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योगी सरकार में डिजिटल क्रॉप सर्वे को मिली रफ्तार, खरीफ और रबी दोनों सीजन में बड़े पैमाने पर सर्वे पूरा

किसानों के हित में बड़ा कदम, यूपी में तेजी से आगे बढ़ रहा ‘फार्मर रजिस्ट्री’ अभियान लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में योगी सरकार लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री अभियान के माध्यम से किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और कृषि व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। खरीफ और रबी दोनों सीजन में डिजिटल क्रॉप सर्वे को तेजी से आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत प्रदेश के राजस्व गांवों में बड़ी संख्या में खेतों और फसलों का डिजिटल सर्वे किया जा रहा है, जिससे फसल से संबंधित सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें। इसके अलावा किसानों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिल सके।   प्रदेश में कुल 1,08,935 राजस्व गांवों में से 95,765 गांवों का जियो रेफरेंसिंग कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। इसके आधार पर खरीफ और रबी दोनों सीजन में लाखों खेतों का डिजिटल सर्वे किया गया है। खरीफ सीजन में 5,37,08,511 से अधिक प्लॉट का सर्वे अंतिम रूप से स्वीकृत किया गया है, जबकि रबी सीजन में भी 5,56,44,677 से अधिक प्लॉट का सर्वे पूरा किया जा चुका है। फार्मर रजिस्ट्री अभियान को मिली गति योगी सरकार द्वारा किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अभियान को भी मिशन मोड में चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार प्रदेश में पीएम किसान योजना के लाभार्थियों की संख्या लगभग 2,88,70,495 है। सत्यापन अभियान के बाद 2,31,36,350 से अधिक किसानों का डेटा उपलब्ध हुआ है। इनमें से अब तक 1, 67,01,996 से अधिक पीएम किसान सम्मान योजना के लाभार्थी फार्मर रजिस्ट्री में शामिल हो चुके हैं, जो कुल लक्ष्य का लगभग 72.19 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त करीब 28, 37,162 वे किसान भी फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकृत किए गए हैं जो पीएम किसान सम्मान योजना में शामिल नहीं हैं।    डिजिटल तकनीक से कृषि व्यवस्था होगी मजबूत योगी सरकार का मानना है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों का सटीक डाटाबेस तैयार होगा, जिससे फसल बीमा, कृषि अनुदान, आपदा राहत और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ सही किसान तक पहुंचाने में आसानी होगी। इससे कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता भी बढ़ेगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी।    योगी सरकार के कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा देने से उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होता जा रहा है। आने वाले समय में इन पहल के माध्यम से किसानों को योजनाओं का लाभ और अधिक प्रभावी तरीके से मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, आंगनबाड़ी सहायिकाओं और उनके परिवार के बनाए गए कार्ड

लखनऊ आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत छूटे पात्र लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड का लाभ देने के लिए योगी सरकार प्रदेश भर में विशेष अभियान चला जा रही है। अभियान की शुरुआत बीते साल 25 नवंबर को हुई। यह 25 दिसंबर, 2025 तक चला। इस दौरान 5 लाख 52 हजार से अधिक कार्ड बनाए गए। अभियान की सफलता को देखते हुए इस साल 15 जनवरी से दोबारा विशेष अभियान शुरू किया गया, जो वर्तमान में चल रहा है। विशेष अभियान की अवधि में अब तक 17 लाख 94 हजार से अधिक कार्ड बनाए जा चुके हैं। अभियान के दौरान विशेष रूप से आशा कार्यकताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी सहायिकाओं के साथ उनके परिवार के कार्ड बनाए जा रहे हैं। अभियान के दौरान सबसे अधिक बरेली में कार्ड बनाए गए। इससे बरेली कार्ड बनाने में पूरे प्रदेश में पहले, जौनपुर दूसरे और आगरा तीसरे स्थान पर हैं।   70 वर्ष या अधिक आयु के करीब 25 लाख 70 हजार बुजुर्गों के कार्ड बनाए गए   साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक आयुष्मान कार्ड बनाने वाला राज्य बन चुका है। योजना के तहत प्रदेश में अब तक लगभग 5.64 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे करोड़ों परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित वय वंदना योजना के तहत 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के करीब 25 लाख 70 हजार बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।  उन्होंने बताया कि योगी सरकार वंचित पात्र लाभार्थियों को योजना से जोड़ने के लिए प्रदेश भर में विशेष अभियान चला जा रही है। यह अभियान पहले 25 नवंबर से 25 दिसंबर, 2025 तक संचालित किया गया। अभियान की सफलता को देखते हुए इसे इस साल 15 जनवरी से 15 अप्रैल तक विस्तारित किया गया है। अभियान के तहत 12 मार्च तक 17 लाख 94 हजार से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। अभियान को स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से संचालित किया जा रहा है। ग्राम स्तर पर स्वयंसेवकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के माध्यम से पात्र परिवारों तक पहुंच बनाकर उनका सत्यापन किया गया और मौके पर ही आयुष्मान कार्ड बनाए गए। अभियान के दौरान सबसे अधिक बरेली ने 1,12,855 कार्ड बनाकर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह जौनपुर 83,042 कार्ड बनाकर दूसरे, आगरा 76,702 कार्ड बनाकर तीसरे स्थान पर है जबकि प्रयागराज 74,252 कार्ड बनाकर चौथे और आजमगढ़ 70,266 कार्ड बनाकर पांचवे स्थान पर है।  1.51 लाख आंगनबाड़ी सहायिकाओं और उनके परिवार के बनाए गए कार्ड साचीज की एसीईओ डॉ. पूजा यादव ने बताया कि विशेष अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और आंगनबाड़ी सहायिकाओं तथा उनके परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में लगभग 4.28 लाख आशा कार्यकर्ता और उनके परिवार के सदस्य योजना के दायरे में आते हैं। इनमें से 12 मार्च तक करीब 3.24 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। अभी लगभग 1.03 लाख लोगों के कार्ड बनना शेष है। इस दौरान सबसे अधिक कुशीनगर में 6,620 कार्ड बनाए गए। इसी प्रकार लगभग 2.17 लाख आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और उनके परिवारों में से 1.53 लाख के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जबकि लगभग 64 हजार लाभार्थियों के कार्ड बनने बाकी हैं। इस दौरान सबसे अधिक अंबेडकरनगर में 3,176 कार्ड बनाए गए। वहीं 2.32 लाख आंगनबाड़ी सहायिकाओं और उनके परिवारों में से लगभग 1.51 लाख लोगों के कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जबकि करीब 81 हजार लोगों के कार्ड बनना अभी शेष है। इस दौरान सबसे अधिक अंबेडकरनगर में 3,077 कार्ड बनाए गए। वहीं जीरो पावर्टी अभियान के तहत चिन्हित निर्धन परिवार के सदस्यों का भी आयुष्मान कार्ड बनाया गया। इसमें सबसे अधिक वाराणसी में कार्ड बनाए गए। इसके बाद हापुड़, बागपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में कार्ड बनाए गए।

