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उपराष्ट्रपति धनखड़ आज आएंगे नरसिंहपुर, कृषि उद्योग समागम का करेंगे शुभारंभ

नरसिंहपुर उप राष्ट्रपति धनखड़, राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 115.96 करोड़ रुपए की लागत के 36 निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे। इसमें 60 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत के 71 निर्माण कार्यों का लोकार्पण और 46 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत के 15 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। 2 घंटे से ज्यादा रुकेंगे उपराष्ट्रपति धनखड़ उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ व उनकी पत्नी सुदेश धनखड़ का करीब 2 घंटे 20 मिनट प्रवास रहेगा। ये दोपहर 12.15 बजे भारतीय वायुसेना के विशेष हेलिकॉप्टर से नरसिंहपुर में बनाए गए हेलिपैड पर उतरेंगे। दोपहर 12.25 बजे से दोपहर 1.25 बजे तक कृषि उद्योग समागम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। दोपहर 1.30 बजे भोजन करने के बाद 2.10 बजे कार्यक्रम से हेलीपेड के लिए रवाना होंगे। दोपहर 2.15 बजे से 2.25 बजे तक विदाई कार्यक्रम होगा। ये दोपहर 2.25 बजे हेलिकॉप्टर से जबलपुर के प्रस्थान करेंगे। मंत्री भी रहेंगे मौजूद समागम सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण, उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण विभाग मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग और जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग मंत्री ऐदल सिंह कंषाना, स्कूल शिक्षा व परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल समेत कई अन्य विशिष्टजन भी शामिल रहेंगे। 325 बसों से आएंगे किसान समागम में किसानों-हितग्राहियों को लाने के लिए 325 बसें अधिग्रहित की गई हैं। वहीं कई विभागों के अमले को भी हितग्राहियों को लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रविवार को वरिष्ठ अधिकारियों ने अमले के साथ बैठक कर आयोजन स्थल का जायजा लिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सुबह 11.15 बजे नरसिंहपुर पहुंचेंगे। दोपहर 3.15 बजे जबलपुर के लिए रवाना होंगे। पना, छाछ, कढ़ी समेत चार तरह की सब्जी का जायका लेंगे निवेशक निवेशकों के भोजन के लिए मध्यप्रदेश टूरिज्म विभाग की ओर से आम का पना, मसाला छाछ प्रमुखता से परोसा जाएगा। सब्जियों में आलू गोभी, जीरा कोफ्ता, भिंडी मसाला, पनीर और कढ़ी भी होगी। शहर की दाल, चावल, बाजरा, ज्वार, गेहूं की रोटी भी परोसी जाएगी। किसानों-हितग्राहियों के लिए अलग मेन्यू बनाया गया है। इसमें उन्हें पूडी, सब्जी, अचार, मीठा, पानी आदि मिलेगा। मीडियाकर्मियों व ड्यूटीरत कर्मचारियों के लिए पैक्ड भोजन बांटा जाएगा। दो बजे तक नहीं मिलेगा बसों को प्रवेश नरसिंहपुर शहर से प्रतिदिन गाडरवारा, सागर, सिवनी, जबलपुर एवं छिंदवाड़ा आने-जाने वाली बसों का आज सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक शहर में प्रवेश नहीं होगा। जबलपुर, सिवनी से नरसिंहपुर आने-जाने वाली बसों का संचालन पेट्रोल पंप के पास एनएच 44 से रहेगा। छिंदवाड़ा से नरसिंहपुर आने-जाने वाली बसों का संचालन एनएच 44 सिंहपुर चौराहे फ्लाई ओव्हर के पास से रहेगा। गाडरवारा, सागर एवं राजमार्ग चौराहे से नरसिंहपुर आने-जाने वाली बसों का संचालन खैरीनाका के पास से रहेगा। सभी प्रकार के दो पहिया, चार पहिया, मालवाहक एवं व्यवसायिक वाहन सुबह 6 से दोपहर 2 बजे तक मुशरान पार्क से रेलवे स्टेशन तक प्रतिबंधित रहेंगे। मंडी चौराहा पर उतारे जाएंगे हितग्राही जबलपुर, सिवनी, मंडला व डिंडोरी, छिंदवाड़ा से आने वाले हितग्राहियों के वाहन एनएच 44 के निर्माणाधीन पुल के नीचे से रेलवे स्टेशन परशुराम तिराहा होकर मंडी चौराहा पहुंचेगें। रायसेन, सागर एवं दमोह