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पटवारी रिश्वतखोर : किसान की शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथों दबोचा

Patwari briber: Lokayukta police caught red handed on farmer’s complaint मंदसौर में एक पटवारी को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है. पटवारी ने किसान से जमीन के बंटवारे के लिए 25,000 रुपये की मांग की थी. मंदसौर ! किसान की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार राजस्व महा अभियान तीन चल रही है. इसी बीच मंदसौर जिले का पटवारी बंटवारे के लिए किसान से ₹25000 की मांग कर रहा था. लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत मिलने पर ₹10000 की रिश्वत लेते हुए पटवारी को गिरफ्तार कर लिया. आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में कार्रवाई की गई है. लोकायुक्त एसपी अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि मंदसौर जिले के इशाकपुर में रहने वाले धर्मेंद्र मालवीय ने पैतृक भूमि के पारिवारिक बंटवारे को लेकर पटवारी के यहां आवेदन दिया था. पटवारी जगदीश पाटीदार द्वारा तहसीलदार के नाम पर ₹25000 की रिश्वत मांगी गई. पटवारी ने कहा कि ₹25000 देने के बाद ही तहसीलदार द्वारा नामांतरण और बंटवारा आदि प्रकरण निपटाए जा रहे हैं. यह सुनते ही धर्मेंद्र मालवीय चौंक गया. धर्मेंद्र मालवीय ने इसकी शिकायत लोकायुक्त एसपी अनिल विश्वकर्मा से की. लोकायुक्त पुलिस ने पटवारी की शिकायत का सत्यापन किया तो फरियादी सही साबित हुआ. इसके बाद मंगलवार को लोकायुक्त पुलिस ने ₹10000 की रिश्वत लेते हुए पटवारी जगदीश पाटीदार को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. उसके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में प्रकरण बनाया गया है. जैसे ही लोकायुक्त पुलिस ने पटवारी को पकड़ा वह उनके सामने गिड़गिड़ाने लगा. पटवारी लोकायुक्त पुलिस से छोड़ने की गुहार भी लगाई. तहसीलदार को नहीं कोई जानकारी फरियादी धर्मेंद्र मालवीय के परिवार की जमीन का बंटवारा होना था. उसके द्वारा तहसील कार्यालय में आवेदन किया गया जो कि पटवारी के पास पहुंचा. पटवारी ने तहसीलदार के नाम पर रिश्वत की मांग कर ली जबकि तहसीलदार को घटना की जानकारी तक नहीं थी लोकायुक्त पुलिस का कहना है कि अभी मामले में और भी विवेचना की जा रही है.

सऊदी अरब ने इस साल 100 से ज्यादा विदेशियों को मौत की सजा दी, सबसे ज्यादा पाकिस्तानी

दुबई  सऊदी अरब ने इस साल 100 से ज्यादा विदेशियों को मौत की सजा दी है। इसे सऊदी अरब में दिए जाने वाले मृत्युदंड के आंकड़ों में अभूतपूर्व वृद्धि के तौर पर देखा जा रहा है। आधिकारिक सऊदी प्रेस एजेंसी ने बताया कि शनिवार को दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र नज़रान में एक यमनी नागरिक को मौत की सजा दी गई, जो देश में ड्रग्स की तस्करी करने का दोषी था। राज्य मीडिया रिपोर्टों से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, 2024 में अब तक मारे गए विदेशियों की संख्या 101 हो गई है। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, यह 2023 और 2022 के आंकड़ों से लगभग तिगुना है, जब सऊदी अधिकारियों ने हर साल 34 विदेशियों को मौत की सजा दी थी। सऊदी अरब ने तोड़े रिकॉर्ड बर्लिन स्थित यूरोपीय-सऊदी मानवाधिकार संगठन (ईएसओएचआर) ने कहा कि इस साल की सजाओं ने पहले ही रिकॉर्ड तोड़ दिया है। समूह के कानूनी निदेशक ताहा अल-हज्जी ने कहा, “यह एक साल में विदेशियों को दी गई सबसे बड़ी संख्या है। सऊदी अरब ने कभी भी एक साल में 100 विदेशियों को फांसी नहीं दी है।” सऊदी अरब को मृत्युदंड के अपने इस्तेमाल को लेकर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा है, जिसकी मानवाधिकार समूहों ने अत्यधिक और अपनी छवि को नरम करने तथा अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और निवेशकों का स्वागत करने के प्रयासों के साथ तालमेल न रखने के रूप में निंदा की है। मौत की सजा देने वाले टॉप 3 देशों में शामिल एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, तेल समृद्ध सऊदी अरब 2023 में चीन और ईरान के बाद दुनिया में तीसरे सबसे अधिक संख्या में कैदियों को फांसी देने वाले देशों में शामिल है। सितंबर में, एएफपी ने बताया कि सऊदी अरब ने तीन दशकों से अधिक समय में सबसे अधिक संख्या में फांसी दी है। यह आंकड़ा 2022 में 196 और 1995 में 192 के अपने पिछले उच्चतम स्तर को पार कर गया है। तब से फांसी की सजाएं तेजी से जारी हैं। रिपोर्ट के अनुसार,  इस साल कुल 274 लोगों को फांसी दी गई। इन देशों के नागरिकों को दी गई फांसी की सजा   फांसी पाने वाले विदेशी नागरिकों में पाकिस्तान, यमन, सीरिया, नाइजीरिया, मिस्र, जॉर्डन और इथियोपिया के नागरिक शामिल हैं।  पाकिस्तान से 21, यमन से 20, सीरिया से 14, नाइजीरिया से 10, मिस्र से नौ, जॉर्डन से आठ और इथियोपिया से सात शामिल हैं। सूडान, भारत और अफगानिस्तान से तीन-तीन और श्रीलंका, इरिट्रिया और फिलीपींस से एक-एक व्यक्ति को फांसी दी गई। राजनयिकों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि विदेशी प्रतिवादियों की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो पाती। सजा पाने वाले विदेशी नागरिक बड़े ड्रग डीलरों के शिकार बन जाते हैं। गिरफ्तारी के समय से लेकर फांसी तक आरोपियों को अपनी बात कोर्ट के सामने रखने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

