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महाकुंभ-2025: श्री आदि शंकर विमान मंडपम् मंदिर श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होगा

प्रयागराज महाकुंभ-2025 में संगम किनारे बना दक्षिण भारतीय शैली का श्री आदि शंकर विमान मंडपम् मंदिर श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होगा। स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्व मंदिर में विग्रहों के दर्शनों के लिए आ चुके हैं। महाकुंभ के लिए योगी सरकार मंदिर के आसपास विकास कार्य करा रही है। मंदिर की आभा ऐसी है कि वो श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच लेती है। मंदिर के प्रबंधक रमणी शास्त्री के अनुसार कांचिकामकोटि के 69वें पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती ने अपने गुरु चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती की इच्छापूर्ति के लिए श्री आदि शंकर विमान मंडपम् का निर्माण कराया। गुरु चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती ने वर्ष 1934 में प्रयाग में चातुर्मास किया था। उन दिनों वो दारागंज के आश्रम में रुके थे। प्रतिदिन पैदल संगम स्नान को आते थे। उस दौरान बांध के पास उन्हें दो पीपल के वृक्षों के बीच खाली स्थान नजर आया। गुरु चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती ने धर्मशास्त्रों का अध्ययन किया और स्वयं के तपोबल से यह साबित किया कि इसी स्थान पर आदि शंकराचार्य और कुमारिल भट्ट के बीच संवाद हुआ था। बाद में यहीं पर कुमारिल भट्ट ने तुषाग्नि में आत्मदाह किया था। रमणी शास्त्री ने बताया कि इसी स्थान पर गुरु चंद्रशेखरेंद्र ने मंदिर बनाने की इच्छा व्यक्त की थी, जिसे शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती ने पूर्ण किया। 17 वर्ष लगे मंदिर निर्माण में श्री आदि शंकर विमान मंडपम् की नींव वर्ष 1969 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल बी. गोपाल रेड्डी ने रखी थी। तब इंजीनियर बी. सोमो सुंदरम् और सी.एस. रामचंद्र ने मंदिर का नक्शा तैयार किया था। मंदिर प्रबंधन के साथ उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने भी निर्माण में सहयोग दिया था। जिन 16 पिलर्स पर मंदिर टिका है, उनका निर्माण उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम के तत्कालीन असिस्टेंट इंजीनियर कृष्ण मुरारी दुबे की देख-रेख में कराया गया था। 17 मार्च 1986 को मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। श्री आदि शंकर विमान मंडपम् में विग्रह और निर्माण में प्रयोग किए गए पत्थर दक्षिण भारत से लाए गए हैं। मंदिर द्रविड़ियन आर्किटेक्चर का नायाब उदाहरण है। 130 फीट ऊंचा है मंदिर 130 फीट ऊंचे इस मंदिर में श्री आदि शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित की गई है। देवी कामाक्षी और 51 शक्तिपीठ के अलावा तिरुपति बालाजी और सहस्र योग लिंग के साथ 108 शिवलिंग मंदिर में स्थापित हैं। गणेश जी का मंदिर भी है। मंदिर प्रातः 6 बजे से दोपहर 1 बजे और सायं 4 से रात्रि 8 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। मंदिर के ऊपरी तलों से संगम का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है। इन दिनों भी श्री आदि शंकर विमान मंडपम् में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते हैं। महाकुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालु श्री आदि शंकर विमान मंडपम् में आएंगे और विग्रहों के दर्शन करेंगे।  

एमपीपीएससी ने राज्य सेवा परीक्षा 2025 घोषित कर दी, 16 फरवरी को होंगे पेपर

इंदौर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने राज्य सेवा परीक्षा 2025 को लेकर घोषणा कर दी। आयोग ने 16 फरवरी को पेपर रखे है। अभी रिक्त पदों के बारे में संबंधित विभागों से कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। यही वजह है कि आयोग ने खाली पदों का उल्लेख विज्ञापन में नहीं किया है। आयोग ने अगले सात दिनों के भीतर पदों के बारे में पोर्टल पर जानकारी देने की बात कहीं है। अधिकारियों के मुताबिक परीक्षा में आवेदन की प्रक्रिया भी दीपावली बाद शुरू होगी। राज्य सेवा परीक्षा 2022-2023 के साक्षात्कार की प्रक्रिया और राज्य सेवा परीक्षा 2024 का मुख्य परीक्षा का रिजल्ट आना बाकी है। इस बीच आयोग ने अगली परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। जल्दबाजी में आयोग ने राज्य सेवा परीक्षा 2025 की भले ही तारीख घोषित कर दी। मगर रिक्त पदों के बारे में अभ्यर्थियों को जानकारी नहीं दी। आयोग ने 16 फरवरी को दो सत्र में पेपर रखे हैं। भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM इंदौर) ने वैश्विक शिक्षा के विस्तार को लेकर चीन और नार्वे की शैक्षणिक संस्थानों के बीच दो अनुबंध करार किए गए है। इसके माध्यम से इन संस्थानों में विद्यार्थी-फैकेल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम चलाए जा सकेंगे। यहां तक कि संस्थानों में रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा। खास बात यह है कि एमओयू के चलते संस्थान आपस में संसाधानों का आदान-प्रदान भी कर सकेंगे। नार्वे की क्रिस्टियानिया यूनिवर्सिटी काॅलेज और चीन में सूचो यूनिवर्सिटी के साथ ही समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए है। इंदौर और नार्वे की क्रिस्टियानिया यूनिवर्सिटी कॉलेज में अनुसंधान व कलात्म विकास पर अनुबंध हुआ है, जिसमें निदेशक प्रो. हिमांशु राय और डा. क्रिस्टी बाक ने हस्ताक्षर किए हैं। नार्वे की क्रिस्टियानिया यूनिवर्सिटी कालेज नार्वे की स्थापना 1914 में हुई थी। यह 16 हजार से अधिक छात्रों के साथ अभ्यास-उन्मुख शिक्षण वातावरण प्रदान करता है और विपणन, प्रबंधन, रचनात्मकता और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों पर जोर देता है। डा बाक़ ने कहा कि यह साझेदारी दोनों संस्थानों के लिए अपार संभावनाओं के द्वार खोलती है। दोनों देशों की शैक्षणिक पद्धति और प्रणाली को समझा जा सकेंगे। इसके माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकेगा। वे कहते है कि इसे इंडस्ट्री की जरूरत व आवश्यकताओं को समझकर पाठ्यक्रम में संशोधन करेंगे। प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ाएंगे।निदेशक प्रो. राय ने कहा कि सतत विकास और नवीन प्रथाओं में उनके अनुभवों से सीखने के लिए उत्सुक हैं, जो हमारी शैक्षिक पाठ्यक्रमों में भी योगदान देगा। वहीं ज्ञान साझा करने व्याख्यानों और संगोष्ठियां आयोजित होगी। वहीं दोनों संस्थान मिलकर पाठ्यक्रम बनाएंगे। साथ ही दोहरी डिग्री के अवसरों की खोज के माध्यम से शैक्षणिक अनुभवों को समृद्ध करेगा। दूसरे एमओयू पर सूचो यूनिवर्सिटी में बिजनेस स्कूल के डीन प्रो. बो फेंग ने हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि उनके मूल मूल्य- प्रामाणिकता, जवाबदेही, प्रशंसा और उन्नति- सामाजिक रूप से जागरूक और अभिनव व्यावसायिक लीडरों को तैयार कर सकेंगे। सहयोग ज्ञान के आदान-प्रदान और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के लिए मार्ग बनाकर हमारे छात्रों और शिक्षकों की शैक्षिक यात्रा को समृद्ध बनाएगा।

