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तमिलनाडु में चौंकाने वाला मामला, दिखा वक्फ संसोधन बिल का असर, 150 परिवारों को दरगाह ने दिया बेदखली का नोटिस

वेल्लोर तमिलनाडु के वेल्लोर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां कट्टुकोल्लई गांव में लगभग 150 परिवारों पर आरोप लगाया गया है कि वे वक्फ संपत्ति पर अवैध कब्जा करके रह रहे हैं। इसके लिए एक दरगाह ने उन्हें बेदखली का नोटिस भी जारी किया है जिसके बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गई है। इन नोटिसों के जवाब में कांग्रेस विधायक हसन मौलाना ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया है कि किसी को भी गांव से बेदखल नहीं किया जाएगा। हालांकि, मौलाना ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर वक्फ बोर्ड के पास जमीन से जुड़े कानूनी दस्तावेज हैं और उनकी वैधता सिद्ध होती है, तो ग्रामीणों को थोड़ा किराया देना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ होता है।” क्या है पूरा मामला? मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद की शुरुआत तब हुई जब कट्टुकोल्लई गांव के लगभग 150 परिवारों को एफ. सैयद सथाम नामक व्यक्ति की ओर से नोटिस भेजे गए। सथाम का दावा है कि यह जमीन एक स्थानीय दरगाह की वक्फ संपत्ति है, जो 1954 से वक्फ बोर्ड के अधीन है। नोटिस के अनुसार, एक ग्रामीण बालाजी पर आरोप है कि उसने वक्फ भूमि (सर्वे नंबर 362) पर मकान और दुकान बना ली है। नोटिस में कहा गया है कि सभी निवासियों को वक्फ नियमों का पालन करना होगा, अनुमति लेनी होगी और ग्राउंड रेंट देना होगा – अन्यथा उन्हें कानूनी रूप से बेदखल किया जा सकता है। वक्फ बोर्ड का पक्ष सैयद सथाम 2021 में अपने पिता की मृत्यु के बाद दरगाह और मस्जिद के संरक्षक बने थे। उनका कहना है कि उनके पास जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता अशिक्षित थे और उन्हें औपचारिकताओं की जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने ग्रामीणों से कभी किराया नहीं वसूला। अब वे इस “गलती” को सुधारना चाहते हैं। सथाम ने कहा कि अभी दो और नोटिस भेजे जाएंगे, और यदि फिर भी प्रतिक्रिया नहीं मिली तो वे मामला हाई कोर्ट में ले जाएंगे। ग्रामीणों का विरोध वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि वे चार पीढ़ियों से इस जमीन पर रह रहे हैं और इसे अपनी पुश्तैनी संपत्ति मानते हैं। उन्होंने पक्के सरकारी दस्तावेज, पेंचायत टैक्स भुगतान और घर निर्माण की अनुमति जैसे प्रमाण भी दिखाए हैं। ग्रामीणों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि जब सथाम के पिता ने कभी किराया नहीं मांगा, तो अब अचानक यह मांग क्यों उठ रही है। विवाद ने तब तूल पकड़ा जब डरे-सहमे ग्रामीण बड़ी संख्या में वेल्लोर के जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। हिंदू मुनानी के डिवीजनल सेक्रेटरी प्रवीण कुमार ने प्रशासन से अनुरोध किया कि ग्रामीणों को पट्टा (भूमि का वैध स्वामित्व प्रमाण पत्र) दिया जाए ताकि वे अपने घर और आजीविका को लेकर आश्वस्त हो सकें। जिला प्रशासन की भूमिका स्थानीय निवासियों के अनुसार, वेल्लोर जिला कलेक्टर ने अनौपचारिक रूप से उन्हें सलाह दी है कि वे फिलहाल कोई किराया न दें। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह विवाद न केवल कानूनी पहलू से जुड़ा है, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक स्तर पर भी ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि वक्फ बोर्ड के दावे कितने वैध साबित होते हैं और प्रशासन इसका समाधान किस प्रकार निकालता है।

केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में प्रशासनिक अफसरों को भी अधिकार , निगरानी और प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी

 बुरहानपुर वक्फ संशोधन विधेयक के लोकसभा में पेश होते ही शहर में हलचल मच गई है। भोपाल के बाद प्रदेश में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां बुरहानपुर में हैं, जिनकी संख्या 3,000 हेक्टेयर से अधिक है। मस्जिद, दरगाह और कब्रस्तान कमेटियों पर सीधा असर पड़ने के कारण समर्थन और विरोध की लहर तेज हो गई है। वक्फ संपत्तियों का सर्वे, सरकार की सख्ती केंद्र सरकार ने बिल पेश करने से पहले ही वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण का आदेश दिया, जिसे प्रशासन ने तुरंत अमल में लाना शुरू कर दिया। सरकार का दावा है कि यह कानून वक्फ संपत्तियों के सशक्तिकरण, दक्षता और विकास के लिए लाया गया है। अब केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में प्रशासनिक अफसरों को भी अधिकार मिलेंगे, जिससे निगरानी और प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी। काली पट्टी बांधकर विरोध सरकार के इस कदम से असहमति जताते हुए कुछ लोगों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। उनका आरोप है कि सरकार धार्मिक स्थलों पर गैर-मुस्लिमों को बैठाने की साजिश कर रही है। अधिवक्ता एवं AIMIM जिलाध्यक्ष जहीरुद्दीन शेख ने कहा कि ‘सरकार अगर सच में पारदर्शिता चाहती है, तो अन्य धर्मों के ट्रस्ट में भी मुस्लिमों को स्थान दे।’अधिवक्ता मो. उजैर अंसारी ने कहा कि यह बिल मुस्लिम समाज के खिलाफ है। जो संशोधन मुस्लिमों की तरफ से सुझाए गए थे, उन्हें जेपीसी ने खारिज कर दिया।’ सांसद का पलटवार भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने विरोध को खारिज करते हुए कहा कि वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वालों को यह बिल रास नहीं आ रहा। उन्होंने कहा, ‘यह बिल मुस्लिम समाज के हित में है। इससे संपत्तियों की आमदनी में पारदर्शिता आएगी और उसका सही उपयोग होगा।’ अधिवक्ता शाकीर अहमद ने इस बिल का समर्थन करते हुए कहा कि ‘संपत्तियों का सर्वे होने से कब्जाधारी बेनकाब होंगे। हर साल ऑडिट होगा, जिससे आय का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।’  

राधा मोहन दास अग्रवाल का कांग्रेस पर तीखा हमला, यह एक क्रांतिकारी विधेयक है जो गरीब मुसलमानों की मदद करेगा

नई दिल्ली लोकसभा में पास होने के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को आज राज्यसभा में पेश किया गया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बिल को सदन के पटल पर रखा। बता दें कि करीब 12 घंटे लंबी बहस और तीखी नोकझोंक के बाद, वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को बुधवार देर रात लोकसभा में पारित कर दिया गया। इस विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 232 सांसदों ने मतदान किया। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन को बेहतर करने के उद्देश्य से लाया गया था, जिसे लेकर सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी दलों के बीच गहरा मतभेद देखने को मिला। अब सभी की नजरें राज्यसभा पर टिकी हैं।   