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हाईकोर्ट ने मंत्री शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए बयान के बाद स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई अदालती कार्रवाई बंद कर दी

जबलपुर  मप्र हाईकोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए विवादित बयान के बाद प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई कानूनी कार्रवाई बंद कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 28 मई को मप्र हाईकोर्ट से निवेदन किया था कि मंत्री विजय खिलाफ के खिलाफ कार्रवाई बंद कर दें। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सोमवार को जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने मामला समाप्त कर दिया। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह द्वारा इंदौर के पास महू-अंबेडकर नगर के रायकुंडा गांव में एक सार्वजनिक समारोह में दिए गए बयान पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था। 14 मई को पारित आदेश में शाम तक उनके खिलाफ बी.एन.एस. की धारा 152, 196(1)(बी) और 197(1)(सी) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए थे। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि मंत्री ने भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया है। उन्होंने आमसभा में कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ गटर भाषा का इस्तेमाल किया है। उनका बयान प्रथम दृष्टया मुस्लिम धर्म के सदस्यों और अन्य व्यक्तियों के बीच वैमनस्य और दुश्मनी या घृणा या दुर्भावना पैदा करने की प्रवृत्ति का है। याचिका पर अगले दिन 15 मई को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया था कि मंत्री के खिलाफ दर्ज एफआईआर में उनके द्वारा किए गए अपराध का उल्लेख नहीं किया है। एफआईआर ऐसे कंटेंट के साथ लिखी गई है, जो चुनौती देने पर निरस्त हो जाए। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि अपराध के विवरण का उल्लेख करते हुए दोबारा एफआईआर दर्ज की जाए। हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के पूरे आदेश को सभी न्यायिक, अर्ध-न्यायिक और जांच प्रक्रिया में पैराग्राफ 12 के हिस्से के रूप में पढ़ा जाएगा। पुलिस की मंशा को देखते हुए हाईकोर्ट जांच की निगरानी करेगा। हालांकि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से निवेदन किया था। उसी पर हाईकोर्ट ने निर्णय लिया है। 

प्लेन क्रैश में जान गंवाने वाले रुपाणी का डीएनए मैच हुआ, अंतिम संस्कार राजकोट में होगा

 राजकोट  अहमदाबाद प्लेन क्रैश में जान गंवाने वाले गुजरात के रुपाणी का डीएनए मैच हो गया है जिसके बाद अब उनका पार्थिव शरीर उनके परिवारवालों को सौंपा जाएगा और राजकोट में उनका अंतिम संस्कार होगा। गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, “गुजरात के पूर्व सीएम विजय रूपाणी का 12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया दुर्घटना के दौरान निधन हो गया था आज सुबह करीब 11:10 बजे उनका डीएनए मैच हो गया है। अब उनके परिवारवालों को उनका पार्थिव शरीर सौंपा जाएगा। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री रुशिकेश पटेल ने कहा, सीएम भूपेंद्र पटेल पूर्व सीएम विजय रूपाणी के आवास पर गए और उनके परिवार को बताया कि उनका डीएनए मिलान हो गया है। सीएम ने परिवार को यह भी बताया है कि राजकोट में अंतिम संस्कार के लिए राज्य सरकार उनका सहयोग करेगी। परिवार के सदस्य तय करेंगे कि वे उनका पार्थिव शरीर कब लेना चाहते हैं। गुरुवार को अहमदाबाद से लंदन जाने वाला एयर इंडिया का विमान मेघानीनगर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उस दौरान पायलट और क्रू मेंबर्स के साथ फ्लाइट में कुल 242 लोग मौजूद थे जिनमें से एक विजय रुपाणी भी थे। वह अपनी बेटी से मिलने लंदन जा रहे थे। गुरुवार को दोपहर को हुआ विमान हादसा इतना भीषण था कि यात्रियों के डीएनए टेस्ट कर उनके शव परिवारवालों को सौंपे जा रहे हैं। 87 व्यक्तियों का डीएनए मिलान हुआ  सिविल अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रजनीश पटेल ने कहा कि सिविल अस्पताल में लाए गए शवों में से 92 (शव अवशेषों) का डीएनए मिलान पूरा हो गया है। 87 व्यक्तियों का ही डीएनए मिलान हुआ है, क्यों कि कई कुछ सैंपल डुप्लीकेशन वाले थे। यहां से 47 शव खेड़ा, अहमदाबाद, कोटा, महेसाणा, भरूच, वडोदरा, अरावली, आनंद, जूनागढ़, भावनगर, अमरेली, महिसागर और भावनगर भेजे गए हैं।  पूर्व सीएम स्वर्गीय विजय रूपाणी के बेटे रुषभ रूपाणी ने क्या कहा? पूर्व सीएम स्वर्गीय विजय रूपाणी के बेटे रुषभ रूपाणी ने कहा कि यह सिर्फ हमारे परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य 270 परिवारों के लिए भी दुख की घड़ी है। मैं इस घटना के दौरान पुलिस, आरोग्य स्टाफ, सिविल डिफेंस, फायर सर्विसेज और आरएसएस कार्यकर्ताओं के बचाव प्रयासों के लिए उनका आभार व्यक्त करता हूं, जो सराहनीय है। मैं पीएम मोदी, सीएम भूपेंद्र पटेल और अन्य नेताओं का भी आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने सिर्फ हमारे परिवार के साथ ही नहीं, बल्कि अन्य सभी परिवारों का भी साथ दिया और उनका साथ दिया। मेरे पिता ने अपने 50-55 साल के राजनीतिक जीवन में कई लोगों के जीवन को छुआ। आज वे सभी लोग हमारे साथ खड़े हैं। पंजाब से भी कई पार्टी कार्यकर्ता अपनी संवेदना व्यक्त करने यहां आ रहे हैं। कैसे हुआ था हादसा? गुरुवार दोपहर एकर बजकर 38 मिनट पर एयर इंडिया के विमान AI-171 से उड़ान भरी थी और टेक ऑफ के कुछ ही मिनटों बाद मेघानीनगर में एक हॉस्टल की पांच मंजिला इमारत से टकरा गया। इस हादसे का वीडियो भी सामने आया था जिसमें विमान के नीचे गिरने के बाद आग धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया था। ये हादसा इतना भयावह था कि फ्लाइट में मौजूद 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई जबकि एक शख्स बाल-बाल बच गया। एक हफ्ते पहले जाने वाले थे विजय रुपाणी बताया जा रहा है कि पहले विजय रुपाणी का लंदन जाने का प्रोग्राम 5 जून का था। लेकिन लुधियाना पश्चिम उपचुनाव के चलते उन्हें अपनी ट्रिप टालनी पड़ी। बाद में उन्होंने 12 जून की तारीख तय की।     

मंत्री शाह ने बताया है कि मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के लोगों के उत्थान के लिये वचनबद्ध है

भोपाल जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया है कि मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के लोगों के उत्थान के लिये वचनबद्ध है। प्रदेश की प्रमुख पिछड़ी जनजाति में कोल जनजाति तीसरी प्रमुख पिछड़ी जनजाति है। उन्होंने कहा कि कोल जनजाति स्वतत्रंता आंदोलन में गौरवमयी संघर्ष की याद दिलाती है। संघर्षमयी इतिहास, उनकी शैली और संस्कृति स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान के लिये जानी जाती है। मध्यप्रदेश में 10 लाख से भी ज्यादा कोल जनजाति के लोग निवासरत है। रीवा, सीधी, सिंगरौली, सतना, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, कटनी, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिण्डौरी में मुख्यत: निवासरत है। बढ़ी आबादी कोल जनजाति केवल मध्यप्रदेश ही नहीं देश के उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्य में भी निवास करती है। यह खरवार समूह की एक प्राचीन जनजाति है। ये स्वयं को शबरी माता का वंशज मानते है। कोल शब्द कुल से निकला है, जो समस्त का रूप है। ग्रामीण सांस्कृति की धड़कन है वाद्ययंत्र मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि कोल जनजाति का मुख्य जीविकोपार्जन वनोपज संग्रहण, कृषि और मजदूरी पर आधारित है। प्रकृति की पूजा करने वाली यह जनजाति जंगल, नदियों और पहाड़ों से गहरा नाता रखती है। कोल समाज के पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और वाद्ययंत्र आज भी ग्रामीण संस्कृति की धड़कन है। सरकार और समाज मिलकर कोल जनजाति के उत्थान और सम्मान के लिये कार्य कर रहे है। सरकार द्वारा जनजातियों के विकास के लिये संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलने से और औद्योगिकरण के विकास से कोल जनजाति भी विकास की और अग्रसर है। शिक्षा और रोजगार पर शासन का फोकस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जनजाति वर्ग के चहुँमुखी उत्थान के लिये राज्य और केन्द्र सरकार के द्वारा छात्र-छात्राओं के विकास के लिये किये जा रहे समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि कोल जनजाति के छात्र-छात्राएँ आज उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे है। राज्य शासन द्वारा म.प्र. प्रदेश लोक सेवा आयोग तथा संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में सफल होने पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में विभिन्न स्तरों पर सफल होने वाले अभ्यर्थियों को देय राशि प्रारम्भिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 40 हजार मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 60 हजार एवं साक्षात्कार उपरांत सफल होने पर 50 हजार की राशि प्रदान की जाती है। इसमें प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने की पात्रता के लिए आय सीमा का बंधन नहीं है। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में विभिन्न स्तरों पर सफल होने वाले जनजातीय वर्ग के सफल अभ्यार्थी जिनके माता-पिता / अभिभावक की वार्षिक आय रुपये 8 लाख से अधिक न हो को प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 20 हजार मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 30 हजार साक्षात्कार उपरांत सफल होने पर 25 हजार की राशि प्रदान की जाती है। दूसरी बार सफलता प्राप्त करने पर अभ्यर्थी को उपरोक्त उल्लेखित राशि की 50 प्रतिशत राशि एवं तीसरी बार योजना का लाभ प्रदान नहीं किया जाता। अंगेजी हुकुमत के विरूद्ध हुआ कोल विद्रोह मंत्री डॉ. विजय शाह ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम में कोल समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कोल जनजाति ने अंग्रेजी हुकुमत के अन्याय के विरूद्ध 1831 में अंग्रेजों से लोहा लिया, जिसे कोल विद्रोह के रूप में याद किया जाता है। बुधू भगत और मदारा महतो के नेतृत्व में कोल विद्रोह असमानता, शोषण और अत्याचार के विरूद्ध अन्य जनजातियों के लिये प्रेरणा का स्त्रोत बना। कोल विद्रोह से प्रभावित होकर इसका अनुसरण करते हुए अन्य कई जनजातियों ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।  

