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एमपी की सोम डिस्टलरीज की याचिका पर हाईकोर्ट में नया मोड़, बड़ा अपडेट सामने आया

भोपाल   मध्यप्रदेश की शराब कंपनी सोम डिस्टलरीज की हाईकोर्ट में याचिका पर बड़ा अपडेट सामने आया है। केस में  जबलपुर हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। इस पर मामला आगे बढ़ा दिया गया है। सोम डिस्टलरीज Som Distilleries के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में ही सुनवाई से दो जजों ने खुद को अलग कर लिया था। ऐसे में कानूनी उलझन उत्पन्न हुई पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यह केस जबलपुर हाईकोर्ट में ही चल रहा है। रायसेन जिले में स्थित सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज और सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड प्रदेश की सबसे प्रमुख शराब निर्माता कंपनी है। इनका लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया था। 4 फरवरी को आबकारी आयुक्त ने इस संबंध में आदेश जारी किया था। तत्कालीन आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने अपने आदेश में कहा था कि सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज और सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के संचालक, प्रतिनिधि, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता व कर्मियों पर देपालपुर (इंदौर) कोर्ट में एक प्रकरण में पारित निर्णय के आधार पर कार्रवाई की गई। इसमें कहा गया कि इंदौर हाईकोर्ट से संबंधित आपराधिक अपीलों में सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाई, पर दोषसिद्धि प्रभावी है। शराब निर्माता कंपनी सोम डिस्टलरीज Som Distilleries ने इसे चुनौती देते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई से जबलपुर हाईकोर्ट के दो जज जस्टिस विशाल मिश्रा और संदीप एन भट्ट ने खुद को अलग कर लिया जिससे कानूनी उलझन हुई। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में ही याचिका पर सुनवाई शुरु हुई।  हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच ने केस की सुनवाई की  हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच ने केस की सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सुनवाई में याचिकाकर्ता सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज और सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें पेश कीं। इधर सरकार की ओर से भी शासकीय अधिवक्ता ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच ने दोनों पक्षों को सुना पर समयाभाव के कारण सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। इसपर कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 मार्च की तारीख तय की।

इंदौर में पंजाबी सिंगर करण औजला के शो से पहले नगर निगम ने जब्त किया सामान, टैक्स न भरने पर की कार्रवाई

इंदौर  इंदौर में पंजाबी सिंगर करण औजला के शो से पहले नगर निगम की टीम ने कार्यक्रम की जगह पर पहुंचकर सामान जब्त कर लिया। जानकारी के मुताबिक शो से पहले निगम को मनोरंजन कर जमा नहीं करवाया गया है। इस पर यह कार्रवाई की गई। पंजाबी सिंगर का आज शाम ही शो होना है। शो के लिए 3 हजार से 6 लाख रुपये तक के टिकट की बेचे जाने की बात सामने आ रही है। मंच से सामान जब्त, आयोजकों की मिन्नतें नाकाम जब कॉन्सर्ट की अंतिम तैयारियां चल रही थीं, तभी नगर निगम के कर्मचारियों ने एक-एक करके स्टेज पर रखा कीमती साउंड सिस्टम और अन्य साजो-सामान गाड़ियों में भरना शुरू कर दिया। वहां मौजूद कर्मचारियों ने टीम को रोकने की कोशिश की, लेकिन निगम के अधिकारी मनोरंजन कर जमा न होने की बात पर अड़े रहे। यह कार्रवाई इतनी अचानक थी कि आयोजकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। करोड़ों का कारोबार, पर टैक्स नहीं भरा खबर है कि इस शो के लिए टिकिटों की बिक्री धड़ल्ले से हुई है। 6 लाख रुपये तक के वीआईपी टेबल बुक होने की चर्चा है, लेकिन इस बड़े कारोबार के बीच सरकारी खजाने में जमा होने वाला मनोरंजन कर नहीं पहुंचा। इसी को आधार बनाकर निगम ने अपनी कार्रवाई को अंजाम दिया। आयोजकों ने नहीं सीखा सबक यह पहली बार नहीं है जब इंदौर में किसी बड़े सितारे के शो पर ग्रहण लगा हो। इससे पहले हनी सिंह के शो में भी एक करोड़ का सामान जब्त हुआ था। दिलजीत दोसांझ के मामले के बाद निगम ने स्पष्ट कर दिया था कि अब कार्यक्रम से पहले टैक्स चुकाना अनिवार्य होगा। बावजूद इसके, आयोजकों की इस लापरवाही ने अब हजारों प्रशंसकों के उत्साह को अनिश्चितता में डाल दिया है। कॉन्सर्ट की तैयारी में लगे कर्मचारी उस समय चौक गए जब नगर निगम की टीम वहां पहुंची और एक-एक करके स्टेज पर रखा साउंड सिस्टम और अन्य सामान उठाकर गाड़ी में रखने लगी। इस दौरान कुछ लोगों ने उन्हें ऐसा न करने के लिए कहा, लेकिन नगर निगम के कर्मचारियों ने कार्रवाई जारी रखी।

