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तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने 5258 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया

तिरुपति  तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष बीआर नायडू हैं। उनकी अध्यक्षता में बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बजट को मंजूरी दी है। यह बजट 5258 करोड़ रुपये का है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट से यह थोड़ा ज्यादा है। पिछले साल का बजट 5179 करोड़ रुपये था। इस बार बजट में 79 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। बजट में मंदिर की आय और व्यय का विवरण दिया गया। हर साल की तरह, तिरुपति ट्रस्ट को सबसे ज्यादा उम्मीद दान से है। मंदिर को उम्मीद है कि इस साल दान से 1729 करोड़ रुपये मिलेंगे। पिछले साल यह आंकड़ा 1671 करोड़ रुपये था। इसका मतलब है कि दान में बढ़ोतरी होने की संभावना है। मिलेगा 1310 करोड़ ब्याज तिरुपति ट्रस्ट को बैंकों में जमा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से भी ब्याज मिलता है। ट्रस्ट के पास लगभग 18000 करोड़ रुपये से ज्यादा की FD है। इस पर उन्हें 1310 करोड़ रुपये का ब्याज मिलने का अनुमान है। प्रसाद से होगी 600 करोड़ कमाई पिछले साल तिरुपति ट्रस्ट ने प्रसाद बेचकर 550 करोड़ रुपये कमाए थे। इस साल ट्रस्ट को उम्मीद है कि वे प्रसाद बेचकर 600 करोड़ रुपये कमाएंगे। प्रसाद की बिक्री से मंदिर को अच्छी आमदनी होती है। 310 करोड़ रुपये टिकट बिक्री से मंदिर को दर्शन टिकटों की बिक्री से भी पैसे मिलते हैं। इस साल अनुमान है कि टिकट बेचकर 310 करोड़ रुपये आएंगे। इसके अलावा, अर्जिता सेवा टिकटों से 130 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। ट्रस्ट के रूम से 157 करोड़ कमाई भक्तों के रहने के लिए कमरे और कल्याण मंडपम भी हैं। इनसे ट्रस्ट को 157 करोड़ रुपये की आमदनी होने का अनुमान है। कल्याणकट्टा से 176.5 करोड़ रुपये मिलेंगे। ट्रस्ट को अन्य स्रोतों से भी आय होती है, जैसे कि दान से 90 करोड़ रुपये, किराए और बिजली-पानी के बिल से 66 करोड़ रुपये, प्रकाशनों से 31 करोड़ रुपये और अन्य साधनों से 170 करोड़ रुपये मिलेंगे। कर्मचारियों के वेतन पर होगा सबसे ज्यादा खर्च खर्च की बात करें तो, तिरुपति ट्रस्ट इस साल कर्मचारियों के वेतन पर बहुत बड़ी रकम खर्च करेगा। यह राशि 1773.75 करोड़ रुपये है। हर साल की तरह, TTD का वेतन खर्च दान से मिलने वाली राशि से ज्यादा है। इस साल दान से 1729 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है, जबकि वेतन का खर्च 44.75 करोड़ रुपये ज्यादा है। 800 करोड़ का कॉर्पस फंड TTD ने 800 करोड़ रुपये कॉर्पस और अन्य निवेशों के लिए रखे हैं। मंदिर ट्रस्ट सामग्री खरीदने पर 768.5 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इंजीनियरिंग के कामों के लिए 350 करोड़ रुपये और इंजीनियरिंग के रखरखाव के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। तिरुपति ट्रस्ट ने SVIMS (श्री वेंकटेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) के इंजीनियरिंग के कामों के लिए 60 करोड़ रुपये और SVIMS को अनुदान के रूप में 60 करोड़ रुपये दिए हैं। TTD ने अन्य संस्थानों को अनुदान के रूप में 130 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है। 117.62 करोड़ रुपये लोन देगा TTD हिंदू सनातन धर्म को बढ़ावा देने के लिए भी काम करता है। इसके लिए ट्रस्ट ने HDPP (हिंदू धर्म प्रचार परिषद) और अन्य परियोजनाओं के लिए 121 करोड़ रुपये रखे हैं। TTD लोन और एडवांस के तौर पर 117.62 करोड़ रुपये देगा। अन्य खर्चों में ये शामिल हैं। सुविधा प्रबंधन सेवाओं के लिए 80 करोड़ रुपये, पेंशन और ग्रेच्युटी फंड में योगदान के लिए 100 करोड़ रुपये, राज्य सरकार को योगदान के लिए 50 करोड़ रुपये आदि।

