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सिलौटा पहुंचे मुख्यमंत्री साय, हेलीपेड पर जनप्रतिनिधियों ने किया आत्मीय स्वागत

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज ’सर्व आदिवासी समाज के जिला स्तरीय कर्मा महोत्सव’ में शामिल होने सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड स्थित ग्राम सिलौटा पहुंचे। हेलीपेड पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक भूलन सिंह मरावी, श्रीमती शकुन्तला पोर्ते, भैयालाल राजवाड़े, राजेश अग्रवाल, प्रबोध मिंज,रामकुमार टोप्पो, सरगुजा संभाग कमिश्नर जी. आर. चुरेंद्र, सरगुजा आई.जी. अंकित गर्ग, कलेक्टर रोहित व्यास द्वारा पुष्पगुच्छ देकर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

अब जम्मू-कश्मीर के सत्यपाल मलिक ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा, ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल

नई दिल्ली विपक्ष लंबे समय से ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव करवाने की मांग करता रहा है। हरियाणा चुनाव के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग और ईवीएम की विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े किए। वहीं अब जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आज के हालात को देखकर ईवीएम से भरोसा उठने जैसा हो गया है। मलिक ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर कहा, अभी हरियाणा में हुए चुनावों में पोस्टल बैलेट पेपर में कांग्रेस 74-16 से आगे थी, जैसे ही EVM खुली धीरे धीरे कांग्रेस सत्ता से बाहर ओर और भाजपा सत्ता में। जो शुरुआती रुझानों में दिखाया गया था और एग्जिट पोल्स में भी दिखाया था सब उसके विपरीत हो रहा है। आज वर्तमान स्तिथि देखकर चुनाव आयोग और EVM से भरोसा उठने जैसा हो गया है। EVM का खेल आखिर कब तक चलेगा, आज AI का ज़माना है अगर निष्पक्ष चुनाव चाहते हो तो EVM को हटाना भी एक मात्र विकल्प है। हाल ही में लाइव हिंदुस्तान से बातचीत में भी सत्यपाल मलिक ने कहा था कि हरियाणा के नतीजे उम्मीद के विपरीत आए हैं। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस में एकता नहीं है। कांग्रेस के लोग उतनी मेहनत नहीं करते। वहीं बीजेपी के लोग 24 घंटे राजनीति करते हैं। उनके मुकाबले कांग्रेस की मेहनत नहीं टिकती है। उन्होंने कहा था कि हरियाणा की हार के लिए राहुल गांधी जिम्मेदार नहीं हैं। मलिक ने कहा था कि बीजेपी के 50 अनुषांगिक संगठन हैं। कांग्रेस के लोग बीजेपी के बराबर राजनीति और संघर्ष नहीं करते। सड़कों पर नहीं रहते। उन्होंने कहा कि कुमारी सैलजा की वह से कांग्रेस के दलित वोट कट गए। वहीं बैकवर्ड सीएम की वजह से पिछड़ा वोट भी बीजेपी को मिल गया। बता दें कि चुनाव परिणाम वाले दिन अजय माकन, भूपेंद्र सिंह हुड्ड् और कुमारी सैलजा जैसे कांग्रेस नेताओं ने कहा था कि दोपहर में गिनती धीमी हो गई है। उन्होंने गिनती में गड़बड़ी की आशंका जताई थी। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने ईवीएम पर सवाल भी खड़े किए थे। जवाब देते हुए बीजेपी ने कहा था कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप क्यो नहीं लगा रही है। जबकि जम्मू-कश्मीर में उसका गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में है। बाद में कांग्रेस ने ईवीएम के मामले को लेकर एक फैक्ट फाइंडिंग टीम बना दी और कहा कि जब तक पुख्ता सबूत नहीं मिल जाते कांग्रेस ईवीएम के मुद्दे पर ज्यादा बात नहीं करेगी।

