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महाकाल मंदिर के शिखर पर ब्रह्म ध्वज फहरेगा गुड़ी पड़वा पर, 2000 साल पुरानी परंपरा का पुनरुद्धार

उज्जैन  चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और गुड़ी पड़वा के अवसर पर 19 मार्च को श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर ब्रह्म ध्वज का आरोहण किया जाएगा। यह आयोजन लगातार दूसरे वर्ष किया जा रहा है। यह केवल ध्वजारोहण नहीं, बल्कि लगभग 2000 वर्ष पुरानी उस गौरवशाली परंपरा का पुनरुद्धार है, जिसकी शुरुआत सम्राट विक्रमादित्य के काल में हुई थी।  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर इस परंपरा को फिर से भव्य रूप दिया जा रहा है। विक्रमादित्य द्वारा प्रारंभ किया गया विक्रम संवत और ब्रह्म ध्वज की परंपरा भारत की सांस्कृतिक श्रेष्ठता और गौरव का प्रतीक मानी जाती है। ब्रह्म ध्वज की विशेषता विक्रमादित्य शोध संस्थान के निदेशक राम तिवारी के अनुसार ब्रह्म ध्वज शक्ति, साहस और चतुर्दिक विजय का प्रतीक है। केसरिया रंग के इस ध्वज की बनावट भी विशेष होती है। इसमें दो पताकाएं होती हैं, जो ध्वज के दोनों छोर पर स्थित रहती हैं। ध्वज के मध्य में सूर्य का चिन्ह अंकित होता है, जो तेज, ऊर्जा और विश्व विजय का प्रतीक माना जाता है। महिदपुर स्थित अश्विनी शोध संस्थान में आज भी वे प्राचीन मुद्राएं सुरक्षित हैं, जिन्हें सम्राट विक्रमादित्य ने इसी ब्रह्म ध्वज परंपरा को अमर बनाने के लिए जारी किया था। सम्राट विक्रमादित्य के काल में उज्जैन अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख केंद्र माना जाता था। उस समय की मुद्राओं पर बने चिह्न बताते हैं कि उज्जैन को पृथ्वी का मध्य बिंदु माना जाता था। इन सिक्कों के एक पक्ष पर भगवान शिव सूर्यदंड लिए दिखाई देते हैं, जबकि दूसरे पक्ष पर प्लस (+) का चिन्ह बना होता है, जिसकी चारों भुजाओं पर गोले बने रहते हैं। यह प्रतीक दर्शाता है कि उज्जैन जल, थल और नभ तीनों मार्गों से विश्व से जुड़ा हुआ था। 65 वर्षों तक सुरक्षित रखा गया था ध्वज शोधपीठ के निदेशक राम तिवारी ने बताया कि विक्रम संवत ज्ञान, संस्कृति, विज्ञान और अनुसंधान का महापर्व है। विक्रम संवत के अवसर पर ब्रह्म ध्वज विभिन्न स्थानों पर फहराया जाएगा। मध्यप्रदेश में मंदिरों, सार्वजनिक स्थलों और निजी स्थानों पर भी लोग स्वप्रेरणा से इस ध्वज को फहरा सकेंगे। उन्होंने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर पर स्थापित यह ध्वज लंबे समय तक पंडित सूर्यनारायण व्यास के परिवार ने अपने पूजा स्थल पर लगभग 65 वर्ष तक सुरक्षित रखा था। उसी ध्वज से प्रेरणा लेकर वर्तमान ब्रह्म ध्वज का निर्माण किया गया है। 

यूनियन कार्बाइड कचरे पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी

भोपाल भोपाल गैस त्रासदी के तीन दशक बाद भी यूनियन कार्बाइड संयंत्र का जहरीला कचरा कानूनी और पर्यावरणीय विवादों के केंद्र में है। सुप्रीम कोर्ट ने  इस कचरे को जलाने के बाद बची राख से पारे के संभावित रिसाव से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता संगठन भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति को राहत के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट की 20 साल पुरानी निगरानी का हवाला मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉय माल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यह संवेदनशील मामला पिछले दो दशकों से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सीधी निगरानी में चल रहा है। बेंच ने कहा कि तकनीकी साक्ष्यों और नई सामग्री के साथ हाईकोर्ट में आवेदन करना अधिक व्यावहारिक और उचित होगा। याचिका में दावा किया गया था कि कचरे के अवशेषों में भारी मात्रा में पारा हो सकता है, जो आसपास के भूजल और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है। क्या है विशेषज्ञों की राय? सुनवाई के दौरान अदालत ने तकनीकी बारीकियों पर टिप्पणी करने से परहेज किया। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि जब विशेषज्ञ समितियों और निजी विशेषज्ञों की राय अलग-अलग हो, तो कोर्ट सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता। याचिकाकर्ताओं ने डॉ. आसिफ कुरैशी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्रायल रन की पद्धति पर सवाल उठाए थे। यदि भविष्य में पारे के रिसाव से संबंधित कोई नई सामग्री या तकनीकी आपत्ति सामने आती है, तो याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के समक्ष आवेदन कर सकते हैं। हमें उम्मीद है कि हाईकोर्ट इस मुद्दे पर जल्द विचार करेगा। क्या है पूरा मामला? यह मामला पीथमपुर (धार) स्थित ट्रीटमेंट प्लांट और भोपाल के यूनियन कार्बाइड परिसर से जुड़ा है। दिसंबर 2024 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक नोटिस ने खलबली मचा दी थी, जिसमें दावा किया गया था कि जहरीले तत्व भूजल में रिस रहे हैं। याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि कंक्रीट की पेटियों में बंद राख की दोबारा जांच हो, जिसे फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया है।

भोजशाला विवाद पर हाई कोर्ट का बड़ा निर्णय, जज खुद करेंगे मुआयना, 2 अप्रैल तक होगा दौरा

