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खालिस्तानी पन्नू के खिलाफ साजिश के आरोपी की गुहार, आरोपी ने बताया जान पर खतरा, कोर्ट से राहत

नई दिल्ली अमेरिका में खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की कोशिश करने के आरोपी विकास यादव ने दिल्ली की कोर्ट में एक आवेदन फाइल कर कहा है कि उन्हें सुनवाई में हाजिर होने से छूट दे दी जाए। उनका कहना है कि उनकी सारी डीटेल बाहर आ गई है इसलिए जान पर खतरा बना हुआ है। कोर्ट ने फिलहाल उन्हें छूट देते हुए 3 फरवरी को हाजिर होने का आदेश दिया है। 18 दिसंबर 23 को विकास यादव को उगाही और किडनैपिंग के मामले में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उससे पहले ही अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने विकास यादव का नाम पन्नू की हत्या में शामिल साजिश करने वाले के तौर पर लिया था। विकास यादव को अप्रैल 2014 में जेल से जमानत पर रिहा किया गया। इसके बाद 18 अक्टूबर को एफबीआई ने उन्हें वॉन्टेड घोषित कर दिया। आरोप लगाया गया था कि भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय ने विकास यादव को नियुक्त किया था जो कि प्रधानमंत्री कार्यालय का ही हिस्सा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि अब विकास यादव भारत सरकार के कर्मचारी नहीं हैं। आरके हांडू की तरफ से कोर्ट में पेश किए गए दो पेज के आवेदन में विकास यादव ने कहा कि उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस ने झूठा मुकदमा दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि उनके फोटोग्राफ, घर का अड्रेस और अन्य तस्वीरें भी अब सार्वजनिक हो गई हैं। ऐसे में उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर खतरा है। उनकी जान पर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जान के खतरे के बीच वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से भी सुनवाई में हाजिर नहीं हो सकते क्योंकि उनकी लोकेशन को ट्रैक किया जा सकता है। शनिवार को यादव का एप्लिकेशन कोर्ट के सामने लिस्ट किया गया था। कोर्ट ने इस बार सुनवाई में हाजिर होने से छूट देते हुए कहा कि अगली सुनवाई में हाजिर होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को होनी है। बता दें कि रोहिणी के रहने वाले एक व्यापारी ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि विकास यादव का लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कनेक्शन है और वह उगाही और किडनैपिंग में शामिल हैं। इसके बाद यादव और उनके सहयोगी अब्दुल्लाह खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली कोर्ट में 13 मार्च को उनके खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई। 22 मार्च को यादव को अंतरिम जमानत मिली और इसके बाद 22 अप्रैल को पूर्ण जमानत मिल गई।

SDM लिखी स्कॉर्पियो ने ईको कार को टक्कर मार दी, जिससे कार में सवार 2 लोगों की मौत, 5 घायल

खरगोन रविवार सुबह मध्य प्रदेश के खरगोन में भीषण सड़क दुर्घटना हो गई। SDM लिखी स्कॉर्पियो ने ईको कार को टक्कर मार दी, जिससे कार में सवार 2 लोगों की मौत हो गई। 5 लोग घायल हैं, जिनमें स्कॉर्पियो का ड्राइवर भी शामिल है। हादसा रविवार सुबह 6.40 बजे हुआ। मृतकों की पहचान रामलाल और शोभाराम के रूप में हुई है। कार डालकी से बुरहानपुर जा रही थी। कार एक बारात का हिस्सा थी। स्कॉर्पियो गाड़ी बड़वानी जिले के सेंधवा एसडीएम की बताई जा रही है। घायल ड्राइवर का भी इलाज जारी है। हादसा पीडब्ल्यूडी ऑफिस के सामने जवाहर मार्ग के मोड पर हुआ। घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। खरगोन कोतवाली पुलिस जांच में जुटी है। पुलिस के अनुसार, खरगोन में डायवर्सन रोड पर SDM लिखी स्कॉर्पियो (MP46T-0923) और ईको वाहन (MP09WD-4439) में तेज टक्कर हुई। दर्दनाक हादसे में जिले के टांडाबरूढ थाने के डालकी निवासी 50 वर्षीय रामलाल मांगीलाल और 49 वर्षीय शोभाराम नत्थू प्रजापत की मौके पर मौत हो गई। परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। कोतवाली थाने के उपनिरीक्षक श्रीराम भूरिया ने बताया कि बारात की कार टांडा बरूड थाने डालकी से बुरहानपुर जा रही थी। इस दौरान डायवर्शन रोड पर पीडब्लूडी कार्यालय के सामने ईको कार और स्कार्पियो कार में भिड़ंत हो गई। एसडीएम लिखी कार को लेकर कोतवाली पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही पता चलेगा कि स्कॉर्पियो कार किसकी थी। कोतवाली थाने में मर्ग कायम कर जांच की जा रही है। बताया जा रहा है की डायवर्सन रोड पर पीडब्ल्यूडी ऑफिस के सामने तेज गति से सेंधवा की ओर जा रही एसडीएम के वाहन ने जवाहर मार्ग के मोड रही ईको कार सीधे टक्कर मारी। 5 घायलों का जिला अस्पताल में उपचार जारी है। सभी खतरे से बाहर बताए जा रहे है। दोनो वाहनों को पुलिस ने मौके से ताबड़तोड़ हटवा दिया है।

वास्तविक मूल्य पर मिल सकेगा बैंक लोन, गाइड लाइन मूल्य पर ही लगेगा रजिस्ट्री शुल्क

