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विजय शाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, कर्नल कुरैशी पर टिप्पणी और माफी पर होगी चर्चा

भोपाल  मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह द्वारा भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान के मामले में आज, 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार पहले ही अपनी रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। अब अदालत के समक्ष सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए या नहीं। सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट के रुख और संभावित निर्देशों को देखते हुए कानूनी, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर लगातार समन्वय किया जा रहा है। दिल्ली में मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय बैठक सुनवाई से ठीक पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार रात दिल्ली प्रवास पर थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में मंत्री विजय शाह को लेकर बने राजनीतिक और कानूनी हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार रात दिल्ली प्रवास के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मिले थे। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान उन्होंने मंत्री शाह को लेकर बने हालात पर चर्चा की। सीनियर वकीलों से भी इस मामले में सलाह ली गई है, ताकि कोर्ट में सरकार अपना पक्ष मजबूती से रख सके। सरकार कुछ मामलों में जांच के आधार पर समय-सीमा बढ़ाने की मांग कोर्ट से कर सकती है। इस मुद्दे पर भी पार्टी और सरकार स्तर पर मंथन हुआ है। दो दिन पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी दिल्ली प्रवास के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन से मिले थे। इसके बाद ही मंत्री विजय शाह को फिर से माफी मांगने के लिए कहा गया था। इसके बाद 7 फरवरी को मंत्री शाह ने लिखित माफी पढ़कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी, जिसका वीडियो भी जारी किया गया। पूरे मामले में यह उनकी चौथी माफी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सुनवाई को देखते हुए सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और कोर्ट के रुख पर लगातार नजर बनाए हुए है। बता दें, मंत्री विजय शाह ने 11 मई 2025 को महू के रायकुंडा में ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने वरिष्ठ वकीलों से भी सलाह ली है, ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखा जा सके। सरकार यह भी विचार कर रही है कि कुछ बिंदुओं पर जांच के आधार पर समय-सीमा बढ़ाने की मांग अदालत से की जाए। इस पहलू पर पार्टी और सरकार, दोनों स्तरों पर मंथन हुआ है। प्रदेश अध्यक्ष की मुलाकात और माफी का दबाव इस पूरे घटनाक्रम से पहले, दो दिन पूर्व बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी दिल्ली प्रवास के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से मिले थे। इसके बाद ही मंत्री विजय शाह से एक बार फिर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा गया। इसी क्रम में 7 फरवरी को मंत्री विजय शाह ने लिखित माफी पढ़कर सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना की, जिसका वीडियो भी जारी किया गया। यह इस पूरे विवाद में उनकी चौथी माफी थी। क्या है पूरा विवाद? मामले की जड़ 11 मई 2025 की है, जब मंत्री विजय शाह ने महू के रायकुंडा क्षेत्र में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। यह बयान सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई। इस बयान को सेना, महिलाओं और एक समुदाय के प्रति आपत्तिजनक बताते हुए विरोध दर्ज कराया गया, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। पहली और दूसरी माफी: विवाद बढ़ने पर मंत्री विजय शाह ने 13 मई 2025 को पहली बार माफी मांगी। उन्होंने कहा, “सोफिया बहन ने देश का मान-सम्मान बढ़ाया है। मैं उन्हें सैल्यूट करता हूं। दुखी मन से और इतनी विपरीत परिस्थितियों में अगर मेरे मुंह से कुछ गलत निकल गया है, तो मैं दस बार माफी मांगने को तैयार हूं।” अगले दिन, 14 मई 2025 को लगभग इसी शब्दों में उन्होंने दोबारा माफी दोहराई। हालांकि, इन दोनों माफियों को लेकर यह सवाल उठता रहा कि क्या वे पर्याप्त और बिना शर्त थीं। तीसरी माफी: 23 मई 2025 का विस्तृत बयान 23 मई 2025 को मंत्री विजय शाह ने एक लंबा बयान जारी करते हुए तीसरी बार माफी मांगी। उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुए जघन्य हत्याकांड से उनका मन विचलित था और उसी मानसिक स्थिति में उनसे भाषाई भूल हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी धर्म, जाति या समुदाय को ठेस पहुंचाना नहीं था और वे भारतीय सेना, कर्नल सोफिया कुरैशी तथा देशवासियों से पूरी तरह क्षमा प्रार्थी हैं। चौथी माफी: 7 फरवरी 2026, कोर्ट की सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से ठीक पहले, 7 फरवरी को मंत्री विजय शाह ने चौथी बार सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनके शब्द देशभक्ति के उत्साह, उत्तेजना और आवेश में निकल गए थे, जो उनकी वास्तविक भावना के अनुरूप नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा और संवेदनशीलता अत्यंत आवश्यक है, इस घटना से उन्होंने आत्ममंथन किया है और भविष्य में ऐसी गलती दोहराई नहीं जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजर अब पूरे मामले की दिशा सुप्रीम कोर्ट की आज की सुनवाई से तय होगी। अदालत यह निर्णय कर सकती है कि मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही आगे बढ़ेगी या राज्य सरकार की दलीलों और माफियों को देखते हुए कोई अन्य रास्ता अपनाया जाएगा।  