वैष्णो देवी मंदिर ने वित्त वर्ष 24 में 683 करोड़ रुपये कमाए, प्रसाद और धार्मिक समारोह जीएसटी से मुक्त

श्रीनगर दुनिया में भारत मंदिरों का देश है, यहां मंदिरों की संख्या लाखों में है. लेकिन, क्या आप जानते हैं देश का सबसे अमीर मंदिर कौन-सा है? दरअसल, मंदिरों की कमाई और उस पर टैक्स को लेकर इन दिनों एक सियासी बहस छिड़ी हुई है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी सरकार मंदिरों को जीएसटी बकाया का नोटिस भेज रही है. उधर, बीजेपी ने इस मामले में कांग्रेस पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है. आइये आपको बताते हैं देश के सबसे अमीर मंदिर की कमाई और टैक्स के बारे में… कहां है स्थित है सबसे दौलतमंद मंदिर मनीकंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट में एक विश्लेषण के बाद पाया है कि भारत का सबसे अमीर मंदिर ट्रस्ट तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTS) है, जो वित्त वर्ष 2025 में अपनी 4,774 करोड़ रुपये की वार्षिक आय पर 1.5 प्रतिशत से कम वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का भुगतान करेगा. नवंबर 2024 में, देश के सबसे धनी मंदिरों में से एक तिरुवनंतपुरम के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर को बकाया टैक्स भुगतान के लिए नोटिस भेजा गया था. मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि 7 साल की अवधि के लिए मांग केवल 1.57 करोड़ रुपये की थी, जबकि मंदिर ने अकेले 2014 में 700 करोड़ रुपये कमाए हैं. करोड़ों का चढ़ावा, ब्याज से भी कमाई जम्मू के कटरा में स्थित वैष्णो देवी मंदिर ने वित्त वर्ष 24 में 683 करोड़ रुपए कमाए, जिसमें से 255 करोड़ रुपए चढ़ावे से आए, जो टैक्स-फ्री हैं और 133.3 करोड़ रुपए ब्याज से आए. टीटीडी के मामले में, 4,800 करोड़ रुपए की कमाई में से एक तिहाई से अधिक हुंडी संग्रह से आए. इस मामले में जीएसटी के तहत टैक्स लायबिलिटी वित्त वर्ष 21 से पांच वर्षों में लगभग 130 करोड़ रुपये रही है. हालांकि, इस मामले में मंदिरों के डिटेल विवरण उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन भारत के दो सबसे बड़े मंदिर ट्रस्टों की आय पिछले सात वर्षों में दोगुनी हो गई है. साल दर साल बढ़ी मंदिरों की आय -तिरुपति ट्रस्ट का वित्त वर्ष 2017 में बजट 2,678 करोड़ रुपये था, जो इसकी वेबसाइट के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 5,145 करोड़ रुपये हो गया. -वैष्णो देवी ट्रस्ट की आय वित्त वर्ष 2017 में 380 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 683 करोड़ रुपये हो गई है. जीएसटी भुगतान की रकम संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, तिरुपति मंदिर ने वित्त वर्ष 2017 में 14.7 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2022 में 15.58 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2023 में 32.15 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024 में 32.95 करोड़ रुपये का जीएसटी भुगतान किया. धार्मिक समारोह और प्रसाद होते हैं ‘टैक्स फ्री’ -प्रसाद और धार्मिक समारोह जीएसटी संग्रह से मुक्त हैं. टीटीडी और वैष्णो देवी के मामले में यह आय एक तिहाई से अधिक थी. -वित्त वर्ष 24 में वैष्णो देवी मंदिर ट्रस्ट ने अपनी आय का 37 प्रतिशत दान से अर्जित किया. वहीं, वित्त वर्ष 25 में टीटीडी को दान से लगभग 4,800 करोड़ रुपये अर्जित करने की उम्मीद है. -यदि कमरे का शुल्क 1,000 रुपये से अधिक है और यदि सामुदायिक हॉल या खुले क्षेत्र का शुल्क 10,000 रुपये से अधिक है, तो परिसर के किराये पर जीएसटी लगाया जाता है. -व्यवसाय के लिए किराए पर दी गई दुकानों और अन्य स्थानों पर भी जीएसटी नहीं लगता है, यदि मासिक किराया 10,000 रुपये से कम है. -ट्रस्ट द्वारा संचालित स्मारिका दुकानों और अन्य वाणिज्यिक उपक्रमों पर जीएसटी लागू है. वैष्णो देवी ट्रस्ट एक हेलीकॉप्टर सेवा और स्मारिका दुकानें चलाता है. -ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 24 में बिक्री से 19 प्रतिशत या 129.6 करोड़ रुपये और किराये की आय से 84 करोड़ रुपये या 12 प्रतिशत कमाए.

