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घर-घर पहुँच रहा पानी, बदली ठरकपुर की कहानी

घर-घर पहुँच रहा पानी, बदली ठरकपुर की कहानी हर घर नल, हर घर जल का साकार हुआ सपना बिलासपुर जल जीवन मिशन से मुंगेली जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर ग्राम ठरकपुर में हर घर नल, हर घर जल का सपना साकार हुआ है। मिशन के अंतर्गत ठरकपुर में पाइपलाइन बिछाकर प्रत्येक घर को नल कनेक्शन प्रदान किया गया है। इसके बाद से गांव में न केवल पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, बल्कि पानी की गुणवत्ता और नियमितता भी बेहतर हुई है। अब गांव के हर घर में स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। इसने ठरकपुर की कहानी बदल गई है। कभी पेयजल संकट से जूझने वाले ठरकपुर की तस्वीर आज पूरी तरह बदल चुकी है। एक समय था जब पानी के लिए हैंडपंपों पर लंबी कतारें, मटकों और बाल्टियों के साथ ग्रामीणों की भीड़ तथा गर्मी के दिनों में गांव में जल संकट होता था। पहले पूरा गांव पेयजल के लिए 8 हैंडपंपों के भरोसे था। गर्मियों में जलस्तर गिरने से ये हैंडपंप अक्सर जवाब दे जाते थे, जिससे ग्रामीणों विशेषकर महिलाओं को दूर-दराज के जल स्रोतों से पानी लाने मजबूर होना पड़ता था। ठरकपुर की श्रीमती गंगा यादव बताती हैं कि पहले छोटे बच्चों को घर पर छोड़कर दूर हैंडपंप से पानी लाना पड़ता था। गर्मी में बहुत परेशानी होती थी। अब घर में नल लग गया है, भरपूर पानी मिल रहा है और जीवन आसान हो गया है। नल जल योजना से महिलाओं की मेहनत और समय की बचत हो रही है, जिसे अब वे परिवार, बच्चों की देखभाल और अन्य रचनात्मक कार्यों में लगा पा रही हैं, इससे वहां की महिलाओं के चेहरे में मुस्कान आई है। ठरकपुर में जल जीवन मिशन केवल पानी की व्यवस्था नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सुविधा और सम्मान का माध्यम बनकर आया है। स्वच्छ जल से बीमारियों में कमी आई है और ग्रामीणों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है।

पानी की किल्लत से जूझ रहे नगर वासी

पानी की किल्लत से जूझ रहे नगर वासी   मंडला  जनपद पंचायत घुघरी के ग्राम पंचायत नैझर मैं लोग पानी के लिए बहुत ही समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है गर्मी के दिनों में हैंड पंप  में पानी निकलना बंद हो जाता है और लोग कुआं बावली से पानी पीते हैं उसके लिए दो से तीन किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ता है और पानी लाना पड़ता है गर्मी की चल चलती धूप और ऊपर से दो गुंडी पानी सिर पर रखा जाता हैं कई लोगों को तो चक्कर आ जाते हैं गिर जाते हैं जबकि शासन प्रशासन मैं हमारे प्रिय यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेझर ग्राम पंचायत को डेढ़ से 2 करोड़ की योजना ग्राम वासियों के लिए पी एच ई द्वारा दी गई हैं इस योजना का क्रियान्वयन हुआ पानी टंकी तो बनाई गई गांव में पाइप लाइन भी बिछा दी गई पाइपलाइन कहीं बिछी कहीं नहीं बिछी सीमेंट का नल घर के सामने खड़ा कर दिया गया है लेकिन 3 वर्षों में किसी के घर पर दो बूंद पानी नहीं आया यह कैसी शासन प्रशासन की योजना है ठेकेदार एवं पी एच ई के अधिकारी मनोज भास्कर के द्वारा इन लोगों का सारा पैसा निकाल दिया गया है ना ही इनके एसडीओ और इंजीनियर कभी देखने नहीं आए ठेकेदार जो कह दिया वह मान लिया गया और पूरा पैसा निकाल दिया गया इसमें अधिकारी कर्मचारी  की लूट है गांव के लोगों का कहना था की हम लोग जनसुनवाई में आवेदन देकर आए हैं  कहीं भी हमारी कोई नहीं सुन रहा है लगता है कि शासन प्रशासन पर बैठे लोग पी एच ई द्वारा किसी ने घूस दी हो है इसलिए कुछ नहीं बोलते चाहे वह पीएचई मंत्री संपत्तिया उइके जी या फिर सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते जी सभी को हमने आवेदन निवेदन सब किया है सब शांत रह जाते हैं इन इनकी शांती की खामोशी कुछ बयान करती है यह कहीं ना कहीं पी एच ई अधिकारी के दबाव में जरूर है गांव के लोगों की समस्या को सुनकर हमारे  आंसू निकल आते हैं जब हम उनकी समस्या को देखते हैं यही डेढ़ दो लाख की यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की योजना का नहीं हो रहा है क्रियान्वयन मंडला से प्रीतम कुमार बर्मन की रिपोर्ट

भारत का सशक्त कदम: सिंधु नदी पर बांधों का जाल और पाकिस्तान की बढ़ती मुश्किलें

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के बाद अगर आपने सोचा होगा क‍ि भारत ने पाक‍िस्‍तान की ओर ध्‍यान देना बंद कर द‍िया है तो रुक‍िये… भारत ने जम्मू-कश्मीर की बर्फीली वादियों से बहने वाली चिनाब, झेलम और सिंधु नदी पर कुछ ऐसा क‍िया है क‍ि अगले कुछ महीनों बाद पाक‍िस्‍तान की सांसें अटक जाएंगी. सिंधु जल संध‍ि पर कंप्‍लीट ब्रेक के बाद मोदी सरकार ने इन नद‍ियों पर बांधों का जाल बिछाना शुरू कर द‍िया है. एक दो नहीं, बल्‍क‍ि कई बड़े बांध बनाए जा रहे हैं. सबको इमरजेंसी मोड में पूरा करने को कहा गया है. बजट पहले से अलॉट कर द‍िया गया है. टाइम फ‍िक्‍स है. साफ है क‍ि भारत अब अपनी नदियों के पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखेगा. पाक‍िस्‍तान के ल‍िए यह क‍िसी सर्जिकल स्‍ट्राइक से कम नहीं. वो प्रोजेक्‍ट जो पाक‍िस्‍तान का हलक सुखा देंगे च‍िनाब नदी सवलकोट हाइड्रो पावर प्रोजेक्‍ट     सवलकोट प्रोजेक्‍ट को चिनाब नदी पर भारत का सबसे महत्वाकांक्षी कदम माना जा रहा है. यह प्रोजेक्ट ऊधमपुर और रामबन जिलों में फैला हुआ है. यह चिनाब नदी पर पहले से मौजूद बागलीहार प्रोजेक्ट (अपस्ट्रीम) और सलाल प्रोजेक्ट (डाउनस्ट्रीम) के बीच में स्थित है. इसकी लोकेशन ऐसी है कि यह चिनाब के पानी के बहाव को नियंत्रित करने में भारत को अभूतपूर्व बढ़त देती है. पहले चरण में 1,406 मेगावाट और दूसरे चरण में 450 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा.     इमरजेंसी मोड: NHPC ने फरवरी 2026 में इसके लिए टेंडर जारी किए हैं. दस्तावेजों से पता चलता है कि सरकार इसे जितनी जल्दी हो सके (As early as possible) कमीशन करना चाहती है. मानसून के दौरान भी इसका काम 50% गति से जारी रखने का निर्देश दिया गया है. पाकल दुल परियोजना     किश्तवाड़ जिले में बन रही यह परियोजना पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा दुःस्वप्न है. सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान की ओर बहने वाली पश्चिमी नदियों पर भारत को ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ प्रोजेक्ट बनाने की अनुमति थी, लेकिन पाकल दुल भारत की पहली ऐसी परियोजना है जिसमें पानी को स्टोर करने की क्षमता है.167 मीटर की ऊंचाई के साथ यह भारत का सबसे ऊंचा बांध होगा. इसकी मदद से भारत सर्दियों में जब पाकिस्तान को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब पानी के बहाव को रेगुलेट कर सकेगा. सरकार ने इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. कीरू प्रोजेक्‍ट     चिनाब नदी पर किश्तवाड़ में ही एक और महत्वपूर्ण बांध ‘कीरू’ आकार ले रहा है. कीरू को पाकल दुल और अन्य परियोजनाओं के साथ एक ‘चेन’ के रूप में डिजाइन किया गया है. इसका मतलब है कि अगर भारत ऊपर के बांध से पानी रोकता है, तो नीचे के सभी बांधों का प्रबंधन एक साथ किया जा सकेगा. इसे भी दिसंबर 2026 तक पाकल दुल के साथ ही चालू करने का आदेश दिया गया है, ताकि चिनाब पर भारत की पकड़ एक साथ मजबूत हो. क्वार प्रोजेक्‍ट     क्वार परियोजना इंजीनियरिंग का एक नमूना है. जनवरी 2024 में चिनाब नदी का रुख मोड़कर इसके निर्माण के लिए रास्ता बनाया गया था, जिसे पाकिस्तान ने बहुत करीब से ट्रैक किया था. केंद्र ने इसके लिए मार्च 2028 की समयसीमा तय की है. नदी का मार्ग परिवर्तन इस बात का सबूत है कि भारत अब पाकिस्तान के कड़े विरोध की परवाह किए बिना निर्माण कार्य जारी रख रहा है. रतले प्रोजेक्‍ट     रतले प्रोजेक्ट पिछले एक दशक से भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे विवादित मुद्दा रहा है. पाकिस्तान ने इसके डिजाइन, विशेष रूप से इसके स्पिलवे को लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालतों तक का दरवाजा खटखटाया है. भारत ने इन विरोधों को खारिज करते हुए 2024 में नदी का रुख मोड़ा और बांध के कंक्रीट कार्य की आधारशिला रखी. यह प्रोजेक्ट भी 2028 तक चालू होने की उम्मीद है. दुलहस्ती स्टेज-2     मौजूदा दुलहस्ती-1 के ठीक नीचे स्टेज-2 को भी पर्यावरण मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. पाकिस्तान ने इस पर हाल ही में यह कहकर आपत्ति जताई कि उसे सूचित नहीं किया गया था, लेकिन भारत ने इसे संधि के दायरे में बताते हुए आपत्ति को दरकिनार कर दिया है. झेलम नदी     किशनगंगा जलविद्युत परियोजना (330 MW): यह झेलम की सहायक नदी किशनगंगा (पाकिस्तान में नीलम) पर है. भारत ने इसे 2018 में चालू किया था. यह पानी को मोड़कर वुलर झील में डालती है, जिससे पाकिस्तान के नीलम-झेलम प्रोजेक्ट की बिजली क्षमता कम हो जाती है.     उरी स्टेज-II (240 MW): बारामूला जिले में स्थित इस प्रोजेक्ट को सरकार ने अब प्राथमिकता पर रखा है. संधि के स्थगन के बाद इसकी फाइलें तेजी से आगे बढ़ी हैं ताकि झेलम के पानी का अधिकतम उपयोग भारत की सीमा के भीतर हो सके.     तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट: यह वुलर झील के मुहाने पर एक ‘बराज’ है. पाकिस्तान के विरोध के कारण यह सालों से लटका था, लेकिन अब भारत इसे नेविगेशन और पानी के स्‍टोरेज के लिए फिर से जीवित कर रहा है. सिंधु नदी     निमो-बाजगो (45 MW): लेह के पास अलची गांव में स्थित यह बांध सिंधु नदी पर बना है. यह लद्दाख की बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ सिंधु के मुख्य बहाव पर भारत की कूटनीतिक पकड़ मजबूत करता है.     चुटक प्रोजेक्ट (44 MW): यह सिंधु की सहायक नदी ‘सुरु’ पर कारगिल जिले में स्थित है.     दुर्बुक-शायोक और निमू-चिलिंग प्रोजेक्ट: लद्दाख की इन परियोजनाओं पर भी पाकिस्तान ने हाल ही में आपत्ति जताई थी, लेकिन भारत इन्हें अपनी रणनीतिक जरूरतों के लिए तेजी से आगे बढ़ा रहा है. रावी नदी     शाहपुर कंडी बांध: पंजाब के पठानकोट में रावी नदी पर स्थित इस बांध का मुख्य हिस्सा फरवरी 2024 में तैयार हो गया है. यह रणजीत सागर बांध से निकलने वाले पानी को रोकेगा, जिससे पाकिस्तान जाने वाला पानी पूरी तरह बंद हो जाएगा और जम्मू-कश्मीर व पंजाब के खेतों को सिंचाई मिलेगी.     उझ मल्‍टी परपज प्रोजेक्‍ट: रावी की सहायक नदी ‘उझ’ पर यह प्रोजेक्ट कठुआ में बन रहा है. केंद्र ने हाल ही में यहां नहर प्रणाली को मंजूरी दी है ताकि पाकिस्तान जाने वाले अनियंत्रित पानी को रोककर पंजाब और राजस्थान की … Read 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बरगी बांध में लीक से 6 गांवों और खेतों में पानी फैलने से स्थिति बिगड़ी, जबलपुर में मचा हड़कंप

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 जबलपुर/बरगी नगर  बरगी बांध से रीवा की ओर जाने वाली दाईं तट मुख्य नहर रविवार दोपहर करीब 12 बजे सगड़ा-झपनी ग्राम पंचायत के पास अचानक फूट गई। नहर फूटते ही हजारों क्यूसेक पानी तेज रफ्तार से बाहर निकलते हुए खेतों से लेकर आसपास की बस्तियों और निचले इलाकों की ओर बढ़ने लगा। देखते ही देखते क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन गए, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई। नहर में लंबे समय से पानी का दबाव अधिक बना हुआ था। नहर की दीवार कमजोर होने से ध्वस्त हो गई। पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही देर में खेत जलमग्न हो गए और छह गांवों में जगह-जगह पानी भर गया। गनीमत रही कि नहर का पानी घरों में प्रवेश नहीं कर पाया। जिन गांवों तक नहर का पानी पहुंचा, वहां के लोगों का आरोप है कि नहर की दीवारें लंबे समय से जर्जर थीं। जहां नहर फूटी है वहां एक साल से पानी का रिसाव हो रहा था। सिंचाई विभाग को शिकायत दी गई थी, लेकिन मरम्मत नहीं की गई। अधिकारियों की अनदेखी व लापरवाही का खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। किसान नीरज उपाध्याय ने बताया कि नहर से पानी के रिसाव की शिकायत ग्रामीणों ने की थी, अधिकारी मौके पर पहुंचे थे, परंतु सुनवाई नहीं हुई। किसान अजय पटेल ने बताया कि यह हादसा अचानक नहीं हुआ, बल्कि विभागीय लापरवाही का नतीजा है। गनीमत रही कि, केनाल के पास ही नरई नाला है, नाला नहीं होता, तो खेत ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के घरों में पानी घुस जाता। विभाग द्वारा नहर की मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति की गई, जिसका नतीजा सामने है। तत्काल कराई मुनादी प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल मुनादी कराई, ताकि ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर रहें। क्षतिग्रस्त नहर से सगड़ाझपनी, बम्हनोदा, रोसरा, चारघाट, पिपरियाकला और घाना गांव प्रभावित हुए। नहर का अधिकतम बहाव नरई नाला की ओर गया और इसके आगे का पानी नर्मदा नदी में प्रवाहित हुआ। चारघाट क्षेत्र का रिपटा जलमग्न हो गया है। निरीक्षण के दौरान पता चला है कि प्रभावित गांवों में गेहूं, चना और सब्जियों की फसल जलमग्न हुई है। जिला प्रशासन के मुताबिक स्थिति नियंत्रण में है। फसलों के नुकसान का सर्वे शुरू कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशन पर एसडीएम जबलपुर अभिषेक सिंह और बरगी बांध दाईं तट नहर के कार्यपालन यंत्री, सिंचाई विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। जिसके बाद नहर का पानी की निकासी पूरी तरह रोकते हुए टूटे हिस्से के आगे के सभी गेट खोल दिए गए, जिसके बाद हालात सामान्य हो पाए। वहीं खेतों में पानी भरने से फसलों को हुए नुकसान का सर्वे प्रारंभ कर दिया गया। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित किसानों को शासन की ओर से राहत राशि दी जाएगी। बाईं तट नहर से भी हो रहा रिसाव बरगी बांध से निकली बाईं तट नहर में भी रिसाव हो रहा है। विभाग का कहना है कि इस एक्वाडक्ट में रिसाव को सुधारने के लिए जल्द शासन स्तर पर प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। बरगी बांध में भी सीपेज बरगी बांध के ब्लाक नंबर 3/10 में सीपेज हो रहा है। भोपाल और दिल्ली से विशेषज्ञों की टीम जांच कर चुकी है। पानी का रिसाव सामान्य स्तर से अधिक पाया गया, लेकिन टेंडर और काम देने की प्रक्रिया में ही मामला उलझा है। 2021 में भी हुई थी घटना इधर, 2021 में पाटन और मझौली ब्लाक में बरगी बांध की नहरें फूटी थी। पाटन के पास जिनवाणी कलां में नहर फूटने से लगभग ढाई सौ एकड़ में धान की फसल को नुकसान हुआ था। वहीं चरगंवा में नहर फूटने से कोहा नाले में पानी भर गया था।

छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार कांकेर जिले में ’मोर गांव, मोर पानी’ महाअभियान जोर-शोर से चलाया जा रहा

