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मुकेश मल्होत्रा विजयपुर विधायक बने रहेंगे, लेकिन राज्यसभा में वोट का हक नहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

श्योपुर मध्यप्रदेश के श्योपुर की विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. इस सीट को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को बरकरार रखते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट ने उपचुनाव में दूसरे नंबर पर रहे रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था. विधायक बने रहेंगे मल्होत्रा हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को शून्य घोषित कर रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था. इसके बाद मुकेश मल्होत्रा ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर अपील के लिए समय मांगा था. इसके बाद हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि मुकेश मल्होत्रा के पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए 15 दिन का समय है. मुकेश मल्होत्रा को विधायकी बचाने के लिए 20 मार्च तक सुप्रीम कोर्ट से स्टे लाना होगा. अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया है तो मुकेश मल्होत्रा विधायक बने रहेंगे.  सुप्रीम कोर्ट में मुकेश मल्होत्रा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने दलीलें पेश कीं, जिसके बाद अदालत ने मल्होत्रा को राहत दी। सुप्रीम कोर्ट की दो प्रमुख शर्तें जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की डबल बेंच ने मुकेश मल्होत्रा को विधायक के रूप में जारी रखने की अनुमति तो दी है, लेकिन अंतिम फैसला आने तक ये पाबंदियां भी लगाई हैं… वोटिंग राइट नहीं: मुकेश मल्होत्रा फिलहाल राज्यसभा के लिए मतदान नहीं कर सकेंगे। ऐसे में अब मुकेश जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए वोट नहीं डाल पाएंगे। वेतन पर रोक: जब तक कोर्ट इस मामले में अपना अंतिम निर्णय नहीं सुना देता, तब तक उन्हें विधायक के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ते नहीं दिए जाएंगे। हालांकि, उन्हें विधायक निधि मिलेगी या नहीं…यह अभी साफ नहीं हुआ है। वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने बताया कि अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। मुकेश और रामनिवास दोनों ने बदली थी पार्टी पूर्व राज्यमंत्री और आदिवासी नेता मुकेश मल्होत्रा ने 2 मई 2024 को कांग्रेस जॉइन की थी। उन्होंने मुरैना जिले में आयोजित प्रियंका गांधी की चुनावी सभा में सदस्यता ली। विधानसभा चुनाव–2023 में मुकेश मल्होत्रा विजयपुर सीट से निर्दलीय मैदान में उतरे थे, तब पूरे क्षेत्र के आदिवासियों ने उनका साथ दिया था। उन्हें 45 हजार वोट मिले थे। मुकेश विजयपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पहले में बीजेपी में थे, तब सरकार ने उन्हें सहारिया प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया था। दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री बनाया था। विधानभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने 2023 के चुनाव से पहले भाजपा का साथ छोड़ दिया था। दरअसल, विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में सहारिया आदिवासी समाज के 70 हजार से ज्यादा वोट हैं। कांग्रेस ने आदिवासी वोटों को ध्यान में रखकर मुकेश को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया था।

बीजेपी ने थलापति विजय को दिया आकर्षक ऑफर, डिप्टी CM और 80 सीटें देने की पेशकश

 चेन्नई तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के करीब आते ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. हालिया मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्टी कड़गम (TVK) और BJP के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ने विजय को गठबंधन में शामिल होने के लिए एक बड़ा ऑफर दिया है. कहा जा रहा है कि बीजेपी ने विजय की पार्टी को 80 सीटें देने की पेशकश की है. इसके साथ ही बीजेपी ने विजय को उपमुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि विजय मुख्यमंत्री पद चाहते हैं और इसकी वजह से बातचीत में पेंच फंसा रहा है। मध्यस्थता करवा रही बीजेपी! बीजेपी विजय को एनडीए के साथ जोड़ने के लिए कई रास्तों का इस्तेमाल कर रही है. बताया जा रहा है कि वो एक अन्य राज्य के उपमुख्यमंत्री के जरिए इस बातचीत में मध्यस्थता करवा रही है. बीजेपी की विजय में दिलचस्पी का सबसे बड़ा कारण उनकी विशाल फैन फॉलोइंग है। क्यों विजय का साथ चाहती है बीजेपी? बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि तमिलनाडु के कड़े मुकाबलों में महज 2 प्रतिशत वोटों का अंतर भी जीत की दिशा बदल सकता है. राज्य के चुनावी इतिहास में कई बार बहुत कम मार्जिन से जीत-हार का फैसला हुआ है, ऐसे में विजय का समर्थन बीजेपी के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। विजय की पार्टी के सलाहकार क्या कहते हैं? दूसरी ओर, बीजेपी के साथ हाथ मिलाने की खबरों ने विजय के करीबी सलाहकारों के बीच चिंता बढ़ा दी है. उनके कुछ सलाहकारों का मानना है कि इतनी जल्दी किसी राष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा बनने से पार्टी की ‘स्वतंत्र छवि’ को नुकसान पहुंच सकता है. विजय ने अपनी पार्टी को राज्य में एक ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में पेश किया है। सलाहकारों को डर है कि एनडीए में शामिल होने से उनकी पार्टी की साख और वह नैरेटिव कमजोर हो सकता है, जिसके दम पर उन्होंने राजनीति में कदम रखा है।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के विभागों के लिए बजट पास, कई प्रमुख क्षेत्रों को वित्तीय मंजूरी

उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, गृह, जेल, विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग का बजट पारित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के लिए 16 हज़ार 560 करोड़ रुपए प्रावधानित रायपुर, उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार बनते ही हमने आवासहीन लोगों को प्रतिबद्घ होकर प्रथम बैठक में 18 लाख से अधिक लंबित आवासों के निर्माण को स्वीकृति दी गयी थी। 2 वर्षों में एसईसीसी 2011 एवं आवास प्लस-2018 की सूची के सभी पात्र हितग्राहियों के आवास स्वीकृत किया जा चुका है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, गृह, जेल, विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग का बजट  विधानसभा में पारित किया गया l          विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान के अंतर्गत 33 हजार 255 परिवारों को आवास स्वीकृति दी जा चुकी है एवं 19 हजार 199 आवास पूर्ण भी हो चुके हैं। प्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं नक्सल पीड़ित पात्र परिवारों को पीएम आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत विशेष परियोजना के तहत आवास लाभ प्रदान किए जाने हेतु भारत सरकार द्वारा 15 हजार परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जा रहा है।        मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत 38 हजार से अधिक परिवारों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है एवं 15 हजार से अधिक आवास पूर्ण भी हो चुके है। सरकार गठन उपरांत राशि  400 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान भी किया गया, यह राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि कोई भी परिवार आवासहीन न रहे।       भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय से पीएमजी एसवाई 4 के तहत 774 सड़कों द्वारा 781 बसाहटे लाभान्वित होंगी। जिसके लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 2237.97 करोड़ रुपए एवं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के लिए 550 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत निर्मित एवं निर्माणाधीन सड़कों के नागरिक सूचना पटल पर QR कोड आधरित सूचना स्वप्रकटीकरण बोर्ड लगाकर सड़कों की समस्त जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।     मंत्री  शर्मा ने बताया कि इस बजट में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 4000 करोड़ रुपए एवं  प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना हेतु 4265.00 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के लिए 350 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु बजट प्रावधान 850 करोड़ रुपए किया गया है। ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान हेतु 8.75 करोड़ का प्रावधान किया गया है।  ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के लिए 144 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।      गृह मंत्री  शर्मा ने बताया कि पुलिस विभाग के लिए मुख्य बजट में राजस्व व्यय मद अंतर्गत 7130.48 करोड़ रुपए एवं पूंजीगत परिव्यय मद अंतर्गत 590.53 करोड़ रुपए कुल 7721.01 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। पुनर्वास करने वाले वामपंथी उग्रवादी नक्सली कैडर को केन्द्रीय पुनर्वास नीति के तहत् उनके प्रतिस्थापन एवं पुनर्वास के लिये फिक्स डिपाजिट एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिये राशि रूपये 38 करोड़ का बजट में प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के मुख्य बजट में वर्तमान में हो रहे आधुनिक किस्म के अपराध एवं साइबर अपराध के मामलों की गहन अनुसंधान एवं रोकथाम हेतु पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में आधुनिक आई.टी. सेंटर खोले जाने हेतु 06 नवीन पद तथा जिला बालोद, बेमेतरा, खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई, सक्ती, बलरामपुर में कुल 05 साइबर थाना के गठन हेतु 50 नवीन पदों का प्रावधान किया गया है। सरकार द्वारा जिला रायपुर के नगरीय क्षेत्रों में लागू किये गये पुलिस आयुक्त प्रणाली का सुचारू एवं कुशलतापूर्णक संचालन हेतु कुल 67 नवीन पदों का प्रावधान किया गया है तथा ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पृथक से नवीन पुलिस जिला रायपुर ग्रामीण के रूप में संचालन हेतु कुल 251 नवीन पदों का प्रावधान किया गया हैं। इसी प्रकार राज्य के 06 नवगठित जिलों सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती, बलौदाबाजार, बालोद, बेमेतरा एवं मुंगेली में पुलिस के महत्त्वपूर्ण कार्य हेतु डीसीबी, डीसीआरबी के 156 नवीन पदों का प्रावधान किया गया है।         प्रदेश के नक्सल प्रभावित जिलों के लिए 15 नवीन पुलिस थाना की स्थापना हेतु कुल 975 नवीन पदों एवं 08 पुलिस चौकी को पुलिस थाना में उन्नयन किये जाने हेतु 337 नवीन पद, अत्यधिक कम बल स्वीकृत वाले 21 पुलिस थानों में अतिरिक्त बलवृद्धि किये जाने हेतु कुल 870 नवीन पदों का प्रावधान किया गया है।         प्रदेश में पुलिस प्रशासन को सुदृढ़ किये जाने हेतु नवीन पुलिस महानिरीक्षक रेंज रायपुर एवं राजनांदगांव तथा पुलिस उप महानिरीक्षक रायगढ़ रेंज कार्यालय के लिए कुल 41 नवीन पद तथा प्रदेश के विभिन्न पुलिस अधीक्षक कार्यालयों में अनुसचिवीय बल के कुल 110 अतिरिक्त नवीन पदों का प्रावधान किया गया है। शासकीय रेल पुलिस रायपुर के थाना/चौकी एवं लाईन में अतिरिक्त बलवृद्धि किये जाने हेतु कुल 150 अतिरिक्त नवीन पदों सहित, जगदलपुर हवाई पट्टी की सुरक्षा हेतु हेतु 40. न्यू स्टेट हैंगर माना रायपुर की सुरक्षा हेतु 40 नवीन पद का प्रावधान किया गया है। राजभवन की सुरक्षा, मुख्यमंत्री निवास सुरक्षा एवं मंत्रालय की सुरक्षा हेतु 250 अतिरिक्त नवीन पद, छसबल की वाहिनियों के अकुशल ट्रेडमेन संवर्ग के 400 नवीन पद, बस्तर फाईटर बल में अतिरिक्त बलवृद्धि (आरक्षक) हेतु 1500 नवीन पद, विशेष आसूचना शाखा मुख्यालय के लिए अनुसचिवीय संवर्ग के 24 नवीन पद, एटीएस विशेष शाखा में आदर्श आतंकवाद निरोधक दस्ता हेतु 325 नवीन पद, प्रदेश के विभिन्न छसबल वाहिनीयों में श्वान दल हेतु 83 नवीन पदों का प्रावधान किया गया है।      मंत्री   शर्मा ने बताया कि सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में 440 नवीन पदों की स्वीकृतियां प्रदान की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 01 नवीन भारत रक्षित वाहिनी के गठन हेतु 1007 नवीन पद, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल का 01 बटालियन गठन किये जाने हेतु 500 नवीन पद. जिला स्तरीय एन्टी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन हेतु 100 नवीन पद, विशेष शाखा, पुलिस मुख्यालय अंतर्गत एस०ओ०जी० (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) के गठन हेतु 44 नवीन पद सहित थाना एवं चौकियों की संख्या में वृद्धि करते हुये कुल 5421 नवीन पदों की स्वीकृतियां प्रदान की गई है। सरकार द्वारा विशेष पुलिस बल अंतर्गत … Read more

अभिनेता विजय पर 1.50 करोड़ रुपए का जुर्माना, मद्रास उच्च न्यायालय ने रखा फैसला जस का तस

मद्रास   दक्षिण के अभिनेता और टीवीके प्रमुख विजय एक बार फिर विवादों में घिर चुके हैं। इस बार मद्रास उच्च न्यायालय ने अभिनेता को झटका देते हुए आयकर विभाग द्वारा 1.50 करोड़ रुपए का जुर्माना अदा करने के आदेश को बरकरार रखने का फैसला लिया है। अभिनेता ने मद्रास उच्च न्यायालय में आयकर विभाग द्वारा लगाए जुर्माने को गलत बताते हुए याचिका दायर की थी, लेकिन न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए फैसले को बरकरार रखा है। दरअसल साल 2016-17 में अभिनेता ने आयकर रिटर्न दाखिल किया था और अपनी संपत्ति का विवरण देते हुए 35,42,91,890 रुपए की संपत्ति घोषित की थी। अभिनेता पर आरोप लगा कि उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है और असल संपत्ति छिपाने की कोशिश की। आयकर विभाग ने अभिनेता की संपत्ति की तुलना साल 2015 के दस्तावेजों से की, जिसमें पाया गया कि विजय ने कथित तौर पर फिल्म ‘पुली’ में अभिनय के लिए प्राप्त 15 करोड़ रुपए की आय को छुपाया था, जिसका खुलासा उन्होंने अपने आयकर रिटर्न में नहीं किया था। जिसके बाद साल 2022 में अभिनेता पर आयकर विभाग ने 1.50 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। अभिनेता ने जुर्माना न भरने का फैसला करते हुए आयकर विभाग द्वारा लगाए गए जुर्माने को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी। आदेश को चुनौती देते हुए अभिनेता का दावा था कि आदेश 30 जून, 2019 से पहले पारित किया जाना चाहिए था, और चूंकि आदेश देरी से जारी किया गया था, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए। मामले की सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने जुर्माने की राशि के भुगतान पर अंतरिम रोक लगा दी थी, लेकिन अब न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति के समक्ष अंतिम सुनवाई में जुर्माने के फैसले को बरकरार रखने का फैसला लिया गया है। अब अभिनेता को 1.50 करोड़ रुपए भरने पड़ेंगे। इसके अलावा अभिनेता करूर भगदड़ मामले में भी फंसे हैं। अभिनेता से लगातार सीबीआई घटना को लेकर पूछताछ कर रही है। अभिनेता दो बार सीबीआई के सामने पेश हो चुके हैं। सीबीआई लगातार अभिनेता और उनकी पार्टी की करूर भगदड़ में भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि विजय के देरी से आने की वजह से भीड़ ज्यादा एकत्रित हो गई और उन्हें देखने के लिए जुटी भीड़ अचानक बेकाबू हो गई। हालांकि अभिनेता और पार्टी से जुड़े अधिकारियों ने आरोपों से इनकार किया है।उच्च न्यायालय ने फैसले को किया बरकरार मद्रास उच्च न्यायालय का फैसला, अभिनेता विजय को 1.50 करोड़ रुपए का जुर्माना देना होगा अभिनेता विजय पर 1.50 करोड़ रुपए का जुर्माना, मद्रास उच्च न्यायालय ने रखा फैसला जस का तस

हाईकोर्ट ने मंत्री शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए बयान के बाद स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई अदालती कार्रवाई बंद कर दी

जबलपुर  मप्र हाईकोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए विवादित बयान के बाद प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई कानूनी कार्रवाई बंद कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 28 मई को मप्र हाईकोर्ट से निवेदन किया था कि मंत्री विजय खिलाफ के खिलाफ कार्रवाई बंद कर दें। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सोमवार को जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने मामला समाप्त कर दिया। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह द्वारा इंदौर के पास महू-अंबेडकर नगर के रायकुंडा गांव में एक सार्वजनिक समारोह में दिए गए बयान पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था। 14 मई को पारित आदेश में शाम तक उनके खिलाफ बी.एन.एस. की धारा 152, 196(1)(बी) और 197(1)(सी) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए थे। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि मंत्री ने भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया है। उन्होंने आमसभा में कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ गटर भाषा का इस्तेमाल किया है। उनका बयान प्रथम दृष्टया मुस्लिम धर्म के सदस्यों और अन्य व्यक्तियों के बीच वैमनस्य और दुश्मनी या घृणा या दुर्भावना पैदा करने की प्रवृत्ति का है। याचिका पर अगले दिन 15 मई को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया था कि मंत्री के खिलाफ दर्ज एफआईआर में उनके द्वारा किए गए अपराध का उल्लेख नहीं किया है। एफआईआर ऐसे कंटेंट के साथ लिखी गई है, जो चुनौती देने पर निरस्त हो जाए। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि अपराध के विवरण का उल्लेख करते हुए दोबारा एफआईआर दर्ज की जाए। हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के पूरे आदेश को सभी न्यायिक, अर्ध-न्यायिक और जांच प्रक्रिया में पैराग्राफ 12 के हिस्से के रूप में पढ़ा जाएगा। पुलिस की मंशा को देखते हुए हाईकोर्ट जांच की निगरानी करेगा। हालांकि मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से निवेदन किया था। उसी पर हाईकोर्ट ने निर्णय लिया है। 

