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“सीएम योगी ने हनुमानगढ़ी और रामलला मंदिर में मत्था टेका, विकास कार्यों की समीक्षा की”

 अयोध्या गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को एक दिवसीय दौरे पर अयोध्या पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले संकटमोचन हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन-पूजन किया और प्रदेश की सुख-शांति की कामना की। इसके बाद सीएम योगी ने श्रीराम मंदिर में श्रीरामलला के चरणों में शीश झुकाया। उन्होंने श्रीराम मंदिर परिसर के निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली। मुख्यमंत्री ने अपने दौरे की शुरुआत संकटमोचन हनुमानगढ़ी मंदिर से की। उन्होंने यहां विधिवत पूजा-अर्चना करते हुए प्रदेशवासियों के सुखमय जीवन की प्रार्थना की। यहां से निकल कर मुख्यमंत्री श्रीराम मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने श्रीरामलला के दर्शन किए, आरती उतारी और मंदिर की परिक्रमा की। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर परिसर में निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति और आगामी योजनाओं से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने संतों से भी की मुलाकात, पूछा कुशलक्षेम मुख्यमंत्री ने हनुमानगढ़ी में संतों से भी मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना। मुख्यमंत्री यहां सबसे पहले महंत प्रेमदास जी महाराज से मिले। इसके बाद मुख्यमंत्री ने अन्य संतों से भी मिलकर उनका हालचाल जाना। इससे पहले मुख्यमंत्री के अयोध्या आगमन पर रामकथा पार्क हेलीपैड पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान जनपद के प्रभारी मंत्री/कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, रामचंद्र यादव, चंद्रभानु पासवान, अमित सिंह चौहान, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय आदि मौजूद रहे।

146 करोड़ रुपये के इंसेंटिव स्वीकृत, 58 करोड़ रुपये स्टार्टअप्स को वितरित

स्टार्टअप हब बनता उत्तर प्रदेश, नवाचार को मिल रहा संस्थागत समर्थन स्टार्टअप इंडिया मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या प्रदेश में 20 हजार के पार  146 करोड़ रुपये के इंसेंटिव स्वीकृत, 58 करोड़ रुपये स्टार्टअप्स को वितरित तीन हजार से अधिक स्टार्ट इन यूपी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स, योगी सरकार की नीतियों से स्थानीय उद्यमिता को मिल रही रफ्तार लखनऊ  उत्तर प्रदेश तेजी से देश के उभरते हुए स्टार्टअप हब के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। प्रदेश सरकार की नीतियों, संस्थागत ढांचे और वित्तीय प्रोत्साहन के कारण प्रदेश में नवाचार और उद्यमिता को नया बल मिला है। उत्तर प्रदेश में 20 से अधिक स्टार्टअप, “इंडिया मान्यता प्राप्त” स्टार्टअप्स सक्रिय हैं, जो प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम को दर्शाते हैं। इससे युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। प्रदेश में स्टार्ट इन यूपी पहल के अंतर्गत भी उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक तीन हजार से अधिक स्टार्टअप्स को इसके तहत मान्यता मिल चुकी है। प्रदेश सरकार की स्टार्टअप नीति और प्रोत्साहन योजनाओं ने स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को मजबूत आधार दिया है। इन पहल के माध्यम से युवाओं को अपने नवाचार को व्यवसाय में बदलने के लिए जरूरी सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने में इन्क्यूबेशन नेटवर्क की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।  प्रदेश में वर्तमान में 76 मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर कार्यरत हैं, जो नए उद्यमियों को मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं। ये इन्क्यूबेटर विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और निजी संगठनों के साथ मिलकर स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से ही सही दिशा देने का काम कर रहे हैं। इससे नवाचार को बढ़ावा मिल रहा है और युवाओं को अपने विचारों को व्यावसायिक रूप देने का भी अवसर मिल रहा है। इसके साथ ही प्रदेश में उन्नत तकनीक और अनुसंधान आधारित स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए सात सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को भी मंजूरी दी गई है। इन सेंटरों के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, एग्रीटेक और अन्य उभरते क्षेत्रों में शोध और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संस्थागत ढांचे से प्रदेश में टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप्स के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो रहा है। वित्तीय सहायता के मामले में भी सरकार की पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रदेश में स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए अब तक 146 करोड़ रुपये के इंसेंटिव स्वीकृत किए जा चुके हैं, जबकि 58 करोड़ रुपये की राशि स्टार्टअप्स को वितरित भी की जा चुकी है। यह वित्तीय सहयोग स्टार्टअप्स को अपने उत्पाद और सेवाओं के विकास, बाजार विस्तार और तकनीकी उन्नयन में मदद कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत नीति ढांचा, संस्थागत समर्थन और वित्तीय प्रोत्साहन किसी भी राज्य के स्टार्टअप इकोसिस्टम को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उत्तर प्रदेश में इन सभी क्षेत्रों में समानांतर रूप से काम किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति तेजी से विकसित हो रही है और नवाचार को नई दिशा मिल रही है।

एसआई भर्ती परीक्षा में शामिल होंगे 15.75 लाख अभ्यर्थी, परीक्षा की शुचिता से कोई समझौता नहीं: मुख्यमंत्री

