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देश के 55 प्रतिशत एक्सप्रेस-वे के साथ यूपी बना एक्सप्रेस-वे हब

9 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति, उत्तर प्रदेश बना देश की कनेक्टिविटी का ग्रोथ इंजन 63,383 किमी सड़कों और 35,433 किमी ग्रामीण मार्गों से मजबूत हुआ नेटवर्क देश के 55 प्रतिशत एक्सप्रेस-वे के साथ यूपी बना एक्सप्रेस-वे हब 16 एयरपोर्ट और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ एविएशन कनेक्टिविटी को मिलेगी नई उड़ान रेल, राष्ट्रीय जलमार्ग और फ्रेट कॉरिडोर से लॉजिस्टिक्स को मिला बूस्ट सर्वोत्तम बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है- संजीव सिंह गौड़, राज्य मंत्री समाज कल्याण निवेश और विकास के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य बन चुका है उत्तर प्रदेश – दानिश आजाद अंसारी, मंत्री उत्तर प्रदेश प्रदेश के हर हिस्से को जोड़ते हुए विकास की नई धारा प्रवाहित-अवनीश कुमार अवस्थी, मुख्यमंत्री के सलाहकार लखनऊ उत्तर प्रदेश ने बीते 9 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव दर्ज करते हुए खुद को देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे राज्यों में शामिल कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में सड़क, एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट, रेल, जलमार्ग, ऊर्जा और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर काम हुआ है, जिसने विकास को नई गति दी है। प्रदेश में सड़क नेटवर्क के विस्तार ने विकास की दिशा तय की है। वर्ष 2017 के बाद से 63,383 किलोमीटर सड़कों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया गया है, जबकि 35,433 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण कर गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ा गया है। प्रतिदिन औसतन 19 किलोमीटर सड़क निर्माण की रफ्तार प्रदेश की तेज प्रगति को दर्शाती है। इसके साथ ही 1,740 पुलों का निर्माण कर आवागमन को और सुगम बनाया गया है। तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों को बेहतर सड़कों से जोड़ने का व्यापक कार्य भी पूरा किया गया है। उत्तर प्रदेश आज देश के एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बन चुका है। देश के कुल एक्सप्रेसवे का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा प्रदेश में स्थित है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे जैसे प्रोजेक्ट्स ने क्षेत्रीय असमानताओं को कम करते हुए कनेक्टिविटी को नई दिशा दी है। गंगा एक्सप्रेस-वे, जिसका लगभग 99 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़ने वाला एक ऐतिहासिक प्रोजेक्ट साबित होने जा रहा है। इसके अलावा विन्ध्य एक्सप्रेस-वे जैसी नई परियोजनाएं भी विकास के दायरे को और विस्तारित करेंगी। हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्तमान में प्रदेश में 16 एयरपोर्ट संचालित हैं, जिनमें 4 अंतर्राष्ट्रीय हैं। जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश का एक प्रमुख एविएशन हब बनने की दिशा में अग्रसर है। इसके शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट वाला राज्य बन जाएगा, जिससे पर्यटन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। रेल और जलमार्ग के क्षेत्र में भी प्रदेश ने अपनी स्थिति मजबूत की है। करीब 16,000 किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क के साथ उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े रेल नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल है। वहीं, 11 राष्ट्रीय जलमार्गों का जुड़ाव इसे लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में नई पहचान दे रहा है। वाराणसी में देश का पहला मल्टी मॉडल टर्मिनल और 100 एकड़ में विकसित फ्रेट विलेज प्रदेश को निर्यात और माल ढुलाई का प्रमुख केंद्र बना रहे हैं। जल क्षेत्र में भी बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार किया गया है।  इन सभी प्रयासों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश आज मजबूत, आधुनिक और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एक नए विकास मॉडल के रूप में उभर रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार ने न केवल आम नागरिकों के जीवन को सुगम बनाया है, बल्कि उद्योग, निवेश और रोजगार के लिए भी नए द्वार खोले हैं। प्रदेश अब इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आम नागरिकों के जीवन को आसान बना “डबल इंजन सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी का व्यापक विस्तार हुआ है। शानदार सड़क नेटवर्क और तेजी से हो रहा निर्माण आम नागरिकों के जीवन को आसान बना रहा है। यही कारण है कि प्रदेश आज सर्वोत्तम बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।” संजीव सिंह गौड़, राज्य मंत्री समाज कल्याण उत्तर प्रदेश ने नई पहचान बनाई  “योगी सरकार के 9 वर्ष विकास, विश्वास और सुशासन के प्रतीक हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने नई पहचान बनाई है। आज प्रदेश निवेश और विकास के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य बन चुका है।” दानिश आजाद अंसारी, मंत्री उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास ने अभूतपूर्व गति पकड़ी  “मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ के नेतृत्व में 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास ने अभूतपूर्व गति पकड़ी है। आज प्रदेश देश के 55 प्रतिशत एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के साथ विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी का उदाहरण बन चुका है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसे प्रोजेक्ट्स ने प्रदेश के हर हिस्से को जोड़ते हुए विकास की नई धारा प्रवाहित की है।” अवनीश कुमार अवस्थी, मुख्यमंत्री के सलाहकार

9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने इंफ्रास्ट्रक्चर में किया ऐतिहासिक विकास, एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी तक

