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जंगल के संरक्षक को चाहिए संरक्षण.

The guardian of the jungle needs protection. अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस आज डॉ. केशव पाण्डेय दुनियाभर में जैव विविधता संरक्षण के लिये अनेक दिवस मनाने के साथ ही विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। एक महत्वपूर्ण प्रजाति, सतत् विकास और मध्य एवं दक्षिण अमेरिका की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस मनाया जाता है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी जंगली बिल्ली है। “गार्जियन ऑफ द जंगल“ कहे जाने वाले जगुआर की प्रजाति उसके संरक्षण और महत्व से जुड़ी एक खास रिपोर्ट। देश और दुनिया में प्रति वर्ष 29 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य जगुआर के सामने दिनों-दिन बढ़ते खतरों को टालना है। साथ ही मेक्सिको से अर्जेंटीना तक इसके अस्तित्व को सुनिश्चित करने वाले महत्त्वपूर्ण संरक्षण प्रयासों के बारे में लोगों का जागरूक करना है। ताकि जंगल की इस खास प्रजाति का संरक्षण हो सके।जगुआर दिवस का मनाना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के व्यापक प्रयासों का ही यह परिणाम है। इसके तहत जगुआर कॉरिडोर और उनके आवासों के संरक्षण की ज़रूरत पर ध्यान आकर्षित करने के लिये राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय साझीदारों के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय जगुआर दिवस संबंधित देशों की सामूहिक आवाज़ का प्रतिनिधित्त्व करता है। इसके महत्व को ऐसे समझा जा सकता है कि मार्च 2018 में “जगुआर 2030 फोरम“ के लिए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 14 रेंज देशों के प्रतिनिधि न्यूयॉर्क में एकत्रित हुए। इस फोरम के परिणामस्वरूप जगुआर 2030 स्टेटमेंट अस्तित्व में आया, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी जगुआर संरक्षण पहलों की एक विस्तृत श्रृंखला को रेखांकित किया।ब्राजील सहित अनेक रेंज देश राष्ट्रीय जगुआर दिवस समारोह भी मना रहे हैं। जिसने जगुआर को जैव विविधता के प्रतीक के रूप में मान्यता दी है। सबसे खास बात यह है कि जगुआर दिवस मनाने की मांग करने वालों में वैश्विक जंगली बिल्ली संरक्षण संगठन, पैंथेरा के सह संस्थापक,पूर्व सीईओ व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एलन रैबिनोविट्ज़ शामिल थे।जिस तरह भारत में टाइगर सहित चीतों व अन्य प्रजातियों के संरक्षण को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। ठीक उसी तरह दुनिया भर में विलुप्त होते जगुआर के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2023 में इसकी थीम “गार्जियन आफ द जंगल“ रखी गई है। मतलब जंगल का अभिभावक… ताकि लोगों को अधिक से अधिक जागरूक किया जा सके। कुदरत ने इन्हें बड़ा खूबसूरत बनाया है। हालांकि चीता और जगुआर दोनों ही पैंथर हैं, जिनके बीच बहुत अंतर है। एक के शरीर पर रोसेट (गुलाब के फूल जैसा) पैटर्न होता है। लेकिन भारत में जगुआर नहीं पाया जाता है। भारत में मेलेनिस्टिक तेंदुओं को ब्लैक पेंथर कहा जाता है। अमेरिका में मेलानिस्टिक जगुआर को ब्लैक पैंथर कहा जाता है। भारत में चार प्रजातियां पाई जाती हैं। गिर शेर, टाइगर, भारतीय तेंदुआ और हिम तेंदुआ इसके अलावा क्लाउडेड तेंदुआ भी पाया जाता है। जगुआर और चीता 1940 के दशक में विलुप्त हो गए थे। हालांकि भारत सरकार ने देश में चीता के संरक्षण के लिए 2022 में विशेष प्रयास किए और मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में इनका नया घर बनाया गया है।खासतौर पर जगुआर लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी मांसाहारी और एकमात्र बड़ी बिल्ली है, जो मेक्सिको से अर्जेंटीना तक 18 देशों में मौजूद है। इसका वैज्ञानिक नाम पैंथेरा ओंका है। यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बिल्ली शिकारी और अमेज़ॅन वर्षावन की एक महत्वपूर्ण प्रजाति है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) की खतरे वाली प्रजातियों की रेड लिस्ट में “ संकटग्रस्त प्रजाति” के रूप में जगुआर अल सल्वाडोर और उरुग्वे में विलुप्त है। शेष रेंज देशों में दबाव का सामना कर रहा है। वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन सूचीः परिशिष्ट आई में आते हैं। कारण स्पष्ट है कि जगुआर को अपने प्राकृतिक आवास रेंज में 50 प्रतिशत से अधिक संकट का सामना करना पड़ा है। जगुआर अच्छे तैराक होते हैं और यहाँ तक कि पनामा नहर में तैरने के लिये भी जाने जाते हैं। जगुआर की पहचान इसकी पूरी शृंखला में एक प्रजाति के रूप में की गई है, जो प्रजातियों की आनुवंशिक विविधता के लिये इसके निवास स्थान के संबंध और संरक्षण को महत्त्वपूर्ण बनाती है। जगुआर की शक्ति का अदांजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह कछुए का कवच हो या मगरमच्छ की खाल दोनों का शिकार कर लेता है।देश में इस दिन विभिन्न राष्ट्रीय प्राणी उद्यानों में इसे मनाने के साथ ही लोगों को इसके संरक्षण के बारे में जागरूक किया जाता है। ऐसे में आवश्यक है कि “जंगल के सरंक्षक को भी मिले मानव का संरक्षण“। तभी इस दिन को मनाने की सार्थकता सिद्ध होगी।

