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मकान मालिक और किरायेदार के लिए नए नियम, किराएदार मकान पर नहीं कर पाएगा कब्जा, तंग नहीं कर सकता मकान मालिक

Narendra Modi 'completely helpless': Rahul Gandhi attacks Center over NEET-PG

भोपाल मकान किराए पर लेकर रहने वाला किराएदार अब उस पर कब्जा नहीं कर पाएगा। अनुबंध में निर्धारित अवधि पूरी होने पर उसे मकान खाली करना होगा। यदि वह ऐसा नहीं करता है तो शिकायत पर किराया प्राधिकारी बेदखली की कार्रवाई करेंगे। किराएदार की मृत्यु होने पर उसके उत्तराधिकारी को वहां रहने का अधिकार होगा, किंतु उसे भी अनुबंध का पालन करना होगा।   तंग नहीं कर सकता मकान मालिक मकान मालिक भी किराएदार को तंग नहीं कर सकेगा। वह जल, विद्युत, पाइप कुकिंग गैस की आपूर्ति, मार्ग, लिफ्ट, सीढ़ियों पर प्रकाश, सफाई व्यवस्था, पार्किंग, संचार माध्यम, स्वच्छता सेवाएं और सुरक्षा संबंधी सुविधाएं बाधित नहीं करेगा। किराएदार के परिसर में प्रवेश का उसे कोई अधिकार नहीं रहेगा।   विधेयक का प्रारूप तैयार मकान मालिक और किराएदार के अधिकार का संरक्षण करने के लिए केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने किराएदारी अधिनियम विधेयक का प्रारूप तैयार किया है, जिसे विधानसभा के मॉनसून सत्र में प्रस्तुत किया जा सकता है। केंद्र सरकार ने दिए थे निर्देश केंद्र सरकार ने मकान मालिक और किराएदार के अधिकारों के संरक्षण के लिए सभी राज्यों को कानूनी प्रावधान करने के लिए दिशा निर्देश दिए थे। इसके अनुसार, नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने अधिनियम का प्रारूप तैयार किया है। इसमें मालिक और किराएदार को लिखित अनुबंध करके जानकारी दो माह के अंदर किराया प्राधिकारी को देनी होगी। निर्धारित अवधि के बाद किराएदार को मकान या भूखंड खाली करना होगा। आपदा की स्थिति में अवधि समाप्त होने पर भी किराएदार से मकान खाली नहीं कराया जाएगा पर उसे अनुबंध के अनुसार किराया देना होगा। किराएदार की मृत्यु होने पर उसके उत्तराधिकारी को रहने का अधिकार होगा पर उसे भी अनुबंध का पालन करना होगा। कई बार यह शिकायत भी आती है कि किराएदार ने मकान मालिक को बताए बिना किराएदार रख लिया। ऐसा बिना सहमति के नहीं किया जा सकेगा। किराएदार अनुबंध समाप्त होने के बाद भी मकान खाली नहीं करता है तो पहले दो माह तक दोगुना और फिर इसके बाद चार गुना मासिक किराया देना पड़ेगा। मकान मालिक किराएदार को बताए बिना कभी भी परिसर में प्रवेश नहीं करेगा। मकान में मरम्मत या अन्य कार्य करवाने, निरीक्षण या अन्य किसी कारण से प्रवेश करना है तो 24 घंटे पहले सूचना देनी होगी। किराएदार को तंग करने के लिए जल, विद्युत, पाइप कुकिंग गैस की आपूर्ति, मार्ग, लिफ्ट, सीढ़ियों पर प्रकाश, सफाई व्यवस्था, पार्किंग, संचार माध्यम, स्वच्छता सेवाएं और सुरक्षा संबंधी सुविधाएं बाधित नहीं की जाएंगी। किराया अधिकरण बनेगा प्रस्तावित विधेयक के अनुसार प्रत्येक जिले में किराया अधिकरण होगा। इसमें न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति होगी। इन्हें शिकायत का निराकरण 60 दिन के भीतर करना होगा। आदेश का पालन करने के लिए स्थानीय निकाय या पुलिस की सहायता ले सकेंगे। परिसर का कब्जा दिलाने या वसूली के लिए कुर्की भी करा सकेंगे। किराएदारी कानून के प्रविधान शासकीय परिसर, धार्मिक या ट्रस्ट के अलावा वक्फ अधिनियम के अधीन पंजीकृत न्यास के स्वामित्व वाले परिसर पर लागू नहीं होंगे।

करीब 30 दिन से जिस बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम जंगल की खाक छान रही थी, हुई पूरी, पकड़ाया बाघ

रायसेन करीब 30 दिन से जिस बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम जंगल की खाक छान रही थी, उसे गुरुवार की दोपहर ग्राम सूरई के जंगल में पकड़ लिया गया। वन विभाग की टीम को सुबह 7 बजे उसकी पिन प्वाइंट लोकेशन मिल गई थी। लोकेशन मिलते ही 8 बजे तक हाथियों के साथ टीम मौके पर पहुंच गई, जहां उसे घेर लिया गया। हालांकि इस दौरान बाघ ने टीम को काफी छकाया। करीब 11 बजे डाक्टर व विशेषज्ञों की टीम भी वहां पहुंच गई। 12 बजकर 5 मिनट पर बाघ को गन की मदद से पहला इंजेक्शन दिया गया। इसके बाद उसकी मूवमेंट कुछ धीमी हो गई। इसके बाद 1 बजकर 30 मिनट पर उसे दूसरा इंजेक्शन दिया गया, जिससे वह पूरी तरह बेहोश हो गया। डॉक्टरों की टीम ने उसके स्वास्थ्य की जांच की। गर्मी अधिक होने से बाघ के ऊपर पानी का छिड़काव किया गया और आक्सीजन भी दी गई। पूरी तरह से निश्चिंत होने के बाद बाघ को टीम ने पिंजरे में पहुंचाया, करीब 4 बजे बाघ वापस होश में आ गया। फिलहाल उसे पिंजरे सहित गोपालपुर स्थित तितली पार्क में रखा गया। वाइल्ड लाइफ के अधिकारियों व विशेषज्ञों की सलाह के बाद निर्णय लिया जाएगा कि उसे कहां भेजा जाना है, लेकिन उससे पहले करीब 7 से 8 दिन उसे ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा। बाघ को पकड़ने में 25 से 30 लाख खर्च तीस दिन पहले हुई तेंदूपत्ता मजदूर मनीराम की मौत के बाद से ही वन विभाग की टीम बाघ की सर्चिंग में जुट गई थी। उसकी मूवमेंट पर लगातार नजर रखी जा रही थी। इस काम में वाइल्डलाइफ के क्षेत्र में काम करने वाले दो एनजीओ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और डब्ल्यूसीपी की टीम भी वन विभाग की मदद कर रही थी। एनजीओ ने विभाग को अधुनिक कैमरे व अन्य तकनीकी मदद प्रदान की। 20 दिन बाघ की निगरानी करने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर कान्हा, पन्ना नेशनल पार्क व वन विहार भोपाल की 40 सदस्यीय टीम बाघ को रेस्क्यू करने रायसेन पहुंची। इस टीम के साथ वन विभाग के करीब 100 कर्मचारी मिलाकर करीब 140 सदस्यीय टीम 10 दिन से बाघ को पकड़ने में जु़टी हुई थी। रायसने डीएफओ के अनुसार इस पूरे रेस्क्यू आपरेशन में करीब 25 से 30 लाख रुपए खर्च हो गया है। आदमखोर नहीं है बाघ बाघ के बारे में जानकारी देते हुए डीएफओ विजय कुमार ने बताया कि उसको लेकर यह बात फैलाई जा रही थी कि वह आदमखोर है, यह पूरी तरह से गलत हैं। दरअसल तेंदूपत्ता मजदूर के साथ जो घटना हुई, वह एक हादसा था। उस घटना के बाद हमने लगातार बाघ का ऑब्जर्वेशन किया। इसमें कही भी आदमखोर जैसे लक्षण सामने नहीं आए हैं। आदमखोर बाघ इंसान का पीछा करके उसका शिकार करता है, लेकिन ऐसी एक भी घटना सामने नहीं आई है। मनीराम की मौत के बारे में की गई पड़ताल में पता चला है कि घटना के समय बाघ नाले में आराम कर रहा था, अचानक मजदूर के सामने आाने पर उसने हमला कर दिया। उसका रेस्क्यू सिर्फ इसलिए किया गया है, क्योंकि बाघ जिस क्षेत्र में अपनी टेरेटरी बना रहा था, उसके बीच में काफी सारे गांव, शहर और सड़कें आती थी, जहां से वह गुरजता था। इसकी वजह से लोगों में डर बना हुआ था। साथ ही बाघ की सुरक्षा को लेकर भी खतरा था। अब उसे वाइल्डलाइफ के अधिकारियों के मार्गदर्शन में सुरक्षित जगह भेजा जाएगा।