उत्तर बस्तर कांकेर  छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार कांकेर जिले  में ’मोर गांव, मोर पानी’ महाअभियान जोर-शोर से चलाया जा रहा है। उक्त संबंध में कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर द्वारा बताया गया कि जिले में औसतन 1200-1300 मिमी वार्षिक वर्षा होती है, फिर भी जिले में जल संकट की स्थिति बनी रहती हे। इसके पीछे अनियमित मानसून, पहाड़ी क्षेत्रों में तीव्र सतही जल बहाव और घटती भूजल पुनर्भरण जैसे कारण है। यह संकट अति गंभीर है, जहां अत्यधिक जल बहाव, मिट्टी में नमी बनाए रखने की क्षमता का कम होना और क्षतिग्रस्त जलग्रहण क्षेत्र, अनियमित मानसून कृषि को अलाभकारी बना देती है। उन्होंने बताया कि इस वर्षा ऋतु जल संरक्षण का अभियान को जन आंदोलन का रूप देने का लक्ष्य है, इसके लिए जिले की सभी 454 ग्राम पंचायतों में 02 से 05 जून तक चार दिवसीय उन्मुखीकरण और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोज़ित किया गया। कार्यक्रम में जिले के सभी 454 ग्राम पंचायतों के सरपंचों, सचिवों, रोजगार सहायकों, बिहान समूह के सदस्यों और जल संरक्षण से संबंधित विभिन्न विभागों द्वारा जल संरक्षण और जल संचयन की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी द्वारा बताया गया कि मोर गांव, मोर पानी की मुख्य विशेषता यह है कि यह सामुदायिक नेतृत्व वाली योजना है। इस अभियान में योजनाओं का निर्माण और कार्यान्वयन स्थानीय समुदाय के नेतृत्व में होता है। इसी प्रकार वैज्ञानिक एवं तकनीकी दृष्टिकोण के तहत जल प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी तरीकां का उपयोग किया जाता है। युक्तधारा पोर्टल का उपयोग करके डेटा इकट्ठा किया जाता है, जो बेहतर योजना और निगरानी में मदद करता है। वाटरवेल पोर्टल का उपयोग जल स्रोतों की निगरानी या प्रबंधन के लिए किया जाता है। उन्होंने आगे यह भी बताया कि भौगोलिक सूचना प्रणाली के ओपन सोर्स टूल्स का उपयोग मानचित्रण और स्थानिक विश्लेषण में सहायक होता है। साथ ही योजनाओं का अभिसरण विभिन्न सरकारी योजनाओं को एक साथ लाकर एकीकृत परिणाम प्राप्त करने पर जोर दिया जाता है। क्षमता निर्माण और संस्थागत सशक्तीकरण व्यक्तियों की क्षमताओं को बढ़ाने और स्थानीय संस्थाओं को मजबूत करने का लक्ष्य है। जल संरक्षण के प्रयासों को सीधे लोगों की आजीविका सुधारने से जोड़ा गया है। इसके लिए निरंतर निगरानी लागू की गई पहल की लगातार निगरानी और मूल्यांकन किया जाता है। मोर गांव मोर पानी अभियान एक समग्र, समुदाय केंद्रित और तकनीकी रूप से उन्नत दृष्टिकोण अपनाकर जल संरक्षण और प्रबंधन को सुनिश्चित कर रहा है। इस अभियान के माध्यम से जल संरक्षण और आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जिले में लगातार विकास हो रहा है, जिला प्रशासन के प्रयास से जिले को जल संकट से जल्द ही निदान मिल जाएगा। अपेक्षित परिणाम – बेहतर जल सुरक्षा और मृदा प्रबंधन के तहत जल संचयन और भूमि उपचार के माध्यम से कृषि उत्पादकता और जल उपलब्धता बढ़ेगी। इसी प्रकार स्थायी परिसंपत्ति निर्माण से टिकाउ जल संरचनाओं और प्राकृतिक संसाधन प्रणालियों का निर्माण होगा। आजीविका संवर्धन से बेहतर जल उपलब्धता और आजीविका परिसंपत्तियों से ग्रामीण रोजगार और आय में वृद्धि होगी। साथ ही स्थानीय और स्वामित्व का सुदृढ़ीकरण से पंचायती राज संस्थाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों की क्षमता में वृद्धि होगी, इससे स्थानीय विकास कार्यों में उनकी भागीदारी और नेतृत्व मजबूत होगा और वे अपने गांव के लिए बेहतर निर्णय ले सकेंगे।

पंजाब,हरियाणा, राजस्थान तक पहुंचेगा सिंधु का पानी, बदलते वर्षा पैटर्न के संकट पर कंट्रोल

नई दिल्ली  सिंधु नदी के पानी का पूरा इस्तेमाल करने के लिए भारत एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। यह योजना नदियों को आपस में जोड़ने की है। TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू और कश्मीर से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में पानी ले जाने के लिए 113 किलोमीटर लंबी नहर बनाने की तैयारी चल रही है। यह नहर चिनाब नदी को रावी-ब्यास-सतलुज नदी प्रणाली से जोड़ेगी। इस योजना का लक्ष्य सिंधु जल समझौते के तहत भारत के हिस्से का बेहतर इस्तेमाल करना है। इससे पूर्वी (रावी, ब्यास, सतलुज) और पश्चिमी (सिंधु, झेलम, चिनाब) नदियों के पानी का सही उपयोग हो सकेगा और पाकिस्तान में बहने वाले अतिरिक्त पानी को रोका जा सकेगा। पंजाब,हरियाणा, राजस्थान तक पहुंचेगा सिंधु का पानी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पचमढ़ी में बीजेपी के एक प्रशिक्षण सत्र के दौरान इस बड़ी योजना का संकेत दिया था। उन्होंने कहा, ‘सिंधु का पानी तीन साल के भीतर नहरों के माध्यम से राजस्थान के श्री गंगानगर तक पहुंचाया जाएगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ‘पानी की हर बूंद के लिए तरस जाएगा।’ रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि प्रस्तावित नहर नेटवर्क जम्मू और कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 13 मौजूदा नहरों से जुड़ेगा और आखिरकार यह इंदिरा गांधी नहर प्रणाली में मिल जाएगा। जलवायु परिपर्तन और बदलते वर्षा पैटर्न के संकट पर कंट्रोल मनोहर पर्रिकर रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान के वरिष्ठ फेलो उत्तम सिन्हा ने कहा, ‘जम्मू और कश्मीर से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में अतिरिक्त पानी भेजने से इलाके में पानी की उपलब्धता को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘आंतरिक स्तर पर पानी के वितरण में इस बदलाव से जलवायु परिवर्तन और बदलते वर्षा पैटर्न का सामना करना भारत के लिए ज्यादा आसान हो सकेगा।’ इस काम को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार रणबीर नहर की लंबाई 60 किलोमीटर से बढ़ाकर 120 किलोमीटर करने पर भी विचार कर रही है। साथ ही, प्रताप नहर का भी पूरी तरह से इस्तेमाल करने की तैयारी में है। इसके लिए फिजिबिलिटी असेसमेंट किए जा रहे हैं। उझ बहुउद्देशीय परियोजना को भी नई गति देने की तैयारी यही नहीं, कई सालों से रुका हुआ कठुआ जिले का उझ बहुउद्देशीय परियोजना भी फिर से शुरू किया जा रहा है। उझ, रावी नदी की एक सहायक नदी है। पहले रावी नदी के अतिरिक्त पानी को पाकिस्तान में जाने से रोकने के लिए उझ के नीचे एक अलग रावी-ब्यास लिंक बनाने की योजना थी। अब यह बड़ी नहर योजना का हिस्सा होगी। इसमें ब्यास बेसिन में पानी स्थानांतरित करने के लिए एक बैराज और सुरंग शामिल होगी। पनबिजली परियोजनाओं परियोजनाओं पर तेजी से काम इन योजनाओं के अलावा, चिनाब नदी पर बने बागलीहार और सलाल हाइड्रो परियोजनाओं के जलाशयों से गाद निकालने जैसे छोटे समय के उपायों पर भी काम चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार भारत अपनी सिंधु प्रणाली के पानी का बेहतर उपयोग करने के लिए कई पनबिजली परियोजनाओं, जैसे- पाकल दुल (1,000 मेगावाट), रतले (850 मेगावाट), किरू (624 मेगावाट), और क्वार (540 मेगावाट) पर भी तेजी से काम कर रहा है। दरअसल, मोदी सरकार की कोशिश है कि इन सारी परियोजनाओं के काम जल्द से जल्द पूरे हों,ताकि सिंधु नदी घाटी के पानी का इस्तेमाल भारतीय राज्यों के लिए हो सके। यही वजह है कि पर्यावरण मंत्रालय भी इस बात का पुख्ता इंतजाम कर चुका है कि इन परियोजनाओं को ग्रीन क्लियरेंस मिलने में जरा भी दे रही नहीं हो।

मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के नेतृत्व में गांव-गांव में जल चौपाल का शुभारंभ पौधरोपण से किया गया

भोपाल  प्रदेश में 30 मार्च से शुरू हुए जल गंगा संवर्धन अभियान के कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच गये हैं। जिलों में अब इन कार्यों की समीक्षा की जा रही है। इसी के साथ तालाब गहरीकरण, सोखता गड्ढ़ों का निर्माण सहित अन्य कार्य जनभागीदारी से तेज गति से किये जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जल संचयन के कामों के प्रति जनसामान्य को दीवार लेखन सहित अन्य गतिविधियों से जागरूक किया जा रहा है। प्रदेश में आगामी वर्षा के मौसम को देखते हुए जल स्रोतों के आस-पास व्यापक पौधरोपण की योजना भी तैयार की गई है। दीवार लेखन से किया जा रहा है जागरूक पांढुरना जिले में कलेक्टर अजय देव शर्मा के निर्देश पर मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के नेतृत्व में गांव-गांव में जल चौपाल का शुभारंभ पौधरोपण से किया गया एवं पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई गई। दीवार लेखन का कार्य भी किया गया। जल चौपाल में ग्रामीणों के बीच बैठकर कार्यकर्ताओं द्वारा उनको जल स्रोतों के आस-पास निरंतर साफ-सफाई रखने की समझाइश दी गई। जिले में तैयार की गई पौधरोपण की कार्ययोजना पर भी जानकारी दी गई। जनसमुदाय को क्षेत्र के आस-पास की ऐतिहासिक बावड़ी की जानकारी भी दी गई। वाटर बॉडी को करें जियो टैग रतलाम जिले में कलेक्टर कार्यालय में जल संवर्धन अभियान में अब तक किये गये कार्यों की समीक्षा की गई। कलेक्टर राजेश बाथम ने अभियान में चल रहे कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि जल संवर्धन एवं संरक्षण के लिए अब तक जो भी काम किए गए हैं उनकी जानकारी गूगल सीट में अपडेट करें। जिले में जल संवर्धन के लिए अब तक बनाई गई सभी वाटर बॉडी की जियो टैगिंग अनिवार्य रूप से की जाये। बैठक में स्कूल भवनों, अस्पताल, हेल्थ एण्ड वेलनेस सेन्टर, आँगनबाड़ी भवनों, पंचायत भवनों में बनाये गए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जानकारी दी गई। जल संवर्धन अभियान की समीक्षा के दौरान जल संसाधन विभाग को निर्देशित किया कि जलशक्ति केन्द्रों का निरीक्षण कर जानकारी उपलब्ध करवाई जाये। पीएचई विभाग को निर्देश दिये गये कि आँगनबाड़ी केंद्र एवं स्कूलों में हैण्डपम्प के पास जल संवर्धन के लिए बनाये जा रहे रीचार्ज पिट को शीघ्र पूरा किया जाये। जल संरक्षण के सभी कार्य बरसात के पहले पूरे हों शहडोल कमिश्नर श्रीमती सुरभि गुप्ता ने संभाग के तीनों जिलों में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के सभी कार्य बरसात के पहले पूरा करने के निर्देश दिये हैं। उन्होने कहा कि जल संरचनाएं, पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार, नए अमृत सरोवरों का निर्माण, निर्मल नीर, खेत तालाब, कुओं की सफाई एवं रिचार्ज की व्यवस्था हैण्डपंपों के पास जल संरक्षण कार्य, पुरानी बावड़ियों का जीर्णोद्धार सहित सभी कार्य 20 जून तक पूरे किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि तालाबों के कैचमेंट एरिया के अवरोधों को हटाया जाए जिससे तालाबों में वर्षा का पानी पहुंच सके। जल संरचनाओं को राजस्व रिकार्ड में दर्ज किया जाए। बावड़ी उत्सव देवास जिले में जन अभियान परिषद ने कमलापुर में जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत बावड़ी उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया। कमलापुर की हाथी बावड़ी ऐतिहासिक धरोहर है। बावड़ी उत्सव जल संरचना के सांस्कृतिक मूल्यों, ऐतिहासिक धरोहरों के संवर्धन एवं सहेजने का उत्सव है। कमलापुर का बावड़ी उत्सव लोकमाता अहिल्याबाई की त्रि शताब्दी के अवसर पर किया गया। जिले की तीन ऐतिहासिक धरोहरों में कमलापुर की हाथी बावड़ी भी शामिल है। कार्यक्रम में हुकुम पटेल द्वारा हाथी बावड़ी के संरक्षण के कार्यों की जानकारी दी गई। जिले में प्राचीन बावड़ियां को जन सहयोग से साफ स्वच्छ करने का कार्य किया जा रहा है। जल स्रोतों की साफ-सफाई रीवा और मऊगंज जिले में वर्षा जल को संचित करने के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में पुराने जल स्त्रोतों की साफ-सफाई के साथ-साथ नई जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। वर्षाकाल में पौधरोपण की भी तैयारी की जा रही है। इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मेहताब सिंह गुर्जर ने बताया कि पीएचई विभाग द्वारा नल जल योजनाओं को दोबारा शुरू करने तथा पाइप लाइन की मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। अभियान में जिले भर में बड़ी संख्या में खेत तालाबों का निर्माण भी किया जा रहा है। ग्राम पंचायत धोपखरी में दो खेत तालाब बनाये जा रहे हैं। इसके साथ ही आस-पास के क्षेत्र में बनाये जा रहे खेत-तालाब की प्रगति की जानकारी भी ली गई। आगामी वर्षा के मौसम को देखते हुए औद्योगिक विकास निगम द्वारा पौधरोपण के लिए गड्ढे तैयार किये जा रहे हैं। जिले में प्राचीन जल स्त्रोतों की सफाई तथा अमृत सरोवरों का निर्माण किया जा रहा है। स्वच्छ पानी के लिये ग्रामों में क्लोरिनेशन कार्य मंडला जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी कार्यालय द्वारा जिले के ग्रामीण इलाकों में जनसामान्य को जागरुक करने के लिये प्रचार रथ द्वारा वर्षा काल में पानी को साफ करने के तरीके, पानी जांच प्रक्रिया से समुदाय को अवगत कराया जा रहा है। विभाग द्वारा समुदाय को जल शुद्धिकरण की सामग्री भी प्रदान की जा रही है। इस सिलसिले में प्रचार रथ ने अनेक गांव का भ्रमण भी किया है।  

जल गंगा संवर्धन अभियान से घोड़ा पछाड़ नदी पुनर्जीवित, अन्य सहायक नदियाँ भी प्रवहमान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल संरक्षण की दिशा में जल गंगा संवर्धन अभियान मध्यप्रदेश सरकार की महत्त्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में यह अभियान 30 मार्च से 30 जून तक संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नदियों, जल स्त्रोतों और वेटलैण्ड्स का संरक्षण व पुनर्जीवन है। शासन और समाज के समन्वित प्रयासों से इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। घोड़ा पछाड़ नदी पुनर्जीवित, अन्य सहायक नदियाँ भी प्रवहमान खण्डवा जिले में आम नागरिकों और प्रशासन के सहयोग से नर्मदा की सहायक घोड़ा पछाड़ नदी को पुनर्जीवित किया गया है। अंधाधुंध भू-जल दोहन के कारण यह नदी और आसपास की कई छोटी नदियाँ सूख चुकी थीं, जिससे खेती-किसानी प्रभावित हो रही थी। रिज टू वैली सिद्धांत पर आधारित जल संरचनाओं के निर्माण से लगभग 33 किलोमीटर क्षेत्र में जल संचय किया गया। परिणामस्वरूप घोड़ा पछाड़ नदी में फिर से जल प्रवाह शुरू हो गया है, जिससे वर्ष भर इन नदियों के प्रवहमान रहने की संभावनाएं बनी हैं। राज्य की नदियों का सर्वेक्षण और जल शोधन संयंत्रों की स्थापना मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नर्मदा, चंबल, क्षिप्रा, बेतवा, सोन, टोंस, ताप्ती, कान्ह, माही, सिंध, और बेनगंगा सहित प्रमुख नदियों का सर्वेक्षण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि 158 नालों से प्रतिदिन लगभग 450 मिलियन लीटर घरेलू अपशिष्ट जल सीधे इन नदियों में बहाया जा रहा है। इस स्थिति में सुधार के लिए नगरीय विकास विभाग द्वारा 869 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) की स्थापना की जा रही है। वेटलैण्ड संरक्षण में मध्यप्रदेश की अग्रणी भूमिका वर्ष 2002 में जहां मध्यप्रदेश में केवल एक रामसर साइट थी, वहीं आज यह संख्या बढ़कर पाँच हो चुकी है। साथ ही इंदौर को देश का पहला वेटलैण्ड सिटी घोषित किया जाना राज्य के लिए गौरव की बात है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण ने 2.25 हैक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले 13,565 वेटलैण्ड्स का भौतिक सत्यापन और सीमांकन समय-सीमा में पूर्ण किया है। इंदौर नगर निगम एवं एप्को ने मिलकर शहर के 330 पारंपरिक कुएं और बावड़ियों का संरक्षण कार्य किया है। यह पहल शहर की जल-परंपरा को पुनर्जीवित करने में सहायक सिद्ध हो रही है। प्रकृति के संरक्षण के लिये साझा जिम्मेदारी प्रकृति में पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए समाज की सहभागिता आवश्यक है। नदियाँ, पेड़, पहाड़ और मानव – सब एक-दूसरे पर आश्रित हैं। जल गंगा अभियान इसी पारस्परिक जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा है, जिससे जल, जीवन और प्रकृति की यह अमूल्य विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहे।  

