिया एजेंसियों ने इस हमले को अंजाम देने वाले 4 आतंकियों की एक साथ तस्वीरें जारी की है. इन तस्वीरों में सबसे दायीं ओर पाकिस्तानी सेना से रिटायर आसिफ फौजी भी शामिल है. जांच से ताल्लुक रखने वाले एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा, “यह सिर्फ एक अलग-थलग आतंकी घटना नहीं है. हमलावरों को सीमा पार से निर्देशित, सुसज्जित किया गया था और उन्हें सपोर्ट दिया गया. उनका उद्देश्य क्षेत्र को अस्थिर करना और शांति को पटरी से उतारना है.” गृह मंत्रालय स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की गई है. वरिष्ठ खुफिया और सैन्य अधिकारियों की अध्यक्षता में इस सप्ताह के अंत में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक होने की उम्मीद है. यह घटना क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादी समूहों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली रणनीति में बदलाव का संकेत देती है. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सैन्य-ग्रेड हथियारों और एन्क्रिप्टेड संचार प्रणालियों का उपयोग कश्मीर में हाइब्रिड युद्ध के एक नए चरण की ओर इशारा करता है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा जांच की जिम्मेदारी संभालने की उम्मीद के साथ, हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में शामिल व्यापक नेटवर्क के बारे में अधिक विवरण सामने आने की संभावना है. पाकिस्तान ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में क्या कहा? बता दें कि पहलगाम अटैक के बाद पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है. पाकिस्तान ने इस घटना से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि उसका इससे कोई लेना-देना नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले से पाकिस्तान का कोई लिंक नहीं है. हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं है. हम हर तरह के आतंकवाद की निंदा करते हैं. उन्होंने कहा कि पहलगाम की घटना से हमारा कोई ताल्लुक नहीं है.    

तुर्की ने सीरिया और इराक में किया भीषण हमला, 13 की मौत

अंकारा  तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि देश की सेना ने उत्तरी इराक और उत्तरी सीरिया में अभियान चलाकर 13 ‘आतंकवादियों’ को मार गिराया है।रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उत्तरी इराक में तुर्की के ऑपरेशन क्लॉ-लॉक में प्रतिबंधित कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के 11 सदस्य मारे गए। समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में तुर्की ने देश की सीमा के पास उत्तरी इराक के मेतीना, जैप और अवाशिन-बसयान क्षेत्रों में पीकेके के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ऑपरेशन क्लॉ-लॉक शुरू किया था। मंत्रालय ने कहा कि उत्तरी सीरिया में एक अलग ऑपरेशन में तुर्की की सेना ने सीरियाई कुर्द पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स (वाईपीजी) के दो सदस्यों को मार गिराया। मंत्रालय के अनुसार, वाईपीजी सदस्यों को तुर्की सेना के ऑपरेशन पीस स्प्रिंग क्षेत्र में देखा गया था। तुर्की अधिकारी अक्सर अपने बयानों में ‘निष्प्रभावी’ (न्यूट्रलाइज्ड) शब्द का प्रयोग यह दर्शाने के लिए करते हैं कि संबंधित ‘आतंकवादियों’ ने आत्मसमर्पण कर दिया, मारे गए या पकड़ लिए गए। तुर्की सेना, पीकेके और वाईपीजी के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए इराक और सीरिया में सीमा पार ऑपरेशन चला रही है। तुर्की सेना ने पड़ोसी देश के साथ अपनी सीमा पर वाईपीजी-फ्री जोन बनाने के लिए उत्तरी सीरिया में 2016 में ऑपरेशन यूफ्रेट्स शील्ड, 2018 में ऑपरेशन ओलिव ब्रांच, 2019 में ऑपरेशन पीस स्प्रिंग और 2020 में ऑपरेशन स्प्रिंग शील्ड शुरू किया था। तुर्की, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध पीकेके ने तीन दशकों से अधिक समय तक तुर्की सरकार के खिलाफ विद्रोह किया है। तुर्की वाईपीजी समूह को पीकेके की सीरियाई शाखा के रूप में देखता है।  