इंदौर/धार. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने धार जिले के अति-संवेदनशील भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर मामले में एक अहम टिप्पणी की है. जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा कि मामले से जुड़े कई विवादों को देखते हुए वे 2 अप्रैल की अगली सुनवाई से पहले स्वयं परिसर का मुआयना करेंगे। एक न्यूज एजेंसी ने बताया कि जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने इस विवादित परिसर से जुड़ी याचिकाओं की नियमित सुनवाई के लिए 2 अप्रैल की तारीख तय की. बेंच ने अपनी मौखिक टिप्पणियों में कहा, “कई विवादों को देखते हुए हम इस परिसर का दौरा करना और उसका मुआयना करना चाहेंगे. हम अगली तारीख (2 अप्रैल) से पहले इस परिसर का दौरा करेंगे.” कोर्ट के दौरे की सख्त शर्तें हालांकि, बेंच ने यह भी साफ किया कि इस दौरे के दौरान मामले से जुड़ा कोई भी पक्ष विवादित जगह पर मौजूद नहीं रह पाएगा। लंबी दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने इस मामले में दायर अलग-अलग अंतरिम अर्जियों को स्वीकार कर लिया और कहा कि पक्ष इन अर्जियों से जुड़े दस्तावेज़ और हलफनामे कोर्ट में पेश कर सकते हैं। हाई कोर्ट ने जोर देकर कहा, “हम इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका देंगे। धार में स्थित यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है, जिसने हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए इसका वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया और एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की। ASI सर्वे रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु ASI की 2000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल इमारत मस्जिद से पहले से ही वहां मौजूद थी और मौजूदा विवादित इमारत को प्राचीन मंदिरों के हिस्सों का दोबारा इस्तेमाल करके बनाया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां से मिले वास्तुशिल्प के अवशेष, मूर्तियों के टुकड़े, साहित्यिक लेखों वाली शिलालेखों की बड़ी-बड़ी पट्टियां, खंभों पर बने नागकर्णिका शिलालेख आदि इस बात का संकेत देते हैं कि इस जगह पर साहित्यिक और शैक्षिक गतिविधियों से जुड़ी एक विशाल इमारत मौजूद थी। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि वैज्ञानिक जांच-पड़ताल और इस दौरान मिले पुरातात्विक अवशेषों के आधार पर, इस पहले से मौजूद इमारत को परमार काल का माना जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “वैज्ञानिक जांच, सर्वेक्षण और की गई पुरातात्विक खुदाई, मिली चीजों के अध्ययन और विश्लेषण, वास्तुशिल्प अवशेषों, मूर्तियों और शिलालेखों, कला और मूर्तियों के अध्ययन के आधार पर, यह कहा जा सकता है कि मौजूदा ढांचा पहले के मंदिरों के हिस्सों से बनाया गया था। ASI ने रिपोर्ट में कहा कि सजाए गए खंभों और स्तंभों की कला और वास्तुकला से यह कहा जा सकता है कि वे पहले के मंदिरों का हिस्सा थे और बेसाल्ट के एक ऊंचे चबूतरे पर मस्जिद के स्तंभों की कतार बनाते समय उनका दोबारा इस्तेमाल किया गया था। दोनों पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें हिंदू समुदाय, जिसने पूरे विवादित परिसर की धार्मिक प्रकृति को तय करने की मुख्य मांग के साथ अदालत का रुख किया था, का दावा है कि ASI को अपने वैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख यह साबित करते हैं कि यह ढांचा मूल रूप से एक प्राचीन मंदिर था। हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने इस दावे पर विवाद किया है और सर्वेक्षण पर सवाल उठाया है, यह आरोप लगाते हुए कि ASI ने उनकी पिछली आपत्तियों को नजरअंदाज किया और सर्वेक्षण में विवादित परिसर में रखी गई चीजों को शामिल कर लिया। न्यूज एजेंसी से बात करते हुए, मुस्लिम पक्ष के याचिकाकर्ताओं में से एक मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के नेता अब्दुल समद ने कहा, “हमने हाई कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की है, जिसमें अनुरोध किया गया है कि पूरे ASI सर्वेक्षण की वीडियोग्राफी और रंगीन तस्वीरें उपलब्ध कराई जाएं, ताकि हम यह साबित कर सकें कि सर्वेक्षण में शामिल कुछ चीजों को किस तरह पहले से तय योजना के तहत शामिल किया गया था। समद ने दावा किया कि विवादित परिसर के सर्वेक्षण के दौरान जैन और बौद्ध समुदायों से संबंधित मूर्तियां भी मिली थीं. उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड और एक ‘मुतवल्ली’  ने भी परिसर से संबंधित अदालत में चल रहे मामले में अर्जी दाखिल की है। बता दें कि हिंदू समुदाय भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि 11वीं सदी की यह इमारत कमल मौला मस्जिद है. ASI के 7 अप्रैल 2003 के एक आदेश के अनुसार, हिंदुओं को हर मंगलवार को इस परिसर में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को हर शुक्रवार को नमाज पढ़ने की इजाजत है।

PM Narendra Modi से Eknath Shinde की मुलाकात, मिडिल ईस्ट संकट पर हुई खास बातचीत

नई दिल्ली शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने ईरान-इजरायल युद्ध, घरेलू हालात और महाराष्ट्र के अलग-अलग मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। इस दौरान शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे, नरेश म्हस्के, मिलिंद देवड़ा, धैर्यशील माने, श्रीरंग बारणे और रवींद्र वायकर मौजूद रहे। एकनाथ शिंदे ने भरोसा दिलाया कि युद्ध जैसे हालात में ‘एनडीए’ की सहयोगी के तौर पर शिवसेना, पीएम के स्टैंड का सपोर्ट करती है और हम देश के साथ हैं। इस मीटिंग के बाद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मीडिया से बातचीत की। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालात के दौरान भारत में झूठा प्रोपेगेंडा फैलाकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग हेडलाइन बनाने के लिए पाकिस्तान की बात करते हैं। बालासाहेब के लिए देश पहले था और राजनीति बाद में। आज हम बालासाहेब के विचारों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि युद्ध के कारण कुवैत, दुबई, मस्कट में फंसे महाराष्ट्र के नागरिकों को मुंबई और पुणे सुरक्षित वापस लाया गया। उन्होंने कोविड के बाद से खाड़ी देशों के साथ बने अच्छे रिश्तों की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से दो जहाजों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के साथ राज्य में विकास के कामों और अलग-अलग मुद्दों पर बातचीत हुई। उन्होंने आगे कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष युद्ध जैसे हालात का इस्तेमाल राजनीति के लिए कर रहा है। कांग्रेस और शिवसेना-यूबीटी देश में गैस की कमी की अफवाह फैला रहे हैं। इससे ब्लैक मार्केट करने वालों को मौका मिल रहा है। राजनीति के लिए और भी मुद्दे हैं, लेकिन जब युद्ध जैसे हालात में देश के साथ रहने की उम्मीद है, तब विपक्ष राजनीति कर रहा है। विपक्ष ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी ऐसी ही राजनीति की थी, जिसका पाकिस्तान में भी ध्यान रखा गया था। कुछ लोग हेडलाइन बनाने के लिए पाकिस्तान में बोलते हैं। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने शिवसेना एमपी को देश में गैस की कमी के मुद्दे पर कड़ा स्टैंड लेने और सदन में विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे झूठे प्रोपेगेंडा को नाकाम करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में कहीं भी गैस सिलेंडर की कमी नहीं है। सरकार ब्लैक मार्केट करने वालों को रोकने के लिए पूरी मेहनत से काम कर रही है।