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के पहल पर छत्तीसगढ़ सरकार ने संपत्ति खरीदने वाले मध्यम वर्ग के लोगों को बड़ी राहत दी है। अब किसी भी प्रापर्टी की खरीद-बिक्री में गाइड लाइन दर से सौदे की रकम अधिक होने पर भी रजिस्ट्री शुल्क गाइड लाइन दर के अनुसार ही लिया जाएगा। इससे बैंक लोन पर निर्भर मध्यम वर्गीय परिवार को वास्तविक मूल्य के आधार पर ऋण मिल सकेगा।   उल्लखेनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी की अध्यक्षता में पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले से विशेषकर उन नागरिकों को लाभ होगा, जो बैंक ऋण के माध्यम से संपत्ति खरीदते हैं। पूर्व में संपत्ति की खरीद-बिक्री में गाइड लाइन दर और सौदे की राशि में जो भी अधिक होता था, उस पर रजिस्ट्री शुल्क देना आवश्यक था। उदाहरण के लिए यदि किसी संपत्ति का गाइड लाइन मूल्य 10 लाख रुपये है और उसका सौदा 15 लाख में हुआ, तो रजिस्ट्री शुल्क 15 लाख पर 4 प्रतिशत के हिसाब से 60 हजार रुपये देना पड़ता था। इस नियम में संशोधन के बाद संपत्ति खरीदने वाले अब सौदे की रकम गाइड लाइन दर से अधिक होने पर भी वास्तविक मूल्य को अंकित कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें कोई रजिस्ट्री शुल्क नहीं देना होगा। 10 लाख रुपये की गाइड लाइन मूल्य वाली प्रॉपर्टी का सौदा 15 लाख में होता है, तो भी रजिस्ट्री शुल्क 10 लाख के 4 प्रतिशत के हिसाब से 40 हजार रुपये देय होगा। इस तरह 20 हजार रुपये की बचत होगी। वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने बताया कि इस संशोधन से मध्यम वर्गीय परिवारों को वास्तविक मूल्य के आधार पर अधिक बैंक ऋण प्राप्त करने में सहूलियत होगी। इसके अलावा यह निर्णय संपत्ति बाजार में पारदर्शिता व स्पष्टता को बढ़ाने में भी सहायक होगा और इससे वास्तविक मूल्य दर्शाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा।    देश के अन्य राज्यों में जमीन की गाइडलाइन कीमत या सौदा मूल्य दोनों में से जो ज्यादा हो उस पर पंजीयन शुल्क लगता है। केवल मध्य प्रदेश में गाइडलाइन कीमत से अधिक सौदा मूल्य दर्शाने पर उसमें पंजीयन शुल्क में छूट दी गई है। इसके कारण वहां लोगों में वास्तविक सौदा मूल्य को रजिस्ट्री पेपर में लिखने की प्रवृत्ति में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।   वर्तमान में किसी संपत्ति का सौदा मूल्य सामान्यतः गाइडलाइन मूल्य से बहुत ज्यादा होता है। लेकिन लोग गाइडलाइन मूल्य या इसके आसपास का ही सौदा मूल्य अंकित करते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि अगर वास्तविक सौदा राशि अंकित कर देंगे, तो पंजीयन शुल्क गाइडलाइन मूल्य या वास्तविक सौदा राशि दोनों में से जो ज्यादा हो उस पर लगेगा। अधिक पंजीयन शुल्क से बचने के लिए लोग गाइडलाइन कीमत या इसके आसपास पूर्णांकित करते हुए सौदा मूल्य डाल देते हैं। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार की इस पहल का सीधा लाभ राज्य के सभी मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा क्योंकि अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवार संपत्ति खरीदने के लिए बैंक लोन पर निर्भर रहते हैं। बैंक लोन रजिस्ट्री पेपर में दिखाए गए सौदे के रकम के आधार पर मिलता है, लोग पंजीयन शुल्क से बचने के लिए गाइडलाइन कीमत के बराबर सौदा मूल्य दिखाते हैं।कम सौदा कीमत दिखाएं जाने से बैंक लोन भी कम मिलता है।इस नीति से आमजनों को न्यायिक प्रकरणों में भी संपत्ति का वास्तविक मूल्य प्राप्त होगा। यदि कभी संपत्ति में कुछ धोखाधड़ी पायी गई तो व्यक्ति विक्रेता से वही मुआवजा पाने का हकदार होता है, जो रजिस्ट्री पेपर में लिखा हुआ। संपत्ति का सही मूल्य रजिस्ट्री में अंकित होने से प्रभावित व्यक्ति को उसका सही मुआवजा प्राप्त हो पायेगा।

साहसिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध बस्तर के धुड़मारास गांव की पहचान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुई स्थापित

रायपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के छोटे से गांव धुड़मारास ने देश और दुनिया में अपनी अनोखी पहचान बनाई है। बस्तर जिले के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के उन्नयन कार्यक्रम के लिए चयनित किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के पर्यटन ग्राम उन्नयन कार्यक्रम के लिए 60 देशों से चयनित 20 गांवों में भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के धुड़मारास ने भी अपनी जगह बनाई है।   मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि के लिए पर्यटन विभाग की टीम के साथ ही बस्तर जिला प्रशासन तथा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों व कर्मचारियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धुड़मारास की सफलता का मुख्य श्रेय यहां के स्थानीय निवासियों को जाता है, जिन्होंने अपने पारंपरिक ज्ञान और संसाधनों को संरक्षित रखते हुए इसे आकर्षक पर्यटक स्थल में बदल दिया है। धुड़मारास प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। बस्तर के अदभुत आदिवासी जीवनशैली, पारम्परिक व्यंजन, हरियाली और जैव विविधता से समृद्ध यह गांव पर्यटकों के लिए एक आकर्षक ही नहीं बल्कि रोमांचक स्थल है। धुड़मारास गांव दुनिया भर के उन 20 गांवों में से एक है जिसे सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव उन्नयन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए चुना गया है। धुड़मारास को इसकी अनूठी सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संुदरता और सतत पर्यटन विकास की क्षमता के कारण चुना गया है। उन्नयन कार्यक्रम में शामिल होने से गांव को उन संसाधनों तक पहंुंच प्राप्त होगी जो इसके पर्यटन बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, सांस्कृतिक संपत्तियों को बढ़ावा देने और ग्रामवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार में मदद करेंगे। विश्व स्तर पर पर्यटन गांव के रूप में इस गांव की पहचान स्थापित होने का तात्पर्य यह भी है कि लंबे समय के बाद बस्तर में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है। उल्लेखनीय है कि धुड़मारास तथा बस्तर के ही चित्रकोट गांव को इस वर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव का पुरस्कार मिला था।       प्रकृति की गोद में बसा धुड़मारास गांव घने जंगलों से घिरा हुआ है। गांव के बीच से बहती कांगेर नदी इसे मनमोहक बना देती है। बस्तर के लोग मेहमाननवाजी के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग अपने घरों को पर्यटकों के लिए उपलब्ध करवा रहे हैं, ठहरने की सुविधा उपलब्ध करवाने से उन्हें रोजगार मिल रहा है। गांव के युवा पर्यटकों को आसपास के क्षेत्रों की सैर कराते हैं। स्थानीय खानपान के अंतर्गत पर्यटकों को बस्तर के पारम्परिक व्यंजन परोसे जाते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर में पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए ट्रैकिंग ट्रेल और कैंपिंग साइट विकसित करने सहित होम-स्टे की सुलभता हेतु पहल कर रही है। साथ ही स्थानीय शिल्पकारों और कलाकारों को प्रोत्साहन दे रही है, जिससे ईलाके के रहवासी ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार की उपलब्धता होने के साथ आय संवृद्धि हो सके। राज्य सरकार पर्यटकों को आकर्षित करने हेतु क्षेत्र में सड़कों और परिवहन सुविधाओं का विकास पर भी ध्यान दे रही है। बस्तर के पर्यटन स्थलों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में देश के पर्यटकों सहित अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए व्यापक प्रचार- प्रसार किया जा रहा है। वहीं स्थानीय हस्तशिल्प और कला को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।     छत्तीसगढ़ सरकार के वन एवं पर्यटन विभाग ने धुड़मारास को ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब जिले के नागलसर और नेतानार में भी स्थानीय युवाओं की ईको पर्यटन विकास समिति द्वारा गांव में बहने वाली शबरी एवं कांगेर नदी में कयाकिंग एवं बम्बू राफ्टिंग की सुविधा पर्यटकों को मुहैया कराई जा रही है। साथ ही स्थानीय व्यंजन से पर्यटकों को बस्तर के पारम्परिक खान-पान का स्वाद मिल रहा है। गांव के युवाओं की ईको पर्यटन विकास समिति कांगेर नदी में कयाकिंग और बम्बू राफ्टिंग की सुविधाएं पर्यटकों को उपलब्ध करवाती है, जिससे इस समिति को अच्छी आमदनी हो रही है। यह पर्यटन समिति अब अपनी आय से गांव में पर्यटकों के लिए प्रतीक्षालय और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित कर रहे हैं।           बेस्ट टूरिज्म विलेज धुड़मारास की कहानी यह साबित करती है कि जब सामुदायिक भागीदारी और शासन का सहयोग मिलता है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक और सांस्कृतिक विकास संभव है। यह गांव अब बस्तर के अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन गया है। यही वजह है कि कांगेर घाटी नेशनल पार्क के नागलसर और नेतानार में भी ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिल रहा है।

स्व. माधवराव सिंधिया जी की प्रतिमा के आपत्तिजनक स्थानांतरण पर गंभीरतापूर्वक संज्ञान ले: विष्णुदत्त शर्मा

कटनी राष्ट्रीय राजमार्ग 30, कटनी बायपास मार्ग पर स्थापित श्रद्धेय स्व. माधवराव सिंधिया जी की प्रतिमा के आपत्तिजनक स्थानांतरण पर प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा जी ने तत्काल गंभीरतापूर्वक संज्ञान लेते हुए कड़ाई से कलेक्टर और NHAI के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मूर्ति का विस्थापन सौंदर्यीकरण के साथ अच्छे से अच्छी जगह किया जाए। राष्ट्र एवं समाज के निर्माण में योगदान देने वाले महापुरूषों की प्रतिमा के साथ इस प्रकार की असंवेदनशिलता अस्वीकार्य है । इसके बाद  NHAI के परियोजना निदेशक ने जिम्मेदार सीनियर इंजीनियर श्री मनोज वर्मा एवं इंजीनियर श्री आशीष सिंह परिहार तथा टीम लीडर श्री राजेश कुमार नेमा एवं सहायक ब्रिज इंजीनियर श्री दीपक सोनी को दोषी पाए जाने के बाद त्वरित रूप से सेवा से निलंबित कर दिया गया है। स्वर्गीय सिंधिया जी की प्रतिमा सम्मान से स्थापित की गई है तथा उत्कृष्ट सौंदर्यीकरण किया जाएगा।