तिरुपति मंदिर को लेकर नया विवाद, भक्त ने प्रसाद में कीड़ा मिलने का किया दावा, टीटीडी का इनकार

आंध्र प्रदेश क्या आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर के प्रसाद में कीड़े पाए गए? रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना बीते बुधवार दोपहर 1:30 बजे की है जब मंदिर में दोपहर का भोजन परोसा जा रहा था। एक भक्त ने दावा किया कि उसे अपने दही चावल में कनखजूरा मिला। हालांकि, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने भक्त के इस दावे को खारिज कर दिया है। मंदिर के दर्शन के लिए वारंगल से तिरुपति आने वाले चंदू ने कहा, ‘जब मैंने कर्मचारियों के सामने यह मुद्दा उठाया तो उनकी प्रतिक्रिया चौंकाने वाली रही। उनका कहना था कि ऐसा कभी-कभी हो जाता है।’ इसके बाद उसने प्रसाद का फोटो और वीडियो लेकर मंदिर के अधिकारियों से संपर्क किया। उन्होंने पहले इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया और बाद में उसे डराने-धमकाने की कोशिश की। चंदू ने बताया, ‘मंदिर के अधिकारियों ने मुझसे कहा कि प्रसाद परोसने के लिए इस्तेमाल की जाने वाले पत्ते से कीड़ा आया होगा।’ मगर, शिकायतकर्ता का कहना है कि यह लापरवाही अस्वीकार्य है। अगर बच्चे या दूसरे लोग दूषित भोजन खाते हैं तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा? दूसरी ओर, टीटीडी ने इन आरोपों से इनकार किया और ऐसे दावे को निराधार व झूठा बताया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मंदिर में रोजाना हजारों लोगों के लिए ताजा प्रसाद बनाया जाता है। मगर, इसमें कोई कीड़ा मिला। बयान में कहा गया, ‘टीटीडी श्रीवारी दर्शन के लिए आने वाले हजारों भक्तों के लिए गर्म अन्न प्रसादम तैयार करता है। यह अपुष्ट दावा है कि कनखजूरा बिना ध्यान दिए भोजन में गिर सकता है।’ ‘भगवान वेंकटेश्वर में आस्था को भटकाने का प्रयास’ टीटीडी की ओर से कहा गया कि प्रसाद को लेकर टिप्पणी भक्तों को भगवान वेंकटेश्वर में उनकी आस्था से भटकाने का प्रयास हो सकती है। साथ ही, संस्था को बदनाम करने का यह एक जरिया है। तिरुपति के प्रसाद में कीड़ा मिलने का दावा ऐसे समय किया गया है जब लड्डू में चर्बी की मिलावट को लेकर हंगामा मचा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई की सहायता से विशेष जांच दल (SIT) लड्डू में मिलवाट के दावों की जांच कर रहा है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने इस महीने की शुरुआत में बड़ा आरोप लगाया था। उन्होने कहा कि राज्य में वाईएस जगनमोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के दौरान तिरुपति मंदिर के लड्डू तैयार करने में पशु चर्बी का इस्तेमाल किया गया था। ‘तिरुपति के लड्डूओं की गुणवत्ता में हुआ सुधार’ मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को कहा कि तिरुमला की पहाड़ियों पर स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं ने ‘लड्डू प्रसादम’ की गुणवत्ता पर संतोष जताया है। तिरुमला की पहाड़ियों पर तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की ओर से स्थापित वकुलामठ केंद्रीकृत रसोईघर का उद्घाटन किया गया। इसके बाद नायडू ने कहा कि लड्डू प्रसादम बनाने के लिए प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता की जांच के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित करने के अलावा, अगर जरूरत पड़ी तो टीटीडी तिरुमला में पूरी प्रक्रिया पर सुझाव लेने के लिए IIT तिरुपति से भी परामर्श ले सकता है। नायडू ने वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के प्रबंधक टीटीडी के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने यह सुनिश्चित करने को कहा कि प्रसाद बनाने में केवल सर्वोत्तम गुणवत्ता वाली सामग्री का ही उपयोग किया जाए।