शराब दुकानदारो का लोगों व प्रशासन के साथ धोका!

Deception with the people and administration by liquor store owners. Special Correspondent – Sahara Samachaar शराब दुकानदारो द्वारा शराब के दाम मूल्य से ज्यादा की कीमत पर बेंची जा रही है। दामों की गई बढोत्तरी से शराब का सेवन करने वालों के बीच काफी नाराजगी देखी जा रही हैं नाराज़ लोगो का कोर्ट की ओर रुख इसी नाराजगी के चलते सेवन करने वालों लोग की ओर से एक जनहित याचिका भी लगाए जाने की योजना है। मुद्दे को लेकर अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में जाने की बात कही गई है। लोगों का कहना है मदिरा का सेवन करने वाले लोगों का आरोप है कि लायसेंसी शराब दुकान पर रैपर पर लिखे गये मूल्य से ज्यादा की कीमत वसूली जा रही है। मामले में बड़ा खुलासा होने पर कहा गया कि आबकारी पुलिस लगातार सिर्फ कच्ची शराब बनाने वालों पर कार्यवाई कर रही है। 40 रूपये की अवैध वसूली जबलपुर जिले में लायसेंसी शराब दुकानों पर मूल्य से अधिक दामों पर अंग्रेजी शराब बेची जा रही है। लायसेंसी शराब दुकान के गद्दीदार मदिरा प्रेमियों से अवैध वसूली कर रहे हैं। अंग्रेजी शराब के एक पाव के 150 रुपये की जगह 190 रुपए लिए जा रहे। दुकान संचालक एक बोतल पर करीब 40 रूपये की अवैध वसूली कर रहे हैं। यहां के लोग करेंगे शिकायत शहर के धन्वन्तरि नगर, रसल चौक, इंद्रा मार्किट, भेड़ाघाट, बरगी, कुंडम सहित जिले भर में अंग्रेजी शराब दुकान में मूल्य से अधिक दाम में शराब बेची जा रही है। मूल्य से अधिक दामों पर बेची जा रही शराब को लेकर जनहित याचिका लगाई जाएगी। शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र निखारे ने मामले को लेकर कहा है कि वह कोर्ट में जनहित याचिका लगाएंगे। अवैध तरीके से ग्राहकों से की जा रही वसूली को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा आबकारी विभाग के पास दुकान संचालकों की शिकायत कीजायेगी। इसी के चलते शराब प्रेमियों का शराब से होता जा रहा मोह भंग. सहारा समाचार -जबलपुर.

