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थरूर की “शिवलिंग पर बिच्छू” वाली टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट सोमवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है। उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को निशाना बनाकर की गई थरूर की कथित “शिवलिंग पर बिच्छू” वाली टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ मानहानि की कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया था। थरूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए 10 सितंबर को उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस सांसद के खिलाफ दायर मानहानि मामले में निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने इस मामले में शिकायतकर्ता भाजपा नेता राजीव बब्बर और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब तलब किया था। न्यायालय की वेबसाइट पर 14 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध वाद सूची के अनुसार, न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ थरूर की याचिका पर सुनवाई करेगी। थरूर ने उच्च न्यायालय के 29 अगस्त के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है, जिसमें उनके खिलाफ मानहानि की कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।  थरूर के वकील ने 10 सितंबर को सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय से कहा कि शिकायतकर्ता को मामले में पीड़ित पक्ष नहीं कहा जा सकता और राजनीतिक दल के सदस्यों को भी पीड़ित पक्ष नहीं कहा जा सकता। वकील ने दलील दी थी कि थरूर की टिप्पणी मानहानि कानून के प्रतिरक्षा खंड के तहत संरक्षित है, जो यह निर्धारित करता है कि अच्छी सोच के साथ दिया गया बयान आपराधिक नहीं है। वकील ने कहा कि थरूर ने टिप्पणी करने से छह साल पहले कारवां पत्रिका में प्रकाशित एक लेख का संदर्भ दिया था। शीर्ष न्यायालय ने हैरानी जताई थी कि 2012 में उस वक्त यह बयान अपमानजनक नहीं था जब आलेख मूल रूप से प्रकाशित हुआ था। न्यायमूर्ति रॉय ने सुनवाई के दौरान कहा था, “आखिरकार यह एक रूपक है। मैंने समझने की कोशिश की है। यह संदर्भित व्यक्ति (मोदी) की अपराजेयता को दर्शाता है। मुझे नहीं पता कि यहां किसी ने आपत्ति क्यों जताई है।” थरूर के खिलाफ कार्यवाही को रद्द करने से इनकार करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि प्रथम दृष्टया, प्रधानमंत्री के खिलाफ “शिवलिंग पर बिच्छू” जैसे आरोप “घृणित एवं निंदनीय” हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मानहानि की शिकायत में तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद थरूर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर 16 अक्टूबर 2020 को रोक लगा दी थी और पक्षकारों को 10 सितंबर को निचली अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। उसने कहा था कि प्रथम दृष्टया, टिप्पणी से प्रधानमंत्री, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ-साथ इसके पदाधिकारियों और सदस्यों की मानहानि हुई है।    

अमेरिकी सेना को जल्द ही मिलेंगे अचूक ‘ड्रोन किलर’, मचाएंगे तबाही, बदलेगी जंग की सूरत

वॉशिंगटन  युद्ध में आज के समय ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्रोन में हथियार भर कर उन्हें दुश्मनों के ठिकानों पर सटीक तरीके से गिराया जा रहा है। ऐसे में इनसे निपटना एक नई चुनौती है। इटली की कंपनी लियोनार्डो की अमेरिकी सब्सिडरी कंपनी लियोनार्डो DRS ने ड्रोन खतरों का मुकाबला करने के लिए 8X8 स्ट्राइकर हल्के बख्तरबंद वाहन के नए संस्करण का अनावरण किया है। यह वाहन लेजर के साथ-साथ, 70 एमएम एडवांस्ड लेजर गाइडेड रॉकेट, 30 एमएम ऑटोमैटिक तोप और एडांस्ड सेंसर सिस्टम से लैस है। अमेरिकी सेना के लिए शॉर्ट रेंज डिफेंस सिस्टम के लिए यह महत्वपूर्ण है। नए स्ट्राइकर प्रोटोटाइप पर ब्लूहेलो का 26 किलोवाट लेजर डायरेक्टेड हथियार लगा है। यह अलग-अलग आकार और प्रकार के ड्रोन को तबाह करने में सक्षम है। लियोनार्डो डीआरएस में बिजनेस डेवलपमेंट के वरिष्ठ निदेशक एड हाउस ने कहा, ‘यह एक डायरेक्ट एनर्जी क्षमता प्रदान करेगा।’ हथियार 600 किग्रा तक के वजन वाले, 18000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले और 460 किमी प्रति घंटे की स्पीड वाले ड्रोन को तबाह कर सकता है। क्या है ताकत? लेजर हथियार दुश्मन को मारने की क्षमता बढ़ा देता है। पारंपरिक हथियारों की तुलना में इसे बार-बार लोड किए बिना फायर किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त वाहन में 70 मिमी लेजर गाइडेड रॉकेट के चार गोले लॉन्च करने की सुविधा है। यह स्ट्राइकर वाहन की ड्रोन को तबाह करने की क्षमता को और बढ़ा देते हैं। रॉकेट एडवांस्ड प्रिसिजन किल वेपन सिस्टम II (APKWS II) का हिस्सा हैं, जिन्हें खास तौर से ड्रोन को मारने के लिए बनाया गया है। नवंबर में भारत और अमेरिका ने साथ मिलकर एक ऐसा ही हथियार बनाने पर चर्चा की थी, जिसके जरिए सैनिकों को चीन की सीमा पर लाने ले जाने में मदद मिले। इसमें एंटी टैंक हथियार लगाया जाता। मशीनगन भी लगी है स्ट्राइकर पर 7.62 मिमी मशीन गन भी लगी है, ताकि हवाई और जमीनी दोनों खतरों को खत्म किया जा सके। एडवांस्ड हथियारों की मदद के लिए स्ट्राइकर नए अपडेट किए सेंसर से लैस है। इसमें ड्रोन का पता लगाने और ट्रैक करने वाले सेंसर हैं। साथ ही रडार लगा है। वाहन के सेंसर सूट में संभावित खतरों का पता लगाने और उन्हें वर्गीकृत करने के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे भी लगे हैं।

शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी, मद्महेश्वर मेला 23 नंवबर को होगा आयोजित

उखीमठ/मक्कूमठ पंचकेदार में प्रतिष्ठित द्वितीय केदार मद्महेश्वर मंदिर के कपाट 20 नवंबर को शुभ लग्नानुसार प्रात: काल और तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के कपाट 04 नवंबर पूर्वाह्न 11 बजे तुला लग्न में बंद होंगे। कपाट बंद होने के बाद मद्महेश्वर भगवान की चल विग्रह उत्सव डोली विभिन्न पड़ावों से होकर शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी। मद्महेश्वर मेला 23 नवम्बर को आयोजित होगा। मद्महेश्वर मंदिर के कपाट बंद होने की तिथि पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ और तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट बंद होने की तिथि शीतकालीन गद्दीस्थल मर्केटेश्वर मंदिर मक्कूमठ में आज दशहरे के शुभ अवसर पर पंचांग गणना पश्चात घोषित हुई। मद्महेश्वर मेला और देव डोलियों के शीतकालीन गद्दीस्थल पहुंचने का कार्यक्रम भी घोषित हो गया। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति मीडिया प्रभारी डॉ हरीश गौड़ ने बताया कि मद्महेश्वर मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भगवान मद्महेश्वर की चल विग्रह डोली 20 नवंबर को प्रथम पड़ाव गौडार गांव, 21 नवंबर को दूसरे पड़ाव रांसी, 22 नवंबर गिरिया और 23 नवम्बर को ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ पहुंचेगी। 23 नवंबर को मद्महेश्वर मेला संपन्न होगा। कपाट बंद होने की तिथि तय करने के अवसर पर पुजारी बागेश लिंग, वेदपाठी यशोधर मैठाणी, नवीन मैठाणी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डीएस भुजवाण, प्रशासनिक अधिकारी रमेश नेगी, देवानंद गैरोला, जेई सूरज मलासी, प्रेम सिंह रावत, वीरेश्वर भट्ट, नवीन शैव, वर्ध जमलोकी, सत्यप्रसाद सेमवाल, शंकर स्वामी, पंच गौंडार से मदन पंवार (भंडारी) ब्राह्मण खोली पंडितगण सहित पंचगाई हक हकूहकधारी आदि मौजूद थे। इसी तरह तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट तुला लग्न में सोमवार 04 नवंबर पूर्वाह्न 11 बजे को बंद होंगे। कपाट बंद होने की तिथि शीतकालीन गद्दीस्थल मर्केटेश्वर मंदिर मक्कूमठ में तय हुई।  इस अवसर पर मठापति रामप्रसाद मैठाणी, प्रबंधक बलबीर नेगी, पुजारी भारत मैठाणी, मुकेश मैठाणी, उमादत्त, विनोदमैठाणी, आचार्य रविंद्र मैठाणी, माहेश्वर प्रसाद, शांति प्रसाद, शेखर चंद्र, क्षेत्र पंचायत सदस्य जयबीर नेगी, दिलवर नेगी और हक-हकूकधारी आदि मौजूद रहे। लाखों तीर्थयात्रियों ने किए दर्शन ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ प्रभारी/प्रशासनिक अधिकारी रमेश नेगी और प्रबंधक बलबीर नेगी ने संयुक्त बयान में बताया कि इस यात्रा वर्ष 13372 श्रद्धालु द्वितीय केदार मद्महेश्वर पहुंचे और 140322 से अधिक तीर्थयात्रियों ने तृतीय केदार तुंगनाथ के दर्शन किये। कपाट बंद होने के बाद तृतीय केदार तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली 4 नवंबर को प्रथम पड़ाव चोपता पहुंचेगी‌। इसके बाद पांच नवंबर को भनकुन गुफा, 06 नवंबर को भी भनकुन प्रवास करेगी और गुरुवार 07 नवंबर को शीतकाल गद्दीस्थल मर्केटेश्वर मंदिर मक्कूमठ मंदिर गर्भ गृह में शीतकाल के लिए विराजमान हो जाएगी।  

16 अक्टूबर को मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पूरे साल भर में 12 पूर्णिमा तिथियां होती हैं, जिसमें शरद पूर्णिमा को विशेष माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा और कोजागर पूर्णिमा के नाम से भी जानते हैं. शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के संग महारास रचाया था, इसलिए इसे रास पूर्णिमा कहते हैं. वहीं शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं, जिसे कोजागर पूर्णिमा के नाम से जानते हैं. शरद पूर्णिमा की रात में खुले आसमान के नीचे खीर रखते हैं. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं कि इस साल शरद पूर्णिमा कब है? शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में खीर रखने का समय क्या है? शरद पूर्णिमा 2024 तारीख वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल शरद पूर्णिमा के लिए जरूरी अश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि 16 अक्टूबर बुधवार की रात 8 बजकर 40 मिनट से शुरू होगी. यह तिथि अगले दिन 17 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 55 मिनट तक मान्य रहेगी. ऐसे में शरद पूर्णिमा का पर्व 16 अक्टूबर बुधवार को मनाया जाएगा. रवि योग में है शरद पूर्णिमा 2024 इस साल शरद पूर्णिमा को रवि योग बन रहा है. शरद पूर्णिमा को रवि योग सुबह में 6 बजकर 23 मिनट से बनेगा, जो शाम को 7 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. उस दिन ध्रुव योग प्रात:काल से लेकर सुबह 10:10 बजे तक रहेगा. उसके बाद व्याघात योग है. शरद पूर्णिमा वाले दिन उत्तर भाद्रपद नक्षत्र शाम को 07:18 बजे तक है, उसके बाद से रेवती नक्षत्र है. हालांकि शरद पूर्णिमा पर पूरे दिन पंचक भी रहेगा. शरद पूर्णिमा 2024 खीर रखने का समय 16 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का चंद्रोदय शाम में 5 बजकर 5 मिनट पर होगा. शरद पूर्णिमा की रात खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की किरणों में खीर रखते हैं. इस साल शरद पूर्णिमा पर खीर रखने का समय रात में 08 बजकर 40 मिनट से है. इस समय से शरद पूर्णिमा का चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होकर अपनी किरणों को पूरे संसार में फैलाएगा. शरद पूर्णिमा की रात क्यों रखते हैं खीर? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है और उस रात अमृत की वर्षा होती है. चंद्रमा की किरणें औषधीय गुणों वाली होती हैं, जो शीतलता भी प्रदान करती हैं. इस वजह से शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर कुछ समय के लिए रखा जाता है, ताकि वह चंद्रमा की किरणों से औषधीय गुणों वाली हो जाए. उसे खाने से सेहत ठीक होती है.

