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1090 करोड़ रुपये का निवेश उत्तर प्रदेश में शिशु देखभाल पर, मृत्यु दर घटाने पर जोर

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गाजियाबाद गाजियाबाद समेत प्रदेश के 75 जिलों में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के संचालन एवं शिशु देखभाल पर 1090 करोड़ खर्च होंगे।राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक डॉ.पिंकी जोवल ने पहली बार बच्चों की देखभाल के लिये भारी भरकम बजट आवंटित करने के साथ ही इसको खर्च करने के लिये सख्त निर्देश जारी किये हैं। सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने बजट आवंटन संबंधी पत्र के मिलने की पुष्टि की है। गाजियाबाद समेत सभी जिलों के सीएमओ को भेजे गये पत्र में निर्देश दिये गये हैं कि आवंटित धनराशि का उपयोग वित्तीय नियमों के तहत किया जाये। प्रत्येक भुगतान एफएएमएस एवं एसएनए स्पर्श पोर्टल का प्रयोग करते हुए ससमय नियमानुसार व्यय एवं भुगतान किया जाये। स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण के लिये 31 लाख का बजट मेरठ मंडल स्तर पर चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण के लिये 31 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है। एसएनसीयू को बेहतर तरीके से संचालित करने, नये उपकरण लगाने एवं मेंटेनेंस के लिये भी बजट दिया गया है। जिला महिला अस्पताल में 18 बेड के एसएनसीयू, संयुक्त अस्पताल के पीकू-नीकू वार्ड में मेडिकल संसाधन बढ़ाने और छह सीएचसी में अत्याधुनिक नर्सरी बनाने को भी धनराशि दी गई है। शिशुओं की देखभाल में लगे चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों के मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिलाने का भी रोस्टर जारी किया गया है।शिशु मृत्यु दर को कम करने और आरबीएसके को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिये यह धनराशि आवंटित की गई है। बता दें कि जिले में हर साल 40 से अधिक शिशुओं की मौत नर्सरी में उपचार के दौरान हो रही है।घर पर होने वाली मौत का डाटा अलग है। अकेले जिला महिला अस्पाल में संचालित एसएनसीयू में अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच भर्ती होने वाले 1233 बच्चों में से 29 बच्चों की मौत हुई है। यह रिपोर्ट 28 फरवरी को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में रखी गई। जिला स्वास्थ्य समिति के समक्ष रखी गई जिला महिला अस्पताल में शिशु मृत्यु की रिपोर्ट माह     शिशु मृत्यु अप्रैल     3 मई     2 जून     2 जुलाई     10 अगस्त     3 सितंबर     2 नवंबर     4 दिसंबर     0 जनवरी 2026     3  

वैश्विक निवेश, टेक्नोलॉजी और भरोसे के दम पर बदलता उत्तर प्रदेश

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1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा यूपी, सिंगापुर-जापान दौरे ने खोले नए द्वार 2.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव बने ‘ब्रांड योगी’ पर भरोसे की नई कहानी बेहतरीन कानून व्यवस्था और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बना निवेश का आधार लखनऊ,  उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। यह वही प्रदेश है, जिसे नौ साल पहले अत्यधिक जनसंख्या और पिछड़ेपन के संदर्भ में देखा जाता था। आज वही उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेश, अत्याधुनिक तकनीक और निर्णायक नेतृत्व के बल पर 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास से बढ़ रहा है। यह बदलाव आकस्मिक नहीं है। इसके पीछे एक स्पष्ट विजन, कठोर प्रशासनिक इच्छाशक्ति और निवेशकों को दिया गया भरोसेमंद वातावरण है। हालिया सिंगापुर और जापान दौरे से लौटे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे उत्तर प्रदेश के लिए विश्वास और अवसर का नया अध्याय बताया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि यह दौरा केवल निवेश जुटाने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उत्तर प्रदेश के बदलते विकास मॉडल को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर था। सिंगापुर-जापान दौरा: कूटनीति से अर्थनीति तक हालिया सिंगापुर-जापान दौरा केवल एक शिष्टाचार यात्रा नहीं था। यह आर्थिक कूटनीति का सुविचारित प्रयास था। सरकार-से-सरकार (G2G), सरकार-से-व्यवसाय (G2B) और उद्योग-से-उद्योग (B2B) संवादों के माध्यम से 60 से अधिक उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की गईं। नतीजा, जापान में लगभग ₹90,000 करोड़ के एमओयू और ₹1.5 लाख करोड़ तक के निवेश प्रस्ताव तथा सिंगापुर में ₹60,000 करोड़ के एमओयू और लगभग ₹1 लाख करोड़ तक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। कुल मिलाकर 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों को मुख्यमंत्री ब्रांड यूपी पर वैश्विक भरोसे की मुहर मानते हैं। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश अब निवेशकों के लिए केवल संभावनाओं का प्रदेश नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की क्षमता वाला राज्य बन चुका है। उत्तर प्रदेश अब निवेश मानचित्र पर उभरता विकल्प नहीं, विश्वसनीय गंतव्य बन चुका है। ‘ब्रांड योगी’: नीति, निर्णायकता और विश्वास किसी भी निवेश का पहला आधार आंकड़े नहीं, विश्वास होता है। उत्तर प्रदेश में यह विश्वास दो स्तरों पर निर्मित हुआ है। पहला राष्ट्रीय नेतृत्व की वैश्विक साख और दूसरा प्रदेश नेतृत्व की प्रशासनिक दृढ़ता। मुख्यमंत्री का मानना है कि पिछले वर्षों में प्रदेश ने कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और सेक्टोरल नीतियों में जो संरचनात्मक सुधार किए हैं, उसी का परिणाम है कि सिंगापुर और जापान जैसे विकसित देशों के निवेशक बड़े पैमाने पर राज्य में रुचि दिखा रहे हैं। एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर नीति, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब जैसे प्रोजेक्ट्स को सीएम योगी इस भरोसे की आधारशिला बताते हैं। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: निवेश से आगे की सोच जापान और सिंगापुर दौरे की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि फोकस केवल पूंजी निवेश पर नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और कौशल विकास पर भी रहा। दौरे के दौरान ग्रीन हाइड्रोजन, क्लीन एनर्जी, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, फिनटेक, मेडिटेक व डीपटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाश की गईं। मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि उत्तर प्रदेश को दीर्घकालिक औद्योगिक शक्ति बनाना है तो उसे भविष्य की तकनीकों से जुड़ना ही होगा। कानून व्यवस्था: निवेश की असली रीढ़ किसी भी औद्योगिक विकास की सबसे मजबूत नींव कानून व्यवस्था होती है। उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्षों में इस क्षेत्र में निर्णायक सुधार किए हैं। माफिया और संगठित अपराध पर सख्ती, निवेशकों की सुरक्षा की गारंटी और प्रशासनिक जवाबदेही ने प्रदेश की छवि को बदला है। आज निवेशक उत्तर प्रदेश को एक स्थिर, सुरक्षित और सुनियोजित नीति वाले राज्य के रूप में देखते हैं, जो बड़े निवेश के लिए अनिवार्य शर्त है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट मत है कि मजबूत कानून व्यवस्था के बिना औद्योगिक विकास संभव नहीं है। वह कहते हैं कि पिछले वर्षों में माफिया और संगठित अपराध पर सख्ती तथा प्रशासनिक जवाबदेही ने प्रदेश की छवि बदली है। निवेशक सुरक्षा, स्थिरता और पारदर्शिता चाहते हैं। उत्तर प्रदेश ने यह भरोसा दिया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: प्रक्रिया से परिणाम तक योगी सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन अनुमतियां और समयबद्ध स्वीकृतियों से उद्योगों के लिए प्रक्रियागत बाधाएं कम की हैं। उत्तर प्रदेश अब निवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाकर प्रतिस्पर्धी राज्यों की श्रेणी में खड़ा है। जो प्रक्रियाएं कभी महीनों लेती थीं, वे अब तय समय-सीमा में पूरी हो रही हैं। उत्तर प्रदेश ने वास्तव में ‘रेड टेप’ की जटिलता से निकलकर ‘रेड कार्पेट’ की संस्कृति को अपनाया है, जहां निवेशक को अड़चनों से नहीं, समाधान से संतुष्ट किया जाता है। यही प्रशासनिक दक्षता और नीतिगत स्पष्टता आज वैश्विक निवेशकों के बीच प्रदेश को प्रतिस्पर्धी, विश्वसनीय और परिणामोन्मुख गंतव्य के रूप में स्थापित कर रही है। रोजगार, युवा और 1 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रस्तावित निवेश धरातल पर उतरते हैं तो लाखों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। आईटी, ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स, रक्षा उत्पादन, ग्रीन एनर्जी और एमएसएमई सेक्टर में निवेश प्रदेश की आर्थिक संरचना को नई मजबूती देगा। उनका कहना है कि 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक परिवर्तन का रोडमैप है, जहां उद्योग, कृषि, सेवाएं और निर्यात की समान भागीदारी अनिवार्य है।

रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बन गया है उत्तर प्रदेश: योगी

राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सीएम योगी ने प्रस्तुत की प्रदेश की तेज आर्थिक प्रगति की तस्वीर सीएम योगी बोले, जनता जनार्द़न पर कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं, चोरी को रोका गया लखनऊ विधान परिषद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान प्रदेश की तेज आर्थिक प्रगति की तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने राजस्व अनुशासन, किसानों की आय वृद्धि और कृषि क्षेत्र में तकनीकी बदलावों को सरकार की प्रमुख उपलब्धि बताया। कहा कि बिना अतिरिक्त कर लगाए टैक्स चोरी पर अंकुश और विकास के संतुलित मॉडल से प्रदेश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 में उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी मात्र 13 लाख करोड़ रुपये थी। 1947 से लेकर 2017 तक इस यात्रा को तय करने में 70 वर्ष लगे। 2017 के बाद मात्र आठ से साढ़े आठ वर्ष के बीच में डबल इंजन सरकार ने इसमें 23 लाख करोड़ अतिरिक्त जोड़े हैं। सीएम योगी ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था 36 लाख करोड़ की हो चुकी है। जब देश आजाद हुआ था, यूपी का शेयर 14 प्रतिशत था। लगातार घटते-घटते 2016-17 में यह आठ प्रतिशत रह गया। अब लगातार आगे बढ़ते हुए 9.5 प्रतिशत तक पहुंचने में सफलता प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर कैपिटा इनकम को तीन गुना करने में सफलता मिली है। इसके लिए जनता जनार्दन पर कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं लगाया। हमने टैक्स चोरी को जरूर रोका है। रेवेन्यू लीकेज पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया। आज प्रदेश पिछले पांच वर्षों में लगातार रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में अपने आप को स्थापित कर चुका है। जोरदार वित्तीय अनुशासन और विकास दोनों का संतुलन आज उत्तर प्रदेश के अंदर देखने को मिल रहा है। सीएम ने कहाकि बैंकों में पहले उत्तर प्रदेश के अंदर 100 रुपए जमा होते थे जो मात्र 43 रुपये जनता के उपयोग में खर्च होते थे। हमने इसे बढ़ाकर 61-62 रुपये तक पहुंचा दिया है। उत्तर प्रदेश के नौजवानों और व्यापारियों तक इसके उपयोग को पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है। यानी सीडी रेशियो 43 से बढ़कर 62 प्रतिशत पहुंचाने में हमने सफलता प्राप्त की है। मुझे इस बात का गर्व है कि उत्तर प्रदेश आज सही दिशा में बेहतरीन ढंग से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश करता है सबसे ज्यादा खाद्यान्न उत्पादन सीएम योगी ने कहा कि विपक्ष के लोग भी गाहे-बगाहे अन्नदाता की चर्चा करते हैं, लेकिन नीयत उनकी साफ नहीं है। उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य भी है। सबसे ज्यादा खाद्यान्न उत्पादन भी करता है लेकिन अन्नदाता किसानों की स्थिति उनके समय में क्या थी। इन्होंने कहां पहुंचा दिया था? भारत आज से 2000 वर्ष पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था का सिरमौर था। 44 प्रतिशत वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारत का अधिकार था। वह भारत का स्वर्ण युग था। आज से 400 वर्ष पहले भी भारत की स्थिति यही थी और ग्लोबल इकॉनामी में भारत का शेयर 24-25 प्रतिशत था। किसानों के साथ पिछली सरकारों में औपनिवेशिक मानसिकता का व्यवहार हुआ सीएम योगी ने कहा कि औपनिवेशिक काल में यहां शोषण हुआ, लूट हुई, परंपरागत उद्यम समाप्त किए गए। अन्नदाता किसानों को, जो पहले उत्पादक था, उसे उपभोक्ता बनाकर रख दिया गया। कच्चा माल यहां से बाहर जाता था, फिर पक्का माल बनकर आता था और उस पर भारी टैक्स लगाकर महंगा बेचा जाता था। आज हम कह सकते हैं कि पिछली सरकारों में भी औपनिवेशिक मानसिकता के साथ अन्नदाता किसानों, एमएसएमई सेक्टर और परंपरागत उद्यम से जुड़े कारीगरों के साथ यही व्यवहार हुआ। किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता से यह देश खड़ा हुआ आज पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसान, कारीगर सभी को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया गया है। हम मानते हैं कि किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता से यह देश खड़ा हुआ है। हर गांव हमारे यहां एक आधारभूत इकाई हुआ करता था। ग्राम स्वराज इसकी आधारशिला थी। चाहे पशुपालन हो, कृषि हो, हस्तशिल्प हो हर क्षेत्र में किसान उत्पादक था, कारीगर स्वयं में उद्यमी था और व्यापारी राष्ट्र को जोड़ने का सेतु हुआ करता था। डबल इंजन की डबल स्पीड लागत कम, उत्पादन ज्यादा 2017 के पहले कृषि के बारे में कोई स्पष्ट नीति नहीं थी। अन्नदाता केवल वोट बैंक बन गया था। लागत अधिक, उत्पादन कम था और बिचौलियों का वर्चस्व था। 2017 के बाद डबल इंजन की डबल स्पीड से लागत कम, उत्पादन ज्यादा अन्नदाता को विकास में भागीदार बनाया गया। अन्नदाता से उद्यमी बनने की कहानी आज उत्तर प्रदेश में देखी जा सकती है। भूभाग का 11 प्रतिशत यूपी के पास लेकिन 21 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन हमारा संकल्प कृषि को इनकम-बेस्ड और वैल्यू एडिशन मॉडल के साथ किसानों की आय बढ़ाना है। आज उत्तर प्रदेश में कृषि विकास दर 8.5 से बढ़कर साढ़े 18 प्रतिशत तक पहुंची है। एमएसपी पर पारदर्शी खरीद हो रही है और डीबीटी का पैसा सीधे अन्नदाता किसानों के खाते में जा रहा है। इसी का परिणाम है कि देश के कुल कृषि भूभाग का 11 प्रतिशत यूपी के पास है, लेकिन 21 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन कर रहा है। अन्नदाता को खेत से बाजार तक ग्लोबल मार्केट उपलब्ध है। किसानों को खेती संबंधी तकनीकी जानकारी सरल भाषा में सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में भी उत्तर प्रदेश के किसानों को 95 हजार करोड़ रुपये की धनराशि उनके खाते में हस्तांतरित हुई है। आज अन्नदाता किसानों को उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती, ड्रोन और जलवायु संबंधी तकनीकी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाई जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों, स्टार्टअप और प्रगतिशील किसानों के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। कृषि आधारित उद्योगों की गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान ड्रोन दीदी, एफपीओ, एग्री स्टार्टअप और फूड प्रोसेसिंग के माध्यम से फसलों का मूल्यवर्धन हो रहा है। यूपी एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड एंटरप्राइज इकोसिस्टम” परियोजना के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और कृषि आधारित उद्योगों की गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहले धड़ल्ले से चलते थे स्लॉटर हाउस 2017 के पहले प्रदेश में स्लॉटर हाउस धड़ल्ले से चलते थे। व्यापक तस्करी होती थी और आस्था के साथ खिलवाड़ … Read more

योगी सरकार की ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’

