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ब्रिटिश के पूर्व राजनयिक टॉम फ्लेचर को संयुक्त राष्ट्र सहायता प्रमुख नियुक्त किया गया

संयुक्त राष्ट्र  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने पूर्व ब्रिटिश राजनयिक टॉम फ्लेचर को विश्व निकाय का नया मानवीय प्रमुख नियुक्त किया। वर्तमान में ऑक्सफोर्ड के हर्टफोर्ड कॉलेज के प्रिंसिपल और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के कॉन्फ्रेंस ऑफ कॉलेजेज़ के उपाध्यक्ष फ्लेचर अपने ब्रिटिश साथी मार्टिन ग्रिफिथ्स का स्थान लेंगे। ग्रिफिथ्स ने जून के अंत में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए मानवीय मामलों के अवर महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया था। नियुक्ति की घोषणा करने वाले संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता फरहान हक ने कहा कि कार्यवाहक संयुक्त राष्ट्र मानवीय प्रमुख जॉयस मसूया तब तक इस पद पर बने रहेंगे जब तक कि फ्लेचर कार्यभार नहीं संभाल लेते। हक ने फ्लेचर को “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एक संचारक बताया जिन्होंने अपनी पुस्तकों और लेखन संबंधी कार्यों के माध्यम से विकास, कूटनीति, प्रौद्योगिकी और लोकतंत्र के क्षेत्रों में तकनीकी विशेषज्ञता और सार्वजनिक कूटनीति का मिश्रण प्रस्तुत किया है।” अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने कहा कि अमेरिका “तत्काल मानवीय संकटों से निपटने के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत करने और तेज करने के लिए” फ्लेचर के साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर है। उन्होंने एक बयान में कहा, “हमें यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए कि जीवन रक्षक सहायता सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे – सूडान से लेकर गाजा, हैती, यूक्रेन और अन्य जगहों पर।”    

मुख्यमंत्री के बयान पर पटवारी संवर्ग की प्रतिक्रिया: प्रदेश अध्यक्ष सोहन साहू ने की सम्मानजनक शब्दों की मांग

Patwari cadre’s reaction on Chief Minister’s statement: State President Sohan Sahu demanded respectful words भोपाल: reaction on Chief Minister’s statement मध्य प्रदेश पटवारी कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष सोहन साहू ने मुख्यमंत्री द्वारा कलेक्टर और पटवारियों की तुलना करते हुए दिए गए हालिया बयान पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। 10 अक्टूबर को मुरैना में एक सार्वजनिक सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने जो बयान दिया, उससे प्रदेशभर के पटवारी संवर्ग में असंतोष और आक्रोश उत्पन्न हो गया है। सोहन साहू ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा, “माननीय मुख्यमंत्री प्रदेश के पालक हैं, और हम सब उनके नेतृत्व में कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री जी हमेशा सभी को मर्यादित और सम्मानजनक भाषा के उपयोग की प्रेरणा देते हैं, परंतु बार-बार मंचों से पटवारी वर्ग के संदर्भ में की जाने वाली टिप्पणियां हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचा रही हैं।” Read More : https://saharasamachaar.com/manager-of-livelihood-mission/ साहू ने स्पष्ट किया कि पटवारी का पद अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील है। “हम प्रदेश के किसानों के हित में कार्य करते हैं और सरकार के विभिन्न कार्यों में अभिन्न भूमिका निभाते हैं। किसान और ग्रामीण जनजीवन से जुड़े मामलों में पटवारियों का योगदान सर्वविदित है। हम अपने वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं का सम्मान करते हैं, और यही सम्मान की अपेक्षा हमें भी सरकार से है,” उन्होंने कहा। पटवारी संघ ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि भविष्य में पटवारियों के प्रति आदरयुक्त और सम्मानजनक शब्दों का उपयोग किया जाए। “हमारा संवर्ग निरंतर सरकार के विकास कार्यों में सहभागी रहा है और हम पूरी निष्ठा से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहेंगे। किंतु इस प्रकार के बयान हमारी मनोबल को गिराने का काम करते हैं,” साहू ने कहा। पटवारी संघ ने यह भी रेखांकित किया कि पटवारियों का कार्यभार अत्यंत जटिल और जिम्मेदारियों से भरा हुआ है। वे न केवल राजस्व से संबंधित कार्यों का संचालन करते हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री से अपील करते हुए सोहन साहू ने कहा, “हमें विश्वास है कि मुख्यमंत्री जी भविष्य में ऐसे कदम उठाएंगे जिससे पटवारी संवर्ग का आत्मसम्मान और मनोबल बना रहेगा, ताकि हम किसान और समाज के हित में और भी बेहतर काम कर सकें।”

