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रिकी पोंटिंग ने कहा- चेन्नई एक मैच के लिए धोनी को बाहर रखने के बारे में सोच सकती है

नई दिल्ली आईपीएल 2025 के लिए चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) द्वारा एमएस धोनी को रिटेन किए जाने के बाद, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग को लगता है कि धोनी को अगले सीजन में उनसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाने के लिए यहां-वहां एक मैच के लिए आराम दिया जा सकता है। 43 वर्षीय, जो अपने खेल करियर के अंतिम चरण में हैं, 2020 में अंतरराष्ट्रीय संन्यास की घोषणा करने के बाद से केवल आईपीएल में ही नज़र आए हैं। उन्होंने अपने नेतृत्व में सीएसके को पांच आईपीएल खिताब दिलाए। द आईसीसी रिव्यू के हालिया एपिसोड में पोंटिंग ने कहा, “दो सीजन पहले शायद उनका सबसे खराब सीजन रहा था, लेकिन फिर पिछले साल उन्होंने वापसी की और पुराने एमएस धोनी की तरह कुछ मैचों में वास्तव में प्रभाव डाला।” “मुझे लगता है कि अब भी ऐसा ही होगा… हो सकता है कि वे उन्हें पूरे सीजन में न खिला पाएं। वे उसे एक मैच के लिए बाहर रखने और उसे यहां-वहां आराम देने के बारे में सोच सकते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे उससे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवा रहे हैं।” पोंटिंग ने धोनी की लंबी अवधि के लिए प्रशंसा व्यक्त की और टीम के कप्तान न होने के बावजूद उनकी मेंटरशिप क्वालिटी की सराहना की। पोंटिंग ने कहा, “वह जिस भी टीम में हो, चाहे वह कप्तान हों या न हों, वह हमेशा उस समूह के लिए मेंटर और लीडर रहेंगे, चाहे वह खेल रहे हों, चाहे वह किनारे पर बैठे हों, वह बस ऐसा ही है…वह चेन्नई के लिए महत्वपूर्ण है, वह नेतृत्व जो वह मैदान पर और मैदान के बाहर लाता है।” “सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी वे होते हैं जो लंबे समय तक इस तरह के उच्च स्तर को बनाए रखने में सक्षम होते हैं… 10, 12, 14 साल के करियर के लिए।” पोंटिंग ने इस बात पर जोर दिया कि धोनी ने स्थिति के अनुसार खुद को ढालने की अपनी अनूठी क्षमता के साथ खेल में प्रभावशाली बने रहने के लिए वर्षों में कैसे विकास किया है। पोंटिंग ने कहा, “वह अब पारी की आखिरी 20 गेंदों पर बल्लेबाजी कर रहे हैं, लेकिन फिर भी दिखा रहे हैं कि ऐसा करके आप खेल पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं।”  

हर जिले में साइबर थाना, हर थाने में हेल्प डेस्क… फ्रॉड करने वालों की खैर नहीं

CM Mohan Yadav’s action plan: Cyber ​​police station in every district, help desk in every police station… fraudsters are in trouble मध्य प्रदेश के हर जिले में अब साइबर पुलिस स्टेशन खुलेंगे और हर थाने में हेल्प डेस्क बनेगी। अब तक यह सुविधा सिर्फ भोपाल में थी। अन्य जिलों में पुलिस थानों में साइबर ठगी की शिकायतें लिखी जाती थीं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के आदेश के बाद यह फैसला लिया गया है। भोपाल ! मध्य प्रदेश में साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब हर जिले में एक साइबर थाना और हर थाने में एक साइबर हेल्प डेस्क होगी।यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि इस साल जनवरी से अब तक 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो चुकी है। अभी तक सिर्फ भोपाल में ही एक साइबर थाना था, बाकी जिलों में साइबर क्राइम के मामले क्राइम ब्रांच में दर्ज होते थे। एक साल पहले आ गया था प्रपोजल साइबर हेल्प डेस्क बनाने का प्रस्ताव तो एक साल पहले ही आ गया था, लेकिन बजट नहीं होने की वजह से इस पर काम नहीं हो पाया था। अब राज्य साइबर मुख्यालय ने इसके लिए शासन से बजट की मांग की है और उम्मीद है कि जल्द ही यह सुविधा सभी जिलों में शुरू हो जाएगी। पुलिसकर्मियों को मिलेगी ट्रेनिंग पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि साइबर हेल्प डेस्क में एक पुलिसकर्मी को साइबर क्राइम की जांच के लिए ट्रेनिंग देकर तैनात किया जाएगा। यह पुलिसकर्मी लोगों की शिकायतें सुनेगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें साइबर थाने भेजेगा। इस साल में 250 करोड़ की ठगी साइबर क्राइम के मामलों में पिछले कुछ सालों में काफी तेजी आई है। पिछले पांच सालों में साइबर क्राइम की शिकायतें पांच हजार से बढ़कर तीन लाख से ज़्यादा हो गई हैं। साइबर पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, इस साल जनवरी से अब तक 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो चुकी है। दूसरे देशों से ठगी कर लेते हैं लोग साइबर पुलिस के मुताबिक, दूसरे देशों में बैठे लोग भी इस तरह के अपराध में शामिल हैं। साइबर थाने बनने से साइबर कानून के जानकार पुलिसकर्मी तैनात किए जा सकेंगे। इससे अपराध की घटनाओं पर कार्यवाई में तेजी आएगी। जांच से लेकर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल करने तक का काम समय पर और अच्छी तरह से हो सकेगा। मध्य प्रदेश में बढ़े हैं ऐसे मामले मध्य प्रदेश में साइबर अपराध के मामलों में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है, इसलिए हर जिले में एक अलग साइबर थाने की सख्त ज़रूरत है। उम्मीद है कि इससे साइबर अपराध पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी और लोग साइबर ठगी से बच सकेंगे।