महतारी वंदन योजना जरूरतमंद महिलाओं की संजीवनी बनी

महासमुंद छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना महतारी वंदन योजना की क्रियान्वयन का दायित्व महिला एवं बाल विकास विभाग को दिया गया है। महतारी वंदन योजना का लाभ लेती गरीब और जरूरतमंद महिलाओं की सशक्तिकरण की अनुपम मिशाल है। ये कहानी है जिला महासमुंद के एकीकृत बाल विकास परियोजना महासमुंद शहरी के वार्ड नम्बर 4 ईदगाह भाठा शारदा मंदिर के पीछे देवारों की बस्ती में एक छोटा सा घर नंदनी टांडी का है। वे यहां अपने दो बच्चों के साथ रहती है। बड़े ही आत्मविश्वास के साथ अपनी हालत के बारे में बया करते नंदनी भावुक हो जाती है। पति से अलग होने के बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी पूरी तरह उनके कंधो पर आ गई। कचरा बीनकर जो कुछ मिलता उसे बच्चों की देखभाल और जीवन यापन के लिए खर्च करती थी। बमुश्किल से प्रतिदिन 100-150 रुपए तक ही कमा पाती थी। वे कहती है कि अकेले रहने का दर्द मैं बखूबी झेलती रही हूं। एक तो आर्थिक समस्या दूसरी ओर बच्चों का लालन-पालन की जिम्मेदारी कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करना पड़ रहा था। बड़े उत्साह के साथ बताती है कि जब से महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक श्रीमती शीला प्रधान ने महतारी वंदन योजना के बारे में बताया और कार्यकर्ता दीदी लल्ली आर्य के द्वारा सभी जरूरी कागजात के साथ मेरा फार्म भरा गया और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय हम महिलाओं को खाते में हर महीने एक हजार रुपए दे रहे हैं वे कहती है कि सरकार द्वारा महतारी वंदन योजना के अंतर्गत एक हजार रुपए दिया जाना हम महिलाओं के लिए नया सहारा बना है। नंदनी के पास पैसे की हमेशा तंगी रहती थी, किंतु विगत आठ महीने से उनका बटुआ भरा रहता है। उन्होंने बताया कि मुझे बकरी पालने का शौक है। अभी मेरे पास एक बकरी है महतारी वंदन के पैसे से मैं जल्दी ही दूसरी बकरी खरीदूंगी। मेरी बेटी भी 9वीं कक्षा में पढ़ रही है। उसे भी आगे पढ़ाऊंगी। नंदनी कहती है कि मुझे हर महीना अपने मोबाईल पर घंटी बजने का इंतजार रहता है और अब हर महीने के शुरुआत में ही राशि मिल जाने से बटुआ खाली रहने की नौबत नहीं आई। जिसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद ज्ञापित किया है।

बोइनपल्ली को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत

नई दिल्ली दिल्ली के कथित शराब घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हैदराबाद के कारोबारी अभिषेक बोइनपल्ली को जमानत दे दी। बोइनपल्ली को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में जस्टिस एमएम सुंदरेश और अरविंद कुमार की बेंच ने जमानत दी है। ईडी की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने जमानत का विरोध नहीं किया। बेंच ने कहा, ‘हम जमानत देने के पक्ष में हैं।’ सर्वोच्च अदालत ने 13 अगस्त को बोइनपल्ली को मिली अंतरिम जमानत को बढ़ा दिया था। 20 मार्च को कोर्ट ने यह कहते हुए उन्हें पांच सप्ताह की जमानत दी थी कि वह 18 महीनों से जेल में बंद हैं। इसके बाद लगातार उनकी जमानत अवधि बढ़ती रही। अंतरिम जमानत देते हुए सर्वोच्च अदालत ने बोइनपल्ली को अपना पासपोर्ट जमा कराने को कहा था। उन्हें हैदराबाद के अलावा एनसीआर से बाहर कहीं और नहीं जाने को कहा गया था।कारोबारी ने दिल्ली हाई कोर्ट के तीन जुलाई 2023 के आदेश को चुनौती दी है जिसमें 2022 में उनकी गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाने वाली याचिका खारिज कर दी गई थी। उन्होंने पीएमएलए की धारा 19 का पालन न करने के आधार पर गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। उनका कहना है कि प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। दिल्ली सरकार ने 2021-22 के लिए बनी शराब नीति 17 नवंबर, 2021 को लागू की थी लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सितंबर, 2022 के अंत में इसे रद्द कर दिया था। केंद्रीय जांच एजेंसियों सीबीआई और ईडी का आरोप है कि इस नीति के तहत शराब कारोबारियों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया गया और बदले में उनसे रिश्वत ली गई। इस मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सांसद संजय सिंह जैसे बड़े नेता भी आरोपी हैं। तीनों सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर निकले हैं।

नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराने की तैयारी में जुटी साय सरकार, भाजपा पर राजनैतिक लाभ लेने का आरोप लगाया: पूर्व मंत्री डहरिया

रायपुर छत्तीसगढ़ में साय सरकार नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ कराने की तैयारी में जुटी है. इस मामले में अब सियासत तेज हो गई है. डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा, नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ करने के लिए समिति का गठन किया गया था. समिति ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है. सरकार इस रिपोर्ट पर विचार कर जल्द निर्णय लेगी. वहीं पूर्व मंत्री कांग्रेस नेता शिव डहरिया ने भाजपा पर राजनैतिक लाभ लेने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा, दोनों चुनाव एक साथ कराना व्यवहारिक नहीं है. उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा, पूरे देश में वन नेशन वन इलेक्शन की चर्चा है. हम प्रयास कर रहे हैं कि धन और समय दोनों बच सके, इसके लिए नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ हो. कमेटी की रिपोर्ट सरकार के पास आ गई है. इस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा. भाजपा पर राजनैतिक लाभ लेने का आरोप वहीं इस मामले में पूर्व मंत्री शिव कुमार डहरिया ने भाजपा पर राजनैतिक लाभ लेने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा, नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिया एक साथ चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है. बीजेपी हर जगह राजनैतिक लाभ लेने की कोशिश करती है. दोनों चुनाव का समय अलग-अलग है. ऐसे में एक साथ कैसे कर सकते हैं, ये व्यवहारिक नहीं है.

