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किसानों के लिए राहत की खबर: गेहूं MSP 2585 रुपये, आष्टा मंडी में नीलामी शुरू

आष्टा केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 160 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए इसे 2585 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। बीते साल यह मूल्य 2425 रुपये था। एमएसपी की घोषणा के बाद प्रदेश सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। किसान अब खरीदी की तारीख की प्रतीक्षा कर रहे हैं।  पंजीयन की जानकारी समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसान 7 फरवरी से 7 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। नई व्यवस्था के तहत किसान ऑनलाइन नि:शुल्क पंजीयन कर सकते हैं। वहीं कियोस्क या अन्य ऑनलाइन केंद्रों से पंजीयन कराने पर 50 रुपये शुल्क देना होगा। पंजीयन के लिए आधार कार्ड, भू-अभिलेख, ऋण पुस्तिका और आधार से लिंक बैंक खाता अनिवार्य है। किसान एप और ई-उपार्जन पोर्टल पर घर बैठे पंजीयन की सुविधा भी उपलब्ध है। मौसम और उत्पादन की उम्मीद इस रबी सीजन में मौसम अब तक किसानों के अनुकूल रहा है। पर्याप्त ठंड और नमी की वजह से फसल अच्छी स्थिति में है। लोकवन, तेजस, 1544 और 322 जैसी उन्नत किस्मों की बोवनी बड़े पैमाने पर की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौसम इसी तरह बना रहा, तो इस बार गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है, जिससे खरीदी व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ेगा। MSP का पिछले वर्षों का सफर पिछले वर्षों पर नजर डालें तो वर्ष 2024 में गेहूं का MSP 2300 रुपये था। उस पर मध्य प्रदेश सरकार ने 125 रुपये बोनस जोड़कर 2425 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदी की थी। वर्ष 2025 में केंद्र ने MSP 2425 रुपये तय किया, जबकि राज्य सरकार ने 175 रुपये बोनस जोड़कर 2600 रुपये प्रति क्विंटल किसानों को भुगतान किया। अब 2026-27 के लिए MSP 2585 रुपये घोषित किया गया है। चुनावी वादा और किसानों की उम्मीद किसान राधेश्याम राय और कैलाश विश्वकर्मा का कहना है कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में किसानों से 2700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदी का वादा किया था। बीते वर्ष बोनस देकर सरकार इस आंकड़े के करीब जरूर पहुंची, लेकिन वादा अधूरा रहा। इस बार MSP 2585 रुपये होने के बाद किसानों को उम्मीद है कि यदि राज्य सरकार 115 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देती है, तो भाजपा अपना चुनावी वचन पूरा कर सकती है। बोनस पर टिकी निगाहें प्रदेश में भाजपा की सरकार होने की वजह से किसानों की नजरें पूरी तरह राज्य सरकार के फैसले पर हैं। पिछले वर्ष बोनस ने किसानों को बड़ी राहत दी थी। इस बार भी किसान आशा लगाए बैठे हैं कि सरकार उनकी लागत, मेहनत और भरोसे की कद्र करेगी। अब देखना है कि आने वाले दिनों में सरकार उनकी उम्मीदों को हकीकत में बदलती है या 2700 रुपये का वादा फिर इंतजार में रह जाएगा। आष्टा मंडी में रबी सीजन की नीलामी शुरू सीहोर जिले की आष्टा कृषि उपज मंडी में मंगलवार से नए रबी सीजन की गेहूं की आवक और नीलामी का औपचारिक शुभारंभ हो गया। मंडी परिसर में सुबह से ही किसानों की चहल-पहल और व्यापारियों की सक्रियता ने नए सीजन की शुरुआत खास बना दी। पहली नीलामी से उत्साह सीजन की पहली नीलामी में इछावर तहसील के ग्राम डाबला राय निवासी किसान राजाराम ने चार क्विंटल गेहूं मंडी में लाया। उसकी उपज को सात्विक एग्रो फूड इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड ने 2381 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा। पहले दिन मिले भाव ने न सिर्फ राजाराम का हौसला बढ़ाया, बल्कि मंडी पहुंचे अन्य किसानों में भी उत्साह भर दिया। एक दिन में 9904 क्विंटल आवक मंडी सचिव नरेंद्र कुमार मेश्राम ने बताया कि 3 फरवरी 2026 को आष्टा मंडी में कुल 9904 क्विंटल गेहूं की आवक दर्ज की गई। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में आवक और बढ़ सकती है क्योंकि आसपास के क्षेत्रों में फसल की कटाई जोरों पर है। उन्नत किस्मों को बेहतर भाव मंडी में गेहूं की अलग-अलग किस्मों को गुणवत्ता के अनुसार अच्छा भाव मिला। ‘गेहूं सुजाता 3006’ किस्म का उच्चतम भाव 3440 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। वहीं लोकवन किस्म 2602 रुपये से 2834 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिकी। अच्छी क्वालिटी वाले गेहूं की मांग ने मंडी में प्रतिस्पर्धा का माहौल बना दिया। शरबती गेहूं की साख आष्टा मंडी शरबती और उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं के लिए प्रसिद्ध है। यहां की फसल देश के कई हिस्सों में पसंद की जाती है। व्यापारियों का कहना है कि मंडी में आने वाले गेहूं की गुणवत्ता लगातार बेहतर हो रही है, जिससे बाहर के खरीदार ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं और किसानों को बेहतर भाव मिलने की संभावना मजबूत हुई है। पड़ोसी जिलों के किसानों का भरोसेमंद केंद्र सीहोर जिले की आष्टा और भैरूंदा मंडी बड़े व्यापारिक केंद्र मानी जाती हैं। यहां की साख ऐसी है कि हरदा, देवास और राजगढ़ जैसे जिलों के किसान भी अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं। मंडी से खरीदा गया गेहूं महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्यों में भेजा जाता है। बेहतर भाव और पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के कारण किसान बड़ी संख्या में आष्टा मंडी का रुख कर रहे हैं।  

मध्यप्रदेश गेहूं उपार्जन में देश में दूसरे स्थान पर खाद्य मंत्री राजपूत ने दी बधाई

भोपाल प्रदेश में इस वर्ष गेहूं उपार्जन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश अब पूरे देश में गेहूं उपार्जन में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। यह जानकारी खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने प्रभार के जिले गुना में जिला अधिकारियों की समीक्षा बैठक के दौरान दी। मंत्री राजपूत ने बताया कि इस वर्ष गेहूं उपार्जन में 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में एक बड़ी छलांग है। उन्होंने इसे किसानों के प्रति राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता और सुनियोजित नीति का परिणाम बताया। मंत्री राजपूत ने कहा कि हमारे प्रयासों का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी एवं सुविधाजनक बनाना है। उन्होंने 60 प्रतिशत से अधिक गेहूं उपार्जन पर उपार्जन से जुड़े विभाग के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का आभार जताया। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गौरतलब है कि राज्य सरकार की सक्रिय भूमिका, समय पर समर्थन मूल्य की घोषणा तथा सुचारू परिवहन और भंडारण व्यवस्था ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है। ”मोबाइल कोर्ट” से न्याय हो रहा सुलभ बैठक में  बताया गया कि ”मोबाइल कोर्ट” के माध्यम से जमीनी विवाद, अतिक्रमण और सीमांकन जैसे पुराने लंबित प्रकरणों के त्वरित निपटारे किए जा रहे हैं। इस दौरान दोनों पक्षों की सहमति से मौके पर ही समाधान किया जा रहा है, जिससे जनता को न्याय सुलभ हो रहा है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को किया सम्मानित मंत्री राजपूत ने जल-गंगा संवर्धन अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया। डिप्टी कलेक्टर एवं प्रभारी सीएमओ सुमंजूषा खत्री, एसडीओ पीएचई टीएल मेहरा एवं उपयंत्री जनपद पंचायत आरोन चंदन शुक्ला को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। साथ ही राज्य स्तरीय मेरिट सूची में स्थान पाने वाले छात्र शैलेन्द्र धाकड़, कु. पूर्णिमा अडा़वकर एवं राष्ट्रीय ओलंपियाड प्रतियोगिता में चयनित नमन लोधी को भी सम्मानित किया गया।  बैठक में कलेक्टर किशोर कन्याल ने बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराए गए श्रमिकों की जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की भी जानकारी दी।  