EPFO में नए नियम लागू: जानिए सरकार ने क्या बदला और आप पर क्या होगा असर

नई दिल्ली लोकसभा में सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत चल रहे EPFO 3.0 रिफॉर्म्स पर विस्तृत जानकारी दी है। श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि इस पहल का मकसद सिस्टम को ज्यादा तेज, पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली बनाना है। खासतौर पर क्लेम सेटलमेंट को फास्ट करना, प्रोसेस को आसान बनाना और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सभी सेवाएं एक जगह उपलब्ध कराना इसमें शामिल है। क्या होगा बदलाव सबसे बड़ा बदलाव सेंट्रलाइज्ड पेंशन पेमेंट सिस्टम (CPPS) को लेकर आया है। मंत्री ने बताया कि 1 जनवरी 2025 से EPFO के सभी फील्ड ऑफिस इस सिस्टम को पूरी तरह अपना चुके हैं। इस नए सिस्टम की मदद से हर महीने 70 लाख से ज्यादा पेंशनर्स को समय पर और बिना गलती के पेंशन मिल रही है। यानी अब पेंशन के भुगतान में देरी या गड़बड़ी की शिकायतें काफी हद तक कम हो गई हैं। क्लेम सेटलमेंट के मामले में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है। सरकार के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में 25 फरवरी 2026 तक ₹5 लाख तक के कुल 3.52 करोड़ से ज्यादा क्लेम ऑटो मोड में सेटल किए गए हैं। यही नहीं, कुल एडवांस क्लेम्स में से करीब 71.37% ऑटोमैटिक तरीके से निपटाए गए, जिनके जरिए लगभग ₹51,620 करोड़ की राशि जारी की गई। इससे साफ है कि अब लोगों को अपने पैसे के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ रहा। EPF अकाउंट ट्रांसफर अब काफी आसान नौकरी बदलने पर EPF अकाउंट ट्रांसफर भी अब काफी आसान हो गया है। पहले जहां इस प्रक्रिया में नियोक्ता की मंजूरी और कई स्टेप्स लगते थे, अब KYC अपडेट होने पर यह काम खुद-ब-खुद हो रहा है। 25 फरवरी 2026 तक करीब 70.5 लाख ऑटो ट्रांसफर क्लेम्स बिना किसी दखल के प्रोसेस हो चुके हैं। वहीं 21 लाख से ज्यादा ट्रांसफर क्लेम ऐसे हैं, जो कर्मचारियों ने खुद बिना नियोक्ता की मदद के जमा किए। एक बड़ा डिजिटल अपग्रेड अगर EPFO 3.0 को आसान भाषा में समझें, तो यह एक बड़ा डिजिटल अपग्रेड है, जिसमें कागजी काम कम करके पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और ऑटोमेटेड बनाया गया है। पहले जहां क्लेम सेटलमेंट में 20 दिन तक लग जाते थे, अब वही काम 3 दिन से भी कम समय में हो रहा है। इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों को काफी राहत मिल रही है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल (EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन बढ़ाने) पर फिलहाल कोई ठोस ऐलान नहीं हुआ है। सरकार ने इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इस पर विचार चल रहा है, लेकिन अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। ऐसे में लाखों पेंशनर्स की नजर अब आने वाले फैसलों पर टिकी हुई है।

ईरान के नए सुप्रीम लीडर पर विवाद, लीक ऑडियो से उठे कई सवाल

ईरान ईरान के नव नियुक्त सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में मौत को महज कुछ सेकंड से चकमा देकर जान बचाई थी। इस बात का खुलासा एक लीक हुई ऑडियो रिकॉर्डिंग से हुआ है। ऑडियो रिकॉर्डिंग के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को इजरायल के ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत किए गए मिसाइल हमले में उनके पिता और ईरान के भूतपूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई, लेकिन मोजतबा ठीक समय पर इमारत से बाहर निकल आए थे, इस कारण उनकी जान बच गई। ब्रिटिश अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ऑडियो 12 मार्च को वरिष्ठ ईरानी धर्मगुरुओं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) कमांडरों की एक आंतरिक बैठक से लीक हुआ है। बैठक में दिवंगत नेता के कार्यालय के प्रोटोकॉल प्रमुख मजाहेर हुसैनी ने बताया कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता के साथ इमारत के अंदर थे, लेकिन मिसाइलें गिरने से ठीक पहले वे किसी काम से आंगन में बाहर निकल गए थे। ऑडियो रिकॉर्डिंग में और क्या हुसैनी के हवाले से रिकॉर्डिंग में कहा गया है कि ईश्वर की मर्जी से मोजतबा को कुछ काम के लिए बाहर जाना पड़ा और वे वापस लौट रहे थे। वे बाहर थे और ऊपर की ओर जा रहे थे, तभी इमारत पर मिसाइल हमला हुआ। हमले के तुरंत बाद इजरायली ब्लू स्पैरो बैलिस्टिक मिसाइलों ने परिसर को निशाना बनाया, जिसमें अयातुल्ला अली खामेनेई सहित दर्जनों वरिष्ठ अधिकारी और परिवारजन मारे गए। रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम तीन मिसाइलें दागी गईं थी। बताया गया कि एक मुख्य निवास पर, दूसरी मोजतबा के ऊपरी मंजिल आवास पर और तीसरी उनके बहनोई मिस्बाह अल-हुदा बाघेरी कानी के घर पर। हमले के प्रभाव को बताते हुए हुसैनी ने कहा कि ईरानी सैन्य प्रमुख मोहम्मद शिराजी का शरीर टुकड़ों में बंट गया और केवल कुछ किलो मांस से उनकी पहचान हुई। एक अन्य मिसाइल से बाघेरी कानी का सिर दो हिस्सों में कट गया। मोजतबा के पैर में चोट लगने की बात आगे बताया गया कि मोजतबा खामेनेई को हमले में पैर में मामूली चोट आई, जबकि उनकी पत्नी हद्दाद की मौके पर ही मौत हो गई। दिवंगत नेता के एक अन्य बेटे मुस्तफा खामेनेई और उनकी पत्नी भी बाल-बाल बच गए। अब ऑडियो लीक होने के बाद से मोजतबा खामेनेई की सेहत और ठिकाने को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद से वे सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं, जिससे उनकी चोटों की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उनके पैर का नुकसान पहुंचा है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अधिकारी ईरानी नेता की स्थिति से अनिश्चित हैं। ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि बहुत से लोग कह रहे हैं कि उनका चेहरा बुरी तरह विकृत हो गया है। वे कह रहे हैं कि उन्होंने एक पैर खो दिया है और गंभीर चोटें आई हैं। कुछ लोग उनकी मौत की भी बात कर रहे हैं। हमने उन्हें बिल्कुल नहीं देखा है। हमें नहीं पता कि वे जिंदा हैं या नहीं।  