एक बार फिर RSS की तरफ बढ़ रही शिवसेना, RSS की तारीफ

नई दिल्ली कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्षी इंडिया अलायंस और महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी के घटक दल शिवसेना ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके सरकार्यवाह मोहन भागवत की तारीफ की है और उनके बयानों के बहाने भाजपा पर तीखा तंज कसा है। अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में शिवसेना ने लिखा है कि क्या मोहन भागवत के क्लास लगाने से भाजपा का मौजूदा चरित्र बदलने वाला है? पार्टी ने आगे लिखा है कि जब तक भाजपा के सूत्र मोदी-शाह के हाथ में हैं, तब तक संघ नेताओं की फटकार चिकने घड़े पर पानी डालने के सिवा कुछ नहीं कहा जा सकता है। मोहन भागवत के बयान का उल्लेख करते हुए उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने कहा है कि जनसेवक कौन है और जन सेवा के नाम पर अहंकार कौन पाल रहा है? आलेख में सेना ने लिखा है कि संघ भाजपा का मातृ संगठन है। भाजपा को वर्तमान स्थिति में लाने के लिए संघ के स्वयंसेवकों ने कड़ी मेहनत की। संघ वहां पहुंच गया है जहां भाजपा नहीं पहुंची। झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर-पूर्व के सुदूर राज्य, इन सुदूर इलाकों में संघ के स्वयंसेवकों के अपार प्रयासों के कारण ही भाजपा ने जड़ें जमाईं और सफलता पाई है। आलेख में आरएसएस की तारीफ करते हुए कहा गया है कि संघ ने अरुणाचल, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, असम जैसे राज्यों में भी काम किया। संघ झारखंड, छत्तीसगढ़ के जंगली इलाकों में है। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भाजपा की शत-प्रतिशत सफलता संघ के निर्माण के कारण है, लेकिन पिछले दस वर्षों में मोदी-शाह ने संघ का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया। शिवसेना ने मोदी-शाह की जोड़ी पर हमला बोलते हुए लिखा है कि इस व्यापारिक जोड़ी ने दिखा दिया कि संघ का मतलब ‘इस्तेमाल करो और फेंक दो’ है वरना भाजपा अध्यक्ष नड्डा में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह कह सकें कि हमें संघ की जरूरत नहीं है। शिवसेना ने लिखा है कि ये बयान देने की प्रेरणा उन्हें मोदी-शाह से मिली। भाजपा के मौजूदा नेतृत्व पर आक्रामक शिवसेना ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भाजपा ने अपने चरित्र को दागदार किया है। द्रौपदी का चीरहरण कौरवों ने किया था, लेकिन भाजपा का चीरहरण गुजरात के दुर्योधन ने किया, किसी वक्त गुजरात के दुर्योधन भी संघ के विनम्र स्वयंसेवक थे। मोदी-शाह शासनकाल में संघ का पतन हुआ है। शिवसेना ने लिखा है कि 2024 के चुनाव में भाजपा मोदी-शाह के अहंकार की वजह से हारी है। आलेख में शिवसेना और भाजपा के रिश्तों की भी बात कही गई है और कहा गया है कि  शिवसेना मूलत: हिंदुत्ववादी विचारों की पार्टी है और हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा और शिवसेना एक साथ आए। संघ नेतृत्व की भूमिका थी कि यह गठबंधन न टूटे, लेकिन मोदी-शाह के अहंकार और व्यापारिक रवैए के कारण संघ की बात सुने बिना ही शिवसेना से गठबंधन तोड़ दिया गया। इसके साथ ही शिवसेना ने आरोप लगाया है कि संघ में भी मोदी-शाह ने चमचों की फौज तैयार कर दी थी, जिसकी वजह से इस मनमानी का किसी ने विरोध नहीं किया। आलेख में कहा गया है कि टीम मोदी ने यह धारणा बनाई कि मोदी जी ही हिंदुत्व के ब्रांड और शिल्पकार हैं, इस तरह का ढोल पीट कर उन्होंने संघ के हिंदुत्ववादी भूमिका को चुनौती दी है, जबकि मणिपुर हिंसा के मामले में मोदी-शाह का कायराना रवैया संघ पचा नहीं पा रहा है। शिवसेना ने लिखा है कि पहले संघ के कार्यकर्ता भाजपा की जीत के लिए कड़ी मेहनत करते थे। इस समय संघ कार्यकर्ता भाजपा के प्रचार से दूर रहे। यहां तक कि मोदी-की टीम की  गडकरी को भी कैबिनेट से हटाने की योजना थी, लेकिन चूंकि भाजपा 240 पर अटक गई थी, इसलिए उन्हें गडकरी को कैबिनेट में लेना पड़ा। शिवसेना ने लिखा कि पिछले दस सालों में मोदी-शाह ने संघ की सोच, संघ संरक्षकता, नैतिकता की खुराक को झिड़क दिया है। वे अभिमान और अहंकार से ग्रसित हो गए हैं।  

चीन और पाकिस्तान ने एक बार फिर से कश्मीर राग अलापा, भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब, CPEC पर भी घेरा