त्योहारों और पुलिस भर्ती परीक्षा के दृष्टिगत मुख्यमंत्री सख्त, कानून-व्यवस्था व व्यवस्थाओं पर विशेष सतर्कता के निर्देश त्योहार सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हों, समाज विरोधी गतिविधियों व नई परंपरा की अनुमति नहीं: मुख्यमंत्री एसआई भर्ती परीक्षा में शामिल होंगे 15.75 लाख अभ्यर्थी, परीक्षा की शुचिता से कोई समझौता नहीं: मुख्यमंत्री बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के आवागमन को देखते हुए सुचारु रहे ट्रैफिक व्यवस्था, कहीं जाम या अव्यवस्था न हो: मुख्यमंत्री प्रत्येक परीक्षा केंद्र के बाहर पीआरवी-112 की तैनाती सुनिश्चित हो, सोशल मीडिया पर सतत निगरानी रखी जाए: मुख्यमंत्री नवरात्र के दौरान प्रमुख शक्तिपीठों में सुगम दर्शन, सुरक्षा, स्वच्छता व पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित हो: मुख्यमंत्री प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति और वितरण सामान्य, कहीं भी अभाव नहीं कहीं भी किसी प्रकार की घबराहट या कृत्रिम संकट की स्थिति न बने, जमाखोरी व कालाबाजारी पर होगी सख्त कार्रवाई: मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को आगामी पर्व-त्योहारों, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा तथा अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों के दृष्टिगत कानून-व्यवस्था एवं प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 13 मार्च को अलविदा की नमाज, 14-15 मार्च को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा सब-इंस्पेक्टर एवं समकक्ष पदों की लिखित परीक्षा, 19 मार्च से चैत्र नवरात्र तथा 20-21 मार्च को ईद-उल-फितर मनाए जाने की संभावना है। ऐसे में यह अवधि कानून-व्यवस्था की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। सभी अधिकारी पूरी सतर्कता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हों। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की नई परंपरा शुरू करने की अनुमति न दी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी धार्मिक कार्यक्रम के कारण आमजन को असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि समाज-विरोधी अथवा राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। एसआई भर्ती परीक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 14 और 15 मार्च को प्रदेश के 1090 परीक्षा केंद्रों पर चार पालियों में परीक्षा आयोजित होगी, जिसमें 15 लाख 75 हजार से अधिक अभ्यर्थी पंजीकृत हैं। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के अन्य जिलों से आने की संभावना को देखते हुए प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए, ताकि कहीं भी जाम या अव्यवस्था की स्थिति न बने। उन्होंने कहा कि परीक्षा की शुचिता, और गोपनीयता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। सेक्टर मजिस्ट्रेट और स्टेटिक मजिस्ट्रेट पूरी जिम्मेदारी के साथ तैनात रहें तथा इंटेलिजेंस तंत्र पूरी तरह सक्रिय और सतर्क रहे। परीक्षा से पूर्व सभी जिलों में व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास कराया जाए तथा सोशल मीडिया पर सतत निगरानी रखी जाए, ताकि किसी भी अफवाह या भ्रामक सूचना का तत्काल खंडन किया जा सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक परीक्षा केंद्र के बाहर पीआरवी-112 की गाड़ी अनिवार्य रूप से तैनात रहे और जिला प्रशासन भर्ती बोर्ड के साथ समन्वय बनाकर परीक्षा को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराए। चैत्र नवरात्र की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देवीपाटन मंदिर (बलरामपुर), शाकुम्भरी देवी (सहारनपुर), मां विंध्यवासिनी धाम (मीरजापुर), ललिता देवी (सीतापुर) सहित प्रमुख शक्तिपीठों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। अयोध्या में 27 मार्च को रामनवमी के अवसर पर देशभर से श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम दर्शन, पेयजल, स्वच्छता और भीड़ प्रबंधन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नवरात्र के अवसर पर नगरों और गांवों में मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए तथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त स्वच्छताकर्मी तैनात किए जाएं। पुलिस स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी भीड़ प्रबंधन और फुट पेट्रोलिंग की कार्ययोजना लागू करे। मुख्यमंत्री ने मीरजापुर, बलरामपुर, सीतापुर, अयोध्या, मथुरा और सहारनपुर के जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान से तैयारियों की जानकारी भी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 19 मार्च को ही माननीय राष्ट्रपति जी का अयोध्या और मथुरा आगमन प्रस्तावित है। इसके दृष्टिगत सभी आवश्यक प्रोटोकॉल व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित कर ली जाएं। मुख्यमंत्री ने हालिया वैश्विक परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में पेट्रोल- डीजल की उपलब्धता की समीक्षा भी की। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि वर्तमान में प्रदेश में कहीं भी पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। आपूर्ति और वितरण सामान्य है। मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। कहीं भी किसी प्रकार की घबराहट या कृत्रिम संकट की स्थिति न बनने पाए। खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारी फील्ड में उतर कर निरीक्षण करते रहें। मुख्यमंत्री ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, अपर पुलिस महानिदेशक (जोन), पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक (रेंज), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक सहित शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तर प्रदेश को एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का प्रमुख हब बनाने की संभावनाओं पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री से मिले नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव लोहम कंपनी के सीईओ व चीफ ऑफ स्टाफ ने भी की मुलाकात  उत्तर प्रदेश को एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का प्रमुख हब बनाने की संभावनाओं पर हुई चर्चा  लखनऊ  नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने बुधवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। इस दौरान लोहम कंपनी के सीईओ रजत वर्मा और कंपनी के चीफ ऑफ स्टॉफ आयुष सबात भी मौजूद रहे। तीनों अतिथियों ने निवेश के लिए उत्तर प्रदेश के सकारात्मक माहौल की सराहना की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोबेल पुरस्कार विजेता कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव, लोहम के सीईओ रजत वर्मा और चीफ ऑफ स्टाफ आयुष सबात का उत्तर प्रदेश में स्वागत किया। बैठक में उत्तर प्रदेश को देश में एडवांस्ड मटेरियल रिसर्च और इंजीनियरिंग का प्रमुख हब बनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इस क्रम में लोहम द्वारा प्रदेश में भारत की पहली “रेयर अर्थ टू मैग्नेट” इंटीग्रेटेड फैसिलिटी स्थापित करने की योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस फैसिलिटी के स्थापित होने से देश में उच्च तकनीक आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। नोबेल पुरस्कार विजेता कोंस्टेंटिन नोवोसेलोव, जो ग्रैफीन की खोज के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं, लोहम कंपनी के साथ स्ट्रैटेजिक एडवाइजर और सहयोगी के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य उन्नत मटेरियल साइंस को औद्योगिक स्तर पर बैटरी तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में लागू करना है। लोहम और नोवोसेलोव के सहयोग का मुख्य फोकस दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर है। पहला, 2D मटेरियल (जैसे ग्रैफीन) का उपयोग कर अगली पीढ़ी की लिथियम-आयन बैटरियों की क्षमता, सुरक्षा व लाइफ को बढ़ाना। दूसरा, बैटरियों और परमानेंट मैग्नेट का उन्नत रीसाइक्लिंग सिस्टम विकसित कर महत्वपूर्ण खनिजों की बेहतर रिकवरी सुनिश्चित करना, जिससे सर्कुलर इकॉनमी को मजबूती मिलेगी। यह सहयोग भारत के “मेक इन इंडिया” और ग्रीन एनर्जी विजन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गुणवत्तापूर्ण टेक होम राशन की आपूर्ति के लिए 301.19 करोड़ रुपये का फंड मंजूर

