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उत्तराखंड के दौरे पर गयीं उमा भारती को कोरोना, हरिद्वार के पास क्वारंटीन

भोपाल। एमपी की पूर्व सीएम उमा भारती की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव हैं। वह अभी उत्तराखंड के दौरे पर हैं। उमा बीते दिनों पहाड़ की यात्रा पर गई थीं। उन्होंने केदारनाथ में दर्शन करते हुए वीडियो भी डाला था। कोरोना पॉजिटिव होने के जानकारी उन्होंने खुद ही ट्वीट कर दी है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उमा भारती ने ऋषिकेश और हरिद्वार के बीच स्थित वंदे मातरम कुंज में खुद को क्वारंटीन किया है। उमा भारती ने देर रात ट्वीट कर लिखा है कि मैं आपकी जानकारी के लिए यह डाल रही हूं कि मैंने अपनी पहाड़ यात्रा की समाप्ति के अंतिम दिन प्रशासन को आग्रह करके कोरोना टेस्ट की टीम को बुलवाया, क्योंकि मुझे 3 दिन से हल्का बुखार था। मैंने हिमालय में कोविड के सभी विधिनिषेध एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया। फिर भी मैं कोरोना पॉजिटिव निकली हूं। पूर्व सीएम ने बताया कि मैं अभी हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच वंदे मांतर कुंज में क्वारंटीन हूं, जो कि मेरे परिवार के जैसा है। 4 दिन बाद फिर से टेस्ट कराऊंगी और स्थिति ऐसी ही रही, तो डॉक्टरों के परामर्श के अनुसार निर्णय लूंगी। मेरे संपर्क में आए लोगों से अपील है कि वो अपनी कोरोना टेस्ट करवाए एवं सावधानी बरते। गौरतलब है एमपी की पूर्व सीएम उमा भारती एमपी उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार के बाद हिमालय की यात्रा पर निकल गई थीं। यात्रा खत्म कर वह फिर से एमपी की राजनीति में सक्रिय होतीं। लेकिन उससे पहले ही वह कोरोना की चपेट में आ गई हैं। एमपी बीजेपी के नेताओं ने उन्हें जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।

MP में चने की सप्लाय में भी घोटाला, फफूंद लगा चना PDS के जरिए बांटने की तैयारी

बैतूल। मध्यप्रदेश में घटिया अनाज वितरण के रोज नए घोटाले सामने आ रहे हैं। बालाघाट, मंडला,छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में बांटे गए घटिया चावल और गेहूं का मामला थमा भी नहीं था कि अब घटिया चना दूसरे प्रदेशों को भेजने का सनसनीखेज मामला बैतूल में सामने आया है। बैतूल से छत्तीसगढ़ भेजे जा रहे सौ टन चने की खेप में फफूंद लगा और घुन लगा चना मिला, जिसे रास्ते से ही वापस कर दिया गया। चने का भंडारण करने वाले एमपी लॉजिस्टिक वेयर हाउस कॉरपोरेशन की इसमे बड़ी लापरवाही सामने आई है। छत्तीसगढ़ भेजे जा रहे इस चने को वहां गरीबो में बांटा जाना था। लेकिन इसके फफूंद लगे और गुणवत्ता हीन होने की शिकायत के बाद घटिया सप्लाय का यह खेल उजागर हो गया। बताया जा रहा है कि साल 2018 में नेफेड ने समर्थन मूल्य पर चने की खरीदी की थी, जिसे वेयरहाउस कॉरपोरेशन के जरिये सरकारी और प्राइवेट वेयर हाउसो में रखा गया था। इस चने को कोरोना काल मे केंद्र सरकार ने गरीबों की मदद के लिए उन्हें राशन के तौर पर देने का फैसला किया है। फ्री में बांटे जाने वाले इस चने को छत्तीसगढ़ सरकार को देने के आदेश दिए गए थे। इसका ठेका रायपुर की अनाज कंपनी भारत दाल इंडस्टीज को सौंपा गया है। इसके घटिया होने का खुलासा तब हुआ जब कंपनी के ट्रक ड्राइवर और क्लीनरों को इसका वजन और क्वालिटी घटिया होने का संदेह हुआ और उन्होंने पूरे खेप की जांच करना शुरू किया। कम्पनी के ट्रक ड्राइवर बैतूल के चिचोली स्थित निजी वेयर हाउस से चार ट्रक में लगभग 100 टन चना लेकर रायपुर के लिए रवाना हुआ थे, लेकिन ड्राइवर को कम वजन और वाटर डैमेज का संदेह हुआ तो उसने ठेकेदार को इसकी सूचना दी। ठेकेदार की शिकायत पर एमपी वेयर हाउसिंग लॉजिस्टिक कॉरपोरेशन, बैतूल की टीम ने इनके सैम्पल लिए तो उसमें फफूंद वाला चना निकला। इसके अलावा चने में कचरा और उसमें घुने लगे होने के भी प्रमाण मिले। गड़बड़ी के उजागर होते ही चारो ट्रकों को तुरंत प्राइवेट वेयर हाउस वापस भेजा दिया गया। गड़बड़ी के सामने आने के बाद अधिकारी अब जांच करने की बात कर रहे हैं। वहीं, ठेकेदार का कहना है कि ऐसा चना तो गाय भी नहीं खाएगी। भले ही अधिकारी जांच की बात कर रहे हों, लेकिन इस मामले से साफ है कि वेयर हाउस में गड़बड़ी हो रही है। ठेकेदार ने एक ट्रक में 3 क्विंटल चना कम होने का भी संदेह व्यक्त किया है। अब तक बैतूल से 25 सौ टन चना छत्तीसगढ़ भेजा जा चुका है और चार से पांच सौ टन चना अभी और भेजा जाना बाकी है।