‘गोरखधंधा’ नाटक का मंचन दिल्ली के द ब्लैंक कैन्वस थियेटर में किया

मुंबई मशहूर क्राइम शो सनसनी के एंकर श्री वर्धन त्रिवेदी की गरिमामय उपस्थिति में  “मास्क प्लेयर्स आर्ट ग्रुप” (एम पी ए जी) ने ‘गोरखधंधा’ नाटक का मंचन दिल्ली के द ब्लैंक कैन्वस थियेटर में किया। शनिवार 16 नवंबर, 2024 को खेला गया ये नाटक जयवर्धन का लिखा और चन्द्र शेखर शर्मा द्वारा निर्देशित किया गया।  नाटक में दिल्ली प्रॉपर्टी का मालिक सज्जन और उसका नौकर गुल्लू अवैध तरीके से सरकारी घर किराए पर देकर किराएदारों संग गोरखधंधा करते हैं।  मकान खाली कराने और रुपये  ठगने के लिए वो झूठी- झूठी  कहानियाँ बनाते हैं। लेकिन एक किराएदार गीता इनके झूठ के जाल में इन्हीं को फंसा कर नाक रगड़वा देती है। नाटक की कहानी और डायलाग्स का दर्शकों ने जमकर मज़ा लिया। निर्देशन सधा हुआ रहा और एक्टर्स की कामेडी टाईमिंग ने  दर्शकों को हँसा-हँसा कर लोटपोट  कर दिया। इस अवसर पर नाटक के लेखक जयवर्धन भी उपस्थित रहे और कलाकारों की सराहना की। सज्जन की भूमिका में आशीष शर्मा, गुल्लू- निखिल झा, गीता- इवा दंदोना,नटवर- आशुतोष श्रीवास्तव, गुप्ता जी – पुष्कर सागर,भास्कर व कृष्ण कुमार की भूमिका  जतिन शौर्य ने निभायी। मंच के पीछे  रजत शर्मा, मनोज, मयंक शर्मा, सरिता राणा, शिवदत्त पाँडे, ममता रानी, विपिन गुप्ता  व राकेश शर्मा ने अच्छा सहयोग किया।

छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को सींच रहे, मजदूर पिता की बेटी रितिका के जज़्बे को मुख्यमंत्री ने सराहा

रायपुर धमतरी की रहने वाली मजदूर पिता की बैडमिंटन प्लेयर बेटी रितिका ध्रुव ने कभी नहीं सोचा था कि उसका अपने खेल के प्रति जुनून एक दिन उसे मुख्यमंत्री से रूबरू करवा देगा। आज जब रितिका को मोबाइल पर वीडियो कॉल में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का स्नेहमयी चेहरा नजर आया तो उसे विश्वास नहीं हुआ कि उसकी बात प्रदेश की मुखिया से हो रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने रितिका से बात करते हुए उसके बैडमिंटन के हुनर को सराहा और उसका हौसला बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप इसी तरह अपने बैडमिंटन के हुनर को निखारिये। खूब आगे बढ़िये और अपने माता-पिता के साथ पूरे छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाइये। हम आपके साथ हैं, आपको बैडमिंटन के लिए जो भी सहायता व सुविधाएं चाहिए उसे हम आपको देंगे। मुख्यमंत्री की ये बात सुनकर रितिका का चेहरा खिल उठा। मुख्यमंत्री श्री साय ने रितिका से वीडियो-कॉल में बड़ी आत्मीयता से बात की और उसके बैकग्राउंड के विषय में जाना। रितिका ने बताया कि उसके पिता जीवनयापन के लिए मजदूरी का कार्य करते हैं और माता आंगनबाड़ी सहायिका हैं। उसे बचपन से ही बैडमिंटन के खेल में रुचि थी। समय के साथ उसका ये शौक जुनून में बदल गया और वह पूरे तरह से इस खेल के प्रति समर्पित हो गयी। मगर परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि बड़े स्तर के टूर्नामेंट के लिए वह अपने टैलेंट को तराश सके। मुख्यमंत्री ने संघर्षों के बावजूद बैडमिंटन में शानदार प्रदर्शन के लिए रितिका की खूब सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय को रितिका ने वीडियो कॉल पर बताया कि उसने बंगलुरू में खेलो-इंडिया यूनवर्सिटी लेवल गेम्स और हाल ही में ओडीसा में नेशनल टूर्नामेंट में हिस्सा लिया है। वह आगे नेशनल-इंटरनेशनल स्तर पर खेलना चाहती है और ओलम्पिक में मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करना चाहती है। मुख्यमंत्री श्री साय ने रितिका से कहा कि आपका ओलम्पिक का सपना भी पूरा होगा। मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ वे राज्य ओलंपिक संघ के अध्यक्ष भी हैं। आपकी तरह छत्तीसगढ़ की बेटियां जो अपने खेल में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं, उन्हें सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा। मुख्यमंत्री को रितिका ने बताया कि वो अभी बीए अंतिम वर्ष में पढ़ाई भी कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने रितिका को खेल के साथ अपनी पढ़ाई भी पूरे मन से करने प्रोत्साहित किया। उन्होंने बिटिया को खूब आशीर्वाद देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री से बात कर के रितिका के चेहरे पर खुशी की मुस्कान छा गयी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री साय लगातार प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं। उनका प्रयास है कि राज्य में खेल का मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बनने के साथ-साथ यहां के टैलेंट को आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले। इसी क्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने विगत दिनों छत्तीसगढ़ की पर्वतारोही निशा को किलिमंजारो पर्वत फतह करने कॉल कर पूरी मदद का आश्वासन दिया था। आज जब मुख्यमंत्री ने रितिका के संघर्ष और उसकी बैडमिंटन की प्रतिभा को जाना तो वीडियो कॉल पर बिटिया का हौसला बढ़ाया।

एनसीएल की बड़ी योजना: सिंगरौली में बस्ती का पुनर्वास और 60 करोड़ टन कोयला खनन का लक्ष्य