मणिपुर पड़ाव के दौरान अमूर फॉल्कन को किया जाएगा सैटेलाइट ट्रांसमीटर के साथ टैग

इम्फाल माह की शुरुआत में, भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक मणिपुर के तामेंगलोंग जिले में अमूर फाल्कन पक्षियों को सैटेलाइट ट्रांसमीटर से टैग करेंगे, ताकि इन प्रवासी पक्षियों के रास्तों का अध्ययन किया जा सके। यह जानकारी वन अधिकारियों ने दी है। यह खूबसूरत पक्षी, जिन्हें मणिपुर में ‘अखुआइपुइना’ और नागालैंड में ‘मोलुलम’ के नाम से जाना जाता है, सालाना करीब 22,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। ये पूर्वी एशिया से दक्षिण अफ्रीका तक की यात्रा करते हैं और फिर शरद ऋतु में वापस लौटते हैं। फाल्कन परिवार से संबंधित ये छोटे पक्षी, जो आकार में कबूतर से थोड़े छोटे होते हैं, तामेंगलोंग के घने जंगलों वाले इलाके में बड़ी संख्या में पहुंचे हैं प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए मणिपुर के नोनी और तामेंगलोंग जिलों ने किसी भी तरह के शिकार, पकड़ने, मारने और बेचने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। ये जिले असम और नागालैंड से लगे हुए हैं, जो इन पक्षियों की आगे की यात्रा से पहले एक छोटा ठहराव स्थल भी होता है। तामेंगलोंग के वन अधिकारी हिटलर सिंह ने बताया कि देहरादून स्थित डब्ल्यूआईई के वैज्ञानिक, डॉ सुरेश कुमार यूके से मंगवाए गए ट्रांसमीटर के साथ नवंबर के पहले सप्ताह में तामेंगलोंग पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पहले कुछ अमूर फाल्कन चुनकर उनकी सेहत का निरीक्षण करेंगे और फिर सबसे स्वस्थ दो पक्षियों को ट्रांसमीटर से टैग करेंगे। सिंह ने बताया कि जैसे ही टैग किए गए पक्षी उड़ान भरेंगे, उनके यात्रा मार्ग और उड़ान पैटर्न का अध्ययन किया जा सकेगा। ट्रांसमीटर एक साल तक काम करता है, जिससे इन पक्षियों की पूरी सालभर की यात्रा का रिकॉर्ड मिल सकेगा। एक मादा बाज को 2018 में तमेंगलोंग में ट्रांसमीटर से टैग किया गया था। उसने लगातार पांच दिन और आठ घंटे उड़ान भरने के बाद 5,700 किलोमीटर की दूरी तय करके सोमालिया में लैंड किया था। इस बीच, जिले के अधिकारियों और जानवर प्रेमियों के समूहों ने इन पक्षियों की सुरक्षा के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। वन अधिकारी हिटलर सिंह ने बताया, स्थानीय लोगों को प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए वन विभाग, स्थानीय क्लबों और पशु प्रेमियों के समूहों के समर्थन से, पहले की तरह नवंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में “अमूर फाल्कन महोत्सव” का आयोजन करेगा। तामेंगलोंग के पशु प्रेमियों का कहना है कि वन अधिकारियों और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा अमूर फाल्कन की सुरक्षा के लिए बढ़ाई गई जागरूकता और सुरक्षा के प्रयासों के कारण उनके शिकार की घटनाओं में काफी कमी आई है। एक पशु प्रेमी ने कहा, “हमने अपने जिले में अमूर फाल्कन का स्वागत किया है। हमने देखा है कि कई बाज हमारे जिले में आजादी से उड़ रहे हैं।” राज्य में अमूर फाल्कन की जनसंख्या का पहला सर्वेक्षण पिछले वर्ष तामेंगलोंग के चुलुआन बांस के जंगल में किया गया था, जहां बराक नदी के किनारे 1,41,274 बाज पाए गए थे। नागालैंड में, एक वन अधिकारी ने बताया कि ये राज्य भी इन पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां ये पक्षी शीतकाल में तीन से चार सप्ताह के लिए विश्राम और फिर से तरोताजा होने के लिए रुकते हैं। इन पक्षियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति का पर्यावरणीय महत्व है, क्योंकि ये प्राकृतिक रूप से कीटों की संख्या को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं। अमूर बाज को 1972 के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत कानूनी संरक्षण दिया गया है। नागालैंड के अधिकारी ने कहा कि इन पक्षियों का शिकार करना या उनके मांस का कब्जा करना गंभीर अपराध है, जिसके चलने तीन साल तक की सजा भी हो सकती है। अमूर फाल्कन और अन्य प्रवासी पक्षियों के संरक्षण से नागालैंड में पर्यटन को बढ़ावा मिला है।  

हरभजन सिंह को इस बात पर संदेह है कि आईपीएल 2025 की मेगा नीलामी से पहले मुंबई इंडियंस रोहित शर्मा को रिटेन करेगी