अलमारी के छोटे से ‘बॉक्‍स’ से न‍िकले 4 खूंखार आतंकी,दहशतगर्दों का नया ठ‍िकाना

कुलगाम जम्मू कश्मीर में सेना द्वारा आतंकवादियों के सफाए के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं. शनिवार को कुलगाम जिले में दो जगहों पर हुई मुठभेड़ में  6 आतंकियों को सुक्षाबलों ने ढेर कर दिया. कुलगाम के मोदरगाम मुठभेड़ स्थल से दो आतंकवादियों के शव बरामद किए गए जबकि चिन्नीगाम स्थल से रविवार को चार शव बरामद किए गए. इस बीच चिन्निगाम फ्रिसल से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जो हैरान करने वाला है. दरअसल शनिवार रात को मुठभेड़ में मारे गए हिजबुल मुजाहिदीन के चार आतंकवादियों ने चिन्निगाम फ्रिसल में एक घर के अंदर ऐसा ठिकाना बना रखा था जिसका वीडियो देखकर सुरक्षाबल भी हैरान हैं. आतंकियों ने एक अलमारी के अंदर बंकर बना रखा था. घर के अंदर आतंकियों का खुफिया ठिकाना कुलगाम के चिनीगाम क्षेत्र जिस घर में आतंकी छिपे थे, वहां उन्होंने अलमारी के पीछे बंकर बना रखा था. मुठभेड़ में हिजबुल के चारों आतंकियों के मारे जाने के बाद सुरक्षाबलों ने घर के अंदर तलाशी ली तो उन्हें तयखाना मिला. इसका इस्‍तेमाल आतंकी खुद छिपने और हथियार व गोलाबारूद छिपाने के लिए करते थे. कुलगाम के चिन्निगाम में मारे गए सभी आतंकवादी हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े हुए थे. ड्रॉवर के अंदर सीक्रेट बंकर वायरल हो रहे वीडियो में सुरक्षाकर्मी एक घर के अंदर हैं जहां अलमारी के पीछे आतंकियों ने सीक्रेट बंकर बना रखा है. जवान जब एक कमरे में लगी कपड़े की अलमारी को देखते हैं तो उन्हें कुछ शक सा होता है. जैसे अलमारी के नीचे की तरफ बना ड्रॉवर को खोला जाता है तो इसमें अंदर की तरफ एक रास्ता जाता दिखा. फिर यहां लाइट जलाकर एक शख्स को अलमारी के अंदर बने सीक्रेट रास्ते के जरिए बंकर तक भेजा गया और वीडियो रिकार्डिंग की गई. इस दौरान साफ देखा जा सकता है कि अलमारी के पीछे की तरफ आतंकियों ने एक सीक्रेट बंकर बना रखा था. जिसमें वह खुद भी छिप सकते थे और हथियार भी छिपा सकते थे. बताया जा रहा है कि कुलगाम में मारे गए आतंकी इसी बंकर में छिपे थे. दो जवान भी हुए थे शहीद आपको बता दें कि कुलगाम जिले के दो गांवों में शनिवार को मुठभेड़ शुरू हुई थी. पहली मुठभेड़ मोदरगाम गांव में हुई, जहां पैरा कमांडो लांस नायक प्रदीप नैन कार्रवाई में शहीद हो गए. सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान शुरू किया और कम से कम दो से तीन आतंकवादियों को उनके ठिकाने पर घेर लिया. वहीं दूसरी मुठभेड़ फ्रिसल चिनिगाम गांव में हुई, जब सुरक्षा बलों को इलाके में संभावित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों के बारे में सूचना मिली. ऑपरेशन के दौरान प्रथम राष्ट्रीय राइफल्स के हवलदार राज कुमार शहीद हो गए. गांव पहुंचने पर, एक घर में छिपे आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर अचानक से गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई. मुठभेड़ में एक पैरा कमांडो समेत दो सैन्यकर्मी शहीद हो गए. अभियान के बारे में बताते हुए जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक आरआर स्वैन ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में आतंकवादियों का सफाया करना एक बड़ी उपलब्धि है. स्वैन ने कहा कि अभियान की सफलता इस बात का संकेत है कि जम्मू-कश्मीर में आतंक के खात्मे की लड़ाई अपने अंजाम तक पहुंचेगी. आतंकियों की थी बड़ी साजिश आर्मी के इस ऑपरेशन में दो सुरक्षा बल भी शहीद हो गए। वहीं दो अलग-अलग जगह पर हुए एनकाउंटर में हिजबुल मुजाहिद्दीन के कुल 6 आतंकी मारे गए हैं। इस ऑपरेशन के बारे में बात करते हुए जम्मू कश्मीर के डीजीपी आर.आर स्वैन के अनुसार कुलगाम में छिपे ये आतंकी कोई बड़ी साजिश रच रहे थे, जिसे सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया है। सुरक्षा बलों ने मार गिराए 6 आतंकी बता दें कि जम्मू कश्मीर में हुए पहले एनकाउंटर में दो आतंकियों को मारा गया। इस मुठभेड़ में एक जवान भी शहीद हो गया। दूसरा एनकाउंटर कुलगाम के चिनिगम में हुआ, जहां चार आतंकियों को ढेर किया गया। इस दौरान हुई गोलीबारी में एक और जवान की शहादत हो गई। 2 एनकाउंटर में मारे गए 6 आतंकी हिजबुल मुजाहिद्दीन के थे। कुलगाम में मारे गए आतंकियों की पहचान यावार बशीर धर, जहीद अहमद धर, तौहीद अहमद और शकील अहमद वाणी के रूप में की गई है।  

