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Hyundai अगले कुछ दिन में सेबी के पास जमा कर सकती है ड्राफ्ट, IPO लाने की तैयारी पूरी

नई दिल्ली  आईपीओ मार्केट में निवेश करने वालों के लिए अच्छी खबर है। दक्षिण कोरिया की ऑटो कंपनी हुंडई मोटर की भारतीय यूनिट आईपीओ लाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक कंपंनी अगले दो सप्ताह में मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर सकती है। इसके साथ ही आईपीओ लाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यदि यह आईपीओ सफल रहा तो यह भारत में किसी ऑटो कंपनी का दो दशक से अधिक समय में पहला आईपीओ होगा। इससे पहले देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी साल 2003 में आईपीओ लाई थी। एक निवेश बैंकर ने बताया कि डीआरएचपी दाखिल करने के बाद हुंडई मोटर इंडिया का मैनेजमेंट अगले महीने से भारत और विदेशों में इन्वेस्टर्स रोड शो शुरू कर सकता है। डीआरएचपी दाखिल करने के बाद 60-90 दिनों के भीतर इसे सेबी से मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इस तरह हुंडई मोटर इंडिया का आईपीओ संभवतः सितंबर या अक्टूबर में बाजार में आ सकता है। कंपनी ने इस आईपीओ को मैनेज करने के लिए इन्वेस्टमेंट बैंकर सिटीबैंक, मोर्गन स्टेनली, कोटक महिंद्रा, एचएसबीसी और जेपी मोर्गन को हायर किया है। हालांकि हुंडई मोटर इंडिया ने इस बारे में ईटी के सवालों का जवाब नहीं दिया। इस आईपीओ के जरिए हुंडई की कोशिश भारतीय शेयर बाजार में तेजी का लाभ उठाने की है। पिछले दशक में भारतीय बाजार ने 14% का सालाना रिटर्न दिया है। यह वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले पांच बाजारों में शामिल है। ऑटो सेक्टर को फायदा ईटी ने फरवरी में बताया था कि हुंडई अपनी भारतीय यूनिट के लिए 22-28 अरब डॉलर के मूल्यांकन का लक्ष्य बना रही है और आईपीओ के माध्यम से 15-20% हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है। यह पूरी तरह से कोरियाई मूल कंपनी द्वारा बिक्री पेशकश होगी। एक टॉप घरेलू फंड के सीनियर फंड मैनेजर ने कहा कि यदि हुंडई यह वैल्यूएशन प्राप्त करने में सफल हो जाती है, तो इससे भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर की पुनः रेटिंग हो सकती है। इससे विशेष रूप से मारुति सुजुकी को लाभ होगा। साथ ही घरेलू ऑटो बाजार को भी फायदा होगा। एक घरेलू ब्रोकरेज फर्म के एनालिस्ट ने कहा कि भारत में बहुत ज्यादा लिस्टेड कंपनियां नहीं हैं। ऐसे में घरेलू स्तर पर लिस्टेड कंपनियों में हुंडई की निकटतम प्रतिद्वंद्वी मारुति सुजुकी ही है। हुंडई की वैल्यूएशन मारुति की तुलना में काफी अधिक होने की संभावना है। एनालिस्ट ने कहा कि पिछले कुछ साल में भारतीय बाजार में एसयूवी की मांग बढ़ी है और हुंडई ने इस मौके का फायदा उठाया है। मारुति की तुलना में हुंडई नए मॉडल, लेटेस्ट टेक्नीक और ज्यादा फीचर पेश करने के मामले में बहुत ज्यादा सक्रिय रही है। इससे कंपनी बेहतर वैल्यूएशन और अपनी प्रीमियम स्थिति को मजबूत करने की स्थिति में है। हुंडई के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर तरुण गर्ग ने इस महीने की शुरुआत में मीडिया के साथ मंथली सेल बिक्री कॉल में कहा कि मई में हुंडई की कुल बिक्री में एसयूवी की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 67% रही। कंपनी की एसयूवी रेंज में Exter, Venue, Creta, Alcazar, Tucson और Ioniq 5 शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ के बोहरडीह में 7 छोटे तालाबों को जोड़ने के लिए एसीसी और अदाणी फाउंडेशन ने 1.32 लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी खोदी

बोहरडीह गांव में वर्षा जल संचयन और बारहमासी जल आपूर्ति को बढ़ाने के लिए एसीसी चिल्हाटी साइट पर अदाणी फाउंडेशन ने 7 तालाबों को जोड़ा छत्तीसगढ़ के बोहरडीह में 7 छोटे तालाबों को जोड़ने के लिए एसीसी और अदाणी फाउंडेशन ने 1.32 लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी खोदी वर्षा जल संचयन के लिए विकसित किए गए 33,000 वर्ग मीटर के 20 तालाबों के बांधों से 1,200 ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों के लिए पानी मिलेगा। गांव के 60 किसानों की 70 एकड़ कृषि भूमि को वर्षा जल संचयन से सीधे लाभ मिलेगा सात जल निकायों को जोड़ने के लिए 14 इनलेट और आउटलेट बनाए गए। रायपुर  विविध कारोबार वाले अदाणी पोर्टफोलियो की सीमेंट और निर्माण सामग्री कंपनी एसीसी लिमिटेड, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और अपने परिचालन वाले ग्रामीण समुदायों के लिए जल पहुंच बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। एसीसी ने अदाणी फाउंडेशन के साथ मिलकर हाल ही में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एसीसी चिल्हाटी स्थल के पास बोहारडीह गांव के निवासियों के लिए वर्षा जल संचयन बढ़ाने के लिए मौसमी तालाबों को जोड़ने और तालाब की मेड़ जोड़ने के लिए ‘सप्त सरोवर’ परियोजना पूरी की है। मस्तूरी तहसील के बोहारडीह गांव में सात ऐसे उथले तालाब थे, जिनके किनारे क्षतिग्रस्त हो जाते थे और मानसून के दौरान ओवरफ्लो हो जाते थे। इसके कारण, शुष्क महीनों के दौरान, तालाब अपनी पूरी क्षमता के साथ पानी को संग्रहीत करने में सक्षम नहीं होते थे, जिससे इस ग्रामीण समुदाय के दैनिक जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ता था। साथ ही, मवेशियों के सामने भी जल संकट उत्पन्न होता था और फसलों के लिए भी पानी की कमी हो जाती थी। इस गंभीर मुद्दे की पहचान करते हुए एसीसी की सीएसआर टीमों ने न केवल तालाबों की जल धारण क्षमता बढ़ाने के लिए, बल्कि ग्रामीणों के लिए पानी की बारहमासी आपूर्ति प्रदान करने के लिए एक समेकित समाधान पर निर्णय लिया। इस मिशन के साथ, इन सात तालाबों को गहरा करने के लिए 1.32 लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी खोदी गई। इन बांधों का कुल क्षेत्रफल 33,000 वर्ग मीटर है। इस परियोजना के जरिये लगभग 1,200 ग्रामीणों को दैनिक उपयोग के लिए बारहमासी जल पहुंच का प्रावधान हो सकेगा। साथ ही इस क्षेत्र के जल आपूर्ति परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण रूप से बदलाव लाने में कामयाबी मिलेगी। इस तरह यहां 60 किसानों की 70 एकड़ कृषि भूमि भी इस स्थायी जल समाधान से लाभान्वित होगी। इसके अलावा, अब संबंधित पंचायतों को सौंपे गए बांधों के जरिये सब्जी की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा और इसके लिए महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के माध्यम से स्थायी आजीविका को संभव बनाने की पूरी तैयारी भी की गई है। एसीसी और अदाणी फाउंडेशन ग्रामीण समुदायों के सहयोग से ठोस प्रयासों के माध्यम से स्थायी आजीविका, जल संरक्षण और कुशल जल उपयोग का समर्थन करने पर विशेष ध्यान देने के साथ ऐसी सफलता की कहानियों को सक्षम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