माल्या का दावा है कि बैंकों ने उनकी संपत्तियों से 14,131.6 करोड़ रुपये की वसूली कर ली, जो उनके कर्ज से अधिक

नई दिल्ली भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के कर्ज चुकाने वाले दावे पर सरकार और बैंकों ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। माल्या का दावा है कि उन्होंने बैंकों के सभी बकाया कर्ज चुका दिए हैं फिर भी उन्हें परेशान किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि माल्या पर अभी भी 7,000 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है और उसके पुनर्भुगतान के दावे ‘निराधार’ हैं। टइम्स ऑफ इंडिया ने सरकारी सूत्रों के हवाले से लिखा कि माल्या का यह दावा पूरी तरह भ्रामक है, क्योंकि उन्होंने केवल मूलधन (प्रिंसिपल अमाउंट) को आधार बनाकर बयान दिया है, जबकि उन पर अब भी ब्याज और अन्य शुल्कों सहित कुल 6,997 करोड़ रुपये बकाया हैं। वर्ष 2013 में जब यह मामला ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) में दर्ज किया गया था, तब किंगफिशर एयरलाइंस का कुल एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) 6,848 करोड़ रुपये था। इसमें नॉन-क्यूम्युलेटिव रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर्स भी शामिल थे। अप्रैल 10 तक, DRT के आदेश के अनुसार, बकाया ब्याज और अन्य शुल्कों को मिलाकर कुल देनदारी बढ़कर 17,781 करोड़ रुपये हो गई थी। अब तक बैंकों ने माल्या से जुड़ी संपत्तियों को बेचकर 10,815 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है, जिसमें गोवा स्थित मशहूर किंगफिशर विला की बिक्री भी शामिल है। इसके बाद भी बैंकों को अब भी 6,997 करोड़ रुपये की वसूली करनी है। 14,000 करोड़ रुपये चुका दिए? सरकारी सूत्रों के अनुसार, विजय माल्या का दावा कि उन्होंने 14,000 करोड़ रुपये चुका दिए हैं, वास्तविकता से परे है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “उन्होंने संभवतः केवल मूल कर्ज की राशि को ध्यान में रखते हुए यह दावा किया है, जबकि किसी भी ऋण पर तब तक ब्याज लगता है जब तक वह पूरी तरह चुकता न हो जाए। इसके अतिरिक्त, डिफॉल्ट करने वालों पर दंडात्मक ब्याज (पेनल इंटरेस्ट) भी लगाया जाता है।” माल्या पहले भी ऐसे दावे कर चुके हैं, जबकि वह खुद देश से फरार हैं और भारत लौटकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करने से बच रहे हैं। उनके दावों के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया है कि बैंकों की वसूली प्रक्रिया उनके बोर्ड द्वारा स्वीकृत नीतियों के अनुरूप ही की जा रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, “बैंकों की वसूली की नीति हर कर्जदार के लिए समान है, चाहे वह किसी भी समुदाय, क्षेत्र या पृष्ठभूमि से आता हो। विजय माल्या द्वारा लगाए गए किसी भी भेदभाव या मीडिया दबाव के आरोप पूर्णतः निराधार और भ्रामक हैं।” गौरतलब है कि किंगफिशर को दिए गए कुछ ऋणों का पुनर्गठन भी हुआ था, जो अब जांच के दायरे में है। यहां तक कि आईडीबीआई बैंक के पूर्व प्रमुख योगेश अग्रवाल जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को भी सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है। सरकार और बैंक अब माल्या की भारत वापसी के कानूनी रास्ते को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं ताकि लंबित वसूली को आगे बढ़ाया जा सके और देश की वित्तीय प्रणाली पर विश्वास कायम रखा जा सके। माल्या के दावों की कहानी विजय माल्या कभी ‘किंग ऑफ गुड टाइम्स’ के नाम से मशहूर थे। वह 2016 में भारत से भागकर यूनाइटेड किंगडम में बस गए थे। उनकी अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस पर 17 भारतीय बैंकों का 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बकाया था। माल्या ने हाल ही में एक यूट्यूबर के पॉडकास्ट में अपनी चुप्पी तोड़ते हुए दावा किया कि बैंकों ने उनकी संपत्तियों की नीलामी के जरिए 14,100 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली कर ली है। उन्होंने यह भी कहा कि यह राशि डीआरटी के फैसले में निर्धारित 6,203 करोड़ रुपये के कर्ज से दोगुनी से अधिक है। माल्या ने यह भी दावा किया कि उन्होंने कभी भी कर्ज चुकाने से इनकार नहीं किया और उनकी मंशा हमेशा बैंकों को भुगतान करने की रही है। उन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की, जिसमें बैंकों से वसूली गई राशि का हिसाब मांगा गया है। माल्या ने अपने दावों के समर्थन में वित्त मंत्रालय की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनकी संपत्तियों से 14,131.6 करोड़ रुपये की वसूली की है। अब भारत सरकार और बैंकों ने माल्या के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विजय माल्या के दावे भ्रामक और निराधार हैं। उनकी कुल देनदारी 9,000 करोड़ रुपये से अधिक थी, जिसमें ब्याज और अन्य शुल्क शामिल हैं। सरकार का कहना है कि माल्या की संपत्तियों की नीलामी से प्राप्त राशि को विभिन्न बैंकों के बीच बांटा गया है, लेकिन यह पूरी तरह से उनके कर्ज को कवर नहीं करती। कानूनी लड़ाई और विवाद माल्या ने हाल ही में लंदन की एक अदालत में अपनी दिवालियापन याचिका को रद्द करने की अपील की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। उन्होंने दावा किया था कि बैंकों ने उनके कर्ज से अधिक राशि वसूल कर ली है, लेकिन यूके की अदालत ने उनके तर्कों को स्वीकार नहीं किया। माल्या के वकील ने कहा कि वे इस आदेश को चुनौती देना जारी रखेंगे। इस बीच, भारत में माल्या के समर्थन में कुछ लोग सामने आए हैं। उद्योगपति हर्ष गोयनका ने हाल ही में एक एक्स पोस्ट में सवाल उठाया कि जब बैंकों ने माल्या से 14,100 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है, तो उन्हें ‘राजनीतिक बलि का बकरा’ क्यों बनाया जा रहा है। किंगफिशर कर्मचारियों का दर्द माल्या के दावों के बीच, किंगफिशर एयरलाइंस के हजारों पूर्व कर्मचारियों का मुद्दा भी चर्चा में है। अनुमान है कि एयरलाइंस पर अपने कर्मचारियों का 300 करोड़ रुपये से अधिक का वेतन बकाया है। माल्या ने पॉडकास्ट में कर्मचारियों से माफी मांगी, लेकिन यह भी कहा कि उन्होंने कंपनी में अपनी निजी पूंजी से 3,000 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

विजय माल्या बोले मेरा इरादा हमेशा कर्ज चुकाने का था, ‘तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से संपर्क भी किया था …..