छठ पूजा की शुरुआत 7 नवंबर 2024 से, भूल कर भी ना करें ये चीजें

छठ पूजा की शुरुआत इस साल 7 नवंबर 2024 से हो रही है. ये बिहार और झारखंड का सबसे बड़ा पर्व  है जो पूरे देश में बेहद धूम धाम के साथ मनाया जाता है. हिन्दू धर्म में इसका विशेष महत्व है. यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को शुरू होता है और सप्तमी तिथि तक चलता है. चार दिनों तक चलने वाला ये पर्व सभी के लिए बहुत खास और एहम  होता है. इसकी शुरुआत नहाय-खाय के साथ होती है. छठ पूजा में सूर्य देव के साथ उनकी बहन छठ मैया की भी पूजा की जाती है. छठ पूजा को लेकर कई मान्यताए है जो इस के व्रत को और भी खास बनाती है. छठ पूजा पर रखे जाने वाला व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. यह व्रत संतान के लिए रखा जाता है उनकी लंबी उम्र ,अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि  के लिया 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते है. यह व्रत महिलायें रखती है और इसके कुछ कड़े नियम भी है जिनका पालन भी करना पड़ता है. इन बातों का रखें ध्यान व्रती महिलाएं सूर्य  देव को अर्घ्य दिए बिना कुछ भी ना खाएं. पहले और दूसरे दिन सूर्य को जल देने के बाद ही भोजन करें और व्रत रखने वाली महिलाएं जमीन पर ही सोएं. पूजा में किसी भी तरह का चांदी, स्टील और प्लास्टिक के बर्तनो का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इस पूजा में केवल मिट्टी के चूल्हे और बर्तनो का ही इस्तेमाल करें. पूजा के प्रसाद को गलती से भी बनाते हुए जूठा ना करें और प्रसाद बनाने से पहले कुछ भी न खाए. पूजा में साफ-सफाई का खास ख्याल रखें. 36 घंटो के व्रत और पूजा करने के दौरान साफ कपड़े पहने और इस बात पर ध्यान रखें की पूजा की चीज़ो को साफ हाथ से ही छुएं. छठ पूजा के दौरान बिकुल भी मांसाहारी भोजन, लहसुन और प्याज़ का सेवन ना करें. प्रसाद बनाने की जगह पर भोजन न करें. छठ का व्रत रखने वाले अपनी वाणी पर संयम रखें किसी को भी अपशब्द न कहे अन्यथा आपको पूजा का फल नहीं मिलेगा.

संयुक्त राज्य अमेरिका में विवाहपूर्व सेक्स, 40 % लड़की शादी से पहले ही प्रेग्नेंट!

न्यूयॉर्क अमेरिका दुनिया का सबसे अमीर देश । ऐसा देश जहां जाने का सपना हर किसी का होता है ।कहते हैं जो इस देश चला गया , उसकी तो समझो लाइफ बन गई । आपने अमेरिका के बारे में यूं तो बहुत कुछ सुना होगा , लेकिन ऐसी बहुत सी बातें हैं , जो आप नहीं जानते होंगे । यहां की कई बातें आपको काफी हैरान कर सकती है । ये देश कितना धनी है इसका अंदाजा तो इसी बात से लगाया जा सकता है कि एप्पल , गगूल , माइक्रोसॉफ्ट जैसी दुनिया की बड़ी कंपनीज अमेरिकी कंपनीज हैं । यहां के 5 प्रतिशत लोगों के पास इतना ज्यादा पैसा है जितना दुनिया के 65 प्रतिशत लोगों के पास भी नहीं है । अमेरिका में जितने प्रतिशत लोग वोट देने नहीं जाते उससे कहीं ज्यादा लोग फेसबुक और वॉट्सएप यूज करते हैं । एक रिसर्च के अनुसार यहां की 40 प्रतिशत महिलाएं शादी से पहले बच्चे को जन्म देती हैं । यहां पर शादी को काफी कम महत्व दिया जाता है । – अमेरिका में मैरिड लोगों से ज्यादा उन लोगों की संख्या ज्यादा है जिन्होंने अब तक शादी नहीं की या फिर उनका तलाक हो गया है ।अमेरिका में हर एक घंटे में 100 से ज्यादा तलाक होते हैं ।अमेरिका में 30 प्रतिशत बिजनेस की मालिक महिला ही है । यहां बिजनेस में महिलाओं का वर्चस्व है । यहां तक की किसी बडे पर महिला का ही कब्जा होता है । – लगभग 7 प्रतिशत अमेरिकी ये दावा करते हैं कि वे अपनी जिन्दगी में आज तक नहीं नहाए हैं । स्वास्थ के मामले में अमेरिका को दुनिया में अव्वल माना जाता है , लेकिन इसके बाद भी यहां के 20 से 30 प्रतिशत लोगों की मौत मेडिकल ट्रीटमेंट की गलतियों से होती है और यहां अच्छे हेल्थ केयर के बावजूद यहां के लोगों की औसम आयु विकसित देशों से काफी कम है । सिक्योरिटी के मामले में अमेरिका को अच्छा माना जाता है लेकिन फिर भी दुनिया का आधा क्रेडिट कार्ड फ्रॉड अमेरिका में होता है । अमेरिकी महिलाओं में एक दशक पहले की तुलना में बच्चे पैदा करने की संभावना अधिक है 2024  में प्रसव उम्र के अंतिम पड़ाव पर पहुंची अमेरिकी महिलाओं में से जिन्होनें कभी बच्चे को जन्म दिया है, उनकी हिस्सेदारी 10 साल पहले की तुलना में अधिक थी। यू.एस. जनगणना ब्यूरो के आंकड़ों के प्यू रिसर्च सेंटर के विश्लेषण के अनुसार, 40 से 44 वर्ष की आयु की लगभग 86% महिलाएँ माताएँ हैं, जबकि 2016  में यह 80% थी। 1  इस आयु वर्ग की महिलाओं में से जो माताएँ हैं, उनकी हिस्सेदारी 1990 के दशक की शुरुआत में जितनी थी, उतनी ही है। न केवल महिलाओं के माँ बनने की संभावना पहले से ज़्यादा है, बल्कि वे ज़्यादा बच्चे भी पैदा कर रही हैं। कुल मिलाकर, महिलाओं के जीवन में औसतन 2.07 बच्चे होते हैं – 2006 में 1.86 से बढ़कर, जो रिकॉर्ड पर सबसे कम संख्या है। और जो माताएँ हैं, उनके परिवार का आकार भी बढ़ गया है। 2016 में, अपने बच्चे पैदा करने की उम्र के अंत में माताओं ने लगभग 2.42 बच्चे पैदा किए, जबकि 2008 में यह संख्या 2.31 थी। मातृत्व और प्रजनन क्षमता में हाल ही में हुई वृद्धि इस धारणा के विपरीत प्रतीत हो सकती है कि अमेरिका मंदी के बाद “बेबी बस्ट” का अनुभव कर रहा है। हालांकि, प्रत्येक प्रवृत्ति एक अलग प्रकार के माप पर आधारित है। यहाँ विश्लेषण जीवन भर की प्रजनन क्षमता के संचयी माप पर आधारित है, एक महिला द्वारा अब तक जन्म दिए गए जन्मों की संख्या; इस बीच, अमेरिका में प्रजनन क्षमता में गिरावट की रिपोर्ट वार्षिक दरों पर आधारित है, जो एक समय में प्रजनन क्षमता को दर्शाती है।