25 वर्ष से ज्यादा पुराने प्रोजेक्ट्स को मिलेगी नई जिंदगी स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य, सोसायटी अथवा अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के दो-तिहाई सदस्यों की सहमति के बाद ही लागू होगी पुनर्विकास प्रक्रिया पीपीपी मॉडल के तहत निजी डेवलपर की भागीदारी, त्रिपक्षीय समझौते से तय होंगी जिम्मेदारियां डीपीआर, ट्रांजिट आवास और 3 वर्ष की समयसीमा, योगी सरकार का टाइम-बाउंड रीडेवलपमेंट ब्लूप्रिंट नियोजन मानकों में व्यावहारिक लचीलापन, बोर्ड अनुमोदन से तेज होगा अमल लखनऊ, तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पुराने हो चुके ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की जर्जर स्थिति को देखते हुए योगी सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’ लागू कर दी है। इस नीति का मकसद 25 वर्ष या उससे अधिक पुराने भवनों को सुरक्षित, आधुनिक और सुविधायुक्त रूप में पुनर्विकसित करना है, ताकि लोगों को बेहतर और सुरक्षित आवास मिल सके। कैबिनेट की मंजूरी के बाद शहरी एवं नियोजन विभाग द्वारा अब इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। योगी सरकार की यह नीति न सिर्फ पुराने और असुरक्षित भवनों को नया जीवन देगी, बल्कि निर्माण, रियल एस्टेट और संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। बेहतर नियोजन और आधुनिक डिजाइन के जरिए यह पहल उत्तर प्रदेश के शहरों को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। एकल आवास नीति में शामिल नहीं प्रदेश के कई शहरों में पुराने अपार्टमेंट और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं अब संरचनात्मक रूप से कमजोर हो चुकी हैं। ऐसे भवनों में रहना जोखिम भरा हो गया है और महंगी शहरी जमीन का पूरा उपयोग भी नहीं हो पा रहा। नई नीति के जरिए सरकार इन पुराने और कम उपयोग किए जा रहे परिसरों को नए सिरे से विकसित कर शहरों के स्वरूप को बेहतर बनाना चाहती है। नीति के तहत वे सभी सार्वजनिक और निजी प्रोजेक्ट्स पुनर्विकास के लिए पात्र होंगे, जो कम से कम 25 वर्ष पुराने हैं या जिन्हें स्ट्रक्चरल ऑडिट में असुरक्षित पाया गया हो। हाउसिंग सोसायटी या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के मामलों में प्रक्रिया शुरू करने के लिए दो-तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होगी। 1500 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल की भूमि और एकल मकान इस नीति में शामिल नहीं किए गए हैं। इसके अलावा नजूल की भूमि, लीज पर आवंटित भूमि तथा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की भूमि भी इस पुनर्विकास नीति में शामिल नहीं होगी। तीन मॉडल्स से तय होगा पुनर्विकास सरकार ने पुनर्विकास के लिए तीन मॉडल तय किए हैं। पहला, शासकीय एजेंसी द्वारा सीधे काम कराना, दूसरा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत निजी डेवलपर की भागीदारी और तीसरा सोसायटी या एसोसिएशन द्वारा स्वयं पुनर्विकास। पीपीपी मॉडल में शासकीय अभिकरण, डेवलपर और सोसायटी के बीच त्रिपक्षीय समझौता होगा, जिसमें सभी की जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी। हर परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करना अनिवार्य होगा। इसमें नए फ्लैट्स का कारपेट एरिया, पार्किंग, कॉमन एरिया, ट्रांजिट आवास या किराये की व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और तय समयसीमा जैसी सभी जानकारियां शामिल होंगी। पुनर्विकास के दौरान जिन निवासियों को अस्थायी रूप से स्थानांतरित करना होगा, उन्हें वैकल्पिक आवास या किराया दिया जाएगा। तीन वर्ष में पूरी होगी परियोजना परियोजना को सामान्यतः तीन वर्ष में पूरा करना होगा, जबकि विशेष परिस्थितियों में अधिकतम दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। नियोजन मानकों में भी व्यावहारिक लचीलापन रखा गया है। बोर्ड की मंजूरी से केस-टू-केस आधार पर कुछ शर्तों में ढील दी जा सकेगी, ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हों। साथ ही, आपस में जुड़े एक से अधिक भूखंडों को मिलाकर पुनर्विकास की अनुमति दी गई है, जिससे बेहतर और समेकित विकास संभव होगा।

आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण को गति देगी एआई कौशल क्रांति

    प्रदेश सरकार लाखों युवाओं के लिए शुरू करेगी एआई और इमर्सिव तकनीकों का व्यापक प्रशिक्षण अभियान डिजिटल अवसंरचना से डिजिटल दक्षता तक, टैबलेट बने कौशल विकास का माध्यम, निवेश और उद्योगों के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने की रणनीति भविष्य के रोजगारों की ठोस रणनीति और तैयारी के साथ आगे बढ़ने को तैयार उत्तर प्रदेश लखनऊ,  योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीते कुछ वर्षों में विकास की जिस नई कार्यसंस्कृति को स्थापित किया है, उसका केंद्र बिंदु केवल आधारभूत संरचना का निर्माण नहीं, बल्कि ह्यूमन कैपिटल (मानव पूंजी) का सशक्तीकरण भी है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश सरकार द्वारा ‘टेक युवा-समर्थ युवा’ योजना की शुरुआत की गई है। यह योजना प्रदेश में 25 लाख युवा शक्ति को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसी आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित कर उत्तर प्रदेश को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने का व्यापक अभियान है। योगी सरकार का स्पष्ट मत है कि 21वीं सदी की प्रतिस्पर्धा केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि कौशल की है। प्रदेश में पहले चरण में डिजिटल अवसंरचना को मजबूत किया गया। बड़ी संख्या में युवाओं को टैबलेट उपलब्ध कराए गए, ताकि डिजिटल पहुंच सुनिश्चित हो सके। अब उसी आधार को मजबूत करते हुए सरकार इन उपकरणों को कौशल विकास के प्रभावी माध्यम में बदल रही है। एप्लिकेशन आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से युवाओं को व्यावहारिक और उद्योगोन्मुख शिक्षा दी जाएगी, जिससे वे सीधे रोजगार या कारोबार से जुड़ सकें। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान केवल बजट का आंकड़ा नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत है। योगी सरकार युवाओं को केवल डिग्रीधारी नहीं, दक्ष और आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में एआई और उन्नत तकनीकों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश अपने युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बना रहा है। सरकार का यह प्रयास व्यापक आर्थिक रणनीति से जुड़ा हुआ है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश तेजी से बढ़ रहा है। डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर पार्क और विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं के साथ अब आवश्यकता कुशल मानव संसाधन की है। ‘टेक युवा-समर्थ युवा’ योजना इसी आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जब स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवा उपलब्ध होंगे तो उद्योगों को भी गति मिलेगी और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। इस योजना की विशेषता यह है कि इसका लाभ केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के युवा भी डिजिटल माध्यम से उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। इससे क्षेत्रीय असमानता कम करने में मदद मिलेगी और प्रदेश के हर हिस्से में समान अवसर उपलब्ध होंगे। योगी सरकार की सबका साथ सबका विकास की अवधारणा इसी प्रकार की योजनाओं के माध्यम से साकार हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रोजगार का स्वरूप तकनीक आधारित होगा। ऐसे में यदि राज्य स्तर पर बड़े पैमाने पर कौशल उन्नयन किया जाता है तो यह बेरोजगारी की चुनौती को काफी हद तक कम कर सकता है। योगी सरकार का यह कदम युवाओं में आत्मविश्वास पैदा करेगा और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा। भविष्य में इसके लाभ -युवाओं की तकनीकी दक्षता बढ़ेगी, जिससे वे उभरते एआई आधारित उद्योगों में सीधे रोजगार पा सकेंगे -प्रदेश में निवेश करने वाली कंपनियों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा, जिससे औद्योगिक विकास को गति मिलेगी -स्वरोजगार और स्टार्टअप की संभावनाएं बढ़ेंगी, क्योंकि तकनीकी रूप से दक्ष युवा नवाचार की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे -ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के युवाओं को भी समान अवसर मिलेंगे, जिससे क्षेत्रीय असमानता कम होगी एआई और उन्नत डिजिटल तकनीकों में 25 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करना केवल कौशल विकास कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक बदलाव की शुरुआत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का ये कदम प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अगले दशक के लिए रीडिफाइन करने वाला है।  इससे प्रदेश की युवा शक्ति नौकरी तलाशने वाली भीड़ नहीं, बल्कि इनोवेशन और निवेश को आकर्षित करने वाली दक्ष कार्यशक्ति में बदलेगी। मनिन्द्र अग्रवाल, डायरेक्टर, आईआईटी, कानपुर

जीएसडीपी 13 लाख करोड़ से बढ़कर 2026-27 में 36 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की ओर अग्रसर