रेसिपी आधारित पुष्टाहार व्यवस्था लागू करने वाला पहला राज्य बनेगा उत्तर प्रदेश बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को मिलेगा पौष्टिक आहार, कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को मिलेगी मजबूती गुणवत्तापूर्ण टेक होम राशन की आपूर्ति के लिए 301.19 करोड़ रुपये का फंड मंजूर पुष्‍टाहार वितरण हेतु चेहरा पहचान प्रणाली (फेस रिकग्निशन सिस्टम) होगा लागू, धांधली पर लगेगी रोक लखनऊ  योगी सरकार ने बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं के बेहतर पोषण के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में अप्रैल से रेसिपी आधारित अनुपूरक पुष्टाहार की नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। भारत सरकार की गाइडलाइन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत लागू की जा रही इस व्यवस्था के साथ उत्तर प्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। अनुपूरक पुष्‍टाहार वितरण हेतु चेहरा पहचान प्रणाली (फेस रिकग्निशन सिस्टम) लागू की जाएगी जिसके क्रम में प्रदेश में अनुपूरक पोषाहार का ऑफलाइन वितरण अमान्य कर केवल एफआरएस प्रणाली से ही वितरण मान्य किया गया है। इससे पुष्टाहार वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।  पौष्टिक भोजन से खिलेंगे नौनिहाल नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में सात श्रेणी के लाभार्थियों को ध्यान में रखकर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से रेसिपी आधारित पुष्टाहार तैयार कर सीधे आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। जिन जिलों या परियोजनाओं में इसकी व्यवस्था नहीं होगी, वहां नैफेड के जरिए आंगनबाड़ी केंद्रों तक आपूर्ति की जाएगी। सरकार ने अलग अलग आयु वर्ग के बच्चों और महिलाओं के लिए अलग भोजन तय किया है। छह माह से एक वर्ष तक के बच्चों को आटा-बेसन का हलवा (मीठा) दिया जाएगा। एक से तीन वर्ष तक के बच्चों को भी आटा-बेसन हलवा (मीठा) मिलेगा, जबकि तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को आटा-बेसन बर्फी (मीठा) और दलिया-मूंग-सोया खिचड़ी (नमकीन) दी जाएगी। गर्भवती और धात्री महिलाओं को आटा-बेसन-सोया बर्फी और दलिया-मूंग-दाल खिचड़ी उपलब्ध कराई जाएगी। अतिकुपोषित बच्चों को विशेष आहार  अतिकुपोषित बच्चों के लिए पौष्टिक आहार का प्रावधान रखा गया है। इसके अंतर्गत 06 माह से 01 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक हलवा, 01 वर्ष से 03 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक हलवा “बाल संजीवनी” तथा 03 वर्ष से 06 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक हलवा एवं पौष्टिक दलिया उपलब्ध कराया जाएगा। यह रेसिपी आधारित व्यवस्था बच्चों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को संतुलित और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। रेसिपी के पोषण मानकों में भारत सरकार के मानकों के अनुरूप कैलोरी और प्रोटीन के साथ-साथ 11 अन्य आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को भी शामिल किया गया है। सरकार ने 301.19 करोड़ रुपये का फंड किया स्वीकृत इस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने वायबिलिटी गैप फंड भी मंजूर किया है। प्रदेश में अनुपूरक पुष्टाहार की आपूर्ति वर्ष 2017 के कॉस्ट नॉर्म्स पर की जा रही है। इसके कारण राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) के अंतर्गत रेसिपी आधारित पुष्टाहार का उत्पादन करने वाली इकाइयों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा था। लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण टेक होम राशन (टीएचआर) उपलब्ध कराते हुए इसकी गुणवत्ता पर किसी प्रकार का समझौता न हो, इसे ध्यान में रखते हुए इन इकाइयों को होने वाली संभावित हानि की प्रतिपूर्ति के लिए वायबिलिटी गैप फंड (वीजीएफ) की आवश्यकता पाई गई। इसी क्रम में राज्य सरकार ने एसआरएलएम के माध्यम से संचालित उत्पादन इकाइयों को वित्तीय सहयोग प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मंत्रिपरिषद ने कुल 301.19 करोड़ रुपये की वीजीएफ स्वीकृत की है। इससे उत्पादन इकाइयों के संचालन को मजबूती मिलेगी और लाभार्थियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण अनुपूरक पुष्टाहार की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

15 हजार से अधिक विद्युत सखी सक्रिय रूप से फील्ड में तैनात, बाकी प्रशिक्षित महिलाएं भी जल्द उतरेंगी मैदान में

योगी सरकार की पहल से आधी आबादी के जीवन में उजाला 30 हजार ‘विद्युत सखियां’ बनीं आत्मनिर्भर ग्रामीण यूपी में महिलाओं ने किया कमाल, अब तक 3250 करोड़ रुपये का किया रिकॉर्ड बिजली बिल कलेक्शन 15 हजार से अधिक विद्युत सखी सक्रिय रूप से फील्ड में तैनात, बाकी प्रशिक्षित महिलाएं भी जल्द उतरेंगी मैदान में लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिला सशक्तीकरण की दिशा में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। योगी सरकार की ‘विद्युत सखी योजना’ ग्रामीण महिलाओं के जीवन में न केवल उजाला ला रही है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत भी कर रही है।  अब तक इन ग्रामीण महिलाओं ने अपनी मेहनत और लगन से 3,250 करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल संग्रह कर एक अभूतपूर्व रिकॉर्ड कायम किया है, जो महिला सशक्तीकरण का एक सशक्त मॉडल बन गया है। प्रदेश में अभी  30 हजार महिलाओं को विद्युत सखी के तौर पर पंजीकृत किया जा चुका है। इनमें से 15 हजार से अधिक महिलाएं पूरी सक्रियता के साथ फील्ड में तैनात होकर घर-घर जाकर बिजली बिल जमा करवा रही हैं।  महिलाओं के लिए सम्मानजनक आय का एक मजबूत जरिया योगी सरकार की योजना है कि प्रशिक्षण और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बाकी बची महिलाओं को भी जल्द ही मैदान में उतार दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण ऊर्जा सेवा में आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की जा सके। इस योजना ने महिलाओं के लिए सम्मानजनक आय का एक मजबूत जरिया तैयार किया है।  हजारों ‘दीदियां’ बनीं लखपति इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में विद्युत सखियों को दो हजार रुपये तक के बिजली बिल कलेक्शन पर 20 रुपये का कमीशन दिया जाता है, जबकि दो हजार से अधिक के बिल पर एक फीसदी कमीशन मिलता है। इस योजना के जरिए आज गांवों में हजारों ‘दीदियां’ लखपति बन चुकी हैं और समाज व परिवार में उनका मान-सम्मान भी काफी बढ़ा है। उपभोक्ताओं को सुविधा तो महिलाओं के लिए रोजगार का साधन उत्तर प्रदेश में इस योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बिजली बिल कलेक्शन एजेंट के रूप में सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया था। इस सफल पहल से जहां एक ओर ग्रामीण उपभोक्ताओं को लंबी लाइनों से छुटकारा मिला है और उनके लिए बिल जमा करना आसान हुआ है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के लिए यह योजना रोजगार का एक बेहतरीन साधन साबित हुई है।

