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मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत देश के निर्माण में हमारे सभी महापुरूषों का अमूल्य योगदान है

उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को मेडिसिटी चिकित्सा महाविद्यालय भूमिपूजन कार्यक्रम के बाद टॉवर चौक पर भारत रत्न डॉ. बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की नवीन प्रतिमा का अनावरण कर माल्यार्पण किया गया। इस दौरान सांसद अनिल फिरोजिया, बालयोगी उमेशनाथ महाराज, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, महापौर मुकेश टटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेडा, सतीश मालवीय, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि उज्जैन नगरी की कई विशेषताएँ हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत देश के निर्माण में हमारे सभी महापुरूषों का अमूल्य योगदान है। बाबा साहेब 20वीं सदी के ऐसे महानायक हैं जिन्होंने समाज में समता के लिए, सहअस्तित्व के लिए, समान भाव लाने के लिए इस देश के अंदर जो विसंगतियाँ थीं, जो बुराईयाँ थीं, कुरीतियॉ थीं, उनके विरूद्ध आवाज उठाई और संघर्ष किया। भारत की स्वतंत्रता के पूर्व कई सामाजिक कुरितियों को दूर कर नए विचारों को जन्म दिया। समाज के कमजोर वर्ग को बाबा साहेब ने सशक्त किया और सशक्त कर आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दिया। उन्होंने संविधान का निर्माण कर सबको समानता का अधिकार दिलाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महापुरूषों की प्रतिमाओं के साथ भविष्य में किसी तरह की छेड़छाड़ न हो इसके लिए प्रशासन द्वारा प्रतिमाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए।  मुख्यमंत्री ने अपनी ओर से सभी को शुभकामनाएं दीं। महापौर मुकेश टटवाल ने कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन किया। उल्लेखनीय है कि उक्त प्रतिमा का निर्माण 12.50 लाख रूपये की लागत से हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर प्रतिमा की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं एवं प्रतिमा के आसपास के स्थल का सौंदर्यीकरण एवं विद्युत साज सज्जा भी की गई है।  

जल जीवन मिशन से फूल बाई बैगा हुई लाभान्वित

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले विकासखण्ड मनेंद्रगढ़ के पाराडोल के छोटे से गांव बैगापारा में जल जीवन मिशन ने ग्रामीण जीवन में क्रांतिकारी बदलाव किया है। वर्षों से स्वच्छ पेयजल की कमी से जूझ रहे इस गांव के लोग आज जल जीवन मिशन द्वारा नल-जल कनेक्शन के जरिए स्वच्छ और सुगम पेयजल का लाभ उठा रहे हैं। इस परिवर्तन की धुरी बनी हैं बैगापारा की निवासी फूल बाई बैगा, जिनकी कहानी इस मिशन की सफलता का प्रतीक बन गई है। गांव में वर्षों तक रही पानी की समस्या बैगापारा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में लंबे समय तक स्वच्छ पानी की व्यवस्था न होने के कारण लोग प्राकृतिक जल स्रोतों और छोटे मोटे कुओं पर निर्भर थे। इन स्रोतों की स्वच्छता और उपलब्धता अक्सर अनियमित रहती थी, जिससे जल जनित बीमारियां और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आम थी। महिलाओं और बच्चों को पानी भरने के लिए घंटों लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे उनकी शिक्षा और दैनिक जीवन भी प्रभावित होता था। जल जीवन मिशन का शुभारंभ और बदलाव का सफर 01 अप्रैल 2024 को जल जीवन मिशन के तहत बैगापारा में नल-जल आपूर्ति के प्रयास शुरू किए गए। सरकार ने गांव के हर घर को 100 प्रतिशत एफएचटीसी (फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन) से जोड़ने का लक्ष्य रखा। 18 नवंबर 2024 तक बैगापारा के प्रत्येक घर को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया। यह सुनिश्चित किया गया कि सभी परिवारों को निजी स्रोतों के जरिए स्वच्छ पानी की नियमित आपूर्ति हो। स्वच्छ पानी ने बदली ग्रामीणों की जिंदगी जल जीवन मिशन के प्रभाव ने बैगापारा के लोगों के जीवन में अभूतपूर्व बदलाव लाया है। अब ग्रामीणों को पानी के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। महिलाओं और बच्चों का समय और श्रम बचत होती है, वे लोग अपना समय अब शिक्षा, खेती और अन्य उत्पादक कार्यों में लगा रहे हैं। स्वच्छ पेयजल ने जल जनित बीमारियों की घटनाओं को काफी हद तक कम कर दिया है। फूलबाई बैगा ने इस योजना का व्यक्तिगत रूप से लाभ उठाया और इसे ग्रामीणों के लिए जीवन बदलने वाला अनुभव बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा यह पहल हमारे जैसे गांवों को आत्मनिर्भर और स्वस्थ बना रही है। अब हमारा जीवन पहले से कहीं ज्यादा सरल और सुरक्षित हो गया है। प्रेरणा का स्रोत बना बैगापारा बैगापारा की सफलता अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई है। जल जीवन मिशन ने साबित किया है कि सही दिशा में किए गए ठोस प्रयासों से ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और स्वस्थ बनाया जा सकता है। यह कहानी केवल सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की नहीं, बल्कि गांववासियों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में उठाए गए एक बड़े कदम की मिसाल है। बैगापारा अब पूरे क्षेत्र में एक मॉडल गांव के रूप में उभर रहा है।

डॉ. हरिसिंह गौर की 155वीं जयंती पर सांस्कृतिक कार्यक्रम में मंत्री पटेल हुए शामिल