NCL’s big plan: rehabilitation of settlement in Singrauli and target of mining 60 crore tonnes of coal सिंगरौली  । कोल इंडिया की शाखा एनसीएल एक बड़ी पुनर्वास और पुनर्स्थापन (आरएंडआर) परियोजना की योजना बना रही है। कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) बी साईराम ने कहा कि इसके तहत मध्य प्रदेश के सिंगरौली में एक बस्ती के निवासियों को स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है, जिसके नीचे 60 करोड़ टन खनन योग्य कोयला है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि मध्य प्रदेश के सिंगरौली में मोरवा बस्ती 927 हेक्टेयर में फैली हुई है। यह एक बड़ी परियोजना है, जिसमें नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) की मोरवा बस्ती को पूरी तरह स्थानांतरित किया जाएगा। साईराम ने कहा, अच्छी बात यह है कि इस अधिग्रहण में लोग पुनर्वास के लिए तैयार हैं। इसलिए आधी समस्या हल हो गई है, क्योंकि पहला प्रतिरोध लोगों की तरफ से ही आता है। उन्होंने कहा कि अब केवल मुआवजे की दरों और आरएंडआर लाभ को अंतिम रूप देना बाकी है। पिछले छह महीनों से एनसीएल पुनर्वास और पुनर्स्थापन पर लोगों के साथ नियमित रूप से बातचीत कर रही है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन एनसीएल की मदद कर रहा है और पुनर्वास के पहले चरण का ब्यौरा तैयार किया जाना है। सीएमडी ने कहा, मई से हम मुआवजे का पहला चेक देना शुरू कर देंगे। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 572.5 हेक्टेयर कृषि भूमि खाली कराई जानी है। सूत्रों के अनुसार कंपनी अभी भी योजना के विवरणों पर काम कर रही है, जिसमें वित्तीय पक्ष भी शामिल हैं। मोरवा बस्ती पुनर्वास और पुनर्स्थापन परियोजना बहुत बड़ी होगी और इस पर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुमानित व्यय होने का अनुमान है। इस परियोजना से 30 हजार परिवार प्रभावित होंगे और इसमें 22 हजार घरों, संरचनाओं का स्थानांतरण शामिल होगा।

युग कवि मुक्ति बोध के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रसंग मुक्तिबोध का आयोजन सम्पन्न

बिलासपुर जीवन मूल्यों के प्रयोगधर्मी कवि और नई कविता को विशिष्ट स्वरूप प्रदान करने वाले युग कवि मुक्ति बोध के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रसंग मुक्तिबोध का आयोजन डीपी चौबे स्मृति ट्रष्ट भवन बिलासपुर के सभागार में सम्पन्न हुआ ।दो दिवसीय (16,17 नवम्बर ) आयोजन के प्रथम दिवस 16 नवम्बर के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध आलोचक वीरेंद्र यादव ने की ।मुख्य वक्ता वरिष्ठ,कवि, कथाकार रणेंद्र थे ।आलोचक जयप्रकाश द्वारा मुक्तिबोध की जीवनी पर लिखी कृति एक अधूरी दीर्घ कविता पर आधारित यह आयोजन था । इस वैचारिक आयोजन के वक्ता डॉ कल्याणी वर्मा, नन्द कुमार कंसारी, थे ।बिलासपुर प्रलेसं के अध्यक्ष हबीब खान इस अवसर पर प्रमुखता से उपस्थित थे ।आधार वक्तव्य प्रलेसं सचिव रफीक खान ने दिया ।  इस अवसर पर मुख्य वक्ता रणेंद्र ने विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा मुक्ति बोध संस्कृति के विरुद्ध कभी नही रहे। वे यथास्थितिवाद के खिलाफ थे जो हमें परिवर्तन करने से रोकता है । प्रेमचंद को पढ़कर उनकी मां ने मुक्तिबोध को साहित्य की पहली शिक्षा दी । अध्यक्षता कर रहे प्रखर आलोचक वीरेंद्र यादव ने कहा कि आज के भयावह दौर में प्रतिरोध की बात करना बड़ी बात है ।मुक्तिबोध की सारी रचना समाज को बेहतरी की ओर ले जाने वाली है उनकी सोच कबीर की सोच थी ।       इस अवसर पर जयप्रकाश ने अपनी कृति में उल्लेखित मुक्तिबोध के संघर्षपूर्ण जीवनी को रेखांकित किया ।कुसुम माधुरी टोप्पो ने मुक्तिबोध की कविताओं का पाठ किया। आरम्भ में संरक्षक राजेश्वर सक्सेना के शुभकामना संदेश को प्रोजेक्टर में प्रसारित किया गया । इप्टा बिलासपुर के अध्यक्ष अरुण दाभड़कर ने आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला । आयोजन का संचालन छत्तीसगढ़ प्रलेसं के महासचिव परमेश्वर वैष्णव ने किया । आभार प्रदर्शन प्रलेसं बिलासपुर सचिव अशोक शिरोडे करते हुए नथमल शर्मा के शुभकामना संदेश की सूचना दी।  इस आयोजन में सत्यभामा अवस्थी, लोकबाबू ,नरेश अग्रवाल,हबीब खान, आर के सक्सेना,मंगला देवरस,सचिन शर्मा,मधुकर गोरख,मुस्ताक मकवाना,लखन सिंह,कोमल सिंह शारवा,श्याम बिहारी बनाफर,विमल झा,साक्षी शर्मा,प्रमिथियस ठाकुर संकल्प यदु मांझी अनन्त,पोषल वर्मा,विश्वासी एक्का, मृदुला सिंह आशा शर्मा,आदि साहित्यकार उपस्थित थे आयोजन के अंत मे राजकमल नायक के निर्देशन में मुक्तिबोध की कविताओं पर आधारित नाट्य मंचन इप्टा बिलासपुर द्वारा किया गया । वरिष्ठ कवि वेद प्रकाश अग्रवाल, और डॉ आलोक वर्मा की अध्यक्षता में और संजय शाम के संचालन में काव्य पाठ का आयोजन किया गया ।जिसमें छत्तीसगढ़ प्रलेसं की विभिन्न जिला इकाइयों से आये कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया ।

ठेके पर चलती शासकीय प्राथमिक पाठशाला, विभाग की मोन स्वीकृति के चलते सालों से नहीं आए शिक्षक पढ़ाने