MP : एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची, अस्पताल के रास्ते में ही निकली महिला की जान

बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल में एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंचने से एक महिला की मौत हो गई। बैतूल के भंडारपानी गांव में सड़क नहीं है और ग्रामीण बांस के झोले में महिला को लादकर अस्पताल के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है और मामले की जांच की मांग की है। बैतूल के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक का भंडारपानी गांव 1800 फीट ऊपर पहाड़ी पर बसा है। यहां जाने के लिए रास्ता नहीं है। भंडारपानी की जग्गोबाई पति इंदर (28) की डिलीवरी पिछले महीने अगस्त में हुई थी जब उसने बेटी को जन्म दिया था लेकिन एक महीने बाद पेट मे दर्द और ब्लीडिंग के कारण उसकी मौत हो गई। परिवार वालों का आरोप है कि एम्बुलेंस और सरकारी सुविधाएं मिल जाती तो उसकी जान बच सकती थी। जग्गो बाई को 9 सितंबर की रात में अचानक दर्द और ब्लीडिंग होनी लगी। 10 सितंबर की सुबह ग्रामीणों ने बांस में कपड़ा बांधकर झोला बनाया और उसे कंधों पर 1800 फीट नीचे इमलीखेड़ा (सड़क तक) ले आए। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने बुधवार दोपहर 12.46 बजे 108 पर एंबुलेंस के लिए फोन किया। भोपाल से सूचना मिली कि घोड़ाडोंगरी की एंबुलेंस ढाई घंटे बाद मिल पाएगी। इसके बाद नूतन डंगा गांव के सरपंच साबू लाल, सचिव मालेकार सरकार ने प्राइवेट वाहन की व्यवस्था की और घोड़ाडोंगरी अस्पताल के लिए महिला व परिजनों को रवाना किया। गांव से 10 किमी दूर तबियत बिगड़ने पर रास्ते में आमढाना उप स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए दिखाया गया लेकिन महिला की मौत पहले ही हो चुकी थी। श्रमिक आदिवासी संगठन के राजेंद्र गढ़वाल ने कहा उन्होंने 108 पर एंबुलेंस के लिए फोन किया था, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। पीड़िता एंबुलेंस का इंतजार करती रही। अगर एंबुलेंस समय पर आ जाती तो शायद महिला की मौत नहीं होती। उन्होंने सरकार से पीड़ित परिवार के लिए राहत की मांग भी की है।

ड्रग्स मामले में पूछताछ के दौरान तीन बार रोईं फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण

मुंबई. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने शनिवार को दीपिका पादुकोण से करीब 6 घंटे तक पूछताछ की। रिपोर्ट्स की मानें तो सवाल-जवाब के दौरान दीपिका एक बार नहीं, बल्कि तीन बार रो पड़ी थीं। बताया जा रहा है कि इस दौरान एनसीबी के अधिकारियों ने उन्हें इमोशनल कार्ड न खेले की नसीहत दी थी। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, दीपिका की आंखों में आंसू देख एनसीबी के अधिकारियों ने उनके हाथ जोड़ लिए। साथ ही कहा कि इमोशनल कार्ड खेलने की बजाय वे सबकुछ सच-सच बताती हैं, तो उनके लिए बेहतर होगा। दीपिका ने मानी ड्रग्स चैट की बात रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनसीबी की पूछताछ में दीपिका पादुकोण ने ड्रग्स चैट करने की बात स्वीकार की। हालांकि, उन्होंने ड्रग्स लेने की बात से इनकार किया। दीपिका ने एनसीबी को बताया कि उनका पूरा ग्रुप डूप लेता है, जो कि सिगरेट है। इसमें कई नशीली चीजें होती हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि एनसीबी ने जब दीपिका से चैट में इस्तेमाल हुए वीड और हशीश शब्दों के बारे में पूछा तो उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। जब उनसे पूछा गया कि वो जो डूप लेती हैं, क्या उसमें ड्रग्स भी होती है तो एक्ट्रेस ने चुप्पी साध ली। एक्ट्रेस के कई जवाबों से एनसीबी के अधिकारी संतुष्ट नहीं हुए। दीपिका के दो फोन जब्त किए गए सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को दीपिका के एनसीबी दफ्तर पहुंचने के बाद अधिकारियों ने सबसे पहले उन्हें आरोपों के बारे में बताया। डेटा का बैकअप लेने के लिए उनके 2 मोबाइल फोन ले लिए गए। उनसे कहा गया कि इस मामले में किसी संदिग्ध या आरोपी से बात नहीं करेंगी। उसके बाद एक अंडरटेकिंग पर साइन करवाए गए। उनसे कहा गया कि 3 फेज में पूछताछ की जाएगी, इसके लिए 3-4 राउंड हो सकते हैं। सुशांत सिंह राजपूत डेथ केस से जुड़े ड्रग्स मामले की जांच कर रही एनसीबी के हाथ तीन साल पुरानी वॉट्सऐप ग्रुप चैट लगी थी। 28 अक्टूबर 2017 को हुई इस चैट में दीपिका, उनकी मैनेजर करिश्मा प्रकाश और सुशांत की टैलेंट मैनेजर जया साहा के बीच ड्रग्स को लेकर हुई बातचीत हुई थी। चैट में दीपिका ने ‘हैश’ और ‘वीड’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए करिश्मा से पूछा था कि माल है क्या? इसके बाद दीपिका और करिश्मा को समन भेजा गया था। करिश्मा ने एनसीबी को बताया था कि इस वॉट्सऐप ग्रुप की एडमिन खुद दीपिका थीं। कोर्ट में पेश किए जाएंगे स्टेटमेंट शनिवार को एनसीबी ने दीपिका के अलावा सारा अली खान और श्रद्धा कपूर से भी पूछताछ की। इससे एक दिन पहले एजेंसी के सामने रकुल प्रीत सिंह की पेशी हुई थी। एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर एमए जैन का कहना है कि पूछताछ के दौरान उन्होंने जितने भी स्टेटमेंट रिकॉर्ड किए हैं, वो कोर्ट में सबमिट किए जाएंगे। जैन के मुताबिक, ड्रग्स एंगल में अब तक 18-19 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

