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समर सीजन में यात्रियों की संख्या बढ़ी, फिर 16 कोच के साथ चलेगी बिलासपुर-नागपुर वंदेभारत

बिलासपुर बिलासपुर-नागपुर के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन में यात्री कम होने पर 16 कोच को घटाकर 8 कर दी गई थी, लेकिन समर सीजन में यात्रियों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में अब फिर से 8 की जगह 16 कोच के साथ चलाई जाएगी। यह सुविधा जून से शुरू होगी।बिलासपुर से नागपुर के लिए एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया 2240 रुपए है, जबकि चेयर कार का किराया 1240 रुपए तय किया गया है। दरअसल, वंदेभारत एक्सप्रेस की शुरुआत छत्तीसगढ़ में 11 दिसंबर 2022 को हुई थी। शुरुआत में इस ट्रेन के परिचालन को लेकर रेल प्रशासन के साथ-साथ लोगों में भी भारी उत्सुकता थी। स्वदेश में निर्मित सेमी हाई स्पीड सेल्फ प्रोपेल्ड ट्रेन में कई तरह की विशेषताएं हैं। महंगी टिकट के चलते यात्रियों की संख्या कम थी इसे जानने और देखने के उद्देश्य से ही बड़ी संख्या में यात्रियों ने बिलासपुर-नागपुर के बीच यात्रा की, लेकिन ट्रेन में महंगी टिकट के चलते कुछ समय बाद ही यात्रियों की संख्या कम होने लगी। इसके चलते रेलवे इसे बंद करने की तैयारी में थी। हालांकि, रेलवे ने ट्रेन को बंद करने के बजाय अप्रैल 2023 में 16 कोच को घटाकर 8 कर दी। तब यह ट्रेन 8 कोचों के साथ ही चल रही है। बढ़ी यात्रियों की डिमांड रेलवे सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में वंदे भारत ट्रेन में यात्रियों की डिमांड बढ़ गई है। विशेष कर समर सीजन में ट्रेन पैक चल रही है। टिकटों की डिमांड बढ़ने पर सीटों की उपलब्धता कम हो गई है। ऐसे में रेलवे इसे फिर से 16 कोचों के साथ चलाने की तैयारी कर रही है। 4 कोच में रिपेयरिंग का काम बताया जा रहा है कि मुंबई डिवीजन से बिलासपुर भेजे जा रहे 8 में से 4 कोच खराब है। इनकी मरम्मत बिलासपुर में की जाएगी। मरम्मत का काम पूरा होने के तत्काल बाद इसकी सुविधा रूट के यात्रियों को मिल सकेगी। कहा जा रहा है कि कोच आते ही रेलवे पहले उसकी मरम्मत का काम प्राथमिकता से कराएगा। कोच बढ़ने पर 1128 यात्री कर सकेंगे सफर दावा किया जा रहा है कि जून से वंदे भारत ट्रेन में कोच की संख्या पहले की तरह यानी 16 कोच हो जाएगी। जिसके बाद इसमें कुल सीटों की संख्या बढ़कर 1128 हो जाएगी। वर्तमान में केवल 50% सीटों के साथ कुल 564 यात्री ही वंदे भारत में यात्रा कर पा रहे हैं। कोच बढ़ने से सीटों की संख्या भी दोगुनी हो जाएगी, जो सुविधा सीधे यात्रियों को मिलेगी। जानिए वंदे भारत ट्रेन की खासियत इस ट्रेन में सिटिंग चेयर अरेंजमेंट से लेकर सीसीटीवी, फायर सेफ्टी डिवाइस, फर्स्ट-एड बॉक्स, स्मार्ट टॉयलेट, ग्लास विंडो, ऑटोमैटिक डोर, डिस्प्ले बोर्ड, एयर कंडीशनर, डीप फ्रीजर जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं यात्रियों के लिए उपलब्ध है। मुंबई से बिलासपुर पहुंचे कोच वंदे भारत के कोच मुंबई से शुक्रवार को बिलासपुर पहुंच गए है। दिन भर यार्ड में इसे रखा गया और फिर बाद में कोचिंग डिपो लाया गया। डिपो में इस रैक के सभी कोचों का परीक्षण शुरू हो गया है। बताया गया कि परीक्षण के दौरान अधिकारी भी मौजूद रहे। उन्होंने रैक के साथ में विस्तृत जानकारी ली और यह जानने का प्रयास किया कि डिपो से इस रैक को कब फिट किया जाएगा। फिट होने के साथ कुछ अहम तैयारियां और करनी होंगी, जिनमें सबसे प्रमुख रिजर्वेशन सिस्टम में 16 कोच की जानकारी अपडेट करना शामिल है।  