मुख्यमंत्री योगी की दूरदृष्टि और कार्ययोजना से यूपी बना निवेशकों की शीर्ष पसंद

₹7.5 लाख करोड़ की नई परियोजनाओं के साथ पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी मुख्यमंत्री योगी की दूरदृष्टि व सुनियोजित कार्ययोजना से यूपी बना निवेशकों की पहली पसंद रिफॉर्म, परफॉर्म व ट्रांसफॉर्म के मंत्र से बदली प्रदेश की तस्वीर सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, हर मोर्चे पर तैयार की गई निवेश के लिए आदर्श जमीन लखनऊ उत्तर प्रदेश ने पिछले 9 वर्षों में जो परिवर्तन देखा है, वह केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक आर्थिक और औद्योगिक बदलाव की कहानी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदृष्टि व सुनियोजित कार्ययोजना के तहत “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” के मंत्र ने प्रदेश को निवेश के नक्शे पर नई पहचान दिलाई है। यह योगी सरकार की नियोजित कार्यशैली का नतीजा है कि अब तक चार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के जरिये लगभग ₹15 लाख करोड़ की परियोजनाएं धरातल पर उतारी जा चुकी हैं, जबकि ₹7.5 लाख करोड़ की नई परियोजनाओं के साथ पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी है। निवेश व उद्यमिता के मोर्चे पर बुरी तरह पिछड़ रहे उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में योगी सरकार आने पर स्थिति में सुधार के लिए बिंदुवार योजना तैयार की गई। सबसे पहले योजनाबद्ध तरीके से सिस्टम में सुधार (रिफॉर्म) किया गया, फिर परफॉर्मेंस के जरिए नीतियों को जमीन पर उतारा गया और अंततः ट्रांसफॉर्म के माध्यम से प्रदेश की छवि बदल गई। हर क्षेत्र के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया, निवेश प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाया गया। निवेश व उद्योग के रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहचान कर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत 13 अधिनियमों में 99% छोटे आपराधिक प्रावधान समाप्त कर कारोबार को आसान किया गया। प्रदेश में निवेश के अनुकूल माहौल तैयार करना केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर निवेश के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार किया गया। उद्योगों के लिए प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं और डि-रेगुलेशन सुधार लागू किए गए। इसी का परिणाम है कि योगी सरकार के अस्तित्व में आने के बाद यूपी को ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।  योगी सरकार की नीति प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए सेक्टरवार विशेष औद्योगिक क्षेत्रों का विकास करना भी रही। इसके तहत राज्य में उद्योग विशेष के लिए क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। फिल्म सिटी, टॉय पार्क, लॉजिस्टिक हब (यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र), फार्मा पार्क (झांसी-ललितपुर) मेगा टेक्सटाइल पार्क (लखनऊ-हरदोई), परफ्यूम पार्क (कन्नौज), प्लास्टिक, गारमेंट और लेदर क्लस्टर (गोरखपुर, कानपुर, हरदोई) क्षेत्र विशेष के निवेश को आकर्षित करने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।  निवेश का ड्रीम डेस्टिनेशन बनकर उत्तर प्रदेश 1 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का स्पष्ट फोकस हाईटेक सेक्टर जैसे एआई, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण पर है, जहां निवेश के साथ-साथ युवाओं के लिए नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं। साथ ही, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क जैसे मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए निवेश को गति दी जा रही है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की कहानी अब महज सुधार तक सीमित नहीं, बल्कि एक व्यापक परिवर्तन की मिसाल बन चुकी है, जहां “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” का मंत्र प्रदेश को सुरक्षित, सक्षम और निवेश के लिए सबसे उपयुक्त गंतव्य में बदल चुका है।

यूपीटीईटी-2026 के लिए जुलाई में तीन दिन आयोजित होगी परीक्षा

यूपीटीईटी-2026 का ऐलान, जुलाई में तीन दिन होगी परीक्षा 27 मार्च से आवेदन शुरू, 26 अप्रैल अंतिम तिथि पात्र युवाओं के लिए शिक्षक बनने का सुनहरा मौका भर्ती प्रक्रिया में बड़ा सुधार, डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता और तेजी पर जोर लखनऊ उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए बड़ी खबर है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा उ0प्र0 शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 का आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया गया है। आयोग की वेबसाइट पर 20 मार्च 2026 से विज्ञापन उपलब्ध करा दिया गया है। इस बार की परीक्षा में प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) और उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) दोनों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लगातार शिक्षा क्षेत्र में सुधार और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए प्रयासरत है। इसी कड़ी में यूपीटीईटी-2026 को समयबद्ध तरीके से आयोजित कर प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को गति देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।  आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि योगी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और अभ्यर्थी हितैषी बनाने के उद्देश्य से इस बार वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) व्यवस्था लागू की है। अब अभ्यर्थियों को पहले ओटीआर पूरा करना होगा, उसके बाद ही वे यूपीटीईटी-2026 के लिए आवेदन कर सकेंगे। इस व्यवस्था से फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी। उप सचिव संजय कुमार सिंह ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया 27 मार्च 2026 से शुरू होकर 26 अप्रैल 2026 तक चलेगी। वहीं अभ्यर्थियों को 1 मई 2026 तक आवेदन पत्र में संशोधन और शुल्क संबंधित समस्याओं के समाधान का अवसर दिया जाएगा। परीक्षा का आयोजन 2, 3 और 4 जुलाई 2026 को प्रस्तावित है। आयोग का फोकस योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति से प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध विस्तृत विज्ञापन और निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर ही आवेदन करें, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचा जा सके।