नव निर्माण के 9 वर्ष: इंफ्रास्ट्रक्चर 9 साल में बदला उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर का चेहरा, एक्सप्रेसवे से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी तक ऐतिहासिक छलांग 2017 में सीमित संसाधनों से आज देश का लॉजिस्टिक्स हब बनने की ओर अग्रसर यूपी एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, जलमार्ग और औद्योगिक कॉरिडोर से विकास को नई रफ्तार निवेश, निर्यात और रोजगार के नए अवसरों के साथ भविष्य की मजबूत आधारशिला लखनऊ  वर्ष 2017 से पहले सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी चुनौतियों से जूझता उत्तर प्रदेश, बीते 9 वर्षों में तेजी से बदलकर आज देश के उभरते लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, जलमार्ग और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के व्यापक विस्तार ने न केवल विकास की रफ्तार को नई दिशा दी है, बल्कि निवेश, निर्यात और रोजगार के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व संभावनाओं के द्वार खोले हैं। आने वाले वर्षों में यही बुनियादी ढांचा प्रदेश को देश की आर्थिक प्रगति का प्रमुख इंजन बनाने की आधारशिला साबित होगा। 2017 से पहले की स्थिति वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास सीमित दायरे में था। प्रदेश में केवल 2 एक्सप्रेसवे संचालित थे और कनेक्टिविटी का दायरा अपेक्षाकृत कमजोर था। औद्योगिक विकास के लिए बड़े स्तर पर योजनाबद्ध भूमि चिह्नांकन और कॉरिडोर आधारित विकास की गति धीमी थी। लॉजिस्टिक्स लागत अधिक होने और परिवहन में समय लगने के कारण उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी प्रभावित होती थी। एविएशन सेक्टर में भी सीमित विस्तार था और प्रदेश का उपयोग बड़े निवेश गंतव्य के रूप में अपेक्षाकृत कम होता था। जलमार्ग और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी की दिशा में भी कोई बड़ा प्रभावी ढांचा विकसित नहीं हुआ था। 9 वर्षों में बदली तस्वीर पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है। जहां 2017 में केवल 2 एक्सप्रेसवे थे, वहीं आज यह संख्या बढ़कर 22 तक पहुंच गई है। इनमें 7 संचालित, 5 निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित एक्सप्रेसवे शामिल हैं। देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा अब उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। इन एक्सप्रेसवे के किनारे 26 जनपदों के 27 स्थानों पर लगभग 5,300 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक विकास के लिए चिन्हित की गई है। साथ ही बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) का गठन कर 47 वर्षों बाद एक नए औद्योगिक शहर की नींव रखी गई है, जिससे 56,662 एकड़ क्षेत्र में बहुआयामी विकास को गति मिली है। निर्यात के क्षेत्र में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय सुधार किया है। ‘एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स 2024’ में उत्तर प्रदेश चौथे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि 2022 में यह सातवें स्थान पर था। लैंडलॉक्ड राज्यों में प्रदेश का प्रथम स्थान इसकी नीतिगत मजबूती को दर्शाता है। लॉजिस्टिक्स सेक्टर में सुधार के चलते परिवहन समय में कमी आई है और लागत घटी है, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी है और निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। जल, थल और नभ तीनों क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया गया है। वाराणसी में देश का पहला मल्टी-मॉडल टर्मिनल स्थापित किया गया है, जबकि रामनगर, चंदौली, मीरजापुर और गाजीपुर में टर्मिनल और फ्रेट विलेज विकसित किए जा रहे हैं। सड़क निर्माण में तेजी लाते हुए औसतन 19 किलोमीटर प्रतिदिन के हिसाब से सड़कों का निर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। एविएशन सेक्टर में भी बड़ा विस्तार हुआ है। वर्तमान में 16 हवाई अड्डे संचालित हैं, जिनमें 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे शामिल हैं, जबकि 8 हवाई अड्डे प्रक्रियाधीन हैं। भविष्य का विजन आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद प्रदेश देश का पहला राज्य बन जाएगा, जहां 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे होंगे, जिससे वैश्विक कनेक्टिविटी और निवेश को नई दिशा मिलेगी। मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के विस्तार, एक्सप्रेसवे नेटवर्क के और सुदृढ़ीकरण तथा औद्योगिक कॉरिडोर के विकास से प्रदेश में लॉजिस्टिक्स लागत और कम होगी तथा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। निर्यात उन्मुख नीतियों, निवेश अनुकूल वातावरण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से उत्तर प्रदेश न केवल देश का प्रमुख निवेश केंद्र बनेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी गति देगा।

किसानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा कदम

योगी सरकार की ‘नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना’ से डेयरी सेक्टर में आ रही नई क्रांति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से बैंक ऋण व अनुदान वितरण में आई तेजी किसानों की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी सरकार का बड़ा कदम लखनऊ योगी सरकार की ‘नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना’ उत्तर प्रदेश में डेयरी सेक्टर के सशक्तीकरण की दिशा में एक प्रभावी पहल बनकर उभर रही है। किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से चलाई जा रही इस योजना के तहत राज्य सरकार ने तीन वर्षों में 204 डेयरी इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य तय किया है। योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए बैंक ऋण स्वीकृति और अनुदान वितरण की प्रक्रिया की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे डेयरी नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है। इस दौरान पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में 10 मंडल मुख्यालय जनपदों में 50 इकाइयों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें बैंक ऋण स्वीकृति के केवल 2 मामले (मेरठ व लखनऊ) विचाराधीन हैं। वहीं, प्रथम किश्त के 12 मामलों (लखनऊ, कानपुर नगर, गोरखपुर, प्रयागराज, अयोध्या व बरेली) और द्वितीय किश्त के 35 मामलों (आगरा, लखनऊ, कानपुर नगर, झांसी, गोरखपुर, अयोध्या, वाराणसी, मेरठ व बरेली) में अनुदान वितरण प्रक्रियाधीन है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में योजना के तहत 8 मंडल मुख्यालय जनपदों में 40 इकाइयों का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 18 बैंक ऋण स्वीकृति के मामले मिर्जापुर, बस्ती, आजमगढ़, गोंडा, बांदा, सहारनपुर और अलीगढ़ जैसे जनपदों में तेजी से प्रक्रिया में हैं। साथ ही 32 लाभार्थियों को प्रथम किश्त का अनुदान तय प्रक्रिया के तहत जल्द अवमुक्त किया जाएगा, जिनमें अलीगढ़, बांदा, आजमगढ़, गोंडा, बस्ती, सहारनपुर और मुरादाबाद प्रमुख हैं।   वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना का दायरा और बढ़ाते हुए 57 जनपदों में 114 इकाइयों (प्रति जनपद 2 इकाई) का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें जौनपुर, ललितपुर, जालौन, सम्भल, देवरिया और रामपुर जैसे जनपदों में ऋण स्वीकृति शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुकी है। इसके अलावा सभी 57 जनपदों में 114 लाभार्थियों को प्रथम किश्त का अनुदान अवमुक्त करने की प्रक्रिया तेजी से जारी है।    राज्य सरकार ने सभी प्रक्रियागत मामलों के शीघ्र निस्तारण और अनुदान वितरण में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, ताकि योजना का लाभ समयबद्ध तरीके से किसानों तक पहुंचे। ‘नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना’ के माध्यम से उत्तर प्रदेश न केवल डेयरी सेक्टर को नई दिशा दे रहा है, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम भी उठा रहा है।

मिशन शक्ति 5.0: दूसरे चरण में प्रदेशभर में जन-जागरूकता कार्यक्रम, 21 मार्च को महिलाओं-बच्चों के अधिकारों पर फोकस