राज्यसभा में बृहस्पतिवार को कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार पर आरोप लगाया कि उसने 2013 में वक्फ़ संशोधन विधेयक का समर्थन करने के बाद अपना रुख इसलिए बदल लिया क्योंकि 2024 के चुनाव में उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और वह वक्फ़ कानून के बारे में देश में तमाम तरह की भ्रांतियां फैला रही है। वक्फ़ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर उच्च सदन में हो रही चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि 2013 में जब यह विधेयक संसद में आया तो लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में भाजपा के नेताओं ने उसका समर्थन किया था लेकिन आज इसे ‘दमनकारी कानून’ करार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2024 में जब सत्तारूढ़ भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और वह 240 सीटों पर सिमट गयी तो उसे इस वक्फ़ कानून की याद आयी और वह इसे दमनकारी कानून कहने लगी। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित कई प्रदेशों में तो वक्फ़ बोर्ड गठित ही नहीं किये गये और आज अल्पसंख्यक मंत्री वक्फ़ में पारदर्शिता लाने की बात कर रहे हैं। हुसैन ने सरकार से जानना चाहा कि क्या सरकार ‘प्रैक्टिसिंग मुस्लिम’ की पहचान करने के लिए कोई अलग विभाग खोलेगी और उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फोटो लगा कर कोई प्रमाणपत्र देगी ? उन्होंने कहा कि इस विधेयक का असली मकसद यह है कि खुद सरकार की नज़र वक्फ़ की जमीन पर लगी हुई है। राधा मोहन दास अग्रवाल का कांग्रेस पर तीखा हमला भाजपा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल ने राज्यसभा में कहा, “जब सैयद नासिर हुसैन ने बेंगलुरु में राज्यसभा की शपथ ली, तब मैं कर्नाटक में था। उनके समर्थकों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए और विरोध करने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया।” उन्होंने कहा, “यह एक क्रांतिकारी विधेयक है जो गरीब मुसलमानों की मदद करेगा। हम हिंदू हैं और इतिहास गवाह है कि हमने सती प्रथा और बाल विवाह पर प्रतिबंध लगाकर और विधवा विवाह की अनुमति देकर अपने समाज को बेहतर बनाने की कोशिश की है। लेकिन इस संसद में ऐसे सुधार करने की कोई कोशिश नहीं की गई जिससे गरीब मुसलमानों की मदद हो सके। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार ऐसा हो रहा है। उनकी सभी कल्याणकारी योजनाएं मुसलमानों तक पहुंची हैं।” हमें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश की जा रही है- सैयद नसीर कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने राज्यसभा में कहा, ‘वे राजनीति कर रहे हैं और देश में दंगे कराना चाहते हैं। वे पोर्टल पर पंजीकरण के लिए कागजात मांगेंगे। अगर उनके पास कागजात नहीं होंगे, तो उनके लोग हंगामा करेंगे।’ ‘क्या आप हमें दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं? वे 123 संपत्तियों को लेकर भ्रम पैदा कर रहे हैं। वे या तो मस्जिद हैं, कब्रिस्तान हैं या दरगाह हैं। मैं उनकी सूची प्रस्तुत करना चाहता हूं। जब अंग्रेजों ने लुटियंस दिल्ली पर कब्जा किया, तो उन्होंने क्षेत्र के निर्माण के बाद इन संपत्तियों को वक्फ को सौंप दिया था। ये संपत्तियां वक्फ के पास हैं। ये वे संपत्तियां हैं जिनका वे 2013 के संबंध में उल्लेख कर रहे हैं।” राज्यसभा में सैयद नसीर हुसैन बनाम अमित शाह संसद में सैयद नसीर हुसैन ने कहा, “वे कहते हैं कि मौजूदा वक्फ अधिनियम के तहत, अगर लोग न्यायाधिकरण के फैसले से असंतुष्ट हैं तो वे अदालत नहीं जा सकते। यह गलत है। अगर कोई भी अदालत नहीं जा सकता तो उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में इतने सारे लंबित मामले कैसे हैं?” इस पर अमित शाह ने जवाब दिया, “उन्होंने 2013 के अधिनियम में न्यायालय में सिविल मुकदमे के लिए कोई प्रावधान नहीं रखा, जिसका दायरा व्यापक है। उनके पास केवल उच्च न्यायालय में रिट क्षेत्राधिकार का प्रावधान है, जिसका दायरा बहुत सीमित है।”

लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल हुआ पास, पक्ष में 288; विरोध में 232 वोट पड़े

नई दिल्ली बुधवार को देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने लोकसभा में सफलतापूर्वक वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 को पारित करा लिया। आज इसे राज्यसभा में पारित कराने के लिए पेश किया जाएगा। 543 सदस्यों वाले लोकसभा में बिल के पक्ष में 288 मत पड़े। वहीं, इसके विरोध में 233 वोट डाले गए। इसके बाद सदन ने दोनों ही बिल को मंजूरी दे दी। राज्यसभा की जहां तक बात है तो यहां कुल 236 सदस्य हैं। बिल को पास कराने के लिए डाले गए मतों में से सर्वाधिक मतों की आवश्यकता होगी। इन दिनों भाजपा यहां सबसे बड़ी पार्टी है। उसके पास कुल 98 सांसद हैं। एनडीए की जहां तक बात करें तो उसके पास 125 सांसद हैं। भाजपा के अलावा जेडीयू के 4, अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के 3 और टीडीपी के 2 सांसद शामिल हैं। नंबर गेम को देखते हुए एनडीए को इस सदन में भी इस बहुचर्चित संशोधन विधेयक को पारित कराने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। ऐसा इसलिए भी क्योंकि एनडीए ने लोकसभा में एकजुटता दिखाया है। राज्यसभा में क्या है नंबर गेम? संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा की बात करें तो यहां सदन की मौजदा स्ट्रेंथ 236 सदस्यों की है. इसमें बीजेपी का संख्याबल 98 है. गठबंधन के लिहाज से देखें तो एनडीए के सदस्यों की संख्या 115 के करीब है. छह मनोनीत सदस्यों को भी जोड़ लें जो आमतौर पर सरकार के पक्ष में ही मतदान करते हैं तो नंबरगेम में एनडीए 121 तक पहुंच जा रहा है जो विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी 119 से दो अधिक है. कांग्रेस के 27 और इंडिया ब्लॉक के अन्य घटक दलों के 58 सदस्य राज्यसभा में हैं. कुल मिलाकर विपक्ष के पास 85 सांसद हैं. वाईएसआर कांग्रेस के नौ, बीजेडी के सात और एआईएडीएमके के चार सदस्य राज्यसभा में हैं. छोटे दलों और निर्दलीय मिलाकर तीन सदस्य हैं जो न तो सत्ताधारी गठबंधन में हैं और ना ही विपक्षी गठबंधन में. किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त 2024 को ये बिल लोकसभा में पेश किया था, जिसे विपक्ष के हंगामे के बाद संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया था. जगदंबिका पाल की अगुवाई वाली जेपीसी की रिपोर्ट के बाद इससे संबंधित संशोधित बिल को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी थी. सत्तापक्ष का कहना है कि वक्फ संशोधन बिल के माध्यम से इसकी संपत्तियों से संबंधित विवादों के निपटारे का अधिकार मिलेगा. वक्फ की संपत्ति का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और इससे मुस्लिम समाज की महिलाओं को भी मदद मिल सकेगी. बता दें कि इससे पहले वक्फ संशोधन बिल लोकसभा से पारित हो गया है. वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में वोटिंग हुई, जिसमें 464 कुल वोटों में से 288 पक्ष में और 232 विरोध में रहे. लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर 12 घंटे से ज्यादा समय तक बहस चली. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और विपक्ष के सांसदों ने अपने-अपने पक्ष रखे. अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा और फिर राष्ट्रपति के पास अप्रूवल के लिए भेजा जाएगा. इससे पहलो केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सरकार के इस कदम को मुस्लिम विरोधी बताने के कई विपक्षी सदस्यों के दावों को खारिज करते हुए कहा कि इस विधेयक को मुसलमानों को बांटने वाला बताया जा रहा है, जबकि सरकार इसके जरिए शिया, सुन्नी समेत समुदाय के सभी वर्गों को एक साथ ला रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार तो देश में सबसे छोटे अल्पसंख्यक समुदाय पारसी को भी बचाने के लिए प्रयास कर रही है। रिजिजू ने कहा, ‘‘विपक्ष सरकार की आलोचना कर सकता है, लेकिन यह कहना कि हिंदुस्तान में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है, सही नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं खुद अल्पसंख्यक हूं और कह सकता हूं कि भारत से ज्यादा अल्पसंख्यक कहीं सुरक्षित नहीं हैं। हर अल्पसंख्यक समुदाय शान से इस देश में जीवन जीता है।’’ उन्होंने विपक्षी सदस्यों को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ‘‘सदन में इस तरह देश को बदनाम करना….आने वाली पीढ़ियां आपको माफ नहीं करेंगी।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विधेयक के पारित होने के बाद देश के करोड़ों मुसलमान प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देंगे। रिजिजू के जवाब के बाद सदन ने अनेक विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए 232 के मुकाबले 288 मतों से वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को पारित किया। सदन ने मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 को भी ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल भाजपा के सहयोगी दलों जदयू, तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), जनसेना और जनता दल (सेक्यूलर) ने वक्फ (संशोधन) विधेयक का समर्थन किया। झारखंड में भाजपा की सहयोगी आजसू ने भी विधेयक का समर्थन किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक एवं अन्य विपक्षी दलों ने विधेयक को असंवैधानिक और मुसलमानों की जमीन हड़पने वाला बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया। ऐसे में ये भी सवाल हैं कि क्या एक बिल से मोदी सरकार ने देश में धर्मनिरपेक्षता की राजनीति का गणित बदल दिया? क्या एक बिल से मोदी सरकार ने दिखाया कि मुस्लिमों को डराकर वोट की सियासत नहीं चलेगी? क्या एक बिल ने बता दिया कि मुस्लिमों के हित में बदलाव का मतलब सेक्युरिज्म का विरोध नहीं होता? क्या सरकार ने दिखा दिया कि सीटें घटने से संसद में आक्रामक फैसले लेने की गति नहीं घटी है? क्या वक्फ बिल पर मुहर के साथ अब देश में सियासत की नई सेक्युलरिज्म देखी जाएगी? फैसला लेने में पीएम मोदी का कोई सानी नहीं विपक्ष को ये लगता रहा होगा कि बिहार में नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू के सांसदों के भरोसे चलती सरकार वक्फ पर फैसला लेने में हिचकिचाएगी, लेकिन 240 सीट के साथ भी संसद में बीजेपी वैसी ही दिखी जैसे 303 सीट के साथ रही थी. 2019 में जब मोदी सरकार दूसरी बार सत्ता में आई तो 6 महीने के भीतर सरकार ने तीन तलाक, आर्टिकल 370 से आजादी और CAA कानून तीनों को पास करा दिया. तब बीजेपी के पास अपने दम पर 303 सीट का बहुमत था. अबकी बार जब … Read more

वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में आज पेश होगा, सरकार के सामने विपक्षी दलों ने रख दी ये मांग