मुंबई बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमुख विजय माल्या , जो 9,000 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं , पॉडकास्टर राज शमनी के साथ खुलकर बातचीत की। गुरुवार को जारी किए गए इस एपिसोड में माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस के पतन के बारे में खुलकर बात की और इसके पतन के लिए मुख्य रूप से 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट को जिम्मेदार ठहराया। माल्या ने 2008 की वैश्विक वित्तीय मंदी की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “तो मान लीजिए कि 2008 तक यह आपके पक्ष में काम करता रहा। फिर क्या हुआ? आसान। क्या आपने कभी लेहमैन ब्रदर्स के बारे में सुना है? क्या आपने कभी वैश्विक वित्तीय संकट के बारे में सुना है, है न? क्या इसका भारत पर कोई असर नहीं पड़ा? बेशक, इसका असर हुआ।” किंगफिशर को बचाने के अपने प्रयासों को याद करते हुए माल्या ने बताया कि उन्होंने तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से संपर्क किया था। उन्होंने कहा, “मैं श्री प्रणब मुखर्जी के पास गया… और कहा कि मुझे एक समस्या है। किंगफिशर एयरलाइंस को आकार घटाने, विमानों की संख्या में कटौती करने और कर्मचारियों की छंटनी करने की जरूरत है, क्योंकि मैं इन उदास आर्थिक परिस्थितियों में परिचालन नहीं कर सकता।” भगोड़े शराब कारोबारी ने कहा, “मुझे कहा गया था कि आकार न घटाएं। आप जारी रखें, बैंक आपका समर्थन करेंगे। इस तरह से यह सब शुरू हुआ। किंग फिशर एयरलाइंस को अपनी सभी उड़ानें निलंबित करने के लिए मजबूर होना पड़ा। किंग फिशर एयरलाइंस संघर्ष कर रही है। जिस समय आपने ऋण मांगा, उस समय कंपनी का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं था।”   ‘छोरी’ कहाँ है? पॉडकास्ट पर बोलते हुए विजय माल्या ने कहा कि मार्च 2016 के बाद भारत नहीं लौटने के कारण उन्हें “भगोड़ा” कहना “उचित” है। हालांकि, उन्होंने सवाल किया कि लोग उन्हें “चोर” क्यों कह रहे हैं और पूछा कि “चोरी” कहां है। उन्होंने कहा, “मार्च (2016) के बाद भारत न जाने के कारण मुझे भगोड़ा कहिए। मैं भागा नहीं, मैं पहले से तय यात्रा पर भारत से बाहर गया। ठीक है, मैं उन कारणों से वापस नहीं लौटा, जिन्हें मैं उचित मानता हूं, इसलिए यदि आप मुझे भगोड़ा कहना चाहते हैं, तो कहिए, लेकिन ‘चोर’ कहां से आ रहा है… ‘चोरी’ कहां से आ रही है?” भारत सरकार ने अभी तक पॉडकास्ट में माल्या की टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। विजय माल्या पर भारतीय बैंकों के एक संघ को ₹ 9,000 करोड़ (लगभग $1.2 बिलियन) से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है, मुख्य रूप से उनकी अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए ऋणों के माध्यम से। इस साल फरवरी में, माल्या ने कर्नाटक उच्च न्यायालय को सूचित किया कि बैंकों को उनके द्वारा दिया गया ₹ 6,200 करोड़ का ऋण “कई गुना” वसूल किया गया है, और उनसे, यूनाइटेड ब्रुअरीज होल्डिंग्स लिमिटेड (UBHL, जो अब परिसमापन में है) और अन्य प्रमाणपत्र देनदारों से वसूल की गई राशि को दर्शाने वाले खातों का विस्तृत विवरण मांगा। धोखाधड़ी और धन शोधन के आरोपों का सामना कर रहे माल्या ने 2016 में भारत छोड़ दिया था और तब से वह यूनाइटेड किंगडम में रह रहे हैं।

कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी करने वाले मंत्री शाह के खिलाफ जांच करेगी 3 सदस्यीय SIT टीम, जानें पूरा मामला

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ राज्य के मंत्री विजय शाह की टिप्पणी की जांच के लिए सोमवार देर रात तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन कर दिया है. विशेष जांच दल (एसआईटी) में पुलिस महानिरीक्षक प्रमोद वर्मा, उप महानिरीक्षक कल्याण चक्रवर्ती और पुलिस अधीक्षक वाहिनी सिंह शामिल हैं. सुप्रीम ने सोमवार को कर्नल कुरैशी पर की गई ‘‘अभद्र” टिप्पणी के लिए विजय शाह को फटकार लगाई और उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से जुड़े मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन करने का निर्देश दिया. कोर्ट के दखल के बाद पुलिस ने गठित की एसआईटी शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को मंगलवार सुबह 10 बजे तक आईजी रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी गठित करने को कहा था, जिसमें एक महिला अधिकारी भी शामिल हो, जो मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज प्राथमिकी से जुड़े मामले की जांच करेगी.  मंत्री ने अपनी टिप्पणी के लिए प्राथमिकी दर्ज करने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी. सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि वह एक सार्वजनिक व्यक्ति और अनुभवी राजनेता हैं और इसलिए उनके शब्दों में कुछ वजन होना चाहिए. इस मामले में CID ​​ने आदेश जारी कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2025 को कुंवर विजय शाह बनाम मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय एवं अन्य के मामले में यह आदेश जारी किया था, जो एफआईआर क्रमांक 188/2025 से जुड़ा हुआ है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 152, 196 (1) (बी) एवं 197 (1) (सी) के तहत अपराध दर्ज किया गया है. गठित एसआईटी में पुलिस महानिरीक्षक सागर जोन प्रमोद वर्मा, उप पुलिस महानिरीक्षक विशेष सशस्त्र बल भोपाल कल्याण चक्रवर्ती, पुलिस अधीक्षक डिंडोरी वाहिनी सिंह जांच करेंगे. CID के आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अक्षरशः एवं निर्धारित समय सीमा में पालन किया जाए. क्या है पूरा मामला दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह के मामले में जांच करने के लिए एसआईटी गठन करने का आदेश दिया था. कुछ दिनों पहले मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर की विवादित टिप्पणी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में आईपीएस अधिकारियों की विशेष जांच समिति (एसआईटी) बनाने का आदेश दिया था. साथ ही पीठ ने विजय शाह की याचिका पर मध्य प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी किया था. कोर्ट ने मंत्री की लगाई फटकार पीठ ने कहा कि हमें ऐसी माफी नहीं चाहिए. आप पहले गलती करते हैं, फिर कोर्ट चले आते हैं. आप जिम्मेदार राजनेता हैं. आपको सोच-समझकर बोलना चाहिए, लेकिन आपने बहुत घटिया भाषा अपनाई है. इस पर विजय शाह के वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि वह माफी मांग चुके हैं और माफी का वीडियो भी जारी कर चुके हैं. विजय शाह मेरी पार्टी में होते तो उन्हें निकाल देता: चिराग पासवान कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह की टिप्पणी की निंदा करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को कहा कि अगर भाजपा नेता उनकी पार्टी में होते तो उन्हें ‘‘जीवन भर के लिए निष्कासित कर दिया जाता.” लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे. वह अपने गृह राज्य बिहार के दौरे पर हैं. हाजीपुर से सांसद ने कहा, ‘‘हमें अपने सैन्यकर्मियों पर गर्व है, जो कोई भी उनकी तुलना आतंकवादियों से करता है, वह निंदा का पात्र है। अगर ऐसा कोई व्यक्ति मेरी पार्टी में होता, तो उसे जीवन भर के लिए निष्कासित कर दिया जाता.” चिराग की पार्टी भाजपा की सहयोगी है. शाह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में मीडिया को जानकारी देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को ‘‘आतंकवादियों की बहन” कहकर विवाद खड़ा कर दिया था. हालांकि, भाजपा ने अभी तक शाह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है, जो दावा कर रहे हैं कि यह ‘‘जुबान फिसलने” के कारण हुआ. मध्यप्रदेश के मंत्री को राजग सहयोगियों के साथ-साथ विरोधियों की भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई. न्यायालय ने कहा कि शाह के बयानों से ‘‘पूरा देश शर्मसार हुआ है”. इसने साथ ही आदेश दिया कि इस संबंध में दर्ज प्राथमिकी की जांच तीन सदस्यीय विशेष जांच दल द्वारा की जाए. 8 दिन में सौंपना होगी जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को 28 मई तक जांच करने के आदेश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने शाह को गिरफ्तारी से राहत देते हुए जांच में सहयोग करने के लिए भी कहा है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह को फटकार लगाई है. कोर्ट ने सरकार और पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि एफआईआर के बाद आपने क्या किया? जांच कहां पहुंची? पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को कुछ और ठोस कदम उठाने चाहिए थे. इस बयान से बढ़ीं विजय शाह की मुश्किलें मंत्री विजय शाह की मुश्किलें 11 मई को उनके द्वारा दिए गए बयान से बढ़ी हैं. उन्होंने महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर मंच से बयान दिया था. उन्होंने नाम लिए बिना कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकियों की बहन बता दिया था. उन्होंने कहा था कि, उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी तैसी करने उनके घर भेजा.” हाई कोर्ट ने लिया था संज्ञान मंत्री का वीडियो वायरल हुआ तो जबलपुर हाईकोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया. हाईकोर्ट ने 14 मई को 4 घंटे में मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए. हालांकि मामले में FIR तो दर्ज हुई, लेकिन हाईकोर्ट ने FIR को खाना पूर्ति बताया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि अब इस मामले में कोर्ट ही पुलिस जांच की निगरानी करेगी. हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी कैविएट दायर की है. यानी आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के मामले को भी सुना जाएगा. विजय शाह मामले में कब क्या हुआ     11 मई को मंत्री विजय शाह, महू के रायकुंडा गांव पहुंचे और यहां एक कार्यक्रम … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंत्री द्वारा मांगी गई माफ़ी स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं, कानून अपना काम करेगा