पूर्वी यूपी के किसानों को राहत, सरयू नहर परियोजना विस्तार से बढ़ेगा सिंचित क्षेत्र

सरयू नहर परियोजना से पूर्वी यूपी में 14.04 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य सतत विकास को सुनिश्चित करेगा सरयू नहर परियोजना का विस्तार, बढ़ेगी किसानों की उत्पादकता और आय लखनऊ, यूपी का सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन ‘हर खेत को जल’ के मुताबिक पूरे प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था का विस्तार कर रहा है। इस क्रम में सिंचाई विभाग सरयू नहर परियोजना का विस्तार कर रहा है, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश में प्रदेश का सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग इस राष्ट्रीय परियोजना के तहत कुल 14.04 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में वर्ष 2026-27 में नए कुलाबों का निर्माण और गैप्स को पूरा करने के साथ प्रेशर सिंचाई प्रणाली विकसित कर सरयू नहर परियोजना की सिंचाई क्षमता में लगातार वृद्धि की जा रही है। इससे न केवल पूर्वी यूपी में सिंचाई कमांड एरिया में वृद्धि हो रही है, बल्कि क्षेत्र के किसानों के उत्पादन और आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। वर्ष 2026-27 में होगा 1655 कुलाबों का निर्माण, 14 नहर गैप में चल रहा है निर्माण कार्य सरयू नहर परियोजना के तहत पूर्वी यूपी के नौ जिलों में 9000 कुलाबों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से लगभग 7345 कुलाबों का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष 1655 कुलाबों का निर्माण सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग वित्तीय वर्ष 2026-27 में पूरा कर रहा है। इससे क्षेत्र में लगभग 66,200 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षेत्र का विकास होगा, जिसका लाभ क्षेत्र के किसानों को रबी और खरीफ दोनों फसलों में मिलेगा। इसी क्रम में नहरों में 14 गैप्स के कारण बड़े क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होती है। इनमें से 14 नहर गैप्स में निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। इस कार्य के पूरा होने से लगभग 27,863 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा। प्रेशर सिंचाई परियोजना का हो रहा है चरणबद्ध विकास, बढ़ेगा 1.31 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र सरयू नहर परियोजना के तहत कम जल उपलब्धता वाले क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था का विस्तार करने के उद्देश्य से यूपी सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के सहयोग से प्रेशर सिंचाई परियोजना का चरणबद्ध विकास कर रहा है। सरयू नहर परियोजना के कमांड एरिया में प्रेशर सिंचाई परियोजना पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अप्रैल 2025 से चल रही है। इस क्रम में प्रेशर सिंचाई के जरिए लगभग 1.31 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षेत्र का विस्तार करने का लक्ष्य तय किया गया है। कुल मिलाकर प्रदेश का सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग 0.95 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कुलाबा निर्माण और गैप भरने से पूरा करने का प्रयास कर रहा है, जबकि शेष लक्ष्य को प्रेशर सिंचाई परियोजना के माध्यम से प्राप्त किया जा रहा है। योगी सरकार के प्रयासों से सरयू नहर परियोजना के सिंचित क्षेत्र में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है, जिसका प्रत्यक्ष लाभ पूर्वांचल के किसानों को मिल रहा है।