 नई दिल्ली  वक्फ संशोधन विधेयक आज बुधवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक दोपहर 12 बजे विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में विधेयक को पेश करने की जानकारी दी गई। विपक्ष ने बिल पर 12 घंटे चर्चा की मांग की। जबकि सरकार ने आठ घंटे का समय दिया है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने सभी सांसदों को तीन लाइन का व्हिप भी जारी करेगी। पार्टी के सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहना होगा। विपक्ष ने किया बैठक से वॉकआउट सरकार के रुख से नाराज होकर विपक्षी दलों के सदस्यों ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से वॉकआउट कर दिया था । विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने उनके किसी भी मुद्दे पर चर्चा नहीं की। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि हमने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी से वॉकआउट किया क्योंकि सरकार अपना अजेंडा थोप रही है। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की बात नहीं सुन रही है। वक्फ बिल पर 8 घंटे चर्चा होगी। जरूरत के मुताबिक समय बढ़ाया जा सकता है। हर पार्टी को अपनी बात रखने अधिकार है। हम बिल पर चर्चा कराना चाहते हैं। हमने इस मुद्दे पर सभी दलों से व्यापक चर्चा की है। वक्फ बिल पर व्यापक चर्चा की मांग विपक्षी दलों के सदस्यों ने कहा कि हमने वक्फ पर व्यापक चर्चा की। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन पर चर्चा की बात कही। वोटर कार्ड को आधार से जोड़ने को लेकर मुद्दा रखा। हालांकि, सरकार ने किसी भी मुद्दे पर विपक्ष की बात नहीं मानी। विपक्ष का कहना है कि हाउस सरकार की मनमर्जी से चल रहा है। विपक्ष को कोई जगह नहीं दी जा रही है। यह हाउस सिर्फ रूलिंग पार्टी का नहीं जनता का है। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि हम लागातर वोटर कार्ड की बात कर रहे हैं। हमारी मांग नहीं मानी। उन्होंने कहा कि दूसरे मुद्दे थे। ये किसी पर भी चर्चा नहीं करने दे रहे। अभी तक नहीं मिलीं विधेयक की प्रतियां: बीजद सांसद बीजू जनता दल (बीजद) के सांसद सस्मित पात्रा ने कहा, “जहां तक ​​विधेयक की बारीकियों का सवाल है तो इसकी प्रतियां अभी तक वितरित नहीं की गई हैं। इस विधेयक पर बीजद की गंभीर चिंताएं हैं। उन्होंने कहा कि चिंता यह नहीं है कि जेपीसी की बैठक हुई, बल्कि यह है कि विपक्ष की आवाज पर विचार किया गया है या नहीं। उन्होंने कहा कि अब अगर दो दिन लोकसभा में ही चर्चा होगी तो राज्यसभा के लिए समय बचेगा क्या. किरेन रिजिजू ने कहा कि इतना अच्छा बिल हमलोग लेकर आए हैं, रिकॉर्ड में दर्ज होगा कि किसने समर्थन किया और किसने विरोध. उन्होंने ये भी कहा कि कल ही चर्चा होगी, जवाब होगी और लोकसभा से इसे पारित कराना है. किरेन रिजिजू ने कहा कि हम हाथ जोड़कर विनती करते हैं, बिल पर बोलने के लिए कुछ नहीं है तो बहाना मत बनाइए. खुलकर बोलिए. उन्होंने ये भी कहा कि चर्चा का समय बढ़ाया जा सकता है लेकिन बिल उसी दिन पारित कराना है. किरेन रिजिजू ने कहा कि बहुत से मुस्लिम भी इस बिल के समर्थन में हैं. जेपीसी में इतनी चर्चा हो चुकी है. इस बिल को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है. विपक्ष ने किया बैठक से वॉकआउट विपक्ष ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से वॉकआउट कर दिया. सरकार की ओर से पहले चार से छह घंटे चर्चा का प्रस्ताव रखा गया था. विपक्षी दलों के नेता वक्फ बिल पर कम से कम 12 घंटे चर्चा की मांग कर रहे थे. सरकार की ओर से दो ही दिन का समय बचा होने की बात कहते हुए दो दिन तक चर्चा जारी रखने में असमर्थता जता दी. इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से वॉकआउट कर दिया. बाद में आठ घंटे चर्चा की बात पर सहमति बनी और सरकार की ओर से ये भी कहा गया कि चर्चा का समय और बढ़ाया भी जा सकता है. सांसदों को उत्तेजित न होने के निर्देश वक्फ बिल को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही सरकार नहीं चाहती कि कोई भी सदस्य उत्तेजित होकर ऐसा कुछ बोल जाए जिससे विपक्ष को हंगामा करने का कोई अवसर मिले और सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ जााए. इसलिए सभी सदस्यों से कहा गया है कि जिन्हें भी इस बिल पर चर्चा में शामिल होने का मौका मिले, वे अपनी बात मर्यादित तरीके से प्रमुख बिंदुओं पर फोकस करके रखें. बोलते समय उत्तेजित न हों. बीजेपी ने सहयोगी दलों से भी अपने सभी सदस्यों की मौजूदगी सदन में सुनिश्चित करने के लिए कहा है.  

कल 12 बजे संसद में पेश होगा वक्फ संशोधन बिल, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में फैसला