नई दिल्ली चीन और पाकिस्तान ने एक बार फिर से भारत के जम्मू और कश्मीर को लेकर बयान जारी किया है। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी भारत ने दोनों देशों को खूब खरी-खरी सुनाई। भारत ने चीन और पाकिस्तान के ताजा संयुक्त बयान में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के ‘‘अनुचित’’ संदर्भों को बृहस्पतिवार को दृढ़ता से खारिज कर दिया। भारत ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख “भारत के अभिन्न अंग रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे”। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग के बीच वार्ता के बाद गत सात जून को बीजिंग में संयुक्त बयान जारी किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘‘हमने सात जून को चीन और पाकिस्तान के बीच संयुक्त बयान में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के अनुचित संदर्भों को देखा है। हम ऐसे संदर्भों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं।” उन्होंने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर हमारी स्थिति सुसंगत है और संबंधित पक्षों को अच्छी तरह से पता है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे।” जायसवाल संयुक्त बयान पर मीडिया के एक सवाल का जवाब दे रहे थे। जायसवाल ने कहा, ‘‘किसी अन्य देश को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।’’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने संयुक्त बयान में शामिल चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) पर भी कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ‘‘इसी संयुक्त बयान में तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के तहत गतिविधियों और परियोजनाओं का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें से कुछ भारत के संप्रभु क्षेत्र में हैं, जो पाकिस्तान द्वारा जबरन और अवैध कब्जे में हैं।’’ जायसवाल ने कहा, ‘‘हम भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर आघात करने वाले इन क्षेत्रों पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे को मजबूत करने या वैध बनाने के लिए अन्य देशों द्वारा किए गए किसी भी कदम का दृढ़ता से विरोध करते हैं और इसे अस्वीकार भी करते हैं।’’  

सेना में अग्निवीर व्यवस्था को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के दौरान बड़ा मुद्दा बनाया

लखनऊ   सेना में अग्निवीर व्यवस्था को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के दौरान बड़ा मुद्दा बनाया था। कहा था कि सेना के बाद यूपी पुलिस में यही व्यवस्था लागू करने की तैयारी हो रही है। इसी बीच बुधवार की रात यूपी पुलिस का एक लेटर वायरल हो गया। एडीजी स्थापना की ओर से जारी लेटर में कहा गया कि पुलिस विभाग के दफ्तरों में आउटसोर्सिंग से भर्ती पर विचार हो रहा है। सपा ने इसे पुलिस में भी सेना की अग्निवीर जैसी व्यवस्था लागू करने का आरोप लगाया। खुद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लेकर भाजपा को घेर लिया। इसके बाद यूपी पुलिस बैकफुट पर आ गई और कहा कि यह लेटर गलती से जारी हो गया है। इसके बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रदेश पुलिस की तरफ से जो सफाई पेश की गई है, वह समझ से परे है। पहले अखिलेश यादव ने लेटर को लेकर भाजपा पर बड़ा हमला बोला। अखिलेश ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि उप्र में भाजपा सरकार ने ‘पुलिस व्यवस्था’ के प्रति लापरवाही भरा नज़रिया अपना रखा है, जिसकी वजह से अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। एक-के-बाद-एक कार्यवाहक डीजीपी के बाद अब कुछ ‘पुलिस सेवाओं की आउटसोर्सिंग’ पर विचार किया जा रहा है। ठेके पर पुलिस होगी तो न ही उसकी कोई जवाबदेही होगी, न ही गोपनीय और संवेदनशील सूचनाओं को बाहर जाने से रोका जा सकेगा। भाजपा सरकार जवाब दे कि जब पुलिस का अपना भर्ती बोर्ड है तो बाक़ायदा सीधी स्थायी नियुक्ति से सरकार भाग क्यों रही है? अखिलेश ने लिखा कि पुलिस सेवा में भर्ती के इच्छुक युवाओं की ये आशंका है कि इसके पीछे आउटसोर्सिंग का माध्यम बनने वाली कंपनियों से ‘काम के बदले पैसा’ लेने की योजना हो सकती है क्योंकि सरकारी विभाग से तो इस तरह पिछले दरवाज़े से ‘पैसा वसूली’ संभव नहीं है। अपने आरोप के आधार के रूप में वो कोरोना वैक्सीन बनानेवाली प्राइवेट कंपनी का उदाहरण दे रहे हैं, जिसे भाजपा ने नियम विरूद्ध पाते हुए, वैक्सीन बनाने वाली एक सरकारी कंपनी के होते हुए भी, वैक्सीन बनाने का ठेका दिया और उससे चंदा वसूली की। कहा कि पुलिस भर्ती परीक्षा के पेपर लीक से आक्रोशित युवाओं में इस तरह की ‘पुलिस सेवा की आउटसोर्सिंग’ की खबर से और भी उबाल आ गया है। आउटसोर्सिंग का ये विचार तत्काल त्यागा जाए और उप्र के युवाओं को नियमित, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सीधी नियुक्ति प्रक्रिया के माध्यम से नौकरी दी जाए। यह भी कहा कि भाजपा कहीं किसी दिन ‘सरकार’ ही आउटसोर्स न कर दे। अखिलेश के हमले के बाद यूपी पुलिस की तरफ से स्पष्टीकरण आ गया। कहा गया कि सोशल मीडिया में पुलिस विभाग में आउटसोर्सिंग के संबंध में एक पत्र प्रसारित हो रहा है। यह पत्र त्रुटिवश जारी हो गया है। पुलिस विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग की व्यवस्था पहले से चल रही है, इसी के संबंध में पत्र जारी किया जाना था जो कि गलती से मिनिस्टीरियल स्टाफ के लिए जारी हो गया है। ऐसा कोई प्रस्ताव पुलिस विभाग और शासन स्तर पर विचाराधीन नहीं है। यह पत्र गलत जारी हो गया है जिसे निरस्त कर दिया गया है। पुलिस का स्पष्टीकरण आने के बाद कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इसे समझ से परे बताते हुए एक्स पर लिखा कि उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर के स्तर पर आउटसोर्सिंग के जरिये भर्तियों पर विचार किया जा रहा है। इस संबंध में जिलों के अधिकारियों को पत्र भेजा गया था जो कि सोशल मीडिया पर वायरल है। भाजपा सरकार ने अग्निपथ स्कीम लाकर हमारी सेना और युवाओं का भविष्य दोनों कमजोर किया। अब यूपी पुलिस में यही खेल करने का प्रयास चल रहा है। भाजपा की सरकारें देश की हर एक संस्था को बेहतर बनाने की जगह उन्हें कमजोर करने का काम कर रही हैं। प्रदेश पुलिस की तरफ से जो सफाई पेश की गई है, वह समझ से परे है। एक के बाद एक पेपर लीक, अग्निवीर, लाखों खाली पद और अब पुलिस भर्ती में आउटसोर्सिंग की खबरों से प्रदेश के करोड़ों युवा आक्रोशित हैं। भाजपा को सामने आकर इस बारे में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। सपा सांसद ने लिखा पुलिस को अग्निवीर बनाया जा रहा सपा नेता और अंबेडकरनगर के सांसद लालजी वर्मा ने एक्स पर लिखा कि सेना को अग्निवीर बनाने के बाद अब उत्तर प्रदेश पुलिस को भी अग्निवीर बनाया जा रहा है। अखिलेश यादव  ने चुनाव के दौरान ही चेताया था कि यह सरकार सेना को अग्निवीर बनाने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को भी अग्निवीर बना देगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष का संदेह सही निकला अब उत्तर प्रदेश सरकार सब इंस्पेक्टर (लिपिक) के पदों को संविदा पर भर्ती करने का विचार कर रही है। उन्होंने यह भी लिखा कि अखिलेश यादव ने चुनाव के दौरान ही यह कहा था कि भविष्य में यह सरकार सारे सरकारी पदों को संविदा पर कर देगी ताकि आरक्षण को समाप्त किया जा सके।  