3300 से ज्यादा किसानों को मिलेगा राज्य में कृषि यंत्रों का तोहफा

प्रदेश के 3300 से अधिक किसानों को मिलेंगे कृषि यंत्र  जनपदों में शुक्रवार को ई लाटरी से होगा किसानों का चयन  www.agridarshan.up.gov.in पर 4 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन करने वाले किसानों को मिलेगा अनुदान का लाभ 2017 से 2025 के मध्य लगभग तीन लाख कृषि यंत्रों का किया गया है वितरण लखनऊ योगी सरकार होली के उपरांत 3300 से अधिक किसानों को अनुदान पर कृषि यंत्र देगी। इसका लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिन्होंने 4 मार्च तक कृषि विभाग की वेबसाइट www.agridarshan.up.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन किया है। जिन जनपदों में लक्ष्य से अधिक आवेदन मिले हैं, सिर्फ वहीं शुक्रवार को ई लाटरी से चयन होगा।  सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजना के तहत 2519 किसानों को दिए जाएंगे यंत्र  कृषि विभाग द्वारा संचालित सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजना के अंतर्गत फार्म मशीनरी बैंक, कृषि ड्रोन, अन्य एकल कृषि यंत्र के तहत 2519 तथा प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेज्ड्यू योजना के अंतर्गत 800 किसानों को कृषि यंत्र मिलेंगे।  10 दिन के भीतर अपलोड करनी होगी रसीद व फोटो  कृषि यंत्रों से जुड़ी समस्त जानकारी व अनुदान प्रक्रिया वेबसाइट पर उपलब्ध है। लाभार्थियों का चयन/बुकिंग टोकन कन्फर्म होने की तिथि से कृषि यंत्र खरीद कर उसकी रसीद व फोटो 10 दिन के भीतर www.agridarshan.up.gov.in या upyantratraking.in अपलोड करना होगा।  चयनित न होने वाले किसानों की जमानत धनराशि की जाती है वापस  ई लॉटरी में चयनित किसानों को मोबाइल पर एसएमएस भेजा जाता है। सूचना एवं बिल अपलोड की अंतिम तिथि की सूचना के साथ-साथ प्रतीक्षा सूची में चयनित कृषकों को भी सूचित किया जाता है। ई लॉटरी में चयनित न होने वाले किसानों की जमानत धनराशि अधिकतम छह महीने में वापस कर दी जाती है। योगी सरकार की प्राथमिकता है कि कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाएं पारदर्शिता से संपादित हो और इसका लाभ किसानों को मिले। कृषि विभाग ने अपील की है कि जिन किसानों ने कृषि विभाग के पोर्टल पर कृषि यंत्रों की बुकिंग की है, वे जनपद में होने वाली ई-लाटरी प्रक्रिया में अवश्य प्रतिभाग करें। 2017 से 2025 तक लगभग तीन लाख कृषि यंत्रों का वितरण 2017-18 से 2025 तक उत्तर प्रदेश में लगभग तीन लाख कृषि यंत्रों का वितरण किया गया। इसमें 2.31 लाख एकल कृषि यंत्र, 8405 कस्टम हायरिंग सेंटर, 7351 फॉर्म मशीनरी बैंक आदि प्रमुख हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत जनवरी तक 7777 कृषि यंत्र, 51 कस्टम हायरिंग सेंटर एवं 64 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने के बिल पोर्टल पर अपलोड हुए।

उत्तर प्रदेश पुलिस और होंडा इंडिया फाउंडेशन के तत्वावधान में होगा आयोजन

उत्तर प्रदेश पुलिस को होंडा इंडिया फाउंडेशन देगा 50 वाहन आज  50 क्यूआरटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे मुख्यमंत्री  उत्तर प्रदेश पुलिस और होंडा इंडिया फाउंडेशन के तत्वावधान में होगा आयोजन  लखनऊ होंडा इंडिया फाउंडेशन उत्तर प्रदेश पुलिस को 50 वाहन देगा। फाउंडेशन अपने सीएसआर फंड से ये वाहन उपलब्ध कराएगा। इन 50 क्यूआरटी (क्विक रिस्पॉन्स टीम) दोपहिया वाहनों को शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह आयोजन उत्तर प्रदेश पुलिस और होंडा इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में होगा। इस दौरान पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण भी मौजूद रहेंगे।  बॉर्डर के जनपदों को दी जाएगी तरजीह  यह 50 दोपहिया वाहन उत्तर प्रदेश पुलिस के बेड़े में शामिल होंगे। इन वाहनों का उपयोग बार्डर जनपदों में कानून व्यवस्था बनाये रखने एवं आपातकालीन स्थिति या अपराध होने पर पुलिस की तरफ से तत्काल कार्रवाई के लिए किया जाएगा। सहारनपुर में 5, शामली, हापुड़, बागपत, बुलन्दशहर, बिजनौर, पीलीभीत, महोबा, बांदा, प्रतापगढ़, खीरी, उन्नाव, श्रावस्ती, सिद्धार्थ नगर, देवरिया व सोनभद्र में तीन-तीन वाहन दिए जाएंगे। 2017 के बाद पुलिस का बढ़ा कारवां योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के उपरांत पुलिस के वाहनों का कारवां भी बढ़ा है। वर्ष 2017 में चार पहिया वाहनों की संख्या 9500 थी और दोपहिया की संख्या 3000 थी। वर्तमान में यह संख्या खासी बढ़ चुकी है। अब चार पहिया वाहन 15,500 एवं दोपहिया वाहन 9200 हो चुके हैं। गौरतलब है कि 2017 के पहले पुलिस के वाहन क्रय करने के लिए 85 करोड़ के प्रावधान में कई गुना बढोतरी के साथ 280 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