लखनऊ, उत्तर प्रदेश की तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था के पीछे महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते नौ वर्षों में राज्य में महिला श्रम बल भागीदारी दर 13 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जिससे उत्तर प्रदेश के विकास को नई गति मिल रही है। इसी अवधि में प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2017 में करीब 13 लाख करोड़ रुपये तक सीमित रही  जीएसडीपी  2026-27 में बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये की ओर अग्रसर है। महिला श्रम बल भागीदारी दर में हर 1 प्रतिशत की वृद्धि से सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 0.5 से 1 प्रतिशत तक अतिरिक्त उछाल आता है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में  अर्थशास्त्र का यह सिद्धांत व्यवहार में साबित होता दिख रहा है। यही नहीं, महिला कार्यबल बढ़ने से उत्पादन क्षमता, श्रम उत्पादकता और राज्य के टैक्स बेस तीनों में समानांतर विस्तार हुआ है। महिलाएं बनीं ‘ग्रोथ मल्टीप्लायर’ महिलाओं की आय बढ़ने से घरेलू उपभोग में वृद्धि हुई है, जिससे एमएसएमई गतिविधियों और सेवा क्षेत्र को लगातार गति मिल रही है। ग्रामीण स्वयं सहायता समूह,  डेयरी और कृषि आधारित उद्योगों से लेकर शहरी सेवा क्षेत्र तक महिलाएं अब ‘ग्रोथ मल्टीप्लायर’ की भूमिका निभा रही हैं। ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की राह आसान करेंगी महिलाएं नीतिगत स्तर पर महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और स्वरोजगार से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए उत्तर प्रदेश में आर्थिक भागीदारी का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो उत्तर प्रदेश की ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की राह में महिलाओं की भूमिका निर्णायक रहेगी।

उत्तर प्रदेश विधान मंडल का बजट सत्र सोमवार से

माननीय राज्यपाल के अभिभाषण से होगी शुरुआत 11 फरवरी (बुधवार) को वित्तमंत्री सुरेश खन्ना पेश करेंगे वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट लखनऊ,  उत्तर प्रदेश विधान मंडल का बजट सत्र 2026-27 9 फरवरी से प्रारंभ होगा। सत्र के प्रथम दिन सोमवार को विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा व विधान परिषद) के समक्ष माननीय राज्यपाल आनंदी बेन पटेल का अभिभाषण होगा। 10 फरवरी को सदन के वर्तमान व पूर्व सदस्यों के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की जाएगी। सदन की कार्यवाही 20 फरवरी तक प्रस्तावित है। 11 फरवरी (बुधवार) को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया जाएगा। इसके पश्चात राज्यपाल के अभिभाषण (धन्यवाद प्रस्ताव) पर चर्चा होगी। 13 फरवरी तक सदन नियमित तौर पर चलेगा। 14 व 15 फरवरी को क्रमशः शनिवार व रविवार होने के कारण सदन की बैठक स्थगित रहेगी। 16 फरवरी से पुनः सदन की कार्यवाही प्रारंभ होगी। विधानसभा अध्य़क्ष सतीश महाना ने सभी सदस्यों से सदन के सफल संचालन का अनुरोध किया है। वहीं नेता सदन (मुख्यमंत्री) योगी आदित्यनाथ ने सभी सदस्यों से जनता के मुद्दों को सदन में रखने और स्वस्थ चर्चा कर प्रदेश के विकास को गति प्रदान करने के लिए सरकार का सहयोग करने का आग्रह किया है।

उत्तर प्रदेश बना देश में सर्वाधिक पंजीकरण वाला राज्य, कौशल विकास में रचा नया कीर्तिमान

राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता 2025-26 के 40 विजेताओं का सम्मान, युवाओं के सपनों को मिली नई उड़ान योगी सरकार की पहल से युवा होंगे ग्लोबल स्किल्स के लिए तैयार, अब इंडिया स्किल्स कॉम्पीटिशन में लेंगे हिस्सा कौशल, प्रतिस्पर्धा और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम, कौशल विकास मिशन के विशेष बूट कैंप से मिलेगी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी में मदद उत्तर प्रदेश बना देश में सर्वाधिक पंजीकरण वाला राज्य, कौशल विकास में रचा नया कीर्तिमान नॉर्थ रीजनल, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यूपी के युवा बढ़ाएंगे प्रदेश का गौरव लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर, रोजगारोन्मुख और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाने की दिशा में निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) द्वारा इंडिया स्किल्स कॉम्पीटिशन 2025-26 के अंतर्गत राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता के विजेताओं का भव्य सम्मान समारोह बुधवार को कौशल विकास मिशन मुख्यालय, लखनऊ में आयोजित किया गया। इस अवसर पर 20 विभिन्न स्किल ट्रेड्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 40 विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रत्येक स्किल ट्रेड से दो विजेताओं का सम्मान प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित इस समारोह में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम एवं मिशन निदेशक पुलकित खरे ने विजेताओं को सम्मानित किया। प्रत्येक स्किल ट्रेड से दो विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने कौशल, समर्पण और परिश्रम से प्रदेश का नाम रोशन किया। युवाओं का कौशल निखारने को प्रतिबद्ध योगी सरकार प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने विजेता प्रतिभागियों से संवाद कर उनके प्रशिक्षण अनुभव, प्रतियोगिता यात्रा और भविष्य की योजनाओं की जानकारी ली तथा उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को आधुनिक, रोजगारोन्मुख एवं वैश्विक मानकों के अनुरूप कौशल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे आयोजनों से युवाओं में प्रतिस्पर्धात्मक भावना विकसित होती है और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। विशेष बूट कैंप में भाग लेंगे विजेता इस अवसर पर मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता युवाओं की प्रतिभा को पहचान दिलाने का सशक्त मंच है, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने बताया कि चयनित सभी विजेता प्रतिभागी लखनऊ में आयोजित विशेष बूट कैंप में भाग लेंगे, जहां उन्हें विशेषज्ञों द्वारा नॉर्थ रीजनल स्किल कॉम्पीटिशन की तैयारी कराई जाएगी। अपर मिशन निदेशक प्रिया सिंह ने कहा कि कौशल विकास युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम है और मिशन गुणवत्तायुक्त प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रति दो वर्ष में होती है प्रतियोगिता उल्लेखनीय है कि वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता प्रत्येक दो वर्षों में आयोजित होती है। वर्ष 2024 में जहां कुल 7,472 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया था, वहीं वर्ष 2026 के लिए यह संख्या बढ़कर 1,09,249 हो गई है, जिससे उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक पंजीकरण वाला राज्य बन गया है। वर्ष 2024 में प्रदेश ने 10 स्किल्स में भागीदारी की थी, जबकि इस वर्ष 20 स्किल्स में सहभागिता कर प्रदेश ने कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इसके साथ ही, जहां पूर्व में प्रतियोगिता एक ही केंद्र पर आयोजित की जाती थी, वहीं इस वर्ष लखनऊ के 11 विभिन्न केंद्रों पर 1,270 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान मिशन की गतिविधियों को जन-जन तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया सेल का शुभारंभ किया गया तथा गुणवत्तायुक्त प्रशिक्षण को और सुदृढ़ करने हेतु नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर आन्त्रोप्रेन्योरशिप एंड स्माल बिजनेस डेवलपमेंट (NIESBUD) के साथ एमओयू का हस्तांतरण भी किया गया। इस अवसर पर इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ITOT) के निदेशक डी.के. सिंह, NIESBUD नोएडा की डायरेक्टर शिवानी डे, संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार, वित्त नियंत्रक संदीप कुमार, सहायक निदेशक डॉ. एम.के. सिंह एवं डॉ. पवित्रा टंडन, डीडीयू-जीकेवाई के सीओओ आशीष कुमार सहित मिशन के अधिकारी, कर्मचारी एवं विभिन्न जनपदों से आए अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर धर्मांतरण की कोशिशें चल रही, सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी की निगरानी, सामने आया पूरा मामला