भोपाल डॉ. हरिसिंह गौर की 155वी. जन्म जयंती पर सागर जिला “गौर उत्सव” मना रहा है। इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल गुरुवार को शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यदि आप पीढ़ियों तक अपना यश चाहते हैं तो शिक्षा का मंदिर तैयार करें और इसे एक संकल्प के रूप में पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि एक बार किए गए संकल्प में फिर विकल्प का स्थान नहीं रहता। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी संकल्प की ताकत को समझे, विचार के प्रति समर्पण की ताकत को समझे। हम जो संकल्प जीवन में लें उसके प्रति विकल्प कभी स्वीकार न करें। डॉक्टर सर हरि सिंह गौर का जीवन भी की बड़े संकल्पों की प्रतिमूर्ति है। हम सभी को उनके प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। डॉ. हरिसिंह गौर जैसे बहुआयामी व्यक्तित्व हमारे जीवन में न केवल प्रेरणा स्रोत के रूप में कार्य करते हैं बल्कि सामाजिक सरोकार और समाज के प्रति अपने दायित्व, अपनी जिम्मेदारी की ओर भी इंगित करते हैं। मंत्री पटेल ने कहा कि डॉ. गौर साहब अधिवक्ता, लेखक, शिक्षाविद्, समाज सुधारक, दानी और ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे जो आगे आने वाली परिस्थितियों को देख सकते थे। आजादी के 75 साल बाद भी हम महसूस कर सकते हैं कि जो पाठ्यक्रम, सुविधाएं सागर केंद्रीय विश्वविद्यालय में है, वह देश के अन्य बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में भी नहीं, यह हमारे लिए गौरव की बात है। उन्होंने डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा प्राप्त होने की बात को याद करते हुए कहा कि शुरुआत में इस बात को समझ नहीं पाए कि केंद्रीय विश्वविद्यालय बन जाने पर डॉ. हरिसिंह गौर की मूल मंशा प्रभावित होगी। डॉ. गौर की मंशा थी कि बुंदेलखंड के गरीब, अनपढ़ व्यक्ति को संसाधन प्राप्त हों। परंतु जब मध्यप्रदेश के सागर में राजकीय विश्वविद्यालय बनाने के फैसले ने डॉ. गौर की मूल भावना को पुनः जीवित कर दिया। रानी अवंती बाई विश्वविद्यालय सागर सहित संपूर्ण बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगी और डॉ. गौर के सपनों को पूरा करने में सहायक बनेगी। इस दौरान मंत्री पटेल ने अपने गुरु की सीख याद करते हुए कहा कि युग परिवर्तन का अकाट्य सिद्धांत है, मूल सुधार तथा भूल सुधार। जिसे उन्होंने अपने जीवन में अपनाया और कई कठिन परिस्थितियों का आसानी से सामना कर सके। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलगुरू प्रो. नीलिमा गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत सहित जन-प्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी, कॉलेज के प्राचार्य, शिक्षक, छात्र छात्राएं मौजूद थे।  

