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जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

भगवान बिरसा मुण्डा की स्मृति में 15 नवंबर को छत्तीसगढ़ के हर जिले में मनाया जाएगा ’जनजातीय गौरव दिवस’ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री ’जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में शामिल हुए  जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया  : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जनजातीय संस्कृति में छिपी है, गहरी आध्यात्मिकता देश के लिए संघर्ष करने की परम्परा जनजातीय परम्परा रही है जीवन जीने की कला जनजातीय समाज से सीखनी चाहिए रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भगवान बिरसा मुण्डा की जयंती के अवसर पर 15 नवंबर को छत्तीसगढ़ के हर जिले में ’जनजातीय गौरव दिवस’ मनाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुण्डा की स्मृति में जनजातीय गौरव दिवस मनाने का निर्णय लिया है। इस वर्ष भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती है। छत्तीसगढ़ में भी इसे भव्य रूप से मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में ’जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत, ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वन मंत्री केदार कश्यप ने की। विधायक भईयालाल राजवाड़े विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है। यह सोचकर गर्व होता है कि अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों का जन्म जनजातीय समाज में हुआ। अपने देश के लिए संघर्ष करने की परम्परा जनजातीय समाज में प्रारंभ से रही है। शहीद वीर नारायण सिंह, गैंदसिंह, गुण्डाधूर जैसे अनेक महान नायकों ने अपना बलिदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया आज जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में प्रकृति का संरक्षण बहुत आवश्यक है। जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया हैै, जो आज भी अनुकरणीय है। जनजातीय समाज में प्रकृति की पूजा की जाती है। पूर्वीं छत्तीसगढ़ में साल के पेड़ में जब फूल आते है तो सरहुल पर्व मनाया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय संस्कृति में गहरी आध्यात्मिकता छिपी है। प्रकृति को सहेजकर, प्रकृति के अनुकूल जीवन जीना। बड़े-छोटे, स्त्री-पुरुष में किसी तरह का भेदभाव नहीं। सब बराबर हैं और प्रकृति का उपहार सबके लिए है। ये बातें हमें इस समाज से सीखने की आवश्यकता है। वास्तव में जीवन जीने की कला जनजातीय समाज से सीखनी चाहिए। जनजातीय समाज में दहेज जैसी सामाजिक बुराई का अस्तित्व नहीं है। भगवान बिरसा मुण्डा का शौर्य हमें हमेशा जीवन में साहस की राह दिखाता है। उन्होंने शोषण मुक्त समाज का सपना देखा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हीं की परिकल्पना के अनुरूप प्रधानमंत्री जनमन योजना प्रारंभ कर विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों के जीवन में समृद्धि लाने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री कल हजारीबाग से प्रधानमंत्री जनजाति उन्नत ग्राम अभियान की शुरूआत करेंगे, जिसमें जनजातीय बहुल 63 हजार गांवों के 5 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय लोग कभी दिखावा नहीं करते, उनकी सरलता-सहजता मन मोह लेती है। जनजातीय समाज की खानपान की शैली बीपी-शुगर जैसी लाइफ स्टाईल से जुड़ी बीमारियों से दूर रखती है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा ’जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत पर आयोजित यह कार्यशाला जनजातीय समाज के गौरव को पूरे समाज के सामने लाने में मील का पत्थर साबित होगी। वन मंत्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज का बहुत बड़ा योगदान रहा हैै। इस समाज में अनेक महापुरूषों ने जन्म लिया जिन्होंने 1857 क्रांति के पहले ही अंग्रेजों के विरूद्ध संघर्ष की शुरूआत की। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों को बड़ा नुकसान जनजातीय क्षेत्रों में हुआ, अनेक मौकों पर उन्हें मजबूर होकर पीछे हटना पड़ा। कश्यप ने कहा कि अंग्रेजों ने जब बस्तर में रेल लाईन बिछाने का काम शुरू किया उसमें लकड़ी का उपयोग किया जाता था। जनजातीय समाज ने इसका विरोध किया और यह भाव जताया कि हमारा जंगल कोई नहीं काटेगा। सामाजिक एकजुटता के कारण बहुत कुछ संरक्षित रहा। उन्होंने कहा कि आज किए जा रहे आयोजन के माध्यम से इतिहास के पन्नों में दर्ज जनजातीय समाज के गौरव की गाथा हमारी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा प्रमाण है। इस समाज में 80 प्रतिशत परिवार संयुक्त परिवार है। मिलेट का उपयोग, जैविक खेती जैसी अनेक बातें जनजातीय समाज से शिक्षित समाज को सीखने की आवश्कता है। स्वागत भाषण उच्च शिक्षा विभाग के सचिव प्रसन्ना आर. ने दिया। वनवासी विकास समिति के अखिल भारतीय युवा कार्य प्रमुख वैभव सुरंगे ने स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति में अनेक प्रगतिशील परम्पराएं हैं। भगवान से ये कुछ नहीं मांगते। वनवासी विकास समिति के सचिव डॉ. अनुराग जैन ने कहा कि जनजातीय समाज के गुमनाम महानायकों के योगदान से नई पीढ़ी को परीचित कराने की जरूरत है। कार्यक्रम में वनवासी विकास समिति के प्रांताध्यक्ष उमेश कश्यप विश्व विद्यालय के कुलपति एवं प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने इस अवसर पर जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया, जनजातीय संस्कृति में छिपी है, गहरी आध्यात्मिकता : साय