बीजेपी की नई फौज तैयार, अनुभव-कुशलता और युवा जोश का सामंजस्य

नई दिल्ली. आठ महीने के लंबे इंतजार और तमाम कयासों के बाद बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अपनी टीम की घोषणा कर दी. जेपी नड्डा को पिछले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की जो टीम मिली थी, उसमें उन्होंने कई अमूलचूल परिवर्तन करते हुए अपनी टीम में अनुभव, संगठन कुशलता के साथ-साथ युवा जोश का सामंजस्य बैठाने की कोशिश की है. जेपी नड्डा ने अपनी टीम में वैसे तो कई बड़े-बड़े फैसले लिए हैं लेकिन सबसे चौंकाने वाला फैसला आरएसएस से बीजेपी में आए राम माधव और मुरलीधर राव को हटाना है. राम माधव ने ही मोदी सरकार बनने के बाद जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार बनवाकर घाटी में पार्टी को मजबूती दी थी. उसके बाद असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर एक के बाद एक सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. मिजोरम, नगालैंड और मेघालय में गठबंधन की सरकार बनाकर पूर्वोत्तर भारत में भी बीजेपी के पैर जमाने का काम किया था. हरियाणा में 2014 और 2019 में सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले डॉ अनिल जैन को भी महासचिव पद से हटा दिया गया है. छत्तीसगढ़ में रमन सिंह से छत्तीस का आंकड़ा रखने वाली सरोज पांडेय भी महासचिव पद से मुक्त कर दी गई हैं. इनकी जगह जिन चेहरों को नड्डा ने टीम में जगह दी वो अचंभित करते हैं. जिन्हें प्रमोशन मिला है उनमें तरुण चुग पंजाब से आते हैं और अभी तक राष्ट्रीय सचिव के पद पर काम कर रहे थे, दिल्ली के प्रभारी थे. हालांकि दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी की क्या पर्फोमेंस रही, ये किसी से छुपी नहीं है. इन चेहरों पर जताया भरोसा पिछले कुछ समय से बीजेपी ने जिस दलित चेहरे पर सबसे ज्यादा भरोसा जताया है उनमें दुष्यंत कुमार गौतम का नाम शामिल है. इन पर नड्डा ने भरोसा जताते हुए अपनी टीम में महासचिव बनाया हैं. कर्नाटक के सीटी रवि को महासचिव बनाया गया हैं. सीटी रवि कर्नाटक सरकार में संस्कृति, कन्नड़ और पर्यटन मामलों के मंत्री हैं और उनकी मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से खास नहीं बनती है. इसलिए वो मंत्री पद से इस्तीफा देकर बीजेपी महासचिव के तौर पर काम करेंगे. इसके अलावा महिला कोटे से कांग्रेस से बीजेपी में आईं एनटी रामाराव की बेटी डी पुरदेंश्वरी को महासचिव बनाया गया है. चेन्नई में जन्मी पुरदेंश्वरी मनमोहन सिंह सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रही हैं. जाहिर है कि उन्हें आंध्र प्रदेश की नुमाइंदगी करने के लिए राम माधव की जगह दी गई है. डी पुरदेंश्वरी 2019 के लोकसभा में विशाखापट्टनम से चुनाव लड़ी थी और उनकी जमानत भी जब्त हो गई थी. असम चुनाव को देखते हुए नड्डा ने सांसद दिलीप सैकिया को महासचिव बनाया है. सैकिया असम में पिछलें दो दशकों से संगठन में कई पदों पर काम कर चुके हैं. तेजस्वी सूर्या को बड़ी जिम्मेदारी जेपी नड्डा की नई टीम पर संगठन महासचिव बीएल संतोष की प्रभाव अच्छा खासा दिखता हैं. सीटी रवि को महासचिव के पद पर ताजपोशी और उनके करीबी माने जाने वाले युवा सांसद तेजस्वी सूर्या को भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. उन्हें पूनम महाजन की जगह युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है. अनंत कुमार का कर्नाटक बीजेपी में ही नही बल्कि केंद्रीय बीजेपी नेतृत्व में बड़ा नाम था. उनके निधन के बाद उनकी पत्नी तेजस्वनी लोकसभा सीट बेंगलुरू दक्षिण से दावेदार थीं. हालांकि बीएल संतोष ने पूरी ताकत लगाकर अनंत कुमार की पत्नी की जगह तेजस्वी सूर्या को टिकट दिलाया था. जेपी नड्डा की नई टीम में तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को उपाध्यक्ष बनाया गया है. वसुंधरा राजे और रमन सिंह पहले से ही अमित शाह की टीम से उपाध्यक्ष थे. इस बार झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का नया नाम जुड़ गया हैं. नड्डा की नई टीम राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में भी कुछ नाम चौंकाते हैं जैसे मुकुल रॉय. हालांकि मुकुल रॉय को तृणमूल कांग्रेस से बीजेपी में आए लंबा अरसा हो चुका है. लेकिन उन्हें सरकार के बजाए संगठन में जिम्मेदारी मिली. पश्चिम बंगाल चुनाव में उनकी बड़ी भूमिका रहने वाली है. इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है. उमा भारती, प्रभात झा, विनय सहस्त्रबुद्धे, ओम माथुर, श्याम जाजू और अविनाश राय खन्ना की उपाध्यक्ष पद से छुट्टी कर दी गई है . प्रवक्ता बीजेपी ने 23 प्रवक्ताओं की भारी-भरकम फौज बनाई है. राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी इसकी अगुवाई करेंगे. इसमें पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ और सांसद हिना गवित, सांसद राजू बिस्टा, सांसद राजीव चंद्रशेखर, तेजतर्रार सांसद अपराजिता सारंगी समेत कई युवा चेहरों को जगह दी गई हैं लेकिन मीनाक्षी लेखी को प्रवक्ता पद से मुक्ति दे दी गई है. जेपी नड्डा ने अपनी टीम में दूसरी पार्टियों से आए नेताओ को भी तरजीह देते हुए उन्हें संगठन में जगह दी है. जेपी नड्डा की इस टीम में नए-पुराने चेहरों का सामंजस्य बैठाने की कोशिश की गई है. नड्डा ने अपनी टीम में बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं के अनुभव का ध्यान रखते हुए स्थान दिया हैं. सबसे खास बात ये हैं कि उन्होंने अपनी टीम जातिगत आधार पर और सभी राज्यों को प्रतिनिधित्व देते हुए चुनी है. पद खाली वहीं सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि तमाम कोशिश के बाद भी जेपी नड्डा संगठन की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण पद महासचिव पर सभी 10 महासचिवों की नियुक्ति नहीं कर पाए हैं. संगठन के हिसाब से संगठन महासचिव समेत 10 महासचिव होने चाहिए लेकिन अभी एक महासचिव पद खाली है. मतलब साफ है कि कहीं न कहीं पार्टी में ऐसे अनुभवी लोगों की कमी है जिनको महासचिव बनाया जाए. वहीं अमित शाह के 6 साल अध्यक्षीय कार्यकाल में दो महासचिव समेत कई संगठन के पद खाली रहे. सूत्रों के मुताबिक जिन नेताओं को नड्डा की टीम में जगह नहीं मिली हैं, उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बनाया जा सकता हैं. माना जा रहा है कि केंद्र सरकार में मंत्रिमंडल में फेरबदल भी जल्द होगा.