मिशन शक्ति 5.0 के दूसरे चरण के तहत प्रदेशभर में जन-जागरूकता कार्यक्रम, 21 मार्च को महिलाओं-बच्चों के अधिकारों पर फोकस यूपी में गांव से लेकर जनपद स्तर तक मोबाइल वैन, कैंप और स्टॉल के जरिए पहुंचेगा अभियान वन स्टॉप सेंटर, 181 महिला हेल्पलाइन और विभिन्न योजनाओं की दी जाएगी जानकारी लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को समर्पित ‘मिशन शक्ति 5.0’ के दूसरे चरण के तहत प्रदेशभर में व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। नवरात्र के अवसर पर महिला कल्याण विभाग द्वारा इस विशेष अभियान में 21 मार्च को सार्वजनिक स्थलों पर मोबाइल वैन, कैंप और स्टॉल लगाकर महिलाओं एवं बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। यह कार्यक्रम ग्राम, ब्लॉक और जनपद स्तर तक एक साथ संचालित होगा, जिससे अधिकतम लोगों तक सीधी पहुंच सुनिश्चित की जा सके। महिला कल्याण विभाग द्वारा 20 अप्रैल तक प्रतिदिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  गांव-गांव तक पहुंचेगा जागरूकता अभियान महिला कल्याण विभाग की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा ने बताया कि मिशन शक्ति अभियान के तहत जनपद, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मोबाइल वैन और सूचना स्टॉल के माध्यम से महिलाओं और बच्चों से सीधे संवाद स्थापित किया जाएगा। इसमें घरेलू हिंसा, सुरक्षा अधिकारों और उपलब्ध सहायता तंत्र के बारे में जानकारी दी जाएगी। स्थानीय प्रशासन और विभागीय इकाइयां मिलकर यह सुनिश्चित करेंगी कि अभियान की पहुंच दूरस्थ क्षेत्रों तक भी हो, ताकि कोई भी जरूरतमंद इससे वंचित न रहे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर योजना के प्रचार-प्रसार के लिए हैशटैग #Women&ChildrenFirst #MissionShakti प्रयोग किया जाएगा।  योजनाओं और हेल्पलाइन की दी जाएगी जानकारी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर, 181 महिला हेल्पलाइन, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना सहित विभिन्न योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। साथ ही पीड़ित महिलाओं को तत्काल सहायता दिलाने के लिए उपलब्ध सेवाओं की जानकारी भी दी जाएगी, जिससे संकट की स्थिति में वे तुरंत मदद प्राप्त कर सकें। कार्यक्रमों में जन-प्रतिनिधियों, क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों को आमंत्रित किया जाएगा तथा स्थानीय चैनलों, रेडियो कार्यक्रमों, तथा विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार किया जाएगा।  कानूनी अधिकारों पर विशेष जोर अभियान के अंतर्गत महिलाओं और बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति भी जागरूक किया जाएगा। घरेलू हिंसा अधिनियम, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न निवारण कानून, दहेज निषेध अधिनियम और बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कार्यक्रमों की निगरानी करते हुए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई हो और प्रत्येक प्रकरण का प्रभावी फॉलोअप किया जाए। समस्त जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय द्वारा प्रतिदिन की रिपोर्ट जनपद स्तर पर संकलित कर पूर्व विकसित “शक्ति वार रूम” के माध्यम से महिला कल्याण निदेशालय को निर्धारित रिपोर्टिंग प्रारूप/स्प्रेडशीट (पूर्व से प्रेषित) पर प्रतिदिन सायं 8 बजे तक अपडेट की जाएगी। यह अभियान प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नई लैब्स से केसों के निस्तारण में आएगी तेजी और दोषियों को जल्द सजा दिलाने में मिलेगी मदद :सीएम योगी

योगी सरकार अपराध के बदलते तरीकों पर पांच नई लैब्स से लगाएगी ब्रेक  सीएम योगी के निर्देश पर यूपीएसआईएफएस में जल्द स्थापित की जाएंगी पांच लैब्स – क्वांटम कंप्यूटिंग लैब, चैलेंज्ड ऑडियो-वीडियो लैब, 3-डी प्रिंटिंग लैब, एससीएडीए लैब और डिजिटल फॉरेंसिक लैब की जाएंगी स्थापित नई लैब्स से केसों के निस्तारण में आएगी तेजी और दोषियों को जल्द सजा दिलाने में मिलेगी मदद :सीएम योगी लखनऊ योगी सरकार ने अपराध के बदलते तरीकों पर रोक लगाने के लिए यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज में पांच नई लैब स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन लैब के जरिये इंस्टीट्यूट के छात्र अपराध के विभिन्न स्वरूपों की जांच करने के तरीके सीख सकेंगे। इसके साथ ही यूपी पुलिस के जांबाज भी इन लैब्स से विभिन्न तरीकों से होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने के गुण सीख सकेंगे। योगी सरकार इंस्टीट्यूट में क्वांटम कंप्यूटिंग लैब, चैलेंज्ड ऑडियो-वीडियो लैब, 3-डी प्रिंटिंग लैब, आईटी/ओटी सिक्योरिटी के लिए एससीएडीए लैब और डिजिटल फॉरेंसिक लैब शुरू करेगी। इन लैब्स के शुरू होने से प्रदेश में अपराधों की जांच और साक्ष्य विश्लेषण की क्षमता में बड़ा सुधार होगा। गौरतलब है कि वर्तमान में इंस्टीट्यूट में पांच लैब्स संचालित हैं। इनमें एडवांस्ड साइबर फॉरेंसिक, एडवांस्ड डीएनए प्रोफाइलिंग, एआई-ड्रोन एंड रोबोटिक्स, डॉक्यूमेंटेशन एग्जामिनेशन और इंस्ट्रूमेंटेशन लैब्स शामिल हैं।  क्वांटम कंप्यूटिंग लैब से जटिल डाटा एनालिसिस को तेजी से सुलझाया जा सकेगा यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज के निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा मॉर्डन टेक्नोलॉजी अपनाने पर जोर देते हैं। इसी कड़ी में सीएम योगी की मंशा के अनुरूप इंस्टीट्यूट में पांच नई लैब की स्थापना की तैयारी की जा रही है। इसमें क्वांटम कंप्यूटिंग लैब के माध्यम से जटिल डाटा एनालिसिस और एन्क्रिप्शन से जुड़े मामलों को तेजी और सटीकता से सुलझाया जा सकेगा। यह लैब साइबर अपराधों की जांच में विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी। वहीं, चैलेंज्ड ऑडियो-वीडियो लैब उन मामलों में अहम भूमिका निभाएगी, जहां खराब गुणवत्ता वाले ऑडियो या वीडियो को स्पष्ट कर साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करना होता है। डिजिटल फॉरेंसिक लैब से डिजिटल उपकरणों की डाटा रिकवरी की बढ़ेगी क्षमता 3-डी प्रिंटिंग लैब अपराध स्थलों के मॉडल तैयार करने, हथियारों के प्रतिरूप बनाने और घटनाओं के रीक्रिएशन में मदद करेगी। इससे जांच एजेंसियों को केस को बेहतर तरीके से समझने और अदालत में प्रभावी प्रस्तुति देने में सहायता मिलेगी। वहीं, एससीएडीए लैब आईटी और ओटी (ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी) सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच के लिए महत्वपूर्ण होगी, खासकर औद्योगिक संस्थानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर होने वाले साइबर हमलों की पड़ताल में अहम भूमिका निभाएगी। इसके अलावा डिजिटल फॉरेंसिक लैब से मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों से डाटा रिकवरी और विश्लेषण की क्षमता बढ़ेगी। इससे साइबर क्राइम, वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य तकनीकी अपराधों की जांच और भी प्रभावी हो सकेगी। नई लैब्स के शुरू होने से केसों के निस्तारण में आएगी तेजी  योगी सरकार द्वारा प्रदेश में फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। योगी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में न केवल नए फॉरेंसिक संस्थानों की स्थापना पर जोर दिया है, बल्कि मौजूदा लैब्स को आधुनिक तकनीकों से लैस करने का भी काम किया है। पुलिस और जांच एजेंसियों को वैज्ञानिक साक्ष्य आधारित जांच के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे अपराधियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किए जा सकें। योगी सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश में न्याय प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया जाए। नई लैब्स के शुरू होने से केसों के निस्तारण में तेजी आएगी और दोषियों को जल्द सजा दिलाने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने में भी योगदान मिलेगा।