 नई दिल्ली  वक्फ संशोधन विधेयक बुधवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक दोपहर 12 बजे विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में विधेयक को पेश करने की जानकारी दी गई। विपक्ष ने बिल पर 12 घंटे चर्चा की मांग की। जबकि सरकार ने आठ घंटे का समय दिया है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने सभी सांसदों को तीन लाइन का व्हिप भी जारी करेगी। पार्टी के सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहना होगा। विपक्ष ने किया बैठक से वॉकआउट सरकार के रुख से नाराज होकर विपक्षी दलों के सदस्यों ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने उनके किसी भी मुद्दे पर चर्चा नहीं की। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि हमने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी से वॉकआउट किया क्योंकि सरकार अपना अजेंडा थोप रही है। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की बात नहीं सुन रही है। वक्फ बिल पर 8 घंटे चर्चा होगी। जरूरत के मुताबिक समय बढ़ाया जा सकता है। हर पार्टी को अपनी बात रखने अधिकार है। हम बिल पर चर्चा कराना चाहते हैं। हमने इस मुद्दे पर सभी दलों से व्यापक चर्चा की है। वक्फ बिल पर व्यापक चर्चा की मांग विपक्षी दलों के सदस्यों ने कहा कि हमने वक्फ पर व्यापक चर्चा की। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन पर चर्चा की बात कही। वोटर कार्ड को आधार से जोड़ने को लेकर मुद्दा रखा। हालांकि, सरकार ने किसी भी मुद्दे पर विपक्ष की बात नहीं मानी। विपक्ष का कहना है कि हाउस सरकार की मनमर्जी से चल रहा है। विपक्ष को कोई जगह नहीं दी जा रही है। यह हाउस सिर्फ रूलिंग पार्टी का नहीं जनता का है। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि हम लागातर वोटर कार्ड की बात कर रहे हैं। हमारी मांग नहीं मानी। उन्होंने कहा कि दूसरे मुद्दे थे। ये किसी पर भी चर्चा नहीं करने दे रहे। अभी तक नहीं मिलीं विधेयक की प्रतियां: बीजद सांसद बीजू जनता दल (बीजद) के सांसद सस्मित पात्रा ने कहा, “जहां तक ​​विधेयक की बारीकियों का सवाल है तो इसकी प्रतियां अभी तक वितरित नहीं की गई हैं। इस विधेयक पर बीजद की गंभीर चिंताएं हैं। उन्होंने कहा कि चिंता यह नहीं है कि जेपीसी की बैठक हुई, बल्कि यह है कि विपक्ष की आवाज पर विचार किया गया है या नहीं। उन्होंने कहा कि अब अगर दो दिन लोकसभा में ही चर्चा होगी तो राज्यसभा के लिए समय बचेगा क्या. किरेन रिजिजू ने कहा कि इतना अच्छा बिल हमलोग लेकर आए हैं, रिकॉर्ड में दर्ज होगा कि किसने समर्थन किया और किसने विरोध. उन्होंने ये भी कहा कि कल ही चर्चा होगी, जवाब होगी और लोकसभा से इसे पारित कराना है. किरेन रिजिजू ने कहा कि हम हाथ जोड़कर विनती करते हैं, बिल पर बोलने के लिए कुछ नहीं है तो बहाना मत बनाइए. खुलकर बोलिए. उन्होंने ये भी कहा कि चर्चा का समय बढ़ाया जा सकता है लेकिन बिल उसी दिन पारित कराना है. किरेन रिजिजू ने कहा कि बहुत से मुस्लिम भी इस बिल के समर्थन में हैं. जेपीसी में इतनी चर्चा हो चुकी है. इस बिल को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है. विपक्ष ने किया बैठक से वॉकआउट विपक्ष ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से वॉकआउट कर दिया. सरकार की ओर से पहले चार से छह घंटे चर्चा का प्रस्ताव रखा गया था. विपक्षी दलों के नेता वक्फ बिल पर कम से कम 12 घंटे चर्चा की मांग कर रहे थे. सरकार की ओर से दो ही दिन का समय बचा होने की बात कहते हुए दो दिन तक चर्चा जारी रखने में असमर्थता जता दी. इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से वॉकआउट कर दिया. बाद में आठ घंटे चर्चा की बात पर सहमति बनी और सरकार की ओर से ये भी कहा गया कि चर्चा का समय और बढ़ाया भी जा सकता है. सांसदों को उत्तेजित न होने के निर्देश वक्फ बिल को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रही सरकार नहीं चाहती कि कोई भी सदस्य उत्तेजित होकर ऐसा कुछ बोल जाए जिससे विपक्ष को हंगामा करने का कोई अवसर मिले और सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ जााए. इसलिए सभी सदस्यों से कहा गया है कि जिन्हें भी इस बिल पर चर्चा में शामिल होने का मौका मिले, वे अपनी बात मर्यादित तरीके से प्रमुख बिंदुओं पर फोकस करके रखें. बोलते समय उत्तेजित न हों. बीजेपी ने सहयोगी दलों से भी अपने सभी सदस्यों की मौजूदगी सदन में सुनिश्चित करने के लिए कहा है.