सांसद पाल किसान संगठनों से बातचीत करेंगे, याचिकाएं जेपीसी के समक्ष रखी जाएंगी

नई दिल्ली वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही संसद की संयुक्त समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल बृहस्पतिवार को कर्नाटक का दौरा कर उन किसानों से मुलाकात करेंगे जो वक्फ संपत्तियों पर कथित तौर पर अतिक्रमण को लेकर पिछले दिनों नोटिस दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। बाद में ये नोटिस वापस ले लिए गए थे। पाल के कई अन्य लोगों से भी मिलने की संभावना है, जिनमें कर्नाटक प्रदेश भाजपा के वो कई नेता भी शामिल हैं जो इस मुद्दे को लेकर आक्रामक हैं। भारतीय जनता पार्टी के सांसद और इस समिति के सदस्य तेजस्वी सूर्या ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘वक्फ संबंधी जेपीसी के अध्यक्ष ने वक्फ की मनमानी कार्रवाई से प्रभावित किसानों के साथ बातचीत करने के लिए सात नवंबर को हुबली और बीजापुर जाने के मेरे अनुरोध पर सहमति व्यक्त की है।’’ सूर्या के मुताबिक, भाजपा सांसद पाल किसान संगठनों से बातचीत करेंगे और उन्हें दी गई याचिकाएं जेपीसी के समक्ष रखी जाएंगी। विवाद खड़ा होने और आलोचना से घिरने के बाद कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने कहा कि नोटिस के लिए गजट में हुई त्रुटि जिम्मेदार है। इन नोटिस को वापस ले लिया गया। भाजपा ने दावा किया है कि यह कांग्रेस की वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा है। समिति के विपक्षी सदस्य पाल की कार्यप्रणाली की मुखर आलोचना करते रहे हैं और आरोप लगाते रहे हैं कि वह एकतरफा निर्णय ले रहे हैं और पूरी प्रक्रिया को ध्वस्त कर रहे हैं। समिति विभिन्न हितधारकों के विचार सुनने के लिए नौ से 14 नवंबर तक पांच राज्यों की राजधानियों, कोलकाता, गुवाहाटी, भुवनेश्वर, पटना और लखनऊ का दौरा करेगी।  

Swiggy IPO का इंतजार खत्म, आज से खुलेगा स्विगी आईपीओ, ₹371-390 प्राइस बैंड फिक्स, चेक करें GMP