प्लेन क्रैश में जान गंवाने वाले रुपाणी का डीएनए मैच हुआ, अंतिम संस्कार राजकोट में होगा

 राजकोट  अहमदाबाद प्लेन क्रैश में जान गंवाने वाले गुजरात के रुपाणी का डीएनए मैच हो गया है जिसके बाद अब उनका पार्थिव शरीर उनके परिवारवालों को सौंपा जाएगा और राजकोट में उनका अंतिम संस्कार होगा। गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, “गुजरात के पूर्व सीएम विजय रूपाणी का 12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया दुर्घटना के दौरान निधन हो गया था आज सुबह करीब 11:10 बजे उनका डीएनए मैच हो गया है। अब उनके परिवारवालों को उनका पार्थिव शरीर सौंपा जाएगा। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री रुशिकेश पटेल ने कहा, सीएम भूपेंद्र पटेल पूर्व सीएम विजय रूपाणी के आवास पर गए और उनके परिवार को बताया कि उनका डीएनए मिलान हो गया है। सीएम ने परिवार को यह भी बताया है कि राजकोट में अंतिम संस्कार के लिए राज्य सरकार उनका सहयोग करेगी। परिवार के सदस्य तय करेंगे कि वे उनका पार्थिव शरीर कब लेना चाहते हैं। गुरुवार को अहमदाबाद से लंदन जाने वाला एयर इंडिया का विमान मेघानीनगर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उस दौरान पायलट और क्रू मेंबर्स के साथ फ्लाइट में कुल 242 लोग मौजूद थे जिनमें से एक विजय रुपाणी भी थे। वह अपनी बेटी से मिलने लंदन जा रहे थे। गुरुवार को दोपहर को हुआ विमान हादसा इतना भीषण था कि यात्रियों के डीएनए टेस्ट कर उनके शव परिवारवालों को सौंपे जा रहे हैं। 87 व्यक्तियों का डीएनए मिलान हुआ  सिविल अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रजनीश पटेल ने कहा कि सिविल अस्पताल में लाए गए शवों में से 92 (शव अवशेषों) का डीएनए मिलान पूरा हो गया है। 87 व्यक्तियों का ही डीएनए मिलान हुआ है, क्यों कि कई कुछ सैंपल डुप्लीकेशन वाले थे। यहां से 47 शव खेड़ा, अहमदाबाद, कोटा, महेसाणा, भरूच, वडोदरा, अरावली, आनंद, जूनागढ़, भावनगर, अमरेली, महिसागर और भावनगर भेजे गए हैं।  पूर्व सीएम स्वर्गीय विजय रूपाणी के बेटे रुषभ रूपाणी ने क्या कहा? पूर्व सीएम स्वर्गीय विजय रूपाणी के बेटे रुषभ रूपाणी ने कहा कि यह सिर्फ हमारे परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य 270 परिवारों के लिए भी दुख की घड़ी है। मैं इस घटना के दौरान पुलिस, आरोग्य स्टाफ, सिविल डिफेंस, फायर सर्विसेज और आरएसएस कार्यकर्ताओं के बचाव प्रयासों के लिए उनका आभार व्यक्त करता हूं, जो सराहनीय है। मैं पीएम मोदी, सीएम भूपेंद्र पटेल और अन्य नेताओं का भी आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने सिर्फ हमारे परिवार के साथ ही नहीं, बल्कि अन्य सभी परिवारों का भी साथ दिया और उनका साथ दिया। मेरे पिता ने अपने 50-55 साल के राजनीतिक जीवन में कई लोगों के जीवन को छुआ। आज वे सभी लोग हमारे साथ खड़े हैं। पंजाब से भी कई पार्टी कार्यकर्ता अपनी संवेदना व्यक्त करने यहां आ रहे हैं। कैसे हुआ था हादसा? गुरुवार दोपहर एकर बजकर 38 मिनट पर एयर इंडिया के विमान AI-171 से उड़ान भरी थी और टेक ऑफ के कुछ ही मिनटों बाद मेघानीनगर में एक हॉस्टल की पांच मंजिला इमारत से टकरा गया। इस हादसे का वीडियो भी सामने आया था जिसमें विमान के नीचे गिरने के बाद आग धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया था। ये हादसा इतना भयावह था कि फ्लाइट में मौजूद 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई जबकि एक शख्स बाल-बाल बच गया। एक हफ्ते पहले जाने वाले थे विजय रुपाणी बताया जा रहा है कि पहले विजय रुपाणी का लंदन जाने का प्रोग्राम 5 जून का था। लेकिन लुधियाना पश्चिम उपचुनाव के चलते उन्हें अपनी ट्रिप टालनी पड़ी। बाद में उन्होंने 12 जून की तारीख तय की।     

मंत्री शाह ने बताया है कि मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के लोगों के उत्थान के लिये वचनबद्ध है

भोपाल जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया है कि मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय वर्ग के लोगों के उत्थान के लिये वचनबद्ध है। प्रदेश की प्रमुख पिछड़ी जनजाति में कोल जनजाति तीसरी प्रमुख पिछड़ी जनजाति है। उन्होंने कहा कि कोल जनजाति स्वतत्रंता आंदोलन में गौरवमयी संघर्ष की याद दिलाती है। संघर्षमयी इतिहास, उनकी शैली और संस्कृति स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान के लिये जानी जाती है। मध्यप्रदेश में 10 लाख से भी ज्यादा कोल जनजाति के लोग निवासरत है। रीवा, सीधी, सिंगरौली, सतना, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, कटनी, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिण्डौरी में मुख्यत: निवासरत है। बढ़ी आबादी कोल जनजाति केवल मध्यप्रदेश ही नहीं देश के उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्य में भी निवास करती है। यह खरवार समूह की एक प्राचीन जनजाति है। ये स्वयं को शबरी माता का वंशज मानते है। कोल शब्द कुल से निकला है, जो समस्त का रूप है। ग्रामीण सांस्कृति की धड़कन है वाद्ययंत्र मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि कोल जनजाति का मुख्य जीविकोपार्जन वनोपज संग्रहण, कृषि और मजदूरी पर आधारित है। प्रकृति की पूजा करने वाली यह जनजाति जंगल, नदियों और पहाड़ों से गहरा नाता रखती है। कोल समाज के पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और वाद्ययंत्र आज भी ग्रामीण संस्कृति की धड़कन है। सरकार और समाज मिलकर कोल जनजाति के उत्थान और सम्मान के लिये कार्य कर रहे है। सरकार द्वारा जनजातियों के विकास के लिये संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलने से और औद्योगिकरण के विकास से कोल जनजाति भी विकास की और अग्रसर है। शिक्षा और रोजगार पर शासन का फोकस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जनजाति वर्ग के चहुँमुखी उत्थान के लिये राज्य और केन्द्र सरकार के द्वारा छात्र-छात्राओं के विकास के लिये किये जा रहे समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि कोल जनजाति के छात्र-छात्राएँ आज उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे है। राज्य शासन द्वारा म.प्र. प्रदेश लोक सेवा आयोग तथा संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में सफल होने पर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में विभिन्न स्तरों पर सफल होने वाले अभ्यर्थियों को देय राशि प्रारम्भिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 40 हजार मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 60 हजार एवं साक्षात्कार उपरांत सफल होने पर 50 हजार की राशि प्रदान की जाती है। इसमें प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने की पात्रता के लिए आय सीमा का बंधन नहीं है। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में विभिन्न स्तरों पर सफल होने वाले जनजातीय वर्ग के सफल अभ्यार्थी जिनके माता-पिता / अभिभावक की वार्षिक आय रुपये 8 लाख से अधिक न हो को प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 20 हजार मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर 30 हजार साक्षात्कार उपरांत सफल होने पर 25 हजार की राशि प्रदान की जाती है। दूसरी बार सफलता प्राप्त करने पर अभ्यर्थी को उपरोक्त उल्लेखित राशि की 50 प्रतिशत राशि एवं तीसरी बार योजना का लाभ प्रदान नहीं किया जाता। अंगेजी हुकुमत के विरूद्ध हुआ कोल विद्रोह मंत्री डॉ. विजय शाह ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम में कोल समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कोल जनजाति ने अंग्रेजी हुकुमत के अन्याय के विरूद्ध 1831 में अंग्रेजों से लोहा लिया, जिसे कोल विद्रोह के रूप में याद किया जाता है। बुधू भगत और मदारा महतो के नेतृत्व में कोल विद्रोह असमानता, शोषण और अत्याचार के विरूद्ध अन्य जनजातियों के लिये प्रेरणा का स्त्रोत बना। कोल विद्रोह से प्रभावित होकर इसका अनुसरण करते हुए अन्य कई जनजातियों ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।  

