Bandhavgarh’s ‘Mobile Scandal’: Video of officer in front of tiger in core zone goes viral, questions raised on Supreme Court’s directives
उमरिया । देश के सबसे प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व में शामिल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एक बार फिर बड़े विवाद में घिर गया है। इस बार मामला सीधे वन्यजीव संरक्षण नियमों और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ गया है।
टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में सफारी के दौरान मोबाइल फोन के कथित उपयोग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पर्यटन विभाग के सहायक संचालक दिलीप कुमार मराठा टाइगर की फोटो और वीडियो बनाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब वन्यजीव संरक्षण को लेकर देश में नियमों को सख्ती से लागू करने की बात कही जा रही है।
ताला जोन में दिखा ‘बजरंग’, और शुरू हो गया विवाद
सूत्रों के अनुसार 13 मार्च 2026 की शाम की सफारी के दौरान ताला जोन में वीआईपी पर्यटकों के साथ भ्रमण के समय चर्चित टाइगर ‘बजरंग’ दिखाई दिया।
इसी दौरान सामने आए वायरल वीडियो में सहायक संचालक दिलीप मराठा कथित रूप से मोबाइल फोन से टाइगर की फोटो और वीडियो बनाते नजर आ रहे हैं।
वन विभाग की सफारी गाइडलाइन के अनुसार कोर क्षेत्र में अनावश्यक मोबाइल उपयोग को हतोत्साहित किया जाता है, क्योंकि इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार में व्यवधान की आशंका रहती है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भी सवाल
मामले ने इसलिए और तूल पकड़ लिया है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने 17 नवंबर 2025 को संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों के संचालन को लेकर कड़े निर्देश दिए थे।
इन निर्देशों में वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार में हस्तक्षेप रोकने और संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया था।
ऐसे में कोर क्षेत्र में मोबाइल फोन उपयोग का आरोप सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन निर्देशों का पालन वास्तव में हो रहा है।
पर्यटकों ने भी जताई नाराजगी
सफारी में मौजूद कुछ पर्यटकों ने भी इस घटना पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि
“जब पर्यटकों को बार-बार मोबाइल फोन निकालने से रोका जाता है, तो अधिकारियों द्वारा स्वयं मोबाइल से टाइगर की फोटो लेना नियमों के दोहरे मापदंड को दिखाता है।”
सोशल मीडिया पर भी यह वीडियो तेजी से फैल रहा है और लोग वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

पहले भी विवादों में रहा नाम
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार सहायक संचालक दिलीप मराठा का नाम पहले भी कई विवादों से जुड़ चुका है।
अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और गाली-गलौज के आरोप
एक डिप्टी रेंजर द्वारा कथित प्रताड़ना से आहत होकर आत्महत्या का प्रयास
ताला क्षेत्र के बठान इनक्लोजर में रखे दो बाघ शावकों में से एक का रहस्यमय तरीके से लापता होना
सूत्रों का यह भी कहना है कि उस समय इन शावकों की वीआईपी पर्यटकों को कथित रूप से विशेष फोटोग्राफी कराई जाती थी, जिससे वन विभाग के भीतर भी चर्चा हुई थी।
निलंबन, कोर्ट और फिर वही पोस्टिंग
बताया जाता है कि पूर्व में विवादों के चलते उन्हें निलंबित भी किया गया था। बाद में उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और निलंबन आदेश पर स्थगन प्राप्त कर लिया।
इसके बाद से वे लंबे समय से उसी क्षेत्र में पदस्थ बताए जाते हैं, जिस पर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
अब कार्रवाई पर देश की नजर
ताजा वायरल वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों, वन्यजीव प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।
अब निगाहें मध्यप्रदेश वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों — प्रमुख सचिव संदीप यादव और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (बल प्रमुख) शुभरंजन — पर टिकी हैं कि क्या वायरल वीडियो की जांच कर कोई सख्त कार्रवाई की जाएगी या मामला फिर प्रशासनिक फाइलों में दब जाएगा।
बड़ा सवाल
क्या देश के प्रतिष्ठित टाइगर रिजर्व में नियम केवल पर्यटकों के लिए हैं, या अधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होंगे?
बांधवगढ़ का यह ताजा विवाद अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ सकता है।