नई दिल्ली पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह को इस बात पर संदेह है कि आईपीएल 2025 की मेगा नीलामी से पहले मुंबई इंडियंस रोहित शर्मा को रिटेन करेगी। हालांकि, मुंबई के लिए रोहित की कप्तानी में तीन आईपीएल खिताब जीतने वाले स्पिनर को लगता है कि टी20 विश्व कप 2024 जीतने के बाद सलामी बल्लेबाज को रिटेन किया जाएगा। रोहित के अलावा, अनुभवी क्रिकेटर का मानना ​​है कि कप्तान हार्दिक पांड्या, तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह, बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा को मेगा नीलामी से पहले अपने कोर ग्रुप को बरकरार रखने के लिए फ्रेंचाइजी बरकरार रखेगी। हरभजन ने स्टार स्पोर्ट्स से मुंबई इंडियंस के लिए संभावित आईपीएल रिटेंशन के बारे में बात करते हुए कहा, “मुंबई इंडियंस एक ऐसी टीम है जिसने पिछले दो-तीन वर्षों में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है। वह एक चैंपियन और बहुत अच्छी टीम है। जहां तक मुझे पता है, वे निश्चित रूप से भविष्य को ध्यान में रखकर टीम बनाने पर फोकस करेंगे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे इस साल अनुभवी खिलाड़ियों को नहीं शामिल करेंगे। पिछले साल, उन्होंने हार्दिक पांड्या को कप्तान बनाया था और मुझे लगता है कि उन्हें निश्चित रूप से रिटेन किया जाएगा। जसप्रीत बुमराह को रिटेन किया जाएगा, सूर्यकुमार यादव को रिटेन किया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या रोहित शर्मा को रिटेन किया जाएगा।” इस 44 वर्षीय स्पिनर ने 31 अक्टूबर की समय सीमा से पहले छह रिटेंशन के तहत अनकैप्ड श्रेणी के तहत नेहल वढेरा को मुंबई की अंतिम पसंद के रूप में चुना। हरभजन ने कहा, “कप्तान के तौर पर हाल ही में रोहित शर्मा ने विश्व कप जीता है, इसलिए मुझे लगता है कि उन्हें टीम में बनाए रखना चाहिए और ऐसा होगा भी। इस तरह चार खिलाड़ी हो जाएंगे और अगर पांचवां खिलाड़ी है, तो तिलक वर्मा को टीम में बनाए रखा जाएगा। तिलक वर्मा उन खिलाड़ियों में से हैं जो भविष्य में मुंबई इंडियंस के लिए मैच जीतने में बहुत उपयोगी साबित होंगे।” आईपीएल 2024 में पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस पांड्या की कप्तानी में तालिका में सबसे निचले पायदान पर रही। टीम ने 14 लीग चरण के मुकाबलों में से सिर्फ चार मैच जीते और पूरे सीजन में तालिका में सबसे निचले पायदान पर रही।

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर टॉम मूडी को लगता है कि पंजाब किंग्स आरटीएम से इन खिलाड़ियों को दे सकती है मौका

नई दिल्ली पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर टॉम मूडी को लगता है कि आईपीएल 2024 सीजन के खराब प्रदर्शन के बाद पंजाब किंग्स इस साल के अंत में लीग के अगले सीजन के लिए होने वाली मेगा नीलामी से पहले अर्शदीप सिंह, जितेश शर्मा, सैम करन और कगिसो रबाडा के लिए राइट टू मैच (आरटीएम) विकल्प का इस्तेमाल करेगी। आईपीएल फ्रेंचाइजी अपनी मौजूदा टीम से कुल छह खिलाड़ियों को रिटेन कर सकती हैं। यह या तो रिटेंशन के जरिए या राइट टू मैच ऑप्शन के जरिए किया जा सकता है। छह रिटेंशन/आरटीएम में अधिकतम पांच कैप्ड खिलाड़ी (भारतीय और विदेशी) और अधिकतम दो अनकैप्ड खिलाड़ी हो सकते हैं। आईपीएल 2025 के लिए फ्रेंचाइजी के लिए नीलामी पर्स 120 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। फ्रेंचाइजी के लिए अपनी रिटेंशन सूची को अंतिम रूप देने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर है। मूडी ने स्टार स्पोर्ट्स से पंजाब किंग्स के लिए संभावित आईपीएल रिटेंशन के बारे में बात करते हुए कहा, “पंजाब किंग्स के लिए मुझे नहीं लगता कि मैं किसी भी खिलाड़ी को रिटेन करूंगा, निश्चित रूप से कैप्ड खिलाड़ियों को नहीं लेकिन मैं अर्शदीप सिंह, सैम करन और रबाडा जैसे खिलाड़ियों के लिए राइट टू मैच विकल्प का उपयोग करना चाहूंगा। जितेश शर्मा एक और खिलाड़ी हैं, जिनके लिए मैं नीलामी में राइट टू मैच का उपयोग करने पर विचार करूंगा।” उन्होंने पंजाब के संभावित रिटेंशन के तौर पर अनकैप्ड शशांक सिंह और हरप्रीत बरार को चुना, जिससे उनकी छह खिलाड़ियों की सूची पूरी हो जाएगी। शशांक पिछले सीजन में 164.65 की स्ट्राइक रेट से 354 रन बनाकर फ्रेंचाइजी के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे, जिसमें दो अर्धशतक शामिल थे। दूसरी ओर, हरप्रीत ने 13 मैचों में सात विकेट लिए। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ने कहा, “जब अनकैप्ड खिलाड़ियों की बात आती है, तो कुछ अच्छे खिलाड़ी हैं जिन्हें मैं नीलामी से पहले टीम में शामिल करना चाहूंगा। शशांक सिंह, जो एक शानदार मध्यक्रम पावर हिटर हैं जबकि हरप्रीत बरार बाएं हाथ के स्पिनर हैं।” साल 2024 के संस्करण में पंजाब किंग्स आखिर से दूसरे स्थान पर रही। उसने पांच मैच जीते और नौ हारे। वे आईपीएल के आगामी संस्करण से पहले खिलाड़ियों की नीलामी के माध्यम से अपनी टीम में बदलाव की उम्मीद कर रहे होंगे।

रायपुर दक्षिण विधानसभा उपचुनाव : 13 नवंबर को होगा मतदान, मतदान सेक्टरों की संख्या 19 से बढ़ाकर की 38

रायपुर रायपुर दक्षिण विधानसभा में उपचुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने तैयारियों को तेज कर दिया है। 13 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए इस बार सेक्टरों की संख्या को 19 से बढ़ाकर 38 कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को सुगम बनाना और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता पहुंचाना है। इस निर्णय से मतदान की गति बनाए रखने और मतदाताओं को अधिक सुविधाएं प्रदान करने की उम्मीद है। सेक्टरों की संख्या बढ़ाने का कारण लोकसभा चुनाव के दौरान रायपुर दक्षिण में 19 सेक्टर बनाकर चुनाव संपन्न करवाया गया था। हालांकि, इस बार उपचुनाव में मतदाताओं को बेहतर सेवाएं देने और चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए सेक्टरों की संख्या दोगुनी कर दी गई है। इससे सेक्टर अधिकारियों और मतदान केंद्रों के बीच की दूरी कम होगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता पहुंचाना संभव हो सकेगा। आपात स्थिति में होगी त्वरित सहायता सेक्टरों की संख्या बढ़ाने से आपात स्थिति में त्वरित सहायता पहुंचाना आसान होगा। चाहे कानून व्यवस्था की स्थिति को मेंटेन करना हो या किसी प्रकार की मेडिकल इमरजेंसी, सहायता की पहुंच तेज और सुगम होगी। मतदान केंद्रों और सेक्टर कार्यालयों के बीच दूरी कम होने से चुनाव प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित हो जाएगी। वहीं, ला एंड आर्डर की स्थिति बनने या फिर आपात स्थिति बनने पर त्वरित रूप से यहां सहायता उपलब्ध करवाई जा सकेगी। पूर्व में हुई बैठक के दौरान इस पर निर्णय लिया गया और कलेक्टर डॉ गौरव सिंह ने आदेश जारी किया, ताकि मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानियों को रोका जा सके। आयोग का बढ़ेगा खर्च, बढ़ेगी कर्मचारियों की संख्या एक सेक्टर में सेक्टर अधिकारी के अलावा एक ड्राइवर रखा जाता है। वहीं, एक दल बनाया जाता है, जिसमें मेडिकल टीम, सुरक्षा गार्ड, एक अन्य कर्मचारी रहते हैं और एक पीठासीन अधिकारी रहते हैं। ऐसे में सेक्टराें की संख्या बढ़ाने से कर्मचारियों की संख्या दोगुनी होगी और आयोग का खर्च भी गाड़ियों अन्य मदों में बढ़ेगा। इस तरह की होंगी सुविधाएं – मतदान सटीक मॉनिटरिंग व रिपोर्टिंग – ला एंड आर्डर मेंटेन करने में सहूलियत – मतदान केंद्रों की सेक्टरों से दूरी घटेगी – मशीन खराब होने पर तुरंत बदला जा सकेगा – मतदान की गति नहीं थमेगी – मेडिकल टीम व सुरक्षा बल भी बढ़ेंगे

बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीतनी है, भारत को बुमराह, सिराज और शमी जैसे तेज गेंदबाजों की जरूरत: ब्रेट ली

नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने कहा कि अगर भारत को इस साल ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीतनी है, तो उन्हें जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और शीर्ष फॉर्म में चल रहे मोहम्मद शमी जैसे तेज गेंदबाजों की जरूरत है। बुमराह और सिराज लगातार भारत के लिए खेल रहे हैं, जबकि शमी ने पिछले साल घरेलू वनडे विश्व कप के बाद से प्रतिस्पर्धी क्रिकेट नहीं खेला है, क्योंकि वह अकिलीज़ टेंडन की चोट से उबर रहे हैं, जिसके लिए इस साल लंदन में सर्जरी की जरूरत थी। शमी, जिन्होंने भारत के बेंगलुरू टेस्ट में न्यूजीलैंड से आठ विकेट से हारने के बाद एक सत्र में गेंदबाजी करते समय अपने बाएं घुटने पर पट्टी बांध ली थी, ऑस्ट्रेलिया में महत्वपूर्ण टेस्ट श्रृंखला खेलने से पहले अपनी फिटनेस और तैयारियों का आकलन करने के लिए पहले रणजी ट्रॉफी में खेलने की संभावना है। “अगर भारत को यहां जीतना है तो मोहम्मद शमी को फिट होना होगा। हम सभी जानते हैं कि बुमराह कितने अच्छे गेंदबाज हैं। वह ऐसा खिलाड़ी है जो गेंद को दोनों तरफ से घुमा सकता है और मुझे लगता है कि वह बहुत अच्छी गेंदबाजी करेगा। वह पुरानी गेंद से बहुत अच्छा खेलता है। वह रिवर्स स्विंग का बेहतरीन उदाहरण है। “मोहम्मद सिराज नई गेंद को अच्छी तरह से घुमाता है और जब वह सीम को सीधा रखता है, तो वह उसे सही आकार देता है, और यहीं पर ऑस्ट्रेलिया मुश्किल में पड़ सकता है और गेंद को चकमा दे सकता है, खासकर पर्थ और एडिलेड जैसे विकेटों पर, जो तेज गेंदबाजी के लिए अनुकूल हो सकते हैं। ली ने फॉक्स क्रिकेट के ‘द फॉलो ऑन’ पॉडकास्ट पर कहा, “मेरे लिए, यह संयोजन है। इसमें तीन तेज गेंदबाज और स्पिनर (रविचंद्रन) अश्विन शामिल हैं। फिर उनके पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन अगर भारत जीतना चाहता है, तो आपके पास ये तीन तेज गेंदबाज होने चाहिए।” ली का यह भी मानना है कि अगर शमी ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट खेलने के लिए समय पर तैयार नहीं होते हैं, तो भारत युवा तेज गेंदबाज मयंक यादव के साथ जा सकता है, जो आईपीएल 2024 से ब्रेकआउट स्टार्ट हैं, जिन्होंने इस महीने बांग्लादेश के खिलाफ अपना टी20 डेब्यू किया। यादव न्यूजीलैंड के खिलाफ चल रही टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम के लिए दौरे पर जाने वाले रिजर्व खिलाड़ियों में से एक हैं। “भारत के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि उन्हें इस बात की चिंता नहीं है कि किसी ने कितना क्रिकेट खेला है, कितना नहीं खेला है। यह कुछ हद तक सैम कोंस्टास की तरह है – अगर वह खेलने के लिए तैयार है, तो उसे खेलने दें – और मुझे वास्तव में यह सिद्धांत पसंद है। “एक बात का मैं आपसे वादा कर सकता हूं कि बल्लेबाज 135 किमी से 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी का सामना करने में सहज हैं। यह तब होता है जब वे 150 से अधिक की गति से गेंदबाजी कर रहे होते हैं – मुझे परवाह नहीं है कि वह कौन है – कोई भी 150 किमी/घंटा से अधिक की गति से तेज गेंदबाजी का सामना नहीं करना चाहता। हां, आप थोड़े अनियमित हो सकते हैं। हां, आप शॉर्ट और वाइड गेंदबाजी कर सकते हैं और दंडित हो सकते हैं।” उन्होंने कहा, “लेकिन ऐसा लगता है कि उसके पास पूरा पैकेज है। वह तरोताजा और कच्चा है। लेकिन अगर मोहम्मद शमी तैयार नहीं है तो मैं उसके साथ जाने के लिए इच्छुक हूं। कम से कम उसे टीम में शामिल करें। उसे टीम में शामिल करें और अगर कुछ होता है और वह खुद को पेश करता है, तो उसे वह अवसर मिल सकता है और मुझे लगता है कि वह इन ऑस्ट्रेलियाई विकेटों पर काफी अच्छा प्रदर्शन करेगा।”  

प्रमोद कृष्णम ने कहा- कांग्रेस को अपना ‘दफ्तर’ और ‘झंडा’ भी ‘सपा’ को सौंप देना चाहिए

