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पुलिस के वाणिज्यिक संस्थान जैसे पेट्रोल पंप, गैस रिफिलिंग केंद्र, सुपर बाजार, कैंटीन आदि में नकद होगा बंद

भोपाल पुलिस के वाणिज्यिक संस्थान जैसे पेट्रोल पंप, गैस रिफिलिंग केंद्र, सुपर बाजार, कैंटीन आदि में नकद लेन-देन एक जनवरी 2025 से बंद हो जाएगा। 15 नवंबर से यह व्यवस्था आंशिक रूप से लागू की जाएगी। इसमें ग्राहकों से नकद में भुगतान करने के बजाय कैशलेस भुगतान के लिए कहा जाएगा। यदि वह नगद राशि देते हैं तो केंद्र संचालक को ग्राहक का नाम और मोबाइल नंबर लिखकर रखना होगा, जिससे जरूरत पड़ने पर जांच में यह पता किया जा सके कि उसने भुगतान किया था या नहीं। यह है वजह पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि एक पेट्रोल पंप में वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। लेनदेन में पारदर्शिता रहे, इसलिए कैशलेस भुगतान को अनिवार्य कर दिया गया है। संभवत: मध्य प्रदेश पुलिस पहला सरकारी विभाग है, जिसमें नकद भुगतान पूरी तरह से बंद किया जा रहा है। अभी बड़े शापिंग मॉल में ऐसी अनिवार्यता नहीं है। अधिकतर सरकारी विभागों में बिल भुगतान भी नगद और कैशलेस दोनों तरह से हो रहा है। डीजीपी कांफ्रेंस में उठा था मुद्दा पुलिस मुख्यालय के एडीजी कल्याण एवं लेखा अनिल कुमार ने बताया कि इस संबंध में इंदौर और भोपाल के पुलिस आयुक्त, सभी पुलिस अधीक्षक और पुलिस इकाइयों के प्रमुखों को आदेश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि डीजीपी कांफ्रेंस में यह विषय आया था। दो वर्ष से यह व्यवस्था लागू करने की कोशिश चल रही थी। कैशलेस भुगतान से एक-एक पैसे का हिसाब रहेगा, जिससे गड़बड़ी की आशंका नहीं रहेगी।

नए साल के जनवरी माह में नई दिल्ली से सीधी ट्रेन श्रीनगर-बारामूला तक केंद्र सरकार जल्द शुरू करेगी

जम्मू नव वर्ष पर कश्मीर घाटी के लोगों को रेलवे बड़ा तोहफा देने की तैयारियों में जुटी है। सूत्रों के अनुसार नए साल के जनवरी माह में नई दिल्ली से सीधी ट्रेन श्रीनगर-बारामूला तक शुरू करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य पूरा किया जा रहा है। यानी अब सालभर कोई भी मौसम हो कश्मीर घाटी रेल संपर्क से देश के अन्य राज्यों से जुड़ी रहेगी। बता दें कि 272 किलोमीटर लंबी ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना पर करीब शत-प्रतिशत काम पूर्ण किए जा चुके हैं। जानकारी के अनुसार इस रेल लिंक परियोजना पर कुछ ही स्थानों पर तकनीकी कार्य 19 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर जारी हैं जोकि रियासी व कटड़ा के बीच का है। जानकारी के अनुसार इस साल के अंत तक सभी कार्य पूरे कर लेने की पूरी-पूरी संभावना है। इसके बाद जनवरी माह में कमिश्नर रेलवे सेफ्टी द्वारा निरीक्षण के बाद सीधी ट्रेन नई दिल्ली से बारामूला तक शुरू हो सकती है। रेलवे ट्रैक पर कई दुर्गम सुरंगें, पुल व विहंगम दृश्य यात्रियों व पर्यटकों को कुदरती नजारों से निहाल कर देंगे। जबकि ट्रेन जब श्री माता वैष्णो देवी के त्रिकुटा पर्वत के नीचे से गुजरेगी तो वह अलग ही आस्था और मां के चरणों के नीचे से गुजरने का अनुभव करवाएगी। वहीं यात्रियों और पर्यटकों को विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे पुल चिनाब रेल ब्रिज, अंजी ब्रिज भी इसी रेलवे ट्रैक पर देखने का सुनहरा अवसर मिलेगा।

अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की कमला हैरिस और रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप के बीच कांटे की टक्कर, मतदान कल

वाशिंगटन अमेरिका अपने नए राष्ट्रपति को चुनने के लिए फिर तैयार है। वहां 5 नवंबर को वोटिंग है। कई अरबपतियों कवर स्टोरी ने वहां बेहिसाब पैसे खर्च किए हैं। आखिर अरबपतियों के लिए भी ये चुनाव इतने अहम क्यों हैं?  अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की कमला हैरिस और रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप  के बीच कांटे की टक्कर है। चुनाव में  अरबपतियों के बीच भी कड़ा मुकाबला चल रहा  है क्योकि इन्होंने अपने-अपने पसंदीदाप्रत्याशियों पर करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं। इन प्रत्याशियों के बहाने इन अरबपतियों का भी काफी कुछ दांव पर लगा हुआ है। दोनों मुख्य उम्मीदवारों के लिए उनके सहयोगी समूहों ने अक्टूबर के मध्य तक ही 3.8 अरब डॉलर (करीब 32 हजार करोड़ रुपए) से अधिक जुटा लिए थे।   एक विश्लेषण के अनुसार सिर्फ करोड़पतियों ने ही इस चुनाव में 69.5 करोड़ डॉलर (लगभग 5,800 करोड़ रुपए) खर्च किए हैं, जो कुल चंदे का 18 फीसदी हिस्सा है। इधर, चुनावी फंडिंग की जानकारी देने वाली साइट ओपनसीक्रेट्स ने दावा किया है कि 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव इतिहास के सबसे महंगे चुनाव होंगे। इस चुनाव पर कुल 15.9 अरब डॉलर (1.3 लाख करोड़ रुपए) खर्च हो सकते हैं। पिछले चुनाव में कुल खर्च 14.4 अरब डॉलर (1.2 लाख करोड़ रुपए) ही था।   उद्योगपति ट्रम्प के साथ क्यों? ये हैं तीन वजह    टैक्स में छूट  का लालच  अमेरिकी उद्योगपति आखिर डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन क्यों कर रहे हैं, इसका सीधा जवाब है टैक्स में कटौती। ट्रम्प ने कहा कि वे अधिकतम कॉर्पोरेट टैक्स को वर्तमान 21% से घटाकर 15% कर देंगे। जब ट्रम्प व्हाइट हाउस पहुंचे थे, तब अमेरिका में ये दर 35% थी। वहीं डेमोक्रेट्स इसे 28% तक बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। ट्रम्प वेल्थ टैक्स को कम करने का भी समर्थन करते हैं। वहीं बाइडेन 10 करोड़ डॉलर से अधिक की संपत्ति वाले परिवारों पर वेल्थ टैक्स लगाने की मांग कर रहे हैं।   सरकारी फैसलों में दखल की अपेक्षा ट्रम्प का समर्थन करने से कई अमेरिकी उद्योगपतियों को व्यक्तिगत फायदा है। उदाहरण के लिए इलॉन मस्क को लेते हैं। मस्क की कंपनी स्पेसएक्स और टेस्ला अमेरिकी सरकार पर काफी निर्भर हैं। स्पेसएक्स पेंटागन के सबसे बड़े पार्टनर्स में से एक है। टेस्ला को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है। मस्क की दोनों कंपनियों को एक दशक में 15.4 अरब डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं। यानी उनकी सफलता में सरकार का भी योगदान है। मस्क को लगता है कि ट्रम्प इसमें आगे भी काफी मददगार साबित हो सकते हैं। ऐसे में मस्क का ट्रम्प समर्थन उनके निजी फायदे से काफी हद तक जुड़ा हुआ है। टेक कंपनियों पर बाइडेन की सख्ती कई अरबपति बाइडन हैरिस प्रशासन की कार्रवाइयों से भी नाराज हैं। उदाहरण के लिए इस साल बाइडन प्रशासन ने दिग्गज टेक कंपनी एपल के खिलाफ उसके आईफोन एकाधिकार के दुरुपयोग के लिए कानूनी कार्रवाई तेज की थी। इसके अलावा गूगल मेटा के खिलाफ भी बाइडन प्रशासन ने ऐसे ही कड़े तेवर दिखाए थे। बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ डेमोक्रेट्स को इस वजह से भी पसंद नहीं कर रहे, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी नीतियों से व्यापार को नुकसान होगा। कारोबारियों का कमला के प्रति रुझान क्यों? 1. आर्थिक नीतियों में स्थिरता अमेरिका के कई अरबपति डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रत्याशी कमला हैरिस का समर्थन कर रहे हैं और इसका एक बड़ा कारण यह है कि उनकी आर्थिक नीतियां अनेक व्यावसायिक हितों के साथ मेल खाती हैं। एक तो उन्हें डेमोक्रेट्स की नीतियों में स्थिरता नजर आती है। फिर हैरिस दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों चिप मैन्युफैक्चरिंग और रियल एस्टेट में अधिक निवेश किए जाने की पैरवी करती हैं। कई उद्योगपति इन दोनों क्षेत्रों में निवेश में लगातार बढ़ोतरी कर रहे हैं, जिससे उन्हें फायदे की उम्मीद है। 2. निजी दुश्मनी निभाते हैं ट्रम्प डोनाल्ड ट्रम्प की गिनती निजी दुश्मनी निभाने वालों में होती है। ट्रम्प के कार्यकाल में कई उद्योगपति निशाने पर थे। उदाहरण के तौर पर जब ट्रम्प टीवी चैनल सीएनएन के कवरेज से नाराज हुए थे, तब कहते हैं कि उन्होंने पिछले दरवाजें से एटी एंड एटी और टाइम वार्नर (सीएनएन की पैरेंट कंपनी) के बीच विलय को रोकने का प्रयास किया था। इससे दोनों कंपनियों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। इसी तरह अमेजॉन पर भी ट्रम्प ने गुस्सा निकाला था। इस वजह से पेंटागन के साथ हुआ 10 अरब डॉलर का क्लाउड- कंप्यूटिंग कांट्रैक्ट उसके हाथ से चला गया था। 3. हैरिस सामाजिक सुरक्षा में बेहतर  कई उद्योपति कमला हैरिस का समर्थन करते हैं और इसकी वजह यूबीएस सर्वे से समझी जा सकती है। इसमें कम से कम 10 लाख डॉलर की संपत्ति वाले अमीरों को शामिल किया गया था। सर्वे में सामने आया कि 57% हैरिस के लिए और 43% ट्रम्प के लिए वोट देने की योजना बना रहे हैं। सर्वे में 971 अमीरों को शामिल किया गया था। ये लोग हैरिस को सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के मोर्चे पर बेहतर मानते हैं।