मामूली विवाद के बाद घर में घुसकर चाचा भतीजे को गोली मारी, 3 लोग घायल

After a minor dispute, uncle entered the house and shot nephew, 3 people injured छतरपुर ! छतरपुर जिले में बढ़ते अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे। ताजा मामला बमीठा थाना क्षेत्र के कुटिया गांव का है, जहां रात में हुए मामूली विवाद में सुबह बाइक सवारों ने घर आकार चाचा-भतीजे को गोली मार दी। जहां चाचा को गोली बांए हाथ में तो वहीं भतीजे को सिर में लगी है। दोनों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया जहां इलाज चल रहा है। इनमें से एक (भतीजे) की हालत गंभीर होने पर उसे रेफर किया गया है। मामले में पीड़ित और आरोपी आपस में रिश्तेदार हैं। आरोपी घटना को अंजाम देकर फरार हो गए हैं और पुलिस मामले की जांच पीड़ित घायलों से पूछताछ आरोपियों की तलाश/गिरफ्तारी और अग्रिम कार्यवाही में जुट गई है। यह है पूरा मामलाजानकारी के मुताबिक घटना जिले के बमीठा थाना क्षेत्र के कुटिया गांव का है। जहां बीती रात हुए चौक समारोह में दोनों पक्षों जो आपस में रिश्तेदार भी है। उनमें खाने-पीने के दौरान मामूली विवाद हो गया। जिसपर कि रात में 100 डायल पुलिस पहुंची थी और मामला समझकर वापिस भी आ गई पर आज सुबह एक पक्ष ने दूसरे पक्ष के घर बाइक से जाकर फायरिंग कर दी। जिसमें से एक घायल को गोली उसके हाथ में तो वहीं दूसरे 37 वर्षीय घायल को गोली उसके सिर में लगी है। वहीं तीसरे व्यक्ति को मामूली चोटें आई हैं। ग्वालियर रेफर37 वर्षीय घायल जिसकी कनपटी/सिर में गोली लगी है जिसकी हालत गंभीर होने पर उसे पहले शहर के मिशन अस्पताल और वहां से ग्वालियर मेडिकल रेफर किया गया है। जिला आपताल में सिटी कोतवाली थाना एवं बमीठा थाना पुलिस पहुंचकर पूछताछ और मामले की जांच में जुटी हुई है।

शिमला मिर्च के राष्ट्रीय व्यापार के लिए जबलपुरअहम केंद्र बना, मिर्च की उत्पादन और गुणवत्ता

 जबलपुर  मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) का जबलपुर जिला शिमला मिर्च (Capsicum) उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहा है. यहां की उन्नत कृषि पद्धतियां और संरक्षित खेती ने न केवल शिमला का उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि इसकी गुणवत्ता को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है. क्षेत्र के किसान अब पारंपरिक तरीकों को छोड़कर आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उपज क्षमता में कई गुना वृद्धि हुई है. आइए आपको यहां की शिमला मिर्च और उसकी खेती से जुड़ी खास बातें बताते हैं. जबलपुर की शिमला मिर्च की उत्पादन और गुणवत्ता जबलपुर में शिमला मिर्च की प्रमुख किस्में जैसे “कैलिफोर्निया वंडर” और “इंद्रा” उगाई जाती हैं. इनकी उपज क्षमता प्रति एकड़ 125-150 क्विंटल तक की होती है. संरक्षित खेती (पॉलीहाउस और नेटहाउस) का उपयोग करके किसान प्रति हेक्टेयर 80-100 टन उत्पादन कर सकते हैं, जो खुले में खेती की तुलना में तीन गुना ज्यादा है. इस खेती से उत्पाद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है और वह रोगों से अधिक सुरक्षित रहता है. ऑनलाइन बिक्री और राष्ट्रीय व्यापार जबलपुर के किसान अब अपनी उपज सीधे थोक व्यापारियों तक ऑनलाइन माध्यम से पहुंचा रहे हैं. उपज की तस्वीरें साझा कर व्यापारियों से मूल्य तय किया जाता है. इससे किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है और बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है. इस मॉडल ने जबलपुर को शिमला मिर्च के देशव्यापी व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया है. संरक्षित खेती के फायदे पॉलीहाउस और नेटहाउस के जरिए उत्पादन को पर्यावरणीय प्रभावों से बचाया जा सकता है. इसमें पौधों को नियंत्रित तापमान, नमी और उर्वरक दिए जाते हैं. इसकी मदद से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार होता है. इस तकनीक से किसान अधिक लाभ कमा रहे हैं. शिमला की खेती में चुनौतियां और भविष्य संरक्षित खेती की उच्च लागत और इसके लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता किसानों के लिए एक तरह की चुनौती है. लेकिन, सरकारी योजनाओं और सब्सिडी से किसानों को इसे अपनाने में मदद मिल रही है. इस नई दिशा से न केवल स्थानीय किसानों की आय में वृद्धि हुई है, बल्कि जबलपुर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी मिली है.

Delhi Metro यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब सिंगल प्लेटफॉर्म पर खरीदें दिल्ली मेट्रो, नमो भारत के QR टिकट

