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तेल खरीद पर ट्रंप के आरोपों पर रूस ने किया पर्दा फ़ाश, भारत में असमंजस

मॉस्को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद भारत-रूस संबंधों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ट्रंप ने भारत पर लगे टैरिफ को घटाते हुए सोमवार को कहा था कि भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है, लेकिन रूस ने इस दावे पर साफ शब्दों में कहा है कि भारत की ओर से उसे ऐसा कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को कहा कि मॉस्को भारत के साथ अपने रणनीतिक साझेदारी वाले रिश्तों को बेहद अहम मानता है और उन्हें आगे भी मज़बूत करना चाहता है।   ट्रंप का बड़ा ऐलान ट्रंप ने एक दिन पहले घोषणा की थी कि अमेरिका और भारत के बीच एक नया व्यापार समझौता हुआ है। इसके तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात पर लगने वाला टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया जाएगा। इसी के साथ ट्रंप ने दावा किया था कि इसके बदले भारत रूस से तेल खरीद बंद करेगा और अमेरिका से ज़्यादा तेल खरीदेगा। ट्रंप ने यह भी कहा था कि भारत के रूसी तेल खरीदने से यूक्रेन युद्ध में रूस को अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिल रही है। रूस की दो टूक इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए क्रेमलिन के प्रवक्ता पेसकोव ने कहा, “रूस भारत के साथ संबंधों पर ट्रंप की टिप्पणियों का ध्यान से विश्लेषण कर रहा है।” जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने का फैसला किया है, तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया, “अब तक तो हमने भारत की ओर से रूस से तेल खरीद रोकने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं सुना है।” उन्होंने कहा कि नई दिल्ली भारत-रूस साझेदारी को भी उतनी ही अहमियत देता है। पेसकोव ने कहा, “हम द्विपक्षीय अमेरिकी-भारतीय संबंधों का सम्मान करते हैं लेकिन हम रूस और भारत के बीच एक उन्नत रणनीतिक साझेदारी के विकास को भी उतना ही महत्व देते हैं। भारत के साथ हमारे रिश्ते हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और हम उन्हें आगे भी विकसित करना चाहते हैं।” तेल और कूटनीति यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद 2022 से भारत रियायती रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों ने इस पर नाराज़गी जताई है और रूस की ऊर्जा आय को सीमित करने के लिए कई प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि भारत का रुख हमेशा यही रहा है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है। बहरहाल, तस्वीर अभी साफ नहीं है क्योंकि एक तरफ ट्रंप का बड़ा दावा है, तो दूसरी तरफ रूस का इनकार। भारत की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में यह साफ है कि तेल, व्यापार और कूटनीति का यह खेल अभी जारी रहेगा।

ट्रंप से टैरिफ डील फाइनल, PM मोदी ने कहा– आत्मविश्वास से लिख रहा भारत नई आर्थिक कहानी

नई दिल्ली भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच वार्ता के बाद टैरिफ डील पर बड़ा फैसला हुआ है। अमेरिका ने अब भारत पर लगने वाले टैरिफ को सीधे 50 फीसदी से घटाकर 18 पर्सेंट कर दिया है। इसे भारत और अमेरिका के रिश्तों में सुधार की नई पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा भारत के एक्सपोर्ट बाजार के लिहाज से भी यह अहम है। इस फैसले को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार रात को ही एक ट्वीट किया था और डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद दिया था। अब उन्होंने एक और पोस्ट की है, जिसमें आत्मविश्वास के जरिए विकसित भारत के रास्ते में आगे बढ़ने की बात कही है।   पीएम नरेंद्र मोदी ने इस पोस्ट में टैरिफ डील का जिक्र नहीं किया, लेकिन उनकी बात को उससे ही जोड़कर देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने लिखा, ‘आत्मविश्वास वह बल है जिससे सब कुछ संभव है और विकसित भारत के सपने को साकार करने में यही शक्ति काम आएगी।’ मोदी ने यह टिप्पणी अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनने के कुछ घंटों बाद की है। इस समझौते के तहत वाशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर जवाबी शुल्क को मौजूदा 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘आत्मविश्वास वह शक्ति है जिसके बल पर सब कुछ संभव है। विकसित भारत के सपने को साकार करने में देशवासियों की यही शक्ति बहुत काम आने वाली है।’ मोदी ने संस्कृत का यह श्लोक भी साझा किया- ”श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति प्रागल्भ्यात् सम्प्रवर्धते। दाक्ष्यात् तु कुरुते मूलं संयमात् प्रतितिष्ठत।’ उन्होंने इस श्लोक का अर्थ समझाते हुए लिखा, ‘शुभ कार्यों से धन अर्जित होता है। यह साहस और आत्मविश्वास से बढ़ता है, कुशलता एवं दक्षता से स्थिर रहता है और संयम द्वारा सुरक्षित होकर राष्ट्र की प्रगति में सहायक बनता है।’ ट्रंप के दावों पर अब भी सस्पेंस, भारत सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार बता दें कि भारत पर अमेरिका ने मोटे टैरिफ लादे थे। इसके बाद कई बार ऐसा हुआ कि दोनों देशों के बीच टैरिफ खत्म करने को लेकर बात कई बार बात हुई, लेकिन सिरे नहीं चढ़ सकी। अब इस डील के बाद माना जा रहा है कि अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में सुधार हो सकता है। अब नई डील के साथ ही भारत पर अमेरिकी टैरिफ काफी कम हो गया और यह पाकिस्तान, चीन समेत अपने तमाम पड़ोसी देशों के मुकाबले कम है। हालांकि अब भी इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत ने अमेरिकी उत्पादों की भारतीय बाजार में एंट्री और रूस से तेल खरीद रोकने पर सहमति जताई है या नहीं।

बिना शर्त सरेंडर! हम जानते हैं कहां छिपा हैं खामेनेई …अमेरिका ने रवाना किए 30 फाइटर जेट

वाशिंगटन ईरान और इजरायल जंग के बीच भीषण जंग चल रही है. इजरायल की राजधानी तेल अवीव पर ईरान ने हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमला कर कहर बरपा दिया है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बुधवार को कहा कि इजरायल पर नवीनतम हमले के दौरान हाइपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था. दोनों देशों के बीच लड़ाई छठे दिन में प्रवेश कर गई है. इधर इजरायल की वायु सेना ने भी कहा है कि उन्होंने तेहरान में फिर से कई क्षेत्रों को निशाना बनाया है.  इजरायली हमले में अबतक ईरान के 585 लोगों की मौत हो चुकी है और 1326 लोग घायल हो चुके हैं. जबकि ईरान के हमले में अबतक 24 इजरायलियों की मौत हो चुकी है. दोनों कट्टर दुश्मनों के बीच एक दूसरे पर हमले की ताजा फेज तब शुरू हुई जब इस युद्ध को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बयान आ रहे हैं. ट्रंप ने ईरान से बिना शर्त सरेंडर करने को है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ट्रूथ सोशल पर बड़े-बड़े बोल्ड अक्षरों में लिखा- UNCONDITIONAL SURRENDER. ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के लिए तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि हमें ठीक ठीक पता है कि तथाकथित सुप्रीम लीडर कहा छिपा हुआ है. वह एक आसान टारगेट है लेकिन अभी वह सेफ है. हम उसे अभी नहीं मारने जा रहे हैं, कम से कम अभी तो नहीं मार रहे हैं. लेकिन हम नहीं चाहते हैं कि मिसाइलों से नागरिकों पर हमला किया जाए और अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया जाए. हमारा धैर्य जवाब दे रहा है. इस बीच बीबीसी की ओर से वेरिफाई किए गए उड़ान ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि पिछले तीन दिनों में कम से कम 30 अमेरिकी सैन्य विमानों को अमेरिका के ठिकानों से यूरोप भेजा गया है. ये सभी अमेरिकी सैन्य टैंकर विमान हैं जिनका इस्तेमाल लड़ाकू विमानों और बमवर्षकों को ईंधन भरने के लिए किया जाता है. लेकिन ट्रंप की धमकियों से बेपरवाह ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने एक्स पर ही अमेरिका और इजरायल को करारा जवाब दिया है और टॉप जनरलों और वैज्ञानिकों की मौत के बावजूद जंग में टिके रहने की मंशा जताई है.  अली खामेनेई ने एक्स पर लिखा है कि ने अपने पहले ट्वीट में लिखा है, The battle begins. यानी कि युद्ध अब शुरू हुआ है. खामेनेई ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “हमें आतंकवादी ज़ायोनी शासन को कड़ा जवाब देना चाहिए. हम यहूदियों पर कोई रहम नहीं दिखाएंगे. अली खामेनेई एक तरफ ट्वीट कर रहे थे दूसरी ओर ईरानी सेना इजरायल पर हमले के लिए मिसाइलों की लॉन्चिंग कर रही थी.  ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने सरकारी टेलीविजन पर एक बयान जारी कर दावा किया है कि ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस -3 की 11वीं लहर में एक विध्वसंक हमले को अंजाम दिया गया है और फतह-1 हाइपरसोनिक मिसाइलों से इजरायल पर हमला किया गया है. रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि ईरानी सेना ने इजरायल द्वारा कब्जे वाले क्षेत्रों के आसमान पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है. तेल अवीव पर ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट करते हुए इजरायली मिसाइल डिफेंस सिस्टम (AP) हाइपरसोनिक मिसाइलें ऐसी मिसाइलें हैं जो ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक (मैक 5 या उससे ज्यादा) की गति से उड़ती हैं. ये अत्यधिक तेज, सटीक और चालाकी से लक्ष्य को भेदने में सक्षम होती हैं, जिससे इन्हें रडार और रक्षा प्रणालियों द्वारा पकड़ना मुश्किल होता है. ईरान ने इजरायल के दूसरे ठिकानों पर भी हमला किया है. इजरायल ने कहा है कि एक घंटे से भी कम समय में ईरान से इजरायल की ओर कम से कम 30 मिसाइलें दागी गईं, जिनमें तेल अवीव समेत कई इलाके शामिल थे. इजरायल फायर एंड रेस्क्यू सर्विसेज के अनुसार मिसाइलों के हमले की वजह से तटीय, दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में खुले इलाकों में कई जगह आग लग गई. इससे पहले, मध्य और उत्तरी इजरायल में कई जगहों पर सायरन की आवाजें सुनी गईं.  टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार ईरान ने पहली बमबारी रात 12:40 (स्थानीय समय) बजे शुरू की. इससे पहले ही इजरायल के एक बड़े हिस्से में सायरन बजने शुरू हो गए थे. इस हमले में लगभग 15 प्रोजेक्टाइल शामिल थे. लगभग 10 रॉकेटों की अगली बौछार लगभग 40 मिनट बाद शुरू हुई और इसने मध्य इजरायली समुदायों और वेस्ट बैंक की कई बस्तियों में अलर्ट जारी कर दिया. हमलों से कई मिनट पहले इजरायली रक्षा बलों ने मिसाइल फायर की निवासियों को चेतावनी देते हुए अलर्ट जारी किया और उन्हें आश्रय लेने का निर्देश दिया. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ने मंगलवार देर रात X पर लिखा- जंग शुरू होती है। हम आतंकी यहूदी शासन को कड़ा जवाब देंगे। उन पर कोई दया नहीं दिखाएंगे। इस ऐलान के बाद ईरान ने इजराइल पर 25 मिसाइलें दागी हैं। ईरान-इजराइल के बीच पिछले 5 दिनों से हिंसक संघर्ष जारी था, अब खामेनेई की पोस्ट को जंग का अधिकारिक ऐलान माना जा रहा है। यानी अब इसे संघर्ष की बजाय जंग कहा जाएगा। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जल्द अमेरिका भी इसमें शामिल हो सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा से आने के बाद व्हाइट हाउस में नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ बैठक की। इसके बाद अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में और ज्यादा फाइटर जेट्स भेजने का फैसला किया। ईरान-इजराइल के बीच लड़ाई में अब तक 224 ईरानी मारे जा चुके हैं, जबकि 1,277 घायल हुए हैं। वहीं, इजराइल में अब तक 24 की मौत हुई है, जबकि 600 से ज्यादा घायल हैं। इजरायल का हमला जारी इस बीच इजरायल का भी तेहरान पर जवाबी हमला जारी है. आईडीएफ ने बुधवार को तेहरान के डिस्ट्रिक्ट 18 के निवासियों को क्षेत्र छोड़ने के लिए एक अलर्ट जारी किया, इजरायली सेना ने कहा है कि वह सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर क्षेत्र में कार्रवाई करने जा रहा है. इसके तुरंत बाद सेना ने घोषणा की कि इजरायली वायु सेना ने ईरान की राजधानी में हमलों की एक नई लहर शुरू की है. तेहरान में हमलों के साथ-साथ ईरानी समाचार वेबसाइटों ने राजधानी के पास खोजिर मिसाइल प्रोडक्शन सेंटर और करज शहर में विस्फोटों की सूचना दी. यहां इजरायल ने … Read more

ट्रंप की धमकी के बाद बोले ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन, ‘ऐसा हमला करेंगे कि इजरायल को होगा अफसोस’