अब हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से खजुराहो के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन दतिया रेलवे स्टेशन पर भी रुकेगी

ग्वालियर भारतीय रेलवे बोर्ड ने देश की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन का नया हॉल्ट मध्य प्रदेश के एक नए शहर में देने का फैसला किया है. अब नई दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से खजुराहो के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन दतिया रेलवे स्टेशन पर भी रुकेगी, जिससे दतिया के पीतांबरा माता शक्तिपीठ के दर्शन के लिए आने जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलने जा रही है. मंगलवार से दतिया में रुकेगी वंदेभारत एक्सप्रेस झांसी रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह से मिली जानकारी के अनुसार खजुराहो-निजामुद्दीन के बीच सफर करने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 22469/22470 का दतिया हॉल्ट आगामी 13 मई से लागू होने जा रहा है. भारतीय रेलवे बोर्ड ने यह फैसला यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए लिया है. ये होगा दतिया ग्वालियर और झांसी का नया समय वंदे भारत एक्सप्रेस के दतिया ठहराव के साथ ही रेलवे ने नई समय सारणी भी जारी की है. अब से दतिया हॉल्ट की वजह से ग्वालियर और झांसी रेलवे स्टेशन का समय भी बदलने जा रहा है. जहां खजुराहो से चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस 22469 का दतिया रुकने का समय शाम 6:42-6:44 का होगा, जिसकी वजह अब यह ट्रेन ग्वालियर शाम 7:28 बजे पहुंचेगी और शाम 7:33 बजे निजामुद्दीन के लिए रवाना होगी. निजामुद्दीन से खजुराओ चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस 22470 निजामुद्दीन से चलकर सुबह 09:59 बजे दतिया पहुंचेगी 2 मिनट हॉल्ट के बाद 10:01 बजे आगे के लिए रवाना होगी. मंगलवार से झांसी नए समय पर सुबह 10:30 पर पहुंचेगी और 10:35 बजे खजुराहो रवाना होगी. हर रोज पहुचते हैं लाखों श्रद्धालु बता दें कि लंबे समय से धार्मिक स्थल पीतबारा माई शक्तिपीठ पर यात्रियों की सुविधा के दृष्टिगत वंदे भारत एक्सप्रेस के हॉल्ट की मांग की जा रही थी. क्योंकि प्रतिदिन न सिर्फ प्रदेश से बल्कि देश के कोने कोने से श्रद्धालु पीताम्बरा माता के दर्शन के लिए दतिया पहुंचते हैं. मान्यताओं के हिसाब से शनिवार को यहां आने वालों श्रद्धालुओं की संख्या लाखों की होती है. ऐसे में वंदे भारत एक्सप्रेस का ठहराव चम्बल अंचल के लिए तीर्थ और पर्यटन के लिहाज से एक बड़ी सौगात है.

वंदे भारत ट्रेन के कोच भी ग्वालियर में बनी स्प्रिंग के सहारे पटरियों पर दौड़ने लगेंगे