2 अप्रैल को Lok Sabha में पेश हो सकता है Waqf Amendment Bill

 नई दिल्ली संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है. इस चरण की कार्यवाही के भी चार दिन बाकी हैं और अब सरकार वक्फ बिल लाने की तैयारी में है. वक्फ बिल 2 अप्रैल को संसद में आ सकता है. सूत्रों की मानें तो वक्फ बिल 2 अप्रैल को लोकसभा में पेश किया जा सकता है. सरकार अगर 2 अप्रैल को वक्फ बिल संसद में लाती है तो उसे दोनों सदनों से पारित कराने के लिए इस सत्र में केवल दो ही दिन का समय मिलेगा. वक्फ संशोधन विधेयक संसद के पिछले सत्र में लोकसभा में पेश किया गया था. विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे के बीच पेश हुए विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया था. वक्फ बिल को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद जगदंबिका पाल की अगुवाई में जेपीसी गठित की गई थी. वक्फ संशोधन विधेयक को जेपीसी के पास भेजा गया था बताया जा रहा है कि उसी आधार पर सरकार की ओर से ईद के बाद संभवत: मंगलवार को लोकसभा में वक्फ विधेयक पेश किया जा सकता है। कोशिश यह होगी कि इसी सत्र में कम-से-कम एक सदन से विधेयक पारित हो जाए। अगस्त 2024 में वक्फ संशोधन विधेयक को जेपीसी के पास भेजा गया था। विधेयक को पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या जरूरी बजट सत्र के पहले सप्ताह में जेपीसी ने अपनी रिपोर्ट भी दे दी थी। बताते हैं कि सरकार ने रिपोर्ट देख ली है और उसी अनुसार पुराने विधेयक में कुछ बदलाव की तैयारी हो गई है। विपक्षी दलों को इसका अहसास है कि सरकार के पास किसी विधेयक को पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या है। भाजपा बना रही यह योजना ऐसे में विपक्षी दलों की ओर से भाजपा के सहयोगी दलों-जदयू, तेदेपा और लोकजनशक्ति पार्टी के नेताओं से संपर्क साधने की कोशिश हो रही है और सार्वजनिक बयानों में उन्हें आगाह भी करने की कोशिश हो रही है। भाजपा सूत्रों के अनुसार सहयोगी दलों में किसी तरह का संशय नहीं है। उनके नेता जेपीसी में भी मौजूद थे और उनके सुझावों पर अच्छे से विचार किया गया। फिर भी विधेयक पेश होने से पहले सहयोगी दलों के नेताओं को औपचारिक रूप से इस बारे में बताया जा सकता है। विधेयक पारित कराने मे सरकार कोई जल्दबाजी नहीं करेगी सूत्रों के अनुसार, कोशिश यह होगी कि कम-से-कम एक सदन से विधेयक पारित करा लिया जाए। यह तय है कि इस पर संसद गर्म रहेगी। वैसे यह भी तय है कि विधेयक पारित कराने मे सरकार कोई जल्दबाजी नहीं करेगी और चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। बजट सत्र चार अप्रैल को खत्म हो रहा है। अमित शाह बोले- संसद के इसी सत्र में पेश होगा वक्फ विधेयक गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वक्फ (संशोधन) विधेयक संसद के इसी सत्र में फिर से पेश किया जाएगा। अगस्त 2024 में इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया था। चार अप्रैल को समाप्त होने वाले मौजूदा बजट सत्र में अब केवल चार कार्यदिवस बचे हैं। विपक्ष मुसलमानों को गुमराह कर रहा है- शाह अमित शाह ने एक निजी चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कहा कि हम इसी सत्र में संसद में वक्फ विधेयक पेश करेंगे। प्रस्तावित कानून से किसी को डरना नहीं चाहिए, क्योंकि नरेन्द्र मोदी सरकार संविधान के दायरे में रहकर वक्फ अधिनियम में संशोधन कर रही है। विपक्ष मुसलमानों को गुमराह कर रहा है। मुसलमानों के किसी भी अधिकार पर अंकुश नहीं लगाया जाएगा। विपक्ष सिर्फ झूठ पर झूठ बोल रहा है। एनडीए के दो घटक दलों जेडीयू और टीडीपी के रुख की भी चर्चा हो रही है लेकिन माना जा रहा है कि इस बिल को लेकर दोनों दलों की चिंताओं का निवारण हो गया है. जेपीसी में भी दोनों दलों के सदस्य थे ही, जेपीसी की रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट की जिस बैठक में संशोधित रिपोर्ट के आधार तैयार नए बिल को मंजूरी दी गई थी, उसमें भी एनडीए के दोनों घटक दलों के कोटे के मंत्री मौजूद थे. राज्यसभा में छोटे दलों के समर्थन की उम्मीद राज्यसभा में एनडीए वक्फ बिल पारित कराने के लिए जरूरी बहुमत के आंकड़े से थोड़ा पीछे है. ऐसे में सरकार को कुछ छोटे दलों के समर्थन की उम्मीद है. राज्यसभा में बहुमत नहीं होने के बावजूद सरकार ने पहले भी कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराए हैं और इस बार भी नजर फ्लोर मैनेजमेंट पर होगी.