जम्मू-कस्मीर पुलिस ने मामले में 50 संदिग्धों को हिरासत में लिया, रियासी आतंकी हमला केस में पुलिस को बड़ी कामयाबी

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर के रियासी में पिछले दिनों श्रद्धालुओं की बस पर हुए आतंकी हमले में पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। जम्मू-कस्मीर पुलिस ने मामले में 50 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। रियासी की एसएसपी मोहिता शर्मा ने कहा, “जिला पुलिस रियासी ने पी/एस पौनी के कांडा इलाके में तीर्थयात्रियों की बस पर हाल ही में हुए आतंकवादी हमले के सिलसिले में 50 व्यक्तियों को हिरासत में लिया है।” चार दिन पहले रविवार ( 09 जून) को हुई इस घटना में कई लोग हताहत हो गए थे । केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में हाल ही में हुए हमलों में शामिल आतंकवादियों का पता लगाने के लिए विभिन्न जिलों के वन क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान यह कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने बताया कि एक महिला ने दो व्यक्तियों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दी जिसके बाद पुलिस ने अर्धसैनिक बलों के साथ मिलकर जम्मू के बाहरी इलाके नरवाल बाईपास क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया। पिछले चार दिन में आतंकवादियों ने रियासी, कठुआ और डोडा जिलों में चार जगहों पर हमले किए हैं, जिनमें नौ तीर्थयात्रियों और केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक जवान की मौत हो गई तथा सात सुरक्षाकर्मी समेत कई अन्य घायल हो गए। कठुआ में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकवादी भी मारे गए। उनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। अधिकारियों के अनुसार, सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने सुबह डोडा जिले में गंडोह के कोटा टॉप, चट्टागल्ला और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान फिर से शुरू किया, जहां मंगलवार और बुधवार को आतंकवादियों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मियों सहित सात सुरक्षाकर्मी घायल हो गए थे। पुलिस ने बुधवार को जिले में दो हमलों में शामिल चार आतंकवादियों के स्केच जारी किए थे और उनकी गिरफ्तारी के लिए सूचना देने वाले को 20 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी। इससे पहले पुलिस ने रविवार को रियासी जिले में तीर्थयात्रियों को ले जा रही बस पर हुए हमले में शामिल एक आतंकवादी पर 20 लाख रुपये का नकद इनाम घोषित किया था और उसका स्केच भी जारी किया था। इस हमले में नौ लोग मारे गए थे और 41 घायल हो गए थे। अधिकारियों ने बताया कि रियासी और राजौरी जिले में तलाशी अभियान जारी है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी के स्केच से मिलते-जुलते चेहरे वाले एक शख्स को दोपहर में रियासी में एक बस से हिरासत में लिया गया और उसे पूछताछ के लिए ले जाया गया। उन्होंने बताया कि राजौरी के नौशेरा और पास के पुंछ में भी तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। आतंकी खतरे के बारे में खुफिया जानकारी मिलने के बाद कठुआ, सांबा और जम्मू जिलों में भी सुरक्षा बलों को अलर्ट पर रखा गया है। कठुआ में मंगलवार रात से शुरू हुई और 15 घंटे से अधिक समय तक चली भीषण मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया था। इस अभियान में सीआरपीएफ के एक जवान की भी मौत हो गई थी, जबकि एक नागरिक घायल हो गया। पुलिस ने बुधवार को एक परामर्श जारी कर जम्मू क्षेत्र के निवासियों से संदिग्ध व्यक्तियों और वस्तुओं की आवाजाही के बारे में सतर्क रहने का आग्रह किया था। राजौरी और जम्मू जिलों के कुछ हिस्सों में आतंकी खतरे की आशंका जताने वाली खुफिया सूचनाओं के बाद यह परामर्श जारी किया गया। 

भले ही कानून महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए बने हैं, लेकिन मर्द ही हमेशा गलत नहीं होता: इलाहाबाद हाई कोर्ट

नई दिल्ली   यौन उत्पीड़न के एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि भले ही कानून महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए बने हैं, लेकिन मर्द ही हमेशा गलत नहीं होता। कोर्ट ने शादी के झूठा वादा करके यौन उत्पीड़न करने के आरोपों की सुनवाई करते हुए यह बात कही। सारे तथ्यों के सामने आने के बाद अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में केस को साबित करने की जिम्मेदारी आरोपी और शिकायतकर्ता दोनों पर होती है। जस्टिस राहुल चतुर्वेदी और जस्टिस नंद प्रभा शुक्ला ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि यौन उत्पीड़न से जुड़े कानून महिला केंद्रित हैं। इनका उद्देश्य महिलाओं की गरिमा और सम्मान की रक्षा करना है। लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि हमेशा मर्द ही गलत नहीं होते। अदालत ने आरोपी को बरी किए जाने के खिलाफ दायर अर्जी पर यह बात कही। आरोपी पर एससी-एसटी ऐक्ट के तहत भी केस दर्ज हुआ था। पीड़िता ने 2019 में केस दर्ज कराया था और कहा था कि आरोपी उसके साथ यौन संबंध बनाता रहा और वादा किया था कि शादी करेगा। लेकिन बाद में उसने शादी करने से इनकार कर दिया। यही नहीं महिला ने आरोप लगाया था कि उस शख्स ने जातिसूचक शब्द कहे थे। आरोपी शख्स के खिलाफ 2020 में चार्जशीट दाखिल की गई थी। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने 2023 में आरोपी शख्स को रेप केस से बरी कर दिया था। अदालत में आरोपी का कहना था कि दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे। उसने महिला से शादी करने से तब इनकार कर दिया था, जब उसे पता चला कि वह ‘यादव’ बिरादरी से नहीं है, जैसा कि उसने दावा किया था। यही नहीं पूरे मामले की पड़ताल के बाद अदालत ने पाया कि आरोप लगाने वाली महिला की पहले भी 2010 में किसी शख्स से शादी हुई थी, लेकिन दो साल बाद ही वह अलग रहने लगी थी। आरोप लगाने वाली महिला ने खुद छिपाई थी पहली शादी केस की जांच हुई तो पता चला कि आरोप लगाने वाली महिला ने अपनी पहली शादी की बात भी छिपाई थी। इसके अलावा जाति भी गलत बताई थी। इस पर अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने फैसला ठीक दिया था। हाई कोर्ट ने आरोपी पर एससी-एसटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज करने पर कहा कि समाज में किसी भी रिश्ते के शादी में तब्दील होने के लिए आज भी जाति मायने रखती है। बेंच ने कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में नाकाम रही कि आखिर उसने जाति को लेकर झूठ क्यों बोला और उसकी जरूरत क्या थी।  