MP में गेहूं खरीद को लेकर बड़ा अपडेट, इन किसानों को 9 मई तक मिलेगा फसल बेचने का मौका, अब तक 76 लाख मीट्रिक टन गेहूं

भोपाल  मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद का आंकड़ा 85 लाख मीट्रिक टन (एमटी) रहने का अनुमान है। यह सरकार की ओर से निर्धारित किए गए खरीद के लक्ष्य 80 लाख एमटी से अधिक है। सरकार ने मंगलवार को बताया कि करीब 8.76 लाख पंजीकृत किसानों से 76 लाख एमटी गेहूं की खरीद की जा चुकी है। खरीद प्रक्रिया जिसमें केवल पंजीकृत किसानों से ही तौल करना शामिल है, अतिरिक्त पांच दिनों तक जारी रहेगी। राज्य ने 15 मार्च को गेहूं खरीद अभियान शुरू किया था और अपने 4,000 निर्धारित खरीद केंद्रों पर 2,600 रुपए प्रति क्विंटल की कीमत की पेशकश की थी। पिछले साल मध्य प्रदेश में 5.85 लाख किसानों से 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था। जल्द ही अपडेटेड आंकड़े आने की उम्मीद है, मंगलवार तक खरीद 81 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुकी है। सरकार को अब इस सीजन में कुल 85 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद होने की उम्मीद है। घर बैठे करा सकते हैं नामांकन इसके अलावा सरकार ने घोषणा की कि अब तक किसानों को उनकी उपज के भुगतान के लिए 16,472 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके हैं। कार्यों को सुव्यवस्थित करने के लिए राज्य सरकार ने एसएमएस के माध्यम से किसानों को पंजीकृत किया और एक समर्पित वेब या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर से नामांकन करने का विकल्प प्रदान किया। किसान ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और तहसील कार्यालयों में स्थित सुविधा केंद्रों पर भी पंजीकरण करा सकते हैं। 175 रुपए का मिलेगा बोनस केंद्र सरकार ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को भी संशोधित किया है, इसे 2025-26 के रबी मार्केटिंग सीजन के लिए 150 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर 2,425 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है। हालांकि, मध्य प्रदेश 2,600 रुपए प्रति क्विंटल का खरीद मूल्य प्रदान करेगा, जिसमें 175 रुपए प्रति क्विंटल की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी शामिल है। मध्य प्रदेश में सीहोर, उज्जैन, नर्मदापुरम, हरदा, रायसेन और देवास जिलों में मालवा पठार के कम वर्षा वाले क्षेत्र में शरबती और डरम जैसी कुछ कम सिंचित उच्च उपज वाली किस्में उगाई जाती हैं। इन सभी किस्मों में से शरबती सबसे पसंदीदा किस्म है क्योंकि इसमें उच्च प्रोटीन होता है।  किसानों को 9 मई तक मिलेगा फसल बेचने का मौका मध्‍य प्रदेश में गेहूं की एमएसपी पर सरकारी खरीद की प्रक्रिया 5 मई को खत्‍म हो गई, लेकिन सरकार ने अभी भी कई किसानों को 9 मई तक गेहूं बेचने का मौका दिया है. ऐसे में जानिए आखिर पूरा मामला क्‍या है और कौन-से किसान फसल बेचने के लिए पात्र हैं… दरअसल, ऐसे किसान जिन्‍होंने स्‍लॉट तो बुक किए थे, लेकिन उनकी वैलिड‍िटी खत्‍म हो गई है, उन्‍हें 9 मई तक अपनी फसल बेचने का मौका दिया गया है. इसके लिए अफसरों को डीएसओ लॉगिन के जरिए स्‍लॉट की अवधि‍ बढ़ाने के लिए कहा गया है. इसे लेकर खाद्य विभाग ने अफसरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. गेहूं की सबसे ज्‍यादा सरकारी कीमत MP में वहीं, सरकार ने 5 मई तक खरीद के लिए 30 अप्रैल तक स्‍लॉट बुक करने की मोहलत दी थी, लेकिन खरीद के अंतिम दिन भी किसानों को ऑफलाइन स्‍लॉट बुक करने का ऑप्‍शन दिया गया और वे फसल बेच सके. मालूम हो कि प्रदेश में गेहूं खरीद की प्रक्रिया 15 मार्च से 5 मई तक चली. इस दौरान किसानों को 2425 रुपये प्रत‍ि क्विंटल एमएसपी और 175 रुपये प्रत‍ि क्विंटल बोनस का भुगतान किया गया यानी 2600 रुपये प्रति क्विंटल. हालांकि, उपज में नमी और क्‍वालिटी के चलते कीमत में अंतर आना सामान्‍य है. प्रदेश में हुआ गेहूं का बंपर उत्‍पादन मध्‍य प्रदेश में इस साल ग‍ेहूं की अच्‍छी फसल हुई है, जिसके चलते मंडियों में नई फसल की बंपर आवक दर्ज की गई. राज्‍य के सीएम मोहन यादव ने दावा किया कि प्रदेश में किसानों को गेहूं की जितनी कीमत मिल रही है, वह सभी राज्‍यों के मुकाबले सबसे ज्‍यादा है. व्‍यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि एमएसपी और बोनस मिलने के कारण किसानों ने निजी व्‍यापारियों की जगह सरकारी एजेंसियाे को गेहूं बेचना पसंद किया. बीते हफ्ते ही केंद्र ने मध्‍य प्रदेश का गेहूं खरीद लक्ष्‍य मिल‍ियन टन बढ़ा दिया था. 312 LMT है खरीद का अनुमानित लक्ष्‍य वहीं, देश के अन्‍य राज्‍यों में भी केंद्रीय पूल के तहत गेहूं की खरीद चल रही है. पिछले महीने केंद्र सरकार ने सभी प्रमुख राज्‍यों में गेहूं खरीद को लेकर आंकड़े जारी किए थे. इसमें 30 अप्रैल 2025 तक रबी मार्केटिंग सीजन यानी आरएमएस 2025-26 के दौरान गेहूं की खरीद के लिए तय 312 लाख मीट्रिक टन के अनुमानित लक्ष्य की तुलना में केंद्रीय पूल में 256.31 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है. इस साल 30 अप्रैल तक खरीदे गए गेहूं की मात्रा पिछले साल की इसी तारीख को हुई कुल खरीद 205.41 लाख मीट्रिक टन से 24.78 प्र‍तिशत ज्‍यादा है. प्रमुख गेहूं उत्‍पादक राज्‍यों पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्‍यादा खरीद हुई है.