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में बड़े स्तर पर धर्मांतरण की कोशिशें चल रही हैं। इसको लेकर कई गैंग मिशन मोड में काम कर रहे हैं। इस बीच धर्मांतरण कराने वालों का रेट कार्ड भी सामने आया है। मिली जानकारी के मुताबिक, पूरे परिवार का धर्मांतरण कराने वाले एजेंट को 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। वहीं, युवती का धर्म बदल कर शादी कराने की स्थिति में 15 हजर रुपये अतिरिक्त बोनस का प्रावधान किया गया है। मिशनरियों के धर्मांतरण के इस खेल में चर्चित स्कूल से लेकर प्रतिष्ठित संस्थान तक शामिल हैं। ये हवाला एजेंट की तर्ज पर मिशनरियों को बड़ी मात्रा में धनराशि उपलब्ध करा रहे हैं। पैसे की कमी नहीं होने से ग्रामीण स्तर तक धर्मांतरण गैंग का जाल फैल गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, धर्मांतरण एजेंट प्रचारक के तौर पर अपनी गतिविधियों को अंजाम देने में जुटे हुए हैं। ऐसे काम करता है गैंग धर्मांतरण गैंग के प्रचारक बनकर गांव-गांव तैनात किए गए हैं। ये जरूरतमंदों को टारगेट करते हैं। उनके निशाने पर पैसे की तंगी से जूझ रहे और बीमार लोग होते हैं। ऐसे लोगों को प्रार्थना सभाओं में लाने का जिम्मा प्रचारकों का होता है। मिशनरियों की ओर से हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए प्रचारकों की नियुक्ति की गई है। ऐसे में प्रचारक अपने वर्ग के लोगों को समझाने और धर्म परिवर्तन के लिए राजी करने में कामयाब होते हैं। इस पूरे अभियान को प्रचारक, पास्टर और पदारी के माध्यम चलाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि धर्मांतरण गैंग को कुछ चर्चों से भी पैसे मिलने की जानकारी सामने आई है। आईबी के एक पूर्व अधिकारी का दावा है कि जोशुआ प्रोजेक्ट की वेबसाइट धर्मांतरण के पूरे जाल को समझा जा सकता है। स्टडी के नाम पर धर्मांतरण के बढ़ावा दिया जा रहा है। श्रावस्ती में आया मामला श्रावस्ती में धर्मांतरण के प्रयास का मामला सामने आया है। इसमें पंजाब मॉडल की बात सामने आ रही है। इकौना इलाके में रविवार को धर्मांतरण मामले में हरीश सिंह का नाम आया। उसने पांच साल पहले ही पंजाब में धर्म परिवर्तन कर लिया था। गांव लौटने के बाद झोपड़ी में प्रार्थना सभा आयोजित करने लगा। सुरक्षा एजेंसियों की दबिश के बाद वह गायब हो गया। एसपी घनश्याम चौरसिया ने इस मामले में सीओ के नेतृत्व में टीम का गठन किया है। नेपाल सीमा से सटे इलाकों में इस प्रकार के गिरोह के सक्रिय होने की बात सामने आई है। देवीपाटन मंडल के श्रावस्ती, बहराइच, बलरामपुर और गोंडा जैसे संवेदनशील जिलों में पुलिस को कंवर्जन का मामला आते ही कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में आईजी अमित पाठक का कहना है कि चारों जिलों के एसपी को इस प्रकार के मामलों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिला स्तर पर सक्रिय है टीमें धर्मांतरण के लिए जिला स्तर पर गैंगों को सक्रिय किया गया है। मिशनरियां अब मिशन मुस्लिम चला रही हैं। इसके लिए सबसे अधिक 443 सक्रिय टीम के संगम नगरी प्रयागराज में काम करने की बात सामने आई है। इसके अलावा महराजगंज में 398, बहराइच में 378, श्रावस्ती में 320, बलरामपुर में 330 और गोंडा में 340 टीमों के सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। धर्मांतरण का नेटवर्क फैलाने में प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में 333 टमों के जुटे होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, अंबेडकरनगर में 347, सीतापुर में 326, सिद्धार्थनगर में 345, अमेठी में 317, रायबरेली में 323 और पीलीभीत में 346 सक्रिय टीमें अभियान में जुटी हैं। यह सब तब है, जब यूपी में धर्मांतरण के मामलों में कठोर कार्रवाई का नियम लागू है।  

टूरिज्म एण्ड वोकेशनल एजुकेशन में होगा फायदा, उत्तरप्रदेश-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व यामानाशी प्रीफेक्चर कम्पनी जापान में एमओयू

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के समक्ष आज यहां उनकेआवास पर उत्तर प्रदेश सरकार और यामानाशी प्रीफेक्चर (जापान) के मध्यइण्डस्ट्रियल कॉपरेशन, टूरिज्म एण्ड वोकेशनल एजुकेशन के क्षेत्र में एम0ओ0यू0सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश व जापान केसाथ हुआ एम0ओ0यू0 साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर मानवता के लिएमहत्वपूर्ण क्वाड देशों के साथ मिलकर कार्य करने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जीकी प्रतिबद्धता का परिणाम है। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री जी ने जापान के यामानाशी प्रान्त के मा0 राज्यपाल श्रीकोटारो नागासाकी के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमण्डल का स्वागत जापानी भाषा मेंउद्बोधन के साथ किया। प्रदेश सरकार की ओर से मुख्य सचिव श्री मनोज कुमारसिंह और यामानाशी प्रान्त के गवर्नर्स पॉलिसी प्लानिंग ब्यूरो के महानिदेशक श्रीजुनीची इशिदेरा ने एम0ओ0यू0 का आदान प्रदान किया।2मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश अनलिमिटेड पोटेंशियल का स्टेट है।आज इस एम0ओ0यू0 के बाद से भारत और जापान के सम्बन्धों को एक नई मजबूतीमिलेगी। अनलिमिटेड पोटेंशियल वाले इस राज्य में आपको सुखद अनुभव होगा।जापान से पधारे आप सभी को उत्तर प्रदेश के पोटेंशियल का पूरा लाभ मिलेगा।राज्य सरकार जापानी कम्पनियों के साथ सहयोग करने की इच्छुक है। यू0पी0ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 के पार्टनर कन्ट्री के रूप में भी जापान का बड़ासहयोग मिला था।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत और जापान के सम्बन्ध सदियों से मैत्रीपूर्ण रहेहैं। दोनों देशों के मध्य एक सहस्त्राब्दी से अधिक समय से रणनीतिक, सांस्कृतिक ववैश्विक सहभागिता की जड़ें जुड़ीं हुई हैं। भारत और जापान बड़ी अर्थव्यवस्था वालेदेश हैं। समान सामाजिक-आर्थिक विकास की प्राथमिकताओं के साथ लोकतांत्रिक,धर्मनिरपेक्ष एवं बहुलवादी प्रणालियों के साथ-साथ विश्व स्तरीय सामरिक दृष्टिकोणभी दोनों देशों के समान हैं। आज जब दुनिया के तमाम देश युद्ध में हैं, तब प्रधानमंत्रीश्री नरेन्द्र मोदी जी, भगवान बुद्ध के संदेश के माध्यम से दुनिया को शांति-सौहार्द वएकता के सूत्र में बांध रहे हैं। प्रधानमंत्री जी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 शिंजोआबे के प्रगाढ़ सम्बन्धों ने भी भारत-जापान के राजनीतिक, आर्थिक और व्यावसायिकसम्बन्धों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत एवं जापान के मध्य आर्थिक सहयोग अत्यन्तसमृद्ध हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कार्यरत 07 प्रमुख कम्पनियों (मित्सुईटेक्नोलॉजीज, होंडा मोटर्स, यामाहा मोटर्स, डेंसो, टोयोड्रंक, निसिन ए0बी0सी0लॉजिस्टिक्स, सेकिसुई डी0एल0जे0एम0 मोल्डिंग) सहित 1,400 से अधिक जापानीकम्पनियां भारत में संचालित हैं। दोनों देशों के मध्य वित्तीय वर्ष 2023-24 में 22.854बिलियन अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ है। इस अवधि में जापान से भारतको 17.69 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया गया तथा 5.15 बिलियनअमेरिकी डॉलर का आयात किया गया।देश में सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश, आकार में भारत काचैथा सबसे बड़ा राज्य है। यहां निवासरत 25 करोड़ नागरिक इसे भारत का सबसेबड़ा श्रम एवं उपभोक्ता बाजार बनाते हैं। विगत साढ़े सात वर्षों में राज्य सरकार ने3प्रदेश में निवेश के लिए बेहतरीन माहौल तैयार किया है। रेल, रोड, एयर औरवॉटर-वे की बेहतरीन कनेक्टिविटी है। इससे उद्योगों को वैश्विक एवं घरेलू बाजारतक पहुंच बनाने में लॉजिस्टिक्स की सुलभता में वृद्धि हुई है। प्रदेश में देश का सबसेबड़ा रेलवे नेटवर्क है। यह 16,000 किमी0 से अधिक है।वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर-8.5 प्रतिशत एवं ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेटकॉरिडोर 57 प्रतिशत का अधिकांश क्षेत्र उत्तर प्रदेश में आता है। दोनों फ्रेट कॉरिडोरका जंक्शन प्रदेश के दादरी (ग्रेटर नोएडा) में है। देश के सबसे विस्तृत राष्ट्रीयराजमार्ग नेटवर्क में से एक होने के नाते, उत्तर प्रदेश ने स्वयं को 13 वर्तमान एवंआगामी एक्सप्रेस-वे के साथ ‘एक्सप्रेस-वे राज्य’ के रूप में स्थापित किया है। 1,225किलोमीटर के 06 एक्सप्रेस-वे पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 07 विकास के विभिन्न चरणोंमें हैं। ये एक्सप्रेस-वे पूरे राज्य में मैन्युफैक्चरिंग केन्द्रों को निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदानकर रहे हैं। एक्सप्रेस-वे प्रदेश के रूप में उत्तर प्रदेश को नई पहचान मिल रही है।गंगा एक्सप्रेस-वे बनने के बाद देश के कुल एक्सप्रेस-वे में 55 प्रतिशत भागीदारीउत्तर प्रदेश की होगी। वर्तमान में कुल 1130 किमी0 लम्बाई के 05 एक्सप्रेस-वेसंचालित हैं।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मेरठ से प्रयागराज के मध्य 594 किमी0 के गंगाएक्सप्रेस-वे सहित 720 किमी0 लम्बाई के 03 एक्सप्रेस-वे निर्माणाधीन हैं। अयोध्या,लखनऊ, वाराणसी एवं कुशीनगर में क्रियाशील तथा जेवर में निर्माणाधीन एशिया केसबसे बड़े अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकसित होने से उत्तर प्रदेश 05अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला देश का एकमात्र राज्य बनने जा रहा है। वर्तमान में16 घरेलू, जिसमें 04 अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे संचालित हैं।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यामानाशी प्रीफेक्चर और उत्तर प्रदेश दोनों में एकबड़ी साम्यता है। दोनों ही लैंडलॉक्ड स्टेट हैं, दोनों की अपनी सीमाएं हैं। उत्तर प्रदेशने अपनी इस समस्या को एक चुनौती के रूप में लिया है और अब हमने ड्राई पोर्ट्सको विकसित किया है। इनलैंड वॉटर-वे को एक्टिव किया है। प्रदेश के वाराणसी सेपश्चिम बंगाल के हल्दिया तक देश का पहला वॉटर-वे प्रारम्भ हो चुका है। वाराणसीमें 100 एकड़ में भारत का पहला ‘फ्रेट विलेज’ विकसित हो रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश4के निर्यात केंद्रों को पूर्वी भारत के बंदरगाहों से जोड़ने वाला यह गांव इनबाउण्ड औरआउटबाउण्ड कार्गो के लिए ट्रांस-शिपमेंट हब के रूप में कार्य करेगा।भारत की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक होने के नाते, उत्तर प्रदेश, राष्ट्रीयसकल घरेलू उत्पाद में लगभग 9.2 प्रतिशत का योगदान करता है। उत्तर प्रदेश भारतके फूड-बास्केट के रूप में जाना जाता है। राज्य में कृषि एवं खाद्य-प्रसंस्करण तथाडेयरी सेक्टर में अपार सम्भावनाएं हैं। उत्तर प्रदेश भारत में खाद्यान्न, दूध तथा गन्नेका सबसे बड़ा उत्पादक है। प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन नीति प्रख्यापित की है।ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में 2.73 लाख करोड़ रुपये के 20 एम0ओ0यू0 हस्ताक्षरितकिये गये हैं। अयोध्या एवं अन्य 17 नगर निगमों का सोलर सिटी के रूप में विकासकिया जा रहा है।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जापान और भारत के बीच शताब्दियों से गहरेसांस्कृतिक सम्बन्ध रहे हैं। भगवान गौतम बुद्ध के पिता महराज शुद्धोधन की राजधानीकपिलवस्तु, पहला उपदेश स्थल सारनाथ, सर्वाधिक चातुर्मास प्रवास स्थल श्रावस्ती,महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर सहित भगवान बुद्ध के अनेक स्मृतियां यहां संजोयीगई हैं। भगवान बुद्ध के इस स्थलों को आपस मे जोड़ते हुए हमने बौद्ध सर्किटडेवलप किया है। हमें प्रसन्नता होगी यदि आप सभी स्वयं एक बार इन स्थलों काविजिट करें।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आई0टी0/आई0टी0ई0एस0 सेक्टरमें उत्तर प्रदेश को भारत के कुल मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में लगभग 45 प्रतिशतयोगदान करने का गौरव प्राप्त है। यहां भारत के मोबाइल कम्पोनेण्ट्स के लगभग 55प्रतिशत निर्माता हैं। भारत के लगभग 26 प्रतिशत मोबाइल निर्माता उत्तर प्रदेश मेंक्रियाशील हैं … Read more

