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उद्योग मंत्री देवांगन बोले- नई औद्योगिक नीति से प्रदेश में बेहतर औद्योगिक वातारण का निर्माण होगा

रायपुर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि प्रदेश की नवीन औद्योगिक नीति में उद्यमियों एवं युवाओं के लिए बेहतर अवसर प्रदान करने वाली है। इससे प्रदेश में बेहतर औद्योगिक वातारण का निर्माण होगा और प्रदेश के निवासियों को रोजगार उपलब्ध होंगे। ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा 14 नवम्बर को प्रदेश में नवीन औद्योगिक नीति लॉन्च की गई थी। छत्तीसगढ़ सरकार ने भारत सरकार के विजन 2047 की परिकल्पना को साकार करने तथा राज्य के औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से कई प्रावधान किए हैं। राज्य के प्रशिक्षित व्यक्तियों को औपचारिक रोजगार में परिवर्तित करने के लिए उद्योगों हेतु प्रति व्यक्ति 15 हजार रूपए की प्रशिक्षण वृत्ति प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। यह नीति 31 मार्च 2030 तक के लिए होगी। उद्योग मंत्री श्री देवांगन ने बताया कि नई औद्योगिक नीति में निवेश प्रोत्साहन में ब्याज अनुदान, लागत पूंजी अनुदान, स्टाम्प शुल्क छूट, विद्युत शुल्क छूट. मूल्य संवर्धित कर प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। नई नीति में मंडी शुल्क छूट, दिव्यांग (निःशक्त) रोजगार अनुदान, पर्यावरणीय प्रोजेक्ट अनुदान, परिवहन अनुदान, नेट राज्य वस्तु एवं सेवा कर की प्रतिपूर्ति के भी प्रावधान किये गये हैं। इस नीति में राज्य के युवाओं के लिये रोजगार सृजन को लक्ष्य में रखकर एक हजार से अधिक स्थानीय रोजगार सृजन के आधार पर बी-स्पोक पैकेज विशिष्ट क्षेत्र के उद्योगों के लिये प्रावधानित है। राज्य के निवासियों विशेषकर अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला उद्यमियों, सेवानिवृत्त अग्निवीर सैनिक, भूतपूर्व सैनिकों, जिनमें पैरामिलिट्री भी शामिल है, को नई औद्योगिक नीति के तहत अधिक प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान है। नक्सल प्रभावित लोगों, कमजोर वर्ग, तृतीय लिंग के उद्यमियों के लिए नई औद्योगिक पॉलिसी के तहत विशेष प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान किया गया है। नई औद्योगिक नीति में पहली बार सेवा क्षेत्र अंतर्गत एमएसएमई सेवा उद्यम एवं वृहद सेवा उद्यमों के लिये पृथक-पृथक प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। इस नीति में फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाईल, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोत्पाद (एनटीएफपी) प्रसंस्करण, कम्प्रेस्ड बॉयो गैस, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू), आई.टी., आई.टी.ई.एस., डेटा सेंटर, जल विद्युत परियोजनाओं, सौर ऊर्जा परियोजनाओं आदि के लिए आकर्षक पृथक औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन का प्रावधान है। राज्य के कोरबा-बिलासपुर-रायपुर को देश के औद्योगिक मानचित्र में स्थान दिलाने के लिये इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर की स्थापना का प्रावधान है। नई औद्योगिक नीति के निर्माण के लिए उद्योग विभाग द्वारा संबंधित सभी हितपक्षों, औद्योगिक संगठन, औद्योगिक समूहों, संबंधित विभागों के साथ एक वर्ष तक संवाद एवं गहन विचार-विमर्श कर तैयार किया गया है।

घर के मुख्य दरवाजे से जुड़ी इन बातों का रखें ध्यान, होगी बरकत

फेंगुशई के अनुसार घर का मुख्य द्वार घर में सकारात्मक ऊर्जा आने का मुख्य साधन है। इससे घर में खुशहाली और बरकत आती है। इसलिए घर के मुख्य दरवाजे से जुड़ी फेंग शुई की बातों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। इसके अलावा फेंगशुई में घर में कुछ पौधे लगाने से भी सकारात्मक ऊर्जा आती है। लेकिन इन्हें लगानें से पहले कुछ बातों का भी ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ बातों के बारें में: 1. फेंगशुई के अनुसार घर के दरवाजे के पास ताजे फूल रखने चाहिए। इसके अलावा घर की खुशहाली के लिए दरवाजे के पास हरे पौधे और बुद्धा की प्रतिमा रखनी चाहिए। 2. परिवार के सदस्यों में प्यार बढ़ाने के लिए दरवाजे के बाहर विंड चाइम लगाएं इसके अलावा आप घर के दरवाजे के बाहर छोटी-छोटी लाइटें भी लगा सकते हैं। 3. कोशिश करें कि घर के दरवाजे का मुख्य द्वार का रास्ता सीधा नहीं हो, इसमें मुड़ाव जरूर होना चाहिए। फेंगशुई के अनुसार कहा जाता है कि इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और घर से नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है। 4. फेंगशुई के अनुसार घर में ऐसे पौधों को रखना चाहिए जो प्राकृतिक हों यानी जिन्हें बढ़ने के लिए मिट्टी, पानी और सूरज की रोशनी की जरूरत हो। इनकी सही तरीके से देखभाल भी करनी चाहिए। 5. घर के मुख्य दरवाजे के पास कोई भी फालतू चीज नहीं रखी होनी चाहिए। इसके अलावा घर की सुख-समृद्धि के लिए दरवाजे के दोनों तरफ पौधे लगाने चाहिए। इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य व सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।  

एमपी में व्हाइट टॉपिंग तकनीक बनेगी, बढ़ेगी सड़कों की उम्र, चार महीनों के अंदर काम खत्म करने का रखा टारगेट