MP के किसान 5 मई तक गेहूं उपार्जन बेच सकते ,अबतक 67.92 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ खरीदी

भोपाल मध्य प्रदेश के किसानों के लिए काम की खबर है। गेहूँ के उपार्जन की लास्ट डेट 5 मई है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रदेश में अभी तक 7 लाख 81 हजार 389 किसानों से 67 लाख 92 हजार 890 मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया जा चुका है और इसके लिए लगभग 6000 करोड़ रूपये से अधिक का भुगतान किया गया है। गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये है और राज्य सरकार द्वारा 175 रूपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। इस तरह से गेहूँ की खरीदी 2600 रूपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। इस साल प्रदेश में लगभग 80 लाख टन गेहूं उपार्जन अनुमानित है। मध्य प्रदेश के इंदौर, उज्जैन, भोपाल, नर्मदापुरम समेत सभी संभागों में गेहूं की खरीदी जारी है जो 5 मई तक चलेगी। इस बार 2600 (न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 +175 बोनस) रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जाएगा।बता दे कि मालवा निमाड़ में इंदौर, उज्जैन संभाग के कई किसान गेहूं का उत्पादन करते हैं, लेकिन देशभर में सबसे ज्यादा सीहोर का शरबती गेहूं मशहूर है। 7. 81 लाख किसानों से 67.92 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ का उपार्जन     प्रदेश में अभी तक जिला उज्जैन में 6 लाख 48 हजार 993, सीहोर में 6 लाख 25 हजार 718, विदिशा में 5 लाख 38 हजार 284, रायसेन में 5 लाख 25 हजार 172, शाजापुर में 3 लाख 55 हजार 439, राजगढ़ में 3 लाख 52 हजार 734, नर्मदापुरम में 3 लाख 42 हजार 513, भोपाल में 3 लाख 23 हजार 273।     देवास में 2 लाख 82 हजार 360, सागर में 2 लाख 70 हजार 225, इंदौर में 2 लाख 46 हजार 432, सिवनी में 2 लाख 2 हजार 890, आगर-मालवा में एक लाख 81 हजार 129, मंदसौर में एक लाख 65 हजार 210, सतना में एक लाख 36 हजार 217, हरदा में एक लाख 26 हजार 653।     धार में एक लाख 22 हजार 249, दमोह में एक लाख 10 हजार 321, रतलाम में एक लाख 2 हजार 67, नरसिंहपुर में 98 हजार 584, जबलपुर में 79 हजार 308, कटनी में 77 हजार 40, श्योपुर में 77 हजार 30, दतिया में 70 हजार 768, शिवपुरी में 64 हजार 782, रीवा में 61 हजार 349।     ग्वालियर में 57 हजार 292, छतरपुर में 55 हजार 910, अशोकनगर में 49 हजार 421, पन्ना में 46 हजार 82, गुना में 45 हजार 560, मण्डला में 44 हजार 484, भिण्ड में 42 हजार 476, खण्डवा में 42 हजार 194, मैहर में 35 हजार 32, नीमच में 34 हजार 503, मुरैना में 28 हजार 967।     बैतूल में 23 हजार 868, झाबुआ में 23 हजार 863, छिंदवाड़ा में 22 हजार 869, टीकमगढ़ में 16 हजार 975, शहडोल में 6 हजार 338, सिंगरौली में 6 हजार 239, उमरिया में 5 हजार 403, सीधी में 4 हजार 171।     मऊगंज में 3 हजार 619, डिण्डोरी में 2 हजार 941, खरगौन में 2 हजार 914, निवाड़ी में 2 हजार 754, बालाघाट में 1 हजार 121, अनूपपुर में 832, अलीराजपुर में 245 और पांढुर्णा में 77 मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया जा चुका है।

मध्यप्रदेश में गेहूं की MSP पर खरीदी जारी, सीहोर ने नया रिकॉर्ड बनाया, अभी तक 5 लाख 29 हजार 482 टन की हुई खरीदी

 सीहोर   समर्थन मूल्य केंद्रों पर इस साल किसानों की गेहूं बेचने की होड़ लगी हुई है। एक माह की खरीदी में ही इस बार सीहोर ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। पिछले साल पूरे सीजन में 5 लाख 6 हजार 40 टन गेहूं खरीदा गया था। इस बार सिर्फ एक महीने में 5 लाख 29 हजार 482 टन की खरीदी हो चुकी है। इस तरह सीहोर प्रदेश में सबसे आगे निकल गया है, जबकि उज्जैन 4 लाख 68 हजार टन के साथ दूसरे नंबर पर है। इस सीजन में किसान बड़ी संख्या में समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने आ रहे हैं। इस बार मौसम अनुकूल रहा। फसल की बुवाई से लेकर कटाई तक बारिश ने साथ दिया। कटाई के समय मौसम साफ रहा। इससे फसल की निकासी में कोई रुकावट नहीं आई। किसानों को उपज का भुगतान भी 3 से 7 दिन में मिल रहा है। साथ ही 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी मिल रहा है। इसके अलावा खुले बाजार और मंडी में गेहूं के दाम कम है। इसके कारण किसान अपनी उपज समर्थन मूल्य केंद्रों पर ले जा रहे हैं। समर्थन केंद्रों पर किसानों की उपज बेचने भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। जिले में 820 करोड़ रुपये का हो चुका भुगतान इस सीजन में 15 मार्च से खरीदी शुरू हुई थी। 15 अप्रैल तक 5 लाख 29 हजार टन गेहूं खरीदा जा चुका है। पिछले साल खरीदी 20 मार्च से शुरू होकर 31 मई तक चली थी। इस बार 5 मई तक ही खरीदी होनी है। यानी कुल 51 दिन का समय मिलेगा। इसके बावजूद अगले 20 दिन में 1.25 लाख से 1.50 लाख टन गेहूं और खरीदे जाने की उम्मीद है। अब तक जिले में 4 लाख 22 हजार टन गेहूं की खरीदी हो चुकी है। किसानों को 820 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। पूरे सीजन में अब तक 1376 करोड़ की खरीदी हो चुकी है। इसमें से 1203 करोड़ के ईपीओ जनरेट हो चुके हैं। किसानों के खातों में 1192 करोड़ रुपये पहुंच चुके हैं। 61 हजार 296 किसान बेच चुके अपनी उपज इस बार 88 हजार 292 किसानों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 61 हजार 296 किसान अब तक अपनी उपज बेच चुके हैं। जिले में 240 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं। शुरुआत में ही 140 केंद्रों पर खरीदी शुरू कर दी गई थी। पिछले साल की तुलना में इस बार खरीदी 5 दिन पहले शुरू हुई। मंडी में इस बार गेहूं के भाव कम हैं। मिल क्वालिटी गेहूं 200 से 300 रुपए प्रति क्विंटल कम दाम में बिक रहा है। जबकि समर्थन मूल्य पर ज्यादा दाम मिल मिल रहे रहे हैं। इसलिए किसान मंडी की बजाय खरीदी केंद्रों पर गेहूं बेच रहे हैं। भुगतान की व्यवस्था भी बेहतर हुई है। पिछले साल 10 से 15 दिन में भुगतान होता था। इस बार 3 से 7 दिन में पैसा मिल रहा है। यही वजह है कि इस बार खरीदी में रिकॉर्ड बना है। गेहूं खरीदी में सीहोर नंबर 1 इस संबंध में जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के आकाश चंदेल ने बताया कि गेहूं खरीदी में सीजन में अभी तक सीहोर नंबर वन पर है। इस साल अभी तक 5 लाख 29 हजार मेट्रिक टन गेहूं की खरीदी हो चुकी है।  

सार्वजनिक अवकाश होने के बावजूद गेहूं की खरीदी का कार्य निर्बाध रूप से जारी रहेगा

भोपाल प्रदेश के अन्नदाताओं की सुविधा और हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि अब सभी उपार्जन केन्द्रों पर आगामी 18 और 19 अप्रैल को सार्वजनिक अवकाश होने के बावजूद गेहूं की खरीदी का कार्य निर्बाध रूप से जारी रहेगा। इसके लिए किसान स्लॉट बुक करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि यह निर्णय किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि उपार्जन प्रक्रिया में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो। किसान इन तिथियों में स्लॉट बुक कर बिना किसी परेशानी के गेहूं विक्रय कर सकेंगे। इसके लिए सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। कलेक्टरों को दिए गए निर्देश खाद्य मंत्री राजपूत ने समस्त जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने जिलों में उपार्जन केन्द्रों की निरंतर मॉनीटरिंग करें। उपार्जन कार्य से जुड़े कर्मचारियों, अधिकारियों और एजेंसियों को भी सख्त हिदायत दी गई है कि किसानों को कतारों में लंबा इंतजार न करना पड़े, तुलाई, रख-रखाव, भुगतान और परिवहन की सभी व्यवस्थाएँ समय पर और पारदर्शिता से हों। किसानों को न हो कोई असुविधा खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा कि सरकार किसान हितैषी है। यह सुनिश्चित करना हमारा दायित्व है कि किसानों को अपने उत्पाद बेचने के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। इसलिए अवकाश के दिन भी उपार्जन कार्य जारी रखा जाएगा। सभी संबंधित विभागों को आवश्यक संसाधनों और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी भी उपार्जन केन्द्र से लापरवाही या अनियमितता की शिकायत प्राप्त होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की जाएगी।  