दुनियाभर में जाना जायेगा उज्जैन का मेडिसिटी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सिंहस्थ के पहले उज्जैन में बनकर तैयार होगा मेडिसिटी एवं चिकित्सा महाविद्यालय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव महाकाल की निगरानी में होगा अब हर मर्ज का ईलाज दुनियाभर में जाना जायेगा उज्जैन का मेडिसिटी प्रायवेट सेक्टर के साथ मिलकर उज्जैन में ही मेडिकल टूरिज्म भी होगा स्थापित मुख्यमंत्री ने उज्जैन में 592.30 करोड़ की मेडिसिटी एवं चिकित्सा महाविद्यालय का किया भूमि-पूजन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश के उज्जैन को मेडिसिटी एवं चिकित्सा महाविद्यालय की सौगात दी है। इसका गुरूवार को भूमि-पूजन किया गया। सिंहस्थ के पहले यह महत्वाकांक्षी प्राजेक्ट तैयार हो जायेगा। इस नवीन व्यवस्था से महाकाल की निगरानी में अब हर मर्ज का ईलाज होगा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में उज्जैन की मेडिसिटी दुनियाभर में जानी जायेगी। उज्जैन में हाईटेक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ मेडिकल डिवाईस पार्क भी विकसित होगा। एक ही परिसर में सारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हाईराईज बिल्डिंग बनाई जाएगी तथा एक-एक इंच भूमि का उपयोग किया जायेगा। परिसर में ही चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टॉफ आदि के लिए आवासीय व्यवस्था रहेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश गठन के बाद वर्ष 2003-04 तक प्रदेश में कुल 05 मेडिकल कॉलेज थे। आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में 30 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं, जिनमें 17 सरकारी हैं और 13 निजी क्षेत्र के हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और समाज सहकार के साथ व्यवस्थाएं बनाएंगे। अगले वर्ष 12 मेडिकल कॉलेज और तैयार हो रहे हैं। जिन चिकित्सालयों की क्षमता अधिक है वहां चिकित्सा शिक्षा की व्यवस्था करने की भी योजना है। प्रदेश में पहले चिकित्सा शिक्षा एवं लोक स्वास्थ्य अलग-अलग विभाग होते थे, जिन्हें अब एक कर दिया गया है। सरकार एक-एक पैसे का सदुपयोग कर आम जनता को सुविधाएं दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को उज्जैन में 592.30 करोड़ रूपये लागत से निर्मित होने वाली मेडिसिटी एवं शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय का भूमि-पूजन कर संबोधित कर रहे थे। भूमि-पूजन के दौरान वेदपाठी बाहृणों द्वारा स्वस्ति वाचन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेडिसिटी एवं शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय सिंहस्थ-2028 के पहले प्रारंभ होगा। उज्जैन में प्रायवेट सेक्टर के साथ मिलकर मेडिकल टूरिज्म की स्थापना भी की जाएगी। उज्जैन में प्रदेश ही नहीं बल्कि विदेशों से आने वाले सभी मरीजों का उपचार किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा आयुष्मान भारत निरामय योजना शुरू करने के बाद राज्य सरकार ने भी तीन महीने में ही गंभीर मरीजों को एयर लिफ्ट कर बड़े चिकित्सालयों में उपचार कराने की सुविधा शुरू की है। जिन स्थानों पर एयरपोर्ट या हवाई पट्टी नहीं है वहां हेलीकॉप्टर से एयर लिफ्ट कर मरीजों को उपचार की सुविधा दी जा रही है। वर्तमान में प्रदेश में 5000 विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा प्रदान की जा रही है, जो आने वाले समय में 10 हजार हो जायेगी। साथ ही प्रदेश में आयुर्वेद के 5 मेडिकल कॉलेज शुरू कर रहे हैं। उज्जैन के आयुर्वेदिक धनवंतरी महाविद्यालय को सर्वसुविधायुक्त एम्स की तरह बनाया जायेगा, इसकी प्रक्रिया चल रही है। साथ ही उज्जैन में हौम्योपैथी महाविद्यालय भी शुरू कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को रोजगार मूलक पैरामेडिकल एवं नर्सिंग की शिक्षा देने के निर्देश दिये गये हैं, इससे प्रदेश में रोजगार उपलब्ध होगा। विश्वविद्यालय को पैरामेडिकल एवं नर्सिंग परीक्षाएं भी आयोजित करने के निर्देश दिये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी चिकित्सालयों में शव वाहन की व्यवस्था भी की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सिकल सेल-एनीमिया के उन्मूलन के पर्याप्त इंतजाम किये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन कलेक्टर कार्यालय का नवीन भवन माधव नगर थाने के पास की जमीन पर निर्मित कराने का भी निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम को उप-मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल एवं स्थानीय विधायक अनिल जैन कालूहेडा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान धनवंतरि की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं कन्या-पूजन कर किया। मालवी पगड़ी पहनकर कार्यक्रम में पहुँचे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उपस्थित जन-समूह का पुष्प-वर्षा कर स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के तहत हितलाभ भी वितरित किये, जिसमें ग्राम पंचायत ब्रजराज खेड़ी के दीपक शर्मा को व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए प्रोत्साहन राशि, उज्जैन नगर पालिक निगम की बेबी बाई को आयुष्मान भारत निरामय योजना की 5 लाख रूपये, ग्राम पंचायत गंगेड़ी को पिंक टॉयलेट निर्माण के लिए 4.84 लाख रूपये का चेक प्रदान किया। प्रदेश की पहली मेडिसिटी उज्जैन में निर्मित होने वाली प्रदेश की पहली मेडिसिटी एवं मेडिकल कॉलेज 14.97 एकड़ में 592.3 करोड़ रूपये की लागत से बनेगा। इसमें 6 हाईराइज टॉवर होंगे। टीचिंग हॉस्पिटल का भवन 9 मंजिला होगा, जिसमें बेसमेंट भी शामिल है। मेडिकल कॉलेज का भवन 8 मंजिला होगा इसमें भी बेसमेंट बनाया जाएगा। नर्सेस होस्टल, आरडीएच ब्लॉक व यूजी इंटर्न गर्ल्स होस्टल के भवन 14 मंजिला होंगे। वहीं यूजी इंटर्न बॉइस होस्टल का भवन 11 मंजिला होगा। मेडिसिटी चिकित्सा महाविद्यालय सम्पूर्ण रूप से दक्ष होगा इसमें रिसर्च एंड डवलपमेंट की सभी सुविधाएँ होंगी। इस महाविद्यालय में 550 बेड की क्षमता का अस्पताल होगा तथा इसमें 150 मेडिकल छात्रों को चिकित्सा शिक्षा प्रदान की जाएगी। महाविद्यालय में 380 क्षमता का नर्सिंग होस्टल, यूजी इन्टर्न गर्ल्स व बोइस होस्टल, सर्विस ब्लॉक, लाईब्रेरी, पार्किंग, जिमनेशियम, फुटओवर ब्रीज की सुविधाओं से सम्पन्न होगा। मेडिसिटी मेडिकल कॉलेज के भवन में उर्जा दक्षता, फायर सेफ्टी, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, सोलर पॉवर, इलेक्ट्रिसिटी बेकअप, सिवरेज ट्रीटमेंट प्लाँट आदि आधुनिक तकनीकिओं का उपयोग होगा। कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री एवं उज्जैन जिला प्रभारी गौतम टेटवाल, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक सर्व अनिल जैन कालूहेड़ा, सतीश मालवीय, डॉ. तेज बहादुरसिंह चौहान, जितेन्द्र पंड्या एवं शाजापुर विधायक अरूण भीमावद, महापौर मुकेश टटवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कमला कुंवर अंतरसिंह, उपाध्यक्ष श्रीमती शिवानी कुंवर, नगरनिगम सभापति अध्यक्ष श्रीमती कलावती यादव, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल, विवेक जोशी, बहादुरसिंह बोरमुण्डला सहित जन-प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित थे।  

एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भोपाल से हैदराबाद एवं बेंगलुरु उड़ान शुरू करने की तैयारी की, नई उड़ानें दिसंबर से

भोपाल भोपाल का दक्षिण भारत के साथ हवाई कनेक्शन जल्द ही पहले से मजबूत हो जाएगा। एयर इंडिया की सहयोगी कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भोपाल से हैदराबाद एवं बेंगलुरु उड़ान शुरू करने की तैयारी की है। जल्द ही बुकिंग शुरू हो जाएगी। 15 दिसंबर से नई उड़ाने संभावित हैं। इस रूट पर अभी तक इंडिगो की उड़ानें संचालित हैं। अतिरिक्त उड़ानें शुरू होने से यात्रियों को कम किराये में सीट मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। प्रतिस्पर्धा का मिलेगा लाभ भोपाल का दक्षिण भारत से हवाई कनेक्शन लंबे समय से है, लेकिन उड़ानों की संख्या कम होने के कारण यात्रियों को लो-फेयर का लाभ नहीं मिल पाता। हैदराबाद उड़ान में स्पाट फेयर 10 से 12 हजार रुपये तक है। बेंगलुरु तक दो उड़ाने होने के बावजूद स्पाट फेयर 10 से 12 हजार एवं अग्रिम बुकिंग किराया छह से आठ हजार रुपये तक है। उड़ानों की संख्या बढ़ने से एयरलाइंस में प्रतिस्पर्धा होगी और यात्रियों को कम किराये का लाभ मिल सकता है। यहां पर यह बता दें कि भोपाल से सबसे अधिक उड़ानें दिल्ली तक हैं। इस रूट पर इंडिगो तीन एवं एयर इंडिया की दो नियमित उड़ानें हैं। एक साप्ताहिक उड़ान है। यही कारण है कि तीन से चार हजार रुपये में सीट मिल जाती है। जल्द शुरू होगी बुकिंग एयर इंडिया एक्सप्रेस ने विंटर सीजन के लिए हैदराबाद एवं बेंगलुरु के अलावा दिल्ली एवं मुंबई के लिए स्लॉट लिया था। कंपनी इसकी शुरुआत हैदराबाद एवं बेंगलुरु उड़ान के साथ कर रही है। कंपनी ने एयरपोर्ट पर कार्यालय खोलने के लिए अनुमति शुल्क भी जमा कर दिया है। माना जा रहा है कि इस माह के अंत तक दोनों शहरों की बुकिंग शुरू होगी। कंपनी ने एयरपोर्ट अथॉरिटी को 15 दिसंबर से फ्लाइट ऑपरेशन शुरू करने की जानकारी दी है।   रीवा उड़ान की बुकिंग भी जल्द फ्लायबिग की रीवा उड़ान की बुकिंग भी जल्द शुरू होने की उम्मीद की जा रही है। कंपनी ने पहले 15 नवंबर से बुकिंग शुरू की थी। बाद में बुकिंग रोक दी गई। इंडिगो की प्रस्तावित कोलकाता उड़ान की बुकिंग भी अभी शुरू नहीं हुई है। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने स्पेस के लिए शुल्क जमा करा दिया है। शुरुआत हैदराबाद एवं बेंगलुरु उड़ान के साथ होगी। अगले साल दिल्ली एवं मुंबई की उड़ानें भी शुरू हो सकती है।- रामजी अवस्थी, एयरपोर्ट डायरेक्टर

इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन के लिए रेल मंत्रालय ने 77 गांवों की जमीन का अधिग्रहण करने के लिए गजट नोटिफकेशन दिया

इंदौर बहुप्रतीक्षित इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन परियोजना में अब जमीनी स्तर पर काम शुरू हो गया है। इस परियोजना में मप्र के तीन जिलों के 77 गांवों से होकर रेल लाइन गुजरेगी। हाल ही में रेल मंत्रालय ने इन गांवों की जमीन का अधिग्रहण करने के लिए गजट नोटिफकेशन भी कर दिया है। अब जिले के राजस्व अफसर जमीन का आकलन करने में जुट गए हैं ताकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द पूरी हो और रेल लाइन बिछाने का काम शुरू हो सके। बता दें कि इस नई रेल लाइन के शुरू हो जाने से धार, खरगोन और बड़वानी जिले के आदिवासी अंचलों से पहली बार रेल गुजरेगी। परियोजना से लगभग एक हजार गांव और 30 लाख आबादी का रेल सेवाओं से सीधा संपर्क जुड़ेगा। 16 जोड़ी पैसेंजर ट्रेन चलेंगी प्रोजेक्ट पूरा होने पर 16 जोड़ी पैसेंजर ट्रेन का संचालन होगा, जिसमें 50 लाख यात्री शुरुआती वर्षों में सफर करेंगे। हर साल इस प्रोजेक्ट से रेलवे को 900 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलेगा। इंदौर से मुंबई की दूरी भी 830 किमी से घटकर 568 किमी रह जाएगी। नई रेल लाइन खरगोन, धार और बड़वानी जिले से होकर गुजरेगी। बड़वानी जिले के 39, धार जिले के 28 और खरगोन जिले के 10 गांवों में रेल लाइन बिछाई जाएगी। अब जिला स्तर पर राजस्व विभाग इन गांव की जमीन का आकलन करेगा। इसके बाद पश्चिम रेलवे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करेगा। इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन संघर्ष समिति के मनोज मराठे ने बताया इस प्रोजेक्ट के लिए पिछले कई वर्षों से संघर्ष किया जा रहा है। आगामी पांच वर्ष में यह प्रोजेक्ट तैयार होने का लक्ष्य रखा गया है। इन गांवों की जमीनों का होगा उपयोग धार जिला : राती तलाई, सेवरी माल, सराय तालाब, आंवलिया, चुंडीपुरा बीके, बियाघाटी, आंवलीपुरा, जामदा, झाड़ीबड़ोदा, जलवाय, नागझीरी, लुन्हेराखुर्द, सुंद्रेल, पटलावद, भीखरोन, पंधानिया, ग्यासपुर खेड़ी, एकलारा खुर्द, एकलारा, दुधी, भोंदल, चिकटयावड़, सिरसोदिया, दुंगी, कोठिदा, चौकी, भारूडपुरा बीके और भारूड़पुरा। बड़वानी जिला : सोलवान, मालवान, मालवान बीके, भामन्या, बावदड़, अजनगांव, अजनगांव बीके, नवलपुरा, बनिहार, गोई, कलालदा, जामली, सालीकलां, नांदेड़, मातमुर, बालसमुद, ओजर, सांगवी नीम, देवला, जुलवानिया रोड, निहाली, छोटी खरगोन, वासवी, कुसमारी, मुंडला, रेलवा बुजुर्ग, बंजारी, खजूरी, बघाड़ी, घाटी, अजंदी, हसनखेड़ी, सिकंदर खेड़ी, सेगवाल, उमरदा, शेरपुरा, जरवाह और जरवाह बीके। खरगोन जिला : जारोली, औरंगपुरा, नागंवा, कोठड़ा, ज्ञानपुरा, मोहिदा, मक्सी, भेडल्याबाड़ा, नीमगढ़ और कुसुम्भ्या। यहां से गुजरेगी रेल लाइन नई रेल लाइन महू से धार होते हुए धरमपुरी, ठीकरी, राजपुर, सेंधवा, सिरपुर, शिखंडी, धुले, मालेगांव होकर मनमाड़ पहुंचेगी। पूरी परियोजना में 30 नए रेलवे स्टेशन भी बनाए जाएंगे।