महिला सशक्तिकरण में वन स्टॉप सेंटर की महत्वपूर्ण भूमिका

   उज्जैन  महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक गंभीर सामाजिक समस्या है जिससे निपटने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये प्रदेश में वन स्टॉप सेंटर की स्थापना की गई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में मिशन शक्ति की संबल उपयोजना के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की हिंसा से प्रभावित और संकटग्रस्त महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर विभिन्न आपातकालीन एवं गैर-आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराना है। महिला सशक्तिकरण में वन स्टॉप सेंटर की भूमिका ·  सुरक्षित आश्रय एवं तात्कालिक सहायता – वन स्टॉप सेंटर उन महिलाओं को तत्काल आश्रय और सुरक्षा प्रदान करता है जो घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन हिंसा अथवा किसी भी प्रकार की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती है। सेंटर में महिलाओं को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाती है और उन्हें सुरक्षित वातावरण में आश्रय दिया जाता है। ·  कानूनी सहायता और परामर्श – वन स्टॉप सेंटर पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता प्रदान करता है ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सके और आवश्यक कानूनी कदम उठा सकें। कानूनी परामर्श और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहायता मिलने से महिलाएँ अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ न्याय पाने की दिशा में सशक्त हो सकें। ·  चिकित्सा सहायता – वन स्टॉप सेंटर पर महिलाओं को तत्काल चिकित्सा सहायता मिलती है। हिंसा या प्रताड़ना से घायल महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य सेवाएँ के साथ समन्वय कर चिकित्सा सेवाएँ दी जाती है। ·  मनोवैज्ञानिक परामर्श – हिंसा की शिकार महिलाएँ अक्सर मानसिक आघात से गुजरती है, वन स्टॉप सेंटर पर प्रशिक्षित परामर्शदाता महिलाओं को मानसिक और भावनात्मक समर्थन प्रदान करते है जिससे उनका आत्म-विश्वास मजबूत होता है। ·  पुनर्वास सेवाएँ एवं समाज में पुनर्स्थापना – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को पुनर्वास सेवाएँ भी प्रदान करते है। जरूरत पड़ने पर महिलाओं को उनके परिवार के साथ पुनर्स्थापित करने अथवा उन्हें स्वतंत्र जीवन जीने, अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर प्रदान करता है। ·  आर्थिक सशक्तिकरण के लिये प्रशिक्षण और रोजगार – वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को रोजगार और स्व-रोजगार देने के लिये प्रशिक्षण देने का भी प्रयास करते है। महिलाओं को विभिन्न कौशल में प्रशिक्षित किया जाता है। इससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकें और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें।        प्रदेश के 52 जिलों में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित किये जा रहे है। प्रारंभ से अगस्त 2024 तक 98 हजार 636 महिलाओं को पंजीकृत कर विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की गई, जिसमें लगभग 78 प्रतिशत महिलाएँ (76,499) को घरेलू हिंसा से संबंधित सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त दहेज उत्पीड़न, बलात्कार, यौन अपराध, बाल विवाह, गुमशुदा, अपहरण, निराश्रित आदि से संबंधित प्रकरणों में यथोचित मदद की गई। वर्ष 2019-20 में कुल 6 हजार 352 महिलाओं को सहायता दी गई थी। वर्ष 2023-24 में 21 हजार 490 महिलाओं को मदद प्रदान की गई। अब सभी वन स्टॉप सेंटर में वाहनों का प्रावधान भी किया गया है, जिससे दूरस्थ महिलाओं को भी त्वरित सहायता मिल सकेगी। क्रमांक 1881         

आजीविका मिशन की प्रबंधक ने मांगी रिश्वत, जिला पंचायत CEO ने 24 घंटे में दिए 2 अहम निर्देश