योगी सरकार की योजनाओं का असर, एस्पिरेशनल ब्लॉक कार्यक्रम में यूपी का लहराया परचम

योगी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर हासिल की एक और बड़ी उपलब्धि, नीति आयोग से लखीमपुर खीरी के दो ब्लॉकों को मिला सम्मान लखीमपुर खीरी के धौरहरा ब्लॉक को मिला गोल्ड और बांकेगंज को ब्रॉन्ज मेडल योगी सरकार की योजनाओं का असर, एस्पिरेशनल ब्लॉक कार्यक्रम में यूपी का लहराया परचम स्वास्थ्य, पोषण और कृषि योजनाओं में शत-प्रतिशत सैचुरेशन से मिली राष्ट्रीय पहचान धौरहरा ने छह और बांकेगंज ने तीन इंडिकेटर्स पर 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर जीता मेडल लखनऊ योगी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नीति आयोग ने एस्पिरेशनल ब्लॉक के तहत उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित धौरहरा व बांकेगंज ब्लॉक को उत्कृष्ट कार्य के लिए गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल से नवाजा है। जुलाई से सितंबर 2024 के बीच चले संपूर्णता अभियान में जिले के बांकेगंज और धौरहरा ब्लॉक ने प्रदर्शन की नई इबारत लिखी। यह मेडल लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने प्राप्त किया। इसके साथ ही उन्हें सर्टिफिकेट ऑफ एप्रिसिएशन से सम्मानित किया गया।  बांकेगंज ब्लॉक ने तीन प्रमुख इंडिकेटर्स पर प्राप्त किया शत प्रतिशत सैचुरेशन जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में जिले के आकांक्षात्मक ब्लॉक में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इसी के तहत लखीमपुर खीरी के बांकेगंज ब्लॉक ने ‘हेल्थ एंड न्यूट्रिशन’, ‘एग्रीकल्चर एंड अलाइड सर्विसेज़’ और ‘एस्पिरेशनल ब्लॉक्स प्रोग्राम के तहत सोशल डेवलपमेंट’ थीम में तीन प्रमुख इंडिकेटर्स पर शत-प्रतिशत सैचुरेशन हासिल किया है। इसके लिए नीति आयोग की ओर से ब्लॉक को ब्रॉन्ज मेडल प्रदान किया गया है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से संभव हो पाया। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप जमीनी निगरानी, विभागों के बीच बेहतर तालमेल और तय समय सीमा में लक्ष्य पूरा करने की रणनीति ने ब्लॉक को मॉडल बनाया। धौरहरा ब्लॉक ने प्राप्त किया छह इंडिकेटर्स पर शत प्रतिशत सैचुरेशन जिलाधिकारी ने बताया कि धौरहरा ब्लॉक ने छह इंडिकेटर्स पर शत-प्रतिशत सैचुरेशन के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच, पोषण सुधार की ठोस पहल और कृषि योजनाओं के लाभार्थियों तक सीधी पहुंच ने नतीजे को असरदार बनाया। संपूर्णता अभियान के तहत किए गए प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और टीमवर्क साथ हो, तो लक्ष्य सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहते, धरातल पर उतरते हैं। डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने सीडीओ अभिषेक कुमार की मौजूदगी में बांकेगंज के बीडीओ ऋषिकांत अहिरवार और धौरहरा के तत्कालीन बीडीओ सुमित कुमार सिंह (वर्तमान में बीडीओ फूलबेहड़) को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया है।

आयुष्मान भारत के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने अब तक सर्वाधिक 5 करोड़ 60 लाख से अधिक गोल्डन कार्ड बनाए: सीएम

जैसे कपिल देव को देखकर ही पाकिस्तान आधा मैच हार जाता था, वैसे ही डॉक्टर के व्यवहार से आधी बीमारी हार जाती है: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रेटर नोएडा में किया केडीएसजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का शुभारंभ   आयुष्मान भारत के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने अब तक सर्वाधिक 5 करोड़ 60 लाख से अधिक गोल्डन कार्ड बनाए: सीएम वर्ष 2014 से पहले देश में सिर्फ 6 एम्स कार्यरत थे, प्रधानमंत्री मोदी जी की पहले से आज देश में 23 एम्स: मुख्यमंत्री सरकारी प्रयासों के साथ निजी अस्पतालों के सहयोग से बड़ी आबादी को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती हैं: सीएम योगी 2017 से पहले प्रदेश में “वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया” की स्थिति थी और सरकारें माफियाओं के सामने नतमस्तक रहती थीं: योगी आज यूपी “वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज”, “वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट” और अब “वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुज़ीन” की दिशा में आगे बढ़ रहा: सीएम ग्रेटर नोएडा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को ग्रेटर नोएडा में केडीएसजी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास और मानवीय व्यवहार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एक मरीज डॉक्टर के पास बड़े विश्वास के साथ जाता है। उसके लिए पैसा सबसे बड़ा मुद्दा नहीं होता, बल्कि डॉक्टर के व्यवहार और उसकी सलाह पर भरोसा अधिक महत्वपूर्ण होता है। डॉक्टर का अच्छा व्यवहार मरीज की आधी से अधिक बीमारी को समाप्त कर देता है। इस बात को समझाने के लिए मुख्यमंत्री ने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भारत की क्रिकेट टीम के कप्तान के रूप में कपिल देव गेंदबाजी करते थे या टीम का नेतृत्व करते थे, तो पाकिस्तान की टीम आधा मैच वहीं हार जाती थी। इसी तरह यदि बीमारी की तुलना पाकिस्तान से की जाए और डॉक्टर को कपिल देव के रूप में देखा जाए, तो मरीज डॉक्टर को देखकर ही आधी लड़ाई जीत लेता है।  डॉक्टर पर विश्वास हो तो दवा भी असर करती है और दुआ भी मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जब मरीज को डॉक्टर पर विश्वास हो जाता है तो बीमारी के खिलाफ उसकी मानसिक शक्ति बढ़ जाती है। इसके बाद दवा भी असर करती है और दुआ भी काम करती है। डॉक्टर को दुआ मिलती है और मरीज को सही दवा मिलने पर वह जल्दी स्वस्थ हो जाता है। इससे अस्पताल की प्रतिष्ठा भी बढ़ती है और डॉक्टर का सम्मान भी। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में उठाए जा रहे कदमों के बारे में कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद लोगों को बिना भेदभाव पांच लाख रुपये तक की कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध कराई है, जिससे लाखों लोगों को राहत मिल रही है।  सेवा सही, सस्ती और विश्वसनीय होनी चाहिए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 तक भारत के अंदर केवल छह एम्स काम कर रहे थे और प्रधानमंत्री मोदी जी की पहल का परिणाम है कि आज देश में 23 एम्स कार्य कर रहे हैं। आयुष्मान भारत के अंतर्गत 60 करोड़ से अधिक लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य है, जहां सर्वाधिक गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं। प्रदेश में अब तक 5 करोड़ 60 लाख से अधिक गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी पैदा हुई है। यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा ऐसी है, जिसमें आज सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं भी बढ़ रही हैं। साथ ही सरकार द्वारा तय उपचार दरों और निजी क्षेत्र की मनमानी दरों के बीच बड़े अंतर को संतुलित करने का भी प्रयास हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा मानना है कि अस्पतालों के लिए स्वास्थ्य सेवा की परिभाषा स्पष्ट होनी चाहिए। सेवा सही होनी चाहिए, सस्ती होनी चाहिए और विश्वसनीय भी होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर मरीज के साथ धोखा नहीं होना चाहिए। हर व्यक्ति उस सेवा को वहन कर सके और उस पर भरोसा कर सके। सरकार के साथ निजी क्षेत्र की सहभागिता भी अत्यंत आवश्यक मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की सहभागिता भी अत्यंत आवश्यक है। निजी अस्पतालों के सहयोग से बड़ी आबादी को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। किसी भी संपन्न देश के लिए यह आवश्यक है कि वहां के प्रत्येक नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले। यह उसका अधिकार भी है और सरकार का दायित्व भी। उन्होंने केडीएसजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसके संस्थापकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अस्पताल केवल गौतम बुद्ध नगर ही नहीं, बल्कि पूरे एनसीआर क्षेत्र तथा अन्य जनपद के लोगों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की अपार संभावनाएं मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता जताई कि केडीएसजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थापना कपिल देव और उद्योगपति सुनील गुप्ता द्वारा की गई है। उन्होंने महाराष्ट्र की प्रतिष्ठित संस्था डीवाई पाटिल ग्रुप के साथ मिलकर इस अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी ली है। डीवाई पाटिल समूह शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहा है और उसने महाराष्ट्र में उत्कृष्ट कार्य किए हैं। अब उनके अनुभव का लाभ गौतम बुद्ध नगर जनपद और एनसीआर क्षेत्र के लोगों को भी मिलेगा। उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है और यहां स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। यदि केडीएसजी समूह मेडिकल कॉलेज के क्षेत्र में भी निवेश करेगा, तो इससे नए मेडिकल प्रोफेशनल तैयार होंगे और स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। 1000 लोगों को मिलेगा रोजगार मुख्यमंत्री ने कहा कि यह 300 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल केवल स्वास्थ्य सेवा ही नहीं देगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। यहां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कम से कम 1000 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसमें डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिक्स, टेक्नीशियन, वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी और अन्य सहयोगी कर्मचारी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश सकारात्मक सोच के साथ विकास के मार्ग … Read more