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भगवान बिरसा मुण्डा की जयंती के अवसर पर 15 नवंबर को छत्तीसगढ़ के हर जिले में जनजातीय गौरव दिवस मनाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुण्डा की स्मृति में जनजातीय गौरव दिवस मनाने का निर्णय लिया है। इस वर्ष भगवान बिरसा मुण्डा की 150वीं जयंती है। छत्तीसगढ़ में भी इसे भव्य रूप से मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में झ्जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत, ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदानझ् विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने की। विधायक श्री भईयालाल राजवाड़े विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है। यह सोचकर गर्व होता है कि अनेक महान स्वतंत्रता सेनानियों का जन्म जनजातीय समाज में हुआ। अपने देश के लिए संघर्ष करने की परम्परा जनजातीय समाज में प्रारंभ से रही है। शहीद वीर नारायण सिंह, गैंदसिंह, गुण्डाधूर जैसे अनेक महान नायकों ने अपना बलिदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया आज जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में प्रकृति का संरक्षण बहुत आवश्यक है। जनजातीय समाज ने हमें प्रकृति के संरक्षण का मार्ग दिखाया हैै, जो आज भी अनुकरणीय है। जनजातीय समाज में प्रकृति की पूजा की जाती है। पूर्वीं छत्तीसगढ़ में साल के पेड़ में जब फूल आते है तो सरहुल पर्व मनाया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय संस्कृति में गहरी आध्यात्मिकता छिपी है। प्रकृति को सहेजकर, प्रकृति के अनुकूल जीवन जीना। बड़े-छोटे, स्त्री-पुरुष में किसी तरह का भेदभाव नहीं। सब बराबर हैं और प्रकृति का उपहार सबके लिए है। ये बातें हमें इस समाज से सीखने की आवश्यकता है। वास्तव में जीवन जीने की कला जनजातीय समाज से सीखनी चाहिए। जनजातीय समाज में दहेज जैसी सामाजिक बुराई का अस्तित्व नहीं है। भगवान बिरसा मुण्डा का शौर्य हमें हमेशा जीवन में साहस की राह दिखाता है। उन्होंने शोषण मुक्त समाज का सपना देखा था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हीं की परिकल्पना के अनुरूप प्रधानमंत्री जनमन योजना प्रारंभ कर विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों के जीवन में समृद्धि लाने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री कल हजारीबाग से प्रधानमंत्री जनजाति उन्नत ग्राम अभियान की शुरूआत करेंगे, जिसमें जनजातीय बहुल 63 हजार गांवों के 5 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय लोग कभी दिखावा नहीं करते, उनकी सरलता-सहजता मन मोह लेती है। जनजातीय समाज की खानपान की शैली बीपी-शुगर जैसी लाइफ स्टाईल से जुड़ी बीमारियों से दूर रखती है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत पर आयोजित यह कार्यशाला जनजातीय समाज के गौरव को पूरे समाज के सामने लाने में मील का पत्थर साबित होगी। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज का बहुत बड़ा योगदान रहा हैै। इस समाज में अनेक महापुरूषों ने जन्म लिया जिन्होंने 1857 क्रांति के पहले ही अंग्रेजों के विरूद्ध संघर्ष की शुरूआत की। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों को बड़ा नुकसान जनजातीय क्षेत्रों में हुआ, अनेक मौकों पर उन्हें मजबूर होकर पीछे हटना पड़ा। श्री कश्यप ने कहा कि अंग्रेजों ने जब बस्तर में रेल लाईन बिछाने का काम शुरू किया उसमें लकड़ी का उपयोग किया जाता था। जनजातीय समाज ने इसका विरोध किया और यह भाव जताया कि हमारा जंगल कोई नहीं काटेगा। सामाजिक एकजुटता के कारण बहुत कुछ संरक्षित रहा। उन्होंने कहा कि आज किए जा रहे आयोजन के माध्यम से इतिहास के पन्नों में दर्ज जनजातीय समाज के गौरव की गाथा हमारी आने वाली पीढि?ों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा प्रमाण है। इस समाज में 80 प्रतिशत परिवार संयुक्त परिवार है। मिलेट का उपयोग, जैविक खेती जैसी अनेक बातें जनजातीय समाज से शिक्षित समाज को सीखने की आवश्कता है। स्वागत भाषण उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री प्रसन्ना आर. ने दिया। वनवासी विकास समिति के अखिल भारतीय युवा कार्य प्रमुख श्री वैभव सुरंगे ने स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति में अनेक प्रगतिशील परम्पराएं हैं। भगवान से ये कुछ नहीं मांगते। वनवासी विकास समिति के सचिव डॉ. अनुराग जैन ने कहा कि जनजातीय समाज के गुमनाम महानायकों के योगदान से नई पीढ़ी को परीचित कराने की जरूरत है। कार्यक्रम में वनवासी विकास समिति के प्रांताध्यक्ष श्री उमेश कश्यप विश्व विद्यालय के कुलपति एवं प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने इस अवसर पर जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

