LATEST NEWS

छठ त्योहार पर सूर्य देवता और छठी मईया की आराधना की जाती है

नई दिल्ली  यूपी-बिहार में मनाया जाने वाला छठ पूजा एक महत्वपूर्ण त्योहार है। छठ में सूर्य देवता और छठी मईया की आराधना की जाती है। यह पूजा चार दिनों तक चलती है और इसमें श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य देते हैं। आइए आज हम आपको छठ पूजा में सूर्य को अर्घ्य देने की प्रथा के पीछे की पौराणिक कहानी के बारे में बताते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार सूर्य देवता जीवन और ऊर्जा के स्रोत माने जाते हैं। उनकी आराधना से मनुष्य को स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि सूर्य देवता ने अपने तेज से संसार को प्रकाश दिया और अंधकार को मिटाया। इसलिए, सूर्य को अर्घ्य देकर श्रद्धालु अपनी इच्छाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। छठी मईया को गौरी, उषा या छठ देवी भी कहा जाता है और वह सूर्य देवता की बहन मानी जाती हैं। उनका विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों में बहुत सम्मान है। छठ पूजा के दौरान, श्रद्धालु विशेष रूप से छठी मईया की आराधना करते हैं, जिनसे उन्हें संतान सुख और परिवार में सुख-शांति की प्राप्ति की उम्मीद होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जो लोग सच्चे मन से छठी मईया की पूजा करते हैं, उनको परिवार में कभी भी दुख और दरिद्रता का सामना नहीं करना पड़ता। छठी मईया के प्रति श्रद्धा और भक्ति से मनुष्य के जीवन में सुख और समृद्धि का आगमन होता है। छठ पूजा का आयोजन मुख्य रूप से कार्तिक महीने में, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर सप्तमी तक किया जाता है। इस पूजा में विशेष रूप से उपवास किया जाता है। इस अवसर पर लोग नदी, तालाब या किसी जल स्रोत के किनारे जाकर पूजा करते हैं। छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, इस दिन श्रद्धालु स्नान करके विशेष पकवान बनाते हैं, जिसमें चावल, चना का दाल और कद्दू की सब्जी शामिल है। दूसरे दिन, जिसे ‘खरना’ कहा जाता है, उपवास रखकर शाम को खीर का प्रसाद बनाया जाता है। इसी प्रसाद को खाने के बाद शुरू होता है निर्जला व्रत। तीसरे दिन, श्रद्धालु नदियों के किनारे जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और फिर चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात परिवार के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं। बिहारी समाज के अनुसार छठ पूजा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा की एक अमूल्य धरोहर है। बिहार के लोग छठ पूजा को सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव के रूप में मनाते हैं, जो भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाता है।    

भोपाल: साइबर ठगों ने पुलिस कमिश्नर के नाम से फर्जी अकाउंट बनाकर ठगी की कोशिश, क्राइम ब्रांच को सौंपी गई जांच

Bhopal: Cyber ​​​​thugs tried to cheat by creating a fake account in the name of Police Commissioner, investigation handed over to Crime Branch. भोपाल: राजधानी में साइबर ठगों ने हद ही पार कर दी। भोपाल के पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा के नाम से फर्जी फेसबुक अकाउंट बनाकर साइबर ठगों ने लोगों से पैसे ऐंठने की कोशिश की। ठग फर्जी अकाउंट से लोगों को रिक्वेस्ट भेज रहे हैं और एक्सेप्ट होने पर पैसे मांगने लगते हैं। खुद पुलिस कमिश्नर तक पहुंचा मामलामामला अब खुद पुलिस कमिश्नर तक पहुंच गया है। मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। यह पहली बार नहीं है जब पुलिस कमिश्नर मिश्रा को निशाना बनाया गया है। जब वह इंदौर के पुलिस कमिश्नर थे, तब भी उनके नाम से फर्जी अकाउंट बनाया गया था। तब इंदौर क्राइम ब्रांच ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस अकाउंट को बंद करवा दिया था। क्या करते हैं ठगठग लोगों से उनका मोबाइल नंबर मांगते हैं और कहते हैं कि उनका कोई परिचित उन्हें कॉल करेगा। फिर वो व्हाट्सएप पर सस्ते फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने का झांसा देकर ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं। क्राइम ब्रांच देख रही मामलापुलिस कमिश्नर मिश्रा ने कहा, ‘यह मामला मेरे संज्ञान में आ गया है। क्राइम ब्रांच आईपी एड्रेस के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।’ लोगों की बढ़ी चिंतासाइबर ठग अब पुलिस अधिकारियों को भी निशाना बनाने से नहीं चूकते। पहले जहां आम लोगों के फर्जी अकाउंट बनाकर ठगी की जाती थी, वहीं अब ये अपराधी पुलिस अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करके लोगों को चूना लगा रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना निजी नंबर या कोई भी जानकारी न दें। ऑनलाइन खरीदारी करते समय भी सावधानी बरतें और किसी भी अनजान वेबसाइट या लिंक पर अपनी बैंकिंग जानकारी शेयर न करें।