विंडोज 10 में बिल्ट-ईन ऐप्स को ऐसे कर सकते है अनइंस्टॉल

विंडोज 10 में बहुत सारे पहले से इंस्टॉल किए गए ऐप जैसे एक्सबॉक्स, ग्रूव म्यूजिक, पीपल, मैप्स आदि होते हैं, जो सिर्फ जगह घेरते हैं लेकिन अगर आप उनसे छुटकारा पाना चाहते हैं तो उन्हें अनइंस्टॉल करने के सरल तरीके हैं। इन बिल्ट-ईन ऐप्स को कंट्रोल पैनल से अनइंस्टॉल नहीं किया जा सकता, लेकिन आप निश्चित रूप से इन्हें अन्य तरीकों से अनइंस्टॉल कर सकते हैं। इन यूनिवर्सल ऐप्स को कुछ सरल तरीकों से अनइंस्टॉल किया जा सकता है। पहला तरीका : ड्रॉपडाउन मेन्यू, विंडोज़ 10 में बिल्ट-ईन ऐप्स को अनइंस्टॉल करने का सबसे सरल तरीका है। सबसे पहले स्टार्ट मेनू में जाएं, वहाँ आपको ऐप का नाम टाइप करना होगा। उस पर राइट क्लिक करें और फिर अनइंस्टॉल का चयन करें। दूसरी विधि : विंडोज 10 से इन ऐप्स को निकालने के लिए पॉवरशैल का उपयोग किया जा सकता है। ऑपरेटिंग सिस्टम के कई उपयोग हैं और इन ऐप्स को अनइंस्टॉल करना इस तरह से सरल है। पॉवरशैल वास्तव में बिल्ट-ईनऐप्स को अनइंस्टॉल करने का सबसे लोकप्रिय तरीका है। इसे करने का तरीका नीचे दिया गया हैं- स्टेप 1: विंडोज 10 सर्च बार में पॉवरशैल टाइप करें। पॉवरशैल पर राइट-क्लिक करें। इसके बाद रन एज एडमिनिस्ट्रेटर को चुनें। स्टेप 2: निम्न कमांड टाइप करें : गेट-एपएक्सपैकेज । एफटी नाम, पैकेजफुलनाम- ऑटोसाइज़  जिसके बाद आपको इंस्टॉल ऐप्स की एक सूची दिखेगी। स्टेप 3: यदि आप किसी भी ऐप को हटाना चाहते हैं, तो आपको निम्नलिखित कमांड टाइप करनी होगी: गेट-एपएक्सपैकेज -एक्सबॉक्सएप।आपको ऐप का नाम बदलना होगा और फिर वाइल्डकार्ड्सका उपयोग करना होगा। Powershell में ऐप के नाम से पहले और बाद में आपको इसका इस्तेमाल करना हैं। स्टेप 4: आपको थोड़ी देर इंतजार करना होगा ताकि विंडोज ब्लोटवेयर को हटा सके। ये विभिन्न तरीके हैं जिनकी मदद से ईन-बिल्ट एप्स को विंडोज 10 से हटाया या अनइंस्टॉल किया जा सकता है। कुछ ईन-बिल्ट ऐप्स को छोड़कर आप इस तरीके से लगभग सभी ऐप्स को अनइंस्टाल कर सकते हैं।  

प्रदेश में हवाओं संग कुछ नमी आने के कारण कोहरा और धुंध भी छा रही, सर्द हवाओं ने बढ़ाई सिहरन, पचमढ़ी सबसे ठंडा

भोपाल उत्तर की ओर से आ रही सर्द हवाओं के असर से प्रदेश में सिहरन बढ़ गई है। इस वजह से लगभग सभी शहरों में न्यूनतम तापमान में गिरावट हो रही है। इसके साथ-साथ हवाओं संग कुछ नमी आने के कारण कोहरा और धुंध भी छा रही है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक मौसम का ऐसा मिजाज अगले दो दिन तक बना रह सकता है। लगातार लुढ़क रहा पारा मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक हिल स्टेशन पचमढ़ी प्रदेशभर में ठंडा रहा, जहां गुरुवार को लगातार दूसरे दिन न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में सबसे कम 9.1 डिग्री सेल्सियस तापमान मंडला में रिकॉर्ड किया गया और उमरिया में 9.8 डिग्री सेल्सियस रहा। नौगांव और राजगढ़ में पारा लुढ़ककर 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसी तरह राजधानी भोपाल में रात का तापमान 10.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे कम तापमान रहा। प्रदेश के सभी शहरों में रात का पारा 15 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। मौसम विभाग के मुताबिक गुरुवार सुबह प्रदेश के भोपाल, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, खजुराहो और नौगांव में मध्यम कोहरा छाया रहा। भोपाल में सुबह 1 से 2 किलोमीटर तक दृश्यता रही। दो दिन बाद छा सकते हैं बादल मौसम विज्ञानियों के अनुसार फिलहाल देश के पश्चिमोत्तर क्षेत्र में जेट स्ट्रीम बना हुआ है। मध्य पाकिस्तान पर हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बना हुआ है। दक्षिणी बांग्लादेश के ऊपर भी एक चक्रवात सक्रिय है। प्रदेश में फिलहाल दो दिन तक मौसम का मिजाज इसी तरह बना रहेगा। गुरुवार को बंगाल की खाड़ी में तमिलनाडु के तट के पास हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बनने जा रहा है। आगे बढ़कर यह कम दबाव के क्षेत्र में परिवर्तित हो सकता है। इस मौसम प्रणाली के असर से हवाओं का रुख बदल सकता है। इसके चलते दो दिन बाद प्रदेश में कहीं-कहीं बादल भी छा सकते हैं। सुबह छा रही धुंध मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व वरिष्ठ विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि राजस्थान पर बने प्रति-चक्रवात के असर से लगातार सर्द हवाएं मध्य प्रदेश की तरफ आ रही हैं। इस वजह से रात का पारा लगातार लुढ़क रहा है। हवाओं के साथ कुछ नमी भी आने से ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में कोहरा बना हुआ है। शेष भागों में सुबह के समय धुंध छाई रहती है।

भोपाल के थानों में जल्द बनेगी साइबर हेल्प डेस्क, फरियादी की सहायता के लिए तैनात होंगे दक्ष पुलिसकर्मी