 ग्वालियर  हाई स्पीड ट्रेन शताब्दी, राजधानी और गतिमान के बाद अब वंदे भारत एक्सप्रेस(Vande Bharat Express) की स्प्रिंग का निर्माण भी रेल स्प्रिंग कारखाना सिथौली(Sithauli) में किया जाएगा। इसके लिए इलाहाबाद मुख्यालय से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। उम्मीद है कि इस साल वंदे भारत ट्रेन के कोच भी ग्वालियर में बनी स्प्रिंग के सहारे पटरियों पर दौड़ने लगेंगे। देशभर में चलने वाली ट्रेनों के लिए स्प्रिंग का निर्माण करने वाले केवल दो कारखाने हैं, इनमें एक ग्वालियर के सिथौली में है और दूसरा आईसीएफ चैन्नई में है। सिथौली(Sithauli) के रेल स्प्रिंग कारखाने में वर्षों से आईसीएफ (इंटीग्रल) और एलएचबी (लिंके- हॉफमैन ब्रुश) कोच की स्प्रिंग का निर्माण किया जा रहा है। इंडियन रेलवे लगातार स्प्रिंग की मांग बढ़ाता जा रहा है, इससे इस साल कारखाने का टारगेट भी पहली बार एक लाख स्प्रिंग से ऊपर चला गया है। हर साल बढ़ रही स्प्रिंग की डिमांड रेल स्प्रिंग कारखाना सिथौली(Sithauli) की शुरूआत 1989 में हुई थी। इसके बाद 1990 में स्प्रिंग बनना शुरू हो गई थी।यहां मांग के हिसाब से स्प्रिंगों का निर्माण किया जाता है और हर साल इसकी संया में इजाफा होता जा रहा है। इस साल पहली बार टारगेट एक लाख को पार कर गया है। फैक्ट्री में सबसे ज्यादा एलएचबी कोच की स्प्रिंग बनाई जाती हैं। स्प्रिंग की संख्या बढ़ते ही तीन शिट में काम 45 लोगों को और मिला रोजगार 35 साल में पहली बार स्प्रिंग की संख्या बढ़ते ही दो की जगह तीन शिट में काम शुरू किया गया है। फैक्ट्री में 275 लोगों का स्टाफ है। तीसरी शिट शुरू होने से लगभग 45 लोगों को और रोजगार मिला है। यहां एक दिन में 450 से 500 स्प्रिंग बनाई जा रही हैं। जल्द ही हर दिन 600 स्प्रिंग बनाने की प्लानिंग की जा रही है। तीन हजार स्प्रिंग से शुरू हुआ था कारखाना सिथौली स्प्रिंग कारखाने में 1990 में स्प्रिंग का निर्माण शुरू हुआ था। पहले साल तीन हजार स्प्रिंग बनाई गईं। उसके बाद पांच हजार स्प्रिंग तैयार हुईं। मांग बढ़ते ही हर साल लक्ष्य बढ़ता गया और अब यह आंकड़ा एक लाख पार हो गया है। 50 मशीनों पर बनतीं स्प्रिंग स्प्रिंग कारखाने में करीब 50 मशीनें लगी हुई हैं। इन मशीनों पर एक बार में दो से तीन कर्मचारी डिमांड के हिसाब से काम करते हैं। काम बढऩे पर कर्मचारी इसे आपस में बांट लेते हैं। भविष्य में और भी मशीनें आने की संभावना हैं, जिससे काम और बढ़ेगा। सिथौली स्प्रिंग कारखाना में इस साल टारगेट एक लाख पार हो गया है। संभवत: इस साल से वंदे भारत की स्प्रिंग भी यहां बनाई जाएगी।– मनोज कुमार सिंह, पीआरओ झांसी मंडल

रेलवे का बड़ा प्लान; भोपाल से लखनऊ रूट पर वंदे भारत ट्रेन दौड़ाने की तैयारी, यात्रियों को मिलेगी राहत