मुंबई ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी का आईपीओ आज 6 नवंबर से खुल जाएगा. रिटेल निवेशक बुधवार से बोली लगा सकते हैं, जोकि 8 नवंबर को बंद हो जाएगा. कंपनी आईपीओ के जरिए करीब 11,327 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है. पब्लिक इश्यू के लिए प्राइस बैंड 371-390 रुपए फिक्स किया गया है. इस लिहाज से निवेशकों को हर लॉट में 38 शेयर मिलेंगे. हालांकि ग्रे मार्केट में भाव लगातार गिरता जा रहा है. 6 नवंबर को खुलेगा आईपीओ स्विगी आईपीओ (Swiggy IPO) आज 6 नवंबर से खुलेगा. रिटेल निवेशक पब्लिक इश्यू में 8 नवंबर तक बोली लगा सकते हैं. बताते चलें कि कंपनी ने मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास 26 सितंबर को आईपीओ के लिए अप्लाई किए थे. आईपीओ में 500 करोड़ रुपए के नए शेयर जारी किए जाएंगे. वहीं, ऑफर फॉर सेल यानी OFS में प्रोमोटर्स और मौजूदा निवेशक हिस्सा बिक्री करेंगी. इसके तहत 18.52 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री होगी. ओएफएस के जरिए करीब 6,666 करोड़ रुपए जुटाने की योजना है. स्विगी पब्लिक इश्यू के लिए बुकरनिंग लीड मैनेजर्स के तौर पर कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया, जेफरीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एवेंडस कैपिटल, जेपी मॉर्गन इंडिया, बोफा सिक्योरिटीज इंडिया और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज नियुक्त किया गया है. वहीं, रजिस्ट्रार के तौर पर लिंक इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड है. ग्रे मार्केट में स्विगी आईपीओ स्विगी के आईपीओ का जलवा ग्रे मार्केट में कम होता जा रहा है. आईपीओ खुलने से पहले प्रीमियम में गिरावट दर्ज की जा रही है. यह मंगलवार को 20 रुपए गिर गया. इस लिहाज ग्रे मार्केट प्रीमियम अब 410 रुपए पर आ गया है, जोकि इश्यू प्राइस 390 रुपए से 5.13 फीसदी ज्यादा है जोमैटो vs स्विगी का कारोबार ज़ोमैटो ने हाल ही में प्रॉफिटेबिलिटी का ऐलान किया, जिसका वैल्युएशन 30 बिलियन डॉलर के करीब है. इसे ब्लिंकिट और इसके B2B सेगमेंट, हाइपरप्योर के माध्यम से इंस्टेंट कॉमर्स में सफल प्रयासों से बल मिला है. दूसरी ओर, स्विगी के वित्तीय प्रदर्शन ने ग्रोथ और चुनौतियों का मिश्रण दिखाया है. वित्त वर्ष 24 में स्विगी ने 36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 11,247 करोड़ रुपए का राजस्व दर्ज किया, जबकि घाटे में 44 प्रतिशत की कटौती की. हालांकि, वित्त वर्ष 25 की पहली तिमाही में बढ़ते खर्चों की वजह से स्विगी के घाटे में 8 फीसदी का अजाफा होगा, जो 611 करोड़ रुपए थी. इसके उलट उसी दौरान जोमैटो की आय 253 करोड़ रुपए के फायदे के साथ 4,206 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. भारत में तेजी बढ़ रहा फूड डिलीवरी मार्केट भारतीय फूड डिवीवरी मार्केट को लेकर आगे अच्छा आउटलुक है. एक अनुमान के मुताबिक साल 2030 तक यह 2 लाख करोड़ रुपए के पार निकल जाएगा. देश के फूड डिलीवरी मार्केट में 90% से ज्यादा की हिस्सेदारी स्विगी और जोमैटो के पास है. जोमैटो को मार्केट में साल 2021 में ही लिस्ट हो चुका है. अब स्विगी की बारी है. मीडिया सोर्सेज के मुताबिक स्विगी पर कुछ बैंकरों ने भरोसा जताया है, जोकि 10 से 13 अरब डॉलर की वैल्युएशंस के साथ लिस्ट हो सकती है.

रीजनल रूरल बैंकों के मर्जर की तैयारी में सरकार, अभी पूरे देश में कुल 43 Regional Rural Bank हैं

नई दिल्ली  सरकार की नजर अब क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों पर है। देश में अभी 43 ग्रामीण बैंक हैं। सरकार उनकी संख्या 28 करना चाहती है। इसके लिए कुछ बैंकों का दूसरे बैंकों में मर्जर करने का प्लान है। इससे इन बैंकों को लागत कम करने और कैपिटल बेस बढ़ाने में मदद मिलेगी। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने इस बारे में एक दस्तावेज तैयार किया है। इसमें ग्रामीण बैंकों के मर्जर का प्रस्ताव है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक छोटे किसानों, कृषि मजदूरों और छोटे कारोबारियों को क्रेडिट देते हैं लेकिन उनकी पूंजी और टेक्नोलॉजी तक पर्याप्त पहुंच नहीं है। 31 मार्च, 2024 तक के आंकड़ों के मुताबिक इन बैंकों के पास कुल 6.6 लाख करोड़ रुपये जमा थे जबकि उनका एडवांस 4.7 लाख करोड़ रुपये का था। एक बैंकर ने कहा कि प्रस्तावित मर्जर के बाद एक राज्य में एक क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक रह जाएगा। इस बारे में वित्त मंत्रालय ने ईमेल का जवाब नहीं दिया। एसेट्स के हिसाब से देश में अब भी आधे से अधिक बैंकिंग सेक्टर पर सरकारी बैंकों को कब्जा है। सरकार ने बैंकों के कामकाज में सुधार करने और कैपिटल के लिए सरकार पर उनकी निर्भरता कम करने के लिए उन्हें कंसोलिडेट करने की कोशिश की है। कितनी घट चुकी है संख्या क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में केंद्र सरकार की 50 फीसदी, स्पॉन्सर या शेड्यूल्ड बैंकों की 35 फीसदी और राज्य सरकार की 15 फीसदी हिस्सेदारी है। सरकार ने 2004-05 में बैंकों को कंसोलिडेट करने की प्रोसेस शुरू की थी। 2020-21 तक इनकी संख्या 196 से घटाकर 43 की गई थी। प्रस्ताव में महाराष्ट्र में दो रीजनल बैंकों का मर्जर करने की योजना है। साथ ही आंध्र प्रदेश में भी चार बैंकों को मिलाने की बात कही गई है।

वीरांगना रानी अवंतिबाई लोधी स्मृति पुरस्कार से उप राष्ट्रपति महिला कृषक अदिती कश्यप को करेंगे सम्मानित