अडानी ने केन्या के साथ किया एक और बड़ा समझौता, ₹62000000000 की डील, जानें क्या करेगी कंपनी

नई दिल्ली  गौतम अडानी दुनिया के कई देशों के साथ एक से बढ़कर एक डील कर रहे हैं। अब उन्होंने केन्या सरकार के साथ एक नई डील की है। हालांकि उनकी केन्या के एयरपोर्ट को लेकर हुई डील अभी भी फंसी हुई है। लेकिन नई डील को अडानी का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। यह डील 736 मिलियन डॉलर (करीब 6200 करोड़ रुपये) की है। नई डील के तहत अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी एनर्जी केन्या में बिजली ट्रांसमिशन लाइनों का संचालन करेगी। इसके लिए अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने केन्या इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (केट्राको) के साथ एक समझौते पर साइन किए हैं। यह डील 30 वर्षों के लिए हुई है। केन्या के ऊर्जा मामलों के कैबिनेट सचिव ओपियो वांडाई ने इसकी जानकारी दी। क्या होगा डील में? मौजूदा समय में केन्या बिजली के संकट से जूझ रहा है। इस डील के मुताबिक अडानी एनर्जी केन्या में प्रमुख ट्रांसमिशन लाइनों और सबस्टेशनों को विकसित करेगी। साथ ही कंपनी वित्तपोषण, निर्माण, संचालन और रखरखाव करेगी। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य विश्वसनीय बिजली सुनिश्चित करने के लिए देश के ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना है। केन्या सरकार खर्च नहीं करेगी चवन्नी भी केन्या सरकार इस प्रोजेक्ट पर कोई पैसा खर्च नहीं करेगी। पर कोई वित्तीय व्यय नहीं करेगी। ओपियो वांडाई के अनुसार इस इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए प्रोजेक्ट कंपनी (AESL) लोन और इक्विटी के माध्यम से फंडिंग जुटाएगी। इस रकम को 30 साल की अवधि में चुकाया जाएगा। प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से तय की जाएगी, जिसे केट्राको और AESL द्वारा संयुक्त रूप से संभाला जाएगा। AESL तीन ट्रांसमिशन लाइन और दो सबस्टेशन विकसित करेगी। अटका हुआ है एयरपोर्ट का संचालन अडानी ग्रुप का केन्या में यह दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट है। इससे पहले यह ग्रुप केन्या के मुख्य एयरपोर्ट के संचालन के लिए डील कर चुका है। हालांकि स्थानीय लोगों के विरोध के बाद प्रस्ताव को रोक दिया गया है। बता दें कि केन्या सरकार ने देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट जोमो केन्याटा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (JKIA) को अडानी ग्रुप को 30 साल के लिए लीड पर देने की घोषणा की थी। केन्या एविएशन वर्कर्स यूनियन (KAWU) अडानी की इस डील के खिलाफ हैं। इस यूनियन की मांग है कि इस डील को रद्द किया जाए।

Hyundai IPO के आने से पहले ही ग्रे मार्केट में खराब शुरुआत, जीएमपी में तगड़ी गिरावट