खंडवा से Indian Mujahideen का आतंकी गिरफ्तार, खंडवा से एमपी ATS ने किया गिरफ्तार

खंडवा  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खंडवा जिले (Khandwa district) से पकड़े गए आतंकवादियों (Terrorists) के पास से पुलिस को कई चौंकाने वाले सामान और जानकारियां मिली हैं। ATS IG, डॉक्टर आशीष ने इन आतंकियों के बारे में कई जानकारियां दी हैं। आईजी, एटीएस ने कहा, ‘सुबह हमें अपने विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली की खूंखार आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (Indian Mujahideen terrorist organization) मानसिकता से ग्रसित एक शख्स बड़े हमले की तैयारी में है। हम इसपर काम कर रहे थे और इनपुट के आधार पर हमने एक आतंकवादी फैजान और उसके पिता हानिफ शेख को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों कंजार मोहल्ला, खंडवा के रहने वाले हैं। उन्हें UAPA (Unlawful Activities (Prevention) Act के विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से कई जिहादी साहित्य मिले हैं। इसके अलावा 4 मोबाइल फोन, 1 पिस्टल और 5 जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए हैं। इनके पास से SIMI के सदस्यता फॉर्म भी मिले हैं। इनके पास से जो मोबाइल और अन्य डिजिटल डिवाइस मिले हैं उनमें इंडियन मुजाहिदीन, आईएसआईएस, लश्कर-ए-तैयबा समेत अन्य आतंकी संगठनों के वीडियो और फोटो मिले हैं। इस मामले की जांच जारी है। अभी पुलिस को इनसे कई जानकारियां मिली हैं और आगे की जांच की जा रही है।’ ATS ने खंडवा में सुबह करीब 4 बजे बड़ी कार्रवाई की. जांच एजेंसी ने खंडवा की सलूजा कॉलोनी और गुलमोहर कॉलोनी में छापे मारे. युवकों के परिजनों और क्षेत्रवासियों ने बताया कि कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी के आठ से ज्यादा जवान हथियारबंद थे. उन्होंने घर की तलाशी लेकर परिवार के सभी मोबाइल भी जब्त किए हैं. जब्त मोबाइल और डिजिटल डिवाइस में आतंकी संगठनों इंडियन मुजाहिद्दीन, आईएसआईएस, जैश ए मोहम्मद, लश्कर ए तैयबा, जेहादी साहित्य, वीडियो मिले हैं. गिरफ्तार आतंकी के प्रतिबंधित संगठन सिमी के सदस्यों से संपर्क मिले हैं. ATS आईजी डॉ आशीष ने यह जानकारी दी. गौरतलब है कि खंडवा के अब्दुल