माइनिंग विभाग की लापरवाही से अवैध उत्खनन करने वाले भू माफिया निडर, दौड़ा रहे डंपर.

Boldly running dumpers, engaged in illegal excavation due to the Mining Department’s negligence, the land mafia is fearless. अलताफ खान सिरोंज सिरोंज – आरोन रोड पर स्थित एवं इमलानी रोड पर स्थित गिट्टी क्रेशर मशीनों की आड़ में अवैध कोपरे मुरम का धड़ले से चल रहा कारोबार 24 घंटे आरोन रोड की घाटी से कोपरे मुरम से भरे हुए डंपर क्षेत्र में कॉलोनी ओर प्लांटो में बगे़र रॉयल्टी के बेझिझक डाल रहे हैं माइनिंग विभाग सिरोंज से लगभग 90 किलोमीटर दूर विदिशा जिले में बैठी हुई है लेकिन निष्क्रिय नजर आती है माइनिंग विभाग द्वारा कभी भी क्रेशर मशीनों पर जाकर चेक नहीं किया जाता कि उनके आसपास की जमीन को क्रेशर मशीनों के मालिकों ने बड़े-बड़े गढ़ों में तब्दील कर दी है कुछ जमीन राजस्व विभाग की भी है तो कुछ जमीन वन विभाग की भी है क्या कभी इन्होंने इतनी रॉयल्टी दी माइनिंग विभाग के अधिकारी कभी ऐसा नहीं करते कई बार मीडिया कर्मियों द्वारा अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है फिर भी वह इस ओर ध्यान नहीं देते हां सूत्र बताते हैं कि कभी-कभी माइनिंग विभाग सिरोंज क्षेत्र में आता है तो कभी छोटा-मोटा रेता केमट्रैक्टर ट्राली को पड़कर कैस बना देते हैं और गिट्टी क्रेशर मशीनों पर घूम कर वापस आ जाते हैं जिससे मॉर्निंग विभाग की मिली भगत भी इसमें शामिल हो सकती है लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद भी प्रशासन इन भू माफियाओं पर कार्रवाई करने से बच रहा है इस विषय मैं जब हमारे प्रतिनिधि की बात सिरोंज अनुविभागी अधिकारी हषर्ल चौधरी से हुई तो उनका कहना है कि जैसे ही हमें भनक लगेगी के क्षेत्र में अवैध कोपरे के डंपर पर आ रहे हैं हम इन पर कार्रवाई करेंगे

अवैध उत्खनन का खेल, गरीबों के नहीं बन रहे आशयाने कंपनी हो रही मालामाल, खुलेआम शासन के राजस्व पर लूट, नियम कायदे सिर्फ कागज़ों में, अधिकारी मौन.