‘ अगर हिंदू जाति में बंटेंगे तो बांग्लादेश जैसा कटेंगे’, वाराणसी में BJP युवा मोर्चा ने लगाए पोस्टर तो मचा हंगामा

वाराणसी  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान “बंटेंगे तो कटेंगे” पर लगातार प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के मुख्य द्वार के बाहर भारतीय जनता युवा मोर्चा ने एक विशाल बैनर लगाया है। इस बैनर पर लिखा है, “हिंदू जाति में बटेंगे तो बांग्लादेश जैसा कटेंगे… फैसला आपका।” बैनर लगाने वाले ने अपनी तस्वीर और नाम भी इसमें शामिल किया है। विवेक सिंह भाजपा युवा मोर्चा के वाराणसी महानगर अध्यक्ष हैं, उन्होंने इस बैनर के माध्यम से यह संदेश दिया है कि अगर हिंदू लोग जातियों में बंटते हैं, तो इसका परिणाम देश के लिए गंभीर हो सकता है। विवेक सिंह ने बैनर के माध्यम से कहा कि हमें एकजुट रहना होगा, अन्यथा हम अपने ही देश में बांग्लादेश जैसे हालात का सामना कर सकते हैं। विवेक सिंह ने कहा कि इस बैनर के माध्यम से वह यह संदेश देना चाहते हैं कि एकजुटता में ही शक्ति है। उनका मानना है कि अगर हिंदू समाज जातियों में विभाजित होता है, तो यह देश के लिए नुकसानदायक साबित होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा, “हमें सभी हिंदुओं को एकजुट करना चाहिए, ताकि हम किसी भी प्रकार की विभाजनकारी राजनीति से बच सकें।” इस बैनर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ विवेक सिंह की तस्वीर भी लगाई गई है। बता दें कि योगी आदित्यनाथ के “बंटेंगे तो कटेंगे” वाले बयान के बाद से इस मुद्दे पर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी राज्यों और उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनावों के मद्देनजर इस नारे के विभिन्न वर्जन दिखाई और सुनाई दे रहे हैं। भाजपा के इस बैनर ने न केवल स्थानीय राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि यह मुद्दा देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के 9 सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। वहीं, महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसको लेकर सियासी हलचल बढ़ चुकी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से जमकर पोस्टर वार किए जा रहे हैं।    

केंद्रीय मंत्री गडकरी, आस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया सहित कई देशों के विशेषज्ञ भारतीय सड़क कांग्रेस अधिवेशन में लेंगे हिस्‍सा

रायपुर राजधानी के साइंस कॉलेज मैदान में 8 से 11 नवंबर तक होने वाले भारतीय सड़क कांग्रेस अधिवेशन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस महत्वपूर्ण अधिवेशन का उद्घाटन सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी करेंगे। यह अधिवेशन सड़क निर्माण के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों, नीतियों और प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसमें भारत के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी होगी। अधिवेशन में श्रीलंका, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और सिंगापुर के निर्माण विशेषज्ञ और वैज्ञानिक शामिल होंगे। इन विशेषज्ञों के अनुभव और ज्ञान का लाभ उठाकर, भारत में सड़क निर्माण की चुनौतियों और अवसरों पर गहन चर्चा की जाएगी। चार दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में, यह तय किया जाएगा कि विभिन्न राज्यों में किस प्रकार की तकनीकें अपनाई जाएं, जिससे सड़कें अधिक मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित बनाई जा सकें। अधिवेशन के लिए लगाए जाएंगे 129 स्टाल साइंस कॉलेज मैदान में अधिवेशन के लिए 129 स्टाल लगाए जाएंगे। इन स्टालों के लिए विशेष रूप से बड़े डोम बनाए जा रहे हैं, जहां सड़क, पाथ-वे, और डिवाइडर के डिजाइन के साथ विभिन्न उपकरण प्रदर्शित किए जाएंगे। इन प्रदर्शनों का उद्देश्य लोगों को सड़क निर्माण की नवीनतम तकनीकों और प्रगति से अवगत कराना है। उपस्थित लोग इन स्टालों पर जाकर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और सड़क निर्माण के क्षेत्र में हो रहे बदलावों का अनुभव कर सकेंगे। अधिवेशन के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा। इस अधिवेशन का आयोजन प्रदेश में पहली बार हो रहा है, जिसके लिए तैयारियां तेजी से जारी हैं। स्थानीय प्रशासन और आयोजकों ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए हैं। इस अवसर पर न केवल सड़क निर्माण से संबंधित जानकारियों का आदान-प्रदान होगा, बल्कि यह अवसर विभिन्न देशों के विशेषज्ञों के साथ विचारों का साझा करने का भी होगा। कुल मिलाकर, भारतीय सड़क कांग्रेस अधिवेशन सड़क निर्माण के क्षेत्र में एक नई दिशा देने का प्रयास करेगा, जो कि न केवल भारत की सड़क संरचना को मजबूत बनाएगा, बल्कि भविष्य में सड़क सुरक्षा और गुणवत्ता को भी सुनिश्चित करेगा। यह अधिवेशन सभी भागीदारों के लिए एक मंच प्रदान करेगा, जहां वे अपने विचार साझा कर सकेंगे और नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