करेली, खैरीनाका, गुलाब चौक, गांधी चौक, सुभाष चौक, आष्टांग तिराहा, सांकल तिराहा से ढाबा होते हुए मंडी चौक पहुंचेगें। हितग्राहियों को स्थानीय मंडी चौराहे पर उतारा जाएगा। जहां से 100 मीटर दूर कार्यक्रम स्थल पहुंचाने यातायात पुलिस तैनात रहेगी। मुख्य रोड पर यह वैकल्पिक व्यवस्था शहर में मुशरान पार्क से सुभाष चौक मेन रोड पर यातायात का अत्याधिक दबाव होने से सभी प्रकार के भारी वाहनों का नरसिंहपुर शहर में प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। उक्त समय में सभी प्रकार के चार पहिया, तीन पहिया एवं दो पहिया वाहन सुभाष चौक से आष्टांग चिकित्सालय, सांकल तिराहा, सुनका चौराहा, मुशरान पार्क से होकर सिंहपुर तिराहा वाले मार्ग का उपयोग कर सकते है। प्लेटफॉर्म 2 से आ-जा सकेंगे यात्री सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन के सामने वाली रोड पर यातायात का दबाव रहेगा। इसलिए रेलवे यात्री रेलवे स्टेशन पहुंचने के लिए प्लेटफॉर्म नम्बर 2 का उपयोग करें। शहर से प्लेटफार्म नम्बर दो पर जाने के लिए बरगी बिज से होकर एनएच 44 से होकर रॉसरा ग्राम से होते हुए रेलवे प्लेटफार्म नम्बर दो पहुंचनें के मार्ग का उपयोग कर सकते हैं  

Vice President ने कहा एक मामले में SC ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं दूसरे मामले में कहा कि यह संविधान का हिस्सा

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने एक नए संबोधन में कहा है कि संविधान के बारे में कोई संदेह नहीं होना चाहिए. संविधान क्या होगा? इसे अंतिम रुप से तय करने वाले निर्वाचित प्रतिनिधि हीं होंगे और इससे ऊपर कोई अथॉरिटी नहीं होगा. उन्होंने कहा कि संसद सुप्रीम संस्था है. राज्यसभा के सभापति उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिल्ली विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान के पद औपचारिक या सजावटी हो सकते हैं. मेरे हिसाब से नागरिक सर्वोच्च है. हर किसी की अपनी भूमिका होती है. उपराष्ट्रपति ने एक बार फिर संविधान कोर्ट की आलोचना की और सुप्रीम कोर्ट द्वारा संविधान की प्रस्तावना को लेकर व्याख्याओं में असंगति पर सवाल उठाया. जगदीप धनखड़ ने कहा, “एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है (गोलकनाथ मामला) दूसरे मामले में उसने कहा कि यह संविधान का हिस्सा है (केशवानंद भारती). बता दें कि गोलकनाथ केस में संसद अनुच्छेद 368 के तहत मौलिक अधिकारों को संशोधित या समाप्त नहीं कर सकती, क्योंकि मौलिक अधिकार संविधान का अभिन्न हिस्सा हैं. यानी कि संसद को मौलिक अधिकारों में कटौती करने का अधिकार नहीं है. केशवानंद भारती केस में सर्वोच्च न्यायालय की 13 जजों की संविधान पीठ ने 7:6 के बहुमत से फैसला दिया कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से को संशोधित कर सकती है, लेकिन यह संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) को नष्ट नहीं कर सकती. मूल संरचना में संविधान की सर्वोच्चता, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, संघीय ढांचा, शक्ति पृथक्करण, न्यायिक समीक्षा, और मौलिक अधिकारों का सार शामिल है. 25 जून 1975 लोकतंत्र का काला दिन उपराष्ट्रपति ने देश में आपातकाल का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि 25 जून 1975 हमारे लोकतंत्र का काला दिवस था. इस दिन देश की सर्वोच्च अदालत ने 9 उच्च न्यायालयों की सलाह की अवहेलना की. जगदीप धनखड़ ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोगों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, लेकिन सौदेबाजी नहीं की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र अभिव्यक्ति और संवाद से ही पनपता है. अगर अभिव्यक्ति के अधिकार का गला घोंटा जाता है तो लोकतंत्र खत्म हो जाता है. और अगर अभिव्यक्ति के अधिकार पर अहंकार