लखनऊ उत्तर प्रदेश की सभी नौ सीटों पर होने वाले उपचुनाव में इंडिया गठबंधन की तरफ से समाजवादी पार्टी ने अपने प्रत्याशियों को उतारने की घोषणा की है। कांग्रेस ने यूपी में एक भी सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा है, इसको लेकर यूपी सियासत गरमा गई है। सपा के इस फैसले पर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कांग्रेस पर तंज कसा है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने उत्तर प्रदेश उपचुनाव में सभी नौ सीटों पर विपक्षी गठबंधन की तरफ से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को उतारने के ऐलान के बाद कांग्रेस पर बड़ा तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस को अपना दफ्तर और झंडा भी सपा को दे देना चाहिए। प्रमोद कृष्णम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “कांग्रेस को अपना ‘दफ्तर’ और ‘झंडा’ भी ‘सपा’ को सौंप देना चाहिए।” बता दें कि यूपी नौ सीटों विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच सीट शेयरिंग का मुद्दा काफी चर्चा में रहा। कांग्रेस जहां प्रदेश में चार से पांच सीटें मांग रही थी, जबकि सपा, कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें देने को तैयार थी। वहीं सपा ने अब सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बुधवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, “बात सीट की नहीं जीत की है’ इस रणनीति के तहत ‘इंडिया गठबंधन’ के संयुक्त प्रत्याशी सभी 9 सीटों पर समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ के निशान पर चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी एक बड़ी जीत के लिए एकजुट होकर, कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़ी है। इंडिया गठबंधन इस उपचुनाव में, जीत का एक नया अध्याय लिखने जा रहा है।” उन्होंने कहा था, कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से लेकर बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं के साथ आने से समाजवादी पार्टी की शक्ति कई गुना बढ़ गई है। इस अभूतपूर्व सहयोग और समर्थन से सभी 9 विधानसभा सीटों पर ‘इंडिया गठबंधन’ का एक-एक कार्यकर्ता जीत का संकल्प लेकर नई ऊर्जा से भर गया है। ये देश का संविधान, सौहार्द और पीडीए का मान-सम्मान बचाने का चुनाव है। इसलिए हमारी सबसे अपील है; एक भी वोट न घटने पाए, एक भी वोट न बंटने पाए। देशहित में ‘इंडिया गठबंधन’ की सद्भाव भरी ये एकता और एकजुटता आज भी नया इतिहास लिखेगी और कल भी।” बता दें कि यूपी की सभी नौ सीटों पर उपचुनाव के लिए 13 नवंबर को मतदान होंगे, वहीं इसके नतीजे 23 नवंबर को सामने आएंगे। नामांकन की आखिरी तारीख 25 अक्टूबर है।  

भारत के खिलाफ टेस्ट मैचों के लिए विशेषज्ञ ओपनर चुने ऑस्ट्रेलिया : माइकल क्लार्क

नई दिल्ली भारत के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी सीरीज में उस्मान ख्वाजा का ओपनिंग पार्टनर कौन होना चाहिए, इस पर चल रही बहस के बीच, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व टेस्ट कप्तान माइकल क्लार्क ने जॉर्ज बेली की अगुआई वाली चयन समिति से किसी विशेषज्ञ खिलाड़ी को चुनने का आग्रह किया है। डेविड वार्नर के संन्यास के बाद खाली हुई जगह को भरने के बाद स्टीव स्मिथ के चौथे नंबर पर वापस आने के बाद, सैम कोंस्टास, मार्कस हैरिस, कैमरून बैनक्रॉफ्ट, जोश इंगलिस (जिन्होंने शेफील्ड शील्ड में मध्यक्रम के बल्लेबाज के रूप में शतक लगाया) और नाथन मैकस्वीनी जैसे दावेदार दूसरे ओपनर के स्थान के लिए दौड़ में हैं। “हमने टेस्ट क्रिकेट में स्टीव स्मिथ को ओपनिंग के लिए बुलाकर गलती की, इसलिए हमें वही गलती नहीं दोहरानी चाहिए। हमें एक विशेषज्ञ ओपनर चुनना चाहिए, जो सबसे बेहतर तरीके से तैयार हो। आप कैसे साबित कर सकते हैं कि जोश इंगलिस इस भारतीय आक्रमण के खिलाफ टेस्ट मैच में ओपनिंग के लिए विशेषज्ञ ओपनर से बेहतर व्यक्ति है?” स्काई स्पोर्ट्स रेडियो पर क्लार्क ने कहा, “उसने शील्ड में रन बनाए, हां, लेकिन वह मध्य क्रम में बल्लेबाजी करता है। यह सिर्फ इस बारे में नहीं है कि अभी यहां कौन रन बना रहा है। आप ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम का चयन इस तरह से नहीं करते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि ऑस्ट्रेलिया भारत के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होने में एक महीने से भी कम समय बचा होने के बावजूद अपने दूसरे ओपनर पर फैसला करने में उलझन में क्यों है, और उनका मानना है कि मौजूदा शेफील्ड शील्ड सीजन की खराब शुरुआत के बावजूद बैनक्रॉफ्ट को सबसे आगे होना चाहिए। “इस समय उनके सामने समस्या यह है कि शीर्ष तीन दावेदार जो विशेषज्ञ ओपनिंग बल्लेबाज हैं, शील्ड क्रिकेट में रन नहीं बना रहे हैं। कौन परवाह करता है? पिचों पर दो शील्ड राउंड हो चुके हैं – कौन परवाह करता है? यह सिर्फ़ दो शील्ड मैच में रन बनाने के बारे में नहीं हो सकता।मैं शायद कैमरून बैनक्रॉफ्ट के साथ जाऊंगा क्योंकि वह पिछले दो सालों से शील्ड क्रिकेट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे हैं। मुझे शील्ड क्रिकेट की परवाह है। मुझे लगता है कि उन्होंने रनों के आधार पर चुने जाने का अधिकार अर्जित किया है।”  

चीन में लगातार जन्म दर कम हो रही कमी, जानें भारत समेत दूसरे देशों का क्या है हाल

नईदिल्ली चीन में पिछले कुछ सालों में जन्म दर में भारी गिरावट आई है, जिसके चलते चीन में बच्चों के स्कूल माने जाने वाले कई किंडर गार्डन बंद कर दिए गए हैं. ये स्थिति सिर्फ चीन ही नहीं बल्कि कई देशों के लिए चिंता का विषय है. जहां घटती जन्म को बढ़ाने के लिए सरकार लगातार कई प्रयास कर रही है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि आखिर भारत का जन्म दर के मामले में क्या हाल है. चीन में क्यों घट रही जन्म दर? चीन में दशकों तक चली एक-संतान नीति के कारण लोगों में एक बच्चे को जन्म देने की मानसिकता बन गई. जी हां, एक समय ऐसा था जब चीन दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन गया था. जिसके चलते चीन ने दो बच्चे पैदा करने पर रोक लगा दी थी. ऐसे में अब लोग एक ही बच्चे को जन्म देते हैं और उसका पालन पोषण करते हैं. इसके अलावा शहरीकरण के कारण लोगों की जीवनशैली में बदलाव आया है. करियर और जीवन स्तर को बेहतर बनाने पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है. वहीं महिलाएं अब शिक्षित और स्वतंत्र हैं. वो करियर बनाने और परिवार नियोजन के फैसले स्वयं ले रही हैं. साथ ही बच्चों की परवरिश में आने वाली लागत लगातार बढ़ रही है. इसके अलावा चीन की आबादी भी तेजी से बूढ़ी हो रही है. चीन में गिरती जन्मदर के क्या हैं प्रभाव? अब सवाल ये उठता है कि चीन अपनी घटती जनसंख्या से परेशान क्यों हो रहा है? तो बता दें कि कम जन्मदर से श्रम शक्ति कम होगी, जो आर्थिक विकास को प्रभावित करेगी. इसके अलावा बुजुर्गों की संख्या बढ़ने से सामाजिक सुरक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ेगा. साथ ही कम युवाओं के कारण सैन्य शक्ति कमजोर हो सकती है. भारत में जन्म दर की क्या है स्थिति? भारत में भी पिछले समय के मुकाबले जन्म दर घटी है. अब हमारे देश में दंपत्ति एक या दो बच्चों को ही जन्म देने पर जोर दे रहे हैं. हालांकि चीन के मुकाबले भारत में ये समस्या फिलहाल कम है. वहीं कई ऐसे देश हैं जहां घटती जन्म दर एक बड़ी समस्या है. बता दें जापान, दक्षिण कोरिया और कई यूरोपीय देशों में भी जन्मदर में गिरावट देखी जा रही है. जिसके लिए सरकार को आगे आकर जन्म दर को बढ़ाने के प्रयास करने पड़ रहे हैं. जी हां, इन देशों में सरकार बच्चे पैदा करने के लिए तरह-तरह के ऑफर देकर लोगों को आकर्षित कर रही है.