प्रदेश में जल संरक्षण की यात्रा दिन प्रति दिन मजबूती से आगे बढ़ रही

भोपाल प्रदेश में जल संरक्षण की यात्रा दिन प्रति दिन मजबूती से आगे बढ़ रही है। जनभागीदारी से जल संरचनाओं के संरक्षण और सफाई के कार्य हाथ में लिये गये है। ऐतिहासिक, संस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले जल स्त्रोतों के सफाई के कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है। नर्मदा पथ पर यात्रा के माध्यम से नदी किनारे ग्रामों में जल चौपाल कर ग्रामीणों को नदी के आसपास साफ सफाई के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है। जल है जीवन की धारा, कल का यही सहारा शहडोल जिले में स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से जल संवर्धन का कार्य लगातार किया जा रहा है। इसी के साथ जल है जीवन की धारा, कल का यही सहारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर “जल गंगा सवंर्धन अभियान” 30 मार्च से 30 जून तक चलाया जा रहा है। यह अभियान जन-जन के जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान है। अभियान के अंतर्गत जहां एक ओर नये तालाब बनाये जा रहे, वहीं दूसरी ओर पुराने तालाबों, बावड़ियों और कुँओं का जीर्णाद्वार का कार्य भी किया जा रहा है।  नदियों को साफ-स्वच्छ एवं जल एकत्रित करने के लिए भी कार्य किए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व वाले तालाबों, जल स्रोतों तथा देवालयों में जल संरक्षण के कार्य भी किये जा रहे हैं। अभियान जन प्रतिनिधियों, स्थानीय समुदाय, जनभागीदारी, आमजन और सरकार के संयुक्त प्रयास से संचालित हो रहा है। अभियान में मशीन, सामग्री और श्रम का समुचित नियोजन किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत शहडोल जिले के जनपद पंचायत सोहागपुर के ग्राम पंचायत मैकी, ग्राम पंचायत दुलादर  सहित अन्य ग्राम पंचायतों में नवीन खेत तालाब के कार्य किये गए है। ग्राम समर्रा में नल कनेक्शनों में टोटियां लगायी गयी टीकमगढ़ कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय के निर्देशानुसार जिले में जलगंगा संवर्धन अभियान कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसी क्रम में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के तहत ग्राम समर्रा में एकल जल प्रदाय योजना के अंतर्गत नल कनेक्शनों में टोंटियां लगायी गईं। ग्रामीणों को पानी के अनावश्यक बहने से राकेने की समझाइश दी गई। ग्राम समर्रा में करीब 20 घरों के नल कनेक्शनों में टोटियों को लगाया गया। यह पहल ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश से की गई है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि पानी भरते ही नल की टोटी बंद कर देना चाहिए, जिससे जल को बर्बाद होने से रोका जा सके। अभियान पर केन्द्रित प्रदर्शनी का सरपंचों ने किया अवलोकन राज्य सरकार के निर्देश पर 30 मार्च से प्रारंभ हुए प्रदेश स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जनसहभागिता से निरंतर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। आगामी 30 जून तक संचालित होने वाले इस महत्वाकांक्षी अभियान में प्राचीन जल स्त्रोतों एवं कुएं व बावड़ियों के जीर्णाद्धार कार्य सहित जल संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाओं अंतर्गत खेत तालाब निर्माण इत्यादि का कार्य ग्रामवासियों के सहयोग से क्रियान्वित हो रहा है। अभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की जा रही है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में विभिन्न कार्यों को जनसहभागिता से बेहतर रूप में क्रियान्वित करने की कार्ययोजना बनाई गई है। जिले के सभी विकासखण्ड में अभियान के तहत पूर्ण हो चुके एवं प्रगतिरत कार्यों के बारे में जानकारी तथा तकनीकी पहलुओं से अवगत कराने के लिए जिला पंचायत परिसर में प्रदर्शनी लगाई गई। करीब 90 सरपंचो ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर कार्यों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। पंचायत प्रतिनिधियों को जल की स्वच्छता एवं कचरा के उचित निस्तारण की जानकारी दी गई। अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के प्रश्नों का समाधान भी किया गया। एक्सपोजर विजिट में सरपंचों को जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अच्छे कार्यों का महत्व बताया गया। प्रदर्शनी में ग्रामीण क्षेत्र और पंचायतों के उत्कृष्ट कार्यों को प्रदर्शित किया गया। तालाब में किया गया श्रमदान दमोह जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में स्वच्छता ही सेवा का 49वें सप्ताह के अंतर्गत पाठक कॉलोनी तालाब में श्रमदान किया गया। कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर, जनप्रतिनिधियों,  विभिन्न सामाजिक संगठन, स्वंयसेवी संस्थाओं ने अपनी सहभागिता निभाई। यह श्रमदान कार्य पिछले 48 सप्ताह से जारी हैं। जिले में जल स्त्रोतों मे सीवेज का गंदा पानी न मिले इसके लिये सोक पिट का निर्माण किया गया है। जिले में सिंचाई की नहर प्रणाली की सफाई व्यवस्था में किसानों की सहभागीता सुनिश्चित की जा रही है। भरहटा में बावडी की सफाई सतना जिले में उचेहरा विकासखंड के कबीर आश्रम ग्राम पंचायत भरहटा में बावड़ी स्वच्छता कार्यक्रम में जनभगीदारी से सफाई कार्य किया जा रहा है। स्थानीय पुजारी के अनुसार सम्राट अशोक के समय इस बावड़ी का निर्माण कराया गया था। बताया गया कि प्राचीन समय में राहगीर और स्थानीय गांव के लोग इसी से पानी पीते थे। श्रमदान के बाद ग्रामीणों को पेयजल स्त्रोतों की उपयोगिता की जानकारी दी गई। उन्हें शपथ दिलाई गई की वे निंरतर श्रमदान कर बावड़ी के आस पार सफाई रखेंगे। जिले में किसानों को खेत तालाब के महत्व के बारे में विभागीय अधिकारियों द्वारा जानकारी देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है।  

बाग बगीचों को चिन्हांकित कर किया जा रहा हरित विकास

जल गंगा संवर्धन अभियान भोपाल प्रदेश में जन सामान्य को पानी के महत्व को समझाने के लिये अनेक स्लोगन तैयार किये गये हैं। इन स्लोगन के पोस्टर और दीवार लेखन से समाज के सभी वर्गों में जन जागरूकता फैलाने के व्यापक स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं। इसी का प्रभाव है कि प्रदेश में जल संरचनाओं की साफ-सफाई में जनता की भागीदारी दिनोदिन बढ़ती जा रही है। ग्राम पंचायत धुलकोट में फार्म पौंड निर्माण बुरहानपुर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान जल संरक्षण के सिद्धांत को अपनाने पर जोर देता है। इस अभियान में बुरहानपुर अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अभियान में ग्राम पंचायत धुलकोट में फार्म पौंड निर्माण कार्य जारी है। इस कार्य में ग्रामीणजन स्वयं आगे आकर सहभागिता कर रहे है। पौंड निर्माण कार्य से वर्षा का जल संचित किया जा सकेगा और आस-पास के भूजल स्तर में भी वृद्धि होगी। जिले में जल संग्रहण संरचनाओं का जीर्णोद्धार, जल स्त्रोतों और जल वितरण प्रणालियों की साफ-सफाई इत्यादि कार्य प्राथमिकता के साथ किये जा रहे हैं। बाग बगीचों को चिन्हांकित कर किया जा रहा हरित विकास उमरिया जिले में जिला शहरी एवं विकास अभिकरण ने जन भागीदारी से नगरीय निकायों में शहरी क्षेत्रों और टाउनशिप के उजड़े बाग बगीचों को चिन्हांकित कर हरित विकास किया जा रहा है। नगर पालिका परिषद उमरिया में अमृत 2.0 के अंतर्गत लालपुर पानी टंकी के पास 45 लाख रूपये की लागत से बनने वाले पार्क के निर्माण का कार्य 30 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। वार्ड नंबर 14 में कन्या स्कूल के सामने 10 लाख रूपये की लागत से बनने वाले पार्क निर्माण का कार्य 25 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। इसी तरह वार्ड नंबर 12 सत्संग भवन के पास 50 लाख रूपये की लागत से बनने वाले पार्क का निर्माण का कार्य 30 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। इसी तरह नगर पालिका परिषद पाली में अमृत 2.0 के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 13 में सांई मंदिर के सामने 33.20 लाख रूपये की लागत से बनने वाले पार्क निर्माण का कार्य 40 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। नगर परिषद चंदिया के अंतर्गत अमृत 2.0 के तहत भरोसा तालाब के पास 21 लाख रूपये की लागत से बनने वाले पार्क निर्माण का कार्य 25 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। नगर परिषद मानपुर अंतर्गत वार्ड क्रमांक एक पंचायत भवन सेमरा में पौधरोपण किया गया है। नगर परिषद नौरोजाबाद में अमृत 2.0 अंतर्गत वार्ड क्रमांक 7 में बागीचे का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। उमरिया की नदी ग्राम पंचायत गौरय्या में स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान नागरिकों ने नदी तथा उसके आस पास पड़े कचरे को एकत्र किया और जन जागरूकता का संदेश दिया।  पानी आप बचाओ, पानी आपको बचाएगा शहडोल जिले में जल संरचनाओं के कार्य में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी ली जा रही है। अभियान में नागरिकों को बताया जा रहा है कि पानी आप बचाओ, पानी आपको बचाएगा। सरकार और समाज दोनों को मिलकर जल के महत्व को समझना होगा। इसी से हम सबका भविष्य सुरक्षित होगा। जल चौपाल में बताया गया कि जल जीवन का अभिन्न अंग है, और इसके बिना न तो कृषि संभव है, न ही उद्योग, और न ही हमारी दैनिक आवश्यकताएँ पूरी हो सकती हैं। जनपद पंचायत बुढ़ार के ग्राम सिंघली में जल की एक-एक बूंद सहेजने के लिए चौपड़ा का निर्माण किया गया। चौपड़ा के निर्माण हो जाने से स्थानीय लोगों को जल की समस्या से निजात मिली, वहीं वर्षा जल का संचयन भी होगा। भीषण गर्मी में भी चौपडा पानी से लबालब भरा हुआ है। जल है जीवन की धारा, कल का यही सहारा शहडोल जिले में “जल है जीवन की धारा, कल का यही सहारा”, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने “जल गंगा सवंर्धन अभियान” 30 मार्च से 30 जून तक चलाये जाने का निर्णय लिया है। जिले में जहां एक ओर नये तालाब बनाये जा रहे, वहीं दूसरी ओर पुराने तालाबों, बावड़ियों और कुँओं का जीर्णोद्धार का कार्य भी किया जा रहा है। जनपद पंचायत गोहपारू के ग्राम पंचायत बरमनिया, देवरी बुढार जनपद पंचायत के रूपौला सहित अन्य ग्राम पंचायतों में नवीन खेत तालाब के कार्य किये गए। नागौद के खजलइयां तालाब की हुई सफाई सतना जिले में कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस. के मार्गदर्शन में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत नगर परिषद नागौद द्वारा वार्ड क्रमांक-3 स्थित खजलइयां तालाब में जल सहयोग से सामूहिक स्वच्छता श्रमदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें नगर परिषद नागौद की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, शासकीय अमला और नागरिक शामिल हुए। जल गंगा संवर्धन अभियान की निगरानी के लिए 6 दल तैनात रीवा जिले में संभाग के सभी जिलों में 30 मार्च से 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत सभी जिलों में नदियों के उद्गम स्थल की साफ-सफाई, जल स्रोतों की सफाई, जल संरक्षण संरचनाओं में सुधार तथा नई जल संरचनाओं के निर्माण का कार्य किया जा रहा है। रीवा कमिश्नर बीएस जामोद ने जल संरक्षण कार्यों की निगरानी के लिए संभागीय अधिकारियों के 6 दल तैनात किए हैं। सभी दल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जिलों का भ्रमण करके जल संरक्षण कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। रैली के माध्यम से दिया गया जल संरक्षण का संदेश कटनी जिले में कलेक्‍टर दिलीप कुमार यादव के मार्गदर्शन में विकासखंड कटनी में छात्र-छात्राओं और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से चौपाल एवं रैली के माध्यम से जल संरक्षण एवं प्राकृतिक स्रोतों की गहरीकरण और साफ-सफाई जन भागीदारी से करने का संदेश दिया गया। ग्राम वासियों ने स्थानीय तालाब के घाट में कचरा और गंदगी की श्रमदान से साफ-सफाई में सहभागिता की और मानव श्रृंखला बनाकर तालाब से निकले कचरे को दूर फेंक दिया। तहसील विजयराघवगढ़ सेक्टर क्रमांक एक उबरा में ग्रामीण संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जागरूकता रैली द्वारा ग्रामीणों को जल संरक्षण का संदेश देते हुए हैंडपंपों से पानी के अपव्यय को रोकने की प्रेरणा दी गई। ग्रामों में किए जा रहे जल संरक्षण के कार्य डिण्डोरी जिले में जल स्त्रोतो के जल संरक्षण एवं पुर्नजीवन के लिये विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। विकासखण्ड … Read more

पाकिस्तान में पानी के लिए बहा खून! प्रदर्शनकारियों ने मंत्री का घर फूंका, पुलिस ने चलाई गोलियां

 सिंध प्रांत पाकिस्तान इस वक्त चौतरफा मुश्किलों से घिरा है जहां एक तरफ बलूचिस्तान में अस्थिरता है तो दूसरी तरफ उसका सिंध प्रांत भी जल रहा है. सिंध में लोग विवादित छह-नहर प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं. इसी प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों ने सिंध के गृह मंत्री जियाउल हसन लंजर के नौशहरो फिरोज जिले में स्थित आवास पर धावा बोल दिया और आग लगा दी. प्रदर्शनकारियों ने संपत्ति की तोड़फोड़ की और घर के सामान को आग के हवाले कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे के पास मोरो शहर में स्थित मंत्री के आवास को निशाना बनाया और पास में खड़े दो ट्रेलरों को भी आग के हवाले कर दिया. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और एक डीएसपी और छह अन्य पुलिसकर्मियों सहित एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए. चोलिस्तान नहर का मुद्दा पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेतृत्व वाली सिंध सरकार और केंद्र की शहबाज शरीफ सरकार के बीच विवाद का मुख्य मुद्दा बना हुआ है. पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार चोलिस्तान रेगिस्तान की सिंचाई के लिए सिंधु नदी पर छह नहरों के निर्माण की प्लानिंग कर रही थी. लेकिन पीपीपी और सिंध प्रांत के अन्य राजनीतिक दल इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं. सरकारी सूत्रों के अनुसार, चोलिस्तान कैनल सिस्टम की अनुमानित लागत 211.4 अरब रुपये है और इस प्रोजेक्ट के जरिए हजारों एकड़ बंजर भूमि को खेती योग्य जमीन में बदलना था. प्रोजेक्ट के तहत 400,000 एकड़ जमीन पर खेती की योजना थी. लेकिन सिंध में इस प्रोजेक्ट का भारी विरोध हो रहा था जिसमें राजनीतिक दल, धार्मिक संगठन, एक्टिविस्ट्स और वकील शामिल थे. प्रोजेक्ट के खिलाफ पूरे सिंध में रैलियां और धरना प्रदर्शन किए गए. इसे देखते हुए पिछले महीने इस प्रोजेक्ट को कॉमन इंटरेस्ट्स काउंसिल (CCI) ने अस्वीकार कर दिया. सीसीआई की बैठक के बाद पाकिस्तान के पीएमओ की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, ‘सभी प्रांतों के बीच आपसी समझ और आम सहमति के बिना कोई भी नई नहर नहीं बनाई जाएगी… जब तक प्रांतों के बीच व्यापक समझौता नहीं हो जाता, तब तक केंद्र किसी भी योजना पर आगे नहीं बढ़ेगा.’ सीसीआई के निर्णय के बावजूद, सिंध में प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहा और सरकार ने प्रदर्शनकारियों से इसे समाप्त करने का आग्रह किया. पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो मंत्री के आवास पर हमले को लेकर क्या बोले? पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने मंत्री के आवास पर हमले की कड़ी निंदा की है और इसे “आतंकवादी कृत्य” बताया है. उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन की आड़ में हिंसा फैलाने वालों ने अपनी दुर्भावनापूर्ण मंशा उजागर कर दी है. बिलावल भुट्टो ने सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया. गृह मंत्री के घर घुसे प्रदर्शनकारी वहीं मौत की जानकारी मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर हिंसक रूप धारण कर लिया और दो ट्रेलरों में आग लगा दी। उन्होंने सिंध के गृह मंत्री जियाउल हसन लंजर के घर में भी घुसकर तोड़फोड़ की और उसके कुछ हिस्सों में आग लगा दी, जबकि कुछ मोटरसाइकिलों को भी आग लगा दी गई।  

इंदौर नगर निगम को जलसंकट की चिंता, वाणिज्यिक भवनों मालिकों को जल संवर्धन और वाटर रिचार्जिंग यूनिट का निर्माण करना अनिवार्य

इंदौर इंदौर में पंद्रह दिन बाद मानसून की  आमद हो सकती है और अब नगर निगम को जलसंकट की चिंता सताई है। नियमों का हवाला देते हुए निगमायुक्त शिवम वर्मा ने नगर निगम सीमा क्षेत्र के रहवासी, औद्योगिक और वाणिज्यिक भवनों मालिकों को जल संवर्धन और वाटर रिचार्जिंग यूनिट का निर्माण करना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए जुलाई माह की मियाद दी गई है। यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि निर्माण नहीं किया जाता है तो फिर नगर पालिक निगम अधिनियम के तहत जुर्माना भी भरना होगा। इसके अलावा इंदौर में होने वाले निर्माण कार्यों और कार सर्विस सेंटर में बोरिंग और नर्मदा के जल के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वे अब तरी करने और गाडि़यां धोने के लिए ट्रीटेंड वाॅटरों का ही इस्तेमाल कर पाएंगे। अफसरों ने कहा कि इंदौर में 48 स्थानों पर ट्रीटेड वाॅटर के हाइड्रेड लगाए गए है। वहां से पानी लेकर उसका उपयोग किया जाए। यदि बोरिंग का उपयोग मिला तो फिर बोरिंग नगर निगम अधिगृहित कर लेगा। इंदौर में नर्मदा से 500 एमएलडी पानी आता है, लेकिन ज्यादातर निजी बोरिंगों में पानी नहीं होने के कारण जलसंकट शहर में छाया हुआ है। शहर में नगर निगम 200 से ज्यादा टैंकरों से पानी बांट रहा है। पानी की डिमांड लगातार बनी हुई है। इंदौर के 25 प्रतिशत इलाके में नर्मदा लाइन नहीं है। वहां सबसे ज्यादा जलसंकट बना हुआ है।