रायपुर कवर्धा विकासखण्ड के ग्राम पालीगुड़ा की रहने वाली महिला कृषक अदिती कश्यप को आज उप राष्ट्रपति  जगदीप धनखड़ नया रायपुर में राज्योत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव की उपस्थिति में वीरांगना रानी अवंतिबाई लोधी स्मृति पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। अदिती कश्यप ने केवल 10वीं तक शिक्षा प्राप्त की है। अदिती कश्यप के पति पुलिस विभाग में कार्यरत है, जो वर्तमान में अम्बिकापुर में पदस्थ हैं। लेकिन पिछले 18 वर्षों से अकेले रहते हुए पालीगुड़ा खार रानीसागर के पास 15 एकड़ में खेती बाड़ी का काम स्वयं करती हैं। गृहणी होकर भी रोजाना खेत जाती हैं। फसलों में धान, चना, गेहूं, मक्का के अलावा उद्यानकी फसल भी लेती हैं। अदिती कश्यप ने पर्यावरण सुरक्षा में सहभागिता निभाने हेतु खेत के मेड़ों का सदुपयोग करते हुए नींबू, चीकू, आम, जामून, अमरूद, सीताफल, कटहल आदि फलदार वृक्ष रोपित किये हैं, जिससे पर्याप्त आमदनी होती है। अदिती कश्यप ने 1 एकड़ में 30 क्विंटल धान उत्पादन कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है, वह भी उस क्षेत्र में जहां पहले प्रति एकड़ केवल 11 क्विंटल धान उत्पादन होता था। अदिती कश्यप द्वारा बॉयर 6444 किस्म का श्री विधि से लगाई हुई धान के फसल की 135 दिन बाद कटाई हुई तो अदिती स्वयं अचंभित हो गई, इस पैदावार से प्रधानमंत्री भी प्रभावित हुए। कर्नाटक में 2 जनवरी 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कृषि कर्मण्य पुरस्कार के साथ 2 लाख रुपए और प्रशस्तिपत्र से सम्मानित हुई, इसके साथ ही राज्य स्तरीय कई अवार्डों से सम्मानित हुईं।

भारत आटा और भारत चावल की बिक्री केंद्रीय भंडार, एनसीसीएफ और नेफेड के जरिये शुरू

नई दिल्ली महंगी चीजों के बीच सरकार अब फिर से सस्ते आटे और चावल की बिक्री शुरू कर रही है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने आज यहां भारत आटा और चावल की बिक्री के दूसरे चरण की शुरुआत की। मंत्री ने एनसीसीएफ, नेफेड और केंद्रीय भंडार की मोबाइल वैन को हरी झंडी दिखाकर इसका शुभारंभ किया। क्या होगा भारत आटा और चावल का दाम भारत आटा और चावल के चरण-2 के दौरान ग्राहकों को 30 रुपये प्रति किलो की दर से आटा और 34 रुपये प्रति किलो की दर से चावल मिलेगा। हरी झंडी दिखाने के बाद पत्रकारों से बातचीत में जोशी ने बताया कि यह पहल ग्राहकों को रियायती दर पर आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि है। उन्होंने बताया कि चावल, आटा और दाल जैसे भारत ब्रांड के तहत बुनियादी खाद्य पदार्थों की खुदरा बिक्री के माध्यम से प्रत्यक्ष हस्तक्षेप से स्थिर मूल्य व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिली है। सरकार ने उपलब्ध कराए हैं सस्ते गेहूं और चावल भारत आटा और चावल के दूसरे चरण के लिए सरकार ने तीनों संगठनों को 3.69 लाख टन गेहूं और 2.91 लाख टन चावल उपलब्ध कराए है। इस योजना के पहले चरण के दौरान, लगभग 15.20 लाख टन भारत आटा और 14.58 लाख टन भारत चावल सामान्य उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर उपलब्ध कराया गया था। कहां मिलेंगे ये सामान इस बार भारत आटा और भारत चावल केन्द्रीय भंडार, नेफेड और एनसीसीएफ की दुकानों और मोबाइल वैन से बेचे जाएंगे। इसके साथ ही कई ई-कॉमर्स/बड़ी श्रृंखला वाले खुदरा विक्रेताओं के स्टोर और मोबाइल वैन पर उपलब्ध होंगे। दूसरे चरण के दौरान, ‘भारत’ ब्रांड का आटा और चावल 5 किलोग्राम और 10 किलोग्राम के बैग में बेचा जाएगा।

मध्यप्रदेश-राजस्थान ने चीता संरक्षण और कॉरिडोर विकास के लिए संयुक्त प्रबंधन समिति बनाई