Manager of Livelihood Mission asked for bribe, District Panchayat CEO gave 2 important instructions in 24 hours उमरिया में Manager of Livelihood Mission में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। फोन पे के माध्यम से पैसे लिए जा रहे हैं। जिला प्रबंधक माधुरी शुक्ला पर बैंक सखी से रिश्वत लेने का आरोप है। सीईओ जिला पंचायत ने माधुरी शुक्ला को पद से हटा दिया है। मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उजागर हुआ। उमरिया ! उमरिया में आजीविका मिशन में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यहां खुले आम फोन पे के माध्यम से पैसा लिया जा रहा है। इसका खुलासा तब हुआ जब फोन पे का स्क्रीन शॉट वायरल हुआ। सरकार की जीरो टोलरेंस नीति पर सवाल इस घटना से प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति पर सवाल उठ रहा है। उमरिया जिले में सरकारी कर्मचारी बिना डरे अपने मातहतों से पैसों की डिमांड कर अपनी जरुरतें पूरी कर रहे हैं। लोगों की आजीविका को सुधारने का जिम्मा जिस विभाग के पास है, वह इन दिनों स्वयं की आजीविका सुधारने में लगा हुआ है। क्या है मामला आजीविका मिशन में पदस्थ मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन की जिला प्रबंधक (सूक्ष्म वित्त) माधुरी शुक्ला ने बैंक सखी से ऑडिट कराने के नाम पर फोन पे के माध्यम से रिश्वत ली। बैंक सखी ने इसकी शिकायत डीपीएम और सीईओ जिला पंचायत से कर दी है। वहीं, जिस फोन पे नंबर पर पैसा डाला गया, उसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया में वायरल हो गया है। लंबे समय से चल रहा है भ्रष्टाचार पूरा मामला वर्षों से चल रहे लेने देन से जुड़ा हुआ है। यह खेल पूर्व डीपीएम प्रमोद शुक्ला के समय से चला आ रहा है, जो अभी तक अनवरत जारी है। मामला तब सामने आया जब बैंक सखियों ने अपनी व्यथा शिकायती पत्र में लिखी, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह पैसा आजीविका मिशन में नौकरी करने वाली कंचन गुप्ता के नाम से गया है, जो फिर बाद में आपस में बांट लिया जाता है। बैंक सखी द्वारा की गई शिकायत का यह पहला नमूना है। इससे पहले भी न जाने कितने लोगों से पैसा वसूल किया गया है। अब सबसे खास बात यह है कि जिले में लगभग 45 से 50 FLRCP अर्थात फाइनेंशियल लिट्रेसी रिसोर्स पर्सन हैं, जिनको बिना कार्य के ही भुगतान कर दिया गया वह भी अधिया में। मानपुर जनपद पंचायत क्षेत्र में बहुत सी ऐसी हितग्राही हैं, जिनको पैसा देकर आधा वसूल लिया गया है। Read More : https://saharasamachaar.com/gujarat-student-fell-from-the/ बैंक सखियों के पास नहीं हैं नियुक्ति पत्र इससे बड़ी बात यह है कि जिले में जो 45 से 50 बैंक सखी कार्य कर रही हैं, उनके पास किसी तरह का नियुक्ति पत्र नहीं है और न ही विधिवत उनकी नियुक्ति की गई है। बस सारा काम मिल बांट कर हो रहा है। जिसमें ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत का पालन हो रहा है। बैंक सखियों के माध्यम से भी जम कर पैसा वसूला जा रहा है, जिसमें आरोप लगाया जा रहा है कि आधा माधुरी मैडम के पास आता है। जिला पंचायत सीईओ ने लिया एक्शन फोन पे का स्क्रीन शॉट और शिकायती पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद डीपीएम तो शून्य रहे लेकिन सीईओ जिला पंचायत अभय सिंह ओहरिया ने मामले पर संज्ञान लिया। उन्होंने आनन फानन में एक आदेश जारी कर माधुरी शुक्ला को पदीय दायित्व से हटा दिया। उनकी जगह सुनील बारस्कर को दायित्व सौंपा गया। इसी बीच रात भर में ही कुछ ऐसा हो गया जिसके बाद इस आदेश में आंशिक संशोधन जारी किया गया। दूसरे आदेश में माधुरी शुक्ला को मात्र वित्त के कार्य दायित्व से अलग किया गया। वित्त मामलों का प्रभार अब सुनील बारस्कर संभालेंगे। हालांकि इन आदेशों पल लोग सवाल उठा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश को 31 हजार 962 हजार करोड़ टैक्स डिवोल्यूशन मिला