नई दिल्ली दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) की ट्रेन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की धड़कन बन चुकी है। यह दिल्ली के चप्पे-चप्पे में तो चल ही रही है, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के भी कई इलाकों में चल रही है। इसी के साथ अब नमो भारत ट्रेन (Namo Bharat Train) का परिचालन शुरू हो गया है। इस समय यह ट्रेन मेरठ साउथ से सहिबाबाद तक चल रही है। जल्दी ही इसकी सेवा आनंद विहार और न्यू अशोक नगर स्टेशनों तक मिलेगी। इन दोनों स्टेशनों पर नमो भारत ट्रेन और दिल्ली मेट्रो ट्रेन का जंक्शन है। अब यात्री एक टिकट पर ही दोनों ट्रेनों पर यात्रा कर सकेंगे। इसके लिए अलग अलग टिकट खरीदने की बाध्यता नहीं होगी। एकीकृत टिकटिंग सिस्टम लॉन्च राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) नेअपने एकीकृत क्यूआर-टिकटिंग सिस्टम को आधिकारिक तौर से लॉन्च कर दिया। इस ऐतिहासिक पहल का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में यात्रा को और अधिक आसान एवं सुविधाजनक बनाना है। दिल्ली-एनसीआर में एक एकीकृत, एवं डिजिटल रूप से संचालित यात्री केंद्रित नेटवर्क बनाने के उद्देश्य से इसी साल, अगस्त में एनसीआरटीसी और डीएमआरसी के बीच एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किया गया था। यह पहल उसी दिशा में बढ़ाया गया एक कदम है। इससे आरआरटीएस के परिचालित 42 किलोमीटर के कॉरिडोर के साथ अब 393 किलोमीटर के डीएमआरसी मेट्रो नेटवर्क के जुड़ने से, यात्री एकीकृत और कुशल यात्रा अनुभव का आनंद ले सकते हैं। किन्होंने की शुरुआत एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल और डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक विकास कुमार ने मोबाइल ऐप पर नमो भारत और दिल्ली मेट्रो की टिकट बुक कर आधिकारिक तौर पर इस एकीकृत टिकटिंग सिस्टम की शुरुआत की। उन्होने यह विश्वास जताया कि यह डिजिटल एकीकरण यात्रियों की राह तो आसान करेगा ही, साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित भी करेगा। यात्री अब ‘आरआरटीएस कनेक्ट’ ऐप के माध्यम से दिल्ली मेट्रो का क्यूआर कोड टिकट और ‘डीएमआरसी मोमेंटम 2.0’ ऐप से नमो भारत के लिए क्यूआर कोड टिकट बुक कर सकते हैं। इससे आरआरटीएस और दिल्ली मेट्रो, दोनों में निर्बाध टिकटिंग संभव होगी। यात्रियों को क्या होगा फायदा बताया जा रहा है कि आरआरटीएस और डीएमआरसी नेटवर्क का एकीकरण, इस नई लॉन्च की गई क्यूआर-टिकटिंग प्रणाली के साथ और सुदृढ़ होगा तथा एनसीआर में निर्बाध यात्रा का अनुभव सुनिश्चित करेगा। दोनो ही परिवहन प्रणालियां मल्टी-मॉडल इंटिग्रेशन के तहत, आपस मे जोड़ी जा रही हैं। नमो भारत द्वारा प्रदान की जाने वाली क्षेत्रीय पारगमन सेवा और दिल्ली मेट्रो द्वारा प्रद्दत इंट्रा-सिटी पारगमन सेवाएं, साथ मिलकर एक व्यापक और कुशल आवागमन नेटवर्क बनाती हैं। यह निर्बाध कनेक्टिविटी न केवल यात्रा को सुविधाजनक बनाती है बल्कि सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को भी प्रोत्साहन देती है, जिससे इन आवश्यक पारगमन परियोजनाओं की दीर्घकालिक सततता में भी योगदान मिलता है। एनसीआरटीसी आरआरटीएस परियोजना के कार्यान्वयन के साथ इस क्षेत्र के परिवहन परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस एकीकरण से उम्मीद है कि नमो भारत व दिल्ली मेट्रो, दोनों परिवहन प्रणालियों के स्टेशनों पर टिकट की लाइनें कम होंगी, यात्रियों का बहुमूल्य समय बचेगा, डिजिटल लेनदेन और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा विकल्पों को बढ़ावा मिलेगा तथा यात्रियों को अधिक सहज और समय-कुशल यात्रा अनुभव का लाभ मिल सकेगा। आईआरसीटीसी से भी हुआ है समझौता एनसीआरटीसी ने आईआरसीटीसी के साथ भी इसी प्रकार का एक समझौता किया है जिसके अंतर्गत, यात्री आईआरसीटीसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारतीय रेलवे के ट्रेन टिकट के साथ-साथ नमो भारत ट्रेन टिकट भी बुक कर सकते हैं। इससे यात्रियों के लिए टिकट लेना आसान तो होगा ही, उनका समय भी बचेगा। अभी नमो भारत रेल की सेवा कहां तक अभी नमो भारत रेल की सेवा 9 स्टेशनों के साथ 42 किलोमीटर का कॉरिडोर परिचालित है। इनमें साहिबाबाद, गाज़ियाबाद, गुलधर, दुहाई, दुहाई डिपो, मुराद नगर, मोदी नगर साउथ, मोदी नगर नॉर्थ और मेरठ साउथ शामिल हैं। सहिबाबाद से दिल्ली की तरफ देखें तो आनंद विहार होते हुए न्यू अशोक नगर सेक्शन में ट्रायल रन निर्बाध रूप से चल रहा है। इस सेक्शन का परिचालन आरंभ होने के बाद, कॉरिडोर के परिचालित सेक्शन का विस्तार 54 किलोमीटर तक हो जाएगा। यह सेक्शन आनंद विहार और न्यू अशोक नगर जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों को जोड़ेगा, जिससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में यात्रियों के लिए पारगमन विकल्प की संख्या में विशिष्ट वृद्धि होगी। इस विस्तार से एनसीआर में यात्रियों के लिए अधिक सुविधा, सुव्यवस्थित कनेक्टिविटी और बेहतर पहुंच सुनिश्चित होगी।

करोड़ों बहनों के खाते में 20 वीं किस्त के 1250 रु कब होंगे जारी, अब दिसंबर में अगली किस्त, जानें अपडेट्स

भोपाल मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए चलाई जा रही बड़ी योजनाओं में से एक है। इसे पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू किया गया था, पहले 1000 रुपए दिए जाते है लेकिन अबवर्तमान में इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं। जून 2023 से नवंबर 2024 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 18 किश्तों का अंतरण किया गया है।अब योजना की 19वीं किस्त 10 दिसंबर को आएगी।चुंकी आमतौर पर हर महीने की 10 तारीख को योजना की किस्त जारी की जाती है, हालांकि त्यौहारों को देखते हुए समय से पहले भी किस्त जारी कर दी जाती है।इधर, सीएम के राशि बढ़ाने के संकेत के बाद संभावना जताई जा रही है नए साल 2025 में योजना की राशि में इजाफा किया जा सकता है।हालांकि अधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।     दरअसल, हाल ही में इंदौर और श्योपुर की विजयपुर विधानसभा में अपने भाषण के दौरान सीएम डॉ. मोहन यादव ने लाड़ली बहना योजना की राशि बढ़ाने के संकेत दिए थे। इंदौर में अपने संबोधन में सीएम ने कहा था कि योजना की शुरूआत में पात्र लाड़ली बहनों को 1000 रूपये दिये गये। इसके बाद यह राशि बढ़ाकर 1250 रूपये की गई। इस राशि में आगे और भी वृद्धि की जायेगी।     इसके अलावा उपचुनाव की वोटिंग से पहले भी विजयपुर में सीएम ने कहा था कि अभी सरकार 1,250 रुपये जमा कर रही है, इसे (मासिक सहायता) तीन हजार रुपये से बढ़ाकर 5 हजार रुपये भी किया जाएगा,यह सरकार की नीति है। इससे पहले अक्टूबर में विजयपुर विधानसभा में सीएम ने कहा था कि हमने 1000/- रुपये महीना लाड़ली बहना को देना शुरू किये, फिर इसे बढ़ाकर 1250/- कर दिए। आने वाले समय में हम इसे 3000/-रुपये महीना तक लेकर जायेंगे, ये हमारा संकल्प है। मई 2023 में शुरू हुई थी     लाड़ली बहना योजना पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में शुरू की गई थी।     इसमें 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसके बाद रक्षाबंधन 2023 पर राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था।     अब इस योजना के तहत 1250 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 15,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से अक्टूबर 2024 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 17 किश्तों का अंतरण किया गया है।     इसके अतिरिक्त माह अगस्त 2023 एवं 2024 में (कुल 2 बार) लाभार्थी महिलाओं को 250 रुपये की राशि की विशेष आर्थिक सहायता का भी अंतरण किया गया। किसे मिलता है लाड़ली बहना योजना का लाभ     इस योजना में 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी समस्त विवाहित महिलाएं (विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता समेत) वर्ष 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है।     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।     यदि कोई महिला 60 वर्ष से कम उम्र की है और किसी अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पहले से ही प्रति माह 1250 रुपये से कम प्राप्त कर रही है, तो उस महिला को भी 1250 रुपये तक की राशि दी जाएगी।     विवाहित महिलाओं में विधवा, और तलाकशुदा महिलाएं भी शामिल हैं। जिस साल आवेदन किया जाए, उस साल 1 जनवरी को आवेदक की उम्र 21 वर्ष पूरी हो चुकी होनी चाहिए और अधिकतम उम्र 60 वर्ष से कम होनी चाहिए। कैसे चेक करें लिस्ट में अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