LPG क्राइसिस पर सुनवाई: कोर्ट के सवालों पर सरकार ने रखी अपनी बात

नई दिल्ली एलपीजी संकट को लेकर केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को जवाब दिया है। सरकार ने इस जवाब में कहा है कि एलपीजी संकट से उबरने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। ताकि ईरान-इजरायल युद्ध के चलते भारत में एलपीजी की सप्लाई प्रभावित न होने पाए। सरकार के दूसरे वरिष्ठतम कानून अधिकारी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अनिल एस किलोर और राज डी वाकोड़े की बेंच को बताया कि बातचीत जारी है और सरकार अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिन कदमों को उठाया जा रहा है, उन्हें जानबूझकर नहीं बताया जा रहा है। साथ ही सरकार पर भरोसा बनाए रखने की भी अपील की। अपनी तरफ से पूरी कोशिश इसलिए, उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि वह एलपीजी डीलरों द्वारा दायर याचिका को बंद कर दे। डीलरों ने दावा किया था कि ईरान-इजरायल युद्ध के चलते घरेलू आपूर्ति की तुलना में निर्यात को प्राथमिकता दी जा रही है। एसजी मेहता ने कहाकि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत चल रही है। हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं। सरकार पर भरोसा करते हुए अदालत इसे बंद करने पर विचार कर सकती है। अदालत ने सरकार की प्रस्तुतियों पर विचार किया और याचिका को बंद कर दिया। यह याचिका एलपीजी डीलरों द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि घरेलू आपूर्ति की तुलना में निर्यात को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि एलपीजी की गंभीर कमी है। डीलरों ने कहाकि महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में आपूर्ति मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण प्रभावित हुई। सरकार को दी थी नोटिस इससे पहले 12 मार्च को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बढ़ाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर गुरुवार को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विदेश व्यापार महानिदेशालय और एक निजी कंपनी को नोटिस जारी किया था। छह रसोई गैस वितरकों द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि नागपुर स्थित कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड ने केन्द्र सरकार के घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने के निर्देशों के बावजूद घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति नहीं बढ़ाई है। अधिवक्ता श्याम देवानी और साहिल देवानी के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया था कि ईरान युद्ध के कारण वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान से रसोई गैस उत्पादन पर दबाव बढ़ गया है। इस स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस के उत्पादन और आपूर्ति को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए थे। याचिका में क्या था याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि कंपनी से निर्यात रोककर घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए कई बार अनुरोध किए गए, लेकिन कंपनी ने इसे नजरअंदाज कर दिया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार कंपनी ने जवाब दिया कि वह अपनी निर्यात नीति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति जारी रखने के लिए बाध्य है और घरेलू बाजार को प्राथमिकता नहीं दे सकती। जस्टिस अनिल एस किलोरे और न्यायमूर्ति राज डी वाकोड़े की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विदेश व्यापार महानिदेशालय और कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड को नोटिस जारी किए और मामले की अगली सुनवाई सोमवार को निर्धारित की थी।  

क्रिकेट में हासिल किए ऊंचे प्रतिशत, सूर्या बोले- पढ़ाई में 50-60% से आगे कभी नहीं बढ़ा

नई दिल्ली सूर्यकुमार यादव को भले ही पढ़ाई में बहुत अधिक सफलता नहीं मिली लेकिन क्रिकेट के मैदान पर उन्होंने आखिरकार 80 प्रतिशत अंक हासिल कर लिए हैं। सूर्यकुमार की अगुवाई में भारत ने हाल में टी20 विश्व कप खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया। इस जीत का भरपूर आनंद ले रहे सूर्यकुमार का भारतीय कप्तान के रूप में जीत का रिकॉर्ड 80 प्रतिशत है। मुंबई के रहने वाले सूर्यकुमार स्वाभाविक रूप से अपने इन आंकड़ों से बेहद खुश थे, क्योंकि शिक्षा ग्रहण करते समय वह कभी इतने अधिक नंबर लेकर नहीं आए थे। ‘मैं 50-60 का आंकड़ा पार नहीं कर पाया’ सूर्यकुमार ने 2024 में टी20 कप्तान का पद संभालने के बाद लगातार सफलता हासिल की। उनकी अगुवाई में भारत ने अभी तक जो 52 मैच खेले हैं उनमें से 42 मैच में उसे जीत मिली है। सूर्यकुमार ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा, ”मुझे लगता है कि स्कूल और कॉलेज में मैंने जो प्रतिशत हासिल करने की कोशिश की वह अब मुझे क्रिकेट में मिल रही है।” उन्होंने कहा, ”वहां (स्कूल या कॉलेज में) मैं कभी 50-60 प्रतिशत का आंकड़ा पार नहीं कर पाया। लेकिन यह (जीत की दर 80 प्रतिशत) सुनकर वास्तव में बहुत अच्छा लग रहा है। मैं वैसे आंकड़ों पर बहुत ज्यादा गौर नहीं करता हूं लेकिन किसी को भी किसी भी खेल में हारना पसंद नहीं होता और मुझे भी जीतना पसंद है।” सूर्यकुमार के पिता इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे सूर्यकुमार के पिता अशोक कुमार यादव भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे। लेकिन सूर्यकुमार का कभी पढ़ाई लिखाई में मन नहीं लगा और उनके परिवार ने क्रिकेट में उनके सपनों को साकार करने के लिए पूरा सहयोग दिया। उन्होंने कहा, ”मेरे परिवार ने मुझे पढ़ाई में अच्छा करने के लिए बहुत प्रेरित किया लेकिन कुछ समय बाद ही उन्हें समझ में आ गया कि इस लड़के को पढ़ाई में कोई दिलचस्पी नहीं है। यह लड़का उनके हाथ नहीं आएगा।” ‘अगर कुछ हासिल नहीं होता है तो फिर हम…’ सूर्यकुमार ने कहा, ”लेकिन उन्होंने खेल में मेरा हमेशा समर्थन किया क्योंकि उन्होंने पाया कि इसमें मुझे पूरा आनंद आ रहा है और मुझे खेलना पसंद है। इसलिए उन्होंने कहा, ‘ठीक है, जाओ खेलो। अगर कुछ हासिल नहीं होता है तो फिर ख्याल रखने के लिए हम तो हैं ही।” हमेशा मुस्कुराते रहने वाले इस दिग्गज बल्लेबाज ने हालांकि ऐसी नौबत नहीं आने दी जिससे कि उन्हें ‘प्लान बी’ का सहारा लेना पड़े।

मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव: इजरायल ने ईरान के बड़े सैन्य चेहरों को किया ढेर, खलबली मची