कांग्रेस ने फिर की मांग, NEET परीक्षा घोटाले की हो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच

Will Arvind Kejriwal get relief? Hearing on bail plea continues in court

नई दिल्ली मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित ‘राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक’ (NEET-UG) 2024 में कथित धांधली की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है। गुरुवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने फिर से अपनी मांग दोहराई है और कहा है कि 24 जून से आरंभ हो रहे संसद के सत्र के दौरान इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा। गोगोई ने कहा कि कांग्रेस इस मामले में सीबीआई जांच चाहती है, लेकिन अगर सरकार इसके लिए तैयार नहीं है तो फिर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए। इससे पहले केंद्र सरकार ने गुरुवार को ही सुप्रीम कोर्ट में कहा कि नीट (स्नातक) के 1,563 अभ्यर्थियों को ग्रेस मार्क्स देने के फैसले को निरस्त कर दिया गया है और उन छात्रों को 23 जून को पुन: परीक्षा देने का विकल्प दिया जाएगा। केंद्र और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के वकीलों ने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की अवकाशकालीन पीठ को बताया कि जिन विद्यार्थियों को ग्रेस मार्क्स दिए गए थे, उन्हें पुन: परीक्षा का विकल्प दिया जाएगा। उधर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट में प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इसका कोई प्रमाण नहीं है। कांग्रेस सांसद गोगोई ने संवाददाताओं से कहा, “यह रहस्य की बात है कि नीट के नतीजे 4 जून को क्यों घोषित किए गए, जब पूरा देश चुनाव नतीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहा था।  इससे यही संकेत मिलता है कि उन्हें पता था कि कोई तूफान आने वाला है। इसलिए वे 4 जून को नीट के नतीजे घोषित करके इस पर किसी भी तरह की चर्चा से बचना चाहते थे। ” गोगोई ने कहा, “इसीलिए हम इस पूरे घोटाले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच चाहते हैं क्योंकि यह 24 लाख युवाओं की जिंदगी का मसला है और उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।” उन्होंने कहा, ‘‘नीट परीक्षा में हुई धांधली के आरोपों पर सरकार का जो रवैया रहा है, उस पर उन्हें आत्ममंथन करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में सरकार ने जताया है कि 1563 छात्रों का स्कोरकार्ड रद्द किया जाएगा और उन्हें 23 जून को दोबारा परीक्षा देने का विकल्प मिलेगा। वे बच्चे जो दोबारा परीक्षा नहीं देना चाहते, उनके गे्रस मार्क्स  हटाने के बाद जो अंक रहेंगे, वही फाइनल अंक माने जाएंगे। जो छात्र 23 जून को दोबारा परीक्षा देंगे, उनका 30 जून को परिणाम आएगा और फिर 6 जुलाई से काउंसलिंग शुरू होगी।’’ गोगोई ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस मामले पर चर्चा से भाग रहे हैं।  उन्होंने कहा, ‘‘जिस एनटीए के नेतृत्व में यह पूरा घोटाला हुआ, आप उसी एजेंसी से मामले में जांच करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है?’’ उन्होंने कहा, ‘‘परीक्षा केंद्र और कोचिंग सेंटर का एक गठजोड़ बन चुका है, जिसने आज हमारे मध्यम-गरीब वर्ग को हिला कर रख दिया है। ‘पैसे दो-पेपर लो’ जैसी सांठगांठ की जांच एनटीए कैसे कर पायेगा ? इसमें एनटीए का कोई न कोई अधिकारी शामिल है। ऐसे में एनटीए निष्पक्ष जांच कैसे करेगा ?’’ कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘कांग्रेस इस मामले में सीबीआई जांच चाहती है। यदि सरकार सीबीआई जांच के लिए तैयार नहीं है तो हम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करते हैं।’’ गोगोई ने दावा किया, ‘‘हमने अलग-अलग रिकॉर्डिंग सुनी है कि कैसे लाखों रुपये मांगे जा रहे हैं। एक ही सेंटर में बच्चों को एक जैसे नंबर मिल रहे हैं। इस मामले पर सरकार का रवैया कमजोर रहा है और वह इस मुद्दे से भाग रही है। लेकिन देश के मुद्दों को उठाना विपक्ष का कर्तव्य है और हम सदन के अंदर अपने 24 लाख छात्रों की आवाज जोर-शोर से उठाएंगे।’’ दूसरी तरफ, घोटाले के आरोपों को खारिज करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “कोई पेपर लीक नहीं हुआ है, अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है। लगभग 1,560 छात्रों के लिए कोर्ट द्वारा सुझाए गए मॉडल को अपनाया गया था और इसके लिए शिक्षाविदों का एक पैनल बनाया गया है।” बता दें कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने 5 मई को 4,750 केंद्रों पर नीट परीक्षा आयोजित की थी, जिसमें लगभग 24 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। मूल रूप से, परिणाम 14 जून को घोषित किए जाने थे, लेकिन निर्धारित समय से पहले ही 4 जून को नतीजे घोषित कर दिए गए, जिससे एनटीए पर और अधिक संदेह हो रहा है।  हालांकि, एनटीए ने स्पष्ट किया है कि उत्तर पुस्तिकाओं के तेजी से मूल्यांकन के कारण ऐसा किया गया। कुल 67 छात्रों ने 720 में 720 मार्क्स लाए हैं। एनटीए के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। हरियाणा के फरीदाबाद के एक केंद्र के छह छात्र उनमें शामिल थे, जिससे संभावित अनियमितताओं को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 

10 जुलाई को हिमाचल प्रदेश में 3 विधानसभा सीटों पर होंगे उपचुनाव, कांग्रेस ने बनाया प्रभारी