वरिष्ठ मंत्री रहे अनिल विज ने जेपी नड्डा से की मुलाकात, इस मुलाकात के हरियाणा में खूब हो रहे चर्चे

नई दिल्ली अंबाला कैंट सीट से लगातार 7वीं बार विधायक चुने गए हरियाणा के सीनियर भाजपा नेता अनिल विज ने जेपी नड्डा से मुलाकात की है। वह पार्टी चीफ से मुलाकात करने दिल्ली पहुंचे। वरिष्ठ मंत्री रहे अनिल विज की जेपी नड्डा से मुलाकात के हरियाणा में भी चर्चे हैं। फिलहाल इस बात के कयास लग रहे हैं कि उन्हें कौन सा मंत्रालय नई सरकार में मिल सकता है। वह मनोहर लाल खट्टर की सरकार में गृह मंत्री थे, लेकिन नायब सिंह सैनी को कमान मिलने के बाद उन्होंने शपथ नहीं ली थी। वह सिर्फ विधायक के तौर पर काम कर रहे थे। इस बार फिर उन्होंने अंबाला से जीत हासिल की है। इस जीत के बाद फिर से उनके कैबिनेट में आने की चर्चाएं हैं। नायब सिंह सैनी के 17 अक्टूबर को कुछ मंत्रियों के साथ शपथ होगी। अब चर्चा है कि 17 अक्टूबर को अनिल विज उनके साथ शपथ लेंगे या नहीं। दरअसल अनिल विज ने हरियाणा चुनाव के नतीजों से पहले सीएम पद पर दावा किया था। उनका कहना था कि वह वरिष्ठ नेता हैं और सीएम पद के लिए उपयुक्त हैं। ऐसे में अब वह नायब सैनी की सरकार में बतौर मंत्री शपथ लेंगे या फिर नहीं। इसको लेकर भाजपा में आंतरिक चर्चाएं तेज हैं। हालांकि अनिल विज ने दावा करने के बाद यह भी कहा था कि यह मेरी नहीं बल्कि समर्थकों की राय है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि जब मनोहर लाल खट्टर के स्थान पर नायब सिंह सैनी को सीएम बनाया गया तो मेरे समर्थकों की राय थी कि मैं भी इसके लिए सही विकल्प था। फिर मैंने जब कुछ नहीं कहा तो लोगों ने कहा शुरू किया कि अनिल विज खुद ही सीएम नहीं बनना चाहता। इसलिए मैंने इस मसले पर बात करते हुए कहा कि मैं भी मुख्यमंत्री बन सकता हूं। ऐसा इसलिए कहा था ताकि अपने समर्थकों के बीच भ्रम दूर कर सकूं। बता दें कि अनिल विज को हरियाणा भाजपा के फायर ब्रांड नेताओं में गिना जाता है। वह तब से भाजपा के विधायक हैं, जब पार्टी राज्य में कमजोर थी और तीसरे या चौथे नंबर की पार्टी हुआ करती थी। भाजपा को इस बार के चुनाव में 48 सीटें मिली हैं और वह लगातार तीसरी बार राज्य की सत्ता में लौटी है।

छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा द्वारा 5 सूत्रीय मांगो के लिए मुख्यमंत्री के नाम सौपा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले जिला रायपुर के शिक्षकों ने अपने पूर्व लंबित मांगों एवं लंबित मंहगाई भत्ते को लेकर आज दिनांक 14 अक्टूबर 2024 को माननीय मुख्यमंत्री महोदय छत्तीसगढ़ शासन ,माननीय शिक्षा मंत्री महोदय छत्तीसगढ़ शासन ,माननीय वित्त मंत्री महोदय, श्रीमान मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन ,श्रीमान सचिव स्कूल शिक्षा विभाग ,श्रीमान सचिव वित्त विभाग, श्रीमान संचालक लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ के नाम  संयुक्त कलेक्टर रजक जी व जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर विजय कुमार खंडेलवाल को सैंकड़ो की संख्या में उपस्थित होकर शिक्षकों ने संघर्ष मोर्चा के बैनर तले ज्ञापन सौंपा। मोर्चा के जिला संयोजक ओमप्रकाश सोनकला, भानुप्रताप डहरिया ने बताया की एलबी संवर्ग के शिक्षकों की बहुत पुरानी मांगे हैं जो आज दिनांक तक लंबित है जिसमें मोदी जी की गारंटी के तहत सहायक शिक्षकों के वेतन विसंगति  दूर कर समस्त एल बी संवर्ग को क्रमोन्नत वेतनमान प्रदान किया जावे, समतुल्य वेतनमान पुनरीक्षित वेतनमान में सही एलपीसी जारी कर  वेतन का निर्धारण किया जाए, पूर्व सेवा अवधि की गणना करते हुए समस्त शिक्षक एलबी संवर्ग के पुरानी पेंशनों को निर्धारित करें एवं भारत सरकार द्वारा 2 सितंबर 2008 को जारी आदेश के समान 35 वर्ष में पूर्ण पेंशन के स्थान पर 20 वर्ष में पूर्ण पेंशन का प्रावधान किया जावे ।माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा सभी पात्र एलबी संवर्ग के शिक्षकों के लिए क्रमोन्नति समयमान का विभागीय आदेश किया जावे ।शिक्षक व कर्मचारियों को केंद्र के समान 1 जनवरी 2024 से 4% महंगाई भत्ता दिया जाए तथा जुलाई 2019 से देय तिथि पर महंगाई भत्ते के एरियर्स राशि का समायोजन जीपीएफ – सीजीपीएफ खाते में किया जाए।  ज्ञापन सौपने वालो मे मोर्चा के जिला संचालक द्वय ओमप्रकाश सोनकला व भानुप्रताप डहरिया,आयुष पिल्ले,जीतेन्द्र मिश्रा,कन्हैया कंसारी, अतुल शर्मा,, गोपाल वर्मा,बुद्धेश्वर बघेल, रविंद्र सॉन्ग सुरतान,मनोज मुछावड, अब्दुल आसीफ खान, मदन वर्मा, कृष्ण कुमार जांगड़े,प्रफुल्ल मांझी, संतोष सोनवानी, रमेश साहू,ममता डहरिया,जितेंद्र निषाद, इंद्रकुमार देवांगन, वर्षा दुबे सहित पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

राष्ट्रीय विकास बैंक ने शिमला में देश का सबसे लंबा रोपवे बनाने की दी इजाजत

शिमला हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के विकास में एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। राष्ट्रीय विकास बैंक (NDB) ने 1734 करोड़ की लागत से बनने वाले शिमला ट्रांसपोर्ट रोपवे प्रोजैक्ट के निर्माण के लिए अग्रिम टैंडर लगाने की इजाजत दी है। इस ऐतिहासिक परियोजना से शिमला में यातायात का नया अध्याय शुरू होगा। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने सोशल मीडिया अकाऊंट पर सांझा किया है। दुनिया का दूसरा और भारत का सबसे लंबा रोपवे उपमुख्यमंत्री ने बताया यह रोपवे विश्व का दूसरा सबसे लंबा और भारत का पहला सबसे लंबा रोपवे बनने जा रहा है। इसकी लंबाई 13.79 किलोमीटर होगी। इस प्रोजैक्ट के पूरा होने के बाद शिमला में यातायात का एक नया विकल्प उपलब्ध होगा, जिससे न केवल पर्यटकों बल्कि स्थानीय लोगों को भी भारी लाभ मिलेगा। पर्यटन और यातायात में होगा सुधार शिमला जो पहले से ही देश के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है, इस परियोजना से और भी अधिक आकर्षक हो जाएगा। रोपवे के निर्माण से शहर में यातायात जाम की समस्या कम होगी और पर्यटकों को सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिलेगा। यह प्रोजैक्ट न केवल शिमला बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के पर्यटन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा इस प्रोजैक्ट के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन के बढ़ने से स्थानीय व्यापारियों, होटलों, और अन्य संबंधित सेवाओं को लाभ होगा। साथ ही, निर्माण कार्यों के दौरान भी स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

अंतरिक्ष में जोड़े जाएंगे स्पेसक्राफ्ट के हिस्से, ISRO बड़े प्रयोग की तैयारी, रचेगा इतिहास