Cyber ​​help desk will soon be set up in Bhopal police stations, skilled policemen will be deployed to assist the complainant. भोपाल। राजधानी की पुलिस साइबर ठगी की रोकथाम, इसका शिकार हुए लोगों की मदद के लिए एक और नवाचार करने जा रही है। अब राजधानी के हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। एक दिसंबर से सभी थानों में साइबर हेल्प डेस्क का संचालन शुरू हो जाएगा। यहां पर पांच लाख रुपये तक की साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज कराई जा सकेंगी। यह होगा लाभ इससे न सिर्फ साइबर ठगी के पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने में सहूलियत होगी, बल्कि साइबर क्राइम सेल का भार भी कम होगा। साथ ही जल्द शिकायत होने से पीड़ितों की ठगी गई राशि भी साइबर पुलिस त्वरित कार्रवाई कर होल्ड करेगी, जिससे रिफंड होने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।थानों की साइबर डेस्क में साइबर अपराध की इस चुनौती से निपटने के लिए शहर के हर थाने से दस पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। पुलिस कंट्रोल रूम में गुरुवार से छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिया गया है। इसके तहत पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधों से जुड़ी बारिकीयों की जानकारी दी जा रही है। साइबर विशेषज्ञ अधिकारी दे रहे प्रशिक्षण डीसीपी क्राइम अखिल पटेल ने बताया कि साइबर डेस्क संचालन के लिए तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता होती है। फिलहाल छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 20 साइबर विशेषज्ञ पुलिस अधिकारी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसमें पुलिसकर्मियों को राष्ट्रीय पोर्टल एनसीसीआरपी, जेएमआईएस एवं सीईआइआर पर डाटा अपलोड करने के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ ही टेलीकॉम कंपनी एवं अन्य तकनीकों का प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार जारी रहेंगे। बड़े मामले राज्य साइबर पुलिस ही संभालेगीसाइबर अपराध की रोकथाम और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए यह पहल की जा रहा है कि अब 5 लाख रुपय तक ऑनलाइन ठगी की शिकायत थानों में दर्ज कराई जा सकेगी। हालांकि पांच लाख रुपए से अधिक की साइबर धोखाधड़ी की जांच स्टेट साइबर पुलिस ही करेगी। यानी बड़ी साइबर ठगी के शिकार लोगों को भदभदा स्थित राज्य साइबर पुलिस के कार्यालय में ही शिकायत दर्ज करानी होगी।

इंटरनेट मीडिया तक बच्चों की पहुंच रोकने वाला बिल संसद में पेश, अब बच्चों ने किया इस्तेमाल तो लगेगा जुर्माना

मेलबर्न इंटरनेट मीडिया के गलत प्रभाव से बच्चों को बचाने के लिए गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई संसद में एक बिल पेश किया गया। दुनिया में अपने तरह का पहला यह बिल 16 साल से कम उम्र के बच्चों को इंटरनेट मीडिया से प्रतिबंधित कर देगा। बच्चों के अकाउंट बनाने पर लगेगा जुर्माना ऑस्ट्रेलिया की संचार मंत्री मिशेल रोलैंड ने कहा कि अगर इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म टिकटाक, फेसबुक, स्नैपचैट, रेडिट, एक्स और इंस्टाग्राम छोटे बच्चों को अकाउंट बनाने से रोकने में विफल होंगे, तो उनपर 33 मिलियन डालर (2,787,498,714 रुपये) तक का जुर्माना लगेगा। बिल को व्यापक राजनीतिक समर्थन प्राप्त है। इसके कानून बनने के बाद आयु प्रतिबंध को लागू करने के लिए प्लेटफार्मों को एक वर्ष का समय मिलेगा। हिंसक सामग्री देख खुद को हानि पहुंचा रहे बच्चे संचार मंत्री ने कहा कि 14 से 17 वर्ष के लगभग दो-तिहाई किशोरों ने हिंसक सामग्री सहित खुद को हानि पहुंचाने वाले कंटेंट देखे हैं। सरकार की ओर से कराए गए शोध में 95 प्रतिशत अभिभावक आनलाइन सुरक्षा को सबसे कठिन चुनौतियों में से एक मानते हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेट मीडिया की एक सामाजिक जिम्मेदारी है और वह अपने प्लेटफार्म पर होने वाले नुकसान को दूर करने में बेहतर काम कर सकता है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रियल-एस्टेट में करियर