हो जाता है तो वह हमारी सभ्यता के अनुसार अभिव्यक्ति नहीं है संवैधानिक पद औपचारिक या सजावटी हो सकते हैं दिल्ली विश्वविद्यालय संविधान के 75  वर्ष लागू होने के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रम ‘कर्तव्यम’ को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि संस्कृत में कर्तव्य का अर्थ है कर्तव्य. हमारे संविधान निर्माता ने ऐसा संविधान दिया जिसमें टकराव से बचा जा सके. उन्होंने संविधान में मौजूद कुछ ऐसे पदों की ओर इशारा किया जिन्हें आम तौर पर सजावटी कहा जाता है. जगदीप धनखड़ ने कहा, “संवैधानिक पद औपचारिक या सजावटी हो सकते हैं. मेरे अनुसार, एक नागरिक सर्वोच्च है. हर किसी की भूमिका होती है. उन्होंने कहा कि एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है (गोलकनाथ मामला) दूसरे मामले में उसने कहा कि यह संविधान का हिस्सा है (केशवानंद भारती). संसद ही सुप्रीम है उन्होंने कहा कि संविधान के बारे में कोई संदेह नहीं होना चाहिए. संविधान क्या होगा? इसे अंतिम रुप से तय करने वाले निर्वाचित प्रतिनिधि ही होंगे और इससे ऊपर कोई अथॉरिटी नहीं होगा. इससे ऊपर कोई अथॉरिटी नहीं होगा. संसद सर्वोच्च है. उन्होंने कहा कि हमारा लोकतंत्र सहभागी है. डॉ. अंबेडकर ने माना कि स्वतंत्रता के लिए जिम्मेदारियों की आवश्यकता होती है. उन्होंने कहा कि मौलिक कर्तव्य मूल रूप से संविधान में नहीं थे. इसलिए 42वें संविधान संशोधन द्वारा हमने अनुच्छेद 51A पेश किया. शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 86वें संशोधन द्वारा एक और कर्तव्य जोड़ा गया. उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रवाद के लिए ऐसी प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है जिसमें मिलावट न की जा सके. हमारा संविधान हजारों वर्षों से हमारी सभ्यता के सिद्धांतों को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बातचीत में जीता है और बातचीत में सभी बराबर हैं. लोकतंत्र की सेहत बातचीत की गुणवत्ता पर निर्भर करती है. अगर बातचीत को पैसे वालों, विदेशी हितों द्वारा नियंत्रित किया जाता है, तो क्या होगा? हमें पक्षपात से ऊपर उठना होगा.    

न्यायाधीश के घर में पैसे मिले और FIR नहीं हुई लेकिन न्यायपालिका राष्ट्रपति पर सवाल उठा सकती हैःउपराष्ट्रपति धनखड़

नई दिल्ली 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार एक टिप्पणी के जरिए सलाह दी थी कि राष्ट्रपति को तीन महीने के भीतर राज्यपालों द्वारा भेजे गए लंबित विधेयकों पर फैसला ले लेना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय की इस टिप्पणी पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने प्रतिक्रिया दी है और इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि भारत ने ऐसे लोकतंत्र की कल्पना नहीं की थी। उपराष्ट्रपति ने किसे कहा ‘सुपर संसद’? उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, भारत ने ऐसे लोकतंत्र की कल्पना नहीं की थी, जहां न्यायाधीश कानून बनाएंगे, कार्यकारी कार्य करेंगे और ‘सुपर संसद’ के रूप में कार्य करेंगे। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गुरुवार को न्यायपालिका की भूमिका, पारदर्शिता की कमी और हाल की घटनाओं को लेकर चिंता जताई. उन्होंने न्यायपालिका द्वारा कार्यपालिका और विधायिका के क्षेत्र में हस्तक्षेप को लेकर तीखे सवाल उठाए. हाल ही में एक जज के आवास पर हुई घटना, उन पर एफआईआर दर्ज न होने और राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मद्देनजर ये सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश ने ऐसे लोकतंत्र की कल्पना नहीं की थी, जहां जज कानून बनाएंगे, कार्यपालिका का काम भी काम खुद ही करेंगे और सुपर संसद की तरह काम करेंगे. हाल ही में एक फैसले में राष्ट्रपति को निर्देश दिया गया