नई दिल्ली ISRO चीफ डॉ. एस. सोमनाथ ने खुलासा किया है कि दिसंबर में इसरो SPADEX (Space Docking Experiment) मिशन कर सकता है. क्योंकि चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) के लिए अंतरिक्ष में डॉकिंग बहुत जरूरी तकनीक है. डॉकिंग मतलब जो अलग-अलग हिस्सों को एकदूसरे की तरफ लाकर उसे जोड़ना. इस समय SPADEX के सैटेलाइट्स का इंटीग्रेशन हो रहा है. एक महीने में ये बनकर तैयार हो जाएंगे. इसके बाद इनकी टेस्टिंग वगैरह होगी. सिमुलेशन होंगे. उम्मीद है कि इसरो इसे 15 दिसंबर 2024 या उससे पहले लॉन्च करे. यह मिशन अंतरिक्ष में डॉकिंग प्रोसेस पूरा करने की पहली सीढ़ी होगी. SPADEX मिशन क्यों है जरूरी? अंतरिक्ष में दो अलग-अलग चीजों को जोड़ने की ये तकनीक ही भारत को अपना स्पेस स्टेशन बनाने में मदद करेगी. साथ ही चंद्रयान-4 प्रोजेक्ट में भी हेल्प करेगी. स्पेडेक्स यानी एक ही सैटेलाइट के दो हिस्से होंगे. इन्हें एक ही रॉकेट में रखकर लॉन्च किया जाएगा. अंतरिक्ष में ये दोनों अलग-अलग जगहों पर छोड़े जाएंगे. धरती की निचली कक्षा में प्रयोग इसके बाद इन दोनों हिस्सों को धरती से निचली कक्षा में जोड़ा जाएगा. ताकि ये फिर से एक यूनिट बन जाएं. इस पूरे प्रोसेस कई तरह के काम होंगे- जैसे दोनों अलग-अलग हिस्से एकदूसरे को खुद से अंतरिक्ष में खोजेंगे. उनके पास आएंगे. ताकि एक ही ऑर्बिट में आ सकें. इसके बाद दोनों एकदूसरे से जुड़ जाएंगे. इसरो के आगे के मिशन क्या होंगे? इसके बाद इसरो गगनयान के दो टेस्ट करेगा. पहला टेस्ट व्हीकल डिमॉन्स्ट्रेशन-2 (TVD2) और पहला मानवरहित मिशन (G1). इस दौरान इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट और पैड अबॉर्ट टेस्ट भी किए जाएंगे. G1 मिशन में ह्यूमेनॉयड व्योममित्र (Vyomitra) महिला रोबोट भी जाएगी. ताकि उसके ऊपर पड़ने वाले असर की स्टडी की जा सके. G1 में एक सीट पर व्योममित्र और दूसरे पर एनवायरमेंटल कंट्रोल एंड लाइफ सपोर्ट सिस्टम (ECLSS) होगा. इन दोनों के डेटा का एनालिसिस किया जाएगा. ताकि यह पता चल सके कि अंतरिक्ष में इंसानों पर क्या असर होगा. और इलेक्ट्रॉनिक्स, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर आदि पर क्या फर्क पड़ेगा.  

रूस के काजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले सदस्यता लेने की मची होड़, 34 देशों की सदस्यता पर नई रार