समय के साथ तरक्की के नए रास्ते खुलते जा रहे हैं और इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर एवं रियल एस्टेट का बहुत बड़ा योगदान है। हर तरह की उन्नति को हम इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रियल एस्टेट से जोड़ सकते हैं।    देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रियल एस्टेट का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। हमारे चारों ओर सीमेंट-क्रांकीट के जंगल खड़े हो रहे हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट के बढ़ने से इसमें युवाओं के लिए करियर की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। यह क्षेत्र चुनौतियों के साथ-साथ भरपूर आर्थिक संभावनाओं वाला क्षेत्र भी है। इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए उन सभी गुणों और कौशल की आवश्यकता होती है जो की एक बिजनेस स्थापित करने के लिए ज़रूरी होते हैं। इस क्षेत्र को बिजनेस के रूप में अपनाने वाले युवा 12वीं पास करने के‍ बाद युवा दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से इसका कोर्स कर सकते हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों से सिविल अथवा कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग की डिग्री लेकर इस क्षेत्र में जॉ‍ब किया जा सकता है। सेल्स एवं मार्केटिंग क्षेत्र में करियर के लिए एमबीए किया जा सकता है। रियल एस्टेट के कारोबार से जुड़ी कंपनियों में कार्य के आधार पर आप सेल्स मैनेजर, सेल्स एक्जीक्यूटिव, कंस्ट्रक्शन एक्जीक्यूटिव जैसे पदों पर कार्य कर सकते हैं। चरणबद्ध प्रक्रिया साधारणतः छात्र 12वीं के उपरान्त दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से इस क्षेत्र में कोर्स करते हैं यदि उन्हें अपना रियल-एस्टेट बिजनेस चलाना हो. परन्तु तकनीकी ज्ञान प्राप्त कर इस क्षेत्र में जॉब करने के लिए आपको देश भर में फैले इंजीनिअरिंग कॉलेजों से सिविल अथवा कंस्ट्रक्शन इंजीनिअरिंग में डिग्री लेनी होगी. तकनीक से जुड़ी नौकरियों के अलावा इस क्षेत्र में आप सेल्स और मार्केटिंग अथवाइंटरनेश्नल रिलेशंस में एमबीए करके या बिजनेस कम्युनिकेशंस में डिग्री प्राप्त कर किसी कंस्ट्रक्शन कम्पनी के साथ अपने करियर की शुरूआत कर सकते हैं. विभिन्न कंपनियों के कार्य के आधार पर आप सेल्स मैनेजर, सेल्स एग्जीक्यूटिव, कंस्ट्रक्शन एग्जीक्यूटिव जैसे पदों से शुरूआत कर सकते हैं. यहाँ आपको निम्न क्षेत्रों का ज्ञान होना भी ज़रूरी है: -बिल्डिंग और कंस्ट्रक्शन से जुड़े तकनीकी पहलू -विभिन्न क्षेत्रों में घर/प्लॉट/ज़मीनों के बाज़ार भाव व इनसे जुड़ी ख़बरों पर नज़र रखना -विभिन्न कम्पनियों के स्टॉक और शेयर पर नज़र रखना -ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मार्केटिंग, सेलिंग व प्राइसिंग रणनीतियों का ज्ञान -शेयर होल्डर्स और खरीददारों का बड़ा नेटवर्क यदि आप इन विषयों में अपनी तैयारी पक्की रखते हैं तो आप अपने लिए इस क्षेत्र में एक विशेष जगह बना सकते हैं. पदार्पण यदि आप खुद का रियल-एस्टेट बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो अपने रिस्क पर अपने बनाए गए कोंटेक्ट्स के ज़रिये आप बाज़ार से कच्चा माल व मजदूर प्राप्त कर सकते हैं. आपके व्यापार के आकार के आधार पर बैंक भी आपको लोन दे सकता है. अन्यथा आप सिविल इंजीनिअरिंग में डिग्री लेकर नौकरी भी कर सकते हैं. क्या यह मेरे लिए सही करियर है? यदि आपमें ज्यादा पैसा कमाने की इच्छा और लगन है और यदि आप 24 घंटे सातों दिन कठिन परिश्रम करते हुए बिल्डर्स, कंसल्टेंट्स, मजदूर एवं साईट मैनेजर की टीम को मार्गदर्शन दे सकते हैं तो इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रियल-एस्टेट का क्षेत्र आपके लिए है. एक बिल्डर के तौर पर आपको सीमेंट, चूना मसाला, ईंट एवं अन्य कच्चा सामान खरीदकर मजदूरों और आर्कीटेक्ट को तय करना होता है. बिल्डर का कार्य पुरानी, गिरवी रखी हुई तथा वाद-विवाद वाली ज़मीन, प्लॉट अथवा घर को कानूनी तौर पर सही बनाकर उसे बेचने योग्य बनाना भी होता है. अब अगला कदम आता है प्रोपर्टी को बेचना जिसके लिए आपको एक अच्छा समन्वयक होना ज़रूरी है. हालांकि आपको शुरूआत में यह एक कठिन कार्य लगेगा परन्तु दीर्घकालीन दृष्टि से देखने पर यह आपके लिए किसी भी और प्रोफेशन से ज्यादा पैसे कमाने वाला प्रोफेशन साबित होगा. विशेषकर भारत में जहां इण्डिया प्रोपर्टी डोट कॉम, 99 एकड़ डोट कॉम और इण्डिया हाउसिंग डोट कॉम जैसी वेबसाईट सारे देश में प्रोपर्टी खरीदने और बेचने की सुविधा प्रदान कर रही हैं. ये वेबसाइट्स खरीदने वाले और बेचने वाले के बीच माध्यम बनकर प्रक्रिया को सरल बना देती हैं. बिजनेस को बढ़ाने का एक और माध्यम है- समाचार-पत्रों में विज्ञापन देना. खर्चा कितना होगा? अपने राज्य के किसी प्राइवेट संस्थान से सिविल इंजीनिअरिंग डिग्री करने पर 60,000 से लेकर 1 लाख रूपये तक वार्षिक खर्चा होगा. परन्तु यदि आप राष्ट्रीय स्तर की किसी प्रवेश परीक्षा को उत्तीर्ण कर आईआईटी या दिल्ली कॉलेज ऑफ़ इंजीनिअरिंग जैसे किसी संस्थान में दाखिला लेते हैं तो फीस अलग होगी. आपके पास सेल्स एंड मार्केटिंग में एमबीए कर रियल-एस्टेट एजेंसी में नौकरी करने का विकल्प भी है. छात्रवृत्ति यदि आप बैंक से लोन लेने के इच्छुक हैं तो स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया से बेहतर विकल्प कोई नहीं है जोकि आपको 7.5 लाख तक का लोन देता है. चूंकि यह एक राष्ट्रीयकृत बैंक है इसलिए क़र्ज़ चुकाने के तरीके भी सुरक्षित हैं. रोज़गार के अवसर इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं रियल-एस्टेट क्षेत्र में सेल्स एग्जीक्यूटिव, प्रोपर्टी मैनेजर, एस्टेट मैनेजर, आईटी मैनेजर- रियल एस्टेट और प्रोफ़ेसर जैसे पद आपको प्राप्त हो सकते हैं. ये वेबसाइट्स तकनीकी क्षेत्र में कई अवसर उपलब्ध कराती हैं. यदि आप सिविल इंजीनियर या एक आर्कीटेक्ट हैं तो भी आप कंस्ट्रक्शन टीम का भाग बन सकते हैं. अन्य फील्ड सेल्स की नौकरियों की तुलना में निर्माण क्षेत्र की जॉब ज्यादा थकाऊ होती है. दूसरी ओर, इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में आते हैं– सिविल इंजीनियर, इन्फ्रास्ट्रक्चर मैनेजर, स्टोर या वेयरहाउस मैनेजर तथा इन्वेंटरी एग्जीक्यूटिव्स. वेतनमान बिजनेस लाने की मात्रा के आधार पर  एक रियल-एस्टेट सेल्स एग्जीक्युटिव का शुरूआती मासिक वेतन 15000 से 50000 तक जा सकता है. यदि आप किसी बैंक अथवा प्राइवेट फाइनेंस कंपनी के रिअल्टी या मोर्टगेज डिपार्टमेंट में कमीशन बेस पर काम करते हैं तो व्यापारिक संबंध बनाने के अनुपात में आप असीमित आय प्राप्त कर सकते हैं. सिविल इंजीनियर के तौर पर आप अग्रणी कंपनियों में 20 से 25 हज़ार मासिक वेतन के साथ स्ट्रक्चर मैनेजर के पद से शुरूआत कर सकते हैं. मांग एवं आपूर्ति आईटी, इलेक्ट्रोनिक्स और टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर की तुलना में सिविल इंजीनियर की मांग हालांकि कम है परन्तु एक बार इन कंपनियों में लग जाने पर आप बहुत अच्छा सेलेरी पैकेज प्राप्त कर सकते हैं तथा आपको जापान जैसे देशों की यात्रा करने का मौका भी मिल सकता है. इन्फ्रास्ट्रक्चर मार्केटिंग और … Read more