विटामिन D हो पर्याप्त तो कोरोना वायरस से मौत का खतरा आधा: स्टडी

भोपाल। कोरोना वायरस के जिन मरीजों में पर्याप्त मात्रा में विटामिन D की मात्रा मौजूद होती है उनकी मौत का खतरा 52 फीसदी कम होता है. एक नई स्टडी में इस बात की जानकारी मिली है. अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने यह स्टडी की है. रिसर्चर्स को इस बात की जानकारी मिली है कि जिन मरीजों में विटामिन डी की मात्रा पर्याप्त रूप से मौजूद थी, वैसे मरीजों के हॉस्पिटल में भर्ती होने के बाद मौत का खतरा आधा हो गया. वहीं, गंभीर रूप से बीमार पड़ने का खतरा भी विटामिन डी की वजह से 13 फीसदी कम पाया गया. स्टडी के दौरान पता चला कि जिन मरीजों में विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा मौजूद है, उनके वेंटिलेटर पर रखे जाने की जरूरत भी 46 फीसदी कम हो गई. वैज्ञानिकों का कहना है कि व्यक्ति के इम्यून सिस्टम में विटामिन डी का अहम रोल होता है जिसकी वजह से कोरोना मरीजों को फायदा होता है. बता दें कि औसतन अमेरिका के 42 फीसदी लोगों में विटामिन डी की कमी पाई जाती है. वहीं, अश्वेत और बुजुर्ग लोगों में भी तुलनात्मक रूप से विटामिन डी की कमी अधिक होती है और ऐसे लोग कोरोना के भी अधिक शिकार हो रहे हैं. इससे पहले बोस्टन यूनिवर्सिटी के ही माइकल हॉलिक को एक रिसर्च में पता चला था कि ऐसे लोग जिनमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मौजूद है, उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा 54 फीसदी कम होता है. पिछली स्टडी को ही आगे बढ़ाने पर वैज्ञानिकों को कोरोना मरीजों और विटामिन डी के संबंधों को लेकर नई जानकारी मिली. हॉलिक की टीम ने तेहरान के अस्पताल के 235 कोरोना मरीजों के सैंपल लिए थे. कुल 67 फीसदी मरीजों में विटामिन डी की मात्रा 30 ng/mL से कम थी. एक्सपर्ट का कहना है कि अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों में भी विटामिन डी की मात्रा कम होती है, इसलिए स्पष्ट तौर से यह कहना मुश्किल है कि विटामिन डी की कमी नहीं होती तो कितने लोगों की जान बच सकती थी.