लखनऊ केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को  1,78,173 करोड़ रुपये का टैक्स डिवॉल्यूशन जारी किया है. इसमें सबसे ज्यादा यूपी को 31हजार 962 करोड़ रुपये मिले हैं. सभी राज्यों के संदर्भ में देखें तो इस टैक्स डिवॉल्यूशन में अक्टूबर, 2024 में देय नियमित किस्त के अलावा ₹89,086.50 करोड़ की एक अग्रिम किस्त भी शामिल है. वित्त मंत्रालय ने कहा है कि आगामी त्यौहारी सीज़न को देखते हुए और राज्यों को पूंजीगत खर्चे में तेजी लाने और उनके विकास/कल्याण संबंधी खर्चे को वित्तपोषित करने में सक्षम बनाने के लिए अग्रिम किस्त जारी की गई. केंद्र के इस फैसले पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रतिक्रिया भी दी है. उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कर हस्तांतरण के तहत उत्तर प्रदेश को समय पर 31,962 करोड़ रुपये करने के लिए प्रधानमंत्री और वित्त मंत्रालय का हार्दिक आभार. यह अग्रिम किस्त हमारे त्यौहारी सीजन की तैयारियों को काफी बढ़ावा देगी और पूरे राज्य में विकास और कल्याणकारी पहलों को गति देगी. हम सब मिलकर एक मजबूत और अधिक समृद्ध उत्तर प्रदेश का निर्माण कर रहे हैं. बता दें इन रुपयों को राज्य सरकार उन अलग-अलग योजनाओं और स्कीम्स में खर्च करेगी जिनका ऐलान किया गया है. सरकार ने बीते दिनों कर्मचारियों को बोनस देने, बीपीएल श्रेणी वालों को त्यौहारी सीजन में दो सिलेंडर मुफ्त देने का ऐलान किया था. इन योजनाओं में राज्य सरकार का करोड़ों रुपया खर्च होता है. ऐसे में केंद्र से टैक्स डिवॉल्यूशन का रुपया मिलने पर राज्य सरकार को काफी राहत मिलेगी.  

शिमला मस्जिद मामले में संजौली की दुकानों पर लगाए गए ‘सनातनी सब्जी वाला’ बोर्ड, देवभूमि संघर्ष समिति लगा रही पोस्टर

शिमला हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में देवभूमि संघर्ष समिति ने एक नया अभियान शुरू कर दिया है. यहां देवभूमि संघर्ष समिति की ओर से हिंदू दुकानदारों की सब्जी की दुकान के बाहर एक बोर्ड लगाया जा रहा है. इस बोर्ड में ‘सनातन सब्जी वाला’ लिखा गया है. इसका उद्देश्य यह है कि स्थानीय लोग हिंदू दुकानदारों से खरीदारी करें और बाहरी लोगों का बॉयकॉट किया जाए. देवभूमि संघर्ष समिति के राज्य सह संयोजक विजय शर्मा ने कहा कि समिति की ओर से यह अभियान शुरू किया गया है. इस अभियान का उद्देश्य संजौली इलाके में हिंदू सब्जीवालों को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि वे लोगों से यह भी अपील कर रहे हैं कि बाहरी लोगों से वह खरीददारी न करें और स्थानीय दुकानदारों को आगे बढ़ाएं, ताकि उनका रोजगार चल सके. विजय शर्मा ने कहा, “हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में रोहिंग्या जैसे लोगों का आना शुरू हो गया है. यह लोग यहां पर व्यापार कर रहे हैं. इस बीच देवभूमि संघर्ष समिति ने स्थानीय दुकानदारों को आगे बढ़ने का बीड़ा उठाया है.” नेम प्लेट को लेकर पहले मच चुका बवाल हिमाचल में इससे पहले भी दुकानों में नेम प्लेट लगाने को लेकर विवाद हो चुका है। शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान पर पूरे देश में बवाल मचा था। दरअसल, पिछले महीने विक्रमादित्य सिंह ने कहा था कि सभी दुकानों में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर नेम प्लेट लगानी होगी। इस बयान के बाद देशभर में कांग्रेस बेक फुट पर आ गई थी, क्योंकि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने जब कावड़ यात्रा के दौरान नेम प्लेट लगाना अनिवार्य किया था, उस दौरान देशभर में कांग्रेस ने विरोध किया था। विक्रमादित्य के इस बयान के बाद कांग्रेस सरकार ने भी मंत्री के बयान से किनारा कर दिया था और मंत्री का निजी बयान बताया था। बहुदलीय कमेटी स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए रूल्स तैयार कर रही हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने उद्योग मंत्री हर्ष वर्धन चौहान की अध्यक्षता में रेहड़ी फड़ी वालों की समस्या के समाधान के लिए उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर रखी है। यह कमेटी स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए रूल्स तैयार कर रही है। नेम प्लेट वाले मामले पर हो चुका है विवाद हिमाचल प्रदेश देवभूमि संघर्ष समिति के इस अभियान के बाद अब संजौली में सब्जी बेच रहे दुकानदारों का धर्म प्रदर्शित होगा. इससे पहले हिमाचल प्रदेश में शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह के नेम प्लेट वाले बयान को लेकर भी खासा विवाद हो चुका है. विक्रमादित्य सिंह ने उत्तर प्रदेश के तर्ज पर हिमाचल प्रदेश के रेहड़ी-फड़ी वालों के नाम प्रदर्शित करने की बात कही थी. हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया था कि इस पूरे मामले का उत्तर प्रदेश और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मॉडल से कोई लेना-देना नहीं है. विधानसभा अध्यक्ष ने की कमेटी गठित हिमाचल प्रदेश में स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जो कमेटी गठित की गई है, वहीं इस संबंध में फैसला लेगी. गौरतलब है कि कि हिमाचल प्रदेश में स्ट्रीट वेंडर एक्ट के तहत जो भी व्यक्ति वेंडिंग करता है, उसे नगर निगम की ओर से लाइसेंस दिया जाता है. इस लाइसेंस में पहले से ही व्यक्ति की पहचान से जुड़ी जानकारी होती है. इस लाइसेंस को दुकान में लगाना पहले से ही अनिवार्य है.