माल्या का दावा है कि बैंकों ने उनकी संपत्तियों से 14,131.6 करोड़ रुपये की वसूली कर ली, जो उनके कर्ज से अधिक

नई दिल्ली भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के कर्ज चुकाने वाले दावे पर सरकार और बैंकों ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। माल्या का दावा है कि उन्होंने बैंकों के सभी बकाया कर्ज चुका दिए हैं फिर भी उन्हें परेशान किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि माल्या पर अभी भी 7,000 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है और उसके पुनर्भुगतान के दावे ‘निराधार’ हैं। टइम्स ऑफ इंडिया ने सरकारी सूत्रों के हवाले से लिखा कि माल्या का यह दावा पूरी तरह भ्रामक है, क्योंकि उन्होंने केवल मूलधन (प्रिंसिपल अमाउंट) को आधार बनाकर बयान दिया है, जबकि उन पर अब भी ब्याज और अन्य शुल्कों सहित कुल 6,997 करोड़ रुपये बकाया हैं। वर्ष 2013 में जब यह मामला ऋण वसूली न्यायाधिकरण (DRT) में दर्ज किया गया था, तब किंगफिशर एयरलाइंस का कुल एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) 6,848 करोड़ रुपये था। इसमें नॉन-क्यूम्युलेटिव रिडीमेबल प्रेफरेंस शेयर्स भी शामिल थे। अप्रैल 10 तक, DRT के आदेश के अनुसार, बकाया ब्याज और अन्य शुल्कों को मिलाकर कुल देनदारी बढ़कर 17,781 करोड़ रुपये हो गई थी। अब तक बैंकों ने माल्या से जुड़ी संपत्तियों को बेचकर 10,815 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है, जिसमें गोवा स्थित मशहूर किंगफिशर विला की बिक्री भी शामिल है। इसके बाद भी बैंकों को अब भी 6,997 करोड़ रुपये की वसूली करनी है। 14,000 करोड़ रुपये चुका दिए? सरकारी सूत्रों के अनुसार, विजय माल्या का दावा कि उन्होंने 14,000 करोड़ रुपये चुका दिए हैं, वास्तविकता से परे है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “उन्होंने संभवतः केवल मूल कर्ज की राशि को ध्यान में रखते हुए यह दावा किया है, जबकि किसी भी ऋण पर तब तक ब्याज लगता है जब तक वह पूरी तरह चुकता न हो जाए। इसके अतिरिक्त, डिफॉल्ट करने वालों पर दंडात्मक ब्याज (पेनल इंटरेस्ट) भी लगाया जाता है।” माल्या पहले भी ऐसे दावे कर चुके हैं, जबकि वह खुद देश से फरार हैं और भारत लौटकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करने से बच रहे हैं। उनके दावों के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया है कि बैंकों की वसूली प्रक्रिया उनके बोर्ड द्वारा स्वीकृत नीतियों के अनुरूप ही की जा रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, “बैंकों की वसूली की नीति हर कर्जदार के लिए समान है, चाहे वह किसी भी समुदाय, क्षेत्र या पृष्ठभूमि से आता हो। विजय माल्या द्वारा लगाए गए किसी भी भेदभाव या मीडिया दबाव के आरोप पूर्णतः निराधार और भ्रामक हैं।” गौरतलब है कि किंगफिशर को दिए गए कुछ ऋणों का पुनर्गठन भी हुआ था, जो अब जांच के दायरे में है। यहां तक कि आईडीबीआई बैंक के पूर्व प्रमुख योगेश अग्रवाल जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को भी सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है। सरकार और बैंक अब माल्या की भारत वापसी के कानूनी रास्ते को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं ताकि लंबित वसूली को आगे बढ़ाया जा सके और देश की वित्तीय प्रणाली पर विश्वास कायम रखा जा सके। माल्या के दावों की कहानी विजय माल्या कभी ‘किंग ऑफ गुड टाइम्स’ के नाम से मशहूर थे। वह 2016 में भारत से भागकर यूनाइटेड किंगडम में बस गए थे। उनकी अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस पर 17 भारतीय बैंकों का 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बकाया था। माल्या ने हाल ही में एक यूट्यूबर के पॉडकास्ट में अपनी चुप्पी तोड़ते हुए दावा किया कि बैंकों ने उनकी संपत्तियों की नीलामी के जरिए 14,100 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली कर ली है। उन्होंने यह भी कहा कि यह राशि डीआरटी के फैसले में निर्धारित 6,203 करोड़ रुपये के कर्ज से दोगुनी से अधिक है। माल्या ने यह भी दावा किया कि उन्होंने कभी भी कर्ज चुकाने से इनकार नहीं किया और उनकी मंशा हमेशा बैंकों को भुगतान करने की रही है। उन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की, जिसमें बैंकों से वसूली गई राशि का हिसाब मांगा गया है। माल्या ने अपने दावों के समर्थन में वित्त मंत्रालय की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनकी संपत्तियों से 14,131.6 करोड़ रुपये की वसूली की है। अब भारत सरकार और बैंकों ने माल्या के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विजय माल्या के दावे भ्रामक और निराधार हैं। उनकी कुल देनदारी 9,000 करोड़ रुपये से अधिक थी, जिसमें ब्याज और अन्य शुल्क शामिल हैं। सरकार का कहना है कि माल्या की संपत्तियों की नीलामी से प्राप्त राशि को विभिन्न बैंकों के बीच बांटा गया है, लेकिन यह पूरी तरह से उनके कर्ज को कवर नहीं करती। कानूनी लड़ाई और विवाद माल्या ने हाल ही में लंदन की एक अदालत में अपनी दिवालियापन याचिका को रद्द करने की अपील की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। उन्होंने दावा किया था कि बैंकों ने उनके कर्ज से अधिक राशि वसूल कर ली है, लेकिन यूके की अदालत ने उनके तर्कों को स्वीकार नहीं किया। माल्या के वकील ने कहा कि वे इस आदेश को चुनौती देना जारी रखेंगे। इस बीच, भारत में माल्या के समर्थन में कुछ लोग सामने आए हैं। उद्योगपति हर्ष गोयनका ने हाल ही में एक एक्स पोस्ट में सवाल उठाया कि जब बैंकों ने माल्या से 14,100 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है, तो उन्हें ‘राजनीतिक बलि का बकरा’ क्यों बनाया जा रहा है। किंगफिशर कर्मचारियों का दर्द माल्या के दावों के बीच, किंगफिशर एयरलाइंस के हजारों पूर्व कर्मचारियों का मुद्दा भी चर्चा में है। अनुमान है कि एयरलाइंस पर अपने कर्मचारियों का 300 करोड़ रुपये से अधिक का वेतन बकाया है। माल्या ने पॉडकास्ट में कर्मचारियों से माफी मांगी, लेकिन यह भी कहा कि उन्होंने कंपनी में अपनी निजी पूंजी से 3,000 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

विजय माल्या बोले मेरा इरादा हमेशा कर्ज चुकाने का था, ‘तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से संपर्क भी किया था …..