MP अजब है, गज़ब है … 5 उन जिलों में वेंटिलेटर भेजे, जहां आईसीयू बेड ही नहीं

भोपाल। कोरोना महामारी से निपटने की चुनौतियों के बीच सरकारी मैनेजमेंट में बड़ी खामी उजागर हुई है। स्वास्थ्य संचालनालय द्वारा स्वास्थ्य मंत्रालय के नेशनल हेल्थ पोर्टल पर अपलोड की गई एक रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में कोविड के गंभीर मरीजों के लिए आईसीयू में पलंग और वेंटिलेटर कम पड़ रहे हैं। पांच जिले बैतूल, दमोह, मंडला, पन्ना और श्योपुर के जिला अस्पतालाें में आईसीयू नहीं हैं, लेकिन यहां 9 वेंटिलेटर भेज दिए गए। इनमें भी 5 सिर्फ दमोह भेजे गए। जबकि आगर मालवा, नरसिंहपुर, सतना, शाजापुर और उमरिया जिलों में आईसीयू के 2 से 10 बिस्तर हैं, लेकिन यहां एक भी वेंटिलेटर नहीं दिया गया। भोपाल में 283 नए केस, प्रदेश में 23 दिन में 50 हजार मरीज बढ़े राजधानी में शनिवार को 283 नए कोरोना केस मिले, जबकि 7 मरीजों की मौत हो गई। इनमें 4 भोपाल के हैं। नए संक्रमितों में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के बेटे सुकर्ण मिश्रा और एक आईएएस अधिकारी की 10 वर्षीय बेटी भी शामिल है। वहीं, प्रदेश में 2181 नए संक्रमित मिले। 23 दिन में 50 हजार संक्रमित बढ़ चुके हैं। इनमें भी 20 हजार सिर्फ 9 दिन में बढ़े।

MP : न डॉक्टर देखते हैं, न दवा देते हैं, मरीज की पत्नी ने मंत्री को गिनाईं खामियां

भोपाल। पति को कोरोना होने पर 5 दिन पहले ही जेपी अस्पताल में भर्ती किया है, ना डॉक्टर देखने आते हैं और ना वार्ड ब्वॉय दवाई खिलाते हैं। नर्सों को कुछ बोलो तो वो दुत्कार देती हैं। मरीज को खाना खिलाने और बाथरूम कराने के लिए कोई तैयार नहीं है। ऐसे में मजबूरन मैं कोरोना के आईसीयू में जाकर पति को दवा और खाना खिलाती हूं। मैं जानती हूं कि मुझे संक्रमण का खतरा है, इसलिए 5 दिन से अस्पताल में ही पड़ी हूं। घर में छोटे-छोटे बच्चे अकेले हैं। अपनी मजबूरी और अस्पताल प्रबंधन की यह लापरवाही 12 नंबर स्टॉप पर रहने वाली आशा शर्मा ने शनिवार दोपहर 2 बजे जेपी अस्पताल पहुंचे चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग को सुनाई। इस पर मंत्री ने अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाई और स्वास्थ्य आयुक्त संजय गोयल को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा। साथ ही आशा को भरोसा दिलाया कि उनके पति का बेहतर इलाज किया जाएगा। मंत्री सारंग जेपी अस्पताल में कोरोना मरीज संतोष रजक की मौत और रजक की बेटी की ओर से लगाए गए आरोपों की हकीकत देखने अस्पताल पहुंचे थे। मंत्री ने जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरके तिवारी और डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव को फटकार लगाई। मंत्री सारंग ने बताया कि मृतक संतोष रजक के मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य आयुक्त को बोला है। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद देर शाम जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आरके तिवारी को हटा दिया गया। इनके स्थान पर डॉ. राकेश श्रीवास्तव को यह जिम्मेदारी सौंपी। मंत्री की फटकार के बाद चिरायु भेजा- मंत्री सारंग ने आशा से पूछा कि आप क्या चाहती हैं। इस पर आशा ने साफ कहा कि यहां इलाज ही नहीं हो रहा है, आप मेरे पति को चिरायु अस्पताल में शिफ्ट करा दो। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग का अमला सक्रिय हुआ और एक घंटे में एंबुलेंस से सुरेश को चिरायु अस्पताल भेज दिया गया। इससे पहले मंत्री सारंग ने कोरोना पॉजिटिव मृतका संतोष की बेटी प्रियंका की ओर से लगाए गए आरोपों का वीडियो जेपी के सिविल सर्जन डॉ. तिवारी समेत अन्य जिम्मेदारों को दिखाया। उनसे हकीकत पूछी। इस पर उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा था कि परिजन तो झूठे आरोप लगा रहे हैं।

UP व दक्षिण भारत की ओर जाने वाली ट्रेनें फुल, दशहरा-दिवाली पर होने लगी वेटिंग

भोपाल। दशहरा और दीपावली के आसपास के दिनों में उत्तर प्रदेश व दक्षिण भारत तरफ जाने वाली लगभग सभी स्पेशल ट्रेनों में वेटिंग की स्थित बन गई है। एसी और स्लीपर दोनों ही श्रेणी में अभी से ही वेटिंग मिल रही है। ऐसे में यदि इन प्रदेशों तरफ आवागमन करने वाली स्पेशल ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ाई गई, तो यात्रियों को त्योहारों के समय अपने घरों को लौटने में खासी परेशानी उठाना पड़ सकती है। हालांकि रेल मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि 10 अक्टूबर के पहले कुछ स्पेशल ट्रेनें और बढ़ाए जाने की संभावना है। इसके लिए विभिन्न रेल मंडलों से प्रस्ताव व वेटिंग मांगी गई है। नई ट्रेनों की मांग: फीरोजपुर, जम्मू, रायपुर, कोटा, अमृतसर, पुणे, अहमदाबाद के लिए स्पेशल ट्रेनों की मांग बढ़ने लगी है। रेल यात्री उपयोगकर्ता व सलाहकार समिति के सदस्य निरंजन वाधवानी का कहना है कि हर दिशा में ट्रेनों का संचालन शुरू किया जाए।