भोपाल कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी का गठन कर दिया है। इसमें मध्य प्रदेश के बाहर से एक महिला अधिकारी सहित तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शामिल होंगे। सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह को फटकार भी लगाई और उनकी माफी स्वीकार करने से भी इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मंत्री द्वारा मांगी गई माफ़ी स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। कोर्ट ने कहा, आप एक पब्लिक फिगर हैं। एक अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं। आपको बोलते समय अपने शब्दों पर विचार करना चाहिए। हमें आपका वीडियो यहां दिखाना चाहिए। यह सशस्त्र बलों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। हमें बहुत ज़िम्मेदार होने की जरूरत है। सुनवाई के दौरान मंत्री विजय शाह के वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि अपने बयान के लिए वे माफी मांग चुके हैं। इस पर अदालत ने कहा कि माफी स्वीकार नहीं है। एक मंत्री का आचरण आदर्श वाला होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि माफी स्वीकार हो गई, तो आप बाह जाकर कहेंगे कि हमने अदालत के कहने पर माफी मांगी। आपके बयान से देश में गुस्सा है। भावना अच्छी होती तो माफी में अगर-मगर नहीं लगाते। कोर्ट ने तीन आईपीएस अधिकारियों की एसआईटी का गठन किया है, जो पूरे मामले की जांच करेगी। कोर्ट ने अपने आदेश में डीजीपी को एसआईटी का गठन करने का आदेश दिया। एसआईटी का नेतृत्व आईजी रैंक के अधिकारी करेंगे और इसमें एक महिला भी शामिल होगी। विजय शाह को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी भाजपा की निगाहें विजय शाह द्वारा दिए गए बयान के बाद कांग्रेस लगातार उन्हें मंत्री पद से हटाने का दबाव बना रही है। उधर इस मामले में भाजपा की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर थी। इससे पहले मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। कोर्ट के आदेश के बाद मानपुर पुलिस ने मंत्री के खिलाफ केस दर्ज किया था। इधर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एफआईआर के आदेश पर रोक लगाने के लिए विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, लेकिन वहां से भी उन्हें फटकार मिली। पाकिस्तान ने बना लिया दुष्प्रचार का टूल मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया को लेकर दिए गए बयान को पाकिस्तानी मीडिया ने दुष्प्रचार का टूल बना लिया है। वहां के मीडिया चैनल इस बयान के जरिए भारत को मुस्लिम विरोधी बता रहे हैं। बार एंड बेंच के के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने कहा आपने किस तरह की माफ़ी मांगी है? हमें दिखाइए। माफी का एक मतलब होता है। कभी-कभी नम्र और बनावटी माफी भी होती है, कभी कभी घड़ियालू आंसू भी होते हैं। आपका कौनसा मामला है? वहीं वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि माफी मांगी गई थी और इसे अदालत के सामने भी मांगी जा सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हमें माफी की ज़रूरत नहीं है, यह अवमानना ​​नहीं है। हम इसे कानून के अनुसार संभाल सकते हैं। सिर्फ इसलिए कि आप अदालत में आ रहे हैं, आप माफी मांग रहे हैं। आप एक सार्वजनिक व्यक्ति और एक अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं और आपको अपने शब्दों पर विचार करना चाहिए।

कर्नल सोफिया कुरैशी पर विजय शाह का विवादित बयान, सुप्रीम कोर्ट और HC में आज मामले की सुनवाई, जानें अब तक क्या हुआ?

भोपाल मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए बयान पर आज सुप्रीम कोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होना है। मंत्री विजय शाह ने महू के मानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान दिया था। इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। कोर्ट के आदेश के बाद मानपुर पुलिस ने मंत्री के खिलाफ केस दर्ज किया था। इधर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एफआईआर के आदेश पर रोक लगाने के लिए विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन वहां से भी उन्हें फटकार मिली। अब इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होना है। इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। कोर्ट के आदेश के बाद मानपुर पुलिस ने मंत्री के खिलाफ केस दर्ज किया था। इधर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एफआईआर के आदेश पर रोक लगाने के लिए विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन वहां से भी उन्हें फटकार मिली। अब इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होना है। पुलिस सार्वजनिक नहीं करेगी जानकारी शाह ने हाई कोर्ट के एफआईआर के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने अभी तक सिर्फ छापरिया के सरपंच और सचिव को बयान देने के लिए बुलाया है। पुलिस का कहना है कि मामला कोर्ट से जुड़ा है, इसलिए जांच की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। पुलिस के अनुसार, वे मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए काम कर रहे हैं। कर्नल पर दिए बयान के बाद हुई आलोचना मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर एक विवादित बयान दिया था। इस बयान के बाद उनकी काफी आलोचना हुई थी। हाई कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। शाह ने हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पुलिस ने वीडियो तो जब्त कर लिया है, लेकिन उसे अभी तक फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है भाजपा की निगाहें विजय शाह द्वारा दिए गए बयान के बाद कांग्रेस लगातार उन्हें मंत्री पद से हटाने का दबाव बना रही है। उधर इस मामले में भाजपा की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर है। पाकिस्तान ने बना लिया दुष्प्रचार का टूल मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया को लेकर दिए गए बयान को पाकिस्तानी मीडिया ने दुष्प्रचार का टूल बना लिया है। वहां के मीडिया चैनल इस बयान के जरिए भारत को मुस्लिम विरोधी बता रहे हैं। विजय शाह ने दिया था विवादित बयान दरअसल, 11 मई को इंदौर के महू में आयोजित एक कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्यमंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान दिया था. जो एक दिन बाद 12 मई को वायरल हुआ था. मामले ने तूल पकड़ा तो विजय शाह ने माफी भी मांगी, लेकिन 14 मई को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रदेश के डीजीपी को तत्काल मंत्री विजय शाह पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे, हाईकोर्ट में जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की बैंच ने उनकी इस भाषा को गटर जैसा बताया था, जिसके बाद मामले में एफआईआर भी हुई है. लेकिन विजय शाह ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. आज हो सकता है अहम फैसला विजय शाह के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में कोई अहम फैसला हो सकता है. क्योंकि हाईकोर्ट ने विजय शाह के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को केवल खानापूर्ति बताया था. हाईकोर्ट ने सख्ती से इस मामले में पुलिस जांच की बात कही थी. जिसके बाद मामले में तेजी देखी जा रही है. वहीं सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई पर ही विजय शाह का भविष्य तय करेगा. एक तरफ कांग्रेस लगातार प्रदेश में उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी पर भी दवाब देखा जा रहा है. क्योंकि यह कोई पहला मौका नहीं है जब विजय शाह ने इस तरह का विवादित बयान दिया हो, वह इससे पहले भी विवादित बयान दे चुके हैं. खास बात यह है कि विजय शाह की फिलहाल 16 मई के बाद से कोई लोकेशन नहीं मिल रही है, उनके भोपाल निवास पर कोई नहीं है, जबकि खंडवा और इंदौर में भी उनकी कोई जानकारी नहीं मिली है. फिलहाल वह कहा है कि इसकी जानकारी किसी को नहीं है, लेकिन विजय शाह के मामले में प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है, जबकि कांग्रेस लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रही है.  बयान पर कांग्रेस ने जताई कड़ी आपत्ति महू के पास एक कार्यक्रम में शाह ने कहा कि भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को उनकी ही बहन के जरिए सबक सिखाया। कांग्रेस ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि शाह का इशारा कर्नल कुरैशी की तरफ था। शाह ने बाद में सफाई दी कि उनके भाषण को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। बीजेपी के एक महत्वपूर्ण आदिवासी नेता और अक्सर विवादों में रहने वाले शाह की इस टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। कौन हैं कुंवर विजय शाह कुंवर विजय शाह बीजेपी के एक महत्वपूर्ण नेता हैं। वे आदिवासी समुदाय से आते हैं और अक्सर विवादों में रहते हैं। कुंवर विजय शाह हरसूद सीट से लगातार आठ बार चुनाव जीत चुके हैं। यह सीट अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित है। वे वर्तमान में जनजातीय कार्य, सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन और भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास मंत्री हैं। खंडवा के जंगलों से निकल भोपाल पहुंचे शाह खंडवा के जंगलों से निकलकर मध्य प्रदेश की राजनीति में ऊंचे पद तक पहुंचे हैं। लेकिन विवादों में रहने की उनकी आदत अक्सर उनकी तरक्की में बाधा बनती रही है। 2013 में शाह को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान … Read more

सरकारी कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह की फोटो को हटा दी गई