मुंबई बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमुख विजय माल्या , जो 9,000 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं , पॉडकास्टर राज शमनी के साथ खुलकर बातचीत की। गुरुवार को जारी किए गए इस एपिसोड में माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस के पतन के बारे में खुलकर बात की और इसके पतन के लिए मुख्य रूप से 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट को जिम्मेदार ठहराया। माल्या ने 2008 की वैश्विक वित्तीय मंदी की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “तो मान लीजिए कि 2008 तक यह आपके पक्ष में काम करता रहा। फिर क्या हुआ? आसान। क्या आपने कभी लेहमैन ब्रदर्स के बारे में सुना है? क्या आपने कभी वैश्विक वित्तीय संकट के बारे में सुना है, है न? क्या इसका भारत पर कोई असर नहीं पड़ा? बेशक, इसका असर हुआ।” किंगफिशर को बचाने के अपने प्रयासों को याद करते हुए माल्या ने बताया कि उन्होंने तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से संपर्क किया था। उन्होंने कहा, “मैं श्री प्रणब मुखर्जी के पास गया… और कहा कि मुझे एक समस्या है। किंगफिशर एयरलाइंस को आकार घटाने, विमानों की संख्या में कटौती करने और कर्मचारियों की छंटनी करने की जरूरत है, क्योंकि मैं इन उदास आर्थिक परिस्थितियों में परिचालन नहीं कर सकता।” भगोड़े शराब कारोबारी ने कहा, “मुझे कहा गया था कि आकार न घटाएं। आप जारी रखें, बैंक आपका समर्थन करेंगे। इस तरह से यह सब शुरू हुआ। किंग फिशर एयरलाइंस को अपनी सभी उड़ानें निलंबित करने के लिए मजबूर होना पड़ा। किंग फिशर एयरलाइंस संघर्ष कर रही है। जिस समय आपने ऋण मांगा, उस समय कंपनी का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं था।”   ‘छोरी’ कहाँ है? पॉडकास्ट पर बोलते हुए विजय माल्या ने कहा कि मार्च 2016 के बाद भारत नहीं लौटने के कारण उन्हें “भगोड़ा” कहना “उचित” है। हालांकि, उन्होंने सवाल किया कि लोग उन्हें “चोर” क्यों कह रहे हैं और पूछा कि “चोरी” कहां है। उन्होंने कहा, “मार्च (2016) के बाद भारत न जाने के कारण मुझे भगोड़ा कहिए। मैं भागा नहीं, मैं पहले से तय यात्रा पर भारत से बाहर गया। ठीक है, मैं उन कारणों से वापस नहीं लौटा, जिन्हें मैं उचित मानता हूं, इसलिए यदि आप मुझे भगोड़ा कहना चाहते हैं, तो कहिए, लेकिन ‘चोर’ कहां से आ रहा है… ‘चोरी’ कहां से आ रही है?” भारत सरकार ने अभी तक पॉडकास्ट में माल्या की टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। विजय माल्या पर भारतीय बैंकों के एक संघ को ₹ 9,000 करोड़ (लगभग $1.2 बिलियन) से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है, मुख्य रूप से उनकी अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए ऋणों के माध्यम से। इस साल फरवरी में, माल्या ने कर्नाटक उच्च न्यायालय को सूचित किया कि बैंकों को उनके द्वारा दिया गया ₹ 6,200 करोड़ का ऋण “कई गुना” वसूल किया गया है, और उनसे, यूनाइटेड ब्रुअरीज होल्डिंग्स लिमिटेड (UBHL, जो अब परिसमापन में है) और अन्य प्रमाणपत्र देनदारों से वसूल की गई राशि को दर्शाने वाले खातों का विस्तृत विवरण मांगा। धोखाधड़ी और धन शोधन के आरोपों का सामना कर रहे माल्या ने 2016 में भारत छोड़ दिया था और तब से वह यूनाइटेड किंगडम में रह रहे हैं।

कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी करने वाले मंत्री शाह के खिलाफ जांच करेगी 3 सदस्यीय SIT टीम, जानें पूरा मामला

भोपाल मध्य प्रदेश पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ राज्य के मंत्री विजय शाह की टिप्पणी की जांच के लिए सोमवार देर रात तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन कर दिया है. विशेष जांच दल (एसआईटी) में पुलिस महानिरीक्षक प्रमोद वर्मा, उप महानिरीक्षक कल्याण चक्रवर्ती और पुलिस अधीक्षक वाहिनी सिंह शामिल हैं. सुप्रीम ने सोमवार को कर्नल कुरैशी पर की गई ‘‘अभद्र” टिप्पणी के लिए विजय शाह को फटकार लगाई और उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से जुड़े मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन करने का निर्देश दिया. कोर्ट के दखल के बाद पुलिस ने गठित की एसआईटी शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को मंगलवार सुबह 10 बजे तक आईजी रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी गठित करने को कहा था, जिसमें एक महिला अधिकारी भी शामिल हो, जो मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज प्राथमिकी से जुड़े मामले की जांच करेगी.  मंत्री ने अपनी टिप्पणी के लिए प्राथमिकी दर्ज करने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी. सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि वह एक सार्वजनिक व्यक्ति और अनुभवी राजनेता हैं और इसलिए उनके शब्दों में कुछ वजन होना चाहिए. इस मामले में CID ​​ने आदेश जारी कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2025 को कुंवर विजय शाह बनाम मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय एवं अन्य के मामले में यह आदेश जारी किया था, जो एफआईआर क्रमांक 188/2025 से जुड़ा हुआ है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 152, 196 (1) (बी) एवं 197 (1) (सी) के तहत अपराध दर्ज किया गया है. गठित एसआईटी में पुलिस महानिरीक्षक सागर जोन प्रमोद वर्मा, उप पुलिस महानिरीक्षक विशेष सशस्त्र बल भोपाल कल्याण चक्रवर्ती, पुलिस अधीक्षक डिंडोरी वाहिनी सिंह जांच करेंगे. CID के आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अक्षरशः एवं निर्धारित समय सीमा में पालन किया जाए. क्या है पूरा मामला दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह के मामले में जांच करने के लिए एसआईटी गठन करने का आदेश दिया था. कुछ दिनों पहले मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर की विवादित टिप्पणी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले में आईपीएस अधिकारियों की विशेष जांच समिति (एसआईटी) बनाने का आदेश दिया था. साथ ही पीठ ने विजय शाह की याचिका पर मध्य प्रदेश सरकार को भी नोटिस जारी किया था. कोर्ट ने मंत्री की लगाई फटकार पीठ ने कहा कि हमें ऐसी माफी नहीं चाहिए. आप पहले गलती करते हैं, फिर कोर्ट चले आते हैं. आप जिम्मेदार राजनेता हैं. आपको सोच-समझकर बोलना चाहिए, लेकिन आपने बहुत घटिया भाषा अपनाई है. इस पर विजय शाह के वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि वह माफी मांग चुके हैं और माफी का वीडियो भी जारी कर चुके हैं. विजय शाह मेरी पार्टी में होते तो उन्हें निकाल देता: चिराग पासवान कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह की टिप्पणी की निंदा करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को कहा कि अगर भाजपा नेता उनकी पार्टी में होते तो उन्हें ‘‘जीवन भर के लिए निष्कासित कर दिया जाता.” लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे. वह अपने गृह राज्य बिहार के दौरे पर हैं. हाजीपुर से सांसद ने कहा, ‘‘हमें अपने सैन्यकर्मियों पर गर्व है, जो कोई भी उनकी तुलना आतंकवादियों से करता है, वह निंदा का पात्र है। अगर ऐसा कोई व्यक्ति मेरी पार्टी में होता, तो उसे जीवन भर के लिए निष्कासित कर दिया जाता.” चिराग की पार्टी भाजपा की सहयोगी है. शाह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में मीडिया को जानकारी देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को ‘‘आतंकवादियों की बहन” कहकर विवाद खड़ा कर दिया था. हालांकि, भाजपा ने अभी तक शाह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है, जो दावा कर रहे हैं कि यह ‘‘जुबान फिसलने” के कारण हुआ. मध्यप्रदेश के मंत्री को राजग सहयोगियों के साथ-साथ विरोधियों की भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई. न्यायालय ने कहा कि शाह के बयानों से ‘‘पूरा देश शर्मसार हुआ है”. इसने साथ ही आदेश दिया कि इस संबंध में दर्ज प्राथमिकी की जांच तीन सदस्यीय विशेष जांच दल द्वारा की जाए. 8 दिन में सौंपना होगी जांच रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को 28 मई तक जांच करने के आदेश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने शाह को गिरफ्तारी से राहत देते हुए जांच में सहयोग करने के लिए भी कहा है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह को फटकार लगाई है. कोर्ट ने सरकार और पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि एफआईआर के बाद आपने क्या किया? जांच कहां पहुंची? पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को कुछ और ठोस कदम उठाने चाहिए थे. इस बयान से बढ़ीं विजय शाह की मुश्किलें मंत्री विजय शाह की मुश्किलें 11 मई को उनके द्वारा दिए गए बयान से बढ़ी हैं. उन्होंने महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर मंच से बयान दिया था. उन्होंने नाम लिए बिना कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकियों की बहन बता दिया था. उन्होंने कहा था कि, उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी तैसी करने उनके घर भेजा.” हाई कोर्ट ने लिया था संज्ञान मंत्री का वीडियो वायरल हुआ तो जबलपुर हाईकोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया. हाईकोर्ट ने 14 मई को 4 घंटे में मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिए. हालांकि मामले में FIR तो दर्ज हुई, लेकिन हाईकोर्ट ने FIR को खाना पूर्ति बताया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि अब इस मामले में कोर्ट ही पुलिस जांच की निगरानी करेगी. हाईकोर्ट ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी कैविएट दायर की है. यानी आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के मामले को भी सुना जाएगा. विजय शाह मामले में कब क्या हुआ     11 मई को मंत्री विजय शाह, महू के रायकुंडा गांव पहुंचे और यहां एक कार्यक्रम … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंत्री द्वारा मांगी गई माफ़ी स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं, कानून अपना काम करेगा