Tejashwi Yadav said on NEET issue

हमीरपुर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (HPCC) के महासचिव रजनीश खिमटा ने गुरुवार को कहा कि पार्टी राज्य में आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है और एकजुटता के साथ धनबल का मुकाबला करेगी। उन्होंने यहां जारी एक बयान में बताया कि कांग्रेस ने देहरा, नालागढ़ और हमीरपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए तीन मंत्रियों को प्रभारी नियुक्त किया है। उपचुनाव के लिए मतदान 10 जुलाई को होगा। ये सीटें तीन निर्दलीय विधायकों आशीष शर्मा (हमीरपुर), होशियार सिंह (देहरा) और केएल ठाकुर (नालागढ़) के इस्तीफे से खाली हुई हैं। तीनों विधायकों ने 22 मार्च को विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था और अगले दिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे। कृषि मंत्री चंद्र कुमार को देहरा विधानसभा सीट, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर को नालागढ़ सीट और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी को हमीरपुर विधानसभा सीट का प्रभारी नियुक्त किया गया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि 27 फरवरी को हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने धनबल का इस्तेमाल कर सरकार को गिराने का प्रयास किया था। इस चुनाव में कांग्रेस के छह बागी विधायक और तीन निर्दलीय विधायकों समेत कुल नौ विधायकों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया था। खिमटा ने कहा कि पार्टी ने हाल में हुए विधानसभा उपचुनाव में चार सीट जीती हैं, जिससे साबित होता है कि हिमाचल प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार की नीतियों, कार्यक्रमों और नेतृत्व से खुश है और मतदाताओं ने भाजपा की खरीद-फरोख्त की नीतियों को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि आगामी उपचुनाव में कांग्रेस एकजुट होकर भाजपा की अनैतिक रणनीतियों का सामना करेगी और इन तीनों सीट पर जीत दर्ज करेगी। इससे पहले भाजपा ने बुधवार को इन तीन सीट के लिए प्रभारी नियुक्त किये थे। इससे पहले हाल ही में प्रदेश की 6 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में पार्टी को 4 सीटों पर जीत मिली थी। जिसे लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि ‘विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास हुआ है कि जिन लोगों ने सरकार गिराने की साजिश की थी, उनके खिलाफ कार्रवाई तेज की जाए। जनता ने हमें 4 विधानसभा सीटें जिताईं हैं। लोकसभा में भी हमारा मत 14 प्रतिशत बढ़ा है। यह सब हमारे 15 महीने के कार्यकाल का परिणाम है।’  

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का चुनाव एक महीने से ज्यादा चला, पाकिस्तानी सांसद ने सवाल किया कि आखिर हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते

इस्लामाबाद भारत में चुनावों के बाद नई सरकार का गठन हो गया है। नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार सत्ता में आए हैं। भारत में सात चरणों में चुनाव हुए और इसमें किसी भी तरह की धांधली का आरोप नहीं लगा है, जो पाकिस्तान के लिए हैरानी वाली बात है। पाकिस्तान की संसद में भी इससे जुड़ा मुद्दा उठाया गया है। पाकिस्तान के चुनावों में लगातार धांधली के आरोप लगे हैं, जिसे लेकर एक सांसद ने भारत के चुनावों की तारीफ की। उसने पाकिस्तान की चुनावी व्यवस्था को लताड़ लगाते हुए कहा कि भारत में एक महीने का इलेक्शन हो गया। लेकिन हम सिर्फ लड़ते रहते हैं। चुनावों के रिजल्ट नहीं मानते। पाकिस्तान में विपक्षी सांसद शिबली फराज ने भारतीय चुनावों की प्रशंसा की। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में ईवीएम के जरिए एक साथ लंबे चुनाव आयोजित किए गए। उन्होंने इस बात की भी तारीफ की कि किसी भी धोखाधड़ी के आरोपों के बिना नई सरकार बनी। साथ ही सवाल किया कि आखिर पाकिस्तान ऐसा क्यों नहीं कर सकता? उन्होंने कहा कि सही से चुनाव न हो पाने के कारण हमारा पॉलिटिकल सिस्टम खोखला हो गया है। पाकिस्तान के चुनावों पर उठे सवाल पाकिस्तान में 8 फरवरी को चुनाव हुए थे। लेकिन इससे पहले ही यह साफ हो गया था कि सत्ता में किसकी सरकार आएगी। पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की लहर पूरे पाकिस्तान में थी। लेकिन इमरान खान को सेना पसंद नहीं करती। सेना चाहती थी कि नवाज शरीफ फिर सत्ता में आएं। चुनावों में इमरान खान की पार्टी को प्रत्याशी उतारने से प्रतिबंधित कर दिया गया। वहीं जब रिजल्ट आए तो इसमें धांधली के आरोप लगे। आरोप लगे कि इमरान के समर्थक निर्दलीय उम्मीदवारों को जबरन हरा दिया गया। पाकिस्तान के चुनावों में धांधली के आरोप पाकिस्तान में हुए ‘कथित चुनाव’ ने पूरे देश की भद्द पिटाई थी। अमेरिकी कांग्रेस के 31 सांसदों ने राष्ट्रपति बाइडेन और विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में चुनावों में हस्तक्षेप के आरोपों की जांच होने तक पाकिस्तान की नई सरकार को मान्यता न देने का आग्रह किया गया था। क्योंकि पाकिस्तान में चुनाव शांतिपूर्ण नहीं हुआ। 8 फरवरी के दिन मोबाइल सेवाओं को अवरुद्ध कर दिया गया था। कई इलाकों में हिंसा भी देखी गई थी। चुनावों के नतीजे जारी करने में भी देरी हुई, जिससे धांधली का शक बढ़ा है।

दिल्ली जल संकट का क्या है हल! SC ने राज्यों के बीच पानी के बंटवारे पर आदेश देने से किया इनकार

नई दिल्ली पड़ोसी राज्यों से ज्यादा पानी दिलाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची दिल्ली सरकार को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपनी तरफ से आदेश से इनकार करते हुए फैसला अपर यमुना रिवर बोर्ड  पर छोड़ दिया है। कोर्ट ने कहा कि राज्यों के बीच पानी बंटवारे का मुद्दा जटिल है। इस बीच हिमाचल प्रदेश भी अतिरिक्त पानी भेजने के अपने पहले के बयान से मुकर गया है और उसने कहा है कि उसके पास अतिरिक्त पानी नहीं है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने कहा कि यमुना में पानी का बंटवारा राज्यों के बीच एक जटिल विषय है और इस कोर्ट के पास इसकी तकनीकी विशेषज्ञता नहीं है। अदालत ने कहा कि यह मुद्दा UYRB पर छोड़ देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने UYRB को शुक्रवार को सभी पक्षों की बैठक बुलाने और जल्दी से इस मुद्दे पर फैसला लेने को कहा। सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह मानवीय आधार पर विचार के लिए शाम 5 बजे तक बोर्ड के सामने आवेदन दे। हिमाचल ने वापस लिया बयान, अब कहा- ज्यादा पानी नहीं दिल्ली के लिए अतिरिक्त 136 क्यूसेक पानी देने का वादा करने वाली हिमाचल सरकार भी अपने रुख से पलट गई है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हिमाचल प्रदेश ने अपना पुराना बयान वापस ले लिया और कहा कि उसके पास अतिरिक्त 136 क्यूसेक पानी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार की ओर से दाखिल उस याचिका पर सुनवाई चल रही थी जिसमें यह मांग की गई थी कि हरियाणा को हिमाचल की ओर से छोड़े जाने वाले अतिरिक्त पानी को दिल्ली तक निर्बाध रूप से जाने देने को कहा जाए। भीषण गर्मी के बीच दिल्ली में लोगों को भारी जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली सरकार का आरोप है कि हरियाणा की ओर से यमुना में कम पानी छोड़ा जा रहा है जिसकी वजह से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता कम हो गई है।  