तिरुपति मंदिर में 4 अक्टूबर से 9 दिवसीय ‘ब्रह्मोत्सव’ उत्सव, हर दिन 1 लाख भक्तों के आने की उम्मीद

तिरुपति आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में प्रसाद को लेकर हुए विवाद के बाद अब तिरुपति का श्री वेंकटेश्वर मंदिर ‘ब्रह्मोत्सव’ के लिए तैयारी कर रहा है. यह 9 दिवसीय उत्सव 4 से 12 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें हर दिन लगभग 1 लाख भक्तों के आने की उम्मीद है. बता दें कि लड्डू विवाद के बाद मंगलवार को मंदिर में सफाई अनुष्ठान ‘कोईल अल्वार तिरुमंजनम’ का आयोजन किया गया था.  इस दौरान पूरे मंदिर, मूर्तियों और पूजा के बर्तनों को साफ किया गया. हर दिन बनेंगे 8 लाख लड्डू ब्रह्मोत्सव के दौरान मंदिर प्रशासन बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की उम्मीद कर रहा है. पवित्र रसोई, जिसे ‘पोटु’ कहा जाता है, जहां प्रतिदिन लगभग 3.5 लाख लड्डू तैयार किए जाते हैं वहां  ब्रह्मोत्सव के दौरान प्रतिदिन कम से कम 8 लाख लड्डू बनाने के लिए तैयार हो रही है. जानकारी के अनुसार, हर दिन एक लाख तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है. प्रशासन व्यवस्था भी सख्त मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी खास इंतजाम किए जा रहे हैं. 4 से 12 अक्टूबर तक सभी वीआईपी दर्शन की व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है. मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों को भीड़ नियंत्रित करने की खास ट्रेनिंग दी जा रही है. लोगों को सावधानी बरतने के लिए कहा जा रहा है. कौन तैयार करता है लड्डू तिरुपति मंदिर देश के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है. यहां हर साल करीब तीन करोड़ श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं यानी रोजाना करीब 82 हजार श्रद्धालु भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन करते हैं. करीब 3.50 लाख लड्डू तैयार किए जाते हैं. सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में लड्डू दिए जाते हैं. इस पूरी व्यवस्था का संचालन उस कमेटी के द्वारा किया जाता है, जिसका गठन हर दो साल में आंध्र प्रदेश की राज्य सरकार करती है. इस कमेटी का नाम है- तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम्. बता दें कि हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया कि पिछली सरकार में तिरुपति मंदिर में मिलने वाले प्रसाद में घी की जगह जानवरों की चर्बी और मछली के तेल का इस्तेमाल किया जा रहा था. इसी साल जून में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव हारी और नायडू ने एनडीए की सरकार बनाई. इस दावे के बाद देशभर की सियासत गर्मा गई थी. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था.  

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