वॉशिंगटन/ तेहरान/ तेल अवीव इजरायल के हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि ‘कुछ भी न बचे’ उससे पहले ईरान जल्द से जल्द परमाणु समझौते के लिए तैयार हो जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान पर बाद में होने वाले इजरायली हमले “और भी क्रूर” होंगे। हाल के हफ्तों में ईरान के साथ एक नए परमाणु समझौते पर बातचीत तेज हो गई है, लेकिन तेहरान का यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार पर जोर देना एक बड़ा मुद्दा साबित हुआ है। शुक्रवार को इजरायल ने ईरान के परमाणु सुविधाओं, बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्री और एयर डिफेंस सिस्टम पर भीषण हमला किया। इन हमलों में कम छह ईरानी परमाणु वैज्ञानिक मारे गए हैं। इसके बाद ईरान ने इजरायल से बदला लेने का कसम खाई है। ट्रंप बोले- नरसंहार को खत्म करने को अब भी समय शुक्रवार की सुबह ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि ईरानी नेताओं को “पता नहीं था कि क्या होने वाला है। वे सभी अब मर चुके हैं, और यह और भी बदतर हो जाएगा!” ट्रंप ने लिखा, “पहले से ही बहुत सारी मौतें और विनाश हो चुके हैं, लेकिन इस नरसंहार को समाप्त करने के लिए अभी भी समय है, अगले पहले से ही योजनाबद्ध हमले और भी क्रूर हैं।” उन्होंने कहा, “ईरान को एक समझौता करना चाहिए, इससे पहले कि कुछ भी न बचे, और जिसे कभी ईरानी साम्राज्य के रूप में जाना जाता था उसे बचाना चाहिए।” ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर क्या लिखा ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, “मैंने ईरान को सौदा करने के लिए कई मौके दिए। मैंने उन्हें सबसे कड़े शब्दों में कहा, “बस करो”, लेकिन चाहे उन्होंने कितनी भी कोशिश की हो, चाहे वे कितने भी करीब क्यों न पहुंचे हों, वे इसे पूरा नहीं कर पाए। मैंने उनसे कहा कि यह उनके द्वारा ज्ञात, प्रत्याशित या बताई गई किसी भी चीज से कहीं ज़्यादा बुरा होगा, कि संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया में कहीं भी सबसे अच्छा और सबसे घातक सैन्य उपकरण बनाता है, अब तक, और इजरायल के पास इसका बहुत ज़्यादा हिस्सा है, और आने वाले समय में और भी बहुत कुछ होगा – और वे इसका इस्तेमाल करना जानते हैं।” महायुद्ध की आहट; खामेनेई का करीबी भी इजरायली हमले में घायल इजरायल के हमले में ईरान को बड़ा नुकसान पहुंचा है। ईरान के आर्मी चीफ मोहम्मद घावेरी मारे गए हैं तो वही एलीट फोर्स कही जाने वाली इस्लामिक रिवॉलूशनरी गार्ड के लीडर हुसैन सलामी की भी मौत हो गई है। यही नहीं इस हमले में ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के करीबी सलाहकार भी जख्मी हो गए हैं। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने ही अपनी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की है। रिपोर्ट में कहा गया कि शीर्ष नेता के सलाहकार अली शमखानी भी आज के यहूदी अटैक में घायल हुए हैं। इस बीच इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के महायुद्ध में तब्दील होने की भी आशंका है। एक तरफ इजरायल के जवाब में ईरान ने 100 ड्रोन्स से जवाब देने की कोशिश की है तो वहीं इजरायल का कहना है कि अभी तो यह शुरुआत है। इस बीच मिडल ईस्ट के कई देशों ने अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया है। आशंका यह है कि कहीं यात्री विमान ना ईरान और इजरायल के हमले की चपेट में आ जाएं। ईरान और इजरायल के पड़ोसी देशों इराक, लेबनान, सीरिया और जॉर्डन ने अपने एयरस्पेस फिलहाल बंद कर लिए हैं। इसके चलते कई देशों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ईरान का एयरस्पेस बंद होने से भारत की ही तमाम उड़ानों को वापस दिल्ली या मुंबई लौटना पड़ा है। इसके अलावा विदेशों से आ रही फ्लाइट्स को डायवर्ट करके लाया जा रहा है। इजरायल ने तो अपने यहां विमानों का संचालन अगली सूचना तक रोक दिया है। ईरान ने तेहरान के अपने मुख्य हवाई अड्डे तक को बंद कर दिया है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच जंग में तेजी आ सकती है। इजरायल का कहना है कि वह अब भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले करेगा। इजरायल ने कहा कि यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि ईरान के पास परमाणु हथियार हो। यही बात डोनाल्ड ट्रंप ने भी कही है और उन्होंने इजरायल की सुरक्षा के लिए तत्पर रहने की बात कही है। इस तरह नेतन्याहू से लेकर ट्रंप तक के रुख ने महायुद्ध की आशंकाओं को बल प्रदान किया है। गौरतलब है कि इजरायल ने करीब 100 ठिकानों पर ईरान के अंदर अटैक किया है। इस हमले के बाद से ही दुनिया भर में आशंकाओं का दौर तेज है। बाजारों पर भी इस जंग का असर दिख रहा है। कच्चे तेल के दामों में इजाफा हुआ है तो वहीं एयरलाइन कंपनियों के शेयर गिरे हैं। ऐसे में अगले कुछ दिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से अहम रहने वाले हैं। ईरान को दी सीधी चेतावनी ट्रंप ने आगे कहा, “कुछ ईरानी कट्टरपंथियों ने बहादुरी से बात की, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि क्या होने वाला था। वे सभी अब मर चुके हैं, और यह और भी बदतर हो जाएगा! पहले से ही बहुत ज़्यादा मौतें और विनाश हो चुका है, लेकिन इस नरसंहार को समाप्त करने के लिए अभी भी समय है, अगले पहले से ही योजनाबद्ध हमलों के साथ और भी ज़्यादा क्रूर। ईरान को सौदा करना चाहिए, इससे पहले कि कुछ भी न बचे, और जो कभी ईरानी साम्राज्य के रूप में जाना जाता था उसे बचाएं। अब और मौत नहीं, और विनाश नहीं, बस करो, इससे पहले कि यह हो जाए बहुत देर हो चुकी है। भगवान आप सबका भला करे!” ईरान के न्यूक्लियर साइट पर इजरायल ने फिर शुरू किए हमले इजरायल ने एक बार फिर से ईरान पर हमले शुरू कर दिए है. ईरानी मीडिया के अनुसार इजरायल ने अब शिराज और तबरीज शहरों के साथ-साथ नतान्ज न्यूक्लियर साइट पर फिर से हमला शुरू कर दिया है.  हिजबुल्लाह इजरायल पर हमला नहीं करेगा इजरायल पर हमले के लिए हिजबुल्लाह ईरान का साथ नहीं देगा. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक हिजबुल्लाह के एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा … Read more

एलन मस्क राष्ट्रपति ट्रम्प के खिलाफ गई अपनी कुछ सोशल मीडिया पोस्ट पर खेद व्यक्त किया

वाशिंगटन   दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क ने बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ पिछले सप्ताह की गई अपनी कुछ सोशल मीडिया पोस्ट पर खेद व्यक्त किया और कहा कि उनकी पोस्ट ” बात बहुत आगे बढ़ गई”।एलन मस्क ने लिखा, “मुझे पिछले सप्ताह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में लिखी गई अपनी कुछ पोस्टों पर खेद है। बात बहुत आगे निकल गईं।” क्या थी विवाद की वजह?  एलॉन मस्क और ट्रंप के बीच विवाद तब गहरा गया जब मस्क ने डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) के चीफ के पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद मस्क ने ट्रंप के खर्च और टैक्स कटौती वाले विधेयक जिसे ट्रंप ‘One Big Beautiful Bill’ कह रहे हैं, उसकी कड़ी आलोचना की. इस पर ट्रंप ने मस्क को जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने एलॉन को इस बिल के बारे में बताया था, खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सब्सिडी में कटौती की बात, लेकिन एलॉन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पलटवार करते हुए कहा कि यह बिल उन्हें कभी दिखाया ही नहीं गया. इतना ही नहीं, मस्क ने X पर ट्रंप के इंपीचमेंट (महाभियोग) का समर्थन करते हुए एक पोस्ट किया था, हालांकि उसे बाद में डिलीट कर दिया. बात इतनी बढ़ गई थी कि एलॉन ने ट्रंप के जेफरी एपस्टीन से पुराने संबंधों का भी ज़िक्र किया, जिसे ट्रंप ने पुराना और झूठा मुद्दा बताया. सरकारी ठेकों और सब्सिडी खत्म करने की धमकी  Elon Musk से विवाद बढ़ा तो ट्रंप ने खुली धमकी दी कि वे मस्क की कंपनियों विशेष रूप से SpaceX के साथ सरकारी ठेकों और सब्सिडी खत्म करने पर विचार कर सकते हैं. ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है एलॉन बहुत दुखी और निराश महसूस कर रहे हैं. NBC न्यूज को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में तो ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि मुझे लगता है अब हमारा रिश्ता खत्म हो गया है.  ‘डेमोक्रेट्स को फंड न दें मस्क’  ट्रंप ने मस्क को ये भी धमकी दी कि अगर एलॉन मस्क डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को फंडिंग करते हैं, खासकर उन उम्मीदवारों को जो रिपब्लिकन पार्टी के टैक्स बिल का विरोध कर रहे हैं, तो उसके गंभीर परिणाम होंगे. हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे परिणाम क्या होंगे. मस्क को ट्रंप से दिक्कत क्या है?  डोनाल्ड ट्रंप सरकार के खर्च और टैक्स कटौती वाले बिल में इलेक्ट्रिक व्हीकल की खरीद पर मिलने वाली टैक्स छूट को खत्म करने का प्रस्ताव है. अमेरिका की पिछली बाइडेन सरकार नई EV खरीदने पर 7500 डॉलर की टैक्स छूट देती थी. ट्रंप इसे खत्म करने जा रहे हैं. इस बिल में प्रावधान है कि जो कंपनियां 2009 से 2025 के बीच दो लाख EV बेच चुकी हैं, उन्हें छूट नहीं मिलेगी. यह सीधेतौर पर एलॉन मस्क की टेस्ला के लिए झटका है.  एक दूसरी वजह ये भी है कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA में एलॉन मस्क अपने भरोसेमंद जेरेड इसाकमैन को एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में नियुक्त करवाना चाहते थे, लेकिन ट्रंप ने उनकी सिफारिश को नजरअंदाज कर दिया. मस्क का मानना था कि अगर इसाकमैन NASA में एडमिनिस्ट्रेटर बनते हैं, तो इससे उनकी कंपनी SpaceX को भी फायदा होगा.

मस्क ने अमेरिका के राष्ट्रपति पर लगाया गंभीर आरोप, एपस्टीन की फाइलों में है ट्रंप का नाम

वॉशिंगटन: अमेरिकी सरकारी दक्षता विभाग (डीओजीई) के पूर्व प्रमुख एलन मस्क ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए एलन मस्क ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम एपस्टीन फाइलों में है, इसीलिए उन्हें जारी नहीं किया जा रहा है. मस्क ने लिखा “अब समय आ गया है कि बहुत बड़ा बम गिराया जाए: डोनाल्ड ट्रम्प एपस्टीन फाइलों में हैं. यही असली कारण है कि उन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया है. आपका दिन शुभ हो, डीजेटी!” उन्होंने आगे कहा, “इस पोस्ट को भविष्य के लिए मार्क कर लें. सच्चाई सामने आ जाएगी.” वाकई बड़ा बम गिराने का समय आ गया एलॉन मस्क ने एक्स पर पोस्ट किया, “अब वाकई बड़ा बम गिराने का समय आ गया है, डोनाल्ड ट्रंप का नाम एपस्टीन फाइलों में है.और यही असली वजह है कि उन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया है. आपका दिन शुभ हो, DJT!” कौन है जेफरी एपस्टिन जिसकी चर्चा कर मस्क ने अमेरिका की राजनीति में हलचल ला दी है. अमेरिका जैसे देश में बड़ी हस्तियों का सेक्स स्कैंडल से नाम जुड़ना नई बात नहीं है. बिल क्लिंटन- मोनिसा लेवेंस्की की सनसनीखेज कहानी इसका प्रमाण है. जेफरी एपस्टिन: दौलत और सेक्स क्राइम की काली दुनिया जेफरी एपस्टिन अमेरिका का एक अरबपति फाइनेंसर था. अकूत दौलत के दम पर इस शख्स ने दुनिया के अमीरों के साथ रिश्ते बनाए. एपस्टिन के रिश्तों के इस सर्किल में डोनाल्ड ट्रंप का भी नाम शामिल है. इतनी दौलत के अलावा एपस्टिन ने सेक्स क्राइम की काली दुनिया में भी घुसपैठ की. उस पर सेक्स ट्रैफिकिंग के भी आरोप लगे. 1953 में न्यूयॉर्क में जन्मे एपस्टिन ने बिना कॉलेज डिग्री के बैंकिंग और वित्त क्षेत्र में अपनी फर्म स्थापित की. एपस्टीन पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और सेक्स तस्करी के गंभीर आरोप लगे. 2005 में एक 14 वर्षीय लड़की के शोषण की शिकायत के बाद जांच शुरू हुई, जिसमें 36 नाबालिग पीड़िताओं की पहचान हुई. 2008 में उन्हें वेश्यावृत्ति से संबंधित दो आरोपों में दोषी ठहराया गया और 13 महीने की जेल मिली. जैसा कि हमने बताया जेफरी एपस्टिन की हाई-प्रोफाइल हस्तियों जैसे बिल क्लिंटन, डोनाल्ड ट्रंप और प्रिंस एंड्रयू से दोस्ती थी. जेल में रहस्यमयी मौत 2019 में, उन्हें फिर से मानव तस्करी और यौन अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया, लेकिन सुनवाई से पहले उनकी जेल में मृत्यु हो गई, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या बताया गया, हालांकि इस पर कई साजिश सिद्धांत मौजूद हैं. अमेरिका में जेफरी एपस्टिन को यौन शोषण का आरोपी कहा जाता है. प्राइवेट आईलैंड और लोलिता एक्सप्रेस! जेफरी एपस्टिन अथाह दौलत का स्वामी था. उसने अमेरिका में प्राइवेट आईलैंड खरीद रखे थे. उसकी अपनी जेट थी. इस जेट पर अमेरिका के प्रभावशाली व्यक्ति सवार होकर उसके निजी द्वीप में पहुंचते थे और पार्टियां करते थे. एपस्टीन को यूएस वर्जिन आइलैंड्स में अपने द्वीप, लिटिल सेंट जेम्स पर मशहूर लोगों का मनोरंजन करने के लिए जाना जाता था. वह अक्सर लोगों को अपने निजी जेट से द्वीप पर ले जाता था और वहां यात्रा करने वालों का लिखित रिकॉर्ड छोड़ जाता था. अमेरिका में जेफरी एपस्टिन के इस निजी जेट विमान को पार्टी सर्किल में ‘लोलिता एक्सप्रेस’ कहा जाता था. न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार इस लोलिता एक्सप्रेस में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रम्प ने यात्राएं की है.  एक रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 1993 से 1997 के बीच निजी विमान से कम से कम 7 यात्राएं कीं. ट्रम्प उस समय एकबिजनेस टायकून और रियल एस्टेट डेवलपर थे और उन्हें एपस्टीन के सहयोगी के रूप में जाना जाता था. हालांकि ट्रंप ने इससे इनकार किया था, लेकिन एपस्टीन की साथी और गर्लफ्रेंड गिस्लेन मैक्सवेल के मुकदमे के तहत 2021 में जारी फ्लाइट लॉग से पता चला कि अमेरिकी राष्ट्रपति एपस्टीन के विमान में 7 बार सवार हुए थे. ट्रंप ने 2024 ट्रुथ सोशल पोस्ट में दावा किया, “मैं कभी एपस्टीन के विमान या उसके बेवकूफ़ द्वीप पर नहीं था.” पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिटंन की भी इस जेट पर कई बार तस्वीरें आई है. बता दें कि किसी मामले से संबंधित फाइलों में किसी व्यक्ति का नाम शामिल होने का यह मतलब नहीं है कि उन पर किसी गलत काम का आरोप लगाया गया है. उन्हें भी उतनी ही सुंदर महिलाएं पसंद हैं जितनी मुझे हालांकि ट्रंप ने 6 जुलाई, 2019 को एपस्टीन की गिरफ्तारी के बाद से ही उनसे दूरी बना ली थी, लेकिन 1980 के दशक के अंत से लेकर 2000 के दशक की शुरुआत तक दोनों अच्छे दोस्त थे. हाल ही में एक तस्वीर सामने आई थी जिसमें दोनों को मार-ए-लागो में एक पार्टी में एक-दूसरे से बात करते हुए दिखाया गया था. उन्हें विक्टोरिया सीक्रेट एंजेल्स पार्टी में भी साथ देखा गया था. ट्रंप ने अपने हमेशा की तरह ही जोरदार अंदाज में 2002 में न्यूयॉर्क पत्रिका को दिए एक साक्षात्कार में एपस्टीन की प्रशंसा की थी और उन्हें “शानदार व्यक्ति” कहा था जिन्हें वे 15 सालों से जानते हैं. तब ट्रंप ने जेफरी एपस्टिन के बारे में कहा था, “उनके साथ रहना बहुत मजेदार है. यह भी कहा जाता है कि उन्हें भी उतनी ही सुंदर महिलाएं पसंद हैं जितनी मुझे और उनमें से कई युवा हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है- जेफरी को अपना सोशल लाइफ पसंद है.” ट्रंप के साथ दोस्ती बिगड़ने के बाद मस्क ने इन्हीं मामलों का जिक्र किया है. ये मामले और कानूनी रिकॉर्ड जिन दस्तावेजों में जब्त हैं उन्हें एप्सटीन फाइल्स के नाम से जाना जाता है. इनमें से कुछ फाइलें सार्वजनिक की गई हैं, लेकिन कुछ अभी भी गोपनीय हैं, जिसके कारण कई साजिश सिद्धांत और अटकलें चल रही हैं. मस्क इन्हीं फाइलों को सार्वजनिक करने की बात कर रहे हैं. एलन मस्क का दावा कि डोनाल्ड ट्रम्प का नाम इन फाइलों में है, एक गंभीर लेकिन अपुष्ट बयान है. ट्रंप और एप्सटीन की पुरानी दोस्ती के कुछ सबूत हैं (जैसे, ट्रंप का उनके जेट में यात्रा करना), लेकिन ट्रंप के खिलाफ कोई ठोस आपराधिक सबूत सार्वजनिक नहीं हुआ है जो उन्हें एप्सटीन के अपराधों से सीधा जोड़ सके.   क्या है एपस्टीन मामला     ये सारा मामला … Read more