युवाओं के लिए खुशखबरी: योगी सरकार तीन शहरों में आयोजित करेगी विशाल रोजगार मेला

युवाओं को निजी कंपनियों में नौकरी के अवसर उपलब्ध कराने की पहल कौशल विकास मिशन के माध्यम से रोजगार से जोड़ा जा रहा युवाओं को प्रदेश सरकार की प्राथमिकता—कौशल, प्रशिक्षण और रोजगार लखनऊ,  योगी सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और उन्हें कौशल के आधार पर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बृहद रोजगार मेलों का आयोजन कर रहा है। इससे बड़ी संख्या में युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। राज्य सरकार के निर्देशानुसार मार्च माह में तीन प्रमुख शहरों में रोजगार मेले आयोजित किए जाएंगे। इन रोजगार मेलों में विभिन्न कंपनियां भाग लेकर प्रशिक्षित और योग्य युवाओं का चयन करेंगी। सरकार का उद्देश्य है कि कौशल प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा जाए। तीन प्रमुख शहरों में होगा आयोजन कौशल विकास मिशन द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 18 मार्च को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में बृहद रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। इस मेले में लखनऊ, कानपुर, अयोध्या और बरेली मंडल के अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसके बाद 24 मार्च को झांसी के बुंदेलखंड महाविद्यालय में रोजगार मेला आयोजित होगा, जिसमें झांसी, चित्रकूट और आगरा मंडल के युवाओं को भाग लेने का अवसर मिलेगा। इसी क्रम में 25 मार्च को वाराणसी स्थित राजकीय आईटीआई करौंदी परिसर में रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। इस मेले में वाराणसी, मिर्जापुर और प्रयागराज मंडल के युवाओं को विभिन्न कंपनियों में रोजगार के अवसर मिलेंगे। कौशल और रोजगार को जोड़ने पर जोर प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार की नीति के तहत कौशल विकास मिशन युवाओं को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। रोजगार मेलों के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं और कंपनियों को एक मंच पर लाकर रोजगार की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है। जिला प्रशासन और मिशन की संयुक्त जिम्मेदारी रोजगार मेलों के सफल आयोजन के लिए कौशल विकास मिशन द्वारा संबंधित मंडलों में नोडल अधिकारियों की भी नियुक्ति की गई है। साथ ही जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम को सफल बनाएं। युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार मिशन डायरेक्टर पुलकित खरे ने बताया कि योगी सरकार की विभिन्न योजनाओं, कौशल प्रशिक्षण, स्टार्टअप और निवेश आधारित औद्योगिक विकास के चलते प्रदेश में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। रोजगार मेलों के माध्यम से युवाओं को सीधे कंपनियों से जुड़ने और अपनी योग्यता के अनुसार नौकरी पाने का अवसर मिल रहा है। 100 से अधिक कंपनियां देंगी रोजगार योजना के तहत प्रत्येक आयोजन स्थल पर 100 से अधिक कंपनियों और नियोक्ताओं को आमंत्रित किया जाएगा, जिनके माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इन रोजगार मेलों में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, मुख्यमंत्री युवा कौशल योजना, आईटीआई और पॉलिटेक्निक से प्रशिक्षित युवाओं के साथ-साथ अन्य अभ्यर्थियों को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही महिला अभ्यर्थियों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने, जीरो पॉवर्टी अभियान के अंतर्गत चयनित परिवारों के युवाओं को प्राथमिकता देने तथा इच्छुक और योग्य दिव्यांगजनों के लिए विशेष अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है। कौशल विकास मिशन के अनुसार प्रत्येक आयोजन स्थल पर चयनित कंपनियों के माध्यम से न्यूनतम 1.50 लाख रुपये वार्षिक वेतन वाली रिक्तियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी प्रयास किया जा रहा है। ताकि अधिक से अधिक युवाओं को बेहतर रोजगार मिल सके और प्रदेश में कौशल, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सके।

यूपी में गोहत्या पर कड़ा प्रहार: 35 हजार से ज्यादा तस्कर और आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ योगी सरकार ने सूबे की सत्ता संभालने के बाद प्रदेश में गोकशी, गोतस्करों और अवैध पशु वध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई की, जो आज भी लगातार जारी है। इसके साथ गोकशी को पूरी तरह से रोकने के लिए वर्ष 2020 में गोवध निवारण कानून में संशोधन किया गया और जून-2020 में उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश जारी किया गया। इसके तहत अब तक प्रदेश भर में गोकशी के 14,182 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 35,924 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यूपी सरकार का मानना है कि गोकशी पर नियंत्रण केवल कानून व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि यह सामाजिक आस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार द्वारा पुलिस, प्रशासन और विशेष कानूनों के माध्यम से लगातार कार्रवाई की जा रही है। गोकशी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ केवल सामान्य मुकदमे ही नहीं दर्ज किए गए, बल्कि उनके विरुद्ध कड़े कानूनों के तहत भी कार्रवाई की गई। गोकशी के मामले में 35,924 आरोपियों में से 13,793 के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई की गई, जबकि 178 आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) की कार्रवाई की गई। इसके अलावा 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई की गई है। योगी सरकार की सख्त कार्रवाई से गोकशी व गोतस्करी से जुड़े संगठित गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिली। इस दौरान प्रदेश में सक्रिय गोकशी से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया गया और आरोपियों की संपत्तियों की भी जांच की गई। गोकशी के मामलों में केवल गिरफ्तारी तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही, बल्कि आर्थिक स्तर पर भी अपराधियों पर प्रहार किया गया। गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत कार्रवाई करते हुए लगभग 83 करोड़ 32 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की गई। इसका उद्देश्य अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त करने से संगठित अपराधियों की आर्थिक ताकत कमजोर करना है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों को पूरी तरह रोका जा सके। इतना ही नहीं, कई मामलों में अवैध कमाई से खरीदी गई जमीन, वाहन और अन्य संपत्तियों को भी कुर्क किया गया है। योगी सरकार ने गोकशी पर नियंत्रण के लिए पुलिस की विशेष टीमों का गठन किया। विशेष टीमों द्वारा खुफिया निगरानी, जिलास्तरीय टास्क फोर्स और सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सतर्कता के जरिये गोकशी-गोतस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त किया गया। साथ ही प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों में रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाई गई, वहीं पशु परिवहन से जुड़े मामलों की भी विशेष निगरानी की गई। इसके अलावा अवैध बूचड़खानों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए। योगी सरकार की सख्त कार्रवाई से प्रदेश में अवैध पशु वध से जुड़े मामलों में काफी कमी आई है और संगठित गिरोहों की गतिविधियों पर अंकुश लगा है। उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020 में नियमों को सख्त किया गया। अध्यादेश के तहत प्रदेश में गोहत्या पर 10 साल कठोर कारावास की सजा, 3 से 5 लाख तक जुर्माने का प्रावधान और गोवंश के अंगभंग करने पर 7 साल की जेल व 3 लाख जुर्माना है।