मुंबई अगले हफ्ते देश का सबसे बड़ा आईपीओ आ रहा है, जो LIC, पेटीएम और कोल इंडिया जैसे आईपीओ की रिकॉर्ड तोड़ देगा. यह आईपीओ 15 अक्‍टूबर को सब्‍सक्रिप्‍शन के लिए खुल रहा है और 17 अक्‍टूबर को बंद हो जाएगा. कंपनी ने इस IPO के तहत 1865-1960 रुपये प्रति शेयर के प्राइस बैंड (Hyundai IPO Price Band) का ऐलान किया है. Hyundai IPO के साइज की बात करें तो ये 27870.16 करोड़ रुपये का है, जो इसे देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC के आईपीओ से भी बड़ा बनाता है, जो कि 21000 करोड़ रुपये का था. इस आईपीओ के तहत अलॉटमेंट प्रोसेस के लिए 18 अक्टूबर, तो रिफंड प्रोसेस के लिए कंपनी ने 21 अक्टूबर की तारीख तय है. इसके शेयरों की लिस्टिंग 22 अक्टूबर को होनी है. हुंडई आईपीओ जीएमपी में तगड़ी गिरावट Hyundai IPO के आने से पहले ही ग्रे मार्केट में इसकी खराब शुरुआत दिख रही है. ऑटो सेक्‍टर की इस कंपनी के जीएमपी में तगड़ी गिरावट देखी जा रही है. आईपीओ का साइज और प्राइस बैंड तय किए जाने के बाद से ही इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) लगातार टूट रहा है और करीब 80 फीसदी टूट चुका है. सितंबर के आखिरी दिनों में 570 रुपये से गिरकर 12 अक्‍टूबर को इसका जीएमपी 75 रुपये पर आ चुका है. किसके लिए कितना रिजर्व? Hyundai का इश्यू 50 फीसदी हिस्सा क्वालिफाईड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB), 15 फीसदी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) और 35 फीसदी खुदरा निवेशकों के लिए रिजर्व है. IPO के तहत शेयरों का अलॉटमेंट 18 अक्टूबर को फाइनल होगा. फिर BSE और NSE पर 22 अक्टूबर को एंट्री होगी.  इस आईपीओ के तहत 10 रुपये की फेस वैल्यू वाले 14,21,94,700 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत जारी होंगे और ये शेयर इसकी पैरैंट कंपनी बेचेगी. क्‍या करें निवेशक? हुंडई आईपीओ के जीएमपी में गिरावट को देखते हुए ज्‍यादातर लोगों के मन में यही सवाल है कि आखिरी अब क्‍या करना चाहिए? ऐसे में कुछ एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि यह फाइनेंशियल तौर पर ज्‍यादा मजबूत दिखाई देता है. ऐसे में निवेश किया जा सकता है. हालांकि निवेशकों को अपने रिस्‍क और फंडामेंटल समेत सभी फैक्‍टर्स को अच्‍छी तरह से समझकर ही निवेश करना चाहिए. दो दशक बाद ऑटोमेकर कंपनी का IPO पैसेंजर व्हीकल सेल्स वॉल्यूम के आधार पर Hyundai Motors India कंपनी वित्त वर्ष 2024 में मारुति सुजूकी के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है. मारुति सुजूकी का मार्केट कैप 48 अरब डॉलर के करीब है. मारुति सुजुकी का आईपीओ 2003 में आया था. ऐसे में 20 साल बाद भारत में किसी ऑटो मेकर कंपनी का आईपीओ आ रहा है और इसका साइज देश में अब तक पेश किए गए सबसे बड़ी आईपीओ से भी ज्यादा है. वहीं आईपीओ के जरिए हुंडई मोटर इंडिया 18 से 20 अरब डॉलर के बीच वैल्यूएशन पाने का लक्ष्य लेकर चल रही है.

दिल्ली मेट्रो में बिना लिखित परीक्षा के नौकरी पाने का मौका, 96000 पाएं सैलरी

दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) में नौकरी (Sarkari Naukri) पाने का मन बना रहे लोगों के लिए एक अच्छा अवसर है. अगर आप भी इन पदों से संबंधित योग्यता रखते हैं, तो दिल्ली मेट्रो की आधिकारिक वेबसाइट delhimetrorail.com पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने मैनेजर और असिस्टेंट मैनेजर के पदों के लिए वैकेंसी निकाली है. इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के इस भर्ती के लिए जो कई भी आवेदन कर रहे हैं, वे 1 नबंवर तक या उससे पहले अप्लाई कर सकते हैं. अगर आप भी इन पदों पर काम करने की इच्छा रखते हैं, तो आवेदन करने से पहले दिए गए इन बातों को गौर से पढ़ें. दिल्ली मेट्रो में नौकरी पाने की क्या है योग्यता दिल्ली मेट्रो के इस भर्ती के लिए जो कोई भी आवेदन कर रहे हैं, उनके पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से बी.ई. (इलेक्ट्रिकल/मैकेनिकल) या समकक्ष डिग्री होनी चाहिए. दिल्ली मेट्रो में अप्लाई करने की क्या है आयु सीमा दिल्ली मेट्रो में नौकरी पाने की ख्वाहिश रखने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयुसीमा 55 वर्ष और अधिकतम आयुसीमा 62 वर्ष होनी चाहिए. दिल्ली मेट्रो में चयन होने पर मिलती है सैलरी मैनेजर (इंस्पेक्शन): 96,600 रुपये प्रतिमाह असिस्टेंट मैनेजर (इंस्पेक्शन): 75,100 प्रतिमाह दिल्ली मेट्रो में ऐसे होगा चयन जो कोई भी दिल्ली मेट्रो के इस भर्ती के लिए आवेदन कर रहे हैं, उनका चयन पर्सनल इंटरव्यू के माध्यम से किया जाएगा. उम्मीदवारों के नॉलेज, स्किल, फिजिकल फिटनेस और प्रासंगिक अनुभव का आकलन किया जाएगा. यहां देखें आवेदन लिंक और नोटिफिकेशन ऐसे करें आवेदन उम्मीदवारों को DMRC की आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन फॉर्मेट डाउनलोड करना होगा. विधिवत भरा हुआ आवेदन पोस्ट के नाम के साथ लिफाफे पर स्पष्ट रूप से अंकित करके स्पीड पोस्ट या ईमेल के माध्यम से नीचे दिए गए पते पर भेजना होगा. कार्यकारी निदेशक (एचआर) दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड मेट्रो भवन, फायर ब्रिगेड लेन बाराखंभा रोड, नई दिल्ली

ओवैसी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को हराने के लिए सभी को साथ लेकर चलना होगा

हैदराबाद  ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ‘धर्मनिरपेक्ष’ पार्टियां चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-विरोधी मतों में सेंध लगाने के लिए उन पर (ओवैसी पर) आरोप लगाती थीं, लेकिन हरियाणा में एआईएमआईएम के उम्मीदवारों को न उतारने के बावजूद कांग्रेस कैसे हार गई? ओवैसी ने कांग्रेस पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को हराने के लिए ‘पुरानी पार्टी’ को सभी को साथ लेकर चलना होगा। तेलंगाना के विकाराबाद में  एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने (भाजपा) हरियाणा कैसे जीत लिया? मैं वहां नहीं था। वरना वे ‘बी टीम’ कहते… वे वहां हार गए। अब आप ही बताइए, वे किसके कारण हारे?’’ ओवैसी ने कहा, ‘‘मैं पुरानी पार्टी (कांग्रेस) से कहना चाहूंगा कि मेरी बात समझिए, मोदी को हराने के लिए सबको साथ लेकर चलना होगा। आप अकेले कुछ नहीं कर पाओगे।’’ भाजपा ने हरियाणा में सत्ता-विरोधी लहर को मात देते हुए लगातार तीसरी बार शानदार जीत हासिल की और कांग्रेस की वापसी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। हरियाणा में भाजपा ने 90 विधानसभा सीट में से 48 सीट जीतीं, जो सरकार बनाने के लिए 46 के जादुई आंकड़े से कहीं अधिक है।  