कैलाश विजयवर्गीय : हाथ लग गए तो उल्टा लटका कर शहर में घुमाऊंगा… इंदौर में दंगा फैलाने वालों को मंत्री विजयवर्गीय की चेतावनी

Kailash Vijayvargiya: If I get hold of him, I will hang him upside down and roam around the city… Minister Vijayvargiya’s warning to those who spread riots in Indore. इंदौर: शहर के छत्रीपुरा थाना क्षेत्र में हुए विवाद और पथराव को लेकर मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। वे सोमवार को छत्रीपुरा में पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे। क्या बोले मंत्री विजयवर्गीयइस दौरान विजयवर्गीय ने मीडिया से कहा की ‘छत्रीपुरा मामले में सही चेहरों की पहचान नहीं हुई तो फिर मैं भी देखूंगा कि इंदौर में कौन अशांति फैलाता है। ऐसे लोग मेरे हाथ लग गए तो मैं उन्हें उल्टा लटकाकर शहर में घुमाऊंगा। इस शहर में कोई अशांति नहीं फैला सकता। इंदौर का किसी भी तरह से कोई नुकसान करेगा तो हम पीछे नहीं हटेंगे। इस शहर के लिए हम कुछ भी कर सकते हैं। मेरा खुला संदेश है…इंदौर में जो दंगा फैलाएगा, वो इंदौर में नहीं रह पाएगा।’ अब तक 8 आरोपी हो चुके है गिरफ्तारइंदौर में दिवाली के दूसरे दिन दो पक्षों में पटाखा फोड़ने को लेकर विवाद हुआ था। विवाद के दौरान कुछ उपद्रवियों ने पथराव, तोड़फोड और आगजनी की घटना को अंजाम दिया था। पूरे मामले में पुलिस ने पहले पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया था। महिला समेत कई अभी भी फरारसोमवार को फरार आरोपी अनीस, नानू, राजा उर्फ अमान को गिरफ्तार कर लिया है। इन्हें इंदौर के अलग-अलग स्थान से पकड़ा गया है। यह घटना के बाद से ही फरार चल रहे थे और लगातार अपना लोकेशन बदल रहे थे। अभी भी महिला सहित कई आरोपी फरार हैं, जिनकी पुलिस तलाश कर रही है।

विधायक निर्मला सप्रे के विधानसभा की सदस्यता निरस्त कराने कांग्रेस हाईकोर्ट की शरण में जाएगी

भोपाल  मध्य प्रदेश के बीना से विधायक निर्मला सप्रे के विधानसभा की सदस्यता निरस्त करने की मांग लगातार कांग्रेस कर रही है.अब कांग्रेस पार्टी ने इसके लिए हाईकोर्ट की शरण लेने का निर्णय लिया है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिघार ने इसकी जानकारी दी है. कार्रवाई का रास्ता खुला विधायक की विधानसभा सदस्यता निरस्त करने की मांग की जा रही है.नेता प्रतिपक्ष की याचिका के 90 दिन पूरे होने के बाद कांग्रेस के पास कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला गया है.नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष की  सदस्यता रद्द करने की याचिका लगाई थी . इतने दिन बीत जाने के बाद भी अब तक किसी तरह का फैसला नहीं हुआ है.ऐसे में अब कांग्रेस कोर्ट का रूख करेगी .सबूत के साथ कोर्ट में कांग्रेस अपना पक्ष रखेगी. पार्टी की गतिविधियों में लिप्त है उमंग सिघार ने कहा कि मुझे नहीं लगता है कि भाजपा इस बारे में कोई निर्णय लेना चाहती है, ऐसे में हम इस मामले में हाईकोर्ट जा रहे हैं.वे भाजपा की बैठकों में जा रही हैं. बयानबाजी कर रही हैं. ऐसे कई तथ्य हैं, जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में पूरी तरह से लिप्त हैं. ऐसे में उन्हें बर्खास्त करने की मांग को लेकर कोर्ट में जा रहे हैं. दल बदल कानून के तहत कांग्रेस इस्तीफे पर जोर दे रही है. बता दें कि निर्मला सप्रे बीजेपी की बैठक में भी नजर आई थी. हालांकि निर्मला ने एक बयान में कहा था कि न तो मैंने कांग्रेस छोड़ी है और न ही बीजेपी ज्वाइन की है.