The game of illegal excavation is in progress, and companies are amassing wealth while the poor are unable to secure dwellings. There is blatant looting of public revenue under the guise of open governance, rules and regulations exist only on paper, and officials maintain silence. Special Correspondent, Sahara Samachaar Katni. कटनी। नियम कानून को रौदकर जिले में रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर लगाम लगा पाने में संबंधित विभाग लगातार नाकामयाब साबित हो रहा है। कहने को विष्टा रेत कंपनी का ठेका समाप्त होने के बाद धनलक्ष्मी नामक रेत कंपनी ने जिले की सभी खदानें ले ली। स्वीकृत खदानों में से सिर्फ चार खदानें ऐसी हैं जहां पर वर्तमान में विभाग ने उत्खनन की स्वीकृति प्रदान कर रखी है। कागजों में स्वीकृत चार खदानों के अलावा कई ऐसी खदानें वर्तमान में हैं जहां से रेत का अवैध उत्खनन धड़ल्ले से हो रहा है। रेत कंपनी जिस अंदाज में बगैर अनुमति रेत का अवैध उत्खनन कर रही है उससे यह कहना गलत नहीं होगा की कंपनी को संबंधित विभाग का संरक्षण प्राप्त है। गत रात्री रेत का अवैध उत्खनन कर जा रहे एक ट्रक को ग्रामीणों ने रोक कर जब दस्तावेजों की जांच की तो जो बातें सामने आई वह बेहद चौंकाने वाली हैं। ग्रामीणों के दस्तावेज पूछने पर यह सिद्ध हुआ कि स्वीकृत खदान की टीपी लेकर गाड़ी किसी दूसरी खदान से अवैध उत्खनन कर देर रात निकल रही थी। उक्त घटना के बाद काफी देर तक गांव में हंगामे की स्थिति निर्मित रही बाद में किसी अधिकारी की मध्यस्थता के बाद ट्रक आगे की ओर रवाना हुआ। यह था मामलासूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक हाईवा क्रमांक MP 20 ZE 5577 गत रविवार की देर रात बड़वारा थाना क्षेत्र के ग्राम लदहर से रेत लोड कर के जा रहा था। ट्रक का पीछा करते हुए ग्रामीणों ने ट्रक को ग्राम सकरीगढ़ में रोक लिया। रेत से लदे ट्रक के चालक से जब ग्रामीणों ने दस्तावेज के संबंध में पूछताछ की तो चालक ने जो दस्तावेज उन्हें दिखाएं उसमें टीपी जजागढ़ रेत खदान की मौजूद थी। जजागढ़ की टीपी के जरिए रेत कंपनी का उक्त ट्रक लदहर से रेत लोड करके जा रहा था। लदहर रेत खदान से अभी तक कंपनी को रेत उत्खनन की स्वीकृति नहीं मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि बगैर स्वीकृति के ही उक्त खदान में धड़ल्ले से रेत के उत्खनन का खेल दिन-रात चल रहा है। बेखौफ चल रहा उत्खननरेत के अवैध उत्खनन को लेकर दो दिन पहले ही जिले के समीप वर्ती जिले शहडोल में रेत माफियाओं ने पटवारी को ट्रैक्टर से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया था। शहडोल की ही तरह कटनी में भी रेत माफिया गहरे तक अपनी जड़े जमा चुके हैं। पिछले रिकॉर्ड को अगर याद करें तो कटनी में भी मारपीट, गोलीबारी जैसी घटनाएं रेत माफियाओं के द्वारा घटित की जा चुकी हैं। पुरानी कंपनी की तर्ज पर नई कंपनी भी रेत की अवैध उत्खनन में अपने हाथ जमाने लगी है। महज चार खदानों की स्वीकृत होने के बावजूद कंपनी कई अन्य खदानों से रेत का उत्खनन कर स्वीकृत खदान की टीपी के जरिए सप्लाई कर रही है। वर्तमान समय में रेत के दाम आसमान छू रहे हैं। अवैध रूप से निकाली जा रही रेत पर कंपनी को किसी प्रकार का टैक्स तो देना नहीं पड़ेगा, लेकिन मिली भगत करके कंपनी व संबंधित जिम्मेदार लोग मोटा मुनाफा कमाने में जुट गए हैं। रेत का अवैध उत्खनन कर कंपनी जहां एक तरफ शासन को टैक्स का चूना लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ आम जनता की जेब पर डाका डालकर अपनी तिजोरी भर रही है जिम्मेदार कार्यवाही नहीं कर रहे यह एक सोचनीय विषय है

जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की लापरवाही का सिलसिला जारी, कार्यवाही के नाम पर रस्म अदायगी, प्रसूता की हुई मौत.