विभाग ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय को प्रदेश में अग्निशमन सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा

भोपाल नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार प्रदेश में अग्निशमन सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा है। विभाग ने 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत 397 करोड़ 54 लाख रूपये का प्रस्ताव तैयार किया है। केन्द्रीय गृह मंत्रालय को भेजे गये प्रस्ताव में 75 प्रतिशत केन्द्र सरकार के हिस्से के रूप में 298 करोड़ 15 लाख रूपये मध्यप्रदेश को प्राप्त होंगे। राज्य सरकार अंश के रूप में 25 प्रतिशत राशि 99 करोड़ 39 लाख रूपये विभाग को मंजूर करेगी। विभाग ने यह प्रस्ताव राज्य कार्यपालिक समिति के अनुमोदन के बाद केन्द्र सरकार को भेजा है। कार्य योजना पर मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में अग्निशमन सेवाओं का आधुनिकीकरण होगा। इसके अंतर्गत प्रदेश में नवीन फायर स्टेशनों का निर्माण, आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहन, हाई राईज बिल्ड़िंग में अग्नि नियंत्रण के लिये हाइड्रोलिक प्लेटफार्म और आधुनिक उपकरण खरीदे जा सकेंगे। साथ ही अग्निशमन सेवाओं के कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों का प्रशिक्षण और क्षमतावर्धन भी किया जायेगा। प्रदेश में होने वाली अग्नि दुर्घटनाओं पर रियल टाईम नियंत्रण के लिये जीपीएस और जीआईएस आधारित आधुनिक सिस्टम तैयार करने का प्रावधान भी कार्य योजना में रखा गया है।  

भारत ने सबसे तेजी से बढ़ती जी-20 अर्थव्यवस्था का ताज हासिल

नई दिल्ली भारत ने जी20 देशों में जीडीपी ग्रोथ रेट को टॉप किया है। भारत का 2024 में अनुमानित ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत सबसे हाई दर्ज किया गया है। देश की यह उपलब्धि मजबूत अर्थव्यवस्था और वैश्विक चुनौतियों के बीच एक शक्तिशाली विकास को प्रदर्शित करता है। क्या है जी20 देशों का प्रोजेक्टेड जीडीपी ग्रोथ रेट?     भारत- 7 प्रतिशत     इंडोनेशिया-5 प्रतिशत     चीन- 4.8 प्रतिशत     रूस-3.6 प्रतिशत     ब्राजील-3 प्रतिशत     अफ्रीका-3 प्रतिशत     तुर्किए-3 प्रतिशत     यूएसए-2.8 प्रतिशत     कोरिया-2.5 प्रतिशत     मेक्सिको-1.5 प्रतिशत     सऊदी अरब-1.5 प्रतिशत     कनाडा-1.3 प्रतिशत     आस्ट्रेलिया-1.2 प्रतिशत     फ्रांस-1.1 प्रतिशत     यूरोपियन यूनियन-1.1 प्रतिशत     यूके-1.1 प्रतिशत     साउथ अफ्रीका-1.1 प्रतिशत     इटली-0.7 प्रतिशत     जापान-0.3 प्रतिशत     जर्मनी-00     अर्जेंटिना- माइनस3.5 प्रतिशत

परम्परा से मनेगा डाॅ. हरीसिंह गौर का जन्मदिन, ‘पच’ में आएंगी किताबें, ‘सोहर’ गाएंगी महिलाएं