मिथुन चक्रवर्ती को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलने पर जया प्रदा ने खुशी जाहिर की

मुंबई,  बॉलीवुड अभिनेत्री जया प्रदा ने मिथुन चक्रवर्ती को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलने पर खुशी जाहिर की है। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को मिथुन चक्रवर्ती को दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की है। मिथुन चक्रवर्ती को 08 अक्टूबर को 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के दौरान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। जया प्रदा ने मिथुन चक्रवर्ती को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिलने पर खुशी जाहिर की है।जयाप्रदा ने कहा कि मिथुन दा महानायक हैं। मिथुन दा को दादा साहब अवार्ड दिया जाएगा, ये हमारे लिए और इंडस्ट्री के लिए बहुत खुशी की बात है।यह फिल्म जगत में हम सभी के लिए गर्व का क्षण है।मिथुन दा ने कई भाषाओं की कई फिल्मों में काम किया है। मैं दादा के साथ दो फिल्में अभी कर रही हूं। इनमें एक रिवाज है और दूसरी फौजी है। मुझे बहुत अच्छा लगा।  

हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, छत्तीसगढ़-शराब घोटाला में त्रिपाठी और ढिल्लन को जमानत नहीं

बिलासपुर। हाई कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में आरोपी अरुणपति त्रिपाठी और त्रिलोक सिंह ढिल्लन की ज़मानत याचिका को खारिज कर दिया है. आरोपियों ने ईओडब्लू द्वारा शराब घोटाला मामले में दर्ज एफआइआर को लेकर जमानत याचिका दायर थी, जिस पर जस्टिस अरविंद वर्मा की कोर्ट में सुनवाई हुई, दोनों पक्षों को सुन बीते माह हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर ऑर्डर जारी किया गया है. दरअसल, ईडी ने शराब घोटाले मामले में मई 2023 में आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और शराब वितरण कंपनी सीएसएमसीएल के पूर्व एमडी अरुण पति त्रिपाठी को गिरफ्तार किया था. पूछताछ कर ईडी की विशेष अदालत ने जेल भेज दिया था. उन्होंने विशेष अदालत में जमानत अर्जी लगाई, जहां अर्जी खारिज होने पर हाईकोर्ट में जमानत अर्जी लगाई. हाईकोर्ट ने पहली बार जमानत खारिज कर दिया, लेकिन दूसरी बार में बेल दे दिया था. इसी दौरान EOW ने शराब घोटाले और नकली होलोग्राम पर केस दर्ज कर जांच शुरू की, जिसके तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई. EOW की गिरफ्तारी के बाद एपी त्रिपाठी और कारोबारी त्रिलोक ढिल्लन ने हाईकोर्ट में अलग अलग जमानत अर्जी लगाई. याचिकाकर्ताओं ने ईडी और एसीबी की कार्रवाई को झूठा बताते हुए कहा, कि इस केस में उन्हें पहले से बेल मिल गई है. अब उसी केस पर EOW ने दूसरी FIR किया है, जो अवैधानिक है. मामले में सुनवाई के दौरान ज़मानत याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट में तर्क दिया गया था, कि यह गंभीर आर्थिक अपराध है, राज्य के साथ सीधा छल है. सरकारी रेवेन्यू सरकार के ख़ज़ाने में जमा होने के बजाय सिंडिकेट की जेब में गया, यह एक संगठित अपराध गिरोह है.

पश्चिम बंगाल में प्रदर्शन कर रहे कनिष्ठ चिकित्सकों ने एक बार फिर पूरी तरह बंद किया काम

कोलकाता पश्चिम बंगाल में प्रदर्शन कर रहे कनिष्ठ चिकित्सकों ने सभी चिकित्सा प्रतिष्ठानों में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बनाने के लिए मंगलवार को फिर से अनिश्चितकाल के लिए काम पूरी तरह बंद कर दिया। कनिष्ठ चिकित्सक 42 दिन के विरोध प्रदर्शन के बाद 21 सितंबर को सरकारी अस्पतालों में आंशिक रूप से अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। चिकित्सकों ने नौ अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद एक महिला चिकित्सक से बलात्कार और उसकी हत्या की घटना के विरोध में काम बंद कर दिया था। प्रदर्शनकारी चिकित्सकों में शामिल अनिकेत महतो ने कहा, ‘‘हमें सुरक्षा की हमारी मांगों को पूरा करने को लेकर राज्य सरकार का कोई सकारात्मक दृष्टिकोण नहीं दिख रहा। आज (विरोध प्रदर्शन का) 52वां दिन है और हम पर अब भी हमले हो रहे हैं और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ बैठकों के दौरान किए गए अन्य वादों को पूरा करने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा। मौजूदा स्थिति में हमारे पास आज से काम पूरी तरह बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब तक राज्य सरकार इन मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई नहीं करती, तब तक कार्य पूरी तरह बंद रहेगा।’’  