नगरीय निकायों का बकाया बिजली बिल चुकाएगी सरकार

Government will pay the outstanding electricity bill भोपाल। मध्य प्रदेश की सरकार ने नगरीय निकायों के करोड़ों रुपये के बकाया बिजली बिल चुकाने का निर्णय लिया है। आर्थिक संकट में फंसे इन निकायों की सहायता के लिए चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि का उपयोग किया जाएगा, जिससे उनकी बिजली की देनदारी चुकाई जा सकेगी। 60 करोड़ रुपये की स्वीकृति मप्र नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस मद से 60 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इसमें से सबसे अधिक 31 करोड़ रुपये पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को दिए जाएंगे, जिससे इंदौर नगर निगम के 23 करोड़ रुपये का बकाया बिल समायोजित किया जाएगा। इसके अलावा भोपाल नगर निगम के 5 करोड़, जबलपुर के 5.5 करोड़ और ग्वालियर के 2.5 करोड़ रुपये का बिल भी चुकाया जाएगा। वित्तीय स्थिति की चुनौती मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी है कि वे अपने बिजली के बिल समय पर चुकाने में असमर्थ हैं। इसके पीछे मुख्य कारण है कि इन निकायों की वसूली बेहद कम है। पेयजल, स्ट्रीट लाइट आदि के लिए विद्युत वितरण कंपनियों से बिजली की आपूर्ति की जाती है, लेकिन स्थानीय निकायों द्वारा रहवासियों से शुल्क की वसूली में कमी आई है। सरकार का निर्णय इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि का उपयोग बिजली के बकाया बिलों का भुगतान करने का निर्णय लिया है। यह राशि अब मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के बजाय बिजली बिल चुकाने में खर्च की जाएगी। इससे विद्युत वितरण कंपनियों पर भी दबाव कम होगा और उनकी सेवा में भी कोई बाधा नहीं आएगी।

‘मोहन सरकार ने जंगली जानवरों के हमलों के कारण मौत पर मुआवजे की राशि आठ लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का फैसला किया

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत जंगली जानवरों के हमले में मारे गए लोगों के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजा राशि आठ लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है। राज्य सरकार ने उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पास एक हाथी द्वारा दो व्यक्तियों को कुचलकर मार डालने की घटना के एक दिन बाद यह घोषणा की। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया, ‘‘हमने जंगली जानवरों के हमलों के कारण मौत के लिए मुआवजे की राशि आठ लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का फैसला किया है। हमने उमरिया में (हाथियों के हमले में) मारे गए दो लोगों के परिवारों को भी इसके दायरे में शामिल किया है।’’ वन मंत्री प्रदीप अहिरवार द्वारा उमरिया जिले के पीड़ितों के परिजनों को 8-8 लाख रुपये का मुआवजा सौंपने के कुछ घंटों बाद ही मुआवजा राशि में तीन गुना की वृद्धि की गई। उधर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (बीटीआर) के बफर जोन के बाहर शनिवार को जंगली हाथियों के हमले में एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई थी। अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि मृतक की पहचान रामरतन यादव (65) के रूप में हुई है। बीटीआर के अधिकारी ने बताया, “आज सुबह जब वह रिजर्व के बाहर शौच के लिए गए थे तो जंगली हाथियों ने उन्हें कुचल दिया।’’ उमरिया के मंडल वन अधिकारी (डीएफओ) विवेक सिंह ने को फोन पर बताया कि यह घटना देवरा गांव में हुई। इस हफ्ते की शुरुआत में तीन दिनों के अंतराल में बीटीआर में दस हाथियों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को रिजर्व (बीटीआर) के खितोली रेंज के अंतर्गत सांखनी और बकेली में चार जंगली हाथी मृत पाए गए, जबकि बुधवार को चार और बृहस्पतिवार को दो की मौत हो गई। अधिकारियों ने पहले बताया था कि 13 सदस्यीय झुंड में से अब केवल तीन हाथी ही जीवित हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या व्यक्ति को शेष तीन हाथियों ने मारा है, तो अधिकारी ने कहा कि उनकी पहचान का पता लगाना मुश्किल है। बीटीआर के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि झुंड के शेष तीन हाथी कटनी जिले के वन क्षेत्र की ओर बढ़ते देखे गए। वन अधिकारी ने कहा, “यह गतिविधि असामान्य है क्योंकि बीटीआर में पहले कभी ऐसा नहीं देखा गया है।” बीटीआर पूर्वी मध्यप्रदेश के उमरिया और कटनी जिलों में फैला हुआ है।

स्मार्ट मीटर में बैलेंस खत्म होने के बाद भी अगले तीन दिन तक बिना कनेक्शन काटे रिचार्ज कराया जा सकता