Waqf Amendment Bill के खिलाफ जंतर मंतर पर हल्ला बोल, AIMIM के नेता होंगे शामिल

नई दिल्ली ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है।मिली जानकारी के मुताबिक, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समेत अन्य मुस्लिम संगठनों ने जंतर-मंतर पर वक्फ बिल के खिलाफ सड़कों पर उतर गए हैं। देश में मुसलमान पूरी तरह सुरक्षित: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जिम्मेदार कह रहे हैं कि देश में मुसलमानों को खतरा है, सुरक्षित नहीं हैं। ये सरासर गलत और गुमराह करने वाली बातें हैं। उन्होंने कहा कि देश में मुसलमान पूरी तरह सुरक्षित है। देश में मुसलमान अपने धार्मिक त्योहार, नमाज, रोजा, हज, जकात, जुलूस और उर्स आदि कार्यक्रम आजादी से मनाता है। कोई भी व्यक्ति या हुकूमत इन धार्मिक कार्यक्रमों में कोई भी बाधा नहीं डालती। रमजान का महीना खुदा की इबादत के लिए मौलाना ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड वक्फ संशोधन बिल के विरोध में जंतर-मंतर दिल्ली पर धरना प्रदर्शन करने जा रहा है। धरना प्रदर्शन करना, अपनी आवाज बुलंद करना हर व्यक्ति को संविधान ने यह अधिकार दिए हैं। मगर रमजान का महीना खुदा की इबादत के लिए है, धरना प्रदर्शन के लिए नहीं। साल के 12 महीनों में रमजान के माह में मुसलमान पवित्रता के साथ रोजा रखता है। नमाज पढ़ता है, कुरआन शरीफ की तिलावत करता है। ऐसी स्थिति में रमजान शरीफ के दिनों में धरना-प्रदर्शन का आयोजन करना, लोगों को धार्मिक कार्य से रोककर राजनीतिक काम में लगाना है। साल के 11 महीनों में किसी दिन भी धरना प्रदर्शन किया जा सकता था। रमजान के महीने में ही क्यों आयोजन किया गया। वक्फ क्या होता है? वक्फ कोई भी चल या अचल संपत्ति हो सकती है, जिसे इस्लाम को मानने वाला कोई भी व्यक्ति धार्मिक कार्यों के लिए दान कर सकता है। इस दान की हुई संपत्ति की कोई भी मालिक नहीं होता है। दान की हुई इस संपत्ति का मालिक अल्लाह को माना जाता है। लेकिन, उसे संचालित करने के लिए कुछ संस्थान बनाए गए है। वक्फ कैसे किया जा सकता है? वक्फ करने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं। जैसे- अगर किसी व्यक्ति के पास एक से अधिक मकान हैं और वह उनमें से एक को वक्फ करना चाहता है तो वह अपनी वसीयत में एक मकान को वक्फ के लिए दान करने के बारे में लिख सकता है। ऐसे में उस मकान को संबंधित व्यक्ति की मौत के बाद उसका परिवार इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। उसे वक्फ की संपत्ति का संचालन करने वाली संस्था आगे सामाजिक कार्य में इस्तेमाल करेगी। इसी तरह शेयर से लेकर घर, मकान, किताब से लेकर कैश तक वक्फ किया जा सकता है। सरकार ने जो वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया है वो क्या है? पिछले कई दिनों से चर्चा थी कि सरकार संसद में वक्फ बोर्ड में संशोधन से जुड़ा विधेयक पेश कर सकती है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 पेश किया। 40 से अधिक संशोधनों के साथ, वक्फ (संशोधन) विधेयक में मौजूदा वक्फ अधिनियम में कई भागों को खत्म करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, विधेयक में वर्तमान अधिनियम में दूरगामी परिवर्तन की बात कही गई है। इसमें केंद्रीय और राज्य वक्फ बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना भी शामिल है। इसके साथ ही किसी भी  धर्म के लोग इसकी कमेटियों के सदस्य हो सकते हैं। अधिनियम में आखिरी बार 2013 में संशोधन किया गया था।  

वक्फ संसोधन बिल पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने आपत्ति जताते हुए कहा- जितना हक हिंदुओं का, उतना मुसलमानों का भी

नई दिल्ली वक्फ संसोधन बिल पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट संसद में पेश की, लेकिन इस पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कड़ी आपत्ति जताई है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा कि भारत में अपनी जायदाद पर सिखों और हिंदुओं का जितना हक है, उतना ही हक मुस्लिमों का भी है। वक्फ पर मौजूदा कानून भारतीय संविधान के तहत ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि वक्फ पर मौजूदा कानून भारतीय संविधान के तहत आता है और यह धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत है। उन्होंने बताया कि सिख अपनी जायदाद अपने तरीके से चलाते हैं और हिंदू भी स्वतंत्र हैं, इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन उनका कहना था कि नए बिल के मुताबिक वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुसलमानों को शामिल किया जाएगा और इस बोर्ड में सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी का मुसलमान होना जरूरी नहीं रहेगा, जिसे बोर्ड ने गलत बताया। हुकूमत से लड़ाई खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि यह कहना बेकार है कि एक दिन पूरा देश वक्फ के तहत आ जाएगा, यह सरकार की ओर से फैलाया जा रहा भ्रम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई हिंदू-मुसलमान की नहीं है, बल्कि यह उनकी अपनी संपत्ति और अधिकार की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि संविधान में हमें धार्मिक मामलों को चलाने का हक दिया गया है और वे अपनी इस लड़ाई में न्यायप्रिय हिंदुओं से भी समर्थन की उम्मीद करते हैं। इस तरह, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने वक्फ से जुड़े नए बिल के खिलाफ अपनी स्थिति स्पष्ट की और इसे संविधान के तहत दिए गए अधिकारों का उल्लंघन बताया।  

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