शोध में पाया गया कि देश के 65 प्रतिशत हेल्थ प्रोफेशनल सुरक्षित तंबाकू विकल्पों के पक्ष में

नई दिल्ली देश में तंबाकू की बढ़ती महामारी के बीच 10 में से चार घर धूम्रपान की लत से परेशान हैं। शुक्रवार को आई एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि देश में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े 65 फीसदी पेशेवर जीवन बचाने के लिए तंबाकू के सुरक्षित और नए विकल्पों की मांग कर रहे हैं। साइजेन ग्लोबल इनसाइट्स एंड कंसल्टिंग के सहयोग से डॉक्टर्स अगेंस्ट एडिक्शन (डीएएडी) सर्वेक्षण की रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव का पता चला है, जिसमें 65 प्रतिशत डॉक्टर धूम्रपान की लत छुड़ाने के प्रयासों में निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी और हीट-नॉट-बर्न उत्पादों जैसे सुरक्षित विकल्पों को एकीकृत करने का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने इन विकल्पों की प्रभावकारिता पर और अधिक शोध की आवश्यकता पर जोर दिया। यह रिपोर्ट तंबाकू की लत के खिलाफ भारत की चल रही लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो सालाना 9,30,000 से अधिक मौतों का कारण बनती है।धूम्रपान से संबंधित बीमारियों के कारण हर दिन 2,500 से अधिक लोगों की जान चली जाती है। पद्मश्री पुरस्कार विजेता और सर गंगा राम अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. मोहसिन वली ने कहा, “तंबाकू की लत देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। इससे निपटने के लिए हमें तंबाकू छोड़ने के लिए वैज्ञानिक रूप से स्वीकृत विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए। स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के रूप में रोगियों को सुरक्षित विकल्पों की ओर मार्गदर्शन करना जीवन बचाने और तंबाकू के विनाशकारी प्रभाव को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।” डीएएडी के मुख्य समन्वयक डॉ. मनीष शर्मा ने कहा, “भारत का तम्बाकू संकट एक राष्ट्रीय आपातकाल है, जिसके लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। धूम्रपान छोड़ने के वैज्ञानिक रूप से सिद्ध समाधानों की तत्काल वैधानिक सिफारिशें की जानी चाहिए।” सर्वेक्षण में 300 स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों को शामिल किया गया जिनमें 70 प्रतिशत से अधिक ने लत की गंभीरता और प्रेरणा की कमी का हवाला दिया और 60 प्रतिशत ने छोड़ने के लिए प्रमुख बाधाओं के रूप में लत छोड़ने के संसाधनों की कमी की ओर इशारा किया। इससे पता चला कि अपर्याप्त अनुवर्ती देखभाल और साक्ष्य-आधारित तरीकों के खराब कार्यान्वयन के कारण भारत में धूम्रपान बंद करने में बाधा आ रही है। केवल 7.4 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवा प्रदाता नियमित रूप से लत छोड़ने के लिए सलाह देते हैं और केवल 56.4 प्रतिशत फॉलोअप कंसल्टेशन की व्यवस्था करते हैं। ये आंकड़े महत्वपूर्ण कमी को इंगित करते हैं। नई दिल्ली स्थित बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पल्मोनरी मेडिसिन के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. पवन गुप्ता ने कहा, “तम्बाकू की लत से छुटकारा पाने के लिए बहुआयामी समाधानों की आवश्यकता है। धूम्रपान छोड़ने के लिए सुरक्षित और नए वैकल्पिक उत्पादों का उदय हमारी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने का अवसर प्रदान करता है। धूम्रपान छोड़ने की इन रणनीतियों को एक जगह उपलब्ध कराकर और इसके बारे में तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म और संसाधनों के बारे में लोगों में जानकारी बढ़ाकर हम अपने उपचार के परिणामों में काफी सुधार कर सकते हैं।”

महाकुंभ 2025 में महाआयोजन के दौरान 40 करोड़ से अधिक लोगों के प्रयागराज आने का अनुमान