तत्परता और संवेदनशीलता से हो जनता की समस्याओं का समाधान: सीएम योगी

जन समस्याओं के निस्तारण में शिथिलता अक्षम्य: मुख्यमंत्री जनता दर्शन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 150 लोगों की समस्याएं तत्परता और संवेदनशीलता से हो जनता की समस्याओं का समाधान: सीएम योगी गोरखपुर,  गोरखपुर में जनता के साथ बुधवार दिनभर होली की खुशियां साझा करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनसेवा के नियमित प्रकल्प ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात की। उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन समस्याओं का समाधान तत्परता और संवेदनशील तरीके से किया जाए। इसमें किसी भी तरह की शिथिलता या लापरवाही अक्षम्य होगी। हर समस्या का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और संतुष्टिपरक होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनता की हर समस्या का समाधान सरकार की प्राथमिकता है। गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन में कुर्सियों पर बैठे लोगों तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद चलकर पहुंचे और एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने करीब 150 लोगों से मुलाकात की और सबको आश्वस्त किया कि हर व्यक्ति को न्याय दिलाया जाएगा। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित निस्तारण का निर्देश देने के साथ मुख्यमंत्री ने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या का समाधान कराने के लिए दृढ़ संकल्पित है।  सीएम ने अफसरों से कहा कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए। हर पीड़ित के साथ संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए उसकी सहायता की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि किसी की जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले और कमजोरों को उजाड़ने वाले किसी भी सूरत में बख्शे न जाएं। उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।  मुख्यमंत्री के समक्ष जनता दर्शन में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। सीएम योगी ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी। उनके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इलाज से जुड़ी इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण करा कर शासन में उपलब्ध कराया जाए।

गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने लिया फाग का आनंद, सीएम संग खेली गई रंगों व फूलों की होली

होलिका भस्म की पूजा कर सीएम योगी ने मनाई होली गोरक्षपीठाधीश्वर व संतों ने एक दूसरे को लगाया भस्म का तिलक गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने लिया फाग का आनंद, सीएम संग खेली गई रंगों व फूलों की होली   गोरखपुर होली के पावन महापर्व पर बुधवार सुबह गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में होलिका भस्म की पूजा कर होली मनाने का शुभारंभ किया। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में फाग गीतों का आनंद लिया और गोवंश को भस्म व गुलाल लगाया और गुड़ खिलाकर गोसेवा की। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गोरक्षपीठाधीश्वर के संग जमकर रंगों और फूलों की होली खेली।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के होलिकोत्सव की शुरुआत बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर में बतौर गोरक्षपीठाधीश्वर होलिका भस्म की पूजा से हुई। मंदिर परिसर के मेला ग्राउंड में जलाई गई होलिका के पास जाकर योगी आदित्यनाथ ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होलिका भस्म (सम्मत की राख) की पूजा की और आरती उतारी, भस्म का तिलक लगाया। इस अनुष्ठान के बाद मंदिर के प्रधान पुजारी कमलनाथ समेत अन्य साधु-संतों व श्रद्धालुओं ने इसी भस्म से गोरक्षपीठाधीश्वर का तिलक कर आशीर्वाद लिया। गोरक्षपीठाधीश्वर ने भी उन्हें तिलक लगाकर होली की मंगलकामना की। होलिकादहन स्थल से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गुरु गोरखनाथ जी के मंदिर पहुंचे और श्रीनाथ जी को होलिका भस्म अर्पित की। इसके बाद मंदिर के द्वार पर फाग गीतों का आयोजन हुआ। सीएम योगी ने भी कुछ देर वहां रुककर फाग का आनंद उठाया और सबको होली की बधाई व शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री जब फाग का आनंद ले रहे थे तब वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने उनके ऊपर रंग, अबीर-गुलाल और फूलों की वर्षा कर होली खेली।  गोवंश को लगाया तिलक, गुड़ खिलाकर की गोसेवा होली के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंदिर की गोशाला पहुंचे और गोवंश को भस्म व गुलाल लगाकर उनके लिए भी मंगलकामना की। उन्होंने गोवंश को गुड़ खिलाकर उनकी सेवा की। गोशाला में सीएम योगी की आवाज सुनकर गोवंश उनके पास दौड़ते हुए चले आए। मुख्यमंत्री ने माथा व गर्दन सहलाकर सभी गोवंश को खूब दुलार भी किया।