प्रधानमंत्री मोदी को दो राष्ट्रों से मिले सर्वोच्च सम्मान के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बधाई

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बारबाडोस और डोमिनिका के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित होने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी को बारबाडोस के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान “ऑनररी ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोस” से सम्मानित किए जाने पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विश्व गगन में जय-जय भारत का नारा गूंज रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत वैश्विक मंच पर निरंतर नए आयामों को छू रहा है। यह बदलते और आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डोमिनिका के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान “डोमिनिका अवार्ड ऑफ ऑनर” से सम्मानित होने पर कहा कि प्रत्येक भारतीय के लिए यह गर्व करने का अवसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम के ध्येय मंत्र पर अग्रसर नया भारत आज विश्व के लिए प्रेरणापुंज की तरह है।  

आज मुख्यमंत्री डॉ.यादव करेंगे वर्चुअल चर्चा

आज मुख्यमंत्री डॉ.यादव करेंगे वर्चुअल चर्चा शुक्रवार को होगी कलेक्टर – कमिश्नर कॉन्फ्रेंस भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज कलेक्टर-कमिश्नर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार शाम 5:00 बजे मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन से सभी संभागों के कमिश्नर , पुलिस महानिरीक्षक , पुलिस आयुक्त , सभी जिलों के कलेक्टर के साथ पुलिस अधीक्षकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा करेंगे।

जल्द ही शहर की सड़कों में दौड़ेगी ई-बस

बिलासपुर संभवत आने वाले एक से दो महिने के भीतर यह सेवा शुरू हो जाएगी। इसके लिए कलेक्टर ने बिजली सब स्टेशन और चार्जिंग पाइंट बनाने और सेवा शुरू करने के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए है। जानकारी के अनुसार जल्द ही सीटी बस भी शहर पहुंच जाएगी। जानकारी के अनुसार ई चार्जिंग प्वाइंट और बसों को चार्ज करने के लिए 2500 किलोवाट के विद्युत सब स्टेशन की स्थापना की जा रही है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के अंशदान से फंड उपलब्ध कराया गया है। ऐसे में कोनी स्थित सिटी बस डिपो में भी जरुरी बदलाव किया जा रहा है। कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त अमित कुमार ने भी साफ किया है इस कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और कार्य तेज गति से पूरा होना चाहिए, क्योंकि जल्द ही ई-बस पहुंचने वाली है, ऐसे में इन्हें सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए है। साफ है कि जल्द ही यह बड़ी सौगात शहरवासियों को मिलने वाली है। ई-बस के आने से होने वाली फायदे     इलेक्ट्रिक बसों का किराया सामान्य बस से कम रहेगा।     इलेक्ट्रिक बसों से सफ़र करने में यात्रियों को शुद्ध वातावरण मिलता है।     इलेक्ट्रिक बस चलने में कम शोर करेगी।     इलेक्ट्रिक बसों से सफ़र सार्वजनिक परिवहन का आकर्षक विकल्प बनेगा।     इलेक्ट्रिक बसों से ध्वनि और वायु प्रदूषण कम होगा।     इलेक्ट्रिक बसों से कार्बन उत्सर्जन कम मात्रा में होगा। इलेक्ट्रिक बसों की यह भी खास बात इलेक्ट्रिक बसों में अतिरिक्त पुर्ज़े नहीं होते, इसलिए इनमें टेस्टिंग, इंजन फ़िल्टर में बदलाव, इंजन आयल में बदलाव, काइल और स्पार्क प्लग बदलने, और ट्रांसमिशन मेंटेनेंस की ज़रूरत नहीं होगी। खेप में आएगी बसें पीएम ई बस योजना के तहत बिलासुपर में 50 बस चलेगी, लेकिन इन्हें एक साथ नहीं भेजा जाएगा, इसे कई खेप में भेजा जाएगा और धीरे-धीरे 50 बस की संख्या पूरी की जाएगी।बसे आने और चलाने की तिथि निर्धारण के बाद ही रूट तय किया जाएगा। हालाकि पहले जिन रूटों में सिटी बस चली है, उन्हीं रूट में इन्हें चलाया जाएगा। साथ ही कुछ नए रूट भी इसमे शामिल होंगे।

बंगाल की खाड़ी में मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में ‘फेंजल’ नामक चक्रवात के बनने की संभावना जताई

कोलकाता बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवातीय स्थिति बन चुकी है, जिससे मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में ‘फेंजल’ नामक चक्रवात के बनने की संभावना जताई है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार रात को यह जानकारी दी। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण अंडमान और निकोबार के पास बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवातीय दबाव क्षेत्र बन चुका है। इसके प्रभाव से आस-पास के क्षेत्रों में एक निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, जो धीरे-धीरे तेज होकर ‘गहरे दबाव’ और फिर चक्रवात का रूप ले सकता है। मौसम विशेषज्ञों ने गुरुवार को कहा है कि चक्रवातीय दबाव अगले 24 घंटे में और मजबूत हो सकता है। समुद्री परिस्थितियों और हवाओं की गति के चलते यह चक्रवातीय दबाव शनिवार या रविवार को मुख्य भारतीय भूभाग के तटीय क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। इसके चलते तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में इसका असर पड़ सकता है। श्रीलंका के उत्तरी तटीय इलाकों में भी इसके प्रभाव की आशंका जताई गई है। अगर यह चक्रवात पूर्ण रूप लेता है, तो इसे ‘फेंजल’ नाम दिया जाएगा। यह नामकरण सऊदी अरब द्वारा किया गया है। इससे पहले अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में इसी क्षेत्र में बने ‘दाना’ चक्रवात ने भारी प्रभाव डाला था, जिसका नाम कतर द्वारा दिया गया था। हालांकि, आईएमडी ने अब तक इस संभावित चक्रवात की सटीक दिशा, तीव्रता या उससे होने वाले नुकसान के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी है। मौसम विभाग ने तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। प्रशासन ने भी ऐहतियाती कदम उठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। समुद्र में मछुआरों को नहीं जाने की सलाह दी गई है।  

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