यूपी : गैंगरेप के बाद काटी थी जीभ, दलित लड़की की हालत नाजुक, वेंटिलेटर पर

अलीगढ़। यूपी के हाथरस जिले में हैवानियत का शिकार दलित लड़की जिंदगी और मौत से जूझ रही है। हैवानों ने गैंगरेप के बाद उसकी जीभ भी काट दी थी। उसके बाद वह एक हफ्ते से ज्यादा बेहोश रही थी। आरोप है कि 19 साल की दलित लड़की के साथ गांव के ही चार दबंग युवकों ने गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया था। इस मामले में पुलिस का रवैया कठघरे में है। सवाल उठने के बाद तीन आरोपियों को आनन-फानन में गिरफ्तार किया जा चुका है। मेडिकल परीक्षण में पता चला कि युवकों ने गैंगरेप के बाद पीड़िता की रीढ़ की हड्डी को तोड़ डाला था। पुलिस ने छेड़खानी के आरोप में इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। 21 सितंबर को किशोरी के होश में आने के बाद की गई डॉक्टरी परीक्षण के दौरान मेडिकल रिपोर्ट में गैंगरेप की पुष्टि हुई। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। पीड़िता ने होश में आने पर यह भी बताया था कि आरोपियों ने उसकी जीभ काट दी थी, जिससे वह लोगों को घटना के बारे में ना बता सके। अब तक तीन आरोपी गिरफ्तार हाथरस पुलिस ने तीन आरोपियों को अब तक गिरफ्तार किया है। पीड़िता पिछले 13 दिनों से जिंदगी और मौत के बीच अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में जूझ रही है। हालत बिगड़ने पर उसे आईसीयू में शिफ्ट करते हुए वेंटिलेटर पर रखा गया है। लगातार पीड़िता की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। 14 सितंबर को रेप का आरोप हाथरस के थाना चंदपा इलाके के गांव में 14 सितंबर को चार दबंग युवकों ने 19 साल की दलित लड़की के साथ बाजरे के खेत में गैंगरेप किया था। इस मामले में पुलिस ने लापरवाही भरा रवैया अपनाया। रेप की धाराओं में केस ना दर्ज करते हुए छेड़खानी के आरोप में एक युवक को हिरासत में लिया। इसके बाद उसके खिलाफ धारा 307 (हत्या की कोशिश) में मुकदमा दर्ज किया गया था। घटना के 9 दिन बीत जाने के बाद पीड़िता होश में आई तो अपने साथ हुई आपबीती अपने परिजनों को बताई। जब पीड़िता का डॉक्टरी परीक्षण हुआ तो इसमें गैंगरेप की पुष्टि होने के बाद हाथरस पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार कर लिया है। गांव में ठाकुरों की दबंगई: परिजन पीड़िता के परिजनों ने बातचीत के दौरान बताया कि थाना चंदपा इलाके के इस गांव की जनसंख्या 450 के करीब है। इसमें 150 ठाकुर समाज के लोग और 150 के करीब ब्राह्मण समाज के लोग हैं। वहीं 150 के करीब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग हैं। परिजनों का कहना है कि गांव के अंदर ठाकुरों की दबंगई है। चारा काटते वक्त खेत में गैंगरेप 14 सितंबर को सोमवार सुबह साढ़े दस बजे दलित लड़की अपने मां और भाई के साथ पशुओं को चारा लेने के लिए खेतों पर घास लेने के लिए गई थी। उसी दौरान लड़की का भाई घास काटने के बाद चारा लेकर खेतों से घर चला गया था। इसके बाद पीड़िता की मां कुछ दूरी पर जाकर घास काटने लगी। उसी दौरान पीड़िता को अकेला पाकर गांव के रहने वाले चार युवक बाजरे के खेत में खींचकर ले गए। जिला अस्पताल से अलीगढ़ हुई थी रेफर गैंगरेप की घटना को अंजाम देते वक्त चिल्लाने की आवाज सुनकर मौके पर पहुंची मां को देखने के बाद आरोपी युवक फरार हो गए थे। पीड़िता की हालत नाजुक होने पर इलाज के लिए उसे परिजन जिला अस्पताल ले गए थे। डॉक्टरों ने पीड़िता की गंभीर हालत देखते हुए अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। पीड़िता के हाथ-पैर काम नहीं कर रहे: डॉक्टर जेएन मेडिकल के डॉक्टरों का कहना है कि पीड़िता के दोनों हाथ और दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया है। अब दलित लड़की की हालत बेहद ही नाजुक बनी हुई है। जेएन मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में वेंटिलेटर पर वह जिंदगी की जंग लड़ रही है।

