प्रोग्राम में 4 घंटे बगैर मास्क के गृह मंत्री नरोत्तम, बोले- मैं मास्क नहीं पहनता
https://youtu.be/fS2N20fO-iE
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इंदौर। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा बुधवार को शहर में करीब 4 घंटे तक कई कार्यक्रमों में शामिल हुए। पहले वे अनुग्रह सहायता राशि वितरण कार्यक्रम में शामिल होने रवींद्र नाट्यगृह पहुंचे। इसके बाद नए कंट्रोल रूम का उद्घाटन किया। सभी कार्यक्रमों में गृहमंत्री बिना मास्क के नजर आए। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बेहिचक कह दिया कि वे तो मास्क पहनते ही नहीं हैं। मैं यहां क्या- किसी कार्यक्रम में मास्क नहीं पहनता, इसमें क्या होता है। दरअसल, इंदौर वही शहर है, जहां मास्क नहीं पहनने वालों पर निगम टीम चालानी कार्रवाई कर रही है। मास्क नहीं लगाने वालों पर 100 रुपए जुर्माना लिया जा रहा है। इसे लेकर विवाद भी हो रहे हैं, लेकिन गृह मंत्री का मास्क को लेकर ऐसा जवाब, जनता पर क्या असर डालेगा। कैदियों की पैरोल 2 महीने और बढ़ाई गृह मंत्री ने मीडिया से चर्चा में सांवेर जेल को लेकर कहा कि निर्माण कार्य बहुत जल्दी शुरू होगा। हम आज ही सांवेर जेल को लेकर राशि मंजूर कर देंगे। कैदियों को लेकर कहा कि जो कैदी कोरोना को लेकर 4 महीने से पैरोल पर थे। उसे दो महीने और बढ़ा दिया गया है। अस्पतालों में लापरवाही को लेकर कहा कि सभी के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई होगी। 2 लाख रुपए की कर्जमाफी नहीं हुई किसानों के कर्जमाफी को लेकर कहा कि दो हजार और चार हजार रुपए कर्ज माफ हुए हैं। हम बात कर रहे हैं 2 लाख रुपए के कर्जमाफी की, वो नहीं हुए हैं। आप तो कांग्रेस-भाजपा के चक्कर में मत आओ। आप मीडिया वाले किसी गांव में सीधे जाओ, 10 दिन के भीतर राहुल गांधी जो 2 लाख का कर्ज माफ करने का कहकर गए थे। गांव के 10 किसानों से पूछ लो, उनके एक लाख हुए हों, डेढ़ लाख हुए हों, दो लाख हुए हों। उन्हें कैमरे के सामने बिठा लो तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। कमलनाथजी चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए, वे क्या जानें गरीबों का दर्द मध्य प्रदेश में 15 महीने कांग्रेस की सरकार रही। कमलनाथजी मुख्यमंत्री रहे, उन्होंने गरीब के दर्द और पीड़ा को समझा ही नहीं। समझते भी कैसे- उद्योगपति हैं, बड़े आदमी के बेटे थे, सोने की चम्मच मुंह में लेकर पैदा हुए थे, गरीब का दर्द वे कहां जानते। अपने यहां शास्त्र में कहा गया है कि जाके पांव ना फटी बेमाई, वाे का जाने पीर पराई। सोने का चम्मच लेकर पैदा होने वाले कमलनाथजी को इस दर्द का एहसास ही नहीं है। दर्द का एहसास है भाजपा को, उसके नेताओं को और हमारे मुख्यमंत्री को, क्योंकि वे गरीब और किसान के बेटे हैं। यह बात प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार को रवींद्र नाट्यगृह में कही। वे यहां अनुग्रह सहायता राशि वितरण कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे।
भोपाल। मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा उपचुनाव के जरिये सत्ता में वापसी का गणित भले ही कांग्रेस के लिए मुश्किलभरा हो, लेकिन पार्टी जीत के लिए पुरानी परिपाटी को छोड़ने में भी गुरेज नहीं कर रही है। कांग्रेस की नैया पार लगाने के लिए उपचुनाव में गांधी परिवार का चेहरा मोर्चा संभाल रहा है। मप्र कांग्रेस ने पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को उपचुनाव में बुलाया है। प्रियंका यहां दतिया स्थित मां पीतांबरा देवी के दर्शन के बहाने आ रही हैं। इसी बहाने वे उपचुनाव की छह सीटों से गुजरते हुए रोड शो भी करेंगी। उनका कार्यक्रम राजस्थान से सड़क मार्ग से प्रवेश कर मुरैना, ग्वालियर और डबरा होते हुए दतिया