यूपी में महिला निदेशकों की अगुवाई में स्टार्टअप्स का विस्फोट, 174 से 2525 तक पहुंची संख्या

महिला निदेशकों की अगुवाई में यूपी का स्टार्टअप बूम, 174 से 2525 पहुंची संख्या    योगी सरकार में महिला भागीदारी वाले स्टार्टअप्स में यूपी की बढ़ रही हिस्सेदारी 2017 से 2025 तक मजबूत उछाल, 2026 में भी 300 से ज्यादा डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त नए स्टार्टअप जुड़े योगी सरकार की नीतियों से महिला उद्यमिता को मिला निर्णायक बल लखनऊ  उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है और यह बढ़त अब धरातल पर स्पष्ट दिखाई देने लगी है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में महिला निदेशक या साझेदार वाले स्टार्टअप्स की संख्या में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में केवल 174 ऐसे स्टार्टअप्स थे जिन्हें डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त थी और जिनमें कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार शामिल थी। यह संख्या लगातार बढ़ते हुए वर्ष 2025 में 2525 तक पहुंच गई।  31 जनवरी 2026 तक भी 301 नए स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी दर्ज की गई है। ये सभी स्टार्टअप्स डीपीआईआईटी की ओर से आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त हैं। प्रदेश में इस बढ़त को योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए निवेश अनुकूल माहौल, प्रक्रियाओं में सरलता और युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है। इसका असर खासतौर पर महिला उद्यमिता पर पड़ा है, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं अब निदेशक और साझेदार के रूप में सामने आ रही हैं। केंद्र सरकार की स्टार्टअप इंडिया पहल के साथ राज्य स्तर पर मिले सहयोग ने इस वृद्धि को गति दी है। फंड ऑफ फंड्स, स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम और क्रेडिट गारंटी स्कीम जैसी योजनाओं के जरिए स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार तक वित्तीय सहायता मिल रही है। इसका लाभ उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को भी मिला है, जिससे नए स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से उभरते स्टार्टअप केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। महिला भागीदारी में हो रही लगातार वृद्धि यह संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश में उद्यमिता का दायरा व्यापक हो रहा है और महिलाएं इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं। प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम न केवल विस्तार कर रहा है, बल्कि महिला सशक्तीकरण के एक नए मॉडल के रूप में भी स्थापित कर रहा है। जहां नीतिगत समर्थन और बढ़ती भागीदारी मिलकर नई आर्थिक संभावनाओं को जन्म दे रही है।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने रामनगरी में राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया

रामनगरी में राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने किया राष्ट्रपति का स्वागत  महापौर ने देश की प्रथम नागरिक को सौंपी ‘नगर की चाबी’  एयरपोर्ट से राम मंदिर के रास्ते में कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से राष्ट्रपति का किया भव्य स्वागत अयोध्या  चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु रामनगरी पहुंचीं। यहां उनका भव्य स्वागत किया गया। उनका अयोध्या आगमन ऐतिहासिक व सांस्कृतिक गरिमा से परिपूर्ण रहा। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।  महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने राष्ट्रपति का अभिवादन करते हुए उन्हें ‘नगर की चाबी’ भेंट की। यह सम्मान अतिथि को नगर की ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्च प्रतीकात्मक सम्मान माना जाता है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का अयोध्या का यह दूसरा दौरा है। एयरपोर्ट से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तक कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से किया भव्य स्वागत अयोध्या एयरपोर्ट से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए जैसे ही राष्ट्रपति का काफिला रवाना हुआ, पूरे मार्ग पर उत्सव जैसा दृश्य देखने को मिला। सड़क के दोनों ओर करीब 20 सांस्कृतिक मंच सजाए गए थे, जहां लगभग 250 कलाकारों ने रामायण आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भारतीय वेशभूषा में कलाकारों ने स्वागत गीत, भजन, अवधी-भोजपुरी लोकगायन-लोकनृत्य समेत भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत कार्यक्रमों के जरिए मन मोह लिया।  हर ओर उत्साह व उल्लास अयोध्यावासियों ने भी सड़क किनारे खड़े होकर पुष्प वर्षा, जयकारों संग देश की प्रथम नागरिक का गर्मजोशी से स्वागत किया। राष्ट्रपति ने भी अयोध्यावासियों का अभिवादन किया। कार्यक्रम को और भव्य बनाने के लिए रामलीला के अंश, झांकियां, ढोल-नगाड़ा, शंखनाद, वेदपाठ और भजन-कीर्तन जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिससे अयोध्या की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। राष्ट्रपति के आगमन के मद्देनजर सजी अयोध्या नगरी में हर ओर श्रद्धा, उत्साह और उल्लास का वातावरण रहा।