13 अक्टूबर की सुबह तक मध्य अरब सागर पर दबाव में तब्दील, कई राज्यों में मौसम में बदलाव होगा और जबरदस्त बारिश होगी

नई दिल्ली पूर्व मध्य अरब सागर पर बना कम दबाव का क्षेत्र के पश्चिम-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ने की संभावना है और आज 13 अक्टूबर की सुबह तक मध्य अरब सागर पर दबाव में तब्दील हो जाएगा। इसकी वजह से कई राज्यों में मौसम में बदलाव होगा और जबरदस्त बारिश होगी। दक्षिणी इंटीरियर कर्नाटक, केरल, माहे, तमिलनाडु में अगले पांच से छह दिनों तक भारी बारिश होने वाली है। इसके अलावा, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में 14-16 अक्टूबर के बीच भारी बरसात होने की संभावना है। पिछले 24 घंटे के मौसम की बात करें तो केरल, माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी, उत्तरी इंटीरियर कर्नाटक, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, पूर्वी मध्य प्रदेश, असम, मेघलय, पश्चिमी मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, अरुणाचल प्रदेश, साउथ इंटीरियर कर्नाटक में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों के दौरान गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम में मॉनसून की वापसी के आसार बन रहे हैं। कैसा रहेगा दक्षिण भारत का मौसम? मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल में 14-16 अक्टूबर के बीच बहुत भारी बरसात होगी। इसके अलावा, केरल, माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल में 12, 13 और 17 अक्टूबर, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा में 14-17 अक्टूबर, साउथ इंटीरियर कर्नाटक में 12-16 अक्टूबर के बीच तेज बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अरुणाचल प्रदेश, असम, अंडमान और निकोबार द्वीप में 12 अक्टूबर को तेज बारिश की संभावना है। पश्चिमी और मध्य भारत के राज्यों की बात करें तो कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़ में बारिश का अलर्ट है। इसमें से मध्य महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर, गुजरात में 12, 13, पश्चिमी मध्य प्रदेश, विदर्भ में 12 अक्टूबर को तेज बारिश होने वाली है। वहीं, उत्तर पश्चिम भारत में इस हफ्ते तक बारिश नहीं होने की संभावना है।

प्रदेश में दिवाली मनाएगा संघ परिवार: प्रचारकों का ग्वालियर में होगा प्रशिक्षण वर्ग, संघ प्रमुख मोहन भागवत होंगे शामिल

ग्वालियर  मध्य प्रदेश के संघ सदस्यों के लिए इस बार दीपावली पर्व कुछ खास रहेगा।दरअसलराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सभी सम-वैचारिक संगठनों के संगठन मंत्री और अन्य पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रचारकों का चार दिवसीय अखिल भारतीय प्रशिक्षण वर्ग इस बार ग्वालियर में आयोजित किया जा रहा है। 1 से 4 नवंबर तक यह वर्ग चलेगा। इसके लिए 30 अक्टूबर को सभी प्रचारक ग्वालियर के केदारधाम सरस्वती शिशु मंदिर में एकत्र होंगे। इसमें संघ प्रमुख डॉ  मोहन भागवत और अखिल भारतीय टोली के सभी प्रमुख सदस्य शामिल होंगे। संगठन के पदाधिकारी रहेंगे मौजूद ग्वालियर में आयोजित किए जा रहे इस कैंप में संघ के 3 दर्जन से अधिक अनुषांगिक संगठनों के नगर प्रचारक से लेकर अखिल भारतीय स्तर के पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। जनवरी 2025 से शुरू होने वाले संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम की रूपरेखा इसी कैंप के दौरान बनाई जाएगी। नए पाठ्यक्रम की बनेगी रूपरेखा संघ की स्थापना के अगले वर्ष 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यही वजह है कि संघ इस वर्ग में अपने सम-वैचारिक संगठनों में भेजे गए प्रचारकों के प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में भी बदलाव करने जा रहा है। संघ की अखिल भारतीय टोली की मौजूदगी में ही नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा तय की जाएगी। इसमें संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित अन्य सहसरकार्यवाह भी उपस्थित रहेंगे। स्वयंसेवकों के लिए संघ शिक्षा वर्ग की तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने प्रचारकों के लिए भी समय-समय पर प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन करता है। आमतौर पर हर पांच वर्ष में संघ की ओर से सभी सम-वैचारिक संगठनों के उन संगठन मंत्रियों का प्रशिक्षण वर्ग किया जाता है, जो पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में विश्व हिंदू परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय मजदूर संघ, आरोग्य भारती, प्रज्ञा प्रवाह, चित्र भारती जैसे संगठनों में काम कर रहे हैं। इसी क्रम में ग्वालियर में संघ के सम-वैचारिक संगठनों में कार्यरत प्रचारकों को संघ चार दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। संघ की स्थापना के अगले वर्ष 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यही वजह है कि संघ इस वर्ग में अपने सम-वैचारिक संगठनों में भेजे गए प्रचारकों के प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में भी बदलाव करने जा रहा है। संघ की अखिल भारतीय टोली की मौजूदगी में ही नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा तय की जाएगी। इसमें संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित अन्य सहसरकार्यवाह भी उपस्थित रहेंगे। वर्ग के लिए संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत 30 अक्टूबर को ग्वालियर पहुंचने की संभावना है। 31 अक्टूबर को अखिल भारतीय टोली की बैठक हो सकती है। इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक देश में 6 वर्षों में ग्रामीण व शहर, दोनों जगह महिला कामगारों की संख्या में इजाफा हुआ