तक पहुंचने का बनाया जा रहा है। मकसद है सिंधिया से हिसाब चुकता करना दरअसल, कमल नाथ सरकार गिराने के लिए कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया को दोषी ठहराती रही है, इसलिए वह कांग्रेस और गांधी परिवार के निशाने पर हैं। सिंधिया से हिसाब चुकता करने के लिए ही कांग्रेस उनके गढ़ में प्रियंका गांधी वाड्रा का रोड शो कराने की तैयारी में है। कांग्रेस को उम्मीद है कि प्रियंका के आने से इन क्षेत्रों में कार्यकर्ता सक्रिय होंगे, क्योंकि अभी मुश्किल यह है कि सिंधिया के प्रभाव वाला क्षेत्र होने के कारण यहां पार्टी कार्यकर्ताओं की कमी के साथ ही भरोसे के संकट से भी जूझ रही है। वह कड़ी टक्कर देने वाले प्रत्याशी के लिए भी दूसरे दलों के बागियों पर आश्रित है। पीढ़ियों से हाजिरी लगाता आया गांधी परिवार कांग्रेस प्रियंका के इस प्रस्तावित दौरे को सियासी करार देने से बच रही है। उसका तर्क है कि मां पीतांबरा के दर्शन के लिए गांधी परिवार पीढ़ियों से हाजिरी लगाता आया है। पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी यहां आकर दर्शन कर चुके हैं। 2018 में राहुल गांधी ने यहां दर्शन पूजन कर चुनावी अभियान शुरू किया था। एक तीर से कई निशाने कांग्रेस प्रियंका का रोड शो कर एक तीर से कई निशाने लगाना चाहती है। 2018 में राहुल गांधी की मंदसौर रैली ने मप्र विस चुनाव-2018 की तस्वीर ही बदल दी थी। उपचुनाव में प्रियंका भी संदेश देना चाहेंगी कि कांग्रेस में युवा नेताओं को भरपूर मौका दिया जा रहा है। प्रियंका उत्तर प्रदेश में लगातार सक्रिय हैं। रोड शो से सफलता मिलने की स्थिति में उत्तर प्रदेश में प्रियंका की पैठ और गहरी होगी। वहां भी कार्यकर्ताओं का नया कैडर मजबूत हो सकता है।
चंडीगढ़। कृषि बिल को लेकर किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर हरियाणा और पंजाब में किसान सड़क पर हैं और बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. हरियाणा के पानीपत में दिल्ली कूच कर रहे किसानों पर हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे हैं और पानी की बौछार की गई है. इसके साथ ही किसानों को हिरासत में ले लिया गया. प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि अध्यादेश किसानों का डेथ वारंट है और इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे. जो पहले से उन्हें मिल रहा है, वह उसको लेकर खुश हैं. सरकार और ज्यादा देने का प्रयास ना करें. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उनकी जमीन को अडानी और अंबानी को बेचने का काम कर रही है. किसान नेताओं का कहना है कि सरकार लोगों के साथ धोखा कर रही है, क्योंकि तीनों अध्यादेश पूंजीपतियों के लिए है और पूंजीपति किसान की फसल का मनचाहा एमएससी लगाएंगे, जिससे किसान की हालत और भी ज्यादा खराब होगी. आज पूरे देश का किसान रोड पर उतर कर इसका विरोध कर रहा है. भारतीय किसान यूनियन और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने 25 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया है. भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया कि देशभर के किसान 25 सितंबर को कृषि सुधार विधेयक 2020 के विरोध में धरना प्रदर्शन और चक्का जाम करेंगे. यूपी के किसान अपने-अपने गांव, कस्बे और हाईवे का चक्का जाम करने का काम करेंगे. किसान यूनियन के महासचिव धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन इस हक की लडाई को मजबूती के साथ लड़ेगी. सरकार यदि हठधर्मिता पर अड़िग है तो हम किसान भी पीछे हटने वाले नहीं हैं. किसान के पेट पर सरकार ने हमला किया है, जिसे हम कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे. इस कानून से कृषि क्षेत्र में कम्पनी राज को सरकार स्थापित कर रही है.
शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में रिश्तों को कलंकित करने वाला मामला सामने आया है। यहां सिंधौली पुलिस ने चार दिन पहले हुई एक युवक की हत्या का खुलासा किया है। हत्या करने वाला कोई दुश्मन नहीं बल्कि उसका बड़ा भाई है। मृतक अपनी भाभी के निजी पलों के वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करता था। सोते समय हुई थी युवक की हत्या थाना सिंधौली क्षेत्र के गांव कटौल में बीते गुरुवार रात गांव में रहने वाले अरविंदर की रात में सोते वक्त धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मामले में जांच की तो मृतक के बड़े भाई सुखविंदर पर शक हुआ। पुलिस ने जब उससे सख्ती से पूछताछ करने पर उसने अपना आरोप कबूल कर लिया। आरोपी ने बताया की पत्नी का छोटे भाई से अवैध संबंध होने का शक था। छोटा भाई मेरी पत्नी की नहाते वक्त वीडियो बनाता था। उसके बाद मेरी पत्नी को ब्लैकमेल करता था। इसी शक के आधार पर रात में सोते समय छोटे भाई हत्या कर दी। आरोपी को भेजा गया जेल एसपी एस आनन्द ने बताया कि, अवैध संबंध के शक में बड़े भाई ने छोटे भाई की हत्या कर दी थी। हत्या करने वाले भाई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कास्ट पॉलीटिक्स हावी है। खासकर 16% ब्राह्मणों को अपने पाले में लाने के लिए सपा हो या कांग्रेस कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है। आम आदमी पार्टी तो यूपी में जातिगत सर्वे भी करा चुकी है। जिस पर सांसद संजय सिंह पर राजद्रोह का केस भी दर्ज है। मंगलवार को सपा के पूर्व मंत्री व राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिषेक मिश्रा ने उरई में कहा कि, सपा प्रदेश के 75 जिलों में भगवान परशुराम का भव्य मंदिर बनवाएगी। इसके लिए चेतना पीठ के नाम से ट्रस्ट बन गया है। इस सरकार में हर जाति व वर्ग परेशान पूर्व मंत्री अभिषेक ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, पूरे प्रदेश में ब्राह्मणों के साथ-साथ अन्य जातियों पर अन्याय हो रहा है। इनके सांसद-विधायक टीवी पर बैठकर ब्राह्मणों को जूते मारने की बात कहते है, वहीं इस सरकार में युवा वर्ग, किसान परेशान है। जो लोग सरकारी नौकरी कर रहे उनको सरकार ने 3 माह से वेतन नहीं दिया है और जिनको वेतन दे रही है, उनका केवल 40% ही दिया जा रहा है। इसे समाजवादी पार्टी कभी भी बर्दाश्त नहीं करेगी और इसके लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती तब क्यों नहीं बनवाया मंदिर उन्होंने मायावती पर भी हमला बोला। कहा कि मायावती चार बार यूपी में मुख्यमंत्री रह चुकी हैं, तीन बार उन्होंने भाजपा के साथ सरकार बनाई, जबकि एक बार ब्राह्मणों के सहयोग से सरकार बनाई थी, लेकिन उन्होंने भगवान परशुराम का एक भी मंदिर नहीं बनाया और जब वह कह रही हैं कि सरकार आते ही वह मंदिर बनाएगी, लेकिन सपा सरकार में न होते हुए भी अभी से ही मंदिर का निर्माण कराने लगी है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार बनते ही हर वर्ग का विशेष ध्यान रखा जाएगा, बैक डोर से कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाया गया कृषि बिल अभिषेक मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार द्वारा 5 साल संविदा का कानून लागू करने की योजना थी, जैसा कि वह गुजरात में इसे लागू कर चुकी थी। लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर वहां पर वापस लेना पड़ा और जब यहां युवाओं ने आवाज उठाई तो सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। वहीं, किसानों के साथ भाजपा सरकार ने अंग्रेजों से काले कानून के तहत कृषि बिल लाया है। जिसमें बैक डोर से कंपनियों को ले जाकर किसानों की कमर को तोड़ना है। सपा सरकार आते ही यूपी में किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए उनके लिए अलग कानून लाया जाएगा, जिससे किसानों को सही एमएसपी मिल सके।