मुख्यमंत्री योगी की दूरदृष्टि और कार्ययोजना से यूपी बना निवेशकों की शीर्ष पसंद

₹7.5 लाख करोड़ की नई परियोजनाओं के साथ पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी मुख्यमंत्री योगी की दूरदृष्टि व सुनियोजित कार्ययोजना से यूपी बना निवेशकों की पहली पसंद रिफॉर्म, परफॉर्म व ट्रांसफॉर्म के मंत्र से बदली प्रदेश की तस्वीर सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, हर मोर्चे पर तैयार की गई निवेश के लिए आदर्श जमीन लखनऊ उत्तर प्रदेश ने पिछले 9 वर्षों में जो परिवर्तन देखा है, वह केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक आर्थिक और औद्योगिक बदलाव की कहानी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदृष्टि व सुनियोजित कार्ययोजना के तहत “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” के मंत्र ने प्रदेश को निवेश के नक्शे पर नई पहचान दिलाई है। यह योगी सरकार की नियोजित कार्यशैली का नतीजा है कि अब तक चार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के जरिये लगभग ₹15 लाख करोड़ की परियोजनाएं धरातल पर उतारी जा चुकी हैं, जबकि ₹7.5 लाख करोड़ की नई परियोजनाओं के साथ पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी है। निवेश व उद्यमिता के मोर्चे पर बुरी तरह पिछड़ रहे उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में योगी सरकार आने पर स्थिति में सुधार के लिए बिंदुवार योजना तैयार की गई। सबसे पहले योजनाबद्ध तरीके से सिस्टम में सुधार (रिफॉर्म) किया गया, फिर परफॉर्मेंस के जरिए नीतियों को जमीन पर उतारा गया और अंततः ट्रांसफॉर्म के माध्यम से प्रदेश की छवि बदल गई। हर क्षेत्र के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया, निवेश प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाया गया। निवेश व उद्योग के रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहचान कर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत 13 अधिनियमों में 99% छोटे आपराधिक प्रावधान समाप्त कर कारोबार को आसान किया गया। प्रदेश में निवेश के अनुकूल माहौल तैयार करना केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर निवेश के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार किया गया। उद्योगों के लिए प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं और डि-रेगुलेशन सुधार लागू किए गए। इसी का परिणाम है कि योगी सरकार के अस्तित्व में आने के बाद यूपी को ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए।  योगी सरकार की नीति प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए सेक्टरवार विशेष औद्योगिक क्षेत्रों का विकास करना भी रही। इसके तहत राज्य में उद्योग विशेष के लिए क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। फिल्म सिटी, टॉय पार्क, लॉजिस्टिक हब (यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र), फार्मा पार्क (झांसी-ललितपुर) मेगा टेक्सटाइल पार्क (लखनऊ-हरदोई), परफ्यूम पार्क (कन्नौज), प्लास्टिक, गारमेंट और लेदर क्लस्टर (गोरखपुर, कानपुर, हरदोई) क्षेत्र विशेष के निवेश को आकर्षित करने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।  निवेश का ड्रीम डेस्टिनेशन बनकर उत्तर प्रदेश 1 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का स्पष्ट फोकस हाईटेक सेक्टर जैसे एआई, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण पर है, जहां निवेश के साथ-साथ युवाओं के लिए नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं। साथ ही, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क जैसे मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए निवेश को गति दी जा रही है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की कहानी अब महज सुधार तक सीमित नहीं, बल्कि एक व्यापक परिवर्तन की मिसाल बन चुकी है, जहां “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” का मंत्र प्रदेश को सुरक्षित, सक्षम और निवेश के लिए सबसे उपयुक्त गंतव्य में बदल चुका है।

1.43 करोड़ बच्चों का परीक्षण कर फरवरी में पोषण स्थिति में सुधार किया गया

फरवरी में बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार, 1.43 करोड़ बच्चों का हुआ परीक्षण नाटेपन में लगभग 1.21 प्रतिशत,  अति कुपोषित श्रेणी के बच्चों में लगभग 0.12 प्रतिशत तथा अंडरवेट बच्चों में लगभग 0.61 प्रतिशत का सुधार     जनवरी के मुकाबले फरवरी में कुपोषण संकेतकों में गिरावट, योगी सरकार के पोषण कार्यक्रमों का असर लखनऊ  उत्तर प्रदेश में बच्चों की पोषण की स्थिति में सुधार के सकारात्मक संकेत मिले हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण ट्रैकर पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 की तुलना में फरवरी 2026 में स्टंटिंग में लगभग 1.21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि अति कुपोषित श्रेणी के बच्चों में लगभग 0.12 प्रतिशत तथा अंडरवेट बच्चों में लगभग 0.61 प्रतिशत का सुधार देखा गया है। ये दिखाता है कि योगी सरकार योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए गंभीर है और बच्चों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं कर रही है।  बड़े पैमाने पर हुआ बच्चों का परीक्षण पोषण ट्रैकर के माध्यम से बच्चों की पोषण स्थिति की नियमित निगरानी की जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह वर्ष तक के बच्चों की लंबाई, वजन और आयु का आकलन कर उनकी पोषण स्थिति का निर्धारण किया जाता है। फरवरी में प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर परीक्षण अभियान चलाया गया, जिसके तहत 1 करोड़ 43 लाख से अधिक बच्चों का परीक्षण किया गया। डिजिटल निगरानी से मिल रहे सकारात्मक परिणाम प्रदेश में पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बच्चों की पोषण स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इससे डेटा का संकलन और विश्लेषण अधिक सटीक और पारदर्शी हुआ है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा नियमित रूप से बच्चों का परीक्षण और डेटा अपडेट किए जाने से कुपोषण की समय रहते पहचान और आवश्यक हस्तक्षेप संभव हो पा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इसी तरह की निरंतर निगरानी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से आने वाले समय में पोषण संकेतकों में और सुधार देखने को मिलेगा।