The saga of doctors’ negligence continues at the district hospital, with formalities being carried out in the name of disciplinary action, leading to the unfortunate death of a pregnant woman. Special Correspondent – Sahara Samachaar Katni. कटनी। जिला चिकित्सालय में व्यवस्थाएं सुधारने के बजाय बिगड़ती जा रही हैं ऐसे डॉक्टर है जो स्वयं के क्लीनिक चला रहे हैं जिला अस्पताल में दो दिन बाद फिर एक बार डॉ की लापरवाही से प्रसूता की मौत लागतार डॉक्टरों की लापरवाही से प्रस्तुओ की मौत होने का सिलसिला थम ही नही रहा है। जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ जांच का अस्वाशन देकर परिजनों को शांत करा दिया जाता है लेकिन आज तक किसी पर ठोस कार्यबाही नही होने के कारण लापरबाही का रवैया अपनाते हुए डॉक्टर अपने प्राइवेट डिस्पेंसरी में लगे रहते है जानकारी के अनुसार बताया गया है कि विजयराघवगढ़ से आयी प्रसूता की इलाज दौरान मौत विजयराघवगढ़ से आई शालिनी तिवारी पति राजू तिवारी 28 वर्ष कारितलाई निवाशी कल विजयराघवगढ़ में कल शाम 8 बजे स्वास्थ केन्द्र में प्रसव हुआ जिसमें लड़का हुआ था महिला की हालत गम्भीर होने के कारण जिला अस्पताल कटनी रेफर किया गया था जहाँ पर महिला को किसी भी डॉक्टर ने नही देखा रात में डॉक्टर सुनीता वर्मा को अस्पताल से कॉल गया था आधे घण्टे करते करते सुबह 5 बजा दिया, फिर परिजनों को कही ओर ले जाने की सलाह स्टाफ द्वारा दी गयी। जहाँ परिजन शारदा हॉस्पिटल ले गए लेकिन से भी बोल दिया गया था कि जबलपुर ले जाओ लेकिन महिला की मौत हो गयी परिजनों द्वारा डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया गया कि इलाज में बेपरवाही की गई जिससे प्रसूता की मौत हो गयी गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले ही चौधरी परिवार की एक महिला ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया था जिससे उसके परिवारजनो ने लापरवाही का आरोप लगाया था.

दुकानों पर एमआरपी से ज्यादा बेची जा रही शराब, रेट लिस्ट गायब, नियमों कायदे ताक पर, आबकारी विभाग और ठेकेदार मिलीभगत कर लगा रहे है शासन और जनता को चूना.

Alcohol is being sold in shops than the prescribed Maximum Retail Price (MRP), rate lists are missing, regulations are being violated, and there is collusion between the Excise Department and liquor vendors. Special Correspondent – Sahara Samachaar Katni. कटनी । शराब ठेकेदारों और आबकारी विभाग की मनमानी के चलते ग्राहक ठगे जा रहे हैं शराब ठेकेदारों के द्वारा खुलेआम MRP से ज्यादा दाम पर शराब बेची जा रही है लेकिन आबकारी विभाग द्वारा जानकर भी अनजान बनने की कोशिश की जा रही है. फ़ोन करने पर आबकारी विभाग के अधिकारी फ़ोन नहीं उठाते, यदि उठा भी ले तो कार्यवाही का अस्वासन दिया जाता है पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती. इस पूरे खेल से ऐसा प्रतीत होता है की आबकारी विभाग और ठेकेदारों के साठगांठ से करोड़ों रूपए की बंदरबाट हो रही है. कटनी के अंतर्गत आने वाली गर्ग चौराहे और दुर्गा चौक शराब दुकानों में मनमाने दाम में प्रिंट रेट से ज्यादा कीमत में शराब बेची जा रही है आलम यह है की रिहायशी इलाको में शराब MRP पर ही शराब की बिक्री होती है. लेकिन यदि हम कटनी से बहार किसी भी तहसील या कस्बों में जहाँ आबकारी विभाग ने ठेके आबंटित किये है वह पर शराब को MRP से लगभग २०% से २५% पर शराब के सभी ब्रांडो की बिक्री की जा रही है. आबकारी अधिकारी और ठेकेदारों की मिली भगत से शासन एवं आम जनता को चूना लगाया जा रहा है. बिल मांगने पर ठेके पर बैठे सेल्समेन कहते है की हमारे यहाँ बिल नहीं दिया जाता। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार एक तरफ महंगी शराब तो दूसरी तरफ सरकार के आहता बंद होने के आदेश की भी धज्जियां उड़ाते हुए शराब की दुकान के पास में एक नहीं कई आहते मिल जायेंगे जहा रोजाना जमघट मचा रहता हैं। जानकारी के मुताबिक़ कटनी शहर की हर शराब दुकान के पास आराम से बैठ के पीने खाने की व्यवस्था मिल जाती हैं वही कुछ दुकानें ऐसी भी है जो शहर के मोहल्ले गली में खोली गई है । जिनके सामने रोज भीड़ होती है जिससे लोगो को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बताया गया है कि इस मनमानी के चलते लोग परेशान हैं सुभाष चौक में शराब दुकान पर सरेआम महंगे रेट पर शराब बेची जा रही है मजे की बात तो यह है कि यहां से जिम्मेदार अधिकारी भी निकालते हैं लेकिन उनको कोई परवाह नहीं है और कुछ कदमों की दूरी पर आबकारी विभाग भी है लेकिन कार्यवाही के नाम पर नतीजा सिफर ही रहता है कई जगह तो सूचना बोर्ड भी गायब हैं जबकि रेट लिस्ट लगाना जरूरी होता है ताकि लोगों को एमआरपी का पता चल सके बताया जाता है कि ज्यादा कोई बात करता है तो शराब बेचने वाली लड़ाई झगड़े में उतारू हो जाते हैं इस वजह से उपभोक्ता नहीं बोलते हैं लेकिन बात चाहे जो हो गड़बड़ झाला हो रहा है.