कांग्रेस को राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग का डर, हरियाणा, ओडिशा और बिहार की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता, विधायकों की बाड़ेबंदी

भोपाल  मध्य प्रदेश में जून 2026 को खाली होने वाली राज्यसभा सीटों पर अप्रैल मई में चुनाव होने की संभावना है। इससे पहले राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। वर्तमान में इन सीटों पर डॉ सुमेर सिंह सोलंकी (भाजपा), जॉर्ज कुरियन (भाजपा) और दिग्विजय सिंह (कांग्रेस) सांसद हैं। कांग्रेस को क्यों सता रहा डर? कांग्रेस पार्टी को इस चुनाव से पहले अपने ही विधायकों की क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। हाल ही में हरियाणा, बिहार और ओडिशा में हुए राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग के उदाहरण सामने आए हैं, जिससे पार्टी सतर्क हो गई है। सूत्रों के अनुसार, इसी आशंका के चलते कांग्रेस अपने विधायकों की “बाड़ेबंदी” (रिसॉर्ट पॉलिटिक्स) की तैयारी में है, ताकि किसी तरह की टूट-फूट से बचा जा सके। किन विधायकों पर संशय? कांग्रेस के पास फिलहाल 65 विधायक हैं, लेकिन निर्मला सप्रे को लेकर स्थिति साफ नहीं है। निर्मला सप्रे लगातार भाजपा के कार्यक्रमों में नजर आ रही हैं। वहीं अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोटिंग नहीं कर सकते। इसके अलावा पार्टी को आशंका है कि 5–6 विधायक भाजपा के संपर्क में आ सकते हैं। क्या कहता है चुनावी गणित? 230 सदस्यीय विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास 165 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 65। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की जरूरत होती है। इस हिसाब से भाजपा को 2 सीट और कांग्रेस को 1 सीट मिलना तय माना जा रहा है। कहां फंस सकता है पेंच? सियासी समीकरण तब बिगड़ सकते हैं, अगर कांग्रेस के कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर दें या अनुपस्थित रहें। खासकर अगर निर्मला सप्रे भाजपा के पक्ष में जाती हैं और अन्य 5–6 विधायक भी टूटते हैं, तो कांग्रेस अपनी तय मानी जा रही एक सीट भी गंवा सकती है। पार्टी का दावा कांग्रेस नेता पीसी शर्मा का कहना है कि सभी विधायक एकजुट हैं और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हालांकि अंदरखाने चल रही हलचल ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी दावा किया है कि पार्टी में सबकुछ ठीक है और सभी विधायक एकजुट है। संगठन को धार देने की तैयारी, जिला स्तर पर शुरू किया विस्तार दिल्ली में हुई अहम बैठक के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस ने संगठन विस्तार की प्रक्रिया तेज कर दी है। लंबे इंतजार के बाद अब जिला कार्यकारिणी की घोषणा शुरू हो गई है और नवरात्र के अंदर अधिकांश जिलों में नई टीम सामने आ जाएगी। दो दिन तक चली मंथन बैठक में संगठन को मजबूत करने की रणनीति तय हुई। इसके तुरंत बाद जिला कार्यकारिणी घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पार्टी नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि अब देरी बर्दाश्त नहीं होगी।  लंबे समय से लटका था मामला जिला अध्यक्षों की नियुक्ति तो पहले ही हो चुकी थी, लेकिन कार्यकारिणी घोषित न होने से सवाल उठ रहे थे। कुछ जिलों में सूची जारी हुई भी, लेकिन पदों की संख्या ज्यादा होने पर उन्हें निरस्त करना पड़ा। अब नई गाइडलाइन के तहत संतुलित टीम बनाई जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक नवरात्रि के भीतर अधिकांश जिलों की कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी। इसे आगामी चुनावों की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है। जबलपुर ग्रामीण, श्योपुर, कटनी शहर और बड़वानी जिलों की नई कार्यकारिणी घोषित की जा चुकी है। ये नियुक्तियां प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर की गई हैं। AICC की गाइडलाइन के मुताबिक गठन बड़े जिलों में अधिकतम 51 सदस्य छोटे जिलों में 31 सदस्य की सीमा तय इसी मानक के अनुसार नई कार्यकारिणियां तैयार की जा रही हैं। जमीनी स्तर पर भी संगठन मजबूत संगठन विस्तार के तहत 88 नगर अध्यक्ष और 21 मंडल अध्यक्षों की भी नियुक्ति की गई है। इसका मकसद बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करना है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। उनका फोकस बूथ स्तर पर नेटवर्क मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर है। 

पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह के नेतृत्व में केरल में भाजपा का प्रचार अभियान