भोपाल लखनऊ से भोपाल जल्द ही नई वंदे भारत ट्रेन चलेगी। रेलवे ने एमपी-यूपी दोनों राज्यों की राजधानी के बीच कनेक्टिविटी बेहतर बनाने की योजना बनाई है। इस ट्रेन में चेयर कार सीटिंग वाले 8 कोच होंगे और करीब 564 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी। भोपाल रेल मंडल के मुताबिक जल्द ही नए रैक उपलब्ध हो जाएंगे। इसके बाद नियमित शेड्यूल जारी होगा। इससे भोपाल(MP News) से लखनऊ की यात्रा करीब 6 से 7 घंटे में पूरी होने की उम्मीद है। अभी अन्य ट्रेनों से 9 से 12 घंटे लगते हैं। यह ट्रेन रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से चलेगी। यह बीना, झांसी और कानपुर रेलवे स्टेशनों पर रुक सकती है। अधिकारियों के मुताबिक, लखनऊ भोपाल वंदे भारत ट्रेन आठ कोच की चेयर कार होगी। नई वंदेभारत एक्सप्रेस के कोच अपडेट किए जा चुके हैं। ट्रेन में प्रोटेक्शन सिस्टम कवच लगाया गया है। वंदेभारत एक्सप्रेस 4.0 में बिजली की खपत एक चौथाई कम हो जाएगी। नए कोच में एग्जीक्यूटिव चेयर क्लास सीटों के पास बैग मिलेगा। सीटों के आसपास ज्यादा जगह होगी। मैहर में 15 ट्रेनों का अस्थायी ठहराव पश्चिम मध्य रेलवे ने चैत्र नवरात्रि मेले को लेकर श्रद्धालुओं को सुविधा दी है। 30 मार्च से 12 अप्रेल तक मैहर स्टेशन पर 15 जोड़ी ट्रेनों को 5 मिनट का अस्थायी ठहराव देने का फैसला किया है। इस निर्णय से मैहर के मां शारदा देवी दर्शन को आने वाले उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़ और गुजरात के यात्रियों को विशेष सुविधा मिलेगी। लखनऊ से इन तीन रूटों पर वंदे भारत ट्रेन दौड़ाने की तैयारी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को जल्द ही एक बड़ी सौगात मिलने वाली है. लखनऊ से तीन और रूटों पर वंदे भारत ट्रेनों को संचालित करने का खाका तैयार किया जा रहा है. लखनऊ से सेमी हाईस्पीड वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ने से यात्रियों को सहूलियत मिलेगी. जम्मू कश्मीर, चंडीगढ़ व भोपाल के लिए हर रोज सफर करने वाले हजारों यात्रियों को राहत मिलेगी. पूर्वोत्तर रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक गौरव अग्रवाल ने बताया कि गोमतीनगर से भोपाल के लिए वंदे भारत ट्रेन के बावत रेलवे बोर्ड के निर्देशों का इंतजार है. इसके अलावा चंडीगढ़ और जम्मू कश्मीर के लिए भी वंदे भारत ट्रेनों का संचालन शुरू होना है. इन ट्रेनों के प्रारंभ हो जाने से रोजाना लगभग 3200 यात्रियों को राहत मिल सकेगी. रेलवे के विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि अगले तीन माह में ये ट्रेनें पटरी पर उतर सकती हैं. इन रूटों पर हो रहा वंदे भारत ट्रेनों का संचालन : रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ से छह रूटों पर वर्तमान में वंदे भारत ट्रेनों का संचालन हो रहा है. गोमतीनगर स्टेशन से पटना के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन चलती है. चारबाग स्टेशन से मेरठ, गोरखपुर, प्रयागराज और अयोध्या के लिए वंदे भारत और लखनऊ जंक्शन स्टेशन से देहरादून के लिए वंदे भारत ट्रेन का संचालन हो रहा है. यात्रियों को रास आ रही वंदे भारत : वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन यात्रियों की पसंदीदा ट्रेन बन रही है. गोरखपुर से अयोध्या वाया लखनऊ होते हुए प्रयागराज जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की तो ऑक्यूपेंसी 90% तक रही. इसके अलावा अन्य वंदे भारत ट्रेनें भी अब 60 से 70% ऑक्यूपेंसी के साथ संचालित हो रही हैं. रेलवे प्रशासन को उम्मीद है कि अब आने वाले दिनों में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन यात्रियों की सफर के लिए पसंदीदा ट्रेन बनेंगी. गर्मियों के दौरान वंदे भारत ट्रेनों में यात्रा करना यात्रियों को और भी ज्यादा रास आएगा.  

प्रदेश को एक और वंदेभारत की सौगात! 600 किमी के सफर में कई बड़े शहरों को जोड़ेगी नई ट्रेन

भोपाल  एमपी से यूपी के बीच सफर करनेवाले रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी है। उन्हें अब न केवल ट्रेनों की जबर्दस्त भीड़ से निजात मिलेगी बल्कि उनके सफर में समय भी बेहद कम लगेगा। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से यूपी की राजधानी लखनऊ तक का सफर जल्द ही बहुत आसान होनेवाला है। इन दोनों महानगरों के बीच नई वंदेभारत एक्सप्रेस चलाने का प्रस्ताव है। करीब 600 किमी के सफर में नई ट्रेन लखनऊ और भोपाल सहित बीच के कई बड़े शहरों को जोड़ेगी। हालांकि नियमित ट्रेनों की तुलना में इसका किराया ढाई गुना से ज्यादा होगा। लखनऊ भोपाल वंदेभारत एक्सप्रेस यूपी के लखनऊ मंडल की ही ट्रेन होगी। यूपी की ओर जानेवाली ज्यादातर ट्रेनों में इतनी भीड़ रहती है कि कई यात्री तो कोच के अंदर प्रवेश ही नहीं कर पाते। इन ट्रेनों में महीनों की लंबी वेटिंग भी बनी रहती है। प्रस्तावित लखनऊ भोपाल वंदेभारत एक्सप्रेस इन झंझटों से यात्रियों को छुटकारा दिला देगी। भोपाल लखनऊ वंदे भारत में कितने कोच होंगे? पहले मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को नई वंदे भारत ट्रेन मिलने वाली थी. लेकिन यूपी के यात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए इस ट्रेन को भोपाल डिविजन की जगह लखनऊ डिविजन से चलाया जाएगा. लखनऊ भोपाल वंदे भारत एक्सप्रेस एकदम नए कोच वाली प्रीमियम ट्रेन होगी, जिसमें 8 कोच का रैक होगा. माना जा रहा है कि लखनऊ भोपाल वंदे भारत एक्सप्रेस में तकरीबन 564 सीटें होंगी और ये स्लीपर हो सकती है. लखनऊ भोपाल वंदे भारत का कितना होगा किराया? सूत्रों की मानें तो लखनऊ और भोपाल के बीच चलने वाली इस नई वंदे भारत एक्सप्रेस का किराया प्रीमियम ट्रेनों की तरह ही रहेगा. यानी इस ट्रेन में भी राजधानी, दुरंतो आदि ट्रेनों के बराबर या उससे ज्यादा चार्ज किया जा सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह सेमी हाई स्पीड होने के साथ-साथ यात्रियों को प्रीमियम सुविधाएं और कंफर्ट देगी. भोपाल से लखनऊ के बीच कितनी दूरी? मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से उत्तर प्रदेश की राजधानी भोपाल का डिस्टेंस लगभग 720 किमी है. फिलहाल इस रूट पर 10 से ज्यादा ट्रेनें चलती हैं, जिन्हें दोनों शहरों के बीच 9 से 12 घंटे तक का ट्रेवल टाइम लगता है. हालांकि, इतनी ट्रेनें होने के बाद भी इस रूट पर यात्रियों की जबर्दस्त भीड़ होती है. कब शुरू होगी लखनऊ-भोपाल वंदे भारत सीनियर डीएमई आरपी खरे ने बताया, ” भोपाल रेल मंडल से पटना और लखनउ के लिए वंदे भारत चलेगी. वंदे भारत की एक रैक बनने में करीब एक से डेढ़ महीने का समय लगता है. ऐसे में अप्रैल या शुरुआती मई तक भोपाल रेल मंडल को स्लीपर वंदे भारत की एक रैक मिल सकती है.” गौरतलब है कि रेलवे ने हाल ही में देश को 2 और नई वंदे भारत जयपुर-उदयपुर-जयपुर और अजमेर दिल्ली अजमेर वंदे भारत दी हैं, जिसके बाद लखनऊ-भोपाल वंदे भारत के जल्द शुरू होने की उम्मीद की जा रही है. हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक घोषणा होना बाकी है.