भोपाल  मध्यप्रदेश के 20 जिलो में अब तक 10 लाख स्मार्ट मीटर सफलता पूर्वक लगाए जा चुके हैं। जबकि भोपाल में विभिन्न परिसरों में 35 हजार स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। इन स्मार्ट मीटरों का निरीक्षण करने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव शशांक मिश्रा भोपाल आए। उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के फायदे बताने के साथ ही मोबाइल एप भी इंस्टाल करवाया। इस दौरान कंपनी के निदेशक (वाणिज्य) सुधीर कुमार श्रीवास्तव, महाप्रबंधक शहर बीबीएस परिहार सहित अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे। सुविधा का लाभ लेने के लिए कहा केंद्रीय संयुक्त सचिव ने शहर के दानिशकुंज, विराशा हाइट्स में उपभोक्ताओं के परिसरों में लगाए गए स्मार्ट मीटरों का निरीक्षण करते हुए उनकी कार्यप्रणाली को देखा। यहां उन्होंने उपभोक्ताओं से चर्चा कर मीटर के फायदे बताए और एप इंस्टाल कर सुविधा का लाभ लेने के लिए कहा है। उन्होंने बताया कि स्मार्ट मीटर के लगने से सुरक्षा निधि से छूट, पहले से जमा सुरक्षा-राशि से पहला रिचार्ज,मौजूदा टैरिफ के अनुसार, घरेलू एवं गैर घरेलू (व्यावसायिक) बिल में 25 पैसे प्रति यूनिट की छूट, ऊर्जा-प्रभार से जुड़े अन्य प्रभारों (यथा विद्युत-शुल्क, टीओडी सरचार्ज, पावर फैक्टर सरचार्ज) की घटी विद्युत दर से गणना,प्रत्येक भुगतान पर, बिल राशि के शून्य से पांच प्रतिशत (न्यूनतम पांच रुपये ) की छूट, घरेलू श्रेणी में छूट की कोई अधिकतम सीमा नहीं, जबकि अन्य श्रेणियों में छूट की अधिकतम सीमा 20 रुपये जैसे लाभ मिलेंगे। बैलेंस खत्म होने के बाद तीन दिन का मौका उन्होंने बताया कि स्मार्ट मीटर में बैलेंस खत्म होने के बाद भी अगले तीन दिन तक बिना कनेक्शन काटे रिचार्ज कराया जा सकता है।उपभोक्ता मोबाइल में एप के जरिए विद्युत-भार (लोड) की हर 15 मिनट में रियल टाइम जानकारी,विद्युत खपत, तत्संबंधी विद्युत प्रभार, बैलेंस राशि की प्रतिदिन की जानकारी, मीटर रीडिंग की गड़बड़ी, विद्युत लाइनों, वितरण ट्रांसफार्मर, बिजली आपूर्ति में व्यवधान की समस्या को आसानी से दूर करवा सकेंगे। इतना ही भविष्य में सोलर रूफ टाप कनेक्शन लेने पर नये मीटर माडेम खरीदने की आवश्यकता नहीं होगी।

भोपाल में 848 मकान बिजली ट्रांसमिशन की 132 केवी क्षमता की एक्स्ट्रा हाईटेंशन लाइन की जद, टूटेंगे छज्जे

 भाेपाल  शहर के कई क्षेत्रों में लोग जान जोखिम में डालकर घरों में रह रहे हैं। ऐसे लोगों को दुर्घटना से बचाने के लिए मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने नियमानुसार नोटिस जारी किए हैं। बता दें कि शहर में 848 मकान बिजली ट्रांसमिशन की 132 केवी क्षमता की एक्स्ट्रा हाईटेंशन लाइन की जद में हैं। कंपनी ने ऐसे मकानों की छत और छज्जे तोड़ने के लिए नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन को पत्र भी लिखा है। लाइन की जद में आ रहे निर्माण को तोड़ने के लिए एक माह की मोहलत दी गई है। गौरतलब है कि सोमवार को करोंद में एक महिला हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर झुलस गई थी। महिला की हालत गंभीर है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथारिटी के नियमानुसार एवं इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 1956 के प्रविधानों के अनुसार 132 केवी टावर के 27 मीटर कारिडोर में कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। इसी तरह 132 केवी टावर में कम से कम 6.5 मीटर का वर्टिकल क्लीयरेंस होना चाहिए। देवकी नगर में हुई थी बड़ी कार्रवाई इस साल की शुरूआत में देवकी नगर में बड़ी कार्रवाई हुई थी। यहां 132 केवी क्षमता की एक्स्ट्रा हाईटेंशन लाइन की जद में आ रहे निर्माण को तोड़ा गया था। यहां पर अधिकारियों के कहने पर मकान की बाउंड्रीवाल को मकान मालिक ने ही तोड़ा था। अधिकारियों ने कहा कि हाईटेंशन लाइन के आसपास कई मकान हैं और मंदिर भी हैं। इस दौरान बड़ी दुर्घटना का भी खतरा है। इनका कहना है गोविंदपुरा, नारियलखेड़ा, देवकी नगर, करोंद, बैरागढ़, आनंद नगर और जैन कालोनी में ऐसे मकान चिह्नित किए गए हैं, जहां हाईटेंशन लाइन एकदम पास में है। शहर में पेट्रोलिंग और सर्वे करके सूची नगर निगम और जिला प्रशासन को सौंप दी गई है। सुनील तिवारी, एमडी, मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी

UP में 27 हजार प्राथमिक विद्यालयों को नजदीकी विद्यालय में विलय करते हुए उन्हें बंद करने की तैयारी !

 लखनऊ उत्तर प्रदेश के 27 हजार बेसिक स्कूलों के जल्द बंद होने की खबरों ने शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। अब सरकार की ओर से इन खबरों का खंडन कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कहा गया है कि 27 हजार प्राथमिक विद्यालयों को नजदीकी विद्यालय में विलय करते हुए उन्हें बंद करने की बाते कहीं जा रही है, जो बिल्कुल भ्रामक और निराधार है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से यह भी कहा गया कि इस संबंध में ऐसी कोई प्रक्रिया गतिमान नहीं है।  बेसिक शिक्षा विभाग के एक्स पर इस संबंध में कई पोस्ट किए गए हैं। पोस्ट के जरिये बेसिक शिक्षा विभाग ने बताया कि मीडिया में ऐसी खबरें चल रही है। इसमें 27 हजार प्राथमिक विद्यालयों को नजदीकी विद्यालयों में विलय करते हुए बंद करने की बात की गई है, जो बिल्कुल भ्रामक और निराधार है। साथ ही यह भी साफ किया गया कि किसी भी विद्यालय को बंद किए जाने की कोई प्रक्रिया नहीं चल रही है। ड्राप आउट दर कम करने की कोशिश जारी वहीं विभाग की ओर से बताया गया कि प्रदेश का प्राथमिक शिक्षा विभाग विद्यालयों में मानव संसाधन और आधारभूत सुविधाओं के विकास, शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने पोस्ट के जरिये बताया कि छात्रों विशेषकर बालिकाओं के ड्राप आउट दर को कम करने के लिए विभाग लगातार प्रयत्नशील है। इसको लेकर समय-समय पर विभिन्न अध्ययन भी किए जाते रहे हैं। इसके साथ ही विभाग ने बताया कि बीते सालों में प्रदेश के विद्यालयों में कायाकल्प, निपुण, प्रेरणा आदि योजनाओं के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति और सुधार हुए हैं। विभाग के लिए प्रदेश के छात्रों का हित सर्वोपरि है। बता दें, 50 से कम बच्चों वाले प्राथमिक स्कूलों को बंद कर नजदीकी स्कूलों में मर्ज किये जाने की खबरे चल रही थी। फिलहाल इन खबरों का खंडन कर दिया गया है। एक्स पर पूछा जा रहा ये सवाल आपके द्वारा जारी खंडन को झूठा करार देते हुए यह कागज वायरल हो रहा है। कागज 13 और 14 नवंबर को आयोजित बैठक को लेकर जारी विस्तृत एजेंडा का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें स्पष्ट रूप विद्यालयों को मर्ज करने की विस्तृत रूपरेखा स्पष्ट की गई थी। कुछ कहना चाहेंगे?

उपचुनावों में पूरी तरह योगी की चल रही, मोदी-नड्डा से मुलाकात, मोहन भागवत संग बंद कमरे में चर्चा