तिरुवनंतपुरम   9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभियान निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा केरल में एक आक्रामक अभियान की तैयारी कर रही है। इसमें ऐतिहासिक सफलता हासिल करने के प्रयास में पार्टी अपनी शीर्ष राष्ट्रीय नेतृत्व टीम को तैनात कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री समेत अन्य वरिष्ठ नेता केरल पहुंचने वाले हैं, जो 140 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा का खाता खोलने की पार्टी की दृढ़ता को दर्शाता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो त्वरित दौरों पर प्रमुख जिलों का दौरा करेंगे। इस दौरान वह रैलियों को संबोधित करेंगे और कार्यकर्ताओं को उत्साहित करेंगे। भाजपा के अभियान का खाका राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे कसर्गोड, पलक्कड़, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और त्रिशूर में उच्च दृश्यता वाली पहुंच पर केंद्रित है। पार्टी अपने हाल के चुनावी लाभों से आत्मविश्वास ले रही है। सबसे प्रमुख है अभिनेता से राजनीतिज्ञ बने सुरेश गोपी की त्रिशूर लोकसभा सीट पर 70,000 से अधिक मतों से हासिल की गई जीत शामिल है। इसके बाद दिसंबर में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा ने तिरुवनंतपुरम निगम पर नियंत्रण हासिल किया, जो इस राज्य में पार्टी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है, जहां उसे परंपरागत रूप से स्थान पाने में कठिनाई रही है। हालांकि आंकड़े मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने 15.64 प्रतिशत वोट शेयर प्राप्त किया जबकि 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में यह थोड़ी गिरकर 14.71 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद, पार्टी उत्साहित बनी हुई है और 2021 विधानसभा चुनावों में नौ सीटों पर दूसरे स्थान पर आने को बढ़ती पकड़ का सबूत मानते हुए लगातार सक्रिय है। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने विश्वास जताया है कि पार्टी न केवल लंबे समय से चली आ रही चुनावी बाधा को तोड़ेगी बल्कि आगामी विधानसभा में कई सीटें भी जीतेगी। हालांकि, चुनौतियाँ बरकरार हैं। केरल की अद्वितीय जनसांख्यिकीय संरचना, जहां अल्पसंख्यक जिनमें मुस्लिम और ईसाई शामिल हैं, लगभग 42 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। पार्टी रणनीतिकार मानते हैं कि समुदाय के नेताओं के साथ सतत संपर्क महत्वपूर्ण होगा क्योंकि राष्ट्रीय नेता आने वाले दिनों में अधिक जुड़ाव बढ़ाएंगे। जैसे-जैसे अभियान तीव्र होता जा रहा है, भाजपा का यह उच्च-ऊर्जा अभियान यह संकेत देता है कि पार्टी केरल में क्रमिक लाभ को ऐतिहासिक चुनावी पकड़ में बदलने के लिए दृढ़ प्रयास कर रही है।

किसानों के खाते में ₹4000 जमा होंगे एक साथ, जानें इस योजना की पूरी डिटेल

भोपाल मध्य प्रदेश के किसानों के लिए मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना (CM Kisan Kalyan Yojana) को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। इस योजना के तहत किसानों को हर साल ₹6000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन किस्तों में ₹2000-₹2000 के रूप में सीधे बैंक खातों में भेजी जाती है। हालांकि, राज्य के किसानों को अब तक 14वीं किस्त का इंतजार है, जबकि केंद्र की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी हो चुकी है। क्यों अटकी है 14वीं किस्त? पिछली 13वीं किस्त अगस्त 2025 में जारी की गई थी। इसके बाद से अब तक योजना के तहत अगली किस्त किसानों के खातों में नहीं आई है। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही 14वीं और 15वीं किस्त को एक साथ जारी कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो किसानों के खाते में एक साथ ₹4000 ट्रांसफर किए जा सकते हैं। किन किसानों को नहीं मिलेगा लाभ? जिनकी e-KYC पूरी नहीं है जिनका बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है जिनका भूमि रिकॉर्ड सत्यापित नहीं है जिनका नाम पीएम किसान सूची से हट चुका है कैसे चेक करें अपना नाम? किसान अपना स्टेटस देखने के लिए SAARA पोर्टल (saara.mp.gov.in) पर जाकर “Chief Minister Kisan Kalyan Yojana Beneficiary Status” विकल्प चुन सकते हैं। फिलहाल, सरकार की ओर से किस्त जारी करने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही किसानों के खाते में राहत की रकम पहुंच सकती है।