सागर सागर शहर ही नहीं बल्कि पूरे बुंदेलखंड के लिए डाॅ. हरिसिंह गौर की जयंती किसी उत्सव से कम नहीं होती है। सागर जिले में जहां उन्होंने अपने जीवन की जमा पूंजी दान कर यूनिवर्सिटी की स्थापना की। वहां पर सार्वजनिक अवकाश के साथ सुबह से ही गौर जयंती पर एक से बढ़कर एक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इसी कड़ी में इस बार सुखद संयोग बना है कि गौर जयंती के साथ ही सेंट्रल जोन के यूथ फेस्टिवल का आयोजन करने का मौका सागर यूनिवर्सिटी को मिला है। ये यूथ फेस्टिवल भी 26 नवंबर को गौर जयंती के साथ शुरू होगा। डाॅ. हरिसिंह गौर के जन्मदिन पर परंपरा है कि यूनिवर्सिटी में उनकी जयंती मनाए जाने के पहले गौर मूर्ति पर माल्यार्पण कर प्रभात फेरी निकलती है। इसमें शहर के जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, विश्वविद्यालय परिवार और बड़ा संख्या में स्थानीय लोग शामिल होते हैं। सभी यूनिवर्सिटी में डाॅ. गौर की समाधि तक पैदल जाते हैं, जहां श्रृद्धाजंलि अर्पित करने के बाद मुख्य कार्यक्रम आयोजित होता है। इस बार दोपहर में विशाल रैली निकलेगी, जिसमें यूथ फेस्टिवल में पहुंचने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राएं अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए नाचते गाते जाएंगे। वहीं, स्थानीय सामाजिक, सांस्कृतिक संस्थाएं भी शामिल होंगी और कार्निवाल की माहौल होगा। यह है तैयारी सागर यूनिवर्सिटी के सांस्कृतिक संयोजक डाॅ. राकेश सोनी बताते हैं, हम लोगों के पितामह की 155वीं जयंती पर हम लोग गौर गौरव उत्सव करने जा रहे हैं। इसमें सेंट्रल जोन के 12 से 15 सौ छात्र कलाकार यूथ फेस्टिवल में शिरकत करेंगे। इस अवसर पर 26 नवंबर को दोपहर दो बजे गौर मूर्ति से रैली निकलने वाली है, जिसमें सभी सहभागी छात्र पारंपरिक वेशभूषा में अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए चलेंगे। जहां तक बुंदेली परंपरा की बात करें तो यहां के लोकनृत्य, लोकगीत देखने सुनने मिलेंगे। हमारी ग्रामीण अंचल की महिलाएं डॉ. गौर के जन्मदिन पर सोहर गाएंगी, उनके जन्मदिन पर ये नया प्रयोग है। बुंदेली परंपरा के साथ जन्मदिन डॉ. हरीसिंह गौर जयंती को बुंदेली परम्परा के अनुसार मनाया जाएगा. दरअसल, बुंदेलखंड में किसी शिशु के जन्म लेने पर ननिहाल पक्ष जो उपहार लेकर पहुंचता है, उसे ‘पच’ कहते हैं. तो यहां के लोग 500 किताबें पच में लेकर पहुंचेंगे. वहीं बुंदेलखंड की ग्रामीण महिलाएं ‘सोहर’ गाएंगी और ग्रामीण इलाकों में शिशु के जन्म पर आयोजित होने वाले गनता (जन्मोत्सव) में बुंदेली राई नृत्य भी देखने मिलेगा. डॉ. हरी सिंह गौर की 155वीं जयंती सागर शहर ही नहीं बल्कि पूरे बुंदेलखंड के लिए डाॅ. सर हरीसिंह गौर की जयंती किसी उत्सव से कम नहीं होती है. सागर जहां उन्होंने अपने जीवन की जमापूंजी दान करके यूनिवर्सटी की स्थापना की वहां पर सार्वजनिक अवकाश के साथ सुबह से ही गौर जयंती पर एक से बढ़कर एक कार्यक्रम आयोजित होते हैं. इसी कड़ी में इस बार सुखद संयोग बना है कि गौर जयंती के साथ ही सेंट्रल जोन के यूथ फेस्टिवल का आयोजन करने का मौका सागर यूनिवर्सटी को मिला है. ये यूथ फेस्टिवल भी 26 नवम्बर को गौर जयंती के साथ शुरू होगा.

नगरीय प्रशासन विभाग ने स्वच्छ भारत मिशन में प्रति समाज के अलग-अलग समूहों से वर्चुअली संवाद किया

भोपाल नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा स्वच्छ भारत मिशन में प्रति  समाज के अलग-अलग समूहों से वर्चुअली संवाद किया जा रहा है। इस  स्वच्छता में महिलाओं की भूमिका एवं योगदान विषय पर संवाद किया गया। संवाद में प्रदेश के नगरीय निकायों से महिला जन-प्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों, स्वच्छता सहयोगियों से स्वच्छता में महिलाओं से सहयोग एवं योगदान पर अनुभव साझा किये गये। वर्चुअली जुड़ी महिलाओं से घर से निकलने वाले कचरे के संग्रहण के बाद पृथ्कीकरण, प्र-संस्करण से लेकर निष्पादन तक संपूर्ण प्रक्रिया में महिलाओं की क्या भूमिका है इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। संवाद के दौरान बताया गया कि महिलाओं द्वारा अनुपयोगी सामग्री से प्रदेश के कई क्षेत्रों में विभिन्न कलाकृतियों का निर्माण भी किया जा रहा है। महिलाओं से किये गये संवाद में नगरीय निकायों के अधिकारी-कर्मचारी और अशासकीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। वक्ताओं ने कचरा वाहन में ही कचरा देने की आदतों में आये बदलाव, सिंगल यूज प्लास्टिक के स्थान पर थैला एवं पेपर बेग को अपनाने और इससे जुड़े मुद्दों पर विचार व्यक्त किये गये। संवाद में यह तय हुआ कि स्वच्छता अभियान से जुड़े सभी समूह टीम भावना के साथ अपने क्षेत्र में स्वच्छता अभियान में अधिक से अधिक जनसमुदाय को जोड़ने का कार्य करें। प्रदेश में प्रति रविवार होने वाले संवाद सत्र का यह 14वां संस्करण था।  

हमने कलाम को हृदय से लगाया है, लेकिन कसाब को कभी स्वीकार नहीं करेंगे: सांवरे सरकार