 टीकमगढ़ मध्य प्रदेश का टीकमगढ़ जिला  इन दिनों काफी सुर्खियां बटोर रहा है अधिकारियों की साठ गाठ के चलते शिक्षा के अभाव में बच्चों का भविष्य ही चौपट हो रहा है  जहां एक ओर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ सबके विकास के लिए प्रतिबद्ध नजर आते हैं  वहीं दूसरी ओर प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव प्रदेश को विकास की गति देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं लेकिन शिक्षा के बिना कोई भी प्रदेश विकास नहीं कर सकता है प्रदेश में शिक्षा का स्तर गिरने का कारण ही ऐसे शिक्षक हैं जो सरकार द्वारा मोटी सैलरी तो लेते हैं मगर स्कूल जाकर बच्चों को पढ़ाना उन्हें गवारा नहीं है जी हां हम बात कर रहे हैं लिधौरा संकुल के कछियाना खिरक मरगुवा  शासकीय प्राथमिक बिद्यालय की जहां पर शासन द्वारा दो शिक्षक नियुक्त हैं मगर अरविंद दांगी नाम के एक शिक्षक ऐसे भी हैं जो आज से नहीं बल्कि कई सालों से विद्यालय ही नहीं आए हैं और उनकी सैलरी तैयार होकर उनके अकाउंट में चली जाती है यह इतने दबंग शिक्षक हैं कि यदि ग्रामीण गार्जियन विद्यालय में आने के लिए फोन लगाते हैं तो बह ग्रामीणों को धमकी तक दे डालते हैं आप विद्यालय की हालत का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि दो-दो टीचर होने के बावजूद भी विद्यालय में महीनों प्राइवेट टीचर से बच्चों को पढ़ाया गया मामला मीडिया के संज्ञान में आते ही लिधौरा संकुल प्राचार्य ने ऑडी पर एक टीचर की आनन फानन में नियुक्ति कर दी इस प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चे पढ़ते हैं जिनको पानी भी पीने के लिए नसीब नहीं होता है बात यहीं पर समाप्त नहीं होती है बच्चों को बाथरूम के लिए खेतों में जाना पड़ता है यहां पर जो बाथरूम बने हुए हैं उनकी महीना से कोई सफाई नहीं हुई है और जर्जर हालत में हैं

प्रदेश में खूब बिक रहा गेहूं का बिजवारा, अब तक हो चुकी 50 फीसदी बोवनी, लोकवन पूर्णा, 513 जैसी किस्म का जोर

उज्जैन  इस वर्ष मालवा की माटी में गेहूं की बंपर पैदावार होने की संभावना है। करीब 4.5 लाख हेक्टेयर में बोवनी की जा रही है। चने की बोवनी का रकबा कम बताया जा रहा है। किसान तेजस, पोषक, 322 किस्म के गेहूं का बीज ज्यादा पसंद कर रहे हैं। बीते तीन वर्षों से किसानों को सोयाबीन भाव ठीक नहीं मिल रहे हैं, जबकि गेहूं के भाव काफी अच्छे मिल रहे हैं। यही कारण है कि किसानों का रुझान चने की बनिस्बत गेहूं की बोवनी पर अधिक है। अब तक हो चुकी 50 फीसदी बोवनी     कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष 4.50 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बोवनी की जा रही है। अब तक 50 फीसद बोवनी हो चुकी है। किसान अधिक उत्पादन के किस्म का गेहूं अधिक बो रहे हैं।     व्यापारी अखिलेश जैन के अनुसार, किसानों ने पोषक, तेजस, 322 किस्म का बिजवारा अधिक खरीदा। इस किस्म के गेहूं का उत्पादन काफी अच्छा बताया जा रहा है।     बीज कंपनी से लेकर व्यापारिक क्षेत्र में यह गेहूं 3300 से 4500 रुपया क्विंटल तक बिक गया। इसके बाद किसानों ने पर्याप्त पानी के चलते लोकवन पूर्णा, 513 जैसी किस्म को बोया है। इनके भाव भी ऊंचे में 4000 रुपया क्विंटल तक रहे। देशावर में खूब बिक रहा गेहूं का बिजवारा इस वर्ष देशावर में गेहूं के बीज की आपूर्ति मालवा क्षेत्र से हो रही है। 322, लोकवन, पूर्णा, पोषक गेहूं के बीजवारे की मांग महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार में काफी चल रही है। इस कारण गेहूं के भाव भी ऊंचे हैं। शरबती की बोवनी नगण्य किसी समय में मालवा की माटी का शरबती की मिठास देश के महानगरों में काफी पसंद की जाती थी। मुंबई में इस गेहूं की कीमत 5 से 8 हजार रुपये क्विंटल तक होती थी, लेकिन जिले के सभी क्षेत्र में पानी पर्याप्त मात्रा में होने से किसानों ने शरबती गेहूं की बोवनी से किनारा कर लिया। बता दें इस किस्म का गेहूं काफी कम पानी की पैदावार है। उत्पादन भी अन्य गेहूं की बनिस्बत कम है। अब अधिक उत्पादन पर किसान ध्यान देता है।

हरियाणा टीईटी परीक्षा फॉर्म में सुधार करने आज अंतिम मौका, इसके बाद विंडो हो जाएगी बंद, परीक्षा 7 और 8 दिसंबर को होगी