यूपी में महिला निदेशकों की अगुवाई में स्टार्टअप्स का विस्फोट, 174 से 2525 तक पहुंची संख्या

महिला निदेशकों की अगुवाई में यूपी का स्टार्टअप बूम, 174 से 2525 पहुंची संख्या    योगी सरकार में महिला भागीदारी वाले स्टार्टअप्स में यूपी की बढ़ रही हिस्सेदारी 2017 से 2025 तक मजबूत उछाल, 2026 में भी 300 से ज्यादा डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त नए स्टार्टअप जुड़े योगी सरकार की नीतियों से महिला उद्यमिता को मिला निर्णायक बल लखनऊ  उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है और यह बढ़त अब धरातल पर स्पष्ट दिखाई देने लगी है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में महिला निदेशक या साझेदार वाले स्टार्टअप्स की संख्या में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में केवल 174 ऐसे स्टार्टअप्स थे जिन्हें डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त थी और जिनमें कम से कम एक महिला निदेशक या साझेदार शामिल थी। यह संख्या लगातार बढ़ते हुए वर्ष 2025 में 2525 तक पहुंच गई।  31 जनवरी 2026 तक भी 301 नए स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी दर्ज की गई है। ये सभी स्टार्टअप्स डीपीआईआईटी की ओर से आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त हैं। प्रदेश में इस बढ़त को योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार ने स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए निवेश अनुकूल माहौल, प्रक्रियाओं में सरलता और युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है। इसका असर खासतौर पर महिला उद्यमिता पर पड़ा है, जहां बड़ी संख्या में महिलाएं अब निदेशक और साझेदार के रूप में सामने आ रही हैं। केंद्र सरकार की स्टार्टअप इंडिया पहल के साथ राज्य स्तर पर मिले सहयोग ने इस वृद्धि को गति दी है। फंड ऑफ फंड्स, स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम और क्रेडिट गारंटी स्कीम जैसी योजनाओं के जरिए स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार तक वित्तीय सहायता मिल रही है। इसका लाभ उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को भी मिला है, जिससे नए स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से उभरते स्टार्टअप केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। महिला भागीदारी में हो रही लगातार वृद्धि यह संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश में उद्यमिता का दायरा व्यापक हो रहा है और महिलाएं इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं। प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम न केवल विस्तार कर रहा है, बल्कि महिला सशक्तीकरण के एक नए मॉडल के रूप में भी स्थापित कर रहा है। जहां नीतिगत समर्थन और बढ़ती भागीदारी मिलकर नई आर्थिक संभावनाओं को जन्म दे रही है।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में राष्ट्रपति ने की श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठा

राष्ट्रपति ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में की श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना राष्ट्रपति, राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने किए रामलला के दर्शन, चरणों में झुकाया शीश अयोध्या/लखनऊ  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना की। राष्ट्रपति ने नव संवत्सर पर रामलला के चरणों में शीश झुकाकर व आरती उतारकर श्रद्धा निवेदित की। इस दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राष्ट्रपति के साथ रामलला की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति, राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में सभी देवों के समक्ष शीश झुकाया। राष्ट्रपति ने श्रीराम मंदिर परिसर का भ्रमण कर यहां की दीवारों पर उकेरी गईं आकृतियों का भी अवलोकन किया। राष्ट्रपति ने पूज्य संतों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीरामयंत्र की विधिवत प्रतिष्ठापना की। श्रीराम यंत्र दो वर्ष पूर्व जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज द्वारा शोभायात्रा के माध्यम से अयोध्या भेजा गया था। वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों पर आधारित यह यंत्र देवताओं का निवास माना जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करने की क्षमता रखता है। दक्षिण भारत, काशी, अयोध्या के आचार्यों द्वारा मंदिर में श्रीराम यंत्र के लिए नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान पहले से ही शुरू हो चुका था। यंत्र प्रतिष्ठापना के समय राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मां अमृतानंदमयी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी अनिल मिश्रा, सदस्य गोपाल जी आदि मौजूद रहे।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने रामनगरी में राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया

रामनगरी में राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने किया राष्ट्रपति का स्वागत  महापौर ने देश की प्रथम नागरिक को सौंपी ‘नगर की चाबी’  एयरपोर्ट से राम मंदिर के रास्ते में कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से राष्ट्रपति का किया भव्य स्वागत अयोध्या  चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु रामनगरी पहुंचीं। यहां उनका भव्य स्वागत किया गया। उनका अयोध्या आगमन ऐतिहासिक व सांस्कृतिक गरिमा से परिपूर्ण रहा। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।  महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने राष्ट्रपति का अभिवादन करते हुए उन्हें ‘नगर की चाबी’ भेंट की। यह सम्मान अतिथि को नगर की ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्च प्रतीकात्मक सम्मान माना जाता है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का अयोध्या का यह दूसरा दौरा है। एयरपोर्ट से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तक कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से किया भव्य स्वागत अयोध्या एयरपोर्ट से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए जैसे ही राष्ट्रपति का काफिला रवाना हुआ, पूरे मार्ग पर उत्सव जैसा दृश्य देखने को मिला। सड़क के दोनों ओर करीब 20 सांस्कृतिक मंच सजाए गए थे, जहां लगभग 250 कलाकारों ने रामायण आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भारतीय वेशभूषा में कलाकारों ने स्वागत गीत, भजन, अवधी-भोजपुरी लोकगायन-लोकनृत्य समेत भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत कार्यक्रमों के जरिए मन मोह लिया।  हर ओर उत्साह व उल्लास अयोध्यावासियों ने भी सड़क किनारे खड़े होकर पुष्प वर्षा, जयकारों संग देश की प्रथम नागरिक का गर्मजोशी से स्वागत किया। राष्ट्रपति ने भी अयोध्यावासियों का अभिवादन किया। कार्यक्रम को और भव्य बनाने के लिए रामलीला के अंश, झांकियां, ढोल-नगाड़ा, शंखनाद, वेदपाठ और भजन-कीर्तन जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिससे अयोध्या की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। राष्ट्रपति के आगमन के मद्देनजर सजी अयोध्या नगरी में हर ओर श्रद्धा, उत्साह और उल्लास का वातावरण रहा।