इंदौर  मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह एक बार फिर विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। इंदौर में ‘वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत जिला स्तरीय वन अधिकार समितियों की प्रशिक्षण कार्यशाला’ आयोजित की गई। इसमें उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कार्यक्रम स्थल पर लगे होर्डिंग्स में मंत्री विजय शाह की मुस्कुराती तस्वीर दिखी। इस पर अधिकारियों ने ऑब्जेक्शन लिया गया तो उसे हटाया गया। वर्कशॉप में मंत्री का फोटो वाला पोस्टर देखा तो अफसरों के बीच इसी की चर्चा होने लगी। इसके बाद मंत्री को हटा कर उनकी जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो चिपका दी गई। मौके पर पहुंचे सीनियर अधिकारियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए पोस्टर तुरंत हटवाए और संबंधित जिम्मेदारों को फटकार लगाई। क्या है पूरा मामला पूरा घटनाक्रम इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर के फीनिक्स हॉल का है। यहां गुरुवार को ट्रेनिंग प्रोग्राम रखा गया। इसमें अशासकीय सदस्यों, वन अधिकारी समिति के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान वर्कशॉप के लिए पोस्टर लगाए गए। जिसमें, सीएम मोहन यादव के साथ मंत्री विजय शाह की फोटो लगी थी। इस वर्कशॉप कार्यक्रम में इंदौर उज्जैन के कलेक्टर, वन के मंडल अधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी मौजूद थे। वहीं, कार्यक्रम जनजाति कार्य विभाग ने आयोजित कराया था। इसके मंत्री विजय शाह हैं। इसी कार्यक्रम से फोटो हटाई गई। क्यों हटाई गई तस्वीर हाल ही में मंत्री विजय शाह ने सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी की थी। जिसके चलते हाई कोर्ट के आदेश पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इस प्रकरण के बाद मंत्री को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण माना जा रहा है कि आयोजन में उनकी तस्वीर को हटा दिया गया। प्रोटोकॉल का हुआ उल्लंघन कार्यशाला में जब इंदौर संभाग के कमिश्नर दीपक सिंह की नजर इन होर्डिंग्स पर पड़ी, तो उन्होंने नाराजगी जाहिर की। आनन-फानन में अधिकारियों ने मंत्री विजय शाह की तस्वीर को पीएम मोदी की फोटो से ढंक दिया। जिससे न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ बल्कि आयोजकों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ खड़े हुए। नियमों के अनुसार, किसी भी सरकारी आयोजन में नेताओं की तस्वीरों का तय क्रम होता है। जिसमें प्रधानमंत्री का स्थान सर्वोच्च होता है। यहां पीएम मोदी की फोटो दूसरे स्थान पर और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की पहले स्थान पर रही, जो स्पष्ट रूप से अनुचित था। शाह की तस्वीर पर सफेद फ्लेक्स चिपका दिया अधिकारियों ने तत्काल पोस्टर से उनकी तस्वीर हटाने के निर्देश दिए। आनन-फानन में स्टाफ ने शाह की तस्वीर पर सफेद फ्लेक्स चिपका दिया। बाद में उक्त स्थान पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर को चस्पा किया गया। सुबह 11 बजे वन अधिकार अधिनियम को लेकर ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। लोगों ने उठाई थी आपत्ति आयोजन प्रदेश सरकार के जनजाति कार्य विभाग ने किया था। पोस्टर में मुख्यमंत्री मोहन यादव और मंत्री विजय शाह की तस्वीर नजर आ रही थी। पोस्टर में मंत्री शाह की बड़ी सी मुस्कुराती तस्वीर थी। कुछ लोगों ने आपत्ति उठाई और मंत्री शाह की तस्वीर पोस्टर पर क्यों है, तो अफसरों ने तुरंत कार्रवाई की। सरकारी कार्यक्रमों से दूर इस घटना ने साफ कर दिया कि मंत्री शाह अब सिर्फ जनता की नजरों से ही नहीं, बल्कि सरकारी कार्यक्रमों से भी दूर किए जा रहे हैं। अफसर भी उनके साथ सार्वजनिक रूप से जुड़ना नहीं चाह रहे। भले ही उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन उनकी स्थिति बेहद कमजोर नजर आ रही है। संभागीय कार्यशाला शुरू वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन और सामुदायिक वन अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए गुरुवार से दो दिनी संभागीय कार्यशाला की शुरुआत ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में हुई। इसमें वन समितियों की भूमिका को लेकर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने ग्रामीणों को जंगल की जमीन पर अतिक्रमण रोकने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जंगल में ग्रामीणों को वन अधिकार के अंतर्गत पट्टे दिए जाते हैं। सिर्फ खेती करने में भूमि का उपयोग करें, जबकि कुछ पट्टे से लगी जमीन पर भी अतिक्रमण करते हैं, यह बिलकुल गलत है। शुभारंभ जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा और संभागायुक्त दीपक सिंह ने किया। सचिव बामरा ने बताया कि राज्य शासन वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सामुदायिक अधिकारों को सशक्त बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है।

पाकिस्तान के मीडिया ने छेड़ा प्रोपेगंडा अभियान, मंत्री शाह का बयान बना हथियार

भोपाल  मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादास्पद बयान दिया था, जिसे लेकर देश में लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया और मंत्री से माफी मांगने को कहा है। पाकिस्तानी चैनल्स से फैलाया जा रहा नफरती एजेंडा इस बीच पाकिस्तान ने मंत्री विजय शाह के बयान को एक टूल का तरह इस्तेमाल कर प्रोपेगैंडा चलाने का काम किया है। पाकिस्तान के सरकारी चैनल पीटीवी ने इस बयान को भारत में मुस्लिम के प्रति कथित नफरत के प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत किया है। पाकिस्तान के चैनल्स ने एक प्रोपेगैंडा के तहत विजय शाह के बयान को इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है और पीटीवी के अलावा जीओ न्यूज, द डैली जंग सहित कई पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट्स ने इस बयान पर खबरें प्रकाशित कर दुनिया में मुस्लिम समुदाय में भारत की छवि धूमिल करने की कोशिश की है। पीटीवी का प्रोपेगैंडा पीटीवी ने बुधवार देर रात प्रसारित अपने प्राइम टाइम कार्यक्रम में कहा है, “भारत के हिन्दू बीजेपी के सीनियर नेता विजय शाह ने एक वफादार मुस्लिम महिला अफसर को दहशतगर्दों की कतार में खड़ा कर दिया है। मोदी के भारत में मुस्लिम के प्रति नफरत इस हद तक बढ़ चुकी है कि अब सेना के उच्च अधिकारी और महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं।” पीटीवी, जीओ न्यूज और जंग टीवी ने आरोप लगाया कि भारत में मुसलमानों को मुख्यधारा से बाहर धकेला जा रहा है और अब जो लोग सेना जैसी संस्थाओं में भी अपनी सेवा दे रहे हैं, उन्हें संदेह की नजर से देखा जा रहा है। पाकिस्तान द्वारा कर्नल सोफिया के बहाने भारत की छवि को ‘अल्पसंख्यक विरोधी राष्ट्र’ के रूप में प्रचारित करने की कोशिश की जा रही है। सिर्फ पाकिस्तानी टीवी चैनल्स ही नहीं, पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स से भी इस मुद्दे को लेकर नफरती एजेंडे और भारत के खिलाफ दुष्प्रचार को तेज कर दिया गया है। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ चलाए जा रहे प्रोपेगैंडा को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान अब सिर्फ विवादित बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान द्वारा इसे भारत की धार्मिक समरसता और लोकतांत्रिक छवि के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनाने की कोशिश है। राजनीतिक और कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि एमपी के मंत्री का यह बयान ने पाकिस्तान और अन्य विरोधी ताकतों को भारत पर हमला करने का अवसर दे दिया है। हालांकि, मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने स्वत:संज्ञान लेते हुए मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। लेकिन, न तो भाजपा और न ही मध्यप्रदेश सरकार ने उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की है। ठोस कार्रवाई नहीं होने से आग में घी पड़ रहा विशेषज्ञ मानते हैं कि अब यह मामला केवल एक विवादित बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान द्वारा इसे भारत की धार्मिक समरसता और लोकतांत्रिक छवि के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनाने की कोशिश है। राजनीतिक और कूटनीतिक गलियारों में यह चिंता बढ़ रही है कि मंत्री शाह की टिप्पणी ने पाकिस्तान और अन्य विरोधी ताकतों को भारत पर हमला करने का अवसर दे दिया है। हालांकि हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, लेकिन न तो भाजपा नेतृत्व और न ही मध्य प्रदेश सरकार ने उनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई की है। इससे मामला लगातार गरमाता जा रहा है और पड़ोसी देश पाकिस्तान को भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने का एक और बहाना मिल गया है।

कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान के बाद मंत्री विजय शाह की मुश्किलें लगातार बढ़ रही, इस्तीफे का दबाव