दमोह देशभर की राजनीति में इन दिनों बंटेंगे तो कंटेंगे को लेकर सुर्खियां बनी हुई हैं। मप्र के सागर में सांवरे सरकार पंडित विपिन बिहारी ने कहा कि हमें जातियों में बांटने का षडयंत्र रचा जा रहा है। यह गंदी राजनीति है। हमने कलाम को हृदय से लगाया है, लेकिन कसाब को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। कुंभ में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर उन्होंने कहा कि बागेश्वरधाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री की इस मांग का मैं समर्थन करता हूं। कुंभ में गैर सनातनियों का प्रवेश नहीं होना चाहिए। आतकंवादी को स्वीकार नहीं किया जाएगा दरअसल, बुंदेलखंड के प्रसिद्ध कथावाचक और सांवरे सरकार के नाम से प्रसिद्ध पंडित विपिन बिहारी महाराज ने दमोह के नरसिंह मंदिर परिसर में कथा से पूर्व मीडिया से बात की है। उन्होंने कहा कि कुंभ में गैर सनातनियों का प्रवेश नहीं देना चाहिए। बंटेंगे तो कंटेंगे के सवाल पर उनका स्पष्ट कहना है कि हमने कलाम को हृदय लगाया, लेकिन कसाब को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। हमने रसखान को हृदय से लगाया, लेकिन किसी आतंकवादी को कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा। हमारे अंदर जातिवाद का जहर घोला जा रहा उन्होंने कहा कि यह तो निश्चित है कि हमारे भीतर जातिवाद का जहर घोला जा रहा है, यह बहुत गंदी सोच है, हमें कबीलों में बांटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि कथा में अलग-अलग जातियों के लोगों को हाथ उठवाए, फिर हिंदुओं के हाथ उठवाए तो सभी के हाथ उठ गए। उन्होंने कहा कि यही बात मैं कहना चाहता हूं। हमें एक होकर ही रहना होगा। कुंभ में गैर सनातनियों का प्रवेश वर्जित होना चाहिए पंडित विपिन बिहारी ने पूछा गया कि बागेश्वरधाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने मांग की है कि कुंभ में हिंदुओं के अलावा गैर सनातनियों का प्रवेश वर्जित होना चाहिए। मैं ही नहीं हर सनातनी और हिंदू व्यक्ति इस मांग का समर्थन करेगा। हमने अपने-अपने भगवान और महापुरूष बांट लिए! विपिन बिहारी महाराज ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा कि हम लोगों ने अपने-अपने भगवान बांट लिए, भक्त बांट लिए हैं। हर समाज का अपना भगवान और अपना भक्त है। हम समझते हैं कि हम संगठित हो रहे हैं लेकिन असल में हम बंट रहे हैं। जबकि हम सभी सनातन धर्मी हैं। हमें सनातन का झंडा उठाना चाहिए। सनातन का ‘बोर्ड’ हर दिल में होना चाहिए देश में सनातन बोर्ड बनाने की बात चल रही है, सनातन बोर्ड बन रहा है। मैं चाहता हूं कि सनातन का बोर्ड हर दिल में लग जाए। कौन नहीं चाहता अपने धर्म का विस्तार हो। बुंदेलखंडी में कथा को लेकर कहा कि कोई भी कथावाचक दूसरे प्रदेश में जाता है तो वह अपनी बोली को बोलकर खुद को सम्मानित करता है। हमारी बुंदेलखंडी में क्या परेशानी है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंडी भाषा में अपनापन है। मैं चाहता हूं, विश्व के कोने-कोने में बुंदेलखंडी भाषा पहुंचनी चाहिए। एकता और सद्भाव का ठेका क्या हिंदुओं ने ही ले रखा है? उन्होंने कहा कि देश में हिन्दु-मुस्लिम और अन्य धर्मों में एकता का ठेका क्या केवल हिंदुओं के ही जिम्मे हैं। ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती है, दोनों हाथ से बजती हैं। लेकिन किसी आतंकवादी को हृदय से नहीं लगाएंगे। हम गुण के ग्राहक हैं, हम प्रेम के संदेशवाहक हैं, तुम हमसे जितना प्रेम करोगे, उससे दसगुना प्रेम हम वापस लौटाएंगे।

विधानसभा का शीतकालीन सत्र 16 दिसंबर से शुरू

रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र 16 दिसंबर से शुरू हो जा रहा, जो 20 दिसंबर तक चलेगा. इस सत्र में कुल 4 बैठकें होगी. इसकी अधिसूचना छत्तीसगढ़ विधानसभा के सचिव दिनेश शर्मा ने जारी कर दिया है. यह सत्र छत्तीसगढ़ की षष्ठम विधानसभा का चतुर्थ सत्र है. इस सत्र में वित्तीय कार्य के साथ अन्य शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे.