नई दिल्ली रूस के काजान में इसी महीने 22 से 24 अक्तूबर के बीच ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। उससे पहले ब्रिक्स की सदस्यता लेने की होड़ सी मच गई है। पाकिस्तान, तुर्की, म्यांमार, सीरिया, फिलिस्तीन समेत कुल 34 देशों ने ब्रिक्स की सदस्यता के लिए आवेदन दिया है। बड़ी बात यह है कि हिंसा प्रभावित सीरिया, म्यांमार और फिलिस्तीन ने भी आवेदन दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि आगामी शिखर सम्मेलन में 10 नए सदस्यों और 10 पार्टनर को इस संगठन में शामिल किया जा सकता है। बता दें कि भारत,ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका इसके संस्थापक सदस्य देश हैं। जनवरी 2024 में इस समूह का विस्तार हुआ था। अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी शामिल हैं। न्‍यू इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक काजान में होने वाली बैठक में आम सहमति बनने के बाद ही नए सदस्‍यों का ऐलान किया जाएगा। कहा जा रहा है कि भारत ब्रिक्स में नए सदस्यों को शामिल करने का फिलहाल पक्षधर नहीं है, जबकि चीन क्षेत्रीय दबदबा मजबूत करने और अपने एजेंडे को साधने के लिए ब्रिक्स का विस्तार करना चाहता है। चीन इस एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए रूस को अपने साथ ला सकता है। किन-किन देशों ने किया है आवेदन रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन 34 देशों ने ब्रिक्स की सदस्यता के लिए आवेदन दिया है, उनमें अल्‍जीरिया, अजरबैजान, बहरीन, बांग्‍लादेश, बेलारूस, बोलिव‍िया, क्‍यूबा, चाड, इंडोनेशिया, कजाखस्‍तान, कुवैत, पाकिस्‍तान, कुवैत, मलेशिया, लाओस, म्‍यांमार, मोरक्‍को, नाइजीरिया, सेनेगल, दक्षिण सूडान, श्रीलंका, फिलिस्‍तीन, सीरिया, थाइलैंड, तुर्की, यूगांडा, वेनेजुएला, वियतनाम और जिंबाब्‍वे शामिल हैं। इस लिस्ट में कई ऐसे देश हैं जो चीन के करीबी हैं और उन पर चीन का बहुत ज्यादा प्रभाव है। ये देश चीन के साथ मिलकर अमेरिकी नेतृत्व वाले गठजोड़ और देशों का विरोध करते हैं। अपने फायदे के लिए विस्तार चाहता है चीन विश्लेषकों का मानना है कि चीन ब्रिक्स का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करना चाहता है। इसी कड़ी में श्रीलंका और बांगलादेश का भी नाम जुड़ा है, जो भारत के पड़ोसी देश हैं लेकिन चीन की तरफ झुकाव रखते हैं। चीन चाहता है कि जी-7 के खिलाफ ब्रिक्स को खड़ा किया जाय। वह रूस को आगे कर अपनी चाल चल रहा है। इस वक्त रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में फंसा हुआ है और पश्चिमी देशों के साथ लोहा ले रहा है, जबकि चीन उसकी मदद कर रहा है। भारत नहीं चाहता ब्रिक्स का विस्तार भारत और ब्राजील को छोड़कर ब्रिक्स के सभी सदस्य देश चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा हैं। भले ही ब्राजील आधिकारिक तौर पर बीआरआई का हिस्सा नहीं है, लेकिन चीन उसे लुभाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि वह ब्राजील से निर्यात होने वाली चीजों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा खरीदता है। ऐसे में भारत का तर्क है कि अभी हाल ही में ब्रिक्स का विस्तार हुआ है, इसलिए अभी रुककर इसके विस्तार पर विचार किया जाना चाहिए। काजान में होने वाले शिखर सम्मेलन में ईरान और तुर्की के भी राष्ट्रपति शामिल होने वाले हैं। भारत की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जाने वाले हैं। तीन महीने के अंदर उनकी यह दूसरी रूस यात्रा होगी। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी इसमें शामिल होने की संभावना है। दरअसल, ब्रिक्स एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 2006 में की गई थी। रूस ने 01 जनवरी, 2024 को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। इस वर्ष की शुरुआत रूस, ब्राजील, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा अब इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हो चुके हैं। रूस की ब्रिक्स अध्यक्षता निष्पक्ष वैश्विक विकास और सुरक्षा के लिए बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर केंद्रित है। अपनी अध्यक्षता के हिस्से के रूप में रूस 200 से अधिक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा, राजस्थान-ब्यावर में सरकारी नौकरी पाने 2 बहनें बन गईं विधवा

ब्यावर. ब्यावर जिले से एक दिलचस्प मामला सामने आया है। इस मामले में दो सगी बहनों ने सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जीवाड़े की सारी हदें पार कर दीं। इन दोनों ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जमा कराकर सरकारी नौकरी हथिया ली। अब शिक्षा विभाग में इस फर्जीवाड़े के पता चलने की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। बता दें कि इन दोनों बहनों के किसी जानने वाले ने शिक्षा विभाग को इनके जरिए नौकरी पाने के लिए इस्तेमाल किए गए फर्जी प्रमाण पत्रों की शिकायत की थी। जिसके बाद जब मामला जिला शिक्षा अधिकारी के संज्ञान में आया तो दोनों बहनों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई। अभ्यर्थियों को मिल सकता है मौका मिली जानकारी के अनुसार अगर दोनों शिक्षिकाओं रेखा और सुनीता पर लगे आरोप सिद्ध पाए जाते हैं तो राज्य सरकार की ओर से दोनों की सेवा समाप्त की जा सकती है। वहीं, 2022 और 2016-17 माध्यमिक शिक्षक भर्ती में प्रतीक्षा सूची में शामिल एक-एक अभ्यर्थी को कानून के मुताबिक नौकरी मिलने की संभावना है। नेताओं का नजदीकी है परिवार जिन दोनों बहनों ने फर्जी डेथ सर्टिफिकेट लगाकर नौकरी हासिल की। उन दोनों बहनों का परिवार राजनीतिक ताल्लुक रखता है। बताया जा रहा है कि परिवार के सदस्य खुद राजनीति में रहे हैं। दोनों के माता पिता सरपंच रहे हैं। नवंबर 2020 में जब सुनीता की शादी निर्मल सिंह के साथ हुई थी तब विधायक भी शादी समारोह में शामिल हुए थे। दोनों बहनों के पारिवारिक समारोह में नेताओं का आना जाना रहा है।

दीपक बाबरिया ने पार्टी नेतृत्व से इस्तीफे की पेशकश की है और हरियाणा की हार के लिए नैतिक जिम्मेदारी ली