रकीब कुरैशी को भी पिछले साल बंगाल एसटीएफ और एनआइए कोलकाता ने उठाया था. उसके संबंध प्रतिबंधित संगठन सिमी और आईएसआईएस से जुड़े होने की आशंका थी. अब बताया जा रहा है कि फैजान और नाबालिग भी इन संगठनों के करीब हैं. दूसरी ओर, खंडवा आए आईजी अनुराग से जब कार्रवाई के संबंध में पूछा गया तो उनका कहना था कि इसके बारे में हमें अभी कोई जानकारी नहीं है. एनआईए केंद्र सरकार के अधीन है. वह दिल्ली से ही काम करती है. उसके अलग-अलग यूनिट होते हैं. उसी प्रकार एमपी में एटीएस का मुख्यालय पीएचक्यू है. अगर वहां से कुछ कार्रवाई हुई हो तो उसे पता कर रहे हैं. पुलिस ने यह बताया कि आरोपी अपने फेसबुक आईडी पर इंडियन मुजाहिद्दीन से संबंधित जिहादी पोस्ट कर आईएम और आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहा था। वो फेसबुक पर आतंकी कैंपों का वीडियो और कंधार विमान अपहरण की कहानी कौन था निशाने पर पुलिस ने बताया कि आंतकी की लोन वुल्फ अटैक की योजना थी और उसके निशाने पर सुरक्षा बल के जवान थे। फैजान द्वारा लोन वुल्फ अटैक करने की योजना थी, जिसके लिए सुरक्षा बल के जवानों एवं उनके परिजनों की निगरानी एवं रेकी की जा रही थी। इसके द्वारा ऐसा हमला कर स्‍वयं को इंडियन मुजाहिदीन के यासीन भटकल एवं सिमी सरगना अबू फैजल की तरह बड़ा मुजाहिद सिद्ध करना था। अपनी योजना को अंजाम देने के लिए इसके द्वारा स्‍थानीय अवैध हथियार कारोबारी तथा राज्‍य के बाहर के लोगों से सम्‍पर्क कर पिस्‍टल एवं कारतूस एकत्र किए जा रहे थे। प्रकरण में आरोपी की पुलिस रिमांड लेकर अग्रिम पूछताछ की जा रही है एवं इसके अन्य सहयोगियों के बारे में भी पता लगाया जा रहा है। सेक्युरिटी फोर्स पर अटैक थी योजना एटीएस के अधिकारियों ने बताया कि उन लोगों को इनपुट मिला था कि एक शख्स इंडियन मुजाहिदीन के मॉड्यूल पर काम कर रहा है. इसके साथ ही सेक्युरिटी फोर्स पर अटैक की भी योजना बनाई जा रही थी. सुरक्षा बल कर्मियों के परिजनों को निशाने पर लेने की तैयारी की जा रही थी. आरोपी यासीन भटकल और अबू फैजल बनना चाह रहा था. पकड़े गए आरोपी की तार कोलकाता के आतंकी मामले से जुड़ने की संभावना है. लगभग एक साल पहले रकीब नाम के युवक को एटीएस ने दबोचा था. गिरफ्तार आरोपी का उससे संपर्क बताया जा रहा है.