“उद्योग मित्र योजना से कनेक्शन जोड़ने एवं विद्युत विक्रय में वृद्धि होने से राजस्व में वृद्धि भी होगी : ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि प्रदेश के उच्चदाब एवं निम्नदाब श्रेणी के औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की सुविधा के लिये स्थायी रूप से विच्छेदित विद्युत कनेक्शनों को पुन: जोड़ने एवं बकाया राशि के भुगतान में राहत तथा नवीन औद्योगिक एवं वाणिज्यिक आवेदकों को आवश्यक अधोसंरचना निर्माण की लागत के भुगतान में राहत देने के लिये “उद्योग मित्र योजना-2024” लागू की गई है। यह योजना 2 वर्षों के लिये प्रभावशील रहेगी। मंत्री तोमर ने कहा है कि इस योजना से वितरण कंपनियों की स्थायी रूप से विच्छेदित उपभोक्ताओं से बकाया राशि की वसूली हो सकेगी। साथ ही फिर से कनेक्शन जोड़ने एवं नवीन कनेक्शनों से विद्युत विक्रय में वृद्धि होने से राजस्व में वृद्धि भी होगी। यह योजना राज्य के औद्योगिक विकास के लिये भी सहायक होगी। पात्रता योजना में सभी उच्च एवं निम्न दाब श्रेणी के स्थायी रूप से विच्छेछित औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ता, जो कि योजना अनुसार बकाया राशि जमा कर पुनर्संयोजन या नया कनेक्शन लेना चाहते हैं, पात्र होंगे। साथ ही ऐसे औद्योगिक एवं वाणिज्यिक श्रेणी के नवीन आवेदक भी पात्र होंगे, जो विद्युत कनेक्शन के लिये विद्युत अधोसंरचना का निर्माण विद्युत वितरण कंपनियों से करवाना चाहते हैं। प्रावधान योजना में उपभोक्ताओं को स्थाई विच्छेदन के दिनांक पर देय कुल बकाया राशि का न्यूनतम 20 प्रतिशत भुगतान कनेक्शन जोड़ने के पूर्व एक मुश्त देना होगा। नवीन कनेक्शनों के प्रकरणों में जरूरी अधोसंरचना लागत की राशि का न्यूनतम 20 प्रतिशत भुगतान आवेदन के साथ एक मुश्त देना होगा। शेष राशि का भुगतान मासिक बिल के साथ ब्याज सहित अधिकतम 3 वर्ष में किया जा सकेगा। योजना का लाभ लेने के लिये आवेदक को महाप्रबंधक/वृत्त कार्यालय में आवेदन देना होगा। साथ ही 500 रूपये के स्टॉम्प पेपर पर इस आशय का शपथ-पत्र देना होगा कि वह योजना के प्रावधान के अनुसार राशि का भुगतान करेंगे। नवीन कनेक्शनों के लिये आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन देना होगा एवं विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित सर्विस कनेक्शन शुल्क, सुरक्षा निधि आदि भी देय होगा। आवश्यक अधोसंरचना का निर्माण बिजली कम्पनियों द्वारा निर्धारित एसओआर के अनुसार किया जायेगा। निर्धारित किश्तों एवं मासिक देयकों का भुगतान नहीं किये जाने पर 15 दिवस की सूचना देकर बिजली कनेक्शन काटा जा सकेगा। योजना का लाभ उपभोक्ताओं को केवल एक बार ही प्राप्त हो सकेगा। योजना अवधि में कोई उपभोक्ता अपने परिसर का हस्तांतरण किसी अन्य व्यक्ति को करता है, तो निर्धारित शर्तों के तहत सभी सुविधाएं नये उपभोक्ता को प्राप्त हो सकेंगी। योजनांतर्गत किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति में प्रकरण का निराकरण विभागीय समिति द्वारा किया जायेगा। समिति में अपर मुख्य सचिव ऊर्जा, प्रबंध संचालक एमपी पॉवर मैनेजमेंट कम्पनी और विधि विशेषज्ञ होंगे। समिति के संयोजक संबंधित विद्युत वितरण कम्पनी के प्रबंध संचालक होंगे। योजनावधि में प्राप्त होने वाले आवेदनों पर भी विचार किया जायेगा। योजनावधि समाप्ति के अंतिम दिन तक प्राप्त सभी आवेदनों के निराकरण हर स्थिति में योजना समाप्ति दिनांक से 30 दिन के अंदर कर दिया जायेगा।  