जल गंगा संवर्धन अभियान में मनरेगा से किये जा रहे हैं जल संरक्षण के कार्य

भोपाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ज्ञान अभियान को मजबूती देने एवं प्रकृति, पर्यावरण व जल संरक्षण की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार मिशन के रूप में कार्य कर रही है। प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जल गंगा संवर्धन अभियान जारी है। अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा योजना के तहत प्रदेश के 1 लाख कुओं को बारिश के पानी से रिचार्ज करने का लक्ष्य तय किया है। कुओं के पास कूप रिचार्ज पिट (डगवेल रिचार्ज विधि) बनाये जा रहे हैं। कूप रिचार्ज पिट को बनवाने में प्रदेश के कृषकों ने भी जागरूकता दिखाई है। कुओं के रिचार्ज होने से भू-जलस्तर बढ़ेगा, साथ ही कृषकों को सिंचाई व पीने के लिए पर्याप्त पानी भी उपलब्ध होगा। 1 लाख 3 हजार कुओं को रिजार्च करने का रखा गया है लक्ष्य, 75 हजार से अधिक में काम शुरू जल गंगा संवर्धन अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रदेश में 1 लाख 3 हजार कुओं को रिचार्ज करने का लक्ष्य तय किया है। इसमें से 75 हजार से अधिक कुओं के पास कूप रिचार्ज पिट बनाने का कार्य शुरू हो गया है। खंडवा जिले में कूप रिचार्ज पिट बनाने को लेकर दिए गए लक्ष्य से अधिक का निर्माण कर दिया गया है। कूप रिचार्ज पिट बन जाने से भू-जल स्तर में वृद्धि होगी। साथ ही गर्मियों में कुओं के सूखने की संभावना भी कम हो जाएगी। कूप रिचार्ज पिट बनाने की विधि कूप रिचार्ज पिट बनाने के लिए एक खास संरचना तैयार की गई है। जिसमें पत्थर और मोटी रेत की परतें होंगी। पिट का निर्माण कुएं से 3 से 6 मीटर की दूरी पर किया जाएगा। इसके लिए 3 मीटर लंबा, 3 मीटर चौड़ा और 8 मीटर गहर गड्‌ढ़ा खोदा जा रहा है। गड्‌ढ़े में 8 इंच का पाइप डालकर इसे कुएं के अंदर डाला जाएगा। फिर कुएं में पाइप के छोर पर एल्बो लगाकर 1 फिट का पाइप नीचे की तरफ लगाया जाएगा। इसके बाद पाइपलाइन के जरिए कुएं तक पहुंचाया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में 30 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 30 जून तक जारी रहेगा। अभियान में बारिश के पानी को सहेजने व पुराने जल स्त्रोतों का जीर्णोद्धार करने का कार्य किया जा रहा है। तीन माह तक चलने वाले इस अभियान के तहत पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बारिश के पानी का संयचन करने व पुराने जल स्त्रोतों को नया जीवन देने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में खेत-तालाब, कूप रिचार्ज पिट, चैक, डैम, अमृत सरोवर सहित अन्य कार्य किए जा रहे हैं।  

पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के साथ चर्चा करने की अपनी इच्छा जताई

नई दिल्ली जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि (IWT) को स्थगित कर दिया था. इसके कुछ सप्ताह बाद पाकिस्तान ने संधि को लेकर भारत के साथ चर्चा करने की अपनी इच्छा जताई है. सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी. सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तजा ने संधि के निलंबन पर भारत सरकार की औपचारिक अधिसूचना पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने भारतीय जल संसाधन सचिव देबाश्री मुखर्जी को लिखे पत्र में नई दिल्ली द्वारा उठाई गई स्पेसिफिक आपत्तियों पर चर्चा करने के लिए अपनी सरकार की तत्परता व्यक्त की. भारत अपने फैसले पर अडिग उन्होंने भारत के इस कदम के कानूनी पहलुओं पर भी सवाल उठाया और कहा कि संधि में कोई एग्जिट क्लॉज नहीं है. हालांकि, भारत सरकार अपने फैसले पर अभी भी अडिग है.संपर्क किए जाने पर जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों ने इस घटनाक्रम पर आधिकारिक रूप से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत की स्थिति में बदलाव की संभावना नहीं है. सूत्रों ने दोहराया कि संधि को निलंबित करने का निर्णय जम्मू कश्मीर को निशाना बनाकर जारी सीमा पार आतंकवाद के कारण लिया गया था. इससे पहले 24 अप्रैल को लिखे पत्र में मुखर्जी ने मुर्तजा को सूचित किया था कि संधि के तहत परिकल्पित वार्ता में शामिल होने से पाकिस्तान का इनकार और आतंकवाद को लगातार स्पोंसर करना संधि का उल्लंघन है.” पुनर्विचार करने का आह्वान गौरतलब है कि पाकिस्तान की लेटेस्ट अपील – जिसे पत्र में रेगुलेटेड वॉटर पर लाखों लोगों की निर्भरता के कारण निर्णय पर पुनर्विचार करने के आह्वान के रूप में वर्णित किया गया है – तब की गई जब भारत ने चेनाब नदी पर बगलिहार और सलाल जलविद्युत परियोजनाओं में फ्लशिंग और डिसिल्टिंग ऑपरेशन किए. मुर्तजा के पत्र से पता चलता है कि पाकिस्तान ने अपना रुख नरम कर लिया है. सूत्रों ने कहा कि हालांकि, संचार का लहजा आक्रामक बना हुआ है और इस्लामाबाद ने भारत के कदम को एकतरफा और अवैध करार दिया है, लेकिन भारतीय अधिकारियों ने कहा कि परिस्थितियों में बदलाव का सिद्धांत संधि की समीक्षा के लिए आधार प्रदान करता है. 1960 में हुई थी सिंधु जल संधि इससे पहले, भारत ने जनवरी 2023 और सितंबर 2024 में पाकिस्तान को नोटिस जारी किए थे. विश्व बैंक द्वारा मध्यस्थता की गई सिंधु जल संधि ने 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के वितरण और उपयोग को नियंत्रित किया है. सिंधु नदी प्रणाली में मुख्य नदी, सिंधु और उसकी सहायक नदियां शामिल हैं. रावी, ब्यास और सतलुज को सामूहिक रूप से पूर्वी नदियाँ कहा जाता है, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब को पश्चिमी नदियां कहा जाता है. इस रिवर सिस्टम का पानी भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए महत्वपूर्ण है.

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्राचीन और ऐतिहासिक बावड़ी की सफाई, 832 पुरानी जल संरचनाओं पर काम

जल गंगा संवर्धन अभियान भोपाल प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान में जल स्त्रोतों की साफ-सफाई के काम में समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। इसके परिणाम समाज के सामने आ रहे है। जल के महत्व को समझाने के लिये सांस्कृतिक गतिविधियों का सहारा लिया जा रहा है। कुछ क्षेत्रों में जन-प्रतिनिधियों ने पदयात्रा निकाल कर पानी के महत्व का संदेश जन-सामान्य को दिया गया। वाह्य नदी को बारहमासी नदी में बदलने के लिये पदयात्रा भोपाल जिले के बैरसिया में जल गंगा संवर्धन अभियान में वाहृय नदी स्थल का भूमि-पूजन किया गया और वाह्य नदी को बारहमासी नदी में बदलने के लिये बैरसिया विधायक विष्णु खत्री के नेतृत्व में पद यात्रा शुरू की गई। यह यात्रा तहसील के विभिन्न ग्रामों से होती हुई खजुरिया रामदास पर समाप्त हुई। बैरसिया में जल स्त्रोतों को चिन्हित कर उनके संरक्षण कर कार्ययोजना तैयार कर संरक्षण का कार्य शुरू किया गया है। प्राचीन बावड़ी का चिन्हांकन भी किया गया है। उनके ऐतिहासिक महत्व के बारे में जन-सामान्य को जानकारी दी जाएगी। एकल नल जल योजनाओं के स्रोतों के रिचार्ज के प्रयास विदिशा जिले में एकल नल जल योजनाओं के स्रोतों के स्थायित्व और निरंतरता के लिए मनरेगा की योजनाओं के साथ अभिसरण कर रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक और राज्य स्तरीय भुजलविद ने जिले के चयनित गाँव का दौरा किया। ग्रामीणों को बताया गया कि वर्षा की हर बूंद को भूमि के अंदर संरक्षण करके रखना बहुत जरूरी है। ग्रामीणों को वर्षा के जल को रिचार्ज करने की विधि के बारे में बताया गया। ग्रामीणों को बताया गया कि ग्राम के ढलान के अनुसार पानी को दिशा देकर 3-3 मीटर के फिल्टर के माध्यम से असफल नल-कूपों में पुनर्भरण किया जा सकता है। जागरूकता के लिये विशेष प्रयास सीहोर जिले में 30 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जिले भर में जल संरक्षण से संबंधित अनेक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। अभियान के तहत आमजन को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए दीवार लेखन, जागरूकता रैली, पोस्टर बैनर, रंगोली, ग्राम सभाएं, कलश यात्राएं, शपथ सहित अनेकों गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अभियान के तहत जिले के अनेक ग्रामों में कूप मरम्मत, तालाब जीर्णोद्धार, डैम की साफ-सफाई सहित अनेक कार्य किए जा रहे हैं तथा नागरिकों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई जा रही है। 832 पुरानी जल संरचनाओं पर काम ग्वालियर जिले की 263 ग्राम पंचायतों में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जल संरचनायें तेजी से आकार ले रही हैं। कार्यों में तेजी आने से इस अभियान में जिले की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जिले में कहीं पर खेत-तालाब, कहीं पर अमृत सरोवर तो कहीं पर पुराने कुँओं के पुनर्भरण के लिये संरचनायें बनाई जा रही हैं। साथ ही पिछले वर्षों की जल संरचनाओं को पूरा करने का काम भी अभियान के तहत हो रहा है। जिले की 263 ग्राम पंचायतों में वर्तमान में वर्षा जल सहेजने के लिये 1610 कार्य चल रहे हैं। इसके अलावा 832 पुरानी जल संरचनाओं को पूरा करने का काम भी प्रमुखता से कराया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान में जन भागीदारी को बढ़ाने के उद्देश्य से रात्रि चौपाल लगाकर ग्रामीणों को जल संचय एवं उपयोग के संबंध में जागरूक किया जा रहा है। सभी ग्राम पंचायतों में 854 खेत-तालाब स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 794 खेत-तालाबों का काम शुरू हो चुका है। इसी तरह जिले में 903 पुराने कुँओं को रिचार्ज करने के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 810 कुँओं को रिचार्ज करने के लिये संरचनायें बनाने का काम जारी है। जिले में 6 अमृत सरोवर भी स्वीकृत किए गए हैं। जिले में बड़े पैमाने पर बनाई जा रहीं जल संरचनायें जल संरक्षण व संवर्धन का काम तो कर ही रही हैं, साथ ही मछली पालन व सिंघाड़ा उत्पादन जैसी व्यवसायिक गतिविधियों के माध्यम से किसानों की अतिरिक्त आय का साधन भी बनेंगी। खेत-तालाबों व अमृत सरोवरों के किनारे वृहद स्तर पर वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के काम भी किए जायेंगे। प्राचीन और ऐतिहासिक बावड़ी की सफाई झाबुआ जिले के ग्राम भगोर की प्राचीन व ऐतिहासिक बावड़ी में श्रमदान कर साफ-सफाई की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के महत्वाकांक्षी अभियान जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत विभिन्न जल स्रोत की साफ-सफाई का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसी क्रम में झाबुआ कलेक्टर सुनेहा मीना के निर्देशानुसार मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद ग्राम भगोर के केसरिया की प्राचीन ऐतिहासिक कसारा की बावड़ी में श्रमदान कर साफ-सफाई की गई। जिला समन्वयक प्रेमसिंह चौहान ने बताया कि पूरी बावड़ी में पेड़ों के पत्ते बिखरे हुए थे और गंदगी पसरी हुई थी जिसे ग्राम पंचायत, विद्यार्थी, नवांकुर संस्था के सदस्यों द्वारा मिलकर सफाई की गयी। गौरतलब हैं की यह अति प्राचीन बावड़ी है जो की बड़े बड़े पत्थरों से बनी हुई है। इस बावड़ी में पुराने समय में लोग पानी तक पीते थे। परंतु आज पुरानी होने की वजह से कीचड़ व पत्तों से भर गई है। ग्रामवासियों ने मिलकर इसकी साफ-सफाई की। बावड़ी में पानी दिखाई देने लगा। श्रमदान कार्यक्रम में सभी को जल गंगा संवर्धन अभियान में जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई। प्राचीन सूरजकुंड बावड़ी की सफाई इंदौर जिले में जन अभियान परिषद के तत्वावधान में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत देपालपुर के प्रसिद्ध मंगलेश्वर मंदिर स्थित प्राचीन सूरजकुंड बावड़ी की सफाई का महाअभियान आयोजित किया गया। इस अभियान में परिषद की प्रस्फुटन समितियों के सदस्य, मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम के छात्र, नवांकुर तथा सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। सफाई अभियान के दौरान सूरजकुंड बावड़ी की गंदगी को हटाकर जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया गया। यह अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है। जिले के ग्रामीण अंचलों में तालाबों, नदियों एवं नालों की सफाई तथा गहरीकरण के कार्यक्रम श्रमदान के माध्यम से निरंतर जारी हैं। इसी क्रम में मंगलेश्वर मंदिर परिसर स्थित सूरजकुंड बावड़ी पर एक संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसमें जल संरक्षण के महत्व पर चर्चा हुई और सभी प्रतिभागियों को जल बचाने … Read more

जल गंगा संवर्धन अभियान: 4 हजार 700 का मिला था लक्ष्य, बनाए 4 हजार 838

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश पुराने जल स्त्रोतों को सहेजने, नया जीवन देने और किसानों को सिंचाई व पीने के लिए नलकूप, कुओं से पर्याप्त मात्रा में पानी मिले, इसके लिए राज्य सरकार द्वारा प्रदेश भर में जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) अंतर्गत खेत तालाब, कूप रिचार्ज पिट, सोख्ता गड्ढ़ा, बोरी बंधान सहित बारिश का पानी रोकने के लिए अन्य कार्य किए जा रहे हैं। इसके लिए सभी जिलों को लक्ष्य भी दिया गया है। खंडवा जिला प्रदेश का पहला ऐसा जिला बना है, जिसने कूप रिचार्ज पिट निर्माण में 100 फीसदी का लक्ष्य हासिल किया है। 4 हजार 700 का मिला था लक्ष्य, बनाए 4 हजार 838 जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत खंडवा जिले को 4 हजार 700 कूप रिचार्ज पिट बनाने का लक्ष्य मिला था, जिसे समय से पहले और लक्ष्य से अधिक पूरा कर लिया गया है। जिले में 4 हजार 838 कूप रिचार्ज पिट बनाए गए हैं। जिला पंचायत सीईओ खंडवा नागार्जुन बी. गौड़ा ने बताया कि कलेक्टर ऋषव गुप्ता के मार्गदर्शन में जिले में 15 हजार कूप रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं, करीब 10 हजार का कार्य प्रगतिरत है। जल संचय, जन भागीदारी अभियान में देश में तीसरे नंबर पर है खंडवा जिला बारिश के पानी का संचयन करने के लिए भारत सरकार के केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा ” जल संचय, जन भागीदारी अभियान राष्ट्रीय अभियान चलाया जा रहा है, इसमें देश के सभी जिलों में बारिश के पानी को एकत्र करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज पिट, स्टॉप डैम, सोख्ता गड्ढा सहित विभिन्न प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश का खंड़वा जिला 7 मई की स्थिति में देश में तीसरे नंबर पर है। 30 मार्च 2025 से 30 जून 2025 तक चलेगा अभियान प्रदेश में बारिश के पानी को सहेजने, पुराने जल स्रातों को संवारने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रदेशभर में 30 मार्च 2025 से 30 जून 2025 तक जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। कूप रिजार्च पिट के फायदे कूप रिचार्ज पिट, जिसे रिचार्ज शाफ्ट या रिचार्ज पिट भी कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य भू-जल स्तर को बढ़ावा देना है। बारिश का पानी जमीन के अंदर रिसने से भू-जल स्तर बढ़ता है। साथ ही कूप या नलकूपों के सूखने की संभावना भी कम रहती है। साथ ही सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बनी रहती है।  

जल गंगा संवर्धन अभियान -इस वर्ष सबसे ज्यादा सीहोर जिले में शुरू हुए 687 से अधिक खेत-तालाब

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बारिश के पानी का संचयन करने और पुराने जल स्त्रोतों को नया जीवन देने के लिए प्रदेश में 90 दिवसीय जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। इसमें प्रदेश के सभी जिलों में मनरेगा अंतर्गत खेत-तालाब, कूप रिचार्ज पिट, अमृत सरोवर सहित अन्य निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। सीहोर जिले ने बड़े पैमाने पर खेत-तालाब बनाने की मिसाल पेश की है। इस वर्ष 2025 में 687 से अधिक खेत तालाब प्रारंभ हो चुके हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत सीहोर जिले में लगभग 1670 खेत-तालाब के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 687 पर कार्य प्रारंभ हो गया है। इसी प्रकार 2600 कूप रिचार्ज पिट का निर्माण किया जाना है। निर्धारित लक्ष्य के विरूद्ध जिला प्रशासन द्वारा 2250 कार्यों की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें से 1440 पर कार्य भी प्रारंभ हो गया है। जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत जिलों में चल रहे कार्यों की मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा लगातार मॉनिटरिंग भी की जा रही है। किसानों ने भी दिखाई रुचि, जिला प्रशासन की मेहनत लाई रंग, सिंचाई में होगा फायदा किसान अपने खेतों में अधिक से अधिक खेत-तालाब बनवाए, इसके लिए जिला प्रशासन सीहोर की मेहनत रंग लाई है। खेत-तालाब को बनवाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को जागरूक किया गया। खेत तालाब का महत्व बताया। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीणों ने पानी के महत्व को समझा और खेत-तालाब को बनवाने में रुचि दिखाई। खेत-तालाब बनने से किसानों को सिंचाई के लिए आसानी से पानी मिलेगा। साथ पानी बहने के बजाय जमीन में जाएगा। इससे कुओं और ट्यूबवेल का वॉटर लेवल बढ़ेगा, जिसका फायदा किसानों को होगा। फसलों की सिंचाई के साथ कर सकेंगे मछली पालन सीहोर जिले की जनपद पंचायत इछावर की ग्राम पंचायत हालियाखेड़ी के ग्राम बालापुरा के किसान पीयूष, बापू सिंह, हजारी लाल, रामप्रसाद ने बताया कि पथरीली व बंजर जमीन होने के साथ पानी की सुविधा भी नहीं थी। इस वजह से फसलों की सिंचाई नहीं हो पाती थी। अब गांव में खेत तालाब बन जाने से फसलों की दो से तीन बार सिंचाई कर सकेंगे। साथ ही मत्स्य पालन सहित अन्य कार्य भी कर सकेंगे। किसानों ने गांव में खेत-तालाब बनने से खुशी जताई है। उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत हालियाखेड़ी में अब तक 7 खेत-तालाब बनाए जा चुके हैं और 5 प्रगतिरत है। सिपरी सॉफ्टवेयर बना मददगार जिला प्रशासन सीहोर के अनुसार खेत-तालाब के निर्माण में मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा तैयार कराया गया सिपरी साफ्टवेयर मददगार बना है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्थल चयन करने में आसानी हुई है। सिपरी (Software for Identification and Planning of Rural Infrastructure) सॉफ्टवेयर एक उन्न्त तकनीक का सॉफ्टवेयर है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से जियोमार्फोलॉजी और हाइड्रोलॉजी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके संरचनाओं का सही स्थान तय किया जा सकता है।  