भोपाल  मध्य प्रदेश में जल्द ही सड़कें और मजबूत बनेंगी। पीडब्ल्यूडी खराब सड़कों की समस्या से निपटने के लिए व्हाइट टॉपिंग तकनीक अपना रहा है। इस तकनीक से बनी सड़कें ज़्यादा टिकाऊ होती हैं और लंबे समय तक चलती हैं। शुरुआत में 21 जिलों की 41 सड़कों पर इस तकनीक का इस्तेमाल होगा। काम इसी महीने शुरू हो जाएगा और चार महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे बारिश में सड़कों के उखड़ने की समस्या से निजात मिलेगी। लोक निर्माण विभाग ने खराब सड़कों की बढ़ती शिकायतों के बाद यह कदम उठाया है। बारिश में सड़कें टूटने से लोगों को काफी परेशानी होती है। व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बनी सड़कें इस समस्या का समाधान करेंगी। इस तकनीक से करीब 108 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जाएंगी। प्रोजेक्ट नवंबर अंत तक शुरू होकर अगले चार महीनों में पूरा हो जाएगा। सड़क निर्माण में नई क्रांति व्हाइट टॉपिंग तकनीक सड़क निर्माण में एक नया मोड़ है। यह तकनीक सड़कों को मजबूत और टिकाऊ बनाती है। इससे सड़कों का रखरखाव भी आसान हो जाता है। यह तकनीक लंबे समय में पैसा भी बचाती है। सरकार का यह कदम प्रदेश की सड़कों की दशा सुधारने में मददगार साबित होगा। इससे लोगों को आवागमन में सुविधा होगी और राज्य के विकास को गति मिलेगी। यह तकनीक भविष्य में सड़क निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है। यह सड़कों को गर्मी से बचाती है. इससे शहरों का तापमान भी कम रहता है। व्हाइट टॉपिंग तकनीक से बेहतर सड़कें और बेहतर भविष्य की उम्मीद है। लोगों को मिलेगा बेहतर यात्रा का अनुभव भोपाल में वल्लभ भवन मार्ग और सीएम हाउस मार्ग समेत 14 सड़कों को चिह्नित किया गया है। PWD ने 15 अन्य जिलों में भी एक-एक सड़क पर इस तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। इन जिलों में इंदौर, नर्मदापुरम, नीमच, बैतूल से लेकर मुरैना, रतलाम, रायसेन, रीवा, सतना,आगर मालवा, उमरिया, खंडवा, गुना, छतरपुर, देवास और हरदा शामिल हैं। इससे इन जिलों की सड़कों की हालत में सुधार होगा। लोगों को बेहतर यात्रा का अनुभव मिलेगा। जानें क्या है व्हाइट टॉपिंग तकनीक व्हाइट टॉपिंग तकनीक में पुरानी सड़क की ऊपरी परत हटाकर कंक्रीट की मोटी परत बिछाई जाती है। इसमें M-40 ग्रेड सीमेंट और फाइबर बुरादा का इस्तेमाल होता है। 6 से 8 इंच मोटी यह परत सड़क को मजबूत बनाती है। भारी ट्रैफ़िक और खराब मौसम का भी इस पर कम असर होता है। इससे सड़क की उम्र 20 से 25 साल तक बढ़ जाती है। यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल भी है। कंक्रीट की सतह डामर से ज़्यादा ठंडी रहती है। इससे रखरखाव का खर्च भी कम आता है।

देश में हुई ‘सुभद्रा योजना’की शुरुआत, लाभार्थी महिलाओं को सुभद्रा डेबिट कार्ड भी जारी किया जाएगा

नई दिल्ली  हाल ही में 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन के मौके पर महिलाओं के लिए ‘सुभद्रा योजना’की शुरुआत की। इस योजना के तहत ओडिशा सरकार महिलाओं को हर साल 10,000 रुपये देगी। यह पैसा 21 से 60 साल की महिलाओं के खाते में सीधे ट्रांसफर किया जाएगा। योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं को सुभद्रा डेबिट कार्ड भी जारी किया जाएगा। आइए जानते हैं कि कौन-कौन इस योजना के लिए पात्र है और इसका लाभ लेने के लिए क्या करना होगा। सवाल– सुभद्रा योजना क्या है? जवाब– सुभद्रा योजना ओडिशा सरकार की एक बड़ी पहल है, जिसका मकसद महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है। सवाल– सुभद्रा योजना के तहत लाभार्थियों को क्या लाभ मिलते हैं? जवाब- लाभार्थियों को सुभद्रा कार्ड और पांच वर्षों के लिए हर साल आर्थिक सहायता के रूप में 10,000 रुपये मिलते हैं। सवाल- लाभार्थियों को सुभद्रा योजना के तहत कितनी राशि मिलेगी? जवाब– योजना की पात्र लाभार्थी महिलाओं को कुल 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी। ये रुपये पांच वर्षों में हर साल 10-10 हजार रुपये के तौर पर दिए जाएंगे। सवाल- खाते में ये रकम कब आएगी? जवाब- हर साल 5-5 हजार रुपये की दो किस्तों में ये रकम दी जाएगी। पहले 5,000 रुपये राखी पूर्णिमा (रक्षाबंधन) पर और दूसरे 5,000 रुपये अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) पर। सवाल– सुभद्रा कार्ड क्या है? जवाब- सुभद्रा कार्ड एक डेबिट कार्ड है जो सभी लाभार्थियों को प्रदान किया जाएगा, ताकि उन्हें अपने खाते से रुपये निकालने में आसानी हो। सवाल- क्या किसी अन्य आर्थिक योजना का लाभ ले रही महिलाएं सुभद्रा योजना के लिए योग्य हैं? जवाब– नहीं, जो महिलाएं अन्य योजनाओं के तहत 1,500 रुपये हर महीने या ज्यादा पा रही हैं, वे इस योजना के लिए अप्लाई नहीं कर सकतीं। सवाल– सुभद्रा योजना के तहत पुरस्कार कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है? जवाब- यह कार्यक्रम डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए है, जिसमें प्रत्येक ग्राम पंचायत या शहरी स्थानीय निकाय में सबसे ज्यादा डिजिटल लेन-देन करने वाली 100 महिलाओं को 500 रुपये का अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा। सवाल- सुभद्रा योजना ओडिशा के किन जिलों में लागू होगी? जवाब– यह योजना ओडिशा के सभी 30 जिलों में लागू होगी। सवाल- सुभद्रा योजना के लिए कौन-कौन महिलाएं पात्र हैं? जवाब– आवेदक महिलाओं को ओडिशा की निवासी होना चाहिए। उम्र 21 वर्ष से ज्यादा और 60 वर्ष से कम होनी चाहिए। इसके अलावा आर्थिक स्थिति और रोजगार से संबंधित दूसरी शर्तों को पूरा करना होगा। सवाल– सुभद्रा योजना के लिए कौन योग्य नहीं है? जवाब- 21 वर्ष से कम या 60 वर्ष से ज्यादा उम्र वाली महिलाएं इसके लिए अप्लाई नहीं कर सकतीं। साथ ही वो महिलाएं भी पात्र नहीं हैं, जो निर्धारित सीमाओं से ज्यादा आर्थिक सहायता प्राप्त कर रही हैं। सार्वजनिक प्रतिनिधि और जिनके पास कुछ संपत्तियां या आय के स्रोत हैं, वे अयोग्य हैं। सवाल– योजना का लाभ लेने लिए परिवार की इनकम कितनी होनी चाहिए। जवाब- 2.50 लाख रुपये सालाना से ज्यादा आय वाले परिवारों की महिलाएं योजना के लिए अयोग्य हैं। सवाल- आवेदन पत्र कहां से प्राप्त कर सकते हैं? जवाब– आंगनवाड़ी केंद्रों, ब्लॉकों, मो सेबा केंद्रों और सामान्य सेवा केंद्रों से आवेदन पत्र लिए जा सकते हैं। सवाल– आवेदक अपने आवेदन कहां जमा कर सकते हैं? जवाब- महिलाएं अपने भरे हुए आवेदन पत्र सामान्य सेवा केंद्रों या मो सेबा केंद्रों पर जमा कर सकती हैं। सवाल- क्या आवेदन पत्र के लिए कोई शुल्क है? जवाब– आवेदन पत्र निःशुल्क हैं। साथ ही आवेदकों को इसे जमा करते वक्त भी कोई शुल्क नहीं देना है। सवाल– योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे कर सकते हैं? जवाब– योजना की ऑफिशियल वेबसाइट https://subhadra.odisha.gov.in/ पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सवाल- सुभद्रा योजना के लिए कौन-कौन से दस्तावेज आवश्यक हैं? जवाब- आवेदकों को आधार कार्ड, आधार से लिंक किया हुआ मोबाइल नंबर और DBT-सक्षम बैंक खाते से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे। सवाल- यदि आवेदक के पास DBT-सक्षम बैंक खाता नहीं है, तो क्या होगा? जवाब– आवेदक को उसके आधार कार्ड से जुड़ा DBT-सक्षम बैंक खाता खोलने और लिंक करने का अवसर दिया जाएगा। सवाल– योजना की लाभार्थी महिलाएं ई-केवाईसी प्रक्रिया कैसे पूरी कर सकती हैं? जवाब- लाभार्थी महिलाएं अपने आधार नंबर का इस्तेमाल कर सुभद्रा पोर्टल या मोबाइल एप्लिकेशन पर फेस-ऑथेंटिकेशन के माध्यम से ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकती हैं। सवाल– योजना के लिए आवेदकों की पात्रता कैसे जांच की जाएगी? जवाब- पात्रता की जांच सरकारी डेटाबेस के जरिए और अगर जरूरत पड़ी तो फील्ड जांच के माध्यम से की जाएगी।