नई दिल्ली  देश में जॉब करने वाली महिलाओं की संख्या में तेजी आ रही है। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की 2023-24 की रिपोर्ट के मुताबिक लेबर फोर्स में काम करने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले 6 साल में यानी 2017-18 से लेकर 2023-24 तक बेरोजगारी दर में 50 फीसदी तक की कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक इन 6 वर्षों में ग्रामीण हो या शहर, दोनों जगह महिला कामगारों की संख्या में इजाफा हुआ है। दोगुने से ज्यादा हुई मुस्लिम महिलाओं की संख्या जॉब करने वाली मुस्लिम महिलाओं की संख्या में भी 6 साल में दोगुने से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-18 में सिर्फ 9 फीसदी मुस्लिम महिलाएं नौकरी करती थीं। अब इसमें 2.3 गुना की बढ़ोतरी हुई है। यानी अब 20.7 फीसदी मुस्लिम महिलाएं जॉब करती हैं। मुस्लिम महिलाओं के बाद सिख महिलाओं के जॉब करने की संख्या में तेजी आई है। 6 वर्षों में यह 11 सिर्फ से बढ़कर 24.6 फीसदी हो गया है। इसमें 124 फीसदी की तेजी आई है। इसके बाद हिंदू महिला कामगारों की संख्या बढ़ी है। इसमें करीब 84 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इन 6 वर्षों में यह आंकड़ा 17.6 फीसदी से बढ़कर 32.3 फीसदी हो गया है। क्रिश्चियन महिलाओं की संख्या 80 फीसदी बढ़ी है। 6 साल पहले 20.2 फीसदी क्रिश्चियन महिलाएं जॉब करती थीं। अब यह आंकड़ा 36.3 फीसदी है। एसटी वर्ग की महिलाएं सबसे आगे सबसे ज्यादा जॉब अनुसूचित जनजाति महिला की महिलाएं करती हैं। आंकड़ों के मुताबिक इनकी संख्या 46 फीसदी है। अनपेड जॉब करने वाले भी कम नहीं रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जो बिना सैलरी या भत्ते के नौकरी करते हैं। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि इन 6 वर्षों में 16 करोड़ नौकरियां पैदा हुई हैं यानी 2.8 करोड़ हर साल। इनमें से सालाना एक करोड़ ऐसी नौकरियां हैं जो परिवार के बिजनस से जुड़ी हैं। या फिर ऐसे लोग हैं जो सेल्फ एम्प्लॉइड हैं। इनमें काम करने वालों को कोई सैलरी नहीं मिलती। यानी ये अनपेड जॉब करते हैं।

दोस्त रूस ने अत्‍याधुनिक आइसब्रेकर शिप निर्माण के लिए भारत को चुना, चीन को दिया झटका

मास्‍को यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की चीन पर निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है। इस बीच रूस को भारत से भी जमकर मदद मिली है। भारत ने रूस से बहुत बड़े पैमाने पर तेल खरीदा है। वह भी त‍ब जब रूस पर पश्चिमी देशों ने कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। इस बीच रूस ने भारत को बड़ी खुशखबरी दी है। रूस ने अत्‍याधुनिक गैर परमाणु आइसब्रेकर शिप निर्माण के लिए भारत को चुना है। रूस ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है जब राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन चाहते हैं कि आर्कट‍िक क्षेत्र में नादर्न सी रूट का विकास किया जाए और पश्चिमी देशों के लगाए हुए प्रतिबंधों को मात दी जाए। इस समुद्री रास्‍ते के लिए भी रूस ने भारत को ऑफर दिया है। रूस के इस ऑफर से न केवल दोनों देशों के बीच रिश्‍तों में मजबूती आएगी बल्कि इससे भारत आर्कटिक क्षेत्र में बड़ी ताकत बनकर उभरेगा। भारत सरकार दो जहाज बनाने वाली कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है ताकि गैर परमाणु आइसब्रेकर को तैयार किया जा सके। इस पूरे सौदे की कीमत 6000 करोड़ रुपये होगी। इस पूरे सौदे को रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोस्‍टोम का भी साथ म‍िल रहा है। रूसी कंपनी अच्‍छे माहौल वाली और क्षमता से लैस भारतीय कंपनी की तलाश कर रही है। वह भी तब जब अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं। नादर्न सी रूट से क्‍या होगा फायदा ? यूरेशिया टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2023 में रूस ने खुलासा किया था कि उसने भारत को गैर परमाणु आइसब्रेकर बनाने का प्रस्‍ताव दिया है। इनका संयुक्‍त उत्‍पादन किया जाना है। दरअसल, रूस चाहता है कि जहाजों के जरिए होने वाले वैश्विक व्‍यापार के लिए नादर्न सी रूट को विकसित किया जाए जो एक वैकल्पिक रास्‍ता होगा। इससे स्‍वेज नहर की तुलना में उत्‍तरी यूरोप और पूर्वी एशिया के देशों को ज्‍यादा जल्‍दी से सामान पहुंचाया जा सकेगा। रूस का लक्ष्‍य है कि इस रास्‍ते से कम से कम 15 करोड़ टन कच्‍चा तेल, एलएनजी, कोयला और अन्‍य सामान साल 2030 तक हर साल पहुंचाए जाएं। रूस चाहता है कि इसके लिए कम से कम 50 आइसब्रेकर और बर्फ में चलने वाले जहाज इस रास्‍ते में तैनात किए जाएं। साथ ही नए बंदरगाहों, टर्मिनल और आपातकालीन जहाज बनाए जाएं। आर्कटिक का समुद्री इलाका 6 महीने बर्फ में ढंका रहता है। यही वजह है कि आइसब्रेकर की आगे बहुत जरूरत पड़ेगी। पुतिन और पीएम मोदी के बीच मुलाकात में जहाजों के निर्माण को लेकर सहमति बनी थी। असल में अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से यूरोपीय शिपयार्ड रूस के लिए जहाज नहीं बना पा रहे हैं। वहीं चीन, दक्षिण कोरिया और जापान के शिपयार्ड कम से कम साल 2028 तक के लिए बुक हैं। चीन की चाल को मात देगा भारत इसी वजह से रूस को अब विकल्‍प के रूप में भारत की मदद लेनी पड़ रही है जो उसका भरोसेमंद पार्टनर है। वहीं विश्‍लेषकों का कहना है कि रूस भारत के साथ दोस्‍ती बढ़ाकर चीन को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस बुरी तरह से चीन पर निर्भर हो गया है। चीन चाहता है कि नादर्न सी रूट पर उसकी पकड़ बढ़े और वह रूस के साथ दोस्‍ती बढ़ा रहा है। वह इसे बीआरआई का हिस्‍सा बता रहा है। वहीं यह पूरा इलाका तेल और गैस से भरा हुआ है जिससे आने वाले समय में व्‍यापार बहुत ज्‍यादा बढ़ने की संभावना है।