भोपाल। प्रदेश के पांच लाख किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का मुआवजा नहीं मिल पाएगा। वो इसलिए क्योंकि सरकार अपने पोर्टल में 6511 गांवों की अधिसूचित फसल दर्ज करना भूल गई। ये गांव सीहोर, हरदा, होशंगाबाद, देवास और रायसेन जिले के हैं। केंद्र सरकार ने इस गड़बड़ी पर राज्य सरकार से 30 सितंबर तक जानकारी मांगी है, ताकि इन किसानों को फसल बीमा का फायदा मिल सके। 2 लाख को दो अंकों में मुआवजा हाल ही में सरकार ने खरीफ-2019 की 4611 करोड़ रु. बीमा राशि 22 लाख किसानों के खाते में डाली थी। इसमें से करीब दो लाख किसान ऐसे हैं, जिन्हें 99 रु. या दो अंकों में मुआवजा मिला। ये वे किसान हैं, जिनकी सोयाबीन की फसल खराब हुई है। नीमच में बोरखेड़ी पोनेरी के गोपाल को 35 पैसे तो सीहोर की श्यामपुर दोराहा की कौशल्या को एक रुपए मुआवजा मिला। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि दो साल पहले सरकार ने तय किया था कि न्यूनतम मुआवजा 200 रु. होगा, लेकिन यह मामला केंद्र के पास मंजूरी के लिए अटका है। अब जब किसानों को 200 रु. से कम मुआवजा मिला, तब राज्य ने केंद्र से प्रस्ताव को मंजूरी देने को कहा है। मामले पर कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि ऐसे दो लाख किसान हैं जिन्हें 100 रुपए से भी कम मुआवजा मिला है। राज्य सरकार किसानों से मुआवजे के नाम पर मजाक कर रही है। यहां भी हालात ऐसे ही रतलाम, मंदसौर व नीमच में सैंकड़ों किसान ऐसे हैं, जिन्हें 100 रुपए से कम का क्लेम मिलेगा। मंदसौर जिले में 11 रुपए व रतलाम जिले में 43 रुपए न्यूनतम बीमा क्लेम मिलेगा। नीमच जिले के मोडी के किसान गोविंदराम को 23 रुपए का बीमा क्लेम स्वीकृत हुआ है। सूची में 21 किसान ऐसे हैं जिन्हें 100 रुपए से कम की बीमा राशि स्वीकृत हुई है। बोरखेड़ी पानेरी के किसान गोपालकृष्ण ने बताया कि सरकार जब मदद नहीं कर सकती है तो मजाक क्यों करती है। खरगौन जिले में किसानों को 4 से 8 रुपए तक का मुआवजा मिला, जिले में 1.43 लाख किसान है और क्लेम की 118 करोड़ 22 लाख रुपए की राशि का वितरण किया जाना है। महेश्वर के नागझिरी गांव के 81 किसानों को मिली क्लेम की राशि 8 रुपए से कम है।
दमोह. जिले के हटा थाना अंतर्गत संकुईया गांव में पारिवारिक विवाद के चलते पन्ना जिले के सिमरिया थाना अंतर्गत कोनी गांव से दमोह पहुंचे आरोपी बुठिया अहिरवार ने ससुराल में अपने ससुर मुन्नीलाल अहिरवार और 16 वर्षीय साली अनिता को मौत के घाट उतार दिया तो वहीं पत्नी द्रोपती को गंभीर रूप से घायल कर दिया जो अब जिला अस्पताल में अपनी जिंदगी के लिए जूझ रही है. इस पूरे घटनाक्रम में बताया जाता है कि आरोपी बुठिया अहिरवार पन्ना जिले के सिमरिया थाना अंतर्गत कोनि गांव का रहने वाला है. वह मंगलवार देर शाम जिले की हटा तहशील अंतर्गत हटा थाना क्षेत्र के संकुईया गांव पहुंचा था. जानकारी के मुताबिक आरोपी की शादी करीब 3 वर्ष पहले इसी गांव की द्रोपती से हुई थी और शादी के कुछ ही दिन बाद दोनों के बीच आपसी मदभेद के चलते द्रोपती, बुठिया को ससुराल में ही छोड़कर अपने पिता मुन्नीलाल अहिरवार के यहां रहने लगी थी. लेकिन कुछ समय के बाद से ही आरोपी बुठिया अहिरवार अपनी पत्नी द्रोपती पर