कुपोषण के खिलाफ तकनीक का सहारा, बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बच्चों के स्वस्थ भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार पोषण अभियान के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष ध्यान दे रही है । प्रदेश भर के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी के लिए 1 लाख 33 हजार से अधिक आधुनिक उपकरण स्टेडियोमीटर जल्द उपलब्ध कराए जाएंगे। इन उपकरणों की मदद से बच्चों की लंबाई की सटीक जानकारी प्राप्त हो रही है, जिससे उनके पोषण स्तर का सही आकलन करने में मदद मिलती है।  ग्रोथ मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक उपकरण प्रदेश सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों पर ग्रोथ मॉनिटरिंग के लिए कई आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। वर्ष 2021 और 2022 में एक लाख 88 हजार से अधिक स्टेडियोमीटर उपकरणों की आपूर्ति की गई थी। स्टेडियोमीटर के माध्यम से 2 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों की ऊंचाई का सटीक आकलन किया जाता है। इस उपकरण की मदद से बच्चों के विकास की नियमित निगरानी संभव हो रही है और कुपोषण की पहचान समय रहते की जा रही है। सरकार का मानना है कि बचपन में स्वास्थ्य और पोषण की सही देखभाल ही एक मजबूत समाज की नींव रखती है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के लाखों बच्चों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए आंगनबाड़ी व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। तकनीक के सहारे कुपोषण पर प्रहार योगी सरकार ने कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई में तकनीक को महत्वपूर्ण हथियार बनाया है। प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के विकास की निगरानी के लिए आधुनिक ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइस का उपयोग किया जा रहा है। इन उपकरणों के संचालन के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी और बाल विकास परियोजना अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। इसके बाद उनके माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और मुख्य सेविकाओं को भी प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य का आकलन वैज्ञानिक तरीके से किया जा सके। इससे न केवल बच्चों की वृद्धि की सटीक जानकारी मिल रही है बल्कि समय रहते पोषण संबंधी आवश्यक कदम उठाने में भी मदद मिल रही है।

परमिट व टैक्स से मुक्त रहेंगी ग्राम परिवहन योजना में अनुबंधित बसें: दयाशंकर सिंह

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोकभवन में कैबिनेट बैठक हुई। वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने पत्रकार वार्ता में बताया कि बैठक में कुल 31 प्रस्ताव आए, जिसमें से 30 प्रस्तावों पर कैबिनेट ने स्वीकृति दी। योगी सरकार ने ग्रामीणों के हित को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026’ को स्वीकृति दी। इस योजना के माध्यम से अब उत्तर प्रदेश के हर गांव तक बस पहुंचेगी। पत्रकार वार्ता में मौजूद परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 के संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभी तक 12,200 गांवों तक बसें नहीं पहुंच रही थीं, लेकिन नई पॉलिसी के तहत उत्तर प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम सभाओं तक बसें पहुंचेंगी। इन बसों को परमिट व टैक्स से मुक्त रखा गया है। इससे प्रदेश की बड़ी ग्रामीण आबादी लाभान्वित होगी। ये बसें चलाने की अनुमति निजी लोगों को मिलेगी। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी, जिसमें सीडीओ, एसपी, एआरटीओ, एआरएम सदस्य होंगे। ये बसें रात में गांव में ही रुकेंगी। सुबह ब्लॉक व तहसील होते हुए ये बसें सुबह 10 बजे तक जनपद मुख्यालय तक पहुंचेंगी। इस सेवा का लाभ विद्यार्थियों के अलावा कचहरी, ऑफिस या अपना उत्पाद शहर में बेचने जाने वाले लोगों को भी मिलेगा। कई गांवों में ऐसी सड़कें हैं, जहां बड़ी बसें टर्न होने में परेशानी होती है। 12,200 में से 5000 ऐसे गांव हैं, जहां बड़ी बसें टर्न नहीं हो सकतीं। इसलिए ये छोटी बसें होंगी, जिनकी अधिकतम लंबाई सात मीटर और अधिकतम सीट क्षमता 28 होगी। परिवहन मंत्री ने बताया कि सुबह 10 से शाम चार बजे तक इन बसों को डायवर्ट करेंगे। इसके बाद ये बसें दूरी के हिसाब से अधिकतम शाम 8 बजे तक गांव में पहुंच जाएंगी। इन बसों के ड्राइवर, कंडक्टर व क्लीनर आसपास गांव के लोग ही होंगे, जिससे रात में गांव में रुकने और सुबह आने में उन्हें परेशानी नहीं होगी। इन बसों की औसत आयु 15 वर्ष रहेगी, लेकिन पहले 10 साल के लिए ही इन्हें परिचालन की इजाजत दी जाएगी।  परिवहन मंत्री ने बताया कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी स्थानीय स्तर पर किराया निर्धारण करेगी। इसका टिकट भी सस्ता रहेगा। इन्हें परमिट व टैक्स की आवश्यक्ता नहीं होगी। इससे बस चलाने वालों को लाभ होगा। सरकार का उद्देश्य आमजन को बेहतर सुविधा मुहैया कराना है। इस योजना के तहत प्रत्येक आवेदक (जिस ब्लॉक के लिए उसने आवेदन किया है) को समस्त ग्राम पंचायत/रूट पर अपने विवेकानुसार वाहन संचालन करने तथा फेरों की संख्या का अधिकार होगा। बस संचालक ब्लॉक की प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिदिन कम से कम दो बार वाहन की सेवा प्रदान करेगा।  इस योजना के क्रियान्वयन के लिए आवेदन की स्क्रीनिंग 15 दिन में हो जाएगी। आवेदक के सफल चयन के बाद वाहन उपलब्ध कराने के लिए 15 दिन होंगे तथा निर्धारित प्रक्रिया को 45 दिनों में पूर्ण कर लिया जाएगा। प्राप्त आवेदनों का परीक्षण एवं सफल आवेदन का चयन जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जायेगा। उक्त कमेटी द्वारा सेवा प्रदाताओं का चयन करते हुए मार्ग निर्धारण को अंतिम रूप दिया जाएगा। उक्त योजना के क्रियान्वयन एवं निगरानी का दायित्व सम्बन्धित क्षेत्रीय प्रबन्धकों का होगा, जो नियमित रूप से (न्यूनतम मासिक) आयुक्त को कार्य प्रगति से अवगत कराएंगे।