कर्नल सोफिया विवाद: मंत्री विजय शाह ने मीडिया से दूरी बनाई, 9 फरवरी को होगी मामले की सुनवाई

भोपाल  भाजपा प्रदेश मुख्यालय में  समस्याएं सुनने पहुंचे जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह उस वक्त असहज नजर आए, जब मीडिया ने उनसे सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरण को लेकर सवाल पूछ लिया. सवाल सुनते ही मंत्री विजय शाह बिना कोई प्रतिक्रिया दिए सीधे वाहन में बैठकर रवाना हो गए. हालांकि, इसके बाद स्वास्थ्य राज्य मंत्री शिवाजी पटेल को अकेले प्रेस ब्रीफिंग की. मंत्री शाह और पटेल ने सुनी समस्या भाजपा संगठन द्वारा कार्यकर्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से प्रदेश मुख्यालय में मंत्रियों की ड्यूटी तय की गई है. प्रतिदिन दोपहर 1 से 3 बजे तक प्रदेशभर से कार्यकर्ता अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं. जिन मामलों का तत्काल समाधान संभव होता है, उनका मौके पर निराकरण किया जाता है, जबकि अन्य मामलों को संबंधित विभागों को भेजा जाता है. शुक्रवार को यह जिम्मेदारी मंत्री विजय शाह और मंत्री शिवाजी पटेल को सौंपी गई थी. मीडिया के सवालों से बचते दिखे विजय शाह कार्यकर्ताओं की सुनवाई के बाद जैसे ही दोनों मंत्री कार्यालय से बाहर निकले, मीडिया ने जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह से उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले को लेकर सवाल किया. सवाल सुनते ही मंत्री बिना कुछ कहे वाहन में बैठकर निकल गए. विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश सरकार मंत्री विजय शाह के मामले में जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना चाहती. इसलिए अभियोजन की मंजूरी को लेकर सरकार सुप्रीम कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगने की तैयारी में है. सरकार को 3 दिन में देना होगा जबाव 20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए विवादित बयान के मामले में सुनवाई करते हुए एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट देखने के बाद कहा था कि जांच पूरी हो चुकी है और मंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी गई है. कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह में अभियोजन का निर्णय लेकर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे. अब इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 9 फरवरी को है, जबकि कार्यदिवसों के आधार पर सरकार के पास अभी लगभग तीन दिन का समय बचा है. सुप्रीम कोर्ट में सरकार को देना है जवाब मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन (प्रोसिक्यूशन) की मंजूरी के मामले में मध्यप्रदेश सरकार को 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करना है। इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। सरकारी और राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से और समय मांग सकती है। तर्क यह दिया जाएगा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विस्तृत परीक्षण जरूरी है। यही रुख शुरुआत से मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) का भी रहा है। पार्टी और विधि विशेषज्ञों से राय-मशविरा सूत्रों के अनुसार, इस मसले पर पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ अटार्नी जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से भी सलाह ली गई है। लंबी चर्चा के बाद यह संकेत मिले हैं कि सरकार 9 फरवरी की सुनवाई में समय विस्तार की मांग कर सकती है, जिससे सुनवाई आगे बढ़ने की संभावना है। सरकार ने रिपोर्ट दिल्ली भेजी मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी मंशा से जुड़ी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करने के लिए दिल्ली भेज दी है। इस संबंध में एसीएस गृह शिवशेखर शुक्ला, सचिव गृह कृष्णा वेणी देशावतु और अतिरिक्त सचिव मनीषा सेंतिया दिल्ली गए थे। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, 9 फरवरी को अभियोजन से जुड़े बिंदु पर सुनवाई संभावित है, जबकि 11 फरवरी को मामले के अन्य पहलुओं पर सुनवाई हो सकती है। तीन सदस्यीय SIT कर रही जांच विजय शाह प्रकरण की जांच तीन सदस्यीय एसआईटी कर रही है, जिसमें प्रमोद वर्मा, कल्याण चक्रवर्ती और वाहिनी सिंह शामिल हैं। एसआईटी पहले भी विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय मांग चुकी है। विजय शाह ने पिछले साल महू में दिया था बयान 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था- ‘उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।’ शाह ने आगे कहा- ‘अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।’ बजट सत्र के बाद हो सकती है कार्रवाई एसआईटी छह माह पहले ही अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप चुकी है, जिसमें आरोपों की पुष्टि करते हुए मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है. अब अंतिम निर्णय सरकार और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा लिया जाएगा. माना जा रहा है कि विधानसभा के बजट सत्र के बाद सरकार और पार्टी मंत्री विजय शाह के खिलाफ एकशन ले सकते हैं.