नई दिल्ली हरियाणा विधानसभा चुनाव की अप्रत्याशित हार ने कांग्रेस में बवाल बढ़ा दिया है। नेता एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं तो वहीं अब इस्तीफों का दौर भी शुरू हो सकता है। सबसे पहले राज्य के प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से इस्तीफे की पेशकश की है और हरियाणा की हार के लिए नैतिक जिम्मेदारी ली है। उन्होंने हाईकमान से कहा है कि उनकी जगह पर किसी नए शख्स को यह जिम्मेदारी दी जाए। इसे लेकर सीधे राहुल गांधी से ही बाबरिया ने बात की है। दीपक बाबरिया चुनाव के दौरान बीमार थे और अस्पताल में एडमिट थे। उनकी सीधे तौर पर सीनियर लीडर कैप्टन अजय सिंह यादव ने आलोचना की थी। उनका कहना था कि चुनाव के बीच में दीपक बाबरिया बीमार थे। वह अस्पताल में एडमिट थे और कामकाज ठप था। यदि ऐसी स्थिति थी तो उन्हें हाईकमान को बताना चाहिए था कि उनका कोई विकल्प देखा जाए। इस तरह उन्होंने बाबरिया पर लापरवाही का आरोप लगाया था। अब खुद बाबरिया ने नैतिक जिम्मेदारी ली है और इस्तीफा देने की बात कही है। दरअसल हरियाणा में जब टिकटों का बंटवारा हो रहा था और प्रचार जोरों पर था, तब दीपक बाबरिया दिल्ली के एम्स में एडमिट थे। उन्हें रक्तचाप से जुड़ी समस्या हो गई थी। दरअसल दीपक बाबरिया का हरियाणा में कोई जनाधार नहीं रहा है और उन्हें ज्यादातर नेता महत्व नहीं देते। इसी को लेकर बवाल होता रहा है। कैप्टन अजय यादव तो उन पर सीधे हमलावर हुए। उन्होंने कहा कि आखिर ऐसे कैसे कोई प्रभारी हो सकता है, जो चुनाव के वक्त सीन से ही गायब था। दरअसल दीपक बाबरिया को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का करीबी माना जाता है। कर्नाटक में पार्टी की जीत के बाद बाबरिया को विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए पर्यवेक्षक के तौर पर भेजा गया था। इसके बाद उन्हें दिल्ली और हरियाणा का प्रभारी बनाया गया था। बता दें कि हरियाणा में कांग्रेस ने हार के बाद फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने का फैसला लिया है। यह कमेटी हार के कारणों की पड़ताल करेगी। कांग्रेस सूत्रों ने बताया था कि हरियाणा की हार को लेकर जो मीटिंग हुई थी, उसमें राहुल गांधी ने हैरानी जताई थी। उनका कहना था कि कुछ लोगों ने पार्टी हितों की बजाय निजी हितों को ज्यादा प्राथमिकता दी थी। कयास लग रहे हैं कि दीपक बाबरिया के बाद पार्टी के स्टेट चीफ उदयभान भी इस्तीफा दे सकते हैं।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा-मामला गंभीर, राजस्थान-अजमेर में विश्वविद्यालय के खाने में मिली छिपकली की पूंछ

अजमेर. अजमेर जिले के बांदर सिंदरी स्थित सेंट्रल यूनिवर्सिटी में खाने में छिपकली मिलने का मामला सामने आया है। जिसके बाद यूनिवर्सिटी में हड़कंप मच गया है। घटना शनिवार रात की है। जब एक छात्र मेस में खाना खा रहा था, तभी अचानक उसकी सब्जी में छिपकली की कटी हुई पूंछ घूमती नजर आई। घटना के बाद यूनिवर्सिटी के छात्रों ने मेस संचालक और कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। रविवार को खाने में छिपकली की पूंछ का वीडियो सामने आने पर केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा- कुलपति से मामले की जांच करने की बात कही है। स्टूडेंट्स की सेहत के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं है। हम इस मसले को गंभीरता से ले रहे हैं। आगे उचित कदम उठाए जाएंगे। सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार विपिन कुमार का कहना है कि मैं अभी तीन दिन से बाहर हूं। मैं किशनगढ़ पहुंचकर मामले की जानकारी लूंगा। अभी केवल सोशल मीडिया पर मेस के खाने को लेकर जानकारी मिली है। वस्तु स्थिति का पता लगा रहे हैं। कुछ लोगों से फीडबैक लिया है और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं। हो सकता है कि मामला इम्प्लांट का निकले। यूनिवर्सिटी पीआरओ ने नहीं उठाया फोन छात्रों ने जब इस घटना के विषय में यूनिवर्सिटी की पीआरओ अनुराधा मित्तल को फोन कॉल कर मामले की जानकारी देनी चाही, तो उन्होंने फोन कॉल पहली बार में नहीं उठाया। उसके बाद मैसेज कर मामले की जानकारी लेनी चाही, इसके बाद मैसेज से जानकारी दी, लेकिन कोई भी रिप्लाई नहीं किया और अपना फोन को नॉट रीचेबल कर दिया।