रतलाम : प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में पांच दिवसीय दीपोत्सव में भक्तों से सजावट के लिए 17 अक्टूबर से सामग्री लेना शुरू की जाएगी

रतलाम  रतलाम शहर के माणकचौक स्थित प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में पांच दिवसीय दीपोत्सव में भक्तों द्वारा सजावट के लिए दिए जाने वाले रुपये, आभूषण, मोती आदि से विशेष शृंगार की तैयारी हो गई है। 17 अक्टूबर से सामग्री लेना शुरू की जाएगी। पहले दिन धनतेरस पर ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के पट खोले जाएंगे। विशेष शृंगार के दर्शन भाईदूज तक लगातार किए जा सकेंगे। इसके बाद श्रद्धालुओं को सामग्री वापस देना शुरू की जाएगी। 2008 के बाद से बढ़ा शृंगार का स्वरूप इस सामग्री से होने वाले विशेष शृंगार को लेकर मंदिर देश भर में प्रसिद्ध है। पूर्व में कुछ ही लोग सामग्री देते थे, लेकिन वर्ष 2008 के बाद से सामग्री देने वाले भक्तों की संख्या बढ़ने पर शृंगार का स्परूप भी विस्तृत कर दिया गया। दी जाने वाली सामग्री को रजिस्टर में दर्ज कर श्रद्धालु को टोकन दिया जाता है। इसी टोकन से सामग्री वापस मिल जाती है। इस बार भी यही व्यवस्था रहेगी। सुरक्षा के लिए रहते हैं जरूरी इंतजाम पांच दिवसीय दीपोत्सव के दौरान सुरक्षा के लिए मंदिर समिति व पुलिस प्रशासन भी सभी जरूरी इंतजाम करता है। अतिरिक्त पुलिस बल लगाया जाता है। मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे का डिस्प्ले पास में स्थित माणकचौक थाने पर रहता है। वहां से भी निगरानी होती है। मंदिर के संजय पुजारी ने बताया कि 17 से 28 अक्टूबर तक सामग्री ली जाएगी। भाई दूज के बाद रजिस्टर में दर्ज फोटो, टोकन आदि के आधार पर ही सामग्री वापस की जाएगी। रतलाम शहर के साथ यहां बाहर से भी लोग अपनी सामग्री जमा कराने के लिए मंदिर में पहुंचते हैं। महालक्ष्मी मंदिर में विशेष शृंगार पर नजर सामग्री – सोने-चांदी के आभूषण, चांदी की सिल्लियां, पांच से लेकर 500 रुपये तक के नोट, श्रीयंत्र, कछुआ, तिजोरी आदि महालक्ष्मी मंदिर में ली जाती है। सामग्री देने वाले औसतन श्रद्धालु – करीब 3000 श्रद्धालु यहां सामग्री जमा कराने के लिए पहुंचते हैं। मान्यता – महालक्ष्मी मंदिर में रखी शृंगार सामग्री वापस लेने के बाद घर की तिजोरी, पूजन स्थान पर रखने से सालभर सुख-समृद्धि बनी रहती है। व्यवस्था – धनतेरस से मंदिर में विशेष दर्शन शुरू होते हैं। दर्शन व्यवस्था में भी भक्त सहयोग करते हैं। सुरक्षा – दीपोत्सव में मंदिर में विशेष पुलिस बल के साथ ही सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी की जाती है।

भजनलाल सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ के तहत पंचायत राज के चुनाव कराने की बना रही योजना, छोटे जिलों के समाप्त करने के दिए संकेत