ईरान ईरान युद्ध का आज (मंगलवार, 17 मार्च को) 18वां दिन है। इस बीच इजरायली सुरक्षा बल (IDF) ने बड़ा दावा किया है। IDF ने कहा है कि बीती रात ईरान में किए गए हवाई हमले में ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ यानी सबसे बड़े सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी को निशाना बनाया गया है। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि लारीजानी इस हमले में मारे गए हैं या घायल हुए हैं। इसके अलावा इजरायली सेना ने यह भी दावा किया है कि उसने रात के हमले में IRGC की बासिज फ़ोर्स के टॉप कमांडर घोलमरेज़ा सोलेमानी को मार गिराया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल कार्ट्ज ने इससे भी आगे बढ़कर दावा किया है कि IDF के हमले में लारीजानी की मौत हो गई है। इजरायल के इस दावे ने ईरान में खलबली मचा दी है। हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं आई है। IDF ने कहा है कि सोलेमानी की कथित हत्या ईरान के “कमांड-एंड-कंट्रोल ढांचे” के लिए एक बड़ा झटका है। पिछले दिनों अली खामेनेई और ईरान के बाकी बड़े नेतृत्व के मारे जाने के बाद अली लारीजानी को ही सबसे ताकतवर शख्स माना जा रहा था, जो इस युद्ध में ईरान की अगुवाई कर रहे हैं। अली लारीजानी को कथित तौर पर आखिरी बार 13 मार्च को कुद्स डे पर देखा गया था। पहले परमाणु वार्ताकार रहे हैं लारीजानी लारीजानी, जो पहले परमाणु वार्ताकार रह चुके हैं और वर्तमान में ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव के रूप में कार्यरत हैं, उन्हें ईरान की सत्ता संरचना में सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक माना जाता है। अगर उनकी मौत की पुष्टि होती है, तो लारीजानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बाद मारे जाने वाले ईरान के सबसे वरिष्ठ अधिकारी होंगे। तेहरान, शिराज और तबरीज़ में हमले बता दें कि अमेरिका ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े 10 व्यक्तियों की सूची में, लारीजानी सहित वरिष्ठ ईरानी सैन्य और खुफिया अधिकारियों के बारे में जानकारी देने पर 1 करोड़ डॉलर तक का इनाम देने की घोषणा की थी। IDF का कहना है कि उसने सोमवार की रात तेहरान, शिराज और तबरीज़ में ईरान के कई अहम ठिकानों और आधारभूत संरचनाओं पर हमले किए हैं। इजरायली सेना का दावा है कि इन हमलों में तेहरान में कमांड सेंटर, लॉन्च साइट और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया है जबकि शिराज में, आंतरिक सुरक्षा बलों के कमांड सेंटर और एक बैलिस्टिक मिसाइल साइट पर हमला किया गया है। IDF का ये भी दावा है कि तबरीज़ में हुए हमलों ने ईरान के अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम को खत्म कर दिया है।  

राहुल गांधी पर बढ़ा दबाव: पूर्व नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों ने लिखी खुली चिट्ठी, माफी की मांग

नई दिल्ली संसद भवन परिसर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस के हालिया विरोध-प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। 204 सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों, पूर्व नौकरशाहों, पूर्व राजनयिकों और वकीलों ने राहुल गांधी से उनके आचरण के लिए देश से माफी मांगने की मांग की है। मंगलवार को पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी के नाम लिखी एक खुली चिट्ठी जारी की जिसमें कहा गया है कि 12 मार्च को संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान गांधी और अन्य सांसदों का व्यवहार संसदीय मर्यादा और संस्थागत गरिमा के खिलाफ था। पत्र में आरोप लगाया गया है कि लोकसभा अध्यक्ष के स्पष्ट निर्देश के बावजूद संसद परिसर में प्रदर्शन किया गया, जो “अध्यक्ष के आदेश की अवहेलना” और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है। चिट्ठी में राहुल गांधी के व्यवहार को मर्यादा और संस्थागत गरिमा का उल्लंघन बताया गया है। खुले पत्र में, हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि 12 मार्च को संसद भवन परिसर के भीतर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान गांधी के कार्यों को ‘पीठ’ (Chair) की जानबूझकर अवहेलना माना जा सकता है, और यह संसदीय अधिकार के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है। “राजनीतिक नाटक का मंच नहीं संसद” पत्र में कहा गया है, “संसद देश का सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थान है, इसे राजनीतिक नाटक का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।” हस्ताक्षरकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सांसदों का संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय-बिस्किट खाना और प्रदर्शन करना “जनप्रतिनिधियों के आचरण के अनुरूप नहीं” है। खुले पत्र में कहा गया कि इस तरह का व्यवहार न केवल संसदीय प्रक्रियाओं को कमजोर करता है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाता है। माफी और आत्ममंथन की मांग उन्होंने लिखा है, “संसद के हर हिस्से, सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी की समान गरिमा है। जनप्रतिनिधियों का आचरण इन स्थानों पर भी उसी स्तर का होना चाहिए।” पत्र में यह भी कहा गया है कि बार-बार इस तरह की घटनाएं सार्वजनिक संवाद के स्तर को गिराती हैं। पूर्व अधिकारियों ने नेता प्रतिपक्ष से अपील की है कि वे देश से माफी मांगें और अपने व्यवहार पर आत्ममंथन करें, ताकि संसद की गरिमा और विश्वसनीयता बनी रहे। पत्र में कहा गया है, “एक संवैधानिक संस्था के संरक्षक के रूप में, जो एक अरब से अधिक लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का प्रतीक है, सांसदों को इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि उनके कार्यों का प्रतीकात्मक और संस्थागत महत्व होता है।” पत्र का नेतृत्व इस पत्र का समन्वय जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने किया। हस्ताक्षरकर्ताओं में 100 से अधिक पूर्व सैन्य अधिकारी, कई पूर्व नौकरशाह, राजनयिक और वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब संसद के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद से संसदीय आचरण और लोकतांत्रिक परंपराओं पर एक नई बहस छिड़ सकती है।  

UP Mystery Death Case: महिला और पुरुष की अलग-अलग जगह मिली लाशें, क्या जुड़ा है दोनों का राज?