नोएडा में छह हजार बायर्स को 12 साल बाद मिली खुशखबरी

नोएडा  यूनिटेक बिल्डर के 10 हाउसिंग प्रॉजेक्ट के बायर्स के लिए करीब 12 साल बाद अच्छी खबर है। नोएडा अथॉरिटी ने इन प्रॉजेक्ट के नक्शे पास कर दिए हैं। अब इन प्रॉजेक्ट में निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। अथॉरिटी ने यह नक्शे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पास किए हैं। पिछले 4-5 साल से नोएडा अथॉरिटी यह कहते हुए नक्शा पास नहीं कर रही थी कि अथॉरिटी का बकाया पैसा अभी नहीं मिला है। ऐसे में नक्शा पास नहीं किया जा सकता। यूनिटेक के प्रॉजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की तरफ बोर्ड तो नियुक्त हो चुका था, लेकिन नक्शा पास न होने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था। ऐसे में करीब 12 साल पहले बुकिंग कराने वाले बायर्स अब तक इंतजार कर रहे थे। नोएडा अथॉरिटी ने वर्ष 2006-07 में नोएडा प्राधिकरण ने यूनिटेक को जमीन आवंटित करनी शुरू की थी। सेक्टर-96, 97, 98, 113 और 117 में अलग-अलग परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटित की। जमीन आवंटन होने के कुछ साल बाद बिल्डर ने अथॉरिटी को जमीन की कीमत देनी बंद कर दी। इससे बिल्डर पर बकाया बढ़ता गया। इस बीच यूनिटेक के चेयरमैन सहित अन्य लोग जेल चले गए। फिर सरकार की तरफ से फ्लैट बायर्स की समस्याओं को देखते हुए सरकार की तरफ से यूनिटेक के प्रॉजेक्ट को बोर्ड नियुक्त किया गया था। वहीं अथॉरिटी और बिल्डर ग्रुप को प्रकरण कोर्ट में पहुंच गया था। अब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने पर नोएडा अथॉरिटी ने नक्शा पास कर दिया है। फ्लैट और प्लॉट की स्कीम अथॉरिटी अधिकारियों ने बताया कि सेक्टर-96, 97, 98 में 2 ग्रुप हाउसिंग के अलावा विलोज 1 और 2 के नाम से प्लॉट स्कीम भी है। इन सेक्टर में मुख्य रूप से अंबर, बरगंडी आदि हैं। इनमें 897 फ्लैट और प्लॉट बुकिंग की जा चुकी थी। सेक्टर-113 में 1 ग्रुप हाउसिंग प्रॉजेक्ट हैं इनमें 1621 फ्लैट की बुकिंग बिल्डर की तरफ से की जा चुकी थी। सेक्टर-117 में 6 ग्रुप हाउसिंग प्रॉजेक्ट हैं जिनमें 3327 फ्लैट बनने हैं। अथॉरिटी अधिकारियों ने बताया कि यह वो प्रॉजेक्ट हैं जिनमें कुछ हिस्सा बन भी चुका है। 9 हजार करोड़ रुपये का है बकाया नोएडा अथॉरिटी से मिली जानकारी के मुताबिक, यूनिटेक बिल्डर ग्रुप पर अथॉरिटी का कारीब 9 हजार करोड़ रुपये बकाया है। पहले मूल राशि कम ही थी लेकिन फिर समय पर बकाया जमा न होने पर ब्यात बढ़ता चला गया। अथॉरिटी ने तीन जगहों पर इस ग्रुप को 156 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन 2006-2007 में इस ग्रुप को आवंटित की थी। इसमें करीब 90 हेक्टेयर जमीन अभी शहर में अलग-अलग जगहों पर खाली पड़ी हुई है। अथॉरिटी ने बीच में यह तैयारी की थी कि खाली पड़ी जमीन का आवंटन निरस्त कर उसे वापस ले लिया जाए। कोर्ट में भी यह पक्ष रखा गया था। लेकिन अथॉरिटी के मुताबिक फैसला नहीं रहा। सूत्रों की माने तो कोर्ट ने इन 10 प्रॉजेक्ट में फंसे बायर्स की समस्या को देखते हुए अथॉरिटी से कहा है कि पहले नक्शा पास किए जाएं। बकाए को लेकर कोर्ट बाद में निर्णय लेगा।

देश में आजादी के बाद पहली बार, मुस्लिम मंत्री के बिना भारत सरकार; पर 5 अल्पसंख्यक मंत्रियों को प्रभार