न्यूयॉर्क ने एक सदी पुराने कानून को निरस्त कर दिया, जिसमे जीवनसाथी को धोखा देना अपराध माना जाता था

न्यूयॉर्क. न्यूयॉर्क ने  एक सदी से भी ज़्यादा पुराने एक ऐसे कानून को निरस्त कर दिया, जिसका इस्तेमाल शायद ही कभी किया जाता था। इस कानून के तहत अपने जीवनसाथी को धोखा देना अपराध माना जाता था। यह एक ऐसा अपराध था जिसके लिए व्यभिचारियों को तीन महीने की जेल हो सकती थी। गवर्नर कैथी होचुल ने इस कानून को निरस्त करने वाले बिल पर हस्ताक्षर किए। यह कानून 1907 से चला आ रहा है और इसे लंबे समय से पुराना और लागू करने में मुश्किल माना जाता रहा है। उन्होंने कहा, “हालांकि मैं अपने पति के साथ 40 साल तक प्यार भरी शादीशुदा ज़िंदगी जीने के लिए भाग्यशाली रही हूं, लेकिन मेरे लिए व्यभिचार को अपराध से मुक्त करने वाले बिल पर हस्ताक्षर करना थोड़ा विडंबनापूर्ण है, लेकिन मैं जानती हूं कि लोगों के बीच अक्सर जटिल रिश्ते होते हैं।” “इन मामलों को स्पष्ट रूप से इन व्यक्तियों द्वारा ही संभाला जाना चाहिए, न कि हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली द्वारा। आइए इस मूर्खतापूर्ण, पुराने कानून को हमेशा के लिए हटा दें।” व्यभिचार कानून व्यभिचार पर प्रतिबंध वास्तव में कई राज्यों में कानून है और इसे तलाक लेना कठिन बनाने के लिए लागू किया गया था, ऐसे समय में जब पति या पत्नी द्वारा धोखा दिया जाना साबित करना कानूनी अलगाव पाने का एकमात्र तरीका था। आरोप दुर्लभ हैं और दोषसिद्धि और भी दुर्लभ है। कुछ राज्यों ने हाल के वर्षों में अपने व्यभिचार कानूनों को निरस्त करने के लिए भी कदम उठाए हैं। न्यूयॉर्क में व्यभिचार की परिभाषा इस प्रकार दी गई है कि जब कोई व्यक्ति “किसी अन्य व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाता है, जबकि उसका कोई जीवित जीवनसाथी है या दूसरे व्यक्ति का कोई जीवित जीवनसाथी है।” न्यूयॉर्क टाइम्स के एक लेख के अनुसार, राज्य के कानून का पहली बार इस्तेमाल इसके लागू होने के कुछ सप्ताह बाद एक विवाहित पुरुष और 25 वर्षीय महिला को गिरफ्तार करने के लिए किया गया था। बिल के प्रायोजक राज्य विधानसभा सदस्य चार्ल्स लैविन ने कहा कि 1970 के दशक से इस कानून के तहत लगभग एक दर्जन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, और उनमें से केवल पाँच मामलों में ही दोषसिद्धि हुई है। पार्क में यौन क्रिया करते हुए पकड़ी गई महिला ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य के कानून का अंतिम बार प्रयोग 2010 में एक महिला के विरुद्ध किया गया था, जो एक पार्क में यौन क्रिया करते हुए पकड़ी गई थी, लेकिन बाद में एक समझौते के तहत व्यभिचार के आरोप को हटा दिया गया था। 1960 के दशक में न्यूयॉर्क इस कानून को निरस्त करने के करीब पहुंच गया था, जब दंड संहिता का मूल्यांकन करने वाले राज्य आयोग ने कहा था कि इसे लागू करना लगभग असंभव है। 1965 के न्यूयॉर्क टाइम्स के एक लेख के अनुसार, उस समय, विधिनिर्माता शुरू में प्रतिबंध हटाने के पक्ष में थे, लेकिन अंततः इसे बरकरार रखने का निर्णय लिया गया, क्योंकि एक राजनेता ने तर्क दिया कि इसे हटाने से ऐसा लगेगा कि राज्य आधिकारिक तौर पर बेवफाई का समर्थन कर रहा है।