किसानों को 2,600 प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा, अब तक 21.86 लाख मीट्रिक टन का भंडारण किया जा चुका

भोपाल प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन हेतु पंजीयन की प्रक्रिया 20 जनवरी से 9 अप्रैल 2025 तक संचालित की गई। इस अवधि में प्रदेश के 15 लाख 33 हजार किसानों ने अपना पंजीयन कराया। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया कि उपार्जन की अवधि 15 मार्च से 5 मई 2025 तक निर्धारित है। किसानों को गेहूं के लिए 2,425 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ 175 प्रति क्विंटल बोनस, कुल 2,600 प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश में 3,528 उपार्जन केंद्रों की स्थापना की गई है। अब तक कुल 3.09 लाख किसानों से 26.73 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया है। इसमें से 24.44 लाख मीट्रिक टन का परिवहन तथा 21.86 लाख मीट्रिक टन का भंडारण किया जा चुका है। मंत्री राजपूत ने बताया कि अब तक किसानों को 5,027 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। शेष भुगतान 3 से 5 कार्य दिवसों में पूर्ण कर लिया जाएगा। मंत्री राजपूत ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को समय पर उचित मूल्य और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए संकल्पबद्ध है। उपार्जन प्रक्रिया को सरल, व्यवस्थित और किसान हितैषी बनाने के लिए सभी आव  

अभी तक 1794 करोड़ 82 लाख रूपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका: मंत्री राजपूत

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रदेश में अभी तक एक लाख 25 हजार 631 किसानों से 10 लाख 25 हजार 735 मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया जा चुका है। किसानों को उपार्जित गेहूँ का भुगतान भी लगातार किया जा रहा है। अभी तक 1794 करोड़ 82 लाख रूपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये है और राज्य सरकार द्वारा 175 रूपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। इस तरह से गेहूँ की खरीदी 2600 रूपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। जिला उज्जैन में एक लाख 93 हजार 362, सीहोर में एक लाख 61 हजार 737, देवास में 90 हजार 740, शाजापुर में 92 हजार 613, इंदौर में 69 हजार 558, भोपाल में 74 हजार 75, राजगढ़ में 66 हजार 47, मंदसौर 42 हजार 909, आगर मालवा में 40 हजार 550, धार में 33 हजार 249, विदिशा में 54 हजार 474, हरदा में 24 हजार 45, खण्डवा में 16 हजार 654, रतलाम में 19 हजार 743, नीमच में 6362, नर्मदापुरम में 8140, झाबुआ में 5710, रायसेन में 14183, बैतूल में 2431, दमोह में 3557, खरगौन में 565, गुना में 1057, सागर में 1053, नरसिंहपुर में 221, छिंदवाड़ा में 185, अशोकनगर में 119, सिवनी में 1313, सतना में 926, मण्डला में 90, दतिया में 43 और अलीराजपुर में 24, मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया जा चुका है। इस वर्ष अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये 15 लाख 9 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन करवाया है। किसान अब 9 अप्रैल तक पंजीयन करा सकते हैं।  गेहूँ उपार्जन के लिये किसान अब 9 अप्रैल तक करा सकते हैं पंजीयन खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि किसानों के हित में रबी विपणन वर्ष 2025-26 में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये पंजीयन की अवधि 9 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। पूर्व में पंजीयन की अवधि 31 मार्च 2025 तक निर्धारित की गई थी। मंत्री श्री राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि जिन किसानों ने अभी तक पंजीयन नहीं करवाया है, वे 9 अप्रैल तक गेहूँ उपार्जन के लिये पंजीयन जरूर करायें। गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये है और राज्य सरकार द्वारा 175 रूपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। इस तरह से गेहूँ की खरीदी 2600 रूपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। उल्लेखनीय है कि गेहूँ उपार्जन के लिये 31 मार्च तक 15 लाख 9 हजार 324 किसान पंजीयन करा चुके हैं। गेहूँ का उपार्जन भी जारी है।  

टीकमगढ़ में प्रशासन ने कृषि उपज मंडी में बड़ी कार्रवाई, 5 करोड़ के 15772 क्विंटल अवैध गेहूं जब्त

टीकमगढ़  मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में प्रशासन ने कृषि उपज मंडी में बड़ी कार्रवाई की है।  दिन टीकमगढ़ कृषि उपज मंडी में राजस्व विभाग और खाद्य विभाग की टीम ने संयुक्त छापामार कार्रवाई की है। रेड में अवैध तरीके से बाहर भेजे जा रहे गेहूं को जब्त किया है। साथ अवैध गेहूं ले जा रहे 55 ट्रकों को सील किया गया है। टीकमगढ़ तहसीलदार कुलदीप सिंह ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि कलेक्टर विवेक श्रुति के आदेश पर यह छापामार कार्रवाई की गई है। यहां ट्रकों में लाद करके 15772 क्विंटल गेहूं को ट्रेन के माध्यम से बाहर ले जाने का प्रयास किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि यह गेहूं टीकमगढ़ किसी उपज मंडी के व्यापारी अमित ट्रेडर्स का है। वह बिना परमिशन के टैक्स की चोरी करते हुए गेहूं को बाहर ले जा रहा था। हालांकि प्रशासन ने  दिन इसे जब्त कर लिया है। क्यों किया जब्त टीकमगढ़ तहसीलदार ने बताया कि गल्ला व्यापारी को मात्र अपनी फर्म पर 2500 क्विंटल गेहूं रखने का अधिकार है। लेकिन टीकमगढ़ कृषि उपज मंडी की फर्म अमित ट्रेडर्स के मालिक अमित जैन ने 15772 क्विंटल गेहूं का भंडारण किया गया था। जो गलत है। उन्होंने बताया कि इस भंडारण को उन्होंने अपनी फर्म में दर्ज नहीं किया था जो अवैधानिक है। जिसके चलते पूरे गेहूं को जब्त किया गया है। प्रशासन को इसकी सीक्रेट जानकारी मिली थी। अवैध माल की कीमत है 5 करोड़ टीकमगढ़ तहसीलदार कुलदीप सिंह ठाकुर ने बताया कि जब्त किया गया गेहूं लगभग 5 करोड़ रुपए की राशि का है। जिसका प्रपोजल बना करके टीकमगढ़ कलेक्टर को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि इसको खाद्य विभाग ने जब्ती की कार्रवाई की गई है। जब्त किए गए गेहूं को टीकमगढ़ कृषि उपज मंडी में रखा गया है। उन्होंने बताया कि अमर ट्रेडर्स के द्वारा टैक्स की लगातार चोरी की जा रही थी क्योंकि उन्होंने 15772 कुंतल गेहूं को अपनी फर्म में दर्ज नहीं किया था। तहसीलदार ने बताया कि प्रशासन मामले की और भी जांच कर रहा है। प्रशासन यह पता करने में लगा है कि इसके पहले अमित ट्रेडर्स की तरफ से कितना गेहूं बाहर भेजा गया है। साथ ही कितना टैक्स अदा किया है और अपनी ट्रेडर्स पर कितना गेहूं दिखाया है।

मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी केंद्रों पर खरीदी में महिलाओं की भी भागीदारी, ये डॉक्यूमेंट रखें तैयार

भोपाल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उन्हें रोजगार के साधन मुहैया कराने के उद्देश्य से सरकार ने इस साल भी गेहूं उपार्जन केंद्रों पर न्यूनतम मूल्य पर गेहूं के उपार्जन में महिलाओं की भागीदारी तय करने का फैसला किया है। गेहूं का उपार्जन 15 मार्च से शुरू हो चुका है जो 5 मई तक जारी रहेगा , उपार्जन के लिए पंजीयन चल रहा है जो 31 मार्च तक चलेगा। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के उद्देश्य से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेंहू के उपार्जन में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए महिला स्व-सहायता समूहों/ग्राम संगठकों को कार्य देने का प्रावधान उपार्जन नीति में किया गया है।  राजपूत ने बताया है कि महिला स्व-सहायता समूहों/ग्राम संगठकों को उपार्जन कार्य देने के लिए प्रक्रिया निर्धारित कर निर्देश जारी कर दिये गये हैं। एक साल पहले का हो पंजीयन उन्होंने शर्तों की जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत पंजीकृत महिला स्व-सहायता समूहों/ग्राम संगठकों का एक वर्ष पूर्व (एक जनवरी, 2025 की स्थिति में) का पंजीयन होना चाहिए। महिला स्व-सहायता समूहों/ग्राम संगठकों के बैंक खाते में न्यूनतम 2 लाख रुपये जमा हों। समूह द्वारा पिछले एक वर्ष में नियमित रूप से  बैठकों का आयोजन किया गया हो। सभी सदस्य/पदाधिकारी महिला होना चाहिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त ये है कि समूह में समस्त सदस्य/पदाधिकारी महिलाएं हो। विगत वर्षों में उपार्जन कार्य में कोई अनियमितता नहीं की गयी हो,  महिला स्व-सहायता समूहों/ग्राम संगठकों को उपार्जन कार्य देने के लिये मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत की अनुशंसा जरूरी है। ये हैं आवश्यक दस्तावेज समूहों को पंजीयन प्रमाण-पत्र, पिछले 6 माह के बचत खाते का बैंक स्टेटमेंट, पिछले 3 माह की बैठकों का कार्यवाही विवरण और आवश्यक राशि की उपलब्धता का प्रमाण सहित अन्य जरूरी दस्तावेज देने होंगे। उपार्जन कार्य के लिए महिला स्व-सहायता समूहों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जायेगा। महिलाओं की भागीदारी के लिए क्या हैं नियम? महिला स्व-सहायता समूहों/ग्राम संगठकों को उपार्जन कार्य देने के लिए प्रक्रिया निर्धारित कर निर्देश जारी कर दिये गये हैं. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत पंजीकृत महिला स्व-सहायता समूहों/ग्राम संगठकों का एक वर्ष पूर्व (एक जनवरी, 2025 की स्थिति में) का पंजीयन होना चाहिए. महिला स्व-सहायता समूहों/ग्राम संगठकों के बैंक खाते में न्यूनतम 2 लाख रूपये जमा हों. समूह द्वारा विगत एक वर्ष में नियमित रूप से बैठकों का जायोजन किया गया हो. समूह में समस्त सदस्य/पदाधिकारी महिलाएं हो. विगत वर्षों में उपार्जन कार्य में कोई अनियमितता नहीं की गयी हो और महिला स्व-सहायता समूहों/ग्राम संगठकों को उपार्जन कार्य देने के लिये मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत की अनुशंसा जरूरी है. ये मिलेगा मानदेय महिला स्व-सहायता समूहों/ग्राम संगठकों को उपार्जन कार्य के लिये विभाग द्वारा उपार्जन एवं पंजीयन की अवधि के लिये कम्प्यूटर ऑपरेटर का मानदेय दिया जायेगा। साथ ही भारत सरकार द्वारा निर्धारित कमीशन एवं प्रासंगिक व्यय भी दिये जायेंगे। गेहूँ की खरीदी के लिये 2648 उपार्जन केन्द्र बनाये जा चुके हैं। 2600 रुपये क्विंटल MSP पर हो रही गेहूं की खरीद   आपको बता दें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेंहू की खरीदी 15 मार्च से शुरू हो चुकी है ये खरीदी 5 मई तक की जायेगी। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया गेहूं का समर्थन मूल्य 2425 रुपये निर्धारित है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  के निर्देश पर मप्र सरकार किसानों को 175 रुपये प्रति क्विटल बोनस भी दे रही है। इसलिए इस बार सरकार 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीद रही है। 31 मार्च 2025 तक होगा पंजीयन मंत्री ने कहा किसानों को गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग करनी होगी। जिन किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए अभी तक पंजीयन नहीं कराया है, वे 31 मार्च 2025 तक करवा सकते हैं। उन्होंने बताया खरीदी केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए टेंट, बैठने की व्यवस्था, पानी, पंखे, तौल मशीन और कंप्यूटर जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। गेहूं की साफ-सफाई के लिये क्लीनिंग मशीन भी लगाई जा रही है। ये डॉक्यूमेंट हैं जरूरी समूहों को पंजीयन प्रमाण-पत्र, विगत 6 माह के बचत खाते का बैंक स्टेटमेंट, विगत 3 माह की बैठकों का कार्यवाही विवरण और आवश्यक राशि की उपलब्धता का प्रमाण सहित अन्य जरूरी दस्तावेज देने होंगे. उपार्जन कार्य के लिए महिला स्व-सहायता समूहों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जायेगा. महिला स्व-सहायता समूहों/ग्राम संगठकों को उपार्जन कार्य के लिये विभाग द्वारा उपार्जन एवं पंजीयन की अवधि के लिये कम्प्यूटर ऑपरेटर का मानदेय दिया जायेगा. साथ ही भारत सरकार द्वारा निर्धारित कमीशन एवं प्रासंगिक व्यय भी दिये जायेंगे.

अबतक 10 लाख के आसपास किसानों ने पंजीयन कराया , गेहूँ की खरीदी उपार्जन केन्द्रों में 15 मार्च से 5 मई तक होगी

भोपाल  मध्य प्रदेश के किसानों के लिए काम की खबर है। जिन किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन नहीं करवाया है तो वे फटाफट करवा लें। पंजीयन की लास्ट डेट 31 मार्च 2025 है।अबतक 10 लाख के आसपास किसानों ने पंजीयन कराया है।गेहूँ की खरीदी उपार्जन केन्द्रों में 15 मार्च से 5 मई तक होगी। इस बार गेहूँ की खरीदी 2600 रूपये प्रति क्विंटल की दर से की जायेगी। इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये है और 175 रूपये प्रति क्विंटल राज्य सरकार द्वारा बोनस दिया जाएगा। इस उपार्जन पर समर्थन मूल्य की राशि 19,400 करोड़ रूपये तथा बोनस की राशि 1400 करोड़ रूपये का किसानों को भुगतान किया जाना संभावित है। इस बार 80 लाख टन गेहूं उपार्जन का  अनुमान इस साल प्रदेश में लगभग 80 लाख मे. टन गेहूं उपार्जन अनुमानित है।मालवा निमाड़ में इंदौर, उज्जैन संभाग के कई किसान गेहूं का उत्पादन करते हैं, लेकिन देशभर में सबसे ज्यादा सीहोर का शरबती गेहूं मशहूर है। मार्च के पहले हफ्ते तक जिलों में हुए पंजीयन की स्थिति     न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ की बिक्री के लिए जिला बुरहानपुर में 31, खरगौन में 1616, बड़वानी में 99, अलीराजपुर में 46, खंडवा में 6079, धार में 15,940, झाबुआ में 2850, इंदौर में 27,075, मंदसौर 11,275, नीमच 3768, आगर-मालवा में 14,469, देवास में 26,904, रतलाम में 12,908।     शाजापुर में 35,346, उज्जैन में 56,805, अशोकनगर में 1276, शिवपुरी में 1670, ग्वालियर में 1612, दतिया में 2288, गुना में 2199, भिंड में 2266, श्योपुर में 3260, मुरैना में 1025, जबलपुर 1471, बालाघाट 112।     कटनी में 2093, पांढुर्णा 19, डिंडौरी में 658, छिंदवाड़ा में 3054, सिवनी में 8530, नरसिंहपुर में 6286, मंडला में 4598, हरदा में 1610, बैतूल में 3413, नर्मदापुरम में 27,222, विदिशा में 30,556, रायसेन में 31,197, राजगढ़ में 31,171, भोपाल में 17,182, सीहोर में 59,141, सतना में 2811।     रीवा में 1894, सिंगरौली में 369, मऊगंज 94, मैहर में 924, सीधी में 1382, अनूपपुर में 103, उमरिया में 1447, शहडोल में 2246, पन्ना में 2416, निवाड़ी में 431, दमोह में 7636, टीकमगढ़ में 2705, छतरपुर में 3676 और सागर में 20,378 किसानों ने पंजीयन कराया है।