रेलवे वंदे भारत एक्सप्रेस के स्लीपर वर्जन को भी पटरियों पर उतारने की तैयारी में

नई दिल्ली सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस का डेब्यू हुए 6 साल बीत चुके हैं। 2019 से शुरू हुई रफ्तार की यह कहानी अब 136 सेवाओं तक पहुंच चुकी है। इनमें लगातार इजाफा भी जारी है। अब रेलवे वंदे भारत एक्सप्रेस के स्लीपर वर्जन को भी पटरियों पर उतारने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही यात्री लंबी दूरी का सफर आराम से तय कर सकेंगे। वंदे भारत ट्रेनें अब कई शताब्दी ट्रेन मार्गों पर उपलब्ध हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस भारत की सबसे तेज ट्रेन है और 180 किमी/घंटा तक की गति तक पहुंचने में सक्षम है। अब तक, यह दिल्ली और वाराणसी जैसे छोटे और मध्यम दूरी के प्रमुख शहरों को जोड़ती है। कैसे हुई शुरुआत 15 फरवरी 2019 को नई दिल्ली-कानपुर-इलाहाबाद-वाराणसी मार्ग पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई थी। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत इन ट्रेनों को पटरियों पर उतारा गया था। आम ट्रेनों के मुकाबले वंदे भारत एक्सप्रेस रफ्तार से लेकर सुरक्षा स्तर तक कई सुविधाओं से लैस है। क्या हैं विशेषताएं वंदे भारत एक्सप्रेस में एग्जीक्यूटिव क्लास में रिक्लाइनिंग एर्गोनोमिक सीटें, सभी कोच में सीसीटीवी और हर सीट पर मोबाइल चार्जिंग सॉकेट, ऑटोमैटिक दरवाजे, पेंट्री में हॉट केस, वॉटर कूलर, डीप फ्रीजर, हर कोच में आपातकालीन खिड़कियां, अलार्म पुश और टॉक बैक यूनिट्स हैं। ये ट्रेने 160 किमी की रफ्तार से दौड़ सकती हैं। स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस रेल मंत्रालय ने 3 जनवरी को बताया था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने पिछले तीन दिनों में अपने कई परीक्षणों में 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति प्राप्त की है। जनवरी के अंत तक यह परीक्षण जारी रहेंगे। उसके बाद देश भर के रेल यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए यह विश्व-स्तरीय यात्रा उपलब्ध कराई जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका एक वीडियो भी एक्स पर पोस्ट किया था। क्या होगा खास इन वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को स्वचालित दरवाजे, बेहद आरामदायक बर्थ, ऑन बोर्ड वाई-फाई और विमान जैसी डिज़ाइन जैसी सुविधाओं के साथ डिज़ाइन किया गया है। देश में यात्री पहले से ही मध्यम और छोटी दूरी पर चलने वाली 136 वंदे भारत ट्रेनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भोपाल से जबलपुर होते हुए रीवा तक चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस फिर धूम मचा रही, ट्रेन फिर तूफानी रफ्तार से दौड़ने लगी