मध्यप्रदेश में प्रभावी संचार के लिए बिजली कंपनियां करेंगी उपयोग

भोपाल एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के संचालक मंडल द्वारा जागरूकता उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए मध्यप्रदेश में संचार के लिए ‘’विद्युत’’ और ‘’बिजली’’ को विद्युत वितरण कंपनियों के अधिकृत शुभंकर के रूप में उपयोग करने का निर्णय लिया गया है। शुभंकर ‘’विद्युत’’ और ‘’बिजली’’ को मध्यप्रदेश में ऊर्जा विभाग के अधीन एम.पी.पॉवर मैनेजमेंट कंपनी, एम.पी.पॉवर जनरेटिंग कंपनी, एम.पी.पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के साथ ही तीनों विद्युत वितरण कंपनियों क्रमश: पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर तथा मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल द्वारा इन शुभंकरों के माध्यम से प्रभावी संदेश तैयार कर प्रचार – प्रसार को बढावा देने के लिए उपयोग किया जाएगा।    गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में ऊर्जा के दक्ष उपयोग को बढ़ावा देने एवं घरों की छतों पर सोलर रूफ-टॉप के उपयोग को प्रोत्साहित करने बिजली बिलों के समय पर भुगतान और विद्युत सुरक्षा के लिए उपभोक्ताओं को जागरूक करने के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए मध्यप्रदेश में संचार के लिए ‘’बिजली’’ नाम की एक छोटी बालिका और ‘’विद्युत’’ नाम के एक छोटे बालक को शुभंकर के रूप में उपयोग किया जाएगा। यह शुभंकर बिजली उपभोक्ताओं तक बिजली संबंधी संदेश पहॅुंचाने के लिए ऊर्जा विभाग के राजदूत के रूप में काम करेंगे।   मध्यप्रदेश में कार्यरत तीनों विद्युत वितरण कंपनियों और ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत अन्य कंपनियों द्वारा ऊर्जा से संबंधित संदेशों को संप्रेषित करने के लिए इन दोनों शुभंकर का उपयोग एक अभिनव और आकर्षक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करेगा तथा इन आकर्षक शुभंकरों के अधिकारिक उपयोग से बिजली सुरक्षा, ऊर्जा बचत, ऊर्जा दक्षता और सौर ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ ही बिजली बिलों का समय पर भुगतान करने के लिये उपभोक्ताओं को प्रभावी रूप से प्रेरित किया जा सकेगा। इससे राज्य में अधिक प्रभावी और जिम्मेदार ऊर्जा खपत संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।   कौन हैं “बिजली” और “विद्युत” शुभंकर बिजली एक छोटी बालिका है जिसकी आंखें चमकदार हैं और प्रभावित करने वाली हैं। यह लड़की बिजली को दर्शाने वाली लाल पोशाक पहनती है और हाथ में एक छोटा सा दीपक लिये हुए है, जो ऊर्जा और बिजली के महत्व को प्रतिबिम्बित करता है। बिजली एक ऐसी शुभंकर है जो कि चंचल, जिज्ञासु, ऊर्जा से भरपूर और उत्साही है, जो ऊर्जा और नवकरणीय ऊर्जा स्रोतों का प्रतिनिधित्व करती है। यह गर्मजोशी और सुलभता को प्रतिविम्बित करती है, जो सभी उम्र के उपभोक्ताओं के लिए भरोसेमंद है। दूसरी ओर, विद्युत एक प्यार भरी शरारत लिये हंसता मुस्कुराता लड़का है, जिसने बिजली के प्रतीक वाली हरे रंग की टी-शर्ट पहनी है और हाथ में एक हरे लाल रंग का बिजली का चिन्ह है, जो बिजली की खपत को रेखांकित करता है। विद्युत शुभंकर दिखने में साहसी, आत्मविश्वास से परिपूर्ण और हमेशा सीखने के लिए उत्सुक दिखाई देता है। यह ऊर्जा संरक्षण और सौर ऊर्जा के नवीन पहलुओं को दर्शाता है और उसका करिश्माई स्वभाव युवाओं और उम्रदराज उपभोक्ताओं को समान रूप से आकर्षित करता है। छोटे बच्चे उमंग, उत्साह के पर्याय और देश का भविष्य हैं, इसलिए शुभंकर ‘’बिजली’’ और ‘’विद्युत’’ को छोटे बच्चे के रूप में दर्शाया गया है।    

देवेंद्र परमार को बेस्ट डेयरी फार्मर वर्ग में देशी पशु नस्ल सुधार के लिए द्वितीय पुरस्कार