जयपुर  राजस्थान में गहलोत राज में बनाए गए नए जिले को लेकर आखिर क्या होगा? इसको लेकर प्रदेश में लगातार चर्चाएं हो रही है। इस बीच भजनलाल सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ को लेकर भी जुटी हुई है। अब कयास है कि भजनलाल सरकार की रिव्यू कमेटी के फैसले के बाद छोटे जिलों को समाप्त कर नए सिरे से सीमाएं निर्धारित की जाएंगी। इसके बाद सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ फार्मूले के तहत पंचायत राज के चुनाव कराएगी। ऐसे में माना जा रहा है कि अगले साल जनवरी महीने में होने वाले पंचायत राज के चुनाव फिलहाल टलेंगे। कयास है कि इससे पहले सरकार छोटे जिलों को समाप्त कर उनकी सीमा निर्धारित करने का काम करेगी। कानून मंत्री जिलों को समाप्त करने के दे चुके हैं संकेत गहलोत राज में बनाए गए 17 नए जिलों को लेकर हर दिन नई चर्चाएं गर्म है। सरकार यह संकेत दे चुकी है कि नए जिलों में से 5 से 7 जिलों को समाप्त किया जा सकता है। इसको लेकर सरकार में यह निर्णय फिलहाल विचाराधीन है। गत दिनों भजनलाल सरकार के कानून मंत्री जोगराम पटेल ने भी ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ चुनावी फार्मूले के लिए छोटे जिलों को समाप्त किए जाने की आवश्यकता बताई थी। उन्होंने संकेत दिए कि बिना जिलों पर फैसले के ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ के काम में प्रोग्रेस नहीं सकता। ऐसे में माना जा रहा है कि नवंबर दूसरे सप्ताह तक सरकार नए जिलों को लेकर फैसला ले सकती हैं। 7 हजार ग्राम पंचायतों के चुनाव पर लटकी तलवार राजस्थान में नए जिलों के फैसले को लेकर अभी तक असमंजस बना हुआ है। अब कौन से जिले रहेंगे और कौन से खत्म होंगे? इस बीच भजनलाल सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ भी करवाना चाहती है। ऐसी स्थिति में अब जनवरी 2025 में होने वाले 7 हजार ग्राम पंचायतों के चुनाव पर भी तलवार लटक गई है। सरकार के संकेत के अनुसार, अगर ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ का फॉर्मूला लागू हुआ, तो ग्राम पंचायतों के चुनाव टलेंगे और यहां पर सरकार प्रशासक नियुक्त करेगी। फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान नए छोटे जिलों को समाप्त करने के फैसले पर टिका हुआ है। इसके बाद ही सरकार वन स्टेट वन इलेक्शन फॉर्मूला को लागू कर पाएगी। इस साल होने वाले नगर निकाय चुनाव भी टलेंगे हाल ही में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह ने साफ कर दिया है कि भजनलाल सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ का फॉर्मूला लागू करने वाली है। इसके चलते राज्य की कई नगर निकायों में नवंबर महीने में कार्यकाल पूरा हो रहा है। मंत्री के बयान के बाद अब इन निकायों में 2025 में चुनाव होने की संभावना बन गई है। इसके चलते प्रदेश की पांच नगर निगम, 28 नगर पालिकाओं और 16 नगर परिषद में इस साल चुनाव नहीं होंगे। सरकार फाॅर्मूले के तहत 2025 में एक साथ चुनाव करवाने की तैयारी कर रही है। छोटे जिलों को समाप्त करने के लिए कमेटी भी सहमत गहलोत राज में बनाए गए 17 नए जिले को लेकर भजनलाल सरकार ने गत दिनों रिव्यू कमेटी से नए जिलों को लेकर परीक्षण रिपोर्ट बनवाई, जो अभी कमेटी के पास विचाराधीन है, जहां संयोजक मदन दिलावर की अध्यक्षता में राज्यवर्धन सिंह राठौड़, कन्हैया लाल चौधरी, हेमंत मीणा सुरेश सिंह रावत समेत कमेटी के मेंबर इस पर विचार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि कमेटी के सभी मंत्री भी छोटे जिलों को मर्ज करने की राय में सहमत है। अब जल्द ही इस रिपोर्ट को कैबिनेट में रखा जाएगा, जहां निर्णय होने के बाद नए जिलों पर कार्रवाई शुरू होगी। यह जिले सरकार के फॉर्मूले में नहीं बैठ रहे फिट राजस्थान में 17 नए जिले बनाए गए, इनको लेकर भजनलाल सरकार सहमत नहीं है। गत दिनों सर्वे कमेटी ने नए जिलों को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की। सूत्रों के अनुसार, करीब एक दर्जन जिले मापदंडों में फिट नहीं बैठ रहे हैं। इनमें नीम का थाना, कोटपूतली-बहरोड़, केकड़ी, खैरथल-तिजारा, दूदू, डीग, गंगापुर सिटी, शाहपुरा, फलोदी, सलूंबर, सांचैर और अनूपगढ़ जिले शामिल है। ऐसे में सरकार इनमें से कई जिलों को अपने पुराने जिलों में मर्ज कर सकती है।  

जबलपुर: गोहलपुर में आग ने लॉज को किया तबाह, लोग हुए परेशान

Jabalpur: Fire destroys lodge in Gohalpur, people get worried जीतेन्द्र श्रीवास्तवजबलपुर ! जबलपुर में देर रात एक लॉज में आग लगने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलने के पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग लगने के बाद आस-पास के घरों से लोग घबराकर बाहर निकल आए थे। दशहरा पर्व के उल्लास के बीच शनिवार-रविवार दरमियानी रात करीब 3:15 बजे गोहलपुर क्षेत्र में स्थित एक लॉज में आग लगने से क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई। आग की कुर्ती उठती लगता देख आसपास रहने वालों मे अफरा-तफरी मच गई और वह घरों से निकलकर बाहर आ गए। तत्काल ही लॉज में आग लगने की सूचना नगर निगम के दमकल भाग को दी गई। इसकी जानकारी लगते ही मौके पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंची। लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने आग पर काबू पाया। आग से लॉज के पर्दे, फर्नीचर सहित अन्य सामान जलकर खाक हो गया। एक घंटे की मशक्कत के बाद बुझी आग दमकल कर्मियों के मुताबिक तकरीबन 3:15 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। तत्काल ही एक बड़ा दमकल वाहन रवाना किया गया। आग तेजी से फैल रही थी, धुआं उठ रहा था। लगभग लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। दमकल विभाग के मुताबिक फिलहाल आग लगने की वजह शार्ट सर्किट बताई जा रही है। लॉज अजय पटेल का बताया जा रहा हैं।

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