है. आखिर हम कहां जा रहे हैं? देश में क्या हो रहा है? ये बातें उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा के प्रशिक्षुओं के छठे बैच को उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में संबोधित करते हुए कहीं. उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें बेहद संवेदनशील होना होगा. ये कोई समीक्षा दायर करने या न करने का सवाल नहीं है. राष्ट्रपति को समयबद्ध तरीके से फैसला करने के लिए कहा जा रहा है. अगर ऐसा नहीं होता है तो संबंधित विधेयक कानून बन जाता है. अनुच्छेद-142 न्यायपालिका के लिए न्यूक्लियर मिसाइल बन गया है. इसका उपयोग लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करने के लिए किया जा रहा है. ये संविधान की आत्मा के खिलाफ है उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति को निर्देश देना संविधान की आत्मा के खिलाफ है. बता दें कि उपराष्ट्रपति ने ये बात सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर कही है जिसमें अदालत ने राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए बिलों को मंजूरी देने में 3 महीने का समय निर्धारित किया था. उन्होंने केशवानंद भारती केस में आए मूल ढांचे के सिद्धांत की सीमाओं का जिक्र करते हुए आपातकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की याद दिलाई और कहा कि तब मौलिक अधिकारों का हनन हुआ था, जबकि मूल ढांचा अस्तित्व में था. देश का कानून उन पर लागू नहीं होता राज्यसभा के प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे पास ऐसे जज हैं जो कानून बनाएंगे, जो कार्यपालिका का कार्य खुद संभालेंगे, जो सुपर संसद की तरह काम करेंगे और उनकी कोई जवाबदेही नहीं होगी, क्योंकि देश का कानून उन पर लागू नहीं होता. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ये सब देखना पड़ेगा. भारत में राष्ट्रपति का पद बहुत ऊंचा है और राष्ट्रपति संविधान की रक्षा, संरक्षण एवं बचाव की शपथ लेते हैं. जबकि मंत्री, उपराष्ट्रपति, सांसदों और जज सहित अन्य लोग संविधान का पालन करने की शपथ लेते हैं. क्या देरी को समझाया जा सकता है? उपराष्ट्रपति ने कहा, हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते जहां आप भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दें और वह भी किस आधार पर? संविधान के तहत आपके पास एकमात्र अधिकार अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान की व्याख्या करना है. इसके लिए पांच या उससे अधिक न्यायाधीशों की आवश्यकता होती है. धनखड़ ने कहा, मैं हाल की घटनाओं का उदाहरण देना चाहूंगा. 14 और 15 मार्च की रात दिल्ली में एक जज के निवास पर एक घटना घटी. सात दिनों तक किसी को इसके बारे में पता नहीं चला. क्या देरी को समझाया जा सकता है? क्या इससे बुनियादी सवाल नहीं उठते? उन्होंने कहा, क्या ये मामला क्षमा योग्य है? क्या इससे कुछ बुनियादी सवाल नहीं उठते? एक लोकतांत्रिक देश में इसकी जांच की जरूरत है. इस समय कानून के तहत कोई जांच नहीं चल रही है क्योंकि आपराधिक जांच के लिए एफआईआर से शुरुआत होनी चाहिए. यह देश का कानून है कि अपराध की सूचना पुलिस को देना आवश्यक है. ऐसा न करना एक अपराध है. इसलिए आप सभी सोच रहे होंगे कि कोई एफआईआर क्यों नहीं हुई. इसका उत्तर सरल है. कानून से परे एक वर्ग को छूट कैसे मिली? उपराष्ट्रपति ने कहा, इस देश में किसी के भी खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है, किसी भी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ, चाहे वह आपके सामने मौजूद कोई भी हो. मगर, ये न्यायाधीश हैं, उनकी श्रेणी है, तो एफआईआर सीधे दर्ज नहीं की जा सकती. इसे न्यायपालिका में संबंधित लोगों द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए, लेकिन संविधान में ऐसा नहीं दिया गया है. संविधान ने केवल