अब CJI चंद्रचूड़ के पास सुप्रीम कोर्ट में महज 5 कार्य दिवस शेष, रिटायर होने से पहले ये 5 बड़े फैसले सुनाएंगे

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ 10 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। उनके पास सुप्रीम कोर्ट में महज 5 कार्य दिवस बचा है। इन कार्य दिवसों में उन्हें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला देना है, जिनमें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने से जुड़ा विवाद, मदरसा कानून की वैधता, संपत्ति के पुनर्वितरण सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। रिटायर होने से पहले मुख्य न्यायाधीश जिन मुद्दों पर फैसला सुनाएंगे, उनका न सिर्फ राजनीति बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर भी प्रभाव पड़ेगा। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ 10 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय मामला मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली 7 जजों की संविधान पीठ ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा देने से संबंधित मुद्दों पर 1 फरवरी, 2024 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि एएमयू को संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है या नहीं। भर्ती प्रक्रिया के बाद नियमों में बदलाव का मामला सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि क्या भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों और शर्तों में बदलाव हो सकता है? इस मामले में संविधान पीठ ने 23 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह कानूनी सवाल राजस्थान हाईकोर्ट में अनुवादकों की नियुक्ति से उठा था। एलएमवी लाइसेंस धारक मामला सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों के संविधान पीठ इस कानूनी सवाल पर अपना फैसला सुनाएगी कि क्या लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) लाइसेंस धारक चालक 7,500 किलोग्राम तक के वजन वाले परिवहन वाहन चलाने का अधिकार है या नहीं है। इस मुद्दे पर सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने 21 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है। मदरसा कानून की वैधता का मामला मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली 3 जजों की पीठ ने अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश मदरसा अधिनियम की वैधता से जुड़े मसले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा है, जिसके तहत यूपी मदरसा अधिनियम को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया गया था। बच्चों को सरकारी स्कूलों में समायोजित करने का आदेश दिया था। संपत्ति के वितरण का मामला मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली 9 जजों की संविधान पीठ इस संवैधानिक सवाल पर फैसला सुनाएगी कि क्या सरकार को निजी संपत्ति अधिग्रहित कर उनका पुनर्वितरण करने का अधिकार है या नहीं। संविधान पीठ अनुच्छेद 39(बी) के प्रावधानों को लेकर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस अनुच्छेद में जनहित के लिए संपत्ति के पुनर्वितरण से संबंधित है।