ट्रंप प्रशासन ने 12 देशों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया

वॉशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई घोषणा (प्रोक्लेमेशन) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत उन्होंने 12 देशों के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. इसके साथ ही 7 अन्य देशों से आने वाले लोगों पर आंशिक पाबंदियां लगाई गई हैं. ट्रंप ने ये कदम अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए उठाया है. ये जानकारी CBS न्यूज ने प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से दी. । ट्रंप ने ईरान, अफगानिस्तान समेत दुनिया के 12 देशों के नागरिकों की अमेरिका में एंट्री पर बैन लगा दिया है। उन्होंने बुधवार को इसकी घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में इससे जुड़े एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें यह कहा गया कि आतंकवादियों और अन्य खतरों से सुरक्षा के लिए यह कदम बेहद जरूरी था। ट्रंप ने जिन देशों के नागरिकों पर यह प्रतिबंध लगाया है उनमें अफगानिस्तान, म्यांमार, चाड, कांगो, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन का नाम शामिल है। ट्रंप ने कहा है कि इन देशों के अलावा सात अन्य देशों, बुरुंडी, क्यूबा, ​​लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला के लोगों के प्रवेश पर आंशिक रूप से प्रतिबंध लगाया जाएगा। 9 जून 2025 से लागू होगा आदेश जानकारी के मुताबिक ट्रंप का यह आदेश 9 जून 2025 को आधी रात से लागू हो जाएगा। आदेश में बताया गया है कि इस तारीख से पहले जारी किए गए वीजा रद्द नहीं किए जाएंगे। ट्रंप ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि इन देशों की सूची में और भी नाम जोड़े जा सकते हैं। ट्रंप ने कहा, “हम ऐसे लोगों को अपने देश में नहीं घुसने देंगे जो हमें नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।” कोलोराडो हमले का जिक्र ट्रंप ने कहा कि जिन देशों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं वे आतंकवादियों को पनाह देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह देश वीजा सुरक्षा पर सहयोग करने में और अपने देश के नागरिकों की पहचान सत्यापित करने में भी विफल रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि इन देशों के नागरिक आपराधिक इतिहास का रिकॉर्ड रखते हैं और वीजा की अवधि से अधिक समय तक अमेरिका में रहते हुए पाए गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में कोलोराडो में हुए हमले का भी जिक्र किया। पहले कार्यकाल में भी लगाए थे प्रतिबंध बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी ऐसे कदम उठा चुके हैं। उन्होंने पहले कार्यकाल में सात मुस्लिम बहुल देशों के यात्रियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। हालांकि ट्रंप के बाद राष्ट्रपति बने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2021 में इन प्रतिबंधों को हटा दिया था। बाइडेन ने इस फैसले को अमेरिकी मूल्यों पर एक धब्बा भी बताया था।

विदेशी सिनेमा पर डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ स्ट्राइक, US से बाहर बनने वाली फिल्मों पर लगाया 100% टैक्स

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक के बाद एक कड़े फैसले लेकर दुनिया को चौंका रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सख्ती दिखाते हुए कई देशों पर टैरिफ बम फोड़ा। इसके बाद अब तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने फिल्मों पर ही 100% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। यह टैरिफ उन फिल्मों पर लगेगा जो अमेरिका से बाहर बन रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह खत्म दम तोड़ रही अमेरिकी फिल्म इंडस्ट्री को फिर से जिंदा करने के लिए उठाया है। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा भी बताया और साथ ही अमेरिका में फिर से फिल्में बनाने पर जोर दिया। ‘नए टैरिफ का मकसद…’ डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “अमेरिकी फिल्म इंडस्ट्री बहुत तेजी से खत्म हो रही है. यह अन्य देशों द्वारा किया गया एक ठोस उपाय है और इसलिए, यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है. यह, बाकी सब चीजों के अलावा, संदेश और प्रोपेगैंडा है.” ट्रंप ने घरेलू फिल्म प्रोडक्शन पर लौटने की जरूरत पर जोर दिया और कहा, “हम चाहते हैं कि फिल्में फिर से अमेरिका में बनाई जाएं. नए टैरिफ का मकसद खेल के मैदान को लेवल में लाना और स्टूडियो को अमेरिकी धरती पर अपना ऑपरेशन जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है. अलकाट्राज़ जेल खोलने का प्लान… रविवार को ट्रंप ने सैन फ्रांसिस्को खाड़ी में अलकाट्राज़ जेल को फिर से खोलने की योजना का भी खुलासा किया. उन्होंने कथित तौर पर न्याय विभाग, एफबीआई और होमलैंड सिक्योरिटी के साथ कोऑर्डिनेशन में जेल ब्यूरो को ऐतिहासिक सुविधा का पुनर्निर्माण और विस्तार करने का निर्देश दिया, जिसमें 1963 में बंद होने से पहले देश के कुछ सबसे कुख्यात अपराधियों को रखा गया था. ट्रंप ने लिखा, “अलकाट्राज़ का पुनर्निर्माण करें और उसे खोलें! जब अमेरिका एक ज्यादा गंभीर राष्ट्र था, तो हम जानते थे कि सबसे खतरनाक अपराधियों को कैसे अलग-थलग किया जाए. अब इसे वापस लाने का वक्त आ गया है.” ट्रंप ने कहा कि नया अलकाट्राज़ देश के सबसे हिंसक और खतरनाक अपराधियों के लिए एक हाई-सेक्योरिटी सुविधा के रूप में काम करेगा. ट्रंप ने ऐलान करते हुए क्या कहा? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ के जरिए दी। उन्होंने लिखा, “अमेरिकी फिल्म उद्योग तेजी से खत्म हो रहा है। अन्य देश फिल्म निर्माताओं और स्टूडियो को आकर्षित करने के लिए कई तरह के प्रोत्साहन दे रहे हैं, जिससे वे अमेरिका से दूर हो रहे हैं। हॉलीवुड और अमेरिका के कई अन्य क्षेत्रों को इससे बड़ा नुकसान हो रहा है। यह अन्य देशों की एक साजिश है और इसलिए यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।” ‘अमेरिका में फिर से बनें फिल्में’ उन्होंने कहा कि इसलिए, मैं वाणिज्य विभाग और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को विदेशी फिल्मों पर 100% टैरिफ लगाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दे रहा हूं। हम चाहते हैं कि फिल्में फिर से अमेरिका में बनें। चीन ने कम कर दिया था अमेरिकी फिल्मों का कोटा यह कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब टैरिफ को लेकर पहले ही अमेरिका और चीन आमने-सामने हैं। इससे पहले अप्रैल में चीन ने डोनाल्ड ट्रंप के फैसले पर पलटवार करते हुए अपने देश में अमेरिकी फिल्मों का कोटा कम कर दिया था। इसको लेकर चीन के फिल्म प्रशासन ने जारी एक बयान में कहा था, “अमेरिकी सरकार द्वारा टैरिफ का दुरुपयोग चीन के प्रति गलत कार्रवाई है, जिससे अमेरिकी फिल्मों में घरेलू दर्शकों की रुचि कम हो सकती है। हम बाजार के नियमों का पालन करेंगे, दर्शकों की पसंद का सम्मान करेंगे और आयातित अमेरिकी फिल्मों की संख्या में थोड़ी कमी लाएंगे।”

डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान, फार्मास्यूटिकल्स पर भी जल्द लगाया जाएगा टैरिफ, जानिए किन सामानों के एक्सपोर्ट पर क्या असर होगा

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तकरीबन 180 देशों पर लगाया गया रेसिप्रोकल टैरिफ आज से लागू हो गया है. सुबह 9.31 बजते ही भारत पर लगाया गया 26 फीसदी टैरिफ लागू हो गया. भारत पर लगाए गए इस टैरिफ के बाद आज से अमेरिका में निर्यात किए जाने वाले हर भारतीय सामान पर 26 फीसदी शुल्क लगेगा. कहा जा रहा है कि इस टैरिफ का भारत पर कई स्तरों पर असर देखने को मिल सकता है. अमेरिका में भारत के सामान पर 26 फीसदी टैरिफ लगाने से यकीनन उस सामान की कीमत बढ़ेगी. इससे वहां भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा कम हो सकती है, खासकर उन देशों की तुलना में जिन पर कम टैरिफ लगाया गया है. भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न और आभूषण, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल हैं. ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ का सबसे ज्यादा असर दवाओं पर पड़ेगा. भारत से अमेरिका में सस्ती दवाएं जाती हैं. भारत से अमेरिका 12 अरब डॉलर से ज्यादा की दवाएं और फार्मा प्रोडक्ट्स लेता है. 2023-24 में भारत का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस 35.32 अरब डॉलर था. टैरिफ से यह सरप्लस कम हो सकता है. कॉमर्स मिनिस्ट्री के मुताबिक, भारत से 73.7 अरब डॉलर का निर्यात जबकि अमेरिका से 39.1 अरब डॉलर का आयात होता है. हालांकि, अमेरिकी सरकार के आंकड़े इससे अलग हैं. अमेरिका के आंकड़े बताते हैं कि भारत से 91.2 अरब डॉलर का निर्यात तो 34.3 अरब डॉलर का आयात होता है. अमेरिका के साथ कारोबार करना भारत के लिए फायदे का सौदा रहा है क्योंकि उसके इंपोर्ट कम और एक्सपोर्ट ज्यादा है. टैरिफ के कारण एक्सपोर्ट कम हो सकता है. लेकिन भारत पर टैरिफ क्यों? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की दोस्ती जगजाहिर है. दोनों एक-दूसरे को अच्छा दोस्त बताते हैं. ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ रैलियों को इसका सशक्त उदाहरण भी बताया जाता है. लेकिन ट्रंप कई मौकों पर भारत को टैरिफ किंग बता चुके हैं. ट्रंप ने कहा था कि भारत बहुत अधिक टैरिफ लगाता है यह बहुत Brutal है. ऐसे में ट्रंप ने भारत पर 26 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया है. वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) के आंकड़ों की माने तो भारत में औसत टैरिफ सबसे ज्यादा है. भारत में औसत टैरिफ 17 फीसदी तो अमेरिका में 3.3 फीसदी ही है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका से आने वाले खाने-पीने के सामान, मांस और प्रोसेस्ड फूड पर भारत में 37.66 फीसदी टैरिफ लगता है, जबकि इन्हीं सामानों पर भारत, अमेरिका में 5.29 फीसदी टैरिफ देता था. अब तक ऑटोमोबाइल पर भारत 24.14 फीसदी तो अमेरिका 1.05 फीसदी टैरिफ लगाता आया है. शराब पर भारत 124.58 फीसदी तो अमेरिका 2.49 फीसदी टैरिफ वसूलता है. सिगरेट और तंबाकू पर अमेरिका में 201.15 फीसदी तो भारत में 33 फीसदी टैरिफ लगता रहा है. ट्रंप का मानना है कि टैरिफ की मदद से अमेरिका का व्यापार घाटा कम किया जा सकता है. व्यापार घाटा उस स्थिति को कहा जाता है जब कोई देश किसी दूसरे देश से आयात ज्यादा करता है लेकिन निर्यात कम करता है. भारत और अमेरिका के बीच करीब 45 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है. वहीं, कैबिनेट की आज सुबह 11 बजे की मीटिंग में ट्रंप के टैरिफ के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है. केंद्रीय कैबिनेट आज से लागू होने जा रहे टैरिफ को लेकर भारत की रणनीति पर चर्चा कर सकती है. कहा जा रहा है कि इसे लेकर सरकार निर्यातकों के संपर्क में हैं. वाणिज्य मंत्रालय आज निर्यातकों के साथ बैठक भी कर सकता है. जल्द ही दवाओं पर भी लगाएंगे भारी भरकम शुल्क अमेरिका के राष्ट्रपति और टैरिफ किंग डोनाल्ड ट्रंप ने एक और बड़ा धमाका किया है। दुनियाभर के 180 से अधिक देशों पर 2 अप्रैल को पारस्परिक टैरिफ लगाने के बाद ट्रंप ने अब एलान किया है कि जल्द ही दवाओं के आयात पर शुल्क लगाया जाएगा। ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका जल्द ही दवा आयात पर बड़े टैरिफ की घोषणा करेगा। नेशनल रिपब्लिकन कांग्रेसनल कमेटी के एक कार्यक्रम में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि इस टैरिफ से दवा कंपनियों को अपना कारोबार अमेरिका में सेटअप करना पड़ेगा। चीन पर लगाया 104 फीसदी टैरिफ मंगलवार की आधी रात से सभी देशों से अमेरिका आने वाले सामानों पर टैरिफ की नई दर लागू हो गई है। इस बीच ट्रंप ने चीन पर 104 फीसदी टैरिफ का एलान किया है। पहले चीन पर अमेरिका ने कुल 54 फीसदी टैरिफ लगाया था। जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामानों पर 34 फीसदी टैरिफ की घोषणा की। इससे डोनाल्ड ट्रंप भड़क उठे थे। इस बीच ट्रंप ने मंगलवार को चीन पर अमेरिकी टैरिफ से बचने की खातिर अपनी मुद्रा में हेरफेर करने का आरोप लगाया है। ट्रंप ने कहा कि आपको उन्हें जवाब देना होगा। वे आज टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए अपनी मुद्रा में हेरफेर कर रहे हैं। बातचीत में जुटे 70 देश ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामानों पर 26 फीसदी टैरिफ लगाया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि 70 देशों के साथ व्यापार के मुद्दे पर बात चल रही है। हर देश के साथ एक कस्टम-मेड डील पर सहमत होने की कोशिश है। कई नेताओं से ट्रंप ने की बात डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा से बात की और इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने दक्षिण कोरिया के कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू से भी बात की। अमेरिका इस बात पर खफा है कि चीन ने बातचीत के बजाय जवाबी शुल्क लगाने का फैसला किया, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप हर समय फोन उठाने को तैयार हैं।