राष्ट्रपति और राज्यपालों को ही अभियोजन से छूट दी है. फिर कानून से परे एक वर्ग को यह छूट कैसे मिली? इसके दुष्परिणाम सभी के मन में महसूस किए जा रहे हैं. धनखड़ ने कहा कि उनकी चिंताएं ‘‘बहुत उच्च स्तर” पर हैं और उन्होंने ‘‘अपने जीवन में” कभी नहीं सोचा था कि उन्हें यह सब देखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि भारत में राष्ट्रपति का पद बहुत ऊंचा है और राष्ट्रपति संविधान की रक्षा, संरक्षण एवं बचाव की शपथ लेते हैं, जबकि मंत्री, उपराष्ट्रपति, सांसदों और न्यायाधीशों सहित अन्य लोग संविधान का पालन करने की शपथ लेते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते जहां आप भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दें और वह भी किस आधार पर? संविधान के तहत आपके पास एकमात्र अधिकार अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान की व्याख्या करना है> इसके लिए पांच या उससे अधिक न्यायाधीशों की आवश्यकता होती है।’ उपराष्ट्रपति निवास में राज्यसभा के 6वें बैच के प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए धनखड़ दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज के घर से जले हुए नोटों के बंडल मिलने के मामले पर भी बात की। उन्होंने कहा कि 14 और 15 मार्च की रात को नई दिल्ली में एक न्यायाधीश के निवास पर एक घटना हुई। सात दिनों तक, किसी को इसके बारे में पता नहीं था। हमें अपने आप से सवाल पूछने होंगे। क्या देरी समझने योग्य … Read more

जीवाजी विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नक्षत्र की तरह उभरता संस्थान है : केन्द्रीय मंत्री सिंधिया

जीवाजी राव ने जो शिक्षा का सपना देखा था वह आज हो रहा है साकार : उप राष्ट्रपति धनखड़ जीवाजी राव ने शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जीवाजी विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नक्षत्र की तरह उभरता संस्थान है : केन्द्रीय मंत्री सिंधिया उप राष्ट्रपति ने जीवाजी राव सिंधिया की प्रतिमा का किया अनावरण ग्वालियर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि सिंधिया परिवार का शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान रहा है। मैंने आज उन महापुरूष की मूर्ति का अनावरण किया है, जिन्होंने स्वतंत्र भारत में शिक्षा सहित अनेक क्षेत्र में अपने कीर्तिमान स्थापित किए हैं। साथ ही शिक्षा को गति देने का कार्य भी किया है। शिक्षा से ही व्यक्ति के अंदर भाव आता है और मानव का निर्माण होता है। उप राष्ट्रपति ने कहा कि परिवर्तनशील दुनिया है, बदलाव होते रहेंगे लेकिन शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की। तकनीक में हमारा देश काफी आगे निकल चुका है। जीवाजी विश्वविद्यालय संस्थान भी नई-नई तकनीकों को लायेगा, ऐसी उम्मीद है। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर में जीवाजी राव सिंधिया की प्रतिमा अनावरण के बाद आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में यह बात कही। अध्यक्षता राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने की। विशेष अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार, जिले के प्रभारी एवं जल संसाधन मंत्री तुलसराम सिलावट, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला और उप राष्ट्रपति की धर्मपत्नी श्रीमती सुदेश धनखड़ उपस्थित थीं। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि सिंधिया परिवार का संसद में हमेशा योगदान रहा है। स्व. माधवराव सिंधिया ने अनेक क्षेत्रों में सराहनीय कार्य किया है। उन्हें जो भी मंत्रालय मिला है, उसमें उन्होंने अपना श्रेष्ठ कार्य किया है। उप राष्ट्रपति ने कहा जीवाजी राव ने जो शिक्षा का सपना देखा था वह आज साकार हो रहा है। ग्वालियर के लिये आज का दिन रहेगा यादगार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर के लिये आज का दिन यादगार रहेगा। आज ग्वालियर में दो बड़े कार्यों का शुभारंभ हुआ है। जियो साइंस म्यूजियम के माध्यम से पृत्वी की उत्पत्ति, उसकी रचना, भू-गर्भिक घटनाओं की जानकारी का संकलन प्राप्त होगा। साथ ही ज्ञान, विज्ञान के समावेश से युवाओं नई जानकारियां प्राप्त होंगीं। इसके साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले जीवाजी राव सिंधिया की मूर्ति का अनावरण भी किया गया है। जीवाजी विश्वविद्यालय ने न केवल मध्यप्रदेश में बल्कि सम्पूर्ण देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति करते हुए देश के युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में और सशक्त बनाने का कार्य करती रहेगी। उन्होंने कहा जीवाजी राव ने शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया। केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि ग्वालियर शहर संगीत, शिक्षा और अपनी ऐतिहासिकता के लिये जाना जाता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान से ही विनम्रता प्राप्त होती है और विनम्रता से ही पात्रता प्राप्त होती है। जीवाजी विश्वविद्यालय 250 एकड़ में स्थापित है, जिसे मेरी दादी माँ और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा प्रारंभ किया गया था। जीवाजी विश्वविद्यालय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नक्षत्र की तरह उभरता संस्थान है। उन्होंने कहा कि मेरे परिवार ने जो बीज बोया था वह आज वट वृक्ष की तरह खड़ा हो गया है। जीवाजी विश्वविद्यालय संस्थान आधुनिकता की ओर अग्रसर है। उप राष्ट्रपति धनखड़ ने इस मौके पर जीवाजी विश्वविद्यालय द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने प्रदर्शनी में दर्शाए गए जीवाजी विश्वविद्यालय के इतिहास व उपलब्धियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उप राष्ट्रपति धनखड़ एवं अतिथियों ने इस अवसर पर “एक पेड़ माँ के नाम” पौधरोपण भी किया।  

संसदीय प्रक्रियाओं का रोज हम तो अपमान नहीं करते, कपिल सिब्बल का उपराष्ट्रपति धनखड़ पर तंज

नई दिल्ली. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने तंज किया। पी चिदंबरम के नए आपराधिक काननू पर दिए बयान पर उपराष्ट्रपति ने उनकी आलोचना की थी कि ऐ अंशकालिक लोगों के द्वारा बनाए गए हैं। इस पर सांसद कपिल सिब्बल नाराज हुए हैं। 1 जुलाई से नए आपराधिक कानून लागू किए गए हैं। इसको लेकर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा था कि यह अकुशल लोगों ने तैयार किया था। पी चिदंबरम की इस टिप्पणी से गुस्साए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस टिप्पणी का अक्षम्य बताया। उन्होंने कहा था कि यह अपमानजनक, मानहानिकारक टिप्पणी को वापस लिया जाए। धनखड़ ने कहा कि यह संसद के लोगों का अपमान है, क्या हम लोग अकुशल हैं? उपराष्ट्रपति ने कहा था कि मेरे पास इतने मजबूत शब्द नहीं हैं कि मैं इस तरह की कहानी को फैलाए जाने और एक सांसद को अंशकालिक करार दिए जाने की निंदा कर सकूं। उन्होंने कहा कि मैं चिदंबरम इस मंच से अपील करता हूं कि कृपया सांसदों के बारे में इस अपमानजनक, मानहानिकारक और अत्यधिक अपमानजनक टिप्पणी को वापस लें। मुझे उम्मीद है कि वह ऐसा करेंगे। उनके इस बयान पर राज्यसभा सांसद ने उन पर निशाना साधते हुए कहा कि जगदीप धनखड़ ने पी चिदंबरम के इस बयान की आलोचना की कि अंशकालिक लोगों ने तीन आपराधिक कानूनों का मसौदा तैयार किया, यह ‘संसद की बुद्धि का अक्षम्य अपमान’ है। उन्होंने कहा कि हम सभी अंशकालिक हैं धनखड़ जी!” विपक्ष के प्रमुख स्वर और स्वतंत्र राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि “और कौन दैनिक आधार पर संसदीय प्रक्रियाओं का अपमान करता है? हम तो नहीं करते।

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