बांदीपोरा के जंगलों में मुठभेड़ जारी, क आतंकी ढेर एक दिन पहले ही शाह ने आतंकियों पर सख्त एक्शन के निर्देश दिए

To save the government, huge budget was given to Bihar and Andhra Pradesh government

 बांदीपोरा उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में एक आतंकी को ढेर कर दिया गया. इस इलाके में दो आतंकियों के छिपे होने की खबर मिली थी, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने ये कार्रवाई की. ये मुठभेड़ बांदीपोरा के अरागम इलाके में रविवार देर रात शुरू हुई थी. सुरक्षाबलों ने इलाके को चारों तरफ से घेरकर तलाशी अभियान शुरू किया. ड्रोन के जरिए इलाके में आतंकी के शव का पता चला. ढेर आतंकी के हाथ में एम4 राइफल भी देखी गई. जम्मू क्षेत्र में आतंक की एक के बाद एक चार घटनाएं होने के बाद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान आज जम्मू में सुरक्षा स्थिति का जायजा लेंगे. वह नगरौटा में व्हाइट नाइट कॉर्प्स के साथ महत्वपूर्ण बैठकों की अध्यक्षता भी कर सकते हैं. रियासी बम हमले की जांच NIA को सौंपी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रियासी बस पर हुए आतंकी हमले की जांच एनआईए को सौंपी है, जिसका नोटिफिकेश जारी कर दिया गया है. एनआईए ने इस मामले में यूएपीए के तहत एफआईआर दर्ज की है. नौ जून को रियासी में पहला हमला सबसे पहले नौ जून को जम्मू कश्मीर के रियासी में आतंकियों ने तीर्थयात्रियों की बस पर हमला किया था. ये हमला नौ जून की शाम तकरीबन 6:15 बजे के आसपास हुआ था. घात लगाकर बैठे आतंकियों ने बस पर फायरिंग की थी, जिसके बाद बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी थी. बस पर हमले करने वाले आतंकी पहाड़ी इलाके में छुपे हुए थे. कठुआ हमले में दो आतंकियों को किया था ढेर इसके बाद मंगलवार को जम्मू कश्मीर के कठुआ के एक गांव में आतंकी घुस आए थे. आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ में अब तको दो आतंकियों को ढेर कर दिया गया. सर्च ऑपरेशन को और तेज कर दिया गया है. कठुआ जिले के एक गांव में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों का ऑपरेशन शुरू हुआ था. इस जिले के हीरानगर सेक्टर के सैदा सुखल गांव पर मंगलवार शाम आतंकवादियों ने हमला किया था. सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में सीआरपीएफ का एक जवान भी शहीद हुआ. कठुआ में मंगलवार शाम को आतंकियों की गोलीबारी में जम्मू कश्मीर के डीआईजी रैंक और एसएसपी रैंक के दो अधिकारियों की कार भी जद में आ गई थी. इस हमले में ये अधिकारी बाल-बाल बच गए थे. डोडा में तीसरा आतंकी हमला इसके बाद जम्मू कश्मीर के कठुआ में भी आतंकियों ने हमला किया. ये तीन दिन में इस तरह का तीसरा हमला था. डोडा में आतंकियों ने सेना के अस्थाई ऑपरेटिंग बेस पर गोलीबारी की, जिसके बाद सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई थी. डोडा के छत्रकला में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच गोलीबारी में सेना के पांच जवान सहित कुल छह लोग घायल हुए. घायलों में एक स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) भी शामिल था. घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था. कश्मीर टाइगर नाम के आतंकी ग्रुप ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी. नौशेरा में देखे गए थे संदिग्ध आतंकी इन आतंकी हमलों के बीच बुधवार को राजौरी के नौशेरा सेक्टर में दो आतंकियों को देखा गया था, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने यहां सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया. साथ ही अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती भी की गई है.    

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