ससुराल को आने के लिये दवाव बनाने लगा. द्रोपती, बुठिया के साथ रहना नहीं चाहतीं थी. बाद में बुठिया द्वारा अपनी पत्नी को जान से मारने की धमकी दी जाने लगी. इस बात की जानकारी परिवार में सभी को थी, लेकिन किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि बुठिया इस स्तर की शर्मनाक घटना को अंजाम देते हुये अपने ससुर मुन्नीलाल और 16 वर्षीय साली अनिता को मौत घाट उतार देगा. पन्ना जिले की सिमरिया थाना अंतर्गत आने वाले गांव कोनि निवासी बुठिया अहिरवार बीते रोज अपनी ससुराल संकुईया गांव पहुंचा. स्थानीय लोगों के मुतबिक वह रात करीब 10 बजे वह अपने ससुराल पक्ष पर हमले की घात लगाकर गांव में घूम रहा था और जैसे ही उसको मौका मिला उसने अपने ससुर मुन्नीलाल पर चाकुओं से ताबड़ तोड़ हमले शुरू कर दिए. जिसके बचाव में उतरी उसकी छोटी बेटी अनिता पर भी हमला कर दिया. हमले में पिता-पुत्री की घटना स्थल पर ही मौत हो गई और आरोपी ने अपनी पत्नी को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया जिसका जिला अस्पताल में इलाज जारी हैं. जब इस पूरी घटना के बारे में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिव कुमार सिंह से बात की गई तो उनका कहना है आरोपी बुठिया अहिरवार पन्ना जिले के कोनी गांव का निवासी है जो कल बीती रात जिले के हटा थाना अंतर्गत आने वाले संकुईया गांव अपनी पत्नी को लेने पहुंचा था. जिसके विवाद में उसने अपने ससुर मुन्नी लाल अहिरवार एवं साली अनीता अहिरवार की हत्या कर दी. वहीं अपनी पत्नी द्रोपती को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया. जिसके बाद वह घटना के बाद फरार हो गया था, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी की जा चुकी है. जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी.
भोपाल. मध्य प्रदेश कैबिनेट ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए प्रदेशभर में शहरी क्षेत्रों में सरकारी जमीन (नजूल की भूमि) पर काबिज लोगों को स्थायी पट्टे मिल सकेंगे। सरकार 53 साल बाद नजूल भूमि के नियम बदलने जा रही है। इसके लिए हर जिले में कलेक्टर, संभाग में कमिश्नर और राजधानी भोपाल में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएंगी। नजूल की भूमि का पूरा ब्योरा एक क्लिक मेंं ऑनलाइन देखा जा सकेगा। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कैबिनेट की बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि गौशालाओं के लिए 10 एकड़ तक नजूल की जमीन एक रुपए सालाना लाइसेंस फीस पर दी जाएगी। यानि ये एक तरह से मुफ्त होगी। राज्य सरकार 2020 नजूल भूमि निवर्तन निर्देश लागू करने जा रही है। अब राजस्व भूमि का संधारण किया जाएगा नरोत्तम मिश्रा ने की बैठक में 50 साल बाद नगरीय क्षेत्रों की शासकीय भूमि के धारकों को भू अधिकार पत्र देकर उन्हें स्वामित्व दिया जाएगा। नजूल निवर्तन निर्देश दिया गया गया है। वर्तमान में नगरीय क्षेत्रों में नजूल भूमि, आबादी भूमि धारणा अधिकार सुनिश्चित एवं राजस्व वसूली के लिए कोई भूमि अभिलेख संधारित नहीं था। जो इसके बाद अब होगा। नगरीय क्षेत्र में शासकीय भूमि में काबिज अधि भोगियों को भूमि स्वामी प्रमाणपत्र अथवा स्थायी पट्टा किए जाने का प्रस्ताव है। विभाग द्वारा तैयार किए गए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित वरिष्ठ सचिव समिति द्वारा भी इसमें अनुशंसाएं की गई हैं। जब हम गांव में पट्टा दे रहे हैं तो शहर में क्यों नहीं ? गृह मंत्री ने कहा 1967 से राज्य शासन द्वारा नजूल भू खंडों के अधिपत्य अभिलेख