Madhya Pradesh-Rajasthan form joint management committee for cheetah conservation and corridor development मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच चीता संरक्षण परियोजना को सुचारू रूप से संचालित करने और चीता कॉरिडोर के विकास के लिए दोनों राज्यों ने एक संयुक्त प्रबंधन समिति का गठन किया है। यह समिति चीता के संरक्षण, पर्यटन संभावनाओं और क्षेत्रों के विकास के लिए विस्तृत योजना बनाएगी। साथ ही, यह हर तीन माह में अपनी रिपोर्ट दोनों राज्यों की सरकारों को सौंपेगी। इस समिति के संयुक्त अध्यक्ष मध्यप्रदेश और राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य-जीव अभिरक्षक होंगे। अन्य सदस्य के रूप में चीता प्रोजेक्ट के निदेशक, क्षेत्र संचालक/संचालक, वन्य-प्राणी विशेषज्ञ, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि और भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून द्वारा नामांकित प्रतिनिधि होंगे। समिति मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच चीता परियोजना कॉरिडोर के लिए एमओयू का मसौदा तैयार करेगी। यह कॉरिडोर चीतों के सुरक्षित भ्रमण और उनके संरक्षण के लिए विकसित किया जाएगा। समिति कूनो और रणथंबौर क्षेत्रों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में पर्यटन के लिए नए मार्गों का मूल्यांकन करेगी। यह पर्यटन के अवसरों को बढ़ावा देने के साथ-साथ चीतों के संरक्षण में भी सहायक होगा। समिति उन अधिकारियों और फ्रंट-लाइन कर्मचारियों के क्षमता निर्माण पर भी ध्यान देगी, जो कूनो से राजस्थान तक मौजूदा कॉरिडोर में चीतों की निगरानी और गश्त में शामिल हैं। इससे चीतों की सुरक्षा और संरक्षण में सुधार आएगा। कूनो और गांधी सागर अभ्यारण्य क्षेत्रों से चीतों के भविष्य के माइग्रेशन के लिए उपयुक्त क्षेत्रों का विकास भी समिति के कार्यक्षेत्र में शामिल रहेगा। इसके लिए प्रि-औगमेंटेशन बेस तैयार कर सुधारात्मक उपाय किए जाएंगे।

ई-नगर पालिका 2.0 के विकास की प्रक्रिया, परियोजना डिजिटल इंडिया के उद्देश्य को बढ़ावा देना

भोपाल प्रदेश में नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा प्रदेश के सभी 413 नगरीय निकायों को कम्प्यूटरीकृत करने के उद्देश्य से वेब आधारित ई-नगर पालिका योजना प्रारंभ की गई है। यह परियोजना डिजिटल इंडिया के उद्देश्य को बढ़ावा देने तथा पारदर्शी एवं त्वरित नागरिक सेवा देने के लिये ई-गवनेंर्स का अनूठा उदाहरण है। ई-नगर पालिका द्वारा नगरीय निकायों द्वारा समस्त नागरिक सेवाओं, जन शिकायत सुविधा, निकायों की आंतरिक कार्य प्रणाली, समस्त भुगतान एवं बजट प्रक्रिया को एकीक्रत कर ऑनालइन सुविधा प्रदाय की जा रही है। मध्यप्रदेश ऐसा पहला राज्य है, जहां प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों को एक सिंगल पोर्टल पर लाया गया है। 22 नागरिक सेवाएं ई-नगर पालिका 1.0 को डेटाबेस के साथ प्लेटफार्म पर विकसित किया गया। वर्तमान में ई-नगर पालिका के माध्यम से 22 नागरिक सेवाएं प्रदाय की जा रही हैं, इसमें 15 मॉड्यूल शामिल हैं। ई-नगर पालिका का विभिन्न विभागों जैसे उद्योग, राजस्व, पंजीयन विभाग और भारत सरकार के महत्वपूर्ण मोबाइल एप उमंग से भी एकीकृत किया गया है। ई-नगर पालिका 1.0 पोर्टल के माध्यम से दी जा रही सभी नागरिक सेवाओं और विभागीय कार्यों को और बेहतर, सरल तथा सुगम बनाये जाने के उद्देश्य से वर्तमान में विभाग द्वारा ई-नगर पालिका परियोजना के द्वितीय चरण का विकास, क्रियान्वयन और संचालन नई टेक्नोलॉजी एवं उपकरणों के अनुसार कराये जाने का निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत 16 मॉड्यूल और 24 नागरिक सेवाएं शामिल होंगी। भौतिक संरचना को क्लाउड सेवाओं द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा। ई-नगर पालिका 2.0 में जीआईएस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी उपयोग किया जायेगा। ई-नगर पालिका 2.0 कॉमन सर्विस सेंटर, एम ऑनलाइन, कियोस्क सेंटर और भुगतान गेटवे के साथ ई-नगर पालिका 2.0 का एकीकरण किया जायेगा। इससे जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं। ई-नगर पालिका 2.0 पोर्टल के विकास के लिये 2 वर्ष तथा 5 वर्ष का O&M चयनित वेंडर द्वारा किया जायेगा।  

बंटेंगे तो कटेंगे के नारे से योगी ने जाति और संविधान वाले नैरेटिव को तोड़ा, महाराष्ट्र चुनाव में पीएम मोदी से अधिक रैली CM योगी करेंगे