जन्म शताब्दी पर सुशासन दिवस आयोजित, उत्तरप्रदेश-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी को किया नमन

लखनऊ. भारत के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथजी आज यहां लोक भवन मंे पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म2शताब्दी के उपलक्ष्य में सुशासन दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर परउन्होंने सुशासन विषय पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं, स्वच्छसचिवालय अभियान के लिए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अनुभाग अधिकारी, उत्तम औरस्वच्छ भवन के लिए व्यवस्था अधिकारी लोक भवन, शिकायत एवं सर्विस डिलीवरी आवेदनों केशत्-प्रतिशत निस्तारण हेतु प्रमुख सचिव कृषि विभाग व विशेष सचिव सूचना प्रौद्योगिकी एवंइलेक्ट्राॅनिक्स विभाग को सम्मानित किया। इसके पूर्व, उन्होंने लोक भवन प्रांगण में स्थापित श्रद्धेयअटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा के सम्मुख स्थित उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलिदी।रक्षा मंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज सम्पूर्ण देश में पूर्व प्रधानमंत्रीभारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मशताब्दी मनाई जा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रमोदी जी ने वर्ष 2014 में अटल जी के जन्मदिन को प्रतिवर्ष ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाने कानिर्णय लिया था। तभी से प्रतिवर्ष लगातार उनके जन्मदिन को सुशासन दिवस के रूप में मनाया जारहा है। आज श्रद्धेय पं0 मदन मोहन मालवीय जी की भी जयन्ती है। उनका देश की आजादी तथाबनारस हिंदू विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों को स्थापित करने में अहम योगदान रहा है। उनकीविश्वविद्यालय स्थापना की संकल्पना से अनुमान लगाया जा सकता है कि वह किस प्रकार के भारतको देखना चाहते थे।रक्षा मंत्री ने कहा कि सुशासन का तात्पर्य प्रत्येक व्यक्ति में अच्छे शासन के कारण अनुकूलसंवेदना का उत्पन्न होना है। व्यक्ति स्वयं को भय मुक्त महसूस करे। उसके जीवन की न्यूनतमआवश्यकताएं पूरी हो सकें, वह जो कुछ करना चाहता है, उसे करने का अवसर प्राप्त हो। यहीसुशासन होता है। श्रद्धेय अटल जी द्वारा देश को प्रदान की गई गवर्नेंस की सराहना देश केसाथ-साथ दुनिया के अन्य देशों में भी होती है। उस समय पहली बार स्वतंत्र भारत में देश कीविकास दर 8.4 प्रतिशत पर पहुंची थी। सुशासन के लक्ष्य को कैसे प्राप्त किया जा सकता है, यहअटल जी ने करके दिखाया। प्रधानमंत्री जी ने इसीलिए उनके जन्म दिन को सुशासन दिवस के रूपमें मनाने का निर्णय लिया।रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के भारत में वर्तमान राजदूतश्री एरिक गारसेट्टी ने अभी हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा कि ‘इफ यू वाॅन्ट टू सी द फ्यूचरकम टू इंडिया, इफ यू वाॅन्ट टू फील द फ्यूचर कम टू इंडिया, इफ यू वाॅन्ट टू वर्क आॅन फ्यूचर कमटू इंडिया’। यह सुशासन के कारण सम्भव हुआ है। हर व्यक्ति को सुख और आनन्द की अनुभूतिहो। वह भय मुक्त वातावरण में काम कर सके।रक्षा मंत्री ने कहा कि हम लोग एक दार्शनिक अवधारणा को लेकर चलने वाले व्यक्ति हैं। वहदार्शनिक अवधारणा हमें पं0 दीनदयाल उपाध्याय के माध्यम से प्राप्त हुई। उनका कहना था किप्रत्येक मनुष्य तन, मन, बुद्धि तथा आत्मा से मिलकर बना है। इन चारों आवश्यकताओं की पूर्ति परमनुष्य को सुख, आनन्द तथा परमानन्द की प्राप्ति होती है। तन की आवश्यकताओं को पूर्ण करने केलिए धन की आवश्यकता होती है। सुख की प्राप्ति के लिए मन की आवश्यकताओं को पूर्ण करना3आवश्यक है। बुद्धि के सुख की प्राप्ति के लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है। व्यक्ति आत्मिक दृष्टिसे जितना बड़ा होता जाता है, उसके सुख तथा आनन्द की अनुभूति उसी प्रकार बढ़ती जाती है।इसीलिए अटल जी ने कहा था कि ‘छोटे मन से कोई बड़ा नहीं हो सकता, टूटे मन से कोईखड़ा नहीं हो सकता’। तन, मन, बुद्धि तथा आत्मा की आवश्यकताओं की पूर्ति करना ही गुड गवर्नेंसहै। व्यक्ति को अपनी शांति के लिए अपनी धार्मिक विधाओं को करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रत्येक व्यक्ति के धार्मिक क्रिया-कलापों को निर्विघ्नसम्पादित करने का वातावरण निर्मित किया गया है।रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु देश के 80 करोड़लोगों को निःशुल्क राशन उपलब्ध कराया है। योग्यता व क्षमता के आधार पर लोगों को रोजगार केअनेक अवसर प्रदान किये जा रहे हैं। विगत 08 वर्षों में देश में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से उबरेहैं। यदि लोगों की न्यूनतम तथा वित्तीय आवश्यकताएं पूर्ण नहीं हुईं, तो यह सब कैसे सम्भव हुआ।इसे ही गुड गवर्नेंस कहते हैं। हम शत्-प्रतिशत सैचुरेशन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।रक्षा मंत्री ने कहा कि मन के सुख के लिए मान तथा सम्मान आवश्यक होता है। कोई किसीको अपमानित न करे। कोई दहशत न फैलाए। प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को भय मुक्त महसूस करे। यदिसमाज भय मुक्त होगा, तो प्रत्येक व्यक्ति सुख तथा आनन्द की प्राप्ति करेगा। कानून-व्यवस्था राज्यका विषय होता है। मुख्यमंत्री जी इस दायित्व का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं। सरकार सभी को शिक्षाप्रदान करने के लिए कृत संकल्पित है। शिक्षा की दिशा में अनेक नवाचार किये जा रहे हैं। वर्ष2014 से पूर्व देश में स्थापित एम्स, विश्वविद्यालय तथा अन्य शिक्षण संस्थानों की संख्या में वर्तमान मेंदो से ढाई गुना वृद्धि हुई है। यह सभी प्रयत्न इसलिए किए गए ताकि लोगों को अच्छी शिक्षा तथाज्ञान प्राप्त हो सके। इसके दृष्टिगत सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अनेक सुधार किए हैं।रक्षा मंत्री ने कहा की आत्मा के सुख के लिए भगवान या परमानन्द की आवश्यकता होती है।यदि थोड़ी देर के लिए मान लिया जाए कि आत्मा एक सर्कल है। जैसे-जैसे आप इस सर्कल कोबड़ा करते जाएंगे, मेग्नीट्यूड आॅफ सुख, मेग्नीट्यूड आॅफ आनन्द उसी अनुपात में बढ़ता जाएगा।