रीवा भोपाल से जबलपुर होते हुए रीवा तक चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस फिर धूम मचा रही है. ट्रेन का पिछले ही महीने झांसी कोच फैक्ट्री में रिपेयर व मेकओवर पूरा हुआ था, जिसके बाद ये यह ट्रेन फिर तूफानी रफ्तार से दौड़ने लगे हैं. गौरतलब है कि सितंबर में रीवा-भोपाल वंदे भारत के इंजन व कोच में समस्याओं के साथ ट्रेन को रिपेयर के लिए भेज दिया गया था. हालांकि, रेलवे अधिकारियों का कहना था कि ट्रेन को शेड्यूल रिपेयर के हिसाब से मरम्मत के लिए भेजा गया. क्या हुए रीवा-भोपाल वंदे भारत में बदलाव? ट्रेन नंबर 20173 भोपाल-जबलपुर-रीवा वंदे भारत एक्सप्रेस मेंटनेंस के बाद फिर चमचमाती हुई नजर आने लगी है. पिछले महीने ट्रेन की मरम्मत और ब्यूटीफिकेशन का काम झांसी रेल नवीनीकरण कोच में पूरा हुआ था. इस दौरान ट्रेन के इंटीरियर और बाहर लुक्स को फिर नए जैसा बना दिया गया है. अंदर खराब हुई सीटों, इंटीरियर और अन्य फीचर्स को फिर बहाल किया गया है. वहीं कोच को बाहर लुक्स, टूटे हुए कांच बदलकर ट्रेन को फिर नए जैसा लुक दिया गया है. 130 की रफ्तार से फिर हुआ था ट्रायल रन पश्चिम मध्य रेलवे के मुताबिक ट्रेन नंबर 20173 भोपाल रीवा वंदे भारत एक्सप्रेस के इंजर और कोचों की मरम्मत के बाद फिरसे ट्रायल रन किया गया था. फरवरी में झांसी रेल कोच नवीनीकरण फैक्ट्री के डिप्टी सीएमई नितिन पचौरी की मौजूदगी में ट्रेन का डबरा से सोनगिर के बीच 130 की रफ्तार में ट्रायल रन लिया गया था, जिसके बाद इसे फिर भोपाल रवाना किया था. 4.15 घंटे में जबलपुर, 8.05 घंटे में रीवा रानी कमलापति-रीवा वंदे भारत एक्सप्रेस पहले की तरह हवा से बातें करते हुए भोपाल से जबलपुर और रीवा पहुंचती है. इस ट्रेन को जबलपुर से भोपाल पहुंचने में महज 4 घंटे 15 मिनट लगते हैं. ट्रेन दोपहर 3.30 बजे रानी कमलापति स्टेशन से प्रस्थान कर शाम 7.45 पर जबलपुर पहुंच जाती है. वहीं रात 11.35 पर ये रीवा पहुंचती है. भोपाल से रीवा के बीच यह ट्रेन नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, मैहर और सतना में रुकती है. कितना है भोपाल-जबलपुर-रीवा वंदे भारत का किराया? ट्रेन नंबर 20173 भोपाल रीवा वंदे भारत एक्सप्रेस से अगर आप भोपाल से रीवा सफर करते हैं तो चेयर कार में 1495 रु और एग्जीक्यूटिव क्लास में 2760 रु देने पड़ते हैं. वहीं भोपाल से जबलपुर तक के सफर में चेयर कार में 1120 रु और एग्जीक्यूटिव क्लास में 1985 रु चुकाने पड़ते हैं.  

वंदे भारत एक्सप्रेस का ऐतिहासिक पल, इस ट्रेन में लोको पायलट से लेकर कैटरिंग स्टाफ तक महिलाएं