मुंबई महाराष्ट्र चुनाव प्रचार अब जोर पकड़ने लगा है और कांग्रेस, बीजेपी समेत सभी दलों के स्टार प्रचारकों के दौरे शुरू हो गए हैं । अगले 13 दिनों तक बड़े नेता महाराष्ट्र में तूफानी दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र में 11 रैलियां करेंगे। आठ नवंबर से पीएम मोदी की जनसभा की शुरुआत होगी। 6 नवंबर को राहुल गांधी भी आरएसएस के गढ़ नागपुर से चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगे। 18 अक्तूबर की शाम को चुनाव प्रचार का शोर थम जाएगा। उससे पहले यूपी के मुख्यमंत्री और बीजेपी के ट्रंप कार्ड साबित हो चुके योगी आदित्य नाथ मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में 15 चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। वह पीएम मोदी से अधिक जनसभाओं में शिरकत करेंगे। एक्सपर्ट मानते हैं कि महाराष्ट्र में योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी और ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ वाले नारे का असर भी महाराष्ट्र चुनाव में दिखेगा। जम्मू और हरियाणा में राहुल गांधी पर भारी पड़े योगी हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ का करिश्मा नजर आया। जम्मू-कश्मीर में योगी आदित्यनाथ का स्ट्राइक रेट 90 फीसदी और हरियाणा में करीब 65 फीसदी रहा। जम्मू में योगी ने पांच विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी रैलियां कीं, जिनमें से चार पर बीजेपी को जीत मिली। बीजेपी किश्तवाड़ और कठुआ जैसे मुस्लिम बाहुल्य सीट पर जीतने में सफल रही। किश्तवाड़ में पहली बार बीजेपी की शगुन परिहार ने कमल खिलाया। हरियाणा में भी योगी आदित्यनाथ ने 20 विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किया, जिनमें से 13 पर बीजेपी को जीत मिली। यह जीत कांटे के मुकाबले में बीजेपी को तीसरी बार हरियाणा की सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित हुई। सीएम योगी ने हरियाणा में असंध से चुनावी रैली की शुरुआत की थी। इस सीट से ही राहुल गांधी प्रचार में उतरे थे। असंध में बीजेपी को जीत मिली। हरियाणा से कनाडा तक लगे ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ के नारे हरियाणा चुनाव में ही योगी आदित्यनाथ ने ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ के चुनावी नारे को लॉन्च किया। इस नारे में ग्राउंड पर इस कदर कमाल किया कि बीजेपी ने एंटी इम्कबेंसी और कांग्रेस के नैरेटिव को धवस्त कर दिया। यह नारा इनके जुबान पर इस कदर चढ़ा कि गैर चुनावी राज्यों में भी बीजेपी समर्थक इसे आजमाने लगे। लोकप्रियता का आलम यह है कि कनाडा में हमले के बाद हिंदू समुदाय ने अपने प्रदर्शन में’बंटेंगे तो कटेंगे’ के नारे लगाए। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के ऐलान के बाद मुंबई समेत राज्य के कई हिस्सों में योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के साथ ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ के पोस्टर लगाए गए। एक्सपर्ट मानते हैं कि चुनाव में एमवीए के लिए मुस्लिम वोटरों की एकजुटता का जवाब इस नैरेटिव से दिया जा सकता है। इससे पहले के चुनाव में बाबा का बुलडोजर भी काफी लोकप्रिय और प्रभावी साबित हुआ था। क्यों चलता है योगी आदित्यनाथ का करिश्मा चुनाव प्रचार के दौरान योगी आदित्यनाथ अपने भाषण की शुरुआत महिला विकास, किसान और विकास जैसे मुद्दों से करते हैं। ‘युवाओं के हाथ में तमंचा नहीं टेबलेट होना चाहिए’, यह उनकी पसंदीदा लाइनों में से एक है। इसके बाद मोदी सरकार के कार्यकाल में हुए काम के जरिये आतंकवाद को लेकर कांग्रेस को निशाने पर रखते हैं। आतंक की बात होती है तो पाकिस्तान की चर्चा लाजिमी है। पाकिस्तान और आतंकवाद के साथ ही वह अपना संदेश साफ कर देते हैं। दंगों की चर्चा करते हैं तो बुल्डोजर एक्शन के बारे में बताते हैं। राम मंदिर की चर्चा तो सभा में मौजूद के लोगों को अयोध्या में दर्शन का निमंत्रण देते हैं। जब समां बंध जाता है तो वह सभा में मौजूद लोगों से संवाद भी करते हैं। यूपी में सड़कों पर नमाज बंद, मस्जिदों में लगे लाउड स्पीकर हटाने और अपराधियों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन पर भी जनता का फीडबैक लेते हैं। हरियाणा में राहुल गांधी के जातिगत आरक्षण के जवाब में ही उन्होंने ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ का नारा दिया था।

माधोपुर :रणथंभौर टाइगर नेशनल पार्क से 25 बाघों के लापता होने की खबर आने के बाद हड़कंप मचा

 माधोपुर राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर टाइगर नेशनल पार्क से 25 बाघों के लापता होने की खबर आने के बाद हड़कंप मच गया है. राजस्थान के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक( chief wildlife warden) पवन उपाध्याय ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं. पिछले दिनों  रणथंभौर में टाइगरों के लापता होने की सूचना मिलने के बाद बाघों के खोजबीन के लिए कमेटी बनायी गई थी. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि 11 टाइगर कैमरा ट्रैप या अन्य माध्यमों से पिछले एक साल से नहीं दिखाई दे रहे हैं. नेशनल पार्क में 14 बाघों के एक साल से ज्यादा समय से ज़िंदा होने के सबूत नहीं मिल रहे हैं. ऐसे में 25 टाइगरों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है. इस बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए राजस्थान सरकार ने आदेश दिए हैं.  रणथंभौर में कुल 75 टाइगर हैं. जिसमें से 25 बाघों के लापता होने की खबर है. राजस्थान सरकार ने मामले की जांच के लिए कमेटी बनाने का फैसला किया है बाघों के लापता होने की सूचना मिलने के बाद हड़कंप मच गया है. सवाल ये उठ रहें हैं कि आखिर कैसे एक तिहाई टाइगर एक साल में गायब हो गए. इसको लेकर राजस्थान सरकार का वन विभाग लगातार रणथंभौर के फ़िल्ड डायरेक्टर को पत्र लिख रहा था. लेकिन इस पर संतोषप्रद जवाब नहीं आने की वजह से राजस्थान सरकार ने कमेटी बनाने का फैसला किया है. लापता टाइगरों के बारे में पता करने के लिए चीफ़ वाइल्ड लाइफ़ APCCF राजेश गुप्ता की अध्यक्षता में एक कमेटी बनायी गई है. जिसमें CCF जयपुर के टी मोहनराज और DCF भरतपुर मान सिंह को कमेटी का सदस्य बनाया गया है. कमेटी को दो महीने के अंदर रिपोर्ट देनी है. अगर जांच के दौरान जरूरत पड़ती है तो विशेषज्ञों की सेवाएं भी ली जाएंगी.  इस बीच रणथंभौर में मरे हुए टाइगर टी-86 का पोस्टमार्टम हुआ जिसमें कहा गया है कि एक्सप्लोसिव और कुल्हाड़ी से टाइगर की हत्या की गई है.  