उज्जैन में खुला नैवेद्य लोक, जहां इंदौर की छप्पन दुकान जैसा लजीज स्वाद मिलेगा

उज्जैन   इंदौर की छप्पन दुकान की तरह उज्जैन में भी नैवेद्य लोक की शुरुआत हुई है। सीएम मोहन यादव ने नैवेद्य लोक का लोकार्पण किया है। भव्य नैवेद्य लोक उज्जैन के नानाखेड़ा में स्थित है। यहां 34 दुकानें बनाई गई हैं। नैवेद्य लोक में आपको शुद्ध शाकाहारी और लजीज व्यंजन मिलेंगे। यह उज्जैन वासियों के लिए बड़ी सौगात है। 18 करोड़ रुपए से हुआ है निर्माण वहीं, नैवेद्य लोक में बने इन दुकानों की साइज 62 वर्गफीट से लेकर 180 वर्गफीट तक है। इन सभी दुकानों की निर्माण लागत 18 करोड़ रुपए बताई जा रही है। दुकानों का निर्माण उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया है। 28 हजार स्क्वायर फिट में बने नैवेद्य लोक में दुकानों के साथ ही यहां विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सुसज्जित ओपन थियेटर, साउंड सिस्टम, महिला, पुरुष, दिव्‍यांग जनों के उपयोगार्थ नवीन सेंसर उपकरण के साथ प्रसाधन कक्ष, सीसीटीवी कैमरा-सर्वर रूम, आपातकालीन विद्युत व्यवस्था के लिए डीजी सेट, पार्किंग, अंडर ग्राउंड विद्युत व्यवस्था, सीवरेज और लैंडस्केपिंग आदि सुविधाएं विकसित की गई हैं। लजीज व्यंजनों के साथ रोजगार भी मिलेगा वहीं, नैवेद्य लोक के लोकार्पण के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि इस नैवेद्य लोक में व्यंजनों के स्वाद के साथ ही रोजगार भी मिलेगा। इस कार्य के लिए मेरी ओर से सभी को बधाई। अति पिछड़े इलाके को किया गया विकसित नैवेद्य लोक की विशेषता बताते हुए उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी ने बताया कि यहां अति पिछड़े इलाके को विकसित किया गया है। पहले यहां काफी गंदगी हुआ करती थी। इस नैवेध लोक के माध्यम से उज्जैन में महाकाल दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक विशेष सुविधा प्रदान करेगा। श्रद्धालु यहां मालवा के व्यंजनों का लुत्फ उठा सकेंगे। सीईओ संदीप सोनी ने कहा कि इसे पूरी तरह से मॉल वाला लुक दिया गया है। लोग आएंगे तो उन्हें शानदार एंबियंस मिलेगा। गौरतलब है कि लोकार्पण के दिन ही वहां के लोगों की भीड़ उमड़ी है। इसके साथ ही सीएम मोहन यादव ने भी यहां व्यंजनों का स्वाद चखा है।

जमीन अधिग्रहण पर नए कानून से किसानों को मिलेगा फायदा, मुआवजे में ये होगा खास प्रावधान

इंदौर  नए वित्त वर्ष से उन लोगों के लिए एक अच्छा नियम लागू होने जा रहा है जिनकी भूमि विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा रही है। इस नए नियम से किसानो के साथ ही बहुत बड़े स्तर पर लोगों को एक नई राहत मिलने वाली है। दरअसल इस नए नियम लागू होने के बाद जमीन देने वाले किसानों और अन्य भू-स्वामियों को पूरी राशि बिना किसी कर कटौती के मिल सकेगी। इससे उन्हें फायदा होगा। सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाली मुआवज़ा राशि नए वित्त वर्ष से  Tax Free दरअसल अब सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाली मुआवज़ा राशि नए वित्त वर्ष (New FinancialYear) से कर-मुक्त (Tax Free ) होगी। केंद्र सरकार के इस नए प्रावधान को एक बड़े राहत भरे फैसले को तौर पर देखा जा रहा है।  खासकल उन लोगों के लिए ये फायदा देने वाले है जिनकी जमीन विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा रही है। भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाली मुआवज़ा राशि टैक्स फ्री होने से उनको काफी लाभ होगा। पश्चिमी बाइपास, अयोध्या बाइपास, मेट्रो परियोजना से जुड़े भूमि मालिको को लाभ इस नए नियम से शहर में चल रहे तीन मेन प्रोजेक्टों पश्चिमी बाइपास, अयोध्या बाइपास और मेट्रो परियोजना से जुड़े भूमि स्वामियों को डायरेक्ट लाभ मिलेगा। इन परियोजनाओं के लिए करीब 400 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। प्रभावित लोगों जो मुआवज़ा राशि मिलेगी वो अब टैक्स के दायरे से बाहर रहेगी। नए नियम लागू होने के बाद जमीन देने वाले किसानों और अन्य भू-स्वामियों को पूरी राशि बिना किसी कर कटौती के मिल सकेगी। लिहाजा नए साल पर लागू होने वाले इस नियम से किसानों को फायदा होगा। 

उत्तम नगर विवाद: ओवैसी बोले- हालात ऐसे कि मुसलमान न घर में सुरक्षित, न त्योहार मना पा रहे