भोपाल महिला सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर मंत्री विजय शाह के विवादित बयान पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि आप संवैधानिक पद पर हैं और आपको अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। एक मंत्री होकर आप किसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने मंत्री विजय शाह के लिखाफ लिखी गई FIR की कॉपी पर भी सवाल उठाए हैं। इधर सियासी उथलपुथल भी तेज हो गई है। उमा भारती भी इस मामले में लगातार मंत्री शाह के इस्तीफे की मांग कर रही हैं। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेत्री उमा भारती ने विजय शाह को घेरते हुए गुरुवार को फिर से ट्वीट किया। उसमें लिखा कि कांग्रेस के कहने सुनने से हमें क्या मतलब, नैतिकता और देशभक्ति पर कांग्रेस खरी उतर ही नहीं पाई किंतु हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दी गई नसीहतों का तो हम ध्यान रखें।’ पहले हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार गुरुवार को युगलपीठ ने हाईकोर्ट के आदेशानुसार मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की है। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान अपने आदेश में कहा है कि एफआईआर ऐसे कंटेंट के साथ लिखी गयी है,जो चुनौती देने पर निरस्त हो जाये। युगलपीठ ने आदेश में उल्लेखित कंटेंट के बारे बताते हुए  एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा है। इसके अलावा एफआईआर में पुलिस विवेचना की मॉनिटरिंग हाईकोर्ट द्वारा की जाएगी।  पुलिस को जमकर लगाई फटकार, पूछे तीखे सवाल गुरुवार को विजय शाह सुप्रीम कोर्ट की शरण पहुंचे और एफआईआर पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन यहां भी शाह को राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि आप संवैधानिक पद हैं और आपको अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। एक मंत्री होकर आप किसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके पहले इसी कोर्ट ने बुधवार को विजय शाह के बयान पर नाराजगी जताई थी। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे कैंसर जैसा घातक बताया। हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने संज्ञान याचिका की सुनवाई करते हुए डीजीपी को विजय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने कहा कि मंत्री शाह ने गटरछाप भाषा का इस्तेमाल किया है, जो अस्वीकार्य है। इसके बाद बुधवार देर रात महू पुलिस ने विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी। दिल्ली में भाजपा की अहम बैठक शाह का मामला दिल्ली के गलियारों तक भी पहुंच गया है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी नाराजगी जता चुके हैं। गुरुवार को BJP में मंथन की बात सामने आ रही है। मंत्री विजय शाह को लेकर पार्टी महासचिव बीएल संतोष से मध्यप्रदेश भाजपा प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने मुलाकात की है। वहीं विजय शाह भी अमित शाह से मुलाकात के बाद इस्तीफे पर विचार करने का कह चुके हैं। हालांकि इसकी विस्तृत जानकारी फिलहान सामने नहीं आ सकी है। विजय शाह पर पहले दिन क्यों नहीं हुई कार्रवाई –   पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा  कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक बयान देने के मामले में मंत्री विजय शाह पर बीजेपी की ओर से अब तक कोई कार्रवाई ना होने को लेकर वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने दुख जताया है. पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने कहा कि “इस पर तो पहले दिन ही कार्रवाई हो जाना चाहिए थी. मैं हैरान हूं कि पार्टी या सरकार ने अब तक कोई निर्णय क्यों नहीं लिया. उन्होंने कहा कि सारा फजीता करवाने के बाद अब अगर निर्णय लेंगे भी तो उसका क्या औचित्य रहेगा. ईटीवी भारत से खास बातचीत में शर्मा ने कहा कि ऐसे में पार्टी का उपहास होता है, उसकी तपस्या, त्याग, राष्ट्रभक्ति और विचार पर सवालिया निशान लगता है.” शाह पर पार्टी ने क्यों निर्णय नहीं लिया, मुझे हैरानी बीजेपी नेता रघुनंदन शर्मा ने कहा कि “मंत्री रहते हुए अपनी वाणी भाषा संयम रहना आवश्यक है, क्योंकि मंत्री सरकार का प्रतिनिधित्व करता है. हमारे यहां विधान ज्वाइंट रिस्पांसिबिलिटी का है. एक व्यक्ति की त्रुटि सबकी त्रुटि मानी जाती है और एक व्यक्ति का त्याग सबका त्याग, या फिर उसका जनहित का काम पूरी सरकार का जनहित का लोकहित का काम माना जाता है. कहावत है जिएंगे भी साथ मरेंगे भी साथ. शर्मा ने कहा कि मुझे लगता है कि इसके उपर तत्परता से पहले दिन ही कार्रवाई हो जाना चाहिए थी. पार्टी ने या सरकार ने अभी तक क्यों निर्णय नहीं लिया, मुझे तो बड़ा दुख हो रहा है. इतनी फजीती करवाने के बाद निर्णय लेंगे, तो उसका क्या औचित्य रहेगा. उन्होंने कहा कि देश में एक जांबाज सैनिक के प्रति जो युद्ध के समय सम्मान का जो ज्वार उठा था, ऐसे समय में उसके बारे में बोलना और बहुत ही सम्मान प्रगट ना करते हुए अपमानित भाषा का उपयोग करना, चाहे वो कितने ही जोश में रहे हों, लेकिन जोश में होश नहीं खोना चाहिए. हमारे मंत्री ने जोश में होश खो दिया. उसका परिणाम उनको भी भुगतना पड़ रहा है और सारी पार्टी को भुगतना पड़ रहा है.” ऐसे लोग पार्टी की त्याग तपस्या पर सवालिया निशान रघुनंदन शर्मा ने कहा कि “मेरी पार्टी को तो मैं क्या सलाह दूंगा. वहां अब सलाह का अर्थ भी नहीं है. ये तो स्वयं निर्णय लेने का मामला था. कोर्ट निर्णय ले और कोर्ट तक बात जाए, ऐसी परिस्थिति उपन्न ही नहीं होना देनी थी, लेकिन प्रत्युन्नमति का अभाव होने के कारण ये सब खेल खड़ा होता है. उन्होंने कहा कि ऐसे में पार्टी का उपहास होता है. पार्टी का त्याग पार्टी की तपस्या पार्टी की राष्ट्रभक्ति पार्टी का विचार सारा इस सबके ऊपर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर देते हैं. ऐसे लोग जिसमें निर्णय ना लेने लोग भी शामिल हैं. मैं सोचता हूं कि इस बारे में बात साफ कर लेना चाहिए. दूध का दूध का पानी का पानी पहले ही हो जाना चाहिए था. क्यों नहीं हो रहा है मैं खुद हैरान हूं.” राज्यपाल से मिलेंगे कांग्रेस विधायक FIR के बाद भी मंत्री का इस्तीफा नहीं होने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कड़ा रुख अपनाया … Read more

मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में SC ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें फटकार लगाई

 मंत्री विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट ने भी लगाई फटकार, MP High Court के एफआईआर के आदेश पर रोक लगाने से इनकार विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, पूछा- संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसा बयान कैसे दे सकता मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में SC ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें फटकार लगाई भोपाल / जबलपुर मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान पर उनके खिलाफ महू के मानपुर थाने में बुधवार देर रात एफआईआर दर्ज की गई थी। मंत्री द्वारा एफआईआर रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई गई थी, जिस पर उन्हें वहां से भी फटकार मिली। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। उल्लेखनीय है कि स्वत: संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इस मामले में आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होना है। आज हाईकोर्ट के पटल पर उस वीडियो का लिंक भी रखे जाएंगे, जिसमें मंत्री ने कर्नल सोफिया को लेकर टिप्पणी की थी। कांग्रेस कर रही मंत्री को पद से हटाने की मांग इधर कांग्रेस मंत्री विजय शाह को पद से हटाने की मांग कर रही है। प्रदेश के इंदौर, भोपाल और जबलपुर सहित कई शहरों में मंत्री शाह के खिलाफ प्रदर्शन भी किया गया था। इन धाराओं में दर्ज हुआ केस, उम्र कैद या 7 साल तक की सजा का प्रविधान बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 152 : अलगाव, सशस्त्र विद्रोह और विध्वंसक गतिविधियों को भड़काने वाले कृत्यों को अपराध मानती है। यह देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कार्यों को भी अपराध मानती है। इसमें उम्रकैद या सात साल तक के कारावास के दंड का प्रविधान है। बीएनएस 196(1)(ख) : धर्म, जाति, जन्मस्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और सद्भाव बनाए रखने के लिए हानिकारक कार्य करने से संबंधित है। इसमें पांच वर्ष के कारावास का प्रविधान है। बीएनएस 197(1)(ग) : राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों से संबंधित है। इसमें किसी भी समूह की भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा को संदेह में लाने वाले आरोप, दावे या कथन शामिल हैं। इसमें तीन वर्ष के कारावास का प्रविधान है। हाईकोर्ट ने कहा- “गटर जैसी भाषा”, दर्ज हुआ मामला 14 मई 2025 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। अदालत ने उनकी टिप्पणी को “गटर की भाषा” कहा और इसे महिलाओं के सम्मान और सेना की गरिमा के विरुद्ध करार दिया। कोर्ट के मुताबिक, एक कैबिनेट मंत्री की ओर से इस तरह की टिप्पणी न केवल कर्नल सोफिया के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाती है, बल्कि इससे भारतीय सेना की प्रतिष्ठा पर भी सवाल खड़े होते हैं। आदेश के तहत आईपीसी की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें सात साल तक की सजा का प्रावधान है। Supreme Court की फटकार, 16 मई को अगली सुनवाई विजय शाह ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए Supreme Court का रुख किया, लेकिन यहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। 15 मई को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंत्री की भाषा अस्वीकार्य है और उन्होंने अपने पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 16 मई की तारीख तय की है और कहा है कि मामले में कानून के तहत उचित निर्णय लिया जाएगा। सोशल मीडिया पर समर्थन, विपक्ष का हमला यह मामला तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। हजारों लोग कर्नल सोफिया के समर्थन में सामने आए हैं और विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, विपक्षी दलों ने इसे महिलाओं और सेना के प्रति भाजपा सरकार के “दृष्टिकोण” का प्रतिबिंब बताया है। यह विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर गरमाया हुआ है और आने वाले दिनों में इसका असर मध्य प्रदेश की राजनीति पर भी दिख सकता है।

सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान देकर फंसे मंत्री विजय शाह, अब खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा

भोपाल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी जानकारी मीडिया से साझा करने वाली भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में सूबे के काबीना मंत्री विजय शाह के खिलाफ बुधवार रात प्राथमिकी दर्ज की गई है. वहीं इस मामले को लेकर विजय शाह सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं और उन्होंने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका दाखिल की है. उन्होंने याचिका पर ⁠जल्द सुनवाई की मांग की है. दरअसल कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए विवादित बयान को लेकर हाई कोर्ट ने विजय शाह के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था. जिसके बाद मंत्री शाह पर FIR दर्ज हुई है. ये याचिका एओआर शांतनु कृष्णा के माध्यम से दाखिल की गई है. मानपुर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कर्नल कुरैशी पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले का मीडिया की खबरों के आधार पर बुधवार को ही खुद संज्ञान लेते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक को मंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था. पुलिस अधिकारी ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश पर शाह के खिलाफ मानपुर पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है. उन्होंने बताया कि यह प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने का कृत्य), धारा 196 (1) (बी) (अलग-अलग समुदायों के आपसी सद्भाव पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला ऐसा कृत्य जिससे सार्वजनिक शांति भंग होती हो या भंग होने की आशंका हो) और धारा 197 (1) (सी) (किसी समुदाय के सदस्य को लेकर ऐसी बात कहना जिससे अलग-अलग समुदायों के आपसी सद्भाव पर विपरीत असर पड़ता हो या उनके बीच शत्रुता या घृणा या दुर्भावना की भावना पनपती हो या पनपने की आशंका हो) के तहत दर्ज की गई है. इस बीच, राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यालय ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्री विजय शाह के बयान के संदर्भ में कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं.” मानपुर पुलिस थाने में बुधवार रात 11:30 बजे के आस पास दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि 12 मई (सोमवार) को रायकुण्डा गांव में हलमा (सामूहिक श्रमदान और सामुदायिक सहभागिता की जनजातीय परम्परा) के कार्यक्रम के दौरान शाह के संबोधन के कुछ अंश प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए. शाह ने बयान को लेकर मांगी थी माफी शाह ने सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई अपनी विवादास्पद टिप्पणी के लिए बुधवार को माफी मांग ली और कहा कि वह ‘बहन सोफिया’ और सेना का हमेशा सम्मान करते हैं. अगर किसी व्यक्ति को उनकी बातों से ठेस पहुंची है, तो वह 10 बार माफी मांगने के लिए तैयार हैं.  शाह ने कर्नल सोफिया को ‘देश की बहन’ करार दिया और कहा कि उन्होंने राष्ट्र धर्म निभाते हुए जाति और समाज से ऊपर उठकर काम किया है. HC के आदेश के बाद FIR दर्ज मंत्री विजय शाह के खिलाफ कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद बुधवार रात इंदौर जिले में एफआईआर दर्ज की गई है. मंत्री के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की 3 अलग-अलग धाराओं में FIR दर्ज की गई है. उनके खिलाफ बीएनएस की धारा 152, 196(1) (B) और 197 (1)(C) के तहत FIR दर्ज की गई है. मंत्री ने मांगी माफी मंत्री की वीडियो वायरल होने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है. साथ ही उनके इस्तीफे की मांग भी की जा रही है. इसी बीच मंत्री ने वीडियो जारी कर के माफी भी मांगी है और सोफिया कुरैशी को अपनी बहन बताया है. उन्होंने माफी मांगते हुए कहा, हाल ही में मैंने जो बयान दिया अगर उसकी वजह से किसी भी समाज की भावना आहत हुई है, तो इसके लिए मैं दिल से न सिर्फ शर्मिंदा हूं बल्कि बेहद दुखी भी हूं और सभी से माफी चाहता हूं. उन्होंने सोफिया कुरैशी को लेकर आगे कहा, हमारे देश की वो बहन, सोफिया कुरैशी, जिन्होंने राष्ट्र धर्म निभाते हुए जाति और समाज से ऊपर उठकर जो काम किया है, उन्हें हमारी सगी बहन से भी ऊपर सम्मानित मानता हूं. सोफिया कुरैशी को बताया बहन कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर मध्य प्रदेश के मंत्री ने कहा, मैं भारतीय सेना और बहन सोफिया के उन सभी साथियों का दिल से सम्मान करता हूं, जिन्होंने हमारी बहनों का बदला लेने के लिए, हिंदुस्तान की मान-मर्यादा की रक्षा करते हुए, हमारे विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब दिया. मेरी भावना और मंशा यही थी कि मैं उनके अदम्य साहस और बलिदान को समाज के सामने सम्मानपूर्वक रखूं, लेकिन दुख के लम्हों में मुझ से कुछ ऐसे शब्द निकल गए जो नहीं निकलने चाहिए थे. आज मैं पूरे समाज, समुदाय, बहन सौफिया और सभी आर्मी जवानों से हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं. मैं हमेशा बहन सोफिया और हमारी सेना के वीरों का सम्मान करता हूं और एक बार फिर सभी से हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं. मंत्री ने क्या बयान दिया था ऑपरेशन सिंदूर के बाद मंत्री लोगों के संबोधित कर रहे थे इसी दौरान मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी का जिक्र किया और कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की. मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को उन आतंकवादियों की बहन बताया, जिन्होंने पहलगाम में निर्दोष लोगों की हत्या की. यही नहीं, मंत्री ने पीएम मोदी पर भी व्यंग्य कसते हुए कहा था कि उन्होंने आतंकवादियों की बहन को सेना में भेजा है.  

मंत्री विजय शाह मामले में MP हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, कहा- 4 घंटे में दर्ज करें FIR, क्या इस्तीफा देंगे शाह

भोपाल  कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह की मुश्किल बढ़ गई है। हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। जबलपुर HC के जस्टिस अतुल श्रीधरन और अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान कोर्ट ने सरकार को चार घंटे के अंदर (6:00 बजे तक) मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। बता दें कि मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह के विवादित बयान पर पीएम मोदी भी नाराज हैं। मंत्री शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में एक विवादित टिप्पणी की थी, जिस पर कांग्रेस ने उनके इस्तीफे की मांग की है। मंत्री शाह ने बाद में अपने बयान के लिए माफी मांगी और कहा कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं था। लेकिन कांग्रेस ने उनकी माफी को स्वीकार नहीं किया और उनके इस्तीफे की मांग जारी रखी है। ‘विजय शाह पर देशद्रोह का मामला दर्ज हो’ बता दें कि मंत्री विजय शाह के बयान से बवाल मचा हुआ है. बुधवार (14 मई) को पीसीसी चीफ जीतू पटवारी समेत कांग्रेस का प्रतिनिधि मंडल श्यामला हिल्स थाने पहुंचा. कांग्रेस ने उठाई विजय शाह के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने की मांग की है. कांग्रेस गुरुवार (15 मई) को मध्य प्रदेश के सभी थानों में कल शिकायती आवेदन भी देगी. एक मिनट भी पद रहने का हक नहीं- कांग्रेस मंत्री विजय शाह के बयान पर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि विजय शाह ने सेना का अपमान किया है और उन्हें एक मिनट भी मंत्री पद पर रहने का अधिकार नहीं है. उनके बयान से देश के लोग खुश नहीं हैं. हमने श्यामला हिल्स थाने में इसको लेकर आवेदन दिया है साथ ही हमने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी पत्र लिखा है. क्या इस्तीफा देंगे मंत्री विजय शाह कर्नल सोफिया कुरैशी पर जनजातीय मंत्री विजय शाह द्वारा दिए गए आपत्तिजनक बयान ने मध्य प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है. इस मामले में मंत्री विजय शाह को केन्द्रीय नेतृत्व से फटकार लगी है. इसके बाद उन्होंने मांफी भी मांगी है. इधर, कांग्रेस ने विजय शाह के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है. कांग्रेस के आक्रामक रुख और जनता की नाराजगी को देखते हुए अब बीजेपी बचाव की मुद्रा में है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या विजय शाह मंत्री पद से इस्तीफा देंगे. बीजेपी नेता जुटे डैमेज कंट्रोल में वहीं, मंत्री विजय शाह के विवादास्पद बयान से हुई पार्टी की किरकिरी के बाद डैमेज कंट्रोल की कोशिशें बीजेपी ने तेज कर दी हैं. विजय शाह को प्रदेश पार्टी मुख्यालय तलब किया गया. सफाई देने मंत्री हवाई चप्पल पहने ही दौड़े-दौड़े पहुंचे. इसके बाद उन्होंने मीडिया के सामने बयान को लेकर माफी मांगी. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का कहना है “मंत्री विजय शाह को समझाइश दी गई है. पार्टी नेतृत्व ने इस मामले को संज्ञान में लिया है और उन्हें आगाह किया गया है. सोफिया कुरैशी इस देश की बेटी है और उसने जो पराक्रम किया है, उसको पूरा देश सैल्यूट करता है.” कांग्रेस अध्यक्ष खडगे के बयान को लेकर वीडी शर्मा ने कहा “वे क्या कहते हैं वह उनका नजरिया है, लेकिन पार्टी इस पूरे मामले में गंभीर है.” हालांकि विजय शाह के इस्तीफे के सवाल पर पार्टी अध्यक्ष ने कुछ भी नहीं कहा. नेम प्लेट पर कालिख पोतने वाले कांग्रेसियों के खिलाफ एफआईआर इधर, मंत्री विजय शाह के विवादास्पद बयान के विरोध में मंत्री की नेम प्लेट पर कालिख पोतने के मामले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. वहीं, मंत्री पर एफआईआर दर्ज कराने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सहित कांग्रेस नेता थाने भी पहुंचे. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अब इस मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर विजय शाह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की है. जीतू पटवारी ने लिखा है “मंत्री का यह बयान न केवल एक गंभीर अपराध है, बल्कि भारतीय सेना की गरिमा, देश की एकता और सामाजिक सद्भाव पर भी खुला हमला है. कर्नल सोफिया कुरैशी ने अपनी वीरता और देशभक्ति से देश का मान बढ़ाया है. ऐसे व्यक्तित्व पर हमला उनकी व्यक्तिगत गरिमा पर प्रहार और भारतीय सेना एवं जन भावनाओं का अपमान है.”