25 सेकंड में ही हूती विद्रोहियों के गुट को B-2 परमाणु बॉम्बर से खत्म कर दिया गया

न्यूयॉर्क अमेरिका इन दिनों हूती विद्रोहियों पर कहर बरपा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो शेयर करते हुए हूतियों को फिर से चेतावनी दे दी है। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे 25 सेकंड में ही हूती विद्रोहियों के गुट को खत्म कर दिया गया। राजनीतिक और रणनीतिक लिहाज से यह वीडियो काफी मायने रखता है। हूती विद्रोहियों ने आंकड़े जारी करते हुए बताया था कि डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल शुरू होने के बाद से ही अमेरिकी हमलों में कम से कम 67 लोग मारे गए हैं। हालांकि वास्तविक संख्या ज्यादा भी हो सकती है। डोनाल्ड ट्रंप के वीडियो में देखा जा सकता है कि हूती गोलाकार बनाकर खड़े हुए हैं। इसके बाद अचानक विस्फोट होता है। तेज चमक के बाद पूरा इलाका धुएं और धूल के गुबार में समा जाता है। इसके बाद वीडियो जूमआउट होता है और बड़ा इलाका इस धुएं की गिरफ्त में दिखाई देता है। इसमें दो गाड़ियां भी दिखाई देती हैं। अनुमान है कि इन गाड़ियों का इस्तेमाल हमले के लिए किया गया होगा। डोनाल्ड ट्रंप ने वीडियो शेयर करते हुए संदेश भी दिया। उन्होंने लिखा,ये हूती हमले की साजिश के लिए इकट्ठा हुए थे। अब हूती कोई हमला नहीं कर पाएंगे। अब वे हमारा शिप नहीं डुबो सकते। बता दें कि लाल सागर में हूती जहाजों को निशाना बनाते हैं। हमास का समर्थन करने के लिए हूती इजरायल और अमेरिका के जहाजों को ज्यादा निशाना बना रहे हैं। इसी का जवाब देने के लिए अमेरिका ने हूतियों के ठिकानों को तबाह कर दिया। हूती विद्रोहियों ने अभी तक अपने किसी भी नेता की मौत की बात स्वीकार नहीं की है, उधर अमेरिका ने भी किसी भी मारे गए विद्रोही नेता का नाम उजागर नहीं किया है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के लीक होने पर यह जानकारी सामने आई है कि विद्रोहियों के मिसाइल बल के एक नेता को निशाना बनाया गया था। बता दें कि हूतियों को ईरान से समर्थन मिलता है। जानकारों का कहना है कि यह हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम का जवाब है। व्हाइट हाउस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कहा गया कि इन हमलों से ईरान कमजोर हो गया है। अमेरिकी बी-2 बॉम्बर्स की ताकत अमेरिकी वायु सेना के पास कुल मिलाकर केवल 20 स्टील्थ बॉम्बर हैं, जिसका अर्थ है कि पूरे बेड़े का 30 प्रतिशत अब हिंद महासागर में तैनात है। बी-2 बेड़े की बड़ी संख्या ये बताती है कि वायु सेना इनका इस्तेमाल महत्वपूर्ण मिशन के लिए कर रही है। परमाणु हमला करने के अलावा बी-2 स्पिरिट अमेरिकी वायुसेना का इकलौता विमान है, जो 30000 पाउंड के जीबीयू-57/B मैसिव आर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) बंकर बस्टर बमों को संचालित कर सकता है। हूतियों के पास भूमिगत सुविधाओं का व्यापक नेटवर्क है, जिस पर हमला करने के लिए MOP की जरूरत हो सकती है। हूती लगातार लाल सागर में कर रहे हमला हालांकि, यह अभी पता नहीं कि क्या MOP को हूतियों के खिलाफ तैनात किया गया है या नहीं। यमन के हूती चरमपंथी लाल सागर के व्यापारिक मार्ग के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। हूतियों ने लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर हमले किए हैं, जिससे व्यापार मार्ग पर असर पड़ा है। हूतियों के खतरे को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने नए अभियान की घोषणा की थी। अमेरिकी अभियान के बावजूद हूती चरमपंथी झुकने के संकेत नहीं दे रहे हैं। इस बीच उन्होंने इजरायल पर भी हमला तेज किया है। हूतियों ने इस दौरान और इसके पहले कई MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराने में कामयाबी हासिल की है।

राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ ऐलान से शेयर बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो अप्रैल को कई देशों पर ताबड़तोड़ टैरिफ लगाने का ऐलान कर दुनियाभर में खलबली मचा दी. भारत और चीन समेत कई देशों पर रियायती रेसिप्रोकल टैरिफ (Discounted Reciprocal Tariff) लगाया गया है. अब भारत की ओर से ट्रंप के इस टैक्स पर प्रतिक्रिया सामने आई है. भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए 27 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण किया जा रहा है. वाणिज्य मंत्रालय इसका विश्लेषण कर रहा है. उन्होंने बताया कि अमेरिका में सभी तरह के इंपोर्ट पर सार्वभौमिक 10 फीसदी टैरिफ पांच अप्रैल से लागू होगा जबकि बाकी 16 फीसदी टैरिफ 10 अप्रैल से प्रभावी होगा. वाणिज्य मंत्रालय इन टैरिफ के प्रभावों का विश्लेषण कर रहा है. उन्होंने बताया कि इसमें एक प्रावधान है कि अगर कोई देश टैरिफ से जुड़ी हुई चिंताओं को अमेरिका के समक्ष रखता है तो ट्रंप प्रशासन उस देश पर टैरिफ की दर घटाने पर विचार कर सकता है. ट्रंप ने इस टैरिफ को रियायती बताकर बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं. भारत पर उसके 52 फीसदी की जगह 27 फीसदी टैरिफ लगाया गया है. इससे ट्रंप ने भारत के साथ बातचीत की संभावना को खुला रखा है. दोनों देश लगातार एक दूसरे के संपर्क में हैं. ट्रंप का टैरिफ भारत के लिए नहीं है झटका भारत पहले से ही अमेरिका के साथ द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत कर रहा है. दोनों देशों का लक्ष्य इस साल सितंबर-अक्तूबर तक इस समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने का है. अधिकारी ने बताया कि ट्रंप का भारत पर यह टैरिफ झटका नहीं है बल्कि इसका मिला-जुला असर हो सकता है. बता दें कि अमेरिका ने भारत पर 27 फीसदी डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. ट्रंप ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल में ही अमेरिका आए थे. वह मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं. लेकिन इस दौरे के दौरान मैंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि आप हमारे साथ सही व्यवहार नहीं कर रहे हैं. भारत हमेशा अमेरिका से 52 फीसदी टैरिफ वसूलता है. बता दें कि व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में मीडिया को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दो अप्रैल को अमेरिका के लिए मुक्ति दिवस बताया. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को इस लिबरेशन डे की लंबे समय से जरूरत थी. अब से दो अप्रैल को अमेरिकी इंडस्ट्री के पुनर्जन्म के तौर पर याद किया जाएगा. इसी दिन को हम अमेरिका को फिर से संपन्न राष्ट्र बनाने के तौर पर याद रखेंगे. हम अमेरिका को फिर से संपन्न बनाएंगे. सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश ट्रंप के नए टैरिफ ऐलान के बाद दुनियाभर के बाजारों में हड़कंप मच गया है. एशियाई बाजारों से लेकर अमेरिकी स्टॉक मार्केट तक, हर जगह गिरावट देखने को मिल रही है. इस फैसले का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी ने भारी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की. शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों को झटका आजा यानी गुरुवार को बाजार खुलते ही भारतीय स्टॉक मार्केट में बिकवाली हावी हो गई. सेंसेक्स 805.58 अंकों की गिरावट के साथ 75,811.86 पर आ गया. निफ्टी 50 भी 182.05 अंक लुढ़ककर 23,150.30 पर कारोबार कर रहा है. हालांकि, शुरुआती कारोबार में बाजार में तेज रिकवरी देखने को मिली. सुबह 9:30 बजे सेंसेक्स 345.21 अंक (0.45%) की गिरावट के साथ 76,272.23 और निफ्टी 77.70 अंक (0.33%) की गिरावट के साथ 23,254.65 पर ट्रेड कर रहा था. मिडकैप-स्मॉलकैप में हल्की बढ़त, लार्जकैप शेयरों में दबाव शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स हल्की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे, जबकि लार्जकैप शेयरों में दबाव देखने को मिला. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 125 अंकों (0.24%) की बढ़त के साथ 52,183 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 121 अंकों (0.75%) की तेजी के साथ 16,283 पर कारोबार कर रहा था. फार्मा, रियल्टी और एनर्जी सेक्टर में तेजी सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, मेटल और मीडिया सेक्टर में गिरावट देखी गई. वहीं, फार्मा, रियल्टी और एनर्जी सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली. सेंसेक्स के टॉप लूजर्स और गेनर्स इंफोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, टेक महिंद्रा, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, रिलायंस, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी और कोटक महिंद्रा बैंक टॉप लूजर स्टॉक्स रहे. वहीं, सन फार्मा, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, टाइटन और अल्ट्राटेक सीमेंट टॉप गेनर के रूप में उभरे. अमेरिकी और एशियाई बाजार भी धड़ाम ट्रंप के ऐलान के बाद अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट आई.डाउ जोन्स 2.4% गिरा,नैस्डैक 4.2% टूटा,एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 3.5% की गिरावट,टोक्यो के निक्केई 225 इंडेक्स में 2.9% की गिरावट,कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 1.9% टूटा और ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 1.8% गिरकर बंद हुआ. क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? डोनाल्ड ट्रंप ने चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा की है. ट्रंप ने करीब 180 देशों पर जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया गया है. भारत पर 26 प्रतिशत, चीन पर 34 प्रतिशत, वियतनाम पर 46 प्रतिशत और यूरोपीय यूनियन पर 20 प्रतिशत का टैरिफ लगाया गया है. इसके तहत,जापान पर 24%,दक्षिण कोरिया पर 25% टैरिफ लगाए गए हैं. इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है, जिससे बाजार में डर का माहौल बन गया है. भारतीय कंपनियों को भी इस फैसले से झटका लग सकता है, खासकर वे जो एक्सपोर्ट और टेक सेक्टर से जुड़ी हैं. ट्रंप के इस फैसले से रुपया कमजोर हो सकता है, जिससे विदेशी निवेश प्रभावित होगा. रेसिप्रोकल टैरिफ और न्यूनतम बेसलाइन टैरिफ का ऐलान: इसके अलावा, ट्रंप ने 10% न्यूनतम बेसलाइन टैरिफ की भी घोषणा की है, जो उन देशों पर लागू होगा जो अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाते हैं। ट्रंप का कहना है कि यह नीति उन देशों पर दबाव बनाने के लिए है, जो अमेरिकी निर्यात के खिलाफ ऊंचे शुल्क लगाते हैं। उनका आरोप है कि अमेरिका के व्यापारिक साझेदार अपनी नीतियों से अमेरिका को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं, और इसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। ऑटोमोबाइल्स पर भारी टैरिफ: ट्रंप ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की, जिसमें उन्होंने विदेशी … Read more

जेलेंस्की के खिलाफ रूसी राष्ट्रपति के बयान पर भड़के ट्रंप, मॉस्को को दे डाली बड़ी धमकी

वॉशिंगटन यूक्रेन के राष्ट्र्पति वोलोदिमिर जेलेंस्की को लेकर पुतिन की टिप्पणी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भड़क गए हैं। ट्रंप ने रविवार को कहा कि वह जेलेंस्की की आलोचना से बहुत नाराज हैं। इसके साथ ही ट्रंप ने धमकी दी कि अगर रूसी राष्ट्रपति युद्ध विराम के लिए सहमत नहीं होते हैं तो वे मॉस्को के तेल निर्यात पर टैरिफ लगा देंगे। एनबीसी न्यूज के साथ फोन पर दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने 50% टैरिफ लगाने की बात कही, जो रूसी तेल खरीदने वाले देशों को प्रभावित करेगा। उन्होंने यूक्रेन में जंग न रोकने के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराने की बात कही। उन्होंने कहा, ‘अगर रूस और मैं यूक्रेन में खून-खराबे को रोकने के लिए कोई समझौता करने में असमर्थ हैं और अगर मुझे लगता है कि यह रूस की गलती थी, जो कि शायद न हो- तो मैं रूस से आने वाले सभी तेल पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने जा रहा हूं।’ पुतिन को लेकर ट्रंप की टिप्पणी रूसी नेता को लेकर उनके पिछले रुख से अलग है। जेलेंस्की को हटाने की मांग पर भड़के ट्रंप पुतिन को लेकर ट्रंप का गुस्सा तब आया, जब रूसी राष्ट्रपति ने यूक्रेन में जेलेंस्की को हटाकर एक नई सरकार बनाने की मांग की। एनबीसी के साथ फोन पर ट्रंप ने कहा, ‘यह सही जगह पर नहीं जा रहा है।’ इसके पहले ट्रंप ने जेलेंस्की को लेकर निराशा जाहिर की थी और उन्हें तानाशाह तक कह दिया था। लेकिन अब वह रूस के खिलाफ सीधे बोल रहे हैं। ट्रंप ने कहा, मैं बहुत गुस्सा था, नाराज था, जब पुतिन ने जेलेंस्की की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, क्योंकि यह सही जगह पर नहीं जा रहा था, आप समझते हैं?’ रूस की अर्थव्यवस्था को धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूस की अर्थव्यवस्था को झटका देने की चेतावनी दी और कहा कि सभी रूस तेल पर टैरिफ 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी किया जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि अगर आप रूस से तेल खरीदते हैं तो अमेरिका में व्यापार नहीं कर सकते। हालांकि, ट्रंप ने दोनों नेताओं के बीच सुलह का भी संकेत दिया और कहा, ‘पुतिन जानते हैं कि मैं गुस्से में हूं, लेकिन गुस्सा जल्दी खत्म हो जाता है, अगर वह सही काम करते हैं।’ क्या कह रहे विश्लेषक अब ऐसे में सवाल उठता है कि अगर रूस ने यूक्रेन युद्ध विराम समझौते पर अपनी सहमति नहीं दी और ट्रंप ने रूसी तेल निर्यात पर 25 से 50 फीसदी की टैरिफ लगाया तो किन-किन देशों को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके जवाब में विश्लेषकों और अधिकारियों का कहना है कि अगर डोनाल्ड ट्रम्प रूसी तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ 25-50% टैरिफ लगाते हैं, तो चीन और भारत इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। दरअसल, 2022 में यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध छिड़ने के बाद अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। उसके तेल खरीदने पर भी बैन लगा दिया गया था लेकिन भारत और चीन के अलावा कुछ और देशों ने रूस से तेल खरीदना चालू रखा। ऐसे में अमेरिका द्वारा सीधे खरीददारों पर सेकंडरी टैरिफ लगाने से न केवल पुतिन की तेल राजस्व तक पहुंच कम हो सकती है बल्कि जो देश इसका उल्लंघन करेंगे उन्हें भी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ सकता है। रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में शामिल न होने के बावजूद, चीन इसका उल्लंघन करने के बारे में सावधान रहा है, क्योंकि उसे सेकंडरी टैरिफ का डर सताता रहा है। उदाहरण के लिए, कुछ चीनी बैंकों ने अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली से प्रतिबंधित होने के डर से रूसी कंपनियों के साथ लेन-देन कम कर दिया है। चीन को भारत ने छोड़ा पीछे मल्टीनेशनल इन्वेस्टमेंट बैंक और वित्तीय सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टानोवो ने द गार्डियन से कहा, “जैसा कि ट्रम्प ने वेनेजुएला के तेल के मामले में किया है, वैसा ही रूस के मामले में खरीदारों को लक्षित करने के लिए कर सकते हैं। इस कदम से चीन और भारत प्रभावित हो सकता है। हालांकि, हमें यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में क्या घोषणा होती है। बता दें कि भारत चीन को पीछे छोड़ते हुए समुद्री रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। भारत-चीन के अलावा और किन देशों पर असर 2024 में भारत के कुल कच्चे तेल के आयात का लगभग 35% रूसी कच्चा तेल था। यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से ही भारत रूसी तेल खरीदता रहा है लेकिन अब अमेरिकी टैरिफ की चिंता होने लगी है। भारत और चीन के अलावा तुर्किए भी रूसी तेल का बड़ा खरीदार है। इसके अलावा बुल्गारिया,इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, स्लोवाकिया, हंगरी भी रूसी तेल खरीदने में आगे रहा है। पाकिस्तान ने भी रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए डील किया है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में दी इफ्तार पार्टी, गेस्ट के तौर इन्हें बुलाया और हो गया कांड, Not Trump Iftar के लगे नारे

वाशिंगटन डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर व्हाइट हाउस में पहली इफ्तार (Iftar) पार्टी की मेजबानी की. लेकिन ट्रंप की यह इफ्तार पार्टी विवादों में घिर गई है. अमेरिकी मुस्लिम इस इफ्तार डिनर पर भड़के हुए हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इफ्तार डिनर की मेजबानी करते हुए कहा कि मैं आप सभी का व्हाइट हाउस के इफ्तार डिनर में स्वागत करता हूं. हम इस्लाम के पवित्र महीने रमजान का जश्न मना रहे हैं. यह बहुत बेहतरीन महीना है. दुनियाभर के मुस्लिमों को रमजान मुबारक. हम दुनिया के बेहतरीन धर्मों में से एक धर्म का सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि इस पवित्र महीने के दौरान मुस्लिम सुबह से शाम तक रोजा रखते हैं. खुदा की इबादत करते हैं. इसके बाद पूरी दुनिया के मुसलमान हर रात परिवारों और दोस्तों के साथ एकजुट होकर ईश्वर का धन्यवाद करते हैं और इफ्तार करते हैं. हम सभी पूरी दुनिया में शांति चाहते हैं. ट्रंप ने कहा कि 2024 राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए मुस्लिम अमेरिकी समुदाय का आभार भी जताया. बता दें कि व्हाइट हाउस में इफ्तार पार्टी आयोजित करने की दो दशक पुरानी परंपरा है. लेकिन आरोप हैं कि इस बार अमेरिकी मुस्लिम सांसदों और समुदाय से जुड़े नेताओं को इसमें शामिल होने का न्योता नहीं दिया गया. इसके बजाए मुस्लिम देशों के विदेशी राजदूतों को इफ्तार डिनर में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था. व्हाइट हाउस के बाहर कई मुस्लिम सिविल राइट्स ग्रुप ने Not Trump’s Iftar प्रोटेस्ट किया. इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि यह डोनाल्ड ट्रंप का एक तरह का पाखंड है. वह एक तरफ देश में मुस्लिमों के प्रवेश पर बैन लगाते हैं तो दूसरी तरफ इफ्तार पार्टी का आयोजन करते हैं. बता दें कि इससे पहले 2017 में ट्रंप ने राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल के दौरान व्हाइट हाउस की इफ्तार पार्टी को रद्द कर दिया था. दरअसल 1996 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल के दौरान व्हाइट हाउस में इफ्तार पार्टी की शुरुआत की गई थी, जिसे बाद के राष्ट्रपतियों जॉर्ज बुश और बराक ओबामा ने भी जारी रखा. इस इफ्तार पार्टी में मुस्लिम समुदाय के प्रतिष्ठित सदस्यों के साथ ही मुस्लिम देशों के राजनयिक और सीनेटर शामिल होते रहे हैं.  