नई दिल्ली  8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर मध्य रेलवे ने एक अनोखा कदम उठाया है। वंदे भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 22223) को पूरी तरह से महिला कर्मचारियों की ओर से संचालित किया गया। यह हाई-स्पीड ट्रेन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) से शिरडी तक जाती है। पहली बार इस ट्रेन के लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, टिकट चेकर और कैटरिंग स्टाफ, सभी महिलाएं थीं। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) स्वप्निल नीला ने इस मौके को गर्व भरा बताया। उन्होंने कहा, ‘इंडियन रेलवे ने महिलाओं के लिए अवसर पैदा करने की दिशा में हमेशा काम किया है। महिलाओं को सशक्त बनाने की हमारी प्रतिबद्धता के अनुरूप आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हमें CSMT-शिरडी वंदे भारत एक्सप्रेस को पूरी तरह से महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित करने पर गर्व है।’ उन्होंने कहा कि यह पहल सिर्फ पैसेंजर ट्रेनों तक ही सीमित नहीं है। हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि हमारी मालगाड़ियां भी महिलाओं की ओर संचालित की जाएं। रेलवे ने बताया ऐतिहासिक क्षण मध्य रेलवे ने इस उपलब्धि पर अपना गर्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी शेयर किया। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताया जो भारतीय रेलवे में महिलाओं की ताकत, समर्पण और नेतृत्व का जश्न मनाता है। रेलवे ने अपनी पोस्ट में लिखा है, ‘ऐतिहासिक पल! पहली बार एक वंदे भारत एक्सप्रेस पूरी तरह से एक महिला कर्मचारी दल द्वारा संचालित की जा रही है, जो इस #अंतर्राष्ट्रीयमहिलादिवस पर CSMT से प्रस्थान कर रही है! भारतीय रेलवे में महिलाओं की ताकत, समर्पण और नेतृत्व का जश्न मनाने वाला एक गौरवपूर्ण क्षण!’ पीएम मोदी ने की है पहल यह कदम विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के योगदान को पहचानने और प्रोत्साहित करने के चल रहे प्रयासों का हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अपने संदेश में ‘नारी शक्ति’ को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने बताया कि उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं द्वारा संभाला जाएगा और उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों को स्वीकार किया जाएगा।

तकनीकी खराबी की वजह से ट्रेन संख्या 20171 वंदे भारत एक्सप्रेस को अपने निर्धारित समय से 11 घंटे की देरी से रवाना हुई

 भोपाल  जिस ट्रेन की रफ्तार, तकनीक और वैभव को बदलते रेलवे का चेहरा बताया जाता है, उसने सोमवार को धोखा दे दिया। तकनीकी खराबी की वजह से भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन से हजरत निजामुद्दीन जाने वाली ट्रेन संख्या 20171 वंदे भारत एक्सप्रेस को अपने निर्धारित समय से 11 घंटे की देरी से रवाना किया जा सका। इसकी वजह से सोमवार शाम दिल्ली से भोपाल आने वाली और मंगलवार की सुबह भोपाल से दिल्ली को जाने वाली वंदेभारत एक्सप्रेस का रद्द कर दिया गया है। आई तकनीकी खराबी यह पहली बार है, जब किसी तकनीकी खराबी के कारण वंदे भारत एक्सप्रेस को निरस्त करना पड़ा है। बताया जा रहा है कि रविवार रात ट्रेन संख्या 20172, हजरत निजामुद्दीन-रानी कमलापति वंदेभारत के भोपाल पहुंचने के बाद पता चला कि उसके सी-11 कोच की स्प्रिंग टूट गई है। यही ट्रेन सुबह 5.40 बजे हजरत निजामुद्दीन के लिए रवाना होने वाली थी। यात्रियों ने किया हंगामा तकनीकी खराबी ठीक नहीं हुई तो रात तीन बजे यात्रियों को इसके देरी से रवाना होने की सूचना भेजी गई। अधिकांश यात्री सुबह 9.30 बजे तक स्टेशन पहुंच गए। वहां उन्हें ट्रेन नहीं मिली तो हंगामा होने लगा। दोपहर तक ट्रेन का कोई पता नहीं चला तो बहुत से यात्री रेलवे ट्रैक पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे। कई यात्रियों ने स्टेशन मास्टर के कक्ष में जाकर हंगामा किया। रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल नाराज यात्रियों ने शताब्दी एक्सप्रेस में चढ़ने की भी कोशिश की, लेकिन रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने उन्हें बल पूर्वक बाहर निकाल दिया। यात्रियों का कहना था कि रेलवे से स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही थी, जिससे उनकी परेशानी बढ़ गई। इस घटना ने रेलवे के सूचना प्रबंधन और यात्री सुविधा प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रेन की तकनीकी खराबी दूर करने में रेलवे को 17 घंटे का समय लग गया। इस ट्रेन को शाम 4.28 पर रवाना किया गया, तब तक इसके तय समय से 11 घंटे की देर हो चुकी थी। हजरत निजामुद्दीन से भोपाल ट्रेन निरस्त हुई अधिकारियों ने बताया कि देर से रवाना किए जाने की वजह से सोमवार शाम हजरत निजामुद्दीन से चलकर रानी कमलापति आने वाली वंदे भारत ट्रेन को निरस्त कर दिया गया है। यह रैक नहीं आएगा तो मंगलवार सुबह रानी कमलापति से चलकर हजरत निजामुद्दीन तक जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस भी रद्द रहेगी।