तैयार करने और उसके प्रमाणपत्र तैयार करने के निर्देश शासन देगा। ये कार्रवाई प्रदेश के सभी नगरों में शुरू होगी। जहां पर नजूल भूमि का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, वहां पर उपलब्ध होगा। इसकी आवश्यकता क्यों है, वो इसलिए कि भू धारकों को पट्टा देने के साथ ही नजूल भूमि का अभिलेख तैयार करने और इससे राजस्व वसूली करने की जरूरत है। अब इसके बाद स्थायी पट्टा मिल सकेगा। जैसे ग्वालियर में जेसी मिल में लोग सालों से रह रहे हैं। जब हम गांवों में पट्टा दे रहे हैं और मालिक बना रहे हैं तो फिर शहर में क्यों नहीं। जमीन कैसे दी जा सकेगी राज्य शासन के किसी भी विभाग को हस्तांतरण द्वारा, स्थायी पट्टे पर द्वारा, स्थानीय निकाय को भू-स्वामी के हक में दी जाकर, नीलामी द्वारा भू स्वामी के हक में दी जाकर। खाली पड़ी भूमि को मेला लगाने के लिए लाइसेंस द्वारा दी जा कर। योजना बनाकर निर्माण के लिए बाजार, बस स्टैंड इत्यादि के लिए बाजार मूल्य 50 फीसदी प्रीमियम। आबादी योजना के लिए बाजार मूल्य के लिए 60 फीसदी प्रीमियम पर। मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को सक्षम प्राधिकार राज्य सरकार को होगी, लेकिन ऐसे मामले में कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी। अब एनओसी के लिए नहीं भटकना होगा नजूल के एनओसी के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा। अब ये व्यवस्था समाप्त की जा रही है। इसे फ्री कर दिया गया। नजूल की भूमि का लैंड बैंक तैयार किया ज रहा है। एक क्लिक पर पूरे नजूल की जानकारी हर कोई ले सकेगा। कमजोर वर्गों को आधे प्रीमियम पर भूमि आवंटित की जाएगी। सहकारी बैंकों के मामले में 50 फीसदी प्रीमियम पर भूमि दी जाएगी। चैरिटेबल संस्थाओं को रियायती दरों पर भूमि दी जाएगी। गौशालाओं के लिए 10 एकड़ तक की भूमि एक रुपए वार्षिक लाइसेंस फीस पर दी जाएगी मतलब गौशालाओं के लिए भूमि निशुल्क कर दी गई है। स्थायी पट्टे वित्त विभाग की सहमति से 99 साल के लिए दिए जाएंगे। 77 लाख किसानों के खातों में 25 सितंबर को एक क्लिक में भेजी जाएगी 4-4 हजार की राशि नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि उसमें किसान कल्याण निधि जोड़कर 10 हजार रुपए साल तय कर दी है। प्रदेश सरकार ने इसमें 4 हजार रुपए जोड़ा गया है। 77 लाख किसानों के खाते में 25 सितंबर को दीन दयाल उपाध्याय जी के जन्मदिन पर ये राशि एक क्लिक में भेजी जाएगी। बुधवार से राजस्व विभाग का अमला और पटवारी इसके डेटा कलेक्शन के लिए जुट जाएंगे। 77 लाख के अलावा, जो किसान मानते हैं कि वह पात्र हैं, लेकिन उनका नाम नहीं है। वह अपना नाम इस लिस्ट में जुड़वाएं। उन सभी के डेटा को कंप्लीट करने का काम कल से होगा। फिर चाहे वो 80 लाख हो जाएं या 90 लाख हो जाएं। सभी को इसका लाभ मिलेगा।
विदिशा। फसल बीमा की राशि और खराब हुई फसल के सर्वे की मुआवजा राशि को लेकर मंगलवार को देवास-कानपुर हाईवे के धतूरिया गांव के पास किसान सड़क पर उतर आए। किसानों ने नेशनल हाईवे 146 पर चक्काजाम कर दिया। किसानों का कहना था कि बीमा राशि की सूची में हमारा नाम नहीं है। चक्काजाम के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। इन गांवों के किसान शामिल चिड़ोरिया, खाईखेड़ा, मिर्जापुर, पांझ, कुआखेड़ी, सन, भैरोखेड़ी, रुसल्ला, कराखेड़ी, मदनखेड़ी, धारुखेड़ी, डाबर, पड़रात, धतूरिया, पीपरहूंठा, अबेला, तिलक, भदारबड़ा गांव, हिरनई, खरी, काफ, मूड़रा, ठर्र आदि गांव के किसान यहां काफी संख्या में जुट गए थे। किसानों के आगे सिविल लाइंस पुलिस बेबस