वो हमपर टैक्स लगाएंगे, तो हम भी लगाएंगे… ट्रंप ने भारत को अधिक टैरिफ पर दी चेतावनी

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित कर रहे हैं. ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले संयुक्त सत्र में कई बड़े मसलों पर बात की. उन्होंने फ्री स्पीच पर जोर दिया और टैरिफ के फैसले का खुलकर बचाव किया. उन्होंने भारत का भी जिक्र किया और कहा, चीन, कनाडा, मेक्सिको और भारत हम पर बहुत ज्यादा टैक्स लगाते हैं. ट्रंप का कहना था कि भारत जो टैक्स लगाता है, वो उचित नहीं है. ट्रंप ने भाषण में दो बार भारत का नाम लिया. उन्होंने ऐलान किया कि 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैक्स लगाया जाएगा. अमेरिका राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा, मेक्सिको, भारत, ब्राजील और दक्षिण कोरिया बहुत ज्यादा टैरिफ लगाते हैं. ये अच्छी बात नहीं है. जो भी देश हम पर टैरिफ चार्ज लगाएंगे, हम भी उन पर चार्ज लागू करेंगे. हम दो अप्रैल से कनाडा, मेक्सिको, चीन और भारत पर रेसिप्रोकल टैक्स लगाएंगे. टैरिफ से अमेरिका को फिर से अमीर बनाना है. ट्रंप ने कहा, हमारा प्रशासन अमेरिका की जरूरत के अनुसार बदलाव लाने के लिए प्रयास कर रहा है. यह बड़े सपने देखने और साहसिक कार्रवाई का समय है. हमने सभी पर्यावरणीय प्रतिबंधों को समाप्त कर दिया है जो हमारे देश को कम सुरक्षित और पूरी तरह से अप्रभावी बना रहे थे. ट्रंप ने कहा, हमने 43 दिन में जो किया है, वो कई सरकारें अपने 4 या 8 साल के कार्यकाल में भी नहीं कर पाई हैं. ट्रंप ने जो बाइडेन पर भी तंज कसा और उन्हें इतिहास का सबसे खराब राष्ट्रपति बताया. भारत और चीन के खिलाफ रेसिप्रोकल टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका 2 अप्रैल को भारत और चीन समेत अन्य देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा. उन्होंने कहा, वे हम पर जो भी टैरिफ लगाएंगे, हम उन पर टैरिफ लगाएंगे. अन्य देशों ने दशकों से हमारे खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल किया है और अब हमारी बारी है कि हम उन अन्य देशों के खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल करना शुरू करें. यूरोपीय संघ, चीन, ब्राजील, भारत और अनगिनत अन्य देश हमसे बहुत ज्यादा टैरिफ वसूलते हैं. यह बहुत अनुचित है. भारत हमसे 100 प्रतिशत टैरिफ वसूलता है. यह सिस्टम अमेरिका के लिए उचित नहीं है. यह कभी नहीं था. उन्होंने कहा, 2 अप्रैल से पारस्परिक टैरिफ लागू हो जाएंगे. यदि वे हमें अपने बाजार से बाहर रखने के लिए नॉन मोनेटरी टैरिफ लगाते हैं, तो हम उन्हें अपने बाजार से बाहर रखने के लिए नॉन मोनेटरी टैरिफ लागू करेंगे. ट्रंप के संबोधन की बड़ी बातें यहां पढ़ें:- – अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हम यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में काम कर रहे हैं. इस युद्ध में हजारों लोग मारे गए हैं इसलिए इसे रोकना होगा. – ट्रंप ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि मेरी सरकार पनामा नहर पर दोबारा कब्जा करेगी और हमने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है. ट्रंप ने कहा कि हम ग्रीनलैंड के लोगों के अधिकार का सम्मान करते हैं कि उन्हें अपने भविष्य का सम्मान करने का हक है. लेकिन हम चाहते हैं कि ग्रीनलैंड हमारा हिस्सा बने. हम आपको समृद्ध बनाएंगे इसलिए आप हमसे हाथ मिला लें वरना हम किसी न किसी तरीके से ऐसा कर ही लेंगे. लेकिन यकीन दिलाते हैं कि हम आपको सुरक्षित रखेंगे. – संसद को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि हम जल्द ही एक एग्जिक्यूटिव ऑर्डर पर साइन करेंगे, जिसके बाद पुलिस अधिकारी किसी हत्या करने पर मौत की सजा का प्रावधान होगा. – ट्रंप ने कहा कि टैरिफ की रकम से अमेरिका फिर से समृद्ध होगा. इससे अमेरिका दोबारा ग्रेट और अमीर बनेगा और यह हो रहा है. – राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को अब अवैध प्रवासियों से छुटकारा चाहिए. हमारे देश के कुछ कब्जों में इन अवैध प्रवासियों का कब्जा है. हमें इनसे छुटकारा चाहिए और हम इन्हें देश से बाहर निकालकर रहेंगे. – ट्रंप ने कहा कि यह समय बड़े सपनों और बोल्ड फैसलों का है. लेकिन अब हमारा मकसद अमेरिका को फिर से अफोर्डेबल बनाना है. अब हमारा देश Woke नहीं रहेगा. – अमेरिका राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा, मेक्सिको, भारत और दक्षिण कोरिया बहुत टैरिफ लगाते हैं. हम दो अप्रैल से कनाडा, मेक्सिको, चीन और भारत पर रेसिप्रोकल टैक्स लगाएंगे. जो हम पर टैक्स लगाएंगे, हम भी उन पर उतना ही टैक्स लगाएंगे. – डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमसे उगाहे गए पैसों को वसूल कर देश की महंगाई को काबू में करेंगे. मैं अभी तक बाइडेन की असफल नीतियों को दुरुस्त करने में लगा हुआ है. – अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के संबोधन के बीच डेमोक्रेट सांसद Al Green को संसद से बाहर का रास्ता दिखाया गया. उन्हें राष्ट्रपति के संबोधन में व्यवधान डालने के लिए बाहर किया गया. – ट्रंप ने कहा कि अब सिर्फ दो ही जेंडर होंगे महिला और पुरुष. मैंने पुरुषों के महिला खेल खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया है. – अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संबोधन में फ्री स्पीच की भी बात की. ट्रंप ने कहा कि मैंने कुछ दिन पहले अंग्रेजी भाषा को एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाया. गल्फ ऑफ मेक्सिको को गल्फ ऑफ अमेरिका किया. – अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हमने फैसला किया है कि हर एक नया फैसला लेने पर पुराने 100 फैसलों को रद्द किया जाएगा. – ट्रंप ने कहा कि यह बड़े सपनों और बोल्ड एक्शन का समय है. DOGE इसमें बेहतरीन काम कर रहा है. हमने बेहूदा नीतियों को खत्म कर दिया है. भ्रष्ट हेल्थ पॉलिसी को भी खत्म कर दिया है. बाइडेन सरकार की उन नीतियों को तुरंत प्रभाव से खत्म किया है, जिससे देश को फायदा नहीं हो रहा था. – ट्रंप ने कहा कि अमेरिका मोमेंटम वापस आ गया है. हमारी रूह वापस आ गई है. हमारा गौरव वापस आ गया है. हमारा विश्वास लौट आया है और अब अमेरिकी लोग अपने सपने पूरे कर पाएंगे. – ट्रंप ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि हमने सिर्फ 43 दिनों में वह कर दिखाया है, जो पिछली सरकारों ने चार साल में भी नहीं किया. – राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि America is Back. – … Read more

ट्रंप ने यूक्रेन की आर्मी मदद पर लगाई रोक, अब पुतिन से कैसे लोहा लेंगे जेलेंस्की

न्यूयॉर्क रूस और यूक्रेन के बीच लगभग तीन साल से युद्ध चल रहा है। इस दौरान अमेरिका ने यूक्रेन को हर तरह से मदद दी है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अमेरिका का दौरा किया और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात की थी। लेकिन इस दौरान दोनों के बीच जमकर बहस हुई, जिसके बाद जेलेंस्की व्हाइट हाउस से बिना प्रेस वार्ता के निकल गए। अब राष्ट्रपति ट्रम्प ने जेलेंस्की को झटका देते हुए यूक्रेन को मिलने वाली मिलिट्री मदद पर रोक लगा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति निवास व्हाइट हाउस ने इस संबंध में जानकारी दी है। व्हाइट हाउस का कहना है कि पिछले सप्ताह यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की केसाथ तीखी बहस के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को मिलने वाली सभी तरह की मिलिट्री मदद पर रोक लगा दी है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक अमेरिका अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ तौर पर कह दिया है कि उनका ध्यान शांति पर है। हमें चाहिए कि हमारे साझेदार भी उस लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध हों। हम अपनी सहायता रोक रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह समाधान में योगदान दे रही है। ट्रंप का यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। इसके मुताबिक ऐसी मदद से जो अमेरिका से अभी तक यूक्रेन नहीं पहुंची है, उसे भी रोक दिया गया है। इसमें पोलैंड तक पहुंच चुका सामान भी शामिल है। यूक्रेन और अमेरिका ने नहीं दिया जवाब व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, यूक्रेन को रोकी गई मदद तब तक बहाल नहीं की जाएगी। जब तक राष्ट्रपति ट्रंप को यह यकीन नहीं हो जाता कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की वास्तव में शांति चाहते हैं। यूक्रेन को सैन्य मदद रोके जाने को लेकर फिलहाल अमेरिकी रक्षा विभाग और न ही राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से कोई टिप्पणी आई है। वहीं अमेरिकी सहायता रोके जाने पर यूक्रेन राष्ट्रपति जेलेंस्की की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि इस सहायता पर रोक लगाना पूरी तरह से स्थाई नहीं है। यह एक विराम है। एक अरब डॉलर की मदद रुकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे एक अरब डॉलर के हथियार और गोला-बारूद संबंधी मदद पर असर पड़ सकता है। इन्हें जल्द ही यूक्रेन को डिलीवर किया जाना था। इधर यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि उसके पास सिर्फ गर्मियों तक रूस से लड़ने के लिए आपूर्ति है। ऐसे में रूस से लडाई के लिए यूक्रेन संसाधनों की कमी से जूझ सकता है। यूरोपीय देशों पर बढ़ेगा यूक्रेन की मदद का दबाव रूस के खिलाफ युद्ध में अब अमेरिका के यूक्रेन की मदद नहीं करने से यूरोपीय देशों पर यूक्रेन की मदद का दबाव बनेगा। अब तक कई यूरोपीय देशों ने इस युद्ध में यूक्रेन की मदद की है, लेकिन उतनी नहीं जितनी अमेरिका ने की है। अमेरिका ने इस युद्ध की शुरुआत से ही यूक्रेन को वित्तीय सहायता के साथ ही सैन्य सहायता भी मुहैया कराई है। लेकिन अब इस पर रोक लगा दी गई है। जिससे यूरोपीय देशों पर इस युद्ध में यूक्रेन को कमजोर न पड़ने देने का दबाव बनेगा। रूस को मिलेगा अमेरिका का सीधा समर्थन ट्रंप और जेलेंस्की की बहस के बाद अमेरिका और यूक्रेन में तकरार आ गई है। इस बहस का सीधा फायदा रूस को मिलेगा। ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अच्छे दोस्त हैं। ट्रंप के फिर से राष्ट्रपति बनने के बाद से ही उनका झुकाव रूस की ओर रहा है। अब इस युद्ध में अमेरिका की तरफ से रूस को सीधा समर्थन मिल सकता है। हालांकि अमेरिका, रूस की इस युद्ध में कोई मदद नहीं करेगा, लेकिन अमेरिका की तरफ से रूस को समर्थन जरूर मिलेगा। व्हाइट हाउस की तरफ से कहा गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप का मकसद शांति स्थापित करना है। हम चाहते हैं कि हमारा सहयोगी भी शांति के लिए प्रतिबद्ध हो। आज हम अपनी सहायता को रोक रहे हैं और उसकी समीक्षा कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह समाधान में सहयोग दे रही है। इधर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूक्रेन की मदद करने पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनके प्रशासन की भी जमकर आलोचना की है। अमेरिका और यूक्रेन के बीच खनिज सौदे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘…यह हमारे लिए बहुत बड़ी बात है क्योंकि बाइडेन ने बहुत ही मूर्खतापूर्ण तरीके से एक देश को युद्ध लड़ने के लिए 350 बिलियन डॉलर दे दिए… हमें कुछ नहीं मिला… हम 350 बिलियन डॉलर से अपनी पूरी अमेरिकी नौसेना का पुनर्निर्माण कर सकते थे…’