मार्गदर्शिका का क्षेत्रीय परीक्षण चयनित जिलों में, एक नवीन पहल है, जो बालकों में एक नयी सोच का संचार करेगी

भोपाल प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालयों में पढ़ने वाले बालकों में सकारात्मक सोच के लिये उज्ज्वल कार्यक्रम में प्रशिक्षण मार्गदर्शिका तैयार की जा रही है। इसका प्रमुख उद्देश्य बालकों को बढ़ती उम्र के साथ विभिन्न पहलुओं और बदलाव में उनकी सकारात्मक भूमिका के प्रति सजग करना है। यह एक नवीन पहल है, जो बालकों में एक नयी सोच का संचार करेगी, जिससे वे सकारात्मक सोच के साथ विभिन्न मुद्दों को समझ पायें। किशोर अवस्था में अर्जित ज्ञान और कौशल का प्रभाव आजीवन रहता है। इसलिये आवश्यक है कि “पौरूष” की अवधारणा से बालक प्रारंभ से ही परिचित हो सकें और उनके अनुकूल जीवन में व्यवहार करने की सोच उनके अंदर विकसित हो सके। स्कूल शिक्षा विभाग ने यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फण्ड एक्टिविटी (यूएनएफपीए) के सहयोग से इस नवीन आवधारणा को लेकर मार्गदर्शिका उज्ज्वल का निर्माण किया है। उज्ज्वल में शामिल मुद्दे मार्गदर्शिका “उज्ज्वल” में भेदभाव, हिंसा, टकराव, सायबर अपराध, लैंगिक अपराधों और कुप्रथाओं को रोकने में बालकों की भूमिका, घरेलू कामों में बालकों व पुरूषों की बराबरी की भागीदारी जैसे विभिन्न मुद्दे शामिल किये गये हैं। मार्गदर्शिका का क्षेत्रीय परीक्षण प्रदेश के डिंडोरी, बैतूल, गुना एवं भोपाल जिलों में कक्षा 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों के साथ चर्चा की गई। उनसे मिली प्रतिक्रियाओं और सुझावों को मार्गदर्शिका की विषय-वस्तु में शामिल किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने मार्गदर्शिका का प्रथम प्रारूप तैयार कर इसकी समीक्षा शिक्षकों के साथ की है। विभाग संशोधित मार्गदर्शिका को अंतिम स्वरूप देने पर काम कर रहा है। किशोरियों के लिये भी मार्गदर्शिका कन्या छात्रावासों में अध्ययन करने वाली कक्षा 9वीं से 12वीं की किशोरियों के लिये भी सशक्त मार्गदर्शिका तैयार की जा रही है। मार्गदर्शिका के सहयोग से किशोरियां दक्षता अर्जित कर पाएंगी, जो उनके भावी जीवन को बेहतर बनाने में सहायक होगी। किशोरियां विभिन्न जीवन कौशल विकसित कर जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने में अधिक सक्षम हो पायेंगी। किशोरियां अपने अधिकारों, कर्त्तव्यों और सामाजिक जिम्मदारियों के प्रति जागरूक होकर हॉस्टल, घर और समुदाय में परिवर्तन लाने की दिशा में भी सहयोग कर पायेंगी।  

बीजेपी का मातृ संगठन आरएसएस जातिगत जनगणना बात के बाद अब टीडीपी ने भी मांग दोहरा दी