बीजेपी को दिल्ली से मिली अच्छी खबर, एक सर्वे ने दिलाई उम्मीद, 43.4% वोट मिलने का अनुमान

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल अगले साल फरवरी में खत्म हा रहा है. ऐसे में जनवरी के अंत में विधानसभा चुनाव कराए जाने की उम्मीद है. इसी हफ्ते कोर ग्रुप के साथ चुनाव प्रबंध समिति और उम्मीदवार चयन समिति भी गठित हो सकती है. इससे पहले एक सर्वे दिखाता है कि बीजेपी का 28 साल का वनवास खत्म हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के हालिया अंदरूनी सर्वे के बाद 2013 के बाद पहली बार लग रहा है कि वो दिल्ली में सरकार बनाने की स्थिति में आ जाएगी. दरअसल, बीते दिनों पार्टी के अंदरूनी सर्वे में आगामी विधान सभा चुनाव में 43.4 फीसदी वोट मिलने की संभावना के बाद बीजेपी ने इसको 46 फीसदी तक ले जाने का टारगेट रखा है. ऐसे में महाराष्ट्र और झारखंड चुनाव नतीजों के बाद दिल्ली पर फोकस बढ़ेगा. महाराष्ट्र, झारखंड के बाद दिल्ली का रुख करेंगे RSS वर्कर्स दिल्ली के पड़ोसी राज्य हरियाणा में मिली जीत से उत्साहित बीजेपी का ध्यान इस वक्त महाराष्ट्र और झारखंड में भले हो लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने की रणनीति पर अमल अभी से शुरू हो गया है. लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी विधानसभा चुनाव में जिन वजहों से पीछे जाती है, उन पर अभी से ही पार्टी का फोकस है. इसके लिए आरएसएस के पदाधिकारियों ने हरियाणा की तर्ज पर पूरी ताकत लगा दी है और कार्यकर्ता हर बूथ पर 5 लोगों से मुलाकात कर रहे हैं. टिकट की रेस में सबसे आगे 2 पूर्व सांसद पार्टी के लोग बताते हैं कि पूर्व सांसद प्रवेश वर्मा और रमेश विधूड़ी को आम चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिल पाया, लिहाजा दोनो पूर्व सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया जा सकता है. दिल्ली नगर निगम से आधा दर्जन सीनियर पार्षद भी चुनाव लड़ सकते हैं. हालांकि, बीते दिनों कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली के साथ तीन बड़े नेताओं ने बीजेपी का दामन थामा था. तब से उन इलाकों के मौजूदा विधायक असहज हैं कि टिकट मिलेगा या नहीं. दिल्ली की इन सीटों पर NDA लड़ सकता है चुनाव पार्टी सूत्रों ने बताया कि जेडीयू और एलजेपी को संगम विहार, बुराड़ी, सीमापुरी सहित कुछ मुस्लिम बहुल सीटें दी जा सकती हैं. पार्टी ने सहयोगी दलों को तीन से पांच सीटें देने का मन बनाया है.  

भारतीय ओलंपिक संघ ने औपचारिक रुप से एक लेटर ऑफ इंटेंट इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी को भेजा

नई दिल्ली  ओलंपिक और पैरा ओलंपिक खेलों की मेजबानी के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपने को साकार करने के लिए भारत सरकार ने एक कदम आगे बढ़ा दिया है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारतीय ओलंपिक संघ ने 1 अक्टूबर 2024 को औपचारिक रुप से एक लेटर ऑफ इंटेंट इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी को भेज दिया है. सूत्रों ने बताया है कि ये लेटर ऑफ इंटेंट इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी की फ्यूचर होस्ट कमीशन को भेजा गया है. इस खत में लिखा है कि भारत 2036 में ओलंपिक खेल और पैरालिंपिक खेलों का आयोजन करना चाहता है. 2014 में पीएम पद संभालने के बाद से ही नरेन्द्र मोदी हमेशा इस बात के संकेत देते रहे कि वो भारत में ओंलंपिक खेलों का आयोजन करना चाहते हैं. 78वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से ही पीएम मोदी ने कहा था कि हर भारतीय का सपना है कि 2036 में भारत में ओलंपिक खेलों का आयोजन हो और हम लोग उस दिशा में प्रयास भी कर रहे हैं. 2023 में न्यूयॉर्क में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हे पीएम मोदी ने कहा था कि थोडे दिन पहले ही पेरिस में ओलंपिक खेलों का आयोजन हुआ था और अब आप जल्दी ही भारत मे भी ओलंपिक खेल होते हुए देखेंगे. हम 2036 में ओलंपिक के आयोजन के लिए हर संभव प्रयास करने मे जुट गए हैं. सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों का मानना है कि ओलंपिक का आयोजन एक बहुत बड़ा मौका होगा जिससे भारत का बहुत फायदा होगा. इससे आर्थिक क्षेत्र में प्रगति को नई दिशा मिलेगी, रोजगार बढ़ेगा, समाज की तरक्की भी होगी और युवाओं के सशक्तिकरण को नया आयाम मिलेगा।

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