योगी सरकार ने भर्तियों को लेकर विभागों को भेजा अहम निर्देश, आरक्षण पर विपक्ष को नहीं मिलेगा अवसर

लखनऊ   उत्तर प्रदेश में भर्तियों में आरक्षितों को कम कोटा मिलने के विवाद को पूरी तरह से खत्म करने की तैयारी है। आरक्षित पदों की संख्या तय होने के बाद ही भर्तियां की जाएंगी। विभागों को रिक्तियों का प्रस्ताव भेजने से पहले अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग और ईडब्ल्यूएस के पदों को स्पष्ट करना होगा। जरूरी हुआ तो इसके लिए आयोगों के साथ विभागों द्वारा बैठक भी की जाएगी, जिससे भर्तियों को लेकर कोई पेंच न फंसे। दरअसल 69000 शिक्षक भर्ती हो या लेखपाल की भर्ती यूपी की विपक्षी पार्टियों ने लगातार इसमें आरक्षण के नियमों का पालन नहीं करने का सरकार पर आरोप लगाते हुए इसे मुद्दा बनाया था। इसी वजह से मामला हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा है। एनडीए की सहयोगी पार्टियों ने भी कई बार इशारों में आरक्षण को लेकर अपनी ही सरकार को घेरने की कोशिश की है। ऐसे में सरकार इस बार किसी को कोई मौका नहीं देना चाहती है। ओबीसी के कम पद का लगा था आरोप उत्तर प्रदेश में हर साल हजारों की संख्या में भर्तियां हो रही हैं। राज्य सरकार ने भर्तियों के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, उत्तर प्रदेश विद्युत सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड और उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा मंडल बनाया गया है। सबसे अधिक भर्तियां लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग करता है। यूपी में पिछले कुछ भर्ती विज्ञापनों को लेकर आपत्तियां जताई गईं। इसमें कहा गया है कि कुल रिक्तियों में ओबीसी के लिए कम पद तय किए जा रहे हैं। लेखपाल भर्ती को लेकर हुए था बवाल उत्तर प्रदेश में 7994 लेखपाल पदों की भर्ती में ओबीसी के लिए निर्धारित 27% आरक्षण में 1441 पद मिलने पर बड़ा बवाल हुआ था। सपा और अन्य दलों ने इसे आरक्षण में कटौती बता करारा हमला किया था। विरोध के बाद पदों की संख्या बढ़ाई गई। शासन इसीलिए चाहता है कि भर्ती के लिए विज्ञापन निकाले जाने से पहले पदों की गिनती पूरी तरह से कर ली जाएगी। इसमें देखा जाएगा कि आरक्षण के मुताबिक पदों का बंटवारा किया गया है या नहीं। आरक्षण के पालन का निर्देश शासन की ओर से आयोगों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि राज्य के अधीन सेवाओं में अनुमन्य ऊर्ध्वाधर यानी वर्टिकल और क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्थाओं का मानक के अनुरूप पालन किया जाए। उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, जनजातियों एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम-2020 में दी गई व्यवस्था को पूरी तरह से पालन किया जाएगा। साथ ही आरक्षण अधिनियम में दी गई वर्टिकल आरक्षण व्यवस्था पूरी तरह से पालन किया जाएगा, जिससे कोई विवाद न होने पाए।

पीएम मुद्रा योजना से मिला लोन, खुद सशक्त बनीं और पांच अन्य लोगों को दिया रोजगार

डबल इंजन सरकार ने बनाया मनीषा रावत को चॉकलेट निर्माता योगी सरकार की महिला सशक्तिकरण नीति के तहत स्थानीय प्रशासन से मिला मार्गदर्शन व पूरा सहयोग पीएम मुद्रा योजना से मिला लोन, खुद सशक्त बनीं और पांच अन्य लोगों को दिया रोजगार लखनऊ उत्तर प्रदेश के रायबरेली की रहने वाली मनीषा रावत की जिंदगी में डबल इंजन की सरकार ने नए रंग भर दिए। मनीषा ने पीएम मुद्रा योजना के माध्यम से ऋण प्राप्त कर चॉकलेट बनाने का अपना व्यवसाय शुरू किया, जिसमें योगी सरकार की महिला सशक्तिकरण नीति के तहत स्थानीय प्रशासन ने सहयोग के साथ-साथ उन्हें उचित मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया। इस पहल ने मनीषा की जिंदगी की दिशा बदल दी और वह आज पूरी तरह आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। अब वह न केवल स्वयं सम्मानजनक आमदनी कर रही हैं, बल्कि 5 अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। मनीषा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं। बिना गारंटी लोन से बदली जिंदगी की दिशा मनीषा रावत ने वर्ष 2023 में हैंडमेड चॉकलेट बनाने का छोटा व्यवसाय शुरू किया था। बाजार में उनके हैंडमेड चॉकलेट व बेकरी उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ने लगी, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता हुई। पहले वह यह काम घर से ही करती थीं, लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने अपनी केक और चॉकलेट की शॉप खोलने का निर्णय लिया। लेकिन, गारंटी व मॉरगेज जैसी कई अड़चनें सामने थीं। अक्टूबर 2024 में उन्हें पीएम मुद्रा योजना के बारे में पता चला। इसके बाद उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक के मैनेजर अर्जुन निगम ने उन्हें योजना के लाभ व पात्रता आदि की विस्तृत जानकारी दी। उन्हें बिजनेस मॉडल की बारीकियां भी समझाई गईं। आवश्यक दस्तावेज तैयार कर डीआईसी कार्यालय में जमा करने के 20 दिनों के भीतर ही उन्हें 9 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हो गया। खुद सशक्त बनीं, 5 लोगों को दिया रोजगार लोन स्वीकृत होते ही मनीषा ने अपने कारोबार का विस्तार किया। बढ़ते व्यवसाय की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार देना शुरू किया और आज 5 लोगों को नियमित रोजगार प्रदान कर रही हैं। पहले वह परिवार पर निर्भर थीं, लेकिन अब एक सफल महिला उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। उनका चॉकलेट व्यवसाय अच्छी तरह चल रहा है और इसका श्रेय वह अधिकारियों के प्रोत्साहन व इस योजना को देती हैं। उन्होंने अन्य लोगों को भी इस योजना के प्रति जागरूक किया है। डबल इंजन सरकार की योजनाओं से युवाओं को नई राह डबल इंजन की सरकार युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने के लिए अनेक योजनाएं चला रही है, जिनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह केवल ऋण योजना नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों और घरेलू उद्योगों के लिए व्यवसाय शुरू करने का प्रभावी माध्यम है। मनीषा बताती हैं कि इस योजना के तहत मिले ऋण की ब्याज दर कम है और गारंटर की आवश्यकता भी नहीं होती, जिससे उन्हें किस्त चुकाने में सुविधा हो रही है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 10 वर्ष पूर्ण होने पर अप्रैल माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर से 48 सफल उद्यमियों को अपने आवास पर आमंत्रित किया था, जिनमें रायबरेली की मनीषा रावत भी शामिल थीं। इस मुलाकात को याद करते हुए वह कहती हैं कि वह पीएम मोदी व सीएम योगी आदित्यनाथ को अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं और युवाओं के लिए सच्चा मार्गदर्शक मानती हैं।