नई दिल्ली नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद के तौर पर लगातार तीसरी बार शपथ लेकर एक रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने इसके साथ ही देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू की बराबरी कर ली है। यही नहीं उनकी इस तीसरी सरकार में एक और तथ्य की खूब चर्चा हो रही है। वह यह कि ऐसा पहली बार हुआ है, जब केंद्र सरकार में किसी मुस्लिम नेता को मंत्री नहीं बनाया गया। आमतौर पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी किसी मुस्लिम नेता को ही मिलती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी इस बार किरेन रिजिजू को मिली है, जो बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। यह भी एक तरह का रिकॉर्ड ही है कि देश में पहली बार किसी बौद्ध नेता को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है। यही नहीं उनके साथ एक राज्यमंत्री के तौर पर केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन जिम्मेदारी संभालेंगे। वह खुद ईसाई धर्म से ताल्लुक रखते हैं। जॉर्ज कुरियन तो किसी सदन के सदस्य भी नहीं हैं। पहले भाजपा की सरकारों में भी किसी मुस्लिम नेता को ही अल्पसंख्यक मंत्रालय मिलता था, लेकिन यह सिलसिला 2022 में तब खत्म हुआ, जब मुख्तार अब्बास नकवी से इस्तीफा ले लिया गया। उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया था, जिसके चलते उन्हें मंत्री पद भी छोड़ना पड़ा। उसके बाद यह विभाग स्मृति इरानी को दे दिया गया था। स्मृति इरानी मूल रूप से हिंदू हैं, लेकिन उनकी शादी पारसी से हुई है। वहीं उनके साथ काम करने वाले राज्य मंत्री जॉन बार्ला ईसाई समुदाय के थे। यही नहीं इन दिनों राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य भी इकबाल सिंह लालपुरिया हैं, जो एक सिख हैं। उनकी नियुक्ति के साथ भारत सरकार ने इस परंपरा को भी तोड़ा था, जिसके तहत किसी मुसलमान को ही अल्पसंख्यक आयोग की जिम्मेदारी दी जाती थी। बता दें कि एनडीए के ज्यादातर दलों से कोई मुस्लिम नेता चुनकर सदन में नहीं पहुंचा है। इस बार पूरे देश से कुल 28 मुस्लिम सांसद लोकसभा पहुंचे हैं। कुल 5 अल्पसंख्यक नेता बने हैं मोदी सरकार में मंत्री हालांकि एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि मोदी मंत्री परिषद में कुल 5 नेता अल्पसंख्यक समुदाय के हैं। इन नेताओं में हरदीप सिंह पुरी और रवनीत सिंह बिट्टू हैं, जो सिख समुदाय से आते हैं। इसके अलावा रामदास आठवले और किरेन रिजिजू बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। वहीं केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन ईसाई समुदाय के हैं। बता दें कि इन मंत्रियों में से रवनीत सिंह बिट्टू किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। वह लोकसभी चुनाव में हार गए थे। वहीं जॉर्ज कुरियन ने चुनाव ही नहीं लड़ा था। माना जा रहा है कि पार्टी अब उन्हें राज्यसभा के रास्ते संसद भेजेगी। वह केरल में भाजपा के महासचिव भी हैं।

DK शिवकुमार बोले- लोकसभा रिजल्ट के अनुसार कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी

बेंगलुरु लोकसभा चुनाव में कर्नाटक कांग्रेस को जितनी अपेक्षा थी उससे खराब प्रदर्शन रहा। पार्टी ने 20 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था लेकिन महज 9 सीटों से ही कांग्रेस को संतोष करना पड़ा। कर्नाटक विधानसभा में प्रचंड जीत का कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में कोई फायदा नहीं मिला। अब सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर पांच गारंटियों के पुनर्मूल्यांकन की मांग करने वाली आवाजें तेज हो गई हैं क्योंकि कांग्रेस इन कार्यक्रमों पर सालाना 52,000 करोड़ रुपये खर्च करने का वादा करने के बाद भी लोकसभा चुनावों में दूसरे स्थान पर रही। गारंटी के वादे के साथ पार्टी पिछले साल विधानसभा चुनावों में सत्ता में आई थी, जिसके तहत एक के बाद एक कार्यक्रम शुरू किए गए। योजनाओं में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, महीने में 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली की आपूर्ति और परिवार की प्रत्येक महिला मुखिया को हर महीने 2000 रुपये देने का वादा शामिल है। पार्टी ने कर्नाटक में शुरू किए गए मॉडल को अन्य राज्य विधानसभा चुनावों के साथ-साथ हाल के लोकसभा चुनावों में भी दोहराया। लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस विधायक एचसी बालकृष्ण (मगदी) ने सबसे पहले ‘मुफ्त की रेवड़ियों’ को लेकर विचार का सुझाव दिया था। हमारे नेताओं को अपने गांव में ही वोट नहीं मिले कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के नतीजों पर शिवकुमार ने कहा, “हमें 14-15 सीटें जीतने का भरोसा था, लेकिन हम इन आंकड़ों को हासिल करने में विफल रहे। हमें लोगों के फैसले को स्वीकार करना होगा। पार्टी के नेताओं को अपने ही गांव-कस्बों से वोट नहीं मिले, यह चिंता की बात है।” हार के लिए कौन जिम्मेदार हार के लिए विधायकों को जिम्मेदार ठहराने वाले कुछ मंत्रियों की टिप्पणियों पर शिवकुमार ने कहा, “किसी ने भी मुझसे इसकी शिकायत नहीं की है। आरोप-प्रत्यारोप का कोई मतलब नहीं है। जो नेता निर्वाचन क्षेत्रों के प्रभारी हैं, उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करनी चाहिए, कारणों की जांच करनी चाहिए।” उन्होंने विधायक बसवराज शिवगंगा के एक बयान का जिक्र करते हुए सलाह दी कि विधायकों को अनावश्यक रूप से सार्वजनिक रूप से बयान जारी नहीं करना चाहिए। उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर समस्या पर चर्चा करनी चाहिए। 20 का था लक्ष्य, मिलीं 9 सीटें एचसी बालकृष्ण ने कहा था कि अगर पार्टी चुनाव में खराब प्रदर्शन करती है तो पार्टी शासन को गारंटी योजनाओं को वापस लेने पर विचार करना चाहिए। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष डीके शिवकुमार को राज्य की 28 सीटों में से 15 से 20 सीटें जीतने का भरोसा था, लेकिन पार्टी को 9 सीटें ही मिलीं। एम लक्ष्मण ने भी की समीक्षा की मांग मुख्यमंत्री के गृह जिले मैसूर से कांग्रेस के टिकट एम लक्ष्मण चुनाव हार गए थे। उन्होंने भी योजनाओं की समीक्षा की मांग की है। उनका तर्क है कि लोकसभा चुनावों में लोगों के जनादेश से पता चलता है कि वे योजनाओं को जारी रखने के खिलाफ हैं। कांग्रेस के बागलकोट जिले के जेटी पाटिल (बिलगी) ने भी समीक्षा की मांग की है। कांग्रेस विधायकों के एक वर्ग का मानना है कि गारंटी योजनाएं अन्य विकास कार्यक्रमों की कीमत पर आई हैं और इनसे वोट भी नहीं मिले हैं।