MP के खेतों में अभी गेहूं की फसल हरी, दाना परिपक्व नहीं, तापमान बढ़ने पर समय से पहले पकने की आशंका

भोपाल  मौसम का सबसे बड़ा ग्राहक किसान होता है। मौसम जब मौज में होता है, तो किसानों का मन प्रफुल्लित हो उठता है। मौसम का मिजाज बिगड़ने का सीधा प्रभाव भी सबसे पहले किसान पर ही होता है। मौसम विभाग ने मार्च में ही लू जैसे हालात बनने की चेतावनी दी है। आशंका है कि अगर मार्च में ही इतनी गर्मी बढ़ी तो गेहूं की फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है। इससे गेहूं का उत्पादन 15 से 20 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। फसलों की कटाई अब होगी शुरू जिले में रबी फसलों की कटाई का दौर मार्च माह में शुरू होगा। इसके तहत 10 से 15 मार्च के बीच फसलों की कटाई प्रारंभ होगी, जो 15 अप्रेल तक चलेगी। हालांकि अगेती फसलों की कटाई इस माह के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। गेहूं का दाना छोटा रहने पर समर्थन मूल्य पर खरीद में परेशानी होती है। पिछले साल भी काश्तकारों को इसी परेशानी का सामना करना पड़ा था। उत्पादन में पडेगा फर्क, जल्दी पक जाएगी फसल तापमान में बढ़ोतरी के कारण गेहूं और जौ की फसल में फर्क पड़ेगा। दाना तो बन जाएगा, लेकिन जल्दी पक जाएगा। इससे उत्पादन में 5-7 प्रतिशत घट सकता है। इसके अलावा अन्य फसलों में कुछ फर्क नहीं पड़ेगा। अच्छी पैदावार की उम्मीदों पर फिर सकता है पानी     भोपाल के ग्राम सलैया निवासी कामता पाटीदार ने बताया कि उन्होंने विदिशा जिले के ग्राम दुलई में अपनी 50 एकड़ जमीन में गेहूं की बोवनी की है। धान की फसल लेने के कारण बोवनी जनवरी में हो सकी थी। अभी खेत में गेहूं की हरी फसल खड़ी है। अब बढ़ती धूप देखकर फसल के जल्दी पकने की आशंका है।     खजूरीकला के किसान मिश्रीलाल राजपूत ने बताया कि जनवरी में ठीक ठाक ठंड पड़ने के कारण इस बार गेहूं की अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन हरी फसल के दौरान धूप के तीखे तेवर देखकर अरमानों पर पानी फिरता दिख रहा है।     मध्य प्रदेश के किसानों ने वर्ष 2024-25 के रबी सीजन में 138.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसल लगाई है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा गेहूं का है। सामान्य मौसम में सरकारी एजेंसियों ने इस साल 80 लाख टन गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया है। नहीं हो पाता है दानों का पूरा विकास बढ़ते तापमान से गेहूं की बढ़वार रुक जाती है. फसल की लंबाई कम होती है और यह जल्दी पक जाती है. गेहूं में बालियां लगने के बाद दाना भरने के लिए कुछ समय चाहिए होता है. मौसम परिवर्तन के कारण तेज हवा चलती है और तापमान बढ़ जाता है, तो पुष्पन क्रिया शीघ्र हो जाती है. गेहूं की बालियों में दाने नहीं भर पाते हैं. दानों को मजबूती नहीं मिल पाती है, क्योंकि तापमान में तेजी से वृद्धि के कारण दानों का पूरा विकास नहीं हो पाता है और समय से पहले ही दाने परिपक्व हो जाते हैं. दाना कमजोर पड़ जाता है. इससे गेहूं की गुणवत्ता और उपज दोनों पर असर पड़ता है. गेहूं की फसल में ये काम करें गेहूं और जौ की फसलों को बढ़ते तापमान प्रभाव से बचाने के लिए दाना भराव और दाना निर्माण की अवस्था पर सीलिसिक अम्ल 15 ग्राम प्रति 100 लीटर का फॉलियर स्प्रे करना चाहिए. सीलिसिक अम्ल का पहला छिड़काव बलियां निकलते समय और दूसरा छिड़काव दूधिया अवस्था पर करने से काफी लाभ मिलेगा. सीलिसिक अम्ल गेहूं को प्रतिकूल परिस्थितियों में लड़ने की शक्ति प्रदान करता है और निर्धारित समय पूर्व पकने में मदद करता है. इससे उपज में गिरावट नहीं होती है. गेहूं और जौ की फसल में जरूरत के अनुसार, बार-बार हल्की सिंचाई करनी चाहिए. इसके अलावा, 0.2 प्रतिशत म्यूरेट ऑफ पोटाश या 0.2 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट का 15 दिनों के अंतराल पर दो बार छिड़काव किया जा सकता है. तापमान से नुकसान से बचने के उपाय गेहूं और जौ की फसलों में बाली आने पर एस्कॉर्बिक अम्ल के 10 ग्राम प्रति 100 लीटर पानी का घोल छिड़काव करने से अधिक तापमान होने पर भी नुकसान नहीं होगा. गेहूं की पछेती बोई फसल में पोटेशियम नाइट्रेट 13:0:45, चिलेटेड जिंक, चिलेटेड मैंगनीज का छिड़काव भी फायदेमंद होता है. वातावरण में बदलाव के कारण गेहूं की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप दिखाई दे रहा है तो इसके नियंत्रण के लिए किसानों को प्रोपिकोनाजोल की एक मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी के घोल को दो बार 10 से 12 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए. दाना पतला पड़ने से पैदावार प्रभावित होगी     मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में किसानों का रुझान धान की खेती की तरफ बढ़ा है। धान की कटाई दिसंबर तक होने के कारण गेहूं की बोवनी भी देरी से हो पाती है। इस वजह से अभी गेहूं की फसल हरी है। यह समय दाना के परिपक्व होने का है। तापमान बढ़ने के कारण फसल जल्दी पकने लगेगी। इससे गेहूं का दाना पतला रह जाएगा। इससे गेहूं के उत्पादन में भी 15 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट होने की संभावना है। – डॉ. जीएस कौशल, पूर्व संचालक, कृषि विभाग, भोपाल  

मंत्री राजपूत ने बताया कि राज्य के किसानों से 2600 रूपये प्रति क्विंटल की दर से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की जायेगी