चिनाब नदी पर बने बगलिहार और सलाल डैम के कई गेटों को खोल दिया गया

जम्मू भारत और पाकिस्तान के तनाव की बीच कई डैम के पानी को भारत की ओर से रोक दिया गया था। भारत ने सबसे पहले सिंधु नदी का पानी रोक दिया था, जिसके बाद चिनाब नदी पर बने डैम से भी पानी को भी रोक दिया गया था। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद से चिनाब नदी पर बने बगलिहार और सलाल डैम को बंद कर दिया था। हालांकि आज शुक्रवार को चिनाब नदी पर बने दोनों डैम के कुछ गेट खोल दिया गए। इसके वीडियो भी सामने आए है। दोनों डैम के कई गेट खुले दरअसल, भारत की ओर से पिछले सप्ताह ही चिनाब नदी के पानी को रोक दिया गया था। इसमें पहले बगलिहार डैम और फिर सलाल डैम को बंद करके पानी रोका गया था। हालांकि जम्मू-कश्मीर में बीते दिनों आई बारिश के बाद डैम का जलस्तर बढ़ गया था। इसके बाद अब रामबन में चिनाब नदी पर बने बगलिहार हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट बांध के दो गेट खोल दिए गए हैं। इसके अलावा चिनाब नदी पर ही बने रियासी के सलाल बांध के भी तीन गेट खोल दिए गए हैं। इस दौरान दोनों डैम से पानी का फ्लो आगे बढ़ता हुआ दिखा और चिनाब नदी में कई दिनों के बाद से सूखा खत्म हुआ। पानी रुकने से सूखी नदी बता दें कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत ने सबसे पहले सिंधु नदी पर बने बांध को बंद कर दिया था। भारत ने तत्काल प्रभाव से सिंधु जल समझौते को खत्म कर दिया था। बता दें कि विश्व बैंक द्वारा ये सिंधु जल संधि की गई थी। इस संधि पर 1960 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। इसे अक्सर दो शत्रुतापूर्ण पड़ोसियों के बीच शांतिपूर्ण सहयोग के एक दुर्लभ उदाहरण के रूप में सराहा जाता है। उन्होंने कहा कि स्थिति सुबह के समय क्षेत्र की छानबीन करने पर स्पष्ट होगी. घुसपैठ की यह कोशिश ऐसे दिन में हुई है जब भारत ने जम्मू, पठानकोट, उधमपुर एवं कुछ अन्य स्थानों पर पाकिस्तान द्वारा मिसाइल एवं ड्रोन से किए गए हमलों को विफल कर दिया. वहीं, दूसरी तरफ जम्मू शहर में शुक्रवार तड़के धमाकों की आवाज गूंजने पर तत्काल ‘ब्लैकआउट’ हो गया. यह घटना भारत द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की पाकिस्तानी सेना की कोशिशों को विफल करने के कुछ घंटों बाद हुई. सायरन बजने के बाद सुबह 3:50 से 4:45 बजे के बीच धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं। अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने खतरे को बेअसर कर दिया. वीडियो में आसमान में उड़ती हुई चीजों और धमाकों को दिखाया गया है क्योंकि हमले को बेअसर कर दिया गया. रातभर संघर्षविराम का उल्लंघन किये जाने की खबरें हैं। इस दौरान पाकिस्तानी सैनिकों ने पुंछ, राजौरी और जम्मू जिलों में गोलाबारी की। इस पर भारतीय सैनिकों ने भी जवाबी कार्रवाई की. ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में जम्मू के उपायुक्त ने निवासियों से शांत रहने का आग्रह किया. भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर क्षेत्र में सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद कर दिए गए हैं.

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना “पर ड्रॉप-मोर क्रॉप” 13 हजार 500 कृषकों को स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रदेश में 30 मार्च से प्रारंभ किये गये जल गंगा संवर्धन अभियान में उद्यानिकी विभाग द्वारा गाँव-गाँव में आयोजित की जा रही “पानी चौपाल” आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बन गई है। “पानी चौपाल” में मैदानी अमले द्वारा गाँव के किसानों को जल संरक्षण के साथ, कम पानी से होनी वाली फसलों, कृषि के साथ उद्यानिकी फसलों को जोड़कर अधिक लाभ कमाने और नवीन उद्यानिकी तकनीकियों की समझाइश दी जा रही है। इसके साथ ही अभियान के दौरान ही फलोद्यान,‍ड्रिप लाइन, प्लास्टिक मलचिंग, सब्जी क्षेत्र, मसाला क्षेत्र, पुष्प क्षेत्र विस्तार योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिये उद्यानिकी विभाग के ऑनलाइन पोर्टल से पंजीयन भी कराया जा रहा है। उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण विभाग द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना “पर ड्रॉप-मोर क्रॉप” अंतर्गत 13 हजार 500 कृषकों को 76.68 करोड़ रूपये की लागत स्प्रिंकलर एवं ड्रिप सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। लगभग 5 हजार हैक्टेयर में फलदार पौधों का रोपण, सभी विकासखंड में उपलब्ध जल से सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से उचित प्रबंधन पर कार्यशालाओं का आयोजन करने तथा अभियान के लिये 25 लाख से अधिक फलदार पौधे उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिये “पानी चौपाल” में ही किसानों को ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की जानकारी भी प्रदान की जा रही है। “पानी-चौपाल” गुना जिले के गुना विकासखंड ग्राम अकावदा में, विकासखंड चाचौड़ा की ग्राम पंचायत उकविदा, शिवपुर, टीकमगढ़ जिले के विकासखंड जतारा के नतोवली ग्राम पंचायत सेवार, रतलाम जिले के सैलाना विकासखंड के ग्राम सलवानिया और ग्राम सोहौला, छतरपुर जिले के लवकुश नगर विकासखंड के ग्राम में, अशोक नगर जिले के विकासखंड मुगांवली की शासकीय संजय निकुंज गोपालिया में, नर्मदापुरम के विकासखंड माखननगर, मैहर जिले के विकासखंड मुख्यालय के ग्रामों में, सिवनी जिले के विकासखंड केवलारी के ग्राम खैराजी सहित प्रदेश के सेकड़ों ग्रामों में पानी चौपालों का आयोजन लगातार जारी है। पानी चौपाल में किसानों के आये सुझाव और समास्याओं पर अमल व निराकरण एक साथ किया जाएगा।  

जल संकट से जूझ रहे उफरी गांव में पीएम जनमन योजना के साथ जल जीवन मिशन का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया

भोपाल डिंडोरी जिले के करंजिया ब्लॉक का उफरी गांव, जहां कभी जल संकट विकराल रूप ले लेता था, अब स्वच्छ पेयजल की सुविधा से आत्मनिर्भर हो चुका है। यह वही गांव है, जहां पानी की एक-एक बूंद के लिए ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जहां महिलाओं और बच्चों का बड़ा हिस्सा अपने दिन का अधिकांश समय पानी की व्यवस्था करने में ही गंवा देता था। अब यह सब बीते समय की बात हो गई है। गांव के बुजुर्ग गंगाराम बैगा बताते हैं, “गर्मियों में पानी की इतनी दिक्कत थी कि कई बार हमें रात में भी पानी भरने जाना पड़ता था। कई बार तो ऐसा हुआ कि झिरियों से गंदा पानी पीने के कारण गांव के कई लोग बीमार पड़ गए। हमें कभी उम्मीद नहीं थी कि हमारे गांव में भी नल से पानी मिलेगा। अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। यह हमारे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।” पीएम जनमन योजना बनी संजीवनी जल संकट से जूझ रहे इस गांव में पीएम जनमन योजना के साथ जल जीवन मिशन का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा यहां एक बड़ी पेयजल टंकी का निर्माण कराया गया, जिससे पाइपलाइन के माध्यम से हर घर तक पानी पहुंचाया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जनजातीय परिवारों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, ताकि उन्हें जल संकट से मुक्ति मिल सके। गांव की महिला श्रीमती सुकली बाई कहती हैं, “पहले हमें रोज सुबह जल्दी उठकर पानी के लिए निकलना पड़ता था। कई बार रात में भी पानी भरना पड़ता था, क्योंकि सुबह भीड़ अधिक होती थी। हमारी पूरी दिनचर्या पानी पर निर्भर थी, खेती-किसानी और बच्चों की देखभाल भी पीछे छूट जाती थी। अब हमें यह चिंता नहीं रहती, अब समय बचता है और हम अन्य कामों पर ध्यान दे सकते हैं।” नल से जल, 110 परिवारों के जीवन में बदलाव लगभग 530 जनसंख्या वाले उफरी गांव में जल जीवन मिशन के तहत 110 परिवारों को घर-घर नल कनेक्शन दिए गए। अब ग्रामीणों को पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध है, जिससे कई समस्याएं हल हो गई हैं। सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अब बीमारियों का खतरा कम हो गया है। पहले दूषित पानी पीने के कारण गांव में डायरिया, पीलिया जैसी बीमारियां आम थीं, लेकिन अब स्वास्थ्य केंद्र में ऐसे मामलों में काफी कमी आई है। गांव के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि उनके जीवन को सरल और सुखद बनाने वाली क्रांतिकारी पहल है। ग्रामीणों ने इस बदलाव को हृदय से स्वीकार किया है और प्रधानमंत्री जनमन योजना को विकास का वह स्रोत माना है, जिसने उफरी को नई पहचान दी है। पानी की हर बूंद के साथ अब यहां विकास की नई लहर बह रही है। विकास की ओर बढ़ता उफरी अब गांव में महिलाएं पानी भरने की चिंता से मुक्त होकर अपने घर-परिवार और आजीविका पर ध्यान दे सकती हैं। बच्चे बिना किसी रुकावट के स्कूल जा रहे हैं, और सबसे बड़ी राहत यह है कि गंदे पानी से होने वाली बीमारियों का डर अब नहीं सताता। गांव के कई परिवार अब आजीविका के नए साधनों की ओर बढ़ रहे हैं। पीएम जनमन योजना जल जीवन मिशन से हुए इस सकारात्मक बदलाव से पूरा गांव उत्साहित है। ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री मोदी और सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है और कहा है कि यह योजना उनके लिए केवल जल उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं है, बल्कि उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। अब उफरी गांव विकास की एक नई राह पर आगे बढ़ रहा है, जहां हर घर जल है और हर घर खुशहाली की ओर अग्रसर है।  

ग्वालियर को भविष्य में जलसंकट का सामना नहीं करना पड़ेगा, प्रतिदिन 150 एमएलडी पानी मिलेगा

ग्वालियर  एमपी के ग्वालियर में चंबल नदी और कोतवाल बांध से ग्वालियर तक पानी लाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू हो गया है। इससे ग्वालियर शहर की जनता को 30 वर्ष तक भरपूर मात्रा में पानी मिलेगा। भविष्य में जलसंकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।  नगर निगम ने 24 मार्च-2024 को चंबल से पानी लाने के लिए 458.68 करोड़ रुपए का ठेका इनविराड प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया है और कंपनी ने कार्य शुरू कर दिया है। यह कार्य कंपनी को 24 महीने में पूरा करना है। चंबल से ग्वालियर को प्रतिदिन 150 एमएलडी पानी मिलेगा, जो शहर की बढ़ती आबादी की पानी की जरूरत को पूरा करेगा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से 90 एमएलडी पानी रोज ● चंबल नदी का पानी मुरैना नगर निगम के इंटेकवेल के माध्यम से देवरी गांव में बन रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर आएगा। यहां से गुजर रही पाइप लाइन से निगम पानी संपवेल पर लेगा। ● देवरी गांव से चंबल का 90 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी प्रतिदिन भेजा जाएगा। कोतवाल बांध से 60 एमएलडी पानी के लिए लाइन डाली जाएगी, जो देवरी से आ रही लाइन से जुड़ेगी। यहां डाली जाएगी पाइप लाइन मुरैना : मुरैना शहर के अंदर 7.50 किमी के दायरे में डक्ट बनाकर पाइप लाइन डाली जा रही। यहां पूर्व में ही ड्राइंग व डिजाइन तैयार किए जा चुके हैं। नूराबाद : सर्विस रोड पर दो किमी खुदाई कर डक्ट बनाई जाएगी। बानमोर : बानमोर से गुजर रहे हाईवे के पास ही 3.50 किलोमीटर की खुदाई कर पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। नोट : प्रोजेक्ट में 43 किमी लाइन। चंबल वाटर प्रोजेक्ट- कब क्या हुआ 06 अक्टूबर-2023 को महाराज बाड़ा पर तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान और 16 दिसंबर 2024 को सीएम डॉ. मोहन यादव ने जीवाजी विवि के कैंपस में भूमिपूजन किया। 24 दिसंबर-2024 के वर्क ऑर्डर जारी हुए। 06 फरवरी-2025 से कार्य शुरू हुआ। 24 महीने में प्रोजेक्ट का काम पूरा करना होगा।

जल गंगा संवर्धन अभियान : कुओं, बावड़ियों और तालों के पुनर्जीवित होने से बढ़ने के साथ सुरक्षित रहेगा भूजल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जल संरक्षण अभियान देशभर में जन-आंदोलन बन चुका है। मध्यप्रदेश में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान में जन सहयोग उमड़ रहा है। इसमें निरंतर जन सहभागिता बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन के माँ क्षिप्रा के तट रामघाट से 30 मार्च को प्रदेश स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरूआत की थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि जल संरक्षण के लिए जन भागीदारी जुटने से स्पष्ट है कि प्रदेश प्रधानमंत्री मोदी के ‘जन सहयोग से जल संरक्षण’ की मुहिम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेकर अग्रिम पंक्ति में आ गया है। राज्य सरकार ‘खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में’ के सिद्धांत पर जल संरक्षण की दिशा में अभियान चला रही है। इसे सफल बनाने के लिए “जल गंगा संवर्धन अभियान” में वर्षा जल संचयन, पुराने जल स्रोतों का पुनर्जीवन और जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार का यह अभियान जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे जल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देकर अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ें। उज्जैन में जन सहभागिता से आगे बढ़ रहा अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा उज्जैन से प्रारंभ किये गये अभियान में जल संरक्षण, जल स्त्रोंतो के पुनरूद्धार, भू-जल स्तर सुधार, पुराने कुओं-बावड़ियों के जीर्णोद्धार, जल स्त्रोतों की साफ-सफाई, पौध-रोपण, छोटी नदियों, तालाब जैसी जल संरचनाओं के संरक्षण करने के लिए चल रहे इस अभियान में अब जन सहयोग भी उमड़ने लगा है। उज्जैन जिला पंचायत सीईओ श्रीमति जयति सिंह के साथ जनपद पंचायत उज्जैन की टीम ने भी जन सहयोग से चिंतामण बावड़ी, गोठड़ा बावड़ी, राणावड़ बावड़ी और बामोरा बावड़ी की साफ-सफाई की। इंदौर में धर्मगुरु बता रहे हैं जल की महत्ता इंदौर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में जल संरक्षण की महत्ता जन-जन तक पहुँचाने के लिए धर्मगुरु भी जुड़ रहे हैं। धर्मगुरु अपने उपदेशों से जल की महत्ता जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। इनकी प्रेरणा से नागरिक श्रमदान कर बावड़ी, कुँओं और तालाबों को संवार रहे हैं। इन्दौर जिले के बरलाई जागीर गांव में चारभुजा नाथ मंदिर सांवेर के गुरु आनंदाचार्य ने आश्रम के बटुकों के साथ पूजन-अर्चन किया। मंत्रोच्चार के साथ जल का पूजन भी किया गया। उन्होंने उपस्थित जनों को जल की महत्ता समझाते हुए कहा कि जल की एक-एक बूँद जीवनदायी होती है। हमारी धार्मिक मान्यताओं में भी जल का विशेष स्थान है। इसलिए सभी को मिलकर जल को सहेजने चाहिये। आनंदाचार्य के आह्वान पर श्रद्धालुओं ने बरलाई जागीर की बावड़ी के लिये श्रमदान किया। उन्होंने कहा कि “जल गंगा संवर्धन अभियान”, प्रदेश में जल की प्रचुर उपलब्धता और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। सीधी में जन श्रमदान से जल संरचनाओं की सफाई, चौपाल संगोष्ठियों से जन जागरण मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद ने महाविद्यालयों के विद्यार्थियौं के सहयोग से सीधी की सबसे महत्वपूर्ण जल संरचना गोपालदास तालाब में से गाद निकाल कर उसकी साफ-सफाई के लिए श्रमदान का क्रम प्रारंभ किया है, जो अलग-अलग जल संरचनाओं की सफाई के रूप में निरंतर जारी है। इसके साथ ही जल संरक्षण के प्रति जन सामान्य को जागरुक बनाने के लिए चौपाल संगोष्ठी, दीवार लेखन और निबंध-कविता आदि साहित्यिक प्रतियोगिताओं के आयोजन भी कराए जा रहे हैं। नवांकुर संस्था जन-चेतना ग्राम विकास समिति ने सीधी जिले के आदर्श ग्राम नदहा की तिरचुली नदी में श्रमदान से स्वच्छता अभियान चलाया। जनता ने श्रमदान कर गांव के हैंडपम्पों के आसपास और जलाशय की सफाई एवं गहरीकरण किया। श्योपुर में सीप नदी के गिर्राज घाट पर श्रमदान से शुरू हुआ नदी सफाई का क्रम श्योपुर में जल गंगा संवर्धन अभियान में जन-अभियान परिषद की नवांकुर संस्था ने समाजसेवियों एवं स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग से सीप नदी के गिर्राज घाट पर साफ-सफाई के लिए श्रमदान किया। सिवनी में जन-सहयोग के लिए जागरुकता रैली औऱ श्रमदान सिवनी जिले में जल गंगा संवर्धन-अभियान में ग्रामीण क्षेत्रों में नदी, कुंओं, तालाबों, बावड़ियों सहित अन्य जल संरचनाओं के संरक्षण एवं पुनर्जीवन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही इस अभियान में जनसमुदाय को जोडने के लिए जागरूकता रैली और दीवार लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।  

दिल्ली जल बोर्ड में 11 लाख कंज्यूमर्स के 5700 करोड़ रुपये पानी का बिल लंबे समय से है बकाया