नजर आई। वहीं, कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में किसानों ने बीमा राशि को लेकर सुनवाई नहीं होने से कलेक्टोरेट में प्रदर्शन किया। इसके अलावा राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने किसानों की समस्याओं को लेकर किसानों ने जमकर नारेबाजी की। किसान जुटते गए, पुलिस को भनक भी नहीं लगी सागर रोड के एक दर्जन से ज्यादा गांव के किसान बीमा राशि को लेकर सागर हाईवे पर धतूरिया के पास एकत्रित हुए। सैकड़ों की संख्या में किसान पूर्व सूचना पर जुटते गए लेकिन सिविल लाइंस पुलिस को इस बात की भनक नहीं लगी। सिविल लाइंस थाना प्रभारी कमलेश सोनी के ढीले रवैये की वजह से आंदोलन को और ज्यादा बल मिला। एकत्रित हुए किसानों ने करीब एक घंटे तक जाम लगाए रखा। बात करनी की बजाय थाना प्रभारी किसानों ने बदतमीजी कर रहे थे। इस वजह से नाराज किसानों ने हाईवे पर एक घंटे तक जाम लगा दिया। दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई गांवों के किसानों को नहीं मिली बीमा राशि, नेता और अफसर कर रहे गड़बड़ी कांग्रेस नेता देवेंद्रसिंह राठौर, डॉ राजेन्द्रसिंह दांगी, नरेन्द्र रघुवंशी, पोपसिंह, दीवान किरार, प्रकाश कक्का, सुनील रघुवंशी , पांझ पंचायत के सरपंच तोरन सिंह का कहना था कि पिछले साल खरीफ फसल को बहुत नुकसान हुआ था। लेकिन जहां नुकसान हुआ वहां किसानों को राशि नहीं दी गई। कंपनी, अफसरों और नेताओं के साथ मिलकर गड़बड़ी करती है। हाईवे पर जाम के बाद कृषि: संचालक एएस चौहान किसानों से चर्चा करने पहुंचे। डीडीए ने बताया कि एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ने प्रदेश के 22 जिलों में बीमा किया था। 416 हलकों में बीमा आया है और 171 में नहीं आया है। कंपनी के अधिकारियों से चर्चा हुई। बाकी हलकों की राशि आने की उम्मीद है। वहीं विदिशा विधायक शशांक भार्गव ने प्रधानमंत्री, कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विसंगति को दूर करने की मांग की। कांग्रेस भी उतरी किसानों के लिए कांग्रेस नेताओं ने बीमा नहीं मिलने पर किसानों के साथ कलेक्टोरेट में प्रदर्शन किया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष कमल सिलाकारी, पूर्व विधायक डॉ मेहताबसिंह यादव आदि नेताओं का कहना था कि बीमा राशि वितरण सही ढंग से की जाए। जहां नुकसान हुआ था वहां बीमा नहीं मिला। वहीं राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने भी इसका विरोध कर प्रदर्शन किया।
भोपाल. मध्य प्रदेश की अट्ठाइस विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है. मंगलवार रात जारी हुए आदेश में 14 आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं. इन तबादलों में ग्वालियर, सागर और जबलपुर संभाग के कमिश्नर को बदल दिया गया है. इन तीनों संभाग के कमिश्नर को मंत्रालय से अटैच किया गया है और उन्हें सचिव बनाया गया है. जबकि संभाग में नए कमिश्नर की नियुक्ति कर दी गई है. ग्वालियर के कमिश्नर एम.बी ओझा मंत्रालय में सचिव बनाए गए हैं. उनकी जगह अब आशीष सक्सेना ग्वालियर संभाग के नए कमिश्नर होंगे. इसी तरह सागर संभाग के कमिश्नर जनक जैन को मंत्रालय में सचिव बनाया गया है. उनकी जगह अब मुकेश शुक्ला सागर के नए कमिश्नर होंगे. वहीं जबलपुर के कमिश्नर रहे महेश चौधरी को मंत्रालय में सचिव बनाया गया है. उनकी जगह अब बी चंद्रशेखर जबलपुर संभाग के नए कमिश्नर होंगे. दरअसल कुछ वक्त पहले चुनाव आयोग की तरफ से निर्देश जारी किए गए थे कि अगले छह महीने में रिटायर होने वाले और तीन साल से ज्यादा समय से जमे