प्रधानमंत्री बनने के बाद 18 जून को काशी आएंगे पीएम मोदी, किसान सम्मेलन को करेंगे संबोधित

 वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जून को वाराणसी आएंगे। इस दिन वो किसान सम्मेलन को संबोधित करेंगे। भाजपा काशी क्षेत्र के अध्यक्ष दिलीप पटेल ने कहा कि केंद्र में तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी का यह पहला वाराणसी दौरा होगा। काशी क्षेत्र के भाजपा मीडिया प्रभारी नवरतन राठी ने कहा कि अभी तय नहीं है कि ये कार्यक्रम वाराणसी में कहां आयोजित होगा। किसान सम्मेलन के लिए भाजपा जगह की तलाश कर रही है। कार्यक्रम रोहनिया या सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र में आयोजित किया जा सकता है। प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर तैयारियों पर चर्चा के लिए गुलाब बाग स्थित पार्टी कार्यालय में वाराणसी भाजपा पदाधिकारियों की एक बैठक हुई। पटेल ने कहा कि किसान सम्मेलन को संबोधित करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी बाबा काशी विश्वनाथ की पूजा-अर्चना करेंगे और दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ही किसान सम्मान निधि की राशि जारी की है। राष्ट्रपति भवन में रविवार शाम पद एवं गोपनीयता की शपथ लेने वाले पीएम मोदी ने सोमवार सुबह करीब 9.3 करोड़ पात्र किसानों के लिए 20 हजार करोड़ रुपये की राशि जारी करने से संबंधित फाइल पर हस्ताक्षर किये। किसान सम्मान निधि के तहत हर किसान को साल में तीन बार दो-दो हजार रुपये की किस्त दी जाती है। केंद्र सरकार ने योजना की 16वीं किस्त चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले 28 फरवरी को जारी की थी।

भारतीयों की सुरक्षा सबसे पहले, पाकिस्तान को भारत की शर्त पर ही मिलेगा दोस्ती का हाथ

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ ने पीएम मोदी को तीसरी बार शपथ लेने पर बधाई तो भारतीय प्रधानमंत्री ने पाकिस्तानी नेता को साफ कर दिया कि भारत के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा सबसे पहले है। वैसे तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी पीएम मोदी को बधाई संदेश भेजा था, लेकिन उनके बड़े भाई नवाज शरीफ के संदेश में गर्माहट ज्यादा थी। पीएमएल-एन मुखिया नवाज शरीफ ने एक्स पर लिखा, ‘तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर मोदी जी को मेरी हार्दिक बधाई। हाल के चुनावों में आपकी पार्टी की सफलता आपके नेतृत्व में लोगों के विश्वास को दिखाती है।’ इसके साथ ही उन्होंने भारत से दोस्ती की पहल भी की। शरीफ ने आगे लिखा, ‘आइए हम नफरत की जगह उम्मीद को लाएं और इस अवसर का लाभ उठाते हुए दक्षिण एशिया के दो अरब लोगों का भविष्य संवारें।’ पीएम मोदी ने नवाज शरीफ के संदेश की तारीफ की तो भारत का रुख भी साफ कर दिया। पीएम मोदी ने लिखा, ‘भारत के लोग हमेशा शांति और सुरक्षा तथा प्रगतिशील विचारों के पक्षधर रहे हैं। हमारे लोगों की भलाई और सुरक्षा को आगे बढ़ाना हमेशा हमारी प्राथमिकता होना चाहिए।’ पीएम मोदी ने दिया साफ संदेश पीएम मोदी का संदेश साफ बताता है कि मोदी 3.0 में भी भारत का रुख यही रहने वाला है कि पाकिस्तान को अगर भारत से दोस्ती करनी है तो उसे पहले आतंकवाद और आतंकवादियों को पालना बंद करना होगा। भारत ने पहले भी कहा है कि पाकिस्तान से बात तब ही हो सकती है जब यह भरोसा दिलाए कि वह भारत के खिलाफ अपने जहरीले मंसूबों को रोकना चाहता है। विश्लेषकों का मानना है कि मोदी ने अपने संदेश ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमा पार से आतंकवाद को समाप्त करने की शर्त को लेकर प्रतिबद्धता जाहिर की है। नवाज शरीफ ने मानी थी पाकिस्तान की गलती नवाज शरीफ भारत के साथ दोस्ताना संबंधों के पक्षधर रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारत के साथ दोस्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। नवाज शरीफ के दूसरे कार्यकाल के दौरान ही भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बस से लाहौर गए थे, जहां दोनों पक्षों ने लंबित मुद्दों को बातचीत से हल करने पर सहमति जताई थी लेकिन इसके कुछ महीनों बाद ही पाकिस्तान ने धोखा देते हुए कारगिल में घुसपैठ की जिसने पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतार दिया।