कर्नल सोफिया पर आपत्तिजनक बयान के मामले में विजय शाह पर दिल्ली करेगी सुनवाई, राहत नदारद

भोपाल  कर्नल सोफिया को लेकर बेशर्म बयान देने वाले मोहन सरकार के मंत्री विजय शाह को लेकर भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व निर्णय लेगा। माना जा रहा है कि सरकार फैसले के बाद 6 फरवरी तक कोर्ट को अपने निर्णय से अवगत कराएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि 9 फरवरी को उक्त मामले में सुनवाई होनी है। पूर्व में यह माना जा रहा था कि शाह के खिलाफ हुई एसआइटी जांच पर स़त्ता व संगठन द्वारा सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई दो हफ्ते की अवधि में निर्णय ले लिया जाएगा। मंत्री सांसत में, कहीं से नहीं मिली राहत मामला बुरी तरह फंसा है। उधर मंत्री शाह की जान सांसत में है, वे भोपाल से लेकर दिल्ली तक सभी स्तर पर अपना पक्ष रख चुके हैं। बताया जा रहा है कि  देर रात तक उन्हें किसी भी स्तर से कोई राहत नहीं मिली है। सूत्रों के मुताबिक उन्हें दो टूक कह दिया है कि जो कुछ होगा, वह दिल्ली नेतृत्व ही तय करेगा। उसके आधार पर अवगत कराया जाएगा।  वहीं, सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों का कहना है कि अभी तक उनके पास कोई निर्देश नहीं आए हैं। मामला कैबिनेट मंत्री की अभियोजन स्वीकृति का है, जिसके लिए मुख्यमंत्री का अनुमोदन जरूरी है। लेकिन अभी तक कोई भी दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि विजय शाह के विरुद्ध एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर लंबित अभियोजन स्वीकृति पर दो सप्ताह के अंदर निर्णय लिया जाए। यह अवधि 2 फरवरी को पूरी हो गई है। लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। सरकार के सूत्रों को कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 9 फरवरी को है, लेकिन कार्यदिवस के आधार पर 2 सप्ताह की मोहलत 5 फरवरी तक है। इसलिए सरकार के पास अभी 3 दिन का वक्त और है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी 6 माह पहले ही अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज चुकी है। रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि के साथ ही मुकदमा चलाने की स्वीकृति देने की सिफारिश की गई है। क्यों फंसे मंत्री शाह चुनौती देकर फंसे मंत्री शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद इंदौर में कर्नल सोफिया कुरैशी पर बेशर्म टिप्पणी(Minister Vijay Shah Statement Controversy) की। इस पर हाईकोर्ट के एफआइआर के आदेश को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। यहां राहत तो नहीं, उलटा एसआइटी गठित करने के आदेश हुए। कोर्ट ने सरकार से अभियोजन की स्वीकृति पर दो हफ्ते में निर्णय लेने को कहा है।