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से आई बुरी खबर, बाघ का मिला शव, हुआ अंतिम संस्कार

उमरिया मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पर्यटन शुरू होने से पहले ही बाघ प्रेमियों के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। मगधी बीट के कक्ष क्रमांक 280 में बाघ की मौत हो गई। आकाशीय बिजली की चपेट में आने से बाघ की मौत की आशंका जताई जा रही। एनटीसीए की गाइडलाइन के हिसाब से बाघ का अंतिम संस्कार किया गया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मगधी परिक्षेत्र के उत्तर मगधी के कक्ष क्रमांक 280 में संदिग्ध परिस्थिति में बाघ का शव मिला है। जानकारी के अनुसार बाघ की उम्र 5 से 10 वर्ष बताई जा रही है। बाघ की मौत के बाद पूरे क्षेत्र में डॉग स्क्वॉड से सर्चिंग कराई गई है। फिलहाल अधिकारी जांच में जुटे हुए हैं। वहीं आकाशीय बिजली की चपेट में आने से बाघ की मौत की आशंका भी जताई जा रही। घटना स्थल के करीब आकाशीय बिजली गिरने के कारण पेड़ फटा मिला है। घटना के बाद डॉक्टरों की विशेष टीम ने बाघ का पोस्टमॉर्टम किया। इसके बाद टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अधिकारियों ने बाघ का अंतिम संस्कार करवाया।

वन अधिकार पट्टे के लालच में ले ली बलि, छत्तीसगढ़-जशपुर में काट डाले सैकड़ों पेड़

जशपुर जिले के सन्ना वन परिक्षेत्र के लुरापाठ में वन अधिकार पट्टे की लालच में सैकड़ों पेड़ों की कटाई व गार्डलिंग करने का मामला सामने आया है. ग्रामीणों का आरोप है कि पेड़ों को काटकर जमीन को खाली किया जा रहा है, जिससे जमीन पर पीढ़ियों से कब्जा बताकर पट्टे के लिए आवेदन दिया जा सके. मामले में वन विभाग की सुस्त रवैये से ग्रामीणों में आक्रोश है. जशपुर जिले के पठारी क्षेत्र पंडरापाठ में कुछ ग्रामीणों ने जंगल की 3.5 एकड़ जमीन को खाली करने के लिए सैकड़ों पेड़ों की कटाई व गार्डलिंग कर दी है. रात के अंधेरे में बेशकीमती पेड़ों को गार्डलिंग कर छोड़ दिया गया, जिससे अब यह पेड़ सूखने के कगार पर आ गए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की कुछ दबंग प्रवृति के लोग करीब 500 पेड़ो को कटाई कर दी है. वहीं गार्डलिंग की गई पेड़ों को आसानी से काट-काट कर उक्त भूमि पर वन अधिकार पट्टा के लिए आवेदन करने का योजना बनाई है. हैरानी की बात है कि जंगल में सैकड़ों पेड़ों की कटाई के साथ गार्डलिंग हो गई और बीट गार्ड को इस बारे में कुछ पता ही नहीं चल पाया. इलाके के जागरूक ग्रामीणों के द्वारा इसकी सूचना वन विभाग को दी गई. वन विभाग ने सूचना के बाद कार्रवाई शुरू की है. जिन पेड़ों की गार्डलिंग की गई है, उनमें से अधिकांश अभी-अभी बड़े हुए हैं. जंगल में कई पेड़ तो बेहद पुराने हैं, जिनमें से अधिकांश को वन विभाग ने विकसित किया है. पण्ड्रापाठ डिप्टी रेंजर नरेंद्र यादव ने बताया कि सूचना मिलने पर मामले में फिलहाल पंचनामा तैयार कर लिया है. उन्होंने बताया कि पूछताछ में स्थानीय ग्रामीणों की संलिप्तता पाई गई है. कुछ नामजद आरोपी के खिलाफ शिकायत मिली है, जिसपर वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी, साथ ही काटे गए पेड़ों को जब्त कर डिपो में रखवाया जा रहा है.