प्रयागराज दुनिया के सबसे बड़े आयोजन व सनातन आस्था के केंद्र महाकुंभ 2025 को सभी के लिए सुगम बनाने हेतु योगी सरकार लगातार तत्परता से कार्य कर रही है। इस महाआयोजन के दौरान 40 करोड़ से अधिक लोगों के प्रयागराज आने का अनुमान है, जिसको लेकर मेला प्रशासन और जिला प्रशासन दोनों ने क्राउड मैनेजमेंट की तैयारी की है। खासतौर पर पीक डेज (प्रमुख स्नान) के दौरान अत्यधिक भीड़ के कारण कहीं कोई अव्यवस्था न हो, इसके लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। आने और जाने के अलग-अलग रास्ते निर्धारित किए गए हैं, जबकि मोबिलिटी जारी रहे इसकी भी व्यवस्था की गई है। रास्ता जाम न हो, इसके लिए भी विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर जो योजना बनी है उसके अनुसार, श्रद्धालुओं को पीक डेज में एक से 5 किमी. और सामान्य दिनों में एक किमी. से ज्यादा पैदल यात्रा नहीं करनी होगी। आने और जाने के अलग-अलग रास्ते प्रयागराज के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि इस सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में सिर्फ प्रदेश और देश से ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया से श्रद्धालुओं का बड़ा जत्था प्रयागराज पहुंचने वाला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि किसी भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। ऐसे में क्राउड मैनेजमेंट को लेकर एक कार्ययोजना बनाई गई है, जिसके अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि महाकुंभ के दौरान सर्वाधिक श्रृद्धालु सड़क मार्ग से प्रयागराज पहुंचेंगे। प्रशासन की ओर से सभी शहर के दिशाओं में पार्किंग की व्यवस्था की गई है, जहां वाहन खड़ा कर श्रद्धालु आगे का रास्ता तय करेंगे। मेला क्षेत्र में हमने आने और जाने के अलग-अलग रास्ते निर्धारित किए हैं। आस्था की डुबकी लगाने वाले जिस रास्ते से जाएंगे, उस रास्ते से वापस नहीं लौटेंगे। उन्हें दूसरे रास्ते से होकर जाना होगा, ताकि कहीं भी श्रद्धालु आमने-सामने नहीं आ सकेंगे।   नहीं बनने दी जाएगी जाम की स्थिति मंडलायुक्त ने बताया कि ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि श्रद्धालु कहीं एक साथ रुकें नहीं, वो चलते रहें। इससे कहीं भी जाम की स्थिति नहीं बनने दी जाएगी। हमारा उद्देश्य है कि मेला क्षेत्र के साथ-साथ शहर में भी श्रद्धालुओं की मोबिलिटी को बरकरार रखा जाए ताकि स्नान और दर्शन आदि करने के बाद वो सीधे पार्किंग स्थल पहुंचें और अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करें। इसी तरह, रेलवे से भी रिक्वेस्ट की गई है कि वो समय पर और अधिक स्पेशल ट्रेनें संचालित करें, ताकि श्रद्धालु अपना समय गंवाए बिना यात्रा को बरकरार रखे। रेलवे की ओर से पॉजिटिव रिस्पॉन्स भी मिला है और उन्होंने कई अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें संचालित करने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि यदि श्रद्धालु कुछ देर विश्राम करना चाहेंगे तो उनके लिए कुछ होल्डिंग एरियाज भी चिह्नित किए गए हैं। राजसी स्नान के दिनों में लागू होगी विशेष ट्रैफिक स्कीम महाकुंभ की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाएगा। प्रमुख स्नान के दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या कई करोड़ तक होगी। ऐसा अनुमान है कि मौनी अमावस्या को सर्वाधिक 4 से 5 करोड़ श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए संगमनगरी आ सकते हैं। इसकी भी तैयारी की गई है। विजय विश्वास पंत ने बताया कि पीक डेज में आने वाले श्रद्धालुओं को एक से 5 किमी. और सामान्य दिनों में एक किमी. से ज्यादा नहीं चलना पड़ेगा। मौनी अमावस्या सबसे डेंसिटी वाला दिन होने की संभावना है। इसमें भी सुबह 3 बजे से दोपहर 12 बजे का समय बहुत क्रिटिकल होगा, जब श्रद्धालु संगम का रुख करेंगे। वहीं 12 बजे के बाद उनका लौटना शुरू हो जाएगा। हमारी कोशिश उन्हें सुगमता से संगम क्षेत्र तक पहुंचाने और फिर पार्किंग स्थल तक वापस आने की सुविधा प्रदान करने की है। संगम में पवित्र डुबकी लगाने के बाद उन्हें तुरंत वापस भेजने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि जाम की स्थिति न बने। उन्हें पार्किंग स्थल तक पहुंचाने के बाद गंतव्य की ओर रवाना किया जाएगा। हमारी विभिन्न ट्रैफिक स्कीम तैयार है, जिससे न ही श्रद्धालुओं को अव्यवस्था का सामना करना पड़ेगा और न ही मेला और शहर क्षेत्र में ट्रैफिक पैनिक की स्थिति होगी। इंदौर की बायो फ्रेंडली थैलियों का होगा उपयोग मंडलायुक्त ने बताया कि इस महाकुंभ को स्वच्छ कुंभ बनाने के मुख्यमंत्री जी के संकल्प को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि पूरे मेला क्षेत्र में किसी भी तरह की प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया जाएगा। इनके रिप्लेसमेंट ऑप्शन पर विचार किया जा रहा है। खासतौर पर इंदौर की बायो फ्रेंडली थैलियों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसको लेकर हम व्यापारियों से भी संवाद करने वाले हैं। साथ ही लोगों और अधिकारियों को प्लास्टिक की बजाए विभिन्न प्रकार के झोलों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।  

महाकुंभ 2025: प्रयागराज की दीवारें भी बताएंगी महाकुंभ का महत्व, परंपरा और समुद्र मंथन का भी दीवारों पर होगा चित्रण

प्रयागराज संगम नगरी में लगने वाला महाकुंभ 2025 बेहद ख़ास होने वाला है। शहर की दीवारें महाकुंभ के दौरान धर्म और अध्यात्म की अलख जगाते हुए देखी जाएंगी। पहली बार करीब 10 लाख स्क्वायर फीट दीवार पर इसका चित्रण किया जाना है जिसमें 5 लाख स्क्वायर फीट पर किया जा रहा है बाकी की दीवारें चिन्हित की जा रही है। आपको बता दे महाकुंभ के इतिहास चित्रण शहर की दीवारों पर दिखाई देगा, संत ऋषि ने कैसे कुंभ की परंपरा को आगे बढ़ाया, इसको भी चित्रण के जरिए दीवारों पर श्रद्धालु देख सकेंगे। करीब 18 करोड़ के बजट से शहर और महाकुंभ क्षेत्र में जानें वाली सड़कों के किनारे की दीवारों पर इसका चित्रण किया जा रहा है। जिसमें संत महत्मा और सनातन संस्कृति से जुड़े चित्रण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र होंगें। ख़ास बात यह है कि इस चित्रण में भगवान राम और श्रीकृष्ण को दर्शाया जाएगा। इसकेे साथ ही समुंद्र मंथन का भी चित्रण किया जाएगा, जिससे कुंभ के परंपरा की शुरूआत को श्रद्धालु चित्रण के जरिए समझ सकें। अपर मेला अधिकारी विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि मेला क्षेत्र और शहर के प्रमुख स्थलों की दीवारें और फ्लाईओवर भगवान राम, श्रीकृष्ण, भगवान भोलेनाथ और देवी-देवताओं का बखान करेंगी। उन्होनें बताया कि पेंट माई सिटी के तहत इस बार देवी देवताओं के अलावा गंगा अवतरण की पूरी कहानी के साथ इनमे पलने वाले जीव जंतुओं को भी चित्रण के जरिए दर्शाया जाएगा। उन्होनें बताया कि करीब 10 लाख स्क्वायर फीट दीवार पर इसका चित्रण किया जाना है। चित्रण के पहले चरण के कार्य की शुरुआत मेला प्राधिकरण कार्यालय से हो चुकी है। अपर मेला अधिकारी विवेक चतुर्वेदी के मुताबिक पेंट माई पेंट सिटी के तहत कुल आठ संस्थाओं का चयन इस पूरे कार्य के लिए किया गया है। ये संस्थाएं मुंबई, पुणे, राजस्थान समेत अन्य स्थानों की हैं। इसके साथ ही इलाहाबाद विश्विद्यालय, ट्रिपल आईटी और बीएचयू के कई बद्धिक शैक्षिक लोगों को भी जोड़ा गया है। बाहरी संस्थाओं को 20 फीसदी स्थानीय कलाकार रखने हैं, ताकि स्थानीय कलाकारों को भी रोज़गार के संसाधन पेंट माय सिटी के तहत उपलब्ध कराए जा सकें।  