मंत्री शाह गैंगरेप पीड़िता के परिजनों से मिले, आर्थिक सहायता, टीनशेड देने का ऐलान, पीड़िता के परिवार की तस्वीर वायरल

 खंडवा मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के आदिवासी क्षेत्र खालवा में गैंगरेप और हत्या की दिल दहला देने वाली घटना के नौ दिन बाद राज्य के मंत्री विजय शाह मंगलवार को पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे. हालांकि, उन्होंने मीडिया से किसी तरह की बातचीत नहीं की. लेकिन विवाद उस वक्त फिर से गहराया जब पीड़ित परिवार के साथ उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं. वायरल हो गईं तस्वीरें बताया जा रहा है कि जब विजय शाह खालवा में मृतका के परिजनों से मिलने पहुंचे, तब स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने उस मुलाकात की तस्वीरें क्लिक कर सोशल मीडिया पर डाल दीं. इनमें पीड़िता के परिजनों के चेहरे साफ नजर आ रहे हैं, जिससे उनकी निजता भंग हुई है. इस पर अब मंत्री को चौतरफा आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. पुराना विवाद क्या था? विजय शाह से जुड़ा यह कोई पहला विवाद नहीं है. बीते दिनों उन्होंने भारतीय सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को ‘आतंकियों की बहन’ कहकर अभद्र टिप्पणी की थी. कर्नल कुरैशी उन तीन वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल थीं, जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर मीडिया को ब्रीफ किया था. विजय शाह की यह टिप्पणी सोशल मीडिया से लेकर अदालत तक में भारी विरोध का कारण बनी. मामले को गंभीर मानते हुए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों ने स्वतः संज्ञान लेते हुए विजय शाह के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की और एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. हालांकि मंत्री ने माफी मांग ली, लेकिन कोर्ट ने यह माफी अस्वीकार कर दी. गिरफ्तारी से मिली राहत इस बीच, सरकार ने एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की, जिसने सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है. विपक्ष का आरोप है कि विजय शाह के जातीय वोटबैंक और राजनीतिक रसूख की वजह से अब तक उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो सकी है. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी विजय शाह को कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ टिप्पणी मामले में गिरफ्तारी से राहत देते हुए उनकी अंतरिम सुरक्षा को बढ़ा दिया है.  

मंत्री विजय शाह मामले में SIT ने पूरी की जांच, कर्नल सोफिया अंसारी पर की थी विवादित टिप्पणी

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह के विवादित बयान मामले में गठित SIT (विशेष जांच टीम) ने अपनी जांच पूरी कर ली है। अब यह रिपोर्ट 28 मई को सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पूरी जांच के दौरान मंत्री विजय शाह से कोई बयान ही नहीं लिया गया। इस बात ने ना सिर्फ सवाल खड़े किए हैं बल्कि पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर बहस भी छेड़ दी है। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए विजय शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने खुद इस जांच की निगरानी अपने हाथ में ली। पुलिस महानिदेशक द्वारा सागर जोन के आईजी प्रमोद वर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय SIT का गठन किया गया। वीडियो, चश्मदीद और सभास्थल की जांच जांच के दौरान टीम ने उस विवादित वीडियो की गहराई से पड़ताल की। जिसमें मंत्री विजय शाह को कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर बयान देते हुए देखा गया। साथ ही मंच पर मौजूद अन्य लोगों से पूछताछ की गई, और धार जिले के मानपुर स्थित सभास्थल का दौरा कर चश्मदीदों से भी बातचीत की गई। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर जैसे ही रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी, यह तय होगा कि आगे की कानूनी कार्रवाई किस दिशा में जाएगी। अब सवाल उठता है, क्या बिना मंत्रीजी के बयान के जांच को पूर्ण माना जा सकता है? घटनास्थल पर जाकर भी SIT ने की जांच एसआईटी ने मध्य प्रदेश के धार जिले के मानपुर में घटनास्थल पर जाकर भी जांच की है। साथ ही अन्य तथ्यों का परीक्षण किया है। उस वीडियो की भी जांच की गई है, जिसमें शाह कर्नल सोफिया कुरैशी के संबंध में बोल रहे हैं मंच पर मौजूद लोगों से भी पूछताछ की बात सामने आई है। जांच के दौरान विजय शाह से नहीं लिया गया कोई बयान हालांकि, सूत्रों का कहना है कि जांच दल ने मामले में विजय शाह से कोई बयान नहीं लिया है। बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्देश पर विजय शाह के विरुद्ध कायम की गई एफआइआर की जांच करने के लिए कहा था। हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एफआईआर कायम करने के लिए कहा था।