‘शांति के पथ से लड़खड़ा रहा मणिपुर ‘, मोहन भागवत बोले

 नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को संघर्षग्रस्त पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की स्थिति पर चिंता जताई। मणिपुर पिछले साल तीन मई से बड़े पैमाने पर अशांति से प्रभावित है। मोहन भागवत ने नागपुर में आरएसएस प्रशिक्षुओं (ट्रेनी) के एक समूह को संबोधित करते हुए कहा, “मणिपुर एक साल से शांति का इंतजार कर रहा है। हिंसा को रोकना होगा और इसे प्राथमिकता देनी होगी।” मणिपुर हिंसा पर मोहन भागवत की टिप्पणी लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के छह दिन बाद आई है। उन्होंने देश में हाल के चुनावों के दौरान गलत बयानबाजी के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग पर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की। मोहन भागवत ने विपक्ष का नाम लिए बगैर संविधान में बदलाव और पिछड़ी जाति के समुदायों के लिए आरक्षण खत्म करने के विपक्ष के आरोपों का जिक्र किया। उन्होंने आगे कहा, “हमने कई क्षेत्रों में प्रगति की है जैसे- अर्थव्यवस्था, रक्षा, खेल, संस्कृति, प्रौद्योगिकी आदि। इसका मतलब यह नहीं है कि हमने सभी चुनौतियों पर काबू पा लिया है। चुनावी अभियान के दौरान ‘शालीनता और मर्यादा’ का अभाव था, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।” उन्होंने उम्मीद जताई की कि संसद में सौहार्दपूर्ण माहौल रहेगा। कम्पटीशन की संभावना है, लेकिन इसे युद्ध में नहीं बदलना चाहिए। आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि चुनाव आम सहमति बनाने की एक प्रक्रिया है। मोहन भागवत ने कहा कि संसद के दो पक्ष हैं, इसलिए किसी भी सवाल के दोनों पहलुओं पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने बीते दस सालों में सरकार की भूमिका की भी सराहना की। साथ ही कहा कि भारत ने आर्थिक मोर्चे, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता हासिल की है। भारत ने हर चुनौती को स्वीकार किया है और कठिनाइयों पर विजय प्राप्त की है। अब चुनाव खत्म हो चुके हैं, इसलिए ध्यान देश के सामने मौजूदा चुनौतियों की तरफ होना चाहिए और उन पर विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। आरएसएस प्रमुख ने देश के लोगों से पारिवारिक मूल्यों को बनाए रखने का आह्वान किया।

सिंगापुर के पीएम ने दी बधाई ‘PM मोदी उल्लेखनीय परिवर्तनों के नेतृत्वकर्ता हैं’

संयुक्त राष्ट्र,  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरे कार्यकाल की शुरुआत पर बधाई दी और वह उनके साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, “भारत की जनता और सरकार को इस बड़े पैमाने पर चुनाव आयोजित करने के लिए बधाई, जो दुनिया में कहीं और नहीं देखा गया है। देश भर में लगभग 1.1 करोड़ मतदान कर्मचारियों द्वारा संचालित लगभग 10 लाख पोलिंग स्टेशनों पर करीब 64.2 करोड़ नागरिकों ने वोट डाला था। सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वॉन्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत में उल्लेखनीय परिवर्तनों का नेतृत्वकर्ता बनाया है। सिंगापुर के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी एक पत्र में पीएम वॉन्ग लिखते हैं, मुझे पूरा भरोसा है कि पीएम मोदी आपके नेतृत्व में भारत तेजी से समृद्ध और विकसित होगा। उन्होंने भारत-सिंगापुर के बहुआयामी एवं मधुर संबंधों का जिक्र करते हुए लिखा, अगले वर्ष हमारे राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ है। हम इस मौके पर साझेदारी को बढ़ाने डिजिटलीकरण, कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवा जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देंगे। वॉन्ग पिछले महीने ही सिंगापुर के प्रधानमंत्री बने हैं। उन्हें ली सीन लूंग से सत्ता मिली है, जिन्हें नरेंद्र मोदी के करीबी मित्रों में एक माना जाता है। और मजबूत होगी भारत-द. अफ्रीका के बीच साझेदारी : रामाफोसा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी को ऐतिहासिक तीसरे कार्यकाल के लिए बधाई। मोदी भारत के लोगों के प्रति उनके समर्पण के लिए भी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने भारत की जनता को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए भी बधाई दी। साथ ही कहा, भारत-दक्षिण अफ्रीका एक रणनीतिक साझेदार हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में इस साझेदारी के और मजबूत होने की उम्मीद है। भारत से हुए समझौतों की समीक्षा कर रही मालदीव की संसद मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु जब भारत में पीएम मोदी के शपथ समारोह में शामिल हो रहे थे, उसी दौरान मालदीव की संसद ने 2018 से 2023 के बीच दोनों देशों में हुए चार समझौतों की जांच शुरू कर दी। इनमें 2018-2023 के बीच हाइड्रोग्राफी संधि, उत्तरी थिलाफाल्हू में सैन्य डॉकयार्ड संधि, डोर्नियर विमान व हेलिकॉप्टर संधि की जांच शुरू की है।   सियासी, आर्थिक स्थिरता का संदेश है मोदी-3.0 कार्यकाल : यूएसआईबीसी भारत-अमेरिकी व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) ने कहा है कि नरेंद्र मोदी का लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक कार्यकाल भू-रणनीतिक अनिश्चितता के बीच राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता का एक मजबूत संदेश दे रहा है। परिषद के अध्यक्ष अतुल केशप ने कहा, मोदी का यह कार्यकाल इसलिए भी अहम है क्योंकि विश्व स्तर पर कट्टरपंथ के बीच भारतीय वोटरों ने विकास का समर्थन किया है। यह समर्थन भारत को समृद्धि और तकनीकी नवाचार के आधार के साथ अमेरिका का अहम भागीदार भी बना रहा है।

रिकॉर्ड : साउथ अफ्रीका चौथी बार T20 वर्ल्ड कप में 5 या इससे कम रनों के अंतर से मुकाबला जीतने में सफल हुई

न्यूयॉर्क साउथ अफ्रीका की टीम ने न्यूयॉर्क के नसाउ काउंटी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप 2024 के एक ग्रुप स्टेज के मैच में बांग्लादेश को हरा दिया। हार-जीत का अंतर इतना कम था कि साउथ अफ्रीका ने अपने एक विश्व रिकॉर्ड को और भी ज्यादा मजबूत कर लिया। साउथ अफ्रीका ने महज 4 रन के अंतर से बांग्लादेश को हराया। यहां तक कि ये मैच लो स्कोरिंग था, क्योंकि साउथ अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए महज 113 रन बनाए थे और बांग्लादेश की टीम 20 ओवर खेलकर 109 रन ही बना पाई थी। आखिरी ओवर काफी रोमांचक रहा था। वहीं, साउथ अफ्रीका ने इस जीत के साथ अपना विश्व रिकॉर्ड भी मजबूत किया। साउथ अफ्रीका की टीम ने सबसे कम रनों के अंतर से एक या दो बार नहीं, बल्कि चार बार टी20 वर्ल्ड कप का मैच जीता है। पांच या इससे कम रनों के अंतर से कोई अन्य टीम टी20 विश्व कप में 2 से ज्यादा मुकाबले नहीं जीती है, लेकिन साउथ अफ्रीका ने चौथी बार चार या इससे कम रनों के अंतर से मैच जीता है और नया कीर्तिमान स्थापित किया है। हालांकि, तीन बार टीम ने 2014 तक ही 5 रन से कम के अंतर से मुकाबले जीत लिए थे और 10 साल बाद ऐसा हुआ है।    साउथ अफ्रीका की टीम ने 2009 के टी20 विश्व कप में लॉर्ड्स में न्यूजीलैंड को एक रन से हराया था। इसके बाद बांग्लादेश के चटग्राम में 2 रन से 2014 में न्यूजीलैंड को ही मात दी थी। वहीं, इंग्लैंड के खिलाफ उसी साल के टी20 विश्व कप में साउथ अफ्रीका ने 3 रन से जीत दर्ज की थी। अब 10 साल बाद 2024 में बांग्लादेश के खिलाफ साउथ अफ्रीका ने ऐसा किया है। ये साउथ अफ्रीका की बांग्लादेश के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 9वीं जीत है। साउथ अफ्रीका ने इस मामले में पाकिस्तान की बराबरी कर ली है, लेकिन टीम न्यूजीलैंड से पीछे है।  