भोपाल पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में उपलब्धि के लिए प्रदेश के शाजापुर जिले के किसान देवेंद्र परमार का केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय गोपाल-रत्न पुरस्कार 2024 के लिए चयन हुआ है। उन्हें बेस्ट डेयरी फार्मर वर्ग में देशी पशु नस्ल सुधार के लिए द्वितीय पुरस्कार केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन द्वारा राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 26 नवंबर के अवसर पर नई दिल्ली में प्रदान किया जाएगा। दुग्ध उद्यमी किसान देवेंद्र परमार शाजापुर जिले के पटलावदा के हैं, जो भोपाल दुग्ध संघ के अंतर्गत शुजालपुर दुग्ध उत्पादन समिति के सदस्य हैं। वह बड़ी संख्या में दुधारू पशुओं का पालन करते है। उन्होंने देशी गायों की नस्ल सुधार में उल्लेखनीय कार्य किया है। वह देव डेयरी के नाम से पैकेज्ड दूध बेचते हैं। उन्होंने अपने खेत में गोबर गैस संयंत्र भी लगया है, जिससे बड़ी मात्रा में गोबर गैस का उत्पादन करते हैं, साथ ही जैविक खाद बेचकर भी अच्छी आमदनी लेते हैं। राष्ट्रीय गोपाल-रत्न पुरस्कार राष्ट्रीय गोपाल-रत्न पुरस्कारों का उद्देश्य पशुपालन और डेयरी के क्षेत्र में काम करने वाले स्वदेशी जानवरों को पालन कर रहे किसान, एआई तकनीशियन और डेयरी सहकारी समितियां / दूध उत्पादक कंपनियां/ डेयरी किसान उत्पादक संगठन की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित करना है। यह पुरस्कार तीन श्रेणियों में स्वदेशी गाय/भैंस नस्लों का पालन करने वाले सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (एआईटी) और सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी/ दुग्ध उत्पादक कंपनी/ डेयरी किसान उत्पादक संगठन को प्रदान किए जाते हैं। पुरस्कार में प्रथम श्रेणी के लिए 5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार, द्वितीय श्रेणी के लिए 3 लाख रुपये, तृतीय श्रेणी के लिए 2 लाख रुपये और पूर्वोत्तर क्षेत्र में विशेष पुरस्कार के लिए 2 लाख रुपये शामिल हैं। साथ ही एक प्रमाण-पत्र और एक स्मृति चिन्ह भी दिया जाता है। इस वर्ष विजेताओं का चयन कुल प्राप्त 2574 आवेदनों में से किया गया था, जिन्हें एक ऑनलाइन आवेदन पोर्टल यानी https://awards.gov.in के माध्यम से आमंत्रित किया गया। राष्ट्रीय गोकुल मिशन पशुपालन क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो कृषि और संबद्ध क्षेत्र के जीवीए का एक तिहाई हिस्सा है और इसकी वार्षिक वृद्धि दर 8% से ज्यादा है। साथ ही पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन गतिविधियाँ किसानों की आय उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, विशेष रूप से भूमिहीन, छोटे और सीमांत किसानों और महिलाओं के लिए, इसके अलावा यह लाखों लोगों को सस्ती और पौष्टिक भोजन प्रदान करती है। भारत की स्वदेशी गायों की नस्लें मजबूत हैं और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की आनुवांशिक क्षमता रखती हैं। स्वदेशी नस्लों के विकास एवं संरक्षण पर एक विशेष कार्यक्रम के न होने से उनकी जनसंख्या कम हो रही थी और उनका प्रदर्शन उनकी क्षमता से कम है। इसलिए केन्द्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने दिसंबर 2014 में “राष्ट्रीय गोकुल मिशन” की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य स्वदेशी पशु नस्लों को संरक्षित और विकसित करना है।  

लोकसभा सदस्यों को अब डिजिटल पेन से हस्ताक्षर करने होंगे ‘सबमिट’ बटन दबाना होगा

नई दिल्ली संसद के सोमवार से शुरू हुए शीतकालीन सत्र में भाग लेने वाले लोकसभा सदस्यों के पास ‘इलेक्ट्रॉनिक टैब’ पर ‘डिजिटल पेन’ का उपयोग करके अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का विकल्प होगा। संसद को कागज रहित बनाने की अध्यक्ष ओम बिरला की पहल के तहत लोकसभा कक्ष की लॉबी में चार ‘काउंटर’ पर ‘इलेक्ट्रॉनिक टैब’ रखे जाएंगे। लोकसभा सचिवालय ने कहा, ‘‘काउंटर पर उपस्थिति पुस्तिका पहले की तरह रखी जाती रहेंगी लेकिन सदस्यों को सलाह दी जाती है कि वे टैब के उपयोग को प्राथमिकता दें और संसद को कागज रहित बनाने में मदद करें।’’ अधिकारियों ने बताया कि सदस्यों को सबसे पहले टैब पर ‘ड्रॉप डाउन मेन्यू’ से अपना नाम चुनना होगा, डिजिटल पेन की मदद से अपने हस्ताक्षर करने होंगे और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए ‘सबमिट’ बटन दबाना होगा। तकनीकी सहायता के लिए हर ‘काउंटर’ पर राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के इंजीनियर की एक टीम मौजूद रहेगी। संसद सत्र के दौरान सदस्यों को अपना दैनिक भत्ता प्राप्त करने के लिए उपस्थिति पुस्तिका में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होती है। इससे पहले, लोकसभा सदस्य मोबाइल ऐप का उपयोग करके भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे।  

सीएम मोहन यादव ने अस्पतालों में एक्सपर्ट की कमी को देखते हुए फैसला लिया, अब कोई भी मरीज बिना इलाज के अस्पताल से वापस नहीं हो सकेगा

भोपाल मध्य प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में मरीजों को उत्तम और विश्वस्तरीय इलाज मिलने की शुरुआत की जा रही है। अब किसी अस्पताल से मरीजों को अन्य अस्पतालों में सिर्फ इसलिए रेफर नहीं किया जा सकेगा कि वहां डॉक्टर नहीं हैं। इसका रास्ता मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने निकाल लिया है। प्रदेश के जिन अस्पतालों में सर्जरी के लिए ऑपरेशन थियेटर व अन्य संसाधन उपलब्ध हैं, वहां हर तरह के आपरेशन संभव होंगे। विशेषज्ञ की कमी के कारण सर्जरी नहीं रुकेगी। इसके लिए सरकार निजी डॉक्टर्स को अस्पताल बुलाएगी। सर्जरी और एनेस्थीसिया देने के लिए निजी डॉक्टरों की सेवाएं ली जा सकेंगी। सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। डॉक्टर की कमी से नहीं रुकेगा इलाज सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया का लाभ यह होगा कि जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी डॉक्टरों की कमी से सर्जरी या अन्य इलाज नहीं रुकेगा। आपको बता दें कि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने यह तरीका इजाद किया है। भुगतान की दरें भी निर्धारित हालांकि शुरुआत में यह व्यवस्था आयुष्मान रोगियों के लिए शुरू की गई है। बेहतर रिस्पांस मिलने के बाद अन्य रोगियों को भी इस सेवा का अवसर मिल पाएगा। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त तरुण राठी के अनुसार निजी सेवाएं देने वाले डॉक्टरों के लिए भुगतान की दरें भी निर्धारित कर दी गई हैं। इन्हें भुगतान मासिक आधार पर किया जाएगा। ये रहेगी रेट लिस्ट सर्जिकल विशेषज्ञ डॉक्टर्स को संबंधित बीमारी में आयुष्मान योजना में निर्धारित पैकेज की कुल राशि का 21.6 प्रतिशत दिया जाएगा। जबकि एनेस्थीसिया यानि बेहोश करने वाले विशेषज्ञ को 10.8 प्रतिशत दिया जाएगा। सर्जरी करने वाले डॉक्टर की ऑपरेशन के पहले से लेकर फालोअप तक उपचार की संपूर्ण जिम्मेदारी होगी। गौरतलब है कि आयुष्मान योजना में आपरेशन के 99 प्रतिशत पैकेज में राशि दो हजार से अधिक है। सामान्य मानी जाने वाली गठान का आपरेशन पैकेज 2000 रुपये, साइनस की सर्जरी के 5000 रुपये, नसबंदी के दो हजार रुपये है। हालांकि निजी क्षेत्र के डॉक्टर्स मध्य प्रदेश सरकार की इस योजना में कितनी रुचि लेते हैं? यह आने वाले समय में साफ हो पाएगा।

विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग के तहत प्रदेश में होगा राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन

संविधान के 75 वर्ष पूर्ण होने पर भोपाल में निकलेगी ‘संविधान दिवस पदयात्रा’- मंत्री  सारंग विकसित “भारत यंग लीडर” डायलॉग के तहत प्रदेश स्तर पर चयनित युवाओं को मिलेगा प्रधानमंत्री मोदी से सीधे संवाद का अवसर- मंत्री सारंग विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग के तहत प्रदेश में होगा राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन युवा महोत्सव 2025 में युवाओं की प्रतिभा को मंच देने के उद्देश्य से जिला एवं राज्य पर होंगे आयोजन भोपाल खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने संविधान दिवस, विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग और 28वें युवा महोत्सव-2025 से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेज गति से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। इन कार्यक्रमों से युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर उनकी ऊर्जा और दृष्टिकोण को राष्ट्र निर्माण में समाहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी का सपना है कि भारत 2047 तक विश्व के विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में अग्रणी हो। इसके लिए युवाओं को नई ऊर्जा के साथ जोड़ा जा रहा है। संविधान दिवस, विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग और युवा महोत्सव जैसे कार्यक्रम इस दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। संविधान दिवस पदयात्रा – 75 वर्ष का उत्सव मंत्री सारंग ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के आव्हान पर देश भर में संविधान दिवस के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देश के सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों की राजधानी में संविधान दिवस पदयात्रा निकाली जा रही हैं। भोपाल में भी 26 नवंबर 2024 को संविधान के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भोपाल में “संविधान दिवस पदयात्रा” निकलेगी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा शौर्य स्मारक से शाम 4 बजे शुरू होकर बोर्ड ऑफिस स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद पुनः शौर्य स्मारक जाकर समाप्त होगी। मंत्री सारंग ने कहा कि इस आयोजन में लगभग 3000 युवा शामिल होंगे। खेल और युवा कल्याण विभाग के तत्वावधान में यह पदयात्रा विभिन्न विभागों के सहयोग से की जाएगी, जिसमें शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय सेवा योजना और नेहरू युवा केंद्र जैसे संगठनों की भागीदारी होगी। विकसित भारत यंग लीडर डायलॉग- युवाओं के विचारों को मंच मंत्री सारंग ने कहा कि विकसित भारत लीडर डायलॉग का उद्देश्य अधिक से अधिक प्रतिभावान युवा की पहचान कर उन की विशेषज्ञता में वृद्धि करना और विकसित भारत के लिए उन्हें अपने विचारों को शामिल करने का मंच प्रदान करना है। इसके तहत प्रदेश स्तर पर चयनित युवाओं को मिलेगा प्रधानमंत्री मोदी से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि भारत सरकार, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, नई दिल्ली के निर्देशानुसार विकसित भारत-2047 के अंतर्गत 4 चरणों में 15 से 29 आयु वर्ग के युवाओं के लिए प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है।     प्रथम चरण (विकसित भारत ऑनलाईन प्रश्नोत्तरी)- यह डिजिटल क्विज दिनांक 25 नवंबर से 5 दिसंबर, 2024 तक “माय भारत” पोर्टल पर किया जायेगा। जिसमेंडिजिटल क्विज से विकसित भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियों के प्रति जागरूकता का परीक्षण किया जायेगा।प्रतियोगिता में भाग लेने के लिये “माय भारत” पोर्टल पर पंजीयन करवाया जाना अनिवार्य है। इसके परिणाम 6 दिसंबर को पोर्टल पर रैंक सूची के माध्यम से जारी किये जायेंगे।     द्वितीय चरण (निबंध और ब्लॉग लेखन)- प्रतियोगिता 8 से 15 दिसंबर 2024 तक “माय भारत” पोर्टल पर ऑनलाइन होगी। इसमें पिछले चरण के विजेता लगभग 10 चुने गए विषयों जैसे ‘विकसित भारत के लिए तकनीक’, ‘विकसित भारत के लिए युवाओं को सशक्त बनाना’ आदि पर 1000 शब्दों का निबंध प्रस्तुत करेंगे। प्रत्येक विषय से 100 चिन्हित युवाओं को तृतीय चरण राज्य स्तर के लिये चयनित किया जायेगा।इसके परिणाम 18 दिसंबर को घोषित किये जायेंगे।     तीसरा चरण (विकसित भारत विज़न पिच डेक – राज्य स्तरीय प्रस्तुतियां)- प्रतियोगिता 20 से 26 दिसंबर 2024 तक आयोजित की जायेगी, इसके दिशा-निर्देश पृथक से जारी किए जायेंगे। दूसरे चरण में चयनित प्रतिभागी राज्य स्तर पर चुने हुए 10 विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगें। राज्य स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने के ‍लिये प्रतिभागियों में से प्रत्येक विषय पर 4 युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभागिता के लिये चिन्हित किया जायेगा।     चतुर्थ चरण (भारत मंडपम में राष्ट्रीय चैम्पियनशिप)- विभिन्न थीम आधारित राज्य स्तरीय टीम 11 से 12 जनवरी, 2025 को राष्ट्रीय युवा महोत्सव प्रतिस्पर्धा में प्रत्येक राज्य से प्रत्येक विषय पर 4-4 युवाओं की प्रतिभागिता होगी। चयनित देश भर के 1500 युवा प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष विकसित भारत के निर्माण में अपने दृष्टिकोण और विचार प्रस्तुत करेंगे। 28वां राष्ट्रीय युवा महोत्सव: युवा प्रतिभा को मंच मंत्री सारंग ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की मंशानुसार पंच प्राण और आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में 15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग के युवाओं की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से जिला एवं राज्य स्तर पर आयोजन किये जायेंगे। इसमें 12 से 16 जनवरी 2025 के मध्य राष्ट्रीय स्तर पर 28वां युवा उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय युवा उत्सव का स्थान भारत सरकार द्वारा निर्धारित किया जायेगा। इस वर्ष 28वां युवा उत्सव का आयोजन इन विषयों पर किया जा रहा है। क्र. विषय विधा 01 विषयगत (Thematic) विज्ञान मेला (एकल एवं समूह) 02 संस्कृति समूह लोक नृत्य समूह लोक गायन 03 जीवन कौशल (Life Skills) कविता लेखन भाषण पेंटिंग फोटोग्राफी   मंत्री सारंग ने बताया कि 28वें युवा उत्सव का आयोजन राज्य शासन, नेहरू युवा केन्द्र एवं राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा आपसी समन्वय के साथ संयुक्त रूप से किया जायेगा। इसके अन्तर्गत आयोजित होने वाले इवेन्ट युवा उत्सव के तहत विस्तृत योजनाबद्ध गतिविधियां और कार्यक्रम “माय भारत” पोर्टल पर अपलोड की जायेंगी तथा प्रतिभागियों का पंजीयन भी पोर्टल पर किया जाना अनिवार्य होगा।  