वाइस एडमिरल आरती सरीन ने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा महानिदेशक का पद संभाला

नईदिल्ली  वाइस एडमिरल आरती सरीन सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (डीजीएएफएमएस) के महानिदेशक का पद संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बन गईं हैं। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को एक वक्तव्य जारी कर कहा कि 46वें महानिदेशक के पद का कार्यभार संभालने से पहले वह महानिदेशक मेडिकल सेवा (नौसेना), महानिदेशक मेडिकल सेवा (वायु) और सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी), पुणे के निदेशक और कमांडेंट की प्रतिष्ठित नियुक्तियों पर काम कर चुकी हैं। वह एएफएमसी, पुणे की पूर्व छात्रा हैं और उन्हें दिसंबर 1985 में सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं में नियुक्त किया गया था। वह एएफएमसी, पुणे से रेडियोडायग्नोसिस में एमडी हैं और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई से रेडिएशन ऑन्कोलॉजी में डिप्लोमेट नेशनल बोर्ड हैं। अपने 38 साल के करियर में, फ्लैग ऑफिसर ने प्रोफेसर और प्रमुख रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, आर्मी हॉस्पिटल (आर एंड आर) और कमांड हॉस्पिटल (दक्षिणी कमांड)/एएफएमसी पुणे, कमांडिंग ऑफिसर, आईएनएचएस अश्विनी, कमांड मेडिकल ऑफिसर सहित प्रतिष्ठित शैक्षणिक और प्रशासनिक नियुक्तियां हासिल की हैं। फ्लैग ऑफिसर को भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों शाखाओं में सेवा करने का दुर्लभ गौरव प्राप्त है, उन्होंने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट से कैप्टन तक, भारतीय नौसेना में सर्जन लेफ्टिनेंट से सर्जन वाइस एडमिरल तक और भारतीय वायु सेना में एयर मार्शल के रूप में कार्य किया है। वाइस एडमिरल सरीन को हाल ही में चिकित्सा पेशेवरों के लिए सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों और प्रोटोकॉल तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित राष्ट्रीय टास्क फोर्स के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था। वह युवा महिलाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करने में सबसे आगे रही हैं और सरकार की नारी शक्ति पहल की प्रतीक हैं।  

वृद्धजनों के अनुभव का लाभ उठाकर, हम अपने जीवन को सहज और सरल बना सकते है- श्रीमती वायंगणकर

अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर “गरिमा के साथ वृद्धावस्था” कार्यक्रम सम्पन्न वृद्धजन के अनुभव का लाभ उठाये : प्रमुख सचिव श्रीमती वायंगणकर वृद्धजनों के अनुभव का लाभ उठाकर, हम अपने जीवन को सहज और सरल बना सकते है- श्रीमती वायंगणकर भोपाल वृद्धजनों के अनुभव का लाभ उठाकर, हम अपने जीवन को सहज और सरल बना सकते है। यह बात प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने अन्तर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर “गरिमा के साथ वृद्धावस्था” राज्य स्तरीय कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक न्याय विभाग, हेल्पेज इंडिया, सीनियर सिटीजन फोरम और शासकीय होम्योपेथिक चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। प्रमुख सचिव श्रीमती वायंगणकर ने कहा कि प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस का आयोजन भोपाल सहित सभी जिला मुख्यालय पर किया गया है। राज्यस्तरीय कार्यक्रम में शतायु बुजुर्गों को सम्मानित किया गया, जिसमें भोपाल की रहने वाली 113 वर्षीय श्रीमती राम कुंवर बाई, 103 वर्षीय श्रीमती तुलाबाई, 108 वर्षीय हरीलाल, 120 वर्षीय श्रीमती गयाबाई तथा 101 वर्ष की श्रीमती बड़बाई को एक-एक हजार रूपये की राशि तथा शॉल-श्रीफल सम्मान स्वरूप दिया गया। कार्यक्रम स्थल पर नि:शुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन भी किया गया है। आयुक्त सामाजिक न्याय डॉ. आर.आर. भोंसले ने बताया कि भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश के 5 जिलों ग्वालियर, टीकमगढ़, उज्जैन, छिंदवाड़ा तथा जबलपुर में वृद्धजनों के विशेष शिविर आायोजित किए गये है इनमें एलमिको संस्था के माध्यम से जरूरतमंद वृद्धजनों को सहायक उपकरण वितरित किए गये है। यह ग्वालियर जिले में 155, टीकमगढ़ में 147, उज्जैन में 10, जबलपुर में 28 तथा छिंदवाड़ा में 10 हितग्राहियों को सहायक उपकरण वितरित किये गये है। कार्यक्रम में शासकीय होम्योपैथिक कॉलेज के प्राचार्य एवं स्टाफ, आयुष्मान निरामयन हेल्पेज इंडिया और सीनियर सिटीजन फोरम के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में वृद्धजन सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के प्रारंभ में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया।  

अवैध रेत उत्खनन पर बड़ी कार्रवाई, छत्तीसगढ़-बिलासपुर में हाइवा-ट्रैक्टर-पोकलेन मशीन समेत 10 वाहन राजसात