नई दिल्ली दिल्ली के उत्तम नगर में होली पर तरुण की हत्या के बाद उपजे तनाव और ईद से पहले कुछ मुसलमानों के कथित तौर पर इलाके छोड़ने पर सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान अपना आक्रोश जाहिर करते हुए कहा कि ये नौबत आ गई है कि देश में 19-20 करोड़ मुसलमान खुशी से ईद भी नहीं मना सकते हैं और इसके लिए उन्हें कोर्ट का सहारा लेना पड़ रहा है। खबर के मुताबिक ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए दिल्ली के उत्तम नगर में कायम तनाव को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और पूछा कि यह कानून का कैसा शासन है। उन्होंने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि ईद मनाने के लिए मुसलमानों को कोर्ट जाना पड़ रहा है। हम रोजेदार हैं, ईद मनाने दो: ओवैसी ओवैसी ने कहा, ‘कई मुसलमान अपना घर छोड़कर चले गए उत्तम नगर से। कोर्ट को जाना पड़ा। दिल्ली हाई कोर्ट को जाकर कहना पड़ा ईद तो मनाने तो सुकून से। हम रोजेदार हैं, ईद तो मनाने दो हमको। ये नौबत आ गई भारत में। मोदी विश्व गुरु की बात करते हैं, 19-20 करोड़ मुसलमान ईद नहीं मना सकते खुशी से। हमको धमकियां दी जा रही हैं। हमको ईद मनाने के लिए कोर्ट जाना पड़ा। बताओ बीजेपी, आरएसएस, मोदी, ये कौन सा कानून का शासन है।’ उन्होंने आगे कहा कि अफसोस की बात है कि ईद मनाने के लिए कोर्ट जाना पड़ा और हम कहते हैं कि हम तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। हाई कोर्ट में क्या हुआ? उत्तम नगर में ईद के अवसर पर सांप्रदायिक हिंसा की आशंका को दूर करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। अदालत को बताया गया था कि कुछ लोग ईद पर ‘खून की होली’ की धमकियां दे रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने दिल्ली पुलिस को ईद से रामनवमी तक पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने को कहा। पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी को भी ऐसी शरारत करने की अनुमति न दी जाए, जिससे कोई ‘अप्रिय स्थिति’ पैदा होने की आशंका हो। उत्तम नगर में क्यों है तनाव दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दौरान दो पड़ोसी परिवारों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद के बाद हुई हिंसा में 26 वर्षीय युवक तरुण की मौत हो गई थी, जिसमें एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है जबकि कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। तरुण की हत्या के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है। भड़काऊ भाषण और पोस्टर लहराते हुए कई वीडियो वायरल हुए थे। भारी जुटान भी हुआ था।

कर्नाटक में गैस संकट अलार्म: उत्पादन पर खतरा, ‘मांग 50 हजार, सप्लाई 1 हजार’ – सिद्धारमैया का बड़ा बयान

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने बेंगलुरु में कमर्शियल एलपीजी की गंभीर कमी को लेकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में उन्होंने बताया कि शहर में होटल, रेस्तरां, कैटरिंग सेवाओं और पीजी आवासों की दैनिक मांग लगभग 50 हजार सिलेंडर की है, लेकिन 1,000 सिलेंडर प्रतिदिन ही मिल पा रहे हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के हालिया निर्देश के कारण घरेलू LPG को प्राथमिकता देने से कमर्शियल सप्लाई में भारी कमी आई है। इससे बेंगलुरु के कई व्यवसाय प्रभावित हुए हैं और कुछ होटल-रेस्तरां पहले ही बंद होने लगे हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के कदम उठाए जाने का जिक्र किया, लेकिन मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर अभी बहुत बड़ा है। यह संकट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़ा हुआ है, जहां ईरान और अन्य देशों के बीच तनाव बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित हुआ है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम रास्ता है, जिसके बंद होने से भारत में एलपीजी आयात प्रभावित हुआ है। भारतीय ध्वज वाले 2 एलपीजी जहाज एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी ने सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार किया और 92,712 मीट्रिक टन LPG लेकर भारत पहुंचे। फिर भी, स्थानीय स्तर पर कमर्शियल उपयोगकर्ताओं को राहत नहीं मिल पाई है। बेंगलुरु के होटल एसोसिएशन और अन्य संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई तो सैकड़ों दुकानें बंद हो सकती हैं, जिससे लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। LPG संकट कितना गंभीर कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं, जिसमें कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के आदेश शामिल हैं। राज्य ने होटलों को बिजली या वैकल्पिक ईंधन पर स्विच करने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में केंद्र से कमर्शियल और ऑटो एलपीजी के लिए तत्काल अतिरिक्त आवंटन की मांग की है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु जैसे महानगर में कमर्शियल LPG पर निर्भरता बहुत अधिक है और इसकी कमी से शहर की खाद्य सेवा व्यवस्था ठप हो सकती है। केंद्र सरकार ने प्रभावित निर्यातकों के लिए 497 करोड़ रुपये की राहत पैकेज की घोषणा की है और वैश्विक साझेदारों से ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही है। यह संकट न केवल बेंगलुरु बल्कि पूरे कर्नाटक में व्यवसायों, रोजगार और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि राज्य सरकार आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन केंद्र से तत्काल समर्थन जरूरी है। अगर स्थिति सुधरती नहीं तो होटल, रेस्तरां और अन्य सेवाओं में बड़े पैमाने पर बंदी हो सकती है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित होगा। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल से इस समस्या का जल्द समाधान निकालने की जरूरत है।