पलायन के लिए मजबूर: जयपुर में हिंदू परिवारों ने क्यों लगाए ‘पलायन’ वाले पोस्टर, लगाया आरोप

जयपुर किशनपोल, ब्रह्मपुरी के बाद अब जयपुर के भट्टा बस्ती थाना क्षेत्र के शिवाजी नगर में हिंदू परिवारों ने पलायन के लिए मजबूर किए जाने का आरोप लगाया है। यहां कई घरों पर अचानक पलायन से बचाने की अपील वाले पोस्टर नजर आए तो सनसनी फैल गई। पोस्टर्स में कहा गया है कि ‘गैर-हिंदुओं’ को घर नहीं बेचें। शुरुआत में ऐसे किसी मामले की जानकारी से इनकार करती रही पुलिस अब जांच में जुट गई है। सर्व हिंदू समाज के नाम से लगाए गये सभी पोस्टर में हिंदी में लिखा है, ‘सनातनियों से अपील, पलायन को रोकें। सभी सनातन भाइयों बहनों से निवेदन है कि अपना मकान गैर-हिंदुओं को ना बेचें।’ भट्टा बस्ती थाने के प्रभारी कैलाश ने पोस्टर लगाए जाने की पुष्टि की और कहा कि लोगों ने अपने घरों पर पोस्टर चिपकाए हैं और इस बारे में अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने किसी तरह के विवाद होने से इनकार किया। थानाधिकारी ने बताया कि जब भी उपद्रव की कोई शिकायत मिलती है तो पुलिस की ओर से कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि ‘संपत्ति बेचना और खरीदना व्यक्तिगत मामला है। ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है जिसमें कोई विवाद हो।’ हालांकि, पोस्टर चिपकाने वाले स्थानीय लोग कई तरह की परेशानियों का दावा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अपनी मर्जी से उन्होंने अपने घरों पर पोस्टर चिपकाए हैं। पोस्टर लगाए जाने के बाद से शिवाजी नगर में मीडियाकर्मियों की आवाजाही बढ़ गई है। पत्रकारों के पहुंचने पर लोग खुलकर अपनी समस्याओं को रख रहे हैं। मीडिया के कैमरों को देखकर महिलाएं मुखर होकर बताने लगती हैं कि किस तरह उनके उनके मोहल्ले में छेड़छाड़ और गुंडागर्दी जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। क्या कहते हैं लोग? स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में माहौल बदल रहा है। उनका कहना है कि इलाके में कई हिंदू परिवारों ने दूसरे समुदाय के लोगों को अपने मकान बेच दिए। जिन लोगों ने इन मकानों को खरीदा है उनमें से कई उपद्रव करते हैं। एक महिला ने कहा कि गलियों में बदमाश घूमते रहते हैं और युवकों की टोली जमा हो जाती है और जब स्थानीय लोग विरोध करते हैं तो वे झगड़ा करने लगते हैं। एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया, ‘इस स्थिति के कारण, हमने अपने घरों के बाहर पोस्टर चिपकाने का फैसला किया, जिसमें लोगों से अपील की गई कि वे अपने घर गैर-हिंदू को न बेचें। प्रॉपर्टी के दलाल अक्सर हमारे पास आते हैं और पूछते हैं कि क्या हम अपना घर बेचने में रुचि रखते हैं। कई घर बाहरी लोगों को बेच दिए गए हैं और हमारे इलाके में माहौल खराब हो गया है।’ एक महिला ने मीडिया के सामने कहा, जब स्कूलों में बच्चियों की छुट्टियां होती हैं, यहां बड़ी संख्या में लड़के जुट जाते हैं। सीटी बजाते हैं। चोरी की घटनाएं बढ़ गईं हैं, सीसीटीवी कैमरे लगवाने पड़े। उनके साथ एक अन्य महिला ने कहा कि मोहल्ले में  मंदिर के पास मीट की दुकान खोल दी गई है। मोहल्ले को बकरा मंडी बना दिया गया है।  

फिल्म ‘हमारे बारह’ की रिलीज पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी

नई दिल्ली फिल्म ‘हमारे बारह’ की रिलीज पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट से यह भी कहा है कि वह इस मामले में दाखिल अर्जी पर जल्दी फैसला ले। उच्च न्यायालय में दाखिल अर्जी में कहा गया है कि यह फिल्म इस्लाम की मान्यता के खिलाफ है और विवाहिता मुस्लिम महिलाओं को भी गलत ढंग से दिखाती है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि जब फिल्म के खिलाफ हाई कोर्ट में दाखिल अर्जी पर फैसला नहीं होता है, तब तक मूवी की स्क्रीनिंग पर रोक रहेगी। फिल्म की रिलीज 14 जून को होनी थी, लेकिन अब उसे टाल दिया गया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हम हाई कोर्ट से आग्रह करते हैं कि वह इस अर्जी पर जल्दी से फैसला ले। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मूवी की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसने फिल्म पर रोक का आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं की वकील फौजिया शकील ने कहा कि उच्च न्यायालय ने इस फिल्म के सीन देखने के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को एक समिति बनाने का आदेश दिया है। समिति से कहा गया है कि वह फिल्म के विवादित सीन्स को देखे और उस पर राय दे। इस पर अदालत में फिल्म निर्माताओं के वकील ने कहा कि सभी ऐसे सीन हटा दिए गए हैं, जिन पर आपत्ति जाहिर की गई थी। इस पर अदालत ने कहा कि ऐसा नहीं हुआ है। हमने आज ही फिल्म का टीजर देखा। वे सारे सीन उसमें हैं, जिन पर आपत्ति थी। फिल्म मेकर्स के वकील ने कहा कि रिलीज पर स्टे लगाने से हमें नुकसान होगा। इस पर जज ने कहा, ‘यदि फिल्म का टीजर ही इतना आपत्तिजनक है तो फिर पूरी फिल्म में क्या होगा। पहली नजर में ऐसा लगता है कि आप विवादित सीन हटाने में फेल रहे हैं।’   बता दें कि उच्च न्यायालय में दाखिल अर्जी में कहा गया था कि यह फिल्म  विवाहित मुस्लिम महिलाओं का गलत चित्रण करती है। फिल्म कहती है कि एक इंसान के तौर पर मुस्लिम महिलाओं के अधिकार नहीं हैं और ऐसा कुरान में कहा गया है। इस फिल्म में कुरान की आयत की गलत व्याख्या की गई है। इस पर उच्च न्यायालय ने पहले फिल्ममेकर्स से कहा था कि वह 14 जून तक फिल्म रिलीज न करें। इसके बाद एक और आदेश दिया गया, जिसमें फिल्म प्रमाणन बोर्ड से कहा गया कि वह तीन सदस्यों की एक समिति बनाए। इसमें कम से कम एक मुस्लिम सदस्य जरूर होना चाहिए।  