चुनाव प्रबंधन समिति की बैठक में शामिल हुए डॉ नरोत्तम मिश्रा’

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा, प्रदेश सह प्रभारी सतीश उपाध्याय एवं प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद जी की उपस्थिति में सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में केन्द्रीय ससंदीय बोर्ड के सदस्य डॉ. सत्यनारायण जटिया, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, राजेन्द्र शुक्ल, प्रदेश शासन के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, प्रहलाद पटेल, पूर्व गृह मंत्री व वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा, अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, प्रदेश महामंत्री व विधायक भगवानदास सबनानी, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्रीमती माया नारोलिया, सांसद गजेन्द्र सिंह पटेल एवं पूर्व मंत्री रामपाल सिंह भी उपस्थित रहे।

मुंबई मेट्रो में लगे ‘जय श्री राम’ के नारे, पूजा भट्ट को होने लगी दिक्कत, रिएक्शन देते हुए बोलीं- ‘ये कैसे जायज है

मुंबई नवरात्रि के दोरान लोगों के एक ग्रुप द्वारा मुंबई मेट्रो में भजन-कीर्तन करने  और गरबा सॉन्ग गाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वही बॉलीवुड एक्ट्रेस और फिल्म मेकर पूजा भटट् का इस पर गुस्सा फूटा है। उन्होंने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट कर पब्लिक प्लेस पर “जय श्री राम” के नारे लगाने वालों पर अपनी भड़ास निकाली है। वहीं इस पर एक्ट्रेस भी ट्रोल हो रही हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल बता दें कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो को कुणाल पुरोहित नाम के यूजर ने शेयर किया है, जिसमें मुंबई मेट्रो के अंदर यात्री जयश्री राम के जयकारे लगा रहे हैं। वीडियो में आप देख सकते हैं कि मुंबई मेट्रो में कुछ यात्री सीट पर बैठे हैं और कुछ फर्श पर बैठकर ‘भारत का बच्चा बच्चा जय श्री राम बोलेगा’ गा रहे हैं। वहीं कुछ यात्री गुजराती गरबा के गाने गाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो को अपने एक्स अकाउंट पर शेयर करते हुए एक्ट्रेस का गुस्सा छलका है। एक्ट्रेस ने अपनी पोस्ट में लिखा है, “ पब्लिक प्लेस पर इसकी इजाजत कैसे दी सकती है है? इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह हिंदुत्व पॉप, क्रिसमस कैरोल, बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर या इनके बीच कुछ भी है। सार्वजनिक स्थानों का इस तरह दुरुपयोग नहीं किया जा सकता। अधिकारी इसकी अनुमति कैसे और क्यों दे रहे हैं? लॉ एंड ऑर्डर कायम होने की कोई उम्मीद नहीं पूजा भट्ट ने एक और पोस्ट में लिखा, “ अगर हम रियल सेंस में बेसिक रूल्स को फॉलो नहीं कर सकते तो लॉ एंड ऑर्डर कायम होने की कोई उम्मीद नहीं है। सभी राजनीतिक दलों के अवैध होर्डिंग्स शहर को अपवित्र कर रहे हैं, मेट्रो को पार्टी क्षेत्र में तब्दील किया जा रहा है। सड़क के बीच में पटाखे जलाए जा रहे हैं।” बता दें कि पूजा भट्ट की पटाखे वाली यह पोस्ट उस वक्त आई है, जब  महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की दशहरा जुलूस और आतिशबाजी की आड़ में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई ने ली है। पूजा भट्ट हो रहीं ट्रोल वहीं अपनी इस पोस्ट के बाद पूजा भट्ट भी ट्रोल्स के निशाने पर आ गई हैं। एक ने लिखा, “ आप हमारी संस्कृति को मिटा नहीं सकते मैडम। हम अपने त्योहार इसी तरह मनाते आए हैं और मनाते रहेंगे, इसे कोई नहीं रोक सकता, न आप, न सरकार।बस वास्तविक मुद्दों, गरीबी, विकास, अवैध होर्डिंग्स के बारे में बात करें, यह एक अच्छा मुद्दा था। लेकिन हिंदू धर्म को निशाना मत बनाओ।” एक अन्य ने लिखा, “ ओह सच में।।।ईद के समय पर ये ज्ञान कहा चला जाता है पूजा मैडम।   कभी ये ज्ञान बकरी मत काटो पे दे दिया करो।।।सड़कों पर जब 5 बार नमाज पढ़ी जाती है आजतक 1 ट्वीट भी नहीं लिखा गया उस पर।।ज्यादा ज्ञान पेला जा रहा है।।”

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