रूस ने शुरू कर दी न्यूक्लियर हमले की प्रैक्टिस, ऐक्शन से थर्राई दुनिया

मॉस्को बीते दो साल से भी ज्यादा वक्त से रूस-यूक्रेन मोर्चे पर हैं। रूस इस बात पर आमादा है कि वह यूक्रेन को तबाह करके ही मानेगा, वहीं यूक्रेन है कि रूस के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं है। अब यह युद्ध सबसे कठिन दौर में प्रवेश कर गया है क्योंकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने परमाणु बलों को विशेष अभ्यास शुरू करने का आदेश दिया। यह दो हफ्तों में दूसरी बार है जब पुतिन ने ऐसा सैन्य अभ्यास शुरू किया है। पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाली नाटो गठबंधन अब भी इस बढ़ते तनाव से निपटने के तरीकों को लेकर अनिश्चित हैं। तनाव तब और बढ़ा जब अमेरिका सहित पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें उपलब्ध कराने की योजना बनाई ताकि वह रूस के अंदर गहरे क्षेत्र तक निशाना बना सके। रूस ने पश्चिम को साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर यूक्रेन ने पश्चिमी समर्थन के साथ इस तरह का कदम उठाया, तो वह अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने पर विचार करेगा। क्रेमलिन ने अपनी परमाणु नीति को अपडेट किया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि पुतिन की स्वीकृति से यह नीति गैर-परमाणु देशों के खिलाफ भी लागू हो सकती है। परमाणु अभ्यास की शुरुआत करते हुए पुतिन ने कहा, “हम परमाणु हथियारों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए अधिकारियों की कार्रवाई का अभ्यास करेंगे और इसके अंतर्गत बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों का जरूरी इस्तेमाल करेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों का उपयोग अत्यंत असाधारण स्थिति में ही किया जाएगा, लेकिन इन्हें हमेशा तत्परता में रखना आवश्यक है। पुतिन ने यह भी स्पष्ट किया, “हम एक नई हथियार दौड़ में शामिल नहीं होना चाहते, लेकिन हम अपनी परमाणु ताकत को उचित स्तर पर बनाए रखेंगे।” नाटो ने रूस पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें उत्तर कोरिया द्वारा रूस को यूक्रेन में लड़ने के लिए सैनिक भेजने का मुद्दा शामिल है। पेंटागन ने कहा है कि उत्तर कोरिया ने रूस को कम से कम 10,000 सैनिक भेजे हैं, जबकि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का दावा है कि यह संख्या 12,000 से अधिक हो सकती है। पेंटागन की डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी सबरीना सिंह ने कहा, “हमें विश्वास है कि डीपीआरके ने कुल मिलाकर लगभग 10,000 सैनिक रूस के पूर्वी क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए भेजे हैं। इनमें से कुछ सैनिक यूक्रेन के करीब पहुंच गए हैं और हमें चिंता है कि रूस इन सैनिकों का उपयोग यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में करेगा।” पुतिन ने अपने देश की रक्षा के मुद्दे पर स्पष्ट करते हुए कहा कि यह केवल रूस का आंतरिक मामला है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यूक्रेन नाटो में शामिल होने का निर्णय लेता है, तो रूस भी अपनी सुरक्षा को लेकर जो जरूरी होगा, वह करेगा। रूसी सेना ने अपने हालिया अभ्यास के दौरान टीवर क्षेत्र में भी प्रशिक्षण किया, जो मास्को के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इस अभ्यास में यार्स इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) जैसे उपकरणों का भी इस्तेमाल किया गया, जो अमेरिका के हर कोने तक प्रहार करने में सक्षम हैं। रूस और अमेरिका दुनिया के कुल परमाणु हथियारों के 88% का नियंत्रण रखते हैं। पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पहले भी यह चेतावनी दी थी कि यदि रूस और नाटो में सीधा टकराव हुआ, तो यह तीसरे विश्व युद्ध का कारण बन सकता है। रिपब्लिकन राष्ट्रपति उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प ने भी परमाणु युद्ध के जोखिम को लेकर चेतावनी दी है। पुतिन ने कहा, “बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों और नए बाहरी खतरों के बीच, हमारे पास तैयार और आधुनिक रणनीतिक बलों का होना महत्वपूर्ण है।” उन्होंने बताया कि रूस नए स्थिर और मोबाइल-आधारित मिसाइल सिस्टम की ओर बढ़ रहा है, जिनमें प्रक्षेपण की तैयारी का समय कम है और ये मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी मात दे सकते हैं। वहीं पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि अगर उत्तर कोरिया रूस का समर्थन करने के लिए सैनिक भेजता है, तो अमेरिका यूक्रेन के हथियारों के उपयोग पर कोई नई सीमाएं नहीं लगाएगा।

वसीयत लिखते समय न करें ये गलतियां, वरना आ सकती हैं दिक्कतें

उम्र के एक पड़ाव पर आने के बाद अक्सर लोगों को अपनी संपत्ति का वारिश ढूंढना पड़ता है। हालांकि, अपनी संपत्ति का मालिकाना हक किसी दूसरे के हाथों में सौंपने के लिए व्यक्ति को वसीयत लिखनी जरूरी होती है। वसीयत एक कानूनी साक्ष्य होता है जो इस बात की पुष्टि करता है कि आपने अपनी संपत्ति का उत्तराधिकार किसे चुना है? अगर वसीयत न लिखी जाए तो उत्तराधिकारियों के बीच संपत्ति को लेकर विवाद हो सकता है। हालांकि, वसीयत लिखते समय आपको कई जरूरी बातों का ध्यान रखना होता है। अगर आप इन बातों का ध्यान नहीं रखते हैं तो भविष्य में कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं। इसी कड़ी में आज इस खबर के माध्यम से हम आपको उन जरूरी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका विशेष ध्यान वसीयत लिखते समय रखना चाहिए। आइए जानते हैं वसीयत लिखते समय आपको अपने चल और अचल संपत्ति की जानकारी विस्तार ढंग से देनी चाहिए। इसके अलावा आपको अपने बैंक खाते, प्रॉपर्टी की डिटेल्स, लॉकर नंबर आदि जानकारी वसीयत में ठीक से देनी चाहिए। इससे कंफ्यूजन पैदा नहीं होगी। वसीयत बनाते समय आपको एक काबिल एग्जीक्यूटर की जरूरत होती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आपकी वसीयत ठीक तरह से बंटी है। एग्जीक्यूटर को वसीयतकर्ता द्वारा नियुक्त किया जाता है। वसीयतकर्ता की मृत्यु के बाद एग्जीक्यूटर उसकी जगह लेता है। इस दौरान एग्जीक्यूटर यह सुनिश्चित करता है कि संपत्ति को वसीयतकर्ता की अंतिम इच्छा के अनुसार इम्प्लीमेंट किया जाए। वसीयत लिखते समय आपको हर पेज के नीचे अपने हस्ताक्षर करने चाहिए। हस्ताक्षर करने के बाद उसके नीचे ब्रैकेट में अपना नाम जरूर लिखें। आप जिस भाषा में हस्ताक्षर कर रहे हैं उसी भाषा में आपको साफ और स्पष्ट ढंग से अपना नाम नीचे लिखना चाहिए।

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