मलावी के उपराष्ट्रपति को ले जा रहा विमान लापता, तलाश जारी

 लिलोंग्वे,  मलावी के उप-राष्ट्रपति साउलोस चिलिमा और नौ अन्य लोगों को ले जा रहा विमान लापता हो गया है। राष्ट्रपति कार्यालय के एक बयान में ये जानकारी दी गयी है। बीबीसी ने बताया कि मलावी रक्षा बल का विमान सोमवार सुबह राजधानी लिलोंग्वे से रवाना होने के बाद “रडार से गायब हो गया”। विमान से संपर्क न होने के बाद राष्ट्रपति ने खोज और बचाव अभियान का आदेश दिया। बीबीसी ने बताया कि विमान को स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजे के बाद देश के उत्तर में स्थित मज़ूज़ू अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरना था। उपराष्ट्रपति के मौत की आशंका विमान से संपर्क न हो पाने की स्थिति में राष्ट्रपति ने खोज एवं बचाव अभियान का आदेश दिया. टीम विमान को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी तक उसका सटीक लोकेशन नहीं पता चल सका है. इस हादसे के बाद मलावी के राष्ट्रपति लाजरस चकवेरा ने अपनी बहामास यात्रा को रद्द कर दी है. अफ्रीकन जर्नलिस्ट होपवेल ने बताया कि उनको सरकार के सूत्रों से पता चला है कि अब कम ही उम्मीद है कि उपराष्ट्रपति जीवित बचे हों. साथ ही इस बात की पुष्टि हुई हैं कि विमान में उनकी पत्नी मैरी सवार नहीं थी. एक विदेश यात्रा के बाद वह वापस लौटे थे और थकान में थे. घटना की जानकारी के बाद मलावी के राष्ट्रपति लाज़रस चकवेरा ने बहामास की अपनी यात्रा रद्द कर दी। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा, “पूरी स्तिथि साफ़ होने के बाद ही घटनाक्रम के बारे में जनता को जानकारी दी जाएगी।” बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार विमान के लापता होने का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। मलावी के सूचना मंत्री मूसा कुंकुयू ने बीबीसी को बताया कि विमान को खोजने के प्रयास जारी हैं। कुंकुयू ने कहा: “जिस हवाई अड्डे पर उन्हें उतरना था वो मज़ुज़ू के उत्तरी भाग में है।” बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, चिलिमा को 2022 में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर सरकारी अनुबंध देने के बदले में पैसे लेने का आरोप था। हालांकि पिछले महीने अदालत ने सबूत के अभाव में आरोपों को खारिज कर दिया।

महिला टीचर ने ‘हिजाब’ विवाद में अपने पद से दे दिया इस्तीफा, वजह जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे

कोलकाता कोलकाता में एक प्राइवेट लॉ कॉलेज में हिजाब पहने जाने से रोकने पर एक महिला टीचर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और क्लास लेना भी बंद कर दिया. यह कॉलेज कलकत्ता यूनिवर्सिटी से संबद्ध है. न्यूज एजेंसी के मुताबिक जैसे ही यह मामला सामने आया कॉलेज में हंगामा मच गया. इसके बाद कॉलेज अधिकारियों ने दावा किया मिस कम्यूनिकेशन की वजह से ऐसा हुआ था. कॉलेज की तरफ से कहा गया है कि अपना इस्तीफा वापस लेने के बाद महिला टीचर 11 जून से वापस क्लास लेने लगेंगी. बता दें कि पिछले तीन सालों से एलजेडी लॉ कॉलेज में शिक्षिका रहीं संजीदा कादर ने हिजाब पहनने से रोके जाने पर 5 जून को इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा था कि कॉलेज अधिकारियों ने उन्हें 31 मई के बाद कॉलेज में हिजाब न पहनने का निर्देश दिया था. उन्होंने कहा, ‘कॉलेज गवर्निंग बॉडी के आदेश से मेरे मूल्यों और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है.’ संजीदा कादर मार्च-अप्रैल से कार्यस्थल पर हेडस्कार्फ़ पहन रही थीं और पिछले सप्ताह उनके हिजाब पहनने की वजह से यह विवाद हुआ था. हालांकि, उनके इस्तीफे के सार्वजनिक होने के बाद, कॉलेज के अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया और जोर देकर कहा कि यह केवल मिस कम्यूनिकेशन था, उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें काम के घंटों के दौरान अपने सिर को कपड़े से ढकने से कभी मना नहीं किया गया था. इस पर संजीदा कादर ने कहा, ‘मुझे सोमवार को कॉलेज ऑफिस से एक ईमेल मिला, मैं अपने अगले कदम के बारे में सोचूंगी और फिर फैसला करूंगी, लेकिन मैं मंगलवार को कॉलेज नहीं जा रही हूं.’ वहीं उन्होंने कॉलेज की तरफ से मिले ईमेल को लेकर कहा, सभी संकाय सदस्यों के लिए ड्रेस कोड के अनुसार, समय-समय पर उसकी समीक्षा और मूल्यांकन किया जाता है, वो (महिला शिक्षक) क्लास लेते समय अपना सिर ढकने के लिए दुपट्टे या स्कार्फ का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र थीं. कॉलेज गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष गोपाल दास ने बताया, ‘कोई निर्देश या निषेध नहीं था, और कॉलेज के अधिकारी प्रत्येक हितधारक की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं. वह मंगलवार से क्लास फिर से शुरू करेंगी. कोई गलतफहमी नहीं है.  