योगी सरकार का सख्त निर्देश, राज्य विश्वविद्यालय तय शासनादेश के अनुसार ही लें परीक्षा शुल्क

शासनादेश के विपरीत फीस वसूली पर ऑडिट कराकर कार्रवाई करने की चेतावनी छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए विश्वविद्यालयों को लेने चाहिए निर्णय शिक्षा को सर्वसुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए योगी सरकार प्रतिबद्ध लखनऊ,  शिक्षा व्यवस्था को सुलभ, सस्ता और पारदर्शी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार सख्त कदम उठा रही है। इसी क्रम में उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने राज्य विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे परीक्षा शुल्क केवल शासनादेश में निर्धारित दरों के अनुसार ही लें। शासनादेश के विपरीत अधिक शुल्क वसूलने वाले विश्वविद्यालयों के ऑडिट कराने और आवश्यक कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने सोमवार को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में लखनऊ विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों द्वारा शासनादेश के विपरीत फीस लिए जाने के संबंध में समीक्षा बैठक की। बैठक में विश्वविद्यालयों की शुल्क संरचना, परीक्षा शुल्क और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य विश्वविद्यालयों को निर्धारित शासनादेश के अनुसार ही परीक्षा शुल्क लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई विश्वविद्यालय निर्धारित शुल्क से अधिक परीक्षा शुल्क वसूलता है तो उसकी ऑडिट कराई जा सकती है और उचित कार्रवाई की जाएगी। मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा को सुलभ, सस्ता, पारदर्शी व छात्र हितैषी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि फीस में अनावश्यक वृद्धि से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई होती है, इसलिए विश्वविद्यालयों को छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए निर्णय लेने चाहिए। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार राज्य विश्वविद्यालयों में परीक्षा शुल्क की समानता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों हेतु प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके तहत बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, बीसीए, बीएड, बीपीएड, बीजेएमसी, बीएफए और बीवोक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 800 रुपये, एलएलबी, बीएससी एग्रीकल्चर (ऑनर्स), बीटेक, बायोटेक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1000 रुपये तथा बीडीएस, नर्सिंग, बीएएमएस और बीयूएमएस जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1500 रुपये प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क निर्धारित किया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री ने राज्य विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया कि वे शासनादेशों का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित करें और वित्तीय अनुशासन बनाए रखें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने संसाधनों को मजबूत करने, नए पाठ्यक्रम शुरू करने और वित्तीय प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में भी प्रयास करने चाहिए, ताकि संस्थान आत्मनिर्भर बन सकें। बैठक में अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति, परीक्षा संचालन से जुड़ी चुनौतियों और संभावित समाधानों पर भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार विश्वविद्यालयों की वास्तविक आवश्यकताओं पर विचार करते हुए आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए तैयार है, लेकिन शासनादेशों का पालन सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य है। बैठक में एमएलसी उमेश द्विवेदी, अवनीश कुमार सिंह, प्रमुख सचिव एम. पी. अग्रवाल, सचिव अमृत त्रिपाठी,  कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय प्रो. जय प्रकाश सैनी सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

योगी सरकार में डेटा सेंटर पॉलिसी से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिल रही नई मजबूती

डेटा इकॉनामी की नई राजधानी बनने की राह पर उत्तर प्रदेश वर्ष 2030 तक प्रदेश में 5 गीगावाट क्षमता वाले बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य ई-गवर्नेंस, क्लाउड सर्विस और टेक स्टार्टअप्स के लिए अवसरों का विस्तार लखनऊ, उत्तर प्रदेश तेजी से देश की उभरती डेटा इकॉनामी का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। योगी सरकार की डेटा सेंटर नीति और हालिया घोषणाओं के चलते प्रदेश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का दायरा लगातार बढ़ रहा है। फरवरी 2026 में विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकार ने राज्य में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने और स्टेट डेटा सेंटर अथॉरिटी के गठन की घोषणा की। इसका उद्देश्य डेटा सेंटर उद्योग के विकास को संस्थागत ढांचा प्रदान करना और निवेश प्रक्रिया को और अधिक तेज करना है। योगी सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश में 5 गीगावाट क्षमता वाले 4 से 5 बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख डेटा स्टोरेज और क्लाउड सेवाओं के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। तेजी से बढ़ते डिजिटल उपयोग, क्लाउड सेवाओं की मांग और डेटा लोकलाइजेशन की नीति के बीच डेटा सेंटर उद्योग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार की योजना के अनुसार लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश से 8 डेटा सेंटर पार्क विकसित किए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता करीब 900 मेगावाट होगी। इनमें से कई परियोजनाओं पर काम भी आगे बढ़ चुका है। सरकार की ओर से अब तक 8 परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया जा चुका है, जिनमें 6 डेटा सेंटर पार्क और 2 डेटा सेंटर इकाइयां शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में 21,342 करोड़ रुपये के निवेश और 644 मेगावाट की क्षमता सुनिश्चित हो चुकी है। यह प्रगति इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश में में डेटा सेंटर सेक्टर तेजी से गति पकड़ रहा है और बड़ी टेक कंपनियां यहां निवेश को लेकर रुचि दिखा रहीं हैं। आईटी विशेषज्ञ प्रदीप यादव का कहना है कि डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार से केवल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ही मजबूत नहीं होगा, बल्कि इससे आईटी, क्लाउड सेवाओं, नेटवर्किंग और तकनीकी सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसके साथ ही यूपी में स्टार्टअप और डिजिटल सेवाओं के लिए भी मजबूत आधार तैयार होगा।  यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कोई डेटा सेंटर स्थापित नहीं था। योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछले कुछ वर्षों में स्थिति तेजी से बदली है। प्रदेश में नीति आधारित प्रोत्साहन, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश अनुकूल माहौल के कारण डेटा सेंटर मामले में लगातार प्रगति हो रही है, जबकि कई परियोजनाएं निर्माण और प्रस्तावित चरण में हैं। सरकार का मानना है कि डेटा सेंटर क्लस्टर और स्टेट डेटा सेंटर अथॉरिटी के गठन से निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति आएगी। इसके साथ ही प्रदेश को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी और उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में देश की डेटा इकॉनामी का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