बिलासपुर. बिलासपुर वन विभाग ने अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रतनपुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत अनेक वाहनों को जप्त किया है। इस कार्रवाई का नेतृत्व वन मंडलाधिकारी सत्यदेव शर्मा के मार्गदर्शन में और उपवनमंडलाधिकारी अभिनव कुमार (IFS) के निर्देशानुसार किया गया। यह घटना 1 अक्टूबर 2024 की रात 12:10 बजे से सुबह 5:30 बजे तक चली, जिसमें वन विभाग ने कई अवैध रूप से रेत उत्खनन और परिवहन कर रहे वाहनों को पकड़ा। वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 33(ख) और धारा 52 के तहत इन वाहनों को जप्त किया। जप्त किए गए वाहनों में 10 चक्का वाले 2 हाइवा, 12 चक्का वाले 4 हाइवा, एक पोकलेन मशीन, 2 ट्रैक्टर और 1 मोटर साइकिल शामिल हैं। इन सभी वाहनों को रतनपुर परिक्षेत्र में लाकर रखा गया है और धारा 52 के अंतर्गत इन्हें राजसात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई में शामिल टीम ने रातभर अवैध रेत उत्खनन को रोकने के लिए निरंतर प्रयास किया। रतनपुर वन परिक्षेत्र अधिकारी देव सिंह ठाकुर के नेतृत्व में इस अभियान को अंजाम दिया गया, जिसमें परिक्षेत्र सहायक बानाबेल मोहम्मद शमीम, पुडु क्षेत्र सहायक प्रताप सिंह क्षत्रिय, रतनपुर क्षेत्र सहायक लाठीराम धुव, बेलतरा सहायक वेदप्रकाश शर्मा, और अन्य वनकर्मी जैसे हेमंत उदय, दीपक कोसले, संदीप जगत, मुलेश जोशी, जितेंद्र सोनवानी, हित कुमार धु, मनोज पैकरा, धीरज दुबे, पन्नालाल जांगड़े, आकाश श्रीवास्तव, मानस दुबे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह कार्यवाही बिलासपुर वनवृत के मुखिया प्रभात मिश्रा के नेतृत्व में वनों के संरक्षण और संवर्धन के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए की गई। यह अभियान वन विभाग की अवैध गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अवैध रेत उत्खनन पर्यावरण के लिए हानिकारक होता है और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी नुकसान पहुंचाता है। इस प्रकार की अवैध गतिविधियां न केवल पारिस्थितिकी को प्रभावित करती हैं, बल्कि सरकार के राजस्व को भी नुकसान पहुंचाती हैं। वन विभाग की यह कार्यवाही दर्शाती है कि विभाग इस तरह की अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त है और भविष्य में भी ऐसे अभियानों को अंजाम देने के लिए तत्पर है। वन विभाग की इस तत्परता और उनके कारगर कदम से यह स्पष्ट होता है कि अवैध उत्खनन और अन्य अवैध गतिविधियों के खिलाफ विभाग किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतेगा।

कांग्रेस विधायकों ने सीएम मोहन से की मुलाकात, विजन डॉक्यूमेंट, फसल के दाम समेत अन्य मुद्दों को लेकर सौंपा ज्ञापन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज मुख्यमंत्री निवास में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस विधायकों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायक की समस्याओं को सुना और मुझे उम्मीद है कि सकारात्मक विपक्ष प्रदेश के लिए भी बेहतर काम करेगा। सीएम मोहन ने बताया कि सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों के बारे में भी विधायकों से परस्पर चर्चा की है। मुख्यमंत्री ने कहा खासकर के पहले हमने अपनी फसलों के सर्वे का फैसला किया। जिसके लिए जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया कि अगर फसल खराब हुई है तो उसका निराकरण करें। गौशालाओं के लिए उनकी व्यवस्था अच्छी बनी रहे, उसका अनुदान बढ़ाने के लिए नगरीय क्षेत्र में इंदौर, उज्जैन,  भोपाल, ग्वालियर बड़ी-बड़ी  नगर निगमों में गौशाला बनाने और गौ धन को बढ़ावा देने के साथ ही दूध पर बोनस और दूध उत्पादन में भी मध्यप्रदेश देश का नम्बर राज्य बने। राज्य परिसीमन आयोग भी बनाया है। जिला संभाग, तहसीलों को अपनी सीमाएं बदलने के लिए सभी प्रकार के सुझाव भी लेंगे। विकास के मामलों में भी सरकार द्वारा किए गए कार्यो से उन्हें अवगत कराया गया है। अपनी विधानसभा क्षेत्र का विजन डॉक्यूमेंट बनाएं विधायक- मोहन यादव मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि सभी विधायक वो चाहे कांग्रेस के हो, या बीजेपी के सभी अपनी-अपनी विधानसभाओं में विजन डॉक्यूमेंट बनाएं। पांच सालों मे विकास के मामले में वो अपनी विधानसभा को कहां ले जाना चाहते हैं और उसमें हम समान रूप से सारे विधायकों की मदद करेंगे। यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में हम मध्य प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था भी डबल करने वाले हैं। प्रदेश को नंबर वन राज्य बनाने का प्रयास- मोहन यादव सीएम ने कहा विकास के मामलों में मध्यप्रदेश देश का नंबर वन राज्य बने इस प्रयास में हम लगे है। मैं उम्मीद करता हूं कि सारे जनप्रतिनिधि अपनी अपनी क्षेत्रों की चिंता करके आ रहे हैं। हम सबने भी कोशिश की है कि मध्यप्रदेश को एक नए रूप में लाना है। जहां से हम चले थे, उससे और भी डबल स्थिति पाना है। मैं उम्मीद करता हूँ कि आने वाले समय में विकास की गति को इसी तरह जारी रखेंगे।