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया कि रबी विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर गेहूं का उपार्जन इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम् में 01 मार्च से तथा शेष संभाग में 17 मार्च से खरीदी के निर्णय में बदलाव करते हुये राज्य सरकार ने किसानों की मांग पर पूरे प्रदेश में एक साथ 15 मार्च से ही खरीदी करने का निर्णय लिया है। राजपूत ने बताया कि वर्तमान में गेहूं की फसल कटाई पूर्ण नहीं होने तथा मंडियों में आ रहे गेहूं में समर्थन मूल्य उपार्जन हेतु भारत सरकार द्वारा निर्धारित नमी के प्रतिशत से अधिक होने के कारण किसानों को असुविधा से बचाने यह निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है। विगत वर्षों में भी समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन 15 मार्च के बाद ही प्रारम्भ किया जाता रहा है। किसानों को मध्यप्रदेश सरकार देगी 175 रूपये बोनस खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि रबी विपणन वर्ष 2025-26 में भारत सरकार द्वारा समर्थन मूल्य में 150 प्रति क्विंटल की वृद्धि करते हुए 2425 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली किसान हितैषी प्रदेश सरकार द्वारा गेहूं उत्पादक किसानों के हित में बडा और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए समर्थन मूल्य 2425 रूपये के अतिरिक्त 175 रूपये प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा की गई है। राजपूत ने बताया कि राज्य के किसानों से 2600 रूपये प्रति क्विंटल की दर से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की जायेगी। खाद्य मंत्री ने किसानों के हित में लिये गये इस बड़े निर्णय के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार जताते हुये इसे खेती को लाभ का धंधा बनाने की ओर सरकार द्वारा उठाये जा रहे कदमों का एक हिस्सा बताया है। 80 लाख टन गेहूं उपार्जन अनुमानित खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश में लगभग 80 लाख मे. टन गेहूं उपार्जन अनुमानित है। इस उपार्जन पर समर्थन मूल्य की राशि 19,400 करोड़ रूपये तथा बोनस की राशि 1400 करोड़ रूपये का किसानों को भुगतान किया जाना संभावित है।।

वर्ष 2025-26 के लिए गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये घोषित किया गया

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि अभी तक 62 हजार 77 किसानों ने पंजीयन कराया है। किसान 31 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। उन्होंने बताया है कि वर्ष 2025-26 के लिए गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये घोषित किया गया है। यह गत वर्ष से 150 रूपये अधिक है। मंत्री श्री राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि गेहूँ की विक्री के लिए समय-सीमा में पंजीयन जरूर करायें। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ की बिक्री के लिए जिला बुरहानपुर में 2, बड़वानी में 17, खरगोन में 189, खंडवा में 339, अलीराजपुर में 13, झाबुआ में 776, धार में 4202, इंदौर में 9381, नीमच 134, मंदसौर 362, आगर-मालवा में 823, शाजापुर में 3710, देवास में 4035, रतलाम में 2211, उज्जैन में 11344, ग्वालियर में 55, शिवपुरी में 23, गुना में 23, दतिया में 142, अशोकनगर में 6, भिंड में 4, मुरैना में 96, श्योपुर में 43, छिंदवाड़ा में 157, सिवनी में 61, डिंडौरी में 21, कटनी में 14, नरसिंहपुर में 215, मंडला में 353, हरदा में 173, बैतूल में 362, नर्मदापुरम में 1793, विदिशा में 1563, राजगढ़ में 1096, रायसेन में 1969, भोपाल में 1975, सीहोर में 12596, सतना में 48, सीधी में 75, रीवा में 44, सिंगरौली में 19, मैहर में 3, उमरिया में 64, अनूपपुर में 9, शहडोल में 239, पन्ना में 37, सागर में 419, दमोह में 124, छतरपुर में 289, निवाड़ी में 88 और टीकमगढ़ में 341 किसानों ने पंजीयन कराया है।  

सरकार को गेहूं की खरीदी करनी होगी तो उसे एमएसपी भी बढ़ानी होगी: एक्सपर्ट

शहडोल खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश में जहां धान की खेती सबसे बड़े रकबे में की जाती है, तो वहीं रबी सीजन में गेहूं सबसे ज्यादा रकबे में उगाया जाता है. दरअसल, साल भर गेहूं की खूब डिमांड रहती है. इन दिनों गेहूं के दाम आसमान छू रहे हैं, जो आम आदमी के पर्स पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है. लेकिन किसानों के नजरिए से देखें तो ये उनके लिए आने वाले समय के लिए राहत की खबर है. करीब 2 महीने बाद नया गेहूं आ जाएगा. इससे किसानों को मुनाफा होगा. गेहूं के दाम छू रहे आसमान वर्तमान में गेहूं के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे आम आदमी परेशान है, लेकिन किसानों के लिए यह अच्छी खबर है. कारोबारी ने बताते हैं कि “गेहूं अलग-अलग क्वालिटी में 30 रुपए से लेकर के 38 रुपए किलो तक मिल रहा है. मार्केट में नया गेहूं आने से पहले इसका दाम कम नहीं होगा. अगर गेहूं के दाम बढ़े हुए हैं, तो यह तय बात है कि आटे के दाम भी बढ़ेंगे.इस समय नॉर्मल आटे का खुदरा मूल्य 40 रुपए प्रति किलो है. वहीं, किसी ब्रांड का आटा 45 रुपए से लेकर 50 रुपए प्रति किलो मिल रहा है. सरकार को बढ़ाना पड़ सकती है MSP जानकारों के मुताबिक, गेहूं के बढ़े हुए दाम सरकार की परेशानी बढ़ा सकते हैं. क्योंकि अगर सरकार को गेहूं की खरीदी करनी होगी तो उसे एमएसपी भी बढ़ानी होगी. अगर गेहूं का बाजार भाव यही रहा और सरकार ने एमएसपी नहीं बढ़ाई तो कोई भी किसान घाटा सहकर सरकार को अपनी उपज नहीं बेचेगा. पिछली बार सरकार ने 2275 रुपए प्रति क्विंटल एमएसपी की दर से गेहूं की खरीद की थी. प्रदेश सरकार ने इस बार 125 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किसानों को बोनस देने की बात भी कही है. गेहूं का यही रेट रहा तो किसानों को होगा फायदा अगर पिछले साल के रेट और बोनस को मिलाकर देखे तो गेहूं का मूल्य 2400 रुपए प्रति क्विंटल होता है. ऐसे में अगर वर्तमान बाजार मूल्य थोड़ी बहुत टूट के साथ भी बरकरार रहा तो सरकार को गेहूं खरीद के लिए एमएसपी बढ़ानी होगी. बशर्ते गेहूं का बाजार मूल्य यही बना रहे. लेकिन सामान्यतः नई उपज आने के बाद गेहूं का मूल्य धड़ाम हो जाता है.

प्रदेश में खूब बिक रहा गेहूं का बिजवारा, अब तक हो चुकी 50 फीसदी बोवनी, लोकवन पूर्णा, 513 जैसी किस्म का जोर