नई दिल्ली  जिस तरह से दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियां बिजली बिल बकाया होने पर ऑफिस में बैठे-बैठे ही किसी भी कंज्यूमर्स की बिजली मीटर से सप्लाई डिस्कनेक्ट कर देती हैं, जल बोर्ड भी बकाया बिलों की वसूली के लिए कुछ ऐसा ही तकनीकी मैनेजमेंट सिस्टम डिवेलप करने का प्लान बना रहा है। जल बोर्ड अफसरों का कहना है कि करीब 11 लाख ऐसे कंज्यूमर्स हैं, जिनका का करीब 5700 करोड़ रुपये पानी का बिल लंबे समय से बकाया है। मीटर न लगाने वालों की पहचान की जाएगी जल बोर्ड अफसरों के अनुसार जल बोर्ड को घाटे से उबारने के लिए रोजाना सीनियर अफसरों के साथ बैठकें चल रही हैं। इस दौरान यह बात सामने आई कि दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या तो 52 लाख से भी अधिक है, लेकिन पानी उपभोक्ताओं की संख्या बिजली उपभोक्ताओं की तुलना में करीब आधी है। अधिकारियों ने कहा कि बिजली कंपनियों ने जिन लोगों को कनेक्शन दिया है, उनसे डेटा लेकर प्रत्येक घरों का सर्वे किया जाए। ताकि यह पता चल सके कि पानी के उपभोक्ताओं की वास्तविक संख्या कितनी है। उसी के हिसाब से फिर बिलिंग प्रोसेस शुरु किया जाए। ऐसे में जल बोर्ड के रेवेन्यू काफी बढ़ सकता है। कनेक्शन काटने के लिए स्कॉडा सिस्टम जल बोर्ड अफसरों के अनुसार दिल्ली में पानी उपभोक्ताओं की कुल संख्या करीब 28.26 लाख है। इसमें से 11 लाख के आसपास ऐसे उपभोक्ता है, जिन्हें अपने पानी के बिलों पर आपत्ति हैं और लंबे समय से बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं और लगातार उनका पानी का बिल बढ़ता जा रहा है। ऐसे उपभोक्ताओं का एरियर के रूप में करीब 5700 करोड़ रुपये बकाया है। भविष्य में पानी के बकाया बिलों का समय पर भुगतान के लिए पाइप लाइनों के वॉल्व पर स्कॉडा सिस्टम लगाने की बात की जा रही है, ताकि किसी भी उपभोक्ता का पानी का बिल अधिक समय से बकाया है, तो उसका कनेक्शन जल बोर्ड अधिकारी ऑफिस में बैठे ही काट दे। सबसे पहले कमर्शल और बल्क वॉटर कंस्यूमर पर एक्शन स्काडा सिस्टम पूरी तरह से डिवेलप होने के बाद सबसे पहले इस कैटिगरी में कमर्शल कंस्यूमर्स और बल्क वॉटर कंस्यूमर्स को शामिल किया जाएगा। दिल्ली में कमर्शल कंस्यूमर्स की संख्या 82 हजार से अधिक है। बल्क कंस्यूमर्स 4300-4500 हैं। यह प्रयोग सफल होने के बाद दूसरे कैटिगरी के पानी उपभोक्ताओं को इस सिस्टम के तहत शामिल किया जाएगा।  

मुख्यमंत्री की पर्यावरण संतुलन और आर्थिक संवर्धन से जिले में जल संरक्षण की बहुआयामी पहल:-महेन्द्र सिंह मरपच्ची

विश्व जल दिवस पर विशेष लेख एमसीबी/मनेंद्रगढ़  जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन और सभ्यता की धुरी है। मनुष्य के अस्तित्व से लेकर कृषि, उद्योग और पर्यावरण तक जल की अनिवार्यता स्पष्ट है। लेकिन आज जल संकट एक वैश्विक चुनौती बन चुका है, जिससे भारत भी अछूता नहीं है। प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सतत जल प्रबंधन की दिशा में प्रयासों को तेज करना है। भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण और स्वच्छ जल आपूर्ति के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका प्रभाव पूरे देश और छत्तीसगढ़ राज्य में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाने की हुई प्रतिबद्धता         प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें छत्तीसगढ़ की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में इस मिशन को और अधिक प्रभावी बनाया गया है । मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में जल जीवन मिशन की प्रगति को देखें तो अबतक कुल 60,379 नल कनेक्शन पूर्ण किया किया गया है । जबकि जिले की 19 गांवों को शत-प्रतिशत नल कनेक्शन से जोड़ा गया है, जिससे वहां के लोगों को अब स्वच्छ पेयजल की सुविधा सुनिश्चित हो चुकी है। कई गांवों में सौर ऊर्जा आधारित जल आपूर्ति प्रणाली लागू की गई है, जिससे जल आपूर्ति निरंतर बनी रहे। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की चुनौतियां और उसके संभावनाएं छत्तीसगढ़ जल संसाधनों की दृष्टि से समृद्ध राज्य है। यहां महानदी, हसदेव, शिवनाथ, इंद्रावती, अरपा और खारून जैसी प्रमुख नदियां हैं, जो कृषि, उद्योग और पेयजल कबआपूर्ति के लिए जीवनरेखा का काम करती हैं। लेकिन अनियंत्रित जल दोहन, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के कारण राज्य के कई क्षेत्रों में जल संकट गहराता जा रहा है। भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिससे कई जिलों में पानी की कमी देखी जा जाती है। मानसून में अनिश्चितता के कारण कुछ इलाके बाढ़ग्रस्त हो जाते हैं, जबकि अन्य हिस्से सूखे की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाना भी जरूरी हो गया है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जल संरक्षण के लिए किया जा रहा सशक्त प्रयास           केन्द्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार ने जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। इनमें  “कैच द रेन” अभियान के तहत गांवों और शहरों में जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और जल उपयोग की दक्षता बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है। इस अभियान के तहत ग्रामीण इलाकों में पुराने कुओं, तालाबों और झीलों को पुनर्जीवित किया जा रहा है, जिससे जल पुनर्भरण की प्रक्रिया को गति मिले। “अटल भूजल योजना”  विशेष रूप से भूजल स्तर को सुधारने के लिए बनाई गई है, जिसमें समुदाय-आधारित जल प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में इस योजना के तहत बोरवेल रिचार्जिंग, जल पुनर्भरण संरचनाओं और जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। वहीं “अमृत सरोवर मिशन”  के तहत मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में अबतक 96 अमृत सरोवरों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। ये सरोवर जल संरक्षण को बढ़ावा देने, भूजल स्तर में सुधार लाने, और कृषि एवं आजीविका के साधनों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके अलावा ये सरोवर सामुदायिक गतिविधियों और पर्यावरणीय संतुलन को भी प्रोत्साहित करते हैं। छत्तीसगढ़ के विभिन्न अमृत सरोवर स्थलों पर संविधान दिवस जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों का आयोजन किया जाता है, जिससे सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता में वृद्धि होती है। इन सरोवरों के निर्माण से स्थानीय निवासियों को सिंचाई, मछली पालन और अन्य आर्थिक गतिविधियों के अवसर मिलते हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। इसके अलावा “प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना” के अंतर्गत किसानों को माइक्रो इरिगेशन (ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम) अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे कम पानी में अधिक सिंचाई संभव हो सके। इससे जल की बर्बादी कम होती है और खेती को और अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। “अमृत योजना” के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति और सीवरेज प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कार्य किए जा रहे हैं, जिससे शहरी जल संकट को दूर करने में मदद मिल रही है। जल संरक्षण के लिए हर व्यक्ति की जनभागीदारी जरूरी       छत्तीसगढ़ और पूरे देश में जल संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देकर भूजल स्तर को पुनः भरना आवश्यक है। स्मार्ट जल प्रबंधन तकनीकों जैसे कि डिजिटल वॉटर मीटरिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को लागू किया जाना चाहिए। औद्योगिक इकाइयों को जल पुनर्चक्रण अनिवार्य करना चाहिए, ताकि जल अपव्यय को कम किया जा सके। गांवों में पारंपरिक जल संरचनाओं जैसे तालाबों, बावड़ियों और कुओं का पुनर्निर्माण कर उन्हें जल पुनर्भरण के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। कृषि में पानी की बचत के लिए सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) को बढ़ावा देना होगा। स्कूलों और कॉलेजों में जल संरक्षण की शिक्षा देकर युवाओं के साथ साथ हर व्यक्ति को भी जल बचाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। विश्व जल दिवस के दिन जल संरक्षण का संकल्प लेने का सही समय        विश्व जल दिवस केवल एक प्रतीकात्मक अवसर नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता जताने और ठोस कार्रवाई करने का अवसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जल संरक्षण के लिए कई प्रभावी योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका लाभ पूरे देश और छत्तीसगढ़ को मिल रहा है। लेकिन केवल सरकार के प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं। हर नागरिक को जल बचाने की दिशा में योगदान देना होगा। यदि हम आज जल संरक्षण के प्रति गंभीर नहीं हुए, तो भविष्य में यह संकट और विकराल रूप ले सकता है। हमें आज ही जल संरक्षण के ठोस उपाय अपनाने होंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध जल भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। जल संरक्षण केवल एक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा कर्तव्य है। इस विश्व जल दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए … Read more

जलप्रदाय परियोजना से 6300 घरों में नल कनेक्शन, लागत 69.86 करोड़ रूपये

भोपाल नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के अंतर्गत संचालित मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी द्वारा छतरपुर जिले में पर्यटन नगरी खजुराहो और राजनगर में जलप्रदाय परियोजना का कार्य किया गया है। एशियन डेवलपमेंट बैंक की सहायता से क्रियान्वित खजुराहो जलप्रदाय योजना की लागत 69 करोड़ 86 लाख रूपये है। परियोजना लागत में 10 वर्षों का संचालन और संधारण भी शामिल है। परियोजना से 6300 घरों में नल कनेक्शन खजुराहो जलप्रदाय योजना में खजुराहो के लगभग 4200 एवं राजनगर के 2100 घरों के नल कनेक्शन से जोड़ा गया है। इस परियोजना से 30 हजार से अधिक आबादी को साफ पानी मिल रहा है। परियोजना के लिये कुटनी डेम पर इंटैक वैल स्थापित किया गया है। पानी को शुद्ध करने केलिये 10 एमएलडी क्षमता का वॉटर ट्रीटमेंट लगाया गया है। परियोजना में जल संग्रहण के लिये खजुराहो में 5 ओवरहेड टेंक और राजगर में 2 ओवरहेड टेंक बनाये गये हैं। राजनगर में एक ग्राउंड लेवल स्टोरेज रिजर्वायर भी बनाया गया है। परियोजना के पूरा होने से इन दोनों क्षेत्रों के नागरिकों को नल से साफ पानी मिल रहा है। परियोजना से पहले नागरिकों को पानी प्राप्त करने में जो परेशानियां हुआ करती थीं, उनसे अब छुटकारा मिल गया है।  

बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी बचाने वाली जल सहेलियां निकाल रहीं 300 किमी की यात्रा

छतरपुर ‘बुंदेलखंड’ के नाम के साथ ही सूखा ग्रस्त इलाका, पलायन और बेरोजगारी जैसी समस्याएं जुड़ी हुई हैं। पानी के संकट से जूझते इस पूरे इलाके को पानीदार बनाने के लिए देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट की आधारशिला प्रधानमंत्री मोदी ने किया। चंदेल कालीन तालाबों को पुनर्जीवित करने में मप्र का पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जल संरक्षण पर काम करने वाली सामाजिक संस्थाओं (NGO), और पब्लिक की मदद से काम करेगी। जल संरक्षण पर काम कर रही गैर सरकारी संस्थाओं ने ओरछा में वर्कशॉप आयोजित की। इस कार्यशाला में जल पुरुष राजेंद्र सिंह, मप्र के पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल और जल संरक्षण पर काम करने वाले संजय सिंह तमाम एक्सपर्ट्स ने मंथन किया। चंदेल राजाओं ने बनवाए बांध, तालाब और बावड़ियां बुंदेलखंड मप्र और उप्र के 7-7 जिलों में बंटा हुआ है। इस इलाके में 9वीं से 16वीं शताब्दी तक चंदेलों का शासन रहा है। पानी की कमी से यह इलाका हमेशा जूझता रहा है। चंदेल राजाओं ने बरसाती पानी को सहेजने के लिए 2 पहाड़ों के बीच पत्थर और मिट्‌टी का प्रयोग करते हुए बांधों का निर्माण कराया। पहाड़ियों के तराई इलाके में बरसाती पानी इकट्‌ठा हो सके। इन तालाबों को बनाने में ऐसी तकनीक का प्रयोग किया गया। जिसमें एक तालाब के भरने पर वेस्टवियर के जरिए उसके तराई इलाके का तालाब भर सके। इन तालाबों के साथ ही बावड़ियां भी बनवाई गई। ताकि तालाबों और बांधों के किनारे की बावड़ियां भर सकें। पंचायत मंत्री बोले- तालाबों का कैचमेंट बढ़ाएंगे पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने  कहा- लगातार चर्चाएं होती हैं वास्तविक स्थिति पर हमें जरुरी विचार करना पडे़गा। शुरू से यह बातें होती रहीं हैं। जल पुरुष राजेंद्र सिंह और जो संस्थाएं जल के क्षेत्र में काम करती हैं। उनके साथ विमर्श करके हमें रास्ता निकालना पडे़गा। चूंकि, मैं उस क्षेत्र का जनप्रतिनिधि रहा हूं तो मैंने देखा कि कैचमेंट की समस्या बढ़ी है। चाहे तालाबों में अतिक्रमण हो, या फिर सीसी रोड डाल दिया तो आने वाला बरसाती पानी अवरुद्ध हो गया। अगर पुलिया होती तो शायद पानी उसमें जाता। ये प्रयास इन कमियों को ठीक करने के लिए हैं। पंचायत मंत्री बोले- तालाबों का कैचमेंट बढ़ाएंगे पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने  कहा- लगातार चर्चाएं होती हैं वास्तविक स्थिति पर हमें जरुरी विचार करना पडे़गा। शुरू से यह बातें होती रहीं हैं। जल पुरुष राजेंद्र सिंह और जो संस्थाएं जल के क्षेत्र में काम करती हैं। उनके साथ विमर्श करके हमें रास्ता निकालना पडे़गा। चूंकि, मैं उस क्षेत्र का जनप्रतिनिधि रहा हूं तो मैंने देखा कि कैचमेंट की समस्या बढ़ी है। चाहे तालाबों में अतिक्रमण हो, या फिर सीसी रोड डाल दिया तो आने वाला बरसाती पानी अवरुद्ध हो गया। अगर पुलिया होती तो शायद पानी उसमें जाता। ये प्रयास इन कमियों को ठीक करने के लिए हैं।। पानी पर काम करना हमारी संवैधानिक जिम्मेदारी मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा- उन तालाबों में डीसिल्टिंग की बहुत ज्यादा जरूरत नहीं हैं। क्योंकि वहां का जो डेटा हमारे पुरखों ने बनाया उसमें कोई नुकसानदेह चीजें नहीं हैं। पानी की आवक को निरंतर करना। अगर कोई अतिक्रमण है तो उनको दूर करना। पानी आने के रास्तों को खोलने के लिए प्रशासनिक जरूरत पड़ती है। ऐसी कोई जानकारियां जो वहां पर काम करने वाले लोग हैं या फिर जो जल के क्षेत्र में काम करने वाले लोग हैं उनके कोई सुझाव हैं। जो भी सुझाव विमर्श में सामने आएंगे उसके लिए सरकार कटिबद्ध है। हमें आने वाली पीढ़ी के लिए पानी पर काम करना ही होगा। ये हमारी नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। पानी के रास्ते में बनी सड़कों पर विभाग बनवाएगा पुलिया मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा- हमें एक बार चिह्नित करना पडे़गा कि हम शुरुआत कहां से करें। दमोह में मैने किया था बेलाताल में एसपी के सामने पुलिया थी, उसे हमने तोड़ दिया था। मुझे लगता है कि कैचमेंट खोलना हमारे नैतिक बल पर निर्भर करता है। प्रशासन की जरूरत तब पडे़गी तब वहां कोई अवरोध पैदा करे। दूसरी बात ये है कि अगर सीसी रोड बना दिया तो वहां पुलिया बनानी पडे़गी। ऐसे निर्माण की गारंटी हम जैसे मंत्रालय के लोग ही ले सकते हैं। आप बरसात के पहले पुलिया बना दो, अन्यथा वो फिर समस्या पैदा होगी। पानी आएगा तो रास्ता रुक जाएगा। हमारी मानवीय भूलों के कारण जो अवरोध पैदा हुए हैं। उसमें किसी बदलाव की जरूरत पड़ती है। तो फिर उसे हम अपने विभाग की प्राथमिकता में शामिल करेंगे। पानी बचाने वाली जल सहेलियां निकाल रहीं 300 किमी की यात्रा बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संरक्षण पर काम करने वाली जल सहेलियों (महिलाओं के समूह) ने 2 फरवरी को ओरछा से यात्रा शुरू की है। जल सहेलियों की यह 18 दिवसीय यात्रा ओरछा के कंचना घाट से शुरू होकर छतरपुर के जटाशंकर धाम में पूरी होगी। इस यात्रा के दौरान जल सहेलियां गांव-गांव जाकर जल संरक्षण का संदेश देंगी और लोगों को जल प्रबंधन के महत्व को समझाएंगी।