सीएम योगी के नेतृत्व में 9 वर्ष में प्रदेश में लगाए गए 242 करोड़ से अधिक पौधे

सर्वोत्तम के साथ यूपी को ‘हरित प्रदेश’ बनाने में जुटी योगी सरकार इस वर्ष भी प्रदेश में लगेंगे 35 करोड़ पौधे, पिछले वर्ष हुआ था 37.21 करोड़ पौधरोपण  सीएम योगी के नेतृत्व में 9 वर्ष में प्रदेश में लगाए गए 242 करोड़ से अधिक पौधे गांवों में लग रही ग्रीन चौपाल,  15 हजार से अधिक गांवों में हुआ आयोजन  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक तरफ प्रदेश को सर्वोत्तम प्रदेश बनाया तो वहीं यूपी की पहचान ‘हरित प्रदेश’ के रूप में भी बन रही है। 9 वर्ष में यहां 242 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए। उत्तर प्रदेश का वनाच्छादन भी 559.19 वर्ग किमी. बढ़ा है। पिछले वर्ष सिर्फ एक दिन (9 जुलाई) को ही 37.21 करोड़ पौधे लगाए गए। यही नहीं, रविवार को वाराणसी के सुजाबाद डोमरी क्षेत्र में आयोजित ‘वृहद पौधरोपण कार्यक्रम’ में मात्र एक घंटे में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधों का रोपण किया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के जज ऋषिनाथ ने महापौर अशोक कुमार तिवारी व नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को प्रमाणपत्र सौंपा। योगी सरकार 2026 में भी 35 करोड़ से अधिक पौधरोपण की तैयारी में जुट गई है।  9 वर्ष में 242 करोड़ से अधिक लगे पौधे, यूपी का वनाच्छादन भी बढ़ा  2017 में सत्ता संभालने के बाद सीएम योगी ने खुद यूपी की हरियाली की चिंता की। 5 जून को पर्यावरण दिवस हो या वर्षाकाल में पौधरोपण, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इसकी कमान संभाली। पौधरोपण अभियान के पहले वे खुद कई बार इसकी मीटिंग करते हैं। इसके बाद प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पहुंचकर पौधे भी लगाते हैं। योगी सरकार के प्रयास से 9 वर्ष में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। इससे यूपी का वनाच्छादन में भी वृद्धि हुई। भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट- 2023 के मुताबिक उत्तर प्रदेश का वनाच्छादन भी 559.19 वर्ग किमी. बढ़ा। योगी सरकार ने 1 से 7 जुलाई 2025 के बीच जन्मे 18,348 बच्चों को ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट और उनके अभिभावकों को लकड़ी, फल व सहजन आदि प्रजातियों के पौधे भी प्रदान किए। एक पेड़ मां के नाम अभियान में सराहनीय कार्य को लेकर पीएम मोदी ने भी बधाई दी थी।  ‘योगी के यूपी’ ने चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को किया ध्वस्त  ‘योगी के यूपी’ ने विश्व के पर्यावरण मानचित्र पर रविवार को नया इतिहास दर्ज किया। वाराणसी के सुजाबाद डोमरी में आयोजित ‘वृहद पौधरोपण कार्यक्रम’ में मात्र एक घंटे में काशीवासियों ने 2,51,446 पौधों का रोपण कर चीन के आठ साल पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। पीएम मोदी से प्रेरणा लेकर सीएम योगी के कुशल मार्गदर्शन से यह रिकॉर्ड संभव हो सका। सुजाबाद डोमरी के 350 बीघा क्षेत्र में विकसित किए गए इस आधुनिक ‘शहरी वन’ ने आज विश्व पटल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है। इसके पहले 10 मार्च 2018 को 1,53,981 पौधों का रोपण कर चीन की हेनान प्रांतीय समिति और हेनान शिफांगे ग्रीनिंग इंजीनियरिंग कंपनी ने विश्व रिकॉर्ड बनाया था।  योगी सरकार-2026 में भी लगाएगी 35 करोड़ पौधे  योगी सरकार वर्षाकाल-2026 में भी पौधरोपण की तैयारी में जुट गई है। वन व पर्यावरण विभाग की ओर से 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य प्रस्तावित है। पौधशालाओं, विभागों, जनपदों को आगामी दिनों में तैयारी को लेकर निर्देश दिए गए हैं। हाल में प्रस्तुत किए गए बजट में सामाजिक वानिकी योजना के लिए 800 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। पौधशाला प्रबंधन योजना के लिए 220 करोड़ रुपये तथा राज्य प्रतिकारात्मक वन रोपण योजना के लिए 189 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में प्रस्तावित है।  गांवों में पर्यावरण संरक्षण में आमजन की भागीदारी सुनिश्चित कर रही ‘ग्रीन चौपाल’ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2030 तक प्रदेश के हरित आवरण को 15 प्रतिशत तक लाने का निर्देश दिया है। यह लक्ष्य तभी हासिल होगा, जब पौधरोपण को जनांदोलन का स्वरूप दिया जा सके। सीएम के विजन को केंद्र में रखते हुए वन विभाग ने गांवों में ग्रीन चौपालों का गठन करने का निर्णय किया और इसके जरिए पर्यावरण संरक्षण में आमजन की भागीदारी भी सुनिश्चित की। विभिन्न विभागों के सहयोग से प्रत्येक ग्रामसभा स्तर पर अब तक 15000 से अधिक गांवों में चौपाल का गठन/आयोजन किया जा चुका है। ग्रीन चौपाल ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में हो रही है। इसमें सरकार के सभी वर्गों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से इसकी बैठक की जा रही है।

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