सिकल सेल एनीमिया रोग के जड़ से उन्मूलन के लिए 2 केंद्र की मिली केंद्र’ की मंजूरी

भोपाल भारतीय संविधान के अनुच्छेद-275(1) के अंतर्गत केन्द्र सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के तहत विशेष विकास परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के लिये शत-प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में दी जाती है। यह राशि केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के जरिये राज्य सरकारों को सीधे आवंटित की जाती है। सिकल सेल एनीमिया रोग के जड़ से उन्मूलन (Root Out) के लिये केन्द्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 275(1) के तहत प्रदेश में 2 उच्च स्तरीय देखभाल केंद्र (Centre Of Competence For Sickle Cell Disease) या कहें ‘सिकल सेल रोग के लिए सक्षमता केंद्र’ को मंजूरी दी गई है। भोपाल में सिकल सेल रोग के लिये पहला सक्षमता केन्द्र आईसीएमआर के भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, भोपाल में जनजातीय अनुसंधान संस्थान के सहयोग से स्थापित यह केंद्र ‘राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन’ में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के दूरदर्शी लक्ष्य के साथ स्थापित यह अत्याधुनिक सुविधा, सिकल सेल के रोगियों को आधुनिक निदान, उन्नत उपचार और समग्र पुनर्वास सेवाओं सहित व्यापक देखभाल प्रदान करती है। यहां विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम के साथ यह केंद्र न केवल रोग के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करता है, बल्कि प्रभावित व्यक्तियों, विशेष रूप से जनजातीय समुदायों के भीतर जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सुरक्षित पुनर्वास पर भी जोर देता है। इस केन्द्र के जरिये सभी सिकल सेल मरीजों के लिए एक स्वस्थ, उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करने की लक्ष्यपूर्ति के मिशन को बल मिलेगा। केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने इसके लिये करीब 2 करोड़ रूपये मंजूर किये हैं। दूसरा इंदौर में स्थापित हो रहा है महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, इंदौर के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग एवं अत्याधुनिक मॉडल ब्लड सेंटर को सिकल सेल उन्मूलन मिशन- 2047 के तहत उच्च स्तरीय देखभाल केंद्र (सक्षमता केंद्र) के रूप में मंजूरी मिली है। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई है। इस परियोजना के तहत यहां गुणवत्तापूर्ण इलाज किया जायेगा। इस सेंटर में चिन्हित किए गए रोगियों में आधुनिक मशीनों से पुनः रोग की पुष्टि करना (फाइनल डायग्नोसिस बनाना), रोग की गंभीरता एवं प्रकार का पता लगाने के अलावा सिकल सेल रोग के रोगियों की उच्च स्तरीय एवं आधुनिक उपचार एक ही छत के नीचे प्रदान की जायेंगी। इसी प्रकार सिकल सेल एनीमिया के पेशेंट को विश्वस्तरीय, लुकोरिड्यूस्ड नेट टेस्टेड, रेडिएट रक्त एवं उसके घटक प्रदान करना। डे केयर सेंटर्स को सुसज्जित करना ताकि जिन रोगियों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन होना है उन्हें सुरक्षित एवं सरल तरीके से रक्त और उसके घटक प्रदान किया जा सके। स्वैच्छिक रक्तदान शिवरों का आयोजन करना जिससे रक्त और इसके घटकों की आपूर्ति बनी रहे। जीवन रक्षक पद्धति के रूप में बहुत गंभीर मरीजों में एफरेंस तकनीकी से रेड सेल एक्सचेंज करना। प्रसवपूर्व मामले में कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) की मदद से गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे में सिकल सेल रोग का पता लगाना, मॉलिक्यूलर प्रयोगशाला की स्थापना, नवजात शिशु में सिकल सेल का शीघ्र पता लगाना, सिकल सेल रोग के बारे में जनसाधारण, खासकर जनजातीय क्षेत्रों में जन जागरूकता अभियान चलाना, सिकल सेल से पीड़ित रोगियों में बोनमैरो ट्रांसप्लांट एवं जीन थेरेपी की संभावनाओं का पता लगाना एवं उन्हें इस हेतु तैयारियां करना सहित सिकल सेल के क्षेत्र में अनुसंधान और प्रशिक्षण भी दिये जायेंगे। इस केन्द्र से इंदौर के समीपस्थ अलीराजपुर, धार, झाबुआ, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, उज्जैन, देवास आदि जिलों के मरीजों को सर्वाधिक लाभ मिलेगा। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए 1 करोड़ 91 लाख रुपये राशि आवंटित की है। यहां के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के परिसर में पहले से ही बुनियादी ढांचा मौजूद है, जिसमें नवीनीकरण और अन्य आवश्यक कार्य पूर्ण हो चुके हैं। अन्य आवश्यक उपकरणों के लिए शॉर्ट टेंडर जारी किया गया है। टेक्नीशियन और चिकित्सा कर्मचारियों के लिए ओरिएंटेशन का पहला भाग पूरा हो चुका है। यहां सिकल सेल कंसोर्टियम की स्थापना भी कर ली गई है और सभी विभागों से सम्पर्क स्थापित कर सिकल सेल रोग के रोगियों का उच्च स्तरीय इलाज देना भी शुरू कर दिया है। 100 होम-स्टे को मिली मंजूरी अनुच्छेद-275(1) के तहत ही केन्द्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को जनजातियों के आजीविका विकास से जुड़ी विशेष परियोजनाओं के लिये सहायता दी जाती है। इसके तहत प्रदेश में 100 जनजातीय ग्रामों में होम स्टे विकास के लिये केन्द्र सरकार द्वारा राशि आवंटित की गई है। इन 100 जनजातीय ग्रामों में प्रत्येक ग्राम में 5 लाख रूपये की लागत से होम-स्टे निर्माण के लिये जरूरी राशि जनजातीय कार्य विभाग को प्राप्त हो गई है। होम-स्टे के लिये शत-प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार द्वारा वहन की जा रही है। 8 वन्या रेडियो स्टेशन के विकास के लिये मिली राशि केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा 275(1) के तहत प्रदेश में 8 वन्या रेडियो स्टेशन्स के सुदृढ़ीकरण के लिये भी विकास राशि प्रदान की गई है। इससे प्रदेश की सभी जनजातीयों की क्षेत्रीय बोली (Local Dialect) के विकास एवं संवर्द्धन में मदद मिलेगी। ये वन्या रेडियो स्टेशन जनजातियों की क्षेत्रीय बोली में ही संचालित किये जायेंगे। “वन्या संस्थान” जनजातीय कार्य विभाग के अधीन एक प्रकाशन प्रतिष्ठान है। इसका मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश के जनजाति समुदायों की संस्कृति, जीवनशैली और कलाओं का विभिन्न माध्यमों से अभिलेखीकरण, प्रकाशन और प्रसारण करना है। इसी श्रृंखला में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संकल्पना के पालन में जनजातीय क्षेत्रों में सामुदायिक रेडियो केन्द्रों का संचालन किया जायेगा। इससे विभिन्न जनजातीय समुदाय को अपने-अपने जिलों में चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी उनकी ही बोली में प्रदान की जायेगी। वन्या संस्थान द्वारा 8 सामुदायिक रेडियो केन्द्रों नालछा जिला-धार, भाबरा जिला-अलीराजपुर, मेघनगर जिला झाबुआ, बिजौरी जिला-छिन्दवाड़ा, चांड़ा जिला डिण्डौरी, खालवा जिला-खण्डवा, चिचौली जिला-बैतूल एवं सेसईपुरा जिला श्योपुर कला में लगभग 13 वर्षों से संचालित किये जा रहे हैं। इन केन्द्रों में विभिन्न विभागों से प्राप्त विज्ञापन, जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का समुचित प्रचार-प्रसार, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कृषि संबंधी विभिन्न जन-उपयोगी कार्यक्रमों का प्रसारण स्थानीय बोलियों गोंडी. भीली, बैगानी, कोरकू एवं सहरिया में स्थानीय जनजातीय कलाकारों को आमंत्रित कर कार्यक्रम तैयार किये जाते हैं, जिससे भाग लेने वाले जनजातीय कलाकारों को मानदेय/पारिश्रमिक भी दिया जाता है। इन वन्या रेडियो केन्द्रों का अब सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। शासकीय भवन होने के कारण इनकी मरम्मत … Read more

बाइडेन ने जाते-जाते कर डाला तीसरे विश्वयुद्ध का इंतजाम ? यूक्रेन को रूस के हथियार चलाने की मंजूरी

न्यूयॉर्क अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जाते-जाते यूक्रेन को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है। उन्होंने रूस में अंदर तक मार करने के लिए अमेरिका द्वारा सप्लाई की जाने वाली लॉन्ग रेंज मिसाइलों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। अमेरिकी अधइकारियों का कहना है कि युद्ध को और उलझाने से बचाने के लिए अमेरिका ने यह कदम उठाया है। बता दें कि उत्तर कोरिया ने रूस की तरफ से युद्ध करने के लिए अपने हाजरों सैनिक भेज दिए हैं। इसके अलावा उत्तर कोरिया हथियार भेजकर भी रूस की मदद करने में लगा है। इसको लेकर यूक्रेन कई बार आपत्ति जता चुका है। वहीं बताया जा रहा है कि जो बाइडेन प्रशासन ने उत्तर कोरिया के दखल को देखते हुए ही यह फैसला किया है। वहीं नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह राष्ट्रपति बनने के बाद रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को खत्म करवा देंगे। अमेरिका से मंजूरी के बाद अब यूक्रेन आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल रूस के खिलाफ कर पाएगा। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और उनके पश्चिमी देशों के सहयोगी कई महीने से जो बाइडेन प्रशासन पर दबाव डाल रहे थे कि लॉन्ग रेंज मिसाइलों के इस्तेमाल की इजाजत दे दी जाए ताकि रूस में अंदर तक प्रहार किया जा सके। कहा जा रहा था कि अमेरिका के प्रतिबंध की वजह से ही यूक्रेन अपने शहरों और इलेक्ट्रिकल ग्रिड को रूसी हमले से बचा नहीं पा रहा था। यह भी खबर है कि इस मंजूरी से NATO के सभी देश सहमत नहीं हैं। यह भी दबाव है कि अमेरिका और नाटो सदस्य इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल ना हों। लेकिन उत्तर कोरिया ने युद्ध को बढ़ाने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है। वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत यह दिया था कि वह यूक्रेन को कुछ जमीन छोड़ने के लिए राजी करेंगे और इसके बाद युद्ध को खत्म करने का दबाव बनाएंगे। जानकारी के मुताबिक उत्तर कोरिया से 12 हजार सैनिक रूस पहुंचे हैं। इसके अलावा उत्तर कोरिया ने रूस को घातक हथियार भी दिए हैं। डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन की मदद को लेकर बाइडेन प्रशासन की आलोचना करते रहे हैं। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद यूक्रेन चिंतित है। उन्हें लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप के आने से ब्लादिमीर पुतिन को फायदा होगा और यू्क्रेन पर शर्त मनवाने का दबाव बनाया जाएगा। इस युद्ध में अमेरिका ही यूक्रेन के सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी था। अमेरिका यूक्रेन को 56 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद दे चुका है।

पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सनातन बोर्ड बनाने और वक्फ बोर्ड की जांच की मांग

छतरपुर  बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री 21 नवंबर से 29 नवंबर तक 165 किलोमीटर लंबी पदयात्रा के लिए निकल रहे हैं। सनातन हिन्दू एकता पदयात्रा बागेश्वर धाम से रामराजा सरकार की नगरी ओरछा तक जाएगी। इस दौरान बाबा बागेश्वर अपने चिर-परिचित अंदाज में बातें करते नजर आए। उन्होंने हिंदुओं को एक करने की बात कही। मंदिरों ने हर समाज का पुजारी होने, सनातन बोर्ड गठित करने जैसी बातें भी कही। उन्होंने यात्रा के दौरान फूलमाला और खड़ाऊ नहीं पहनने का संकल्प भी लिया। गौरतलब है कि शहर के पन्ना रोड पर स्थित निजी होटल में पत्रकारों से चर्चा करते हुए महाराजश्री ने कहा कि विभिन्न पंथों में बटे सनातन हिन्दुओं को कट्टर हिन्दू बनाने के लिए यह एकता यात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने कहा कि हम मिशन और विजन लेकर चल रहे हैं। सब हिन्दू जात-पात का भेद खत्म करें यही हमारा यात्रा का मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि राष्ट्र ध्वज और धर्मध्वज दोनों का बराबर सम्मान है। उन्होंने राष्ट्रगान के साथ पदयात्रा शुरू करने की बात कही। बाबा की खरी-खरी पत्रकारों से चर्चा करते हुए बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस सनातन यात्रा सब धर्मों के लोग हो शामिल हो सकते हैं। इसके लिए हम किसी को न्यौता देने नहीं जा रहे। क्योंकि जब धर्मयुद्ध होता है तो बुलाया नहीं जाता, जिसका जमीर जिंदा होता है, वो खुद आता है। दूसरे धर्मों के लोगों के शामिल होने की बात पर शास्त्री ने कहा कि उनको लगता है कि हम कार्य अच्छा कर रहे हैं तो उनको भी भागीदारी करना चाहिए, क्योंकि देश तो उनका भी है। क्योंकि इस देश में रहने वाले इस्लामी और ईसाई समाज के लोग पहले हिंदू ही थे, बाद में वह कन्वर्ट हो गए। किसी भी धर्म के लोगों को यात्रा के लिए पीले चावल नहीं देंगे। बाबा ने अपने अंदाज में कहा कि आओ तो वेलकम, जाओ तो भीड़ कम…। सनातन बोर्ड बने बागेश्वर बाबा ने कहा कि हम भारत का हाल बांग्लादेश जैसा नहीं होने देंगे। हम हिंदुओं को जगाएंगे। शास्त्री ने वक्फ बोर्ड पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि 2005 तक तक बोर्ड के पास महज कुछ हजार एकड़ जमीन थी, आज साढ़े आठ लाख एकड़ जमीन हो गई। फिर भी हिंदू चुप बैठा है, हिंदू कायर बना बैठा है। सोया हुआ हिंदू है। कौन सोया हुआ हिंदू है, जो 500 सालों से रामजी के मंदिर के लिए कोर्ट में लड़ रहा था। वो भी वोट देते हैं, हम भी वोट देते हैं। या तो सनातन बोर्ड बनाइए या वक्फ बोर्फ हटाइए। पदयात्रा में नहीं पहनेंगे फूलमाला पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मीडिया के माध्यम से आम जनमानस को अवगत कराना चाहा है कि किसी भी पदयात्रा में फूलमाला का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि हम अपनी हिंदुओं को जगाने की यात्रा निकाल रहे हैं न कि कोई शोभायात्रा, अगर फूलमाला में ढंक जाएंगे तो हमारी बात कौन सुनेगा। उन्होंने कहा कि सभी सनातनप्रेमी फूलमाला में पैसे खर्च करने के बजाय अन्य संसाधनों में लगाएं। जितनी भी उनकी यात्राएं होंगी उन सभी में फूलमाला का त्याग रहेगा। छोटे बच्चे, वृद्ध और बीमार लोगों को यात्रा से दूर रहने का आग्रह किया गया। महाराजश्री ने कहा कि हमें स्वागत नहीं हमें सभी हिन्दुओं को एकजुट करने की भिक्षा दें। सभी यात्रियों से थाली, लोटा और एक गर्म लोयी साथ लेकर चलने का भी उन्होंने आग्रह किया। रामराजा सरकार को ध्वज चढ़ाकर होगा यात्रा का विराम महाराजश्री ने कहा कि यह पदयात्रा 29 नवंबर को रामराजा सरकार के चरणों में पहुंचेगी और यहीं यात्रा का विराम होगा। रामराजा सरकार को यात्रा के माध्यम से पहुंचकर ध्वज समर्पित करना है ताकि यह धर्मध्वजा लहराती रहे। उन्होंने बताया कि जगद्गुरु तुलसी पीठाधीश्वर रामभद्राचार्य जी भगवां ध्वज दिखाकर यात्रा प्रारंभ करेंगे। इस यात्रा में मलूक पीठाधीश्वर पूज्य राजेन्द्र दास महाराज, जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज, हनुमानगढ़ी के महंत राजूदास महाराज, इन्द्रेश जी महाराज, सुदामा कुटी के सुतीक्ष्ण दास जी, संजीव कृष्ण ठाकुर, अनुरुद्धाचार्य महाराज, जगतगुरु बल्लभाचार्य महाराज, गोरीलाल कुंज के महंत पूज्य किशोर दास महाराज शामिल होंगे। वहीं फिल्म, संगीत सहित अन्य  क्षेत्रों से भी लोगों के शामिल होने की सूचनाएं हैं।

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