नई दिल्ली देश भर में राजनीतिक दल और कई सामाजिक संगठन जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं। बिहार में तो नीतीश कुमार जब आरजेडी के साथ सरकार चला रहे थे, उसी समय उन्होंने जातिगत जनगणना करा दी थी। इसके बाद से ही वह पूरे देश में ऐसा करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा गठबंधन के एक और सहयोगी चिराग पासवान भी ऐसी मांग करते रहे हैं। यूपी से अनुप्रिया पटेल, संजय निषाद और ओपी राजभर भी यह दोहरा चुके हैं। इस बीच एनडीए सरकार के सबसे बड़े गठबंधन सहयोगी टीडीपी ने भी यह मांग दोहरा दी है। भाजपा का मातृ संगठन आरएसएस भी इसके पक्ष में बात रख चुका है। संघ का कहना था कि ऐसा किया जा सकता है, बस राजनीतिक इस्तेमाल न हो। तेलुगु देशम पार्टी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू ने दिए इंटरव्यू में जातिगत जनगणना को जरूरी बताया है। उन्होंने कहा कि कास्ट सेंसस होनी चाहिए। यह जनता की भावना है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। नायडू ने कहा, ‘आप जातिगत जनगणना कराएं। फिर आर्थिक विश्लेषण करें। स्किल सेंसस करें। इससे आपको पता चलेगा कि किसकी क्या स्थिति है और फिर उसके आधार पर आर्थिक गैर-बराबरी दूर करने में मदद मिलेगी।’ नायडू ने कहा कि जनभावना है कि जातिगत जनगणना होनी चाहिए। यदि ऐसा है तो फिर उसका सम्मान जरूरी है। यह बात सही है कि देश में गरीबी सबसे बड़ा मुद्दा है। यहां तक कि आप निचली जाति से हैं और पैसे वाले हैं तो लोग आपका सम्मान करेंगे। समाज में आपकी इज्जत होगी। लेकिन आप भले ही ऊंची जाति के हैं, लेकिन गरीब हैं तो फिर कोई आपको महत्व नहीं देगा। यह सच्चाई है। इसलिए आर्थिक स्थिति ही समानता का सबसे बड़ा पैमाना है। इसलिए आपको समाज में संतुलन के लिए आर्थिक गैर-बराबरी खत्म करने के लिए ही काम करना होगा। बता दें कि आरएसएस ने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की मीटिंग के बाद जातिगत जनगणना को लेकर सधा हुआ जवाब दिया था। संघ का कहना था कि यदि समाज को ऐसा लगता है तो कराई जा सकती है, लेकिन इसका प्रयोग राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। इससे समाज में वैमनस्यता बढ़ती है।

TESLA के लिए भारतीयों को करना होगा इंतज़ार! नई EV नीति की घोषणा के बाद सरकार ने पॉलिसी नहीं बदली

मुंबई एलन मस्क की टेस्ला के लिए भारतीय बाजार का रास्ता एक बार फिर मुश्किल हो गया है। दरअसल, इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए लागू की गई नई EV पॉलिसी में टेस्ला और अन्य ग्लोबल व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों रुचि नहीं लेने के बाद भी सरकार इसमें कोई बदलाव करने का मन नहीं है। एक सरकारी अधिकारी ने साफ कहा है कि सभी कंपनियों के लिए EV नीति के मापदंड़ समान रहेंगे। विदेशी इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माता कंपनियों को भारत में लाने के लिए इस साल मार्च में नई EV नीति घोषित की गई थी। हैवी इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने मनीकंट्रोल को बताया कि मौजूदा EV नीति का लाभ उठाने का इरादा रखने वाले कार निर्माताओं के लिए पात्रता मानदंड और अन्य शर्तें समान रहेंगी। अगर टेस्ला या किसी कार निर्माता ने इस नीति के लिए आवेदन नहीं किया है तो हमें चिंता नहीं है। हम किसी विशेष कंपनी के अनुरूप EV नीति में संशोधन नहीं करेंगे। इसे बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस बयान के बाद टेस्ला की इलेक्ट्रिक कारों को भारतीय बाजार में एक्स्ट्रा छूट या दूसरे बेनिफिट्स मिलने का रास्ता भी बंद होता दिख रहा है। अधिकारी ने ये भा बताया कि हमारा रुख साफ है। आप कम टैक्स पर कारों का आयात कर सकते हैं, बशर्ते आप भारत में EV निर्माण प्लांट लिए नया निवेश करें। मार्च में सरकार ने टेस्ला जैसी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए नई EV नीति घोषित की थी, जिसमें 5 साल तक चुनिंदा इलेक्ट्रिक कारों पर आयात शुल्क 15 फीसदी तक कम करने की छूट दी थी। इसके लिए कंपनी को 3 साल में EV निर्माण प्लांट लगाने की शर्त रखी गई। हालांकि, टेस्ला की तरफ से भी प्लांट को लेकर अभी तक कोई डिटेल नहीं आई है।