सरकार ने राशन की मात्रा और नियमों में बदलाव किया, चावल की मात्रा में आधा किलो कम कर दी गई, जबकि गेहूं की मात्रा में आधा किलो की बढ़ोतरी हुई

नई दिल्ली भारत सरकार की राशन योजनाएं गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (NFSA) के तहत राशन कार्ड धारकों को कम कीमत पर अनाज उपलब्ध कराया जाता है। अब सरकार ने राशन की मात्रा और नियमों में बदलाव किया हैं। जो 1 जनवरी 2025 से लागू होंगे। राशन की मात्रा में बदलाव राशन कार्ड पर पहले एक यूनिट में 3 किलो चावल और 2 किलो गेहूं मिलता था। वही अब इसे बदलकर 2.5 किलो चावल और 2 किलो गेहूं कर दिया गया है।इससे तात्पर्य है कि अब चावल की मात्रा आधा किलो कम कर दी गई है। जबकि गेहूं की मात्रा में आधा किलो की बढ़ोतरी हुई है। दरअसल सरकार ने अंत्योदय राशन कार्ड धारकों के लिए भी बदलाव किए गए हैं। पहले 14 किलो गेहूं और 21 किलो चावल मिलता था। अब यह बदलकर 17 किलो गेहूं और 18 किलो चावल कर दिया गया है। हालांकि, कुल मात्रा 35 किलो ही रहेगी। e-KYC अनिवार्य सभी राशन कार्ड धारकों के लिए e-KYC करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। अगर 1 जनवरी 2025 तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो राशन कार्ड रद्द कर दिया जाएगा। इसके बाद फ्री राशन या कम कीमत पर मिलने वाली सुविधा बंद हो जाएगी। e-KYC की अंतिम तिथि पहले 1 अक्टूबर तय की गई थी, जिसे बढ़ाकर 1 नवंबर और फिर 1 दिसंबर 2024 कर दिया गया है। e-KYC कराने का तरीका सरकार ने e-KYC प्रक्रिया को आसान बनाया है। इसे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है। – ऑनलाइन: राशन कार्ड धारक अपने आधार कार्ड की जानकारी के साथ खाद्य विभाग की वेबसाइट पर जाकर या नजदीकी राशन की दुकान पर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। – ऑफलाइन: राशन डीलर या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में आधार कार्ड और जरूरी दस्तावेज जमा कर प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। महत्वपूर्ण तिथियां – e-KYC की आखिरी तारीख: 1 दिसंबर 2024 – बदलाव लागू होने की तिथि: 1 जनवरी 2025  

नकल माफियाओं पर लगाम लगाने मध्य प्रदेश सरकार तैयारियों में जुटी, नए कानून में नकल माफिया से परीक्षा का खर्च वसूला जाएगा

भोपाल  एमपी में नकल माफिया के बुरे दिन आने वाले हैं। मध्य प्रदेश सरकार नकल, सामूहिक नकल और पेपर लीक जैसे मामलों में सजा बढ़ाने जा रही है। ऐसे मामलों में अब 10 साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसके लिए मध्य प्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम में संशोधन होने जा रहा है। अभी तक नकल करने पर तीन साल की जेल और पांच हजार रुपए तक का जुर्माना लगता था। अब सरकार ने इसके लिए कमर कस ली है। पेपर लीक, सामूहिक नकल और परीक्षा की गोपनीयता भंग करने जैसे अपराधों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने सजा बढ़ाने का फैसला लिया गया है। कौन कौन दायरे में? इस कानून के दायरे में एमपी बोर्ड, एमपीपीएससी और कर्मचारी चयन मंडल की सभी परीक्षाएं आएंगी। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में एमपी बोर्ड, व्यापमं और एमपीपीएससी की परीक्षाओं में पेपर लीक और सामूहिक नकल की घटनाएं बढ़ी हैं। इसी को देखते हुए कानून में बदलाव किया जा रहा है। पेपर लीक करने पर हो सकती ये सजा पेपर लीक करने के मामले में दी जाने वाली सजा में बदलाव करने की बात चल रही है। यानी अगर किसी ने पेपर लीक किया तो उसे आजीवन कैद तक की सजा दी जा सकती है। साथ ही जुर्माने के तौर पर एक करोड़ रुपए तक का भुगतान करना पड़ सकता है। कहां तक पहुंचा काम 1937 में बने परीक्षा कानून, मध्य प्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम में जरूरी संसोधन पर बात चल रही है। संशोधित कानून का ड्राफ्ट तैयार हो गया है। इसे विधि विभाग और कैबिनेट की मंजूरी मिलनी बाकी है। इसके बाद विधानसभा से पारित कराके लागू कर दिया जाएगा। लीक होने और घोटाले रोकने में मदद की आशंका ऐसा होने से इसके दायरे में एमपी बोर्ड, एमपीपीएससी और कर्मचारी चयन मंडल की सभी परीक्षाएं आ जाएंगी। बीते सालों में एमपी में परीक्षाओं से जुड़े कई तरह के घोटाले और लीक होने की घटनाएं सामने आई थीं। इसके सख्ती से लागू होने से इनमें लगाम लगने में सहायता मिलेगी। नकल माफिया से वसूला जाएगा खर्च नए कानून में नकल माफिया से परीक्षा का खर्च भी वसूला जाएगा। अगर कोई फर्जी प्रश्नपत्र बांटता है या फर्जी वेबसाइट बनाता है और इससे परीक्षा टलती है तो उस पर होने वाला सारा खर्च वही उठाएगा। परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन ले जाने पर पहले से ही पाबंदी है, लेकिन अब केंद्र अध्यक्ष भी मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेंगे। ऐसा करने पर उन्हें भी 10 साल की जेल और एक करोड़ रुपये जुर्माना देना होगा। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में हो सकता है पेश यह कानून केंद्र सरकार के नए कानून ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024’ पर आधारित होगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा।