अमेरिका ने यूक्रेन का समर्थन करने से किया इनकार

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को यूक्रेन युद्ध पर एक नया रुख अपनाया, जब वॉशिंगटन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन पर आक्रमण की निंदा करने वाले प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ये पहली बार है जब अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के अंदर कीव को समर्थन देने से इनकार कर दिया। संघर्ष के तीन साल पूरे होने पर यूरोपीय समर्थन वाले प्रस्ताव को महासभा ने 93 वोटों के साथ स्वीकार कर लिया। लेकिन अमेरिका के प्रस्ताव का विरोध करने की चर्चा सबसे ज्यादा है, जो ट्रंप के नेतृत्व में वॉशिंगटन की विदेश नीति में बड़े बदलाव को दर्शाता है। प्रस्ताव के खिलाफ 18 सदस्य देशों ने मतदान किया, जबकि 65 सदस्यों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। वॉशिंगटन ने मतदान के दौरान मॉस्को और रूस के सहयोगियों उत्तर कोरिया और सूडान जैसे देशों का साथ दिया। नए पारित प्रस्ताव में युद्ध में कमी लाने, शत्रुता को शीघ्र समाप्त करने और यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान करने का आह्वान किया गया है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नागरिक आबादी समेत भारी विनाश और मानवीय पीड़ा शामिल है। भारत ने लिया किसका पक्ष ? यह प्रस्ताव यूक्रेन के लिए जीत के रूप में सामने आया है, लेकिन यह कीव के कम होते समर्थन को भी दिखाता है। इसे पिछले प्रस्तावों की तुलना में बहुत कम समर्थन मिला है। वहीं, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मसौदा प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत उन 65 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों में शामिल था, जिन्होंने प्रस्ताव पर मतदान से परहेज किया। अमेरिका ने पेश किया अलग प्रस्ताव इस बीच अमेरिका ने भी एक प्रतिद्वंद्वी प्रस्ताव तैयार किया, जिसे संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत ने सही दिशा में एक कदम कहा था। लेकिन वॉशिंगटन के सहयोगी फ्रांस ने अमेरिकी पाठ में संशोधन पेश किया और महासभा को बताया कि पेरिस, ब्रिटेन समेत अन्य यूरोपीय देशों के साथ मौजूदा स्वरूप में इसका समर्थन नहीं कर पाएगा। अपने ही पाठ से पीछे हटा अमेरिका इन देशों ने अमेरिकी पाठ को फिर से लिखने के लिए दबाव डाला। इन परिवर्तनों ने यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की, जिसे अमेरिकी पाठ से हटा दिया गया था। अमेरिकी प्रस्ताव में इतना अधिक संशोधन किया गया कि वॉशिंगटन ने आखिरकार अपने खुद के पाठ पर मतदान से परहेज किया, जबकि सभा ने इसे पास कर दिया।

ट्रंप का कहना है कि हम गाजा पट्टी को अपने अधिकार क्षेत्र में लेंगे, गाजा खाली कराना और पुनर्निर्माण काम कराना है फोकस

वाशिंगटन इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने व्हाइट हाउस पहुंचे. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच लंबी बातचीत हुई. इसी साल 20 जनवरी को कार्यालय में लौटने के बाद ट्रंप की यह किसी विदेशी नेता के साथ पहली बैठक थी. बैठक के बाद दोनों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम चाहते हैं कि अमेरिका गाजा पट्टी का स्वामित्व ले और इसका विकास करे. उन्होंने कहा कि अमेरिका देश युद्धग्रस्त फिलिस्तीनी क्षेत्र गाजा पट्टी पर कब्जा करेगा और इसका विकास करेगा. साथ ही इसका मालिकाना हक रखेगा. वहीं ट्रंप के साथ बोलते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि रिपब्लिकन नेता का विचार ऐसा है जो इतिहास बदल सकता है और ट्रंप गाजा के लिए एक अलग भविष्य की कल्पना करते हैं. गाजा के लोगों को नौकरियां और घर देंगे: ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “हम गाजा पर अपना अधिकार जताएंगे और साइट पर मौजूद सभी खतरनाक बमों और अन्य हथियारों को नष्ट करने की जिम्मेदारी लेंगे. हम नष्ट हो चुकी इमारतों को गिरा देंगे और एक ऐसा आर्थिक विकास करेंगे जो क्षेत्र के लोगों को असीमित संख्या में नौकरियां और आवास प्रदान करेगा.” क्षेत्र में किसी भी सुरक्षा शून्यता को भरने के लिए सैनिकों को तैनात करने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “हम वही करेंगे जो आवश्यक है. यदि यह आवश्यक है, तो हम ऐसा करेंगे”. ट्रंप ने कहा कि वह अपनी विकास योजना के बाद गाजा में दुनिया भर के लोगों के रहने की कल्पना करते हैं. उन्होंने कहा कि वह मध्य पूर्व की अपनी भावी यात्रा के दौरान गाजा, इज़राइल और सऊदी अरब जाने की योजना बना रहे हैं. हालांकि, उन्होंने कोई समय निर्दिष्ट नहीं किया. ‘गाजा पूरी तरह विध्वंस स्थल’ जब उनसे उनके प्रस्ताव पर फिलिस्तीनी और अरब नेताओं की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “गाजा की बात कभी कामयाब नहीं हुई. यह पूरी तरह विध्वंस स्थल है. अगर हम सही ज़मीन का टुकड़े को ढूंढ़ सकें और उस क्षेत्र में बहुत सारा पैसा लगाकर कुछ बहुत अच्छी जगहें बना सकें, तो यह पक्का है. मुझे लगता है कि यह गाजा वापस जाने से कहीं बेहतर होगा. यहां के लोग गाजा छोड़ना पसंद करेंगे. मुझे लगता है कि वे रोमांचित होंगे. मुझे नहीं पता कि वे (फिलिस्तीनी) कैसे रहना चाहेंगे.” राष्ट्रपति से जब इस क्षेत्र पर अमेरिका के लंबे समय तक नियंत्रण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैं दीर्घकालिक स्वामित्व की स्थिति देखता हूं.” ट्रंप ने सुझाव दिया कि अमेरिका द्वारा ऐसा करने से क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा और उन्होंने कहा, “यह कोई हल्के में लिया गया निर्णय नहीं है. मैंने जिन लोगों से बात की है, वे सभी इस विचार से खुश हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका के पास उस भूमि का एक टुकड़ा हो.” गाजा को लेकर ट्रंप का 5 प्वॉइन्ट प्लान? इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से व्हाइट हाउस में मुलाकात के बाद प्रेस को संबोधित करते हुए ट्रंप ने एक बार फिर गाजा पट्टी को खाली करवाने की बात दोहराई. गाजा खाली कराना और पुनर्निर्माण काम कराना है फोकस उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनियों को गाजा पट्टी खाली करनी होगी. उन्हें मिस्र, जॉर्डन और अन्य देशों में स्थाई तौर पर बस जाना चाहिए. अब गाजा रहने लायक नहीं रहा. मैंने सुना है कि गाजा उनके लिए बदकिस्मत है. वे वहां नरक की तरह रहते हैं. वे नरक में रह रहे हैं. गाजा के भविष्य में फिलिस्तीनी नहीं हैं. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कई महीनों से गाजा की स्टडी की है. बहुत करीब से स्टडी की है. गाजा में फिलिस्तीनियों के पास कोई विकल्प नहीं है. उनके पास क्या है? वहां बस मलबा है. फिलिस्तीनियों को गाजा के बजाए किसी खूबसूरत जगह शिफ्ट हो जाना चाहिए. हम गाजा पर नियंत्रण हासिल कर वहां मौजूद सभी खतरनाक बिना फटे बमों और अन्य हथियारों को नष्ट करने से लेकर साइट को समतल करने और नष्ट इमारतों का मलबा हटाने की जिम्मेदारी निभाएंगे. गाजा Riviera of Middle East में होगा तब्दील ट्रंप ने कहा कि गाजा को खाली करवाने के बाद यहां पर जोर-शोर से पुनर्निर्माण का कार्य करवाया जाएगा. हम गाजा को Riviera of Middle East में तब्दील कराएंगे. ट्रंप ने कहा कि यह फैसला पूरी गंभीरता से लिया गया है. मैंने जिनसे भी इस ब्लूप्रिंट के बारे में बात की,उन्हें यह पसंद आया है. गाजा पर अमेरिकी कब्जे के बाद इस क्षेत्रा के पुनर्निर्माण और फिर यहां रोजगार के हजारों मौके उपलब्ध कराकर इसका विकास किया जाएगा. गाजा दुनियाभर के लोगों का घर बन सकता है. ट्रंप ने कहा कि हम गाजा को मिडिल ईस्ट का रिवेरा बनाने पर फोकस करेंगे. रिवेरा दरअसल इटली का एक शब्द है, जिसका मतलब है कोस्टलाइन यानी समुद्री तट. फ्रेंच रिवेरा और इटैलियन रिवेरा दुनियाभर में अपने पर्यटन के लिए मशहूर है. इसी तर्ज पर ट्रंप गाजा को पर्यटन हब के तौर पर विकसित करना चाहते हैं. हमास का खात्मा ट्रंप ने कहा कि इजरायल पर हमास के हमले ने कई निर्दोष लोगों की जिंदगियां छिनी है. आज फिलिस्तीनियों ने जो कीमत चुकाई है, उसका जिम्मेदार हमसा ही है. ऐसे में गाजा को आतंक से मुक्त करना होगा. इसके लिए जरूरी है कि गाजा को खाली कराया जाए. ईरान भी है ट्रंप की हिटलिस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति के गाजा को लेकर 5 प्वॉइन्ट ब्लूप्रिंट में ईरान भी है. ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान ने उन्हें मारने की कोशिश की तो उसे इसका अंजाम भुगतना होगा. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने सलाहकारों को निर्देश दिया है कि अगर ईरान उनके ऊपर हमला करता है तो उसे तबाह कर दिया जाए. ट्रंप ने ईरान की कमर तोड़ने के लिए एक एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत भी किए हैं जिसमें अमेरिकी सरकार को ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने के लिए कहा गया है. बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के बाद इजरायली पीएम नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल पहले कभी इतना ताकतवर नहीं रहा जबकि ईरान कभी इतना कमजोर नहीं रहा. मैंने राष्ट्रपति ट्रंप से हमारे इलाके में शांति लाने और हमारे भविष्य को बचाने पर चर्चा की. … Read more

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को खुली धमकी दी कहा अगर ईरान ने मुझे मारने की कोशिश की तो मैं उस देश को खत्म कर दूंगा

वॉशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दे दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने उन्हे मारने की कोशिश की तो वह देश को खत्म कर देंगे। अमेरिका ने ये भी संकेत दिए है कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार से जुड़े परियोजनाओं को बंद नहीं किया तो अमेरिका उसपर और भी प्रतिबंध लगाएगा। ट्रंप ने ईरान पर और भी अधिक दबाव डालने के आदेश पर हस्ताक्षर भी किए। ईरान को ट्रंप की खुली धमकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने अपने सलाहकारों को निर्देश दिया है कि अगर ईरान उनके ऊपर हमला करता है तो उसे तबाह कर दिया जाए। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने मुझे मारने की कोशिश की तो मैं उसे खत्म कर दूंगा। उन्होंने कहा कि ईरान के पास ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता है। हालांकि, ट्रंप ने ईरान के समकक्ष से मुलाकात की इच्छा भी जाहिर की। ट्रंप पर हो चुका है जानलेवा हमला बता दें कि ट्रंप को कई बार ईरान की ओर से धमकी मिल चुकी है। हाल ही में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप पर जानलेवा हमला भी हुआ था। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि वह नहीं मानते की हत्या का प्रयास ईरान ने किया था। साल 2020 में ट्रंप ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की एलीट शाखा कुद्स फोर्स का नेतृत्व करने वाले कासिम सुलेमानी की हत्या का आदेश दिया था। इसके बाद से ही ट्रंप की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी काफी अलर्ट रहती है। आशंका जताई जा रही है कि ट्रंप, ईरान की मुश्किलें बढ़ाने वाले हैं। ईरान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। साल 2015 में अमेरिका से जब ईरान का परमाणु समझौता हुआ था, लेकिन 2018 में ट्रंप ने ईरान से परमाणु समझौता तोड़ दिया था। इसके बाद ईरान और अमेरिका के बीच रिश्ते काफी खराब हो गए। ईरान के राष्ट्रपति से मिलने की जताई इच्छा उन्होंने कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता है, लेकिन साथ ही उम्मीद जताई की तेहरान के साथ समझौता किया जा सकता है। ट्रंप ने ईरान के अपने समकक्ष से मिलने की इच्छा जताई, ताकि तेहरान को यह समझाने की कोशिश की जा सके कि वह परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश छोड़ दे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन पर तेल-निर्यात प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। ट्रंप के ऊपर खतरा अमेरिकी अधिकारी वर्षों से ट्रंप और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ ईरानी धमकियों पर नजर रख रहे हैं। ट्रंप ने 2020 में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की एलीट शाखा कुद्स फोर्स का नेतृत्व करने वाले कासिम सुलेमानी की हत्या का आदेश दिया था। न्याय विभाग ने बीते साल नवम्बर में घोषणा की थी कि राष्ट्रपति चुनाव से पहले ट्रंप को मारने की ईरानी साजिश की नाकाम किया गया है। विभाग ने आरोप लगाया कि ईरानी अधिकारियों ने सितम्बर में 51 वर्षीय फरहाद शकेरी को ट्रंप की निगरानी करने और उनकी हत्या के लिए योजना बनाने का निर्देश दिया गया था।

ट्रंप का बड़ा दावा, ‘सोमालिया की गुफाओं में छिपे कई आतंकी अमेरिकी एयर स्ट्राइक में ढेर’

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को घोषणा की कि अमेरिकी सेना ने सोमालिया में ISIS के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई आतंकवादी मारे गए हैं. ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि आज सुबह मैंने ISIS के सीनियर अटैकर और उसके द्वारा सोमालिया में भर्ती किए गए आतंकवादियों पर सटीक सैन्य एयर स्ट्राइक का आदेश दिया था. ये हत्यारे गुफाओं में छिपे हुए थे, लेकिन हमने इन पर सटीक हमला किया. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और हमारे सहयोगियों के लिए ये खतरा थे. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने हवाई हमलों से उन गुफाओं को तबाह कर दिया है. जिनमें आतंक छिपे हुए थे और नागरिकों को किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाए बिना कई आतंकवादियों को मार गिराया. हम तुम्हें ढूंढ लेंगे और मार देंगे: ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी सेना ISIS हमले की योजना बनाने वाले आतंकी को कई साल से टारगेट कर रही थी. लेकिन बाइडेन और उनके साथी काम को पूरा करने के लिए इतनी जल्दी एक्शन नहीं लेते, लेकिन मैंने इसे कर दिखाया. ISIS और अमेरिकियों पर हमला करने वाले अन्य सभी लोगों के लिए संदेश ये है कि हम तुम्हें ढूंढ लेंगे, और हम तुम्हें मार देंगे. सत्ता में लौटने के बाद से अमेरिकी सेना द्वारा की गई पहली सैन्य कार्रवाई थी. ‘हमलों में किसी भी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा’ वहीं, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी सेना की अफ्रीका कमान द्वारा किए गए हमलों का निर्देशन ट्रंप ने किया था और सोमालिया की सरकार के साथ समन्वय किया गया था. पेंटागन द्वारा किए गए शुरुआती आकलन से पता चलता है कि कई आतंकी इस हवाई हमले में मारे गए हैं. पेंटागन ने कहा कि हमलों में किसी भी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा है. कैल मिस्काट पहाड़ों में छिपे हैं आतंकी दरअसल, ISIS-सोमालिया अफ्रीकी देश में कई हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है. अंतरराष्ट्रीय ग्रुप्स के अनुसार सोमालिया में ISIS आतंकवादियों की संख्या सैकड़ों में होने का अनुमान है, जो ज्यादातर पुंटलैंड के बारी क्षेत्र में कैल मिस्काट पहाड़ों में बिखरे हुए हैं.