वन एवं अर्थव्यवस्थाएं विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन करेंगे सीएम योगी

सीएम योगी करेंगे ‘वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर लखनऊ में ‘अरण्य समागम’ का आयोजन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शनिवार सुबह 10 बजे होगा कार्यक्रम, विशेषज्ञों और गणमान्य अतिथियों की रहेगी मौजूदगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को राजधानी के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (आईजीपी) के मार्स हॉल में प्रातः 10:00 बजे ‘वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन करेंगे। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय वन दिवस (21 मार्च) के अवसर पर आयोजित ‘अरण्य समागम’ के तहत किया जा रहा है। इस आयोजन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ तथा गणमान्य अतिथि भाग लेंगे। ’वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषय पर होगा मंथन ‘अरण्य समागम’ के अंतर्गत आयोजित इस राष्ट्रीय वानिकी संवाद में वन और अर्थव्यवस्था के बीच संबंधों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। इस मंच के माध्यम से सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। हरित प्रदेश के लक्ष्य को नई गति प्रदेश में ‘स्वच्छ-समृद्ध-हरित प्रदेश’ के संकल्प के तहत पिछले 9 वर्षों में 242 करोड़ से अधिक पौधरोपण किया गया है। हरित क्षेत्र बढ़ाने के सतत प्रयासों से प्रदेश का वनावरण 9.96 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। निजी भूमि पर पौधरोपण को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री कृषक वृक्ष धन योजना संचालित की जा रही है, जबकि पीएम मोदी के विजन के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान जन आंदोलन का रूप ले चुका है। किसानों को कार्बन क्रेडिट की धनराशि वितरित करने वाला उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बना है और वर्षाकाल 2026 में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योगी सरकार की महत्वपूर्ण पहल उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘स्वच्छ-समृद्ध-हरित प्रदेश’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में यह आयोजन योगी सरकार की एक और महत्वपूर्ण पहल है। वन संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ‘एक और कदम हरियाली की ओर’ संदेश के साथ आयोजित यह कार्यक्रम जनभागीदारी को प्रोत्साहित करेगा और प्रदेश को हरित एवं समृद्ध बनाने के संकल्प को और मजबूत करेगा। कार्यक्रम में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पर्यावरण, वन, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन  डॉ. अरुण कुमार सक्सेना तथा राज्य मंत्री पर्यावरण, वन, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन केपी मलिक की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। इसके अलावा अन्य गणमान्य अतिथि और विशेषज्ञ भी कार्यक्रम में शामिल होंगे, जो अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे। यह आयोजन नीति और व्यवहार के बीच समन्वय स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

अब नए वर्ष पर परिवार के साथ मंदिर जाते हैं लोग: मुख्यमंत्री

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र प्रतिष्ठापना कार्यक्रम  सनातन विरोध वाले स्थानों पर नहीं जाती वर्तमान पीढ़ी: सीएम योगी अब नए वर्ष पर परिवार के साथ मंदिर जाते हैं लोग: मुख्यमंत्री  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में की श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना मुख्यमंत्री ने कहा, दुनिया में युद्ध चल रहे और हम कर रहे रामराज्य की अनुभूति अयोध्या/लखनऊ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना की। इस अवसर पर राष्ट्रपति की उपस्थिति में गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने सबसे पहले प्रदेशवासियों को भारतीय नवसंवत्सर की शुभकामना दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरयू मैया अयोध्या धाम को पवित्र करते हुए अपने निर्मल जल से पूरे क्षेत्र को पवित्र करती हैं। रामराज्य की अनुभूति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में युद्ध चल रहे हैं और हम श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना कार्यक्रम में सहभागी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने वर्तमान पीढ़ी की प्रशंसा की और कहा कि यह पीढ़ी नववर्ष पर ऐसे किसी टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर नहीं जाती, जहां सनातन के विरोध में कोई कार्य हो रहा है। वह नए वर्ष पर परिवार के साथ मंदिर जाती है। हर सनातन धर्मावलंबी व सच्चा भारतीय आनंदित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व-मार्गदर्शन में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन, श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा, रामदरबार के पवित्र विग्रह की स्थापना, ध्वजा आरोहण और आज श्रीराम यंत्र की स्थापना का कार्यक्रम हर सनातन धर्मावलंबी व सच्चे भारतीय को आनंद से विभोर कर देता है और यही भारत की आस्था है।  राम मंदिर को अंधविश्वास बताने वाले सत्ता बचाने के लिए नोएडा नहीं जाते थे सीएम योगी ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा, कहा कि आस्था को अंधविश्वास कहकर अपमानित किया गया था। इसे अपमानित करने वाले वही लोग हैं, जो सत्ता बचाने के लिए नोएडा नहीं जाते थे। नोएडा न जाना उनके लिए अंधविश्वास नहीं था, लेकिन राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, कृष्ण-कन्हैया के मथुरा-वृंदावन की बात करना अंधविश्वास का पर्याय था। लेकिन जो आस्था 500 वर्ष तक निरंतर बनी रही, संघर्षों का मुकाबला करती रही, वह न रुकी, न डिगी और न झुकी। आस्था को अपमानित करने वाली सत्ता के खिलाफ संघर्ष निरंतर जारी रहा। अंततः वह दिन आया, जब अयोध्या इस रूप में सबके सामने है।  श्रीराम मंदिर भारत के राष्ट्र मंदिर का बना प्रतीक  सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर भारत के राष्ट्र मंदिर का प्रतीक बन गया है। यह रामराज्य की आधारशिला भी है। दुनिया में तमाम युद्ध चल रहे हैं, अव्यवस्था, आर्थिक अराजकता, भय-आतंक है और अयोध्याधाम में हजारों की संख्या में उपस्थित हम लोग भयमुक्त होकर राष्ट्रपति जी के अभिवादन और श्रीराम यंत्र की स्थापना कार्यक्रम में सहभागी बनकर रामराज्य की अनुभूति कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि भारत इसलिए भारत बना है, क्योंकि इसे ऋषि-मुनियों की तपस्या, अन्नदाता किसानों के परिश्रम, कारीगरों की उद्यमिता और भारत की आस्था ने सदैव ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के रूप में बनाए रखा। श्रीराम जन्मभूमि यज्ञ की पूर्णाहुति कार्यक्रम के साथ जुड़कर न केवल प्रदेशवासी, बल्कि देश-दुनिया के सनातन धर्मावलंबी के मन में भी आनंद की अनुभूति हो रही है। 2025 में 156 करोड़ श्रद्धालु आए उत्तर प्रदेश  सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2025 में 156 करोड़ श्रद्धालु-पर्यटक धार्मिक व आध्यात्मिक स्थलों की यात्रा करने उत्तर प्रदेश आए। अयोध्या, काशी, प्रयागराज महाकुम्भ, मथुरा-वृंदावन में दर्शन करने जितने लोग आए, उतनी आबादी कई देशों की नहीं है। यह नया और बदलता भारत है। वर्तमान पीढ़ी अब दिग्भ्रमित नहीं है, वह सही दिशा में जा रही है। वह नए वर्ष पर परिवार के साथ मंदिर जाती है। लोग किसी ऐसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर नहीं जाते, जहां सनातन के विरोध में कोई कार्य हो रहा है। सीएम योगी ने बलिदान देने वाले रामभक्तों, संतों को किया नमन  सीएम ने राम मंदिर निर्माण यज्ञ में योगदान देने वाले संतों, रामभक्तों, कारीगरों/श्रमिकों का अभिनंदन किया। उन्होंने आंदोलन के दौरान बलिदान देने वाले रामभक्तों के साथ ही संतों व दिवंगत विहिप नेता अशोक सिंहल आदि को नमन किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को स्मृति चिह्न प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने किया। इस दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मां अमृतानंदमयी (अम्मा), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक भैया जी, श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी अनिल मिश्रा, मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले कारीगरों के पारिवारिक सदस्यों समेत हजारों रामभक्त मौजूद रहे।