युवकों ने एक-दूसरे को किया लहूलुहान, छत्तीसगढ़-दुर्ग में पारिवारिक विवाद में चली तलवारें

दुर्ग। जिले में लगातार आपराधिक घटनाएं घट रही है. इसी कड़ी में भिलाई के खुर्सीपार थाना क्षेत्र में बीती रात युवकों के बीच तलवार और कटरबाजी हुई. इस वारदात में चार लोग घायल हुए हैं, जिसमें से एक की हालत गंभीर बताई गई है. जिसे इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है. मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार की रात करीब 1:00 बजे शहीद वीर नारायण चौक के पास पारिवारिक विवाद के चलते कुछ युवक आपस में भिड़ गए. फिर दोनों ही पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि जमकर तलवारबाजी और कटरबाजी हुई. इस वारदात में 4 लोग घायल हुए हैं और एक की हालत गंभीर है. गंभीर रूप से घायल युवक सतीश सेन को शासकीय लाल बहादुर शास्त्री सुपेला अस्पताल से प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज रायपुर रेफर कर दिया गया है. मामले में खुर्सीपार पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया है और देर रात एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. शहर में लगातार हो रही तलवारबाजी और कटरबाजी से लोगों में भय का माहौल है. वहीं सोमवार शाम को पुलिसने छावनी थाना क्षेत्र में हुई कटरबाजी के गिरफ्तार चार आरोपियों का जुलूस निकाला. उसके बावजूद अपराधियों का हौसला बढ़ा हुआ है और अपराधी बेखौफ होकर लगातार वारदात को अंजाम दे रहे हैं.

ड्रिल मशीन में हुई ब्लास्टिंग, छत्तीसगढ़-कोरबा की दीपका खदान में लगी भीषण आग

कोरबा। एसईसीएल (SECL) दीपका खदान में एक भीषण आगजनी की घटना सामने हुई है. खदान के आमगांव क्षेत्र में कोयला उत्खनन के दौरान ब्लास्टिंग के लिए इस्तेमाल की जा रही एक ड्रिल मशीन में अचानक आग लग गई. घटना के दौरान ड्रिल मशीन का चालक बाल-बाल बच गया और उसने समय रहते खुद को सुरक्षित निकाल लिया. मिली जानकारी के अनुसार, इस हादसे का कारण शॉर्ट सर्किट और मशीन के अधिक गर्म होने की वजह से आग लगना बताया जा रहा है. ड्रिल मशीन में आग की भीषण लपटें इतनी तेजी से फैली कि करोड़ों रुपये की मशीन धू-धू कर जलने लगी. आग को देखते हुए तुरंत एसईसीएल के दमकल विभाग को सूचना दी गई. मौके पर दमकल वाहनों ने पहुंचकर आग पर काबू पाने की कोशिश की. इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ है, लेकिन ड्रिल मशीन पूरी तरह से जलकर खाक हो गई है.

मध्यप्रदेश के बदमाश को यूपी पुलिस ने पैर में गोली मरकर किया घायल

दतिया मध्यप्रदेश के दतिया का शातिर बदमाश सद्दाम उर्फ गुल्लू का बीती रात उत्तर प्रदेश की पुलिस से चेकिंग के दौरान आमना सामना हो गया। इस दौरान आमने-सामने की फायरिंग में सद्दाम के पैर में लगी पुलिस की गोली से घायल हो गया। पहले भी झांसी पुलिस की ग्राम बाजना में बदमाशों के बीच मुठभेड़ हुई थी जिसके बाद सद्दाम फरार हो गया था। बीती रात सद्दाम के दतिया से झांसी की तरफ आने की मुखबर से मिली सूचना मिलने पर झांसी पुलिस ने घेराबंदी कर दी। इसी दौरान रकसा पुनावली मार्ग पर आमने-सामने की मुठभेड़ हो गई। पुलिस को सामने देख सद्दाम उर्फ गुल्लू ने फायरिंग कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में सद्दाम उर्फ गुल्लू के पैर में गोली लगी और वह हो गया घायल। जिसे पुलिस अभिरक्षा में इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। घटना को लेकर स्नेहा तिवारी सीओ सदर झांसी ने बताया कि सद्दाम उर्फ गुल्लू का आपराधिक रिकॉर्ड देखें तो 14 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज हैं।