20 लाख घरों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने का लक्ष्य, बड़े पैमाने पर सृजित होंगे रोजगार

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार डिजिटल कनेक्टिविटी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसी क्रम में सोमवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश की पहल पर ‘प्रोजेक्ट गंगा’ के तहत प्रदेश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण एमओयू साइन किया जाएगा। लखनऊ के होटल रेनेसां में आयोजित कार्यक्रम में स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश और वनओटीटी इंटरटेनमेंट लि. (ओआईएल – हिंदुजा ग्रुप लि. की सहायक कंपनी) के बीच औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान होगा। इस कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। गांवों में तेज और सुलभ होगी इंटरनेट की पहुंच ‘प्रोजेक्ट गंगा’ का उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। इस पहल के तहत न्याय पंचायत स्तर पर 8,000 से 10,000 स्थानीय उद्यमियों को स्वतंत्र डिजिटल सेवा प्रदाता (डीएसपी) के रूप में कार्य करने के लिए सक्षम बनाया जाएगा। ये उद्यमी स्थानीय स्तर पर हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराएंगे, जिससे गांवों में इंटरनेट की पहुंच तेज और सुलभ होगी। इस पहल से बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिसकी मदद से स्थानीय युवाओं को उनके अपने ही क्षेत्र में नए अवसर प्राप्त होंगे।  महिला उद्यमियों को मिलेगा बड़ा अवसर इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि डिजिटल सेवा प्रदाताओं (डीएसपी) में लगभग 50 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को नई पहचान और अवसर मिलेंगे, साथ ही महिलाएं डिजिटल सेवाओं के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त होकर डिजिटल अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा से जुड़ सकेंगी। यह पहल न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि गांवों में नारी शक्ति को तकनीक और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। 20 लाख घरों तक पहुंचेगा हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड परियोजना के तहत अगले 2 से 3 वर्षों में प्रदेश के 20 लाख से अधिक घरों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में तेज, सुलभ और भरोसेमंद इंटरनेट की पहुंच मजबूत होगी, जिससे ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल सेवाएं, ई-गवर्नेंस और रोजगार के नए अवसरों को भी गति मिलेगी। डिजिटल यूपी के विजन को मिलेगा बल परियोजना के अंतर्गत चयनित डिजिटल सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, नेटवर्क निर्माण और आधुनिक तकनीकी सक्षमता जैसी संरचित सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि वे अपने क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का मजबूत नेटवर्क विकसित कर सकें। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘डिजिटल उत्तर प्रदेश’ के विजन को आगे बढ़ाने के साथ-साथ ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन और डिजिटल सेवाओं के विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कार्यक्रम में स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, हिंदुजा ग्रुप के प्रतिनिधि तथा परियोजना से जुड़े अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे और ‘प्रोजेक्ट गंगा’ की रूपरेखा तथा इसके संभावित प्रभावों पर अपने विचार साझा करेंगे।

योगी सरकार में स्मार्ट टीवी से आधुनिक बन रहे सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र

प्रदेश के हजारों केंद्रों में डिजिटल शिक्षा से बदल रहा पढ़ाई का तरीका तकनीक से मजबूत हो रहे आंगनबाड़ी केंद्र, प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था में आई क्रांति लखनऊ, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के नेतृत्व में सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। प्रदेश भर में लगभग 16 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्मार्ट टीवी स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था को तकनीक से जोड़ा गया है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना और आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक प्ले स्कूल जैसी सुविधाओं से लैस करना है। डिजिटल तकनीक से बदल रहा आंगनबाड़ी केंद्रों का स्वरूप स्मार्ट टीवी के उपयोग से अब आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाई का पारंपरिक तरीका बदल रहा है। स्मार्ट टीवी की स्थापना पर प्रति इकाई लगभग 25 हजार रुपये का व्यय किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाकर बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जाए। बच्चों को कहानियों, पहेलियों, कार्टून और एनिमेशन के माध्यम से डिजिटल सामग्री दिखाई जा रही है। इसके जरिए छोटे बच्चे खेल खेल में अक्षर ज्ञान, गिनती और रंगों की पहचान करना सीख रहे हैं। इस डिजिटल पद्धति से बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ रही है और उनकी भाषा व संप्रेषण क्षमता भी विकसित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती शिक्षा के इस नए मॉडल से बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास को बेहतर आधार मिलेगा। सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र योजना से मिल रही नई गति डिजिटल माध्यमों के उपयोग से आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाई का वातावरण अधिक आकर्षक और प्रभावी बन रहा है। इससे बच्चों की उपस्थिति बढ़ने के साथ ही सीखने की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा में तकनीक का यह समावेश भविष्य में बच्चों की शैक्षिक यात्रा को मजबूत आधार प्रदान करेगा। योगी सरकार की यह पहल न केवल आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक बना रही है, बल्कि प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा भी तय कर रही है।