रामपुर, गोरखपुर, आगरा और प्रयागराज सहित 10 जिलों के अधिकारियों से सीएम योगी ने मांगी रिपोर्ट, अहम निर्देश दिए

लखनऊ यूपी में आने वाले दिनों में एक के बाद एक बड़े धार्मिक पर्वों को देखते हुए सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर साफ संदेश दिया कि कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने प्रदेश के 10 संवेदनशील जिलों के अधिकारियों से हालिया घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में प्रदेश के सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारी जुड़े. बैठक का फोकस साफ था कि त्योहारों के दौरान शांति, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द हर हाल में बनाए रखना। 10 जिलों पर खास नजर, मांगी गई रिपोर्ट मुख्यमंत्री ने बदायूं, मुरादाबाद, रामपुर, गाजियाबाद, जालौन, गोरखपुर, आगरा, जौनपुर, प्रतापगढ़ और प्रयागराज में हाल के दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं को गंभीरता से लिया. उन्होंने संबंधित जिलों के अधिकारियों से इन घटनाओं पर अब तक हुई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा तलब किया. सीएम ने दो टूक कहा कि अपराध की एक भी घटना पूरे माहौल को प्रभावित करती है, इसलिए हर शिकायत पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपराधियों में पुलिस का खौफ दिखना चाहिए, तभी कानून का असर जमीन पर नजर आएगा। त्योहारों को लेकर सख्त निर्देश बैठक में खास तौर पर चैत्र नवरात्र, अलविदा की नमाज और ईद-उल-फितर को लेकर तैयारियों की समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन अवसरों पर किसी भी तरह की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति पैदा न होने पाए. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की उद्दंडता या माहौल बिगाड़ने की कोशिश को तुरंत रोका जाए और दोषियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए. प्रशासन को निर्देश दिया गया कि संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए। मंदिरों में व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश चैत्र नवरात्र के दौरान देवी मंदिरों में भारी भीड़ को देखते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष इंतजाम करने को कहा. उन्होंने साफ निर्देश दिए कि मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल, रोशनी और स्वास्थ्य सुविधाओं की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए. भीड़ प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन को अलर्ट किया गया है, ताकि किसी भी तरह की भगदड़ या अव्यवस्था की स्थिति न बने. प्रमुख मंदिरों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के भी निर्देश दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आयोजनों में किसी भी नई परंपरा की अनुमति नहीं दी जाएगी. जो परंपराएं पहले से चली आ रही हैं, उन्हीं का पालन सुनिश्चित किया जाए. इसका मकसद यह है कि किसी भी नई गतिविधि के कारण विवाद की स्थिति पैदा न हो। लाउडस्पीकर और स्टंटबाजी पर सख्ती सीएम योगी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज तय मानकों के भीतर ही रहनी चाहिए. यदि कहीं नियमों का उल्लंघन होता है, तो तुरंत कार्रवाई करते हुए लाउडस्पीकर हटाए जाएं. इसके साथ ही उन्होंने बाइक स्टंटबाजी पर भी सख्त नाराजगी जताई. अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सड़कों पर इस तरह की गतिविधियों को तुरंत रोका जाए और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. बैठक में चेन स्नेचिंग की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई गई. मुख्यमंत्री ने पीआरवी-112 वाहनों की गश्त बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि पुलिस की मौजूदगी ऐसी होनी चाहिए कि अपराधी वारदात करने से पहले ही डर जाएं। एलपीजी सप्लाई पर भी सरकार सख्त मुख्यमंत्री ने एलपीजी गैस की आपूर्ति को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर आम जनता पर नहीं पड़ना चाहिए. कहीं भी कृत्रिम कमी, जमाखोरी या कालाबाजारी की शिकायत मिलती है, तो दोषियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए। राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे की तैयारी अयोध्या और मथुरा-वृंदावन में राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी तैयारियां तय प्रोटोकॉल के तहत पूरी की जाएं और किसी भी स्तर पर चूक न हो. मुख्यमंत्री ने निराश्रित गोवंश के संरक्षण को लेकर भी अधिकारियों को निर्देशित किया. उन्होंने कहा कि गो-आश्रय स्थलों में व्यवस्थाएं मजबूत की जाएं, समय पर धनराशि जारी हो और चारे सहित सभी जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. बैठक से पहले पुलिस महानिदेशक ने जानकारी दी कि चैत्र नवरात्र, ईद और रामनवमी के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल पूरी तरह तैयार है. संवेदनशील इलाकों में फुट पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।  

लापरवाही बर्दाश्त नहीं, हर हाल में शांति सुनिश्चित करें, मुख्यमंत्री का प्रशासन को सख्त निर्देश