भोपाल कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी का गठन कर दिया है। इसमें मध्य प्रदेश के बाहर से एक महिला अधिकारी सहित तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शामिल होंगे। सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह को फटकार भी लगाई और उनकी माफी स्वीकार करने से भी इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मंत्री द्वारा मांगी गई माफ़ी स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। कोर्ट ने कहा, आप एक पब्लिक फिगर हैं। एक अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं। आपको बोलते समय अपने शब्दों पर विचार करना चाहिए। हमें आपका वीडियो यहां दिखाना चाहिए। यह सशस्त्र बलों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। हमें बहुत ज़िम्मेदार होने की जरूरत है। सुनवाई के दौरान मंत्री विजय शाह के वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि अपने बयान के लिए वे माफी मांग चुके हैं। इस पर अदालत ने कहा कि माफी स्वीकार नहीं है। एक मंत्री का आचरण आदर्श वाला होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि माफी स्वीकार हो गई, तो आप बाह जाकर कहेंगे कि हमने अदालत के कहने पर माफी मांगी। आपके बयान से देश में गुस्सा है। भावना अच्छी होती तो माफी में अगर-मगर नहीं लगाते। कोर्ट ने तीन आईपीएस अधिकारियों की एसआईटी का गठन किया है, जो पूरे मामले की जांच करेगी। कोर्ट ने अपने आदेश में डीजीपी को एसआईटी का गठन करने का आदेश दिया। एसआईटी का नेतृत्व आईजी रैंक के अधिकारी करेंगे और इसमें एक महिला भी शामिल होगी। विजय शाह को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी भाजपा की निगाहें विजय शाह द्वारा दिए गए बयान के बाद कांग्रेस लगातार उन्हें मंत्री पद से हटाने का दबाव बना रही है। उधर इस मामले में भाजपा की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर थी। इससे पहले मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। कोर्ट के आदेश के बाद मानपुर पुलिस ने मंत्री के खिलाफ केस दर्ज किया था। इधर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एफआईआर के आदेश पर रोक लगाने के लिए विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, लेकिन वहां से भी उन्हें फटकार मिली। पाकिस्तान ने बना लिया दुष्प्रचार का टूल मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया को लेकर दिए गए बयान को पाकिस्तानी मीडिया ने दुष्प्रचार का टूल बना लिया है। वहां के मीडिया चैनल इस बयान के जरिए भारत को मुस्लिम विरोधी बता रहे हैं। बार एंड बेंच के के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने कहा आपने किस तरह की माफ़ी मांगी है? हमें दिखाइए। माफी का एक मतलब होता है। कभी-कभी नम्र और बनावटी माफी भी होती है, कभी कभी घड़ियालू आंसू भी होते हैं। आपका कौनसा मामला है? वहीं वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि माफी मांगी गई थी और इसे अदालत के सामने भी मांगी जा सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हमें माफी की ज़रूरत नहीं है, यह अवमानना ​​नहीं है। हम इसे कानून के अनुसार संभाल सकते हैं। सिर्फ इसलिए कि आप अदालत में आ रहे हैं, आप माफी मांग रहे हैं। आप एक सार्वजनिक व्यक्ति और एक अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं और आपको अपने शब्दों पर विचार करना चाहिए।

कर्नल सोफिया कुरैशी पर विजय शाह का विवादित बयान, सुप्रीम कोर्ट और HC में आज मामले की सुनवाई, जानें अब तक क्या हुआ?

भोपाल मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए बयान पर आज सुप्रीम कोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होना है। मंत्री विजय शाह ने महू के मानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान दिया था। इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। कोर्ट के आदेश के बाद मानपुर पुलिस ने मंत्री के खिलाफ केस दर्ज किया था। इधर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एफआईआर के आदेश पर रोक लगाने के लिए विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन वहां से भी उन्हें फटकार मिली। अब इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होना है। इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। कोर्ट के आदेश के बाद मानपुर पुलिस ने मंत्री के खिलाफ केस दर्ज किया था। इधर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एफआईआर के आदेश पर रोक लगाने के लिए विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन वहां से भी उन्हें फटकार मिली। अब इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई होना है। पुलिस सार्वजनिक नहीं करेगी जानकारी शाह ने हाई कोर्ट के एफआईआर के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने अभी तक सिर्फ छापरिया के सरपंच और सचिव को बयान देने के लिए बुलाया है। पुलिस का कहना है कि मामला कोर्ट से जुड़ा है, इसलिए जांच की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। पुलिस के अनुसार, वे मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए काम कर रहे हैं। कर्नल पर दिए बयान के बाद हुई आलोचना मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर एक विवादित बयान दिया था। इस बयान के बाद उनकी काफी आलोचना हुई थी। हाई कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। शाह ने हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पुलिस ने वीडियो तो जब्त कर लिया है, लेकिन उसे अभी तक फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है भाजपा की निगाहें विजय शाह द्वारा दिए गए बयान के बाद कांग्रेस लगातार उन्हें मंत्री पद से हटाने का दबाव बना रही है। उधर इस मामले में भाजपा की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर है। पाकिस्तान ने बना लिया दुष्प्रचार का टूल मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया को लेकर दिए गए बयान को पाकिस्तानी मीडिया ने दुष्प्रचार का टूल बना लिया है। वहां के मीडिया चैनल इस बयान के जरिए भारत को मुस्लिम विरोधी बता रहे हैं। विजय शाह ने दिया था विवादित बयान दरअसल, 11 मई को इंदौर के महू में आयोजित एक कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्यमंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान दिया था. जो एक दिन बाद 12 मई को वायरल हुआ था. मामले ने तूल पकड़ा तो विजय शाह ने माफी भी मांगी, लेकिन 14 मई को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रदेश के डीजीपी को तत्काल मंत्री विजय शाह पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे, हाईकोर्ट में जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की बैंच ने उनकी इस भाषा को गटर जैसा बताया था, जिसके बाद मामले में एफआईआर भी हुई है. लेकिन विजय शाह ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. आज हो सकता है अहम फैसला विजय शाह के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में कोई अहम फैसला हो सकता है. क्योंकि हाईकोर्ट ने विजय शाह के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को केवल खानापूर्ति बताया था. हाईकोर्ट ने सख्ती से इस मामले में पुलिस जांच की बात कही थी. जिसके बाद मामले में तेजी देखी जा रही है. वहीं सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई पर ही विजय शाह का भविष्य तय करेगा. एक तरफ कांग्रेस लगातार प्रदेश में उनके खिलाफ प्रदर्शन कर रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी पर भी दवाब देखा जा रहा है. क्योंकि यह कोई पहला मौका नहीं है जब विजय शाह ने इस तरह का विवादित बयान दिया हो, वह इससे पहले भी विवादित बयान दे चुके हैं. खास बात यह है कि विजय शाह की फिलहाल 16 मई के बाद से कोई लोकेशन नहीं मिल रही है, उनके भोपाल निवास पर कोई नहीं है, जबकि खंडवा और इंदौर में भी उनकी कोई जानकारी नहीं मिली है. फिलहाल वह कहा है कि इसकी जानकारी किसी को नहीं है, लेकिन विजय शाह के मामले में प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है, जबकि कांग्रेस लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रही है.  बयान पर कांग्रेस ने जताई कड़ी आपत्ति महू के पास एक कार्यक्रम में शाह ने कहा कि भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को उनकी ही बहन के जरिए सबक सिखाया। कांग्रेस ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि शाह का इशारा कर्नल कुरैशी की तरफ था। शाह ने बाद में सफाई दी कि उनके भाषण को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। बीजेपी के एक महत्वपूर्ण आदिवासी नेता और अक्सर विवादों में रहने वाले शाह की इस टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। कौन हैं कुंवर विजय शाह कुंवर विजय शाह बीजेपी के एक महत्वपूर्ण नेता हैं। वे आदिवासी समुदाय से आते हैं और अक्सर विवादों में रहते हैं। कुंवर विजय शाह हरसूद सीट से लगातार आठ बार चुनाव जीत चुके हैं। यह सीट अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित है। वे वर्तमान में जनजातीय कार्य, सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन और भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास मंत्री हैं। खंडवा के जंगलों से निकल भोपाल पहुंचे शाह खंडवा के जंगलों से निकलकर मध्य प्रदेश की राजनीति में ऊंचे पद तक पहुंचे हैं। लेकिन विवादों में रहने की उनकी आदत अक्सर उनकी तरक्की में बाधा बनती रही है। 2013 में शाह को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान … Read more