अधिकारियों को जिलों से हटाया जाए. ग्वालियर, सागर और जबलपुर संभाग के कमिश्नर का तबादला इसी से जोड़कर देखा जा रहा है. यह अधिकारी बदले गए – 14 आईएएस अधिकारियों की नई पदस्थापना – ग्वालियर, सागर, जबलपुर संभाग के कमिश्नर बदले गए – ग्वालियर कमिश्नर एमबी ओझा मंत्रालय में सचिव बनाए गए – आशीष सक्सेना ग्वालियर संभाग के नए कमिश्नर होंगे – जनक जैन सागर संभाग के कमिश्नर मंत्रालय में सचिव बनाए गए – मुकेश शुक्ला सागर के नए कमिश्नर होंगे – महेश चौधरी जबलपुर कमिश्नर मंत्रालय में सचिव बनाए गए – बी चंद्रशेखर जबलपुर संभाग के नए कमिश्नर होंगे – एम के अग्रवाल आयुक्त सहकारी संस्थाएं बनाये गए – मसूद अख्तर, गृह विभाग में सचिव बनाए गए – संजीव सिंह, आयुक्त आदिवासी विकास बनाए गए – शिल्पा गुप्ता, उप सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास – सूफिया फारूकी, सीईओ, रोजगार गारंटी परिषद – प्रीति मैथिल, संचालक, कृषि विभाग – गणेश शंकर मिश्रा, आयुक्त, संस्थागत वित्त – षणमुख प्रिया, सीईओ, राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड
भोपाल. मध्य प्रदेश में मंत्रियों के कोरोना पीड़ित होने का सिलसिला जारी है. मंगलवार को फिर दो मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया और हरदीप सिंह डंग की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी है. इससे पहले सीएम शिवराज सहित उनके मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों को कोरोना हो चुका है. रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया चिरायु अस्पताल में भर्ती हो गए हैं.मिली जानकारी के मुताबिक सिसोदिया अपनी मां का कोरोना टेस्ट कराने चिरायु अस्पताल गए थे. मां की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आयी. जिसके बाद उन्होंने भी अपना टेस्ट कराया. जांच में वे भी संक्रमित मिले. इसके बाद वो मां के साथ ही अस्पताल में भर्ती हो गए. डंग की अपील ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह डंग की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है.संक्रमित होने के बाद मंत्री डंग ने सोशल मीडिया के ज़रिए ये जानकारी साझा की है.डंग ने ट्वीट कर ये बताया कि उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, वह अस्पताल में भर्ती हैं.साथ ही ये अपील भी की है कि उनके संपर्क में जो लोग भी आए हैं, वे अपना कोरोना टेस्ट करा लें. यह भी संक्रमण की चपेट में शहर में मिले संक्रमित मरीजों में भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की डायरेक्टर डॉ. प्रभा देसिकन की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है.भोपाल में उप लोकायुक्त सुशील कुमार पॉलो को भी कोरोना हो गया है. नेशनल ज्यूडिशियल अकेडमी में दो मरीज मिले. जीएमसी में दो, आरकेडीएफ में दो और चिरायु अस्पताल में एक डॉक्टर की रिपोर्ट पॉजिटिव आई.राजभवन में तीन, पुलिस कंट्रोल रूम में दो जवान संक्रमित मिले हैं. मैनिट की स्थापना शाखा के अधीक्षक की पत्नी भी कोरोना से संक्रमित हो गयी हैं. 16 दिन बाद मौत के गिरे आंकड़े राजधानी में संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. रोजाना ढाई सौ से ज्यादा नए मरीज मिल रहे हैं.मंगलवार को शहर में 271 नए संक्रमित मिले हैं. लगभग 16 दिन बाद संक्रमितों की मौतों के मामलों में थोड़ी कमी दर्ज की गई है. स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 16 दिन बाद सिर्फ एक मरीज की मौत हुई है.इससे पहले 7 सितंबर के बुलेटिन में सिर्फ एक मौत रिकॉर्ड हुई थी.