योगी सरकार की पहल से युवाओं को सफलता की राह

समाज कल्याण विभाग की आवासीय कोचिंग और मॉक इंटरव्यू कार्यक्रम का असर, निःशुल्क मार्गदर्शन से युवाओं ने हासिल की सफलता भागीदारी भवन की आवासीय कोचिंग से 2 और मॉक इंटरव्यू से जुड़े 4 अभ्यर्थियों ने पाई कामयाबी लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के मेधावी युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में चलाई जा रही मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना एक बार फिर अपने प्रभावशाली परिणामों के साथ सामने आई है। समाज कल्याण विभाग द्वारा गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में संचालित आवासीय कोचिंग और मॉक इंटरव्यू कार्यक्रम से जुड़े 6 अभ्यर्थियों का चयन सिविल सेवा परीक्षा (यूपीएससी-2025) में हुआ है। योगी सरकार की इस पहल के माध्यम से प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता के लिए मजबूत आधार मिल रहा है। इससे न केवल युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, बल्कि प्रशासनिक सेवाओं में उत्तर प्रदेश की भागीदारी भी लगातार मजबूत हो रही है। चयनितों को दी मंत्री असीम अरुण ने बधाई इन सभी चयनित अभ्यर्थियों को समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवाओं को भी सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। अभ्यर्थियों का शानदार प्रदर्शन समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह के अनुसार, भागीदारी भवन में संचालित आवासीय कोचिंग से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विमल कुमार को 107वीं और विपिन देव यादव को 316वीं रैंक प्राप्त हुई है। वहीं, भागीदारी भवन आवासीय कोचिंग एवं अभ्युदय योजना के अंतर्गत आयोजित मॉक इंटरव्यू में शामिल मानसी को 444वीं, महेश जायसवाल को 590वीं, अदिति सिंह को 859वीं और तनीषा सिंह को 930वीं रैंक हासिल हुई है। विषय विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन समाज कल्याण विभाग द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भागीदारी भवन में आवासीय कोचिंग का संचालन किया जा रहा है। यहां सिविल सेवा मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिनमें विषय विशेषज्ञों के साथ-साथ वरिष्ठ आईएएस और पीसीएस अधिकारी अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इन अभ्यर्थियों को आवासीय कोचिंग के दौरान निशुल्क आवास, भोजन, पुस्तकालय, अध्ययन सामग्री और ऑनलाइन-ऑफलाइन कक्षाओं की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।

पांडुलिपियों, दुर्लभ ग्रंथों को सहेजकर डिजिटल रूप देगी योगी सरकार

गोरखपुर वर्तमान और भावी पीढ़यां विरासत पर गर्व की अनुभूति कर सकें, इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार ने हमेशा प्रतिबद्धता जताई है। इसी क्रम में भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय अभियान ‘ज्ञान भारतम मिशन’ में प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ी पहल की है। पांडुलिपियों और दुर्लभ ग्रंथों को सहेजकर विश्व पटल पर डिजिटल रूप देने के लिए प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में जिला स्तर पर पांडुलिपियों को चिन्हित व संग्रहीत करने के आदेश जारी किए हैं। इसके पर्यवेक्षण के लिए हर जिले में वहां के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।  विरासत के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत हर जिले में उपलब्ध भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी पांडुलिपियों एवं दुर्लभ ग्रंथों का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है ताकि यह धरोहर शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ हो सके। उत्तर प्रदेश के लिए यह अभियान और भी विशेष है क्योंकि उत्तर प्रदेश को प्राचीन ज्ञान दर्शन, साहित्य और संस्कृति की भूमि माना जाता है।  गोरखपुर के उप निदेशक संस्कृति यशवंत सिंह राठौर ने बताया कि ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों, व्यक्तियों के पास उपलब्ध पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों और अन्य दस्तावेजों की पहचान, सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग, संरक्षण तथा डिजिटलीकरण का कार्य किया जाना है। पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण होने से यह ज्ञान भारतम पोर्टल के माध्यम से आमजन को आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी। रखरखाव के अभाव में व्यक्तियों या संस्थाओं के पास उपलब्ध कई ग्रंथ नष्ट होने की कगार पर हैं। अब जिला स्तर पर इन ग्रंथों को चिन्हित करने और उनके संरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला स्तर पर अभियान चलाकर पांडुलिपियों का संग्रह करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं से संपर्क कर उन्हें सूचीबद्ध किया जाएगा। इसमें हाथ से लिखे उन ग्रंथों को शामिल किया जाएगा जो 75 वर्ष से अधिक प्राचीन हों। जिला स्तर पर तैयार सूची संस्कृति विभाग के जरिये प्रदेश के राजकीय अभिलेखागार को प्रेषित की जाएगी। जहां उच्च गुणवत्ता की स्कैनिंग के बाद इसका डिजिटल रूप तैयार हो जाएगा। इस मिशन की विशेषता यह है कि इसमें पांडुलिपियां संबंधित संग्रहकर्ता संस्था या व्यक्ति के ही अधिकार में रहेंगी।

योगी सरकार की ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’