चौथी मंजिल से गिरा गुजरात का छात्र, हादसा या आत्महत्या? पुलिस कर रही जांच

Gujarat student fell from the fourth floor, accident or suicide? Police are investigating 18 वर्षीय युवक गांधीनगर में स्थित Gujarat student fell from the नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (जीएनएलयू) के प्रथम वर्ष का छात्र था। वह मूलत: राजस्थान का रहने वाला था। वह भोपाल स्थित एनएलआईयू में जारी खेल प्रतियोगिता में भाग लेने यूनिवर्सिटी की ओर से दोस्तों के साथ आया था। भोपाल : राजधानी में चेतक ब्रिज के नजदीक स्थित एक होटल की चौथी मंजिल से गिरकर छात्र की मौत हो गई। 18 वर्षीय Gujarat student fell from the के गांधीनगर से अपने दोस्तों के साथ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, भोपाल में स्पोर्ट्स इवेंट्स में शिरकत करने आया था। घटना गुरुवार रात की है। बताया जाता है कि छात्र उस वक्त होटल के कमरे में अपने दोस्तों के साथ मौजूद था। इसी दौरान वह पीछे की ओर बालकनी में गया और रेलिंग से गिरकर उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू की। पुलिस के हाथ घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज लगे है। हालांकि पुलिस को अब तक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, जिससे मामला संदिग्ध लग रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छात्र ने आत्महत्या की है या फिर वह किसी हादसे का शिकार हो गया।गोविंदपुरा पुलिस के अनुसार 18 वर्षीय तुषार माली गांधीनगर में स्थित गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (जीएनएलयू) के प्रथम वर्ष का छात्र था। वह मूलत: राजस्थान का रहने वाला था। वह भोपाल स्थित एनएलआईयू में जारी खेल प्रतियोगिता में भाग लेने यूनिवर्सिटी की ओर से अन्य साथियों के साथ बुधवार को भोपाल आया था।बताया जा रहा है कि हादसे के पहले होटल के रूम में पार्टी चल रही थी। जिसके बाद बालकनी से गिरकर तुरंत उसकी मौत हो गई। पुलिस एम्स अस्पताल में शव का पीएम करवाया है। युवक की मौत के कारण का पता लगाने होटल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज देखे जा रहे हैं। Read More : https://mysecretnews.com/mahamandaleshwar-swami-atmanand-giri/

पाकिस्तान से धमकी: मंडला के महामंडलेश्वर स्वामी आत्मानंद गिरी महाराज की सुरक्षा पर चिंता

Threat from Pakistan: Concern over the safety of Mahamandaleshwar Swami Atmanand Giri Maharaj of Mandla. मध्‍य प्रदेश में मंडला के निवास में Mahamandaleshwar Swami Atmanand Giri महाराज को मोबाइल में फोन आया। बोले- उन नंबर से मुझे जान से मारने व सर कलम कर मेरे टुकडे़ टुकडे़ करने की धमकी दी गई है और साथ ही कहा गया है कि तुम वफ्फ बोर्ड की संपात्ति के विरुद्ध बहुत बयान दे रहे हैं। मुझे जान का खतरा है। मंडला । Mahamandaleshwar Swami Atmanand Giri महाराज को पाकिस्तान से धमकी भरा फोन किया गया है। जान से मारने व सि‍र कलम कर टुकड़े करने की धमकी दी गई है। इसकी लिखित शिकायत निवास थाने में मंहामंडलेश्वर स्वामी ने की है। महाराज बोले-ये काल पाकिस्तान से आए थेजिले की निवास तहसील में Mahamandaleshwar Swami Atmanand Giri श्रीराम कथा कह रहे हैं। यह धमकी उन्हें कई नंबरों से धमकी दी गई है। ये काल पाकिस्तान से आए थे। उन्हाेंने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा है कि तहसील निवास में श्री राम कथा की जा रही है। Read More : https://saharasamachaar.com/the-game-of-charge-in-the-forest-department/ पैसों का लेन देन करना, के संबंध में बताया गया थाबोले-मैंने प्रवचन के दौरान वफ्फ वोर्ड की संपत्ति जिसमे इनके द्वारा जबरन भूमियों पर अतिक्रमण करना एवं अनैतिक पैसों का लेन देन करना, के संबंध में बताया गया था। निवास थाना प्रभारी वर्षा पटेल बोलीं-आवेदन प्राप्त हुआ है, जिसकी जांच की जा रही है। मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने लिया था आशीर्वादश्री राम कथा पर पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने कथा पंडाल पर पहुंच कर कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी आत्मानंद गिरी जी महाराज से आश्रीवाद लिया साथ ही कथा का श्रवण भी किया।

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