कोच्चि के एक गांव की जमीन पर Waqf Board ने किया दावा, सैकड़ो परिवार बेघर होने की कगार पर

कोच्चि केरल की व्यावसायिक राजधानी कोच्चि की हलचल से दूर मुनंबम उपनगर में मछुआरों का एक खूबसूरत गांव है- चेराई. समुद्र तट के करीब स्थित चेराई अपने बीच रिसॉर्ट्स के साथ आज पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है. लेकिन इस गांव के लोग पलायन के डर में जी रहे हैं. गांव के लगभग 610 परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन और संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड ने दावा किया है. कानूनी विवाद में फंसने के कारण गांव वाले 2022 से ही न तो अपनी जमीन पर लोन ले सकते हैं, और न ही इसे बेच सकते हैं. सिरो-मालाबार चर्च और केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल जैसे प्रमुख ईसाई संगठनों ने वक्फ (संशोधन) विधेयक के संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को एक पत्र भेजकर वक्फ अधिनियम 1995 में संशोधन के लिए अपने सुझाव दिए हैं.  इस खूबसूरत गांव में पहुंची और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. समुद्र तट के सामने एक छोटे से घर में बूढ़ी मां गौरी और उनकी विकलांग बेटी सिंटा से मुलाकात हुई. सिंटा ने बताया कि कुछ साल पहले उन्हें स्ट्रोक हुआ था, जिससे उनका जीवन कठिन हो गया. उन्होंने कहा, ‘मैं अब भी यहां लॉटरी टिकट बेचकर जीवन यापन करती हूं. हम यह घर नहीं छोड़ सकते. यह हमारा है. 2022 तक सब कुछ सामान्य था, अचानक हमें बताया गया कि जिस जमीन पर हम वर्षों से रह रहे, अब वह हमारी नहीं रही.’ ग्रामीणों ने की वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन की मांग सिंटा की पड़ोसी सीना के पास भी बताने के लिए ऐसी ही कहानियां थीं. सीना ने कहा कि उनका घर ही उनकी जिंदगी की एकमात्र कमाई है. उन्होंने कहा, ‘मेरे पति एक मछुआरे हैं. सालों की मेहनत के बाद उन्होंने यह घर बनाया है. हमने इस मकान के अलावा कुछ और नहीं बनाया है, जिसे अपना कह सकें. यदि यह घर हमारे हाथ से चला गया तो कुछ नहीं बचेगा. सरकार को वक्फ बोर्ड अधिनियम में संशोधन करना चाहिए और हमारी समस्याओं का समाधान ढूंढना चाहिए.’ इस गांव के हर घर की यही कहानी है. थोड़ी दूर पर, प्रदीप और उनकी पत्नी श्रीदेवी मिले. उनके हाथों में अपनी जमीन और घर से जुड़े दस्तावेज थे. उन्होंने आजतक की टीम को अपने दस्तावेज दिखाए और कहा कि यह साबित करने के लिए काफी है कि जमीन हमारी है. प्रदीप ने कहा, ‘मैंने यह जमीन 1991 में फारूक कॉलेज से उनके द्वारा मांगी गई राशि चुकाकर खरीदी थी. मेरे पास सभी सबूत हैं. मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती, इसलिए मैंने अब काम करना बंद कर दिया है. मेरा बेटा परिवार की देखभाल करता है. मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि भविष्य में उसे इस घर में रहने में कोई दिक्कत न हो. मैं हमारे अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाऊँगा. मैंने मेहनत से यह घर बनाया है.’ प्रदीप इसके आगे अपनी बात पूरी नहीं कर पाए और रोने लगे. गांव वाले न जमीन बेच सकते हैं न ही गिरवी रख सकते हैं इलाके के लोगों को उम्मीद है कि चर्चों द्वारा वक्फ (संशोधन) विधेयक के संबंध में गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को लिखे गए पत्र से उन्हें इस संकट से उबरने में मदद मिलेगी. ग्रामीणों ने कहा कि वे एक सदी से भी अधिक समय से चेराई गांव में रह रहे हैं. उनके अनुसार, यह जमीन 1902 में सिद्दीकी सैत ने खरीदी थी और बाद में 1950 में फारूक कॉलेज को दान कर दी थी. मछुआरों और कॉलेज के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद 1975 में सुलझ गया, जब उच्च न्यायालय ने कॉलेज के पक्ष में फैसला सुनाया. 1989 से स्थानीय लोगों ने कॉलेज से जमीन खरीदनी शुरू कर दी. हालांकि, 2022 में विलेज ऑफिस ने अचानक दावा किया कि गांव वक्फ बोर्ड की जमीन पर बसा है. इसके बाद ग्रामीणों को उनके राजस्व अधिकारों से वंचित कर दिया गया और उन्हें अपनी संपत्ति बेचने या गिरवी रखने से रोक दिया गया.  

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