‘चीनी हस्तक्षेप से मुक्त व सभी के व्यापार के लिए खुली है’, पनामा नहर प्रशासक ने ट्रंप के बयान को किया ख़ारिज

वाशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद से दुनियाभर में पनामा नहर का मामला चर्चा में है। अब पनामा नहर के प्रशासक ने साफ कर दिया है कि पनामा नहर के अमेरिका कब्जे में जाने की कोई संभावना नहीं है और नहर का प्रशासन पनामा के हाथों में ही रहेगा। साथ ही उन्होंने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि चीन नहर के संचालन को नियंत्रित कर रहा है। पनामा के नहर के प्रशासक रिकौर्टे वास्केज ने कहा कि पनामा नहर सभी देशों के लिए खुली रहेगी। रिकौर्टे वास्केज ने नहर पर चीन के नियंत्रण के दावों पर कहा कि नहर के दोनों छोर पर बंदरगाहों में काम करने वाली चीनी कंपनियां हांगकांग की है और उन्होंने साल 1997 में बोली प्रक्रिया में यह अधिकार हासिल किया था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी और ताइवान की कंपनियां नहर के किनारे के अलावा अन्य बंदरगाहों का भी संचालन कर रही हैं। पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो ने भी स्पष्ट रूप से कहा है कि नहर का प्रशासन पनामा के हाथों में ही रहेगा। अमेरिका को पनामा नहर का नियंत्रण देने से इनकार अमेरिका के पनामा नहर पर कब्जा करने की आशंका पर वैस्केज ने कहा कि ‘इस तरह की उम्मीद का कोई आधार नहीं है। मैं बस यही कह सकता हूँ।’ वैस्केज ने इस बात पर जोर दिया कि पनामा नहर सभी देशों के व्यापार के लिए खुली है। वैस्केज ने कहा कि तटस्थता संधि के कारण पनामा नहर प्रशासन अमेरिकी ध्वज वाले जहाजों को विशेष सुविधा नहीं दे सकता। स्थापित नियमों के तहत ही नहर का संचालन होगा। उन्होंने कहा कि नहर संचालन की प्रक्रिया स्पष्ट है और इसमें मनमाने बदलाव नहीं हो सकते। पनामा और अमेरिका के बीच की संधि में एकमात्र अपवाद अमेरिकी युद्धपोतों को तुरंत मार्ग देने का नियम ही है। ज्यादा शुल्क के आरोपों को लेकर दी ये सफाई डोनाल्ड ट्रंप ने पनामा नहर पर लगने वाले शुल्क को बहुत ज्यादा बताया था। इस पर वैस्केज ने कहा कि शुल्क में कोई भेदभाव नहीं है। शुल्क बढ़ने पर वैस्केज ने कहा कि नहर अपने लॉक को संचालित करने के लिए जलाशयों पर निर्भर करती है, लेकिन पिछले दो वर्षों के दौरान सूखे से जलाशय बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। जिसके कारण जहाजों को पार करने के लिए दैनिक स्लॉट की संख्या में काफी कमी करनी पड़ी है। कम जहाजों की संख्या की वजह से प्रशासकों ने स्लॉट आरक्षित करने के लिए फीस बढ़ा दी है। पनामा नहर की वजह से जहाजों को केप हॉर्न के आसपास लंबी और महंगी यात्रा से मुक्ति मिलती है। ट्रंप ने कही थी नहर पर कब्जे की बात डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिनों पनामा नहर को लेकर कहा था कि अगर पनामा स्वीकार्य तरीके से पनामा नहर का प्रबंधन नहीं करता है तो फिर अमेरिका फिर से इस पर अपना कब्जा कर सकता है। उन्होंने कहा था कि हम पनामा नहर को ‘गलत हाथों’ में नहीं जाने देंगे। ट्रंप का इशारा चीन की तरफ माना जा रहा था। उन्होंने लिखा था कि पनामा नहर का प्रबंधन चीन के द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। ट्रंप ने पनामा नहर पर कब्जे को लेकर सैन्य शक्ति के इस्तेमाल से भी इनकार नहीं किया। पनामा नहर से अमेरिका का 70 फीसदी समुद्री यातायात गुजरता है और रणनीतिक रूप से भी यह अमेरिका के लिए अहम है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने तटों के बीच वाणिज्यिक और सैन्य जहाजों की आवाजाही को सुविधा जनक बनाने के 1900 के दशक की शुरुआत में पनामा नहर का निर्माण किया था। वॉशिंगटन ने साल 1977 में हुई एक संधि के तहत 31 दिसंबर, 1999 को पनामा नहर पर अपना नियंत्रण छोड़कर पनामा को इसका नियंत्रण दे दिया था।

आयोजन समिति ने अब तक जुटाए 170 मिलियन डॉलर, ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के लिए चंदा देने की होड़

वासिंगटन। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 20 जनवरी को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह को लेकर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। बड़े-बड़े अरबपति, कारोबारी और तकनीकी विशेषज्ञ इस समारोह में अपनी सहभागिता के साथ आर्थिक सहयोग भी कर रहे हैं। समारोह के लिए चंदा देने की होड़ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के लिए आयोजन समिति को अब तक 170 मिलियन डॉलर का चंदा मिल चुका है। जोकि एक रिकॉर्ड है। इस चंदे के लिए अमेरिका के बड़े-बड़े कारोबारियों और हस्तियों ने बड़े चेक लिखे हैं। व्यक्तिगत तौर पर चंदा वसूलने वाले एक व्यक्ति ने समारोह के लिए अब तक मिले चंदे की पुष्टि की। उसने कहा कि आयोजन समिति को उम्मीद है कि वह समारोह होने तक 200 मिलियन डॉलर चंदा जुटा लेगी। हालांकि वह सार्वजनिक तौर पर इस बारे में बात नहीं कर सकता है। वहीं आयोजन समिति ने भी इसे दावे पर कोई जवाब नहीं दिया। साथ ही यह जानकारी भी नहीं दी गई है कि वह चंदे को कैसे खर्च करेगी। ट्रंप के राष्ट्रपति पुस्तकालय में होगा बची हुई रकम का उपयोग अमेरिका के नियमों के मुताबिक व्यक्तिगत चंदे से मिली रकम का उपयोग आमतौर पर शपथ ग्रहण समारोह किया जाता है। इसमें शपथ ग्रहण समारोह से जुड़ी लागतें, परेड और शानदार उद्घाटन समारोह। बताया जाता है कि आयोजन समिति समारोह के बाद बचने वाले पैसे का उपयोग ट्रंप राष्ट्रपति पुस्तकालय में करेगी। बाइडन को मिला था 62 मिलियन डॉलर का चंदा अमेरिकी चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह की आयोजन समिति ने अब तक सबसे ज्यादा चंदा जुटाया है। यह चार साल पहले राष्ट्रपति जो बाइडन को मिले चंदे के दोगुने से भी अधिक है। बाइडन को लगभग 62 मिलियन डॉलर चंदा मिला था। वहीं 2016 में ट्रंप के प्रथम शपथ ग्रहण समारोह में भी लगभग 107 मिलियन डॉलर का चंदा प्राप्त हुआ था, जिसने एक रिकार्ड स्थापित किया था। राष्ट्रपति के साथ संबंध सुधारने की कवायद नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप और कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन के नियंत्रण के बाद तकनीकी कंपनियां सहित प्रमुख लोग बड़े चेक लिख रहे हैं। ताकि वे नए राष्ट्रपति के साथ अपने संबंध सुधार सकें। फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा और अमेजन ने पिछले महीने कहा था कि वे ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह के कोष में एक मिलियन डॉलर का चंदा देंगे। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी कहा कि एक मिलियन डॉलर का चंदा देने की बात कही थी।

ताजा पोस्ट से भड़की सरकार और बढ़ा तनाव, कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बनाने पर तुले ट्रंप

वाशिंगटन। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाथ धोकर कनाडा के पीछे पड़ गए हैं। ट्रंप, कनाडा को आर्थिक ताकत के बल पर अमेरिका का हिस्सा बनाने की इच्छा व्यक्त कर चुके हैं। अब एक ताजा सोशल मीडिया पोस्ट में कनाडा और अमेरिका का साझा नक्शा पोस्ट किया और उसे संयुक्त राज्य अमेरिका लिखा। ट्रंप के इस पोस्ट पर कई कनाडाई नेताओं ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। गौरतलब है कि ट्रंप ने फ्लोरिडा स्थित अपने आवास में मीडिया से बात करते हुए कनाडा को अमेरिका में मिलाने और उसे अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की इच्छा व्यक्त की थी। कनाडा के पीएम ने जताई नाराजगी अब कनाडा और अमेरिका का साझा नक्शा पोस्ट कर उसे संयुक्त राज्य अमेरिका बताने वाली ट्रंप की पोस्ट पर कनाडा के नेताओं ने नाराजगी जताई। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ट्रंप के बयान पर कहा कि कनाडा के अमेरिका का हिस्सा बनने की कोई संभावना नहीं है। कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जॉली ने कहा कि ट्रंप का बयान ‘कनाडा को एक मजबूत देश बनाने वाली चीजों के बारे में समझ की कमी को दिखाती है। हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत है। हमारे लोग मजबूत हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हम खतरों के सामने कभी पीछे नहीं हटेंगे।’ ट्रंप के बयानों से बढ़ा तनाव उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने पनामा नहर और ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना से भी इनकार नहीं किया। उन्होंने दोनों पर अमेरिका के नियंत्रण को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। ट्रंप ने कहा कि पनामा नहर हमारे देश के लिए महत्वपूर्ण है। हमें राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के लिए ग्रीनलैंड की भी जरूरत है।’ गौरतलब है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है, जो लंबे समय से अमेरिका का सहयोगी और नाटो का संस्थापक सदस्य है। ट्रम्प ने डेनमार्क पर टैरिफ लगाने का भी प्रस्ताव दिया है कि अगर डेनमार्क, ग्रीनलैंड को खरीदने के उनके प्रस्ताव को अस्वीकार करता है तो वे डेनमार्क पर टैरिफ लगा सकते हैं। डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर पनामा और डेनमार्क ने दी प्रतिक्रिया पनामा के विदेश मंत्री जेवियर मार्टिनेज-आचा ने ट्रम्प की धमकी को दृढ़ता से खारिज करते हुए कहा, ‘नहर पनामा के नियंत्रण में है, और यह हमारे ही नियंत्रण में रहेगी।’ वहीं डेनमार्क ने भी दृढ़ता से कहा कि ग्रीनलैंड ‘बिक्री के लिए नहीं है।’ डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने मंगलवार रात कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि जब हम करीबी सहयोगी और साझेदार हैं, तो वित्तीय मुद्दों पर एक दूसरे पर टकराना अच्छी बात नहीं है।’

क्या शपथ से पहले ट्रंप को होगी जेल? पोर्न स्टार मामले में सुनाई जाएगी सजा; 10 जनवरी को कोर्ट में पेशी

न्यूयॉर्क न्यूयॉर्क के जज जुआन मर्चेन ने शुक्रवार (3 जनवरी) को घोषणा की कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 10 जनवरी 2025 को सजा सुनाई जाएगी, जो उनके शपथ ग्रहण से 10 दिन पहले होगी. AFP की रिपोर्ट के मुताबिक ये सजा हश मनी के उस मामले से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को चुप रहने के लिए पैसे दिए थे. इस पर मर्चेन ने संकेत दिया कि वे ट्रंप को जेल की सजा देने के पक्ष में नहीं हैं और बिना शर्त रिहाई की ओर झुकाव दिखाया है. इसका मतलब है कि ट्रंप किसी शर्त के अधीन नहीं होंगे, लेकिन वे दोषी के रूप में व्हाइट हाउस में प्रवेश करेंगे. 78 वर्षीय ट्रंप को 34 मामलों में दोषी ठहराया गया था, जिनमें 2016 के चुनाव से पहले पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को चुप रहने के लिए पैसे का भुगतान करने के लिए व्यवसाय रिकॉर्ड में हेराफेरी शामिल है. ट्रंप को चार साल तक की जेल की सजा हो सकती है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों को उम्मीद है कि उन्हें जेल नहीं भेजा जाएगा. ट्रंप ने इस मामले में अपील करने की योजना बनाई है, जिससे सजा में देरी हो सकती है. ट्रंप के वकीलों ने इसे सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और अन्य न्यायिक निर्णयों के आधार पर खारिज करने की मांग की थी, जिसमें कहा गया था कि पूर्व राष्ट्रपतियों को पद पर रहते हुए कई आधिकारिक कृत्यों के लिए अभियोजन से छूट प्राप्त है. शपथ ग्रहण के बाद ट्रंप को मिल जाएगी छूट हालांकि, न्यायाधीश ने इस तर्क को खारिज कर दिया लेकिन कहा कि शपथ ग्रहण के बाद ट्रंप को अभियोजन से छूट मिल जाएगी. ट्रंप के प्रवक्ता स्टीवन चेउंग ने इस सजा के फैसले की आलोचना की और इसे सुप्रीम कोर्ट के प्रतिरक्षा निर्णय का उल्लंघन बताया. चेउंग ने कहा कि यह मामला कभी लाया ही नहीं जाना चाहिए था और इसे तुरंत खारिज किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप तब तक लड़ते रहेंगे जब तक ये सभी मामले खत्म नहीं हो जाते. दो संघीय मामलों का सामना कर रहे ट्रंप ट्रंप अभी भी विशेष वकील जैक स्मिथ द्वारा लाए गए दो संघीय मामलों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उन मामलों को न्याय विभाग की नीति के तहत खारिज कर दिया गया, जो एक बैठे राष्ट्रपति पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं देती है. ट्रंप पर 2020 के चुनाव परिणामों को पलटने की साजिश और गोपनीय दस्तावेज हटाने के आरोप भी लगे हैं, लेकिन राष्ट्रपति के रूप में उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन मामलों को बंद कर दिया जाएगा. राष्ट्रपति के आपराधिक अभियोजन के संबंध में कानून अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति के आपराधिक अभियोजन के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से यह नहीं माना है कि राष्ट्रपति को अभियोजन से छूट है. यह अवधारणा न्याय विभाग की व्याख्या पर आधारित है, खासकर उसके कानूनी परामर्शदाता कार्यालय (OLC) की तरफ से दी गई सलाह के तहत. OLC का मानना है कि आपराधिक अभियोग, अभियोजन और सजा राष्ट्रपति पद को अक्षम कर सकते हैं, जिससे राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हो सकते हैं. OLC यह भी मानता है कि किसी कार्यरत राष्ट्रपति को इस तरह से अक्षम करना असंवैधानिक होगा. इसके लिए संविधान में महाभियोग या 25वां संशोधन जैसे प्रावधान मौजूद हैं. महाभियोग के माध्यम से राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है, जबकि 25वें संशोधन के तहत किसी अक्षम राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है.