केंद्रीय करों में बिहार को मिली 14 हजार 56 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी

नईदिल्ली केंद्र में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व सरकार बनी है और सोमवार को कैबिनेट गठन हुआ और सभी को उनके मंत्रिमंडल बांट दिए गए. फाइनेंस मिनिस्ट्री की जिम्मेदारी एक बार फिर निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) को दी गई है. विभागों के बंटवारे के तुरंत बाद वित्त मंत्रालय ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्यों को 1,39,750 करोड़ रुपये का टैक्स डिवोल्यूशन (Tax Devolution) जारी करने को हरी झंडी दिखाई. इसके तहत सबसे ज्यादा पैसा उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) को दिया गया है. बिहार को भी मिली मोटी रकम जहां केंद्र सरकार की तरफ से किए गए इस आवंटन में सबसे ऊपर योगी आदित्यनाथ की सरकार वाले उत्तर प्रदेश को किया गया है, केंद्र की ओर से UP को 25,069.88 करोड़ रुपये दिए हैं. तो वहीं गठबंधन के मजबूत सहयोगी नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला बिहार दूसरे नंबर पर है. वित्त मंत्रालय ने Bihar के लिए 14,056.12 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं. इस लिस्ट में सबसे ज्यादा पैसा पाने वाला तीसरा राज्य मध्यप्रदेश (MP) है और इसके लिए 10,970.44 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं. राज्यों की ग्रोथ में किया जाएगा खर्च गौरतलब है कि अंतरिम बजट 2024-25 में राज्यों को कर हस्तांतरण के लिए 12,19,783 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन जारी करते हुए वित्त मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि जून 2024 के लिए डिवोल्यूशन राशि की नियमित रिलीज के अलावा एक अतिरिक्त इंस्टॉलमेंट जारी होगी. इसे राज्य सरकारें विकास और पूंजीगत खर्च में तेजी लाने के लिए इस्तेमाल कर सकेंगी. इस हिसाब से देखें तो अतिरिक्त इंस्टॉलमेंट के साथ सोमवार 10 जून को राज्यों को हस्तांतरित कुल राशि (वित्त वर्ष 2024-25 के लिए) 2,79,500 करोड़ रुपये है. इन राज्यों को भी मिला खूब पैसा अन्य राज्यों को मिले पैसों की बात करें, तो वित्त मंत्रालय की ओर से पश्चिम बंगाल को 10513.46 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 8828.08 करोड़ रुपये, राजस्थान को 8421.38 करोड़ रुपये, ओडिशा को 6327.92 करोड़ रुपये, तमिलनाडु को 5700.44 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश को 5655.72 करोड़ रुपये और गुजरात को 4860.56 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. देश के 28 राज्यों को जारी की गई इस राशि में शामिल झारखंड को 4621.58 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 5096.72 करोड़ रुपये, पंजाब को 2525.32 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश को 1159.92 करोडड रुपये, केरल को 2690.20 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं. इसके अलावा मणिपुर और मेघालय को क्रमश: 1000.60 और 1071.90 करोड़ रुपये मिले हैं.  

जेनसोल इंजीनियरिंग के निदेशक मंडल₨ ने कुलजीत सिंह पोपली को कंपनी का स्वतंत्र निदेशक किया नियुक्त

नई दिल्ली कर्ज में डूबी जयप्रकाश एसोसिएट्स के निलंबित निदेशक मंडल ने एनसीएलटी के पिछले सप्ताह के आदेश को अपीलीय न्यायाधिकरण एनसीएलएटी में चुनौती दी है। एनसीएलटी ने कंपनी के खिलाफ दिवाला कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया था। यह याचिका राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण(एनसीएलएटी) की अवकाश पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई, जिसने एनसीएलटी के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। एनसीएलएटी की इलाहाबाद पीठ ने तीन जून को आईसीआईसीआई बैंक द्वारा दायर की गई दिवालियापन याचिका को स्वीकार कर लिया। उसने कंपनी के निदेशक मंडल को निलंबित करने के बाद भुवन मदान को जेएएल का अंतरिम समाधान पेशेवर भी नियुक्त किया। सितंबर 2018 में आईसीआईसीआई बैंक ने आईबीसी की धारा 7 के तहत जेएएल के खिलाफ दिवालियापन याचिका दायर की थी। एनसीएलटी ने जेएएल की इस दलील को खारिज कर दिया कि उसे नकदी की कमी का सामना करना पड़ा और वह कर्ज चुकाने में चूक गई, जिसका मुख्य कारण सरकारी मंजूरी में देरी, यमुना एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित लंबी मुकदमेबाजी और सरकारी नीतियों में बदलाव है।   जेनसोल इंजीनियरिंग के निदेशक मंडल₨ ने कुलजीत सिंह पोपली को कंपनी का स्वतंत्र निदेशक किया नियुक्त जेनसोल इंजीनियरिंग के निदेशक मंडल ने कुलजीत सिंह पोपली को कंपनी के स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। जेनसोल इंजीनियरिंग ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि पांच साल की अवधि के लिए स्वतंत्र निदेशक (गैर-कार्यकारी) के रूप में उनकी नियुक्ति कंपनी की आगामी आम बैठक में शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन है। पोपली को ऊर्जा क्षेत्र में 40 से अधिक वर्षों का पेशेवर अनुभव है। वे क्लाइम फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक निदेशक हैं। इसके अलावा,निदेशक मंडल ने अली इमरान नकवी को पांच साल की अवधि के लिए कंपनी के अतिरिक्त निदेशक (कार्यकारी) के रूप में नियुक्त करने को भी मंजूरी दे दी है। उनकी नियुक्ति भी कंपनी की आगामी आम बैठक में शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन है। नकवी के पास 14 साल से अधिक का पेशेवर अनुभव है। वह जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड, सोलर ईपीसी इंडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।   कल्पतरु प्रोजेक्ट्स इंटरनेशनल के बोर्ड ने एनसीडी के जरिए 300 करोड़ रुपये जुटाने को मंजूरी दी  कल्पतरु प्रोजेक्ट्स इंटरनेशनल के निदेशक मंडल ने निजी निर्गम के आधार पर गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र (एनसीडी) जारी करके 300 करोड़ रुपये जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बीएसई को दी गई सूचना के अनुसार, 1,00,000 रुपये अंकित मूल्य वाले कुल 30,000 एनसीडी जारी करने का प्रस्ताव है, जिनका कुल मूल्य 300 करोड़ रुपये होगा। सूचना के अनुसार, निदेशक मंडल की कार्यकारी समिति ने आयोजित अपनी बैठक में निजी निर्गम के आधार पर 300 करोड़ रुपये के असुरक्षित, रेटेड, सूचीबद्ध, प्रतिदेय, गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र जारी करने को मंजूरी दे दी है। एनसीडी को बीएसई लिमिटेड के थोक ऋण बाजार खंड में सूचीबद्ध किया जाएगा। आवंटन की अनुमानित तिथि 13 जून 2024 है, जबकि इसका अंतिम प्रतिदान (100 प्रतिशत) 11 जून 2027 तक किया जाएगा।  