उज्जैन  इस वर्ष मालवा की माटी में गेहूं की बंपर पैदावार होने की संभावना है। करीब 4.5 लाख हेक्टेयर में बोवनी की जा रही है। चने की बोवनी का रकबा कम बताया जा रहा है। किसान तेजस, पोषक, 322 किस्म के गेहूं का बीज ज्यादा पसंद कर रहे हैं। बीते तीन वर्षों से किसानों को सोयाबीन भाव ठीक नहीं मिल रहे हैं, जबकि गेहूं के भाव काफी अच्छे मिल रहे हैं। यही कारण है कि किसानों का रुझान चने की बनिस्बत गेहूं की बोवनी पर अधिक है। अब तक हो चुकी 50 फीसदी बोवनी     कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष 4.50 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बोवनी की जा रही है। अब तक 50 फीसद बोवनी हो चुकी है। किसान अधिक उत्पादन के किस्म का गेहूं अधिक बो रहे हैं।     व्यापारी अखिलेश जैन के अनुसार, किसानों ने पोषक, तेजस, 322 किस्म का बिजवारा अधिक खरीदा। इस किस्म के गेहूं का उत्पादन काफी अच्छा बताया जा रहा है।     बीज कंपनी से लेकर व्यापारिक क्षेत्र में यह गेहूं 3300 से 4500 रुपया क्विंटल तक बिक गया। इसके बाद किसानों ने पर्याप्त पानी के चलते लोकवन पूर्णा, 513 जैसी किस्म को बोया है। इनके भाव भी ऊंचे में 4000 रुपया क्विंटल तक रहे। देशावर में खूब बिक रहा गेहूं का बिजवारा इस वर्ष देशावर में गेहूं के बीज की आपूर्ति मालवा क्षेत्र से हो रही है। 322, लोकवन, पूर्णा, पोषक गेहूं के बीजवारे की मांग महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार में काफी चल रही है। इस कारण गेहूं के भाव भी ऊंचे हैं। शरबती की बोवनी नगण्य किसी समय में मालवा की माटी का शरबती की मिठास देश के महानगरों में काफी पसंद की जाती थी। मुंबई में इस गेहूं की कीमत 5 से 8 हजार रुपये क्विंटल तक होती थी, लेकिन जिले के सभी क्षेत्र में पानी पर्याप्त मात्रा में होने से किसानों ने शरबती गेहूं की बोवनी से किनारा कर लिया। बता दें इस किस्म का गेहूं काफी कम पानी की पैदावार है। उत्पादन भी अन्य गेहूं की बनिस्बत कम है। अब अधिक उत्पादन पर किसान ध्यान देता है।

16 सालों में सबसे कम बचा गेहूं का स्टॉक, ज्यादा दाम पर भी सरकारी खरीद 29% कम

नई दिल्ली गेहूं एक साल में 8% महंगा हुआ है। पिछले 15 दिन में ही कीमतें 7% बढ़ चुकी हैं, जो अगले 15 दिन में 7% और बढ़ सकती हैं। दरअसल, गेहूं के सरकारी भंडारों में हर वक्त तीन महीने का स्टॉक (138 लाख टन) होना चाहिए। मगर इस बार खरीद सत्र शुरू होने से पहले यह सिर्फ 2023 में यह 84 लाख टन, 2022 में 180 लाख टन और 2021 में 280 लाख टन स्टॉक था। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से दुनिया में गेहूं का सरकारी स्टॉक घटता जा रहा है। हालांकि, सरकार अभी तक कुल 264 लाख टन गेहूं खरीद चुकी है, लेकिन सरकारी लक्ष्य 372 लाख टन का है। खरीद का समय भी 22 जून तक बढ़ा दिया है, लेकिन खरीद केंद्रों में नगण्य गेहूं ही आ रहा है। ऐसे में ‘मुफ्त अनाज योजना’, बीपीएल की जरूरतें पूरी करने के लिए तत्काल गेहूं का आयात करना पड़ सकता है। गेहूं के दाम काबू करने के लिए पिछले साल सरकार द्वारा रिकॉर्ड 100 लाख टन गेहूं बेचने के कारण इसके भंडार में कमी आई है। गेहूं की आपूर्ति कमजोर होने के बाद भी भारत सरकार आयात को बढ़ावा देने के लिए आयात पर लागू 40 फीसदी शुल्क हटाकर रूस जैसे देश से इसका आयात करने के विरोध में रही। सरकार ने आयात करने के बजाय भंडार में मौजूद गेहूं आटा मिल व बिस्कुट निर्माता जैसे बड़े उपभोक्ताओं को बेचा। अधिकारी ने कहा कि सरकार ने बड़ी मात्रा में सरकारी भंडार से गेहूं की बिक्री करने के बाद भी इसके भंडार को बफर से नीचे नहीं गिरने दिया। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि गेहूं का स्टॉक 100 लाख टन से नीचे न जा पाए। केंद्र सरकार के बफर नियम के मुताबिक 1 अप्रैल को गेहूं का स्टॉक 74.6 लाख टन या इससे अधिक होना ही चाहिए। मुंबई के एक डीलर ने कहा कि सरकार ने अगले सीजन में गेहूं का स्टॉक बफर नियम से अधिक रखने को सुनिश्चित करने के लिए इस साल किसानों से 300 से 320 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। भारत सरकार साल 2022 व 2023 में गेहूं खरीद के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाई क्योंकि ज्यादा गर्मी के कारण गेहूं की पैदावार कम हुई। भारत ने 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर गेहूं की आपूर्ति कमजोर पड़ने से इसकी निर्यात मांग बढ़ने के बीच गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। डीलर ने कहा कि अगर सरकार जरूरी मात्रा में गेहूं खरीदने में विफल रही तो शुल्क मुक्त गेहूं के आयात पर विचार कर सकती है। व्यापारियों का कहना है कि अगर सरकार 40% शुल्क हटाती है तो वे आयात शुरू कर देंगे। नई दिल्ली के एक व्यापारी राजेश पहाड़िया जैन ने कहा कि लगभग 3 मिलियन मीट्रिक टन आयात पर्याप्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रूस सबसे संभावित गेहूं सप्लायर हो सकता है। उन्होंने कहा, “एक बार सरकार शुल्क हटा देती है, तो निजी व्यापार गेहूं का आयात शुरू कर सकता है।” नई दिल्ली स्थित डीलर ने कहा कि अक्टूबर में त्यौहारी सीजन के लिए मांग चरम पर होने के बाद आयात से कीमतों में उछाल टल जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर भारत 30 लाख से 50 लाख मीट्रिक टन आयात करता है तो इससे देश को अपने भंडार से बड़ी मात्रा में गेहूं बेचने की जरूरत खत्म हो जाएगी। लगातार पांच रिकॉर्ड फसलों के बाद, तापमान में तेज वृद्धि ने 2022 और 2023 में भारत की गेहूं की फसल को कम कर दिया, जिससे दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक को निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा। एक प्रमुख उद्योग निकाय का अनुमान है कि इस साल की फसल भी 112 मिलियन मीट्रिक टन के सरकारी अनुमान से 6.25% कम होगी। घरेलू कीमतें राज्य द्वारा निर्धारित न्यूनतम खरीद दर 2,275 रुपये प्रति 100 किलोग्राम से ऊपर बनी हुई हैं, और हाल ही में इनमें वृद्धि शुरू हो गई है। अप्रैल में गोदामों में गेहूं का स्टॉक घटकर 7.5 मिलियन मीट्रिक टन रह गया, जो 16 वर्षों में सबसे कम है। सरकार को कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आटा मिलों और बिस्किट निर्माताओं को रिकॉर्ड 10 मिलियन टन से अधिक गेहूं बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। सरकारी अधिकारी ने कहा, “आयात शुल्क हटाने से हमें यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि हमारा अपना भंडार 10 मिलियन टन के मनोवैज्ञानिक बेंचमार्क से नीचे न गिरे।” भारत को राज्य के गेहूं के स्टॉक को फिर से भरने के लिए संघर्ष करना पड़ा है। अप्रैल में कटाई शुरू होने के बाद से, सरकार 30 मिलियन से 32 मिलियन के लक्ष्य के मुकाबले केवल 26.2 मिलियन मीट्रिक टन ही खरीद पाई है। ऐसा तब हुआ जब उसने व्यापारिक घरानों को खरीद से परहेज करने की सलाह दी थी ताकि राज्य के भंडारक भारतीय खाद्य निगम को बड़ी मात्रा में खरीद करने में सक्षम बनाया जा सके। नई दिल्ली स्थित डीलर ने कहा कि सरकार की खरीद 27 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक होने की संभावना नहीं है। दुनिया के सबसे बड़े खाद्य कल्याण कार्यक्रम के तहत भारत को लगभग 18.5 मिलियन मीट्रिक टन गेहूं की जरूरत है। भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सत्ता में आने पर कार्यक्रम के लाभार्थियों को 10 किलो मुफ्त अनाज की मासिक आपूर्ति का वादा किया है।  

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