लखनऊ  लोकसभा चुनाव 2024 में झटका खाने वाली बीजेपी के लिए यूपी का उपचुनाव प्रतिष्‍ठा का सवाल बन चुका है। 9 सीटों पर 13 नवंबर को वोटिंग होनी है। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ स्‍वयं उपचुनाव को लेकर लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस बार बीजेपी आलाकमान ने योगी आदित्‍यनाथ को खुली छूट दी है। प्रत्‍याशियों के चयन से लेकर तमाम अहम रणनीतिक फैसले योगी के मुताबिक लिए गए हैं। ऐसे में ये उपचुनाव असल मायने में मुख्‍यमंत्री योगी के लिए भी अग्नि परीक्षा जैसी होगी। अचानक दिल्‍ली पहुंच मोदी और नड्डा से मिले एक दिन पहले योगी आदित्‍यनाथ अचानक दिल्‍ली पहुंचे। वह यहां बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जेपी नड्डा से मिले। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक उपचुनाव से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होती रही। इसके बाद योगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने पहुंचे। करीब एक घंटे की बातचीत में चुनावी चर्चा के अलावा महाकुंभ 2025 और 69 हजार शिक्षक भर्ती जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हुई। संघ के शीर्ष नेताओं से 45 मिनट तक चली बैठक इससे पहले पिछले हफ्ते मथुरा में राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ यहां संघ के शीर्ष नेताओं से मिलने पहुंचे। करीब 45 मिनट तक इनके बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। हरियाणा विधानसभा चुनावों में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संघ ने यूपी उपचुनावों को लेकर भी योगी को कई सुझाव दिए। मोहन भागवत से इन मुद्दों पर हुई चर्चा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात कर उपचुनाव की तैयारियों पर चर्चा की। बताया जा रहा है कि उपचुनाव में मत प्रतिशत बढ़ाने, बूथ प्रबंधन सभी वर्गों के वोटरों को एकजुट करने सहित कई मुद्दों पर दोनों के बीच वार्ता हुई है। लोकसभा चुनाव में अनुकूल प्रदर्शन होने के बाद हरियाणा की सफलता में संघ की अहम भूमिका रही। वहां छोटे समूहों में बैठकें कर लोगों के बीच अपनी बात पहुंचाई। साथ ही बूथ प्रबंधन में संघ ने अहम भूमिका निभाई। डोर-टू-डोर अभियान चलाकर बीजेपी के लिए माहौल बनाया। अधिक से अधिक मतदाताओं को मतदान केंद्रों पर पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसी तरह का कुछ माहौल यूपी में बनाने को लेकर चर्चा हुई। इन 9 सीटों पर होने हैं उपचुनाव करहल, सीसामऊ, कुंदरकी, गाजियाबाद, फूलपुर, मझवां, कटेहरी, खैर और मीरापुर में 13 नवंबर को उपचुनाव हैं। अयोध्‍या की मिल्‍कीपुर सीट पर भी उपचुनाव होना है, लेकिन अभी उसकी डेट नहीं घोषित की गई है। इन 10 सीटों में पांच पर सपा का कब्‍जा था। तीन बीजेपी के पास थी। एक निषाद पार्टी और एक रालोद के पास थी। लोकसभा की 80 में मात्र 33 सीटें जीत पाई थी बीजेपी इस साल हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी यूपी की 80 में से केवल 33 सीटें जीत पाई। साथ ही उसका वोट शेयर भी घटकर 41 फीसदी तक रह गया। ऐसे में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के सामने उपचुनाव जीतने को लेकर बड़ी चुनौतियां हैं। जिस तरह बेहतर प्रदर्शन करते हुए सपा ने 37 सीटों पर जीत हासिल की है, इससे उपचुनाव में भी उसका दावा मजबूत माना जा रहा है।

सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला: निजी संपत्तियां ‘समुदाय के भौतिक संसाधन’ नहीं, राज्य नहीं कर सकता जबरन अधिग्रहण

Historic decision of the Supreme Court: Private properties are not ‘physical resources of the community’, the state cannot forcibly acquire them नई दिल्ली ! सर्वोच्च न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि सभी निजी स्वामित्व वाली संपत्तियां सामुदायिक संसाधन नहीं होतीं, जिन्हें राज्य आम भलाई के लिए अपने अधीन कर सकता है। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 8-1 के बहुमत से इस विवादास्पद मुद्दे पर फैसला सुनाया। तीन फैसले लिखे गएमुख्य न्यायाधीश ने अपने और छह सहयोगियों के लिए एक फैसला लिखा, न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने एक समवर्ती लेकिन अलग फैसला लिखा और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने असहमति जताई। पीठ में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय, न्यायमूर्ति नागरत्ना बीवी, न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति एससी शर्मा और न्यायमूर्ति एजी मसीह शामिल थे।यह मामला संविधान के अनुच्छेद 31सी से संबंधित है जो राज्य द्वारा राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों को पूरा करने के लिए बनाए गए कानूनों की रक्षा करता है – संविधान सरकारों को कानून और नीतियां बनाते समय पालन करने के लिए दिशा-निर्देश देता है। अनुच्छेद 31सी जिन कानूनों की रक्षा करता है उनमें अनुच्छेद 39बी भी शामिल है। अनुच्छेद 39बी में प्रावधान है कि राज्य अपनी नीति इस प्रकार बनाएगा कि समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार वितरित हो कि सर्वजन हिताय हो। किसी की निजी संपत्ति नहीं हो सकती पब्लिकइस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, “क्या 39बी में इस्तेमाल किए गए समुदाय के भौतिक संसाधन में निजी स्वामित्व वाले संसाधन शामिल हैं? सैद्धांतिक रूप से, इसका उत्तर हां है, इस वाक्यांश में निजी स्वामित्व वाले संसाधन शामिल हो सकते हैं। हालांकि, यह न्यायालय रंगनाथ रेड्डी में न्यायमूर्ति अय्यर के अल्पमत के दृष्टिकोण से सहमत नहीं है। हमारा मानना ​​है कि किसी व्यक्ति के स्वामित्व वाले प्रत्येक संसाधन को केवल इसलिए समुदाय का भौतिक संसाधन नहीं माना जा सकता क्योंकि वह भौतिक आवश्यकताओं की योग्यता को पूरा करता है।”उन्होंने कहा, “39बी के अंतर्गत आने वाले संसाधन के बारे में जांच विवाद-विशिष्ट होनी चाहिए और संसाधन की प्रकृति, विशेषताओं, समुदाय की भलाई पर संसाधन के प्रभाव, संसाधन की कमी और ऐसे संसाधन के निजी लोगों के हाथों में केंद्रित होने के परिणामों जैसे कारकों की एक गैर-संपूर्ण सूची के अधीन होनी चाहिए, इस न्यायालय द्वारा विकसित सार्वजनिक ट्रस्ट सिद्धांत भी उन संसाधनों की पहचान करने में मदद कर सकता है जो समुदाय के भौतिक संसाधन के दायरे में आते हैं।”46 साल बाद पलटा फैसला1977 में, सात न्यायाधीशों की पीठ ने 4:3 बहुमत से फैसला सुनाया था कि निजी स्वामित्व वाली सभी संपत्ति समुदाय के भौतिक संसाधनों के दायरे में नहीं आती है। हालाँकि, अल्पमत की राय में, न्यायमूर्ति कृष्ण अय्यर ने माना कि सार्वजनिक और निजी दोनों संसाधन अनुच्छेद 39(बी) के तहत “समुदाय के भौतिक संसाधनों” के दायरे में आते हैं। अपने अलग फैसले में, न्यायमूर्ति नागरत्ना ने न्यायमूर्ति अय्यर के फैसले पर उनकी टिप्पणियों पर मुख्य न्यायाधीश से असहमति जताई।