एक ऐसा क्षण आएगा, जब परमानन्द की प्राप्त होगी। यदि इसे गणितीय भाषा में कहें, तोसरकमफेरेंस आॅफ मन इज डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू मेग्नीट्यूड आॅफ सुख एण्ड आनन्द। परमानंदका कोई मेग्नीट्यूड नहीं होता, वह अनन्त तथा असीम है। जो सरकार इन चारों आवश्यकताओं कीपूर्ति करे, वही सुशासन के पथ पर चलने वाली सरकार होती है। जब रोते हुए छोटे मासूम बच्चे कोउसकी मां जमीन से उठाकर अपने सीने से लगाती है, तो उस समय मन को जिस सुख कीअनुभूति होती है, वही आत्मा का सुख होता है।रक्षा मंत्री ने कहा कि अटल जी ने सन् 1999 में देश में गोल्डन क्वॉड्रिलैटरल तथा नॉर्थ,साउथ, ईस्ट व वेस्ट कॉरिडोर की योजना प्रारम्भ की थी। अटल जी का रोड कनेक्टिविटी कासंकल्प केवल बड़े शहरों को जोड़ने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने देश के गांवों को भी … Read more

प्रधानमंत्री के ’सुरक्षित महाकुम्भ’ की परिकल्पना के आवश्यक प्रबन्ध करें, उत्तरप्रदेश-मुख्यमंत्री ने प्रयागराज में की महाकुम्भ-2025 की तैयारियों की समीक्षा

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज जनपद प्रयागराज मेंजनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ आई0सी0सी0सी0 सभागार में महाकुम्भ-2025की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि महाकुम्भ से पहले प्रयागराज में चल रहेसभी टैक्सी, ऑटो, ई-रिक्शा चालकों का पुलिस सत्यापन कराया जाए। प्रदेश पुलिस को इण्टेलिजेंस को और बेहतर करने तथा भारत सरकार की सुरक्षा एजेंसियों के साथलगातार संवाद-समन्वय बनाये रखने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि हाल के समयमें प्रयागराज के आस-पास माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई हुई है। महाकुम्भ से पहलेउनके गुर्गों पर आवश्यकतानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ’सुरक्षित महाकुम्भ’ कीपरिकल्पना की है। इसके दृष्टिगत सभी आवश्यक प्रबन्ध किए जाएं। सुरक्षा बलों कीतैनाती के बारे में जानकारी लेते हुए उन्होंने कहा कि अब तक जिन 20 हजारपुलिसकर्मियों की तैनाती हुई है, उन सभी का प्रशिक्षण जरूर करा लिया जाए। उन्होंनेमहाकुम्भ में फायर सेफ्टी, घाट सुरक्षा तथा चिकित्सा सहायता आदि के सम्बन्ध में की2जा रही व्यवस्थाओं को पुख्ता बनाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा केदृष्टिगत एण्टी ड्रोन सिस्टम की उपलब्धता भी की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए किमेला क्षेत्र में निराश्रित पशुओं का आवागमन न हो। प्रयागराज नगर में ट्रैफिक जाम केसमाधान के लिए पुख्ता कार्ययोजना तैयार करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि फुटपेट्रोलिंग बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि महाकुम्भ में सर्वाधिक श्रद्धालु सड़क मार्ग से आएंगे।अयोध्या, वाराणसी, लखनऊ और मीरजापुर की ओर से बड़ी संख्या में लोगों का आगमनहोगा। इसलिए शीर्ष प्राथमिकता के साथ प्रयागराज आने वाले सभी मार्गों केनवनिर्माण/सुदृढ़ीकरण के कार्यों को पूरा कर लिया जाए। इसमें किसी प्रकार कीकोताही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि इन मार्गों परयदि कहीं भी अतिक्रमण किया गया हो, तो प्रभावी कार्यवाही करते हुए उसे हटायाजाए। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री जी ने प्रयागराज महाकुम्भ की ओर आने वाले सभी मार्गोंके नवनिर्माण/सुदृढ़ीकरण के कार्यों के लिए 05 जनवरी, 2025 की अंतिम तारीख तयकी है।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सेतु निगम के 14 में से 12 सेतुओं का कार्य पूर्ण होगया है। यह संतोषजनक है। शेष दो सेतुओं का कार्य 05 जनवरी, 2025 तक पूरा करलिया जाए। संगम नोज पर ड्रेजिंग के कार्य में और तेजी की अपेक्षा है। 30 दिसम्बर,2024 तक यह कार्य पूरा कर लिया जाए। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि मेला क्षेत्र मेंजल आपूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाने का कार्य प्रत्येक दशा में 30 दिसम्बर, 2024तक पूरा कर लिया जाए। हर सेक्टर में 24×7 शुद्ध जल की आपूर्ति सुनिश्चित कीजाए। सड़कों की मरम्मत एवं डिवाइडर की साज-सज्जा आदि का कार्य इसी माह केअन्त तक पूरा कर लें।मुख्यमंत्री जी ने निर्देशित किया कि जो पाण्टून पुल अभी तक क्रियाशील नहीं हुएहैं, उन्हें प्रत्येक दशा में एक सप्ताह में तैयार करा लिया जाए। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्रीजी के इस एक दिवसीय दौरे के साथ ही प्रयागराज नगर में सूबेदारगंज सेतु पर एक3तरफ से आवागमन प्रारम्भ हो गया। तय समय-सीमा के अनुसार, पुल की एक लेन को31 दिसम्बर, 2024 और दूसरी लेन को मकर संक्रांति से पहले पूरा किया जाना था।लेकिन, यह काम एक सप्ताह पहले ही पूरा कर दिया गया। सूबेदारगंज पुल के निर्माणमें 350 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं।मुख्यमंत्री जी ने अखाड़ों, धार्मिक संस्थाओं और साधु-संतों को भूमि आवंटन कीअद्यतन स्थिति के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि नियमानुसार सभीको आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि विभिन्न राज्यों कीओर से महाकुम्भ में अपने शिविर स्थापित करने के अनुरोध मिल रहे हैं, इस सम्बन्ध मेंयथोचित निर्णय तत्काल ले लिया जाए। नई संस्थाओं को भूमि आवंटन करने से पूर्वउनका सत्यापन भी कराया जाए।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि महाकुम्भ विश्व को भारतीय सनातन संस्कृति सेसाक्षात्कार कराने का सुअवसर है। यह स्वच्छता, सुरक्षा और सुविधा का मानक भीहोगा। ’स्वच्छ महाकुम्भ’ की अवधारणा पर बल देते हुए उन्होंने जनप्रतिनिधियों कोप्रयागराज की स्वच्छता के लिए आगे बढ़कर काम करने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्रीजी ने निर्देश दिए कि महाकुम्भ के दृष्टिगत 7,000 से अधिक बसें लगाई जाएंगी। यहांडेढ़ लाख से अधिक शौचालय स्थापित किए जाएंगे। स्वच्छता पर जोर देते हुए उन्होंनेनिर्देश दिए कि 10 हजार कर्मचारियों की तैनाती कर, यहां की सफाई व्यवस्था को सुदृढ़बनाए रखा जाए।