नई दिल्ली हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा फॉर्म में सुधार करने का कल आखिरी मौका है। बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन हरियाणा की ओर से आज टीईटी करेक्शन विंडो को बंद कर दिया जाएगा। इसलिए, परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट https://bseh.org.in/home पर जाकर आवेदन पत्र में सुधार कर लें। अभ्यर्थी इस बात का ध्यान रखें कि हरियाणा बोर्ड ने यह स्पष्ट किया है कि सुधार करने की अंतिम तिथि बीतने के बाद दूसरा मौका नहीं दिया जाएगा। इसलिए समय पर अपनी गलती को सुधार लें। हरियाणा बोर्ड की ओर से हाल ही में एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इसमे टीईटी परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को एक दिन के लिए बढ़ाया दिया गया था। नई तिथि के मुताबिक, कैंडिडेट्स को 15 नवंबर, 2024 तक का समय दिया गया था, जबकि पहले यह 14 नवंबर, 2024 थी। साथ ही यह जानकारी भी दी गई थी कि 17 नवंबर, 2024 तक करेक्शन विंडो ओपन रहेगी। इसके बाद किसी भी अनुरोध को पर विचार नहीं किया जाएगा। उम्मीदवारों की सहूलियत के लिए नीचे आसान स्टेप्स दिए जा रहे हैं, जिनको फाॅलो करके अभ्यर्थी आसानी से परीक्षा फॉर्म में करेक्शन कर सकते हैं।   सबसे पहले कैंडिडेट्स को बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन हरियाणा आधिकारिक वेबसाइट bseh.org.in पर जाना होगा। अब, होम पेज पर उपलब्ध हरियाणा टीईटी सुधार विंडो लिंक पर क्लिक करें। एक नया पेज खुलेगा, जहां उम्मीदवारों को लॉगिन विवरण दर्ज करना होगा। सबमिट पर क्लिक करें और आवेदन पत्र खुल जाएगा। आवेदन पत्र में बदलाव करें और सबमिट पर क्लिक करें। एक बार हो जाने पर, पुष्टिकरण पृष्ठ डाउनलोड करें। आगे की आवश्यकता के लिए इसकी एक हार्ड कॉपी अपने पास रखें।   हरियारणा, एचटीईटी परीक्षा का आयोजन 7 दिसंबर और 8 दिसंबर को किया जाएगा। यह एग्जाम विभिन्न पालियों में कंडक्ट कराया जाएगा। जारी शेड्यूल के मुताबिक 7 दिसंबर 2024 को लेवल-III की परीक्षा शाम 3 बजे से 5.30 बजे तक ली जाएगी। लेवल-I की परीक्षा 8 दिसंबर को दोपहर 3 बजे से 5.30 बजे तक ली जाएगी। इसी तारीख को लेवल-II की परीक्षा सुबह 10 बजे से 12.30 बजे तक कंडक्ट कराई जाएगी।

जनकपुर-अयोध्या के ऐतिहासिक संबंधों का साक्षी बनेगा श्रीराम का तिलकोत्सव

अयोध्या अयोध्या में भगवान श्रीराम का तिलकोत्सव 18 नवंबर सोमवार को रामसेवकपुरम में भव्य आयोजन के साथ सम्पन्न होगा। यह आयोजन प्रभु श्रीराम और जनकपुर के ऐतिहासिक संबंधों को पवित्रता को पुनः जीवंत करने का एक विशेष अवसर का साक्षी बनने जा रहा है। आयोजनकर्ता ने बताया कि सोमवार दोपहर दो बजे विधि विधान पूर्वक प्रारम्भ होने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में जनकपुर से आए लगभग 300 से अधिक तिलकहरू (शुभचिंतक) और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रहेगी। यह आयोजन न केवल धार्मिक परंपराओं को सजीव करेगा, बल्कि भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान करेगा। इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। रामसेवक पुरम परिसर को इस विशेष अवसर के लिए भव्य रूप से सजाया गया है। परंपरागत रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक धरोहर को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। जनकपुर से तिलकहरुओं का आगमन 16 नवंबर से ही प्रारंभ हो गया है। उनकी आवभगत और ठहरने की व्यवस्था कारसेवकपुरम, अभयदाता हनुमान आश्रम, विवेक सृष्टि, माता सरस्वती देवी मंदिर और तीर्थ क्षेत्र भवन में की गई है। रामसेवक पुरम के मंच पर 18 वर्षीय युवक को प्रभु श्रीराम के स्वरूप में सज्जित किया जाएगा। श्रीराम स्वरूप को आटे से बने चौक या सिंहासन पर विराजमान किया जाएगा। जनकपुर से आए तिलकहरू परंपरागत वस्तुएं जैसे कांसे के बर्तन, पीली धोती, गमछा, करधनी, हल्दी, चंदन, धान, दूब, पान, इलायची, सुपारी, जनेऊ और चांदी के सिक्के लेकर आएंगे और इन्हें तिलक समारोह के दौरान प्रभु श्रीराम के स्वरूप को भेंट करेंगे। तिलक समारोह में सीता जी के छोटे भाई के रूप में तिलक चढ़ाने की भूमिका जानकी मंदिर, जनकपुर के छोटे महंत रामरोशन दास जी निभाएंगे। वे वेदज्ञ आचार्यों के मंत्रोच्चार के बीच प्रभु श्रीराम के स्वरूप को तिलक अर्पित करेंगे। इस भव्य आयोजन में जनकपुर, मधेश प्रदेश के मुख्यमंत्री सतीश कुमार सिंह अपने आधा दर्जन मंत्रियों के साथ उपस्थित रहेंगे। जनकपुर के महापौर मनोज कुमार शाह और नेपाल के अन्य तीन महापौर भी इस धार्मिक आयोजन के साक्षी बनेंगे। तिलकोत्सव के दौरान अयोध्या की महिलाओं की टोली अवध क्षेत्र के परंपरागत मांगलिक लोकगीत गाएगी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा। तिलकहरुओं के स्वागत में विशेष भोज का आयोजन किया जाएगा। इसमें स्वादिष्ट आलू टिक्की, पापड़ी चाट, छोला, चावल, पूड़ी, मिक्स सब्जी, रायता, पापड़ और हलवा जैसे व्यंजन परोसे जाएंगे।