सीतापुर   उत्तर प्रदेश के सीतापुर में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां महोली के एक गांव में तीन बच्चों की मां की लाश खेत में मिली। पुलिस अभी जांच-पड़ताल कर ही रही थी कि पता चला कि एक पुरुष का शव उसके घर में फंदे से लटक रहा है। एक ही दिन दो-दो मौतों से गांव में हर कोई स्तब्ध रह गया। इन मौतों को लेकर ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। उधर, पुलिस ने दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर अपनी जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। घटना के बारे में महिला के परिवार वालों का आरोप है कि मरने वाले पुरुष ने पहले महिला की हत्या कर शव खेत में फेंक दिया। इसके बाद उसने खुद फांसी लगाकर जान दे दी। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी थ्योरी की पुष्टि नहीं की है। पुलिस, दोनों की मौत के पीछे की सच्चाई सामने लाने की कोशिशों में जुटी हे। मारी गई 40 वर्षीय महिला की 20 साल पहले शादी हुई थी। उसके तीन बच्चे हैं। काफी समय से वह अपने पति से अलग मायके में रह रही थी। पुलिस के मुताबिक गांव के ही 41 वर्षीय शख्स और महिला के बीच नजदीकियां थीं। हालांकि वह शख्स भी पहले से शादीशुदा था। उसकी पत्नी का पहले ही देहांत हो चुका था। महिला के परिवार वालों के मुताबिक वह सोमवार की शाम को घर से निकली थी। इसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला। महिला का शव मंगलवार सुबह गांव के पास खेत में पड़ा मिला। उसकी आंख के पास और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट के निशान मिले हैं। सूचना पर कुछ ही देर में महोली सीओ नागेन्द्र चौबे टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस टीम जांच पड़ताल कर ही रही थी कि तभी गांव में ही एक दूसरी मौत की खबर आई। महिला के करीब रहे एक पुरुष का शव उसके घर में फंदे से लटकता मिला। ग्रामीणों के मुताबिक दोनों के बीच बीते चार साल से नजदीकियां थीं। सीओ नागेन्द्र चौबे के मुताबिक महिला के परिवारवालों का आरोप है कि मरने वाले शख्स ने पहले महिला की हत्या की इसके बाद घर आकर फांसी लगा कर अपनी जान दे दी। सीओ के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  

ब्राजील को झटका: नेमार नहीं खेलेंगे वर्ल्ड कप वॉर्मअप मैच, फिटनेस पर सवाल

रियो डी जनेरियो दुनिया के सबसे मशहूर फुटबॉल खिलाड़ियों में से एक नेमार को सोमवार को फ्रांस और क्रोएशिया के खिलाफ फ्रेंडली मुकाबलों के लिए ब्राजील की टीम में जगह नहीं दी गई। यह मैनेजर कार्लो एंसेलोटी के लिए इस साल के फीफा वर्ल्ड कप के लिए अपनी टीम को फाइनल करने से पहले खिलाड़ियों को परखने का आखिरी मौका है। नेमार रविवार को अपनी हालिया चोट से उबरने के बाद मैदान पर लौटे। वह ब्राजील के सीरी ए में 90 मिनट तक मैदान पर खेले और उन्होंने कोरिंथियंस के साथ सैंटोस के 1-1 के घरेलू ड्रॉ में एक असिस्ट भी किया। सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, 27 लोगों की लिस्ट में नेमार के न होने के बावजूद एंसेलोटी ने 34 साल के खिलाड़ी के संयुक्त राज्य अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में होने वाले वर्ल्ड कप में खेलने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया। एंसेलोटी ने कहा, “मैंने इस बार उन्हें टीम में क्यों नहीं रखा, क्योंकि वह 100 प्रतिशत फिट नहीं है और हमें ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत है जो 100 प्रतिशत फिट हों। नेमार अगर पूरी तरह से फिट हो जाते हैं, तो वह अभी वर्ल्ड कप की टीम में शामिल हो सकते हैं।” ब्राजील 26 मार्च को बोस्टन में फ्रांस से और पांच दिन बाद ऑरलैंडो में क्रोएशिया से खेलेगा। साउथ अमेरिकन टीम अपना वर्ल्ड कप कैंपेन 13 जून को मोरक्को के खिलाफ शुरू करेगी। इसके बाद 19 जून को हैती और 24 जून को ग्रुप सी में स्कॉटलैंड से ब्राजील का सामना होगा। एंसेलोटी ने कहा कि नेमार को तकनीकी स्तर पर कुछ साबित करने की जरूरत नहीं है। नेमार को बाहर रखने का फैसला उनके बैकरूम स्टाफ के साथ मिलकर लिया गया था। रियल मैड्रिड के पूर्व बॉस ने कहा, “यह एक शारीरिक मूल्यांकन है, तकनीकी नहीं। बॉल के साथ वह बहुत अच्छे हैं, लेकिन उन्हें शारीरिक तौर पर सुधार करने की जरूरत है, क्योंकि कोचिंग स्टाफ और मेरे लिए वह अपनी काबिलियत के हिसाब से 100 प्रतिशत फिट नहीं हैं। यही वजह है कि उन्हें अपनी क्षमता के 100 प्रतिशत तक पहुंचने के लिए काम करना होगा। यह मेरी और स्टाफ में हर उस व्यक्ति की राय है जो उनके गेम देखते हैं।” ब्राजील की टीम में फ्लैमेंगो के सेंटर-बैक लियो परेरा, गैलाटसराय के मिडफील्डर गैब्रियल सारा, ब्रेंटफोर्ड के स्ट्राइकर इगोर थियागो और बोर्नमाउथ के फॉरवर्ड रेयान के रूप में 4 नए खिलाड़ियों को जगह दी गई है। ल्योन की तरफ से खेलते हुए शानदार फॉर्म में चल रहे युवा खिलाड़ी एंड्रिक को भी टीम में रखा गया है। ब्राजील टीम का स्क्वॉड गोलकीपर: एलिसन (लिवरपूल), बेंटो (अल-नासर), एडरसन (फेनरबाचे) डिफेंडर: वेस्ली (एएस रोमा), एलेक्स सैंड्रो (फ्लेमेंगो), डगलस सैंटोस (जेनिट सेंट पीटर्सबर्ग), मार्क्विनहोस (पेरिस सेंट जर्मेन), गेब्रियल मैगलहेस (आर्सेनल), ब्रेमर (जुवेंटस), डैनिलो (फ्लेमेंगो), इबानेज (अल-अहली), लियो परेरा (फ्लेमेंगो) मिडफील्डर: एंड्री सैंटोस (चेल्सी), कैसेमिरो (मैनचेस्टर यूनाइटेड), डैनिलो (बोटाफोगो), फैबिन्हो (अल-इत्तिहाद), गेब्रियल सारा (गैलाटासराय) फॉरवर्ड: एंड्रिक (ओलंपिक लियोनिस), इगोर थियागो (ब्रेंटफोर्ड), लुइज हेनरिक (जेनिट सेंट पीटर्सबर्ग), रेयान (बोर्नमाउथ), जोआओ पेड्रो (चेल्सी), गेब्रियल मार्टिनेली (आर्सेनल), माथियस कुन्हा (मैनचेस्टर यूनाइटेड), राफिन्हा (बार्सिलोना), विनीसियस जूनियर (रियल मैड्रिड)।  

पत्नी नहीं, मेरी सबसे बड़ी सपोर्ट सिस्टम – सूर्यकुमार यादव ने देविशा को दिया खास सम्मान