रबी फसल की तैयारी पर प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण सम्पन्न.

Trained in natural agriculture for the preparation of Rabi crops. VSS, KVK, BRLF एवं NCNF का संयुक्त प्रयास उमरिया, जिले के अकाशकोट क्षेत्र के गांवों के प्राकृतिक कृषि पर सघन रूप से कार्य कर रहे, सामाजिक संस्था विकास संवाद द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र उमरिया के तकनीकी सहयोग से रबी फसल की तैयारी पर एक दिवशीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया । प्रशिक्षण में कृषि विज्ञान केंद्र उमरिया के वैज्ञानिकों द्वारा भूमि उपचार ,बीज का चयन, बीज उपचार,फसल चक्र, अंतर्वर्ती फसल, मिश्रित फसल, बीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत, ब्रह्मास्त्र, अग्नियास्त्र एवं दशपर्णी अर्क तैयार करने के बारे में विस्तार से बताया गया । उक्त प्रशिक्षण में करकेली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम अमडी, कोहका-47, डोंगरगवां, मर्दर, बिरहुलिया, खैरा, अगनहुडी एवं करौंदी के प्राकृतिक कृषि शामिल हुए । विकास संवाद संस्था एवं प्राकृतिक कृषि का राष्ट्रीय गठबंधन के प्रयाश से किसान प्राकृतिक कृषि की ओर बढ़ रहे हैं । किसान रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशी को छोड़, प्राकृतिक खाद एवं कीटनाशक तैयार कर अपने खेतों में उपयोग कर रहे हैं । प्रशिक्षण में 48 किसान शामिल हुए । प्रशिक्षण को कृषि वैज्ञानिक के.के. राणा, विनीता सिंह, धनंजय सिंह ने संबोधित किया। प्रशिक्षण का संचालन विकास संवाद के जिला समन्वयक भूपेन्द्र त्रिपाठी ने किया। प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए कृषि वैज्ञानिक धनंजय सिंह ने रबी के फसलों के उन्नत किस्मो के बारे में विस्तार बताया । उन्होंने कहा 1 एकड़ में 40 से 45 kg से अधिक न बोयें । चना में उखटा रोग के नियंत्रण पर चर्चा करते हुए फसल चक्र अपनाने की बात कही । कीटो का पहचान बताते हुए विभिन्न कीटों के जीवन चक्र के बारे में विस्तार से बताया । उन्होंने प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण के लिए बीज उपचार, भूमिउपचार के साथ गेंदा, धनिया जैसे फसल बोने की बात कही। श्री सिंह ने मिश्रित बोनी कीट नियंत्रण का कारगर तरीका बताया। प्रतिभगियों से चर्चा करते हुए कृषि वैज्ञानिक के.के. राणा ने बीज उपचार के महत्व को बताते हुए उन्होंने वीजामृत एवं जीवामृत के बनाने की विधि एवं उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला । प्रशिक्षण को सफल बनाने में किसान राकेश बैगा, मोहन बैगा, अमर सिंह , कविता सिंह, रामप्रसाद सिंह, संतोष सिंह, समरबहादुर, प्रदीप सिंह,लवकुश सिंह , बलराम महार, सतमी बाई बैगा एवं यशोदा राय का विशेष सहयोग रहा ।