सरकारी कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह की फोटो को हटा दी गई

इंदौर  मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह एक बार फिर विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। इंदौर में ‘वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत जिला स्तरीय वन अधिकार समितियों की प्रशिक्षण कार्यशाला’ आयोजित की गई। इसमें उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कार्यक्रम स्थल पर लगे होर्डिंग्स में मंत्री विजय शाह की मुस्कुराती तस्वीर दिखी। इस पर अधिकारियों ने ऑब्जेक्शन लिया गया तो उसे हटाया गया। वर्कशॉप में मंत्री का फोटो वाला पोस्टर देखा तो अफसरों के बीच इसी की चर्चा होने लगी। इसके बाद मंत्री को हटा कर उनकी जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो चिपका दी गई। मौके पर पहुंचे सीनियर अधिकारियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए पोस्टर तुरंत हटवाए और संबंधित जिम्मेदारों को फटकार लगाई। क्या है पूरा मामला पूरा घटनाक्रम इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर के फीनिक्स हॉल का है। यहां गुरुवार को ट्रेनिंग प्रोग्राम रखा गया। इसमें अशासकीय सदस्यों, वन अधिकारी समिति के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान वर्कशॉप के लिए पोस्टर लगाए गए। जिसमें, सीएम मोहन यादव के साथ मंत्री विजय शाह की फोटो लगी थी। इस वर्कशॉप कार्यक्रम में इंदौर उज्जैन के कलेक्टर, वन के मंडल अधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी मौजूद थे। वहीं, कार्यक्रम जनजाति कार्य विभाग ने आयोजित कराया था। इसके मंत्री विजय शाह हैं। इसी कार्यक्रम से फोटो हटाई गई। क्यों हटाई गई तस्वीर हाल ही में मंत्री विजय शाह ने सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी की थी। जिसके चलते हाई कोर्ट के आदेश पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इस प्रकरण के बाद मंत्री को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण माना जा रहा है कि आयोजन में उनकी तस्वीर को हटा दिया गया। प्रोटोकॉल का हुआ उल्लंघन कार्यशाला में जब इंदौर संभाग के कमिश्नर दीपक सिंह की नजर इन होर्डिंग्स पर पड़ी, तो उन्होंने नाराजगी जाहिर की। आनन-फानन में अधिकारियों ने मंत्री विजय शाह की तस्वीर को पीएम मोदी की फोटो से ढंक दिया। जिससे न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ बल्कि आयोजकों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ खड़े हुए। नियमों के अनुसार, किसी भी सरकारी आयोजन में नेताओं की तस्वीरों का तय क्रम होता है। जिसमें प्रधानमंत्री का स्थान सर्वोच्च होता है। यहां पीएम मोदी की फोटो दूसरे स्थान पर और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की पहले स्थान पर रही, जो स्पष्ट रूप से अनुचित था। शाह की तस्वीर पर सफेद फ्लेक्स चिपका दिया अधिकारियों ने तत्काल पोस्टर से उनकी तस्वीर हटाने के निर्देश दिए। आनन-फानन में स्टाफ ने शाह की तस्वीर पर सफेद फ्लेक्स चिपका दिया। बाद में उक्त स्थान पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर को चस्पा किया गया। सुबह 11 बजे वन अधिकार अधिनियम को लेकर ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। लोगों ने उठाई थी आपत्ति आयोजन प्रदेश सरकार के जनजाति कार्य विभाग ने किया था। पोस्टर में मुख्यमंत्री मोहन यादव और मंत्री विजय शाह की तस्वीर नजर आ रही थी। पोस्टर में मंत्री शाह की बड़ी सी मुस्कुराती तस्वीर थी। कुछ लोगों ने आपत्ति उठाई और मंत्री शाह की तस्वीर पोस्टर पर क्यों है, तो अफसरों ने तुरंत कार्रवाई की। सरकारी कार्यक्रमों से दूर इस घटना ने साफ कर दिया कि मंत्री शाह अब सिर्फ जनता की नजरों से ही नहीं, बल्कि सरकारी कार्यक्रमों से भी दूर किए जा रहे हैं। अफसर भी उनके साथ सार्वजनिक रूप से जुड़ना नहीं चाह रहे। भले ही उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन उनकी स्थिति बेहद कमजोर नजर आ रही है। संभागीय कार्यशाला शुरू वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन और सामुदायिक वन अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए गुरुवार से दो दिनी संभागीय कार्यशाला की शुरुआत ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में हुई। इसमें वन समितियों की भूमिका को लेकर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने ग्रामीणों को जंगल की जमीन पर अतिक्रमण रोकने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जंगल में ग्रामीणों को वन अधिकार के अंतर्गत पट्टे दिए जाते हैं। सिर्फ खेती करने में भूमि का उपयोग करें, जबकि कुछ पट्टे से लगी जमीन पर भी अतिक्रमण करते हैं, यह बिलकुल गलत है। शुभारंभ जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा और संभागायुक्त दीपक सिंह ने किया। सचिव बामरा ने बताया कि राज्य शासन वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सामुदायिक अधिकारों को सशक्त बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है।

पाकिस्तान के मीडिया ने छेड़ा प्रोपेगंडा अभियान, मंत्री शाह का बयान बना हथियार

भोपाल  मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादास्पद बयान दिया था, जिसे लेकर देश में लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया और मंत्री से माफी मांगने को कहा है। पाकिस्तानी चैनल्स से फैलाया जा रहा नफरती एजेंडा इस बीच पाकिस्तान ने मंत्री विजय शाह के बयान को एक टूल का तरह इस्तेमाल कर प्रोपेगैंडा चलाने का काम किया है। पाकिस्तान के सरकारी चैनल पीटीवी ने इस बयान को भारत में मुस्लिम के प्रति कथित नफरत के प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत किया है। पाकिस्तान के चैनल्स ने एक प्रोपेगैंडा के तहत विजय शाह के बयान को इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है और पीटीवी के अलावा जीओ न्यूज, द डैली जंग सहित कई पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट्स ने इस बयान पर खबरें प्रकाशित कर दुनिया में मुस्लिम समुदाय में भारत की छवि धूमिल करने की कोशिश की है। पीटीवी का प्रोपेगैंडा पीटीवी ने बुधवार देर रात प्रसारित अपने प्राइम टाइम कार्यक्रम में कहा है, “भारत के हिन्दू बीजेपी के सीनियर नेता विजय शाह ने एक वफादार मुस्लिम महिला अफसर को दहशतगर्दों की कतार में खड़ा कर दिया है। मोदी के भारत में मुस्लिम के प्रति नफरत इस हद तक बढ़ चुकी है कि अब सेना के उच्च अधिकारी और महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं।” पीटीवी, जीओ न्यूज और जंग टीवी ने आरोप लगाया कि भारत में मुसलमानों को मुख्यधारा से बाहर धकेला जा रहा है और अब जो लोग सेना जैसी संस्थाओं में भी अपनी सेवा दे रहे हैं, उन्हें संदेह की नजर से देखा जा रहा है। पाकिस्तान द्वारा कर्नल सोफिया के बहाने भारत की छवि को ‘अल्पसंख्यक विरोधी राष्ट्र’ के रूप में प्रचारित करने की कोशिश की जा रही है। सिर्फ पाकिस्तानी टीवी चैनल्स ही नहीं, पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स से भी इस मुद्दे को लेकर नफरती एजेंडे और भारत के खिलाफ दुष्प्रचार को तेज कर दिया गया है। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ चलाए जा रहे प्रोपेगैंडा को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान अब सिर्फ विवादित बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान द्वारा इसे भारत की धार्मिक समरसता और लोकतांत्रिक छवि के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनाने की कोशिश है। राजनीतिक और कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि एमपी के मंत्री का यह बयान ने पाकिस्तान और अन्य विरोधी ताकतों को भारत पर हमला करने का अवसर दे दिया है। हालांकि, मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने स्वत:संज्ञान लेते हुए मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। लेकिन, न तो भाजपा और न ही मध्यप्रदेश सरकार ने उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की है। ठोस कार्रवाई नहीं होने से आग में घी पड़ रहा विशेषज्ञ मानते हैं कि अब यह मामला केवल एक विवादित बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान द्वारा इसे भारत की धार्मिक समरसता और लोकतांत्रिक छवि के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनाने की कोशिश है। राजनीतिक और कूटनीतिक गलियारों में यह चिंता बढ़ रही है कि मंत्री शाह की टिप्पणी ने पाकिस्तान और अन्य विरोधी ताकतों को भारत पर हमला करने का अवसर दे दिया है। हालांकि हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, लेकिन न तो भाजपा नेतृत्व और न ही मध्य प्रदेश सरकार ने उनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई की है। इससे मामला लगातार गरमाता जा रहा है और पड़ोसी देश पाकिस्तान को भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने का एक और बहाना मिल गया है।

कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान के बाद मंत्री विजय शाह की मुश्किलें लगातार बढ़ रही, इस्तीफे का दबाव

भोपाल महिला सैन्य अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर मंत्री विजय शाह के विवादित बयान पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि आप संवैधानिक पद पर हैं और आपको अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। एक मंत्री होकर आप किसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने मंत्री विजय शाह के लिखाफ लिखी गई FIR की कॉपी पर भी सवाल उठाए हैं। इधर सियासी उथलपुथल भी तेज हो गई है। उमा भारती भी इस मामले में लगातार मंत्री शाह के इस्तीफे की मांग कर रही हैं। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेत्री उमा भारती ने विजय शाह को घेरते हुए गुरुवार को फिर से ट्वीट किया। उसमें लिखा कि कांग्रेस के कहने सुनने से हमें क्या मतलब, नैतिकता और देशभक्ति पर कांग्रेस खरी उतर ही नहीं पाई किंतु हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दी गई नसीहतों का तो हम ध्यान रखें।’ पहले हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार गुरुवार को युगलपीठ ने हाईकोर्ट के आदेशानुसार मंत्री विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की है। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान अपने आदेश में कहा है कि एफआईआर ऐसे कंटेंट के साथ लिखी गयी है,जो चुनौती देने पर निरस्त हो जाये। युगलपीठ ने आदेश में उल्लेखित कंटेंट के बारे बताते हुए  एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा है। इसके अलावा एफआईआर में पुलिस विवेचना की मॉनिटरिंग हाईकोर्ट द्वारा की जाएगी।  पुलिस को जमकर लगाई फटकार, पूछे तीखे सवाल गुरुवार को विजय शाह सुप्रीम कोर्ट की शरण पहुंचे और एफआईआर पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन यहां भी शाह को राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि आप संवैधानिक पद हैं और आपको अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। एक मंत्री होकर आप किसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके पहले इसी कोर्ट ने बुधवार को विजय शाह के बयान पर नाराजगी जताई थी। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे कैंसर जैसा घातक बताया। हाईकोर्ट जस्टिस अतुल श्रीधरन तथा जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने संज्ञान याचिका की सुनवाई करते हुए डीजीपी को विजय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने कहा कि मंत्री शाह ने गटरछाप भाषा का इस्तेमाल किया है, जो अस्वीकार्य है। इसके बाद बुधवार देर रात महू पुलिस ने विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी। दिल्ली में भाजपा की अहम बैठक शाह का मामला दिल्ली के गलियारों तक भी पहुंच गया है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी नाराजगी जता चुके हैं। गुरुवार को BJP में मंथन की बात सामने आ रही है। मंत्री विजय शाह को लेकर पार्टी महासचिव बीएल संतोष से मध्यप्रदेश भाजपा प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने मुलाकात की है। वहीं विजय शाह भी अमित शाह से मुलाकात के बाद इस्तीफे पर विचार करने का कह चुके हैं। हालांकि इसकी विस्तृत जानकारी फिलहान सामने नहीं आ सकी है। विजय शाह पर पहले दिन क्यों नहीं हुई कार्रवाई –   पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा  कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक बयान देने के मामले में मंत्री विजय शाह पर बीजेपी की ओर से अब तक कोई कार्रवाई ना होने को लेकर वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने दुख जताया है. पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा ने कहा कि “इस पर तो पहले दिन ही कार्रवाई हो जाना चाहिए थी. मैं हैरान हूं कि पार्टी या सरकार ने अब तक कोई निर्णय क्यों नहीं लिया. उन्होंने कहा कि सारा फजीता करवाने के बाद अब अगर निर्णय लेंगे भी तो उसका क्या औचित्य रहेगा. ईटीवी भारत से खास बातचीत में शर्मा ने कहा कि ऐसे में पार्टी का उपहास होता है, उसकी तपस्या, त्याग, राष्ट्रभक्ति और विचार पर सवालिया निशान लगता है.” शाह पर पार्टी ने क्यों निर्णय नहीं लिया, मुझे हैरानी बीजेपी नेता रघुनंदन शर्मा ने कहा कि “मंत्री रहते हुए अपनी वाणी भाषा संयम रहना आवश्यक है, क्योंकि मंत्री सरकार का प्रतिनिधित्व करता है. हमारे यहां विधान ज्वाइंट रिस्पांसिबिलिटी का है. एक व्यक्ति की त्रुटि सबकी त्रुटि मानी जाती है और एक व्यक्ति का त्याग सबका त्याग, या फिर उसका जनहित का काम पूरी सरकार का जनहित का लोकहित का काम माना जाता है. कहावत है जिएंगे भी साथ मरेंगे भी साथ. शर्मा ने कहा कि मुझे लगता है कि इसके उपर तत्परता से पहले दिन ही कार्रवाई हो जाना चाहिए थी. पार्टी ने या सरकार ने अभी तक क्यों निर्णय नहीं लिया, मुझे तो बड़ा दुख हो रहा है. इतनी फजीती करवाने के बाद निर्णय लेंगे, तो उसका क्या औचित्य रहेगा. उन्होंने कहा कि देश में एक जांबाज सैनिक के प्रति जो युद्ध के समय सम्मान का जो ज्वार उठा था, ऐसे समय में उसके बारे में बोलना और बहुत ही सम्मान प्रगट ना करते हुए अपमानित भाषा का उपयोग करना, चाहे वो कितने ही जोश में रहे हों, लेकिन जोश में होश नहीं खोना चाहिए. हमारे मंत्री ने जोश में होश खो दिया. उसका परिणाम उनको भी भुगतना पड़ रहा है और सारी पार्टी को भुगतना पड़ रहा है.” ऐसे लोग पार्टी की त्याग तपस्या पर सवालिया निशान रघुनंदन शर्मा ने कहा कि “मेरी पार्टी को तो मैं क्या सलाह दूंगा. वहां अब सलाह का अर्थ भी नहीं है. ये तो स्वयं निर्णय लेने का मामला था. कोर्ट निर्णय ले और कोर्ट तक बात जाए, ऐसी परिस्थिति उपन्न ही नहीं होना देनी थी, लेकिन प्रत्युन्नमति का अभाव होने के कारण ये सब खेल खड़ा होता है. उन्होंने कहा कि ऐसे में पार्टी का उपहास होता है. पार्टी का त्याग पार्टी की तपस्या पार्टी की राष्ट्रभक्ति पार्टी का विचार सारा इस सबके ऊपर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर देते हैं. ऐसे लोग जिसमें निर्णय ना लेने लोग भी शामिल हैं. मैं सोचता हूं कि इस बारे में बात साफ कर लेना चाहिए. दूध का दूध का पानी का पानी पहले ही हो जाना चाहिए था. क्यों नहीं हो रहा है मैं खुद हैरान हूं.” राज्यपाल से मिलेंगे कांग्रेस विधायक FIR के बाद भी मंत्री का इस्तीफा नहीं होने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कड़ा रुख अपनाया … Read more

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