आइसक्रीम से निकली इंसानी उंगली, अखरोट समझ कर चबा रहे थे, शक होने पर थूका तो दंग रह गए

मुंबई एक महिला ने आइसक्रीम ऑर्डर की थी, लेकिन जब उसे खोला तो उसमें इंसान की अंगुली मिली। यह देखकर महिला हैरान रह गई और इस मामले में पुलिस ने केस भी दर्ज कर लिया है। अब तक खाने की चीजों में कीड़े-मकौड़े मिलने की खबरें आ जाती थीं, लेकिन इस मामले ने सभी को हैरान कर दिया है। महिला ने Yummo Ice Creams से आइसक्रीम खरीदी थी। महिला की शिकायत पर अब मलाड पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और जांच की जा रही है। यही नहीं आइसक्रीम में मिली अंगुली को टेस्ट के लिए फॉरेंसिक लैब में भेजा जाएगा। मुंबई के मलाड की ही रहने वाली महिला का कहना है कि उसने  Yummo Ice Creams में ऑनलाइन ऑर्डर दिया था। आइसक्रीम जब आई तो उसने खोला, जिसमें इंसान की अंगुली मिली। इस मामले में पुलिस ने आइसक्रीम कंपनी के खिलाफ मिलावट करने और इंसान के जीवन को खतरे में डालने के आरोप में केस दर्ज किया है। पुलिस ने आइसक्रीम और उसमें मिली अंगुली को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है। इस मामले में साजिश की आशंका भी है, जिसके चलते पुलिस सतर्क हो गई है। आइसक्रीम ऑर्डर करने वाली महिला की पहचान ऑरलेम ब्रैंडन सेराओ के तौर पर हुई है। वह पेशे से डॉक्टर हैं और मलाड में ही रहती हैं। उन्होंने कोन आइसक्रीम ऑर्डर की थी। महिला डॉक्टर ने कहा कि मैंने जब आइसक्रीम से कवर हटाया तो एक बार यह भी लगा कि शायद नट्स हैं। लेकिन गौर से देखने पर लगा कि यह इंसान की अंगुली का एक हिस्सा है। इसके बाद मैं शिकायत की और अब मामला पुलिस के पास है। आइसक्रीम में अंगुली वाला फोटो भी उन्होंने ऑनलाइन शेयर किया, जो वायरल हो रहा है। बहन ने किया था ऑर्डर पुलिस ने इस मामले में बताया कि जिस व्यक्ति को आइसक्रीम के अंदर से कटी हुई उंगली मिली वह व्यक्ति पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर है। सेराओ की बहन जब घर के लिए किराने का सामान ऑर्डर कर रही थी तो इसी दौरान उन्होंने अपनी बहन से एक आइसक्रीम भी ऑर्डर करने के लिए कहा था। फिलहाल मुंबई के मलाड पुलिस स्टेशन में मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस करेगी जांच पुलिस ने आगे कहा कि यह आइसक्रीम जहां मैन्युफैक्चर की गई उन स्थानों की भी पुलिस जांच करेगी ताकि इस बात की पुष्टि हो सके कि वह उंगली किसकी थी। साथ ही पुलिस ने इस मामले में एफआईआर राजिस्टर करते हुऐ उंगली को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है, जिसकी रिपोर्ट आनी अभी बाकी है।

हरियाणा में कांग्रेस क्रॉस वोटिंग का डर, हुड्डा की सीट भाजपा के खाते में जा सकती है

Great news! The 17th installment of Samman Nidhi will come on June 18

रोहतक कांग्रेस नेता दीपेंदर हुड्डा हरियाणा की रोहतक लोकसभा सीट से चुनाव जीत गए हैं। अब उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा देना होगा, जिस पर दोबारा चुनाव होगा। इस तरह कांग्रेस को लोकसभा की एक सीट मिल गई है, लेकिन राज्यसभा में एक सीट छिनने का भी खतरा है। इसकी वजह यह है कि हरियाणा विधानसभा के ज्यादातर सदस्य भाजपा के पक्ष में हैं। इसके अलावा क्रॉस वोटिंग भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में हुड्डा की यह सीट भाजपा के खाते में जा सकती है। दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के विधायक और कुछ निर्दलीय क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। ऐसा हुआ तो फिर कांग्रेस के लिए जीत संभव नहीं होगी। दीपेंदर हुड्डा 2020 में राज्यसभा पहुंचे थे और उनका कार्यकाल 2026 तक के लिए था। मौजूदा स्थिति में भाजपा मजबूत दिखती है। उसके अपने विधायकों के अलावा जेजेपी का एक गुट, कुछ निर्दलीय और एक विधायक वाली पार्टियां उसके पक्ष में हैं। नियम के अनुसार यदि कोई राज्यसभा का सांसद लोकसभा के लिए चुना जाता है तो फिर उसे अपनी सीट छोड़नी होती है। ऐसे में रोहतक से जीत के बाद दीपेंदर हुड्डा की राज्यसभा सीट खाली हो गई है। अब चुनाव आयोग को राज्यसभा सीट पर उपचुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी करना होगा। नियम के मुताबिक 6 महीने के भीतर ही चुनाव हो जाना चाहिए। माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस सीट पर इलेक्शन हो सकता है। कांग्रेस एक विधायक वरुण चौधरी अब अंबाला लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं। इस तरह विधानसभा की संख्या 87 ही रह गई है। यहां बहुमत का आंकड़ा 44 ही है। वहीं जेजेपी के कुल 10 विधायक हैं, लेकिन खेमेबाजी है। दो विधायकों ने खुलकर भाजपा का साथ दिया है। उसके एक विधायक देवेंदर सिंह बबली तो कांग्रेस का लोकसभा चुनाव में समर्थन कर चुके हैं। इसके अलावा एक अन्य विधायक रामकुमार गौतम भी जेजेपी लीडरशिप से नाराज हैं। राज्य में कांग्रेस के 29 विधायक हैं और उसे तीन का समर्थन हासिल है। इस तरह विपक्ष की संख्या राज्य में 32 है। जेजेपी के कुछ और विधायक कर सकते हैं क्रॉस वोटिंग वहीं भाजपा के 41 विधायक हैं और गोपाल कांडा एवं नयनपाल रावत का उसे समर्थन हासिल है। इनोलो के इकलौते विधायक अभय चौटाला और निर्दलीय बलराज कुंडू अब तक भाजपा के खिलाफ ही रहे हैं। लेकिन जेजेपी के कुछ और विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। बता दें कि राज्यसभा में विधायक किसी भी कैंडिडेट को वोट कर सकते हैं और उन पर कोई दल ऐक्शन भी नहीं ले सकता। ऐसे ही एक मामले में फैसला सुनाते हुए 22 अगस्त, 2006 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विधायक यदि राज्यसभा में दूसरे दल के नेता को वोट करता है तो उसकी मेंबरशिप खारिज नहीं हो सकती।  

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