कोरोना : राहत … अब एक्टिव केस कम हो रहे, 14 दिन पहले 9.73 लाख थे, अब 9.61 लाख

नई दिल्ली. देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़े अब कुछ राहत दे रहे हैं। बीते आठ में से सात दिनों में नए संक्रमितों से ठीक होने वालों की संख्या ज्यादा रही है। शुक्रवार को भी 85 हजार 465 संक्रमितों की पहचान हुई, जबकि 93 हजार 166 ठीक हो गए। इससे एक्टिव केस लगातार कम हो रहे हैं। 14 दिन पहले 12 सितंबर को 9.73 लाख एक्टिव केस थे, जबकि 25 सितंबर को यह 9.61 लाख हो गए। देश में अब तक 59 लाख 1 हजार 571 लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें 48 लाख 46 हजार 168 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 93 हजार 410 मरीजों की मौत हो चुकी है। ओडिशा देश का 8वां राज्य हो गया है, जहां संक्रमितों की संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है। शुक्रवार को यहां 4208 नए केस मिले। इसी के साथ संक्रमितों की संख्या 2 लाख 1 हजार 96 हो गई है। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में संक्रमितों की संख्या 2 लाख से ज्यादा हो चुकी है। गुरुवार को रिकॉर्ड 14 लाख 92 हजार 409 लोगों की जांच हुई। कोरोना टेस्टिंग का यह आंकड़ा एक दिन में सबसे ज्यादा है। इसके पहले 19 सितंबर को 12 लाख लोगों की जांच हुई थी। 6.89 करोड़ जांच हो चुकी हैं। अब हर 10 लाख की आबादी में मरीजों के मिलने की संख्या बढ़ गई है। अब इतनी आबादी में 4210 लोग संक्रमित मिल रहे हैं। 20 सितंबर तक 4200 मरीज मिल रहे थे। इतनी ही आबादी में मरने वालों की संख्या भी 67 हो गई है। पीजीआई चंडीगढ़ में शुक्रवार से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोरोना वैक्सीन कोवीशील्ड का ट्रायल शुरू हो गया है। यहां वैक्सीन का डोज लेने के लिए 400 वॉलंटियर्स ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

राजस्थान : 40 घंटे से हाईवे पर कब्जा, होटलों में लूटपाट, 30 वाहन फूंके, 700 पर केस

राजस्थान के डूंगरपुर में टीचर भर्ती में अनारक्षित पदों को आरक्षित करने की मांग को लेकर लगातार तीसरे दिन भी हिंसक प्रदर्शन जारी है। 40 घंटे से जयपुर. उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे के 10 किमी इलाके में तनाव बना हुआ है। उपद्रवी हाईवे और आसपास की पहाड़ियों पर डटे हैं। शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने एक बार फिर हाईवे पर बनी होटलों और दुकानों में तोड़फोड़-लूटपाट की। 30 वाहनों में आग लगा दी। अब तक 700 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुछ लोग बाइक पर आए थे, आंखों के सामने हमारी दुकान लूटकर ले गए। साथ ही वहां बने एक स्कूल में भी तोड़फोड़ की गई। एक्शन मोड में पुलिस एक्शन में आई पुलिस उपद्रवियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रही है। 700 लोगों को नामजद भी किया गया है। प्रदर्शन के दौरान 7 कंटेनरों समेत 30 वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। जयपुर ग्रामीण एसपी शंकर दत्त शर्मा को स्पेशल ड्यूटी पर लगाया गया है। रात 2 बजे तक पथराव, जलते रहे टायर डूंगरपुर सीमा के मोथली मोड़ पर भारी संख्या में पुलिसबल तैनात है। खेरवाड़ा से उदयपुर रोड पर ढाई किमी दूर टोल प्लाजा से सटे हाईवे पर देर रात तक पहाड़ियों से वाहनों पर पथराव हुआ। पत्थर राहगीरों को भी लगे। टायर भी जलाए गए। क्या चाहते हैं प्रदर्शनकारी? प्रदर्शन करने वाले शिक्षक भर्ती के अनारक्षित 1167 पदों को एसटी वर्ग से भरने की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर कांकरी डूंगरी पहाड़ी पर 17 दिन से प्रदर्शन चल रहा था। शुक्रवार को उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे पर प्रदर्शन अराजकता की हदें पार कर गया। प्रदर्शनकारियों ने हाईवे के 10 किमी तक के इलाके को कब्जे में ले लिया। पिछले 40 घंटे के अंदर करोड़ों की संपत्ति फूंक डाली। मकानों में भी तोड़फोड़-लूटपाट की गई। गुस्सा क्यों भड़का? कैंडिडेट 7 सितंबर से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने बातचीत कर उन्हें समझाया कि यहां पर पड़ाव न डालें। फिर भी प्रदर्शन जारी रहा। बिछीवाड़ा पुलिस ने कोविड महामारी के नियम तोड़ने और गैर जमानती धारा में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए थे। इसको लेकर कैंडिडेट का गुरुवार से गुस्सा भड़क उठा।

कार की MP : लाइट से हेलीकॉप्टर लैंडिंग, सीएम शिवराज, सिंधिया और नरोत्तम थे सवार

मुरैना: सीएम शिवराज सिंह चौहान के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान लापरवाही की खबर सामने आई है। दरसअल अंधेरा होने चलते के हेलीपेड पर खड़े कार की लाइट से हेलीकॉप्टर की लैंडिंग कराई गई है। बताया जा रहा है कि इस दौरान हेलीकॉप्टर सीएम शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा मौजूद थे। बता दें कि प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर रानीतिक दलों के नेता लगातार चुनावी क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुर्सी पर कब्जा बरकार रखने के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान भी ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं, वे भी लगातार ग्वालियर चंबल अंचल का दौरा कर रहे हैं।