नई दिल्ली टी20 विश्व कप विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अपनी जिंदगी और करियर में पत्नी देविशा शेट्टी की भूमिका पर खुलकर बात की है। इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे करीब 8 साल पहले पत्नी से एक बहुत ही छोटी सी बातचीत ने उनकी जिंदगी बदल दी, करियर को लेकर नजरिया बदल दिया। उनकी पत्नी के सीधे सरल सवाल ने ही उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने को प्रेरित किया और अब जबकि सूर्यकुमार यादव विश्व कप विजेता कप्तान बन चुके हैं, तो वे अपनी ‘बेहद निश्छल’ पत्नी देविशा की जितनी भी प्रशंसा करें वह कम है क्योंकि उन्होंने ही उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यह साल 2018 की बात है जब देविशा शेट्टी ने सूर्यकुमार से एक सरल सवाल पूछा, ‘अगर आप भारत के लिए खेलना चाहते हैं, तो आपकी क्या योजना है?’ उस ‘बेहद सादगीपूर्ण बातचीत’ के आठ साल बाद सूर्यकुमार की अगुवाई में भारत ने टी20 विश्व कप में अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया। सूर्यकुमार ने ‘पीटीआई वीडियो’ के साथ एक पॉडकास्ट साक्षात्कार के दौरान उस बातचीत को याद करते हुए कहा, ‘हमारी शादी 2016 में हुई थी जब मैं केकेआर के लिए खेल रहा था। सब कुछ बहुत सहजता से आगे बढ़ रहा था। मैं अच्छा खेल रहा था, खेल का आनंद ले रहा था। जब मैं 2018 में मुंबई इंडियंस में शामिल हुआ तो वह तब तक के मेरे सफर और दिनचर्या को देखती रही। मुझे लगता है कि इसके बाद हमने चीजों को थोड़ा अलग तरीके से करना शुरू कर दिया था।’ उन्होंने कहा, ‘उसने (सूर्यकुमार की पत्नी) मुझसे कहा कि आपके साथ आयु वर्ग में खेलने वाले सभी खिलाड़ी अब भारत के लिए खेल रहे हैं। आपके मन में क्या है? मैंने कहा, ‘मुझे भी भारत के लिए खेलना है।’ उसने पूछा, ‘कैसे खेलोगे?’ इस 35 वर्षीय खिलाड़ी ने अपनी पत्नी के साथ उनके करियर को बदलने वाली बातचीत के बारे में कहा, ‘वह संक्षिप्त सी बातचीत थी। वह किसी तरह की बहस नहीं बल्कि संक्षिप्त चर्चा थी। लेकिन निश्चित तौर पर यह इस बारे में चर्चा थी कि आप अपने लक्ष्य की ओर एक कदम आगे कैसे बढ़ा सकते हैं। अगर मैं भारत के लिए खेलना चाहता हूं और भारत को जीत दिलाना चाहता हूं, तो मैं यह कैसे कर सकता हूं?’ एक बार जब अंतिम लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अतिरिक्त प्रयास करने का फैसला कर लिया गया तो उनकी जिंदगी में कुछ चुनौतियां भी सामने आई लेकिन सूर्यकुमार और देविशा ने एक जोड़े के रूप में उस रास्ते पर चलना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, ‘हमें कई चीजों में कटौती करनी पड़ी। इनमें खान-पान से लेकर सप्ताहांत में दोस्तों से मिलना, शनिवार-रविवार को आराम, सोमवार से शुक्रवार तक के कार्यक्रम शामिल थे। हमने इस तरह से शुरुआत की और 2018 में आईपीएल में मेरा प्रदर्शन (512 रन) बहुत अच्छा रहा। मैंने घरेलू क्रिकेट में भी अच्छा प्रदर्शन किया।’ सूर्यकुमार ने कहा, ‘उस साल मुझे मुंबई इंडियंस की तरफ से पारी की शुरुआत करने का भी मौका मिला और मैंने रन भी बनाए। हमने 2019 और 2020 में भी यही सिलसिला जारी रखा और मैं एक अलग ही मूड में था। उसने देखा कि वह चीजों का अधिक आनंद लेने लगा है। मेरे लिए 2020 (आईपीएल में फिनिशर के तौर पर 480 रन) और भी बेहतर रहा और फिर 2021 में मुझे भारतीय टीम में चुना गया।’ बेहद मिलनसार कप्तान ने कहा कि देविशा पर्दे के पीछे रहकर उनकी ताकत बनी रहीं। उन्होंने कहा, ‘उसने सच्ची बातें बताकर नेपथ्य में रहते हुए मुझ पर बहुत प्रभाव डाला है। अगर वह आपकी अर्धांगिनी है तो वह हमेशा आपके प्रति ईमानदार रहेगी क्योंकि वह सिर्फ आपकी तरक्की चाहती हैं। अगर आप साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं तो आपके बीच बातचीत में निश्छलता होना जरूरी है।’ भारतीय कप्तान ने कहा, ‘कई बार ऐसा करना मुश्किल भी रहा लेकिन कुल मिलाकर यह अच्छा रहा। अगर आज मैं इस मुकाम पर खड़ा हूं तो इसमें उन बातचीत का बहुत बड़ा योगदान रहा है।’ देविशा ने कभी भी उनकी क्रिकेट को लेकर हस्तक्षेप नहीं किया क्योंकि वह उनका क्षेत्र नहीं था, लेकिन उन्होंने उन्हें क्रिकेट से परे जीवन के बारे में सलाह दी। सूर्यकुमार ने कहा, ‘मैं उसे इसका पूरा श्रेय देता हूं क्योंकि उसने मुझे सिर्फ क्रिकेट में मेरे करियर को लेकर सलाह ही नहीं दी, बल्कि जीवन से जुड़ी कई बातें बताईं। मुझे क्या करना चाहिए? किसी खास परिस्थिति से कैसे निपटना चाहिए? मुझे खुद को कैसे पेश करना चाहिए?’ और सबसे महत्वपूर्ण उन्होंने घर में प्रवेश करने से पहले क्रिकेट को दरवाजे पर छोड़ने के लिए कहा। घर पर वह सुपरस्टार सूर्यकुमार यादव नहीं बल्कि सिर्फ सूर्या हैं। उन्होंने कहा, ‘उसने मुझसे कहा कि क्रिकेट को घर के अंदर लेकर मत आना। यह सब महत्वपूर्ण बातें थी जो मैंने सीखी। आपको अपनी उपलब्धियों के बावजूद विनम्र और जमीन से जुड़े रहना चाहिए। घर पर आप सूर्यकुमार यादव नहीं हैं इसलिए सहज व्यवहार करें। खाना खाने के बाद प्लेट को बर्तन धोने वाले स्थान पर रख दें। यह छोटी-छोटी बातें आपके जीवन में बहुत महत्व रखती हैं।’  