पीवीटीजी समुदाय के सभी बच्चों और महिलाओं को पोषण आहार देने के लिये 217 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों का निर्माण कराया जा रहा

सबका पोषण-सबका कल्याण भोपाल केन्द्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जन-मन) में विशेष पिछड़ी जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) में आने वाले बैगा, भारिया एवं सहरिया समुदाय के सभी बच्चों और महिलाओं को पोषण आहार देने के लिये 217 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि पीवीटीजी बहुल 20 जिलों में बनाये जा रहे इन 217 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों में से 108 आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण पूर्णता की ओर हैं, शेष 109 आंगनवाड़ी भवन 31 मार्च 2025 तक पूर्ण कर लिये जायेंगे। उन्होंने बताया कि पीएम जन-मन के तहत ही पीवीटीजी परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते में पोषण आहार अनुदान के रूप में राज्य सरकार द्वारा पहले 1000 रूपये प्रतिमाह दिये जाते थे। गत वर्ष अक्टूबर से यह राशि बढ़ाकर 1500 रूपये प्रतिमाह कर दी गई है। जारी वित्त वर्ष में सितम्बर 2024 तक 2 लाख 18 हजार 563 पीवीटीजी महिला मुखिया के बैंक खाते में 198 करोड़ रूपये से अधिक की आहार अनुदान राशि का वितरण किया जा चुका है। मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि इस महाअभियान में केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 20 जिलों में 12 लाख रूपये प्रति आंगनवाड़ी केन्द्र भवन की दर से कुल 26 करोड़ 4 लाख रूपये लागत से 217 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। केन्द्रीय मंत्रालय द्वारा प्रदेश के शिवपुरी जिले में 39, श्योपुर में 37, शहडोल में 29, उमरिया में 23, गुना में 14, डिंडौरी में 12, अशोकनगर में 11, अनूपपुर में 7, मंडला एवं दतिया में 6-6, विदिशा, बालाघाट, ग्वालियर एवं सीधी में 5-5, जबलपुर एवं छिंदवाड़ा में 4-4, मुरैना में 2 तथा कटनी, भिंड एवं रायसेन जिले में 1-1 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इन आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण के लिये जरूरी राशि सीधे संबंधित जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आंवटित की गई है। उल्लेखनीय हैकि केन्द्र एवं राज्य सरकार जनजातीय वर्ग के बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार एवं पोषण संवर्धन के प्रति बेहद गंभीर होकर प्रयासरत है। प्रदेश में नये आंगनवाड़ी केन्द्रों के संचालन, पक्के आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण के साथ-साथ पोषण आहार के लिये विशेष अनुदान देकर सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाये हैं। राज्य सरकार द्वारा पीएम जन-मन के तहत केन्द्र सरकार को 529 नये आंगनवाड़ी केन्द्रों का संचालन तथा 1107 पुराने आंगनवाड़ी केन्द्रों के नवीन भवन के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव के आधार पर केन्द्र सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2023-24 में 194 नये आंगनवाड़ी केन्द्रों का संचालन तथा 217 आंगनवाड़ी केन्द्रों के भवन निर्माण की मंजूरी दी गई थी। नये 194 आंगनवाड़ी केन्द्रों का संचालन जनवरी 2024 से प्रारंभ कर दिया गया है। 217 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें से 108 आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण 31 मार्च 2025 तक पूर्ण हो जायेगा। राज्य सरकार के पूर्व प्रस्ताव पर ही केन्द्र सरकार द्वारा वर्तमान वित्त वर्ष 2024-25 में 355 नये आंगनवाड़ी केन्द्रों के संचालन तथा 355 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों के निर्माण कार्य को स्वीकृति दी गई है। जल्द ही इनपर भी काम प्रारंभ हो जायेगा।  

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