MP : किसान कर्ज माफी पर फंसी शिवराज सरकार, विधानसभा में पेश जवाब से मुश्किल

भोपाल. मध्य प्रदेश विधान सभा में रिपोर्ट पेश कर खुद शिवराज सरकार इस मामले में फंस गयी है.रिपोर्ट कह रही है कि कमलनाथ सरकार ने अपने चुनावी वादे के मुताबिक 51 ज़िलों में किसानों का कर्ज माफ किया. विधानसभा में रिपोर्ट पेश करने वाले प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल अब कह रहे हैं कि सरकार इस मसले पर श्वेत पत्र लाएगी. कमलनाथ सरकार में किसान कर्ज माफी को लेकर प्रदेश की मौजूदा सियासत पूरी तरीके से गर्म है. विधानसभा में कमलनाथ सरकार के किसान कर्ज माफी का कबूलनामा पेश करने के बाद भी प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल के तेवर नरम नहीं पड़े हैं. वो अब भी कांग्रेस पर हमलावर हैं. कमल पटेल अब कह रहे हैं कि विधानसभा में जो आंकड़े पेश किए गए थे, वो सही हैं. कलेक्टरों ने कर्ज माफी के पोर्टल से आंकड़े डाले थे. लेकिन हकीकत में किसानों की कर्ज माफी हुई ही नहीं. कृषि मंत्री कमल पटेल अपने बचाव में कई तर्क दे रहे हैं. वो कह रहे हैं कि झाबुआ जिले में उपचुनाव के कारण कर्ज माफी की गई. लेकिन बाकी जिलों में किसी किसान का कर्जा माफ नहीं हुआ. पिछली सरकार ने किसान कर्ज माफी के नाम पर सिर्फ 6 हजार 420 करोड़ की राशि का प्रावधान किया था. उनका आरोप है कि कांग्रेस किसान कर्ज माफी के मुद्दे पर प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है. कांग्रेस को आइना दिखाने के लिए उनकी सरकार श्वेत पत्र जारी करेगी. वो अब उल्टा कांग्रेस नेताओं पर कर्ज माफी के नाम पर किसानों के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगा रहे हैं. पटेल यहां तक कह गए कि राहुल गांधी और कमलनाथ को 24 घंटे के अंदर माफी मांगनी चाहिए. अगर वो माफी नहीं मांगेंगे तो उनके खिलाफ 420 का मामला दर्ज किया जाएगा. कांग्रेस ने कृषि मंत्री कमल पटेल पर जवाबी हमला बोला है. कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे ने कहा विधानसभा और आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार में किसानों का कर्जा माफ हुआ है.प्रदेश में 27 लाख किसानों का 15 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्जा माफ हुआ है.

MP : बीमार मां को लेकर बच्चे 3 अस्पतालों में 2 दिन भटके; चौथे दिन बेड मिला, मौत

भोपाल। कोरोनाकाल में इंसानियत भी मरती जा रही है। प्राइवेट अस्पताल हों या सरकारी, सभी जगह बेपरवाह सिस्टम अब लोगों को मार रहा है। भोपाल के कोलार की 43 साल की संतोष रजक इसी बेपरवाही का शिकार हो गईं। वे दो दिन अस्पतालों में आईसीयू बेड के लिए भटकीं। जैसे-तैसे बेड मिला तो ठीक से इलाज नहीं हो पाया। अंत में उन्होंने गुरुवार को दम तोड़ दिया। बंसल में एक रात के इलाज का 41 हजार रु. बिल भरा 12 सितंबर की शाम करीब 6 बजे मां को सांस लेने में परेशानी हुई तो हर्ष उन्हें सिद्धांता अस्पताल ले गया। यहां हार्ट अटैक के लक्षण बताए तो हम रात 10 बजे बंसल अस्पताल ले गए। यहां कोरोना का सैंपल लिया गया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। यहां कोविड आईसीयू बेड नहीं हैं, इसलिए अगले दिन दोपहर तीन बजे हमें एंबुलेंस से जेके अस्पताल भेज दिया गया। बंसल में एक रात के इलाज का हमने 41 हजार रु. बिल भरा। जेके में भी आईसीयू बेड खाली नहीं थे, तो उन्होंने भर्ती नहीं किया। जेके से हमें हमीदिया भेजा, तो वहां रात 9 बजे तक हम बेड का इंतजार करते रहे, लेकिन बेड खाली नहीं होने का कहकर हमें लौटा दिया। फिर हमने पीपुल्स अस्पताल में फोन लगाया तो पता चला, वहां आईसीयू बेड खाली हैं। हम रात 10:20 बजे पीपुल्स हॉस्पिटल पहुंचे। यहां मरीज को भर्ती करने के पहले पांच दिन के 50 हजार रु. जमा करा गए। यहां इलाज महंगा पड़ता, इसलिए 14 की सुबह हमने कलेक्टर अविनाश लवानिया को आवेदन किया। उनके दखल के बाद मां को 14 सितंबर को दोपहर में जेपी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया। लेकिन, यहां भी इलाज के नाम पर खानापूर्ति हुई। मां की डेथ हुई, तब भी किसी ने हाथ नहीं लगाया यहां रात में अक्सर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाती है, कोई सुनता नहीं है। ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म होने पर मरीज के परिजन दूसरे वार्ड से खुद ही लाते हैं। 10 दिन इलाज के बाद जब गुरुवार को मां की डेथ हुई, तब भी किसी ने हाथ नहीं लगाया। हमें आईसीयू में बुलाकर पीपीई किट थमा दी और कहा- खुद पहन लो और अपनी मां को पहना दो। मेरे भाई और परिजनों ने पीपीई किट पहनकर मां को पैकिंग बैग में रखा, फिर उन्हें एंबुलेंस से विश्राम घाट लेकर गए।  

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