मिडिल ईस्ट संकट पर भारत की पहल: पीएम मोदी ने 5 देशों से बात कर शांति और सुरक्षा पर दिया जोर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच शांति बहाल करने को लेकर लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने ओमान, मलेशिया, फ्रांस, जॉर्डन और कतर के नेताओं से फोन पर बातचीत की। इन वार्ताओं में पीएम मोदी ने भारत की स्थिति स्पष्ट की, जिसमें बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देकर तनाव कम करने व शांति-स्थिरता बहाल करने पर जोर दिया गया। उन्होंने ऊर्जा ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की, क्योंकि ऐसे हमले क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाते हैं और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करते हैं। प्रधानमंत्री ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित आवागमन के महत्व पर बल दिया। ओमान के सुल्तान से बातचीत में उन्होंने ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं और ओमान की संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा दोहराई। साथ ही, भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में ओमान के प्रयासों की सराहना की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग में इन बातचीतों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इन 5 विश्व नेताओं से पश्चिम एशिया के संघर्ष पर भारत का रुख रखा, जिसमें डी-एस्केलेशन के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे जरूरी बताया। ऊर्जा ढांचे पर हमलों को अस्वीकार्य करार देते हुए कहा गया कि ऐसे कदम एनर्जी सप्लाई को और अस्थिर बनाते हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित नौवहन सभी नेताओं ने समर्थन दिया, क्योंकि यह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम है। ये प्रयास भारत की सक्रिय भूमिका को दर्शाते हैं, जहां वह संघर्ष को रोकने और शांति बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ तालमेल कर रहा है। सुरक्षित वापसी के प्रयास जारी इस बीच, पश्चिम एशिया में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। संयुक्त सचिव (गल्फ) असीम महाजन ने बताया कि 18 मार्च को रियाद में हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मृत्यु की दुखद सूचना मिली है। मंत्रालय ने शोक व्यक्त किया और परिवार से गहरा संवेदना जताई। भारतीय मिशन रियाद में परिवार के संपर्क में है और शव को भारत लाने के लिए सऊदी अधिकारियों से समन्वय कर रहा है। कुल 6 भारतीय नागरिक विभिन्न घटनाओं में मारे गए हैं, जबकि एक लापता है। सऊदी अरब, ओमान, इराक और यूएई में भारतीय मिशन लापता व्यक्ति की तलाश व मृतकों के शवों को लाने के लिए स्थानीय अधिकारियों से संपर्क में हैं। इसके अलावा, समुद्री हमलों से प्रभावित भारतीय चालक दल के सदस्यों की सुरक्षित वापसी हो रही है। एमटी सफेसी विष्णु के 15 भारतीय क्रू सदस्यों को इराक से बचाया गया, जो कल सऊदी अरब से भारत लौटने वाले हैं। इसी तरह, एमवी एमकेडी व्योम पर 16 और एमटी स्काईलाइट पर 8 भारतीय नाविकों सहित 24 को ओमान से बचाकर पहले ही भारत पहुंचाया जा चुका है। ये घटनाएं क्षेत्र में बढ़ते तनाव को दर्शाती हैं, जहां भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और वापसी को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। विदेश मंत्रालय लगातार निगरानी और तालमेल में लगा हुआ है।  

जल संरक्षण को बनाए जन आंदोलन, हर नागरिक निभाए जिम्मेदारी: मंत्री उईके

निगरी के मौहरी टोला स्थित तालाब के गहरीकरण एवं गाद निकासी कार्य का किया शुभारंभ भोपाल लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पतिया उइके ने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत निगरी के मौहरी टोला स्थिति तालाब के गहरीकरण एवं गाद निकासी कार्य का विधिवत भूमि-पूजन कर कार्य का शुभारंभ किया। प्रभारी मंत्री ने कहा कि आज हम सब मौहरी टोला, ग्राम पंचायत निगरी, विकासखंड देवसर में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य तालाब गहरीकरण एवं जल संरचना संवर्धन के लिए एकत्रित हुए हैं। यह केवल एक विकास कार्य नहीं, बल्कि हमारे भविष्य को सुरक्षित करने का एक सामूहिक प्रयास है। उन्होंने कहा कि निगरी क्षेत्र में कुल 5 जल संरचनाएं हैं, जिनमें से यह प्रमुख तालाब लगभग 2.50 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इस तालाब का गहरीकरण हमारे लिए अत्यंत आवश्यक है, जिससे हम वर्षा जल का अधिक से अधिक संचयन कर सकें और आने वाले समय में जल संकट से बच सकें। प्रभारी मंत्री ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि जल ही जीवन है। यदि आज हम जल का संरक्षण नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। तालाब के गहरीकरण से न केवल भू-जल स्तर बढ़ेगा, बल्कि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, पशुओं के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और पूरे क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन भी बेहतर होगा। उन्होने कहा कि मैं आप सभी से आग्रह करती हूँ कि इस कार्य को केवल शासन की योजना न समझें, बल्कि इसे अपनी जिम्मेदारी मानकर इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएं। जब जनभागीदारी जुड़ती है, तो हर अभियान सफल होता है। कार्यक्रम में कलेक्टर श्री गौरव बैनल, पुलिस अधीक्षक श्री मनीष खंत्री, सीईओ जिला पंचायत श्री जगदीश गोमे, जनपद अध्यक्ष देवसर श्री प्रणव पाठक सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।  

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