जल प्रदाय योजना के लिए नर्मदा नदी के किनारे लम्हेटाघाट में इंटैकवैल स्थापित किया

जबलपुर मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा जबलपुर परियोजना इकाई के अतंर्गत 7 नगरीय निकायों में जल प्रदाय योजना का काम पूरा कर लिया गया है। यह कंपनी नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के अंतर्गत कार्य कर रही है। एशियन डेवपलमेंट बैंक की सहायता से नर्मदा पेयजल योजना तैयार की गई है। इस योजना को नर्मदा पेयजल योजना भेड़ाघाट के नाम से जाना जा रहा है। इस पेयजल योजना से जिन निकायों को पेयजल उपलब्ध हो रहा है, उनमें भेड़ाघाट, पाटन, कटंगी, मझौली, पनागर, सिहोरा और दमोह जिले का तेंदूखेड़ा शामिल हैं। जल प्रदाय योजना के लिए नर्मदा नदी के किनारे लम्हेटाघाट में इंटैकवैल स्थापित किया गया है। वहीं जल शोधन के लिए 31 एमएलडी का जल शोधन संयंत्र स्थापित किया गया है। सभी 7 निकायों में जल संग्रहण के लिए कुल 13 उच्च स्तरीय टंकियों का निर्माण किया गया है। हर घर नल से शुद्ध जल पहुँचे, इसके लिए 159 किलोमीटर की मुख्य पाईप लाईन और 328 किलोमीटर की वितरण पाईप लाईन बिछाई गई है। भेड़ाघाट जल प्रदाय योजना से 7 नगरों में 32 हजार से अधिक घरों को नल कनेक्शन दिए गए हैं। इन नगरों की 1 लाख 62 हजार की आबादी लाभन्वित हो रही है। योजना की विशेष बात यह है कि आगामी 30 वर्षों की जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रख कर योजना डिजाइन की गई है। दस वर्षों के संचालन और संधारण के साथ योजना की लागत लगभग 257 करोड़ रूपये है। पहले इन निकायों में जल प्रदाय की कोई स्थाई व्यवस्था नहीं थी। महिला हो या बच्चे पानी लेने के लिए घर से दूर जाकर कठिन कार्य करते थे। पूर्व में इन नगरों में हैंडपंप के आस-पास लंबी कतारें होती थीं और जनसामान्य तकलीफों का सामना करता था। मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी की कोशिशों से शोधन उपरांत शुद्ध पानी घर घर पहुँचाने की व्यवस्था की जा रही है। शोधित पानी होने के कारण जल से होने वाली बीमारियों से भी जनसामान्य को छुटकारा मिला है।

नीचे जहरीली गैस की पाइप लाइन से हो सकता है रिसाव, राजस्थान-जैसलमेर में रेगिस्तान फाड़कर निकला पानी

जैसलमेर। जैसलमेर में मोहनगढ़ नहरी क्षेत्र में शनिवार को ट्यूबवेल खुदाई के दौरान पानी का फव्वारा फूट गया। पानी करीब 50 घंटों तक लगातार उसी रफ्तार से बाहर निकलता रहा। किसी के समझ नहीं आया है कि आखिर ये कैसे हो रहा है? शनिवार सुबह पांच बजे धरती फाड़कर निकलना शुरू हुआ पानी सोमवार की सुबह सात बजे अपने आप बंद हो गया। इधर, उप तहसीलदार एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट ललित चारण ने बताया कि जैसलमेर के मोहनगढ़ उप तहसील के 27 बीडी के जोरा माइनर पर ट्यूबवेल खोदते समय जमीन से पानी निकलने की घटना हुई थी। इसके बाद पानी का रिसाव अपने आप बंद हो गया है। फिर रिसाव की आशंका हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस जगह किसी भी वक्त रिसाव फिर से शुरू हो सकता है। ऐसे में जमीन के नीचे जहरीली गैस का भी रिसाव हो सकता है। उन्होंने कहा कि जमीन धंसने और विस्फोट होने की संभावना बनी हुई है। इसलिए जिला कलेक्टर ने क्षेत्र में धारा 163 लगाई थी, जोकि अभी भी प्रभावी है। ग्रामीणों में खौफ बता दें कि एक किसान के खेत में ट्यूबवेल के लिए बोरिंग का काम चल रहा था। इस दौरान अचानक जमीन फट गई और पानी का तेज फव्वारा फूट पड़ा। ऐसे में मशीन और ट्रक जमीन में दफन हो गए। वहीं जमीन से भारी प्रेशर के साथ पानी निकलने लगा। यह मंजर देखकर ग्रामीण भी डर गए। आमजन के आवागमन पर अस्थाई रोक जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट प्रताप सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के अंतर्गत आदेश जारी कर मोहनगढ़ की सुथार मंडी के 27 बीड़ी क्षेत्र में पानी की अनियतंत्रित निकासी वाले बोरवेल के 500 मीटर परिधि को निषिद्ध क्षेत्र घोषित कर आम नागरिकों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया गया है। अतिरिक्त जिला कलेक्टर पवन कुमार ने बताया कि अनियंत्रित निकासी वाले बोरवेल का रविवार को केयर्न एनर्जी कंपनी के विशेषज्ञ अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया है।अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने बताया कि मोहनगढ़ विकास अधिकारी द्वारा भराव क्षेत्र से पानी निकासी के लिए प्रबंध किए जा रहे हैं। वहीं जोधपुर विद्युत वितरण निगम के द्वारा जलभराव क्षेत्र में आने वाली बिजली लाइनों की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।

खेड़ावदा ग्राम पंचायत ने गाँव को स्वच्छ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक अनूठी पहल शुरू की

उज्जैन मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील का खेड़ावदा गाँव आज पूरे जिले के लिए एक मिसाल बन चुका है। यहाँ की ग्राम पंचायत ने गाँव को स्वच्छ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक अनूठी पहल शुरू की हैं। स्वच्छता और साफ-सफाई के साथ अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को जोड़कर, खेड़ावदा को एक संपूर्ण ‘ओडीएफ प्लस’ मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किया गया है। उज्जैन जिले में 726 ओडीएफ प्लस मॉडल ग्राम है। ओडीएफ प्लस ग्राम की निरंतरता बनाए रखने हेतु ग्राम पंचायत में स्वच्छता के साथ अन्य घटकों को समाहित किया जा रहा है, जिससे एक स्वच्छ सुजल आत्मनिर्भर ग्राम निर्मित हो। गाँव में स्वच्छता का जन अभियान स्वच्छता को एक बार का काम मानने के बजाय, इसे ग्रामीणों की आदत में बदलने के लिए जन अभियान चलाया। इस अभियान के तहत, बच्चों की टोलियाँ और महिलाओं के समूह गाँव के घर-घर जाकर कचरे के पृथक्करण (सूखा और गीला) की प्रक्रिया को समझाते है। लोगों को समझाया कि सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग एकत्र करने से उनका निष्पादन आसानी से किया जा सकता है। स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था पंचायत ने मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए स्वच्छ पेयजल का महत्व समझते हुए आर.ओ. प्लांट और पेयजल टंकी की व्यवस्था की। गाँव का कोई भी व्यक्ति मात्र 6 रुपए देकर पूरे महीने स्वच्छ पानी ले सकता है। इससे न केवल गाँव के लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ बल्कि पंचायत के प्रति उनका विश्वास भी बढ़ा। शिक्षा में स्वच्छता का समावेश ग्राम के विद्यालयों में स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। शिक्षकों ने नियमित रूप से बच्चों को स्वच्छता के पाठ पढ़ाए, जिससे स्वच्छता का संदेश नई पीढ़ी में गहराई से उतरा। कचरा प्रबंधन और रोजगार ग्राम पंचायत ने बैंक से ऋण लेकर एक कचरा वाहन खरीदा और हर घर से कचरा एकत्रित करने की व्यवस्था की। एकत्रित कचरे को पृथक कर गीले कचरे से खाद तैयार की गई, जिसे गाँव के किसान कृषि के लिए इस्तेमाल करते हैं। सूखे कचरे को कबाड़ में बेचकर सफाईकर्मियों के मानदेय की व्यवस्था की गई। गाँव के हर घर में डस्टबिन रखने के लिए प्रेरित किया गया ताकि लोग कचरे को खुले में न फेंकें। स्वच्छता के ढाँचे का निर्माण ग्राम में सी.सी. रोड, सामुदायिक स्वच्छता परिसर और आर.सी.सी. नालियों का निर्माण किया गया, जिससे बारिश के पानी की निकासी आसानी से हो सके। नालियों के अंतिम सिरे पर सामुदायिक सोक पिट बनाए गए जिससे पानी जमा न हो और सड़कों पर न फैले। सुरक्षा और सुंदरता का समावेश गाँव में सुरक्षा के लिए सभी चौराहों और शासकीय कार्यालयों में सी.सी.टीवी कैमरे लगाए गए हैं। विद्यालयों में भी सी.सी.टीवी, आर.ओ. वॉटर, और बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालयों का निर्माण किया गया है। बच्चों को हाथ धुलाई और स्वच्छता की आदतों के प्रति जागरूक किया गया है। कला के माध्यम से स्वच्छता का संदेश गाँव में कचरे से कलात्मक वस्तुएँ बनाकर गाँव की सुंदरता को बढ़ाया गया। इससे गाँव में स्वच्छता के साथ कलात्मकता और सौंदर्य का भी समावेश हुआ, जो अन्य पंचायतों के लिए एक प्रेरणा बन चुका है। इंटरनेट में भी आत्मनिर्भर डिजिटल इंडिया की ओर कदम बढ़ाते हुए, ग्राम पंचायत खेड़ावदा को पूर्ण रूप से वाईफाई जोन बनाकर इन्टरनेट से कनेक्ट किया गया है एवं सभी चौराहों व शासकीय कार्यालयों पर सी.सी.टी.वी. केमरे लगाये गये है। खेड़ावदा आज एक आदर्श गाँव का प्रतीक है। यह कहानी बताती है कि कैसे एक गाँव अपने प्रयासों से स्वच्छ, सुजल और आत्मनिर्भर बन सकता है। खेड़ावदा की यह पहल अन्य गाँवों के लिए एक मॉडल है और इसका ग्राम पंचायतों द्वारा भी अनुकरण किया जा रहा है।  

उज्जैन में आज नलों में पानी नहीं आएगा, जाने क्या है कारण

उज्जैन मध्य प्रदेश के उज्जैन में 3 नवंबर की दोपहर को चौंकाने वाली बड़ी घटना घटी. यहां शहर की प्यास बुझाने वाले गंभीर डैम में अचानक पानी की सप्लाई रुक गई. अधिकारियों ने जब गंभीर नदी के इंटक वेल पैनल रूम की जांच की तो पता चला कि उसमें एक सांप घुस गया था. इस सांप की वजह से सिस्टम में फॉल्ट हो गया था. इसे सुधारने का काम देर रात तक जारी रहा. इस वजह से उज्जैन शहर की टंकियां नहीं भर पाईं. यानी, 4 नवंबर को शहर में जल पानी की सप्लाई नहीं होगी. बता दें, उज्जैन जिला प्रशासन गंभीर नदी से पूरे शहर में पानी की सप्लाई करता है. 3 नवंबर को प्रशासनिक अधिकारियों को पता चला कि नदी के इंटक वेल में कुछ गड़बड़ी हो गई है. इसकी वजह से शहर की टंकियों में पानी नहीं आ रहा. इसका पता चलते ही एमपीईबी की टीम मौके पर पहुंची. यहां इंटक वेल में जाते ही कर्मचारियों के होश उड़ गए. उन्होंने देखा कि पैनल रूम में करीब 20-22 फीट लंबा-मोटा सांप बैठा है. हालांकि, सांप की मौत हो चुकी थी. उन्होंने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. टीन ने सांप का शव जब्त कर लिया. आज शहर को होगी परेशानी दूसरी ओर, एमपीईबी ने पैनल की जांच की तो पता चला कि सांप की वजह से सप्लाई लाइनें डिस्टर्ब हो गई थीं. इस वजह से उसमें फॉल्ट हो गया था. एमपीईबी की ग्रिड सहित इंटेक वेल के कंट्रोल पैनलों और ट्रांसफार्मर में जर्क आ गया था. इस वजह से पानी की सप्लाई नहीं हुई. एमपीईबी के कर्मचारी अब इसे ठीक कर रहे हैं. इसके ठीक होने के बाद ही पानी की सप्लाई शुरू होगी. चूंकि, इस फॉल्ट की वजह से शहर की टंकियां नहीं भर सकी हैं. इसलिए 4 नवंबर को पानी की सप्लाई नहीं होगी.

प्रदेश के नगरीय निकायों में भू-जल संरक्षण और प्रबंधन के लिये 33 नगरीय निकायों में भू-जल प्लान तैयार किया

भोपाल प्रदेश के नगरीय निकायों में भू-जल संरक्षण और प्रबंधन के लिये 33 नगरीय निकायों में भू-जल प्लान तैयार किया जा रहा है। प्रदेश के 24 नगरीय निकाय ऐसे हैं, जिन्होंने भू-जल प्रबंधन प्लान तैयार भी कर लिया है। भू-जल प्रबंधन प्लान में क्षेत्र के जल स्त्रोतों की पहचान कर उनके वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण के उपाय किये जा रहे हैं। इनमें क्षेत्र के बोरवेल, बावड़ियां, नदी, तालाब, कुंऍ आदि शामिल हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास द्वारा अमृत योजना 2.0 के अंतर्गत पिछले दिनों आयोजित कार्यशाला में भू-जल विशेषज्ञों ने तैयार किये गये भू-जल प्रबंधन प्लान पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने कहा कि नगरीय निकायों को जन-भागीदारी से शहरी क्षेत्रों में पौध-रोपण पर विशेष ध्यान देना होगा। वृक्ष, जल-संरक्षण के उपाय में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। प्रदेश के 418 नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों ने भू-जल प्रबंधन प्लान तैयार करने पर गहन विचार-विमर्श किया।

बुरहानपुर में नगर के 6 जोन में नवीन जल प्रदाय परियोजना से जल प्रदाय जारी

बुरहानपुर नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा विश्व बैंक के सहयोग से बुरहानपुर में जलावर्द्धन परियोजना का कार्य किया जा रहा है जो कि पूर्णता की ओर है। नगरवासियों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए ताप्ती नदी पर इंटेक-वैल लगाया गया है। वहीं जल को शुद्ध करने के लिए 50 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र भी स्थापित किया गया है। शोधित जल उपलब्ध होने से जल-जनित बीमारियों का जोखिम भी कम रहेगा। जल के संग्रहण के लिए 8 ओवर हैड टेंक बनाए गए है साथ ही मौजूदा 4 ओवर टैंक का इस्तेमाल भी जल संग्रहण के लिए किया जायेगा। हर घर जल पहुँचाने के लिए 296 किलोमीटर की वितरण पाइप लाइन बिछाई बिछा दी गई है। नल कनेक्शन देने का कार्य भी प्रारंभ हो गया है। अब तक कुल 35 हजार से अधिक नल कनेक्शन दे दिए गए है। बुरहानपुर जलावर्धन योजना अंतर्गत जोन क्रमांक 5 शिवाजी नगर, जोन क्रमांक 6 मरीचिका गार्डन एवं जोन 10 इंदिरा कॉलोनी में जलावर्धन योजना द्वारा न्यू वॉटर सप्लाई सिस्टम से नई पाइपलाइन में प्रतिदिन पानी सप्लाई किया जा रहा है और नगर निगम द्वारा पुरानी जल प्रदाय व्यवस्था को पूरी तरीके से बंद कर दिया गया है। वहीं जोन क्रमांक 1 सुभाष स्कूल, ,जोन क्रमांक 2 किला व जोन क्रमांक 3 में भी जलावर्धन योजना अंतर्गत प्रतिदिन पानी सप्लाई किया जा रहा है एवं ओल्ड सिस्टम को बंद करने की प्रक्रिया भी जारी है। परियोजना में शेष 4 जोन जिनमें जोन क्रमांक 4 लालबाग, जोन क्रमांक 8Aट्रांसपोर्ट नगर ,जोन क्रमांक 8B सिंधीपुरा, जोन क्रमांक 9 आजाद नगर में भी लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र जल आवर्धन योजना अंतर्गत वाटर सप्लाई द्वारा कवर किया जा चुका है एवं शेष कमिश्निंग का कार्य प्रगतिरत है।  

सागर में एक ही गांव के 250 लोगों को उल्टी-दस्त, एक की मौत, 15 गंभीर

सागर सागर के झांसी-सागर रोड पर स्थित नरयावली विधानसभा क्षेत्र के मैहर ग्राम में दूषित पानी पीने से करीब 250 से अधिक लोगों की तबीयत बिगड़ गई। उनको उल्टी दस्त की शिकायत होने लगी। हालत बिगड़ने पर मरीजों को बीएमसी और आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मामले की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव भेजी गई है। टीम गुरुवार की देर रात तक गांव में मरीजों का उपचार करती रही। वहीं, पीएचई विभाग की टीम ने पानी के सैंपल लिए हैं, जो जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। इस मामले में क्षेत्रीय विधायक प्रदीप लारिया ने कलेक्टर से चर्चा की और इलाज के समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। कलेकटर दीपक आर्य मेहर ग्राम में पहुंचे और बीएमसी में मरीजों का हालचाल जाना। इसमें ललन बंसल नामक व्यक्ति की मौत की खबर भी सामने आई है। कलेक्टर पहुंचे ग्राम में और अस्पताल में देखा मरीजों को कलेक्टर दीपक आर्य नरयावली विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मैहर पहुंचे। जहां उन्होंने गत रात्रि उल्टी दस्त प्रभावित परिवारों से चर्चा की एवं आवश्यक अधिकारियों को निर्देश दिए। इस अवसर पर एसडीएम विजय डेहरिया, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ममता तिमोरे, पीएचई के अधिकारी हेमंत कश्यप सहित अन्य अधिकारी, डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टॉफ मौजूद था। नरयावली विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मेहर में हुए हैजा के प्रकोप से प्रभावित मरीजों को तत्काल और अच्छी स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त हो सके। इस हेतु नरयावली विधायक इंजीनियर प्रदीप लारिया ने उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल से चर्चा कर जांच हेतु एक विषेष टीम भेजने का अनुरोध किया। विधायक लारिया के अनुरोध पर उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ने शीघ्र विशेष टीम भेजने की सहमति प्रदान की। अस्थाई अस्पताल की गई तैयार ग्राम मेहर में उल्टी दस्त से प्रभावित व्यक्तियों का हर संभव इलाज किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा में स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ममता तिमोरे द्वारा कार्रवाई करते हुए ग्राम मेहर में अस्थाई अस्पताल तैयार की गई एवं डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती सुनिश्चित की गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि ग्राम मेहर में सेक्टर मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता राय ने ग्राम मेहर में उल्टी दस्त फैलने की सूचना दी गई। उसके बाद तत्काल ग्राम मेहर में कामवेट टीम को भेजा गया, जिसमें सीबीएमओ डॉ. विकेश फुसकेले, डॉ. अंकिता राय द्वारा ग्राम का भ्रमण किया गया एवं ट्यूबवेल का पानी दूषित होने से ग्राम वासियो में उल्टी दस्त की बीमारी होना पाया गया। 251 मरीजों का हुआ इलाज अब तक 251 उल्टी दस्त के मरीजों का इलाज किया गया। इसमें से 42 मरीजों को ग्राम मेहर के अस्थाई अस्पताल में ही आई फ्लूड लगाकर इलाज किया गया एवं 63 गंभीर मरीजों को इलाज हेतु जिला चिकित्सालय एव बीएमसी भेजा गया, जिसमें 42 मरीजों को जिला चिकित्सालय में 14 मरीजो को बीएमसी में एवं सात मरीज भाग्योदय अस्पताल में भर्ती है। डॉ. ममता तिमोरे सीएमएचओ ने बताया कि कामवेट टीम को उचित इलाज एवं बीमारी की रोकथाम हेतु निदेर्शित किया गया। उल्टी दस्त के मरीजों के इलाज हेतु कामवेट टीम जो कि अस्थाई अस्पताल में सीबीएमओ के निदेशन में मरीजों का इलाज निरंतर जारी है। दूषित ट्यूबवेल के पानी का उपयोग ग्रामवासियों को न करने की सलाह दी गई है। ग्रामवासियों को उबला पानी पीने की सलाह दी गई है एवं ग्राम में मरीजों के इलाज हेतु अस्थाई अस्पताल बनाई गई है। बीमारी की रोकथाम तक कामवेट टीम को गांव में ही चिकित्सा सेवा देने हेतु आदेशित किया गया है। आशा एवं एएनएम द्वारा बीमारी की रोकथाम हेतु ओआरएस पैकेट का वितरण किया जा रहा है। ग्राम मेहर की अस्थाई अस्पताल में डॉ. अंकिता राय SMO नरयावली, डॉ. तपस्या रानी कबीरपंथी AMO नरयावली, डॉ. भूपेन्द्र अहिरवार AMO SHC मेहर, डॉ. पायल CAMO अलग-अलग समय पर डॉक्टर उपलब्ध रहेंगे।