25 वर्ष से ज्यादा पुराने प्रोजेक्ट्स को मिलेगी नई जिंदगी स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य, सोसायटी अथवा अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के दो-तिहाई सदस्यों की सहमति के बाद ही लागू होगी पुनर्विकास प्रक्रिया पीपीपी मॉडल के तहत निजी डेवलपर की भागीदारी, त्रिपक्षीय समझौते से तय होंगी जिम्मेदारियां डीपीआर, ट्रांजिट आवास और 3 वर्ष की समयसीमा, योगी सरकार का टाइम-बाउंड रीडेवलपमेंट ब्लूप्रिंट नियोजन मानकों में व्यावहारिक लचीलापन, बोर्ड अनुमोदन से तेज होगा अमल लखनऊ, तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पुराने हो चुके ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की जर्जर स्थिति को देखते हुए योगी सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’ लागू कर दी है। इस नीति का मकसद 25 वर्ष या उससे अधिक पुराने भवनों को सुरक्षित, आधुनिक और सुविधायुक्त रूप में पुनर्विकसित करना है, ताकि लोगों को बेहतर और सुरक्षित आवास मिल सके। कैबिनेट की मंजूरी के बाद शहरी एवं नियोजन विभाग द्वारा अब इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। योगी सरकार की यह नीति न सिर्फ पुराने और असुरक्षित भवनों को नया जीवन देगी, बल्कि निर्माण, रियल एस्टेट और संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। बेहतर नियोजन और आधुनिक डिजाइन के जरिए यह पहल उत्तर प्रदेश के शहरों को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। एकल आवास नीति में शामिल नहीं प्रदेश के कई शहरों में पुराने अपार्टमेंट और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं अब संरचनात्मक रूप से कमजोर हो चुकी हैं। ऐसे भवनों में रहना जोखिम भरा हो गया है और महंगी शहरी जमीन का पूरा उपयोग भी नहीं हो पा रहा। नई नीति के जरिए सरकार इन पुराने और कम उपयोग किए जा रहे परिसरों को नए सिरे से विकसित कर शहरों के स्वरूप को बेहतर बनाना चाहती है। नीति के तहत वे सभी सार्वजनिक और निजी प्रोजेक्ट्स पुनर्विकास के लिए पात्र होंगे, जो कम से कम 25 वर्ष पुराने हैं या जिन्हें स्ट्रक्चरल ऑडिट में असुरक्षित पाया गया हो। हाउसिंग सोसायटी या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के मामलों में प्रक्रिया शुरू करने के लिए दो-तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होगी। 1500 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल की भूमि और एकल मकान इस नीति में शामिल नहीं किए गए हैं। इसके अलावा नजूल की भूमि, लीज पर आवंटित भूमि तथा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की भूमि भी इस पुनर्विकास नीति में शामिल नहीं होगी। तीन मॉडल्स से तय होगा पुनर्विकास सरकार ने पुनर्विकास के लिए तीन मॉडल तय किए हैं। पहला, शासकीय एजेंसी द्वारा सीधे काम कराना, दूसरा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत निजी डेवलपर की भागीदारी और तीसरा सोसायटी या एसोसिएशन द्वारा स्वयं पुनर्विकास। पीपीपी मॉडल में शासकीय अभिकरण, डेवलपर और सोसायटी के बीच त्रिपक्षीय समझौता होगा, जिसमें सभी की जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी। हर परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करना अनिवार्य होगा। इसमें नए फ्लैट्स का कारपेट एरिया, पार्किंग, कॉमन एरिया, ट्रांजिट आवास या किराये की व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और तय समयसीमा जैसी सभी जानकारियां शामिल होंगी। पुनर्विकास के दौरान जिन निवासियों को अस्थायी रूप से स्थानांतरित करना होगा, उन्हें वैकल्पिक आवास या किराया दिया जाएगा। तीन वर्ष में पूरी होगी परियोजना परियोजना को सामान्यतः तीन वर्ष में पूरा करना होगा, जबकि विशेष परिस्थितियों में अधिकतम दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। नियोजन मानकों में भी व्यावहारिक लचीलापन रखा गया है। बोर्ड की मंजूरी से केस-टू-केस आधार पर कुछ शर्तों में ढील दी जा सकेगी, ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हों। साथ ही, आपस में जुड़े एक से अधिक भूखंडों को मिलाकर पुनर्विकास की अनुमति दी गई है, जिससे बेहतर और समेकित विकास संभव होगा।

EPF को लेकर योगी सरकार का बड़ा कदम, विधान परिषद में छाया आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का मामला

लखनऊ उत्तर प्रदेश विधान परिषद में मंगलवार को भारतीय जनता पाटर्ी (भाजपा) के एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने नियम 115 के अंतर्गत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से की जा रही ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) कटौती की राशि कर्मचारियों के खातों में अनिवार्य रूप से जमा कराए जाने की मांग उठाई। उन्होंने इस विषय को लोक महत्व का बताते हुए सरकार का ध्यान आकृष्ट किया। आउटसोर्सिंग सेवा निगम बनाए जाने का निर्णय एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने कहा कि राज्य में आउटसोर्सिंग के आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आउटसोर्सिंग सेवा निगम बनाए जाने का निर्णय लिया गया है, जिसकी पूरे प्रदेश में सराहना हो रही है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का शोषण आम बात थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक पहल की है। कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं हो रही थी ईपीएफ की राशि उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के कई हिस्सों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ की कटौती तो नियमित रूप से की जा रही है, लेकिन संबंधित धनराशि कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं हो रही है। इस स्थिति से कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है और वे लगातार संबंधित विभागाध्यक्षों से शिकायत कर रहे हैं। कर्मचारियों की मूल समस्या का अब होगा समाधान विजय बहादुर पाठक ने सदन को अवगत कराया कि विभागीय अधिकारी अक्सर ठेकेदारों और सेवा प्रदाता कंपनियों पर जिम्मेदारी डालकर मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं। कई स्थानों पर यह विषय आंदोलन का रूप ले चुका है और कहीं-कहीं ठेकेदार या एजेंसी बदल दी जाती है, लेकिन कर्मचारियों की मूल समस्या जस की तस बनी रहती है।  कर्मचारियों के खाते में अब पूरी राशि समय से जमा होगी उन्होंने बताया कि बरेली, गाजियाबाद, आगरा, कानपुर, वाराणसी सहित कई नगर निगमों से इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं। लखनऊ नगर निगम में तो कर्मचारियों ने लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनकी ईपीएफ राशि एजेंसी, ठेकेदार और नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत से हड़पी जा रही है। एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने सरकार से मांग की कि इस गंभीर और तात्कालिक लोक महत्व के विषय पर ठोस कारर्वाई करते हुए ऐसी सुनिश्चित व्यवस्था की जाए, जिससे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से की जाने वाली ईपीएफ कटौती की पूरी राशि समय से उनके खातों में जमा हो सके।

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