इतिहास में है रूचि तो यह फील्ड होगी आपके लिए सबसे बेस्ट

हाल ही में रामजन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया जिसके बाद एक बार फिर आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) सुर्खियों में है। इस फैसले में भारतीय पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट का अहम रोल रहा। बता दें, ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्व के स्थलों की खोज, वहां से उपलब्ध साक्ष्यों के जरिए उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाना पुरातत्वविदों का मुख्य काम होता है। इस फील्डे में भी विशेषज्ञों की जरूरत होती है। अगर आप भी इस फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं तो जानिए इससे जुड़ी डीटेल्स्… क्या होता है पुरातत्वविद का काम? पुरातत्वविद (आर्कियोलॉजिस्ट) का काम इतिहास को खोजना और संरक्षित करना होता है। साथ ही ये विशेषज्ञ ऐतिहासिक वस्तुओं और सभ्यताओं की खोज से लेकर संग्रहालयों के संरक्षण का काम भी करते हैं। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की खोज व संरक्षण, म्यूजियम्स, आर्ट गैलरीज को देखते हुए आर्कियोलॉजी के क्षेत्र में भी करियर की बहुत संभावनाएं हैं। कोर्स और एलिजबिलिटी आर्कियोलॉजी में ग्रैजुएट, पोस्ट ग्रैजुएट और पीएचडी लेवल के कोर्स होते हैं। 12वीं में हिस्ट्री  (इतिहास) की पढ़ाई करने वाले ग्रैजुएशन में आर्कियोलॉजी पढ़ सकते हैं और इसी में पोस्ट1 ग्रैजुएशन की डिग्री भी हासिल कर सकते हैं। ग्रैजुएशन लेवल पर कई संस्थानों और कॉलेजों में एक साल का पीजी डिप्लोमा होता है। इसके अलावा म्यूजियोलॉजी के रूप में भी कई कोर्स होते हैं जिसके लिए किसी भी बैकग्राउंड के ग्रैजुएट एलिजबिल होते हैं। कहां मिल सकती है जॉब? आर्कियोलॉजी/हेरिटेज मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद आपके लिए शिक्षण, अनुसंधान, उत्खनन और संग्रहालय के क्षेत्र में करियर के कई ऑप्शपन होते हैं। आर्कियोलॉजी का कोर्स करके आप नई दिल्ली स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) और राज्यों में स्थित इनके क्षेत्रीय केंद्रों में आर्कियोलॉजिस्ट या असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट के रूप में जॉब कर सकते हैं। कितनी मिलती है सैलरी यही नहीं, आपके लिए आर्कियोलॉजिकल म्यूजियम्स, नैशनल और स्टेट लेवल के म्यूजियम्स, आर्ट गैलरीज, कन्ज र्वेशन लैब्स जैसी जगहों पर भी जॉब के ऑप्शेन होते हैं। असिस्टेंट आर्कियोलॉजिस्ट या ऑर्ट रेस्टोरर को इस फील्ड में 50 हजार रुपये तक सैलरी मिल सकती है। इन जगहों पर मिलती है प्राथमिकता बता दें, आर्कियोलॉजिकल बैकग्राउंड के प्रफेशनल लोगों को फॉरेन मिनिस्ट्रील के हिस्टॉरिकल डिविजन, एजुकेशन मिनिस्ट्रीह, नैशनल आर्काइव्सल ऑफ इंडिया, इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च और प्लानिंग कमीशन जैसे डिपार्टमेंट्स के अपॉइंटमेंट्स में प्राथमिकता दी जाती है। यूनेस्को और यूनिसेफ जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी काफी बेहतर संभावनाएं होती हैं।  

ईपीएफओ ने देश भर के लाखों सदस्यों को सामाजिक सुरक्षा देने और वित्तीय रूप से सबल बनाने का काम किया: डॉ. मनसुख मांडविया

नई दिल्ली केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के मुताबिक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने देश भर के लाखों सदस्यों को सामाजिक सुरक्षा देने और वित्तीय रूप से सबल बनाने का काम किया है। राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम में अपने मुख्य भाषण में डॉ. मांडविया ने ईपीएफओ की परिवर्तनकारी यात्रा की सराहना की। उन्होंने ईपीएफओ द्वारा अपने सदस्यों के विशाल कोष का प्रबंधन करने को भी सराहा और पूरे देश में सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों को बढ़ाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। केंद्रीय मंत्री ने मजबूत आईटी प्लेटफॉर्म, शिकायत प्रबंधन के लिए कुशल प्रणाली और सेवा वितरण के सदस्य केंद्रित मॉडल के कार्यान्वयन के महत्व पर भी जोर दिया। डॉ. मांडविया ने ईपीएफओ कर्मचारियों से संगठन के नारे “हम हैं ना” को अपनाने का आग्रह किया और उन्हें लोगों की सेवा करने के उनके कर्तव्य की प्रतिदिन याद दिलाई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सच्ची सेवा का पैमाना कर्मचारियों द्वारा जरूरतमंद की समयानुसार मदद होती है। केंद्रीय मंत्री ने सेवाओं की अंतिम छोर तक डिलीवरी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए पेंशन कवरेज बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने ईपीएफओ के अधिकारियों और कर्मचारियों से सदस्यों की सेवा में ईमानदारी, समर्पण, सहानुभूति और व्यावसायिकता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने का आह्वान किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “संगठन के भीतर निरंतर कौशल वृद्धि और क्षमता निर्माण के प्रयास उभरती चुनौतियों के अनुकूल होने और सेवा वितरण में सुधार के लिए सर्वोपरि हैं।” इस बीच, ईपीएफओ में योगदान देने वाले सदस्यों की संख्या 202-2023 में 6.85 करोड़ से 7.6 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 में 7.37 करोड़ हो गई है, जबकि इस अवधि के दौरान संगठन में योगदान देने वाले प्रतिष्ठानों की संख्या 6.6 प्रतिशत बढ़कर 7.66 लाख हो गई है। ईपीएफओ ने पिछले वर्ष के 3,390 करोड़ रुपये के इसी आंकड़े की तुलना में बकाया राशि की वसूली में 55.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी, जो 5,268 करोड़ रुपये हो गई। पिछले वर्ष की तुलना में निपटाए गए दावों की संख्या में भी 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि कार्यकारी समिति ने रिपोर्ट को केंद्रीय बोर्ड द्वारा अपनाने की सिफारिश की।  

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