जदयू को झटका: केसी त्यागी का इस्तीफा, नए सियासी सफर के संकेत

नई दिल्ली पिछले कुछ दिनों से अपनी ही पार्टी के खिलाफ बोल कर चर्चा में रहने वाले केसी त्यागी ने जनता दल यूनाइटेड से इस्तीफा दे दिया है। केसी त्यागी ने अपना इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर शेयर कर साफ किया है कि वो जदयू की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं और आगे सदस्यता नहीं लेंगे। JDU को भेजे गए इस्तीफे में केसी त्यागी ने अपने भविष्य का प्लान भी बताया है। केसी त्यागी ने लिखा है कि 22 मार्च को वो अपने समर्थकों के साथ बैठक करेंगे। केसी त्यागी ने लिखा, ’30 अक्तूबर, 2003 को जदयू अस्तित्व में आया और समता पार्टी तथा जनता दल का विलय हुआ। उस वक्त जॉर्ज फर्नांडिस ने अध्यक्ष और मैंने महासचिव के तौर पर एक साथ काम किय। मैंने शरद यादव और नीतीश कुमार की अध्यक्षता में भी काम किया। मैं पार्टी का मुख्य प्रवक्ता और राजनीतिक सलाहकार भी रह। अब पार्टी का सदस्यता अभियान खत्म हो गया है और मैंने दोबारा पार्टी की सदस्यता नहीं ली है। नीतीश कुमार के प्रति मेरा सम्मान कभी नहीं बदलेगा।’ केसी त्यागी ने बताया है भविष्य का प्लान केसी त्यागी ने आगे लिखा, ‘मेरे कुछ राजनीतिक साथी, समर्थक और वर्करों ने 22 मार्च को एक बैठक आयोजित की है। इस बैठक में देश के राजनीतिक हालात पर चर्चा होगी। मैं जल्द ही आगे की रणनीति पर फैसला लूंगा। बता दें कि केसी त्यागी मूल रूप से उत्तर प्रदेश से आते हैं। पश्चिमी यूपी में उनके काफी समर्थक भी हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि केसी त्यागी अब उत्तर प्रदेश की राजनीति का रूख भी कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि केसी त्यागी की इच्छा अब यूपी की राजनीति करने की है। केसी त्यागी की गिनती जदयू के पुराने और दिग्गज नेताओं के तौर पर होती थी। केसी त्यागी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी भी माने जाते थे। वो जदयू के पक्ष में हर मंच पर मजबूती से अपनी बात भी रखते थे। इसी साल केसी त्यागी ने नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग भी उठाई थी और पीएम मोदी को खत लिखा था। हालांकि, लंबे समय से जदयू ने केसी त्यागी से दूरी बना रखी थी। इस मुद्दे पर भी जदयू ने खुद को उनसे अलग कर लिया था। केसी त्यागी ने आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को हटाने के फैसला का विरोध किया था। इसके अलावा फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी वो भारत सरकार के स्टैंड से अलग खड़े नजर आए थे। पिछले काफी समय से पार्टी केसी त्यागी को तवज्जो नहीं दे रही थी जिससे इस बात का इशारा मिल रहा था कि अब वो पार्टी में नहीं है। हालांकि, अब केसी त्यागी ने खुद जदयू से इस्तीफे का ऐलान किया है।  

पार्टी लाइन तोड़ी तो सजा तय! क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस के तीन विधायक निलंबित, सदस्यता पर तलवार

ओडिशा ओडिशा में क्रॉस वोटिंग के चलते राज्यसभा चुनाव में हारने वाली कांग्रेस ने अब बागी विधायकों पर ऐक्शन लेना शुरू कर दिया है। पार्टी ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के लिए वोट डालने वाले तीन विधायकों को निलंबित कर दिया है। ये विधायक हैं सनाखेमुंडी रमेश चंद्र जेना, मोहाना के दसरथी गोमांगो और कटक से विधायक सोफिया फिरदौस। इन लोगों ने सोमवार को हुए राज्यसभा चुनाव में पार्टी की हिदायत के बाद भी दिलीप रे के समर्थन में वोट दिया था। इन लोगों के निलंबन की जानकारी देते हुए ओडिशा कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘कांग्रेस को धोखा देने वालों ने देश के साथ विश्वासघात किया है।’ ओडिशा कांग्रेस के मीडिया सेल के प्रभारी अरबिंद दास ने कहा कि यह निर्णय पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने के बाद लिया गया है। इन लोगों ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के हितों के खिलाफ काम किया। वह भी तब जबकि सभी विधायकों को पहले से ही हिदायत दी गई थी। उन्होंने कहा कि अब इन लोगों की विधानसभा की सदस्यता ही खत्म कराई जाएगी। इसके लिए हम स्पीकर को जल्दी ही नोटिस देने वाले हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि इन लोगों से ऐसी उम्मीद नहीं थी। इन विधायकों ने पार्टी के साथ गद्दारी की है। हम तय करेंगे कि कैसे संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत इन लोगों को विधानसभा से बाहर कराया जाए। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इस ऐक्शन की हाईकमान ने भी सराहना की है। लीडरशिप मानती है कि इन लोगों के खिलाफ ऐक्शन लिया जाना जरूरी था। इन कांग्रेस विधायकों के अलावा मुख्य विपक्षी दल बीजेडी के भी 8 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी। इसी के चलते विपक्ष के साझा उम्मीदवार दत्तेश्वर होता की हार हो गई। होता को बीजेडी ने उतारा था, लेकिन कांग्रेस ने भी उनके समर्थन का ऐलान किया था। माना जा रहा है कि कांग्रेस ऐसा ही ऐक्शन बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में भी ले सकती है। बिहार में भी विपक्षी कैंडिडेट को हार मिली है, जबकि वह एक उम्मीदवार जिताने की स्थिति में आसानी से था। हरियाणा में किसी तरह जीत पाई कांग्रेस, 9 वोट थे ज्यादा हरियाणा में किसी तरह कांग्रेस के कैंडिडेट कर्मवीर सिंह बौद्ध को जीत मिल गई। फिर भी भाजपा की रणनीति के आगे पार्टी हांफती नजर आई। यहां भी 5 विधायकों ने पार्टी से अलग रुख अपनाया और क्रॉस वोटिंग कर दी। इसके अलावा 4 वोट अवैध करार दिए गए। इस तरह 37 सीटों वाली कांग्रेस के कैंडिडेट को महज 28 वोट ही मिले। ऐसी स्थिति में कांग्रेस यह पड़ताल करने में जुटी है कि आखिर हरियाणा और बिहार में किन नेताओं ने उसके ही कैंडिडेट को वोट नहीं दिया।

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