राज्यकर्मियों के जानकारी न देने पर रुकेगा प्रमोशन और होगी कार्रवाई, उत्तरप्रदेश-शासन से आया 31 जनवरी तक संपत्ति का ब्योरा देने का आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्य कर्मियों को अपनी-अपनी संपत्ति का ब्योरा देना होगा। इसके बाद ही उन्हें प्रमोशन मिल सकेगा। शासन की ओर से साफ कर दिया गया है कि जो कर्मी ब्योरा नहीं देंगे, उनके प्रमोसन पर विचार नहीं होगा। सभी कर्मियों को अपना ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर देना होगा। शासन की तरफ से जारी पत्र में कहा गया कि 31 जनवरी तक राज्य कर्मियों को अपनी संपत्ति का ब्योरा देना होगा। अन्यथा प्रमोशन पर विचार नहीं होगा। साथ ही संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि उत्तर प्रदेश राज्य के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अनिवार्य रूप से 31 जनवरी तक दे दें।

राजस्व में तेजी लाने के अधिकारियों को दिए निर्देश, उत्तरप्रदेश-मुख्यमंत्री योगी ने की भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की समीक्षा

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज अपने सरकारी आवासपर भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के कार्यों की समीक्षा की तथा अधिकारियों को आवश्यकनिर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में विभाग को अब तक 2407.20करोड़ रुपये राजस्व की प्राप्ति हुई है। राजस्व में तेजी से वृद्धि के निर्देश देते हुएउन्होंने कहा कि इसके लिए विभागीय व जनपद स्तर के अधिकारियों द्वारा प्रभावी प्रयासकिये जाएं। राजस्व में अपेक्षित वृद्धि न करने वाले जनपदों के जिलाधिकारी व जिलाखनन अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जनपद सोनभद्र, बांदा, कौशाम्बी तथा महोबा में खननके दृष्टिगत राजस्व वृद्धि की असीम संभावनाएं हैं। कम राजस्व प्राप्त करने वाले जनपदोंमें भी राजस्व बढ़ोत्तरी के उपाय सुनिश्चित किये जाएं। उन्होंने कहा कि शासन, विभागव जनपद स्तर पर लम्बित आवेदन पत्रों पर शीघ्रता से निर्णय लेकर कार्यवाही आगेबढ़ायी जाए। राजस्व बढ़ाने के अन्य उपायों पर भी विचार किया जाए।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि नदी के कैचमेंट एरिया में किसी भी प्रकार की अवैधखनन गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने तकनीक का उपयोग करते2हुए इसे सख्ती से रोकने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री जी ने स्वीकृत खनन क्षेत्र के अन्दरखनन कर रहे वाहनों पर व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वी0टी0एस0) लगाये जाने के भीनिर्देश देते हुए कहा कि इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि खनन स्वीकृत क्षेत्रमें ही हो रहा है या नहीं। इससे परिवहनकर्ता को भी सहूलियत होगी।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जनपदों में अवैध खनन को रोकने के लिए टास्क फोर्सद्वारा समय-समय पर छापेमारी की जाए। छापेमारी के दौरान विभागीय अधिकारियोंसहित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित हो। इसकी नियमितवीडियोग्राफी भी कराई जाए। विभागीय स्तर पर लम्बित मामलों का समय से निस्तारणकिये जाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि जून से अगस्त माह के मध्य ही वर्षभरकी कार्ययोजनाएं तैयार की जाएं। कार्ययोजना समय से तैयार होने से सभी कार्यसरलतापूर्वक सम्पन्न होंगे।मुख्यमंत्री जी ने बैठक में उपस्थित परिवहन विभाग के अधिकारियों को मार्गदुर्घटनाओं को रोकने के लिए तेजी से प्रयास करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा किसड़कों के किनारे ओवरलोड वाहन कतई न खड़े किए जाएं। कर अपवंचन तथाओवरलोडिंग रोकने के लिए जनपदों में 55 चेक गेट्स स्थापित किए गए हैं। इन परशीघ्र ही ‘वे इन मोशन संयन्त्र’ लगाए जाएं। ओवरलोडिंग हर हाल में जीरो प्वॉइंट परही रोकी जाए।मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत सरकार के खनन मंत्रालय द्वारा स्टेट माइनिंगरेडिनेस इंडेक्स तैयार किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इस सम्बन्ध में विभिन्न विभागोंके समन्वय से आवश्यक सूचनाओं की समय से उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। नदियोंके किनारे की मिट्टी-बालू तथा सिल्ट का प्रयोग ईंट बनाने में किया जाए। यहपर्यावरण को बचाने में कारगर होगा। उपजाऊ जमीन की मिट्टी का प्रयोग ईंट भट्ठोंमें न किया जाए।

उत्तर प्रदेश: पुलिस मुठभेड़ के बाद मासूम से दुष्कर्म का आरोपी गिरफ्तार

औरैया. यूपी के औरैया जिले में 6 वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म करने वाला शख्स पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। पुलिस की संयुक्त टीम ने रविवार तड़के करीब 4:50 बजे ग्राम करमपुर मुढी मोड के पास एक सघन तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हो गई, जिसमें आरोपी घायल हो गया। जानकारी के अनुसार, एसओजी टीम और कोतवाली औरैया पुलिस की संयुक्त टीम आरोपी की तलाश कर रही थी। रविवार सुबह चेकिंग के दौरान आरोपी का सामना पुलिस से हो गया। पुलिस को देखकर आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की और मुठभेड़ में आरोपी घायल हो गया। आरोपी को तत्काल प्राथमिक उपचार के लिए औरैया स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया है। जानकारी के अनुसार बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान आरोपी उसे बहला-फुसलाकर ले गया और दुष्कर्म किया। कथित तौर पर दुष्कर्म के बाद संदिग्ध बच्ची को रोते बिलखते उसके घर छोड़ गया था। इसके बाद बच्ची की मां ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल भिजवाया और मामले की जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए 3 टीम का गठन किया गया। पीड़िता की मां ने बताया था कि हमारी बच्ची को एक आदमी ने घर पर पहुंचाया था, बच्ची की हालत खराब थी जिसके बाद हमने पुलिस में शिकायत की। मां के मुताबिक उसे नहीं पता की बच्ची किसके साथ गई थी और फिर उसे घर पर कौन छोड़ गया। केस में पुलिस को कोई ठोस सबूत नहीं मिल पा रहा था। फिर पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो संदिग्ध दिखा। इसी के आधार पर तलाशी अभियान चलाया गया तो आरोपी पकड़ में आया। बता दें कि इसी तरह का एक मामला पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना से भी सामने आया था। जहां, एक नाबालिग का शव बरामद होने के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई थी। इस मामले में ग्रामीणों ने पुलिस पर शिकायत दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया था। इससे आक्रोशित होकर ग्रामीणों ने थाने में तोड़फोड़ करते हुए आग लगा दी थी।

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