जिले में रिश्वत देने का प्रयास असफल: सीईओ अंशुमान राज का साहसिक कदम

Attempt to give bribe in the district failed: CEO Anshuman Raj’s bold step सीधी ! जिले में रिश्वतखोरी के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, लेकिन सोमवार को जिला पंचायत सीईओ और अपर कलेक्टर अंशुमान राज ने एक साहसिक कदम उठाकर इस प्रवृत्ति पर कड़ा संदेश दिया। एक पूर्व पंचायत सदस्य, अखिलेश कुशवाहा, अंशुमान राज के चैंबर में मिठाई का डिब्बा और नोटों से भरा लिफाफा लेकर पहुंचे थे। परंतु, जैसे ही अंशुमान राज ने मिठाई का डिब्बा खोला, उन्होंने उसके नीचे एक नोटों से भरा लिफाफा पाया, जिससे उन्हें रिश्वत का अंदेशा हुआ। बिना किसी संकोच के, उन्होंने वह मिठाई का डिब्बा कुशवाहा के मुंह पर फेंक दिया और तुरंत पुलिस को सूचित कर दिया। पुलिस ने की तुरंत कार्रवाई सूचना मिलते ही कोतवाली थाना प्रभारी अभिषेक उपाध्याय अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों व्यक्तियों को थाने ले जाकर पूछताछ की। थाना प्रभारी के अनुसार, जांच के बाद इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। दोनों संदिग्धों ने अब तक रिश्वत के आरोपों को अस्वीकार किया है, लेकिन मौके पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की संभावना है। सीईओ की ईमानदार छवि पर मुहर सीईओ अंशुमान राज की इस घटना के बाद जिले में चर्चा है। उनकी ईमानदार छवि और कार्य के प्रति समर्पण को देखते हुए जनता में उनकी सराहना हो रही है। जिले में अपनी तैनाती के बाद से ही उन्होंने कई भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कदम उठाए हैं। कई रोजगार सहायकों और सचिवों के खिलाफ की गई कार्रवाई उनके दृढ़ निश्चय को दर्शाती है। आरोपी का बयान: “रिश्वत का उद्देश्य नहीं था” दूसरी ओर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अखिलेश कुशवाहा ने इस मामले में सफाई दी है। उनका कहना है कि वे पहली बार जिला पंचायत सीईओ से मिलने गए थे और मिठाई का डिब्बा लेकर गए थे। उनके अनुसार, उनके पास जो पैसे थे, वे उनके निजी कार्य के लिए थे और उनका रिश्वत देने का कोई इरादा नहीं था। उनका दावा है कि सीईओ को इस संबंध में गलतफहमी हो गई है। यह घटना न केवल रिश्वतखोरी के प्रति प्रशासन की कठोर नीति को दर्शाती है, बल्कि ईमानदारी और निडरता के प्रतीक के रूप में अंशुमान राज के प्रति जिले की जनता का विश्वास और अधिक बढ़ा है।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live