ट्रंप शासन में होगा भारतवंशियों का दबदबा, जानें कौन-कौन

नई दिल्ली. अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को संघीय जांच ब्यूरो (FBI) के डायरेक्टर पद के लिए अपने निकट सहयोगी एवं विश्वासपात्र काश पटेल को नामित किया। यह सेलेक्शन ट्रंप के इस दृष्टिकोण के अनुरूप है कि सरकार की कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। साथ ही ट्रंप ने अपने विरोधियों के विरुद्ध प्रतिशोध की इच्छा जताई है। ऐसे में इस पद के लिए पटेल का चयन मायने रखता है। इस तरह ट्रंप के नए प्रशासन एक और भारतवंशी को महत्वपूर्ण स्थान मिला है। जानते हैं ट्रंप प्रशासन में किन भारतीय-अमेरिकी को अहम जिम्मेदारी मिल चुकी है। काश पटेल काश पटेल की नियुक्ति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही। पटेल अमेरिका में कानून व्यवस्था और नेशनल सिक्योरिटी को मजबूत करने पर फोकस करेंगे। 44 वर्षीय पटेल 2017 में तत्कालीन ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के अंतिम कुछ हफ्तों में अमेरिका के कार्यवाहक रक्षा मंत्री के ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ के रूप में भी काम कर चुके हैं। पेशे से वकील पटेल का संबंध गुजरात में वडोदरा से रहा है। पटेल भारत में अयोध्या में बने राम मंदिर को लेकर दिए बयान की वजह से भी चर्चा में रहे थे। विवेक रामास्वामी निर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप ने विवेक रामास्वामी को नए डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (डीओजीई) के लिए चुना है। बिजनेसमैन रामास्वामी का काम सरकार को सलाह देना होगा। भारतवंशी रामास्वामी करोड़पति शख्स हैं और एक दवा कंपनी के फाउंडर भी हैं। विवेक रामास्वामी राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी का उम्मीदवार बनने की दौड़ में शामिल थे लेकिन बाद में उन्होंने अपनी दावेदारी वापस ले ली। इसके बाद उन्होंने ट्रंप का समर्थन करने का फैसला किया था। भारतीय प्रवासी के 39 वर्षीय पुत्र रामास्वामी पहले भारतीय-अमेरिकी हैं जिन्हें ट्रंप ने अपने प्रशासन में शामिल किया है। उनके पिता वी गणपति रामास्वामी पेश से इंजीनियर हैं, जबकि उनकी माता गीता रामास्वामी मनोचिकित्सक हैं। उनके माता-पिता केरल से अमेरिका चले गए थे। सिनसिनाटी, ओहियो में जन्मे और पले-बढ़े, भारतीय मूल के बिजनेसमैन राष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी थे। उन्होंने हार्वर्ड से बायोलॉजी में ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने अपनी खुद की बायोटेक कंपनी, ‘रोइवेंट साइंसेज’ शुरू की। बायोटेक बिजनेसमैन की शादी अपूर्वा से हुई है, जो गले की सर्जन हैं। वे ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी वेक्सनर मेडिकल सेंटर में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। वे कोलंबस, ओहियो में रहते हैं और उनके दो बेटे हैं। तुलसी गबार्ड डेमोक्रेटिक पार्टी की पूर्व सदस्य तुलसी गबार्ड ‘डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस’ (डीएनआई) के रूप में सेवाएं देंगी। गबार्ड चार बार सांसद रह चुकी हैं। वह 2020 में वह राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए उम्मीदवार भी थीं। गबार्ड के पास पश्चिम एशिया और अफ्रीका के संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में तीन बार तैनाती का अनुभव है। वह हाल ही में डेमोक्रेटिक पार्टी को छोड़कर रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हुई थीं। जय भट्टाचार्य ट्रंप ने भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक जय भट्टाचार्य को देश के टॉप हेल्थ रिसर्च एवं वित्त पोषण संस्थानों में से एक, ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ (एनआईएच) के निदेशक के रूप में चुना है। इसके साथ ही भट्टाचार्य, ट्रंप द्वारा शीर्ष प्रशासनिक पद के लिए नामित होने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी बन गए हैं। डॉ. भट्टाचार्य रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर के साथ मिलकर राष्ट्र के मेडिकल रिसर्च की दिशा में मार्गदर्शन करेंगे। उषा वेंस भारतीय-अमेरिकी वकील उषा चिलुकुरी वेंस उस समय चर्चा में आईं, जब उनके पति जे डी वेंस को रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार नामित किया गया। ट्रंप-वेंस की जीत के साथ, 38 साल की उषा अमेरिका की सेकंड लेडी बनने वाली हैं। इस भूमिका में उषा पहली भारतीय-अमेरिकी होंगी। उषा, ओहियो के सीनेटर जे डी वेंस (39) के साथ खड़ी थीं, जब ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद समर्थकों को संबोधित किया। भारतीय प्रवासियों की बेटी उषा सैन डिएगो उपनगर में पली-बढ़ीं। उनके माता-पिता का पैतृक गांव आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले में वडलुरु है। पढ़ाई में होनहार छात्रा रहीं और किताबों से लगाव रखने वाली उषा ने आगे चलकर नेतृत्व के गुण दिखाए। उषा का जुड़ाव कैम्ब्रिज, येल यूनिवर्सिटी से भी रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न सदस्यों के लिए भी काम किया। उनकी आखिरी नौकरी मुंगर, टोल्स एंड ओल्सन एलएलपी में दीवानी मुकदमे की वकील के रूप में थी। उषा और वेंस की मुलाकात येल लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान हुई थी। बाद में 2014 में केंटकी में उनकी शादी हुई। वेंस के तीन बच्चे हैं। बेटे इवान और विवेक साथ ही एक बेटी जिसका नाम मिराबेल है।

श्रीलंका में इस्राइली पर्यटकों को निशाना बनाने का ईरानी को दिया जिम्मा, ट्रंप की हत्या की साजिश में सनसनीखेज खुलासा

वॉशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में बंपर जीत दर्ज करने वाले डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की एक और साजिश का खुलासा हाल ही में हुआ। मामले में अमेरिकी खुफिया विभाग ने फरहाद शकेरी नाम के ईरानी नागरिक पर आरोप लगाए हैं। अब एक और बड़ा दावा किया जा रहा कि इस शख्स को ईरानियों ने श्रीलंका में इस्राइली पर्यटकों को निशाना बनाने का काम सौंपा था। एफबीआई ने 51 वर्षीय सदस्य फरहाद शकेरी पर आरोप लगाया, जिसके बारे में माना जाता है कि वह ईरान में रहता है। इसके अलावा, दो आरोपियों कार्लिस्ले रिवेरा (49) और जोनाथन लोडहोल्ट (36) को गुरुवार को न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन और स्टेटन द्वीप से गिरफ्तार किया गया था। आईआरजीसी का सदस्य शकेरी एफबीआई के मुताबिक, फरहाद शकेरी एक ‘ईरानी एसेट’ है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स (IRGC) का सदस्य है । फरहाद को सात अक्तूबर को ईरान ने ट्रंप की हत्या की योजना बनाने का काम सौंपा था। एफबीआई का कहना है कि इसके लिए आईआरजीसी ने समयसीमा भी तय की थी। एफबीआई को पहले ही मिल गई थी जानकारी मैनहट्टन की संघीय अदालत में शिकायत के अनुसार, एफबीआई को इस योजना की जानकारी हो गई थी, जिसके बाद इसे नाकाम कर दिया गया। शकेरी ने एफबीआई को बताया कि ईरानी रिपब्लिकन गार्ड के अधिकारी ने उसे पिछले सितंबर में निर्देश दिया था कि वह अपने बाकी काम छोड़कर सात दिनों के भीतर ट्रंप की निगरानी करने और उन्हें मारने की योजना तैयार करे। अक्तूबर में सामूहिक गोलीबारी की योजना… संघीय अदालत में दायर दस्तावेजों के अनुसार, शकेरी को आईआरजीसी द्वारा श्रीलंका में इस्राइली पर्यटकों को निशाना बनाने और इस साल की अक्तूबर में सामूहिक गोलीबारी की योजना बनाने के लिए कहा गया था। 23 अक्तूबर के आसपास दी गई थी चेतावनी 23 अक्टूबर को या उसके आसपास, संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्राइल की सरकारों ने सार्वजनिक रूप से यात्रियों को अरुगम खाड़ी क्षेत्र में पर्यटक स्थलों को निशाना बनाकर किए जाने वाले हमले के खतरों के बारे में चेतावनी दी थी और अगले ही दिन श्रीलंकाई अधिकारियों ने धमकी के संबंध में तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार करने की सूचना दी थी। न्याय विभाग ने कहा कि 28 अक्तूबर को, संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्राइल की सरकारों द्वारा जारी सार्वजनिक यात्रा चेतावनियों के बाद और श्रीलंकाई अधिकारियों द्वारा दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद, शकेरी ने एफबीआई को बताया कि उसने पहले दोनों लोगों को श्रीलंका में इस्राइली वाणिज्य दूतावास की निगरानी का काम सौंपा था। शकेरी ने बताया कि उसने और गिरफ्तार किए गए लोगों ने एक साथ जेल में समय बिताया था। यह निगरानी आईरजीसी अधिकारी-I को दी गई थी। शकेरी के अनुसार, इस्राइली वाणिज्य दूतावास पर निगरानी किए जाने के बाद आईआरजीसी अधिकारी-I ने उससे दूसरे लक्ष्य की पहचान करने के लिए कहा।

सातों स्विंग स्टेट में जीत दर्ज कर रचा इतिहास, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने एरिजोना राज्य भी जीता

वॉशिंगटन. अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं, लेकिन कुछ जगहों पर अभी भी मतगणना जारी थी। इनमें से एक एरिजोना भी था। शनिवार को घोषित हुए नतीजों में डोनाल्ड ट्रम्प ने एरिजोना में भी जीत हासिल की। इसके साथ ही राष्ट्रपति चुनाव में सातों स्विंग राज्यों में जीत दर्ज कर डोनाल्ड ट्रंप ने इतिहास रच दिया। इससे पहले साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेट पार्टी ने जो बाइडन के नेतृत्व में एरिजोना में जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार ट्रंप के नेतृत्व में रिपब्लिकन पार्टी ने इस राज्य की सभी 11 इलेक्टोरल वोट पर अपना कब्जा जमाया। एरिजोना राज्य रिपब्लिकन पार्टी का गढ़ माना जाता है। साल 2020 में एरिजोना में जीत दर्ज करने वाले जो बाइडन बीते 70 वर्षों में सिर्फ दूसरे डेमोक्रेट नेता थे। अब 2024 में एक बार फिर से रिपब्लिकन पार्टी ने अपना गढ़ बचाने में सफलता हासिल की है। ट्रंप के खिलाफ कई आपराधिक मामले चल रहे हैं, इसके बावजूद उन्होंने 2016 के मुकाबले ज्यादा इलेक्टोरल वोट से राष्ट्रपति चुनाव जीता है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प को अब तक 312 इलेक्टोरल वोट मिले हैं, जो व्हाइट हाउस की दौड़ जीतने के लिए आवश्यक 270 से कहीं ज्यादा हैं। साल 2016 के चुनाव में ट्रंप को 304 इलेक्टोरल वोट मिले थे। सभी स्विंग राज्यों में ट्रंप को जिताया अमेरिकी मीडिया के अनुसार, जॉर्जिया, पेंसिल्वेनिया, मिशिगन और विस्कॉन्सिन जैसे स्विंग राज्यों सहित 50 राज्यों में से आधे से अधिक में ट्रम्प को विजेता घोषित किया गया है। गौरतलब है कि इनमें से सभी ने पिछले चुनाव में डेमोक्रेटिकत पार्टी को वोट दिया था। ट्रंप ने स्विंग राज्यों उत्तरी कैरोलिना और नेवादा में भी जीत हासिल की। वहीं कमला हैरिस को अब तक 226 इलेक्टोरल वोट मिले हैं। ट्रंप के जीत के साथ ही यह लगातार चौथी बार होगा, जब व्हाइट हाउस पर डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी का बारी-बारी से कब्जा होगा। 19वीं सदी के उत्तरार्ध के बाद यह पहली बार हो रहा है, जब अमेरिकी मतदाता हर चार साल के कार्यकाल के बाद दूसरी पार्टी की सरकार को सत्ता सौंप देते हैं। क्या होते हैं स्विंग स्टेट और क्यों हैं ये अहम अमेरिका में स्विंग स्टेट उन राज्यों को कहा जाता है, जहां पार्टियों का समर्थन बदलता रहता है। मतलब जहां अमेरिका के कई राज्यों में पहले से विभिन्न सर्वे में पता चल जाता है, कि इन राज्यों में किस पार्टी को जीत मिलेगी, वहीं कुछ राज्यों में बेहद कड़ा मुकाबला होता है और वहां किसी भी पार्टी का पलड़ा भारी हो सकता है। यही वजह है कि इन राज्यों को स्विंग स्टेट कहा जाता है और राष्ट्रपति चुनाव में किस उम्मीदवार को जीत मिलेगा, उसमें इन स्विंग स्टेट की अहम भूमिका होती है। 2024 के चुनाव में सात स्विंग स्टेट थे जिनमें पेंसिल्वेनिया, मिशिगन, जॉर्जिया, विस्कॉन्सिन, उत्तरी कैरोलिना, नेवादा, एरिजोना का नाम शामिल रहा। अब चुनाव नतीजों में सातों स्विंग स्टेट में ट्रंप का जीतना ऐतिहासिक है। राष्ट्रपति चुनाव तीन प्रकार के राज्य तय करते हैं —  रेड स्टेट्स: रिपब्लिकन पार्टी 1980 के बाद से जीत रही है।  ब्लू स्टेट्स: 1992 से ही डेमोक्रेट्स का वर्चस्व रहा है।  स्विंग स्टेट: पूरी तरह से अलग नतीजे देते हैं। अक्सर इन राज्यों में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स में कांटे की टक्कर होती है। यह राज्य ही चुनावी भाग्य का फैसला करते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की शानदार जीत पर PM मोदी ने दी बधाई, दिया ये खास संदेश

वाशिंगटन अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटों की गिनती जारी है. इस बीच अमेरिकी मीडिया आउटलेट फॉक्स न्यूज ने ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की जीत का ऐलान कर दिया है. इस ऐलान के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप अपने समर्थकों के बीच उन्हें संबोधित करने पहुंच गए हैं. वोटर्स को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका एक बार फिर से महान बनने जा रहा है. उन्होंने अपने वोटर्स को धन्यवाद भी कहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज करने वाले डोनाल्ड ट्रंप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी. बता दें कि चुनाव प्रचार के दौरान दोनों प्रतिद्वंद्वियों का पूरा फोकस 7 स्विंग स्टेट्स पर था, जिनमें से सभी में ट्रंप आगे चल रहे हैं. इनमें से दो में डोनाल्ड ट्रंप ने जीत भी हासिल कर ली है. बता दें कि दुनिया की सबसे जटिल इस चुनावी प्रक्रिया में राष्ट्रपति बनने के लिए बहुमत का आंकड़ा 270 है. क्योंकि यहां पर कुल 538 इलेक्टोरल कॉलेज हैं और जीत के लिए 270 या उससे ज्यादा की जरूरत होती है. अगला राष्ट्रपति इलेक्टोरल कॉलेज के जरिए ही चुना जाएगा.  डोनाल्ड ट्रंप ने की एलॉन मस्क की तारीफ ट्रंप ने कहा कि वह चाहते हैं कि लोग अमेरिका में वापस आएं, लेकिन कानूनी तरीके से. यहां मौजूद हर कोई बहुत खास और महान है. ट्रम्प ने एलन मस्क की तारीफ की और कहा कि वह कमाल के आदमी हैं. ट्रंप ने आगे कहा कि एलन मस्क ने जो किया है, क्या रूस कर सकता है, क्या चीन कर सकता है, कोई और ऐसा नहीं कर सकता. उन्होंने स्पेस एक्स के हालिया लॉन्च की भी तारीफ की. ट्रंप ने आगे कहा कि हम वो देश हैं, जिसे मदद की सख्त जरूरत है. हम अपनी सीमाओं को ठीक करने जा रहे हैं.  ऐसी जीत अमेरिका ने पहले कभी नहीं देखी- ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप के बाद अमेरिका के उप राष्ट्रपति उम्मीदवार जेडी वेंस ने भी रिपब्लिकन पार्टी के वोटर्स को संबोधित किया. जेडी वेंस ने कहा,’मैं बधाई देना चाहता हूं. अमेरिका के इतिहास में महान राजनीतिक वापसी हुई है. अमेरिकी इतिहास में यह सबसे बड़ी आर्थिक वापसी हुई है.’  अमेरिकी इतिहास में यह सबसे बड़ी आर्थिक वापसी: ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप के बाद अमेरिका के उप राष्ट्रपति उम्मीदवार जेडी वेंस ने भी रिपब्लिकन पार्टी के वोटर्स को संबोधित किया. जेडी वेंस ने कहा,’मैं बधाई देना चाहता हूं. अमेरिका के इतिहास में महान राजनीतिक वापसी हुई है. अमेरिकी इतिहास में यह सबसे बड़ी आर्थिक वापसी हुई है.’ बता दें कि जेडी वेंस ने भी अपने क्षेत्र से जीत हासिल की है. ऐसी जीत अमेरिका ने पहले कभी नहीं देखी- ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप ने अपने वोटर्स को संबोधित करते हुए कहा,’हम मतदाताओं के लिए सब कुछ ठीक करने जा रहे हैं. यह एक ऐसी राजनीतिक जीत है, जो हमारे देश ने पहले कभी नहीं देखी. 47वें राष्ट्रपति के रूप में मैं हर दिन आपके लिए लड़ूंगा. यह अमेरिका के लिए एक शानदार जीत है, जो अमेरिका को फिर से महान बनाएगी.’

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