पाकिस्तान आज कनाडा के खिलाफ मुकाबले में बड़ी जीत दर्ज करना चाहेगी

न्यूयॉर्क अमेरिका से उलटफेर का शिकार होने के बाद भारत के हाथों हार से आहत पाकिस्तानी टीम मंगलवार को यहां टी20 विश्व कप में ग्रुप चरण के मैच में कनाडा के खिलाफ मुकाबले में बड़ी जीत दर्ज करना चाहेगी क्योंकि उसके पास खेलने के लिए ज्यादा कुछ नहीं बचा है लेकिन गंवाने के लिए सबकुछ है। ग्रुप ए के शुरूआती मैच में सह मेजबान अमेरिका से सुपर ओवर में पराजित होने के बाद पाकिस्तान को रविवार को चिर प्रतिद्वंद्वी भारत से कम स्कोर वाले मुकाबले में छह रन की हार झेलनी पड़ी। पाकिस्तान का अब सुपर आठ में क्वालीफाई करने का मौका कनाडा और आयरलैंड के खिलाफ बड़ी जीत पर निर्भर करेगा, लेकिन इसके लिए उसे उम्मीद करनी होगी कि अमेरिकी टीम भारत और आयरलैंड के खिलाफ मुकाबलों में बुरी तरह हार जाये। इस हालत में दोनों टीमों के चार चार अंक होंगे और फैसला बेहतर नेट रन रेट से होगा। पाकिस्तान की टीम इस तरह आंकड़े अपने पक्ष में रहने की बस दुआ ही कर सकती है। अमेरिका का नेट रन रेट दो जीत के बाद +0.626 है और आयरलैंड के खिलाफ जीत उसके लिए काफी होगी। वहीं पाकिस्तान का नेट रन रेट -0.150 है जो निराशाजनक है जिससे उसे जीत नहीं बल्कि बड़े अंतर से जीत की दरकार होगी। अभी तक दोनों मैच में 2009 की चैम्पियन उस तरह की मजबूत नहीं दिखी है जिसके लिए वह कभी मशहूर हुआ करती थी। बाबर आजम की कप्तानी पर भी कोई स्पष्टता नहीं दिखती। टीम में दो गुट हैं जिसमें एक कप्तान की अगुआई में उनके करीबी मित्र मोहम्मद रिजवान और शादाब खान का है जबकि दूसरे में हाल में कप्तानी से हटाये गये शाहीन शाह अफरीदी शामिल हैं। अभी तक दोनों मैच में पाकिस्तान के लिए खेल के किसी भी विभाग में दम नहीं दिखाया और अगर उन्हें थोड़ी उम्मीद बरकरार रखनी है तो मिलकर एकजुट प्रयास करने होंगे। बाबर और शादाब खान की बदौलत पाकिस्तान ने अमेरिका के खिलाफ सात विकेट पर 159 रन का स्कोर बनाया लेकिन इस लक्ष्य का बचाव नहीं कर पाया और सुपर ओवर में हार गया। वहीं भारत के खिलाफ 120 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए कोई भी पाकिस्तानी बल्लेबाज उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका और 59 डॉट गेंद खेलकर सात विकेट पर महज 113 रन ही बना सका। आगे आने वाले मुकाबलों में पाकिस्तान की सबसे बड़ी चिंता उसके बल्लेबाजों का प्रदर्शन है जिसमें फखर जमां, इमाद वसीम, शादाब खान और इफ्तिखार अहमद ने भारत के खिलाफ ढीला शॉट खेलकर अपनी परेशानी बढ़ायी। इस मैच में मोहम्मद रिजवान ने 44 गेंद खेकर 31 रन बनाये जबकि वसीम ने 15 रन बनाने के लिए 23 गेंद खेलीं। रविवार को पाकिस्तान के लिए अच्छी चीज उसके गेंदबाजों का प्रदर्शन रहा जिसमें नसीम शाह ने 21 रन देकर तीन जबकि मोहम्मद आमिर ने 23 रन देकर दो विकेट झटके। लेकिन बचे हुए दो मैचों में उसके मुख्य तेज गेंदबाज शाहीन को और अधिक जिम्मेदारी से गेंदबाजी करनी होगी। वहीं कनाडा ग्रुप ए में दो मैच में एक जीत से तीसरे स्थान पर काबिज है। अमेरिका से सात विकेट की हार के बाद कनाडा ने शानदार वापसी करते हुए अगले मैच में आयरलैंड को 12 रन से मात दी। नवनीत धालीवाल के रूप में कनाडा के पास शीर्ष क्रम का अनुभवी बल्लेबाज मौजूद है। कनाडा ने अमेरिका के खिलाफ 194 रन का स्कोर खड़ा किया था, हालांकि उसे हार मिली थी लेकिन अपने बल्लेबाजों के प्रदर्शन से सकारात्मक होकर खेल सकती है। टीम: कनाडा: साद बिन जफर (कप्तान), आरोन जॉनसन, रविंदरपाल सिंह, नवनीत धालीवाल, कलीम सना, डिलोन हेलिगर, जेरेमी गोर्डन, निखिल दत्ता, परगट सिंह, निकोलस किरटन, रेयानखान पठान, जुनैद सिद्दीकी, दिलप्रीत बाजवा, श्रेयस मोव्वा और ऋषिव जोशी। पाकिस्तान: बाबर आजम (कप्तान), अबरार अहमद, आजम खान, फखर जमां, हारिस राऊफ, इफ्तिखार अहमद, इमाद वसीम, मोहम्मद अब्बास अफरीदी, मोहम्मद आमिर, मोहम्मद रिजवान, नसीम शाह, सैम अयूब, शादाब खान, शाहीन शाह अफरीदी, उस्मान खान। मैच भारतीय समयानुसार रात आठ बजे शुरू होगा।  

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