Sofia Qureshi पर विवादित टिप्पणी मामले में विजय शाह पर होगी बड़ी कार्रवाई, डैमेज कंट्रोल में जुटी बीजेपी

 छतरपुर मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान दिया। जिसके बाद से न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस की तरफ से मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है तो वहीं FIR दर्ज कराने की भी तैयारी चल रही है। बीजेपी ने मामले को शांत करने के लिए कुछ नेताओं को कर्नल सोफिया के घर भेजा। भारतीय जनता पार्टी के मध्य प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का संदेश लेकर बीजेपी के कई नेता कर्नल सोफिया कुरैशी के छतरपुर स्थित नौगांव घर पहुंचे। कर्नल सोफिया के घर पहुंचे BJP नेता बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के निर्देश के बाद पूर्व विधायक मानवेंद्र सिंह सहित बीजेपी नेताओं ने सोफिया कुरैशी के नौगांव छतरपुर स्थित घर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और सोफिया को देश की बेटी बताया। इस दौरान भाजपा नेताओं ने कहा कि सोफिया हमारे देश की बेटी है और हमें उन पर गर्व है। बता दें कि विजय शाह के बयान से बीजेपी आलाकमान बेहद नाराज़ है और विवाद बढ़ने के बाद विजय शाह ने माफ़ी भी मांगी है।    खिलाफ FIR दर्ज कराने की तैयारी, इधर बंगले की बढ़ाई गई सुरक्षा मंगलवार को करनाल मोहल्ला स्थित उनके निवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। पूर्व कैबिनेट मंत्री मानवेन्द्र सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष अनूप तिवारी, पूर्व अध्यक्ष अंजुल सक्सेना, और वार्ड पार्षद श्यामसुंदर अर्जरिया पूर्व पार्षद कलीम खान ने उनके भाई बंटी सुलेमान से मुलाकात कर पूरे परिवार को बधाई दी। भाजपा की ओर से सार्वजनिक रूप से सम्मान कर कहा गया, “ऐसी बेटियाँ राष्ट्र की धरोहर होती हैं।” मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी व्यक्तिगत रूप से बधाई भेजी। पूर्व मंत्री मानवेंद्र सिंह ने कही ये बात पूर्व मंत्री मानवेंद्र सिंह ने कहा कि हमारे लिए बहुत गर्व की बात है, माननीय प्रधानमंत्री जी और राष्ट्रीय नेतृत्व ने हमारे नगर की बेटी को लीडरशिप में सबसे आगे जिम्मेदारी सौंपी। जिस तरीके से बेटी सोफिया ने यह कार्य किया है, इसके लिए हम सभी गौरवान्वित है। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि आगे राष्ट्रीय नेतृत्व इस परिवार का सम्मान करेगा। हम सभी परिवार का मनोबल बढ़ाने आए हैं। परिवार को भी गर्व होना चाहिए कि उनकी बेटी ने देश के लिए इतना बड़ा कार्य किया।    कर्नल सोफिया के चचेरे भाई बंटी सुलेमान बोले- परिवार के लिए गर्व की बात   कर्नल सोफिया के चचेरे भाई बंटी सुलेमान ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय नेतृत्व ने जिस तरह से उनकी बहन का मान बढ़ाया है, यह उनके परिवार के लिए गर्व की बात है और पूरा परिवार बहुत खुश है। हमारी बहन उनके फैसले पर खरी उतरी है। आगे भी इसी तरह का विश्वास उस पर बनाए रखे। हमारे परिवार की ओर से बहुत-बहुत आभार। मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए विवादित बयान ने देशभर की राजनीति गरमा दी है। एक तरफ जहां कांग्रेस समेत देशभर के राजनैतिक दल प्रदेश भाजपा सरकार के मंत्री विजय शाह के बयान की निंदा करते हुए उनसे इस्तीफे की मांग कर चुके हैं तो वहीं दूरी तरफ देश के आम लोगों में भी मंत्री विजय शाह की टिप्पणी पर नाराजगी दिखाई दे रही है। हालात ये हो गए हैं विवाद बढ़ने पर मंत्री विजय शाह की ओर से माफी मांगे जाने के बावजूद मामला गर्माता देख भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को इसपर संज्ञान लेना पड़ा है।  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भाजपा के राज्य संगठन से मंत्री विजय शाह से जुड़े मामले की रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय नेतृत्व इस मामले पर फैसला लिया जाएगा। मंत्री शाह के इस बयान पर मचा बवाल दरअसल, सोमवार को href=”https://www.patrika.com/indore-news/” target=”_blank” rel=”noopener”>इंदौर जिले के महू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर अमर्यादित बयान दिया था, जिसके वीडियोज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। मंत्री ने कहा, ‘जिन्होंने हमारी बेटियों का सिंदूर उजाड़ा, मोदी जी ने उन्हीं की बहन को भेजकर उनकी ऐसी की तैसी कर दी।’ इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में तकरार पैदा कर दी। उन्होंने कहा, ‘तुम्हारे समाज की बहन तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी।’ विवाद बढ़ने बेकफुट पर आए मंत्री इधर, बयान के बाद विजय शाह संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा से मिलने पहुंचे। प्रदेश बीजेपी दफ्तर में दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में मुलाकात हुई। हालांकि विजय शाह ने अपने विवादित बयान को लेकर माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि मैं अपने बयान को लेकर माफी मांगता हूं। मैं 10 बार माफी मांगता हूं। बीजेपी हुई असहज कर्नल सोफिया कुरैशी पर पूरे देश को नाज है। वहीं, मध्य प्रदेश के लिए तो अलग ही गर्व की बात है। कर्नल सोफिया कुरैशी मध्य प्रदेश के नौगांव की रहने वाली हैं। वह यहां की बेटी हैं। तमाम बयानवीर नेता कर्नल सोफिया कुरैशी की तारीफों के पुल बांधते नहीं थक रहे हैं। बीजेपी लगातार ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एज ले रही है। बड़बोले मंत्री विजय शाह ने अपने एक बयान से सब कुछ गुड़ गोबर कर दियाहै। विपक्ष के साथ-साथ इनके बयान से सोशल मीडिया पर भी उबाल है। लोग मंत्री की बेशर्मी पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पार्टी ने भी तलब कर खानापूर्ति कर दी है। बेशर्मी पर मंत्री की राक्षसी हंसी हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है, जब मंत्री विजय शाह विवादों में घिरे हैं। डैमेज कंट्रोल के लिए कर्नल सोफिया कुरैशी से मंत्री माफी मांग रहे हैं। एक नहीं, 10-10 बार माफी मांग रहे हैं। अफसोस है कि यह सिर्फ दिखावे के लिए है। उन्हें अपने घटिया बयान पर लगता है कि कोई अफसोस नहीं हो रहा है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। माफी के बाद वह ठहाके लगाकर हंसते हैं। बीजेपी ढो क्यों रही? मंत्री विजय शाह के बयान को लेकर बीजेपी की फजीहत हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी को आगे कर भारत सरकार ने दुनिया को अलग संदेश दिया था। बीजेपी इस मुद्दे पर अलग माइलेज ले रही थी। इसके जरिए … Read more

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