पर्व-त्योहार परंपरा के दायरे में, उपद्रव बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी का सख्त संदेश, त्योहारों पर शांति सर्वोपरि, माहौल बिगाड़ने वालों के विरुद्ध होगी कठोर कार्रवाई पुलिस बल को मुख्यमंत्री की दो टूक- अपराधियों में हो पुलिस की वर्दी का खौफ लापरवाही बर्दाश्त नहीं, हर हाल में शांति सुनिश्चित करें, मुख्यमंत्री का प्रशासन को सख्त निर्देश कोई घटना छोटी नहीं, हर सूचना का गंभीरता से लें संज्ञान: मुख्यमंत्री सफल न हों माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले, उपद्रवियों पर होगी कठोर कार्रवाई: मुख्यमंत्री एलपीजी की कालाबाजारी करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, निराश्रित गो-आश्रय स्थलों में अच्छी व्यवस्था के निर्देश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ पर कड़ी चेतावनी देते हुए साफ कहा है कि पर्व-त्योहारों के दौरान सार्वजनिक उद्दंडता और माहौल बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा, ऐसी हर घटना के दोषियों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस के साथ कठोरतम कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर हाल में शांति, सुरक्षा और अनुशासन सुनिश्चित किया जाए, किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं होगी। साथ ही, धार्मिक आयोजनों में परंपरागत स्वरूप का ही पालन कराया जाए और किसी भी नई परंपरा की अनुमति न दी जाए। बुधवार देर शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने गुरुवार से प्रारंभ हो रहे चैत्र नवरात्र, 20 मार्च को अलविदा की नमाज और 21 मार्च को ईद-उल-फितर के मद्देनज़र व्यापक तैयारियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को निर्देशित किया कि संवेदनशीलता और समन्वय के साथ कार्य करते हुए शांतिपूर्ण माहौल सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि चैत्र नवरात्र के दौरान देवी मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए सुरक्षा, स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन, पेयजल, प्रकाश और स्वास्थ्य सेवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। प्रमुख मंदिरों और भीड़भाड़ वाले स्थलों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए। बदायूं, मुरादाबाद, रामपुर, गाजियाबाद, जालौन, गोरखपुर, आगरा, जौनपुर, प्रतापगढ़ और प्रयागराज में हाल में हुई आपराधिक घटनाओं का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई का ब्यौरा लिया। उन्होंने दो टूक कहा कि अपराध की एक भी घटना पूरे समाज का माहौल बिगाड़ती है, इसलिए हर शिकायत और हर घटना को गंभीरता से लिया जाए। दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। चेन स्नेचिंग की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने पीआरवी-112 वाहनों की निरंतर गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि अपराधियों में पुलिस की वर्दी का खौफ होना चाहिए।  मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्मस्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज निर्धारित मानकों के भीतर ही रखी जाए, अन्यथा सख्ती से हटाने की कार्रवाई की जाए। बाइक स्टंटबाजी पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने इसे तत्काल रोकने के निर्देश दिए। एलपीजी आपूर्ति के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच भी आमजन को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। कृत्रिम कमी, जमाखोरी और कालाबाजारी पर कड़ी नजर रखी जाए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। आमजन की समस्याओं का त्वरित और संवेदनशील समाधान सुनिश्चित किया जाए। अयोध्या और मथुरा-वृंदावन में माननीय राष्ट्रपति महोदया के प्रस्तावित आगमन के दृष्टिगत मुख्यमंत्री ने निर्धारित प्रोटोकॉल का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। संबंधित जिलाधिकारियों ने तैयारियों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने निराश्रित गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश देते हुए नोडल अधिकारियों की तैनाती, समयबद्ध धनराशि भुगतान और गोवंश के संरक्षण, चारा व अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने को कहा। बैठक से पूर्व पुलिस महानिदेशक ने अवगत कराया कि चैत्र नवरात्र, ईद-उल-फितर और आगामी श्रीरामनवमी के शांतिपूर्ण आयोजन हेतु पुलिस बल पूरी तरह सतर्क है तथा फुट पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, अपर पुलिस महानिदेशक (जोन), पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक (रेंज), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक सहित शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

ग्रीन एनर्जी, एआई, डिफेंस व शिक्षा में सहयोग की संभावनाएं, कनाडाई पक्ष ने दिखाई गहरी रुचि

मुख्यमंत्री योगी से कनाडा के उच्चायुक्त की मुलाकात, यूपी में निवेश व टेक्नोलॉजी सहयोग पर जोर भारत-कनाडा साझेदारी को नई गति, उच्चायुक्त ने यूपी को बताया निवेश व इनोवेशन का उभरता केंद्र ग्रीन एनर्जी, एआई, डिफेंस व शिक्षा में सहयोग की संभावनाएं, कनाडाई पक्ष ने दिखाई गहरी रुचि लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने बुधवार को भेंट कर उत्तर प्रदेश में निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और कौशल विकास के क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की। उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने भारत-कनाडा के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की व्यापक संभावनाओं पर जोर देते हुए उत्तर प्रदेश को एक उभरते निवेश और नवाचार केंद्र के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में हुए व्यापक परिवर्तन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने बीते वर्षों में आधारभूत संरचना, नीतिगत सुधार और सुशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे यह वैश्विक निवेशकों के लिए एक विश्वसनीय और आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा है।  भेंट के दौरान उच्चायुक्त ने ग्रीन एनर्जी, एलएनजी/एलपीजी, क्रिटिकल मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने में गहरी रुचि व्यक्त की। उन्होंने शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में साझेदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कनाडा के अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों और उत्तर प्रदेश के बीच सहयोग से कौशल विकास, नवाचार और वैश्विक प्रतिभा विनिमय को नई गति मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारभूत संरचना, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश-अनुकूल नीतियां इसे वैश्विक कंपनियों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाती हैं। उच्चायुक्त ने यह भी कहा कि कनाडाई कंपनियां उत्तर प्रदेश में दीर्घकालिक निवेश और तकनीकी साझेदारी के लिए सक्रिय रूप से अवसरों का आकलन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सतत ऊर्जा, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्रों में कनाडा की विशेषज्ञता, उत्तर प्रदेश की विकास आकांक्षाओं के साथ स्वाभाविक रूप से मेल खाती है, जिससे दोनों पक्षों के बीच एक मजबूत साझेदारी विकसित की जा सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में उपलब्ध निवेश-अनुकूल वातावरण, औद्योगिक विकास और नीतिगत सुधारों का संक्षिप्त उल्लेख करते हुए कनाडा की कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और ब्रह्मोस परियोजना का उल्लेख करते हुए राज्य की बढ़ती औद्योगिक क्षमता को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेशकों के लिए पारदर्शी, स्थिर और उद्योग-अनुकूल नीति वातावरण सुनिश्चित कर रही है तथा कनाडा के साथ तकनीक, कौशल और नवाचार आधारित सहयोग को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए हर संभव संस्थागत समर्थन उपलब्ध कराया जाएगा। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने निवेश, तकनीकी सहयोग और कौशल विकास के क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

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