Cyber धोखाधड़ी का सबसे अधिक झांसा निवेश पर मोटे मुनाफे के नाम पर, नौकरी प्रस्ताव और आसान लोन के नाम पर भी फंस रहे

भोपाल साइबर ठगों ने इंटरनेट मीडिया का दुरुपयोग कर जालसाजी का ऐसा ताना-बाना बुना है कि बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट कंपनियां और पुलिस एजेंसियां उलझ कर रह गई हैं। साइबर क्राइम सेल में दर्ज अपराधों के विश्लेषण से सामने आया है कि ठगी का हर पांचवा मामला यूपीआई से जुड़ा है। यानी ऑनलाइन पेमेंट एप से ठगों के खातों में रकम पहुंची है। इस धोखाधड़ी का सबसे अधिक झांसा निवेश पर मोटे मुनाफे के नाम पर दिया गया है। बढ़ रहा यूपीआई का चलन कैशलेस अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ रही दुनिया में डिजिटल पेमेंट अथवा यूपीआई बड़ा जरिया है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के आंकड़े बताते हैं कि एक नवंबर से 21 नवंबर तक 15 लाख 32 हजार 344 करोड़ रुपये का भुगतान यूपीआई के जरिये हुआ है। लेन-देन के इस बेहद लोकप्रिय तरीके को साइबर अपराधियों ने ठगी के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इसमें हर रोज कोई नया तरीका निकालकर लोगों को लूटा जा रहा है। ऐसे करते हैं ठगी नामी संस्थाओं की ओर से यूपीआई पेमेंट की रिक्वेस्ट डालकर रकम निकलवाने से लेकर यूपीआई ऑटो-पे रिक्वेस्ट जैसे तरीकों से लोगों के खातों में सेंध लगाई जा रही है। इसमें ऑटो पे रिक्वेस्ट सबसे खतरनाक है। इसमें फोन, बिजली, बीमा अथवा फाइनेंस कंपनी के नाम पर ऑटो पे रिक्वेस्ट भेजी जाती है। ठग उस संस्थान का प्रतिनिधि बनकर फोन करके वह रिक्वेस्ट स्वीकार करने को कहता है। वह बताता है कि ऐसा करने से आपको बार-बार भुगतान की तिथि याद करने की जरूरत नही पड़ेगी। आपके खाते से प्रीमियम की रकम अपने आप कट जाएगी और आप विलंब शुल्क से बच जाएंगे। लेकिन इसको स्वीकार करते ही आपके खाते की रकम ठग के खाते में ट्रांसफर हो जाती है। ये ठग इसी तरह शेयर बाजार में निवेश, आसान लोन और सस्ती दरों पर खरीद-फरोख्त जैसे लुभावने प्रस्ताव देते हुए लिंक भेजकर खाते खाली कर रहे हैं। भोपाल साइबर क्राइम सेल में इस वर्ष 42 प्रकार की कुल पांच हजार 463 शिकायतें पहुंची हैं। इनमें से 80 प्रतिशत मामले सिर्फ साइबर ठगी से जुड़े हैं। इसमें भी हर पांचवां मामला यूपीआई से संबंधित है। यानि ठगी के लिए डिजिटल भुगतान के किसी न किसी एप का उपयोग किया गया है। इन दस तरीकों से ठगी के सर्वाधिक मामले   इंटरनेट मीडिया उत्पीड़न 1186 21 प्रतिशत यूपीआई 1067 19.5 प्रतिशत डेबिट/क्रेडिट कार्ड 572 10.47 प्रतिशत ऑनलाइन खरीदफरोख्त 361 6.6 प्रतिशत टास्क 287 5.5 प्रतिशत लोन एप 242 4.43 प्रतिशत निवेश प्रस्ताव 238 4.37 प्रतिशत नौकरी प्रस्ताव 175 3.20 प्रतिशत ऑनलाइन लिंक 138 2.53 प्रतिशत मिरर एप 104 1.90 प्रतिशत   बचाव के लिए यह करें साइबर एक्सपर्ट प्रथमेश कापड़े के मुताबिक यूपीआई से ठगी केवल उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी के चलते होती है। इससे बचने के लिए यूपीआई पर भेजी गई ऐसी किसी भी रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें। बिल पेमेंट के लिए ऑटो-पे की सुविधा शुरू करना है तो उसके लिए यूपीआई एप्स में अलग से व्यवस्था दी गई है। कंपनियों के प्रतिनिधि कभी भी फोन कर इस सुविधा को शुरू करने का दबाव नहीं बनाते हैं।

5 हजार करोड़ का फिर कर्ज लेगी मोहन यादव सरकार, 11 महीने में 40 हजार 500 करोड़ का लोन ले चुकी

Mohan Yadav government will again take a loan of Rs 5 thousand crores, has already taken a loan of Rs 40 thousand 500 crores in 11 months भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर 5 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है। यह ऋण 26 नवंबर को ई ऑक्शन के जरिए स्टाक गिरवी रखकर लिया जाएगा। लोन की यह राशि दो अलग-अलग कर्ज के रूप में ली जा रही है, जो 2500-2500 करोड़ रुपए की है। 27 नवंबर को सरकार के खाते में लोन की यह रकम पहुंच जाएगी। जानकारी के मुताबिक मोहन सरकार की 20 साल के लिए 2500 करोड़ और 14 साल के लिए 2500 करोड़ लेने की तैयारी है। पिछले 11 महीने में सरकार 40 हजार 500 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है है। मध्यप्रदेश की जनता पर 3 लाख 90 हजार करोड़ का कर्ज का बोझ हो चुका है। राज्य सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के माध्यम से यह कर्ज उठाएगी। इसके लिए सरकारी बांड या स्टॉक को गिरवी रखकर धनराशि जुटाई जाएगी। ई-ऑक्शन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 27 नवंबर को यह रकम राज्य सरकार के खजाने में आ जाएगी। 11 महीने में 40,500 करोड़ का कर्जसरकार के वित्तीय रिकॉर्ड पर नजर डालें तो यह इस साल का नया बड़ा कर्ज होगा। पिछले 11 महीनों में, राज्य सरकार ने 40,500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। यह धनराशि राज्य की विकास योजनाओं और अन्य खर्चों के लिए इस्तेमाल की गई है। मध्य प्रदेश की जनता पर कर्ज का भार लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में राज्य पर कुल कर्ज 3 लाख 90 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह राज्य की वित्तीय स्थिरता के लिए एक गंभीर मुद्दा है।

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