बुंदेलखंड में आईएएस व आईपीएस विलेज रैपुरा (चित्रकूट) उत्तर प्रदेश: कभी डकैतों के लिए मशहूर था, अब आईएएस आईपीएस की है फैक्ट्री, हर घर में अफसर.!

Bundelkhand, the village of Raipura (Chitrakoot), Uttar Pradesh, was once infamous for dacoits but now boasts of IAS and IPS officers. It has transformed into a hub of factories, with every household having officers. Udit Narayanभोपाल। देश के हर गांव की अपनी एक विशेषता होती है और उसी वजह से वह अपनी पहचान बना लेता है, उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड अंचल के चित्रकूट का पाठा क्षेत्र कभी डकैतों का गढ़ माना जाता था । दरअसल इस इलाके में एक डकैत के खात्मे के बाद दूसरा डकैत बन जाता था, लेकिन अब इस पाठा क्षेत्र में डकैत नहीं बल्कि आईएएस और पीसीएस का जलवा है। इस छोटे से गांव के हर घर में एक सरकारी नौकर है। हम चित्रकूट जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर रैपुरा गांव कर रहे हैं।यह गांव कभी डकैतों के लिए मशहूर था, लेकिन अब इसकी पहचान आईएएस और आईपीएस हैं। दरअसल गांव के लगभग डेढ़ दर्जन से अधिक लोग इस समय आईएएस, आईपीएस, पीसीएस जैसी विभिन्न सेवाओं में उच्चाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं । खास आज यह है कि रैपुरा गांव में हर घर में कोई न कोई सरकारी कर्मचारी-अधिकारी है।हर घर में एक सरकारी कर्मचारी रैपुरा गांव के इंटर कॉलेज रिटायर प्रधानाचार्य महेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि इस गांव में लगभग डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग आईएएस, पीसीएस हैं। इन सभी की स्‍कूली पढ़ाई गांव में ही हुई है । हालांकि बाहर से उच्‍च शिक्षा हासिल कर अधिकारी बने हैं। साथ ही कहा कि इस गांव में हर एक घर में कोई न कोई सरकारी नौकरी में है। सिंह ने बताया कि वह जब स्कूल के प्रिंसिपल थे, तब स्कूल में बच्चों को दूसरों के बारे में बात कर प्रोत्साहित करते थे। इसका असर बच्‍चों पर सकारात्‍मक हुआ और गांव के युवाओं में सरकारी नौकरी हासिल करने की होड़ सी लग गई। कभी डकैतों के लिए मशहूर यह गांव सरकारी अफसरों के लिए पहचान रखता है। आईएएस और पीसीएस की भरमार महेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि गांव के अभिजीत सिंह, रोहित सिंह, कुलदीप कुमार और सीपी सिंह (आईएएस), यदुवेंद्र शुक्ल (आईपीएस), तेज स्वरुप, सुरेन्द्र, राजेन्द्र ,प्रकाश कुमार, सुरेश चन्द्र पाण्डेय, प्रह्लाद सिंह और सुरेश गर्ग बतौर पीसीएस कार्यरत हैं। इसके अलावा भी कई युवा अधिकारी बनकर रैपुरा गांव का नाम रौशन कर रहे हैं। साथ ही बताया कि आज भी तमाम युवा सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी के लिए बाहर रहकर पढ़ाई में जुटे हैं । हर साल कोई न कोई छात्र आईएएस या पीसीएस की परीक्षा में सफल जरूर रहता है. पिछली बार भी यह रिकॉर्ड कायम रहा है ।

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