बांधवगढ़ में हाथियों की मौत: मुख्यमंत्री ने लिया एक्शन, फील्ड डायरेक्टर-प्रभारी एसीएफ निलंबित

Death of elephants in Bandhavgarh: Chief Minister took action, field director-in-charge ACF suspended बांधवगढ़ में हुई हाथियों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक्शन में हैं. सीएम ने बैठक आयोजित की, जिसमें राज्य स्तरीय ‘हाथी टास्क फोर्स’ गठित करने का निर्णय लिया गया. साथ ही सीएम ने बांधवगढ़ फील्ड डायरेक्टर और प्रभारी एसीएफ को निलंबित करने के निर्देश दिए. सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में उमरिया जिले के वन क्षेत्र में पिछले दिनों 10 हाथियों की अलग-अलग दिन हुई मृत्यु की घटना दुखद एवं दर्दनाक है, जिसे राज्य शासन ने गंभीरता से लिया है. वन राज्य मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों के दल ने क्षेत्र का भ्रमण किया है. प्रारंभिक रिपोर्ट में कोई कीटनाशक नहीं पाया गया है. पोस्ट मार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आना शेष है. हाथियों के बड़े दल के रूप में आने की घटना गत दो तीन वर्ष में एक नया अनुभव भी है. उमरिया और सीधी जिले में बड़ी संख्या में हाथियों की मौजूदगी दिख रही है. ऐसे में फील्ड डायरेक्टर एवं अन्य अधिकारियों को सतर्क और सजग रहने की जरूरत है. अवकाश पर जाना पड़ा महंगा सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हाथियों की मृत्यु की इतनी बड़ी घटना के समय फील्ड डायरेक्टर का अवकाश से वापस न आना और पूर्व में हाथियों के दल के संदर्भ में जो आवश्यक चिंता की जानी चाहिए, वह नहीं की गई. इस लापरवाही के लिए फील्ड डायरेक्टर गौरव चौधरी को सस्पेंड किया गया. साथ ही प्रभारी एसीएफ फतेह सिंह निनामा को भी निलंबित किया गया. केरल-कर्नाटक-असम जाकर करे अध्ययन सीएम ने कहा कि बांधवगढ़ क्षेत्र एवं अन्य वन क्षेत्रों में हाथियों की रहने की अनुकूल और आकर्षक स्थिति हे. वन क्षेत्रों का प्रबंधन उत्तम होने से हाथियों के दल जो छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों से आया करते थे और वापस चले जाते थे वह अब वापस नहीं जा रहे हैं. यहां बड़े पैमाने पर हाथियों द्वारा डेरा डालने की स्थिति देखी जा रही है. यह मध्यप्रदेश की वन विभाग की गतिविधियों का हिस्सा बन गए हैं. ऐसे में हाथियों की आवाजाही को देखते हुए स्वाभाविक रूप से स्थाई प्रबंधन के लिए शासन के स्तर पर हाथी टास्क फोर्स बनाने का निर्णय लिया जा रहा है. हाथियों को अन्य वन्य प्राणियों के साथ किस तरह रहवास की सावधानियां रखना चाहिए, इसके लिए योजना बनाई जा रही है. इसमें कर्नाटक, केरल और असम राज्यों की बेस्ट प्रेक्टिसेस को शामिल किया जाएगा. इन राज्यों में बड़ी संख्या में हाथी रहते हैं. इन राज्यों में मध्यप्रदेश के अधिकारियों को भेजा जाएगा, जिससे सहअस्तित्व की भावना के आधार पर हाथियों के साथ बफर एरिया, कोर एरिया में बाकी का जन जीवन प्रभावित न हो, इसका अध्ययन किया जाएगा. हाथियों की सुरक्षा को खतरा न हो. इस पर हमने गंभीरता से विचार किया है.

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