रेलवे ट्रैक पर बड़ा पत्थर देख ड्राइवर ने लगाया ब्रेक, छत्तीसगढ़-दुर्ग वंदे भारत एक्सप्रेस हादसे से बची

दुर्ग/रायपुर. विशाखापट्नम से दुर्ग आ रही वंदे भारत एक्सप्रेस ओडिशा के नुआपाड़ा रोड में हादसे का शिकार होते-होते बची. जानकारी के मुताबिक वंदे भारत एक्सप्रेस कल रात करीब 10 बजे विशाखापट्टनम से दुर्ग जा रही थी. इस बीच ट्रेन के लोको पायलट की सतर्कता से रेलवे ट्रैक पर एक बड़ा पत्थर देखा और ट्रेन को रेलवे लेवल क्रॉसिंग गेट से लगभग 100 मीटर पहले ही रोक दिया. ट्रेन रोकने के बाद लोको पायलट ने इस बारे में स्टेशन मास्टर को सूचित किया. जल्द ही रेलवे के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और ट्रैक से पत्थर को हटा दिया, जिसके बाद करीब एक घंटे बाद ट्रेन की आवाजाही सामान्य हो सकी. नुआपाड़ा पुलिस स्टेशन से एक टीम भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी कि ट्रैक पर पत्थर किसने और क्यों रखा था. वहीं, लोगों ने लोको पायलट की सतर्कता और सूझबूझ की सराहना की, जिसकी वजह से एक संभावित दुखद दुर्घटना टल गई.

विदेशीयो में बढ़ रही वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का रुतबा, कहा यूरोप की नहीं है ये ट्रेन

मुंबई सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस के प्रशंसक विदेश में भी हैं। हाल ही में UAE यानी संयुक्त अरब अमीरात के एक पत्रकार ने वंदे भारत एक्सप्रेस के स्लीपर वर्जन का वीडियो साझा किया है। उन्होंने इसकी तुलना विदेश की आधुनिक ट्रेनों से की है। देश को पहली वंदे भारत एक्सप्रेस 15 परवरी 2019 को मिली थी। तब ट्रेन नई दिल्ली-कानपुर-इलाहाबाद-वाराणसी रूट पर दौड़ी थी। अब इनकी संख्या 100 के पार हो चुकी है। UAE के पत्रकार हसन सजवानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो वंदे भारत एक्सप्रेस के स्लीपर वर्जन का है। उन्होंने लिखा, ‘नहीं यह यूरो रेल नहीं है…। यह भारत की वंदे भारत स्लीपर ट्रेन है।’ पहली वंदे भारत स्लीपर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 1 सितंबर को ही BEML के बेंगलुरु रेल कॉम्पलैक्स में पहली स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। इस ट्रेन में USB चार्जिंग, इंटीग्रेटेड रीडिंग लाइट, पब्लिक अनाउंसमेंट, सिक्युरिटी कैमरा, मॉड्युलर पैंट्री, दिव्यांगों के लिए खास बर्थ और टॉयलेट जैसी सुविधाएं हैं। खास बात है कि इससे पहले लॉन्च हुईं वंदे भारत में सिर्फ बैठकर ही यात्रा कर सकते थे। यहां चलेगी नई वंदे भारत रेल मंत्रालय ने कोसी क्षेत्र के यात्रियों को एक बड़ी सौगात देते हुए बिहार में पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर मंडल के सहरसा से सियालदह के बीच नई वंदे भारत ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अन्नया स्मृति ने मंगलवार को यहां बताया कि वंदे भारत ट्रेन को चलाने के पहले रेलवे बोर्ड एवं रेल मुख्यालय से ट्रेन मैनेजर और क्रू की ट्रेनिंग कराने का निर्देश प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि पटना से चल रही वंदे भारत ट्रेन के क्रू और ट्रेन मैनेजर के साथ समस्तीपुर मंडल के कर्मियों को प्रशिक्षण लेने के लिए भेजा गया है। अन्नया स्मृति ने बताया कि समस्तीपुर मंडल के क्रू और मैनेजर नई वंदे भारत ट्रेन को मंडल के सहरसा से झाझा स्टेशन तक लेकर जाएंगे, जबकि झाझा से इस ट्रेन को दानापुर मंडल के कर्मचारी लेकर आगे जाएंगे।

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