नर्मदा बेसिन योजना से तेंदूखेड़ा में 3400 कनेक्शन हो चुके है और सभी कनेक्शन में घर-घर पानी पहुंच रहा है

दमोह दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाक में हर साल गर्मी में भीषण जल संकट होता है, लेकिन इस साल शुरू हुई नर्मदा बेसिन परियोजना क्षेत्र के लिए वरदान साबित हुई। आलम यह रहा कि नगर परिषद के टैंकरों से पानी की सप्लाई नहीं करनी पड़ी। क्योंकि 90 प्रतिशत लोगों के घरों में पानी पहुंच रहा है। दूसरी सबसे बड़ी बात जहां-जहां लाइन में लीकेज था, वहां टंकियां बनवाई गई हैं, जिनमें पानी भरा होने से मवेशी भी अपनी प्यास बुझा रहे हैं। मार्च महीने में हुई शुरुआत बता दें कि मार्च के महीने में यह योजना शुरू हुई और इस साल अन्य वर्षों की तुलना में ज्यादा गर्मी हुई। इसके बाद भी नगर में पानी की कमी नहीं आई। पानी प्रत्येक घर में पर्याप्त मात्रा में पहुंचा है। इसलिए इस वर्ष नगर परिषद की टैंकर सुविधा ही चालू ही नहीं हुई। आखिर तेंदूखेड़ा पहुंच गया नर्मदा जल दमोह जिले का तेंदूखेड़ा पहला ब्लाक है, जहां मां नर्मदा का जल पहुंचा है। नर्मदा नदी को जीवन दायनी कहा जाता। है तेंदूखेड़ा में भी इसी तरह के जीवन दाई कार्य हुए हैं, क्योंकि नगर के साथ जंगली क्षेत्रों में भी इस योजना का अच्छा लाभ मिला है। निर्माण कंपनी द्वारा नर्मदा का पानी तेंदूखेड़ा लाने के लिए जंगल, पहाड़, चट्टानों से होकर पहुंचाया गया है। बीच बीच में इन्होने एक ऐसा प्रयास किया। जिसका लाभ बेजुबान जानवरों और राहगीरों को भी पर्याप्त मात्रा में मिला है। पाटन की टेक से लेकर नरगंवा गांव तक यह लाइन जंगली क्षेत्र से आई है जिसकी दूरी 15 किमी है। इस क्षेत्र में इस वर्ष से पहले कभी पानी नही था। गर्मियों के दिनों में यहां रहने वाले जानवर पानी के अभाव में दूसरी जगह भाग जाते थे, लेकिन इस वर्ष यह जानवर यहीं है। क्योंकि ठेकेदार ने जंगली क्षेत्र में दो से तीन जगह मामूली सा लीकेज होने पर उसके नीचे होदी बना दी है जिसमें पर्याप्त पानी रहता है जो जानवर और राहगीरों के लिए भीषण गर्मी में बरदान बना रहा। दिख रहे कई तरह के जानवर पाटन से नरगवा तक जगह-जगह पानी भरा होने से मवेशियों को भी इसका पूरा लाभ मिला है। इसलिए क्षेत्र में इस वर्ष कई तरह के जानवर दिखाई दिये, यहां तक की तेंदुआ ने भी पानी के कारण इसी मार्ग पर अपना रहवास बना लिया था। इसके अलावा नीलगाय, सियार और अन्य मवेशी यह प्रतिदिन सुबह शाम पानी पीते दिखाई देते है। जानवर, मवेशियों के अलावा जो राहगीर है, उनको भी यह योजना लाभदायक सिद्ध हुई है। जंगली क्षेत्र में आवागमन करने बाले राहगीर और चरवाहो को इस वर्ष पर्याप्त पानी भरा मिला है । नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि सतेन्द्र जैन का कहना है कि इस वर्ष नर्मदा का जल आने के बाद नगर में जल संकट की स्थिति नहीं बनी है। इसलिए टेंकर व्यवस्था पूरी तरह बंद रही। नर्मदा बेसिन योजना के प्रभारी अभिषेक पांडे ने बताया कि तेंदूखेड़ा नगर में 3400 कनेक्शन हो चुके है और सभी कनेक्शन में घर घर पानी पहुंच रहा है। जंगली क्षेत्र में जहां जहां लाइन थोड़ी बहुत लीकेज थी। वहां पर वन विभाग ने होदी बनवा दी थी। इसलिए वहां पर रहने बाले जानवर, मवेशियों और राहगीरों को आसानी से साफ सुथरा पानी मिल जाता है और 24 घंटे उनमें पर्याप्त पानी भरा रहता है।

लोकसभा चुनाव में मिलकर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने अब दिल्ली की आम आदमी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया

Cheetah Gamini was seen enjoying the rain with children in the pond, Union Minister shared the video

नई दिल्ली कल तक दिल्ली में साथ में मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के रास्ते हुए एक बार फिर अलग हो गए है. लोकसभा चुनाव में दोनों ही पार्टियों को दिल्ली में मिली करारी हार के बाद एक बार फिर एक दूसरे के खिलाफ हो गए हैं. आम आदमी पार्टी में इसका जवाब विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ने का फैसला करके किया तो वहीं कांग्रेस ने पानी की किल्लत पर आम आदमी पार्टी को को घेर कर यह साफ कर दिया कि अगला विधानसभा चुनाव कांग्रेस अकेले लड़ेगी. AAP के खिलाफ मटका फोड़ प्रदर्शन आज दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में कांग्रेस आम आदमी पार्टी के खिलाफ करेगी मटका फोड़ प्रदर्शन कर रही है. गौरतलब है कि दिल्ली में पिछले कई दिनों से गर्मी का पारा जिस तरीके से बढ़ रहा है उसने दिल्ली के कई इलाकों में पानी की किल्लत बढ़ा दी है. आलम यह है कि कई इलाकों टैंकर से पानी की सप्लाई हो रही है. लेकिन टैंकर टाइम पर ना आने के कारण लोग खासी परेशान है. पानी की कलर पर सरकार बीजेपी के निशाने पर तो थी ही लेकिन अब कांग्रेस के भी नेता आ गई है. कांग्रेस का यह प्रदर्शन सुबह 11:00 बजे शुरू होगा युसूफ सराय गोविंदपुरी और दिल्ली के लगभग 280 ब्लॉकों में कांग्रेस कार्यकर्ता आम आदमी पार्टी के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे. बीजेपी ने साधा कांग्रेस पर निशाना पानी की किल्लत को लेकर आप के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन का ऐलान करने के साथ ही बीजेपी ने कांग्रेस पर चुटकी ली. दिल्ली भाजपा मीडिया प्रमुख श्री प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है की कांग्रेस को आम आदमी पार्टी के विरूद्ध प्रदर्शन की घोषणा करते देख दिल्ली वालों को ऐसा लग रहा है मानों नौ सौ चूहे खा कर बिल्ली हज को चली. प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है की दिल्ली वाले हैरान हैं की जो कांग्रेस अभी दस दिन पहले आम आदमी पार्टी से जय एवं वीरू जैसी दोस्ती का दम भर रही थी आज उसे उसी आम आदमी पार्टी में भ्रष्टाचार नज़र आ रहा है. बीजेपी ने कहा है की कांग्रेस नेता अब जितना मर्जी आम आदमी पार्टी के विरोध का नाटक कर लें पर अब दिल्ली एवं देश की जनता जिस तरह “आप” के भ्रष्टाचार के पापों को माफ नही करेगी उसी तरह कांग्रेस नेताओं की मौकापरस्ती को भी माफ नही करेगी.  

दिल्ली में पानी की भारी कमी और गर्म होती सियासत, विजिलेंस विभाग ने मांग लिया दिल्ली जल बोर्ड से हिसाब

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में इस समय पानी पर संग्राम मचा हुआ है। इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार हरियाणा पर आरोप लगा रही है। इस बीच विजिलेंस विभाग ने दिल्ली जल बोर्ड से टैंकरों का हिसाब मांग लिया है। विजिलेंस डिपार्टमेंट ने जल बोर्ड से पूछा कि आपने बीते 5 सालों में कितने टैंकर हायर किए हैं। दिल्ली में पानी की किल्लत के बीच यह भी आरोप लग रहे हैं कि प्राइवेट कंपनियां बड़ी संख्या में लोगों को प्रीमियम दाम पर पानी के टैंकर उपलब्ध करा रही हैं। पत्र में कई बातों का जिक्र विशेष सचिव (सतर्कता) वाई. वी. वी. जे. राजशेखर ने दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भेजे गए एक पत्र में कई चीजों का जिक्र किया है। उनके पत्र में टैंकर प्रणाली के कामकाज के बारे में कई विवरण दिए गए हैं। उदाहरण के तौर पर अपने मालिकों के साथ कंपनियों का डिटेल, उन्हें कितने दिनों के लिए तैनात किया गया, वो स्रोत जहां टैंकर भरे गए आदि। जांच विभाग ने डीजेबी को ये जानकारी भी देने के लिए कहा है: ➤पिछले 5 सालों में हर साल कितने दिन के लिए टैंकर किराए पर लिए गए? ➤हर साल दिल्ली जल बोर्ड को कितने टैंकर उपलब्ध कराए गए? ➤हर टैंकर मालिक ने डीजेबी को कितना पानी पहुंचाया? ➤हर टैंकर मालिक ने किराए के कितने पैसे मांगे? जांच अधिकारी ने चिट्ठी में लिखा है कि 14 जून तक और ज्यादा से ज्यादा 17 जून तक यह जानकारी दिल्ली जल बोर्ड की ओर से उपलब्ध कराई जानी चाहिए, साथ ही टैंकर मालिकों से किए गए करार की कॉपी भी जमा करनी होगी। दिल्ली सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में DJB ने सिर्फ 888 पानी के टैंकर इस्तेमाल किए थे, जो जून में बढ़कर 1211 हो गए। सूत्रों का कहना है कि जांच विभाग द्वारा मांगी गई जानकारी से पानी के टैंकरों के कारोबार और कथित पानी माफिया के अवैध रूप से निकाले गए पानी को बेचने के मामले को समझने में मदद मिलेगी। इस बीच, दिल्ली की जल मंत्री आतिशी ने दावा किया कि दिल्ली में पानी की कमी का प्राथमिक कारण हरियाणा से अपर्याप्त आपूर्ति है और अगर टैंकर माफिया को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाता है, तो पानी की आपूर्ति में वृद्धि नगण्य होगी और इससे संकट का समाधान नहीं होगा।

दिल्ली जल संकट का क्या है हल! SC ने राज्यों के बीच पानी के बंटवारे पर आदेश देने से किया इनकार

नई दिल्ली पड़ोसी राज्यों से ज्यादा पानी दिलाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची दिल्ली सरकार को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपनी तरफ से आदेश से इनकार करते हुए फैसला अपर यमुना रिवर बोर्ड  पर छोड़ दिया है। कोर्ट ने कहा कि राज्यों के बीच पानी बंटवारे का मुद्दा जटिल है। इस बीच हिमाचल प्रदेश भी अतिरिक्त पानी भेजने के अपने पहले के बयान से मुकर गया है और उसने कहा है कि उसके पास अतिरिक्त पानी नहीं है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने कहा कि यमुना में पानी का बंटवारा राज्यों के बीच एक जटिल विषय है और इस कोर्ट के पास इसकी तकनीकी विशेषज्ञता नहीं है। अदालत ने कहा कि यह मुद्दा UYRB पर छोड़ देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने UYRB को शुक्रवार को सभी पक्षों की बैठक बुलाने और जल्दी से इस मुद्दे पर फैसला लेने को कहा। सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह मानवीय आधार पर विचार के लिए शाम 5 बजे तक बोर्ड के सामने आवेदन दे। हिमाचल ने वापस लिया बयान, अब कहा- ज्यादा पानी नहीं दिल्ली के लिए अतिरिक्त 136 क्यूसेक पानी देने का वादा करने वाली हिमाचल सरकार भी अपने रुख से पलट गई है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हिमाचल प्रदेश ने अपना पुराना बयान वापस ले लिया और कहा कि उसके पास अतिरिक्त 136 क्यूसेक पानी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार की ओर से दाखिल उस याचिका पर सुनवाई चल रही थी जिसमें यह मांग की गई थी कि हरियाणा को हिमाचल की ओर से छोड़े जाने वाले अतिरिक्त पानी को दिल्ली तक निर्बाध रूप से जाने देने को कहा जाए। भीषण गर्मी के बीच दिल्ली में लोगों को भारी जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली सरकार का आरोप है कि हरियाणा की ओर से यमुना में कम पानी छोड़ा जा रहा है जिसकी वजह से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स की क्षमता कम हो गई है।  

भिंड में दूषित पानी पीने से तीन की मौत, 70 से अधिक लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत, अस्पतालों में भर्ती

भिंड  मध्यप्रदेश के भिंड में बड़ी खबर है। फूप कस्बे के तीन वार्डों में बदबूदार दूषित पानी पीने से उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। तीन दिन में 80 से ज्यादा मरीज मिल गए हैं। हर दूसरे घर में कोई न कोई बीमार है। वार्ड 5, 6 ‎और 7 में 3 दिन ‎में 2 बुजुर्गों और 1 लड़की की मौत हो चुकी है। परिजन का कहना ‎है कि दूषित पानी पीने के बाद ‎उल्टी-दस्त हुए और मौत हो‎ गई। हालांकि अधिकारी और डॉक्टर बुजुर्गों की मौत का‎ कारण पुरानी बीमारी को ‎बता रहे हैं।‎ जानें क्या कह रहे लोग स्थानीय लोगों का कहना है कि पुरानी पाइपलाइन से पानी आ रहा है। जो देखने में साफ है, लेकिन पीते समय बदबू ‎आती है। वार्ड 5, 6 और 7 में पानी की सप्लाई चालू करने‎ और बंद करने के लिए पाइपलाइन का वॉल्व नाले के पास ‎मौजूद है। हर समय नाले का गंदा पानी भरा ‎रहता है। लोगों का कहना है कि इसी नाले का पानी‎ पाइप लाइन से हमारे घरों में पहुंच रहा है। घरों में नलों की सप्लाई आने वाले पानी का सेवन किया और लोग बीमार हो गए। 9 मरीजों को ग्वालियर किया रेफर मंगलवार शाम 6.30 बजे से रात 8.30 बजे के ‎बीच 2 घंटे में 9 एंबुलेंस ‎बुलवाकर 9 मरीजों को ग्वालियर रेफर कराना पड़ा है। अब तक कुल 20 मरीजों को ग्वालियर रेफर करने की बात सामने आई है। मुरैना और ग्वालियर से 6‎ एंबुलेंस और बुलाकर भिंड जिला अस्पताल में खड़ा कराया है। 3 एंबुलेंस को फूप में भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। इनकी हुई मौत जानकारी के मुताबिक, वार्ड 6 निवासी बैजनाथ चौधरी (80) की मौत ‎मंगलवार को हुई। मंगलवार को बैजनाथ की तबीयत खराब होने‎ पर कस्बे के शासकीय अस्पताल लेकर‎ पहुंचे। डॉक्टर ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिवार सीधे ‎ग्वालियर लेकर जाने लगे। रास्ते में मौत हो गई। ‎वार्ड 7 में मुस्कान (17) की ‎‎मौत रविवार को हुई। मुस्कान नानी ‎‎शकीला के पास रहती थी। रविवार को उल्टियां होने पर मुस्कान को ‎‎जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसने ‎दम तोड़ दिया।  वार्ड 6 के ‎आशाराम श्रीवास (75) की मौत 9 जून ‎को हुई थी। दूषित पानी पीने से पेट में फैला इंफेक्शन बीएमओ डॉ सिद्धार्थ सिंह चौहान का कहना है कि वार्ड क्रमांक छह और सात से हमारे पास काफी ज्यादा उल्टी और दस्त के मरीज आए हैं। दूषित पानी पीने से लोग बीमार हुए हैं। हमने मरीजों को जरूरी दवाइयां दे दी हैं। बीमारी मुख्य वजह दूषित पानी है। जिसके सेवक के कारण पेट में इंफेक्शन फैला और लोग बीमार हुए हैं। हमारे यहां कोई कैजुअल्टी नहीं हुई है। दो मरीजों को हमने जिला अस्पताल लेकर किया था।  उनमें से एक बैजनाथ जी जिनकी जो काफी बुजुर्ग थे। उन्हें पहले से किडनी की बीमारी थी। उनकी मौत की सूचना मिली है। जांच के लिए भेजे गए सैंपल अधिकारियों का कहना है कि तीनों वार्ड से पानी के सैंपल जांच के ‎लिए भेजे गए हैं, अब जांच रिपोर्ट ‎आने के बाद आगे की कार्रवाई की‎ जाएगी। कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव का कहना है कि फूप में हालात पर काबू पा लिया गया है। एक मरीज की मौत हुई है, जो दूसरी बीमारी से पीड़ित थे। फूप बीएमओ सिद्धार्थ चौहान का कहना है कि दूषित पानी के कारण यह समस्या बनी है। मृतक बैजनाथ चौधरी ट्यूबरक्लोसिस‎ और किडनी समस्या से पीड़ित थे। पुरानी बीमारी के ‎चलते मौत हुई है। 

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